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प्राचीन महादेवम्मा मंदिर विध्वंस मामले में मैसूर SP को विहिप नेता ने लिखा पत्र, DC और तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई की माँग

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेता गिरीश भारद्वाज ने मैसूर के उपायुक्त और नंजनगुडु के तहसीलदार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक के पास शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने यह आरोप 8 सितंबर को महादेवम्मा मंदिर के विध्वंस को लेकर लगाया है। गुरुवार (16 सितंबर, 2021) को दर्ज शिकायत में उन्होंने एसपी से डीसी और तहसीलदार दोनों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का अनुरोध किया है।

विहिप नेता ने ट्विटर पर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने मैसूर के एसपी को उनके द्वारा लिखे गए पत्र की एक प्रति भी शेयर किया।

मैसूर एसपी को लिखे अपने पत्र में, विहिप नेता ने दोनों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को गलत तरीके से पढ़कर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया है, जिसके कारण 8 सितंबर को नंजनगुडु तालुक के उचगनी में 200 साल पुराने महादेवम्मा मंदिर को गिरा दिया गया था। 

इस पत्र में लिखा गया, “महादेवम्मा मंदिर जिसे अधिकारियों ने तोड़ दिया था, उसका 500 से अधिक वर्षों का इतिहास है। देवता की मूर्ति को हिंदू रीति-रिवाजों (प्राण प्रतिष्ठापन) के अनुसार प्रतिष्ठित किया गया था और मूर्ति की प्रतिदिन पूजा की जाती थी। यह बहुत ही चिंता का विषय है कि तहसीलदार ने स्थानीय लोगों की भावनाओं को तवज्जो नहीं दी। भक्तों और स्थानीय लोगों के विरोध से बचने के लिए गुप्त रूप से सुबह तड़के इसे ध्वस्त कर दिया।” पत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लेख करते हुए दावा किया गया है कि विध्वंस इसका उल्लंघन है।

विहिप नेता द्वारा मैसूर एसपी को लिखे गए पत्र का स्क्रीनशॉट
विहिप नेता द्वारा मैसूर एसपी को लिखे गए पत्र का स्क्रीनशॉट

विहिप नेता द्वारा मैसूर एसपी को लिखे पत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया गया है, “अवैध धार्मिक संरचना के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का आदेश बहुत स्पष्ट है: यदि धार्मिक संरचनाएँ पहले से ही सार्वजनिक स्थानों पर हैं और 29 सितंबर 2009 से पहले बनाई गई हैं, तो सरकार को ऐसी संरचना को हटाने / स्थानांतरित करने / नियमित करने के मामले में नीति तैयार करनी होगी और मामले का फैसला करना होगा।” 

पत्र के अनुसार, मैसूर के डिप्टी कमिश्नर ने उचगनी में महादेवम्मा और कालभैरवेश्वर मंदिर को नियमित करने के लिए 2011 में नंजनगुडु के तहसीलदार के सुझावों की अनदेखी कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि मंदिर 200 साल पुराना था। मैसूर के उपायुक्त ने रिपोर्ट की अनदेखी करते हुए मुख्य सचिव के सर्कुलर के अनुसार तहसीलदार को महादेवम्मा मंदिर को ध्वस्त करने के लिए कहा।

पत्र में कहा गया है, “2011 में, नंजनगुडु के तत्कालीन तहसीलदार ने उचगनी में महादेवम्मा और कालभैरवेश्वर मंदिर को नियमित करने की सिफारिश की थी, जिसमें कहा गया था कि मंदिर 200 साल पुराना है। मैसूर के डिप्टी कमिश्नर रिपोर्ट की अनदेखी करते हुए मुख्य सचिव के सर्कुलर के बाद तहसीलदार को महादेवम्मा मंदिर को ध्वस्त करने का निर्देश दिया।”

पत्र में आगे कहा गया कि मंदिर सड़क से 40 फीट की दूरी पर था और इससे विकास प्रभावित नहीं होता। तहसीलदार किसी निर्णय पर पहुँचने के लिए भक्तों और स्थानीय लोगों के साथ बैठक कर सकते थे। इस कदम को तहसीलदार की ‘घोर लापरवाही’ बताते हुए कानूनी कार्रवाई करने की बात कही गई। पत्र में कहा गया है, “तहसीलदार को अतिक्रमण हटाने के आधार पर हिंदुओं के धार्मिक ढाँचे को तोड़ने का कोई अधिकार नहीं है।”

