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लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में दो आरोपित गिरफ्तार: SC में कल जमा करनी है स्टेटस रिपोर्ट, मंत्री के बेटे को पकड़ने के लिए पुलिस टीम गठित

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसक घटना के मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए लोगों के नाम लवकुश राणा और आशीष पांडेय हैं। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा था कि जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज है, उनमें से कितने लोगों की गिरफ्तारी हुई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट को बताया बताया कि इस संबंध में केस के सभी पहलुओं को देखते हुए जाँच चल रही है और बहुत जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी। बुधवार (6 अक्टूबर) को सुप्रीम कोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया था। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में यूपी सरकार को शुक्रवार (8 अक्टूबर) को स्टेटस रिपोर्ट देने को कहा है।

वहीं, लखीमपुर हिंसा के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर लखनऊ रेंज की आईजी लक्ष्मी सिंह ने कहा है कि पुलिस केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को ढूंढ रही है और उसे जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी लोगों से कहा गया है कि जिनके पास कोई सबूत है, वो पुलिस को दें। दरअसल, लखीमपुर हिंसा मामले में आशीष मिश्रा भी नामजद आरोपी हैं और उन पर किसानों को जीप से कुचलकर मारने का आरोप है।

घटना के चार दिन बाद ये पहली गिरफ्तारी है। इस बात को लेकर किसान नेता से लेकर विपक्षी पार्टियाँ सरकार पर हमलावर हैं। किसान नेता राकेश टिकैत ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर सरकार तय समय सीमा में एक्शन नहीं लेगी तो वे कड़े फैसले लेंगे। वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता वरुण गाँधी ने भी लखीमपुर मामले को लेकर एक वीडियो साझा किया और कहा कि जनमत की आवाज यही है कि जो लोग इस कांड में दोषी हैं उनके खिलाफ बिना किसी झिझक के कार्रवाई हो।

समचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की है। उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी ने एजेंसी को बताया कि इस मामले में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा सहित कई अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

दरअसल, लखीमपुर खीरी से दो बार के सांसद और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ के विरोध में कथित किसानों के विरोध के बाद हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई। किसानों का आरोप है कि केंद्रीय गृह राज्यमंत्री मिश्रा का बेटा जिस गाड़ी में सवार थे, उसी ने किसानों को कुचला, जिसमें चार किसानों की मौत हो गई। वहीं, मिश्रा ने आरोप को खारिज कर दिया।

दुर्गा पूजा में आने वाले थे घर, टिकट हो गया था… इस्लामी आतंकियों ने मार डाला: अकेले कमाने वाले वीरंजन पासवान के घर मातम

जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में आतंकियों की गोली से जान गंवाने वाले बिहार के भागलपुर जिले के सैदपुर गाँव के रहने वाले वीरंजन पासवान का अंतिम संस्कार बुधवार को श्रीनगर में झेलम नदी के किनारे स्थित दूधगंगा घाट पर किया गया। जिला प्रशासन ने उनके शव को हवाई जहाज के जरिए भागलपुर भेजने को कहा था, लेकिन मृतक के परिवार की सहमति के बाद श्रीनगर में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

घटना के बाद श्रीनगर के जिलाधिकारी मोहम्मद एजाज असद ने सहायता स्वरूप वीरंजन पासवान की पत्नी पुतुल देवी के नाम पर सवा लाख रुपए का चेक भी पीड़ित परिवार को सौंपा। पीड़ित को दी गई धनराशि में से एक लाख एसडीआरएफ और 25 हजार रेड क्रॉस सोसायटी की ओर से दिया गया है। श्रीनगर के मेयर जुनैद अजीम मट्टू ने कहा कि पहले उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं थी, लेकिन अब वो श्रीनगर में पीड़ित के परिजनों को सांत्वना देने के लिए जाएँगे।

साभार: दैनिक भास्कर

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, वीरंजन के बड़े बेटे विक्रम ने बताया है कि उसके पिता पहले कोलकाता में मजदूरी करते थे और ढाई साल पहले ही श्रीनगर गए थे। वो वहाँ पर गोलगप्पे का ठेला लगाते थे। विक्रम ने बताया कि वह 6 भाई-बहन है। मृतक की पत्नी पुतुल देवी के मुताबिक, बीते सोमवार को वीरंजन का फोन आया था कि नवरात्रि में वह घर आएँगे। उन्होंने अपना टिकट भी करा लिया था। लेकिन, बाद में उनके भाई ने फोन कर बताया कि आतंकियों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी है। वह अपने घर में इकलौता कमाने वाले थे। परिवार पर 73,000 रुपए का कर्ज भी है। इस हत्या की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट जम्मू-कश्मीर ने ली है। इसे इस्लामिक स्टेट विलाया हिंद के नाम से भी जाना जाता है।

