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‘जो BJP नेता मरे वो ‘हत्यारे’ थे’: लखीमपुर खीरी में कॉन्ग्रेस ने प्रियंका गाँधी के स्वागत को कहा ‘अच्छा साइन’

लखीमपुर खीरी हिंसा में मारे गए 8 लोगों में 3 भारतीय जनता पार्टी के नेता व कार्यकर्ता भी हैं। कॉन्ग्रेस इन्हें हत्यारा कहकर बुला रही है। नेशनल टीवी पर एक तरफ जहाँ साफ कहा जा रहा है कि हिंसा में जो बीजेपी नेता मरे उनसे संवेदनाएँ नहीं रखी जानी चाहिए। वहीं दूसरी ओर मृतकों के परिजनों की हितैषी बन लखीमपुर खीरी पहुँची प्रियंका गाँधी को गाड़ी में उनके अन्य साथी समझा रहे हैं कि जो भीड़ उनका अभिवादन कर रही है वो कॉन्ग्रेस के लिए अच्छा साइन है।

‘भाजपा कार्यकर्ता अपराधी थे, उनसे कोई संवेदना नहीं’

टाइम्स नाऊ पर कॉन्ग्रेस नेता कमरू जज़मान चौधरी ने होस्ट पद्मजा जोशी से कहा लखीमपुर खीरी में मारे गए बीजेपी कार्यकर्ता अपराधी थे और वह न तो कोई संवेदना के हकदार हैं और न ही किसी मुआवजे के। नेशनल टीवी पर भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए कही गई ये बातें कॉन्ग्रेस नेता की ओर से उस समय आई हैं जब श्याम सुंदर निषाद की लिंचिंग की वीडियो सोशल मीडिया पर हर जगह वायरल है। 

कमरू चौधरी अपनी ये बात उस समय कहते हैं जब एक ओर उनकी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व पीड़ित परिवारों का दुख बाँटकर उसकी तस्वीर साझा कर रहा होता है। शो में होस्ट द्वारा सवाल किया जाता है कि जिन लोगों को मुआवजा मिला वो अच्छी बात है उनके परिवार को जरूरत थी, लेकिन उनका क्या जिन्हें नहीं दिया गया, क्या उनके परिवार को मुआवजे की जरूरत नहीं है। इस पर कमरू चौधरी होस्ट पर इल्जाम लगाते हैं कि वो आखिर हत्यारों से इतनी संवेदना क्यों रखी रही हैं।

कमरू कहते हैं, “मैडम मैं एक बात नहीं समझ पा रहा, क्या आप उन हत्यारों को जस्टिफाई कर रही हैं जिन्होंने मासूम किसानों को अपनी गाड़ी से कुचल डाला। आप चाहती हैं मैं इस मुद्दे पर महात्मा गाँधी बन जाऊँ।”  

एंकर जोशी द्वारा कमरू को उनके शब्दों पर गौर करवाए जाने के बाद कॉन्ग्रेस नेता पूछते हैं कि अगर वो उन्हें हत्यारा न कहें तो क्या कहें, उनका फूलों से स्वागत करें, कमल के फूल की माला उन्हें चढ़ाएँ। होस्ट पूछती हैं कि आप मुख्य न्यायाधीश हैं जो बिन जाँच हुए उन्हें हत्यारा कह रहे हैं। कमरू फिर दोहराते हैं, ” (भले ही) उनके परिवारों को सपोर्ट की जरूरत हो, लेकिन वो अपराधी थे जिन्हें बीजेपी ने पोसा था। वह लोग मुझसे या इस देश के आम जन से बिलकुल भी संवेदना के हकदार नहीं हैं।”

उल्लेखनीय है कि एक ओर कॉन्ग्रेस नेता ने ऑन टीवी आकर भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या को जस्टिफाई करने का प्रयास किया। वहीं दूसरी ओर प्रियंका गाँधी और राहुल गाँधी लखीमपुर खीरी में मृतकों के परिजनों से मिलने गए। कॉन्ग्रेस के अलग-अलग चेहरों से अंजान लखीमपुर खीरी से प्रियंका की वापसी में भारी भीड़ ने उन्हें अपना हमदर्द मानकर उनका अभिवादन किया। जिसकी एक वीडियो सोशल मीडिया पर आई। इस वीडियो में प्रियंका गाँधी भी गाड़ी से हाथ हिलाते नजर आईं। दर्शकों के लिए यह एक मार्मिक दृश्य हो सकता था, लेकिन तभी पीछे से आवाज आई कि ‘अच्छे साइन ये।’ 

भाजपा के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी के अनुसार ये आवाज चन्नी की थी। उन्होंने वीडियो को साझा करते हुए लिखा, “देखिए, घंटों के सियासी ड्रामे के बाद लखीमपुर खीरी के रास्ते पर मातम मनाया जा रहा है ये ! पीछे डिक्की में बैठे चन्नी जी बता भी रहे हैं कि ‘पूरा अच्छा साइन है ये।’

ईश्वर के स्त्री रूप को समर्पित नवरात्रि: दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती स्त्री-शक्ति के तीन आयाम, जानिए क्या है इसका आध्यात्मिक पक्ष

शारदीय नवरात्रि यानि देवी माँ की उपासना का महापर्व इस वर्ष 2021 में 07 अक्टूबर दिन गुरुवार से चित्रा नक्षत्र, वैधृति योग में प्रारम्भ हो रहा है। यह नवरात्रि प्रकृति की मौलिक शक्ति की आराधना के साथ जन-जन में शक्ति एवं ऊर्जा का संचार करने वाला पवित्र पक्ष है। शक्ति के नौ स्वरूपों का प्रतीक शारदीय नवरात्रि दूसरी ओर वर्षा ऋतु का गमन एवं शरद ऋतु का आगमन होने से यह स्वास्थ्य की दृष्टि से भी संक्रमण काल होता है।

सनातन धर्म में इस पर्व को विशेष महत्व दिया गया है। आगे बढ़ने से पहले यदि शास्त्रीय और ज्योतिषीय गणना को ध्यान में रखकर बात की जाए तो पितृ पक्ष के अंतिम दिन यानी सर्व पितृ अमावस्या के अगले दिन से शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ होता है। हिन्दी पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शक्ति स्वरूपा माँ दुर्गा की आराधना का महापर्व नवरात्रि शुरु होती है। इस साल दो तिथियाँ एक साथ पड़ने की वजह से नवरात्रि आठ दिन का ही है। इस तरह से 7 अक्टूबर से शुरू होकर दुर्गा माँ की आराधना का ये पावन पर्व 14 अक्टूबर को महानवमी को समाप्त होगा।

शक्ति के नौ स्वरुप

नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ स्वरुपों माँ शैलपुत्री, माँ ब्रह्मचारिणी, माँ चंद्रघंटा, माँ कुष्मांडा, माँ स्कंदमाता, माँ कात्यायनी, माँ कालरात्रि, माँ महागौरी और माँ सिद्धिदात्री की पूजा क्रमश: की जाती है।

