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SIT करेगी IAS इफ्तिखारुद्दीन से जुड़े ‘धर्मांतरण वीडियो’ की जाँच, CM योगी ने 7 दिन में माँगी रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश में अवैध धर्मान्तरण कराने वाले गैंग से उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ IAS अधिकारी मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन के कनेक्शन को लेकर वायरल वीडियो की जाँच अब SIT करेगी। सीएम योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में यह प्रकरण आने के बाद जाँच के लिए गृह विभाग से गठित इस एसआईटी के अध्यक्ष डीजी सीबीसीआईडी जीएल मीणा होंगे एवं सदस्य एडीजी कानपुर जोन भानु भास्कर होंगे। यह मामले की जाँच करके 7 दिन में शासन को अपनी रिपोर्ट देगी। IAS अधिकारी पर हिंदू धर्म के खिलाफ प्रचार करने का आरोप लगाया गया है। इससे पहले कानपुर के पुलिस कमिश्नर ने भी एडीसीपी को जाँच सौंपी है। इस प्रकरण पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी नाराजगी जताई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि SIT जाँच में इस बात पर फोकस करेगी कि क्या वीडियो में कोई अपराध दिख रहा है? क्या IAS के सरकारी आवास पर कट्टरता और धर्मान्तरण से जुड़े जलसे करने से नियमों का उल्लंघन हुआ है? IAS अफसर की बैठक में कौन-कौन लोग शामिल हुए थे?

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद अब यह बात भी निकलकर सामने आई है कि कानपुर कमिश्नर रहने के दौरान अपने सरकारी आवास में इस तरह की बैठक IAS मो. इफ्तिखारुद्दीन के लिए आम थी। वह इसमें खुद कट्टरता का पाठ पढ़ाते देखे जा सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि कानपुर ही नहीं कई राज्यों के मुस्लिम इसमें शामिल होने के लिए आते थे। यह भी कहा जा रहा है कि बंगला खाली करने के बाद जब उनके आवास की सफाई हुई तो धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने वाला साहित्य भारी मात्रा में बरामद हुआ था। मगर IAS अफसर होने के चलते तब मामले को दबा दिया गया था।

कानपुर में वरिष्ठ आइएएस अधिकारी मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन की तैनाती के दौरान मंडलायुक्त के सरकारी आवास परधर्मान्तरण से जुड़ी तकरीरों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने बड़ा कदम उठाते हुए इस मामले की जाँच का आदेश दिया था जिसके बाद तीन सदस्यीय एसआइटी टीम का गठन किया गया है। वायरल कई वीडियो में IAS अधिकारी अपने सरकारी आवास पर मुस्लिम धर्म को लेकर तकरीरें पढ़ते नजर आ रहे हैं। वीडियो में उनके साथी मतांतरण की बातें कर रहे हैं।

बता दें कि इफ्तिखारुद्दीन 17 फरवरी 2014 से 22 अप्रैल 2017 तक कानपुर के मंडलायुक्त रहे। वह श्रमायुक्त का पदभार भी सँभाल चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उनसे जुड़े जो करीब आधा दर्जन वीडियो वायरल हो रहे हैं। वह उस समय कानपुर के मंडलायुक्त थे।

यूपी के कानून मंत्री बृजेश पाठक ने भी मामले पर चिंता व्यक्त करते हुए जाँच की बात कही है। बृजेश पाठक ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “जिस तरह से वीडियो सामने आया है उसकी जाँच की जा रही है। ये गंभीर मुद्दा है। धर्मांतरण को लेकर हमारी सरकार ने कानून बनाया हुआ है जो भी ये करता पाया जाएगा उसको छोड़ा नहीं जाएगा चाहे वो कोई भी हो। इस पूरे मामले की SIT जाँच कराई जा रही है यदि वीडियो सही पाया जाएगा तो कार्यवाही की जाएगी।”

कानून मंत्री बृजेश पाठक ने आगे कहा कि इस तरह के मामले में 2 तरह के प्रावधान बनते हैं। पहला तो उन्होंने सर्विस कोड का उल्लंघन किया है तो उन पर उसके तहत कार्यवाही की जाएगी। दूसरा उन पर धर्मांतरण को लेकर भी कार्यवाही की जाएगी जिसमें 10 साल तक कि सजा और जुर्माने का प्रावधान है। अगर वीडियो सत्य पाया जाता है तो उन पर इन दोनों मामलों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। पाठक ने ये भी कहा कि अगर इस तरह आईएएस अधिकारी धर्मांतरण के मामले में संलिप्त पाए जाते हैं तो ये देश के लिए चिंता का विषय है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश स्थित कानपुर के वरिष्ठ IAS इफ्तिखारुद्दीन के 3 वीडियोज वायरल हुए हैं, जिसमें वो कथित रूप से मंडलायुक्त पद पर तैनाती के दौरान सरकारी आवास में मुस्लिम कट्टरपंथियों को बुलाकर धर्म-परिवर्तन को बढ़ावा देने वाले पाठ पढ़ा रहे हैं। उन पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए इस्लामी कट्टरता को बढ़ावा देने के आरोप लगे हैं। ‘मठ मंदिर समन्वय समिति’ ने इस बाबत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की है।

‘खाना देने गई थी मेरी बेटी, मौलवी ने हाथ पकड़ अंदर खींचा…’: पटौदी की मस्जिद में 9 साल की बच्ची से छेड़छाड़

हरियाणा के गुरुग्राम में पटौदी की एक मस्जिद में मौलवी द्वारा 9 साल की बच्ची से छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। पटौदी पुलिस ने बच्ची की माँ की शिकायत पर पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आरोपित मौलवी को गिरफ्तार कर लिया है।

यह घटना सोमवार (27 सितंबर 2021) दोपहर को तब सामने आई जब लड़की ने अपने माँ को बताया कि मस्जिद में मौलवी ने उसे गलत तरीके से छुआ था। इसके तुरंत बाद मोहल्ले के लोगों ने इकट्ठा होकर आरोपित मौलवी को जमकर पीटा। सोशल मीडिया पर मारपीट का वीडियो सामने आया है। इसे मोहल्ले के ही एक व्यक्ति ने बनाया है, जिसका कहना है कि लड़की के साथ मस्जिद के अंदर छेड़छाड़ की गई थी।

ट्विटर पर इस वीडियो को राजीव प्रताप दुबे ने शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “गुरुग्राम में मस्जिद के अंदर 9 साल की बच्ची से छेड़छाड़ की वारदात को चंदा इकट्ठा करने आए जमाती इमाम ने अंजाम दिया। मौलवी को खाना देने गई बच्ची के साथ गंदी हरकत की गई। इसको लेकर आरोपित जमाती इमाम की लोगों ने जमकर धुनाई की। पटौदी इलाके में सोमवार दोपहर करीब 12 बजे हुई यह वारदात हुई।”