गौरतलब है कि बीते मंगलवार को (5 अक्टूबर 2021) को श्रीनगर में आतंकियों ने तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इनमें से एक वीरंजन पासवान थे। वीरंजन पासवान श्रीनगर के मदीनसाहब लाल बाजार में गोलगप्पे का ठेला लगाते थे। शाम को जब वह घर जा रहे थे उसी दौरान ये घटना हो गई। उन्हें घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्होंने दम तोड़ दिया।

मस्जिद की ‘पवित्रता’ भंग… हुई गाने की शूटिंग: पाकिस्तानी अभिनेत्री सबा कमर की बढ़ी मुश्किलें, अदालत ने तय किए आरोप

भले ही शुरू से अब तक पाकिस्तानी अदाकारा सबा क़मर सफाई पेश करती आ रही हों कि उन्होंने मस्जिद में कोई डांस या संगीत का आयोजन नहीं किया है पर आख़िरकार उनकी मुश्किलों को बढ़ाते हुए पाकिस्तान की एक अदालत ने बुधवार (6 अक्टूबर 2021) को उनके विरुद्ध इसी मामले में आरोप तय कर दिया है। यह मामला पिछले वर्ष अगस्त 2020 का है।

पिछले साल इसी मामले में लाहौर पुलिस ने पाकिस्तान की हिंदी मीडियम अभिनेत्री सबा कमर और पाकिस्तानी गायक बिलाल सईद के खिलाफ लाहौर के पुराने शहर में मौजूद मस्जिद वजीर खान को नापाक करने का दोषी मानते हुए केस दर्ज किया था। इन दोनों पर मस्जिद के अंदर नाचने का आरोप लगा था जिस पर पाकिस्तान के तमाम मज़हबी समूहों ने न सिर्फ कड़ी प्रतिक्रिया दी थी बल्कि दोनों आरोपितों के खिलाफ कड़े एक्शन की माँग की थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आरोप तय करने वाली अदालत के न्यायिक मजिस्ट्रेट जावेरिया भट्टी हैं। अदालत में नियमित रूप से न पेश होने के चलते कुछ समय पूर्व ही सबा क़मर के विरुद्ध अरेस्ट वारंट जारी किया गया था। आरोप तय होने के दौरान दोनों कलाकार अदालत में मौजूद थे जिनके विरुद्ध अभियोजन पक्ष को आगामी 14 अक्टूबर को गवाह पेश करने का आदेश मिला है। अपने पुराने बयान पर कायम सबा कमर ने एक बार फिर कहा कि ”मस्जिद में कोई डांस या संगीत नहीं हुआ और इस मामले में मुझे झूठा फँसाया गया है।’

अगस्त 2020 के इस विवादित प्रकरण में पंजाब प्रांत के मज़हबी मामलों के मंत्री सईद हसन शाह ने बताया था कि मस्जिद में वीडियो बनाने की अनुमति देने वाले निदेशक और सहायक निदेशक को सस्पेंड कर दिया गया था। वीडियो वायरल होने के बाद लाहौर स्तर पर उग्र प्रदर्शन भी हुए थे और अदाकारा सबा कमर को लगातार जान से मार देने की धमकियाँ भी मिलती रहीं।

इसी प्रकरण पर हंगामा करते कट्टरपंथियों को जवाब देते हुए पाकिस्तानी यूट्यूबर और मानवाधिकार कार्यकर्ता आरिफ आजाकिया (Arif Aajakia) ने लिखा था, “सबा क़मर और बिलाल के मस्जिद में गाने और नाचने के बाद इस्लाम खतरे में आ चुका है। आज इन दोनों के पीछे पूरे देश के वो गाज़ी पड़ चुके हैं जो तब एक भी शब्द नहीं बोलते जब मस्जिद और मदरसों में हजारों बच्चों के साथ दुष्कर्म होता है.”

गौरतलब है कि पाकिस्तान में अभिनेत्री सबा कमर पर सिर्फ इसीलिए ईशनिंदा का मुकदमा दायर कर दिया गया क्योंकि उन्होंने मस्जिद में एक वीडियो की शूटिंग की थी। अभिनेत्री सबा कमर और गायक बिलाल सईद सहित कई लोगों के खिलाफ लाहौर का वज़ीर खान मस्जिद की ‘पवित्रता भंग करने’ का आरोप लगाया गया था जिसे अब वहाँ के कोर्ट ने तय कर दिया है। इन दोनों ने मस्जिद के भीतर म्यूजिक वीडियो की शूटिंग की थी। उस समय कोर्ट ने पुलिस को क़ानून के हिसाब से कार्रवाई करने का आदेश भी दे दिया था।

रिपोर्ट के अनुसार, उक्त मस्जिद को पाकिस्तान का एक ऐतिहासिक स्थल माना जाता है और वहाँ गाने की शूटिंग के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। अधिवक्ता सरदार फरहत मंजूर खान ने सबा कमर के खिलाफ मामला दर्ज कराया था, जिस पर एडिशनल डिस्ट्रिक्ट सेशन जज अतिकुर रहमान ने अगस्त 13, 2020 को सुनवाई की। लाहौर में मस्जिद की सुरक्षा व्यवस्था को धता बताने के लिए लोगों ने सबा कमर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया था।

