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उत्तराखंड के टिहरी डैम पर बनी अवैध मस्जिद पूरी तरह साफ: प्रशासन ने पर्यटन विभाग की जमीन खाली करवाई, देखें तस्वीरें

उत्तराखंड के टिहरी बाँध के किनारे खांडखाला में पर्यटन विभाग की जमीन पर बने अवैध मस्जिद को आखिरकार अधिकारियों ने हटा दिया है। ध्वस्तीकरण गुरुवार (30 सितंबर 2021) से शुरू हो गया था। टिहरी डैम की भागीरथी पुरम खांडखाला में पर्यटन विभाग की भूमि पर अवैध रूप से बनी मस्जिद को स्थानीय लोग और विश्व हिन्दू परिषद कई दिनों से हटाने की माँग कर रहे थे। इसको लेकर आज जिला प्रशासन और पुलिस ने मस्जिद कमेटी के साथ बैठक की। जिसके बाद मस्जिद कमेटी की सहमति से पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में मस्जिद को हटाया गया।

टिहरी बाँध के पास बना अवैध मस्जिद हुआ ध्वस्त (साभार: अक्षत बिलजवान)

उल्लेखनीय है कि इस अवैध मस्जिद के कारण लोगों को होने वाली समस्याओं को ऑपइंडिया ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कार्यकर्ता अक्षत बिलजवान ने ऑपइंडिया बातचीत में कहा कि कवरेज के कारण अवैध मस्जिद पर देशव्यापी हंगामा हुआ और अंत में प्रशासन ने इसे हटाने का फैसला किया। इस मामले में ऑपइंडिया की खबर के बाद सोशल मीडिया पर हैशटैग #RemoveTehriMosque ट्रेंड करने लगा था।

नेटिजन्स ने अवैध मस्जिद को हटाने के लिए स्थानीय लोगों की माँग को और अधिक आवाज दी। त्वरित कार्रवाई के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को टैग भी किया।

टिहरी बाँध के पास बना अवैध मस्जिद हुआ ध्वस्त (साभार: अक्षत बिलजवान)

गुरुवार को मस्जिद तोड़ने की कार्रवाई शुरू होने की जानकारी अक्षत ने ऑपइंडिया को फोन कर दी। उन्होंने कार्रवाई का वीडियो भी साझा किया, जिसमें पिछले 20 सालों से बने अस्थायी ढाँचे को हटाया जा रहा। सरकारी जमीन पर कब्जा कर खड़े किए गए इस ढाँचे का स्थानीय लोग लंबे वक्त से विरोध कर रहे थे।

टिहरी बाँध के पास बना अवैध मस्जिद हुआ ध्वस्त (साभार: अक्षत बिलजवान)

एक वीडियो मैसेज में अक्षत ने बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और हिंदू जागरण मंच समेत सभी हिंदू संगठनों को इस मामले में समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने अवैध मस्जिद पर कार्रवाई के लिए प्रशासन को धन्यवाद भी दिया। इसके साथ ही अक्षत ने क्षेत्र के मुस्लिम समुदाय को भी धन्यवाद दिया, जिन्होंने अवैध ढाँचे को हटाने में सहयोग किया।

टिहरी बाँध के पास बना अवैध मस्जिद हुआ ध्वस्त (साभार: अक्षत बिलजवान)

‘जेम्स बॉन्ड का चाचा, लोटा’: स्वामी ने बग्गा को बताया पुराना अपराधी तो पहुँचा लीगल नोटिस – 24 घंटे में माँगो माफ़ी

भाजयुमो के राष्ट्रीय महामंत्री तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी को कानूनी नोटिस भेजा है। स्वामी ने दावा किया था कि तजिंदर बग्गा का ‘आपराधिक इतिहास’ है। तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने अपने वकील विकास पड़ोरा के माध्यम से भेजी गई आपराधिक मानहानि की नोटिस में कहा है कि अगर स्वामी एक हफ्ते के भीतर माफ़ी नहीं माँगते हैं तो उनके खिलाफ अदालत में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

सुब्रमण्यम स्वामी ने एक ट्वीट में लिखा था, “दिल्ली के पत्रकारों ने मुझे बताया है कि भाजपा में शामिल होने से पहले तजिंदर पाल सिंह बग्गा को कई बार जेल हो चुकी है। छोटे-छोटे अपराधों के लिए नई दिल्ली मंदिर मार्ग थाने में उनके विरुद्ध कई मामले दर्ज थे। क्या ये सही है? अगर सही है तो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पता होना चाहिए।” लोगों ने उन्हें बताया कि बग्गा बचपन से ही भाजपा से जुड़े रहे हैं।

उनके पिता भी भाजपा के सक्रिय नेताओं में से एक रहे हैं। तजिंदर पाल सिंह बग्गा को भाजयुमो में मिले पद और ट्विटर पर उनके साढ़े 7 लाख फॉलोवर्स का हवाला देते हुए उनके वकील ने स्वामी से कहा है कि स्वामी के भी 1 करोड़ से अधिक फॉलोवर्स हैं और उनके हर ट्वीट लाखों लोगों तक पहुँचते हैं। कहा गया है कि इससे तजिंदर बग्गा की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँची है। स्वामी ने उनके मुवक्किल की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने के लिए जानबूझ कर ये ट्वीट किया था।

नोटिस में कहा गया है कि वो उन FIRs के सीरियल नंबर्स पेश करें, जो उनके मुताबिक मंदिर मार्ग थाने में तजिंदर पाल सिंह बग्गा के खिलाफ दर्ज हैं या थे। साथ ही उनके खिलाफ दर्ज शिकायतों के डीडी नंबर्स भी देने को कहा गया है। साथ ही उन तारीखों के डिटेल्स माँगे गए हैं, जब बग्गा की गिरफ़्तारी हुई या उन्हें जेल भेजा गया। साथ ही उन पत्रकारों (स्रोतों) के नाम भी माँगे गए हैं, जिन्होंने उन्हें ये सूचनाएँ दी।

