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‘वरिष्ठ खिलाड़ियों से अच्छा व्यवहार नहीं करते विराट कोहली, कोच सलाह दे तो डाँटते हैं’: BCCI की नाराजगी की वजह

टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली के टी-20 की कप्तानी छोड़ने की घोषणा के दो दिन बाद टेलीग्राफ ने अपनी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, ड्रेसिंग रूम में विराट कोहली के व्यवहार से कई सीनियर खिलाड़ी नाराज थे। विराट कोहली काफी लंबे समय से फॉर्म से बाहर चल रहे हैं। 32 वर्षीय खिलाड़ी ने टेस्ट, वनडे और टी20 में 53 पारियाँ खेली, लेकिन एक में भी शतक नहीं जड़ पाए।

टेलीग्राफ ने दावा किया, “बीसीसीआई को ड्रेसिंग रूम के अंदर चल रही गतिविधियों की भनक लग गई थी। अपने खराब फॉर्म के चलते उन्हें (विराट कोहली) यह निर्णय लेना पड़ा, क्योंकि खिलाड़ियों के साथ उनके संबंध प्रभावित हो रहे थे।” सूत्रों का हवाला देते हुए अंग्रेजी समाचार पत्र ने बताया कि एक वरिष्ठ खिलाड़ी ने कोहली के खिलाफ बीसीसीआई सचिव जय शाह से शिकायत की थी कि उनकी वजह से वह असुरक्षित महसूस करते हैं।

कथित तौर पर, विराट कोहली ने उस सीनियर क्रिकेटर पर साउथेम्प्टन में न्यूजीलैंड के खिलाफ विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल के दौरान ‘no intent’ दिखाने का आरोप लगाया था। सूत्र ने द टेलीग्राफ को आगे बताया, “कोहली अपना आपा खोते जा रहे हैं। उन्होंने अपना सम्मान खो दिया है और कुछ खिलाड़ियों को उनका रवैया पसंद नहीं आ रहा है। वह अब एक बेहतरीन कप्तान नहीं हैं और ना ही खिलाड़ियों के सम्मान के लायक हैं। जब कोहली अपनी हद पार करते हैं, तो उनसे निपटने के लिए कई खिलाड़ी अपनी सीमाएँ लाँघ जाते हैं। कोहली अब लंबी पारी खेलने के लायक नहीं रहे, यह भी एक बड़ा मुद्दा है।”

द टेलीग्राफ के लेख का स्क्रीनशॉट

टेलीग्राफ ने बताया कि विराट कोहली नेट्स पर अभ्यास सत्र के दौरान उन्हें सुझाव देने वाले एक कोच बरस पड़े। उन्होंने वहाँ मौजूद बल्लेबाजों के सामने बेहद आक्रामक होते हुए कोच से कहा, ”मुझे कन्फ्यूज मत करो।” सूत्र ने इस बात पर भी जोर दिया कि विराट कोहली अपने निराशाजनक प्रदर्शन पर काबू पाने में असमर्थ दिखाई दे रहे थे, जिसका असर उनके व्यवहार पर दिखना शुरू हो गया है। बीसीसीआई कोहली पर दबाव कम करने और उन्हें अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित करने के लिए पर्याप्त जगह मुहैया कराने पर विचार कर रहा है।

सूत्र ने अंग्रेजी दैनिक को बताया कि टीम के युवा खिलाड़ी रोहित शर्मा को वह अपने ‘बड़े भाई’ के जैसा मानते हैं और उन पर भरोसा करते हैं। हालाँकि, उन्होंने विराट कोहली की कप्तानी को चुनौती दी है। सूत्र ने टेलीग्राफ को आगे बताया, ”विराट जानते हैं कि वह अब शॉट नहीं लगा पा रहे हैं। उनमें पहले जैसा खेलने का जज्बा नहीं रहा। उनके व्यवहार पर सवाल उठाया जाएगा। इसमें कोई शक नहीं कि वह विश्व क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक हैं, लेकिन आप कप्तानी को अपनी बल्लेबाजी पर बोझ नहीं बनने दे सकते।”

बता दें कि 17 अक्टूबर 2021 से यूएई (UAE) में आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप का आगाज होने वाला है। इस टूर्नामेंट के खत्म होते ही भारतीय कप्तान विराट कोहली टी-20 की कप्तानी छोड़ देंगे।

55 सालों में पहली बार पंजाब को मिलेगा हिन्दू CM? कभी सनी देओल ने हरा दिया था, अब मुख्यमंत्री की रेस में सुनील जाखड़

पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू और मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के बीच चल रहे सियासी घमासान के बीच शनिवार (18 सितंबर, 2021) को अमरिंदर सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद अब राज्य के मुख्यमंत्री बनने की रेस में सुनील जाखड़ और नवजोत सिंह सिद्धू का नाम उभर कर सामने आ रहा है। जाखड़ पंजाब में प्रमुख हिंदू नेता हैं।

कौन हैं सुनील जाखड़

पंजाब कॉन्ग्रेस के पूर्व प्रमुख रहे सुनील जाखड़ राजनीतिक परिवार से ही आते हैं। पंजाब के फजिल्का जिले के अंबोहर के पंजकोसी गाँव के निवासी हैं। वह शुरू से ही कॉन्ग्रेस के विश्वासपात्र रहे हैं। इसी तरह से उनके पिता बलराम जाखड़ भी कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार थे। सुनील जाखड़ अबोहर विधानसभा क्षेत्र से ही पहली बार साल 2000 में विधायक का चुनाव जीते थे। यहाँ से वो लगातार तीन बार जीतकर वर्ष 2007 औऱ 2012 विधानसभा पहुँचे थे।

वह साल 2012-2017 तक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे। इसके बाद वो पंजाब की गुरुदासपुर सीट से लोकसभा भी पहुँचे। उनसे पहले तक दिवंगत अभिनेता विनोद खन्ना भाजपा के यहाँ से सांसद थे। उनकी मौत के बाद 2017 में हुए उपचुनाव में जाखड़ ने जीत हासिल की। हालाँकि, वो सांसद केवल 2 साल ही रह पाए, क्योंकि 2019 के आम चुनावों के दौरान बीजेपी के कैंडिडेट और अभिनेता सनी देओल ने उन्हें हराकर इस सीट पर कब्जा कर लिया। सनी देओल ने जाखड़ को 82,459 मतों से हराया था।

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के करीबियों में से एक माने जाने वाले जाखड़ ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एमबीए की पढ़ाई की है।

अब कैप्टन अमरिंदर सिंह के अपने पद से इस्तीफा देने के बाद जाखड़ सीएम कैंडिडेट माने जा रहे हैं। राज्य में विधायक दल की बैठक से पहले ही सुनील जाखड़ ने राहुल गाँधी की तारीफ में कसीदे पढ़ दिए हैं। उन्होंने ट्वीट किया, ‘’राहुल गाँधी ने बेहद उलझी हुई गुत्थी के पंजाबी संस्करण के समाधान का रास्ता निकाल लिया है। आश्चर्यजनक ढंग से नेतृत्व के इस साहसिक फैसले से न सिर्फ पंजाब कांग्रेस के झगड़े को खत्म किया गया है, बल्कि इससे कार्यकर्ता भी खुश हो गए हैं। इसने अकालियों की बुनियाद हिला दी है।’’

आदिवासी राजा और उनके बेटे, जिन्हें अंग्रेजों ने तोप से बाँध उड़ा दिया था: गद्दार के कारण पकड़े गए, मोदी सरकार ने दिया सम्मान

मध्य प्रदेश का गोंडवाना, जिसे वर्तमान में जबलपुर के नाम से जाना जाता है, वहाँ के राजा शंकर शाह और उनके बेटे कुँवर रघुनाथ शाह का शनिवार (18 सितंबर, 2021) को बलिदान दिवस है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज जबलपुर में गोंडवाना के राजा शंकर शाह और उनके बेटे कुँवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर दोनों वीरों की प्रतिमाओं को नमन कर पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान अमित शाह के साथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद थे।

आजादी के अमृत महोत्सव पर जबलपुर में स्वतंत्रता आंदोलन में अपना अतुलनीय योगदान देने वाले जनजातीय नायकों के सम्मान में ‘जनजातीय गौरव समारोह’ का आयोजन भी किया गया।

इस दौरान गृह मंत्री ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “मातृभूमि के लिए राजा शंकरशाह और कुँवर रघुनाथ शाह जी का बलिदान हमें सदैव प्रेरणा देता रहेगा। पहले की सरकारों ने ऐसे कई महान वीरों विशेषकर जनजातीय नायकों की निरंतर उपेक्षा की, लेकिन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकारें उनके सम्मान को पुनर्स्थापित करने के लिए कटिबद्ध हैं।

