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झारखंड के साहिबगंज में पुलिस पर भीड़ का हमला, भाग निकला रबीउल शेख: भगदड़ में एक की मौत

झारखंड के साहिबगंज जिले में एक बार फिर पुलिस पर हमला हुआ है। यह घटना तब हुई जब पुलिस सादे कपड़ों में राधानगर थाना क्षेत्र के प्राणपुर बाजार में रबीउल शेख को पकड़ने गई थी। वह ननबैंकिंग कंपनी वारिस फाइनांस में गबन का आरोपित है। घटना गुरुवार (30 सितंबर 2021) की है।

दैनिक जागरण की खबर के शेख को पकड़ने के लिए गोड्डा जिले की मेहरमा थाना पुलिस पहुँची तो उस पर भीड़ ने हमला कर दिया। इसका फायदा उठाकर आरोपित भाग निकला। पुलिस पर हमले में शामिल लोग कथित तौर पर शेख के परिचित थे। उसके खिलाफ गोड्डा जिले के ठाकुरगगंटी थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति ने पैसे गबन करने की शिकायत दर्ज करवा रखी है।

इस संबंध में जब ऑप इंडिया गोड्डा जिले के पुलिस अधीक्षक को कॉल किया तो उन्होंने रांची में एक जरूरी मीटिंग में व्यस्त होने की बात कही। स्थानीय समाचार पोर्टल ग्लोब 24 के अनुसार मेहरमा थाने के अवर निरीक्षक के नेतृत्व में 3 पुलिसकर्मी सादी वर्दी में बोलेरो वाहन से गुरुवार प्राणपुर पहुँचे। शेख को जब वाहन में बिठाया जाने लगा तब भीड़ ने पुलिस पर हमला बोल दिया। इसके बाद भगदड़ मच गई। इसी भगदड़ में शेख भाग निकला। वहीं 50 वर्षीय अब्दुस सलाम की मौत हो गई।

रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने पलाशगाछी पंचायत के मुखिया के घर में शरण लेकर जान बचाई। बाद में राधानगर पुलिस ने मौके पर पहुॅंच उन्हें सुरक्षित निकाला। न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार सफेद कपड़ों में पुलिस के होने के कारण ग्रामीणों ने उन्हें अपहरणकर्ता समझकर हमला कर दिया। राधानगर में पुलिस बल पर हमले का ये पहला मामला नहीं है। 2017 में इसी राधानगर के प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र में उग्र भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया था।

‘वो मेरी बंदी है’: बॉलीवुड का ‘महिला विरोधी’ चेहरा दिखा मुंबई पुलिस ने किए पोस्ट, यूजर्स भी खोज-खोज कर ला रहे डायलॉग

बॉलीवुड फिल्मों में पसरे नारी विरोधी रवैये को मुंबई पुलिस ने हाल में अपने पोस्ट के जरिए उजागर किया।  इंस्टाग्राम पर अपने आधिकारिक अकॉउंट से बॉलीवुड फिल्मों के कुछ डायलॉग को शेयर करके बताया कि सिनेमा समाज का दर्पण होता है। इसलिए अगर कोई नहीं चाहता कि किसी मुद्दे में कानून का हस्तक्षेप हो तो अपने शब्दों को सोच समझ का इस्तेमाल करें। अपने पोस्ट के नीचे उन्होंने LetsNotNormaliseMisogyny, #MindYourLanguage, #WomenSafety जैसे हैशटैग का इस्तेमाल भी किया।

मुंबई पुलिस के पोस्ट में 8 डायलॉग शेयर किए गए हैं:

  1. प्रीति, चुन्नी ठीक करो- कबीर सिंह, 2019।
  2. तुम एक पत्नी हो, तुम्हारा पति जैसा चाहेगा वैसा ही होगा, ये शादी का दस्तूर है, मर्द औरत का भगवान होता है- हम तुम्हारे हैं सनम, 2002।
  3. अगर खूबसूरत लड़की को न छेड़ों तो ये भी तो उसकी बेईज्जती होती है न- मालामाल, 1988।
  4. बट आई अलॉउड आयसा टू रन हर बिजनेस- दिल धड़कने दो, 2015।
  5. प्यार से दे रहे हैं, रख लो, वरना थप्पड़ मार कर भी दे सकते है- दबंग, 2010।
  6. व्हेन यू कान्ट चेंज न गर्ल, चेंज न गर्ल- चश्मे बद्दूर, 2013।
  7. वो मेरी बंदी है- कबीर सिंह, 2019।
  8. पुष्पा, हजार बार मैंने बोला है कपड़े- उजड़ा चमन, 2019।

