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‘…कुछ लोगों के लिए भिंडरावाले संत’: लखीमपुर खीरी हिंसा में खालिस्तान समर्थक टी-शर्ट पहने सिख व्यक्ति के बचाव में उतरे टिकैत

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा पर राजनीतिक रोटियाँ सेंकने का काम लगातार जारी है। इसी क्रम में भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत ने खालिस्तानी आतंकी जरनैल सिंह भिंडरावाले पर कमेंट कर विवाद खड़ा कर दिया है। मीडिया से बात करते हुए ‘किसान’ नेता ने दावा किया कि कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो भिंडरावाले को ‘संत’ मानते हैं।

सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए जा रहे एक छोटे से क्लिप में टिकैत से एक पत्रकार ने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में प्रदर्शनकारियों द्वारा आतंकवादियों का समर्थन किए जाने पर सवाल किया था। इसके जवाब में राकेश टिकैत ने कहा, “एक बच्चे को किसी की तस्वीर वाली टी-शर्ट पहने देखा गया था”। जब एक अन्य पत्रकार ने टिकैत को बताया कि यह भिंडरावाले की तस्वीर है तो उन्होंने आगे कहा, “कुछ लोग भिंडरावाले को संत मानते हैं, जबकि सरकार उन्हें आतंकवादी मानती है।”

यूट्यूब पर राकेश टिकैत की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस उपलब्ध है। इसमें वो सरकार को धमकी भी दे रहे हैं। 9:18 सेकंड की इस वीडियो के 7 मिनट 26 सेकंड से 7 मिनट 40 सेकंड के हिस्से को देखने पर ये स्पष्ट होता है कि राकेश टिकैत खालिस्तानी आतंकी भिंडरावाले को संत कहते दिखाई देते हैं। राकेश टिकैत किसान की मौत की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर बात कर रहे थे।

ध्यान देने वाली बात यह है कि भारतीय किसान यूनियन के नेता के रुख में अचानक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। भड़काऊ बयान देने से लेकर परेशानी खड़ी करने की कोशिशों के बीच अचानक से वह उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ एक संवाददाता सम्मेलन में देखे गए। उस दौरान पुलिस हिंसा में मारे गए लोगों के लिए 45 लाख रुपए के मुआवजे की घोषणा कर रही थी। हालाँकि, उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले योगी सरकार को बदनाम करने के लिए लखीमपुर खीरी की घटना को दोनों हाथों से लपकने वाली कॉन्ग्रस और उसके वफादारों के लिए अच्छी बात नहीं है।

लखीमपुर खीरी में भिंडरावाले की टी-शर्ट के साथ देखा गया सिख व्यक्ति

3 अक्टूबर को कथित किसान प्रदर्शनकारियों ने भाजपा के काफिले पर पथराव किया। काफिले में शामिल एक वाहन कथित तौर पर नियंत्रण खो देने के बाद कुछ प्रदर्शनकारियों पर चढ़ गया और दो लोगों की मौत हो गई। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने काफिले पर हमला कर दिया, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और वाहनों को आग लगा दी गई। हिंसा में दो और किसान भी मारे गए। इस घटना में कुल आठ लोगों की मौत हुई, जिनमें से चार प्रदर्शनकारी, तीन भाजपा सदस्य और भाजपा के काफिले में शामिल एक ड्राइवर था।

प्रदर्शनकारी किसानों ने दावा किया है कि केंद्रीय मंत्री अजय कुमार मिश्रा का बेटा आशीष मिश्रा उस गाड़ी को चला रहा था, जिससे प्रदर्शनकारी कुचले गए। वहीं, मंत्री ने कहा कि घटना के समय उनका बेटा वहाँ मौजूद ही नहीं था।

जब बीजेपी के कार्यकर्ताओं पर हिंसक भीड़ ने डंडों से हमला किया था तो उस दौरान कई तस्वीरों में एक व्यक्ति को भिंडरावाले की टी-शर्ट पहने देखा गया। खालिस्तान से सहानुभूति रखने वालों की उपस्थिति ने आंदोलन के बारे में कई संदेह पैदा किए हैं। इससे शक इस बात का हो रहा है कि हिंसा पूर्व नियोजित थी या नहीं।

इसके अलावा, लखीमपुर की घटना से ठीक पहले ‘ललकार’ नाम का एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था। ग्रुप का एडमिन प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन बब्बर खालसा का पूर्व सदस्य था।

‘सांसद की गाड़ी है…पीछे से हमला करो… खुद गाड़ी के सामने आए’: लखीमपुर खीरी की घटना को हरियाणा में दोहराने की कोशिश

लखीमपुर खीरी की घटना को लेकर जारी सियासत के बीच अब हरियाणा से भी प्रदर्शनकारी किसानों पर गाड़ी चढ़ाने का मामला मीडिया में छाया हुआ है। आरोप है कि कुरुक्षेत्र से भाजपा सांसद नायब सिंह सैनी के काफिले द्वारा प्रदर्शनकारी किसानों पर गाड़ी चढ़ा दी गई है। वहीं, सांसद ने खुद पर हमले किए जाने की बात कही है। सैनी का कहना है कि उग्र भीड़ ने उनके ड्राईवर का गला पकड़ लिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना अंबाला जिले के नारायणगढ़ की है, जहाँ एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सांसद सैनी जा रहे थे। इस बात की खबर लगते ही कथित किसानों की समूह उनका विरोध करने के लिए इकट्ठा हो गया। इसी दौरान भवनप्रीत नाम का एक किसान काला झंडा दिखाते हुए काफिले के सामने आ गया और उसे टक्कर लग गई। टक्कर में घायल होने के बाद अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। किसानों का आरोप है कि भवनप्रीत की हत्या करने के लिए उसे टक्कर मारी गई थी। फिलहाल, हालात को देखते हुए घटनास्थल पर भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है।