दरअसल, 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में राजा शंकरशाह और कुँवर रघुनाथशाह ने अपने साहस से जन-जन में स्वाधीनता की अलख जगाने का काम किया था। इसके लिए अंग्रेजी हुकूमत ने दोनों को तोपों से बाँधकर उनकी निर्मम हत्या कर दी थी। आदिवासी समुदाय के लोगों के लिए आज भी राजा शंकर शाह और कुँवर रघुनाथ शाह बेहद सम्मानीय हैं। ये दोनों पिता-पुत्र महान कवि भी थे, जो अपनी कविताओं के जरिए प्रजा में देश भक्ति का जज्बा जगाते थे, लेकिन अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए राजा शंकर शाह और कुँवर रघुनाथ शाह को अपने प्राण न्योछावर करने पड़े।

अंग्रेजों की क्रूरता का शिकार होने के बावजूद वो उनके आगे नहीं झुके, जिसकी वह से अंग्रेजों ने उन्हें तोप से बाँधकर उड़ा दिया था। आज भी शहरवासियों और यहाँ आने वाले लोगों की बीच उनकी यादें जिंदा हैं, जो उन्हें देश भक्ति के लिए प्रेरित करती हैं।

अंग्रेजों की 52वीं रेजीमेंट का कमांडर क्लार्क – कहानी राजा शंकर शाह और कुँवर रघुनाथ की

बात 1857 की है। उस दौरान गोंडवाना में तैनात अंग्रेजों की 52वीं रेजीमेंट का कमांडर क्लार्क बेहद ही क्रूर था। वह इलाके के छोटे राजाओं, जमीदारों और जनता को परेशान किया करता था और उनसे मनमाना कर वसूलता था। इस पर तत्कालीन गोंडवाना राज्य के राजा शंकर शाह और उनके बेटे कुँवर रघुनाथ शाह ने अंग्रेज कमांडर क्लार्क के सामने झुकने से इनकार करते हुए उनसे लोहा लेनी की ठानी।

दोनों ने अपने आसपास के राजाओं को अंग्रेजों के खिलाफ एकजुट करना शुरू दिया। उनकी कविताओं ने शहरवासियों में विद्रोह की अग्नि सुलगा दी। हालाँकि, इन सबके बीच एक गद्दार और भ्रष्ट कर्मचारी गिरधारी लाल भी था, जो अंग्रेजों की मदद करता था। राजा ने उसे निष्काषित कर दिया था, क्योंकि गिरधारी लाल अंग्रेजों के लिए राजा की कविताओं का हिंदी से अंग्रेजी में अनुवाद करता था। इससे क्लार्क ने चारों ओर अपने गुप्तचर तैनात कर दिए थे।

इनमें से कुछ ऐसे भी गुप्तचर थे, जो साधु के भेष में महल में गए और सारा भेद लाकर क्लार्क को बता दिया कि दो दिन बाद छावनी पर हमला होने वाला है। इसकी वजह से हमले से पहले ही (14 सितंबर) राजा शंकर शाह और उनके 32 वर्षीय बेटे को क्लार्क ने बंदी बना लिया। इन दोनों को अंग्रेजों ने जहाँ बंदी बनाकर रखा था वर्तमान में वह जबलपुर डीएफओ कार्यालय है। इसके चार दिन बाद 18 सितंबर 1857 को दोनों को अलग-अलग तोप के मुँह पर बाँधकर उड़ा दिया गया था। दोनों ने हँसते-हँसते मौत को गले लगा लिया था, लेकिन तब तक जनता में अंग्रेजों के प्रति गुस्सा उबल चुका था, जो आजादी मिलने तक जारी रहा।

‘हिन्दू आबादी में हज हाउस नहीं बनने देंगे’: AAP सरकार के खिलाफ हुई 360 गाँवों की पंचायतें, ‘काँवड़ हाउस’ की माँग

दिल्ली के द्वारका स्थित भर्तला गाँव में मुस्लिमों के लिए हज हाउस बनवाने के लिए जमीनें आवंटित की गई हैं। लेकिन इसका लगातार विरोध किया जा रहा है। इसी क्रम में 360 गाँवों की खाप पंचायतों ने सीधे तौर कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि हिंदू आबादी के बीच हज हाउस नहीं बनाने दिया जाएगा। दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने भी खाप पंचायतों का समर्थन किया है।

