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शाहरुख के लिए लिबरल गिरोह ने पढ़ी दुआ… फिर भी हार गई KKR: CSK ने ‘मुस्लिम सुपरस्टार’ को हराया – नेटिजंस का रिएक्शन

IPL-2021 में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) की जीत ने जाहिरतौर पर KKR फैन्स को निराश किया होगा। लेकिन उससे भी ज्यादा रोना आया होगा लिबरल व कट्टरपंथी गिरोह के सक्रिय सदस्यों को, जो इस खेल को आर्यन ड्रग केस में मिलने वाली राहत से जोड़कर देख रहा था। 

दो टीमों के खेल को शाहरुख खान की जीत-हार से जोड़ देने वाला ये गिरोह मैच से पहले दुआ कर रहा था कि किसी तरह फाइनल मैच में केकेआर जीते तो उन्हें ऐसा लगे कि शाहरुख को भी जीत मिल गई है।

इस्लामी पत्रकारिता की सबसे बड़ी वाहक राणा अयूब ने तो केकेआर के फाइनल में पहुँचने को पोएटिक जस्टिस कहा। वहीं रेडियो मिर्ची की साएमा ने लिखा था- “सच में केकेआर को जीतते देखना चाहती हूँ। हालाँकि मैं धोनी की फैन हूँ लेकिन आज मैं शाहरुख खान को जीतते देखना चाहती हूँ।” सबा नकवी ने कहा था, “केकेआर के साथ हूँ क्योंकि मुझे शहर पसंद हैं और चाहती हूँ कि शाहरुख खान के जीवन में कुछ खुशखबरी आए।”

उल्लेखनीय है कि सोशल मीडिया पर केकेआर की जीत को आर्यन खान ड्रग केस में शाहरुख खान को मिलने वाली राहत से जोड़कर देखने वाली इन लिबरल पत्रकारों को सीएसके की जीत ने आहत किया होगा। इसी का अंदाजा लगाते हुए सोशल मीडिया यूजर इनके ट्विट्स शेयर कर रहे हैं। कहीं धोनी को पोएटिक जस्टिस का बाप बताया जा रहा है और कहीं पूछा जा रहा है कि इस खेल की जीत हार से शाहरुख की परेशानियों या उन्हें मिलने वाली खुशी का क्या लेना-देना।

द स्किन डॉक्टर ने तंज कसते हुए ट्वीट किया, “सीएसके अच्छे से जानती थी कि केकेआर एक मुस्लिम सुपरस्टार की टीम है जो अपने बुरे दौर से गुजर रहे हैं वो भी उसके 23 साल के बच्चे की वजह से जो शिप पर गया था। इसके बावजूद उन्होंने केकेआर को जीतने नहीं दिया। ये पोएटिक जस्टिस नहीं हैं। IPL का I इस्लामोफोबिया को दर्शाता है। न कि उस भारत को जिसका सपना नेहरु ने देखा था। “

उल्लेखनीय है कि यदि लिबरल गिरोह का रोना एक साइड कर दिया जाए तो  साल 2021 का इंडियन प्रीमियर लीग जानदार रहा। चेन्नई सुपर किंग्स ने उनके फैन्स को जश्न मनाने का पूरा-पूरा मौका दिया। वहीं केकेआर का प्रदर्शन भी ऐसा था कि धोनी ने खुद कहा कि जीत की असली हकदार केकेआर है। स्कोर बोर्ड की बात करें तो टॉस हारने के बाद चेन्नई को बैटिंग मिली और उन्होंने 192/3 का लक्ष्य केकेआर को दिया। केकेआर ने भी जीतने के लिए दम लगाया लेकिन फिर भी 27 रनों से हार का मुँह देखना पड़ा।

ये चौथा मौका है जब चेन्नई सुपर किंग्स ने अपने नाम जीत का खिताब किया। इससे पहले उन्होंने  साल 2010 में मुंबई इंडियंस, 2011 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और 2018 में सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) को हराकर आईपीएल में जीत हासिल की थी।

इस मैच की कुछ अन्य बातें भी खास थीं। जैसे बतौर कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का यह 300वाँ मैच रहा। रवींद्र जडेजा ने जहाँ इस मैच के साथ ही अपने 200 आईपीएल मैच पूरे किए। वहीं फाफ डुप्लेसिस ने भी 100वाँ IPL खेला। अंतिम मैच के दिन डुप्लेसिस ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ बने जबकि हर्षल पटेल ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ रहे। सीएसके के ऋतुराज गायकवाड़ ने पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा (635) रन बनाए। वहीं RCB के हर्षल पटेल (32) टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे।

लखीमपुर, बीजेपी, हिंदुत्व, भागवत… : आर्यन खान और ‘प्रदर्शनकारी किसानों’ के बचाव में उतरे उद्धव ठाकरे ने एक साथ साधे कई निशाने