इस मामले को लेकर भारतीय किसान यूनियन गुरुनाम सिंह चढ़ूनी गुट ने नारायणगढ़ थाने में शिकायत भी की है। किसानों ने धमकी दी है कि 10 अक्टूबर तक इस मामले में अगर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है तो वे थाने का घेराव करेंगे। किसान नेताओं का दावा है कि जिस गाड़ी (HR04F0976) से टक्कर हुई थी, वह सांसद के नाम पर रजिस्टर है।

सांसद पर हुआ हमला

इस घटना को लेकर सांसद नायब सैनी ने कहा कि वो कार्यक्रम से निकल रहे थे, इस दौरान उनकी गाड़ी काफिले से पीछे रह गई और मौका मिलते ही उन पर हमला कर दिया गया। सांसद ने कहा कि भीड़ ने उन पर हमला किया और उनके ड्राइवर का गला पकड़ लिया। किसान चिल्ला रहे थे कि सांसद की गाड़ी है पीछे से हमला करो। सैनी ने कहा कि किसान हर घटना का वीडियो बनाते हैं वो उसे जारी करें, मामला साफ हो जाएगा।

शाहरुख खान के बेटे आर्यन समेत 8 आरोपितों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया, आमने-सामने बैठाकर होगी पूछताछ

कोर्ट ने ड्रग्स केस में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान समेत 8 आरोपितों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं आर्यन खान की जमानत याचिका पर सुनवाई शुक्रवार (8 अक्टूबर, 2021) की सुबह 11 बजे की जाएगी। इसके पहले एनसीबी ने अदालत से आर्यन खान और 7 आरोपितों की रिमांड 11 अक्टूबर तक बढ़ाने की माँग की थी। उनका कहना था कि इस मामले में NCB अभी भी कई जगहों पर छापे मार रही है और इसलिए इन आरोपितों का उनकी कस्टडी में होना जरूरी है। हालाँकि कोर्ट ने आर्यन खान को 14 दिन के न्यायिक हिरासत में भेजने का निर्णय लिया है। वहीं कोर्ट ने एनसीबी से अपना जवाब दाखिल करने के लिए भी कहा है।

साथ ही कोर्ट ने कहा है कि इस मामले की सुनवाई अब स्पेशल NDPS कोर्ट द्वारा की जाएगी। कोर्ट में सतीश मानेशिंदे ने आर्यन खान का पक्ष रखा था। उन्होंने न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के कोर्ट के फैसले के बाद जमानत की अर्जी दाखिल की है। जमानत याचिका पर कोर्ट ने कहा कि वो इसपर कल यानी शुक्रवार को सुबह 11 बजे सुनवाई करेंगे। न्यायिक हिरासत के बाद आज गुरुवार (7 अक्टूबर, 2021) की रात भी आर्यन खान समेत सभी 8 आरोपितों की रात एनसीबी के दफ्तर में कटेगी क्योंकि रात में जेल में नए आरोपितों को नहीं लिया जाता हैl

इस मामले में NCB के वकील अनिल सिंह ने कहा कि NCB द्वारा गिरफ़्तार किए गए अर्चित कुमार ने पूछताछ में आर्यन खान और अरबाज मर्चेंट का नाम लिया है। ऐसे में सभी को साथ बैठाकर पूछताछ करना ज़रूरी है। एनसीबी की माँग पर आर्यन खान के वकील सतीश मानशिंदे ने सवाल किया कि आर्यन खान, अरबाज मर्चेंट और अर्चित कुमार को साथ में बैठाकर बुधवार को पूछताछ क्यों नहीं किया गया? अर्चित कुमार की गिरफ़्तारी तो हो चुकी थी। उन्होंने कहा, “पाँच दिनों की कस्टडी में रहने और पूछताछ के दौरान कोई बात सामने नहीं आई तब NCB को फिर से आर्यन की कस्टडी क्यों चाहिए? आगे अगर NCB को कुछ जाँच में मिलता है तो आर्यन को फिर बुला सकती है।”

वहीं एनसीबी के वकील विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) अद्वैत सेठना ने ड्रग्स केस से जुड़े एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान भी दावा किया कि पवई में पकड़े गए आरोपित अर्चित कुमार से आर्यन के नेक्सेस मिले हैं। आमने सामने पूछताछ करनी है इसलिए आर्यन की कस्टडी दी जाए। बात दें कि अर्चित कुमार को 9 अक्टूबर तक अदालत ने हिरासत में भेज दिया है। अद्वैत सेठना ने कहा कि अर्चित कुमार के घर से 2.6 ग्राम गाँजा जप्त किया गया है। वहीं अर्चित के वकील ने कहा कि NCB का दावा झूठा है। अर्चित की गिरफ्तारी अवैध है। मेरे पास सीसीटीवी फुटेज है और मैं इसे रिकॉर्ड पर रखने जा रहा हूँ।

गौरतलब है कि बीते दिनों NCB ने आर्यन सहित 11 लोगों को ड्रग्स मामले में गिरफ्तार किया था। इनमें उनके दोस्त अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धमेचा का भी नाम शामिल है। खुफिया जानकारी के आधार पर एनसीबी की एक टीम ने अपने क्षेत्रीय निदेशक समीर वानखेड़े के नेतृत्व में 2 अक्टूबर की शाम को गोवा जाने वाले ‘कॉर्डेलिया क्रूज़’ पर छापा मारा था। इस छापेमारी में कुछ लोगों के पास से नशीले पदार्थ बरामद किए थे। एनसीबी का कहना है कि छापेमारी में 13 ग्राम कोकीन, पाँच ग्राम एमडी (मेफोड्रोन), 21 ग्राम चरस और एक्स्टेसी की 22 गोलियाँ एवं 1.33 लाख रुपए नकद जब्त किए गए थे।

17 साल से कर्नाटक के घने जंगलों में हिंसक जानवरों के बीच रह रहे हैं चंद्रशेखर, संपत्ति के नाम पर साइकिल: जानिए इसके पीछे की कहानी

