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2 नन्ही बेटियाँ ‘पापा-पापा’ कर रहीं, वृद्ध पिता के आँसू रुकते नहीं: श्याम सुंदर निषाद की विधवा का दर्द सुन टूट जाएँगे

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में ‘किसान आंदोलन’ के दौरान हुई हिंसा में नारे गए लोगों में से एक नाम श्याम सुंदर निषाद का भी है। आपको वो तस्वीर तो बखूबी याद होगी, जिसमें एक व्यक्ति पर ‘किसान प्रदर्शनकारियों’ द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि वो बोले कि उसे केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ ने किसानों को कुचलने के लिए भेजा है। बार-बार छोड़ देने की गुहार लगाने वाले यही व्यक्ति श्याम सुंदर निषाद थे, जिन्हें मार डाला गया।

दो बच्चियाँ, दो बहनें: गुजर-बसर को लेकर चिंतित हैं श्याम सुंदर निषाद के पिता

श्याम सुंदर निषाद के वृद्ध पिता ने रोते हुए बताया कि उनके परिवार में किसी को मोबाइल फोन के माध्यम से उनके बेटे की मौत की खबर मिली। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों ने उनके बेटे को मारा है। उन्होंने बताया कि सरकार की तरफ से कुछ लोग मिलने आए हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें अब तक किसी प्रकार की मदद नहीं मिली है। श्याम सुंदर निषाद ही पूरा परिवार चलाते थे। उनकी दो छोटी-छोटी बेटियाँ हैं।

साथ ही दो बहनें हैं, जिनकी शादी नहीं हुई है। पिता की चिंता है कि अब परिवार कैसे चलेगा। श्याम सुंदर निषाद की एक बेटी 3 वर्ष की है और एक 7 महीने की। उन्होंने कहा कि श्याम सुंदर निषाद ही घर का पूरा खर्च उठाते थे, भोजन-पानी से लेकर कपड़े-लत्ते तक की चिंता किसी को वो नहीं देते थे। मजदूरी कर के वो घर-बार चलाते थे। पिता ने कहा कि उनकी अब कुछ काम करने की अवस्था नहीं है, ऐसे वो वो कहाँ जाएँगे और बेटियों की शादी कैसे करेंगे।

उनकी चिंता है कि अब परिवार कैसे चलेगा। बेटे के बारे में पूछने पर श्याम सुंदर निषाद के पिता बालकराम रोने लगते हैं। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने 45 लाख रुपया देने की घोषणा की है। उन्होंने सरकार से माँग की कि किसी तरह उनके दोनों बेटियों की शादी में मदद की जाए। साथ ही कहा कि परिवार पर जो कर्ज का बोझ है, उसे सधाना है। उन्होंने कहा कि वो छोटे किसान हैं। उन्होंने कहा कि सरकार मदद करती है, तभी दोनों बच्चियों का पालन-पोषण हो पाएगा।

श्याम सुंदर निषाद के पिता अपने बेटे को लेकर सवाल पूछने पर ‘हे भगवान! ये क्या हो गया’ कह कर फूट-फूट के रोने लगते हैं। वहीं श्याम सुंदर निषाद की माँ का भी रो-रो कर बुरा हाल है। उन्होंने बताया कि इलाके में हर साल दंगल होता है और सब कोई देखने जाता है, लेकिन गाड़ी वगैरह की सुविधा नहीं है तो एक ‘साहब’ के स्वागत के लिए वो किसी की गाड़ी में बैठ कर गए थे, जहाँ उन्हें मार डाला गया।

उन्होंने कहा कि उनके बेटे से बार-बार जबरन कहलवाने की कोशिश की गई कि उन्हें मंत्री ने भेजा है, लेकिन वो इनकार करते रहे। इसके बाद परिवार को कुछ नहीं पता चला कि क्या हुआ, उन्हें किस अस्पताल में ले जाया गया। लेकिन, रात में खबर मिली कि अस्पताल में उनकी लाश मिली है। फिर थाने की गाड़ी में बैठ कर परिजन वहाँ पहुँचे। माँ ने बताया कि तलवार से उनका हाथ-पाँव तोड़ डाला गया था।

श्याम सुंदर निषाद की माँ ने बताया कि बार-बार माफ़ी माँगने के बावजूद उनके बेटे को नहीं छोड़ा गया। उन्होंने कहा कि वीडियो में लाठी-डंडा लिए हुए लोग हैं, सरदार हैं, उन सब ने ही उन्हें मारा है। उन्होंने कहा कि जान की भीख माँगने के बावजूद उन्हें पीटा गया। उन्होंने कहा कि सभी ने वो वीडियो देखा है, जिसमें वो हाथ जोड़ कर कह रहे हैं कि वो स्वागत कार्यक्रम में जा रहे थे, उन्हें मंत्री ने नहीं भेजा है।

लखीमपुर खीरी: श्याम सुंदर निषाद की पत्नी ने भी बयाँ किया दर्द

उन्होंने बताया कि श्याम सुंदर निषाद फलों की खेती भी करते थे। उनकी 5 साल पहले ही शादी हुई थी। उनकी पत्नी ने भी बताया कि उनके पति हर साल दंगल देखने जाते थे। उन्होंने कहा, “मैं तो उनका वीडियो भी नहीं देख पाई। मुझे घबराहट हो रही है। मैं कैसे आपके सवालों का जवाब दूँ। मैंने अपना पति खोया है। अपनी बच्चियों का बाप खोया है। मेरी समझ में नहीं आ रहा कि क्या कहूँ। हत्यारों को सज़ा मिलना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “हमारे घर के सभी सदस्यों की देखभाल रही करते थे। अब सरकार को हमारे गुजर-बसर के लिए मदद करनी चाहिए। हम पढ़े-लिखे तो हैं नहीं तो सरकार से क्या माँगें, लेकिन हमें न्याय मिलना चाहिए। मेरी बेटी की तबीयत खराब है। वो बार-बार पूछ रही है कि पापा कहाँ हैं। वो अपने पापा के बिना नहीं रह पाती। मेरी भी तबीयत ठीक नहीं। मेरी छोटी बच्ची भी पापा-पापा करती है।