इस पोस्ट के शेयर होने के बाद कई लोग मुंबई पुलिस की तारीफों के कसीदे पढ़ रहे हैं। तो कुछ इन 8 डायलॉग्स के अलावा और डॉयलॉग ढूँढ-ढूँढ कर ला रहे हैं। जैसे जब वी मेट में कहा जाता है- ‘अकेली लड़की खुली तिजोरी की तरह होती है।’ मुझसे शादी करोगी में कहते हैं- ‘क्या माल है यार।’, बॉर्डर में सुनील शेट्टी कहता है- ‘बेटा ही होगा।’

इस बीच कुछ ऐसे भी हैं जिनका कहना है कि मुंबई पुलिस जितना कूल बन रही है उसका पता तब चलता है जब रिपोर्ट करवाने जाओ।

अनुज सिंह तो इस पोस्ट को देख मुंबई पुलिस पर तंज कसते हैं, “सोशल मीडिया पर ये सब कूल दिखाना अच्छा लगता है लेकिन जब कोई रिपोर्ट करने जाएगा तब आपको हकीकत पता चलेगी।”

अदनान बहलीम कहते हैं, “ये कोई तर्क नहीं है कि सिनेमा इसलिए बनता है कि समाज की रिएलिटी दिखाई जाए। ये हमारा काम है कि समाज को बेहतर बनाए, सिनेमा मनोरंजन करने का अपना काम कर रहा है।”

एक अन्य यूजर ने कहा, “सिनेमा, समाज की सच्चाई को दर्शाता है न कि विपरीत। सिनेमा को इसमें घसीटने के बजाय वास्तविक जीवन का उदाहरण लें।”

उल्लेखनीय है मुंबई पुलिस के ‘क्रांतिकारी’ और ‘मजेदार’ सोशल मीडिया पोस्ट अक्सर चर्चा में रहते हैं। लेकिन एक वास्तविकता ये भी है कि बीते कुछ समय से मुंबई पुलिस तरह-तरह के विवादों में रही। फिर वो चाहे भगवान राम के पोस्टर फाड़ने के कारण हों, सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़ा केस हो, एंटीलिया के बाहर मिले विस्फोटक वाला मामला, सचिन वाजे की हकीकत या फिर पालघर में साधुओं की हत्या…मुंबई पुलिस और उनकी कार्रवाई पर सवाल उठे हैं। शायद यही है कारण है कि यूजर उनसे सोशल मीडिया पोस्ट में दी गई सीखों को हकीकत के साथ जोड़कर हँस रहे हैं।

कॉन्ग्रेस में उथलपुथल के बीच दिग्विजय सिंह ने अमित शाह की ‘मदद’ याद कर चौंकाया, RSS की भी तारीफ

पंजाब, छत्तीसगढ़ और यहाँ तक ​​कि केरल में कॉन्ग्रेस पार्टी में सियासी भूचाल आ गया है। पार्टी में हो रही इस उथल-पुथल को कॉन्ग्रेस नेतृत्व शांत करने की कोशिश कर रहा है। इस बीच कॉन्ग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने अचानक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्रशंसा कर सभी को चौंका दिया है।

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता गुरुवार (30 सितंबर 2021) को भोपाल में एक पुस्तक का विमोचन करने पहुँचे थे। इसी दौरान उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्रशंसा की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह 4 साल पहले की अपनी ‘नर्मदा परिक्रमा’ यात्रा की यादें साझा कर रहे थे।

दिग्विजय सिंह ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यात्रा के दौरान वे एक बार देर रात गुजरात पहुँचे थे। वह पहाड़ी और वन क्षेत्र था। न तो ठीक सड़कें थीं और न ही बोर्डिंग की सुविधा थी। कॉन्ग्रेस सांसद ने बताया कि वहाँ एक फॉरेस्ट ऑफिसर उनसे मिलने आया। उसने अपना परिचय देते हुए कहा कि अमित शाह ने उसे यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि हमें और हमारे सहयोगियों को कोई परेशानी न हो और हमारी अच्छी तरह से देखभाल की जाए।

सिंह ने आगे कहा कि भले ही यह एक दूर-दराज का इलाका था, फिर भी उन्हें आराम करने और अच्छा भोजन करने के लिए जगह दी गई थी। अधिकारी ने हमारी मदद की और हमें सुरक्षित हमारे गंतव्य स्थान तक पहुँचाया।

साभार: ANI

दिग्विजय ने बताया कि उस समय गुजरात चुनाव चल रहे थे और वे शाह के सबसे बड़े आलोचकों में से एक थे। फिर भी अमित शाह ने यह सुनिश्चित किया कि हम सुरक्षित अपने गंतव्य स्थान तक पहुँचे और रास्ते में कोई कठिनाई न हो।