समाजशास्त्र कहता है कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, फिर भी दुनिया में बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्हें अकेलापन पसन्द है। कुछ के लिए एकांतवास की वजह व्यक्तिगत, कुछ की आध्यात्मिक और कुछ की आकस्मिक के लिए घटनाएँ होती हैं, लेकिन इन सभी से अलग कर्नाटक के चंद्रशेखर के जंगल में लगातार 17 वर्ष बिताने की खबर ने लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है।

कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में पड़ने वाले गाँव अड़ताले और नक्कारे के नजदीक सुल्लिअ तालुक क्षेत्र में आने वाले घने जंगलों में लगभग 4 किलोमीटर जाने के बाद प्लास्टिक शीट से ढकी बाँस के खूंटों से बनी एक छोटी-सी झोपड़ी है। झोपड़ी के पास एक पुरानी अम्बेस्डर कार और कार के ऊपर एक पुराना रेडियो रखा है, जिसमें पुराने जमाने के गाने बजते सुनाई दे जाएंगे। वहीं, बगल में खड़ी एक पुरानी साइकिल खड़ी है। बस यही दुनिया है चंद्रशेखर की।

चंद्रशेखर लगभग 56 वर्ष के हो चुके हैं। 39 वर्ष की उम्र में उन्होंने जंगल के जिस स्थान पर डेरा डाला था, आज भी वे जमे हुए हैं। इन लगभग 2 दशकों में न उन्होंने बाल कटवाए और न ही शेविंग की। अब सवाल ये उठता है कि क्या चंद्रशेखर शुरू से ही ऐसे हैं और अगर ऐसे नहीं हैं तो उन्हें ऐसा क्यों होना पड़ा? इसका जवाब खोजने के लिए वर्ष 2003 में जाना पड़ेगा।

न्यूज़ 18 के अनुसार, सन 2003 में चंद्रशेखर ने को-ऑपरेटिव बैंक से 40 हजार रूपये का कर्ज लिया था। इस कर्ज को वो अपनी डेढ़ एकड़ जमीन की खेती से चुकता नहीं कर पाए और बैंक ने उनकी जमीन नीलाम कर दी। अपनी जमीन गँवाने के बाद चंद्रशेखर अपनी ऐम्बेसडर कार लेकर अपनी बहन के घर रहने लगे, लेकिन वहाँ परिवार वालों से विवाद के बाद वो एकांतवासी हो गए और आकर जंगल में आकर रहने लगे।

मात्र 2 जोड़ी कपड़े और 1 हवाई चप्पल में घर छोड़ने वाले चंद्रशेखर के पास कुल जमापूँजी के रूप में आज भी वही उतना ही है। कार ही उनका घर है, जिसे धूप और बरसात से बचाने के लिए उन्होंने प्लास्टिक से ढक दिया है। बगल में बहती नदी में नहाते हैं और जीविका चलाने के लिए जंगल के पेड़ों की सूखी पत्तियों से टोकरी बनाकर उसे बेचते हैं। इससे जो पैसे मिलते हैं, उससे वो राशन आदि खरीद कर जंगल में खाना बनाते हैं और वहीं सो जाते हैं।

इस दिनचर्या के बाद भी चंद्रशेखर को ये आशा है कि बैंक द्वारा नीलाम की गई उनकी जमीन उनको वापस मिल जाएगी। कार को बसेरा बनाने वाले चंद्रशेखर साइकिल का उपयोग आसपास के गाँवों में जाने के लिए करते हैं। जिस जंगल में चंद्रशेखर पिछले 17 सालों से रह रहे हैं, वह हिंसक पशुओं से भरा हुआ है। हाथियों ने कई बार उनके छोटे-से आशियाने पर हमला किया। तेंदुआ जैसे खतरनाक जानवर उनकी झोपड़ी के आसपास चहलकदमी करते रहते हैं, फिर भी चंद्रशेखर अपना ठिकाना छोड़ने या बदलने के लिए तैयार नहीं हैं।

वन विभाग के अधिकारियों को भी चंद्रशेखर के वहाँ रहने से कोई परेशानी नहीं है। बतौर चंद्रशेखर, उन्होंने भी वन विभाग के विश्वास पर खुद को खरा उतारा है और टोकरी बनाने के लिए सिर्फ उन्हीं पत्तियों और टहनियों का प्रयोग करते हैं, जो सूख चूकी हैं। कोरोनाकाल में लॉकडाउन के कारण चंद्रशेखर को अपनी जीविका चलाने में काफी परेशानी उठानी पड़ी। उस समय उनकी बनाई टोकरियों के खरीदार ही नहीं मिल रहे थे।

ऐसे में चंद्रशेखर ने कई बार पानी पीकर और जंगल के फल खाकर अपने दिन बिताए थे। चंद्रशेखर के पास आधार कार्ड नहीं है, लेकिन मानवीय आधार पर अरणथोड ग्राम पंचायत के सदस्यों ने आकर उन्हें कोरोना वैक्सीन दी। चंद्रशेखर की जिद है कि जब तक उनकी नीलाम हुई जमीन उन्हें वापस नहीं मिलती, वो जंगल छोड़कर वापस घर नहीं जाएँगे।

देश में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने वाले खालिस्तान और भिंडरावाले के टी-शर्ट बेच रहा Amazon इंडिया: फैक्ट चेक

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में चल रहे किसान विरोध और हिंसा की ताजा घटना के बीच भारत में खालिस्तानी आतंकवादियों की बढ़ती पैठ और उनके हमदर्दों की मौजूदगी ने चिंताएँ बढ़ा दी हैं। हाल ही में एक सिख युवक को खालिस्तान आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीर वाली टी-शर्ट पहने देखा गया था।

इस बीच सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने दावा किया है कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेजन भारत में भिंडरांवाले और खालिस्तान के समर्थन वाली टी-शर्ट बेच रहा है। सोशल मीडिया के दावों की ऑपइंडिया ने पड़ताल की और देखिए हमने क्या पाया:

पंजाबी क्लोथिंग कंपनी द्वारा पोस्ट की गई भिंडरावाले की टीशर्ट
भिंडरांवाले का माल बेचने वाले अमेजन यूएस स्टोर के लिंक के साथ एक ट्वीट

Amazon India भिंडरांवाले का टी-शर्ट बेचती है?

