राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार (12 अक्टूबर, 2021) को कहा कि वीर सावरकर को बदनाम करने के लिए देश की आजादी के बाद से ही अभियान चलाया गया। इसके बाद स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद सरस्वती और योगी अरविंद को बदनाम करने का नंबर आएगा, क्योंकि सावरकर इन तीनों के विचारों से प्रभावित थे। उन्होंने कहा कि सावरकर ने कहा था कि किसी का तुष्टिकरण नहीं होना चाहिए और यही संघ का मानना है।
#WATCH | Mohan Bhagwat addresses Veer Savarkar Book launch; says ‘Savarkar was a nationalist & visionary, whatever he said has come true; today it’s not wrong to call it Savarkar’s era because it’s an era of nationalists’ https://t.co/oefJxIhn1Dpic.twitter.com/Qegz21j2pi
भागवत ने कहा, “सावरकर जी का हिन्दुत्व, विवेकानंद का हिन्दुत्व ऐसा बोलने का फैशन हो गया है। हिन्दुत्व एक ही है। वो पहले से है और आखिर तक वो ही रहेगा। सावरकर जी ने परिस्थिति को देखकर इसका उद्घोष जोर से करना जरूरी समझा।”
इतने वर्षों के बाद अब हम जब परिस्थिति को देखते हैं तो ध्यान में आता है कि जोर से बोलने की आवश्यकता तब थी, सब बोलते तो शायद विभाजन नहीं होता: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत
संघ प्रमुख ने भागवत ने कहा कि आज भारत में सावरकर के बारे में सही जानकारी का घोर अभाव है। यह एक समस्या है। मोहन भागवत ने कहा कि सावरकर को बदनाम करने की मुहिम चलाई गई। इनकी बदनामी की मुहिम स्वतंत्रता के बाद खूब चली है।
भागवत वीर सावरकर पर लिखी गई भारत सरकार के सूचना आयुक्त उदय माहूरकर की पुस्तक ‘वीर सावरकर: द मैन हू कुड हैव प्रिवेंटेड पार्टिशन’ के विमोचन कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सावरकर के बारे में लिखी गईं तीन पुस्तकों के जरिए काफी जानकारी हासिल की जा सकती है।
मोहन भागवत ने कहा कि हमारी पूजा विधि अल-अलग है लेकिन पूर्वज एक हैं। उन्होंने कहा कि बँटवारे के बाद पाकिस्तान जाने वालों को वहाँ प्रतिष्ठा नहीं मिली। हिंदुत्व एक ही है जो सनातन है। सावरकर ने कहा था कि किसी का तुष्टिकरण नहीं होना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा, “इतने वर्षों के बाद अब हम जब परिस्थिति को देखते हैं तो ध्यान में आता है कि जोर से बोलने की आवश्यकता तब थी। सब बोलते तो शायद विभाजन नहीं होता।” उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि अब 75 साल बाद हिंदुत्व को जोर से बोलने की जरूरत है।
जो भारत का है, उसकी सुरक्षा, प्रतिष्ठा भारत के ही साथ जुड़ी है। विभाजन के बाद भारत से स्थलांतर करके पाकिस्तान में गए मुसलमानों की प्रतिष्ठा पाकिस्तान में भी नहीं है। जो भारत का है, वो भारत का ही है: वीर सावरकर पर पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत pic.twitter.com/d6Alp5DdMa
भारत विभाजन और मुसलमानों को लेकर भागवत ने कहा कि हमारी पूजा विधि अलग-अलग है लेकिन पूर्वज एक हैं। उन्होंने कहा, “जो भारत का है उसकी सुरक्षा और प्रतिष्ठा भारत के ही साथ जुड़ी है। विभाजन के बाद भारत से स्थानांतरण करके पाकिस्तान में गए मुसलमानों की प्रतिष्ठा पाकिस्तान में भी नहीं है। जो भारत का है, वो भारत का ही है।”
मोहन भागवत ने कहा कि सैयद अहमद को मुस्लिम असंतोष का जनक कहा जाता है। इतिहास में दारा शिकोह हुए तो औरंगजेब भी हुए। भागवत ने कहा कि अशफाक उल्लाह खान ने कहा था कि मरने के बाद अगला जन्म भारत में लूँगा, ऐसे लोगों के नाम गूँजने चाहिए।
हिंदुत्व को लेकर उन्होंने कहा कि भारतीय भाषा की परंपरा के अर्थ में धर्म का अर्थ जोड़ने वाला है, उठाने वाला है, बिखरने ना देने वाला है। साधारण शब्दों में समझा जाए तो भारतीय धर्म मानवता है।
वीर सावरकर जी महान स्वतंत्रता सेनानी थे इसमें कहीं दोमत नहीं हैं। किसी भी विचारधारा के चश्मे से देखकर राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को अनदेखा करना, अपमानित करना ऐसा काम है जिसे कभी माफ नहीं किया जा सकता: वीर सावरकर पर पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह pic.twitter.com/Doa0yiZ2WU
इसी कार्यक्रम में बोलते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वीर सावरकर ने इस देश के लिए जो कुछ किया है उसको शब्दों के जरिए बयान नहीं किया जा सकता है।
अब क्रिकेट में भी अपने मुल्क की गिरती साख के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भारत के मत्थे ही दोष मढ़ रहे हैं। इमरान खान ने कहा है कि भारत विश्व क्रिकेट को नियंत्रित करता है। उन्होंने कहा कि क्रिकेट मे अब पैसा सबसे ज्यादा ताकतवर हो गया है और अधिकतर देशों के बोर्ड इसी आधार पर फैसले लेते हैं। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड द्वारा ने हाल ही में सुरक्षा कारणों से अपना पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया था।
उन्होंने कहा, “इंग्लैंड ने खुद को नीचा दिखाया है। अभी भी इंग्लैंड में इस तरह की सोच हावी है कि वो पाकिस्तान जैसे देशों के साथ खेल कर बड़ा एहसान करते हैं। इसका एक बड़ा कारण है जो स्पष्ट है – पैसा। क्रिकेट बोर्डों और खिलाड़ियों के लिए अब पैसा भारत में ही है। मूल बात ये है कि भारत अब विश्व क्रिकेट को नियंत्रित करता है। जो भारत कहता है, वही होता है। विश्व क्रिकेट पर उसका नियंत्रण है।”
साथ ही इमरान खान ने ये भी कहा कि इंग्लैंड और न्यूजीलैंड ने पाकिस्तान के साथ जो भी किया, उनकी हिम्मत नहीं है कि वो भारत के साथ ऐसा करें। इमरान खान ने ‘मिडिल ईस्ट आई’ को दिए गए इंटरव्यू में ये बातें कही। उन्होंने कहा कि BCCI (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) आर्थिक रूप से इतना मजबूत है कि विश्व क्रिकेट में उसका ही रुतबा और दबदबा है। इमरान ने कहा कि उन्हों इंग्लैंड से बेहतर व्यवहार की उम्मीद की थी।