आतंकियों ने सभी शिक्षकों का ID कार्ड देखा… मारा 2 गैर-मुस्लिमों को… क्योंकि 15 अगस्त को इन्हीं दोनों ने बुलाया था बच्चों को

जम्मू-कश्मीर में आतंकी अब हतोत्साहित होकर आम लोगों निशाना बनाने लगे हैं। एक कश्मीरी पंडित सहित तीन लोगों की हत्या के बाद एक बार फिर आतंकियों ने दो लोगों की हत्या कर दी, जिसमें एक हिंदू और एक सिख समुदाय से संबंधित हैं। आतंकियों ने श्रीनगर के ईदगाह इलाके में स्थित एक स्कूल में शिक्षकों को लाइन में खड़े कराकर पहचान करने के बाद दो गैर-मुस्लिम शिक्षकों की हत्या कर दी।

वरिष्ठ पत्रकार आदित्यराज कौल ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के सूत्रों के हवाले से ट्वीट कर बताया कि आतंकियों ने श्रीनगर के सफाकदल हायर सेकेंडरी स्कूल के सभी शिक्षकों को पंक्ति में खड़ा किया, उसके बाद उनके पहचान पत्र और मोबाइल फोन की जाँच की। इसके साथ ही आतंकियों ने उनसे पूछताछ भी की और उनमें से अधिकतर को छोड़ दिया। माना जा रहा है कि जिन शिक्षकों को आतंकियों ने जाने दिया, वे सभी मुस्लिम थे। वहीं, आतंकियों ने सिख समुदाय से संबंध रखने वाली शिक्षिका सतिंदर कौर और हिंदू समुदाय से संबंध रखने वाले शिक्षक दीपक चंद की गोली मारकर हत्या कर दी।

सतिंदर कौर स्कूल की प्रिंसिपल और दीपक कौल शिक्षक थे। मारे गए दोनों शिक्षक अलोचीबाग के रहने वाले थे। इनमें से एक सिख तो दूसरा कश्मीरी पंडित था। रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकी पहले से ही घात लगाए हुए थे और जैसे ही स्कूल खोलने के लिए दोनों शिक्षक वहाँ पहुँचे, आतंकी स्कूल में घुस गए।

वहीं, ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ नाम के एक संगठन की ओर से गुरुवार (7 अक्टूबर 2021) को एक पत्र जारी किया गया, जिसमें कहा गया है कि शहीद गाजी स्क्वैड (टीआरएफ) ने इस ‘टारगेट किलिंग’ को अंजाम दिया है। पत्र में आगे बताया गया है, इन शिक्षकों ने विद्यार्थियों के माता-पिता को प्रताड़ित किया था और उन्हें धमकाया था कि अगर उनके बच्चे 15 अगस्त के उत्सव में शामिल नहीं होते हैं तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इसके साथ ही पत्र में अपने घरों और दुकानों के पास सीसीटीवी लगाने वालों को भी धमकी दी गई कि अगर इसे नहीं हटाया गया तो संबंधित लोगों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

फिलहाल, आतंकियों की तलाश में सुरक्षाबलों ने भी सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। बीते तीन दिनों के भीतर घाटी में पाँच नागरिकों की हत्या हुई है। इसमें से 4 गैर-मुस्लिम हैं। माना जा रहा है कि इस तरह के हमलों का मकसद गैर-मुस्लिमों को डराना है, ताकि कश्मीरी पंडित घाटी में बसने के लिए तैयार ना हों और जो गैर-मुस्लिम घाटी में हैं, वे डरकर भाग जाएँ।

गौरतलब है कि इससे पहले मंगलवार (5 अक्टूबर 2021) को आतंकियों ने अलग-अलग हमलों में तीन आम नागरिकों की हत्या कर दी थी। मारे गए लोगों में से एक कश्मीरी पंडित माखनलाल बिंदरू श्रीनगर के प्रसिद्ध केमिस्ट थे। आतंकियों ने उनके दुकान में घुसकर उन्हें गोली मारी थी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहाँ डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

दूसरी घटना में श्रीनगर के लाल बाजार इलाके में शाम के करीब साढ़े आठ बजे बिहार के गोलगप्पा बेचने वाले व्यक्ति की हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, श्रीनगर के मदीन साहब लालबाजार के पास आतंकियों द्वारा मारे गए शख्स की पहचान वीरेंद्र पासवान के तौर पर हुई है। वे बिहार के भागलपुर के रहने वाले थे।

वहीं तीसरी घटना कश्मीर के बांदीपोरा के शाहगुंड इलाके में हुई थी, जिसमें नायदखाई निवासी मोहम्मद शफी लोन की आतंकियों ने हत्या कर दी थी।

‘BJP ने आखिर दे ही दिया कंगना रनौत को लोकसभा का टिकट, मंडी उपचुनाव में काटा बड़ा नाम’- Fact Check

बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत के बेबाक रवैये और उनका भाजपा की ओर झुकाव देख अक्सर विपक्षी विचारधारा के लोग ये इल्जाम लगाते हैं कि वो आने वाले समय में पार्टी से टिकट चाहती हैं, इसलिए बयानबाजी करती हैं। अभिनेत्री ने उनके बीजेपी से जुड़ने की अटकलों को कई बार खारिज किया है। मगर फिर भी ये बातें बंद नहीं होती। इस बार तो उनके विरोध में प्रचार करने वालों ने मंडी से उन्हें भाजपा प्रत्याशी ही बना डाला और इस संबंध में एक लिस्ट भी जारी कर दी।

सोशल मीडिया पर कंगना के नाम वाली लिस्ट कई जगह शेयर होती देखने को मिली। इसे इतनी सफाई से बनाया गया गया कि इसपे स्टांप भी थी और जरूरी हस्ताक्षर भी थे। लोगों को लगा यही भाजपा प्रत्याशियों की आधिकारिक सूची है। हालाँकि पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ भाजपा ने मंडी संसदीय क्षेत्र में कारगिल हीरो ब्रिगेडियर कुशाल ठाकुर का नाम घोषित किया गया।

सोशल मीडिया पर रिलीज हुई प्रत्याशियों की फेक लिस्ट

प्रदेश में भाजपा मीडिया प्रभारी करण नंदा ने इस प्रकार की सूची को फर्जी कहा है। उनका कहना है कि इस मामले में भाजपा ने संज्ञान लिया है और टिकट आवंटन से जुड़ी फर्जी सूची जारी करने और दुष्प्रचार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। भाजपा लीगल सेल की ओर से इसकी साइबर सेल में शिकायत की गई है। पार्टी के लीगल सेल ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया है। पता लगाया जा रहा है कि संदेश जारी कहाँ से हुआ।

इस संबंध में मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने धर्मशाला में पार्टी की उच्च स्तरीय बैठक में शामिल होकर भी अटकलों पर विराम लगाया था। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि राज्य चुनाव समिति की बैठक में अभिनेत्री का नाम कभी नहीं आया। उन्होंने जोर देकर कहा कि मंडी संसदीय क्षेत्र का टिकट किसी पार्टी कार्यकर्ता को जाएगा, किसी सेलिब्रिटी व्यक्ति को नहीं।

बता दें कि ये पहली दफा नहीं है लोकसभा चुनावों के दौरान कंगना का नाम भाजपा के प्रत्याशी के तौर पर उछाल दिया गया हो। साल 2019 में भी यही कारनाम किया गया था। लेकिन सच्चाई यह थी कि मंडी संसदीय क्षेत्र से रामस्वरूप शर्मा को भाजपा ने आधिकारिक तौर पर टिकट दिया गया था। तब भी भाजपा ने शरारती तत्वों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी।

चर्च जाने या क्रॉस लटकाने से अनुसूचित जाति वाला प्रमाण पत्र खत्म नहीं हो सकता: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास उच्च न्यायालय ने एक फैसले में कहा है कि किसी दलित का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र चर्च जाने और ईसाई मत प्रतीक चिन्ह क्रॉस लटकाने से निरस्त नहीं किया जा सकता। संविधान का हवाला देते हुए ऐसा आदेश देने वाले प्रशासनिक अधिकारियों को अदालत ने टिप्पणी स्वरूप “छोटी सोच” वाला कहा है। यह याचिका पी मुनीस्वरी ने दाखिल की थी जो पेशे से डॉक्टर हैं।

वर्ष 2013 में तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के जिलाधिकारी ने महिला डॉक्टर के SC प्रमाणपत्र को रद्द करते हुए बताया था कि वह ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गई थी जिस आधार पर वह हिन्दू समुदाय के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र योग्य नहीं है। अपने फैसले का आधार प्रशासनिक अधिकारियों ने महिला डॉक्टर की क्लिनिक में किए गए दौरे और उसके बाद हुए जाँच निष्कर्ष को बनाया था जिसमें उनके अनुसार क्लिनिक की दीवार पर एक ‘क्रॉस’ लटका हुआ पाया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के इस फैसले को वर्ष 2016 में पी मुनीस्वरी ने अदालत में याचिका के माध्यम से चुनौती दी जिस पर निर्णय देते हुए मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव बनर्जी और न्यायमूर्ति एम दुरईस्वामी की प्रथम पीठ के अनुसार ईसाई युवक से विवाह करने और अपने बच्चों को अपने पति के धर्म में मान्यता देने वाली महिला का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र प्रशासनिक अधिकारियों के दिए कमजोर तथ्य और तर्क के आधार पर निरस्त नहीं हो सकता।

प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दाखिल हलफनामे पर सवाल उठाते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि अधिकारी ये साबित नहीं कर पाए हैं कि महिला डॉक्टर ने हिन्दू धर्म में अपनी आस्था को खत्म कर दिया है या उसने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया है। न्यायालय के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी कारणवश चर्च जाता है तो इसका मतलब ये भी नहीं है कि उसने अपने मूल धर्म में अपनी आस्था को खत्म कर दिया है।

