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SCO बैठक में PM मोदी ने उठाया कट्टरपंथ का मुद्दा, सुनते रहे इमरान खान: ‘सेंट्रल एशियाई कनेक्टिविटी’ से चीन को भी घेरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (17 सितंबर 2021) तजाकिस्तान की राजधानी दुशांबे में हो रही शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की सालाना बैठक को वर्चुअली संबोधित किया। इस बैठक में उन्होंने तजाकिस्तान के लोगों को आजादी के 30वें पर्व की बधाई दी। साथ ही बताया कि ये SCO की 20वीं वर्षगाँठ है। शुरुआत में पीएम नए लोगों, नई साझेदारी पर बात करते दिखे और नए डायलॉग पार्टनर्स-सऊदी अरब, मिस्र और कतर का अभिनंदन किया।

संस्था के भविष्य पर पीएम मोदी ने कहा कि SCO की 20वीं वर्षगाँठ इस संस्था के भविष्य के बारे में सोचने के लिए भी उपयुक्त अवसर है। उन्होंने पाक पीएम इमरान खान के सामने कहा कि इस क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौतियाँ शांति, सुरक्षा और विश्वास में कमी (ट्रस्ट-डेफिसिट) से संबंधित है। और इन समस्याओं का मूल कारण बढ़ता हुआ रेडिकलाइजेशन (कट्टरपंथ) है। अफगानिस्तान में हाल के घटनाक्रम ने इस चुनौती को और स्पष्ट कर दिया है। अब इसके लिए एससीओ को भी कदम बढ़ाने चाहिए। सभी एससीओ पार्टनर्स के साथ आगे काम करना होगा। 

पीएम मोदी ने कहा, “यदि हम इतिहास पर नज़र डालें, तो पाएँगे कि मध्य एशिया क्षेत्र उदारवादी और प्रगतिशील कल्‍चर और मूल्‍यों का गढ़ रहा है। सूफ़ीवाद जैसी परम्पराएँ यहाँ सदियों से पनपी और पूरे क्षेत्र और विश्व में फैलीं। इनकी छवि हम आज भी इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत में देख सकते हैं।”

भारत में और SCO के लगभग सभी देशों में, इस्लाम से जुड़ी संयमित, सहिष्णु और समावेशी संस्थाएँ और परम्पराएँ हैं। SCO को इनके बीच एक मजबूत नेटवर्क विकसित करने के लिए काम करना चाहिए। इस संदर्भ में मैं SCO के RATS मेकेनिज्म द्वारा किए जा रहे उपयोगी कार्य की प्रशंसा करता हूँ।

वह कहते हैं, “चाहे वित्‍तीय समावेश बढ़ाने के लिए UPI और रूपए कार्ड जैसी तकनीकें हों, या कोविड से लड़ाई में हमारे आरोग्य-सेतु और को-विन जैसे डिजिटल प्‍लेटफॉर्म्‍स, इन सभी को हमने स्वेच्छा से अन्य देशों के साथ भी साझा किया है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत सेंट्रल एशिया के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा मानना है कि लैंडलॉक्‍ड सेंट्रल एशियाई देशों को भारत के विशाल बाजार से जुड़ कर अपार लाभ हो सकता है। कनेक्टिविटी की कोई भी पहल वन-वे स्‍ट्रीट नहीं हो सकती। आपसी विश्‍वास सुनिश्चित करने के लिए कनेक्टिविटी प्रॉजेक्‍ट्स को परामर्शदायी, पारदर्शी और सहभागी होना चाहिए। इनमें सभी देशों की टेरीटोरियल इंटीग्रिटी का सम्मान निहित होना चाहिए।”

60 साल की महिला से रेप करना चाहा, विरोध पर हत्या… फिर लाश के साथ किया रेप: नाबालिग के कारण नाम पब्लिश नहीं

राजस्थान से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ के हनुमानगढ़ के पीलीबंगा कस्बे में एक लड़के ने 60 साल की महिला के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। दुष्कर्म में असफल होने के बाद उसने महिला की हत्या कर दी। लेकिन उस लड़के के कदम यहीं नहीं रुके, उसने महिला के शव के साथ संबंध बनाए। 

पुलिस के मुताबिक दुलमाना निवासी आरोपित (कुछ मीडिया रिपोर्ट नाबालिग बता रहे हैं, इसलिए नाम छिपाया जा रहा है) नशे की हालात में था। उसने गलत मंशा से बुजुर्ग महिला के घर में प्रवेश किया था और दुष्कर्म करने की कोशिश की थी, इसमें वह असफल रहा। इसके बाद उसने गला दबा कर महिला की हत्या कर दी। 

पुलिस ने बताया कि आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। बुजुर्ग महिला के देवर बनवारी लाल द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर धारा 450, 376 व 302 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मृत महिला विधवा थी। उसके पति की तीन साल पहले ही मृत्यु हो चुकी थी और कोई संतान नहीं था। इसके कारण वह घर में अकेली रहती थी। शायद आरोपित इसी बात का फायदा उठाना चाहता था। वृद्धा पशुपालन कर अपना पेट भर रही थी।

इस संबंध में बुजुर्ग महिला के देवर बनवारी लाल ने पीलीबंगा थाना में आरोपित के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है। बुधवार (सितंबर 15, 2021) रात लगभग साढ़े दस बजे भाभी (मृत महिला) उनके घर आई और कहा कि आरोपित थोड़ी देर पहले घर आया था। वह गलत नीयत से छेड़छाड़ करने लगा। धमकाया तो उनका मोबाइल फोन उठाकर भाग गया।