After PCB chief Ramiz Raja claimed that PM Modi can pull the plug on Pakistani cricket if he wants to, Imran Khan has now virtually blamed India for the cancellation of cricket tours by England and New Zealand to his country, citing the wealth and influence of the BCCI. pic.twitter.com/AV5l90qWrO
पाकिस्तान के पीएम ने कहा, “किसी भारतीय ने सिंगापुर से फेक न्यूज फैला दी थी और इसे ही सच समझ कर इन टीमों ने पाकिस्तानी का दौरा रद्द कर दिया। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड को समझना चाहिए कि अगर ऐसा ही व्यवहार किसी दूसरी टीम ने उनके साथ किया होता तो उनकी क्या हालत होती।” पूर्व पाकिस्तानी स्पिनर सईद अजमल ने भी कहा कि BCCI के पास बेशुमार दौलत है, इसीलिए रवि आश्विन, जसप्रीत बुमराह और हरभजन सिंह के बॉलिंग एक्शन पर कार्रवाई नहीं हुई।
बता दें कि पाकिस्तान क्रिकेट के लिए बीते कुछ दिन अच्छे नहीं बीते हैं। पहले न्यूजीलैंड और फिर इंग्लैंड ने यहाँ का दौरा करने से इनकार कर दिया। दरअसल पिछले दिनों पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने इस बात का दावा किया था कि न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम को भारत की तरफ से धमकी भरा मेल आया था। फवाद चौधरी ने कहा था कि यह जो मेल है वो भारत की तरफ से जेनरेट किया गया था जिसकी वीपीएन लोकेशन सिंगापुर बता रहा है।
नामी अधिवक्ता सतीश मानशिंदे आर्यन खान को जमानत नहीं दिला पाए तो अब शाहरुख़ खान ने बेटे को बेल दिलाने के लिए सलमान खान के विश्वस्त वकील अमित देसाई को हायर किया है। आर्यन खान को जहाज पर रेव पार्टी में ड्रग्स के इस्तेमाल को लेकर NCB ने गिरफ्तार किया था। वो फ़िलहाल आर्थर रोड जेल में हैं। अब तक सतीश मानशिंदे उनका केस लड़ रहे थे। अब आर्यन के पिता शाहरुख़ ने नया वकील हायर किया है।
बताते चलें कि अमित देसाई वही वकील हैं, जिन्होंने 2002 हिट एंड रन केस में सलमान खान को बरी कराया था। अब उन्हें आर्यन खान को सलाखों से बाहर निकालने की जिम्मेदारी दी गई है। सोमवार (11 अक्टूबर, 2021) को वो आर्यन खान के लिए अदालत में भी गए थे। जमानत अर्जी दाखिल कर दी। NCB ने जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से एक सप्ताह का समय माँगा है। अमित देसाई ने आर्यन खान के लिए दलीलें भी पेश की थीं।
इस दौरान उन्होंने कहा था कि पिछले एक सप्ताह से जेल में बंद आर्यन खान को इस मामले में ज़्यादा से ज़्यादा एक साल तक की सज़ा हो सकती है और उनके पास से कुछ नहीं मिला है। अमित देसाई ने आर्यन के खिलाफ कोई सबूत न होने का दावा किया। NDPS कोर्ट में ये सुनवाई हुई थी। 2015 में अमित देसाई ने सलमान खान का केस लड़ा था। इसके बाद अभिनेता को 30,000 रुपए के निजी मुचलके पर जमानत मिली थी।
अमित देसाई एक क्रिमिनल लॉयर हैं, जिनके बारे में बताया गया है कि अब वो इस मामले में आर्यन खान को डिफेंड करेंगे। आर्यन की बेल की एप्लीकेशन स्पेशल एनडीपीएस कोर्ट में दी गई है, जहाँ से ये जानकारी सामने आई। ‘नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS)’ की अदालत में इस मामले की अगली सुनवाई होगी। अमित देसाई ने अदालत में कहा था कि इस मामले में जल्दी सुनवाई की ज़रूरत है, क्योंकि ये उनके मुवक्किल की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है।
आर्यन खान पिछले 5 दिनों से जेल में हैं। अब उनके बारे में जानकारी सामने आ रही है कि वो वहाँ सिर्फ ‘पार्ले-जी’ बिस्किट ही खा रहे हैं। और तो और, वो 4 दिनों से टॉयलेट भी नहीं गए हैं। आर्यन खान ने 4 दिनों से स्नान भी नहीं किया है। उन्होंने जेल में एंट्री से पहले ही एक दर्जन पानी की बोतलें खरीदी थीं, लेकिन अब उनमें से 3 ही बची हैं। आर्यन खान से अब तक कोई मिलने भी नहीं आया है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की 28वें स्थापना दिवस पर आयोग के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के अथक प्रयासों के कारण ही जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्व के राज्यों में शांति और कानून-व्यवस्था के नए युग की शुरुआत हुई है।
उन्होंने आगे कहा, “आज भारत एक विश्व शक्ति के रूप में सामने आया है और उसे नई पहचान मिली है। इसका श्रेय नागरिकों, देश के नेतृत्व और संवैधानिक तंत्र को जाता है।” जस्टिस मिश्रा ने कहा कि भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था का आनंद लेते हैं, क्योंकि यहाँ मंदिर, मस्जिद या चर्च बनाने की स्वतंत्रता है, जो कई देशों में हासिल नहीं है।
उन्होंने कहा कि आज बाहरी ताकतों के इशारे पर भारत में मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाने का चलन बन गया है। राजनीतिक हिंसा को लेकर जस्टिस मिश्रा ने कहा कि 20वीं शताब्दी में राजनीतिक हिंसा में 12 करोड़ लोग मारे गए और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजनीतिक हिंसा अभी समाप्त नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि आतंकियों को स्वतंत्रता सेनानी नहीं कहा जा सकता और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को राजनीतिक और आतंकी घटनाओं की निंदा करनी चाहिए। जस्टिस मिश्रा ने कहा, “हम उन लोगों का महिमामंडन नहीं कर सकते, जो निर्दोष लोगों की हत्या करते हैं।”
इसी कारण में प्रधानमंत्री नरेंद्र को संबोधन के लिए आमंत्रित करते हुए जस्टिस मिश्रा ने कहा कि बेहद लोकप्रिय और मेहनती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करते हुए उन्हें गर्व हो रहा है। हालाँकि, जस्टिस मिश्रा के इस संबोधन पर वकील प्रशांत भूषण ने नाराजगी जाहिर की।
आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल (Prof Manindra Aggarwal) के नेतृत्व में प्रोफेसरों की एक टीम ने 11 अक्टूबर, 2021 को कोविड-19 के प्रबंधन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के सफल मॉडल पर एक स्टडी रिपोर्ट जारी किया। इसमें बताया गया कि कैसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली यूपी सरकार ने आर्थिक गतिविधियों को सुनिश्चित किया और टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट एंड टैकल (TTTT) के स्ट्रॅटजी के साथ संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित किया। देश में सबसे अधिक आबादी वाला राज्य होने के बावजूद, यूपी मार्च 2020 से जुलाई 2021 तक महामारी के दौरान भी बेरोजगारी दर को 11% से 4% तक कम करने में कामयाब रहा। बता दें कि, यूपी की बेरोजगारी दर वर्तमान में राष्ट्रीय औसत से कम है।
भारत ने अब तक कोरोनावायरस महामारी की दो लहरें देखी हैं। ऐसे में 11 सितंबर, 2020 को एक दिन में 97,655 नए मामलों के साथ पहली लहर अपने चरम पर पहुँच गई थी। तो वहीं दूसरी लहर, अभूतपूर्व संख्या में संक्रमण के नए मामले लेकर आई और 6 मई, 2021 को 414,280 मामलों के एक दिन के उच्च स्तर के साथ अपने चरम पर पहुँच गई। देश में इतनी बड़ी संख्या में आए कोविड के मामलों में उत्तर प्रदेश का भी अपना हिस्सा था। जहाँ पहली लहर के दौरान, यूपी में एक दिन में सर्वाधिक 7,016 मामले आए वहीं दूसरी लहर में, यह संख्या पाँच गुना अधिक थी। 24 अप्रैल, 2021 को यूपी में कोरोना अपने चरम पर पहुँच गई, जिसमें एक ही दिन में 37,944 मामले सामने आए।
संख्या के मामले में यूपी ने कैसा प्रदर्शन किया है, इसका निर्धारण करते समय, यह ध्यान रखना होगा कि जनसंख्या के मामले में, यह भारत में सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। पिछले डेढ़ वर्षों के दौरान, राज्य प्रशासन ने राज्य में व्यावसायिक गतिविधियों को नहीं रोकना सुनिश्चित करते हुए संख्याओं पर अंकुश लगाने के लिए युद्ध स्तर पर कोविड प्रबंधन रणनीति को आगे बढ़ाया। वास्तव में, अध्ययन में बताया गया है कि यूपी ने पिछले डेढ़ साल के दौरान 2.67 लाख अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी किए थे, जो दर्शाता है कि सरकार आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध थी।
राज्य सरकार के मुख्य उद्देश्य
कोविड प्रबंधन रणनीतियों की योजना बनाते समय, आम जनता पर कम से कम तनाव हो यह सुनिश्चित करने के लिए यूपी सरकार के कुछ उद्देश्य थे।
पहला उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि नागरिकों, विशेष रूप से वंचित और प्रवासी श्रमिकों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
राज्य सरकार के लिए, आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखना सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण था।
वायरस के प्रसार को रोकने और इसे राज्य के कोने-कोने में फैलने से रोकने के लिए यह आवश्यक था।
अंत में, सरकार ने संक्रमण के बढ़ते भार को प्रबंधित करने के लिए स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढाँचे को बढ़ाने पर बड़े पैमाने पर काम किया।
कोरोना के प्रसार पर यूपी ने कैसे लगाई लगाम
यूपी सरकार राज्य में कारोबार सुचारू रूप से चलाना सुनिश्चित करना चाहती थी। दिलचस्प बात यह है कि वायरस की दूसरी विनाशकारी लहर के दौरान, छोटे नियंत्रण क्षेत्रों (containment zones) को बंद कर दिया गया था, लेकिन बाकी कारोबार हमेशा की तरह आगे बढ़ता रहा। यहाँ यह समझने योग्य है कि जब महामारी के दौरान व्यवसायिक गतिविधियाँ जारी रहती हैं, तो वायरस के तेजी से फैलने की संभावना हमेशा बनी रहती है। इस प्रकार, यूपी सरकार के लिए यह महत्वपूर्ण था कि जिस समय या जहाँ से इसका प्रसार शुरू हो, उसी समय उसे वहीं पर रोका जाए।
Our report on handling of Covid second wave by GoUP is available at https://t.co/Y8T3b3F1yV. A thread highlighting key points will follow soon.
अध्ययन से पता चला कि यूपी सरकार ने महामारी के दौरान आयुष मंत्रालय के सिफारिशों के आधार पर 33 लाख से अधिक प्रतिरक्षा बूस्टर किट वितरित किए। हल्के मामलों के लिए, सरकार ने घरेलू प्रबंधन रणनीतियों का गठन किया जिससे रोगियों को घर पर जल्दी और कुशलता से ठीक होने में मदद मिली, जिससे अस्पतालों पर दबाव कम हुआ। व्यापक परीक्षण और निगरानी ने संक्रमण के प्रसार का पता लगाने और हाथ से बाहर जाने से पहले इसे नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नियंत्रण क्षेत्र के स्मार्ट प्रबंधन ने यह सुनिश्चित करने में भी मदद की कि संक्रमण जल्दी से दूर हो जाए। साथ ही विपक्षी नेताओं द्वारा टीकाकरण के खिलाफ चलाए गए तमाम प्रोपेगेंडा के बावजूद टीकाकरण कार्यक्रम में तेजी लाने से राज्य में कोविड-19 को नियंत्रित करने में मदद मिली।
यूपी सरकार द्वारा किए गए प्रयासों ने सकारात्मक परिणाम दिखाए और अध्ययन से पता चला कि यूपी ने सबसे अधिक मामलों की संख्या के साथ शीर्ष दस राज्यों में 98.6% पर उच्चतम रिकवरी रेट दर्ज किया। इसी तरह, जैसा कि राज्य ने TTTT दृष्टिकोण पर जोर दिया, राज्य का पॉजिटिविटी अनुपात 0.0% से भी कम था। विशेष रूप से, राज्य ने 31 जुलाई 2021 तक महामारी के दौरान 6.6 करोड़ परीक्षण किए। यूपी में सबसे कम सक्रिय मामले प्रति मिलियन (3) और मृत्यु प्रति मिलियन (97) थे।
यूपी में अप्रवासी मजदूरों का संकट