गिरीश भारद्वाज ने कहा, “तहसीलदार, नंजनगुडु ने महादेवम्मा मंदिर को ध्वस्त करने की साजिश रची है। यहाँ तक कि प्राण प्रतिष्ठा के साथ प्रतिष्ठित मूर्तियों को स्थानांतरित किए बिना, तहसीलदार ने जानबूझकर ब्रह्म कलश और विग्रहों के साथ मंदिर को ध्वस्त कर दिया है।” गिरीश भारद्वाज ने कहा कि इस कदम ने उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। उन्होंने एसपी से धार्मिक भावनाओं को आहत करने और कर्तव्य की उपेक्षा के लिए डीसी, तहसीलदार और मंदिर के विध्वंस की निगरानी करने वाले सभी लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने का अनुरोध किया है।

मैसूर मंदिर विध्वंस के विरोध में हिंदू संगठन के सदस्यों का प्रदर्शन

इस बीच, हिंदू संगठन हिंदू जागरण वेदिक के सैकड़ों सदस्य, कोटे अंजनेस्वामी मंदिर के सामने इकट्ठा हुए और मैसूर में जिला प्रशासन और सरकार के खिलाफ हिंदू मंदिर के विध्वंस की निंदा करते हुए एक विशाल मार्च में हिस्सा लिया। राज्य सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए संगठन के संयोजक ने कहा कि सीएम बसवराज बोम्मई को हिंदू मंदिरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

कोहाट दंगे: खिलाफ़त आंदोलन के लिए हुई ‘डील’ ने कैसे करवाया था हिंदुओं का सफाया? 3000 का हुआ था पलायन

पाकिस्तान में हिंदुओं पर होते अथाह अत्याचार की हकीकत आज सबके सामने है। लोगों को लगता है कि ये सब पिछले कुछ सालों में शुरू हुआ वरना उससे पहले मुस्लिम बहुल इलाकों में हिंदुओं के साथ सब कुछ ठीक था। कुछ लोग ऐसी भयावह स्थिति के लिए विभाजन को भी जिम्मेदार मानते हैं और कुछ को लगता है कि ये कट्टरपंथ का नतीजा है। 

इसके अलावा हो सकता है कुछ मत और भी हों या कुछ अनुभव अलग भी हों। लेकिन आज मुद्दा ये नहीं  है कि पाकिस्तान में वर्तमान स्थिति क्या है। मुद्दा आपको ये बताना है कि पाकिस्तान में बसे इलाकों में हिंदुओं की हालत विभाजन से पहले भी इतनी ही दर्दनाक थी। ये मारकाट, हत्या, धर्मांतरण कोई आज की तस्वीर नहीं है। भले ही उस समय वह क्षेत्र भारत का हिस्सा थे, लेकिन अल्पसंख्यक होने के कारण हिंदू फिर भी इस्लामी कट्टरपंथ की बलि चढ़ने को मजबूर था।

आगे 1924 में कोहाट का दंगा और उसके ईर्द-गिर्द हुई घटना उक्त बातों को साफ कर देगा। …वैसे तो कोहाट पाकिस्तान में बसा एक शहर है और इसका जिक्र बौद्धों के इतिहास से लेकर बाबरनामा तक में पढ़ने को मिलता है। इसके बाद दुर्रानी शासन काल में, फिर पीर मोहम्मद की शिकस्त और महाराजा रणजीत सिंह की जीत में भी कोहाट शामिल है। मगर, इतिहास में इतना पीछे न जाते हुए सिर्फ 1924 में हिंदुओं पर हुए अत्याचार और उस समय के आस पास घटित हो रही घटनाओं पर बात करते हैं। (इस क्रम में 1919 से 1922 में मध्य भारत में चला खिलाफत आंदलोन भी चर्चा में रहेगा, जिसका उद्देश्य मुस्लिमों के मुखिया माने जाने वाले टर्की के ख़लीफ़ा के पद की पुन: स्थापना कराने के लिए ब्रिटिश सरकार पर दबाव डालना था।)