उनकी भाभी ने आरोपित से अपना मोबाइल फोन दिलवाने की बात कही। रात का वक्त होने की वजह से उसने गुरुवार (सितंबर 16, 2021) सुबह मोबाइल फोन दिलवाने का विश्वास दिलाते हुए भाभी को अपने घर पर ही सो जाने के लिए कहा। लेकिन घर में भैंस व अन्य मवेशी बँधे होने के की वजह से उनकी रखवाली के लिए भाभी को अपने घर जाना पड़ा।

जानकारी के मुताबिक रात के लगभग एक बजे आरोपित ने शराब के नशे में किसी ग्रामीण से कहा कि उसने बुजुर्ग महिला की गला घोंटकर हत्या कर दी है। उनको जब यह जानकारी मिली तो वह अन्य ग्रामीणों के साथ भाभी के घर गए। वहाँ उनकी लाश चारपाई पर पड़ी मिली। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है। फिलहाल पुलिस मामले की हर एंगल से जाँच कर रही है।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में रेप और गैंगरेप के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। राजस्थान लगातार दूसरे साल दुष्कर्म के मामलों में नंबर वन बना हुआ है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau) के मुताबिक राजस्थान में वर्ष 2020 में भी 5310 मामले दर्ज हुए हैं। ये देश में सबसे ज्यादा हैं। रेप और गैंगरेप की हैवानियत भरी वारदातों के कारण राजस्थान देश भर में कई बार बदनाम हो चुका है। 

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक राजस्थान में वर्ष 2019 में रेप के 5997 मामले दर्ज हुए थे। यह संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले थोड़ी कम है, लेकिन फिर भी देश भर में राजस्थान इसमें पहले स्थान पर है। 

‘उन्हें सिर्फ बच्चे पैदा करना चाहिए’: तालिबान का ‘महिला मंत्रालय’, जहाँ महिलाओं के ही घुसने पर होगा बैन

अफगानिस्तान में केयरटेकर सरकार बनाने के बाद तालिबान का एक और तानाशाही रवैया सामने आया है। अफगानिस्तान में नई सरकार बनाने के बाद अब तालिबान ने महिला मामलों के मंत्रालय में महिलाओं की एंट्री पर रोक लगा दिया है। मंत्रालय के एक कर्मचारी ने कहा महिला मामलों के मंत्रालय वाले इमारत में केवल पुरुषों को जाने की इजाजत है। 

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक कर्मचारी ने बताया कि चार महिलाओं को इमारत में प्रवेश करने की अनुमति नहीं मिली। बताया जा रहा है कि महिलाओं ने अब कार्यवाहक तालिबान सरकार के फैसले के खिलाफ मंत्रालय के पास विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई है।

हालाँकि, पिछले महीने काबुल पर कब्जा जमाने के बाद पहली बार मीडिया से बात करते हुए तालिबान ने आश्वासन दिया था कि समूह इस्लाम के आधार पर महिलाओं को उनके अधिकार प्रदान करेगा। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि तालिबान इस्लाम के आधार पर महिलाओं को उनके अधिकार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएँ स्वास्थ्य क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों में काम कर सकती हैं, जहाँ उनकी जरूरत है। महिलाओं के खिलाफ कोई भेदभाव नहीं होगा।

मगर पिछले ही दिनों स्थानीय मीडिया टोलो न्यूज ने तालिबान प्रवक्ता के हवाले से दावा किया कि किसी भी महिला को वहाँ पर मंत्री नहीं बनाया जाएगा। उन्हें सिर्फ बच्चे पैदा करना चाहिए। स्थानीय मीडिया टोलो न्यूज ने तालिबान के प्रवक्ता के हवाले से ट्वीट कर कहा, “एक महिला मंत्री नहीं हो सकती, यह ऐसा है जैसे आप उसके गले में कुछ डालते हैं जिसे वह सँभाल नहीं सकती। एक महिला के लिए कैबिनेट में होना जरूरी नहीं है, उन्हें बच्चे पैदा करना चाहिए। महिला प्रदर्शनकारी पूरे अफगानिस्तान का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं।”

गौरतलब है कि अफगानिस्तान में तालिबानियों का खौफ दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। तालिबान के इस्लामी कट्टरपंथी क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए निर्दोष लोगों को भी मार रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तालिबान ने पिछले दिनों एक 21 वर्षीय लड़की की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी, क्योंकि उसने टाइट कपड़े पहने थे और उसके साथ कोई पुरुष रिश्तेदार नहीं था।

खबरें आ रही हैं कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद से तालिबानी आतंकी बेगुनाह लोगों को जबरन घरों से बाहर निकालकर मार रहे हैं। उन्होंने जिन इलाकों पर कब्जा कर लिया है, वहाँ शरियत कानून लागू करते हुए महिलाओं के अकेले घर से बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

हाल ही में तालिबानी बर्बरता का एक वीडियो सामने आया था। जिसमें तालिबानी अफगान महिला पर कोड़े बरसा रहे थे और वह दर्द से चीख रही थी। महिला गाड़ी के पीछे छिपी हुई थी। अभी तक ऐसे कई वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए जा चुके हैं जो तालिबान के अत्याचारों का दावा करते हैं। वहीं प्रदर्शनकारियों पर तालिबान को गोली बरसाते हुए भी देखा जा चुका है।