वीडियो में आप देख सकते हैं कि मौलवी को लेकर लोगों में कितना आक्रोश है। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इसमें एक 35 वर्षीय शख्स जो सफेद कुर्ता, पायजामा और टोपी पहने हुए दिखाया गया है, उसी पर मासूम बच्ची के साथ छेड़छाड़ का आरोप है। इसको लेकर भीड़ ने उसकी जमकर धुनाई की है। भीड़ बच्ची के साथ छेड़छाड़ की शिकायत के बाद मस्जिद के पास जमा हुई थी। मौके पर पहुँची पुलिस की टीम ने मौलवी को बचाने के लिए भीड़ को तितर-बितर किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक सोमवार शाम को पीड़िता की माँ ने मौलवी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने कहा कि उसकी बेटी खाना देने मस्जिद गई थी। मस्जिद के मुख्य मौलवी मौजूद नहीं थे। दूसरे मौलवी ने मेरी बेटी का हाथ पकड़ कर उसे मस्जिद के अंदर खींच लिया। महिला मूलरूप से पलवल की रहने वाली है। वह पटौदी थाना क्षेत्र में रहती है और लोगों के घरों में काम करती है। महिला ने आरोप लगाया कि मौलवी ने उसकी बच्ची को किस भी किया। इससे घबराकर बच्ची भागकर अपने परिवार के पास गई और उन्हें घटना के बारे में ताया। पुलिस ने लड़की का बयान दर्ज कर मौलवी के खिलाफ पोक्सो एक्ट (यौन हमला) की धारा 8 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

गौरतलब है कि हाल में मस्जिदों के अंदर बच्चियों के साथ यौन शोषण के कई मामले सामने आए हैं। पिछले दिनों दिल्ली में एक 47 वर्षीय मौलवी को मस्जिद के अंदर 10 साल की नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। लड़की रात 10 बजे मस्जिद के अंदर पानी लेने गई थी। मौलवी ने कथित तौर पर उसे रोका और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया।

ऐसा ही एक और मामला राजस्थान के भिवाड़ी का है। यहाँ एक मौलवी ने मस्जिद के अंदर एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार किया और उसके बाद उसे कुएँ में धकेल दिया। घटना का खुलासा तब हुआ जब 14 वर्षीय पीड़िता के परिवार ने सात दिन बाद थाने का दरवाजा खटखटाया। मौलाना जफरू उसे कुएँ में फेंकने के बाद अपने परिवार के साथ वहाँ से फरार हो गया था। लेकिन घटनास्थल पर जमा हुए लोगों ने बच्ची को कुएँ से सकुशल बाहर निकाला और मौलाना के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया।

‘CM योगी का करते हैं सम्मान, उन्हें पता है सही इतिहास’: मिहिर भोज को ‘गुर्जर’ बताए जाने पर क्यों गुस्से में है राजपूत समाज?

सम्राट मिहिर भोज को ‘गुर्जर’ बताए जाने पर आखिर राजपूत समाज आक्रोशित क्यों है? आखिर क्या कारण है कि उन्हें ‘गुर्जर’ बताने वाले पोस्टरों को न सिर्फ फायदा गया, बल्कि दादरी में इसके विरोध में प्रदर्शन भी हुआ था। उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के कई इलाकों में हमने देखा कि कैसे राजपूत समाज ने सड़क पर उतर कर सम्राट मिहिर भोज को ‘गुर्जर’ बताए जाने के विरुद्ध कड़ा रुख अख्तियार किया।

आखिर उनके आक्रोश का कारण क्या है? आखिर सम्राट मिहिर भोज को ‘गुर्जर’ कहे जाने पर क्षत्रिय समाज आंदोलन पर क्यों उतर आया? अब जब उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में ये मुद्दा जोर पकड़ता ही जा रहा है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रतिमा के अनावरण के बाद भी ये शांत होता नहीं दिख रहा है। राजनीतिक रूप से इसका क्या असर पड़ सकता है, हम इस पर भी बात करेंगे।

ऑपइंडिया ने इस सम्बन्ध में सोशल मीडिया में सर्कुलेट हो रहे संदेशों की भी पड़ताल की, जिनमें इसके खिलाफ अलग-अलग तरीकों से विरोध दर्ज कराया जा रहा था। राजपूत समाज के बीच एक सन्देश काफी प्रसारित हो रहा है, जिसमें कहा जा रहा है कि जब एक इतिहासकार के पास कुछ लोगों ने जाकर ऐसा भारत का इतिहास बताने को कहा जिसमें ‘क्षत्रिय’ नहीं आएँ, तो उस इतिहासकार ने उन्हें कोरा कागज देकर भेज दिया।

इसे ‘इतिहास की चोरी’ का नाम देते हुए राजपूत समाज के लोग कह रहे हैं कि उनसे उनकी पहचान व उनके पूर्वजों की अस्मिता न छीनी जाए। ऐसा नहीं है कि आक्रोशित सिर्फ राजपूत ही हैं। गुर्जर समाज में भी आक्रोश है, क्योंकि उनका आरोप है कि सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के अनावरण के दौरान ‘गुर्जर’ शब्द को हटा दिया गया। उनका कहना है कि प्रतिमा का उद्घाटन तब तक नहीं माना जाएगा, जब तक वापस वहाँ ‘गुर्जर’ शब्द नहीं लिख दिया जाता।

सियासत में मौके देखते ही फायदे के लिए नेता तो कूद पड़ते ही हैं, ऐसे में 2017 तक उत्तर प्रदेश में सत्ता में रही सपा के मुखिया अखिलेश यादव भी कैसे पीछे रहते। अखिलेश यादव ने दावा किया कि सम्राट मिहिर भोज गुर्जर-प्रतिहार थे, लेकिन भाजपा ने उनकी जाति ही बदल दी है। उन्होंने लिखा, “इतिहास में पढ़ाया जाता रहा है कि सम्राट मिहिर भोज गुर्जर-प्रतिहार थे, पर भाजपाइयों ने उनकी जाति ही बदल दी है। निंदनीय!’”

अखिलेश यादव ने आगे कहा, ‘”छल वश भाजपा स्थापित ऐतिहासिक तथ्यों से जानबूझ कर छेड़छाड़ व सामाजिक विघटन कर किसी एक पक्ष को अपनी तरफ करती रही है। हम हर समाज के मान-सम्मान के साथ हैं।” हालाँकि, सीएम योगी के दादरी दौरे से पहले गुर्जर और राजपूत संगठनों ने एक साथ मंच पर आकर विवाद ख़त्म करने की घोषणा की थी। लेकिन, ‘गुर्जर’ शब्द शिलापट्ट से हटाने जाने के विरोध में गुर्जर समाज ने महापंचायत बुला लिया।

सम्राट मिहिर भोज पर क्या कहना है राजपूत समाज के प्रतिनिधियों का?

हमने इस पूरे मामले को समझने के लिए उत्तर प्रदेश में ‘श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना’ प्रदेश संगठन महामंत्री राणा बृजेश प्रताप सिंह से बात की, जिन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस प्रतिमा का अनावरण किया है, उस पर ‘गुर्जर’ शब्द नहीं लिखा था और ये बात उस कार्यक्रम में उपस्थित गुर्जर नेताओं को भी पता है। उन्होंने ताज़ा घटना का जिक्र करते हुए बताया कि सोमवार (27 सितंबर, 2021) की रात को सपा-बसपा के कुछ गुर्जर नेताओं ने प्रतिमा को गंगाजल से धोया है।

राणा बृजेश प्रताप सिंह ने कहा कि इस कृत्य में कुछ भाजपा के स्थानीय नेता भी शामिल थे। उनका कहना था कि वो इस उद्घाटन को नहीं मानते, इसीलिए ‘शुद्धिकरण’ कर के फिर से उसमें ‘गुर्जर’ शब्द लगा दिया। उन्होंने भाजपा नेता सुरेंद्र सिंह नागर पर आरोप लगाया कि उन्होंने सुबह-सुबह जाकर प्रतिमा पर फूल चढ़ाया और सोशल मीडिया पर ‘सत्यमेव जयते’ लिखा। बृजेश ने पूछा कि क्या किसी के लिख देने से इतिहास बदल जाएगा?