जब इस तथ्य की पड़ताल की गई तो पता चला कि ई-कॉमर्स कंपनी भिंडरांवाले या खालिस्तानी प्रतीकों से जुड़े कोई उत्पाद नहीं बेचती है। वहीं जब हमने Amazon.in पर भिंडरांवाले नाम से सर्च किया तो हमें केवल खालिस्तानी आतंकवादी से संबंधित किताबें मिलीं। इस पर हम बाद में चर्चा करेंगे पहले टीशर्ट को लेकर चर्चा करते हैं।

हमने अमेजन पर खालिस्तान और जरनैल सिंह से जुड़े तमाम कीवर्ड को सर्च किया। लेकिन, हमें ऐसा कोई प्रॉडक्ट नहीं मिला जो इस तरह के संकेत करता हो कि अमेजन इंडिया भारत में ऐसे प्रॉडक्ट बेचता है।

Amazon के इंडियन स्टोर पर हमें केवल भिंडरावाले से जुड़ी किताबें ही मिलीं

दूसरे देशों में अलग हैं हालात

दरअसल सोशल मीडिया पर जो दावे किए जा रहे हैं वो तो सही हैं, लेकिन इंडिया में ऐसा नहीं है। ये स्क्रीनशॉट उन प्रोडक्ट्स के हैं, जो कि Amazon US की वेबसाइट और अन्य देशों में स्टोर पर उपलब्ध हैं। उल्लेखनीय है कि भारतीय स्टोर में उपलब्ध प्रॉडक्ट यूएस या अन्य जगहों पर अमेजन स्टोर से अलग हैं, क्योंकि वे सामानों की डिलीवरी तेजी से करने के लिए स्थानीय विक्रेताओं को प्राथमिकता देते हैं।

यूएस स्टोर से बहुत कम उत्पाद भारत में शिपिंग के लिए उपलब्ध हैं और खास बात यह है कि भिंडरावाले या खालिस्तान से संबंधित प्रॉडक्ट उसमें शामिल नहीं हैं। अमेजन यूएस पर पंजाबी क्लॉथिंग कंपनी जरूर भिंडरांवाले टी-शर्ट बेचती है। इसके साथ ही यह कंपनी अमेजन यूएस पर ‘नेवर फॉरगेट 1984’ मर्चेंडाइज भी बेचती है।

भिंडरावाले और खालिस्तानी मर्चेंडाइज अमेज़न यूएस स्टोर पर उपलब्ध हैं। (साभार: अमेजन यूएस

भिंडरावाले, खालिस्तान के समर्थन वाले अन्य उत्पादों में खालिस्तानी झंडे, पोस्टर और बहुत कुछ शामिल हैं।

भिंडरावाले और खालिस्तानी मर्चेंडाइज अमेज़न यूएस स्टोर पर उपलब्ध हैं। (साभार: अमेज़ॅन यूएस)
भिंडरावाले और खालिस्तानी मर्चेंडाइज अमेज़न यूएस स्टोर पर उपलब्ध हैं। (साभार: अमेज़ॅन यूएस)

भारत में खालिस्तान या भिंडरावाले का समर्थन करने वाली वेबसाइटें

भारत में Amazon, Flipkart जैसी ई-कॉमर्स दिग्गज भारत में ऐसे उत्पाद नहीं बेचती हैं, लेकिन कुछ वेबसाइटें हैं जो खुले तौर पर भिंडरावाले के पोर्ट्रेट वाली टी-शर्ट बेचती हैं। इसमें पंजाबी अड्डा और डेजर्ट कार्ट जैसी वेबसाइट शामिल हैं। पंजाबी अड्डा कंपनी पंजाब में स्थित है और इसका संचालन 1669 स्टूडियो करता है।

वहीं डेजर्ट कार्ट की बात करें तो यह यूएई की कंपनी है, जो भिंडरावाले और खालिस्तान से जुड़े प्रोडक्ट को अमेरिका से भारत में आयात करने की पेशकश करती है।

भारत के बाहर भिंडरावाले से जुड़े सामान बेचने वाली अमेरिकी कंपनियाँ

भिंडरावाले और खालिस्तान से जुड़े सामानों को बेचने वाली वेबसाइटों की बात करें तो ऐसी अनगिनत वेबसाइटें हैं जो भारत के बाहर भिंडरावाले और खालिस्तान से संबंधित माल बेचती हैं। इनमें रेड बबल, जैज़ल और टी पब्लिक शामिल हैं, लेकिन ये यहीं तक सीमित नहीं हैं।

भिंडरावाले की टी-शर्ट के साथ रेडबबल का स्क्रीनशॉट। (साभार: रेडबबल)
खालिस्तान से संबंधित जैजल पर उपलब्ध कुछ टी-शर्टों का स्क्रीनशॉट। (साभार: जैजल)
टी पब्लिक के पास आतंकी भिंडरावाले और खालिस्तान से जुड़े सामानों का बड़ा संग्रह है। (साभार: टीपब्लिक)

Amazon India पर भिंडरांवाले से जुड़ी किताबें

अमेजन इंडिया पर भिंडरावाले पर कई किताबें उपलब्ध हैं। हमने भारतीय स्टोर में कम से कम चार किताबें देखीं हैं, जिनमें भिंडरावाले को ‘संत’ बताया गया है। अगर इन पुस्तकों को अमेजन से हटा दिया जाता है, तो भी अन्य प्लेटफार्मों या किताबों की दुकानों पर यह उपलब्ध होंगी। समस्या यह है कि देश के अधिकांश हिस्सों में विशेष रूप से पंजाब में, जहाँ सिख समुदाय का एक वर्ग अभी भी भिंडरावाले को ‘संत’ मानता है वहाँ किताबें, मग, पोस्टर और अन्य सामग्री बिना किसी समस्या के मुद्रित और वितरित करना काफी आसान है।