लगातार तीसरे दिन सोनू सूद के घर IT विभाग का तलाशी अभियान, बड़ी मात्रा में टैक्स चोरी का पता चला: रिपोर्ट

अभिनेता सोनू सूद के घर लगातार तीसरे दिन IT विभाग का तलाशी अभियान जारी है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बड़ी मात्रा में टैक्स चोरी की बात भी पता चली है। ‘न्यूज़ 18’ ने अपने सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है। बताया जा रहा है कि उन्हें फिल्मों के जरिए मिली धनराशि और उन्हें किए गए कई व्यक्तिगत पेमेंट्स में भी टैक्स चोरी की बात पता चली है। ‘सूद चैरिटी फाउंडेशन’ का वित्त भी जाँच के घेरे में है।

ये लगातार तीसरा दिन है, जब आयकर विभाग के अधिकारी सोनू सूद के ठिकानों पर तलाशी अभियान चला रहे हैं और सर्वे कर रहे हैं। सोनू सूद न सिर्फ बॉलीवुड, बल्कि दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी खासे सक्रिय रहे हैं। अभी तक IT विभाग की तलाशी को एजेंसी ने ‘छापेमारी (Raid)’ नहीं बताया है, इसे ‘सर्वे’ ही कहा गया है। सोनू सूद का एकाउंटेंट यात्रा में है, जिस कारण जाँच में और भी देर हो रही है।

ये सर्वे बुधवार (15 सितंबर, 2021) को शुरू हुआ, जब मुंबई और लखनऊ में सोनू सूद से जुड़े 6 ठिकानों पर तलाशी ली गई। सोनू सूद द्वारा की गई एक रियल एस्टेट डील भी जाँच के घेरे में है। ये मामला टैक्स चोरी से जुड़ा हुआ है। सोनू सूद ‘बृहन्मुम्बई महानगरपालिका (BMC)’ की रडार पे भी आए थे, जब उन पर जुहू में स्थित एक 6 मंजिला इमारत को बिना ज़रूरी अनुमति लिए होटल में तब्दील कर देने के आरोप लगे थे।

अवैध निर्माण के आरोपों के मामले में BMC के विरुद्ध अदालत का दरवाजा भी खटखटाया था। जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनकी अपील को रद्द कर दी तो वो सुप्रीम कोर्ट पहुँचे। हाल ही में दिल्ली की AAP सरकार ने उन्हें स्कूल में बच्चों के मेंटरशिप योजना का ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया है। हालाँकि, राजनीति में आने की अटकलों को वो टालते रहे हैं। उन्होंने इन अटकलों को झूठा और आधारहीन बताते हुए कहा था कि उनकी या उनके परिवार की राजनीति में कोई रुचि नहीं है।

48 वर्षीय सोनू सूद कोरोना महामारी के दौरान खासे चर्चा में रहे थे, जब दावा किया गया था कि उन्होंने कई मजदूरों व गरीबों की मदद की है। कोरोना की लहर जब अपने उच्चतम स्तर पर थी, तब उन्होंने कई मजदूरों को ट्रेनों व फ्लाइट्स के जरिए घर भेजा था। वहीं अब अरविंद केजरीवाल की पार्टी और कॉन्ग्रेस उनके समर्थन में उतर आई है। दोनों ने केंद्र की राजग सरकार पर बदले की कार्रवाई का आरोप लगाया है।

वैसे 2012 में आयकर (IT) विभाग सोनू सूद के घर पर छापेमारी कर चुकी है, जब केंद्र में यूपीए-2 की सरकार थी। हाल ही में अभिनेता सोनू सूद ने घोषणा की थी कि वह अगले साल रूस के कज़ान में विशेष ओलंपिक विश्व शीतकालीन खेलों में भारतीय दल के साथ जाएँगे। वह इस आयोजन के भारतीय ब्रांड एंबेसडर हैं। उन्होंने 31 जुलाई को अपने जन्मदिन पर विशेष ओलंपिक भारत के विशेष एथलीटों और अधिकारियों के साथ एक वर्चुअल बातचीत के दौरान यह घोषणा की।

एक्टिविज्म का इस्तेमाल कर परोसने वाली थी मनोरंजन, प्रियंका चोपड़ा के शो के खिलाफ बवाल: माँगी माफ़ी, फॉर्मेट भी बदला

अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा के शो ‘The Activist’ को लेकर बवाल हो गया है, जिसके बाद उन्हें माफ़ी माँगनी पड़ी है। मीडिया कंट्रोवर्सी और आलोचना होने के बाद उन्होंने CBS के इस शो में हिस्सा लेने को लेकर माफ़ी माँगी है। उन्होंने कहा कि आलोचनाओं का उन पर काफी असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि इस शो में गलत हुआ है और वो जानती हैं कि उनके इसमें हिस्सा लेने से कई लोग नाराज़ हैं।

अब CBS ने घोषणा की है कि वो अपने शो ‘The Activist’ के प्रारूप में बदलाव करने जा रहा है, जिसके बाद ये प्रतिद्वंद्विता का शो न रह कर एक वन टाइम डॉक्यूमेंट्री हो जाएगा। प्रियंका चोपड़ा ने कहा, “मैं खुश हूँ कि इसमें उनकी कहानियों को उकेरा जाएगा। मैं ऐसे लोगों की साझीदार बन कर खुश हूँ, जो जमीन से जुड़े हुए हैं और जिन्हें पता है कि कब पुनर्विश्लेषण करना है और कब रुकना है।”