“शरदकाले महापूजा क्रियते या च वार्षिकी
सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धनधान्य सुतान्वित:।
मनुष्यो मतप्रसादेन भविषयति:न संशय:।।”

श्री दुर्गा सप्तशती में स्वयं भगवती माँ दुर्गा ने शारदीय नवरात्र के बारे में कहा है- “जो शरद काल की नवरात्रि में मेरी पूजा-आराधना तथा मेरे तीनों चरित्र (जिसका जिक्र आगे है) का श्रद्धा पूर्वक पाठ करता है एवं नवरात्रि पर्यंत व्रत रहते हुए तप करता है, वह समस्त बाधाओं से मुक्त होकर धन-धान्य से समपन्न हो यश का भागीदार बन जाता है, इसमें किंचित संशय नहीं है।

आइए आज नवरात्रि के प्रथम दिवस पर हम देवी के नौ स्वरूपों की बात न करके इसके महात्म्य, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पक्ष में छिपे प्रतीकों को समझते हैं। हमारी पीढ़ी को इसे समझना इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि विभिन्न कारणों से हम अपनी सनातन संस्कृति में रचे-बसे त्योहारों और उनकी महत्ता को भूलकर चमक-धमक या बाह्य आडम्बरों में उलझकर सब खोते जा रहे हैं।

आगे बढ़ने से पहले आपको देवी की एकलय की प्रतिमा की याद दिलाना चाहूँगा। अभी बंगाल और कुछ जगहों को छोड़कर ज़्यादातर जगहों पर अलग-अलग सभी स्वरुप आने लगे हैं। मुख्यतः यह त्योहार स्त्री के सृजन पक्ष का है। सृजन से पहले विनाश या संहार भी आता है। माँ दुर्गा का महिषासुर मर्दिनी स्वरुप वही है साथ में होती हैं माँ लक्ष्मी और देवी सरस्वती। इसके अलावा आप प्रतिमाओं में भगवान गणेश और कार्तिकेय भी देखते हैं। ये कैसे जुड़ें इन प्रतीकों के संयोजन के पीछे क्या योजना रही इस पार बात अगले लेख में, अभी बात करते हैं देवी के सृजनात्मक स्वरुप की।

भगवान गणेश, देवी सरस्वती , माँ दुर्गा, लक्ष्मी और कार्तिकेय

नवरात्रि अर्थात स्त्री शक्ति की सृजनशीलता का पर्व, पारम्परिक रूप से देवी की पूजा करने वाली संस्कृतियाँ इस बात से पूरी तरह अवगत थीं कि अस्तित्व में बहुत कुछ ऐसा है, जिसे कभी समझा नहीं जा सकता। आप उसका आनंद ले सकते हैं, उसकी सुंदरता का उत्सव मना सकते हैं, मगर कभी उसे समझ नहीं सकते। कहा जाता है कि जीवन एक रहस्य है, ये रहस्य इसलिए भी है कि हमें परिणाम तो दिखता है लेकिन कारण लुप्त है। शायद जीवन हमेशा रहस्य ही रहे, जब तक हम खुद इस खोज के साधक न हो। सनातन परंपरा सदैव धर्म और अध्यात्म की इसी सतत खोज की परम्परा का वाहक है।

आगे और गहराई में उतरने से पहले आपको बता दूँ कि एक वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ महीनों में चार बार नवरात्रि आती है, लेकिन चैत्र और आश्विन माह की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक चलने वाले नवरात्र ही ज्यादा लोकप्रिय हैं। यह समय, आदि देवी माँ भगवती की आराधना और स्त्री शक्ति की सृजनशीलता का उत्सव मनाने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। नवरात्रि वह समय है, जब दोनों ऋतुओं का मिलन होता है। इस संधि काल मे ब्रह्मांड से असीम शक्तियाँ सतत ऊर्जा के रूप में मानवता का कल्याण करती हैं।

नवरात्रि क्यों है आदि सनातन परम्परा का वाहक

आइए इन सब पर बातें करते हैं। पहली बात सनातन परम्परा में जीवन का रहस्य यही है कि गंभीर न होते हुए भी पूरी तरह शामिल होना, जीवन के हर क्षण को उत्सव बनाना। तभी हम आध्यात्म की उन ऊँचाइयों तक पहुँच पाएँगे जहाँ तक मनुष्य रूप में पहुँचने की उच्चतम सीमा है।

नवरात्रि का उत्सव ईश्वर के स्त्री रूप को समर्पित है। दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती स्त्री-शक्ति यानी स्त्रैण के तीन आयामों की प्रतीक हैं। वे धरती, सूर्य और चंद्रमा या तमस (जड़ता), रजस (सक्रियता या जोश) और सत्व (परे जाना, ज्ञान, शुद्धता) की प्रतीक हैं।

तमस का अर्थ है जड़ता। रजस का मतलब है सक्रियता और जोश। सत्व एक तरह से सीमाओं को तोड़कर विलीन होना है, पिघलकर समा जाना है। इन तीन खगोलीय पिंडों से हमारे शरीर की रचना का बहुत गहरा संबंध है- पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा। इन तीन गुणों को इन तीन पिंडों से भी जोड़ कर देखा जाता है। धरती माँ को तमस माना गया है, सूर्य रजस है और चंद्रमा सत्व।

नवरात्रि के पहले तीन दिन तमस से जुड़े होते हैं। इसके बाद के दिन रजस से, और नवरात्रि के अंतिम दिन सत्व से जुड़े होते हैं। इन मूल गुणों के अनुसार नवरात्रि के नौ दिनों का वर्गीकरण किया जाता है। पहले तीन दिन दुर्गा को, अगले तीन दिन लक्ष्मी को और अंतिम तीन दिन सरस्वती को समर्पित हैं। दसवाँ दिन, विजया दशमी, जीवन के इन तीनों पहलुओं पर विजय का प्रतीक है।

जो लोग शक्ति, अमरता, क्षमता या सृजन की इच्छा रखते हैं, वे स्त्रैण के उन रूपों की आराधना करते हैं, जिन्हें तमस कहा जाता है, जैसे काली या धरती माँ अर्थात सृजन का आदिस्रोत प्रकृति। इस पर और प्रकाश डालते हुए सद्गुरु जग्गी वासुदेव कहते हैं, जो लोग धन-दौलत, जोश, उत्साह, जीवन और भौतिक दुनिया की तमाम दूसरी सौगातों की इच्छा करते हैं, वे स्वाभाविक रूप से स्त्रैण के उस रूप की ओर आकर्षित होते हैं, जिसे लक्ष्मी या सूर्य के रूप में जाना जाता है। जो लोग ज्ञान, बोध चाहते हैं और नश्वर शरीर की सीमाओं के पार जाना चाहते हैं, वे स्त्रैण के सत्व रूप की आराधना करते हैं। सरस्वती या चंद्रमा उस शक्ति के प्रतीक हैं।