इस ट्वीट के लिए तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने सुब्रमण्यम स्वामी पर तंज कसते हुए उन्हें ‘जेम्स बॉन्ड का चाचा’ भी बताया था। उन्होंने स्वामी का मजाक उड़ाते हुए कई मीम्स भी रीट्वीट किए हैं। उन्होंने स्वामी को ‘लोटा’ बताते हुए लिखा था, “ये मोदी है। तुम्हारे जैसे 3600 ख़त्म करने आए और गए। एक बात याद रखना – नमक स्वादानुसार और अकड़ औकात अनुसार।” उन्होंने स्वामी को ‘कॉन्ग्रेस एजेंट’ बताने वाले कई ट्वीट्स को भी आगे बढ़ाया।

‘मूर्ति पूजन नैतिक तौर पर गलत’: दुर्गा पूजा की अनुमति न देकर पछता रहा ईसाई देश, अब माँगी माफी

ईसाई बहुसंख्यक आबादी वाला एक देश जिसका नाम ‘पापुआ न्यू गिनी’ है। वहाँ कुछ दिन पहले कोविड कंट्रोलर डेविड मैनिंग ने हिंदुओं को दुर्गा पूजा के लिए किसी आयोजन की अनुमति देने से मना कर दिया था। उनका तर्क था कि मूर्ति पूजन नैतिक तौर पर गलत है और ईसाइयों की भावनाओं के विरुद्ध है। अब अपने इसी आदेश की बाबत उन्होंने माफी माँगी है।

इस माफी की वजह है- जनता में व्याप्त हुआ रोष। दरसअल, जब कोविड कंट्रोलर ने दुर्गा पूजा की बाबत अपना बयान जारी किया तो स्थानीयों में आक्रोश फैल गया, जिसके बाद मैनिंग ने एक माफी पत्र जारी किया और पिछले बयान को ‘गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण त्रुटि’ करार दिया।

मैनिंग ने पत्र में माफी माँगते हुए कहा, “18 सितंबर 2021 को डिप्टी कंट्रोलर के कार्यालय से मेरे लिए एक मसौदा आया था, जिसमें मुझे 12-17 अक्टूबर 2021 तक देवी दुर्गा की पूजा करने के आपके निवेदन को अनुमोदित नहीं करने को कहा गया था। राष्ट्रीय महामारी अधिनियम-2020 के नियंत्रक के रूप में मैंने इसका उत्तरदायित्व लिया। मैंने ही कोरोना उप नियंत्रक कार्यालय को विश्वास दिलाया था। दुर्भाग्य से इस मामले में मेरा विश्वास गलत था।”

पत्र में आगे कहा गया है, “मैं इमानदारी से ‘मूर्ति पूजा’ और ‘नैतिक रूप से अनुचित और हमारे ईसाई मूल्यों के खिलाफ’ वाली टिप्पणी के लिए माफी माँगता हूँ। यह कमेंट अपने आप में बहुत ही गलत है और किसी भी तरह से मेरे व्यक्तिगत और पेशेवर विचारों को नहीं दिखाता है। मैं पापुआ न्यू गिनी की सरकार के प्रतिनिधि के रूप में हमारे देश में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का सम्मान करता हूँ।”

मैनिंग ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि दुर्गा पूजा समारोह के लिए अनुमति नहीं देने का बयान कोरोना संक्रमण के जोखिम पर आधारित था। अपने विवादित पत्र को लेकर मैनिंग ने कहा कि पत्र लिखने वाले को अनुशासन में रहने को कहा गया और उप नियंत्रक कार्यालय में भी इसे फिर से जाँचने को कहा गया, ताकि दोबारा ऐसा न हो।

इसके बाद मैनिंग ने प्रस्तावित कार्यक्रम के बारे में और जानकारी माँगी, जिसमें अपेक्षित संख्या और कोरोना से निपटने के प्रोटोकॉल भी शामिल थे, ताकि वो खुद व्यक्तिगत तौर पर एप्लीकेशन का मूल्यांकन कर सकें।

मैनिंग ने दोबारा माफी माँगते हुए कहा, “एक बार फिर मैं इस दुर्भाग्यपूर्ण गलती के लिए विनम्रतापूर्वक आपसे माफी माँगता हूँ और मैं आशा करता हूँ कि आप इस बात को मानेंगे कि ये जानबूझकर नहीं किया गया था। यदि आप मेरे साथ इस मामले पर व्यक्तिगत रूप से चर्चा करना चाहते हैं तो मैं इसके लिए तैयार हूँ।”

बता दें कि यह माफी उस पत्र के बाद आया है, जिसमें पापुआ न्यू गिनी के हिंदुओं को दुर्गा पूजा समारोह आयोजित करने की अनुमति से इनकार कर दिया था। पत्र में कहा गया था कि दुर्गा पूजा के लिए धार्मिक कार्यों की अनुमति देने से कोरोना के कारण नहीं बल्कि ‘मूर्ति-पूजा ईसाई मूल्यों के अनुरूप नहीं’ के कारण इनकार किया गया था।