उन्होंने कहा कि एक्टिविज्म एक उद्देश्य के लिए होता है और इसका एक प्रभाव होता है, क्योंकि जब लोग साथ आकर किसी मुद्दे पर आवाज़ उठाते हैं तो इसका हमेशा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस शो का मकसद था कि एक्टिविस्ट्स के उद्देश्यों और उनके कार्यों को सामने लाया जाए। उन्होंने जानकारी दी है कि शो का फॉर्मेट बदला जा रहा है। इस शो में 6 ‘संभावित एक्टिविस्ट्स’ को हिस्सा लेना था।

इस दौरान उन्हें 3 सेलेब्रिटियों अशर, प्रियंका चोपड़ा और जुलिअन हॉग के साथ हिस्सा लेना था। कई लोगों ने इस शो को लेकर आपत्ति जताई है। शो पर ‘परफॉर्मेंस एक्टिविज्म’ के आरोप लगे और एक्टिविज्म को सस्ता मनोरंजन में तब्दील करने के आरोप भी लगाए गए। प्रियंका चोपड़ा का कहना है कि वो वैश्विक एक्टिविस्ट समुदाय को सम्मान दे रही हैं, जो रोज किसी मुद्दे पर अपना खून-पसीना बहाते हैं।

उन्होंने कहा कि इन एक्टिविस्ट्स के कार्य इतने उम्दा हैं कि उन्हें पहचान मिलनी चाहिए और उन्हें सम्मान देना चाहिए। जुलिअन ने भी कहा कि पिछले कुछ दिनों से शो के विरोध में ‘वास्तविक एक्टिविज्म’ देखने को मिला। CBS का कहना है कि एक्टिविस्ट्स के संघर्षों को दिखाने के लिए इसे लाया गया है। अब शो के आयोजकों से लेकर होस्ट्स तक ने जनता से माफ़ी माँगते हुए इसमें बदलाव की बात बताई है।

लोगों के आरोप थे कि अलग-अलग एक्टिविस्ट्स को प्रतिद्वंद्विता के लिए एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा किया जाना और इसका उपयोग मनोरंजन के लिए करना गलत है। मार्च 2021 में प्रियंका चोपड़ा तब चर्चा में आई थीं जब उन्होंने अपनी आत्मकथा पुस्तक ‘अनफिनिश्ड’ में बताया था कि बॉलीवुड में उनके शुरुआती दिनों में एक फिल्म निर्देशक ने उनके साथ बदतमीजी की थी और अंडरवियर में डांस करने को कहा था। 

केरल की यूनिवर्सिटी में सावरकर और RSS नेता की किताब के अंश नहीं पढ़ाए जाएँगे, CM पिनराई विजयन ने जताई थी आपत्ति

कन्नूर के विश्वविद्यालय में पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले छात्रों को तीसरे सेमेस्टर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता एम एस गोलवलकर और हिंदू महासभा के नेता वी डी सावरकर की किताबों के कुछ अंशों को नहीं पढ़ाया जाएगा। ये अंश शासन एवं राजनीति से जुड़े हैं। इस बात की जानकारी विश्वविद्यालय के कुलपति गोपीनाथ रवींद्र ने गुरुवार (सितंबर 16, 2021) को दी।

कुलपति ने कहा कि पाठ्यक्रम के चौथे सेमेस्टर में नए अंशों में आवश्यक बदलाव के बाद उन्हें पढ़ाया जाएगा। अभी के लिए विश्वविद्यालय समकालीन राजनीतिक सिद्धांत पेपर पढ़ाना जारी रखेगा जैसा कि वह पहले कर रहा था। कुलपति ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा गठित 2 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने विश्वविद्यालय को नए पाठ्यक्रम में बदलावों का सुझाव दिया था। अब ये बदलाव करने के बाद पाठ्य विवरण समिति को भेजा जाएगा।

बता दें कि नए पाठ्यक्रम के बाद इस मामले में कई छात्र संघों ने आलोचना की थी और उन्होंने विश्वविद्यालय के भगवाकरण का आरोप भी लगाया था। इसके बाद केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी कहा था कि उनकी सरकार उन विचारों और नेताओं का महिमामंडन नहीं करेगी जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम से मुँह मोड़ा।

वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने भी इस बाबत बयान दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय का बचाव करते हुए कहा, “एक पार्टी की राजनीति के लिए के लिए बौद्धिक स्वतंत्रता की बलि नहीं चढ़ाई जानी चाहिए।” उन्होंने कहा, “मैंने अपनी किताबों में सावरकर और गोलवलकर का व्यापक संदर्भ दिया है और उनका खंडन भी किया है।” उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में हाल में लिखा, “अगर हम सावरकर और गोलवलकर को पढ़ेंगे ही नहीं तो किस आधार पर उनका विरोध करेंगे। कन्नूर यूनिवर्सिटी गाँधी और टैगोर को भी पढ़ाती है।”

उल्लेखनीय है कि छात्र संघ बताते हैं कि यूनिवर्सिटी ने गोलवलकर की ‘बंच ऑफ थॉट्स’ समेत कई किताबों और सावरकर की ‘हिंदुत्व: हू इज अ हिंदू?’ से कुछ हिस्सों को तीसरे सेमेस्टर के पाठ्यक्रम में शामिल किया था। यह पाठ्यक्रम बोर्ड ऑफ स्टडीज ने नहीं तैयार किया था बल्कि थालास्सेरी ब्रेनन कॉलेज के शिक्षकों और कुलपति द्वारा तय किया गया था।