तमस धरती की प्रकृति है जो सबको जन्म देने वाली है। हम जो समय गर्भ में बिताते हैं, वह समय तामसी प्रकृति का होता है। उस समय हम लगभग निष्क्रिय स्थिति में होते हुए भी विकसित हो रहे होते हैं। इसलिए तमस धरती और मनुष्यता के जन्म की प्रकृति है। हम सब सृजन के इस आयाम का अनुभव कर सकते हैं। हमारा पूरा जीवन इस पृथ्वी की देन है।

सनातन में पृथ्वी के इस आयाम से एकाकार होने को महत्वपूर्ण साधना के रूप में विकसित किया गया है। वैसे भी हम सब पृथ्वी के एक अंश हैं। प्रकृति जब चाहती है, एक शरीर के रूप में अपने गर्भ में सृजन कर हमें नया जीवन दे देती है और जब वह चाहती है, उस शरीर को वापस खाक कर अपने भीतर समा लेती है।

शक्ति का महिषासुरमर्दिनि स्वरुप और दूसरे में है त्रिदेवी स्वरुप

सद्गुरु कहते हैं, नवरात्री के अवसर पर इन तीनों आयामों में आप खुद को जिस तरह से शामिल करेंगे, वह आपके जीवन को एक नई दिशा देगा। अगर आप खुद को तमस की ओर ले जाते हैं, तो आप एक तरीके से शक्तिशाली होंगे। अगर आप रजस पर ध्यान देते हैं, तो आप दूसरी तरह से शक्तिशाली होंगे। लेकिन अगर आप सत्व की ओर जाते हैं, तो आप बिल्कुल अलग रूप में शक्तिशाली होंगे। लेकिन यदि आप इन सब के परे चले जाते हैं, तो बात शक्ति की नहीं रह जाएगी, फिर आप मोक्ष की ओर बढ़ेंगे।

कहते हैं, जो पूर्ण जड़ता है, वह एक सक्रिय रजस बन सकता है। रजस पुन: जड़ता बन जाता है। यह परे भी जा सकता है और वापस उसी तमस की ओर भी जा सकता है। दुर्गा से लक्ष्मी, लक्ष्मी से दुर्गा, सरस्वती कभी नहीं हो पाई। इसका मतलब है कि हम जीवन और मृत्यु के चक्र में फँसे हैं। उनसे परे जाना अभी बाकी है।

यह सिर्फ प्रतीकात्मक ही नहीं है, बल्कि ऊर्जा के स्तर पर भी सत्य है। इंसान के रूप में में हम धरती से निकलते हैं और सक्रिय होते हैं। कुछ समय बाद, हम फिर से जड़ता की स्थिति में चले जाते हैं। सिर्फ व्यक्ति के रूप में हमारे साथ ऐसा नहीं होता, बल्कि तारामंडलों और पूरे ब्रह्मांड के साथ ऐसा हो रहा है। ब्रह्मांड जड़ता की स्थिति से निकल कर सक्रिय होता है और फिर जड़ता की अवस्था में चला जाता है।

ध्यान रहे, बस हमारे अंदर इस चक्र को तोड़ने की क्षमता है। इंसान के जीवन और खुशहाली के लिए देवी के पहले दो आयामों की जरूरत होती है। तीसरा परे जाने की इच्छा है। कहते हैं, अगर आपको सरस्वती को अपने भीतर उतारना है, तो आपको प्रयास करना होगा। वरना आप उन तक कभी नहीं पहुँच सकते।

आसुरी शक्तियों की संहारक माँ भगवती नौ दुर्गा – देवी अपने 9 स्वरूपों के साथ

सनातन परम्परा में ही स्त्री शक्ति को सर्वाधिक महत्त्व हासिल है। स्त्री शक्ति की पूजा धरती पर पूजा का सबसे प्राचीन रूप है। स्त्री सृजन का पर्याय है। सिर्फ भारत में ही नहीं, अपितु यूरोप, अरेबिया और अफ्रीका के बड़े हिस्सों में भी कभी स्त्री शक्ति की पूजा होती थी। वहाँ देवियाँ होती थीं। दुर्भाग्यवश, पश्चिम में मूर्तिपूजा और एक से ज्यादा देवों की पूजा के सभी नामोनिशान मिटाने के लिए देवी मंदिरों को मिट्टी में मिला दिया गया। दुनिया के बाकी हिस्सों में भी यही हुआ।

धर्म न्यायालयों और धर्मयुद्धों का मुख्य मकसद मूर्ति पूजा की संस्कृति को मिटाना था। मूर्तिपूजा का मतलब देवी पूजा ही था। जो लोग देवी पूजा करते थे, उन्हें कुछ हद तक तंत्र-मंत्र विद्या में महारत हासिल थी। कामरूप कामाख्या मंदिर आज भी अपने तंत्र साधना के लिए ही विख्यात है। चूँकि, वे तंत्र-मंत्र जानते थे, इसलिए स्वाभाविक था कि आम लोग उनके तरीके समझ नहीं पाते थे। कहते हैं, उन संस्कृतियों में हमेशा से यह समझ थी कि अस्तित्व में ऐसा बहुत कुछ है, जिसे साधारण लोग आसानी से नहीं समझ सकते और इसमें कोई बुराई नहीं है। कोई भी उसे समझे बिना भी उसके लाभ उठा सकते हैं, जो हर किसी चीज के लिए हमेशा से सच रहा है।

मगर जब एकेश्वरवादी मज़हब यहुदी, इसाई और इस्लाम अपना दायरा फैलाने लगे, तो उन्होंने इसे एक संगठित तरीके से उखाड़ना शुरू कर दिया। उन्होंने सभी देवी मंदिरों को तोड़ कर मिट्टी में मिला दिया।

दुनिया में हर कहीं पूजा का सबसे बुनियादी रूप देवी पूजा या कहें स्त्री शक्ति की पूजा ही रही है। भारत इकलौती ऐसी संस्कृति है जिसने अब भी उसे सँभाल कर रखा है। सनातन परम्परा ने स्त्री शक्ति की पूजा को जारी रखा है। इसी संस्कृति ने हमें अपनी जरूरतों के मुताबिक अपनी देवियाँ खुद गढ़ने की आजादी भी दी। प्राण प्रतिष्ठा के विज्ञान ने हर गाँव को अपनी विशिष्ट स्थानीय जरूरतों के अनुसार अपना मंदिर बनाने में समर्थ बनाया। अगम शास्त्र में इसकी पूरी विधि है।

दूसरी ओर कई वजहों से धर्म को ज़्यादा संजीदगी से सहेजा है तो वह भारत का दक्षिण का हिस्सा है। दक्षिण भारत के हर गाँव में आपको आज भी अम्मन (अम्मा) या देवी के मंदिर मिल जाएँगे। इसके अलावा शिव की नगरी काशी, विंध्याचल से लेकर शायद ही भारत का ऐसा कोई क्षेत्र हो जहाँ देवी आराध्य न हो।