कॉन्ग्रेस सांसद ने कहा, “मैं कभी भी व्यक्तिगत तौर पर अमित शाह से कभी नहीं मिला, लेकिन इस घटना के बाद मैंने उनका आभार व्यक्त किया। शाह ने जो किया वह इस बात का प्रतीक था कि राजनीतिक विरोधियों को अपने राजनीतिक कर्तव्यों को जारी रखते हुए व्यवहार में एक-दूसरे के प्रति सम्मानजनक और सौहार्दपूर्ण होना चाहिए।”

RSS की तारीफ में पढ़े कसीदे

RSS पर हमेशा कीचड़ उछालने वाले और यहाँ तक तक ​​कि 26/11 के मुंबई हमलों को ‘RSS की साजिश’ बताने वाले दिग्विजय सिंह अचानक से RSS की भी प्रशंसा करते नजर आए। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश में अपनी ‘नर्मदा परिक्रमा’ यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान उनसे नियमित रूप से RSS कार्यकर्ता मिलते थे और उनका हालचाल लेते रहते थे। कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि यात्रा के दौरान एक बार RSS कार्यकर्ताओं ने गुजरात के भरूच इलाके में मांझी समुदाय द्वारा संचालित धर्मशाला में रत्रि विश्राम में उनकी मदद की थी।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे RSS कार्यकर्ताओं द्वारा की गई देखभाल और आतिथ्य से हैरान थे और उन्होंने पूछा कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं। इस पर स्वयंसेवकों ने जवाब दिया था कि उन्हें संघ के वरिष्ठ नेतृत्व ने नर्मदा यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह की मदद करने का निर्देश दिया है। उल्लेखनीय है कि दिग्विजय सिंह उनकी पत्नी अमृता और समेत कुछ कॉन्ग्रेस ताओं ने साल 2017 में नर्मदा यात्रा की थी।

सिंह ने ये सभी बातें गुरुवार को भोपाल में अपने सहयोगी ओपी शर्मा द्वारा लिखी गई नई पुस्तक ‘नर्मदा के पथिक’ (नर्मदा के यात्री) के विमोचन समारोह के दौरान कही।

गौरतलब है कि पंजाब में कॉन्ग्रेस पार्टी में सियासी घमासान मचा हुआ है। वहाँ अमरिंदर सिंह को इस्तीफा देने के लिए मजबूर करने और चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाने के कुछ दिनों बाद जिस तरह से नवजोत सिंह सिद्धू ने अपना इस्तीफा दिया है उससे राज्य में सियासी अस्थिरता के बादल छाए हुए हैं। इसी क्रम में पूर्व सीएम अमरिंदर सिंह भी पार्टी नेतृत्व के खिलाफ अपने असंतोष को लेकर मुखर हैं।

एक तरफ पंजाब में कॉन्ग्रेस नेताओं का एक बड़ा धड़ा सिद्धू का समर्थन करने के हाईकमान के फैसले के खिलाफ है तो वहीं दूसरी ओर अमरिंदर सिंह की अमित शाह से मुलाकात ने नई चिंताएँ बढ़ा दी हैं। ऐसे कठिन समय में दिग्विजय सिंह जैसे कॉन्ग्रेसी दिग्गज का अमित शाह की तारीफ करना महज संयोग है या कोई सियासी संकेत।

कचरे के ढेर व गंदे पानी से मुक्त होंगे शहर, दिल्ली का ‘पहाड़’ भी हटेगा: PM ने लॉन्च किया स्वच्छता 2.0, सफाईकर्मियों को बताया ‘महानायक’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (1 अक्टूबर, 2021) को ‘स्वच्छ भारत मिशन – शहरी 2.0’ व ‘अमृत 2.0’ का शुभारंभ किया। इसके तहत शहरों में बन गए बड़े-बड़े कचरों के ढेर को पूरी तरह हटा दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने याद किया कि कचरों का ऐसा ही एक बड़ा पहाड़ दिल्ली में भी बन गया है, जो कई दिनों से हटाए जाने की बाट जोह रहा है। उनका इशारा गाजीपुर के कचरे के सबसे बड़े ढेर की तरफ था, जिसे लेकर AAP सरकार भी निष्क्रिय है।

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि 2014 में देशवासियों ने भारत को खुले में शौच से मुक्त करने का संकल्प लिया था और अब 10 करोड़ से ज्यादा शौचालयों के निर्माण के साथ देशवासियों ने ये संकल्प पूरा किया है। उन्होंने जानकारी दी कि अब ‘स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन 2.0’ का लक्ष्य है ‘कचरा मुक्त शहर’, कचरे के ढेर से पूरी तरह मुक्त शहर बनाना। वहीं उन्होंने बताया कि मिशन अमृत के अगले चरण में देश का लक्ष्य है- ‘सीवेज और सेप्टिक मैनेजमेंट बढ़ाना।