500 साल तक इस्लामी सत्ता के तले दबे कोहाट की आबादी में हिंदू 1924 में कथिततौर पर केवल 6 प्रतिशत थे। बाकी सब मुस्लिम। महाराजा रणजीत सिंह ने अपने जीते जी इस क्षेत्र के हिंदुओं पर आँच तक नहीं आने दी थी। लेकिन उनकी मृत्यु के बाद तस्वीर बदल गई। कोहाट पर ब्रिटिश सत्ता आई और हिन्दुओं की हालत और कमजोर होती गई। मुस्लिम आबादी उन पर हावी हो रही थी जिसके कारण उन्होंने खुद को बचाने के लिए सनातन धर्म सभा का गठन किया।

94 फीसद आबादी के सामने 6 फीसद आबादी कब तक टिक पाती वो भी उस दौर में जब देश को आजादी दिलाने के नाम पर कॉन्ग्रेस पार्टी ही मुस्लिम लीग से हाथ मिला ‘डील’ करके खिलाफत आंदोलन को समर्थन दे रही थी। अजीब बात ये थी कि गाँधी उस दौर में खुद असहयोग आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे लेकिन उनके ‘हिंदू-मुस्लिम एकता’ के साथ स्वतंत्रता पाने के सपने ने उन्हें मुस्लिम लीग से हाथ मिलाने को मजबूर किया।

लाहौल में प्रकाशित हुई हिंदू विरोधी कविता

1922 में खिलाफ़त का आंदोलन फीका पड़ा और हिंदू मुस्लिम एकता के मुखौटे के नीचे सांप्रदायिक तनाव पैदा होता नजर आने लगा। उधर कोहाट के हालात संवेदनशील थे। वहाँ मुस्लिम लगातार हिंदुओं को दबाने में लगे थे। कुछ घटनाएँ हो रही थीं जिनसे माहौल साम्प्रदायिक होता जा रहा था।

अंतत: 1924 में एक दिन ऐसा आया कि मुस्लिम समाचार पत्र में एक हिंदू विरोधी कविता प्रकाशित कर दी गई, जिसे देख सनातन धर्म सभा के सचिव जीवन दास भड़क गए और एक पैम्पलेट के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। विवाद बढ़ा लेकिन बाद में सभा ने इस पर्चे की बाबत 2 सितंबर को क्षमा प्रस्ताव पारित कर दिया।

कृष्णा संदेश में प्रकाशित कविता

बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी इतने से शांत कहाँ होने वाली थी। उनका नेतृत्व करने वाले मौलवी अहमद गुल ने पुलिस को अंजाम भुगतने की धमकी देते हुए जीवन दास की गिरफ्तारी की माँग की। साथ ही कहा कि उन्हें हिरासत में तब तक रखा जाए जब तक कि वो 10 हजार का बॉन्ड नहीं देते। इसके बाद जीवन गिरफ्तार हुए और 8 सितंबर को जाकर कहीं उन्हें बेल मिली।

कोहाट की बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी इस रिहाई को देख आग बबूला हो गई और उलेमा व कई मस्जिद अपने भड़काऊ भाषण देने के काम पर लग गए। धमकी दी गई कि या तो दास को सजा हो या फिर वो उसे शरीयत के मुताबिक सजा देंगे। 9 सितंबर की सुबह तक का वक्त मौलवियों ने दिया था। इस बीच एक हाजी बहादुर के मस्जिद के मौलवी ने कसम खा ली कि अगर वो अपने मजहब की रक्षा न कर पाया तो बीवी को तलाक दे देगा। रात होते होते कई अन्य मुस्लिम इस कसम को खाते देखे गए।

इसके बाद 9 सितंबर को पहले 1000-1500 की भीड़ उप आयुक्त के पास गई और माँग पूरी करवाने का दबाव बनाया, लेकिन सुनवाई न होने पर उसी दिन दोपहर में हिंदुओं पर हमला हुआ। खुलेआम मुस्लिम बहुल आबादी ने वहाँ के तमाम हिंदुओं की दुकानों को लूटा और जलाना शुरू किया। मिट्टी की दीवारें ढहाई गईं और लूटपाट के बाद आगजनी को अंजाम दिया गया। हिंदू क्वार्टर आग की लपटों से धुआं छोड़ रहे थे, जिन्हें देख कोई भी कह देता कि ये कोई प्रतिक्रिया नहीं बल्कि एक गहरी साजिश की परिणाम था।