बेशक, आजकल पुरुष शक्ति समाज में सिर्फ इसलिए महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि हमने अपने जीवन में गुजर-बसर की प्रक्रिया को सबसे अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। आज सौंदर्य या नृत्य-संगीत, प्रेम, दिव्यता या ध्यान की बजाय अर्थशास्त्र हमारे जीवन की प्रेरक शक्ति बन गया है। जब अर्थशास्त्र हावी हो जाता है और जीवन के गूढ़ तथा सूक्ष्म पहलुओं को अनदेखा कर दिया जाता है, तो पौरुष कुदरती तौर पर प्रभावी हो जाता है। अगर स्त्री शक्ति नष्ट हो गई, तो जीवन की सभी करुणामयी, सौम्य, सहज और पोषणकारी प्रवृत्तियाँ लुप्त हो जाएँगी। (हालाँकि, स्त्रीत्व को इन चार शब्दों में समेटा नहीं जा सकता।) जीवन की अग्नि हमेशा के लिए नष्ट हो जाएगी। यह बहुत बड़ा नुकसान है, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा।

आज जब हम अपनी परम्परा और संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं तो ऐसे समय में उसके संरक्षण और संवहन की जिम्मेदारी उन सब पर है जिनकी रगों में आज भी सनातन संस्कृति रक्त बनकर बह रही है। आज जब हम आधुनिक वामपंथी शिक्षा की वजह से नकार की जड़ता के शिकार हो चुके हैं। इसी शिक्षा का एक दुर्भाग्यपूर्ण नतीजा यह भी है कि हम अपनी तर्कशक्ति पर खरा न उतरने वाली हर चीज को नष्ट कर देना चाहते हैं। जबकि हमारी तर्क की सीमा सनातन की सीमा नहीं बल्कि हमारी खुद के अज्ञान की सीमा है।

लखीमपुर खीरी हिंसा: कॉन्ग्रेसी, लिबरल और मीडिया गिरोह ने शेयर किया क्रॉप वीडियो, ‘फॉर्च्यूनर में कौन था’ को लेकर फैलाया झूठ

लखीमपुर खीरी हिंसा की जाँच के साथ इस पर राजनीति शुरू हो गई है। इसी बीच सोशल वीडियो पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक पुलिस अधिकारी कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद के भतीजे के एक सहयोगी से पूछताछ करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

वायरल वीडियो में पुलिस अधिकारी घायल व्यक्ति से उसका नाम, पता और अन्य जानकारी पूछ रहा है। आदमी ने खुलासा किया कि वह चारबाग लखनऊ का रहने वाला है और कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व सांसद अखिलेश दास के भतीजे अंकित दास के साथ काम करता है।

अधिकारी ने फिर पूछा कि हिंसा के दिन वह किसके साथ और कैसे जा रहा था। इस पर, उस व्यक्ति ने खुलासा किया कि वह अंकित दास, तीन अन्य लोगों और एक ड्राइवर के साथ काले रंग की फॉर्च्यूनर (एसयूवी) कार में था।

पुलिस ने पूछा कि क्या अंकित दास भी मौके पर थे और क्या यह कार उनकी थी। उस व्यक्ति ने हाँ में इसका जवाब दिया। अधिकारी ने तब एक अन्य कार के बारे में पूछताछ की जो काफिले में आगे थी। पुलिस ने पूछा, “आगे किसकी गाड़ी थी? उस आदमी ने जवाब दिया, “वो मुझे नहीं पता।” पुलिस अधिकारी ने उस व्यक्ति को इसके बारे में खुलकर बताने को कहा कि वो (कार) भी तो साथ में होगी?

उस व्यक्ति ने बताया, “आगे थार थी, जिससे लोग टकरा गए थे और पीछे फॉर्च्यूनर थी।” थार वही कार थी, जिस पर किसानों की भीड़ ने पत्थरों और लाठियों से हमला किया था, जिससे उसके शीशे टूट गए थे। इसके बाद ड्राइवर ने अपना बैलेंस खो दिया और भीड़ को कुचल दिया। बाद में यह भी सामने आया कि कार के चालक को भी किसानों की भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला।”

पुलिस ने थार के बारे में कुछ और सवाल किए। जिसमें उस व्यक्ति ने कहा कि उसे नहीं पता कि कार में कौन था। यह ‘भैया’ का था और वह व्यक्ति भी उसके साथ था। हालाँकि, अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है कि वह व्यक्ति ‘भैया’ किसे कह रहा था। रिपोर्ट्स की मानें तो पुलिस अंकित दास की तलाश में जुट गई है।

वामपंथियों ने भ्रामक जानकारी साझा की

इस बीच दुष्प्रचार करते हुए वामपंथी लोगों द्वारा इस पूछताछ का एक क्रॉप वीडियो साझा करके सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। द वायर की पत्रकार रोहिणी सिंह ने अपने ट्विटर अकाउंट पर किसानों के ग्रुप द्वारा साझा किए गए क्रॉप वीडियो को रीट्वीट किया है।

रोहिणी सिंह ने भ्रामक और क्रॉप किए गए वीडियो को रीट्वीट किया। साभार: ट्विटर

रोहिणी द्वारा साझा किए गए वीडियो में वह व्यक्ति केवल थार को भीड़ के ऊपर चढ़ाने और लोगों को मारने की बात करता है। जिस हिस्से में उसने बताया है कि वह एक कॉन्ग्रेस नेता के भतीजे के साथ फॉर्च्यूनर में थे, उस हिस्से को क्रॉप कर दिया गया है। जबकि, NDTV ने वीडियो से संबंधित अपने शीर्षक में कहा है कि उस व्यक्ति ने हिंसा प्रभावित क्षेत्र में केंद्रीय मंत्री के बेटे की मौजूदगी के बारे में बताया है।

NDTV ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि वह व्यक्ति यूपी के मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा को ‘भैया’ कह रहा है। वह अपनी रिपोर्ट में ‘भैया’ को केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा से जोड़कर देख रहा है। वायरल वीडियो के पहले हाफ में उस शख्स ने अंकित दास को ‘भैया’ कहकर बुलाया है। जैसा कि हमने कहा, ”यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि थार में किस ‘भैया’ का जिक्र किया जा रहा था। लेकिन सभी ने मान लिया कि वह ‘भैया’ आशीष मिश्रा हैं।”

कौन हैं अंकित दास?