अर्थात, अपने शहरों को पानी व बाढ़ से सुरक्षित जगह बनाना और ये सुनिश्चित करना कि हमारी नदियों में कहीं पर भी कोई गंदा नाला न गिरे। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान और अमृत मिशन की अब तक की यात्रा वाकई हर देशवासी को गर्व से भर देने वाली है। बकौल पीएम मोदी, इसमें मिशन भी है, मान भी है, मर्यादा भी है, एक देश की महत्वाकांक्षा भी है और मातृभूमि के लिए अप्रतिम प्रेम भी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने याद दिलाया कि बाबासाहब भीमराव आंबेडकर असमानता दूर करने का बहुत बड़ा माध्यम शहरी विकास को मानते थे। प्रधानमंत्री ने ध्यान दिलाया कि बेहतर जीवन की आकांक्षा में गाँवों से बहुत से लोग शहरों की तरफ आते हैं। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि उन्हें रोजगार तो मिल जाता है लेकिन उनका जीवन स्तर गाँवों से भी मुश्किल स्थिति में रहता है, जो उन पर एक तरह से दोहरी मार की तरह होता है – एक तो घर से दूर, और ऊपर से ऐसी स्थिति में रहना।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “इस हालात को बदलने पर, इस असमानता को दूर करने पर बाबासाहब का बड़ा जोर था। स्वच्छ भारत मिशन और मिशन अमृत का अगला चरण, बाबासाहब के सपनों को पूरा करने की दिशा में भी एक अहम कदम है। हमारे सफाई मित्र, हर रोज झाड़ू उठाकर सड़कों को साफ करने वाले हमारे भाई-बहन, कूड़े की दुर्गंध को बर्दास्त करते हुए कचरा साफ करने वाले हमारे साथी, सच्चे अर्थों में इस अभियान के महानायक हैं। कोरोना के कठिन समय में उनके योगदान को देश ने करीब से देखा है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘स्वच्छ भारत मिशन – शहरी 2.0’ और ‘अमृत 2.0’ का किया उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मुख्यमंत्री के कार्यकाल को याद करते हुए बताया कि निर्मल गुजरात अभियान जब जन-आंदोलन बना था, तो उसके बहुत अच्छे परिणाम भी मिले। इससे गुजरात को नई पहचान तो मिली ही, राज्य में पर्यटन भी बढ़ा। जन-आंदोलन की ये भावना स्वच्छ भारत मिशन की सफलता का आधार है। उन्होंने लोगों को ये याद रखने की सलाह दी कि स्वच्छता, एक दिन का, एक पखवाड़े का, एक साल का या कुछ लोगों का ही काम है, ऐसा नहीं है।

उन्होंने समझाया कि स्वच्छता हर किसी का, हर दिन, हर पखवाड़े, हर साल, पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाला महा-अभियान है, अर्थात स्वच्छता जीवनशैली है, स्वच्छता जीवन मंत्र है। प्रधानमंत्री ने आँकड़े गिनाते हुए कहा कि आज भारत हर दिन करीब एक लाख टन कचरों को ठिकाने लगा रहा है, जबकि 2014 में जब देश ने अभियान शुरू किया था तब देश में हर दिन पैदा होने वाले कचरे का 20% से भी कम प्रोसेस होता था।

प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि आज हम करीब रोज़ाना 70% ‘वेस्ट प्रोसेस’ कर रहे हैं, जिसे हमें अब शत-प्रतिशत तक लेकर जाना है। उन्होंने बताया कि 2014 के पहले के 7 वर्षों की बात करें, तो शहरी विकास मंत्रालय के लिए करीब सवा लाख करोड़ रुपए का ही बजट आवंटित था। उन्होंने जानकारी दी कि केंद्र सरकार के 7 वर्षों में शहरी विकास मंत्रालय के लिए करीब 4 लाख करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया।

पीएम मोदी ने आगे कहा, “देश में शहरों के विकास के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी लगातार बढ़ रहा है। अभी अगस्त के महीने में ही देश ने ‘National Automobile Scrappage Policy‘ लॉन्च की है, जो नई स्क्रैपिंग पॉलिसी, ‘Waste to Wealth‘ के अभियान को, सर्कुलर इकॉनमी को और मजबूती देती है। उन्होंने कहा कि ये पॉलिसी देश के शहरों से प्रदूषण कम करने में भी बड़ी भूमिका निभाएगी।

इसका सिद्धांत है- Reuse, Recycle और Recovery. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ध्यान दिलाया कि कैसे सरकार ने सड़कों के निर्माण में भी कचरों के उपयोग पर बहुत ज्यादा जोर दिया है। उन्होंने कहा, “आज शहरी विकास से जुड़े इस कार्यक्रम में, मैं किसी भी शहर के सबसे अहम साथियों में से एक की चर्चा अवश्य करना चाहता हूँ। ये साथी हैं हमारे रेहड़ी-पटरी वाले, ठेला चलाने वाले- स्ट्रीट वेंडर्स। इन लोगों के लिए ‘पीएम स्वनिधि योजना’, आशा की एक नई किरण बनकर आई है।