उन्होंने कहा कि पहली बात तो ये है कि मुख्यमंत्री ने इसकी अनुमति नहीं दी थी। उन्होंने कहा कि इस शब्द को लगाने का ये लोग प्रयास कर रहे थे, लेकिन मुख्यमंत्री को संभवतः इतिहास की जानकारी है और इसीलिए उन्होंने इस शब्द पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि सीएम योगी ने सत्य का साथ दिया है, लेकिन इन हरकतों से उनका अपमान किया जा रहा है। उन्होंने पूछा कि जब यही करना था तो उन्हें बुलाया क्यों?

बृजेश ने कहा, “आज का राजपूत युवा स्वतंत्र सोच रखता है और किसी पार्टी के पीछे लग कर काम करने वाला नहीं है। वो खुद अपना निर्णय लेने में सक्षम है। कुछ लोग बंद कमरे में समझौता कर के आंदोलन को खत्म कराने का ठेका ले रहे हैं, लेकिन ये आंदोलन युवाओं का है। समझौता कराने वालों का नहीं है, जो मीडिया में आकर आंदोलन खत्म कराने की घोषणा कर रहे। युवा नाराज़ है। रोजगार नहीं मिल रहा हमारे युवाओं में। सरकारी नौकरियों में हमारी हिस्सेदारी 4% से भी कम है। युवाओं को कोई बहका नहीं सकता, वो अपना हक़ माँगने के बदले अब छीनेंगे।”

अखिलेश यादव के बयान पर राणा बृजेश प्रताप सिंह ने कहा कि पूर्व सीएम ने ‘गुर्जर-प्रतिहार’ लिख कर एक भ्रामक सी स्थिति पैदा कर छोड़ दी है और ये नहीं बताया है कि वो जाति की बात कर रहे या क्षेत्र की। वो बाद में राजपूतों से कहेंगे कि क्षेत्र की बात की है और गुर्जरों से कहेंगे कि उनकी बात की गई है। बकौल बृजेश, गाँव-गाँव में राजपूत युवाओं की पंचायत हो रही है और सिकंदराबाद-जेवर से लेकर कई विधानसभा क्षेत्रों में ये चालू है।

उन्होंने कहा, “भाजपा और RSS पिछले एक-डेढ़ दशक से इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने का प्रयास कर रही है। युवा इसके खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है। पहले के बड़े-बुजुर्ग समझौते कर के बैठ जाते थे। अब हम मूर्तियाँ लगाएँगे, क्योंकि पहले नहीं लगाया तभी आज ऐसा हो रहा। हम सम्राट मिहिर भोज के अलावा भीमदेव सोलंकी, पृथ्वीराज चौहान, अनंगपाल तोमर और महाराजा सुहेलदेव की भी प्रतिमाएँ लगाएँगे। महाराणा प्रताप एक राष्ट्रीय नायक हैं, उनकी छवि अलग है। हम अब उन नायकों की प्रतिमाएँ लगाएँगे, जिनकी ज्यादा चर्चा नहीं हुई।”

उन्होंने ‘श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना’ की अगली योजनाओं के बारे में बात करते हुए बताया कि अब हमारे जो छिपे हुए महापुरुष हैं, उन्हें सबके सामने लाना है क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया तो उन पर भी दावा ठोका जाएगा कल को। उन्होंने कहा कि गुर्जर व राजपूत में विवाद पैदा कर के योगी आदित्यनाथ को नुकसान पहुँचाया जा रहा है, जिसमें कुछ भाजपा के लोग भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राजपूत युवा अब अपना अलग स्वतंत्र राजनीतिक लड़ाई शुरू करेंगे।

वहीं ऑपइंडिया ने ‘अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा’ के यशपाल तँवर से भी बात की, जिन्होंने जानकारी दी कि हमारे समाज ने करनाल में 26 सितंबर, 2021 को ‘वीर चक्र’ से सम्मानित कर्नल देवेंद्र सिंह के नेतृत्व में एक महापंचायत बुलाई थी। उन्होंने बताया कि पूरे हरियाणा के राजपूत अक्टूबर में पुनः इकट्ठे होंगे और लुधियाना के अमर गार्डन में राजपूत समाज का एक बहुत बड़ा कार्यक्रम हुआ था, जिसमें पंजाब के विधानसभा स्पीकर केपी राणा भी आए थे।

उन्होंने बताया कि 10,000 के राजपूत उस दिन इकट्ठे हुए थे। उन्होंने कहा, “हमारे पूर्वजों की जाति बदली जाएगी तो हमारे युवा इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। ग्वालियर में हमारी टीम अदालत में भी लड़ाई लड़ रही है। केवल सोशल मीडिया ही नहीं, जमीन पर भी हम लड़ रहे हैं। हमारे अध्यक्ष महेंद्र तँवर ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सरकार असामाजिक तत्वों को सहारा दे रही है। लोकतंत्र के भीतर राजपूतों के अधिकारों का हनन हो रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमारे बच्चों पर गोकशी के आरोप लगाए जा रहे हैं। उनका बेवजह चालान काटा जाता है। ‘किसान आंदोलन’ को मैं ‘जाट आरक्षण’ आंदोलन कहता हूँ, उन्होंने ‘भारत बंद’ के बहाने इतनी तबाही मचाई, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। राजपूत समाज पूरे देश में फैला हुआ है। हमारा युवा योगी जी को काफी पसंद करता है और जब उन्हें दिल्ली बुलाया गया था और उन्हें सीएम पद से हटाने जाने की अटकलें थीं, उस समय पूरे देश के राजपूतों ने उनके समर्थन में ट्रेंड चलाया।”

सम्राट मिहिर भोज को ‘गुर्जर’ बताए जाने पर राजपूत समाज के विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें

गाँव गागरोल सिकंदराबाद विधान सभा के जिला बुलंदशहर में टीम करणी सेना के पदाधिकारियों की मीटिंग
लखनऊ में इतिहास संरक्षण पर ‘करणी सेना’ के सभी पदाधिकारियों की मीटिंग
ग्राम भावसी में बैठक, अनूपशहर विधानसभा बुलंदशहर में
ग्राम नगला मुइद्दीनपुर में महाराज सुहेलदेव जी के नाम से बोर्ड लगाया गया और बैठक की – विधानसभा क्षेत्र खुर्जा बुलंदशहर

ग्राम मुराद गढ़ी जेवर विधानसभा में इस तरह का बोर्ड लगाया गया

सम्राट मिहिर भोज के ‘राजपूत’ होने के पीछे क्या दिए जा रहे हैं सबूत?