इस मामले में न्यायाधीशों ने आगे अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आदेश देने वाले अधिकारियों के कार्य और आचरण संकीर्ण मानसिकता को प्रदर्शित करते हैं जो संविधान सम्मत नहीं है। न्यायालय ने मामले से जुड़े जाँचकर्ताओ पर इस प्रकरण में मनमानी करने वाला बताते हुए इसे बड़े स्तर की सोच से देखने के लिए कहा। न्यायालय ने याचिका दाखिल करने वाली मुनीस्वरी को प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश देते हुए उनके विरुद्ध हुई कार्रवाई को अनुमानों के आधार पर बिना किसी ठोस सबूत के होना बताया है।

पी मुनीस्वरी ने इस याचिका में तमिलनाडु सरकार के ट्राइबल वेलफेयर डिपार्टमेंट के सचिव, जिलाधिकारी रामनाथपुरम, जिला रामनाथपुरम के रेवेन्यू ऑफिसर के साथ कामुदी (Kamudhi) तालुका के तहसीलदार को भी पक्षकार बनाया था। याचिकाकर्ता की तरफ से वकील राजेंद्रन और प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से पी थिलक कुमार ने अपने-अपने पक्ष रखे।

यहाँ उल्लेखनीय है कि आंध्र प्रदेश की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 80 प्रतिशत ईसाई धर्मांतरित अनुसूचित जाति से हैं और भूमि / घर के आवंटन, मुफ्त बिजली और ऋण के शासकीय लाभ उठा रहे हैं।

‘मैंने वही कहा जो कुरान में लिखा है’: धर्मांतरण के आरोपी IAS इफ्तिखारुद्दीन ने SIT को सुनाई आयतें, कहा- कुछ भी गलत नहीं किया

उत्तर प्रदेश के कानपुर में धर्म परिवर्तन को प्रोत्साहित करने के मामले में IAS अधिकारी मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन से SIT ने बुधवार को लगभग 7 घंटे तक पूछताछ की। पूछताछ में इफ्तिखारुद्दीन ने माना है कि जो वीडियो सामने आए हैं, वे उन्हीं के हैं। पूछताछ के दौरान उन्होंने SIT को कुरान की आयतें सुनाई और बोले कि उन्होंने वीडियो में जो कहा है, उसमें गलत क्या है। कानपुर के पूर्व मंडलायुक्त इफ्तिखारुद्दीन ने कहा कि उन्होंने वही कहा जो कुरान में लिखा हुआ है। वो इस बात को मानने को तैयार नहीं थे कि उन्होंने कुछ गलत कहा है।

एसआईटी के समक्ष पेश होने के दौरान वे अपनी लिखी हुई तीन किताबें भी लेकर पहुँचे थे। एसआईटी को लगता है कि वीडियो से ज्यादा अपनी लिखी किताबों में इफ्तिखारुद्दीन ने आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया है। इसलिए एसआईटी उनकी किताबों की भी गहन पड़ताल करेगी।

दरअसल, SIT ने बयान लेने के लिए इफ्तिखारुद्दीन को बुलाया था, लेकिन वे नहीं आए थे। उसके बाद मंगलवार (5 अक्टूबर 2021) को उन्होंने एसआइटी को फोन किया और बुधवार को आने का वादा किया। बुधवार को दोपहर करीब दो बजे वह सीबीसीआईडी कार्यालय पहुँचे। सीबीसीआईडी के कार्यालय में एसआईटी के अध्यक्ष व सदस्य ने उनसे पूछताछ की। इसके बाद उन्हें गुरुवार (7 अक्टूबर) को पूछताछ के लिए फिर से बुलाया गया है।

दरअसल, कानपुर के वरिष्ठ कर्मचारी नेता भूपेश अवस्थी ने भी वायरल वीडियो को लेकर सीएम योगी से शिकायत की थी। इसमें एक व्यक्ति कुर्सी पर बैठ कर जमीन पर बैठे कुछ मुस्लिमों को सम्बोधित कर रहा है, जिसे IAS इफ्तिखारुद्दीन बताया जा रहा है। भूपेश अवस्थी ने वीडियो को आपत्तिजनक बताते हुए कहा है कि इसमें धर्मांतरण की बातें हैं।

वायरल वीडियो में एक मौलाना इफ्तिखारुद्दीन के साथ बैठा है और कहता है, “पूरे दुनिया के इंसानों को बताओ इस्लाम को आगे बढ़ाओ। अभी पिछले दिनों पंजाब के एक भाई ने इस्लाम कबूल किया तो मैंने उन्हें दावत नहीं दी थी। मैंने कहा कि इस्लाम कबूल करने की वजह क्या थी, तो उन्होंने कहा कि मेरी बहन की मौत। जब उसे जलाया तो वो कपड़े जल गए और वो निर्वस्त्र हो गई। फिर मुझे लगा मेरी बेटी भी है। कल को उसे भी लोग ऐसे ही देखेंगे। इसीलिए, मुझे इस्लाम से अच्छा कोई मजहब नहीं लगा और मैंने कबूल कर लिया।”