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने हाल ही में लखीमपुर की घटना के दौरान भिंडरांवाले की टी-शर्ट पहने एक सिख युवक का पक्ष लिया था। उन्होंने सिख युवाओं की निंदा करने से इनकार किया और कहा कि सरकार भिंडरांवाले को आतंकवादी मानती है, लेकिन कुछ लोग उन्हें एक संत के रूप में देखते हैं।

तो इस प्रकार निष्कर्ष रूप में हम कह सकते हैं कि Amazon India भारत में भिंडरांवाले या खालिस्तान से संबंधित प्रॉडक्ट नहीं बेचता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किए जा रहे स्क्रीनशॉट अमेजन यूएस और अन्य जगहों के हैं।

‘वो आतंकवादी थे, खालिस्तानी थे… किसान नहीं’ – लखीमपुर खीरी हिंसा से पीड़ित एक पिता हैं TV-मोबाइल से दूर… बेटे शुभम मिश्रा को मरते नहीं देख सकते

लखीमपुर खीरी हिंसा में भाजपा कार्यकर्ता शुभम मिश्रा की मृत्यु पर उनके परिजनों ने मीडिया से बातचीत में उग्र किसानों की भीड़ को आतंकी करार दिया। शुभम के चाचा अनूप मिश्रा ने जहाँ प्यारा हिंदुस्तान यूट्यूब चैनल से बात करते हुए स्पष्ट तरह से आतंकवादी शब्द का इस्तेमाल किया। वहीं उनके पिता विजय मिश्रा ने बताया कि गाड़ियाँ उप-मुख्यमंत्री को लेने जा रही थीं। वहीं पहले गाड़ी पर हमला हुआ जिससे गाड़ी अनियंत्रित हुई और कुछ लोगों को चोटें आईं। इसके बाद सबने शुभम को पकड़कर मारना सुरू कर दिया और इतना मारा कि वो मर गया। 

शुभम के पिता विजय मिश्रा कहते हैं कि घटना के बाद से उन्होंने टीवी या मोबाइल कुछ नहीं खोला। हर जगह सिर्फ यही सब दिखा रहे हैं और वो अपने बच्चे को मरता हुआ नहीं देख सकते। उनके मुताबिक, शुभम को मारने वाली किसान नहीं थे इसके पीछे आतंकी संगठनों का हाथ था।

शुभम के परिजन बताते हैं कि इस घटना में कहीं से कहीं तक किसान नहीं था, ये उग्रवादियों का काम है। उनके अनुसार, अगर किसान वहाँ थे तो सिर्फ 25 फीसद बाकी 75 प्रतिशत बाहरी आए थे जिन्होंने माहौल ऐसा किया। ये सब सुनियोजित था। इसलिए लोग बुलाए गए थे। परिजन पूछते हैं जैसे लोगों को मारा गया, क्या वैसे कोई किसान हो सकता है?

योगी सरकार द्वारा स्थिति को संभालने के प्रयासों में शुभम के परिवार ने कहा कि जो भी योगी सरकार कर रही है वो बिलकुल सही कर रही है। इन सब चीजों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

शुभम के पिता कहते हैं कि वहाँ (प्रदर्शन में) बैठे सभी लोगों ने मन बना रखा था कि ‘सांसद’ को मारना है, उनके प्रतिनिधियों को मारना है। वो लोग अटैक करने की फिराक में थे लेकिन कामयाब नहीं हुए। विजय मिश्रा के अनुसार, प्रदर्शन पर बैठे कुछ लोगों ने काले कपड़े पहने थे तो कुछ ने खालिस्तानी कपड़े भी पहने हुए थे। उन्हें लगता है कि वो सब खालिस्तानी ही थे। राकेश टिकैत को लेकर उन्होंने कहा कि जो बयानबाजी जगह-जगह कर रहे हैं वो सब सिर्फ अपना वर्चस्व बनाने के लिए है।

परिजन कहते हैं कि जो लड़के (भाजपा कार्यकर्ता) मारे गए हैं उस पर न किसान नेता ने कुछ कहा है और न ही अखिलेश यादव ने। आखिर ये भी तो किसान के बच्चे हैं। उनको सिर्फ बीजेपी का क्यों बताया जा रहा है। विपक्षी सिर्फ इन सब चीजों को जाल बना कर फैला रहे हैं और उपद्रव करवाने की साजिश रच रहे हैं। सब किसानों की बात कर रहे हैं लेकिन इन लड़कों (भाजपा कार्यकर्ताओं) के बारे में बात नहीं हो रही।

परिवार का कहना है कि गाड़ी में बैठे लोगों से जो हुआ वो चोटिल होने के बाद हुआ। वह अपनी जान बचा रहे थे। लेकिन बाद में जो किया गया वो क्या था। गाड़ी से उतारकर सबको मारा गया। ये कितना बड़ा जुल्म है। भाजपा कार्यकर्ता के परिजनों ने इस पूरे किसान आंदोलन को लेकर कहा कि अब ये खत्म होना चाहिए। इसके बल पर विपक्ष अपनी रोटियाँ सेंक रहा है।

मृतक के पिता माँग करते हैं कि जैसा कि शुभम को वीडियो में मारते हुए 8-9 लोगों को दिखााया गया है उन सभी को सरकार को ढूँढकर बाहर निकालना चाहिए और उन पर कार्रवाई की जानी चाहिए। वह कहते हैं कि वो भी किसान ही हैं जिन्हें किसान संगठन बनाकर बदनाम किया जा रहा है। इस आंदोलन का कोई मतलब नहीं है। ये आंदोलन बंद होना चाहिए। इसमें बहुत गलत हो रहा है। परिजन नहीं चाहते जैसे उनके शुभम को छीना गया वैसे किसी और का बच्चा छीना जाए।