आज भी ‘प्रतिहार’ वंश का क्षत्रिय समाज मौजूद है। भीनमाल, उज्जैन और कन्नौज पर इन्हीं के पूर्वजों ने शासन किया था – ऐसा माना जाता है। ये भी कहा जा रहा है कि राजस्थान और गुजरात के कुछ इलाकों को ही ‘गुर्जरदेश’ कहा जाता था, पूरे भारत को नहीं। ‘गुर्जर’ का अर्थ ‘गुजराती’ या ‘गुर्जरदेश में निवास करने वाले’ के रूप में भी किया जाता रहा है। गल्लका के शिलालेख में लिखा है कि नागभट्ट ने गुर्जरों को हराया था, जो अब तक अजेय थे।

इन तर्कों के आधार पर सवाल पूछा जा सकता है कि जब बागभट्ट ‘गुर्जर’ थे तो उन्होंने ‘गुर्जरों’ को कैसे हरा दिया? नागभट्ट के वंश में ही मिहिर भोज का जन्म हुआ था। कहा जाता है कि ‘गुर्जरदेश’ पर विजय पाने के पश्चात ही नागभट्ट को ‘गुर्जरेश्वर’ कहा गया। मिहिर भोज के सेनापति कनलपल के बारे में भी तथ्य दिया जा सकता है कि वो ‘गुर्जर’ नहीं थे, क्योंकि आज भी गढ़वाल में परमार राजपूत रहते हैं, जो इसी समाज के हैं।

836 ईस्वी से 885 ईस्वी तक शासन करने वाले मिहिर भोज का शासनकाल 49 वर्षों का था। इन 5 दशकों में भारतीय उप-महाद्वीप का एक बड़ा हिस्सा उनके मार्गदर्शन में काफी फला-फूला। उनका साम्राज्य मुल्तान से पश्चिम बंगाल में गुर्जरपुर तक और कश्मीर से कर्नाटक तक फैला हुआ था। ये वो समय था, जब अरब के इस्लामी कट्टरपंथियों ने साम्राज्य विस्तार शुरू कर दिया था और उनकी नजर सिंधु के पार भारतवर्ष पर थी।

स्टिंग से बेनकाब हुए बड़े वाले टिकैत: कैश पेमेंट मिलने पर गुड़ फैक्ट्री के लिए जमीन-गन्ना ‘सस्ता’ दिलाने को हो गए तैयार

बीकेयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और तथाकथित किसान नेता राकेश टिकैत के भाई नरेश टिकैत, ज़ी न्यूज़ द्वारा किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन में अपनी दोहरी नीतियों के कारण पकड़े गए हैं, जिसमें उन्हें यह कहते हुए पाया गया कि विदेशी कंपनी को न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) से कम कीमत पर गन्ना और फ़ैक्ट्री के लिए सस्ती जमीन भी दिला सकते हैं यदि नकद में भुगतान किया जाए।

नरेश टिकैत को लगभग 7 मिनट 24 सेकंड के वीडियो में गुड़ फ़ैक्ट्री और उसी के लिए गन्ना खरीद के प्रस्ताव पर चर्चा करते देखा जा सकता है। एक रिपोर्टर, जो एक उद्योगपति व्यापारी के रूप में नरेश टिकैत के सामने एक व्यापारिक सौदे का प्रस्ताव रख रहा है, को नरेश टिकैत से गुड़ की फैक्ट्री खोलने के बारे में बात करते हुए देखा जा सकता है और जब बातचीत आगे बढ़ते हुए गन्ने की कीमतें बढ़ीं तो… यहाँ पहुँची तो नरेश टिकैत को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “बहुत अच्छा, हमारे यहाँ बड़ी मात्रा में गन्ना है, और ये गन्ने आपको सही दाम पर मिलेंगे, मिल भी इतना गन्ना नहीं ले सकती, बस भुगतान नकद में होना चाहिए, मिल में माँगे गए दर से भी कम कीमत पर आपको गन्ना मिलेगा, जैसा कि मिल की कीमत है, 325 रुपए प्रति क्विंटल है, जबकि क्रशर (कोल्हू) की कीमत 225 रुपए, 250 रुपए या 275 रुपए में मिल जाएगा आपको..”

यह ऐसे समय में आया है जब नरेश टिकैत जैसे तथाकथित किसान नेता और उनके भाई राकेश टिकैत किसान विरोधी होने का दावा करते हुए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। जबकि ‘किसान प्रदर्शनकारी’ एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) को वैध बनाने की माँग कर रहे हैं। वहीं टिकैत अन्य मिलों द्वारा दी जाने वाली कीमत से कम पर वही गन्ना दिलाने की बात कह रहे हैं, अगर पैसे का भुगतान नकद में किया जाता है। सीधे बैंक हस्तांतरण नहीं। इस प्रकार बड़ी मात्रा में बेहिसाब नकदी लेनदेन काले धन की समस्या का कारण भी बन सकता है।

Zee News के अनुसार, उनकी टीम उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में टिकैत से मिली, जहाँ हाल ही में एक ‘महापंचायत’ आयोजित की गई थी। टिकैत इसी जिले के रहने वाले हैं। अंडरकवर ज़ी न्यूज़ की टीम ने नरेश टिकैत को सिंगापुर की एक कंपनी के साथ यूपी में गुड़ की फ़ैक्टरी लगाने के समझौते के बारे में बताया। पहले तो टिकैत ने दिलचस्पी नहीं दिखाई लेकिन जब उन्हें विदेशी कंपनी के निवेश के बारे में पता चला, तो उनकी दिलचस्पी बढ़ गई।

मजे की बात यह है कि टिकैत ने उन मुद्दों को नहीं उठाया जो वह और उनके भाई अक्सर ‘किसान’ नेताओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शनों के दौरान उठाते थे। उदाहरण के लिए, उन्होंने यह उल्लेख नहीं किया कि किसान उद्योगों को जमीन नहीं देते हैं, जिस तरह से वे विभिन्न विरोध प्रदर्शनों में दावा करते रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने कंपनी को सालाना 10,000 रुपए प्रति बीघा की दर से 12 बीघा जमीन भी देने की पेशकश की। मुजफ्फरनगर में हाल ही में हुई महापंचायत के दौरान टिकैत ने किसानों को अपनी जमीन उद्योगों को देने के खिलाफ ‘चेतावनी’ दी थी क्योंकि वे उनकी जमीन ‘हड़प’ सकते हैं। लेकिन जब बात उनकी अपनी जमीन या उनके साथ सौदे की आई तो नरेश टिकैत कंपनियों के साथ समझौता करने को तैयार नजर आए।

अचानक नहीं भड़की हिंसा, सोची-समझी साजिश थी दिल्ली दंगा; CCTV तोड़ना भी उसी का हिस्सा: दिल्ली हाई कोर्ट की दो टूक

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों में हेड कॉन्सटेबल रतन लाल की हत्या मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने मोहम्मद इब्राहिम की बेल याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने बताया कि मौजूदा सबूत इस बात की पुष्टि करते हैं कि शहर में कानून व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए एक पूर्व नियोजित साजिश रची गई थी।

मोहम्मद इब्राहिम की बेल याचिका को खारिज करने वाले कोर्ट के आदेश के अंश

कोर्ट ने कहा, “फरवरी 2020 में देश की राष्ट्रीय राजधानी को दहलाने वाले दंगे स्पष्ट तौर पर एकदम से नहीं हुए। वीडियो और फुटेज में दिखने वाला प्रदर्शनकारियों का बर्ताव जिसे अभियोजन पक्ष द्वारा रिकॉर्ड में रखा गया, साफ तौर पर दिखाता है कि यह सरकार के कामकाज को अस्त-व्यस्त करने के साथ-साथ शहर में लोगों के सामान्य जीवन को बाधित करने का एक सुनियोजित प्रयास था।”

अदालत ने यह भी कहा कि सीसीटीवी कैमरों को भी व्यवस्थित ढंग से नष्ट किया गया था जो शहर में कानून व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए एक पूर्व नियोजित साजिश के अस्तित्व की पुष्टि करता है। अदालत ने कहा, “यह (पूर्व नियोजित साजिश) इस तथ्य से भी साफ होती है कि असंख्य दंगाइयों ने बेरहमी से पुलिस अधिकारियों पर लाठी, डंडे, बैट चलाए।”

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों के दौरान मारे गए हेड कॉन्सटेबल रतन लाल के मर्डर केस में आरोपित की बेल याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि किसी भी व्यक्ति की स्वतंत्रता इस प्रकार दुरुपयोग नहीं की जानी चाहिए कि समाज के ताने बाने को अस्थिर करके खतरा हो और दूसरों को चोट पहुँचे।