हिंदुओं की संपत्ति तहस-नहस करने में अधिकतर दूसरे समुदाय का युवा वर्ग शामिल था। उन्होंने एक मुस्लिम लड़की के साथ भागने वाले सरदार के घर, बागान सबको जला दिया था। इस बीच हालत देख हिंदुओं ने डर कर इन लोगों पर गोली चलाई जिसके कारण एक पत्थरबाज मर गया और कई घायल हुए।

इस घटना ने जैसे दूसरे समुदाय को हिंदुओं को मारने का पास दे दिया। नतीजन दंगा शाम तक चलता रहा। कानून के सहारे जब तक स्थिति को संभाला गया तब तक दूसरे चरण की मारकाट शुरू हो गई थी। 10 सितंबर 1924 को करीबन 4000 मुस्लिमों ने 3000 हिंदुओं को इतना मजबूर कर दिया कि उन्हें भाग कर मंदिर में शरण लेनी पड़ी। इस बीच जो पीछे छूटे उन्हें मुस्लिम सुमदाय के लोगों ने काट डाला, बाकी भागे हिंदुओं के घरों को लूटा और आग में झोंक दिया।

कथिततौर पर 1 हफ्ते के अंदर हिंदू मोहल्ला राख हो चुका था। बचे हुए हिंदुओं ने भाग कर पंजाब के रावलपिंडी में शरण ली। आधिकारिक तौर पर कहते हैं कि कुल 115 लोग हताहत हुए थे। इनमें 12 मरे थे, 13 घायब हुए थे और 86 को चोट आई थी। लेकिन, इन आँकड़ों के साथ ही अनुमान ये भी लगता है कि उस समय दूसरे समुदाय के जितने लोग हताहत हुए उससे तीन गुना हिंदू मारे गये थे। 

इस आपाधापी और इतने भय वाले माहौल ने हिंदुओं को घर छोड़ने को मजबूर कर दिया। हिंदुओं की वापसी दोबारा 1925 में जाकर शुरू हुई जब NWFP चीफ कमिश्नर एचएन बॉल्टन ने हिंदू मुस्लिम नेताओं में नाम का समझौता कराया लेकिन फायदा दूसरे पक्ष को हुआ। इसके तहत मुस्लिमों के ख़िलाफ़ सभी आपराधिक केसों को वापस ले लिया गया सिर्फ जीवन दास के ऊपर से ईशनिंदा का केस नहीं हटा। साथ ही हिंदुओं को 5 लाख रुपए का मुआवजा भी नहीं दिया गया।

अनुमान लग चुका था

कोहाट दंगों से पहले 23 जुलाई को लॉर्ड रीडिंग ने ब्रिटिश सेक्रेट्री को कुछ लिखा था जिससे ये साफ था कि हिंदू मुस्लिम के बीच की खटास उन्हें दिख रही थी। उन्होंने कहा था “ये गाँधी का आंदोलन कभी भी इतना मजबूत नहीं होता लेकिन सेवर्स की संधि (treaty of sevres) जिसने मुसलमानों को इतना कट्टर बनाया कि उसके कारण वह कुछ समय के लिए हिंदुओं से जुड़े। अब सबसे बड़ी परेशानी ये है कि हिंदू-मुस्लिम के गलों को एक दूसरे से बचाया जा सके जो कि मुझे लगता है ब्रिटिश ही कर सकते हैं। विशुद्ध रूप से भारतीय विचारों से, मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि शांति [तुर्की के साथ] हमें भारत में 60 या 70 मिलियन मुसलमानों के बीच चरमपंथियों को छोड़कर सभी के समर्थन का आश्वासन देगी और भारत में ब्रिटिश स्थिति को मजबूत करने के लिए भौतिक रूप से मदद करेगी।”

पैट्रिक मैकग्रा ने ऐसी स्थिति के लिए खिलाफत आंदोलन और उसके बाद के परिणामों को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने बताया था कि कैसे खिलाफत के दौरान मुस्लिम समुदायों में कट्टरता बढ़ी। इस दौरान उलेमा राजनैतिक गतिविधियों में शामिल हुए और इस बीच उनकी कट्टरता ने मुस्लिम समुदाय पर गहरा प्रभाव छोड़ा और साम्प्रदायिक मुद्दे इस बीच बड़ा मुद्दा बनकर उभरे।