दशहरा के मौके पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने फिर विरोधियों पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने अपने पुरानी साथी बीजेपी पर भी तंज कसा है और संघ प्रमुख मोहन भागवत को भी अपने निशाने पर लिया है। कुछ समय से लगातार हिंदुत्व की बात कर रहे मोहन भागवत को लेकर उद्धव ठाकरे ने बड़ा बयान दे दिया है।

उद्धव का भागवत पर निशाना

कुछ दिन पहले ही भागवत ने कहा था कि इस बात पर किसी को शक नहीं होना चाहिए कि सभी के पूर्वज एक थे। अब इसी बयान पर उद्धव ठाकरे ने संघ प्रमुख को लखीमपुर हिंसा याद दिला दी है। उन्होंने कहा है कि भागवत कहते हैं कि हम सभी के पूर्वज एक हैं। अगर ऐसा है तो ये भी बता दीजिए कि लखीमपुर में प्रदर्शन कर रहे किसानों के पूर्वज कौन है? इसके बाद उद्धव ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोगों की सत्ता की भूख ड्रग्स एडिक्शन जैसी हो गई है।

बीजेपी पर भड़के

वहीं इसके बाद उद्धव ने बीजेपी पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोग सत्ता में रहने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। उद्धव ठाकरे ने कहा कि आरएसएस और हमारे रास्ते भले ही अलग हो सकते हैं लेकिन विचारधारा एक ही है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व की विचारधारा की वजह से ही उन्होंने बीजेपी के साथ गठबंधन किया था। लेकिन उन्होंने वादा नहीं निभाया। ठाकरे ने कहा कि अगर बीजेपी ने वादा निभाया होता तो आज दोनों साथ होते। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने पिता से वादा किया था इसीलिए वह सीएम बने हैं। भविष्य में दूसरे शिवसैनिक भी सीएम बनेंगे।

वहीं बीजेपी से गठबंधन टूटने पर सीएम ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी साझेदारी सिर्फ और सिर्फ हिंदुत्व पर टिकी थी। अगर देवेंद्र फडणवीस शिवसैनिक सीएम बनाने का वादा पूरा करते, तो कोई समस्या नहीं आती। उद्धव ने यहाँ तक कहा कि वे खुद बाद में वो सीएम कुर्सी छोड़ देते, उन्हें ऐसा खेल पसंद नहीं है।

इस दौरान उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र को एक अलग नजरिए से देखा जाता है। अगर महाराष्ट्र में कुछ होता है तो वे कहते हैं कि यहाँ लोकतंत्र की हत्या हुई। अगर महाराष्ट्र में ऐसा है, तो उत्तर प्रदेश में क्या हुआ?”

सीएम ठाकरे ने कहा कि हिंदुत्व का मतलब राष्ट्र प्रेम है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि बलसाहेब कहते थे कि पहले हम देशवासी हैं, उसके बाद धर्म आता है। धर्म घर पर रख हम जब बाहर निकलते हैं, तब देश हमारा धर्म होता है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि जब हम देश को धर्म बनाकर आगे बढ़ते हैं तो धर्म के नाम पर गलत करने वालों के खिलाफ बोलना भी हमारा कर्तव्य है।

सावरकर पर राजनाथ को घेरा

अपने संबोधन के दौरान उद्धव ने सावरकर मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने सीधे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को कठघरे में खड़ा करते हुए सवाल कर दिया कि क्या आप इस लायक भी हैं कि सावरकर या गाँधी जी का नाम ले सकें?

उद्धव ठाकरे के संबोधन के दौरान एक वक्त ऐसा भी आया जब मजाकिया अंदाज में एक्टिंग करने लगे। हाल ही में हर्षवर्धन पाटिल ने कॉन्ग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया था। उनके उसी फैसले पर चुटकी लेते हुए उद्धव कहा, “पहले मुझे नींद नहीं आती थी, दरवाजे पर टक-टक होती थी तो रोंगटे खड़े हो जाते थे, फिर मैं बीजेपी में चला गया, अब मैं कुंभकरण की तरह सोता हूँ।”

इस समय शिवसेना और महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी सरकार की ईडी-सीबीआई से भी ठनी है। ऐसे में उद्धव ठाकरे ने इस ट्रेंड के लिए भी बीजेपी को जिम्मेदार माना है। उनकी नजरों में बीजेपी को मर्दों की तरह लड़ाई लड़नी चाहिए। ईडी-सीबीआई का कठपुतली की तरह इस्तेमाल करना गलत है।

इसके अलावा ठाकरे ने हिंदुत्व वाली राजनीति पर भी शिवसेना का स्टैंड साफ कर दिया। स्पष्ट कहा गया कि जब हिंदुत्व खतरे में था तब सिर्फ बाला साहेब ठाकरे ने आवाज बुलंद की थी। जब मुंबई में दंगे हुए थे, तब भी सिर्फ बाल ठाकरे ने आवाज उठाई थी। उन्होंने नारा दिया था- गर्व से कहो हम हिंदू हैं।