अंकित दास को पूर्व कॉन्ग्रेस सांसद अखिलेश दास का भतीजा बताया जा रहा है, जो मनमोहन सिंह की यूपीए-1 सरकार में जनवरी 2006 से मई 2008 तक इस्पात मंत्री थे। वह मई 1993 से नवंबर 1996 तक लखनऊ के मेयर भी रहे हैं।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में जहाँ हर विपक्षी दल किसानों के नाम पर मामले का राजनीतिकरण करने में जुटा है और माहौल को उकसाने के प्रयास हो रहे हैं। वहीं दूसरी ओर योगी सरकार कोशिश कर रही है कि हर हिंसा पीड़ित को इंसाफ मिले और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई हो। इस बीच लखीमपुर खीरी हिंसा में मारे गए ‘किसान’ लवप्रीत सिंह के परिवार वालों का बयान सामने आया है। इसमें वह हाथ जोड़कर अपील कर रहे हैं कि इस घटना पर राजनीति न की जाए। लखीमपुर खीरी हिंसा में शिकार हुए 8 लोगों में 19 साल के लवप्रीत सिंह का भी नाम है। लवप्रीत को लेकर मीडिया में छपी जानकारी बताती है कि वह इंटरमीडिएट तक पढ़ाई पूरी करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए कनाडा जाने की तैयारी कर रहा था।

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले का SC ने लिया स्वत: संज्ञान, चीफ जस्टिस के नेतृत्व में तीन न्यायधीशों की पीठ कल करेगी सुनवाई

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हिंसक झड़प में 8 लोगों की मौत के बाद इस घटना का सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस (सीजेआई) एनवी रमणा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय पीठ गुरुवार को इस मामले पर सुनवाई करेगी। पीठ में सीजेआई के साथ ही जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली शामिल हैं।

दरअसल, लखीमपुर मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए याचिका दायर की गई थी। याचिका दो वकीलों ने दायर की थी। याचिका में कहा गया है कि 3 अक्टूबर को किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान लखीमपुर खीरी में हुई घटना के संबंध में गृह मंत्रालय और पुलिस को निर्देश दिया जाए कि एफआईआर दर्ज कर मामले में शामिल ‘मंत्रियों को दंडित’ किया जाए।

इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय में दायर की गई याचिका में यह भी मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जाँच की जाए और इसमें सीबीआई को भी शामिल किया जाए।

लखीमपुर खीरी से दो बार के सांसद और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ के विरोध में कथित किसानों के विरोध के बाद हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई। किसानों का आरोप है कि केंद्रीय गृह राज्यमंत्री मिश्रा का बेटा जिस गाड़ी में सवार थे, उसी ने किसानों को कुचला, जिसमें चार किसानों की मौत हो गई। वहीं, मिश्रा ने आरोप को खारिज कर दिया।

विपक्ष भी इस घटना को राजनीति के लिए मुद्दे के तौर इस्तेमाल करने लगा। इस बीच बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी सीतापुर से लखीमपुर खीरी के लिए रवाना हुए।

‘वो गड्डी पलटो-गड्डी पलटो कह रहे थे’: लखीमपुर खीरी हिंसा में मारे गए BJP नेता के भाई ने सुनाया हाल, उग्र किसानों को कहा- ‘जल्लाद’

लखीमपुर खीरी हिंसा में मारे गए 8 लोगों में एक नाम भारतीय जनता पार्टी के मंडल मंत्री श्याम सुंदर निषाद का है। निषाद वह भाजपा नेता हैं जिनकी वीडियो हिंसक झड़प के बाद से हर जगह वायरल है। ये वीडियो इतनी झकझोरने वाली है कि शायद ही किसी के जहन से उतरे। खून से लथपथ चेहरा.. सहमे श्याम सुंदर निषाद और उग्र भीड़ का दबाव। इस वीडियो में सब साफ दिख रहा है।

जिस तरह अपनी आखिरी वीडियो में वह अपनी जान की भीख माँग रहे हैं और बर्बर भीड़ बस ये उगलवाने पर आमादा है कि वो मानें कि उन्हें भाजपा नेता टेनी ने किसानों को कुचलने के लिए भेजा…सब साफ दिखाता है कि वहाँ मौजूद भीड़ कुछ सुनने को तैयार नहीं थी। 

वीडियो में श्याम ये जरूर बताते हैं कि उनको टेनी ने भेजा लेकिन इस बात से जैसे ही इनकार करते हैं कि उन्हें किसी को कुचलने के लिए नहीं भेजा गया, वैसे ही गुस्साई भीड़ उनकी ओर बढ़ने लगती है और वह हाथ जोड़ ‘दादा-दादा छोड़ दो’ कहने लगते हैं। इसके बाद सिर्फ उनकी लाश मिलती है। सोच सकते हैं कि जब जिंदा रहते हुए श्याम सुंदर का हाल इतना भयावह कर दिया गया तो जब उन्हें मारा गया होगा तो उनकी स्थिति क्या रही होगी। कुछ रिपोर्ट बताती हैं कि उनके गले और चेहरे पर इस तरह वार हुए थे कि उनकी वहीं मौत हो गई। बाद में उनकी लाश खेत में फेंकी गई और फिर शाम को पुलिस ने उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

इस समय कुछ चीजें मीडिया में दो तरह से चलाई जा रही हैं। एक पक्ष उग्र ‘किसानों’ को जिम्मेदार बता रहा है और दूसरा भाजपा नेताओं की गाड़ी को। वहीं दूसरी ओर आमजन है सारे मामले को सिर्फ चुनिंदा वीडियो पर आँक रहे हैं। ऐसे में ऑपइंडिया आज आपको श्याम सुंदर निषाद के सगे भाई संजय निषाद का पक्ष बताने जा रहा है जो बातचीत में ये मानने से इनकार करते हैं कि भीड़ में मौजूद लोग कोई किसान थे, वह उन्हें जल्लाद कहते हैं। साथ ही ये भी बोलते हैं कि अगर सब किसान होते तो ये नहीं करते, क्योंकि वह लोग खुद भी किसान हैं।

मृतक भाजपा नेता श्याम सुंदर निषाद के भाई संजय निषाद से ऑपइंडिया की बातचीत

सिंगाही थाने के सिंगहा कलां गाँव के श्याम सुंदर निषाद के भाई संजय निषाद कहते हैं, “मेरा भाई भाजपा मंडल मंत्री था। गृह राज्य मंत्री के यहाँ काफी समय से दंगल होते आ रहे थे। ये 2 से 3 तक अक्टूबर चलना था। वहाँ केशव प्रसाद मौर्या आ रहे थे। उनकी अगुवाई के लिए भैया जा रहे थे। वहाँ सब लोग इकट्ठा थे। उन्होंने ही उनको मारा। सब यही बुलवा रहे थे तुम्हें टेनी ने भेजा है। मेरे भैया भी कह रहे थे भेजा उन्होंने ही है लेकिन एक्सिडेंट के लिए नहीं भेजा। केशव प्रसाद मौर्या को लेने भेजा है।”

संजय कहते हैं कि उन्हीं लोगों ने पहले उपद्रव किया, गाड़ी के शीशे पत्थर चलाया और फिर गाड़ी का बैलेंस बिगड़ा। उनके मुताबिक, उन्हें अपने भाई की मृत्यु का संदेश मैसेज के जरिए मिला। वह उस समय उत्तराखंड में थे और किसी कारणवश वह अपने भाई के अंतिम संस्कार में भी नहीं आ पाए थे। वह कहते हैं, “घरवालों को भी तब पता चला जब वीडियो वॉट्सएप पर आई और हल्ला हुआ- ‘उनका लड़का मारा गया-मारा गया। मुझे किसी तरह साढ़े 5 बजे खबर मिली और जिसने फोन किया उसने कहा- ‘आपके भैया को मारा डाला गया है। मैंने बात नहीं मानी, लेकिन जब वॉट्सऐप पर वीडियो देख ली तो यकीन हुआ कि सच में ऐसा हुआ है।”