(ये रिपोर्ट ऑपइंडिया के लिए आदित्य ने कवर की है।)

हसन बन गया गुड्डू, परवेज बना मिहिर: मजहब छिपा हिंदू लड़कियों को फँसाने की गोरखपुर से इंदौर तक एक जैसी कहानी

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और मध्य प्रदेश के इंदौर में दूरी तो काफी है। लेकिन, मजहब छिपाकर हिंदू लड़की को फँसाने और ब्लैकमेल करने की कहानी एक जैसी ही है। ठीक वैसी ही जैसी हम आए दिन देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आने वाले लव जिहाद (Love Jihad) के मामलों में देखते हैं।

गोरखपुर के चिलुआताल थाना क्षेत्र में एक युवक ने मजहब छिपाकर हिन्दू लड़की को प्रेम जाल में फँसाया। बात जब शादी की आई तो अपनी असली पहचान के साथ सामने आया और निकाह का दबाव बनाने लगा। धोखे का एहसास होने पर युवती ने युवक के खिलाफ दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन से संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कराया। आरोपित हसन रजा को गिरफ्तार कर लिया गया है।

जानकारी के मुताबिक, चिलुआताल थाना क्षेत्र की युवती करीब साल भर पहले कॉलेज आते-जाते वक्त एक युवक के संपर्क में आई। अपनी शराफत से युवक ने उसका दिल जीत लिया। बात शादी तक पहुँच गई। लेकिन इसके बाद जब युवती को युवक की हकीकत पता चली तो अवाक रह गई। दरअसल युवती जिसे गुड्डू समझ रही थी, वह असल में हसन रजा था।

युवती ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि आरोपित युवक हसन रजा उस पर धर्म परिवर्तन कर निकाह के लिए दबाव बना रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए चिलुआताल पुलिस ने आरोपित हसन रजा के खिलाफ दुष्कर्म, जबरन घर में घुसना, घुड़की-धमकी और अन्य धाराओं 376, 452, 504, 506 3(5)1 में केस दर्ज कर जेल भेज दिया। पुलिस ने आरोपित को 10 अक्टूबर को उसके घर से गिरफ्तार किया था।

मिहिर बन फँसाया, फिर ब्लैकमेल करने लगा

एक ऐसी ही लव जिहाद की खबर मध्य प्रदेश के इंदौर से सामने आई है। AC, कूलर और फ्रीज ठीक करने वाला मेकेनिक परवेज पठान खुद को मिहिर बताता था। ऑनलाइन गेमिंग और ऐप के जरिए वह लड़कियों और महिलाओं से बातें करता था फिर उनसे दोस्ती करता था। इसके बाद उन्हें प्रेम जाल में फँसाता था और उन्हें धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपनाने के लिए कहता था। इतना ही नहीं, मुस्लिम धर्म न अपनाने पर उसकी प्राइवेट फोटो वायरल करने की धमकी देता था।

मालवीय नगर निवासी 30 वर्षीय युवती ने आरोपित परवेज के खिलाफ केस दर्ज कराई है। पुलिस ने केस दर्ज होने के बाद परवेज को गिरफ्तार कर लिया है और उसका मोबाइल भी जब्त कर लिया है। पुलिस ने उस पर ब्लैकमेलिंग, छेड़छाड़, धमकी और धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है।

महिला के अनुसार, करीब एक साल पहले इंस्टाग्राम पर उसकी दोस्ती परवेज के साथ हुई थी। उसने खुद को हिंदू बताया और कहा था कि उसका नाम मिहिर है। इंस्टाग्राम के बाद दोनों पोगो, ईमो, हेप्पी, शेयर चैट, वीवो टेलिग्राम जैसे ऑनलाइन एप पर बात करने लगे। आरोपित ने माँ की बीमारी और कई कारण बता कर उसे इमोशनल ब्लैकमेल कर उससे बातचीत बढ़ाई। उसके बाद लड़की को उसने प्यार में फँसाया और फिर उसे ब्लैकमेल करने लगा।

पाँच फरवरी को जब वह सो रही थी तो उसने वीडियो कॉल किया और प्राइवेट फोटो खींच लिए। बाद में जब महिला को परवेज की असलियत पता चली तो उसने बातचीत करनी बंद कर दी। इसके बाद परवेज ने उसे परेशान करना शुरू कर दिया। उसने फोटो वायरल करने की धमकी देते हुए कहा कि पति से तलाक नहीं लिया तो उसको भी बता देगा। परवेज ने कहा मुस्लिम बन जाओ। मुस्लिम दो शादियाँ भी कर सकते हैं। बता दें कि परवेज पहले से ही शादीशुदा है।

बीमार पिता जो उठ-बैठ नहीं सकते, कुँवारी बहन और टूटा-फूटा घर: कर्ज में डूबा एक किसान परिवार हरिओम मिश्रा का भी

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में जो लोग मारे गए, उनमें से एक हरिओम मिश्रा भी है। पेशे से ड्राइवर हरिओम मिश्रा भाजपा के कार्यकर्ता भी थे। वो काफी गरीब घर से आते थे और उनके जाने के बाद अब परिवार बेसहारा हो गया है। उनका एक टूटा-फूटा सा घर है। उनके वृद्ध पिता की तबीयत काफी खराब रहती है। घाव व अन्य बीमारियों की वजह से उनका पाँव भी सीधा नहीं हो पाता।