कानपुर के कल्याणपुर स्थित राजकीय उन्नयन बस्ती के पूर्व अध्यक्ष निर्मल कुमार त्यागी ने बताया कि इफ्तिखारुद्दीन ने बस्ती को उजाडऩे की धमकी देकर सैकड़ों परिवारों के धर्मांतरण की कोशिश की थी। उनके मुताबिक, इस बस्ती को अंग्रेजों द्वारा बसाया गया था। वहाँ करीब 600 परिवार हैं और आबादी करीब 5 हजार है। साल 2016 में अक्टूबर में अचानक एक दिन तत्कालीन कमिश्नर इफ्तिखारुद्दीन का काफिला बस्ती पहुँचा और बस्ती वालों को बताया गया कि उन्हें बस्ती खाली करनी होगी, क्योंकि इस जमीन का इस्तेमाल मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए किया जाना है। 

वायरल हुए एक वीडियो में शख्स का कहना था कि आमिर खान और शाहरुख खान भी कमिश्नर साहब के मुरीद हैं। शख्स के अनुसार, आमिर ने अपने बहनोई को भी कानपुर भेजा था ताकि वह कमिश्नर तक उनका सलाम पहुँचा सकें। ये वीडियो एसआईटी के पास भी पहुँच गया है। इसकी फॉरेंसिंक जाँच का फैसला हुआ है। अभी इसकी प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं हुई है।

सीबीसीआइडी के महानिदेशक जीएल मीणा की अध्यक्षता और एडीजी जोन भानु भाष्कर की दो सदस्यीय एसआइटी ने इस मामले में करीब 30 लोगों से पूछताछ की है, जिसमें मंडलायुक्त कार्यालय व आवास के कर्मचारी शामिल हैं। एसआईटी ने इफ्तिखारुद्दीन के करीब 80 विवादित वीडियो जुटाए हैं। इस मामले की जाँच के लिए गठित एसआईटी को सात दिनों के भीतर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था और उम्मीद है कि शुक्रवार (8 अक्टूबर 2021) तक रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।

वहीं, एआईएमआईएम (AIMIM ) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ IAS अधिकारी मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन का समर्थन किया था। ओवैसी ने कहा था, ”IAS को धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया है। उन्हें मुस्लिम होने की वजह से निशाना बनाया गया।”

प्रियंका गाँधी इस साल रखेंगी नवरात्रि का व्रत, कॉन्ग्रेस ने मीडिया को बताया: लोगों ने ‘केरल कॉन्ग्रेस गौहत्या’ की याद दिलाई

कॉन्ग्रेस की महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा इस बार नवरात्रि के व्रत रखेंगी। ये जानकारी गुरुवार (अक्टूबर 7, 2021) को कॉन्ग्रेस पार्टी के हवाले से मीडिया में आई है। एबीपी न्यूज के एडिटर पंकज झा ने बताया कि कॉन्ग्रेस पार्टी की तरफ से इस बार जानकारी दी गई है कि प्रियंका गाँधी नवरात्रि का व्रत कर रही है।

इसके अलावा प्रियंका गाँधी वाड्रा ने खुद भी शारदीय नवरात्रि की सभी को शुभकामनाएँ दी हैं। इसके साथ उन्होंने देवी माता का महा मंत्र भी लिखा है, “या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।”

कॉन्ग्रेस द्वारा मीडिया में इस बात की जानकारी देने पर और मीडिया द्वारा इसका प्रचार किए जाने पर यूजर मीडिया और कॉन्ग्रेस दोनों की खिल्ली उड़ा रहे हैं। आशुतोष झा लिखते हैं, “इस व्रत के दौरान वो निर्जला रहेंगी या फलाहार पर? अगर फलाहार करेंगी तो कौन सा फल खाएँगी, कब-कब खाएँगी, कितना खाएँगी , कटा हुआ खाएँगी या पूरा खाएँगी, कितनी बार चबाएँगी , श्रीमान आपसे निवेदन है कि ये भी जरूर बताइएगा , क्योंकि यही तो न्यूज़ है जो UPSC में पूछा जाएगा।”

एक यूजर ने कहा, “वो दिन जब कॉन्ग्रेस ने बेसहाय गाय को केरल में सिर्फ इसलिए काटा था क्योंकि उन्हें भाजपा का विरोध करना था उस दिन मेरा आखिरी दिन था कि मैंने कॉन्ग्रेस को समर्थन दिया।”

रौशन नारायण लिखते हैं, “कोई नवरात्रि का व्रत करे तो इसकी भी जानकारी ट्वीट किया जाता है और हमारे आदरणीय पत्रकार इसका भी उल्लेख करते है।”

देवेश उपाध्याय ये जानकारी पढ़कर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहते हैं, “तो क्या हम लोग नाचें पंकज झा। यही न्यूज है आपकी रिपोर्टर के तौर पर कि कौन व्रत रखता है कौन शौच जाता है कौन कब सोता है। शर्म आनी चाहिए तुम्हें अपने पर और तुम्हारी जैसी पत्रकारिता पर।”

आलोक लिखते हैं, “ये तो अजूबा हो गया! इस देश में पहली बार किसी ने नवरात्रि का व्रत रखा है। घर पहुँचते में मुर्गी की टांग चबाई जाएगी या पोर्क धांसा जाएगा पास्ता के साथ। गजब लीक, ग़ज़ब की ब्रेकिंग!”