मार्च-अप्रैल 2020 में पूरे भारत में जब लॉकडाउन की घोषणा के बाद, प्रवासी श्रमिक मौका मिलते ही अपने गृह राज्यों में वापस जाने लगे। अध्ययन में बताया गया है कि कोविड की पहली लहर के दौरान लगभग 35 लाख प्रवासी श्रमिक विभिन्न राज्यों से यूपी वापस आए। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा कई रणनीतियों को अपनाया गया था। जिसमें प्रवासी श्रमिकों को आजीविका प्रदान करने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक समाधान दोनों शामिल थे। साथ ही, यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण था कि पहली लहर के बाद श्रमिक वापस यहीं रहें ताकि भविष्य में ऐसी किसी कठिनाई का सामना न करना पड़े।
स्रोत- IIT कानपुर
यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रवासी श्रमिकों को स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिले और राज्य आगे ऐसे किसी भी प्रकोप को रोक पाए, राज्य भर में कई परीक्षण सुविधाएँ और परीक्षण कियोस्क स्थापित किए गए थे। प्रवासी श्रमिकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह घर पर रहकर लॉकडाउन के नियमों का पालन करें उन्हें 1,000 रुपए की तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान किया गया था। जिससे वे केंद्रीय स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा अनिवार्य रूप से सुझाए गए क्वारंटाइन नियमों के तहत घर पर रहें। राज्य ने न केवल राष्ट्रीय और राज्य योजनाओं के तहत मुफ्त राशन वितरित किया, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए सामुदायिक रसोई भी स्थापित की कि कोई भी भूखा न रहे।
वहीं राज्य ने प्रवासी श्रमिकों के लिए एक अभिनव कौशल मैपिंग की पहल भी की। इसने उन्हें विभिन्न योजनाओं के तहत उनके कौशल के अनुसार रोजगार प्रदान करने में मदद की। अध्ययन से पता चलता है कि राज्य ने लगभग 16 लाख प्रवासी श्रमिकों का कौशल मैपिंग किया। यूपी ने एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी बनाया ताकि श्रमिक मंडियों में जाने के बजाय वे अपने स्मार्टफोन पर नौकरी ढूँढ सकें। जबकि कोविड की दोनों लहरों के दौरान श्रमिकों को सबसे अधिक नौकरियाँ निर्माण क्षेत्र में प्रदान की गईं, अन्य नौकरियों में पेंटिंग, बढ़ई, ड्राइवर, प्लंबर, रसोइया, चाइल्ड केयरटेकर, इलेक्ट्रीशियन और ऐसे ही कई अन्य रोजगार शामिल थे।
स्रोत- IIT कानपुर
मनरेगा कार्यक्रम के तहत प्रवासी कामगारों द्वारा किए गए कुछ काम सूखे से बचाव, मत्स्य पालन, सूक्ष्म सिंचाई कार्य, भूमि विकास, ग्रामीण बुनियादी ढाँचा निर्माण जैसे कई दूसरे काम भी थे। अध्ययन से पता चलता है कि लगभग 18 जिलों में, मनरेगा के तहत महिला प्रवासी श्रमिकों को 40-95% काम दिया गया।
स्रोत- IIT कानपुर
कोविड -19 की दोनों लहरों के दौरान दिहाड़ी मजदूरों, रेहड़ी-पटरी वालों, कुलियों, रिक्शा चालकों, प्रवासी कामगारों सहित गरीब लोगों को डीबीटी के माध्यम से खाद्यान्न और मौद्रिक लाभ के रूप में वित्तीय सहायता भी प्रदान की गई। पीएमजीकेएवाई योजना के तहत मूल आवंटन के अलावा, दूसरी लहर के दौरान मई और जून में ऐसे परिवारों के प्रत्येक सदस्य को अतिरिक्त खाद्यान्न भी मुफ्त प्रदान किया गया।
सीमित संसाधनों से कोविड मैनेजमेंट में राज्य सरकार का बड़ा कमाल
इस साल अप्रैल और मई के दौरान एक ऐसा समय भी आया जब यूपी में प्रतिदिन 30,000 से अधिक मामले सामने आए थे। स्वास्थ्य ढाँचा चरमरा गया था। ऐसे में राज्य ने अस्पताल के बिस्तरों और चिकित्सा ऑक्सीजन की बढ़ी माँगों को पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया। राज्य ने तेजी से स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे में वृद्धि की, स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या में वृद्धि की, ऑक्सीजन की कमी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर तेजी से काम किया, महत्वपूर्ण दवाओं की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की, पॉजिटिव मामलों की पहचान करने के लिए बड़े पैमाने पर परीक्षण किया और राज्यव्यापी लॉकडाउन के बजाय सूक्ष्म नियंत्रण क्षेत्र (कन्टेनमेंट जोन) बनाए।
स्वास्थ्य कर्मियों ने वायरस के प्रसार का पता लगाने और उसे रोकने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में, इन श्रमिकों ने संक्रमित लोगों का परीक्षण और उपचार करके कोरोना के प्रसार की शृंखला को तोड़ने में मदद की। उन्होंने ठीक होने के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थापना में भी मदद की। TTTT मॉडल के तहत, राज्य ने प्रति 1000 लोगों पर दो आशा कार्यकर्ता, एक आँगनवाड़ी कार्यकर्ता और एक आँगनवाड़ी सहायिका को नियुक्त किया।
राज्य ने इन श्रमिकों को वॉयसओवर के साथ ऑडियो और वीडियो के माध्यम से प्रशिक्षित करने के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किए हैं। विशेषज्ञों ने क्षेत्र में काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए कैस्केड मॉडल भी बनाए। बेहतर प्रबंधन के लिए जिला स्तर और प्रखंड स्तर के अधिकारी केंद्रीय नीतियों से तालमेल में थे। तो वहीं केंद्र, यूपीटीएसयू, डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ से तकनीकी सहायता ने भी यूपी को कोविड प्रबंधन में मदद की।
स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा राज्य की प्राथमिकता थी। सरकार ने न केवल उन्हें पर्याप्त व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण जैसे पीपीई किट, मास्क, दस्ताने, सैनिटाइज़र आदि प्रदान किए, बल्कि उन्हें पीएमजेजेबीवाई, पीएमएसबीवाई और एकेबीवाई जैसी विभिन्न योजनाओं के तहत नामांकित भी किया।
हॉस्पिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