गरीबी से जूझ रहा लखीमपुर खीरी हिंसा में मारे गए हरिओम मिश्रा का परिवार

हरिओम मिश्रा के घर का वीडियो देखने पर पता चलता है कि उसमें उनके वृद्ध पिता लेटे रहते हैं और उनके लिए एक विशेष लकड़ी की कुर्सी बनवाई गई है, जिस पर बैठा कर उन्हें स्नान व शौच करवाया जाता है। उनकी शारीरिक स्थिति काफी दयनीय है। कुछ ही दिनों पहले हरिओम मिश्रा अपने बीमार पिता के लिए एक गद्दा लेकर आए थे, जिस पर उन्हें लिटाया जाता था। दो कमरों वाले टूटे-फूटे और अस्त-व्यस्त इस घर में हरिओम मिश्रा की माँ भी रहती हैं।

हाँ, एक गाय ज़रूर है जिसे घर में ही रखा जाता है और उसकी सेवा-सुश्रुवा की जाती है। हरिओम मिश्रा के भाई ने अपने घर की इस दयनीय हालत पर वीडियो बनाया है। घर में पानी के लिए चापाकल है, नल की सुविधा नहीं है। मृतक के भाई ने बताया कि नेता लोग भी उनसे अब तक मिलने नहीं आए हैं, जबकि वो लोग भी तो किसान हैं। उन्होंने बताया कि भाजपा के कुछ नेता ज़रूर वहाँ आए हैं।

उनकी एक कुँवारी बहन भी हैं, जिनकी शादी में बड़ा खर्च है। हरिओम मिश्रा की माँ ने बताया कि वो उनकी और अपने पिता की खूब चिंता करते थे और दवाइयों का ख्याल रखते थे। उन्होंने बताया कि जब हिंसा की खबर आई तो वो भगवान से प्रार्थना कर रही थीं कि उनका बेटा कुशल वापस आ जाए, लेकिन अगले दिन उनकी लाश आई। उन्होंने बताया कि वो लोग छोटे किसान हैं, जिनकी रोजी-रोटी कोटा में मिलने वाले राशन से चलती है।

गरीबी और बेटे के जाने का गम: हरिओम मिश्रा की माँ का छलका दर्द

उन्होंने बताया कि हरिओम मिश्रा घर का सारा कामकाज खुद चलाते थे और बाकी लोगों को पता भी नहीं था कि वो किस तरह कमा कर कैसे सब कुछ चलाते थे। उनकी माँ ने बताया कि हरिओम मिश्रा के पिता को काफी देखभाल की ज़रूरत है और इसके लिए पैसा तक नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरा परिवार यही सोच रहा है कि अब गुजारा कैसे होगा। उन्होंने बताया कि अपने बेटे को भी उन्होंने काफी गरीबी में पाला है।

पीड़ित माँ ने बताया कि बचपन में उनके बेटे के पास खाने के लिए रोटी तक नहीं होती थी और दूध भी नहीं होता था, जिससे वो काई कमजोर हो गए थे। हरिओम मिश्रा के वृद्ध पिता को होश नहीं है और उन्हें पता तक नहीं है कि उनके बेटे की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि उनका बेटा ‘श्रवण कुमार’ की तरह था, जो अब दुनिया से चला गया। अपने पिता की सेवा करने के लिए उन्होंने 25,000 रुपए की नौकरी भी छोड़ दी थी।

परिजनों का कहना है कि किसी तरह कर्ज लेकर वो इस घर को चला रहे थे। कृषि के अलावा कुछ सहारा नहीं था। उन्होंने कहा कि उनके बेटे को कैसे मारा गया, ये भी अब तक नहीं बताया गया है। गाँव में उनका किसी से न कोई लड़ाई-झगड़ा था। वो कहते थे कि वो किसी पार्टी के समर्थक नहीं, बल्कि जहाँ थोड़े-बहुत पैसे की कमाई हो जाती है वहाँ रहते हैं। गाँव के बच्चे भी उन्हें खोजते हुए आते थे।

हरिओम मिश्रा की माँ ने बताया कि उनके बेटे अपने कपड़े भी खुद ही साफ़ कर लेते थे और उन पर काम का बोझ नहीं देते थे। उनकी चिंता ये है कि अब कर्ज कैसे चुकाया जाएगा। साथ ही उनके पिता के इलाज में भी काफी खर्च है। कई जगह उन्हें दिखाने भी ले जाया गया था। हरिओम मिश्रा ही अपने पिता को शौच करवाया करते थे, वो खुद से उठ-बैठ नहीं सकते। उनकी मौत के बाद से पिता का इलाज भी बंद है।

‘क्या हम किसान नहीं हैं?’ – हरिओम मिश्रा के परिवार का सवाल

हरिओम मिश्रा की माँ ने बताया कि उनके बेटे हमेशा उन्हें दिलासा देते थे और उनके खाने-पीने को लेकर भी सजग रहते थे। साथ ही वो अपनी बहन के लिए लड़का भी देख रहे थे। हरिओम मिश्रा की माँ ने पूछा कि क्या सिर्फ भाला-बरछी लेकर मारने वाले ही किसान हैं, हम किसान नहीं हैं? उन्होंने कहा कि न सपा वाले आए हैं न ही राहुल गाँधी उनसे मिलने आए। उन्होंने पूछा कि हम खेत में काम करते हैं, तो क्या हम किसान नहीं हैं?