आज मौजूदा तथ्यों और कोहाट दंगों के इर्द-गिर्द घटी ऐतिहासिक घटनाओं को एक दूसरे से जोड़ते हुए हम कह सकते हैं खिलाफत आंदोलन ही वह प्रमुख आंदोलन था जिसने भारत के विभाजन की बीज बोई और मजहब के आधार पर पाकिस्तान की माँग को उठाया। इस खिलाफत आंदोलन के आसपास दो बड़े हिंदू नरसंहार हुए। एक 1921 में मोपला में और दूसरा 1924 में कोहाट में। दोनों ही समय इस्लामी कट्टरपंथियों का भयावह चेहरा देखने को मिला था। लेकिन राजनैतिक समर्थन के कारण इन्हें बल मिला। शायद आगे यही वजह थी कि विभाजन के बाद भी ये कट्टरपंथ का बीज सींचा जाता रहा जिसने 90 के दशक में कश्मीरियों पंडितों के नरसंहार की कहानी लिखी।

‘सीता’ के लिए करीना-दीपिका नहीं कंगना थीं शुरू से पहली पसंद: मनोज मुंतशिर ने किया बड़ा खुलासा, कही ये बात

पिछले काफी दिनों से फिल्म ‘सीता’ चर्चाओं में बनी हुई है। रामायण की कहानी पर आधारिक फिल्म ‘सीता – द इंकार्नेशन’ में सीता के रोल को लेकर अब तस्वीर पूरी तरह से साफ हो चुकी है। इस फिल्म में सीता का रोल बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत निभाने वाली हैं। फिल्म का पोस्टर शेयर करते हुए कंगना ने इस बात का खुलासा किया है। 

इस फिल्म का डायरेक्शन अलौकिक देसाई करेंगे। वहीं राइटर मनोज मुंतशिर डायलॉग और लिरिक्स राइटर है। इससे पहले फिल्म में सीता के किरदार को लेकर कई एक्ट्रेस से बात करने की चर्चाएँ चल रही थीं, जिसमें एक नाम करीना कपूर खान का भी था। ऐसे में इस पर भी बड़ा खुलासा हुआ है।

करीना और दीपिका महज एक अफवाह

दरअसल, जब सीता फिल्म की चर्चाएँ चल रही थी, तब कई तरह की अफवाह बाजार में दौड़ रही थीं, जिसमें एक यह थी कि फिल्म में सीता के रोल के लिए करीना कपूर खान और दीपिका पादुकोण से संपर्क किया गया था, लेकिन अब फिल्म से जुड़े स्क्रीनप्ले राइटर लेखक मनोज मुंतशिर ने करीना कपूर खान और दीपिका पादुकोण को फिल्म के लिए संपर्क किए जाने की अफवाहों पर सफाई दी है। मनोज ने बताया कि मेकर्स हमेशा से चाहते थे कि कंगना रनौत लीड रोल निभाएँ।

‘कंगना के सीता की भूमिका के लिए रोमांचित हूँ’

बता दें कि इस हफ्ते की शुरुआत में यह घोषणा की गई थी कि कंगना रनौत अपकमिंग एपिक पीरियड ड्रामा ‘सीता – द इंकार्नेशन’ में सीता की भूमिका निभाएँगी। फिल्म को अलौकिक देसाई डायरेक्ट करेंगे। पटकथा मनोज के अलावा केवी विजयेंद्र प्रसाद और अलौकिक देसाई ने लिखी हैं। 

वहीं फ्री प्रेस जर्नल के साथ एक इंटरव्यू में मनोज मुंतशिर ने कहा, “मैं कंगना को सीता की भूमिका निभाने के लिए रोमांचित हूँ। कंगना हमारी प्रायोरिटी लिस्ट में थी। करीना और दीपिका जैसी अभिनेत्रियों को इस प्रोजेक्ट के लिए संपर्क करने के बारे में अफवाहें चल रही थीं, लेकिन वो सच नहीं है।

‘मेरी सीता शर्मीली, डरपोक या कमजोर नहीं’ 