न केवल योगी सरकार ने राज्य में आईसीयू बेड की उपलब्धता में वृद्धि की, बल्कि सबसे अधिक वेंटिलेटर लगाने की भी सूचना दी। कोविड रोगियों के लिए बेड, आईसीयू और वेंटिलेटर उपलब्ध कराते हुए, राज्य ने गैर-कोविड सेवाओं को बनाए रखना भी सुनिश्चित किया। जबकि सरकार ने होम आइसोलेशन के लिए सभी सहायता प्रदान की, उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि एचआईवी, प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ताओं, कैंसर चिकित्सा आदि जैसी समस्याओं से पीड़ित रोगियों के लिए इसकी अनुमति नहीं थी। 60 वर्ष से अधिक आयु के रोगियों या सह-रुग्ण स्थितियों वाले रोगियों के लिए उच्च रक्तचाप, मधुमेह आदि की तरह, होम आइसोलेशन की अनुमति देने से पहले उचित मूल्यांकन किया गया था।
गौरतलब है कि राज्य महामारी की संभावित तीसरी लहर के लिए बाल चिकित्सा सुविधाओं में तेजी ला रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बीमारी से पीड़ित बच्चों के लिए पर्याप्त चिकित्सा बुनियादी ढाँचा है।
इम्युनिटी बूस्टर किट्स
होम्योपैथिक किट राज्य में सबसे प्रसिद्ध थे, आयुष किट, आयुष 64, आयुष काढ़ा आदि जैसे आयुर्वेदिक किट राज्य भर में बड़े पैमाने पर वितरित किए गए थे।
ऑक्सीजन वितरण प्रणाली
अप्रैल के अंत से मई के मध्य तक 2021 में, सकारात्मक मामलों की अधिक संख्या के कारण, राज्य में ऑक्सीजन की माँग अपने चरम पर थी। इस अवधि के दौरान, उत्तर प्रदेश सहित भारत भर के कई अस्पतालों ने मेडिकल ऑक्सीजन की कमी की सूचना दी। हालाँकि ऑक्सीजन उपलब्ध थी, लेकिन आपूर्ति शृंखला पर्याप्त नहीं थी। भारत सरकार ने पूरे भारत के राज्यों में ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित करने के लिए धन उपलब्ध कराया था, लेकिन अध्ययन से पता चलता है कि केवल यूपी और असम ने उन संयंत्रों को स्थापित करने में आगे कदम बढ़ाया। उत्तर प्रदेश ने ऑक्सीजन ट्रकों के लिए जीपीएस ट्रैकर्स का उपयोग करके एक व्यापक आपूर्ति शृंखला तैयार की ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह समय पर सभी अस्पतालों तक पहुँचे।
स्रोत- IIT कानपुर
78 सदस्यीय मजबूत टीम के साथ, यूपी की आपूर्ति शृंखला प्रबंधन के एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र ने 133 ऑक्सीजन टैंकरों के साथ 15 ऑक्सीजन संयंत्रों की निगरानी की, जो इन संयंत्रों से लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) को राज्य भर में विभिन्न स्थानों पर ले गए। भारतीय रेलवे ने भी यूपी तक ऑक्सीजन ले जाने के लिए ट्रेनों के माध्यम से सहायता प्रदान की। एलएमओ की आपूर्ति में लगने वाले समय को कम करने के लिए भारतीय वायु सेना ने खाली टैंकरों को ऑक्सीजन संयंत्रों तक पहुँचाया।
गौरतलब है कि विभिन्न योजनाओं के तहत, यूपी के लिए 549 ऑक्सीजन संयंत्र आवंटित किए गए थे। जिसमें से 31 जुलाई 2021 तक, 238 संयंत्र स्थापित किए जा चुके थे।
विशेष निगरानी अभियान
विशेष निगरानी अभियान पहल (वीएसएआई) यूपी सरकार द्वारा शुरू किया गया एक घर-घर निगरानी कार्यक्रम है। इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू स्तर पर मामलों का पता लगाना और उन्हें ट्रैक करना था। दो सदस्यीय वीएसएआई टीम ने घरों का दौरा किया और उन्हें संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के बारे में शिक्षित किया, रोगसूचक रोगियों (लक्षणों वाले) का पता लगाया और सह-रुग्णता (co-morbiditie) (जिनमें लक्षण साफ नहीं थे) वाले लोगों की पहचान की। उन्होंने जरूरत पड़ने पर सैंपल लिए और जाँच के लिए भेज दिए। इस कार्यक्रम ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसार को नियंत्रित करने में मदद की। अध्ययन से पता चला कि यूपी सरकार ने सभी ग्रामीण क्षेत्रों में 21,242 पर्यवेक्षकों के साथ ऐसी 141,610 टीमों को तैनात किया था।
टीकाकरण अभियान
राज्य ने प्रसार को रोकने के लिए टीकाकरण अभियान चलाया। 31 जुलाई तक 4.06 करोड़ लोगों को टीके की कम से कम एक खुराक मिल चुकी थी, जबकि 86 लाख लोगों को पूरी तरह से टीका लगाया जा चुका था। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए मौजूदा आँकड़ों के अनुसार, राज्य में 9.16 करोड़ लोगों को कम से कम एक खुराक मिली है, जबकि 2.48 करोड़ लोगों का पूरी तरह से टीकाकरण हो चुका है।
सहायता पैकेज
अध्ययन से पता चला है कि यूपी सरकार ने कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान 3876962.97 मीट्रिक टन राशन वितरित किया। प्रति व्यक्ति औसत वितरण 16.29 किलोग्राम है। वितरण पीएमजीकेवाई के तहत किया गया था जिसे नवंबर 2021 तक बढ़ा दिया गया है। राज्य सरकार द्वारा 3.6 करोड़ परिवारों को पाँच किलोग्राम गेहूँ / चावल मुफ्त में वितरित किया जा रहा है।
स्रोत- IIT कानपुर
दूसरी लहर के दौरान, महिला लाभार्थियों के जन धन खातों में अप्रैल, मई और जून के महीनों के लिए 500 रुपए प्रति माह भेजे गए। इसके अलावा, 1000 रुपए बीपीएल व्यक्तियों, वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं और विकलांग व्यक्तियों को प्रदान किए गए। राज्य सरकार ने कंटेनमेंट जोन में काम बंद होने के कारण अपनी नौकरी गँवाने वाले निर्माण श्रमिकों को भी 1000 रुपए की सहायता प्रदान की।
टास्क टीम-9
सीएम योगी आदित्यनाथ की देखरेख में चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना और स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह की अध्यक्षता में टास्क टीम-9 का मुख्य कार्य राज्य भर में कोविड बेड का प्रबंधन मानव स्वास्थ्य संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और टीकाकरण अभियान को जारी रखना था। अध्ययन में बताया गया है कि टीम के तहत 73,000 निगरानी समितियों ने लगभग 97,000 गाँवों में घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन लगभग 1,00,000 परीक्षण किए गए।
तीसरी लहर की सम्भावना?