इस मामले को लेकर 28 गाँवों की खाप पंचायतों के प्रमुख राकेश नंबरदार का कहना है कि इसी साल अगस्त के महीने में सभी गाँवों की एक पंचायत बुलाई गई थी, जिसमें करीब 10,000 लोग शामिल हुए थे। उस दौरान इसको लेकर चर्चा के बाद हज हाउस को अलॉट की गई जमीन को वापस लेने की माँग की गई थी। उस दौरान पंचायतों ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार को उनकी माँगें नहीं मानने पर व्यापक प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। हालाँकि, पंचायतों की माँग को दिल्ली सरकार ने अनसुना कर दिया था। दिल्ली के बीजेपी चीफ आदेश गुप्ता ने मदद का हाथ बढ़ाया है और उनकी मदद से हमने इस बात को केंद्र सरकार तक पहुँचाया है।

इस मामले को लेकर दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार पर निशाना साधते हुए आदेश गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में स्कूल, कॉलेज औऱ अस्पताल के लिए जगह नहीं बची है और केजरीवाल सरकार ने द्वारका सेक्टर-22 में वहाँ के लोगों की मंजूरी के बिना ही हज के लिए जमीन दे दी है। इससे बड़ी बिडंबना क्या हो सकती है। उन्होंने गुरुवार (16 सितंबर 2021) को हज हाउस के लिए किए गए जमीन के आवंटन को रद्द करने की माँग की और कहा कि वक्फ बोर्ड के पास बहुत सारी जमीन है वो जहाँ चाहे हज हाउस बना ले।

केंद्रीय मंत्री से मिला पंचायतों का प्रतिनिधि मंडल

हज हाउस की जमीन आवंटन के विवाद के मामले को लेकर खाप पंचायतों का प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मिला था। इस बात की जानकारी खुद केंद्रीय मंत्री ने दी थी। उन्होंने ट्वीट कर इस संबंध ज्ञापन मिलने की बात बताई है। राकेश नंबरदार के मुताबिक, मंत्री ने उन्हें मदद का भरोसा दिया है।

वहीं दिल्ली वक्फ बोर्ड के सदस्य हिमाल अख्तर ने इसे सियासी एजेंडा बताया और कहा कि हज हाउस के साथ काँवड़ हाउस भी बनना चाहिए। उन्होंने इसे चुनावी ध्रुवीकरण बताया है

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने दिया इस्तीफा, कॉन्ग्रेस में बड़ी हलचल: पार्टी में फिर टूट के आसार

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कॉन्ग्रेस आलाकमान से कह दिया है कि वो अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने राजभवन जाकर पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित को अपना इस्तीफा सौंपा। कुछ ही देर में वो मीडिया को भी सम्बोधित करेंगे। इस दौरान उनकी पत्नी भी उनके साथ थीं। दोनों मुख्यमंत्री आवास से राजभवन पहुँचे और इस्तीफा सौंपा।

इससे पहले खबर आई थी कि कॉन्ग्रेस हाईकमान की तरफ से मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह से इस्तीफे की भी माँग कर दी गई है। कॉन्ग्रेस ने ‘बड़ी संख्या में विधायकों के प्रतिनिधित्व’ का हवाला देते हुए, देर रात पंजाब विधायकों की आज एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। करीब 40 से ज्यादा नाराज विधायकों ने उन्हें हटाने की माँग करते हुए पार्टी आलाकमान को चिट्ठी लिखी थी। कैप्टेन लंबे समय से बागी नेताओं के निशाने पर रहे हैं।

‘अब इंग्लैंड भी नहीं आएगा, भारत की लॉबी वाला ICC भी नहीं देगा मुआवजा’ – करोड़ों के घाटे पर रो रहा PCB

न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम द्वारा अपना दौरा रद्द करने के बाद पाकिस्तान को करोड़ों का घाटा हुआ है। दोनों देशों के बीच तीन वनडे मैचों की श्रृंखला होनी थी। इसकी शुरुआत रावलपिंडी में प्रस्तावित थी। ‘पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB)’ का कहना है कि इससे न सिर्फ पाकिस्तान की सुरक्षा को ठेस पहुँची है, बल्कि बोर्ड द्वारा किए जा रहे प्रयासों को भी धक्का लगा है। PCB, पाकिस्तान सरकार और वहाँ की सुरक्षा एजेंसियाँ मुल्क में क्रिकेट की बहाली के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे।

लेकिन, अब उनकी अच्छी-खासी किरकिरी हुई है। वनडे मैचों के बाद लाहौर में पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच 5 T-20 मैचों की सीरीज भी होनी थी। PCB अब इस कदर हतोत्साहित है कि उसका कहना है कि ‘अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड (ICC)’ के समक्ष न्यूजीलैंड के खिलाफ इस मामले को उठाने से भी कोई फायदा नहीं होने वाला है। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे मामलों में ICC भी कोई कार्रवाई नहीं करता है।