उनका दुःख इस बात को लेकर छलका कि हिंसा करने वालों के परिवार को डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपए मिल रहे हैं और उन्हें कोई अब तक पूछने तक नहीं आया, लेकिन वोट माँगने सब आते हैं। उन्होंने कहा कि उनका बेटा तो मजदूर था। उन्होंने कहा कि किसान को हथियार की क्या जरूरत है, उसके पास तो कुदाल और हसिया होता है, तलवार-भाला नहीं। उन्होंने कहा कि उनके घर में कोई हथियार नहीं है।

उन्होंने कहा, “क्या सिर्फ सिख और सरदार ही किसान होते हैं? ब्राह्मण मर जाए, फिर भी उसे कुछ नहीं मिलता। ये लोग ब्राह्मण समाज को नष्ट कर देना चाहते हैं। कुछ तो हमारी फ़िक्र करो। हम तो मेहनत कर के चार पैसे कमाने वाले लोग हैं, ताकि बच्चों को खाना मिल सके। हम भगवान के सहारे हैं। बेटा चला गया, पति बीमार हैं, एक बेटी अस्पताल में है। हमारी सहायता के लिए कोई नहीं है।”

(ये रिपोर्ट हमारे लिए आदित्य ने कवर की है।)

देशभर में 40 जगहों पर CBI की रेड, जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल के पूर्व सलाहकार बसीर खान के घर पर भी दबिश

जम्मू-कश्मीर से एक बड़ी खबर आ रही है। केंद्र शासित प्रदेश के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा के सलाहकार रहे बसीर अहमद खान के ठिकानों पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को छापेमारी की। पूर्व सलाहकार बसीर खान पर बंदूक का फर्जी लाइसेंस देने के रैकेट में शामिल रहने का आरोप है। इस सिलसिले में एजेंसी ने 40 ठिकानों पर रेड डाली है। इन ठिकानों में बाग बागत स्थित बसीर का घर भी शामिल है। छापेमारी में सीबीआई के साथ जम्मू-कश्मीर पुलिस भी शामिल थी।

सीबीआई को जानकारी मिली थी कि फर्जी लाइसेंस बाँटने के रैकेट में बसीर खान बंदूक की भी संलिप्तता है। इसके बाद एजेंसी ने मामले की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय को दी। इस सूचना के बाद मंत्रालय ने पिछले सप्ताह उन्हें सलाहकार के पद से हटा दिया था। इसके बाद पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल के सलाहकार बनने की खबरें सामने आई थीं। हालाँकि, बाद में ऑपइंडिया से बात करते हुए एक सरकारी सूत्र ने इस खबर का खंडन किया था। 

बता दें कि बसीर खान जम्मू-कश्मीर के वर्तमान उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा के सलाहकार रहने के साथ ही वे प्रदेश के पूर्व उप-राज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू के भी थे। वहीं, गृह मंत्रालय से हरी झंडी मिलते ही सीबीआई ने पदोन्नत आईएएस अधिकारी खान के ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी। एजेंसी ने घाटी स्थित उनके अलावा के नई दिल्ली और मध्य प्रदेश समेत देश के अन्य हिस्सों में 40 जगहों पर छापेमारी की।

इसी मामले में पिछले साल आईएएस अधिकारी राजीव रंजन और जम्मू-कश्मीर कैडर के एक वरिष्ठ अधिकारी इतरत हुसैन रफीक को सीबीआई ने घाटी के कुपवाड़ा जिले में डिप्टी कमिश्नर के रूप में अपने आधिकारिक पद के दुरुपयोग के लिए गिरफ्तार किया था।

भारत के सबसे बड़े फर्जी बंदूक लाइसेंस रैकेट माने जा रहे इस मामले में जम्मू-कश्मीर के बाहर रहने वाले लोगों को भी बंदूक के लाइसेंस जारी किए गए थे। इसके लिए तत्कालीन लोक सेवकों ने रिश्वत ली थी। माना जा रहा है कि बंदूकों के कुल ढाई लाख से अधिक फर्जी लाइसेंस जारी किए गए।

इस घोटाले का राजस्थान आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने 2017 में इस घोटाले का खुलासा किया था और अवैध रूप से शस्त्र लाइसेंस जारी करने में संलिप्तता के आरोप में 50 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया था। एटीएस के अनुसार, कथित रूप से सेना के जवानों के नाम पर 3,000 से अधिक परमिट दिए गए थे। एटीएस के निष्कर्षों के आधार पर जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल एन एन वोहरा ने मामले की जाँच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा था।

रामलीला में सिखों का उपद्रव, हिंदू देवताओं पर अपमानजनक टिप्पणी: क्या पंजाब में हिंदू-सिखों को बाँटने की कोशिश कर रहे खालिस्तानी

पंजाबी अखबार में हिंदू देवी के लिए आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल करने के बाद कुछ सिखों ने शनिवार (अक्टूबर 9, 2021) की रात पंजाब के रूपनगर में सनातन धर्म रामलीला समिति द्वारा आयोजित रामलीला में बाधा पहुँचाई। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, पंडाल में रामलीला चल रही थी, तभी कुछ सिख लाठी-डंडों के साथ पहुँचे और हिंदू देवताओं, आयोजकों को गाली देनी शुरू कर दी। खालिस्तानी मानसिकता वाले अराजक तत्वों ने जमकर उपद्रव किया।

मुख्य निदेशक राकेश सहगल और समिति के अध्यक्ष मनोहर लाल कपूर ने दैनिक जागरण को बताया कि समिति के सदस्यों ने सिख समूह को शांत करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने एक न सुनी और उपद्रव जारी रखा। सिख लोगों ने कथित तौर पर समिति पर ‘बीजेपी समर्थक’ होने का आरोप लगाया और भगवान राम सहित हिंदू देवताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करते रहे। इससे वहाँ मौजूद भक्तों की भावना को ठेस पहुुँची। इन अराजक तत्वों की धमकियों और उपद्रव के चलते कई घंटों तक रामलीला रोकनी पड़ी। आयोजकों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद पुलिस ने इन ‘गुंडों’ के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया। आयोजकों ने पुलिस की कार्रवाई को निराशाजनक बताया।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने माँ चिंतपूर्णी के दरबार में माथा टेका था। इसे लेकर ‘रोजाना पहरेदार’ के संपादक ने लेख में विवादित टिप्पणी की थी। इस खबर का शीर्षक था, “अपने पेओ नूं छड सुखबीर पहुँचेआ बेगानी माँ के दरबार।” माता चिंतपूर्णी के लिए ‘बेगानी माँ’ शब्द का इस्तेमाल करने पर हिंदू संगठनों ने रोष जताया। संपादक को गिरफ्तार न करने को लेकर प्रदर्शन किया और जगराओं को बंद रखा।

खालिस्तान समर्थकों के पैर पसारने से बढ़ रहा तनाव?