उल्लेखनीय है कि लखीमपुर खीरी में ‘किसान प्रदर्शनकारियों’ ने जो हिंसा की, उसमें मारे गए लोगों में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्रा टेनी के ड्राइवर हरिओम मिश्रा, भाजपा कार्यकर्ता श्याम सुंदर निषाद और ‘ABP News’ के पत्रकार रमन कश्यप के अलावा एक नाम शुभम मिश्रा का भी है। शुभम मिश्रा युवा थे। डेढ़ साल पहले ही शादी हुई थी। वो भाजपा से जुड़े हुए थे। उनका एक छोटा सा बच्चा भी है। परिवार की स्थिति बदहाल है। शुभम के पिता विजय मिश्रा ने पुलिस में जो तहरीर दी है, उसमें उन्होंने बताया है कि न सिर्फ उनके बेटे को मार डाला गया, बल्कि उनका पर्स और सोने की चेन भी गायब है। आशंका जताई जा रही है कि उनकी हत्या के बाद हत्यारे सोने की चेन और पर्स लेकर भी निकल गए। मेडिकल रिपोर्ट में भी पुष्टि हुई है कि डंडों से मारे जाने और घसीटे जाने के कारण उनकी मृत्यु हुई। 

कश्मीर स्वर्ग नहीं, हमारे लिए नर्क है: मृतक शिक्षक दीपक चंद के रिश्तेदार ने कहा- ‘अभी भी मिल रही है धमकी’

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में आतंकी लगातार गैर-मुस्लिम समुदाय को टारगेट कर हमले कर रहे हैं। इसी क्रम में गुरुवार को श्रीनगर में दो शिक्षकों की हत्या कर दी गई। इस केंद्र-शासित प्रदेश के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस्लामी आतंकियों की इस कायराना हरकत की कड़ी निंदा की है।

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यपाल सिन्हा ने घटना की निंदा करते हुए कहा, “निर्दोंष लोगों पर आतंकी हमले करने वालों को करारा जबाव दिया जाएगा। आतंकी और उनके आका जम्मू-कश्मीर में शांति भंग करने, यहाँ की प्रगति को रोकने और खलल पैदा करने में कभी भी सफल नहीं होंगे।”

वहीं, इस घटना को लेकर राज्य के डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा, “बीते कुछ दिनों में जिस तरह से आम नागरिकों को टारगेट करने की घटनाएँ हुई हैं, ये अपने आप में दरिंदगी, वहशत और दहशत का बड़ा उदाहरण है। इसमें समाज की सेवा में लगे बेगुनाह लोग, जिनका किसी से भी कोई लेना-देना नहीं है उन्हें टारगेट किया जा रहा है। इस तरह की हत्याएँ इसलिए की जा रही हैं, ताकि एक साम्प्रदायिक माहौल बनाया जा सके। ये लोग भाइचारे को बिगाड़ने की साजिश रच रहे हैं।”

डीजीपी ने आगे कहा, “ये पाकिस्तान की साजिश है। वे लोग कश्मीर की इमेज को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं। ये स्थानीय कश्मीरी मुस्लिमों को बदनाम करने की साजिश है, जिसे हम जल्द ही बेनकाब करेंगे।”

हत्या के पीछे पाक का हाथ

श्रीनगर के मेयर जुनैद मट्टू ने दावा किया है कि इस आतंकी हमले के पीछे पाक समर्थित तत्व हैं। उन्होंने कहा, “हम सभी को सड़कों पर उतरना चाहिए और एक समाज के रूप में एक स्टैंड लेना चाहिए कि हम इसकी अनुमति नहीं देंगे। मैं सभी समुदायों से एक साथ खड़े होने की अपील करता हूँ। कश्मीर सभी धार्मिक विश्वासों के लोगों का है।”

गुरुवार को आतंकी हमले में अपनी जान गंवाने वाले शिक्षक दीपक चंद के एक रिश्तेदार का कहना है, “हमें अभी भी धमकी भरे फोन आ रहे हैं। कश्मीर स्वर्ग नहीं है, नर्क है। हमें पिछले 30 सालों से निशाना बनाया जा रहा है।”

बता दें कि बीते कुछ दिनों से जिस तरह से कश्मीर में गैर मुस्लिम समुदाय के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। इससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जिस तरह से 90 के दशक में आतंकियों ने घाटी में आतंक फैलाया था उसकी फिर से शुरुआत की जा रही है।

आर्यन खान से पूछताछ के आधार पर 2 गिरफ्तार, NCB ने कहा- ‘बहुत जानकारी मिली, 4 दिन की कस्टडी और चाहिए’

ड्रग्स मामले में बॉलीवुड ऐक्टर शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की गिरफ्तारी के बाद हिरासत में पूछताछ के दौरान हुए खुलासे को लेकर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने खुलासा किया है। एनसीबी ने कोर्ट को बताया कि हिरासत में आर्यन खान से पूछताछ के आधार पर मुंबई पुलिस ने आचित कुमार नाम के शख्स और एक विदेशी नागरिक को गिरफ्तार किया है। एनसीबी ने इस आधार पर आर्यन खान की हिरासत को 11 अक्टूबर तक बढ़ाने की माँग कोर्ट से की है।

जाँच एजेंसी का कहना है कि आचित कुमार ने आर्यन खान और अरबाज मर्चेंट को ड्रग्स की आपूर्ति की थी और आर्यन खान को गाँजा का मुख्य आपूर्तिकर्ता वही है। वहीं, बीती रात गिरफ्तार विदेशी नागरिक के पास से एजेंसी ने ड्रग बरामद किया है। कोर्ट ने आचित कुमार को 9 अक्टूबर तक के लिए एनसीबी की हिरासत में भेज दिया है।