आर्यन खान केस पर टिप्पणी

संबोधन के दौरान उद्धव ठाकरे ने आर्यन खान केस पर भी टिप्पणी की। उनकी नजरों में सिर्फ पब्लिसिटी के लिए एक सेलेब को निशाना बनाया जा रहा है। उनके मुताबिक सिर्फ महाराष्ट्र में ड्रग्स की समस्या नहीं है। कई राज्यों में सक्रिय है, लेकिन बदनाम सिर्फ महाराष्ट्र को किया जा रहा है। उन्होंने मुंबई पुलिस की तारीफ करते हुए कहा कि हमारी पुलिस ने 150 करोड़ के ड्रग्स बरामद किए, आप लोग सिर्फ चिमटी भर गाँजा सूँघ रहे हैं।

किसानों ने विरोध प्रदर्शन के नाम पर दुर्गा पूजा पंडाल पर लटकाए जूते, FIR: बंगाल HC ने किया हस्तक्षेप से इनकार

कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार (अक्टूबर 14, 2021) को दमदम पार्क भारत चक्र पूजा कमेटी के एक दुर्गा पूजा पंडाल में जूतों के कथित प्रदर्शन के ख़िलाफ़ दायर याचिका पर एक्शन लेने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता ने कहा था कि पूजा पंडाल में जूते प्रदर्शित करके देवी दुर्गा का अनादर हुआ है। वहीं राज्य की ओर से पेश वकील ने बताया कि पुलिस इस पर एफआईआर दर्ज कर चुकी है।

याचिका में ये भी कहा गया कि याचिकाकर्ता खुद पंडाल नहीं गया। लेकिन इस प्रकार जूतों के प्रदर्शन से बंगाल के लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है। शांतनु सिंघा द्वारा दायर याचिका पर न्यायमूर्ति कौशिक चंद द्वारा सुनवाई की गई। जहाँ राज्य और अन्य प्रतिवादियों की ओर से पेश हुए वकील एस एन मुखर्जी ने दलील दी कि संबंधित पंडाल के विषयगत भाग पर जूते दिखाए गए जिसे किसानों ने विरोध के रूप में सजाया था।

मुखर्जी ने कहा कि गर्भग्रह में किसी भी जूते का प्रदर्शन नहीं हुआ। इसके अलावा जहाँ देवी की पूजा हो रही थी उससे भी ये थीमेटिक पार्ट 11 फीट दूरी पर था। अंत में इस मामले में अदालत को यह भी जानकारी दी गई कि उक्त क्लब द्वारा जूते के कथित प्रदर्शन के लिए लेक टाउन पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 153A/506/34 के तहत एक शिकायत पहले ही दर्ज हो चुकी है।

दोनों पक्षों की दलीलों के बाद जस्टिस कौशिक चंद ने गुरुवार (अक्टूबर 14, 2021) को इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि दमदम पार्क भारत चक्र के खिलाफ दर्ज मामले में फिलहाल अदालत दखल नहीं देगा। उन्होंने कहा कि वादी द्वारा प्रस्तुत सोशल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर कोर्ट कोई कार्रवाई नहीं करेगा। 25 अक्टूबर को पुलिस अपनी रिपोर्ट देगी, उसके बाद अगला कदम उठाया जाएगा।

न्यायाधीश कौशिक चंद ने सुनवाई के दौरान ये सवाल भी किया कि आखिर पूजा की थीम ‘धान नहीं देंगे, मान नहीं देंगे’ में जूते इससे कैसे संबंधित हैं? इसपर एडवोकेट जनरल मुखर्जी ने कहा कि जलियाँवाला बाग से शुरू होकर जहाँ भी जन आंदोलन पर हमला हुआ, वहाँ लड़ाई के बाद ढेर सारे जूते गिरे नजर आए।

आगे उन्होंने यूपी का हवाला दिया और कहा कि वहाँ जब किसानों पर हमले हो रहे थे तो मरने वाले किसानों के जूते नजर आए थे, इसलिए इस थीम में जूतों का प्रदर्शन हुआ। उन्होंने कोर्ट को बताया किया कि मंडप के दो भाग हैं- पहला भाग में केवल मंडप है और दूसरे भाग थीमेटिक है। थीम के साथ माँ के मंडप की दूरी 11 फीट है, तो माँ के मंडप का अपमान करने का तर्क किसी भी तरह साबित नहीं होता है।

दलित युवक लखबीर सिंह की हत्या के बाद संयुक्त किसान मोर्चा के बचाव में कूदा India Today, ‘सोर्स’ के नाम पर नया ‘भ्रमजाल’

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के नेता प्रदर्शन स्थल पर हुए दलित युवक की हत्या से खुद को अलग कर रहे हैं और इसके लिए व मीडिया प्लेटफॉर्म की तलाश में हैं। इस बीच इंडिया टुडे ग्रुप अब उनके बचाव में सामने आया है। .