संजय उत्तराखंड से अपने भाई के क्रियाक्रम में आना चाहते थे, लेकिन बस कैंसिल होने के कारण ऐसा नहीं हुआ। वह कहते हैं, “मैंने अपने भाई की आखिरी वीडियो भी देखी है और वो वीडियो भी देखी है जिसमें सब कह रहे हैं- गड्डी पलटो-गड्डी पलटो। इसके बाद भाई मर गया, लेकिन झूठ नहीं बोला कि टेनी ने भेजा था मगर किसी को मारने के लिए नहीं, केशव प्रसाद मौर्या को लेने के लिए।”

संजय से हमारी बातचीत के बीच में ही उन्हें सरकार की ओर से 45 लाख रुपए का मुआवजा भी मिला। संजय ने कहा, “आपसे बातचीत जब हो रही थी और कॉल काटना पड़ा उसी दौरान पुलिस के साथ लेखपाल, पटवारी, ग्राम प्रधान घर आए और 45 लाख रुपए की मदद मिली। आगे सरकारी नौकरी का भी वादा किया गया है।”

परिवार की आर्थिक स्थिति पर वह बताते हैं कि श्याम सुंदर निषाद ही घर की सब जरूरतों को पूरा करते थे। उन्होंने बहनों की शादी करवाई थी और उसके बाद खुद शादी की थी। उनकी पत्नी और दो बेटियाँ बिलकुल अकेली हो गई हैं। संजय कहते हैं कि उनके भाई 15-20 साल से दंगल में जाते थे। वहाँ उन्हें पहले छोटा पद मिला, फिर इसमें बढ़ोतरी हो गई और वह महामंत्री, मंडल मंत्री हो गए।

किसानों के प्रदर्शन के हिंसक होने को लेकर संजय बताते हैं कि वहाँ बहुत लोग थे। चक्का जाम कर रखा था। हमसे बातचीत में संजय ने ये जानकारी भी दी कि उनके घर राहुल गाँधी पहुँचने वाले हैं वह लखीमपुर में ही हैं। वह अपने भाई का आखिरी चेहरा याद करते हुए कहते हैं, “सरकार मेरे भाई को नहीं लौटा पाएगी। उसने हाथ जोड़-जोड़ कर अपनी जान की भीख माँगी लेकिन उन्हें बख्शा नहीं गया। वो किसान नहीं हैं जल्लाद हैं। मुआवजा हमें मिल गया है लेकिन मैं ये बात हर मीडिया में कहूँगा कि वो इंसान नहीं जल्लाद थे।” अपनी माँग का जिक्र करते हुए वह सरकार से कहते हैं, “सरकार आरोपितों का पता लगाए और उनके विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई हो। जिन्होंने मारा वो किसान नहीं थे जल्लाद थे। किसान होते तो मारते क्यों मैं भी तो किसान हूँ।”

‘अगर NCP के नवाब मलिक अदालत जाना चाहते हैं, तो जा सकते हैं’: आर्यन खान ड्रग्स केस में NCB ने दिए सभी आरोपों का जवाब

बॉलीवुड के बादशाह कहे जाने वाले शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की ड्रग्स मामले में गिरफ्तारी इन दिनों खासा चर्चा में है। फिल्म इंडस्ट्री के साथ कई नेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए किंग खान के समर्थन में उतर आए हैं। वे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) जैसी बड़ी संस्था पर आरोप लगा रहे हैं। इसी बीच एनसीबी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मामले से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। साथ ही उन्होंने अपने ऊपर लग रहे आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

NCB के उप महानिदेशक(उत्तर) ज्ञानेश्वर सिंह ने कहा, “हमने मुंबई में क्रूज शिप ड्रग्स मामले से जुड़े 8 लोगों को पकड़ा है। इनके नाम हैं- आर्यन खान, अरबाज मर्चेंट, मुनमुन धामेचा, नुपूर सारिका, इस्मित सिंह, मोहक जसवाल, विक्रांत छोकर और गोमित चोपड़ा। ये सभी लोग मौके पर पकड़े गए हैं। इसके पास से बहुत सारे ड्रग्स जैसे कोकीन, चरस, Mephedrone, MDMA Ecstasy pills के साथ-साथ 1 लाख 33 हजार की नकदी भी बरामद हुई है।”

ज्ञानेश्वर सिंह ने कहा, “प्रारंभिक जाँच के अनुसार मोहक जसवाल को जब एनसीबी की टीम ने इन्टेरोगेट किया। उसके आधार पर जोगेश्वरी में एक रेड कन्डक्ट की गई, जिसमें अब्दुल कारिब शेख नाम के शख्स को Ecstasy pills और commercial quantity Mephedrone के साथ 3 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जाँच में इस्मित चड्ढा के बयान के आधार पर फॉलोअप एक्शन में गोरेगाँव में एनसीबी की टीम ने श्रेयस सुंदर नायर को चरस के साथ गिरफ्तार किया।” उन्होंने कहा, “एक और ऑपरेशन में मनीष राजगढ़िया, जो कि शिप पर एक गेस्ट के रूप में इन्वाइट थे उनके पास से हाइड्रोकोमिक बरामद किया गया। यह चरस की एक किस्म होती है। इसके साथ उनको गिरफ्तार किया गया।”

क्रूज शिप पार्टी मामले में गिरफ्तार किए गए चार अन्य लोगों को मुंबई की एक स्थानीय अदालत ने 14 अक्टूबर तक एनसीबी की हिरासत में भेज दिया है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने बताया कि एनसीबी मुंबई ने अवीन साहू जो कि शिप पर सेल कर रहे था उसको भी 4 अक्टूबर को ​गिरफ्तार किया। फर्दर फॉलोअप एक्शन में इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के चार लोगों गोपाल जी आनंद, समीर सहगल, मानव सिंघल और भास्कर अरोड़ा को सबूतों के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। क्रूज शिप पार्टी मामले में गिरफ्तार किए गए चार लोगों को मुंबई की एक स्थानीय अदालत ने 14 अक्टूबर तक एनसीबी की हिरासत में भेज दिया है। 

NCB के उप महानिदेशक(उत्तर) ज्ञानेश्वर सिंह ने मुंबई में क्रूज शिप ड्रग्स मामले पर कहा, ”हमारी संस्था पर कुछ आरोप लगाए गए हैं, जो निराधार और पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं। प्रक्रिया का पालन करते हुए, सभी नियमों का पालन करते हुए हमने यह कार्रवाई की है।”

दरअसल, महाराष्ट्र सरकार में सहयोगी राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCB)के नेता नवाब मलिक ने एनसीबी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि क्रूज शिप पर एनसीबी के छापे में बीजेपी से जुड़े व्यक्ति भी शामिल थे। कुछ ऐसा ही बयान मुंबई कॉन्ग्रेस ने भी दिया था। इन आरोपों पर मुंबई में एनसीबी के डिप्टी डीजी ज्ञानेश्वर सिंह ने कहा, ”अगर वे (राकांपा) अदालत जाना चाहते हैं, तो वे जा सकते हैं और न्याय माँग सकते हैं। हम वहीं जवाब देंगे। हमने कानून के अनुसार सब कुछ किया है।”