हालिया घटनाओं पर गौर करें तो हमारे सामने कई ऐसे उदाहरण हैं जो पंजाब के साथ-साथ विदेशों में भी खालिस्तान समर्थक संगठनों के पैर पसारने की तरफ इशारा करते हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) को 2017 के पंजाब चुनावों के दौरान और उससे पहले भी अपने राजनीतिक लाभ के लिए खालिस्तानी तत्वों को भड़काने की कोशिश करते देखा गया था।

वहीं कई खालिस्तान समर्थक संगठनों ने 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले AAP के लिए अपना समर्थन जताया था। AAP के प्रमुख नेता और लोकसभा उम्मीदवार जरनैल सिंह को लंदन में खालिस्तान समर्थक रैलियों को संबोधित करते देखा गया था।

हाल की बात करें तो आम आदमी पार्टी के नेता और पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुखपाल सिंह खैरा ने 2018 में खालिस्तान के समर्थन में ट्वीट किया था। उन्होंने पंजाब में ‘खालिस्तान’ बनाए जाने को लेकर साल 2020 में जनमत संग्रह कराने की बात कही थी। खैरा ने कहा था कि वे साल 2020 में होने वाले जनमत संग्रह के मतदाता नहीं हैं, लेकिन उन्हें यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि बँटवारे के बाद सिखों के साथ भेदभाव, उत्पीड़न, दरबार साहिब पर हमले और साल 1984 में हुए हत्याकांड की वजह से यह सब कुछ हुआ है।

इस बयान के बाद उनकी चौतरफा आलोचना होने लगी। सुखपाल खैरा की कड़ी आलोचना करते हुए AAP संयोजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर भी निशाना साधा गया और खैरा को पार्टी से बर्खास्त करने की माँग की। आम आदमी पार्टी, पंजाब ने रेफरेंडम-2020 पर खैरा के बयानों को उनकी निजी राय बताते हुए पल्ला झाड़ लिया।

हाल के ‘किसान विरोध’ में AAP ने ग्रेटा टूलकिट में दिए गए निर्देशों का पालन किया था। खालिस्तान समर्थक तत्वों का उपद्रव उस समय चरम पर था, जब गणतंत्र दिवस 2021 पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का अनादर किया गया।

जैसे-जैसे ‘किसान विरोध’ के इर्द-गिर्द की राजनीति मुखर होती जा रही है, खालिस्तानी समर्थकों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है। भारत और विदेशों में कई खालिस्तानी समर्थक समूह ‘किसान विरोध’ में शामिल रहे हैं और जैसे-जैसे पंजाब चुनाव नजदीक आ रहे हैं, खालिस्तानी तत्वों का खुले तौर पर हिंदू विरोधी पक्ष भी स्पष्ट होता जा रहा है। सत्तारूढ़ भाजपा और मोदी सरकार का विरोध करने के लिए पाकिस्तान समर्थित खालिस्तानी तत्व अब हिंदुओं के खिलाफ नफरत फैलाने का काम करते दिख रहे हैं।

दलित घोड़ी क्या चढ़ने लगे, शादी में दिखने लगी क्रूरता: हिंदूफोबिक ही नहीं, एंटी दलित भी है पेटा

कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान की राजधानी है जयपुर। जयपुर जिले के विराटनगर का एक छोटा सा गाँव है सूरजपुरा। ज्यादा पुरानी बात नहीं है, इसी साल अप्रैल में खबर आई थी कि पहली बार इस गाँव में कोई दलित दूल्हा घोड़ी पर चढ़ा। ऐसी खबरें बेहद सुकून देती हैं, क्योंकि ऐसी हर खबर मुस्लिम-अंग्रेजी दासता के दौरान हिंदुओं को विभाजित करने के नाम पर समाज में घुसेड़ी गई गंदगी के खिलाफ स्वच्छता अभियान का हिस्सा हैं।

देश के स्वतंत्र होने के बाद कॉन्ग्रेसी और वामपंथी गिरोह ‘ब्राह्मणवादी/सवर्ण मानसिकता’ का नाम देकर ऐसी गंदगी को खाद देने का काम करते रहे हैं। मसलन 2018 में स्वयंभू दलित मसीहा दिलीप मंडल ने बीबीसी में बकायदा एक लेख लिखकर पूछ भी लिया था- ‘दलितों के घोड़ी पर चढ़ने से सवर्णों को कष्ट क्यों है?’