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा, “इस न्यायालय ने पहले एक लोकतांत्रिक राजनीति में व्यक्तिगत स्वतंत्रता के महत्व पर विचार किया है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता का दुरुपयोग इस तरह से नहीं किया जा सकता है जिससे सभ्य समाज के ताने-बाने को अस्थिर करने का प्रयास किया जाता है। यह और अन्य व्यक्तियों को चोट पहुँचाता है।”

इब्राहिम के ख़िलाफ़ केस

सीसीटीवी फुटेज में मोहम्मद इब्राहिम को नेहरू जैकेट, सलवार कुर्ता, और इस्लामी टोपी पहने साफ देखा गया था। अभियोजन पक्ष ने तीन वीडियो सबूत के तौर पर पेश किए थे कि ताकि साबित हो कि हेड कॉन्सटेबल रतन लाल की मौत पूर्व-नियोजित थी। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली दंगे कुछ ऐसा नहीं थे जो अचानक भड़क गए हों।

कोर्ट ने बेल याचिका को नकारते हुए कहा, भले ही इब्राहिम क्राइम सीन पर न दिखा, लेकिन वह भीड़ का हिस्सा था। वह जानबूझकर अपने इलाके से  1.5 किलोमीटर दूर तक गया। उसके हाथ में तलवार थी जिसका इस्तेमाल किसी भी नुकसान के वक्त किया जा सकता था। कोर्ट ने कहा, “इसी प्रकाश में याचिकाकर्ता की तलवार के साथ वाली फुटेज काफी भयानक है जो याचिकाकर्ता को हिरासत में रखे रखने के लिए पर्याप्त है।”

बता दें कि आरोपितों की ओर से पेश हुए कई वकीलों की दलीलें सुनने के बाद इस संबंध में पिछले माह आदेश सुरक्षित रख लिया गया था। अभियोजन पक्ष की ओर से एएसजी एसवी राजू और विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद मामले में पेश हुए थे। इब्राहिम की जमानत याचिका 11 जमानत आवेदनों में सुरक्षित आदेशों का हिस्सा थी। गौरतलब है कि, अदालत ने मामले में शाहनवाज और मोहम्मद अय्यूब नाम के अन्य आरोपितों को जमानत दे दी, लेकिन सादिक और इरशाद अली के आवेदनों को खारिज कर दिया। 5 अन्य आरोपितों- मो. आरिफ, शादाब अहमद, फुरकान, सुवलीन और तबस्सुम को इस महीने की शुरुआत में जमानत मिली थी।

रतन लाल की हत्या 

24 फरवरी को दिल्ली दंगों के समय इस्लामी भीड़ डंडा, लाठी, बास्केट बैट, लोहे की रॉड और पत्थरों लेकर वजीराबाद रोड पर करीब 1 बजे इकट्ठा हुई। कुछ देर में ये हिंसक हो गए। स्थिति संभालने के लिए पुलिस को आंसू गैस छोड़ने पड़े। मौजूदा पुलिसकर्मी बताते हैं कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों को मारना शुरू कर दिया था। भीड़ ने डीसीपी शाहदरा, एसीपी गोकुलपुरी और हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल पर भी हमला किया। दोनों सड़क पर गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल को मृत घोषित कर दिया गया।

निजामाबाद, बेंगलुरू और अब हैदराबाद: कट्टरपंथी भीड़ ने हिंदू को पीटा क्योंकि उसके बाइक पर बैठी थी मुस्लिम लड़की

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में कट्टरपंथी भीड़ ने एक हिंदू युवक की पिटाई कर दी। युवक का गुनाह यह था कि उसके बााइक पर एक मुस्लिम युवती बैठी थी। इस तरह की हाल में कई घटनाएँ सामने आई है। इससे पहले तेलंगाना के निजामाबाद में इसी तरह के मामले में भीड़ ने दलित युवक की पिटाई की थी। उसके बाद बेंगलुरू से एक वीडियो सामने आया था जिसमें मुस्लिम भीड़ ने बाइक सवार हिंदू युवक को रोककर धमकाया, क्योंकि वह एक मुस्लिम महिला के साथ घूम रहा था।

हैदराबाद के डीसीपी पश्चिमी जोन ने टाइम्स नाउ को बताया कि पहले युवक और युवती को एक मुस्लिम व्यक्ति ने रोका और उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। इसके बाद कुछ अन्य लोग भी लड़के को कथित रूप से पीटने में शामिल हो गए। घटना तीन दिन पुरानी है। लेकिन वीडियो सोशल मीडिया वेबसाइटों पर वायरल होने के बाद मामला सामने आया है।

पुलिस के अनुसार, आरोपित को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ इंडियन पीनल कोड की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि घटना में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के लिए आरोपित से पूछताछ की जा रही है।

तेलंगाना में ऐसी घटना पहली बार हुई है। इससे पहले भी हिंदू व्यक्तियों के खिलाफ ‘हेट क्राइम’ की घटनाएँ हो चुकी हैं। इन घटनाओं के दौरान कट्टरपंथी भीड़ ने मुस्लिम महिला के साथ यात्रा करने पर हिंदू पुरुषों को रोका, उनका मजाक बनाया और बेरहमी से उनकी पिटाई की।

इसी तरह के एक मामले में मुस्लिम लड़की के साथ सरकारी अस्पताल जा रहे एक दलित को कुछ कट्टरपंथी मानसिकता वाले मुस्लिमों ने रोक लिया था। उन्हें उसे बेरहमी से पीटने के बाद उसका अपहरण कर लिया था। कई घंटों के बाद जब आरएसएस के स्थानीय नेताओं ने इस मामले में हस्तक्षेप किया तो उसे छोड़ा गया। हालाँकि, बाद में लड़की के भाई ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए बताया कि उसी ने अपनी बहन को व्यक्ति के साथ डॉक्यूमेंट लेने के लिए भेजा था।

हाल ही में ऐसी घटना कर्नाटक के बेंगलुरू में भी हुई थी। दक्षिण बेंगलुरू की इस घटना में भी हिंदू व्यक्ति मुस्लिम लड़की को बाइक पर बिठाकर जा रहा था तो मुस्लिम भीड़ ने उसे पीट दिया था। यह घटना उस वक्त सामने आई थी, जब बिना तारीख वाला वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया था। वीडियो में मुस्लिम भीड़ ने मुस्लिम महिला के साथ बाइक चला रहे हिंदू शख्स को रोका।

भीड़ में शामिल लोग हिंदू व्यक्ति को धमकी देते हुए उसे किसी भी मुस्लिम महिला के साथ यात्रा नहीं करने को कह रहे थे। वहीं हिंदू व्यक्ति के साथ यात्रा करने के मामले में मुस्लिम महिला का मजाक भी बनाया गया। यहीं नहीं उसे उसके परिवार का फोन नंबर देने के लिए मजबूर किया गया था। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने बताया था कि मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।

जानिए ‘राजपूत सम्राट मिहिर भोज’ को लेकर क्या कहता है इतिहास: जाति नहीं, क्षेत्र था गुर्जर?

भारत में पूरी नौवीं शताब्दी अगर किसी के नाम रही तो वो थे सम्राट मिहिर भोज। उन्होंने न सिर्फ अरब के मुस्लिम आक्रांताओं को रोका, बल्कि भारत को फिर से एक करने में बड़ी भूमिका निभाई। उनकी जयंती के अवसर पर 22 सितंबर, 2021 को दादरी में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी प्रतिमा का अनावरण किया। इसके बाद से ही ये बहस चालू हो गई है कि मिहिर भोज गुर्जर सम्राट थे या राजपूत सम्राट?