प्रधानमंत्री ने खुशी जताई कि देश के दो बड़े राज्य उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सबसे ज़्यादा स्ट्रीट वेंडर्स को बैंकों से लोन दिया गया है। उन्होंने इन लोगों से भी स्वच्छता अभियान में सहयोग माँगा। इस मिशन का उद्देश्य होगा कि शहरों को कचरों से ढेर से और गंदे पानी से मुक्ति मिले। ‘स्वच्छता एप’ के जरिए लोग अपडेट भी करते हैं कि कहाँ ज्यादा कचरा है। पीएम मोदी ने ‘सोशल हाइजीन’ का मंत्र दिया।

‘इनके कुत्ते भी घर से बाहर नहीं निकलने देंगे’: किसान नेता चढ़ूनी के भड़काऊ बोल, MP-MLA का घर घेरने को उकसाया

भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने हरियाणा की खट्टर सरकार को चेतावनी दी है। चढ़ूनी ने कहा कि अगर 1 अक्टूबर से धान खरीद नहीं शुरू हुई तो भाजपा के एमएलए, एमपी के घर का इस तरह घेराव करेंगे कि उनके घर का कुत्ता भी बाहर नहीं निकल पाएगा।

गुरुवार (सितंबर 30, 2021) को चढ़ूनी ने ‘आज तक’ से बात करते हुए कहा, “हम सरकार को साफ तौर पर चेतावनी देना चाहते हैं कि कल (अक्टूबर 1, 2021) खरीद शुरू कर लें खट्टर साहब। हमारा खून मत जला, हमारा सब्र मत देख। कल खरीद शुरू कर ले, अच्छा रहेगा। फिर चेतावनी दे रहे हैं कल खरीद शुरू कर ले, वरना परसो तेरे एमएलए, तेरे एमपी और तेरे नेताओं को इस तरीके से घेरेंगे, घर में बंद करेंगे कि उनका कुत्ता भी बाहर नहीं निकल पाएगा।”

उन्होंने कहा, “किसान साथियों कल के दिन का इंतजार कर लो। अगर कल खरीद नहीं होती है तो परसों सबके घर घेर लो। भरी हुई ट्रॉलियाँ इनके घर के आगे खड़ा कर दो, चाहे एमपी हो, चाहे एमएलए हो, बीजेपी का हो, जेजेपी का हो। इनके घर का कुत्ता भी बाहर नहीं निकलना चाहिए। ये हाल इनका कर दो परसों, अगर कल खरीद नहीं होती है तो। हमारी फिर चेतावनी है सरकार को हम खाली नहीं बैठेंगे। हमसे उजड़ता हुआ किसान नहीं देखा जाता, बर्बाद होता किसान नहीं देखा जाता। बिल्कुल साफ चेतावनी दे रहे हैं कि कल सरकार खरीद शुरू कर ले वरना परिणाम बहुत गंभीर होगा।”

पुलिस के खिलाफ भी भड़काया था

गौरतलब है कि इसी साल फरवरी में पंजाब के बरनाला में आयोजित किसान महारैली में चढ़ूनी ने किसानों को जमकर उकसाया था। एक भड़काऊ वीडियो जारी कर कथित किसानों से अपील की थी कि यदि दिल्ली पुलिस उन्हें नोटिस दे तो वह उनके सामने पेश न हों और यदि पुलिस उन्हें पकड़ने उनके घर आए तो उन्हें बंधक बना लें। उन्होंने कहा था कि ऐसे पुलिस वालों को तब तक न छोड़ा जाए जब तक जिला प्रशासन आकर आश्वासन न दे कि दिल्ली पुलिस आपके गाँव और आपके जिले में नहीं घुसेगी। वहीं अप्रैल में चढ़ूनी ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर सरकार ने कोरोना संकट की आड़ में सीमा खाली करने की कोशिश की तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

17 जनवरी को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने किसान महापंचायत कार्यक्रम से ठीक पहले करनाल में किसानों और पुलिस के बीच किसानों को भड़काने के लिए चढ़ूनी को दोषी ठहराया था। उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियों ने विरोध प्रदर्शनों को हाइजैक कर लिया है। किसानों द्वारा कार्यक्रम स्थल में तोड़फोड़ करने के बाद करनाल में सीएम का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया था।