एक तरह से देखा जाए तो यूजर की प्रतिक्रिया गलत नहीं हैं क्योंकि ये वाकई हैरान करने वाला है कि कोई व्रत रखता है तो उसे मीडिया में प्रसारित कर दिया जाता है।

चुनावों से पहले हिंदू बन रहे राहुल-प्रियंका, बाकी राज्यों में कैसा हाल?

गौरतलब है कि यूपी चुनाव नजदीक आते-आते राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी में सनातन संस्कृति के प्रति आस्था बढ़ती देखी गई है। पिछले दिनों राहुल गाँधी वैष्णो देवी चले गए थे। इसी तरह राजनीति में सक्रिय होने के बाद से प्रियंका गाँधी भी कभी गंगा तट की सैर तो कभी पूजा अर्चना करते दिखती हैं। जबकि केरल जैसे राज्य में उनकी सत्ता के बावजूद हिंदुओं की भावनाओं की कद्र नहीं होती और खुलेआम सड़कों पर गाय के मीट से जश्न मनाया जाता है।

इसी प्रकार असम में देखें तो हिंदूविरोधी व कट्टर बयानबाजी के लिए पहचाने जाने वाले बदरुद्दीन अजमल से भी पिछले चुनावों में पार्टी ने गठबंधन किया था। बंगाल में उन्हें मौलवी अब्बास सिद्दीकी की इंडियन सेकुलर फ्रंट के साथ हाथ मिलाया था। लेकिन, इस समय बात चाहे सनातन परिधान धारण करने की हो या फिर माथे पर तिलक लगाने, जनेऊ पहनने और आरती-पूजा करने की…राहुल-प्रियंका सब करते दिखते हैं और साथ ही साथ उनकी पार्टी समुदाय विशेष के बंधुओं को रिझाने के लिए मस्जिद के सामने मेनिफेस्टो भी देने लगी है। इस दोहरे चरित्र पर कई बार सवाल भी उठा है कि आखिर मस्जिद-मजार जाने वाले कैसे अलग रूप धारण कर बैठे हैं। इसके अतिरिक्त गाँधी परिवार के नकली ‘हिंदू’ होने को लेकर भी जगह-जगह बातें होती रहती हैं।

भारत की पहली महिला विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप के फाइनल में… अंशु मलिक ने रचा इतिहास

नॉर्वे के ओस्लो में चल रही विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप में भारत की महिला पहलवान अंशु मलिक ने इतिहास रचा है। अंशु मलिक पहली भारतीय महिला पहलवान हैं, जो इस प्रतिष्ठित चैम्पियनशिप के फाइनल में पहुँच पाई हैं। 57 किलोग्राम वर्ग की 19 वर्षीया पहलवान अंशु मलिक ने यह उपलब्धि यूक्रेन की पहलवान और जूनियर यूरोपीय चैम्पियन सोलोमिया विंक को 11-0 से हराकर हासिल की हैं।

फाइनल में पहुँचने के संघर्ष में अंशु मलिक ने प्री क्वार्टर फाइनल में कजाखस्तान की निलुफर रेमोवा को एकतरफा मुकाबले में परास्त किया था। उसके बाद क्वार्टर फाइनल में अंशु ने मंगोलिया की देवाचिमेग एर्खेमबायर को 5-1 से हराया था।

यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने भी अंशु मलिक की इस उपबल्धि पर उनको बधाई देते हुए ट्वीट किया है –

विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप में भारतीय महिला पहलवान

इससे पहले कुल चार भारतीय महिला पहलवान विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप में पदक जीत पाईं हैं। इनमें वर्ष 2012 में गीता फोगट, वर्ष 2012 में बबीता फोगाट, वर्ष 2018 में पूजा ढांडा और वर्ष 2019 में विनेश फोगाट हैं। लेकिन ये सभी फाइनल से पहले हार गई थीं। इन सभी को कांस्य पदक प्राप्त हुआ था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार महिला और पुरुष वर्ग मिला कर अंशु मलिक विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप के फाइनल में पहुँचने वाली कुल छठी भारतीय हैं। इस से पहले वर्ष 1967 में विशम्बर सिंह, वर्ष 2010 में पुरुष वर्ग में पहलवान सुशील कुमार, वर्ष 2013 में अमित दहिया, 2018 में बजरंग पुनिया और वर्ष 2019 में दीपक पुनिया यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं।