पापुआ न्यू गिनी में ईसाईयत राज्य धर्म

पापुआ न्यू गिनी (PNG) ओशिनिया का एक देश है, जिसमें न्यू गिनी द्वीप के पूर्वी आधे हिस्से और मेलानेशिया में इसके अपतटीय द्वीप शामिल हैं। इंडोनेशिया से सटा यह देश ऑस्ट्रेलिया के उत्तर में स्थित है। यह 1975 में ऑस्ट्रेलिया से आजाद हुआ था, लेकिन इसके बाद भी यह ब्रिटिश ‘राष्ट्रमंडल’ का सदस्य बना रहा। PNG की कुल आबादी 90 लाख है, जिसमें से करीब 98 फीसदी ईसाई हैं जबकि हिंदू आबादी महज हजारों में है।

इसके संविधान की प्रस्तावना में कहा गया है कि देश की स्थापना दो बुनियादी सिद्धांतों- सांस्कृतिक विरासत और ईसाई धर्म के आधार पर हुई थी। हालाँकि देश में कोई राज्य धर्म नहीं है। यहाँ के संविधान की प्रस्तावना में कहा गया है, “उन लोगों की रक्षा करना और उन्हें आगे बढ़ाने की प्रतिज्ञा है जो हमारे बाद हमारी महान परंपराएँ और ईसाई सिद्धांत हैं जो अब हमारे हैं”।

पापुआ न्यू गिनी की संसद का सत्र और अधिकांश सरकारी कार्यालय ईसाई प्रार्थनाओं के साथ खुलते और बंद होते हैं। पापुआ न्यू गिनी की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद ने पिछले साल संविधान के तहत देश को औपचारिक रूप से ईसाई घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। चर्च और राज्य के बीच भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार आक्रामक रूप से काम कर रही है। इसके तहत चर्चों को सब्सिडी देना, स्थानीय मामलों के प्रबंधन में मदद करने के लिए चर्च परिषदों की स्थापना करना शामिल है।

‘कम्प्रोमाइज करो फिर डायरेक्टर से मिल सकती हो’: टीवी की ‘गहना’ ने कास्टिंग काउच पर तोड़ी चुप्पी

स्‍टार प्‍लस का सीरियल ‘साथ निभाना साथिया 2’ टीवी के पॉपुलर शो में से एक है। इस सीरियल का पहला सीजन भी काफी हिट रहा था। दूसरे सीजन में किरदार बदले और नए कलाकारों के साथ कहानी आगे बढी। इस सीरियल में गहना का प्रमुख किरदार निभाती हैं अभिनेत्री स्‍नेहा जैन। उन्‍हें इस सीरियल की बदौलत जबरदस्‍त लोकप्रियता हासिल हुई है। आज स्‍नेहा जैन को घर-घर में पहचाना जाने लगा है। हालाँकि लोकप्रियता के इस शिखर तक पहुँचने के लिए उन्होंने काफी संघर्ष किया है। 

करियर के शुरुआत में वह कास्टिंग काउच का भी शिकार हुईं। स्‍नेहा जैन ने खुद इसका अनुभव साझा किया है। टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं ग्रेजुएशन में थी और उस दौरान साउथ फिल्मों के एक कास्टिंग डायरेक्टर ने मुझे फोन किया था। स्टूडेंट लाइफ पर बनने वाली एक फ‍िल्‍म के लिए मुझसे बात की गई। फिल्म में तीन कपल्स की कहानी को दिखाया जाएगा। मैंने अपना प्रोफाइल भेज दिया और मुलाकात के लिए हैदराबाद गई।”

स्नेहा जैन ने कहा, “जब मैं उस आदमी से मिली तो उसने मुझसे कॉम्प्रोमाइज करने के लिए कहा। मैं तो हैरान रह गई। उसने कहा कि कम्प्रोमाइज करते ही मैं डायरेक्टर से मिल सकती हूँ। मेकर्स मुझे फिल्म में काम करने के लिए मोटी रकम भी देंगे। उस आदमी ने कहा कि बस मुझे उसके साथ पूरा दिन बिताना होगा। मुझे यकीन हो गया था कि मैं गलत जगह फँस गई हूँ। मैंने उस आदमी को साफ मना कर दिया।”

स्नेहा के साफ मना करने के बाद भी वह वह बाज नहीं आया। स्नेहा ने आगे कहा, “उसने मुझे बताना शुरू किया कि यह कोई बड़ी बात नहीं है और हर कोई इसे करता है। मैंने उससे कहा कि मैं नहीं करती। मैं फेमस नहीं होना चाहती। अगर मुझे प्रोजेक्ट चाहिए तो मैं इसे अपनी टैलेंट के दम पर लूँगी। उसने मुझे एक हफ्ते बाद फिर से बुलाया और मुझे बताया कि डील अभी ओपन है। मैंने उस पर फिर से चिल्लाया और उसने इसके बाद भी मुझे रुकने के लिए कहा।”

ओटीटी पर बोल्ड कटेंट के साथ काम के बारे में बात करते हुए स्नेहा ने चुटकी लेते हुए कहा, “नहीं, एक्टिंग के मामले में मुझे कोई परेशानी नहीं है। अगर मुझे कुछ बोल्ड ऑफर मिलता है और यह वास्तव में शो की आवश्यकता है तो मैं यह करूँगी। मेरा परिवार भी काफी कूल है, उन्हें कोई समस्या नहीं होगी। मुझे नहीं लगता कि मैं एक लव सीन क्रिएट कर रही हूँ तो कुछ अश्लील है। मैं कुछ भी गलत कर रही हूँ। मैं एक अभिनेत्री हूँ और अपने कैरेक्टर के प्रति सच्चा रहना मेरा काम है। अगर मुझे एक किसिंग सीन की पेशकश की जाती है तो मैं ऐसा करूँगी क्योंकि उस समय मैं स्नेहा नहीं होती, मैं एक किरदार में होती हूँ।”