इंडिया टुडे ने इसे ‘सूत्रों’ का नाम देते हुए अपने ताजा रिपोर्ट में दावा किया है कि संयुक्त किसान मोर्चा ने कथित तौर पर कई मौकों पर हरियाणा और दिल्ली पुलिस को विरोध स्थल पर इस ‘सशस्त्र समूह’ की मौजूदगी के बारे में शिकायत की थी।

एसकेएम के एक सूत्र ने कहा, “एसकेएम ने पुलिस को यह भी बताया था कि निहंग मोर्चा का हिस्सा नहीं थे और उन्होंने निहंगों से भी विरोध स्थलों को खाली करने और वहाँ से सिखों के पवित्र ग्रंथों को हटाने की अपील की थी।”

संतुलन बनाने की कोशिश करते हुए एसकेएम ने एक बयान में यह भी कहा कि मोर्चा किसी भी धार्मिक पाठ या प्रतीक की बेअदबी के खिलाफ है। उन्होंने खुद को इस भीषण हत्या से अलग करते हुए कहा, “हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि इस घटना के दोनों पक्षों, निहंग समूह और मृतक का एसकेएम से कोई संबंध नहीं है।” 

‘आदमी ने स्वीकार किया कि उसे किसी ने भेजा था’: SKM का दावा

वहीं निहंग सिख समुदाय को निराश न करने की कोशिश में संयुक्त किसान मोर्चा के जगजीत सिंह दल्लेवाल ने अपने ताजा बयान में यह कहा, “जब हम मौके पर पहुँचे तो कुछ लोग कह रहे थे कि मृतक व्यक्ति ने मरने से पहले स्वीकार किया था कि उसे किसी ने भेजा था और 30,000 रुपए दिए थे।”

हालाँकि, उन्होंने साथ ही स्पष्ट किया कि उनके पास मृतक युुवक के कथित कबूलनामे का कोई वीडियो सबूत नहीं है। विडंबना यह है कि पीड़ित को निहंगों द्वारा उसके व्यक्तिगत विवरण के बारे में पूछताछ करते हुए वीडियो रिकॉर्ड किया गया था, जब वह बेरहमी से की गई पिटाई के बाद आखिरी कुछ साँसों के लिए हाँफ रहा था और उसका हाथ काट दिया गया था।

उल्लेखनीय है कि सिंघु सीमा पर एसकेएम धरना स्थल पर नृशंस हत्या कर दी गई। किसान मोर्चा धरना स्थल के मुख्य मंच के पास पीड़ित को उसके कटे हुए अंग के साथ लटका दिया गया था।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने माँगी रिपोर्ट

इस बीच, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष विजय सांपला ने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक से दलित व्यक्ति की हत्या पर 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट माँगी है। सांपला ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से इस मामले में दोषियों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई करने का भी आग्रह किया है।

बांग्लादेश में जुमे की नमाज के बाद हिंदुओं के खिलाफ फिर भड़की हिंसा: इस्कॉन के दो साधुओं की हत्या, मंदिर के पास मिले 18 जिंदा बम

कथित कुरान के अपमान को लेकर बांग्लादेश में फैली हिंसा के बाद बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा भारत को दी गई नसीहत के बाद हिंदुओं के खिलाफ नए सिरे से हिंसा भड़क गई है। नोआखली सहित कई जिलों में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा जारी है। शुक्रवार की नमाज के बाद हिंदुओं के खिलाफ फैली हिंसा में नोआखली के इस्कॉन मंदिर के दो साधुओं, निताई दास प्रभु और जतन दास प्रभु की हत्या कर दी गई है।

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ भड़की हिंसा के बाद भारत सरकार द्वारा चिंता जताए जाने पर शेख हसीना ने गुरुवार को उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन था। इसके साथ ही सधे शब्दों में भारत को भी चेतावनी देते हुए कहा था कि भारत में भी ऐसा कुछ नहीं होना चाहिए, जिसका असर बांग्लादेश पर हो और वहाँ के अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को नुकसान पहुँचे। हसीना के बयान के बाद हबीबगंज में हिंसा फैल गई और अगले दिन शुक्रवार को नोआखली जलने लगा। हबीबगंज में एक दुर्गा पूजास्थल पर मदरसा के छात्रों ने हमला कर दिया। इस हमले में एक पुलिसकर्मी सहित 20 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