इस अध्ययन से यह भी पता चलता है कि यूपी में मामलों में बहुत धीमी वृद्धि देखी जा सकती है, फरवरी 2022 में इसकी चरम सीमा प्रति दिन 1,200 संक्रमणों के साथ होगी। यदि कोई नया संस्करण दिखाई देता है, तो राज्य में नवंबर में प्रति दिन लगभग 10,000 संक्रमणों के साथ तेजी से वृद्धि देखी जा सकती है। किसी भी परिदृश्य में, बेड की माँग 10,000 से अधिक नहीं होगी; इस प्रकार, यह स्वास्थ्य के बुनियादी ढाँचे पर दबाव नहीं डालेगा जैसा कि उसने दूसरी लहर में किया था। साथ ही, टीकाकरण पूरे जोरों पर चल रहा है, जिससे दूसरी लहर की तुलना में गंभीर मामलों की संख्या कम होगी।
अमित खरे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सलाहकार नियुक्त किया गया है। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक वे दो साल तक इस पद पर रहेंगे। 1985 बैच के IAS अधिकारी खरे बीते 30 सितंबर को सचिव (उच्च शिक्षा) के पद से रिटायर हुए थे। उससे पहले वे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में भी रहे थे।
Appointments Committee of the Cabinet has approved appointment of Amit Khare as Advisor to the Prime Minister, Prime Minister’s Office, in the rank and scale of Secretary to Govt of India, on contract basis, initially for two years or until further orders, whichever is earlier. pic.twitter.com/5vbWRyG9Cn
अमित खरे की पीएमओ में नियुक्ति पूर्व कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा व पूर्व सचिव अमरजीत सिन्हा के इसी साल सलाहकार का पद छोड़ने के बाद की गई है। खरे पूर्ण पारदर्शिता के साथ स्पष्ट निर्णय लेने वाले अधिकारी के रूप में पहचाने जाते हैं।
खरे के कार्यकाल में ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति का अनुमोदन
अमित खरे ने दिसंबर 2019 में शिक्षा मंत्रालय (उच्च शिक्षा विभाग) के सचिव का पदभार ग्रहण किया था। उनकी नियुक्ति के कुछ ही समय के भीतर, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को कैबिनेट द्वारा 29 जुलाई 2020 को अनुमोदित किया गया था। पने कार्यकाल में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने कई क्रांतिकारी बदलाव किए। आईआईटी, आईआईएम जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने पर जोर दिया। तकनीकी संस्थानों में इनोवेशन को बढ़ावा दिया। इसका फायदा देश की जनता को कोविड काल में देखने को मिला।
अमित खरे ने उजागर किया था चारा घोटाला
अमित खरे उस वक्त सबसे ज्यादा चर्चाओं में आए थे, जब उन्होंने चारा घोटाले को उजागर किया था। दरअसल, अमित खरे ने चाईबासा उपायुक्त रहते हुए ही चारा घोटाले में प्राथमिकी दर्ज करवाई थी, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया था। इस घोटाले में बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव मुख्य आरोपित थे, जो बाद में कोर्ट से दोषी करार दिए गए और फिर उन्हें सजा भी हुई।
दूरदर्शन के दायरे का विस्तार
अमित खरे के पास अगस्त 2021 तक केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी था। अपने कार्यकाल में डीडी झारखंड सहित एक दर्जन सैटेलाइट चैनल लॉन्च करवाया। अमित खरे ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में रहते हुए डिजिटिल मीडिया नियमों में बदलाव में भी अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने दूरदर्शन के दायरे का विस्तार किया। झारखंड समेत देश के लगभग एक दर्जन राज्यों को डीडी फ्री डिश की सेवा शुरू करवाई। नवंबर 2018 में उनके नेतृत्व में गोवा में अंतरारष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आयोजन हुआ। उन्होंने झारखंड में लोगों को डायन-बिसाही जैसे अंधविश्वास के खिलाफ जागरूक किया। इसके खिलाफ कड़े कानून बनवाए।
अमित खरे एकीकृत बिहार के कई जिलों में तैनात रहे। उन्होंने बिहार में मेडिकल और इंजीनियरिंग की परीक्षा कंबाइंड करा कर मेधा घोटाले को रोका था। उनकी पत्नी निधि खरे फिलहाल केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय में अपर सचिव के पद पर तैनात हैं।
फिल्म निर्देशक रामगोपाल वर्मा ने दक्षिण भारत में पूजी जाने वामी माँ मैसम्मा के मंदिर में शराब चढ़ाई है। उन्होंने खुद ट्वीट कर ये जानकारी दी। उन्होंने ट्विटर पर तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “हालाँकि, मैं केवल वोडका ही पीता हूँ, लेकिन मैंने देवी मैसम्मा को व्हिस्की पिलाया।” इस तस्वीर में उन्हें एक कप में शराब की बोतल से कुछ उड़ेलते हुए देखा जा सकता है। इस दौरान उनके साथ कुछ और लोग भी थे।
साथ ही उन्होंने अपनी ट्वीट में हँसने वाली इमोजी भी लगाई। ये ट्वीट उन्होंने मंगलवार (12 अक्टूबर, 2021) को दोपहर 3:54 बजे किया था। इसके 7 मिनट बाद उन्होंने एक और तस्वीर शेयर की, जिसमें वो कप को देवी मैसम्मा के मुँह के सामने ले जाकर रख रहे हैं। साथ ही उन्होंने कैप्शन में लिखा, “चियर्स”। साथ ही शराब की उड़ेलती हुई बोतलों वालों इमोजी लगाई। ये तस्वीरें देवी मैसम्मा के मंदिर में ली गई हैं।
रामगोपाल वर्मा की इस हरकत से नाराज़ हिन्दुओं ने उन्हें पब्लिसिटी के लिए हिन्दू धर्म को बदनाम न करने की सलाह दी है। कुछ लोगों ने कहा कि उनका करियर फ्लॉप होने की वजह से उनके दिमाग पर असर पड़ा है। लोगों ने कहा कि वो अटेन्शन पाने के लिए ये सब कर रहे हैं और। कई लोग उनका समर्थन करते हुए नजर आए। बता दें कि बॉलीवुड में हिन्दू धर्म का मजाक बनाना एक आम बात है।
फिल्म निर्देशक रामगोपाल वर्मा ने मंदिर में चढ़ाई शराब