एनसीबी का कहना है कि ड्रग्स मामले में लगातार रेड डाली जा रही है और अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अगर रेड में कोई गिरफ्तार होता है उसे वर्तमान आरोपी (आर्यन खान) से सामना कराना जरूरी है। एनसीबी का कहना है कि ह्वाट्सऐप चैट से साफ पता चलता है कि इन लोगों का नेक्सस है। बता दें कि आर्यन खान और अन्य आरोपियों के फोन फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजे गए थे।

एजेंसी ने कोर्ट से आर्यन खान के साथ-साथ गिरफ्तार अन्य आरोपियों- अरबाज मर्चेंट, मुनमुन धमेचा की हिरासत की अवधि को भी 11 अक्टूबर तक बढ़ाने का आग्रह किया है। दरअसल, आर्यन खान के दोस्त अरबाज मर्चेंट के वकीलों ने कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की है और छापेमारी की सीसीटीवी फुटेज की माँग की है। खबर लिखे जाने तक इस मामले में कोर्ट में सुनवाई जारी है।

ज्ञात हो कि एनसीबी को मुंबई की ड्रग्स पार्टी का भंडाफोड़ करने और बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को गिरफ्तार करने में एक सप्ताह का समय लगा है। मिड-डे ने अपनी रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मुंबई तट से दूर कॉर्डेलिया क्रूज में रेव पार्टी का भंडाफोड़ करने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने एक प्लान बनाया था।इस हाई-प्रोफाइल छापेमारी के लिए NCB ने अपने 25 अधिकारियों को काम पर लगाया था।

मिड-डे के अनुसार, उनमें से 6 अधिकारी पार्टी के कपड़े पहनकर क्रूज शिप पर चढ़े थे। इस दौरान उन्हें आर्यन काफी घबराए हुए लग रहे थे, जिससे एनसीबी के अधिकारियों का शक और बढ़ गया कि समुद्र के बीच ये आरोपित ड्रग्स लेने की तैयारी कर रहे हैं। एक हफ्ते पहले NCB को सूचना मिली थी कि अमीर परिवारों के कुछ बच्चे क्रूज शिप पर ड्रग्स लेने की योजना बना रहे हैं, जिसे वे मिड-सी पार्टी में ले सकते हैं। जैसे-जैसे अधिकारी इस मामले की तह तक गए उन्हें पता चला कि ड्रग्स लेने की तैयारी कॉर्डेलिया क्रूज़ पर की जा रही है।

एनसीबी के एक अधिकारी ने कहा, “उस समय हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी कि ये बच्चे कौन थे। हमने तय किया था कि एनसीबी अधिकारी पार्टी में जाने वालों लोगों के बीच शामिल होंगे, क्योंकि यही ड्रग्स लेने वालों को रंगे हाथों पकड़ने का एकमात्र तरीका था।”

उन्होंने आगे बताया, ”कई बार नशीले पदार्थों की छापेमारी में अधिकारियों के पहुँचने से पहले ही अपराधियों को अक्सर सतर्क कर दिया जाता है। इससे वह ड्रग्स को ठिकाने लगाने में कामयाब हो जाते हैं और हमें मामले को साबित करने के लिए अदालत में बहुत मुश्किल हो जाती है।”

J&K में हुई हत्याओं के लिए मोदी सरकार जिम्मेदार’ – इस्लामी आतंकियों के बचाव में लिबरल गिरोह, सेना पर भी इल्जाम

कश्मीर घाटी में एक बार फिर जानबूझकर हिंदुओं का खून बहाया गया है। पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने स्कूल में टीचरों की आईडी देख सिर्फ दो को गोली मारी। इनमें एक सिख टीचर थी और दूसरे कश्मीरी पंडित थे। घटना ने सभी को झकझोरा और अब इस पर तमाम सवाल हो रहे हैं। मृतकों के घरों में जहाँ मातम है। वहीं देश की लिबरल और कट्टर जमात ने इस मौके पर सरकार की आलोचना का अवसर खोजा है और आतंकियों की बर्बरता को छिपाने का प्रयास किया है।

फारूख अब्दुल्लाह की जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्रवक्ता इफरा जन ने इस मामले में आतंकियों की बर्बरता पर बोलने की बजाय दक्षिणपंथियों को कोसना उचित समझा और बताने लगीं कि जब आर्टिकल 370 हटा था तो कैसे कम बुद्धि और तेज आवाज वाले दक्षिणपंथी नतीजों को महसूस किए बिना जबरन जनसांख्यिकीय परिवर्तन के लिए बहस करने के लिए उठ गए थे। इफरा के अनुसार, खून दक्षिणपंथियों के हाथ में भी लगा है।

तारिक अनवर ने तो बातें घुमाते हुए घटना के लिए अमित शाह को जिम्मेदार कहा। वह लिखते हैं, “मोदी सरकार ने कहा था कि आर्टिकल 370 के हटने से स्थिति सामान्य होगी। अब कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश है जो अमित शाह के अंतर्गत आता है। श्रीनगर में नागरिकों की मौत के लिए कौन जिम्मेदार है।”

नेशनल हेराल्ड की एडिटर अश्लीन मैथ्यू ने कहा, “मोदी सरकार ने वादा किया था आर्टिकल 370 के बाद हर आतंकी गतिविधि को खत्म होगी और घाटी में शांति आएगी। हिंदू-मुस्लिम करने की जगह सरकार से असहज सवाल पूछना चाहिए।”

हिंदूफोबिक वामपंथन कविता कृष्णन कहती हैं, “घाटी में कश्मीरी पंडितों की हत्या भयावह है। आतंकियों को जिम्मेदार ठहराने के साथ मोदी सरकार को याद दिलाना मत भूलिए- क्या उन्होंने कहा नहीं था कि आर्टिकल 370 हटा तो ऐसी हत्याएँ खत्म होंगी।” अन्य लिबरल की तरह कविता कृष्णन ने आगे इन हत्याओं का ठीकरा मोदी सरकार पर फोड़ा।