पाकिस्तानी मीडिया संस्थान ‘Dwan’ ने PCB अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि ICC में भारतीय लॉबी काफी मजबूत है, इसीलिए न्यूजीलैंड द्वारा अपना दौरा रद्द किए जाने की एवज में पाकिस्तान को कोई मुआवजा मिलने की भी उम्मीद नहीं है। न्यूजीलैंड 2003 के बाद पहली बार पाकिस्तान का दौरा करने वाला था, लेकिन उसके इस फैसले के बाद अब इंग्लैंड ने भी अपना दौरा रद्द करने के लिए विचार-विमर्श शुरू कर दिया है।

अक्टूबर में इंग्लैंड को पाकिस्तान का दौरा करना है, जहाँ ECB की पुरुष टीम 2005 के बाद पहली बार मैच खेलेगी। साथ ही इंग्लैंड की महिला टीम भी पहली बार पाकिस्तान का दौरा करने वाली है। दो T-20 मैचों की छोटी सी श्रृंखला के लिए होने वाला ये दौरा भी अब संशय के बादल तले दब गया है। अधिकारियों का कहना है कि इंग्लैंड के दौरे को लेकर अब कोई आशा नहीं बची है। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने आशा जताई कि पाकिस्तान में सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान तलाशा जाएगा।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए ये बड़ी शर्मिंदगी की बात है, इस तरह के देरी से लिए गए फैसलों से इस खेल पर वित्तीय रूप से काफी बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुरक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त होने के बाद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट शुरू होगा। वेस्टइंडीज के कप्तान रहे डेरेन सैमी ने भी इस पर हैरानी जताई। वो ‘पाकिस्तान सुपर लीग (PSL)’ में ‘पेशावर जलमी’ की तरफ से खेल चुके हैं।

अब इस टीम ने उन्हें मुख्य कोच बना रखा है। उनका कहना है कि पिछले 6 वर्षों में पाकिस्तान में खेलना उनके लिए हमेशा एक मजेदार अनुभव रहा है और उन्होंने हमेशा खुद को सुरक्षित महसूस किया। पाकिस्तानी टीम के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी ने कहा कि अफवाहों के आधार पर न्यूजीलैंड ने दौरा रद्द कर दिया। पाकिस्तानी क्रिकेटर शादाब खान ने इसे दिल तोड़ने वाला बताया। बाबर आजम ने कहा कि न्यूजीलैंड की टीम को उम्दा सुरक्षा दी गई थी।

न्यूजीलैंड की जो टीम पाकिस्तान गई थी, उसमें वहाँ के कई बड़े खिलाड़ी शामिल नहीं थे। उन्हें रावलपिंडी स्टेडियम से 10 किलोमीटर दूर एक होटल में ठहराया गया था। सुरक्षा बलों को भी रास्ते में लगाया गया था। पूर्व पाकिस्तानी गेंदबाज शोएब अख्तर ने कहा कि हम फिर उठेंगे और आगे बढ़ेंगे। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज जैसन गिलेस्पी ने कहा कि न्यूजीलैंड की आलोचना ठीक नहीं, क्योंकि उन्होंने दिखाया है कि वो इस खेल को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

उधर कुछ पाकिस्तानी तो कह रहे हैं कि फौरन पाकिस्तान को फैसला लेना चाहिए कि वो कभी न्यूजीलैंड के साथ कोई मैच नहीं खेलेंगे। वहीं ब्लू टिक वाले पत्रकार फरवा मुनीर समेत कई लोग इसके पीछे भारत और बीसीसीआई को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। कैटी सिमॉन लिखती हैं, “हद्द है! पाकिस्तान पूरी तरह से सुरक्षित देश है। पीसीबी को भविष्य में न्यूजीलैंड के साथ खेले जाने वाला हर मैच को कैंसिल कर देना चाहिए। कोई सुरक्षा कारण नहीं थे बस बीसीसीआई का दबाव था। शर्म आनी चाहिए न्यूजीलैंड क्रिकेट को जो राजनीति के आधार पर खेल खेलते हैं।”

राजनीति से संन्यास की घोषणा कर TMC में शामिल हुआ ‘BJP का बंदर’, बाबुल सुप्रियो ने CM ममता बनर्जी को बताया था ‘क्रूर महिला’

मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके सांसद बाबुल सुप्रियो शनिवार (सितंबर 18, 2021) को औपचारिक रूप से तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) में शामिल हो गए। उन्होंने कुछ दिन पहले ही बीजेपी से इस्तीफा दिया था। टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ ब्रायन की मौजूदगी में उन्होंने तृणमूल कॉन्ग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।

बाबुल सुप्रियो के पार्टी में शामिल होने पर टीएमसी की तरफ से बयान जारी कर बताया गया है कि टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन की मौजूदगी में पूर्व केंद्रीय मंत्री और मौजूदा सांसद बाबुल सुप्रियो टीएमसी में शामिल हो गए हैं। हम इस मौके पर हम उनका पार्टी में स्वागत करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने ट्वीट में लिखा, “खेला होबे।”

जुलाई में राजनीति से संन्यास की घोषणा की थी

बता दें कि जुलाई के महीने में पूर्व केंद्रीय मंत्री और बंगाल में बीजेपी के बड़े नेताओं में शुमार रहे बाबुल सुप्रियो ने राजनीति को अलविदा कह दिया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिख कर कहा था कि वे राजनीति में सिर्फ समाज सेवा के लिए आए थे। अब उन्होंने अपनी राह बदलने का फैसला लिया है।

कहा था कि किसी पार्टी में शामिल नहीं होंगे

जुलाई महीने में जब उन्होंने राजनीति से संन्यास का ऐलान किया था तो उन्होंने था कि लोगों की सेवा करने के लिए राजनीति में रहने की जरूरत नहीं है। वे राजनीति से अलग होकर भी अपने उस उदेश्य को पूरा कर सकते हैं। उनकी तरफ से पोस्ट में पहले इस बात पर भी जोर दिया गया कि वे हमेशा से बीजेपी का ही हिस्सा रहे हैं और रहेंगे। उन्होंने यहाँ तक कहा था कि वे टीएमसी या कोई दूसरी पार्टी में शामिल नहीं होंगे। 

इस दौरान उन्होंने आश्वासन दिया था कि वो सब सुन कर कहते हैं कि वो किसी और पार्टी में नहीं जा रहे। उन्होंने कहा कि वो तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC), कॉन्ग्रेस या CPI(M) में नहीं जा रहे, कहीं नहीं। उन्होंने बताया कि किसी ने उन्हें फोन नहीं किया। उन्होंने कहा कि वो एक टीम के खिलाड़ी हैं और हमेशा एक टीम का समर्थन करते हैं। लेकिन अब लगभग डेढ़ महीने बीतने के बाद उन्होंने टीएमसी का दामन थाम लिया है।

उल्लेखनीय है कि बंगाल में टीएमसी की जीत पर बाबुल सुप्रियो ने ट्वीट करते हुए लिखा था, “न तो मैं ममता बनर्जी को बंगाल में उनकी जीत के लिए बधाई दूँगा और न ही मैं यह कहना चाहता हूँ कि मैं लोगों के फैसले का सम्मान करता हूँ क्योंकि मुझे वाकई लगता है कि बंगाल के लोगों ने भारतीय जनता पार्टी को मौका नहीं देकर और भ्रष्ट, अक्षम, बेईमान सरकार को चुनकर और क्रूर महिला को सत्ता में वापस लाकर ऐतिहासिक गलती की है। हाँ, एक कानून का पालन करने वाले नागरिक के रूप में, मैं एक लोकतांत्रिक देश में लोगों द्वारा लिए गए निर्णय का ‘पालन’ करूँगा। इतना ही!! इससे कुछ ज्यादा नहीं-कुछ कम नहीं।”

बाबुल सुप्रियो के टीएमसी ज्वॉइन करने पर टीएमसी नेता कुणाल घोष ने भी खुशी जाहिर की है साथ ही इस ओर भी इशारा किया है कि बीजेपी से और भी लोग टीएमसी में शामिल होना चाहते हैं। कुणाल घोष ने कहा, “बहुत सारे लोग बातचीत में हैं वो लोग बीजेपी में संतुष्ट नहीं हैं। आज एक आ रहा है कल एक आना चाहता है। यह प्रक्रिया चलती रहेगी। वेट एंड वॉच।”

गौरतलब है कि बाबुल सुप्रियो को टीएमसी नेता बीजेपी का बंदर तक कह चुका है। दरअसल, भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा कट मनी के मसले पर आसनसोल नगर निगम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया जा रहा था। इस दौरान आसनसोल में शुक्रवार (जुलाई 5, 2019) को भड़की हिंसा के बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और साथ ही भाजपा के 13 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार भी किया।