इस मामले में राजपूत संगठन खासे सक्रिय हैं और उन्होंने सीधा आरोप लगाया है कि उनकी विरासत से छेड़छाड़ की जा रही है। भाजपा के प्रति उनमें से कई आक्रोशित भी हैं। मिहिर भोज के प्रतिमा के अनावरण से पहले पोस्टरों पर उन्हें ‘गुर्जर सम्राट’ बताए जाने पर ये आक्रोश सड़कों पर खुल कर सामने आया। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव भी होने हैं, ऐसे में ये मुद्दा और भी संवेदनशील हो गया है।

इस लेख में हम बात करेंगे कि ‘आदिवराह’ के नाम से सिंहासन को सुशोभित करने वाले मिहिर भोज को राजपूत बताए जाने के पीछे ऐतिहासिक तथ्य क्या कहते हैं। समकालीन इतिहास में इसके बारे में कुछ है या नहीं। शिवभक्त मिहिर भोज, जिन्हें अरब के यात्री ‘भारत में इस्लाम का सबसे बड़ा दुश्मन’ बताते थे, उनके क्षत्रिय होने के कौन से प्रमाण मौजूद हैं और किन आधार पर राजपूत संगठन आक्रोश जता रहे हैं, हम इस पर बात करेंगे।

क्षत्रिय इतिहास गौरव से भरा रहा है और राजस्थान की तरफ से भारत में दाखिल होने की कोशिश करने वाले इस्लामी आक्रांताओं को उन्होंने बार-बार धूल चटाई है। दिल्ली से कुछ ही दूरी पर स्थित मेवाड़ साम्राज्य ने मुगलों की नाक में जितना दम किया, वो कबीले तारीफ़ है। चित्तौड़ में हुए कई जौहर क्षत्रिय समाज के देश के लिए दिए गए असंख्य बलिदानों में से एक हैं। महाराणा प्रताप पूरे हिन्दू समाज के लिए पूज्य हैं। हल्दीघाटी की मिट्टी हमारे लिए पवित्र है।

‘गुर्जर’ और ‘गुज्जर’ के बीच का अंतर: क्षेत्र या जाति?

अब आते हैं सम्राट मिहिर भोज और ‘राजपूत इतिहास’ पर। मिहिर भोज को ‘गुर्जर सम्राट’ बताए जाने के विरोध में कुछ इतिहासकारों का कहना है कि ‘गुर्जर’ शब्द की व्याख्या करने पर हमें पता चलता है कि ये शब्द एक खास क्षेत्र के लिए प्रयोग में लाया जाता था और उस क्षेत्र के निवासियों के लिए, तभी सुथार, जैन और ब्राह्मण जैसे समुदायों में भी लोगों को गुर्जर कहा गया। बड़ौदा के जो गायकवाड़ थे, उन्हें मराठा होने के बावजूद ‘गुर्जर नरेश’ कहा गया।

TOI के एक लेख में वरिष्ठ पत्रकार संजीव सिंह ने ‘गुर्जर’ और ‘गुज्जर’ के बीच का अंतर भी समझाया है। उनके अनुसार, ‘गुर्जर’ शब्द का पहले पहले ‘हर्षचरित्र’ में वर्णन मिलता है, जिसे सम्राट हर्षवर्धन के राजकवि बाण ने रचा था। ये 640 ईश्वी के करीब की बात है। इसमें राजा प्रभाकरवर्धन का सिंधु, मालवा, गांधार और गुर्जर प्रदेशों में विजय अभियान का जिक्र है। कर्नाटक के ऐहोले में पुलकेशी II के समय का एक शिलालेख भी मिलता है।

634 ईश्वी के इस शिलालेख में लिखा है कि गुर्जर प्रदेश में राजा ने विजय अभियान चलाया था। ह्वेन सांग नाम का यात्री जब भारत आया था, तो उसने अपने संस्मरण में लिखा है कि छठी-सातवीं शताब्दी में गुर्जर नाम के एक इलाके में चावड़ा वंश के राजपूतों का राज है। बड़ौदा के मराठा शासकों को ‘गुर्जर नरेश’ इसीलिए कहा जाता था, क्योंकि पहले उनकी भूमि वही हुआ करती थी। जैन मुनि उद्योतना सूरी ने भी ‘गुर्जर’ शब्द का जिक्र किया है।

उन्होंने ‘कुवलयमाला’ में उन्होंने गुर्जर, सिंध और मालवा के रहने वाले लोगों के लिए उनके क्षेत्र के नाम से ही विशेषण का प्रयोग किया है। साथ ही समुदायों में उन्होंने ब्राह्मण, क्षत्रिय व भील इत्यादि के साथ-साथ ‘गुज्जर’ शब्द का प्रयोग किया है। 1172 ईश्वी के एक शिलालेख में ‘गुर्जर ब्राह्मण’ सतानंद का जिक्र है, जो कृष्णात्रेय गोत्र के थे। ये शिलालेख यादव राजा कृष्णा के समय का है। संजीव कुमार इन आधार पर बताते हैं कि ‘गुर्जर’ एक क्षेत्र था, जाति नहीं।

12वीं शताब्दी में चालुक्य राजा कुमारपाल सोलंकी के समय की पुस्तक ‘कुमारपालप्रबंध’ में क्षत्रिय समाज के के 36 समूहों का जिक्र किया है, जिसमें ‘गुज्जर’ नहीं हैं। गुजरात में ‘गुर्जरधरित्री’ और ‘गुर्जरत्रिकदेशे’ नाम के जगहों का जिक्र जरूर मिलता है। कश्मीर के इतिहास की सबसे बड़ी पुस्तक राजतरंगिणी में भी ‘गुर्जर’ का जिक्र नहीं है, जबकि वहाँ अभी इनकी जनसंख्या 10 लाख है। ब्राह्मणों, क्षत्रियों व जैनों में भी गुर्जरों का जिक्र है, लेकिन कहीं भी वो गुर्जर समुदाय के नहीं थे और न ही गोजीरी भाषा बोलते थे।

इसी तरह ये तर्क भी दिया जा सकता है कि 20वीं शताब्दी के कई बड़ी हस्तियाँ ‘गुर्जर सभा’ का हिस्सा थीं। केएम मुंशी एक गुर्जर ब्राह्मण थे, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। ‘गुर्जर सभा’ का गठन गुजराती भाषा और गुर्जर क्षेत्र की पहचान को आगे बढ़ाने के लिए बनी थी, जिसका हिस्सा महात्मा गाँधी और मोहम्मद अली जिन्ना तक थे। जिन्ना ने कहा भी था कि धरती पर हर एक गुर्जर गाँधी पर गर्व करता है।

प्रतिहार राजपूत: आज भी मौजूद हैं इनके वंशज

आज भी ‘प्रतिहार’ वंश का क्षत्रिय समाज मौजूद है। भीनमाल, उज्जैन और कन्नौज पर इन्हीं के पूर्वजों ने शासन किया था – ऐसा माना जाता है। ये भी कहा जा रहा है कि राजस्थान और गुजरात के कुछ इलाकों को ही ‘गुर्जरदेश’ कहा जाता था, पूरे भारत को नहीं। ‘गुर्जर’ का अर्थ ‘गुजराती’ या ‘गुर्जरदेश में निवास करने वाले’ के रूप में भी किया जाता रहा है। गल्लका के शिलालेख में लिखा है कि नागभट्ट ने गुर्जरों को हराया था, जो अब तक अजेय थे।