‘असम की डेमोग्राफी बदलने की साजिश, 2050 तक सत्ता हथियाने पर चल रहा काम’: सिपाझार हिंसा पर बोले CM सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य की डेमोग्राफी बदलने के लिए रची जा रही साजिश पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि कुछ समूह 2050 तक न सिर्फ असम की सत्ता पर काबिज होना चाहते हैं, बल्कि 2050 तक यहाँ की डेमोग्राफी को भी बदल देना चाहते हैं। उन्होंने दरांग जिले के सिपाझार में स्थित गोरुखूँटी गाँव में अतिक्रमण हटाने गई पुलिस पर हमले के मद्देनजर ये बात कही।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने गुरुवार (30 सितंबर, 2021) को कहा कि सिपाझार में हुई हिंसा के दौरान जिन अतिक्रमणकारियों ने पुलिस पर हमला किया था, उनमें से अधिकतर बाहर से आए थे और डलगाँव व बाघबोर से आए इन लोगों ने इलाके पर अपना कब्ज़ा जमा लिया था। बता दें कि उस हमले में 3 लोगों की मौत हो गई थी और असम पुलिस के 11 जवान घायल हुए थे। उस गाँव में बंगाली बोलने वाले मुस्लिमों की बहुलता है।

असम के सीएम ने कहा, “उनकी साजिश रही है कि धीरे-धीरे जमीनों का अतिक्रमण किया जाए। होजाइ जिले का लुमडिंग क्षेत्र और सोनितपुर का बरछाला भी उनके निशाने पर रहा है। उन्होंने नागाँव के बतदरोबा पर पहले ही कब्ज़ा जमा लिया है। हर 5 वर्ष के बाद कई क्षेत्रों की डेमोग्राफी बदलने की साजिश रची जाती है। पहले मेरी पहुँच उन कागज़ातों तक नहीं थी, लेकिन अब मैंने ख़ुफ़िया रिपोर्ट्स के साथ-साथ उन दस्तावेजों को भी देखा है।”

उन्होंने कहा कि इन चीजों को देख कर स्पष्ट है कि असम की डेमोग्राफी में बदलाव कर के 2050 तक सत्ता हथियाने की साजिश है। उन्होंने कहा कि गोरुखूँटी गाँव में जो 10,000 लोग रह रहे थे, उनमें से 6000 के नाम NRC में दर्ज नहीं हैं। जबकि वहाँ के जो स्थानीय निवासी हैं, उनके पास सारे दस्तावेज हैं। उन्हें बसाने के लिए सरकार द्वारा 6-6 बीघा जमीन दी जानी है। सीएम सरमा ने कहा कि ये एक ‘राजनीतिक डिजाइन’ है, जिसके तहत अतिक्रमण किया जा रहा है।

उधर असम के दरांग जिले में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुई हिंसा को लेकर मध्य-पूर्व के कट्टर इस्लामी भी प्रोपेगंडा चला रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि भारत में मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है और सरकार उनकी उपेक्षा कर रही है। असम की घटना का हवाला दे कुछ लोग हिंदुओं के बहिष्कार की माँग करते हुए अन्य इस्लामी देशों से भारत के खिलाफ एकजुटता की अपील कर रहे हैं।

पाकिस्तान: पेशावर में दवाखाना के बाहर सिख हकीम सतनाम सिंह की गोली मारकर हत्या

पाकिस्तान में आए दिन अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को निशाना बनाया जाता है। ताजा मामला पाकिस्तान के पेशावर का है जहाँ सिख समुदाय के प्रमुख सदस्य और प्रसिद्ध हकीम (पारंपरिक चिकित्सा के डॉक्टर) सरदार सतनाम सिंह (40) की गुरुवार (30 सितंबर 2021) को उनके क्लीनिक के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई।

पत्रकार इफ्तिखार फिरदौस की रिपोर्ट के अनुसार, पेशावर के चरड्डा रोड इलाके में अज्ञात हमलावरों ने सिख हकीम पर उनके दवाखाना के बाहर हमला किया। उन पर कथित तौर पर 4 बार फायर किया गया। पेशावर के हसनबदल क्षेत्र के रहने वाले सतनाम सिंह शहर में पारंपरिक चिकित्सा का एक लोकप्रिय क्लीनिक ‘धर्मंदर दवाखाना’ चलाते थे। हमले के बाद घायल अवस्था में उन्हें पेशावर के लेडी रीडिंग अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया न जा सका।

घटना के बाद पुलिस ने उनकी दुकान को सील कर इलाके की घेराबंदी कर दी। शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया है कि यह एक तरह का टार्गेटेड अटैक था। इस्लामिक देश पाकिस्तान में इस तरह की घटनाएँ होती रहती हैं। पाकिस्तानी मीडिया संस्थान द डॉन को एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि अज्ञात हमलावर कितने थे यह पता नहीं चल सका है। उन्होंने सतनाम पर गोलियाँ चलाई और वहाँ से फरार हो गए। वहीं फकीराबाद के एसएचओ एजाज नबी ने कहा कि वो फिलहाल घटना की छानबीन कर रहे हैं।