ज्ञानेश्वर सिंह ने आगे कहा, ”एनसीबी दोहराता है कि हमारी जाँच पेशेवर और कानूनी रूप से पारदर्शी और निष्पक्ष रही है और यह जारी रहेगी। एनसीबी मुंबई टीम ने 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल ग्रीन गेट मुंबई और क्रूज शिप पर छापेमारी कर कोकीन, चरस, एमडीएमए जैसी तमाम नशीली दवाओं के साथ 8 लोगों को मौके पर पकड़ा है।”

हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, जाँच एजेंसी ने कहा था कि इस मामले में हर पल एक नया मोड़ आ रहा है। एनसीबी ने कोर्ट को यह भी बताया था कि ये मामला अगाथा क्रिस्टी और शर्लक होम्स के नोवल जैसा हो गया है।

बता दें कि 2 अक्टूबर को मुंबई में समुद्री क्रूज पर चल रही एक ड्रग्स पार्टी में एनसीबी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में नशीला पदार्थ जब्त किए और 8 लोगों को हिरासत में लिया था। यह जहाज मुंबई से गोवा जा रहा था। एक पुख्ता टिप मिलने के बाद मुंबई जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े और अन्य एनसीबी अधिकारी जहाज में आम यात्रियों की तरह सवार हुए और ऑपरेशन को अंजाम दिया था। इसके बाद शाहरुख़ के बेटे आर्यन को 12 घंटे तक चली लम्बी पूछताछ के बाद उसे चरस लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। आर्यन खान पर अपने लेंस के डिब्बे में ड्रग्स छुपाकर रखने का आरोप है।

लालू यादव की पार्टी से तेज प्रताप ‘गायब’, पिता के बंधक बनाए जाने का लगाया था आरोप

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है, इसके संकेत तो समय-समय पर मिलते रहे हैं, लेकिन पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने इसकी पुष्टि कर दी है। राजद के वरिष्ठ नेता और पार्टी उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने कहा है कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के सबसे बड़ पुत्र तेज प्रताप यादव पार्टी में नहीं हैं। उन्हें पार्टी का चुनाव चिह्न लालटेन का इस्तेमाल करने की अनुमति भी नहीं है।

शिवानंद तिवारी ने कहा, “तेज प्रताप पार्टी में हैं कहाँ, नया संगठन उन्होंने पार्टी से अलहदा बनाया है। वो अब पार्टी में नहीं हैं।” उन्होंने कहा कि तेज प्रताप को पार्टी से निष्कासित करने का क्या सवाल है, वह तो खुद निष्कासित हो चुके हैं। कुछ दिनों पहले तेज प्रताप ने अपनी पार्टी के चिह्न की जगह पर लालटेन लगा लिया था, लेकिन राजद की तरफ से उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया गया।

इसके पहले, तेज प्रताप यादव ने इशारों-इशारों में अपने छोटे भाई और बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया था कि कुछ लोग पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का सपना देख रहे हैं। इसी कारण से राष्ट्रीय जनता दल के कुछ लोगों ने उनके पिता (सजायाफ्ता अपराधी लालू यादव) को दिल्ली में बंधक बनाकर रखा हुआ है।

तेज प्रताप यादव ने कहा था कि उनके पिता को जेल से बाहर आए साल भर का समय हो चुका है, मगर उनको अभी तक दिल्ली में ही रखा गया है। इस दौरान तेज प्रताप यादव ने किसी का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा, ”सब जानता है कि ऐसे कौन लोग हैं, उनका नाम लेने से कोई फायदा नहीं है।”

तेज प्रताप यादव ने आगे कहा था, “पार्टी में जो कुछ हो रहा है उससे संगठन बढ़ेगा नहीं, बल्कि टूट जाएगा। इस तरह से काम नहीं चलने वाला है। मेरे पिता बीमार चल रहे हैं इसलिए हम कोई प्रेशर नहीं देना चाहते हैं, लेकिन कुछ लोग इसका नाजायज फायदा उठा रहे हैं।”

तेज प्रताप ने पटना में अपने नवगठित संगठन छात्र जनशक्ति परिषद की आयोजित कार्यशाला में शनिवार (2 अक्टूबर 2021) को यह बात कही। कार्यशाला का आयोजन ‘राजनीति सीखो, नेतृत्व करो’ विषय पर किया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेज प्रताप अपने पिता को पटना लेकर आना चाहते हैं और उन्हें अपने साथ रखना चाहते हैं, मगर कुछ लोग उनके पिता को आने नहीं दे रहे हैं। उन्हें दिल्ली में बंधक बना कर रखा है। बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राजद को जनता से दूर कर दिया गया है। उनके अनुसार पिता लालू यादव रहते थे तो उनके घर का दरवाजा जनता के लिए खुला रहता था। वह जनता से मिलते थे। लेकिन, अब कुछ लोगों ने क्या किया? वो चाहते हैं कि जनता पार्टी (राजद) से दूर रहे।

‘हमारे शैतानों ने उन्हें मारा डाला…’ : आतंकियों द्वारा कश्मीरी पंडित माखनलाल बिंदरू की हत्या पर बोले फारूक अब्दुल्ला

श्रीनगर में कश्मीरी पंडित माखनलाल बिंदरू की आतंकियों द्वारा हत्या किये जाने पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने मृतक परिवार से मुलाकात करने के बाद तीखी प्रतिक्रिया दी है। अब्दुल्ला ने हत्यारों को दरिंदा बताया और कहा कि बिंदरू को शैतानों ने मार डाला। अब्दुल्ला ने कहा वे बिंदरू को व्यक्तिगत तौर पर जानते थे और वे गरीबों की सेवा करना चाहते थे।

बिंदरू के बारे में मीडिया से बात करते हुए फारूक भावुक हो गए। उन्होंने कहा, “वो आज इस दुनिया को छोड़ गया है। उसे हमारे शैतानों ने मार डाला। उसने लोगों के लिए सब कुछ किया। लोग यहाँ से भाग गए, वो नहीं भागा। वो यहीं रहा कि उसे गरीबों की खिदमत करनी है।”

वहीं, बिंदरू की बेटी श्रद्धा ने मीडिया से बात करते हुए पिता की हत्या करने वाले आतंकियों को ललकारते हुए कहा कि उनके पिता कश्मीरी पंडित थे और वे कभी मर नहीं सकते। आतंकी उनके शरीर को मार सकते हैं, लेकिन उनकी आत्मा जीवित रहेगी। श्रद्धा ने कहा, “तुम लोग केवल पत्थर फेंक सकते हो या पीछे से गोली चला सकते हो। मैं अपने पिता की बेटी हूँ। हिम्मत है तो मेरे सामने आओ और आमने-सामने बात करो।” श्रद्धा ने कहा कि उनके पिता माखनलाल बिंदरू फाइटर थे, वह कभी मर नहीं सकते।