इस घटना के बाद आसनसोल के मेयर और टीएमसी नेता जे तिवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और भाजपा कार्यकर्ता के बारे में बात करते हुए कहा था, “वे हमला करने के इरादे से आए थे, लेकिन निगम के गेट को छू भी नहीं सके। बाबुल सुप्रियो, अगर तुम भाजपा के बंदर हो, तो हम आसनसोल में तुम्हारे लिए पिंजरा तैयार कर चुके हैं। हम तुम्हारे जैसे बंदरों को अपने पास रखने की क्षमता रखते हैं।”

5 साल पहले दिल्ली में पकड़ा गया था काबुल एयरपोर्ट का हमलावर, 200 लोगों की चली गई थी जान: ISIS-K का खुलासा

पिछले महीने काबुल एयरपोर्ट पर हमला करने वाले आत्मघाती हमलावर को लेकर इस्लामिक स्टेट खुरासान (ISIS-K) ने बड़ा खुलासा किया है। आईएसआईएस-के ने अपनी पत्रिका के नए अंक में दावा किया है कि अगस्त 2021 में काबुल एयरपोर्ट पर हमला करने वाला आत्मघाती हमलावर 5 साल पहले भारत में पकड़ा गया था। उन्होंने बताया कि हमलावर को गिरफ्तार कर दिल्ली की जेल में भेज दिया गया था और फिर बाद में उसे अफगानिस्तान भेज दिया गया।  

मालूम हो कि अफगानिस्तान पर तालिबानी शासन के बाद आईएसआईएस-के ने 26 अगस्त 2021 को काबुल के हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बाहर आत्मघाती हमला किया था। इस हमले में करीब 200 लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें 13 अमेरिकी सैनिक भी शामिल थे। हमले की जिम्मेदारी आईएसआईएस-के ने ली थी।

ISIS-K ने दावा किया कि अब्दुर रहमान अल-लोगरी नाम के आत्मघाती हमलावर को भारत में 5 साल पहले (2016) पकड़ा गया था, जब वह ‘कश्मीर का बदला लेने के लिए’ हमला करने के लिए दिल्ली लाया गया था। जेल में सजा काटने के बाद उसे फिर से अफगानिस्तान भेज दिया गया था। यह वही आतंकी था, जिसने अमेरिकी सेना की मदद से काबुल एयरपोर्ट से निकाले जा रहे लोगों को पर हमला किया था।

आईएसआईएस-के 2020 से अपनी पत्रिका प्रकाशित करना जारी रखे हुए है। फरवरी 2020 में दिल्ली दंगों के दौरान भी उसने एक संस्करण निकाला था। बाद में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आईएसआईएस-के के साथ कथित रूप से संबंध रखने के आरोप में एक कश्मीरी दंपत्ति जहांजैब सामी (36) और उसकी पत्नी हिंडा बशीर बेघ (39) को गिरफ्तार किया था।

एनआईए द्वारा मामले को अपने हाथों में लेने और उन सभी को चार्जशीट करने से पहले इसी तरह के आरोपों में तीन और लोगों को गिरफ्तार किया गया था। अब तक पूरे भारत में ISIS-K की प्रोपेगेंडा मैगजीन से जुड़े एक दर्जन से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

‘शुरू से दलाल है राकेश टिकैत, कॉन्ग्रेस की फंडिंग से चला रहा आंदोलन’: किसान नेता ने खोली पोल – ‘आंदोलन में चल रही दारू’

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन के अगुआ राकेश टिकैत के बारे में किसान नेता भानु प्रताप सिंह ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने राकेश टिकैत को सबसे बड़ा ठग बताया और कहा कि राकेश टिकैत प्रदर्शन कॉन्ग्रेस की फंडिंग के जरिए करवा रहे हैं। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि लोगों को बिना ठगे तो राकेश टिकैत कोई भी काम नहीं करते हैं।

अंकुर सिंह नाम के यूजर के द्वारा शेयर किए गए वीडियो में किसान नेता भानु प्रताप सिंह ने राकेश टिकैत को जमकर लताड़ लगाई। वीडियो में भानु प्रताप कहते हैं, “जब महेंद्र टिकैत ने अपने संगठन का विस्तार किया और हमें भी उसमें शामिल कराया। तभी से इसने (राकेश टिकैत) दलाली करनी और अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश करनी शुरू कर दी थी। ये ऐसा व्यक्ति है, जिसने कोई भी काम आज तक बिना ठगे किया है नहीं। उदाहरण के तौर पर आप नोएडा के जेपी ग्रुप को देख लीजिए, जिसे इसने ठगा था। अभी ये कॉन्ग्रेस की फंडिंग से चल रहा है।”