दरअसल, सोशल मीडिया पर बुधवार (13 अक्टूबर) की रात हिंदुओं द्वारा कथित रूप से कुरान का अपमान करने का आरोप लगाते हुए एक फेसबुक पोस्ट वायरल किया गया। इसके बाद हिंदुओं के खिलाफ हिंसा बड़े पैमाने पर और लगभग पूरे बांग्लादेश में फैल गई, जो अभी भी जारी है। इस हिंसा के दौरान इस्लामिक कट्टरपंथियों ने कई दुर्गा पंडालों में तोड़फोड़ की और देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को खंडित कर दिया। कट्टरपंथी यहीं नहीं रूके, उन्होंने इलाके के मंदिरों के साथ-साथ हिंदुओं के घरों और दुकानों में भी लूटपाट की और उसके बाद आग के हवाले कर दिया। आज तीन दिन बाद शुक्रवार (15 अक्टूबर) को भी हिंदुओं के खिलाफ देश के कई हिस्सों में हिंसा जारी है।

बांग्लादेश में हिंदुओं के मानवाधिकारों को लेकर मुखर संस्था ‘बांग्लादेश हिंदू यूनिटी काउंसिल’ ने बताया कि नोआखली में हिंदुओं के खिलाफ फिर से हिंसा भड़क उठी है। काउंसिल ने अपने हैंडल से शुक्रवार को ट्वीट किया, “नोआखली एक बार फिर जल रहा है। Plz #SaveBangladeshiHindus

‘इतिहास दोहराया जा रहा है’ लिखकर बांग्लादेश हिंदू यूनिटी काउंसिल ने अपने ट्वीट में एक वीडियो शेयर किया है। वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि चरमपंथी मुस्लिमों की भीड़ एक मंदिर में घुसकर दुर्गा पूजा के पंडाल को ध्वस्त कर रही है और सहमे हिंदू अपने घरों में दुबके हैं।

वहीं, बांग्लादेश का अंग्रेजी अखबार ‘द डेली स्टार’ ने लिखा है कि बांग्लादेश के खुलना के रुपसा उपजिले में एक मंदिर के पास से 18 बम बरामद किये गए हैं। हालाँकि, पुलिस ने मौके पर पहुँचकर बम को निष्क्रिय कर दिया। इस रिपोर्ट को साझा करते हुए बांग्लादेश काउंसिल ने कहा, “हमें अभी भी नहीं पता है कि पिछले तीन दिनों में कितने हिंदू मारे गए।”

हालाँकि, 13 अक्टूबर को कुरान के कथित अपमान की घटना से पहले ही दुर्गा पूजा को लेकर बांग्लादेश के हिंदुओं को धमकाया जा रहा था। इससे स्पष्ट है कि हिंदुओं के खिलाफ यह हिंसा सोची-समझी साजिश है और कुरान का इस्तेमाल सिर्फ उन्हें बदनाम और हिंसा को जायज ठहराने के लिए किया जा रहा है।

10 अक्टूबर 2021 को बांग्लादेश के चटगाँव के फिरंगी बाजार इलाके में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने एक मंदिर पर हमला कर उसमें तोड़फोड़ की थी। इस्लामी चरमपंथियों ने श्री श्मशानेश्वर शिव विग्रह मंदिर की दुर्गा प्रतिमा को तोड़ दिया था। बांग्लादेश हिंदू एकता परिषद ने घटना की जानकारी देते हुए ट्वीट किया, “हमला सड़क पर उस समय हुआ जब चटगाँव के कोतवाली में पूजा मंडप में माँ दुर्गा की मूर्ति को प्रवेश कराया जा रहा था। पुलिस ने एक को गिरफ्तार किया है। चटगाँव में कोतवाली की सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं।” 

इसके बाद, राजधानी ढाका के टीपू सुल्तान रोड स्थित दुर्गा मंदिर में हिन्दुओं को स्थानीय मुस्लिमों द्वारा नवरात्रि की पूजा करने से रोक दिया गया। बताया गया है कि स्थानीय इस्लामी कट्टरपंथियों ने नवरात्रि के दौरान शंखनिधि मंदिर में हिन्दुओं को माँ दुर्गा की पूजा नहीं करने दी।

कुंडली बॉर्डर पर लखबीर की हत्या के मामले में निहंग सरबजीत को हरियाणा पुलिस ने किया गिरफ्तार, लगे ‘जो बोले सो निहाल’ के नारे

किसानों के प्रदर्शनस्थल कुंडली बॉर्डर पर लखबीर सिंह की हत्या मामले में हरियाणा पुलिस ने एक निहंग सिख को गिरफ्तार कर लिया है। निहंग सिख की पहचान सरबजीत के तौर पर हुई है। बताया जा रहा है कि उसने लखबीर सिंह की निर्मम हत्या मामले में जिम्मेदारी लेते हुए खुद को सरेंडर किया है।

सरबजीत की गिरफ्तारी से जुड़ी एक वीडियो सामने आई है। वीडियो में पुलिस भारी भीड़ के बीच उसे जीप में बैठा रही है। आसपास मौजूद लोग तेज-तेज ‘जो बोले सो निहाल’ के नारे बुलंद कर रहे हैं।