स्नेहा जैन को पहली बार 2016 में ‘कृष्णादासी’ में देखा गया था। उन्होंने ‘क्राइम पेट्रोल’ के कुछ एपिसोड में भी अभिनय किया और अब ‘साथ निभाना साथिया 2’ में नजर आ रही हैं।

ओडिशा के हिंदुओं को ईसाई बनाने के लिए पादरी करता था गाँव का दौरा, लालच देकर कराता था धर्मांतरण: ग्रामीणों ने दी चेतावनी

ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में जबरन धर्मांतरण करवाने वाले एक पादरी को ग्रामीणों ने बीते रविवार (सितंबर 26, 2021) धर दबोचा था। महेंद्र साहू नामक पादरी तंगरडीही गाँव में लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए लालच दे रहा था।

ऑर्गनाइजर रिपोर्ट के मुताबिक, पादरी नियमित तौर पर हिंदुओं को ईसाई बनाने के लिए तंगरडीही गाँव में आता था। ग्रामीणों के मना करने के बावजूद वह इस काम को बिन रोक टोक करता था। वह गाँव में दौरा करता था और ईसाई बनने का लालच देता था। ग्रामीणों ने जब उसे पकड़ा उस समय भी वह यही कर रहा था। लोगों ने उसकी हरकतों से तंग आकर एक एफिडेविट पर लिखवाया कि वो भविष्य में दोबारा कभी भी तंगरडीही गाँव में नहीं आएगा।

एक ग्रामीण ने बताया, “उसका एकमात्र इरादा हमारे लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करना था। उसके हमारे गाँव में आने का सभी ग्रामीणों ने विरोध किया था। इसलिए हमने उसे सलाह दी कि वह हमारे गाँव न आए। लेकिन उसने हमारी एक नहीं सुनी। 26 सितंबर को हमारे गाँव वालों के भी सब्र का बाँध टूट गया और इस मुद्दे पर एक बैठक बुलाई गई। ग्रामीणों ने महेंद्र साहू से एक लिखित बांड भरने के लिए कहा कि वह हमारे गाँव और ब्लॉक में दोबारा कभी नहीं आएगा।” ऑर्गनाइजर की रिपोर्ट में सुंदरगढ़ को ईसाई प्रचारकों का प्रमुख लक्ष्य बताया गया है।

ओडिशा में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू नहीं: VHP

मालूम हो कि ओडिशा राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून अस्तित्व में है, जिसे ओडिशा धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम 1967 नाम से जाना जाता है। इस मामले के बारे में बोलते हुए विश्व हिंदू परिषद के सुंदरगढ़ के सचिव राम चंद्र नाइक ने कहा, “ओडिशा धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम 1967 के तहत यह प्रावधान किया गया है कि कोई भी व्यक्ति बल प्रयोग या प्रलोभन या किसी कपटपूर्ण माध्यम से किसी व्यक्ति को प्रत्यक्ष या एक धार्मिक आस्था से दूसरे धर्म में परिवर्तित करने का प्रयास नहीं करेगा। लेकिन दुर्भाग्य से राज्य सरकार द्वारा अधिनियम को ठीक से लागू नहीं किया जा रहा है।”

झज्जर में डिप्टी CM का विरोध करने पहुँचे ‘किसानों’ ने बैरिकेडिंग तोड़ी, पुलिस से भिड़े

हरियाणा के झज्जर में शुक्रवार (अक्टूबर 1, 2021) को उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का कार्यक्रम था। बड़ी संख्या में कथित किसान इसका विरोध करने पहुँचे थे। इस दौरान उन्होंने बैरिकेडिंग भी तोड़ दी। उनको रोकने के लिए पुलिस को पानी की बौछार करनी पड़ी।

जब फसल बर्बाद हो गई तो उप मुख्यमंत्री किसानों का हाल जानने तक नहीं आए, जबकि वे दूसरे दूसरे कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे हैं। यही कारण है कि हम इसका विरोध कर रहे हैं। हंगामे के बाद SP राजेश दुग्गल और डिप्टी कमिश्नर श्याम लाल पूनिया भी मौके पर पहुँचे और प्रदर्शनकारियों से शांति बरतने की अपील की।

डिप्टी कमिश्नर पूनिया ने अपील करते हुए कहा, “आप लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर सकते हैं। हम भी आपके बच्चे हैं और हम सरकारी ड्यूटी पर हैं। कृपया हमें अपना कर्तव्य निभाने से न रोकें। यह कार्यक्रम समाज के लिए काम करने वाले एक संगठन द्वारा आयोजित है। कृपया कार्यक्रम को बाधित किए बिना अपना विरोध दर्ज करें।” 

पूनिया ने बताया कि सिर्फ पंद्रह लोगों को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करने की अनुमति दी गई थी। लेकिन बड़ी संख्या में प्रदर्शनकरी पहुँच गए थे। इससे पहले गुरुवार (सितंबर 30, 2021) को भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने हरियाणा की खट्टर सरकार को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर 1 अक्टूबर से धान खरीद नहीं शुरू हुई तो भाजपा के एमएलए, एमपी के घर का इस तरह घेराव करेंगे कि उनके घर का कुत्ता भी बाहर नहीं निकल पाएगा।

गौरतलब है कि कथित किसान प्रदर्शनकारी इससे पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की कई बैठकों और कार्यक्रमों को भी बाधित कर चुके हैं। बीते अगस्त में हरियाणा में कृषि कानूनों के खिलाफ भाजपा नेताओं के कार्यक्रमों का विरोध कर रहे किसानों ने भिवानी में रोड जाम कर पुलिस पर जानलेवा हमला भी किया था।