बीबीसी के लिए लिखा गया दिलीप मंडल का लेख

अब ऐसा लगता है कि अपने हिंदूफोबिक करतूतों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाला पेटा इंडिया भी ब्राह्मणवादी मानसिकता से ग्रसित है। यदि ऐसा नहीं होता तो सूरजपुरा की खबर के चंद महीने बाद ही पेटा को यह कहने की क्या जरूरत थी, “शादी समारोहों में घोड़ी का उपयोग करना अपमानजनक और क्रूर है।”

पेटा यानी पीपल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स ने सोमवार (11 अक्टूबर 2021) को शाम के करीब 7 बजे यह ट्वीट किया था। इसका विरोध किया जाना चाहिए था और सोशल मीडिया में लोग कर भी रहे हैं। पेटा इंडिया पर प्रतिबंध की माँग रही है।

पूर्व आईपीएस अधिकारी एम नागेश्वर राव ने बताया है कि चैरिटेबल संस्था पेटा हिंदू और भारत विरोधी है। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को टैग करते हुए कंपनीज एक्ट की धारा-8 के तहत इसका पंजीकरण तुरंत रद्द करने की अपील की है। कुछ और यूजर्स की प्रतिक्रिया पर नीचे गौर करिए;

आर्यन शुक्ला नाम के यूजर ने लिखा है, “जानवरों को मार कर खाना सही है, क्योंकि खाने की आजादी है। क्या जानवरों का भक्षण करने वालों का पेटा पालतू है? घोड़ी पर बैठना अपमानजनक और क्रूर है? जानवरों को मार कर खाने वाले सही हैं?”

एक यूजर ने लिखा है, “पोलो के लिए घोड़ों की सवारी करना अच्छा है! दौड़ प्रतियोगिता के लिए घोड़ों की सवारी करना कुलीन है! पुलिस के लिए घोड़ों की सवारी करना सिविल है! लेकिन… शादी के लिए घुड़सवारी करना क्रूर है! यदि कट्टरता को संस्थागत रूप दिया गया, तो इसे ‘पेटा’ के रूप में जाना जाएगा।”

सपना मदान नाम की एक यूजर ने ट्वीट कर रहा है कि घोड़ी का इस्तेमाल क्रूरता है। लेकिन त्योहारों पर जानवरों को काटना क्रूर नहीं है। मैं खुश हूँ कि मैंने बहुत पहले पेटा को डोनेट करना बंद कर दिया था।

एक यूजर ने ट्वीट किया है, “घोड़ों से इतनी मोहब्बत है पेटा को पर बकरों और ऊँट से नफरत क्यों है। उन्हें जब कुर्बानी के नाम पे मारते हैं तो पेटा को बहुत अच्छा लगता है। इस डरपोक संस्था को बंद करो इसका कोई महत्व नहीं है। सभी डरते हैं। इनका टारगेट सिर्फ हिंदू हैं।”

पेटा के इस ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए यूजर्स ने उसके हिंदू विरोधी चरित्र को भी उजागर किया है। खुद को जानवरों के हित और अधिकारों का पैरोकार बतातने वाली पेटा ने पिछले साल रक्षाबंधन पर्व के लिए चमड़ा मुक्त अभियान (लेदर फ्री कैम्पेन) चलाया था। जबकि इसका किसी भी सूरत में इस पर्व से कोई लेना-देना नहीं है। वैसे पेटा कैसा ‘पशु प्रेमी’ है इसे आप इस बात से भी समझ सकते हैं कि उसे बूचड़खानों (कानूनी) में गायों के कटने से दिक्कत नहीं। लेकिन आपके दूध और पनीर से है। हिंदू त्योहारों पर प्रकृति प्रेमी, जीव प्रेमी हो जाने वाला पेटा बकरीद जैसे मौकों पर जब हजारों की संख्या में खुलेआम जानवर काटे जाते हैं तब चुप हो जाता है।

Pak आतंकी दिल्ली में रह रहा था भारतीय पहचान पत्र के साथ, AK-47 सहित धराया, नवरात्रि पर धमाके की थी प्लानिंग

दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने पूर्वी दिल्ली की लक्ष्मी नगर इलाके से एक पाकिस्तानी आतंकवादी को गिरफ्तार किया है। इस आतंकवादी का नाम मोहम्मद अशरफ उर्फ अली है। वह नवरात्रि पर बड़ा आतंकी धमाका करने की फिराक में था, मगर पुलिस ने उसे पकड़ कर इस बड़ी आतंकी घटना को होने से टाल दिया। अली पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का रहने वाला है।

पुलिस ने मोहम्मद अशरफ के पास से एक AK-47 समेत कई हथियार बरामद किए हैं। वह अली अहमद नूरी के नाम का फर्जी भारतीय पहचान पत्र बनवा कर दिल्ली में रह रहा था। उसने फर्जी कागजातों के सहारे भारतीय पहचान पत्र हासिल कर लिया था।

जानकारी के मुताबिक पाकिस्तानी आतंकी के पास से एक एके-47 राइफल के साथ एक अतिरिक्त मैगजीन व 60 राउंड, एक हथगोला, 50 राउंड के साथ 2 अत्याधुनिक पिस्टल जब्त की गई हैं।

न्यूज एजेंसी ANI ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आतंकी के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, विस्फोटक अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और अन्य प्रावधानों के प्रासंगिक प्रावधान लगाए गए हैं। लक्ष्मी नगर के रमेश पार्क में जिस जगह पर वो रह रहा था, वहाँ तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

बता दें कि भारतीय खुफिया एजेंसियों को यह जानकारी मिली थी कि देश में त्योहारों के मौके पर पाकिस्तानी की खुफिया एजेंसी आईएसआई बड़ा हमला करा सकती है। इसके मद्देनजर राजधानी दिल्ली की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। दिल्ली पुलिस होटल्स और गेस्ट हाउस पर नजर रख रही है। किराएदारों के वैरिफिकेशन पर भी जोर दिया जा रहा है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान द्वारा संचालित एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए 6 आतंकियों को गिरफ्तार किया। इनमें पाकिस्तान से प्रशिक्षित दो आतंकवादी भी शामिल थे। पुलिस ने अपने इस मल्टी स्टेट ऑपरेशन में विस्फोटक व अन्य चीजों को भी बरामद किया था। पुलिस का कहना था कि ये संदिग्ध देश में हत्याओं और विस्फोटों को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। इसके अलावा इनके निशाने पर नामचीन लोग भी शामिल थे।