रामगोपाल वर्मा ने वारंगल में अपनी एक फिल्म की लॉन्च के दौरान ये हरकत की। कभी ‘शिवा (1989, 90)’, ‘रंगीला (1995)’, ‘सत्या (1998)’, ‘शूल (1999)’, ‘कंपनी (2002)’ और ‘सरकार (2005)’ जैसी फ़िल्में बना चुके रामगोपाल वर्मा पिछले एक दशक से एक अदद हिट के लिए तरस रहे हैं। हाल ही में उन्होंने कुछ अश्लील फ़िल्में भी बनाई है और वो अजीबोगरीब हरकतें करते रहते हैं।
रामगोपाल वर्मा के ट्वीट से हिन्दू नाराज
मुख्यतः दक्षिण भारत में देवी मैसम्मा की पूजा की जाती है। इसके अलावा महाराष्ट्र में भी ‘मेसाई’ और ‘मेस्को’ नाम से उनकी पूजा होती है। चेचक जैसे संक्रामक रोगों से दूर रखने के लिए उनसे प्रार्थना की जाती है। हैदराबाद के ‘टैंक बून्द’ में स्थित ‘कट्टा मैसम्मी’ मंदिर उनका प्रमुख मंदिर है। इस मंदिर के सामने 1908 में निजाम तक ने सिर झुकाया था। कहा जाता है इसके बाद ही बाढ़ नियंत्रण में आया था।
बांग्लादेश के चटगाँव के फिरंगी बाजार इलाके में रविवार (अक्टूबर 10, 2021) को इस्लामी चरमपंथियों ने श्री शमशानेश्वर शिव विग्रह मंदिर की दुर्गा प्रतिमा को तोड़ दिया। बांग्लादेश हिंदू एकता परिषद ने घटना की जानकारी देते हुए ट्वीट किया है।
इस ट्वीट में उन्होंने क्षतिग्रस्त मूर्ति की तस्वीर के साथ लिखा है, “हमला सड़क पर उस समय हुआ जब चटगाँव के कोतवाली में पूजा मंडप में माँ दुर्गा की मूर्ति को प्रवेश कराया जा रहा था। पुलिस ने एक को गिरफ्तार किया है। चटगाँव में कोतवाली की सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं।”
3rd incident. The attack took place on the road while the Durga idol was being entered in the puja mandapa in Kotwali, Chittagong. Police have arrested one. Protests are going on in the streets of Kotwali in Chittagong. https://t.co/G0LWtgvZlqpic.twitter.com/dvyd5TW1vC
— Bangladesh Hindu Unity Council (@UnityCouncilBD) October 10, 2021
जानकारी के मुताबिक पुलिस ने सोमवार (अक्टूबर 11, 2021) सुबह छापेमारी कर दुलाल (35), कबीर (42) और इकबाल (32) को गिरफ्तार कर लिया। तीनों आरोपित इसी इलाके में एक फल के गोदाम में काम करते थे। कोतवाली थाना प्रभारी (OC) मोहम्मद नेजामउद्दीन ने कहा, “फिरंगी बाजार इलाके में मूर्ति तोड़ने की घटना हुई है। हम जाँच के बाद पुष्टि करेंगे कि यह दुर्घटना थी या सुनियोजित।”
स्थानीय हिंदू लोगों ने बर्बरता का विरोध किया
इस तोड़फोड़ से इलाके में आक्रोश फैल गया, जिसके बाद शिवबाड़ी और निकटतम पूजा मंडप के सैकड़ों भक्त कोतवाली थाने के सामने एकत्र हुए और लगभग दो घंटे तक विरोध किया। पूजा मंडप के अध्यक्ष अमित होर ने शिकायत दर्ज कराई है।
ढाका में दुर्गा प्रतिमा तोड़ी
बांग्लादेश हिंदू एकता परिषद ने 11 अक्टूबर को ढाका में की गई बर्बरता की एक और घटना को साझा किया है। परिषद ने ट्वीट में लिखा, “प्रतिमा को फिर से तोड़ा गया। यह घटना आज शाम ढाका के सावर उपजिला के आशुलिया के रस्तमपुर गाँव की है। हम सभी पूजा मंडप अधिकारियों और स्वयंसेवकों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं ताकि वे मंदिर की सुरक्षा का ध्यान रख सकें।”
4th incident. Vandalizing the pratima again. This incident took place at Rastampur village of Ashulia in Savar upazila of Dhaka this evening. We are drawing the attention of all the puja mandapa authorities and volunteers so that they take care of the temple’s own security. https://t.co/UYOGJBauBTpic.twitter.com/SIDXfum6Jo
— Bangladesh Hindu Unity Council (@UnityCouncilBD) October 10, 2021
त्योहार से पहले दो और दुर्गा प्रतिमाओं में तोड़फोड़
बांग्लादेश में दुर्गा मूर्तियों के साथ तोड़फोड़ का सिलसिला नौ दिवसीय नवरात्रि उत्सव की शुरुआत से बहुत पहले शुरू हो गया था। परिषद के एक अन्य ट्विटर पोस्ट के अनुसार, “सितंबर में कुश्तिया में दुर्गा पूजा के लिए तैयार की जा रही मूर्ति को तोड़ा गया था, मूर्ति के पूरी तरह से तैयार होने से पहले ही उसे तोड़ दिया गया।” संगठन ने एक ट्वीट में कहा, “हर साल की तरह बांग्लादेशी चरमपंथियों ने माँ दुर्गा की मूर्ति तोड़नी शुरू कर दी है। यह हर साल दुर्गा पूजा के दौरान होता है।”
After Kushtia, this time Durga idol was vandalized in Joypurhat.The vandalism of the idol during Durga Puja reveals how strong the law and punishment system of Bangladesh is! https://t.co/rf1wBcwKwNpic.twitter.com/HBDsI91IKZ
त्योहार के लिए तैयार की जा रही एक और मूर्ति को 25 सितंबर को तोड़ दिया गया था। परिषद ने ट्वीट किया, “कुश्तिया के बाद, इस बार जॉयपुरहाट में दुर्गा की मूर्ति को तोड़ा गया। दुर्गा पूजा के दौरान मूर्ति की तोड़फोड़ से पता चलता है कि बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था कितनी मजबूत है!” स्थानीय लोगों ने बदमाशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है।
शाहरुख़ खान का बँगला ‘मन्नत’ पूरी मुंबई में फेमस है। इस आलीशान ‘महल’ में रहने वाले उनके बेटे आर्यन खान अब आर्थर रोड जेल में समाया बीता रहे हैं। ड्रग्स और जहाज पर रेव पार्टी मामले में NCB के हत्थे चढ़े आर्यन खान पिछले 5 दिनों से जेल में हैं। अब उनके बारे में जानकारी सामने आ रही है कि वो वहाँ सिर्फ बिस्किट ही खा रहे हैं। और तो और, वो 4 दिनों से टॉयलेट भी नहीं गए हैं।
‘दैनिक भास्कर’ ने जेल सूत्रों के हवाले से खबर प्रकाशित की है कि पिछले 4 दिनों से आर्यन खान कैंटीन से खरीदी गई बिस्किट्स पर ही ज़िंदा हैं। वो केवल ‘पार्ले-जी’ बिस्किट ही खा रहे हैं। पिछले 4 दिनों से उन्होंने ठीक से टॉयलेट तक नहीं किया है। जेल के अधिकारी और कर्मचारी उन्हें समझा रहे हैं कि वो कुछ खा लें, लेकिन आर्यन मान ही नहीं रहे। वो कह रहे हैं कि उन्हें भूख ही नहीं लग रही है।