इस घटना को लेकर पीड़ित के भाई ने स्थानीय पुलिस को बताया कि सतनाम सिंह मोहल्ला जोगन शाह स्थित अपने घर से क्लीनिक गए थे, जहाँ अज्ञात हमलावरों ने उसकी हत्या कर दी। उन्होंने कहा कि उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। मुख्यमंत्री महमूद खान ने एक बयान जारी कर हत्या की निंदा की और पुलिस को आरोपितों का पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार करने का निर्देश दिया है।

‘पूरे शहर का दम घोंट रखा है, अब दिल्ली में घुसना चाहते हैं’: जंतर-मंतर आना चाहते थे ‘किसान’, सुप्रीम कोर्ट ने फटकारा

किसान प्रदर्शन के नाम पर राष्ट्रीय राजमार्गों को ब्लॉक करके बैठे प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बाद अब सु्प्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर सत्याग्रह आयोजित करने की माँग पर टिप्पणी की है। कोर्ट ने ‘किसान महापंचायत’ संगठन से कहा है कि प्रदर्शन आपका अधिकार हो सकता है लेकिन नागरिकों के भी अपने अधिकार होते हैं। 

बता दें कि किसानों के एक संगठन ‘किसान महापंचायत’ द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसमें जंतर-मंतर पर सत्याग्रह आयोजित करने के लिए माँग की गई थी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए  न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर ने पूछा, “आपने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाया है? आप इस अनुमति के लिए हाईकोर्ट से संपर्क कर सकते हैं।”

आगे पूरे घटनाक्रम को देख न्यायाधीश बोले, “किसानों ने पूरे शहर का दम घोंटा हुआ है और अब चाहते हैं कि शहर में घुस कर प्रदर्शन करेंगे।” न्यायाधीश ने कहा, “आप हर चीज बाधित कर रहे हैं। साथ में सुरक्षाकर्मियों को भी तंग कर रहे हैं।”

लाइव लॉ में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, किसान महापंचायत ने संयुक्त किसान मोर्चा का हवाला देते हुए उन्हें भी वैसा प्रदर्शन करने देने की अनुमति माँगी। ये याचिका अधिवक्ता अजय चौधरी द्वारा फाइल की गई। इसमें कम से कम 200 किसानों को प्रदर्शन के लिए जगह देने की माँग है। इनके मुताबिक, दिल्ली के भीतर किसान शांतिपूर्ण और अहिंसक सत्याग्रह करना चाहते है।

याचिका में अपनी माँग के साथ दिल्ली पुलिस के बर्ताव को भी पक्षपाती कहा गया है। ऐसा सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने महापंचायत के लोगों को जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी। याचिका में मौलिक अधिकारों के हवाले से व तमाम केसों के उदाहरण देते हुए प्रदर्शन करने की अनुमति माँगी गई।

मालूम हो कि इस प्रदर्शन को राहुल गाँधी फुल समर्थन दे रहे हैं। कॉन्ग्रेस द्वारा जहाँ केंद्र सरकार पर किसानों को देश का दुश्मन दिखाने का आरोप मढ़ा जा रहा है। वहीं राहुल गाँधी कह रहे हैं कि अहिंसक सत्यग्रह अब भी दृढ़ है, लेकिन शोषण करने वाली सरकार को यह नहीं पसंद।

बता दें कि इससे पहले किसान आंदोलन के चलते बाधित दिल्ली की सड़कों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (सितंबर 30, 2021) को टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि किसी हाइवे को इस तरह स्थायी रूप से बंद नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि इस मामले में पहले ही स्पष्ट आदेश दिए जा चुके हैं। सरकार उसे लागू नहीं करवा पा रही।

68 साल बाद फिर से टाटा की एयर इंडिया: जानिए मीडिया रिपोर्टों पर सरकार ने क्या कहा

कर्ज में डूबी सरकारी एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया किसकी होगी यह जानने के लिए फिलहाल इंतजार करना होगा। टाटा संस द्वारा नीलामी प्रक्रिया जीत लेने की खबरों का सरकार ने खंडन किया है। मीडिया रिपोर्टों को वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाली डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) ने गलत बताया है। साथ ही कहा है कि जब इस संबंध में फैसला होगा मीडिया को उसकी जानकारी दी जाएगी।

इससे पहले मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था किएयर इंडिया को टाटा संस खरीदने जा रही है। टाटा संस की बोली को केंद्र सरकार ने मँजूरी दे दी है। रिपोर्ट में कहा गया था टाटा ग्रुप ने स्पाइस जेट से ज्यादा की बोली लगाई थी। इसके बाद से 68 साल बाद एयर इंडिया की घर वापसी की ख़बरों ने जोड़ पकड़ लिया था। एयर इंडिया की शुरुआत 1932 में जेआरडी टाटा ने की थी। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इसकी सेवाएँ बंद की गई थी। दोबारा 1946 में जब इसकी सेवा बहाल हुई तो नाम टाटा एयरलाइंस से बदलकर एयर इंडिया लिमिटेड हो गया। देश स्वतंत्र होने के बाद एयर इंडिया की 49 फीसदी भागीदारी सरकार ने ले ली थी। इसके बाद 1953 में इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार अनुराधा शुक्ल ने ट्वीट कर कहा था कि वित्त मंत्रालय के सूत्रों का दावा है कि एयर इंडिया के लिए बोली टाटा ने जीती है। गृह मंत्रालय की अगुवाई वाले पैनल ने इसको मँजूरी दे दी है। अब इसकी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