ठेका (शराब की दुकान) खोलने के लिए आरक्षण: तेलंगाना में पिछड़ा वर्ग, SC/ST के 30% रिजर्वेशन पर कैबिनेट का फैसला

तेलंगाना में केसीआर सरकार ने राज्य में शराब की दुकानें खोलने की अनुमति में जाति आधारित कोटा बढ़ाने का फैसला किया है। रिपोर्टों के अनुसार, राज्य मंत्रिमंडल ने शराब की दुकानें खोलने के लिए पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के समुदायों को आरक्षण देने के निर्णय को मंजूरी दी है।

हैदराबाद में सीएम के चंद्रशेखर राव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया। आबकारी विभाग ने कहा है कि वो एससी और एसटी समुदायों को लाइसेंस शुल्क और आवेदन शुल्क में रियायत देना चाहता है।

इससे पहले सरकार ने घोषणा की थी कि पिछड़ी जातियों के बीच उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए, वह शराब की दुकानों के टेंडर और नीलामी में आरक्षण देगी।

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार को केवल शराब के लाइसेंस और बिक्री से सालाना 25,000 करोड़ रुपए से अधिक राजस्व मिलता है। 2019 तक शराब की दुकानों को 4 स्लैब में बाँटा गया था, जिसे अब 6 स्लैब में बाँटा गया है। ऐसे में आने वाले महीनों में लाइसेंस फीस में 15% से 40% की बढ़ोतरी होगी। 2 लाख रुपए तक की आवेदन शुल्क भी बढ़ेगी।

नए वित्तीय वर्ष यानी 1 नवंबर से पिछड़ी जातियों (गौड़ा समुदाय) को 15% आरक्षण, अनुसूचित जाति को 10% और अनुसूचित जनजाति को 5% आरक्षण पर शराब की दुकानें खोलने की अनुमति मिलेगी।

वर्तमान में राज्य में 2,216 लाइसेंसी शराब की दुकानें हैं। सरकार कम से कम 226 और दुकाने खोलना चाहती है। नई आरक्षण नीति के तहत आरक्षित वर्ग 50 दुकानें ले सकता है।

कैबिनेट ने सड़कों की मरम्मत के लिए अतिरिक्त धनराशि को भी मंजूरी दे दी। स्वास्थ्य विभाग को नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है, ताकि शैक्षणिक वर्ष 2022-23 से कक्षाएँ शुरू हो सकें।

राज्य सरकार ने अधिकारियों को मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन 280 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 550 मीट्रिक टन करने को कहा है। इसके अलावा बच्चों में कोविड के मामलों में बढ़ोतरी होने की स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त बेड और चिकित्सा उपकरण तैयार रखने को कहा गया है, क्योंकि स्कूल 1 सितंबर से फिर से खुल गए हैं।

38 हिंदुओं का सिर कलम, खोपड़ी काट-काट कर फेंकी गई: मोपला का वो नरसंहार जब 3 दिन तक कुएँ से आती रहीं आवाजें

मोपला नरसंहार (Moplah genocide) के बारे में इतिहास की किताबों में कम ही पढ़ने को मिलता है और वो खिलाफत आंदोलन जिसने उसका बीज बोया उस पर तो कोई बात ही नहीं होती। इतिहास की किताबें बताती हैं कि खिलाफत आंदोलन वो आंदोलन था जहाँ हिंदू मुस्लिम एक दूसरे के साथ खड़े होकर ब्रिटिशों से लड़े। जबकि सच ये है कि इस आंदोलन का उद्देश्य मुस्लिमों के मुखिया माने जाने वाले टर्की के ख़लीफ़ा के पद की पुन: स्थापना कराने के लिए ब्रिटिश सरकार पर दबाव डालना था। भारतीय मुसलमान इस्लाम के खलीफा के लिए लड़ रहे थे और गाँधी ने इस आंदोलन में उनको समर्थन दिया था।

गाँधी के इस कदम ने इस्लामवाद को भारत में और अधिक पोसा। उनको लग रहा था कि ऐसे कदम से  मुसलमानों के बीच ब्रिटिश विरोधी भावना मजबूत होगी। यह पहला आंदोलन माना जाता है जिसने अंग्रेजों के ख़िलाफ़ ‘असहयोग आंदोलन’ को मजबूत किया।

हालाँकि, (पाकिस्तान या भारत का विभाजन, पृष्ठ 146, 147 पर) डॉ अम्बेडकर कहते हैं:

“(खिलाफत) आंदोलन मुसलमानों द्वारा शुरू किया गया था। जिसे गाँधी द्वारा दृढ़ता और विश्वास के साथ अपना लिया गया। इसने शायद कई मुसलमानों को आश्चर्यचकित कर दिया होगा। ऐसे कई लोग थे जिन्होंने खिलाफत आंदोलन के नैतिक आधार पर संदेह किया और गाँधी को आंदोलन में भाग लेने से रोकने की कोशिश की, जिसका नैतिक आधार इतना संदिग्ध था।”

नई दिल्ली में आईसीएचआर के पूर्व अध्यक्ष डॉ एम जी एस. नारायणन ने इस संबंध में लिखा,