इसी चैम्पियनशिप में एक अन्य भारतीय महिला पहलवान सरिता मोर को सेमीफाइनल में चार बार की चैंपियन बुल्गारियाई पहलवान बिलयाना डुडोवा के खिलाफ मैच में 0-3 से हार का सामना करना पड़ा है। अब सरिता अगला मैच कांस्य पदक के लिए खेलेंगी। 

आपको बता दें कि टोक्यो ओलम्पिक में भारतीय टीम का हिस्सा रहीं अंशु मलिक अपने पहले ही मुकाबले को हार गईं थीं। जिस स्तर की वो खिलाड़ी हैं, उनसे विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद सबको थी।

इंडियन क्रिकेट टीम पर चढ़ने की बात कर रहा था Pak क्रिकेटर, उसी के साथी खिलाड़ी ने लगा दी क्लास

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर अब्दुल रज्जाक ने भारतीय क्रिकेट टीम को लेकर एक हास्यास्पद बयान दिया है। उनका कहना है कि भारत के पास अच्छे खिलाड़ी नहीं है, इसलिए भारत उनका मुकाबला नहीं कर सकता। रज्जाक के इस बयान के बाद पूरा सोशल मीडिया उनकी खिल्ली उड़ा रहा है। मुनफ पटेल जैसे क्रिकेटर उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। यहाँ तक उनके अपने साथी खिलाड़ी दानिश कनेरिया ने भी उनको नहीं बख्शा है।

एआरवाई न्यूज से बातचीत में अब्दुल रज्जाक ने कहा था, “मैं नहीं समझता भारत पाकिस्तान का मुकाबला कर सकता है, पाकिस्तान के पास जिस तरह की प्रतिभा है वह पूरी तरह से अलग है और मुझे नहीं लगता कि यह क्रिकेट के लिए अच्छी बात है कि भारत और पाकिस्तान के बीच मैच नहीं हो रहे हैं। यह एक रोमांचक संभावना हुआ करती थी जो खिलाड़ियों को यह दिखाने का मौका देती थी कि वे कितना दबाव झेल सकते हैं, लेकिन यह खत्म हो गया है। मुझे लगता है कि अगर यह चलता रहता तो लोगों को पता चल जाता कि पाकिस्तान के पास जिस तरह की प्रतिभा है वह भारत में नहीं है।”

इसी बयान पर दानिश कनेरिया ने वीडियो बनाई और कहा, “पाकिस्तान की बल्लेबाजी और गेंदबाजी में स्थिरता नहीं है। रज्जाक का कहना है कि कोहली और रोहित को आउट करें और इस भारतीय टीम पर पकड़ पाना आसान होगा। बकवास, आप इस भारतीय टीम को कैसे पकड़ेंगे? पाकिस्तान को तो टीम बनाने में ही दिक्कतें आ रही हैं। इंग्लैंड की बी टीम ने हमें हराया। चयन गड़बड़ दिखता है। अब्दुल रज्जाक का यह बहुत ही घटिया बयान है।”

वह आगे कहते हैं, “अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्रिकेटर से इसकी उम्मीद नहीं थी, जिसका कद पाकिस्तान में इतना ऊँचा है। पाकिस्तान पर भारत का दबदबा है। भारत हर क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। उनके पास सूर्यकुमार यादव, इशान किशन, ऋषभ पंत, हार्दिक पांड्या आदि जैसे खिलाड़ी हैं। आप उन्हें कैसे आउट करेंगे?”

कनेरिया ने रज्जाक को उनके पुराने बयान के लिए भी लताड़ा था जहाँ उन्होंने जसप्रीत बुमराह को बेबी बॉलर कहा था। कनेरिया ने कहा कि भारत का ये तेज गेंदबाद सबसे बेहतरीन योर्कर बॉलर है, जिसे उन्होंने विश्व क्रिकेट जगत में वसीम अकरम और वकार यूनिस के बाद देखा है।

कनेरिया ने कहा, “इससे पहले भी, रज्जाक ने बुमराह पर टिप्पणी की थी। वसीम अकरम और वकार यूनिस के बाद, मैंने कभी किसी को बुमराह की तरह परफेक्ट यॉर्कर फेंकते नहीं देखा। पाकिस्तान में कोई बेहतर गेंदबाज पैदा नहीं हुआ जो बुमराह की तरह यॉर्कर डालता है। उसकी गेंदबाजी उत्कृष्ट है। कोई गेंदबाज पाकिस्तान से बुमराह के करीब भी नहीं आता है जो उसे टक्कर दे सकें।”

पाकिस्तानी पूर्व क्रिकेटर अब्दुल रज्जाक को भारतीय प्लेयर मुनफ पटेल ने भी लताड़ा है। उन्होंने रज्जाक के बयान को शेयर करते हुए कहा, “अब क्या बोले इसको कि जितने शतक कोहली के हैं उतने उनकी पूरी टीम के नहीं हैं, कहाँ दिमाग चलता है इनका।”