मंगलवार (12 अक्टूबर, 2021) की सुबह आमद वार्ड के कॉन्स्टेबल ने आर्यन खान को बिस्किट लाकर दी थी। उन्होंने जेल में एंट्री से पहले ही एक दर्जन पानी की बोतलें खरीदी थीं, लेकिन अब उनमें से 3 ही बची हैं। जेल के नियम कहते हैं कि एक व्यक्ति अपने साथ 2500 रुपए तक ही अंदर ले जा सकता है। जेल अकाउंट में इसे जमा कर इसके बदले एक महीने का कूपन दिया जाता है। जेल के कैंटीन में इसका इस्तेमाल किया जाता है।
वहाँ से साबुन, तेल और टूथपेस्ट जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के अलावा नमकीन, बिस्किट और चिप्स जैसी खाने-पीने की वस्तुएँ भी खरीदी जा सकती हैं। जेलकर्मी चिंतित हैं कि कहीं इससे आर्यन खान की तबीयत न बिगड़ जाए। आर्यन के घर से चादर और कुछ कपड़े भी आए हैं। जेल ने उन्हें कंबल भी बिछाने के लिए दी है। वो और अरबाज मर्चेंट एक ही सेल में रह रहे हैं। आर्यन खान ने 4 दिनों से स्नान भी नहीं किया है।
लेकिन, जेल के नियम के हिसाब से उन्हें शेविंग रोज करानी पड़ रही है। उन्हें ‘बच्चा वार्ड’ के नीचे वाले सेल में क्वारंटाइन कर के रखा गया है। उनके साथ जेल के उस हिस्से में दो बुजुर्ग, एक विकलांग समेत तीन विचाराधीन कैदी बंद हैं। जैसे ही क्वारंटाइन पीरियड ख़त्म होगा, उन्हें सामान्य वॉर्ड में भेजा जाएगा। वहाँ एक सेल में 500 कैदियों के रहने की व्यवस्था है। बुधवार को उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई होनी है।
अगर उनकी जमानत याचिका ख़ारिज हो जाती है और उन्हें जेल में और दिन बिताने पड़ते हैं तो अगले महीन उन्हें मनीऑर्डर के जरिए अपने घर से 2500 रुपए मँगाने की अनुमति दी जाएगी। एक जवाबदार और दो संतरी आर्यन खान पर नजर रख रहे हैं। आर्यन का जवाबदार चेंबूर बैंक लूट का एक 21 साल का आरोपित है। हर सेल में सामान्यतः एक जवाबदार रखा जाता है। आर्यन खान से अब तक कोई मिलने भी नहीं आया है।
उधर बाहर आर्यन की बहन सुहाना खान भी भाई को लेकर परेशान हैं और हर घंटे अपने पिता शाहरुख़ खान से अपडेट्स ले रही हैं। ‘मन्नत’ पहुँच बॉलीवुड सितारे आर्यन के माता-पिता शाहरुख और गौरी को हौसला दे रहे हैं। बावजूद बेटे की टेंशन में दोनों की नींद उड़ गई है। एक्टर ने अपनी अपकमिंग फिल्म ‘पठान’ के इंटरनेशनल शूटिंग शेड्यूल को भी रद्द कर दिया है और डायरेक्टर एटली की फिल्म की शूटिंग भी स्थगित कर दी है।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने सोमवार (11 अक्टूबर) को दिल्ली के रमेश पार्क से मोहम्मद अशरफ उर्फ अली नाम के एक पाकिस्तानी आतंकी को गिरफ्तार किया था, जो पिछले एक दशक से अधिक समय से फर्जी पहचान पत्र पर देश में रहा था। अली आतंकियों के स्लीपर सेल के रूप में देश में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश में था।
आतंकी अली वह बांग्लादेश के रास्ते भारत में दाखिल हुआ था और भारत आकर उसने यहाँ का पासपोर्ट भी बनवा लिया। दिल्ली-एनसीआर में पीर-मौलाना के रूप में झाड़-फूंक का काम करता था। वह देश के जिन-जिन शहरों में रहा, वहाँ मौलाना बनकर ही वह रहता था। उसने भारत का पासपोर्ट भी बनवा लिया है। पुलिस के अनुसार, आतंकी अली दिल्ली के स्लीपर सेल का मुखिया था और हिंदुस्तान आने वाले आतंकियों को हथियार और लॉजिस्टिक उपलब्ध करवाता था।
One Pakistani national Mohd Asraf was arrested by Delhi Police Special cell, yesterday. He has been in India for more than a decade using Indian identity. Initial probe revealed his involvement as sleeper cell, orchestrating subversive activities:DCP Special Cell Pramod Kushwaha pic.twitter.com/ftBoR4PUaM
पुलिस का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में इसके नेटवर्क में और भी कई लोग हैं और जल्दी ही कई और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं। पूछताछ में मोहम्मद अशरफ उर्फ अली ने बताया कि वह कई आतंकी घटनाओं में शामिल रहा है। इनमें जम्मू-कश्मीर में अंजाम दी गईं आतंकी घटनाएँ भी शामिल हैं।
पुलिस ने छापेमारी के दौरान उसके पास एक एके-47 राइफल के साथ एक अतिरिक्त मैगजीन व 60 राउंड, एक हथगोला, 50 राउंड के साथ 2 अत्याधुनिक पिस्टल जब्त की थी। ये हथियार उसने दिल्ली के कालिंदी कुंज के पास यमुना नदी के किनारे बालू के नीचे दबा रखे थे। इसके साथ ही उसने कुछ नकदी भी यहाँ छुपा रखा था। पुलिस जानने की कोशिश कर रही है कि ये हथियार और पैसे उसे किसने दिए थे।
जाँच में पता चला कि वह पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई के लगातार संपर्क में थे। उसके मोबाइल से पाकिस्तान के कई नंबर मिले हैं। उसके मोबाइल पर ज्यादातर VOIP कॉल आते थे, ताकि सुरक्षा एजेंसियों को इसकी भनक ना लगे। अली को बड़ा काम करने का हुक्म आईएसआई से मिला था। पुलिस उसकी कॉल डिटेल खंगाल रही है। साथ ही उसके बैंक एकाउंट के बारे में भी जाँच की जा रही है।
अली भारत दशहरे के दौरान दिल्ली में ‘लोन वुल्फ अटैक’ की साजिश रच रहा था। लोन वुल्फ अटैक उस आतंकी घटना को कहते हैं, जिसमें आतंकी किसी भीड़-भाड़ वाली जगह पर घटना को अकेला ही अंजाम देता है, ताकि अधिकतम क्षति पहुँचाई जा सके।
40 वर्ष का है और पुलिस को पता चला कि उसने एक भारतीय महिला से शादी भी की। हालाँकि, पूछताछ के दौरान उसने शादी करने से इनकार किया, लेकिन बाद में उसने कहा कि वह एक महिला के साथ रहता था और फिर उससे अलग हो गया। पुलिस उसके दावों की पुष्टि करने की कोशिश कर रही है।
भारतीय खुफिया एजेंसियों को यह जानकारी मिली थी कि देश में त्योहारों के मौके पर पाकिस्तानी की खुफिया एजेंसी आईएसआई बड़ा हमला करा सकती है। इसके मद्देनजर राजधानी दिल्ली की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। दिल्ली पुलिस होटल्स और गेस्ट हाउस पर नजर रख रही है। किराएदारों के वैरिफिकेशन पर भी जोर दिया जा रहा है।