कॉन्ग्रेस नेता सलमान निजामी भी अपने ट्वीट आर्टिकल 370 का मुद्दा उठाकर लिखते हैं, “कश्मीर में पिछले 2 दिनों में 5 नागरिकों की मौत। यह शुद्ध पागलपन है। भाजपा ने कश्मीर को 1990 के दशक में वापस धकेल दिया है और धारा 370 को एकतरफा रद्द कर दिया है। इसका खामियाजा निर्दोषों को भुगतना पड़ रहा है…।”

कश्मीरनामा के लेखक अशोक कुमार पांडे इन हत्याओं के बाद सेना और सुरक्षाबलों पर सवाल खड़ा करते हैं। वह पूछते हैं कि इतनी सेना, पुलिस, राज्यपाल शासन, केंद्र में शासन और 370 हटाने के बाद वह क्यों हो रहा जो 17 साल से नहीं हुआ था।

अब यहाँ ये बात मालूम हो कि आर्टिकल 370 के रद्द होने के ख़िलाफ़ वामपंथी हमेशा से थे। लेकिन आज जब घाटी में हिंदू और सिख को भीड़ से निकाल कर मारने की बात सामने आई तो ये लोग उस कट्टरपंथ और आतंकवाद के ख़िलाफ़ बोलने की जगह अपना एजेंडा चलाने में लगे हैं। शायद इन्हें लगा कि हिंदू और सिखों की मौत पर ये एक बार दोबारा अपनी रोटियाँ सेंक सकते हैं। लेकिन इनसे पूछने वाली बात ये है कि क्या अगर आर्टिकल 370 को दोबारा घाटी में लागू कर दिया जाए तो ऐसी घटना खत्म हो जाएगी? क्या अगर आर्टिकल 370 रिस्टोर हो तो आतंकी दोबारा घाटी में नहीं आएँगे? जवाब है नहीं। 

1990 में जो कश्मीर में हुआ वो सबूत है इस बात का कि आर्टिकल 370 ने घाटी में कट्टरपंथ को खुलेआम बढ़ने का हक दिया हुआ था। मगर कट्टरपंथियों के साथ वामपंथियों चाहते हैं कि लोग अब इनकी बात पर गौर करें और सोचें कि यही तो हालात पहले भी थे, मोदी सरकार ने बदल क्या दिया। इस घटना में आतंकियों को पकड़ने की माँग से ज्यादा सरकार, सेना को कोसना स्पष्ट तौर पर सिर्फ मौकापरस्ती है जो आतंकियों का मजहब देख उनके किए अपराध का सारा ठीकरा भारत सरकार पर फोड़ देती है।

वरुण गाँधी, सुब्रमण्यम स्वामी और मेनका गाँधी BJP की टॉप लिस्ट से बाहर: सोशल मीडिया से हटाया भाजपा का निशान, देखें पूरी लिस्‍ट

लखीमपुर खीरी हिंसा के बीच भाजपा ने नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी (National Executive) की घोषणा की है। बीजेपी की इस 80 सदस्यीय कार्यकारिणी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर कई केंद्रीय मंत्रियों, राज्य के कई नेताओं के नाम शामिल हैं। लेकिन इस लिस्ट में सुब्रमण्यम स्वामी, वरुण गाँधी और उनकी माँ मेनका गाँधी को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। उनकी जगह कॉन्ग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया को जगह मिली है। बीजेपी के इस ऐक्शन से ऐसा साफ पता चल रहा है कि वरुण और सुब्रमण्यम स्वामी को उनके बागी तेवरों की सजा मिली है।

कई मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है क‍ि उत्‍तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई ह‍िंसा में चार क‍िसानों समेत आठ लोगों की मौत को लेकर सांसद वरूण गाँधी ट्वीट के जरिए लगातार योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साध रहे थे। इतना ही नहीं उन्‍होंने कुछ द‍िनों पहले अपने ट्वीट के बायो से बीजेपी भी हटा ल‍िया था। और अब कार्यकारिणी से बाहर होने के बाद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी अपना ट्विटर बायो बदल लिया है।

इसके साथ ही कार्यसमिति के लिए विशेष आमंत्रित और स्थाई आमंत्रित सदस्यों की भी घोषणा की गई है। बीजेपी राष्ट्रीय कार्यसमिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत 80 नेताओं को जगह दी गई है। इस सूची में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंक्षी राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, पीयूष गोयल, किरेन रिजीजू, गिरिराज सिंह, एस जयशंकर, मनोत तिवारी समेत कई नाम शामिल हैं। हर्षवर्धन, रविशंकर प्रसाद और प्रकाश जावड़ेकर जैसे पूर्व केंद्रीय मंत्री भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बने हुए हैं।

साभार- दैनिक जागरण

वहीं, इसमें नए चेहरों को भी जगह दी गई है। हाल ही में कैबिनेट में शामिल किए गए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, मीनाक्षी लेखी, मनसुख मंडाविया और ज्योतिरादित्य सिंधिया को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया गया है। नीचे आप पूरी लिस्ट देख सकते हैं। बता दें कि 80 नियमित सदस्यों के अलावा, कार्यकारिणी में 50 विशेष आमंत्रित और 179 स्थायी आमंत्रित सदस्य भी होंगे।

साभार- दैनिक जागरण

गौरतलब है कि कार्यकारिणी पार्टी का एक प्रमुख विचार-विमर्श करने वाला निकाय होता है जो सरकार के सामने आने वाले प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करता है और संगठन के एजेंडे को आकार देता है। कोरोना महामारी के कारण लंबे समय से बीजेपी में इसकी बैठक नहीं हुई है। वही अब इस घोषणा के बाद भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक नवंबर में होने वाली है। जेपी नड्डा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यह पहली बैठक होगी।