वहीं जनवरी में करनाल जिले के कैमला गाँव में ‘किसान महापंचायत’ के कार्यक्रम स्थल पर तोड़फोड़ की थी। यहाँ पर सीएम मनोहर लाल खट्टर किसानों की एक बड़ी सभा को संबोधित करने वाले थे। सीएम ने इस तोड़फोड़ के पीछे कॉन्ग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी का हाथ होने का आरोप लगाया था।

‘पत्रकार सिद्दीकी कप्पन ने मुस्लिमों को भड़काया, उन्हें पीड़ित दिखाया’: UP STF की चार्जशीट

उत्तर प्रदेश के हाथरस केस के दौरान सिद्दीकी कप्पन नामक एक पत्रकार गिरफ्तार हुआ था जिसके ख़िलाफ यूपी की स्पेशल टास्क फोर्स ने 5000 पेज की चार्जशीट दाखिल की थी। अब मीडिया में इसी चार्जशीट की कुछ महत्वपूर्ण बातें प्रकाशित हुई हैं। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हलफनामे में एक जाँच अधिकारी का डायरी नोट है। इसमें उन्होंने कप्पन के उन 36 आर्टिकल्स को हाईलाइट किया है जो उसके लैपटॉप से बरामद हुए थे। इन लेखों में निजामुद्दीन मरकज, एंटी सीएए प्रोटेस्ट, दिल्ली दंगे, राम मंदिर, शरजील इमाम जैसे मुद्दों पर बात है।

हलफनामे में बताया गया है कि कप्पन जिम्मेदार पत्रकार की तरह नहीं लिखता था। उसका काम सिर्फ मुस्लिमों को भड़काने का था। उसकी संवेदनाएँ माओवादी और कम्युनिस्टों के साथ थीं। एएमयू में हुए सीएए प्रोटेस्ट पर लिखे लेख में उसने ऐसे दिखाया था जैसे पीटे गए मुस्लिम पीड़ित हों और पुलिस ने उन्हें पाकिस्तान जाने को कहा हो।

एसटीएफ ने इस प्रकार की लेखनी को सांप्रदायिक बताया और इसका उल्लेख किया है कि जिम्मेदार पत्रकार सांप्रदायिक रिपोर्टिंग नहीं करते। कप्पन सिर्फ और सिर्फ मुस्लिमों को भड़काता था, जो कि पीएफआई का छिपा एजेंडा है।

बता दें कि कप्पन को पिछले साल अक्टूबर में पीएफआई सदस्य अतिकुर रहमान, मसूद अहमद और उनके ड्राइवर के साथ मथुरा में गिरफ्तार किया गया था। इन्हें देशद्रोह और यूएपीए के तहत हिरासत में लिया गया था। चार्जशीट में लगाए गए नोट का दावा है की कप्पन पीएफआई के थिंकटैंक की तरह काम कर रहा था। वह हिंदू विरोधी खबरें मलयायम में पब्लिश कराने की और दिल्ली दंगों को भड़काने की कोशिश कर रहा था।

पुलिस ने उस पर इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा और हेड कांस्टेबल रतन लाल की मौत को छिपाने की कोशिश करने और दिल्ली दंगों में निलंबित AAP पार्षद ताहिर हुसैन की भूमिका को कम दिखाने का भी आरोप लगाया। जाँच एजेंसी ने कहा कि कप्पन अपनी लेखनी में प्रतिबंधित संगठन सिमी के आतंक को नकारता रहा था। 

पुलिस ने ऐसे लोगों के बयान भी चार्जशीट में डाले हैं जो बताते हैं कि कप्पन और रहमान भीड़ को प्रशासन के विरुद्ध भड़काने में लगे थे। इस चार्जशीट में एसटीएफ ने मलयालम में लिखे उसके आर्टिकल और उनके अनुवाद के सैंकड़ों पन्ने जमा किए हैं। इसके साथ कॉल रिकॉर्ड, पीएफआई पदाधिकारियों के खातों में लेनदेन का विवरण भी प्रस्तुत किया गया है।

इसमें मंट टोल प्लाजा के इन्चार्ज  ज्ञानेंद्र सिंह सोलंकी का भी बयान है जहाँ उन्होंने कप्पन और रहमान के पीएफआई से जुड़े होने की बात, हाथरस जाते समय उनके पास से मिले 1,717 भड़काऊ पैम्पलेट बरामद होने की बात कही है।

अयोध्या में ईसाई धर्मांतरण का बड़ा गिरोह पकड़ाया: प्रार्थना सभा के नाम पर हिंदुओं का धर्म परिवर्तन, हिरासत में 40

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में ईसाई धर्मांतरण के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। यूपी पुलिस ने इस मामले में 40 लोगों को गिरफ्तार किया है। अयोध्या श्रीराम की जन्मभूमि है और बाबरी मंदिर विध्वंस और उसके बाद चल अदालती कार्यवाही के कारण एक संवेदनशील शहर भी है। आतंकियों के निशाने पर भी अयोध्या है। ऐसे में ईसाई धर्मांतरण गिरोह द्वारा यहाँ पाँव फैलाना बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है।

जिन 40 लोगों को हिरासत में लिया गया है, उनमें अधिकतर महिलाएँ हैं। जहाँ ये मामला सामने आया, वो जगह अयोध्या से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बीकापुर थाना के अंतर्गत ये मामला सामने आया। चाँदपुर गाँव के स्थानीय लोगों ने बताया कि SDM और पुलिस विभाग की छापेमारी में बड़ी संख्या में लोग मिले, जो येशु मसीह की प्रार्थना सभा के नाम पर धर्म-परिवर्तन के खेल का हिस्सा थे।