“गाँधीजी उस समय राजनीतिक रूप से मासूम थे कि वो ब्रिटिश भारत के संदर्भ में यह मान रहे थे कि भारत में गरीब और अनपढ़ मुस्लिम समुदाय को आसानी से ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ एक सक्रिय राजनीतिक संघर्ष में खींचा जा सकता है। मुसलमानों को खुश करने के लिए, उन्होंने … खिलाफत के मामले का समर्थन किया, जिसे अंग्रेजों ने प्रथम विश्व युद्ध के अंत में तुर्की में समाप्त कर दिया था। बाद में महात्मा गाँधी ने खिलाफत को प्रायोजित करने में इस मूर्खता पर खेद व्यक्त किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी- नुकसान हो चुका था। मुसलमानों को सामाजिक सुधार और आधुनिक शिक्षा के लिए मनाने के बजाए, खिलाफत ने उनकी रूढ़िवादी धार्मिक प्रवृत्ति को वैध बनाया और बाहरी दुनिया के बारे में उनके डर और संदेह को जगाया। इसने उनकी सांप्रदायिकता को मजबूत किया, जो अलाउद्दीन खिलजी और औरंगजेब के दिनों से निष्क्रिय पड़े हिंदू काफिरों के खिलाफ नफरत पर पनपी थी।”

गौरतलब हो कि खिलाफत आंदोलन ने जहाँ भारत के भीतर और बाहर, काफिरों के खिलाफ भारतीय मुसलमानों को एकजुट किया था। वहीं इस आंदोलन को गाँधी ने समर्थन देकर मोपला जैसे नरसंहार की जमीन तैयार कर दी थी।

वैसे तो मालाबार में मोपला मुस्लिम समुदाय ने 100 वर्षों तक काफिरों के खिलाफ हत्या जैसी घटनाओं को अंजाम दिया था। लेकिन 1921 के अगस्त-सितंबर में हुआ नरसंहार अलग था क्योंकि उस समय उन्हें लग रहा था कि वो ब्रिटिशों को निकाल कर इस्लामी राज्य स्थापित कर लेंगे। मगर, इसके लिए उन्हें हिंदुओं का नरसंहार करके जमीन को शुद्ध करना होगा।

कई लोगों का मानना है कि इस नरसंहार के दौरान आधिकारिक तौर पर, मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा 10,000 से अधिक हिंदुओं का वध किया गया था। लेकिन अनौपचारिक संख्या, संभवतः कहीं अधिक हो सकती है।

इस नरसंहार में एक भयानक घटना घटित हुई। 25 सितंबर 1921 में उत्तरी केरल के थुवूर और करुवायकांडी के बीच बंजर पहाड़ी पर खिलाफत नेताओं में एक चंब्रासेरी इम्बिची कोइथंगल (chambrassery Imbichi Koithanga) ने अपने 4000 अनुयायियों के साथ रैली की और सभा के दौरान 40 हिंदू पकड़े। इसके बाद उनका हाथ पकड़ कर उनके हाथ बाँधे गए और खिलाफत नेता के पास पेश किया गया। इस दौरान 38 की हत्या हुई। जिनमें 3 को गोली से मारा गया और बाकी के सिर काट कर थुवूर कुएँ में फेंक दिए गए।

थुवूर के कुएँ पर कैसे काटे गए थे हिंदू…क्या हुआ था उस समय?

विभिन्न स्रोतो के अनुसार, 38 हिंदुओं पर मोपला कट्टरपंथियों के ख़िलाफ़ सेना की मदद करने का आरोप लगा था। उनके ख़िलाफ़ आरोपों को उन्हें पढ़कर सुनाया गया और देखते ही देखते कट्टरपंथियों ने उनका सिर कलम कर दिया। हत्या के बाद सबकी खोपड़ियाँ कुएँ में फेंक दी गई।

दीवान बहादुर सी. गोपालन, जो कालीकट, मालाबार के डिप्टी कलेक्टर थे, द्वारा लिखित द मोपला रिबेलियन, 1921 पुस्तक में, 25 सितंबर के उस भयानक दिन के बारे में विस्तृत विवरण दिया गया है।

पुस्तक के 56वें पेज पर गोपालन लिखते हैं:

एक बंजर पहाड़ी की ढलान पर थुवूर और करुवायकांडी के बीच-बीच में एक कुआँ स्थित है। यहाँ चेम्ब्रसेरी (चंब्रासेरी) तंगल के 4000 अनुयायियों ने एक बड़ी बैठक की। तंगल एक छोटे से पेड़ की छाया में बैठ गया और 40 से अधिक हिंदुओं को विद्रोहियों (कट्टरपंथियों) ने पकड़ लिया और उनकी पीठ के पीछे हाथ बाँधकर तंगाल ले जाया गया। इन हिंदुओं पर आरोप लगाया गया कि इन्होंने विद्रोहियों के विरुद्ध सेना की मदद की थी। इनमें 38 को मौत की सजा सुनाई गई। कहा जाता है कि इनमें तीन को गोली मारी गई और बाकी को एक-एक करके कुएँ पर ले जाया गया। किनारे पर एक छोटा सा पेड़ है। जल्लाद यहीं खड़ा हो गया जो तलवार से गर्दन काटकर शव को कुएं में धकेलता रहा था

उनमें से कई लोग जिन्हें नहीं फेंका गया था वह मरे भी नहीं थे। लेकिन चंगुल से छूटना नमुमकिन था। कुएँ के किनारे सख्त लाल चट्टान में कटे हुए हैं और कोई सीढ़ियाँ नहीं हैं। बताया जाता है कि हत्याकांड के तीसरे दिन भी कुछ लोग कुएँ से चिल्ला रहे थे। वे एक अजीबोगरीब भयानक मौत मरे होंगे। जिस समय यह हत्याकांड हुआ था उस समय बारिश का मौसम था और थोड़ा पानी था, लेकिन अब यह सूखा है और कोई भी आने जाने वाला इस भीषण नजारे को देख सकता है। कुआँ पूरी तरह से मानव हड्डियों से भरा है। मेरे बगल में खड़े आर्य समाज मिशनरी पंडित ऋषि राम ने 30 खोपड़ियों की गिनती की।