बता दें कि 35 साल के लखबीर सिंह के साथ हुई यह घटना शुक्रवार (15 अक्टूबर 2021) सुबह की है। हत्या को आंदोलन के मुख्य मंच से 100 मीटर की दूरी पर अंजाम दिया गया। इस घटना के बाद पुलिस में दर्ज हुई एफआईआर को ऑपइंडिया ने एक्सेस किया है। इसमें इस बात का उल्लेख है कि लटके मिले व्यक्ति के सुबह 5 बजे के करीब हाथ पाँव काटे गए।

जब पुलिस घटनास्थल पर पहुँची तो लखबीर का शव बैरिकेड से लटका मिला। उसके शरीर पर बस अंडरगार्मेंट थे। स्थानियों ने जानकारी दी कि ये करतूत निहंगों की है जिन्होंने बाद में पुलिस की जाँच में न सहयोग किया और बल्कि शव को भी बैरिकेड से उतारने से मना कर दिया। कुछ वीडियोज भी सामने आई जिसमें निहंग सिख लखबीर को घेरे खड़े हैं, वहीं एक ऑडियो आई है जिसमें वह निहंगों से दया की भीख माँग रहा है।

टीटू दिल का बुरा नहीं था… जिसे काटकर कुंडली बॉर्डर पर टाँग दिया निहंगों ने, सुनिए उसकी पत्नी की फरियाद

सिंघु बार्डर पर सुबह शव मिलने की बात सामने आने पर पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक युवक की पहचान पंजाब के तरन तारन जिले के रहने वाले लखबीर सिंह उर्फ टीटू के रूप में हुई। इस मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया। पुलिस का कहना है कि जब वह घटनास्थल पर पहुँची तो निहंग शव को घेरकर खड़े थे। पुलिस ने उनसे पूछताछ करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने सहयोग नहीं किया। लखबीर के साथ जो बर्बरता की गई, उससे जुड़े कई वीडियो सामने आए हैं। यह घटना आधी रात को हुई लेकिन पुलिस को इसकी सूचना सुबह पाँच बजे दी गई।

लखबीर सिंह की पत्नी जसप्रीत सिंह ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए कहा कि पाँच साल पहले चाहे वह टीटू को छोड़ चली गई थी, लेकिन लगाव आज भी था। फोन पर टीटू बेटियों से बातें किया करता था। उन्होंने कहा कि टीटू दिल का बुरा नहीं था और ना ही कभी उसने किसी का बुरा चाहा। नशा एक ऐसी आदत थी, जिसे वह छोड़ नहीं पाया। उन्हें पूरा यकीन है कि उसने यह हरकत किसी के बहकावे में आकर ही की है। उसे किसी ने अपनी बातों में फँसाया है। किसी ने नशे या पैसों का लालच देकर ही यह काम करवाया है। 

उनका कहना है कि टीटू कभी यह कदम नहीं उठा सकता। उन्होंने सरकार से माँग की है कि अगर उसे किसी ने बहकाया है ताे उसे सामने लाना चाहिए। टीटू से ऐसी हरकत करवाने वाले को सामने लाकर सच का पता किया जाए। पति की हत्या की खबर सुनकर जसप्रीत कौर अपनी छोटी बेटी के साथ ससुराल आई है। पत्नी गुमसुम घर में एक कोने पर पलंग पर बैठी है।

लखबीर सिंह तीन बेटियों का पिता था। वह मरिटल पंजाब के तरनतारन के गाँव चीमा खुर्द का निवासी था। लखबीर सिंह की पत्नी जसप्रीत उसके नशे की आदत के चलते पाँच साल पहले मायके चली गई थी। जसप्रीत के साथ ही तीनों बेटियाँ भी रहती हैं। तीनों बेटियों में कुलदीप 8 साल, सोनिया 10 साल और तानिया 12 साल की है।

पुलिस के मुताबिक लखबीर का कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है, ना ही किसी राजनीतिक दल से वह जुड़ा हुआ है। उसके खिलाफ गाँव में किसी ने लड़ाई-झगड़े तक करने की शिकायत नहीं की। दलित लखबीर सिंह मजदूरी कर गुजारा करता था। मृतक की बहन राज कौर का कहना है कि चीमा में आने के बाद वह निहंगों के साथ उठता-बैठता था। वह 13 अक्टूबर को मंडी जाने की बात कह कर घर से निकला था। उसे शक है कि कोई उसे पैसों का लालच देकर या बहकावे से दिल्ली साथ ले गया होगा।

काबुल के गुरुद्वारे में जबरन घुसे तालिबानी: धमकी-तलाशी से डरे सिखों ने माँगी भारत से मदद, कंधार के शिया मस्जिद में भी हुआ बम धमाका