आर्यन खान को पकड़ने वाले NCB अफसर समीर वानखेड़े का कब्रिस्तान तक पीछा: किसके इशारे पर जासूसी, फुटेज से उठे सवाल

ड्रग्स केस में बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन की गिरफ्तारी के बाद से ही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े चर्चा में हैं। उनकी गिनती ऐसे कड़क अफसरों में होती है जिनसे ड्रग्स माफिया खौफ खाते हैं। दूसरी ओर महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक उन पर आर्यन खान मामले में बीजेपी के इशारे पर काम करने का आरोप लगा चुके हैं। इस बीच, वानखेड़े की जासूसी कराए जाने का मामला सामने आया है।

इस संबंध में महाराष्ट्र पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। इसमें कहा गया है कि पिछले कुछ दिनों से वानखेड़े का पीछा किया जा रहा है। उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। शिकायत के साथ सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस को सौंपी गई है। इसमें कथित तौर पर सादे कपड़ों में संदिग्ध वानखेड़े का पीछा करते नजर आ रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार वानखेड़े ने आरोप लगाया है कि कब्रिस्तान तक उनका पीछा किया गया। उल्लेखनीय है कि वानखेड़े की माँ की मृत्यु 2015 में हो गई थी और उसके बाद से वह प्रार्थना करने अमूमन वहां जाते रहते हैं। कथित तौर पर उनका पीछा करने वाले मुंबई पुलिस से ही हैं। यह भी गौर करने वाली बात है कि सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद जब बिहार पुलिस मुंबई पहुँची थी तो उसके साथ असहयोग करने और जाँच में बाधा डालने का आरोप भी स्थानीय पुलिस पर लगा था।

गौरतलब है कि एनसीबी की टीम ने वानखेड़े के नेतृत्व में 2 अक्टूबर को मुंबई के समंदर में ‘कॉर्डेलिया क्रूज़’ पर छापा मारा था। यह क्रूज गोवा जा रही थी। एनसीबी के पास क्रूज पर ड्रग्स पार्टी को लेकर पुख्ता सूचना थी। उसने अपने कुछ कर्मी पहले से ही यात्री बनाकर क्रूज पर भेज रखे थे। क्रूज पर छापेमारी में कई तरह के नशीले पदार्थ मिले थे।

आर्यन खान सहित 11 लोगों को क्रूज से पकड़ा गया था। इस मामले में एनसीबी अब तक 20 गिरफ्तारी कर चुकी है। शाहरुख खान के ड्राइवर को भी पूछताछ के लिए बुला चुकी है। साथ ही शाहरुख के करीबी बताए जा रहे फिल्म प्रोड्यूसर इम्तियाज खत्री के घर पर भी दबिश दे चुकी है।

बता दें कि समीर वानखेड़े 2008 बैच के IRS-C&CE अधिकारी हैं। एनसीबी से पहले वह मुंबई में ही रेवेन्यू इंटेलीजेंस के जॉइंट डायरेक्टर पद पर तैनात थे। वह पहले भी कई ड्रग्स रैकेट का भंडाफोड़ कर चुके हैं। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद सामने आए ड्रग्स एंगल की जाँच से भी जुड़े हैं। उनकी पत्नी क्रांति रेडकर भी अभिनेत्री हैं। वह कई हिंदी, मराठी और अंग्रेजी फिल्मों में काम कर चुकी हैं।

वानखेड़े के लिए सेलेब्रिटीज के विरुद्ध कार्रवाई, कोई नई बात नहीं है। आपको जानकर हैरानी होगी कि वानखेड़े ने बतौर कस्टम ऑफिसर मुंबई अतंराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर शाहरुख खान के विरुद्ध एक्शन ले लिया था, जिसके कारण एक्टर को 1.5 लाख रुपए फाइन देने पड़े थे। 

उस समय शाहरुख खान हॉलैंड और लंदन गए हुए थे और घर वापसी में ज्यादा सामान करीब 20 बैग के साथ पकड़े गए थे, तब कस्टम अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की थी और उनके परिजनों को जाने दिया गया था। पूछताछ करने वाली टीम कस्टम अधिकारी समीर वानखेड़े की थी।

प्रक्रिया पूरी होने के बाद शाहरुख को 1.5 लाख रुपए का जुर्माना देना पड़ा था। इस पूछताछ पर उस समय के कस्टम कमिश्नर ने भी बयान दिया था कि ये केवल रूटीन प्रक्रिया थी। कोई भी ज्यादा सामान लाता है तो उसे उस पर कर देना होता है। शाहरुख पर 1.5 लाख लगा क्योंकि उन्होंने बहुत सामान लिया हुआ था। कस्टम अधिकारी की सर्विस के बाद वह सर्विस टैक्स डिपार्टमेंट में गए और उन्होंने अनुराग कश्यप, विवेक ऑबरॉय, मिका सिंह, राम गोपाल वर्मा से भी आमना-सामना किया।

जिस आतंकी ने बिहार के गोल-गप्पे वाले वीरेंद्र पासवान को मारी थी गोली, आज वो मारा गया: शोपियाँ मुठभेड़ में 3 ढेर

जम्मू-कश्मीर के शोपियाँ जिले में मंगलवार (अक्टूबर 12, 2021) को एक मुठभेड़ के दौरान लश्कर-ए-तैयबा (LeT) – द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) के कम से कम तीन आतंकवादी मारे गए हैं। पुलिस ने बताया कि उनके पास से हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया गया है।

पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) कश्मीर विजय कुमार ने बताया कि एक आतंकवादी की पहचान गांदरबल के मुख्तार शाह के रूप में हुई है। वह बिहार के एक रेहड़ी वाले वीरेंद्र पासवान की हत्या करने के बाद शोपियाँ चला गया था। 24 घंटों के भीतर यह तीसरी मुठभेड़ है। केंद्रशासित प्रदेश में हो रही आतंकी घटनाओं के बाद सुरक्षाबलों ने कार्रवाई तेज कर दी है।

बता दें कि सुरक्षाबलों को शोपियाँ के तुलरान इमाम साहिब गाँव में आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद सेना के संयुक्त ऑपरेशन में सोमवार (अक्टूबर 12, 2021) शाम को यह मुठभेड़ शुरू हुई थी। इलाके में तलाशी के दौरान उग्रवादियों ने सुरक्षाबलों पर गोलियाँ चलाईं, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। पुलिस ने फँसे हुए आतंकियों से सरेंडर करने की भी अपील की थी।

लाउडस्पीकर के जरिए आतंकियों को समझाने की कोशिश करते जवानों का वीडियो भी सामने आया था। ऑपरेशन के दौरान तीन आतंकियों के मारे जाने के साथ ही यह एनकाउंटर आज सुबह समाप्त हो गया। सुरक्षा बलों ने दावा किया कि यह एक बड़ी उपलब्धि थी क्योंकि तीनों आतंकवादी विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले सुरक्षाबलों ने सोमवार (11 अक्टूबर, 2021) सुबह अनंतनाग और बांदीपोरा में हुए मुठभेड़ में दो आतंकियों को मार गिराया था। वहीं दूसरा एनकाउंटर बांदीपोरा के हाजिन इलाके के गुंड जहाँगीर में हुआ था।

गौरतलब है कि बिहार के भागलपुर के रहने वाले स्ट्रीट वेंडर वीरेंद्र पासवान की मंगलवार (अक्टूबर 5, 2021) को श्रीनगर के लाल बाजार में इस्लामी आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। उनका अंतिम संस्कार बुधवार (अक्टूबर 6, 2021) को श्रीनगर में किया गया।

₹5 हजार देकर बंगाल से भारत में एंट्री, कबाड़ी वाला बन घर की रेकी… फिर डकैती: ये बांग्लादेशी लूटते ही नहीं, रेप और मर्डर भी करते हैं

लखनऊ के चिनहट में रविवार (10 अक्टूबर 2021) देर रात मुठभेड़ हुई। पुलिस ने तीन बदमाशों को पकड़ा। इनकी पहचान 26 साल के शेख रुबेल, 27 साल के आलम और 23 साल के रबीउल के तौर पर हुई। ये बांग्लादेशी नागरिक हैं। मुठभेड़ के दौरान इनके कुछ साथी भाग निकलने में भी कामयाब रहे। उनकी तलाश की जा रही है।

लखनऊ के पुलिस आयुक्त ध्रुव कांत ठाकुर ने बताया कि यह गिरोह डकैती को अंजाम देने निकला था, इसी दौरान मल्हौर रेलवे स्टेशन के करीब पुलिस पेट्रोल पार्टी से मुठभेड़ हो गई। ईस्ट जोन के डीसीपी संजीव सुमन ने बताया कि रविवार रात के करीब 1.45 बजे पुलिस ने कुछ संदिग्धों को देखा। रुकने के लिए कहे जाने पर वे भागने लगे और फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दो बदमाश गोली लगने से जख्मी हो गए। एक को भागते वक्त पुलिस ने दबोच लिया, जबकि अन्य फरार हो गए।

इनसे पूछताछ में बांग्लादेशी युवाओं के ऐसे गिरोह का खुलासा हुआ है जो देश के अलग-अलग हिस्सों में डकैती की घटनाओं का अंजाम देते हैं। रिपोर्ट के अनुसार ये नदी पार कर बांग्लादेश से आते हैं। 5-10 हजार रुपए देकर पश्चिम बंंगाल के 24 परगना के रास्ते भारत में घुसते हैं। इसके बाद ट्रेन के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों में पहुँचते हैं।

भारत में घुसने के बाद ये रेलवे पटरी के आसपास के इलाकों में कबाड़ी, चाय वाला या फेरी वाला बनकर घरों की रेकी करते हैं। अमूमन ऐसे घरों को टारगेट करते हैं जो रेलवे लाइन के किनारे या खाली प्लॉट में बने हों। डकैती को अंजाम देने के बाद पैसे और जेवरात अपने किसी साथी के साथ बांग्लादेश भेज देते हैं ताकि पकड़े जाने पर माल की बरामदगी न हो।

गिरोह के सदस्य अपराध के दौरान आपस में बंगाली में ही बातचीत करते हैं। मोबाइल की जगह वाकीटॉकी का इस्तेमाल करते हैं। 15 फीट की दीवार ये आराम से फाँद लेते हैं। अधिकारियों के अनुसार ग्रिल काटने के ब्लेड, स्कू ड्राइवर के अलावा ये अपने साथ देशी पिस्टल भी रखते हैं। इस 11 सदस्यीय गिरोह के सरगना की पहचान हमजा के तौर पर हुई है।

यह भी पता चला है कि डकैती के दौरान ये घर में मौजूद लोगों को बंधक बना लेते हैं। विरोध करने पर डंडों और लोहे की रॉड से उनकी बुरी तरह पिटाई करते हैं। कभी-कभी घर की महिलाओं के साथ रेप भी करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के आनंद विहार के एक घर में इस गिरोह ने डकैती के दौरान विरोध किए जाने पर एक बुजुर्ग महिला की सिर पर लोहे के रोड से हमला कर हत्या कर दी थी। इनसे पूछताछ में यूपी, दिल्ली सहित देश के कई राज्यों में हुई डकैती की घटनाओं का पता चला है।