एक खोपड़ी जिसका अलग से जिक्र होना चाहिए।

यह अभी भी बड़े करीने से दो हिस्सों में बंटा हुआ दिखाई देता है। कहा जाता है कि यह कुमारा पणिक्कर नाम के एक वृद्ध व्यक्ति की खोपड़ी है, जिसके सिर को आरी से धीरे-धीरे दो भागों में काट दिया गया था।

गोपालन ने इस पुस्तक में मौजूद तुच्छ जानकारी के बारे में बताया। लेकिन, हिंदुओं के मोपला नरसंहार के दौरान जो कुछ हुआ, उसका शायद ही कोई आधिकारिक या सच्चा विवरण कहीं हो। कई वामपंथी इतिहासकारों ने इस नरसंहार को ये बता कर फैलाया कि ये एक कृषि विद्रोह था या ये कहा गया कि वो (मुस्लिम) मजदूर थे जिन्होंने (हिंदू) जमींदारों के विरुद्ध आवाज उठाई थी।

ऐसे इतिहासकारों ने हिंदुओं के मोपला नरसंहार में दबे वर्ग को मुस्लिम दिखाया जबकि  हिंदुओं को जमींदार कहकर सशक्त दिखाने की कोशिश की। यही रोना शशि थरूर ने भी अपनी किताब में रोया था जबकि इस नरसंहार को लेकर जो विश्वसनीय स्रोत हैं वो पूरी अलग कहानी सुनाते हैं। जिसमें जबरन धर्मांतरण, हिंदू पुरुषों, महिलाओं, बच्चों के खिलाफ अत्याचार और साथ ही साथ कट्टरवाद शामिल है जिसे महात्मा गाँधी समेत  कई कॉन्ग्रेसी नेताओं का समर्थन था।

नोट: यह लेख ऑपइंडिया की एडिटर इन चीफ नुपूर जे शर्मा के मूल लेख पर आधारित है। इसका अनुवाद जयंती मिश्रा ने किया है। आप इस लेख को इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

नाबालिग लड़की के साथ पिता/दादा को सार्वजनिक तौर पर शर्मिंदा… जुबैर का ट्वीट नहीं हटा रहा ट्विटर, NCPCR गई हाई कोर्ट

ऑल्टन्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर का एक विवादित ट्वीट है। ट्विटर ने इसे हटाने से इनकार कर दिया है। इस मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। आयोग ने याचिका में आरोप लगाया गया है कि जुबैर का ट्वीट विभिन्न कानूनों का उल्लंघन है, इसलिए इसे हटाने के लिए कोर्ट ट्विटर को आदेश दे।

NCPCR के चेयरपर्सन प्रियांक कानूनगो की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने पिछले साल अगस्त 2020 में जुबैर के खिलाफ मामला दर्ज किया था। शिकायत में 6 अगस्त 2020 को जुबैर द्वारा किए गए एक ट्वीट का हवाला दिया गया था। उस ट्वीट में एक नाबालिग लड़की की तस्वीर थी। उस बच्ची का चेहरा तो ब्लर किया गया था लेकिन उसे उसके दादाजी (जुबैर ने अपने ट्वीट में यही लिखा था, मीडिया रिपोर्ट में वो बच्ची के पिताजी बताए गए हैं) के साथ खड़ा दिखाते हुए शब्दों के साथ नीचा दिखाने की कोशिश की थी।

इस मामले में पिछले साल हाई कोर्ट ने जुबैर को राहत देते हुए पुलिस को उसके खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने से रोक दिया था। अब हाई कोर्ट में NCPCR ने इस मामले में एक हलफनामा दाखिल किया है। इसमें ऑल्टन्यूज़ के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर के ट्वीट पर कार्रवाई को लेकर दिल्ली पुलिस और ट्विटर को पत्र लिखकर इस मामले में की गई कार्रवाई के बारे में पूछा गया।

दिल्ली पुलिस ने NCPCR को बताया कि उसने 17 फरवरी को ट्विटर के खिलाफ आईपीसी की धारा 175 के तहत पटियाला हाउस कोर्ट में बार-बार याद दिलाने के बावजूद माँगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराने के मामले में याचिका दायर की है। इस मामले में पुलिस ने ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी और इसके तत्कालीन प्रबंध निदेशक (इंडिया ऑपरेशन) मनीष माहेश्वरी के खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी।

ट्विटर ने इस साल अगस्त में बताया था कि ऑल्टन्यूज़ के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर के ट्वीट में बच्ची की तस्वीर पिक्सलेटेड या धुंधली है। कंपनी ने यह भी बताया कि फोटो की समीक्षा करने के बाद उसने इस ट्वीट को हटाने से इनकार कर दिया था।

NCPCR ने इस मामले में ट्विटर को विवादित पोस्ट को हटाने की माँग करते हुए कहा, “ट्विटर कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग नहीं कर रहा है और विवादित पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई नहीं करके देश के कानून का पालन नहीं कर रहा है।”