आपको बता दें कि एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस में सरकार अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच रही है। एयर इंडिया की ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी AISATS में भी 50 फीसदी हिस्सेदारी बेची जा रही है। टाटा के अलावा इसके लिए स्पाइसजेट के अजय सिंह ने भी बोली लगाई थी।

मोदी सरकार के निजीकरण कार्यक्रम में एयर इंडिया हमेशा से सबसे ऊपर रहा है। इससे पहले 2018 में सरकार ने एयर इंडिया में 76 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की कोशिश की थी। लेकिन तब इसके अपेक्षित परिणाम नहीं मिले थे। एयर इंडिया पर 38 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज है।

IAS इफ्तिखारुद्दीन के मुरीद हैं आमिर और शाहरुख खान? नया वीडियो हुआ वायरल, SIT करेगी जाँच

धर्म परिवर्तन को बढ़ावा देने वाले IAS अधिकारी, पूर्व कमिश्नर व यूपी राज्य सड़क परिवहन निगम के चेयरमैन मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन से जुड़ा एक नया वीडियो आया है। इस वीडियो में इफ्तिखारुद्दीन नीचे बैठे हैं और एक अन्य शख्स उनकी तारीफ कर रहा है।

गुरुवार (सितंबर 30, 2021) को वायरल हुई इस वीडियो में शख्स का कहना है कि आमिर खान और शाहरुख खान भी कमिश्नर साहब के मुरीद हैं। शख्स के अनुसार, आमिर ने अपने बहनोई को भी कानपुर भेजा था ताकि वह कमिश्नर तक उनका सलाम पहुँचा सकें। ये वीडियो एसआईटी के पास भी पहुँच गया है। इसकी फॉरेंसिंक जाँच का फैसला हुआ है। अभी इसकी प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वीडियो में नजर आने वाला व्यक्ति कहता है कि आइएएस की बातें सुन कर आमिर खान इतने ज्यादा प्रभावित हुए कि उन्होंने कमिश्नर को फोन किया और बहनोई को उनके मिलने भेजा।

शख्स का दावा है कि मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन की वजह से शाहरुख खान ने कुरान को पढ़ना शुरू किया। अब ये बात साफ नहीं है कि व्यक्ति जिन आमिर और शाहरुख का उदाहरण लोगों को समझाने के लिए दे रहा है वह बॉलीवुड सितारे हैं या कोई और।

इस वीडियो की जाँच एसआईटी द्वारा की जा रही है। वीडियो को जाँच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा जाएगा। एसआईटी के अध्यक्ष व सीबीसीआइडी के पुलिस महानिदेशक जीएल मीणा ने सर्किट हाउस में ही मंडलायुक्त कार्यालय से कुछ दस्तावेज मंगाए और उन्हें जाँच में शामिल किया।

गौरतलब है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश स्थित कानपुर के वरिष्ठ IAS इफ्तिखारुद्दीन के 3 वीडियोज वायरल हुए थे, जिसमें वो कथित रूप से मंडलायुक्त पद पर तैनाती के दौरान सरकारी आवास में मुस्लिम कट्टरपंथियों को बुलाकर धर्म-परिवर्तन को बढ़ावा देने वाले पाठ पढ़ा रहे हैं। उन पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए इस्लामी कट्टरता को बढ़ावा देने के आरोप लगे हैं। ‘मठ मंदिर समन्वय समिति’ ने इस बाबत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की। अब मामले में एसआईटी जाँच हो रही है

मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि कानपुर ही नहीं कई राज्यों के मुस्लिम इसमें शामिल होने के लिए आते थे। यह भी कहा जा रहा है कि बंगला खाली करने के बाद जब उनके आवास की सफाई हुई तो धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने वाला साहित्य भारी मात्रा में बरामद हुआ था। मगर IAS अफसर होने के चलते तब मामले को दबा दिया गया था।

बता दें कि इफ्तिखारुद्दीन 17 फरवरी 2014 से 22 अप्रैल 2017 तक कानपुर के मंडलायुक्त रहे। वह श्रमायुक्त का पदभार भी सँभाल चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उनसे जुड़े जो करीब आधा दर्जन वीडियो वायरल हो रहे हैं। वह उस समय कानपुर के मंडलायुक्त थे।