इन तर्कों के आधार पर सवाल पूछा जा सकता है कि जब बागभट्ट ‘गुर्जर’ थे तो उन्होंने ‘गुर्जरों’ को कैसे हरा दिया? नागभट्ट के वंश में ही मिहिर भोज का जन्म हुआ था। कहा जाता है कि ‘गुर्जरदेश’ पर विजय पाने के पश्चात ही नागभट्ट को ‘गुर्जरेश्वर’ कहा गया। मिहिर भोज के सेनापति कनलपल के बारे में भी तथ्य दिया जा सकता है कि वो ‘गुर्जर’ नहीं थे, क्योंकि आज भी गढ़वाल में परमार राजपूत रहते हैं, जो इसी समाज के हैं।

हालाँकि, ‘गुर्जर बनाम राजपूत’ की लड़ाई नहीं होनी चाहिए और इसका कोई तुक नहीं है, लेकिन अगर किसी समुदाय से उसकी पहचान या उसके पूर्वजों की पहचान छीनी जाती है तो उनका आक्रोशित होना स्वाभाविक है। यही राजपूत संगठनों का कहना है। उनका कहना है कि ‘गुर्जर सम्राट’ की जगह मिहिर भोज को ‘हिन्दू सम्राट’ भी कहा जाता तो कोई दिक्कत नहीं थी। अब देखना है कि ये विवाद कहाँ जाता है।

कौन थे सम्राट मिहिर भोज?

836 ईस्वी से 885 ईस्वी तक शासन करने वाले मिहिर भोज का शासनकाल 49 वर्षों का था। इन 5 दशकों में भारतीय उप-महाद्वीप का एक बड़ा हिस्सा उनके मार्गदर्शन में काफी फला-फूला। उनका साम्राज्य मुल्तान से पश्चिम बंगाल में गुर्जरपुर तक और कश्मीर से कर्नाटक तक फैला हुआ था। ये वो समय था, जब अरब के इस्लामी कट्टरपंथियों ने साम्राज्य विस्तार शुरू कर दिया था और उनकी नजर सिंधु के पार भारतवर्ष पर थी।

कन्नौज को उन्होंने अपनी राजधानी बनाया था और वहीं से शासन चलाया करते थे। कृषि और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियाँ लाने वाले मिहिर भोज के राज में प्रजा खुशहाल थी। कन्नौज तो इतना समृद्ध शहर था कि वहाँ 7 किलों के अलावा 10 हजार की संख्या में मंदिर थे। धन-वैभव से सम्पन्न उनके राज्य में सोने-चाँदी के सिक्कों से व्यापार होता था। अपराधियों को उचित दंड दिया जाता था।

यहाँ तक कि उस दौर के अरब यात्री सुलेमान ने भी अपनी पुस्तक में उनका जिक्र किया है और तारीफ की है। सुलेमान ने लिखा है कि किस तरह सम्राट मिहिर भोज की सेना में बड़ी संख्या में ऊँट, हाथी और घोड़े शामिल थे। उसने ‘सिलसिला-उत-तारिका’ में लिखा है कि मिहिर भोज के राज में चोर-डाकुओं का भी नहीं रहता था। उनकी सीमाएँ दक्षिण में राष्ट्रकूट और बंगाल में पालवंश के अलावा मुल्तान में इस्लामी शासकों से सटी हुई थीं।

915 ईस्वी में भारत भ्रमण पर आये बगदाद के इतिहासकार अल मसूदी ने भी ‘मिराजुल-जहाब’ नामक पुस्तक में लिखा है कि मिहिर भोज की सेनाएँ काफी शक्तिशाली व पराक्रमी है। उसने लिखा है कि लाखों की संख्या में ये सेना चारों दिशाओं में फैली हुई है। 873 ईस्वी में जन्मे मिहिर भोज की गाथा स्कंद पुराण के ‘प्रभास खंड’ में भी वर्णित है। कश्मीर के राज्य कवि कल्हण ने भी अपनी पुस्तक ‘राज तरंगिणी’ में उनकी वीरता का जिक्र किया है।

राम मंदिर आंदोलन वाले अशोक सिंघल के नाम से जानी जाएगी आगरा की ‘घटिया आजम खान’ सड़क

उत्तर प्रदेश की आगरा स्थित ‘घटिया आजम खान’ सड़क अब अशोक सिंघल के नाम से जानी जाएगी। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के दिवंगत नेता सिंघल ने अयोध्या राम मंदिर आंदोलन के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था। सड़क का नाम बदलने का प्रस्ताव आगरा नगर निगम ने सर्वसम्मति से पारित किया है।

सिंघल का जन्म 27 सितंबर 1926 को आगरा में इसी सड़क किनारे बसे एक मुहल्ले में हुआ था। मेयर नवीन जैन ने बताया कि सड़क का नाम बदलने का प्रस्ताव शहीद नगर वार्ड के पार्षद जगदीश पचौरी ने रखा था। स्मार्ट सिटी आगरा कार्यालय में आयोजित आगरा नगर निगम की कार्यकारिणी के 13वें सत्र के दौरान इसे स्वीकार कर लिया गया।

जैन ने बताया, “अशोक सिंघल अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए ही युवावस्था में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में शामिल हो गए थे। उन्होंने 1950 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के इंजीनियरिंग संस्थान से ग्रेजुएशन किया था और उसके बाद वे पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में RSS में शामिल हो गए।”

मेयर ने कहा कि सिंघल 1981 में विहिप में शामिल हुए थे। राम जन्मभूमि आंदोलन और 1984 में ‘धर्म संसद’ आयोजन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। पार्षद जगदीश पचौरी ने सिंघल पर रोड का नाम रखने को गर्व का विषय बताते हुए कहा, “स्वर्गीय अशोक सिंघल की जयंती के अवसर से आगरा की सड़क उनके नाम से जानी जाएगी। आज (27 सितंबर) उनकी जयंती थी। कार्यकारिणी की बैठक के दौरान प्रस्ताव को स्वीकार कर पास भी किया गया।”

इसके अलावा आगरा नगर निगम की बैठक में बलिदानी कौशल कुमार रावत को लेकर भी प्रस्ताव पारित किया गया। मेयर नवीन जैन कहा, “अब केहराई मोड़ क्रॉसिंग को शहीद कौशल कुमार रावत और शास्त्रीपुरम क्रॉसिंग को चित्रगुप्त क्रॉसिंग के नाम से जाना जाएगा।” इसके अलावा किदवई पार्क से राजा की मंडी में पुराने डाकघर तक की सड़क का नाम तात्या टोपे मार्ग रखा गया है। दीवानी चौराहा के पास स्थित कांजी हाउस का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय मवेशी गृह रखने का प्रस्ताव भी पास किया गया।

‘राज कुंद्रा को बोल्ड कंटेंट बनाने में शर्लिन चोपड़ा ने घसीटा… उसे उनकी पूजा करनी चाहिए’: न्यूड हो लाइव आने वाली गहना वशिष्ठ

पोर्नोग्राफी केस में गिरफ्तार राज कुंद्रा दो महीने जेल में बिताने के बाद जमानत पर 21 सितंबर को घर लौट आए। लेकिन, इस मामले में आरोप-प्रत्यारोप का दौर थमता नहीं दिख रहा है। मामले की एक अहम किरदार गहना वशिष्ठ ने शर्लिन चोपड़ा पर राज कुंद्रा को बोल्ड कंटेट बनाने में घसीटने का आरोप लगाया है। गहना वही हीरोइन हैं जिन्होंने इंस्टाग्राम के लाइव वीडियो सेशन में न्यूड होकर सबको हैरान कर दिया था। उन्हें भी अश्लील वीडियो शूट करने और उसे अपनी वेबसाइट पर अपलोड करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा को निशाना बनाने के लिए गहना ने शर्लिन एहसान फरामोश करार दिया है। उन्होंने कहा कि राज कुंद्रा को बोल्ड कंटेंट में घसीटने वाली शर्लिन ही हैं और अब लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए उन पर कीचड़ उछाल रही हैं।