आतंकियों को आइना दिखाते हुए श्रद्धा कहती हैं, “मैं एक हिंदू होकर भी कुरान पढ़ी हूँ और कुरान कहता है कि ये जो चोला है, ये जो शरीर का चोला है, ये बदल जाएगा लेकिन जो इंसान का जज्बा है, स्प्रिट है वह कहीं नहीं जाएगा।” उन्होंने कहा, “एक शरीर तो उड़ा दिया न तुमने, उस शरीर ने जिसको पैदा किया, वो मैं हूं, उस बाप की बेटी। आ जा सामने, इतनी औकात है न चल भाई, आ मेरे सामने और मेरे से बात कर।”

दरअसल, आतंकियों ने मंगलवार को कश्मीरी पंडित माखनलाल बिंदरू सहित तीन लोगों की हत्या कर दी थी। बिंदरू की हत्या श्रीनगर के इकबाल क्षेत्र में शाम के करीब 7:30 बजे गोली मारकर हत्या कर दी। वह प्रसिद्ध फार्मेसी के मालिक थे। आतंकियों ने दुकान में घुसकर उन्हें गोली मारी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहाँ डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

वरिष्ठ पत्रकार आदित्य राज कौल ने ट्वीट किया था, “श्रीनगर के इकबाल पार्क में बिंदरू मेडिकेट के मालिक कश्मीरी पंडित- माखन लाल बिंदरू (70) की आज शाम (मंगलवार) कश्मीर में आतंकियों ने हत्या कर दी। इसके बाद श्रीनगर के लालबाजार में सड़क किनारे गैर स्थानीय भेलपुरी विक्रेता की हत्या कर दी गई।”

हर रोज केजरीवाल सरकार का ही लफड़ा… परेशान सुप्रीम कोर्ट ने वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कहा- ‘…अब इसे छोड़ दें’

सुप्रीम कोर्ट दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच आए दिन होने वाले झगड़ों से परेशान हो गया है। शीर्ष न्यायालय की एक पीठ ने बुधवार (6 अक्टूबर 2021) को कहा, ”हर दिन हमें दिल्ली सरकार के विवाद को ही सुनना पड़ता है।” अदालत ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार (जीएनसीटी) दिल्ली (संशोधन) अधिनियम, 2021 और कार्य संचालन नियम से जुड़े मामले पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी को इसे छोड़ने का निर्देश दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने इस नियम के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी। ये कानून और प्रावधान दिल्ली के उपराज्यपाल को कथित तौर पर अधिक शक्ति देते हैं। इससे पहले दिल्ली सरकार ने इसी याचिका की तत्काल सुनवाई के लिए 13 सितंबर 2021 को उल्लेख किया था। उस दौरान सर्वोच्च अदालत इसे सूचीबद्ध करने को सहमत हो गई थी।

दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच अफसरों की नियुक्ति, स्थानांतरण और तैनाती के नियंत्रण को लेकर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच दशहरा अवकाश के बाद सुनवाई करेगी। दिल्ली सरकार ने मंगलवार (5 अक्टूबर 2021) को मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन के समक्ष इस मुद्दे को उठाया था। दिल्ली सरकार के वकील ने कहा था कि इस पर जल्द सुनवाई की जाए, क्योंकि इससे दिल्ली सरकार का कामकाज प्रभावित हो रहा है। मालूम हो कि फरवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने इस मामले को तीन जजों की बेंच के समक्ष भेज दिया था।

दरअसल यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट केजरीवाल सरकार और दिल्ली के उपराज्यपाल के बीच होने वाले विवाद सुप्रीम कोर्ट में पहुँचे हैं। साल 2018 में दिल्ली में केजरीवाल सरकार और एलजी के बीच चल रही अधिकारों की जंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था। कोर्ट ने दिल्ली सरकार और एलजी को आपसी तालमेल से काम करने की सलाह भी दी थी। कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली में पुलिस, लॉ ऐंड ऑर्डर और लैंड के मामले में सभी अधिकार एलजी के पास ही रहेंगे। वहीं, सभी मामलों में चुनी हुई सरकार कानून बना सकती है।

‘घटना का राजनीतिकरण न हो’: लखीमपुर खीरी हिंसा में मृतक ‘किसान’ के परिजनों ने की हाथ जोड़ कर अपील, Video

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में जहाँ हर विपक्षी दल किसानों के नाम पर मामले का राजनीतिकरण करने में जुटा है और माहौल को उकसाने के प्रयास हो रहे हैं। वहीं दूसरी ओर योगी सरकार कोशिश कर रही है कि हर हिंसा पीड़ित को इंसाफ मिले और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई हो। इस बीच लखीमपुर खीरी हिंसा में मारे गए ‘किसान’ लवप्रीत सिंह के परिवार वालों का बयान सामने आया है। इसमें वह हाथ जोड़कर अपील कर रहे हैं कि इस घटना पर राजनीति न की जाए।

परिवार द्वारा जारी की गई वीडियो में लवप्रीत सिंह के बहनोई मक्खन सिंह अन्य परिवारजन के साथ सामने आकर कहते हैं, “वाहे गुरुजी दा खालसा, वाहे गुरुजी दी फतह। (अपने साथ खड़े लोगों का परिचय कराते हुए मक्खन सिंह ने कहा) हम सब लोग बोल रहे हैं कि हमारा भाई लवप्रीत सिंह इस किसान आंदोलन के संघर्ष में शहीद हुआ है। किसान संयुक्त मोर्चा ने जो स्टैंड लिया है हम उसका सम्मान करते हैं और शासन-प्रशासन ने जैसे समर्थन दिया है हम उसका भी सम्मान करते हैं और बहुत बहुत धन्यवाद देते हैं।”

अपने बयान में मक्खन सिंह स्पष्ट कहते हैं कि ऐसे तत्व जो इस घटना का राजनैतिक लाभ लेना चाहते हैं। उनसे निवेदन है कि वो इस दुख की घड़ी में घटना का राजनैतिक लाभ न लिया जाए और किसी को परेशान न किया जाए। सभी से बस यही प्रार्थना है धन्यवाद। 

बता दें कि लखीमपुर खीरी हिंसा में शिकार हुए 8 लोगों में 19 साल के लवप्रीत सिंह एक नाम हैं। लवप्रीत को लेकर मीडिया में छपी जानकारी बताती है कि वह इंटरमीडिएट तक पढ़ाई पूरी करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए कनाडा जाने की तैयारी कर रहा था। वह दो बहनों का बड़ा भाई और अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था। लवप्रीत सिंह की मृत्यु से आहत बहनें (17 साल की गगनदीप और 15 साल की अमनदीप) अपने भाई के लिए न्याय माँग रही हैं। वहीं योगी सरकार पूरा प्रयास कर रही है मृतकों के परिवार को जल्द से जल्द मुआवजा प्रदान किया जाए। इस हिंसा में मारे गए प्रत्येक मृतक को 45-45 लाख रुपए और परिवार को एक सरकारी नौकरी देने का वादा दिया है।