पुलिस-प्रशासन को इस सम्बन्ध में गुप्त सूचना मिली थी, जिसके बाद छापेमारी की गई। ‘पत्रिका’ की खबर के अनुसार, वहाँ प्रार्थना सभा में शामिल रवींद्र भारती ने बताया, “मैं हिन्दू धर्म को मानने वाला व्यक्ति हूँ। मुझे पता चला कि यहाँ येशु मसीह की प्रार्थना की जा रही है। मेरे घर में मेरी पत्नी सहित सभी लोग बीमार हैं। उनकी सलामती के लिए ही मैं इस प्रार्थना सभा में शामिल होने आया था, ताकि वो ठीक हो जाएँ।”

SDM अनुराग प्रसाद ने इस कार्रवाई के सम्बन्ध में जानकारी दी कि स्थानीय लोगों ने ही सूचना दी थी कि गाँव में कुछ धर्म-परिवर्तन कराने वाले लोग मौजूद हैं। इसके बाद पुलिस ने वहाँ पहुँच कर छानबीन शुरू की। उन्होंने कहा कि जाँच में मिले तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी। हाइवे के किनारे एक घर में ये सब चल रहा था। हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ जारी है। वहाँ कई हिन्दू समाज के लोग जमा थे। आरोपितों को कोतवाली ले जाया गया है।

68 साल की निर्मल सिंह की बहादुरी को सलाम कर रहा सोशल मीडिया: छड़ी से तेंदुए को मार भगाया, देखिए Video

मुंबई के गोरेगाँव इलाके में तेंदुए का आतंक बढ़ता ही जा रहा है। पिछले आठ दिनों में हुई पाँचवीं घटना में तेंदुए ने एक 20 साल के युवक को अपना निशाना बनाया है। तेंदुए ने गुरुवार (30 अक्टूबर, 2021) युवक पर उस वक्‍त हमला किया, जब वह अपने दोस्‍त के साथ घर जा रहा था। तेंदुए के हमले के बाद उसे गंभीर हालत में कूपर अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है। मुंबई के गोरेगाँव में पिछले कई दिनों से तेंदुए के हमले की खबर सामने आ रही है।

इससे पहले मुंबई के आरे कॉलोनी में एक तेंदुए ने बुधवार (29 सितंबर, 2021) को 68 साल की एक बुजुर्ग महिला निर्मल सिंह पर हमला किया। 68 साल की उम्र में भी जब जान पर बन आई तो महिला ने गजब की चुस्ती-फुर्ती और बहादुरी दिखाई और तेंदुए पर पलटवार करते हुए उसे भगा दिया। महिला जख्मी हो गई है और उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है। लेकिन जख्मी होने से पहले महिला ने जबर्दस्त बहादुरी दिखाई और अपनी छड़ी से तेंदुए के मुँह पर पलटवार कर उसे भगा दिया। इसका वीडियो भी सामने आया है।

वीडियो में दिख रहा है कि कैसे महिला पर तेंदुआ हमला करता है। महिला एक छड़ी के सहारे टहल रही है और फिर वह फर्श पर बैठ जाती है। इसी बीच घात लगाया बैठा तेंदुआ पीछे से आता है और अचानक से हमला कर देता है। महिला ने तत्परता दिखाते हुए फुर्ती से छड़ी से तेंदुए के मुँह पर दे मारा।

वीडियो देख कर साफ समझ में आ रहा है कि महिला बरामदे में बैठ कर सामने देख रही है, तभी अचानक पीछे से तेंदुआ दिखाई देता है। दो सेकंड भी नहीं होता कि महिला की नज़रें भी उस तेंदुए पर जाती है। वह तुरंत उठ कर खड़ी हो जाती है, तब तक तेंदुआ एकदम से महिला पर हमला कर देता है। तेंदुआ अपनी पकड़ बनाने के लिए महिला के गले तक पहुँचना चाहता था। लेकिन महिला भी अपने हाथ की छड़ी से उस पर पलटवार करती है। तेंदुआ इस हमले से तुरंत हडबड़ा कर भाग जाता है।

घटना की सूचना पुलिस को दी गई और ठाणे वन अधिकारियों की एक टीम मौके पर पहुँच गई। निर्मल सिंह को अस्पताल ले जाया गया। उसकी गर्दन, पैर, कंधे और पीठ में चोटें आई हैं। वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम पहले ही नागपुर में प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय से संपर्क कर चुके हैं और हमें उम्मीद है कि कल सुबह या दोपहर तक हमें समस्या का पता लगाने की अनुमति मिल जाएगी।”

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों के भीतर खौफ बढ़ गया है। वन्यजीव शोधकर्ताओं ने तेंदुए की गतिविधि पर नजर रखने के लिए कैमरा ट्रैप लगाए हैं। एक स्थानीय निवासी उदय सांगले ने कहा कि इन हमलों को देखकर ऐसा लग रहा है कि तेंदुए के साथ कुछ समस्या है, जिसकी वजह से वह लोगों पर हमला कर रहा है।

वीडियो वायरल होने के बाद लोग सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। “सुधांशु नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा, बहादुर महिला को प्रणाम।”

एक अन्य यूजर ने भी महिला को साहसी बताते हुए लिखा कि मौके पर छड़ी होने की वजह से वह उससे लड़ पाई। इसमें छड़ी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “वह काफी बहादुर महिला है। अगर मैं उसकी जगह होती तो मैं तो पक्का बेहोश हो जाती।”

कुमार एस स्वामी ने लिखा, “इस उम्र में भी माताजी के साहस और बहादुरी को सैल्यूट है, आदमी घबराए नहीं और मुश्किलों से लड़ें तो, उन्हें पछाड़ा जा सकता है। कहते हैं ना कि डर के आगे जीत है तो डर निकल जाता है हम निडर हो जाते हैं।”

जब नेहरू ने JRD टाटा से छीन लिया ‘एयर इंडिया’, नहीं सुनी उनकी बात: ₹70000 करोड़ के नुकसान की जिम्मेदार कॉन्ग्रेस?