गौरतलब है कि फैक्ट चेकिंग के नाम पर लोगों की निजी और गोपनीय जानकारियाँ सार्वजानिक करने के लिए कुख्यात समूह ऑल्टन्यूज़ के संस्थापकों में से एक मोहम्मद जुबैर ने 7 अगस्त 2020 को जगदीश सिंह नाम के एक ट्विटर यूजर को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा कर रहा था। ऐसा करते हुए तब उसने एक नाबालिग लड़की की तस्वीर को भी सार्वजानिक कर दिया था। इस बच्ची को उसने उन्हीं ट्विटर यूजर जगदीश सिंह की पोती बताया था।

PM मोदी के 71वें जन्मदिन पर भारत माता के मंदिर पर जलेंगे 71 हजार दीपक, टूटेगा वैक्सीनेशन का रिकॉर्ड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 71वें जन्मदिन के मौके पर भारतीय जनता पार्टी कई कार्यक्रमों के आयोजन करेगी। ऐसे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इस अवसर पर 2 करोड़ वैक्सीन डोज़ लगाने का लक्ष्य रखा है। 

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा इस दौरान Cowin app पर काउंटर चलाया जाएगा जो हर पल यह अपडेट देगा कि देश में हर सेकेंड कितनी वैक्सीन लगवाई गई। स्वास्थ्य मंत्रालय की कोशिश होगी कि वह दोपहर तक 1 करोड़ वैक्सीन का लक्ष्य प्राप्त कर लें और देर शाम तक 2 करोड़ का आँकड़ा छुआ जा सके।

अब तक दो बार ऐसे मौके आए हैं जब भारत में एक दिन में करीबन 1 करोड़ वैक्सीन के डोज लगाए गए हों। लेकिन, अगर पीएम मोदी के जन्मदिन के अवसर पर ये आँकड़ा 2 करोड़ को पार करता है तो वाकई ये हैरान करने वाली बात होगी।

बता दें कि एक ओर जहाँ स्वास्थ्य मंत्रालय ने जनता को 2 करोड़ वैक्सीन देने का लक्ष्य रखा है। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने पीएम मोदी का 71वाँ जन्मदिवस भव्य ढंग से मनाने के लिए 20 दिन के राष्ट्रव्यापी अभियान की योजना बनाई है। इसे सेवा और समर्पण अभियान का नाम दिया गया जो कि 7 अक्टूबर को खत्म होगा। इस अभियान के लिए बीजेपी ने 4 सदस्यीय समिति बनाई है ताकि अभियान के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए कार्यक्रम आयोजन हों। समिति का नेतृत्व कैलाश विजयवर्गीय के हाथ में हैं।

इसी बाबत केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने गुरुवार (16 सितंबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर 15 मोबाइल चिकित्सा इकाइयों को हिमाचल प्रदेश भेजा ताकि राज्य के लोगों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की जा सके।

इसके अलावा भाजपा ने इस दिन रिकॉर्ड तोड़ वैक्सीनेशन प्रोग्राम के साथ स्वास्थ्य व रक्तदान शिविर आयोजित करने, गरीबों को राशन वितरित करने और स्मृति चिन्हों की ई-नीलामी करने का निर्देश दिया है।

पीएम के जन्मदिन के मौके पर व उनके राजनीतिक सफर को दो दशक (13 साल मुख्यमंत्री के तौर पर और 7साल प्रधानमंत्री के तौर पर) पूरे होने पर एक फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन किया जाएगा।

इस दौरान पीएम मोदी की तस्वीर वाले 14 करोड़ राशन बैग बाँटे जाएँगे। अब तक भाजपा शासित प्रदेशों में कुल 2.16 करोड़ बैग बांटे जा चुके हैं।

देश भर के भाजपा के बूथ स्तरीय कार्यकर्ता प्रधानमंत्री को उनके जन्मदिवस पर दो करोड़ पोस्टकार्ड भेजेंगे और उन्हें आश्वस्त करेंगे कि वह समाज सेवा के लिए खुद को समर्पित करेंगे।

ऐसे ही 17 सितंबर से 21 दिन तक वाराणसी में 71 आयोजन होंगे। इसमें भारत माता मंदिर पर 71 हजार दीपक जलाने, गंगा में 71 मीटर चुनरी चढ़ाने और सभी विधानसभाओं में 71-71 किलो लड्डू वितरित करने की योजना है।

आज सुबह 10 बजे अस्सी घाट पर माँ गंगा को 71 मीटर लंबी चुनरी चढ़ाने का कार्यक्रम होगा । साथ ही साथ 71 प्रमुख मंदिरों में आरती एवं दीपोत्सव का कार्यक्रम भी किया जाएगा।

यूपी में पार्टी कार्यकर्ता गाँव-गाँव जाएँगे और 71 किसानों व 71 जवानों को सम्मानित किया जाएगा। इसी प्रकार 71 महिलाओं को सम्मानित किया जाएगा। स्वच्छता, वृक्षारोपण, साफ-सफाई के कार्यक्रम भी होंगे।

उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी के जन्मदिन के अवसर पर हर कोई उन्हें बधाइयाँ दे रहा है। वाराणसी में तो पीएम मोदी के 71वें जन्मदिन की पूर्व संध्या पर मिट्टी के दीए जला कर 71 किलो लड्डू भी बाँट दिए गए। ऐसे में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके लिए कहा, “अंत्योदय से आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएँ। प्रभु श्री राम की कृपा से आपको दीर्घायु व उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति हो। आजीवन माँ भारती की सेवा का परम सौभाग्य आपको प्राप्त होता रहे।”