ई टाइम्स को दिए इंटरव्यू में गहना ने कहा, “उसके पास करने के लिए कुछ भी नहीं है, इसलिए वह खबरों में बने रहने के लिए ऐसा कर रही है। शर्लिन खुद इस मामले में आरोपित न लगे इसलिए वह राज कुंद्रा पर निशाना साध रही है। अब वो शिल्पा शेट्टी पर पर्सनल अटैक कर रही है, जो उनके बयान पर ध्यान नहीं दे रहीं। शिल्पा उसे इतना महत्वपूर्ण भी नहीं मानतीं कि उसके खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज किया जाए।”

गहना ने कहा, “वह (शर्लिन) साल 2012 से ही बोल्ड और अडल्ट कंटेंट बना रही थीं, जबकि राज कुंद्रा से तो वह महज ढाई साल पहले ही मिली थीं।” अभिनेत्री ने कहा कि राज कुंद्रा ने शर्लिन को पैसा कमाने में मदद की। लेकिन उसने उनको भी नहीं छोड़ा। वह जिस तरह का आलीशान जीवन आज जीती है वो आर्म्सप्राइस ऐप के लिए डेवलप किए गए कंटेंट के कारण है। गहना के मुताबिक, शर्लिन को राज कुंद्रा का शुक्रगुजार होना चाहिए और उनकी पूजा करनी चाहिए। वह आज जो कुछ भी है, उन्हीं की वजह से है।

गहना ने कहा, “वह (शर्लिन) सिर्फ कपड़े उतारना जानती हैं और अब खबरों में बने रहने के लिए कीचड़ उछाल रही है। वह यह भी जानती है कि राज कुंद्रा के खिलाफ बोलने पर ही उसे लाइमलाइट मिलेगी।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों शर्लिन ने शिल्पा शेट्टी पर निशाना साधते हुए उन्हें पोर्न फिल्म से बाहर आकर लोगों की मदद करने की नसीहत दी थी। शर्लिन ने कहा था कि टीवी पर साष्टांग दंडवत करना और लक्ष्मीबाई की बात करना आसान है। वह राज कुंद्रा पर यौन शोषण के आरोप भी लगा चुकी हैं। उल्लेखनीय है कि राज कुंद्रा का व्हाट्सएप चैट लीक होने के बाद शर्लिन चोपड़ा का नाम इस मामले में सामने आया था। वहीं गहना वशिष्ठ पर पोर्न फिल्में बनवाने और उन्हें प्रसारित करवाने के आरोप हैं।

ब्रिटेन में पेट्रोल-डीजल की किल्लत, ट्रक ड्राइवरों का भी टोटा: सेना उतारने की आई नौबत, जानिए पूरा मामला

यूनाइटेड किंगडम (UK) में कई पेट्रोल व डीजल स्टेशन ईंधन की भारी कमी से जूझ रहे हैं, क्योंकि लोग ज्यादा से ज्यादा मात्रा में खरीद कर घर में रख रहे हैं। ‘पैनिक बाइंग’ की वजह से वहाँ के पेट्रोल पम्पों पर अफरातफरी मची हुई है। वहाँ के पेट्रोल पम्पों पर गाड़ियों की लंबी-लंबी लाइनें देखी जा रही हैं। कई गैस स्टेशनों पर भी वही हाल है। दिन पर लाइन में लगने के बाद भी लोगों को ईंधन नहीं मिल पा रहा।

राजधानी लंदन में तो रविवार (26 सितंबर, 2021) को तो ईंधन के लिए मारपीट तक हो गई, जिसे शांत कराने के लिए पुलिस को बुलाना पड़ा। पुलिस ने बताया है कि एक व्यक्ति को मारपीट के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। ‘पेट्रोल रिटेलर्स एसोसिएशन’ ने जानकारी दी है कि सोमवार को लगभग 90% ईंधन स्टेशनों पर पेट्रोल-डीजल व गैस की भारी कमी रही। कहीं-कहीं 50% माल ही उपलब्ध रहा।

कहीं-कहीं तो स्थिति ऐसी हो गई कि वहाँ का 90% ईंधन ख़त्म हो गया और कहीं तो कुछ भी नहीं बचा। बता दें कि PRA नाम का ये संगठन यूके में 65% ईंधन स्टेशनों का प्रतिनिधिमंडल है। ‘ब्रिटिश पेट्रोलियम’ ने भी कहा है कि उसके दो तिहाई पेट्रोल पंप सूखे से गुजर रहे हैं। हालाँकि, सरकार का कहना है कि देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है। ट्रांसपोर्ट मंत्री ग्रांट शप्पस का कहना है कि देश में पर्याप्त मात्रा में ईंधन मौजूद है।

लेकिन, असली समस्या ये है कि स्टोरेज यूनिट से पेट्रोल पम्पों तक ईंधन को ले जाने के लिए पर्याप्त मात्रा में ट्रक ड्राइवर ही उपलब्ध नहीं हैं। कोरोना वायरस संक्रमण सहित कई कारणों से यूके में ट्रक ड्राइवरों की भारी कमी हो गई है। ब्रिटेन के यूरोपियन यूनियन से निकलने के बाद वहाँ से कई कामगार बाहर चले गए। ब्रिटेन के कामगारों की औसत उम्र बढ़ती जा रही है। यूके में काम के लिए सही माहौल न मिलने के कारण भी ऐसा हो रहा है।

अब जब क्रिसमस भी आने वाला है, ऐसे में खाद्य पदार्थों के दाम पर इसका असर देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन एक योजना पर काम कर रहे हैं, जिसके बाद यूके की सेना को पेट्रोल स्टेशनों पर पेट्रोल-डीजल की सप्लाई करने के लिए लगाया जा सकता है। वहाँ की सरकार का कहना है कि ये कमी ‘पैनिक बाइंग’ की वजह से आई है। 5000 ट्रक ड्राइवरों को 3 महीने के अस्थायी वीजा की भी पेशकश की गई है।

लेकिन, औद्योगिक संगठनों का कहना है कि शॉर्ट टर्म के लिए ही ये योजना काम आएगी। रिटेलर्स से लेकर सामानों की डिलीवरी के लिए क्रिसमस व नए साल के दौरान बड़ी समस्या आ सकती है, अगर कामगारों की कमी की समस्या को दूर नहीं किया गया तो। लोगों का पूछना है कि 5000 वीजा से 1 लाख की कमी कैसे पूरी होगी? ब्रिटेन की सरकार इसे बनावटी समस्या बताते हुए कह रही है कि सब यूनियनों की साजिश है।

यूके के पर्यावरण मंत्री जॉर्ज एसटीस का कहना है कि ये एक बड़ी समस्या नहीं है और दिक्कतें इसीलिए आ रही हैं क्योंकि लोग बिना ज़रूरत के पेट्रोल-डीजल की खरीददारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब ये लोग अपने-अपने कार में तेल भर लेंगे तो स्थिति शांत हो जाएगी। ब्रिटेन ने फ्यूल सेक्टर को राहत भी दी है। कई कंपनियों ने बयान जारी कर इसे ‘माँग में अस्थायी वृद्धि’ बताते हुए कहा कि ये राष्ट्रीय समस्या नहीं है।