भारतीय मीडिया में ये खबर तैर रही है कि ‘टाटा समूह’ ने ‘एयर इंडिया’ की बोली जीत कर इसे खरीद लिया है। हालाँकि, भारतीय वित्त मंत्रालय ने इन ख़बरों को नकार दिया है। भारत सरकार ने कहा है कि ऐसा कोई निर्णय होगा तो सूचित किया जाएगा। लेकिन, आइए इसी बहाने ‘एयर इंडिया’ के इतिहास को खँगालते हैं। कैसे JRD टाटा के न चाहने के बावजूद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण कर दिया था, ये भी जानते हैं।

नवंबर 1952 में चलते हैं, जब देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों में से एक JRD टाटा की जवाहरलाल नेहरू से मुलाकात हुई थी। देश नया-नया स्वतंत्र हुआ था और गणतंत्र तो अभी-अभी ही बना था। इसके बाद नेहरू ने टाटा को पत्र लिख कर ‘एयर इंडिया’ (टाटा एयरलाइंस, जो उस समय विश्व की शीर्ष विमान सेवाओं में से एक थी) और ‘इंडियन एयरलाइंस’ (जो घरेलू रूट पर चलती थी) के प्रति अपने रवैये को लेकर सफाई पेश की थी।

उस पत्र में नेहरू ने टाटा को लिखा कि लंच के दौरान उन्हें परेशान देख कर अपनी बात नहीं रख पाए, लेकिन वो उस दौरान टाटा ने उन्हें बताया था कि कैसे केंद्र सरकार ने उनकी विमान कंपनियों के साथ गलत व्यवहार किया है। टाटा को लगता था कि सरकार ने जानबूझ कर एक नीति तैयार की, ताकि वो ‘एयर इंडिया’ को सस्ते में खरीद कर उन्हें नुकसान पहुँचा सके और इसके लिए कई महीनों से काम चल रहा था।

नेहरू ने इन आरोपों को नकारते हुए पत्र में लिखा था कि कॉन्ग्रेस 20 वर्ष पहले से अपनी नीति रखे हुए हैं कि हर प्रकार की ट्रांसपोर्ट सेवाएँ सरकार के हाथ में रहनी चाहिए। नेहरू का कहना था कि ये सरकार की कोई बहुत बड़ी प्राथमिकता नहीं थी, लेकिन इस पर कई बार धीमी चर्चा हुई। उनका कहना था कि वित्तीय दिक्कतों के कारण सरकार इस दिशा में आगे नहीं बढ़ रही थी। 1952 में जगजीवन राम के संचार मंत्री बनने के बाद एयरलाइंस का मुद्दा कैबिनेट के सामने आया और उन्हें सरकारी छत के नीचे एक करने पर सहमति बनी।

आगे बढ़ने से पहले बता दें कि JRD टाटा को ही भारत में विमानन क्रांति लाने के लिए जाना जाता है और वो देश के पहले लाइसेंसी पायलट भी थे। उन्होंने 1932 में ‘टाटा एयरलाइंस’ की स्थापना की थी। उनका मानना था कि भारत के सिविल एविएशन को दबाने के लिए एक साजिश चल रही है, खासकर उनकी विमानन कंपनी को। नेहरू सरकार ने एक कमिटी भी बनाई, जिसने ‘एयर इंडिया इंटरनेशनल’ समेत इन विमानन कंपनियों को एक करने का सुझाव दिया।

नेहरू का कहना था कि JRD टाटा के मन में उनके सरकार के प्रति भ्रम है, जबकि वो भारत में विमान सेवाओं को आगे बढ़ाने व इन्हें विकसित करने पर जोर दे रहे हैं। नेहरू ने सफाई दी थी कि इन कंपनियों का भाव कम होने के बाद इन्हें खरीदना किसी साजिश का हिस्सा नहीं था। उन्होंने इसे स्थिति के अनुसार कार्यवाही करार दिया था। लेकिन, JRD टाटा मानते थे कि विमान सेवा कंपनियों का राष्ट्रीयकरण एक अच्छा फैसला नहीं है और इससे एक सटीक एयर ट्रांसपोर्ट सिस्टम का निर्माण नहीं होगा।

उन्होंने दुःखी मन से कहा भी था कि सरकार अपना मन पहले ही बना चुकी थी, लेकिन इससे पहले उसे विचार-विमर्श करना चाहिए था। उन्होंने बताया कि उन्हें जगजीवन राम ने फोन कर के सिर्फ सरकार के निर्णय की सूचना दी। JRD टाटा ने एक वैकल्पिक व्यवस्था का खाका तैयार कर लिया था और वो चाहते थे कि सरकार उन्हें सुने, ताकि सरकार के लक्ष्य को ही प्राप्त करने में वो मदद कर सकें।

जगजीवन राम ने सिर्फ मुआवजे के बारे में उनसे राय पूछी। उन्होंने कहा था कि उन्हें मुख्य चिंता कर्मचारियों और निवेशकों की है, जिन्होंने वर्षों किए गए मेहनत से एक बड़ा एयर ट्रांसपोर्ट सिस्टम तैयार किया था। हालाँकि, नेहरू सरकार ने उनकी बात नही मानी और 1953 में सारी विमानन कंपनियों का विलय कर के ‘एयर इंडिया’ और ‘एयर इंडिया इंटरनेशनल’ में तब्दील कर दिया गया, जिसे बात में ‘एयर इंडिया’ के नाम से पुकारा गया।