भानु प्रताप ने आगे कहा, “पक्के मकान सड़कों पर बनाकर वहाँ के कमरों में काजू, बादाम, पिस्ता, किसमिशि और शराब की बोतलें बोरे में भरकर आती हैं और लोग उनके मजे लेते हैं। असली किसान इसकी हकीकत जान गया है। वहाँ (किसान धरना स्थल) केवल शराब पीने और नोट लेने वाले हैं। 100, 200 रुपए रोज ले लिए और शराब पी ली। राकेश टिकैत इस आंदोलन को इसलिए लंबा खींचना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें इससे फंडिंग मिल रही है। अगर उन्होंने इस विरोध को बंद कर दिया तो उनकी फंडिंग बंद हो जाएगी।”

गौरतलब है कि किसान नेता भानुप्रताप सिंह का गुट 26 जनवरी की घटना से पहले तक इस आंदोलन में शामिल था। हालाँकि, गणतंत्र दिवस किसान आंदोलन के नाम पर दिल्ली के लालकिले पर जिस तरीके की घटना हुई, उसके बाद भानु प्रताप सिंह इस आंदोलन से अलग हो गए थे।

जैकलीन फर्नांडिस को ED के सामने हाजिर होने के आदेश, मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है मामला: तिहाड़ से आते थे फूल-चॉकलेट

बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज की कई करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग के केस में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें सुकेश चंद्रशेखरन द्वारा चलाए जा रहे कई करोड़ के जबरन वसूली से जुड़े रैकेट में पूछताछ के लिए दोबारा से तलब किया गया है।

कुछ सप्ताह पहले इसी मामले में अभिनेत्री से जाँच एजेंसी ने दिल्ली में 7 घंटे तक पूछताछ की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, जैकलीन को 25 सितंबर को एजेंसी के समक्ष पूछताछ के लिए पेश होने का निर्देश दिया गया है। आशंका इस बात की है कि सुकेश चंद्रशेखर मामले में ईडी दूसरे कलाकारों से भी पूछताछ कर सकता है। दरअसल, जाँच एजेंसी जैकलीन से यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या इस मनी लॉन्ड्रिंग का उन्हें भी लाभ हुआ था या नहीं। उनके साथ नोरा फतेही को भी तलब किया जा सकता है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सुकेश कथित तौर पर तिहाड़ जेल से जैकलीन फर्नांडीस को को स्पूफ कॉल करता था। वह उससे एक बड़ी हस्ती होने का दिखावा करता था और जब उन्होंने उस पर विश्वास कर लिया तो उसने उसे कथित तौर पर उसे चॉकलेट और फूल उपहार के रूप में भेजना शुरू कर दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, जाँच प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 50 के तहत अभिनेत्री से पूछताछ कर रही है। बताया जाता है कि पिछली बार जब दिल्ली में अधिकारियों ने जैकलीन से पूछताछ की थी तो उस दौरान उसकी जाँच पूरी नहीं हो पाई थी।

क्या है मामला

रिपोर्ट के अनुसार, सुकेश चंद्रशेखरन को पुलिस ने इसी साल गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप है कि उसने जेल के अंदर बंद रहते हुए 200 करोड़ रुपए वसूली का रैकेट चलाया था। उसने एक बड़े बिजनेसमैन की पत्नी से 50 करोड़ रुपए की एक्सटॉर्शन मनी माँगी थी। इसी मामले को लेकर जब पुलिस ने जेल में ही रेड की तो वहाँ से उसके पास से 2 मोबाइल फोन जब्त किए गए थे। इस मामले में जैकलीन को गवाह माना जा रहा है। इसके अलावा भी उसने साल 2013 में केनरा बैंक में फ्रॉड किया था।

ईडी के अधिकारियों के पास सुकेश के दो दर्जन से अधिक कॉल रिकॉर्ड हैं, जिसके आधार पर वे जैकलीन के साथ हुई धोखाधड़ी के बारे में पता लगाने में सफल रहे। हालाँकि, जाँच एजेंसी ने सुरक्षा कारणों से यह खुलासा नहीं किया है कि सुकेश खुद को क्या बताकर एक्ट्रेस से बातचीत करता था।