अफगानिस्तान के काबुल में स्थित एक गुरुद्वारे में तालिबानी बंदूकधारियों ने घुसकर सिखों को धमकाया। इंडिया वर्ल्ड फोरम के अध्यक्ष पुनीत सिंह चंडोक ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि खुद को इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान (तालिबानी) की स्पेशल यूनिट का हिस्सा बताने वाले कई हथियारबंद लोग गुरुद्वारा दशमेश पिता में जबरन घुस गए और समुदाय के लोगों को धमकाते हुए गुरुद्वारे की पवित्रता को भंग भी किया।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार चंडोक ने बताया कि ये लोग समुदाय के स्कूल में भी घुसे, जहाँ प्राइवेट सेक्योरिटी गार्ड्स ने उन्हें शुरुआत में रोकने का प्रयास किया लेकिन उन्हें बंदूकधारियों द्वारा धमकी दी गई और उनसे बदसलूकी हुई। इसके बाद ये लोग गुरुद्वारे के पास में ही स्थित पूर्व सांसद नरिंदर सिंह खालसा के दफ्तर और घर में भी घुसे।

इंडिया वर्ल्ड फोरम के अध्यक्ष के अनुसार इस गुरुद्वारे में सिख समुदाय के करीब 20 सदस्य मौजूद हैं। चंडोक ने भारत सरकार से अपील की है कि अफगानिस्तान में रह रहे हिंदू और सिख समुदायों को लेकर चिंता जाहिर करें और सर्वोच्च स्तर पर अफगानिस्तान के समकक्षों के साथ उठाया जाए।

मस्जिद में धमाका

बता दें कि काबुल के गुरुद्वारे में जहाँ पवित्रता को भंग करते हुए बंदूकधारियों ने समुदाय के लोगों को धमकाने का काम किया। वहीं दक्षिण अफगानिस्तान के शहर कंधार में एक शिया मस्जिद में बम विस्फोट की घटना हुई। इसमें 16 लोगों के मारे जाने की खबर है। संख्या बढ़ भी सकती है। विस्फोट शहर की इमाम बारगाह मस्जिद में जुमे की नमाज के समय हुआ है।

मालूम हो कि इस विस्फोट से एक हफ्ते पहले अफगानिस्तान के उत्तरी शहर कुंदुज़ में भी जुमे की नमाज के समय एक ब्लास्ट हुआ था। उस समय आईएस ने उत्तरी प्रांत कुंदुज़ में हुए आत्मघाती बम विस्फोट की जिम्मेदारी ली थी और 46 लोगों की मौत हुई थी।

‘निहंग सिखों से हमारा कोई संबंध नहीं’: कुंडली बॉर्डर पर हुई जघन्य हत्या से संयुक्त किसान मोर्चा ने झाड़ा पल्ला, आनन-फानन में जारी बयान

हरियाणा के कुंडली बॉर्डर पर 15 अक्टूबर 2021 को लखबीर सिंह की हत्या के मामले में किसान नेताओं ने जिम्मेदारी लेने से पल्ला झाड़ लिया है। हत्या का आरोप निहंग सिखों पर लगे हैं। इस मामले में कृषि कानूनों का विरोध करने के लिए कई किसान संगठनों को मिलाकर बने संयुक्त किसान मोर्चा के किसान नेताओं ने सिंघू बॉर्डर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जहाँ संगठन ने इसकी जिम्मेदारी लेने से इनकार किया। एसकेएम ने दावा किया कि निहंगों के समूह का संगठन से कोई संबंध नहीं है।

एसकेएम ने अपने बयान में कहा कि निहंग समूह ने घटना की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने आरोप लगाया कि लखबीर कुछ समय से निहंगों के साथ रह रहा था। एसकेएम ने हत्या की निंदा की और कहा कि हालाँकि वे धार्मिक पाठ या प्रतीक का अनादर करने के खिलाफ हैं, लेकिन इस तरह से किसी को भी कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। संगठन ने इस मामले में पुलिस और प्रशासन को सहयोग देने का भी वादा किया।

एसकेएम के बयान में कहा गया है, “संयुक्त किसान मोर्चा के संज्ञान में आया है कि पंजाब के रहने वाले एक व्यक्ति (लखबीर सिंह, पुत्र दर्शन सिंह, ग्राम चीमा कला, थाना सराय अमानत खान, जिला तरनतारन) की आज सुबह सिंघू बॉर्डर पर हत्या कर दी गई। घटनास्थल पर मौजूद एक निहंग समूह ने इसकी जिम्मेदारी लेते हुए कहा है कि यह घटना मृतक द्वारा सरबलोह ग्रंथ की बेअदबी करने की कोशिश के कारण हुई है। बताया गया है कि यह मृतक कुछ समय से निहंगों के एक ही समूह के साथ रह रहा था।”