इतिहास की बात करें तो देश की पहली कमर्शियल फ्लाइट 1932 में एक एयर मेल को लेकर कराची के दृघ रोड एरोड्रम (अब जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट) से बॉम्बे के जुहू एरोड्रम (मुंबई-जुहू एयरपोर्ट) तक उड़ी थी। JRD टाटा ने खुद ये कारनामा किया था। विश्व युद्ध II के ख़त्म होने के बाद ये ‘एयर इंडिया’ बन गई। 2006 के बाद इसका विलय ‘इंडिया एयरलाइंस’ में कर दिया गया, जिसके बाद इसका घाटा बढ़ता ही चला गया।

फ़िलहाल ‘एयर इंडिया’ 70,000 करोड़ से भी अधिक के घाटे में है और JRD टाटा की बातें अब सच साबित हो रही हैं। नेहरू की अदूरदर्शी नीति का खामियाजा यहाँ भी देश को भुगतना पड़ रहा है। प्राइवेट एयरलाइंस से प्रतिद्वंद्विता और मानव व वित्तीय संसाधन के कुप्रबंधन से ये जूझ रहा है। अगर ‘एयर इंडिया’ फिर से टाटा में लौटता है तो ये इसकी ‘घर-वापसी’ होगी, यानी घूम-फिर कर कर ये अपने संस्थापक समूह के हाथों में आ जाएगा।

JRD टाटा का मानना था कि भारत की सरकार नई है और इसे विमान उड़ाने या विमान सेवा कंपनी चलाने का कोई अनुभव नहीं है, ऐसे में एयर ट्रांसपोर्ट कंपनियों के राष्ट्रीयकरण का अर्थ होगा कि ये ब्यूरोक्रेसी की अकर्मण्यता में फँस जाएगा। इससे यात्रियों व कर्मचारियों को परेशानी होगी। जबकि कॉन्ग्रेस कहती रही कि इससे व्यवस्था सुधरेगी। बाद में सरकार ने उन्हें खुश करने और उनके अनुभव का फायदा लेने के लिए उन्हें ‘एयर इंडिया’ व ‘इंडियन एयरलाइंस’ का चेयरमैन बना दिया।

उन्होंने स्पष्ट कहा था कि विमान के क्रू के प्रशिक्षण व अनुशासन पर जब तक जोर दिया जाता रहेगा, तभी तक भारत विमानन सेवा में अपना नाम बचा पाएगा। अगले 25 वर्षों तक चीजें उनकी देखरेख में हुईं, इसीलिए सरकार से नाराज़गी के बावजूद उन्होंने चीजों को संभाला और देश-दुनिया में भारतीय एयर ट्रांसपोर्ट सेवा का नाम काबिज किया। इस दौरान वो खुद विमान से यात्रा करते और छोटे-छोटे विवरण नोट करते।

वाइन की ग्लास और कंपनी से लेकर एयर होस्टेस की हेयरस्टाइल तक, उनकी नजर सब पर रहती। टॉयलेट या काउंटर गंदा हो तो वो खुद ही उसे साफ़ करने बैठ जाते थे। होर्डिंग से लेकर एयर होस्टेस की साड़ी तक, टॉयलेट से लेकर विज्ञापक तक, सब पर उनकी नजर रहती थी। तभी 70 के दशक में सिंगापुर की एयरलाइंस ने भी ‘एयर इंडिया’ के साथ करार किया। ये पहला एयरलाइंस बना, जिसने जेट (गौरी शंकर) को अपनी फ्लीट में शामिल किया।

जनवरी 1978 में ‘एयर इंडिया’ का एक विमान बड़े हादसे का शिकार हुआ और सभी 213 यात्रियों की मौत हो गई। इसके बाद सरकार ने उन्हें पद से हटा दिया। 25 वर्षों तक उन्होंने बिना एक पाई लिए देश की सेवा की थी। उन्हें हटाए जाने का कर्मचारियों पर काफी बुरा असर पड़ा। कई ने इस्तीफे दे दिए तो कइयों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई की इसके लिए खूब आलोचना हुई।

रेडियो पर ये खबर आई थी। JRD टाटा ने कहा था कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे किसी से उसके प्यारे बच्चे को छीन लिया गया हो। ‘टाटा एयरलाइंस’ 1946 में ही एक सार्वजनिक कंपनी बन कर ‘एयर इंडिया’ में परिवर्तित हो गई थी। लेकिन, नेहरू ने जिस तरह इंडस्ट्री से बात किए बिना राष्ट्रीयकरण का फैसला लिया, उसका दंश आज देश झेल रहा है। उन्होंने एक अधिकारी से तब कहा था कि हम एक राजनीतिक और अफशरशाही के राज में रहते हैं, जहाँ उनकी सुनने वाला कोई नहीं।

1987 के एक इंटरव्यू में JRD टाटा ने कहा था कि मैं इतना मूर्ख था कि कभी कभी ऐसा सोचता था कि कारोबार छोड़ कर कॉन्ग्रेस पार्टी का हिस्सा बन जाऊँ। उन्होंने कहा था, “जवाहर लाल नेहरू ने कई बड़ी राजनीतिक त्रुटियाँ की। नेहरु के समाजवाद को जितना मैं समझ पाया वह समाजवाद का सही स्वरूप नहीं था बल्कि वह नौकरशाहीवाद था। अगर नियति ने उनकी जगह सरदार वल्लभ भाई पटेल को चुना होता तो आज भारत अलग मुकाम पर होता। भारत की आर्थिक स्थिति बहुत मज़बूत होती।”