किसान धरना स्थल पर जघन्य हत्याकांड से हाथ धोते एसकेएम द्वारा जारी बयान

बयान में आगे कहा गया है, “संयुक्त किसान मोर्चा इस वीभत्स हत्या की निंदा करता है और यह स्पष्ट करना चाहता है कि इस घटना के दोनों पक्षों, निहंग समूह और मृतक व्यक्ति का संयुक्त किसान मोर्चा से कोई संबंध नहीं है। मोर्चा किसी भी धार्मिक प्रतीक की बेअदबी के खिलाफ है, लेकिन यह किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं देता है। हम माँग करते हैं कि हत्या और बेअदबी के पीछे साजिश के आरोप की जाँच कर दोषियों को कानून के मुताबिक सजा दी जाए। हमेशा की तरह संयुक्त किसान मोर्चा किसी भी कानूनी कार्रवाई में पुलिस और प्रशासन का सहयोग करेगा। यह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन किसी भी रूप में हिंसा का विरोध करता है।”

एसकेएम का संदिग्ध अतीत रहा है

संयुक्त किसान मोर्चा ने भले ही खुद को विरोध स्थल पर हुई निर्मम हत्या से अलग कर लिया है, लेकिन विरोध स्थलों पर पिछले अपराधों के प्रति एसकेएम का रवैया संदिग्ध है। जून में पश्चिम बंगाल की एक महिला के साथ विरोध स्थल पर कथित तौर पर बलात्कार और हत्या कर दी गई थी। किसान नेताओं ने घटना का व्हाइटवॉश करने की कोशिश की। वहीं, अप्रैल में भी रेप की एक घटना सामने आई थी।

उल्लेखनीय है कि सिंघू बॉर्डर के पास नृशंस हत्या हुई है, जहाँ एसकेएम के ‘प्रदर्शनकारी’ महीनों से धरना दे रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि पीड़ित का शव मुख्य मंच के पीछे बैरिकेड से लटका हुआ था। वहाँ एसकेएम अपना विरोध प्रदर्शन कर रहा है।

घटना के वीभत्स वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जहाँ निहंग शेखी बघारते दिख रहे हैं कि कैसे उन्होंने कथित ईशनिंदा के लिए उस व्यक्ति को मार डाला। बाबा नरेन सिंह नाम के एक निहंग नेता ने हत्या की जिम्मेदारी ली है। रिपोर्टों में कहा गया है कि पीड़ित को पहले पीटा गया, क्षत-विक्षत किया गया, टुकड़े-टुकड़े किए गए और फिर रस्सी से मुख्य मंच तक घसीटा गया। वहाँ उसके शरीर को बाँध दिया गया और कटे हुए हाथ को भी लटका दिया गया।

छत्तीसगढ़ के जशपुर में दशहरा मना रहे लोगों को कार ने रौंदा, गाँजा भरा था: देखें Video

छत्तीसगढ़ के जशपुर में शुक्रवार को दुर्गा प्रतिमा विसर्जित करने जा रहे श्रद्धालुओं को एक बेकाबू कार ने रौंद दिया। ताजा समाचार मिलने तक इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई है और लगभग 26 लोग घायल हो गए हैं। घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जिनमें से 4 की हालत गंभीर बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बेतहाशा भागती जा रही उस कार में गाँजा भरा हुआ था। इस घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने कार को आग लगा दी है। यह घटना जशपुर के पत्थलगांव की है और शुक्रवार (15 अक्टूबर 2021) को दोपहर लगभग डेढ़ बजे के आसपास घटित हुई। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

जुलूस में 7 अलग-अलग दुर्गा पूजा पंडालों की प्रतिमाएँ थीं। इन प्रतिमाओं को विसर्जित करने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। इन्हें विसर्जित करने के लिए जशपुर स्थित नदी के घाट पर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान पीछे से बेहद तेज गति में आती हुई कार श्रद्धालुओं को रौंदती निकल गई। इस दौरान लोगों को सँभलने का भी मौका नहीं मिला। घटना में मृतक का नाम गौरव अग्रवाल बताया जा रहा है, जिसकी उम्र लगभग 21 वर्ष थी।

मौके पर मौजूद चश्मदीदों के अनुसार, घटना के समय कार की गति 100 से 120 किलोमीटर प्रतिघंटे थी। लोगों का कहना है कि आरोपित गाँजा तस्कर हैं। घटना के विरोध में स्थानीय लोगों ने पत्थलगांव थाने का घेराव किया है। लोगों ने स्थानीय थाने के ASI पर गाँजा तस्करी में सहयोग करने का आरोप लगाते हुए आरोपित पुलिसकर्मी पर भी कार्रवाई की माँग की है।

लोगों को कुचल कर भागती कार को 5 किलोमीटर पीछा कर के सुखरापारा में पकड़ा गया है। वहीं, जशपुर के एसपी ने कहा कि मामला गाड़ी तेज चलाने का है और दोनों आरोपियों को पकड़ लिया गया है। एसपी ने बताया कि दोनों आरोपी- बब्लू विश्वकर्मा और शिशुपाल साहू मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं और छत्तीसगढ़ के रास्ते जा रहे थे। उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।