मनोज ने बताया, “हमने जिस सीता देवी को स्केच किया है, उसमें कई शेड हैं और कंगना उस दृष्टिकोण से सर्वश्रेष्ठ कलाकार हैं। एक बार जब आप सिनेमाघरों में फिल्म देखेंगे, तो आप उनकी जगह किसी की कल्पना नहीं कर पाएँगे। हमने कभी भी किसी भी एक्ट्रेस से संपर्क नहीं किया और हमेशा कंगना को लीड कैरेक्टर में देखा था।” 

वहीं कंगना को चुनने के बारे में बोलते हुए मुंतशिर ने कहा कि वह सीता के चरित्र में विश्वास करती हैं। ज्यादातर एक्ट्रेस के साथ आपको उन्हें समझाना होगा कि सीता का कैरेक्टर क्या है। लेकिन कंगना का एक मजबूत व्यक्तित्व है और मेरी सीता शर्मीली, डरपोक या कमजोर नहीं है। वह स्टैंड लेती है, निर्णय लेती है। उन्हें भारतीय नारीवाद की ध्वजवाहक बनना है – सीता को एक रोल मॉडल होना चाहिए।

मनोज ने कहा कि यह अपने कलाकारों और क्रू के लिए करियर को परिभाषित करने वाली फिल्म होगी। ‘द इंकार्नेशन: सीता’ एक ऐसी फिल्म है, जो हमारे करियर को परिभाषित करेगी। हम दोनों इसे गंभीरता से ले रहे हैं और जानते हैं कि यह एक ऐसी फिल्म हो सकती है जिसे अच्छी तरह से बनाए जाने पर आने वाले लंबे समय तक याद रखा जाएगा। यह एक भव्य पैमाने पर योजना बनाई जा रही है और इसे एक बड़े बजट पर बनाया जाएगा।

गौरतलब है कि हाल ही में बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपनी अगली फिल्म ‘The Incarnation – SITA’ में माँ सीता का किरदार निभाने का ऐलान करने के बाद इस फिल्म में सीता के रोल को लेकर खुलासा किया। उन्होंने कहा कि वह पहले भी माँ सीता का रोल कर चुकी हैं। सोशल मीडिया के जरिए कंगना ने कहा कि जब वो 12 साल की थीं तो स्कूल में उन्होंने सीता का अभिनय किया था।

करीना ने माँगे थे 12 करोड़

बता दें कि इससे पहले कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि कंगना से पहले माँ सीता पर आधारित फिल्म में माता सीता का रोल अभिनेत्री करीना कपूर खान को ऑफर किया गया था, जिसके लिए उन्होंने 12 करोड़ रुपए की भारी-भरकम फीस माँगी थी। हालाँकि, सोशल मीडिया पर लोगों ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि करीना पर शूर्पणखा को रोल शूट करता है न कि सीता का।

‘सुब्रमण्यम स्वामी फ्रीलांसर राजनेता, पार्टी के खिलाफ बोलना उनका चरित्र’: कर्नाटक CM बासवराज बोम्मई के बयान से बवाल

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई ने बुधवार (15 सितंबर 2021) को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज एस बोम्मई ने भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी को ‘स्वतंत्र राजनेता’ करार देकर सियासी बखेड़ा खड़ा कर दिया। कर्नाटक विधानसभा में एक बहस के दौरान सीएम ने कहा कि स्वामी का चरित्र और गुण उनकी अपनी पार्टी और उसके नेतृत्व के खिलाफ बोलने का रहा है।

बोम्मई ने कहा, “आप सुब्रमण्यम स्वामी के बारे में अच्छी तरह जानते हैं। वह जिस पार्टी में हैं, वहाँ एक स्वतंत्र राजनेता की तरह हैं। जो मन में आता है वही कह देते हैं। वह अपने विश्लेषण के आधार पर बातें करते हैं।”

बोम्मई ने कहा कि स्वामी ने जनता पार्टी और फिर जनता दल के नेतृत्व के खिलाफ भी बात की थी। उन्होंने कहा, “सरकार में रहते हुए उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के खिलाफ बात की थी। यह सुब्रमण्यम स्वामी का चरित्र और गुण है।”

सिद्धारमैया के ट्वीट का बोम्मई ने दिया जबाव

दरअसल, कर्नाटक के सीएम ने सुब्रमण्यम स्वामी पर यह टिप्पणी सिद्धारमैया के उस ट्वीट के जवाब में आई है, जिसमें उन्होंने भारत में पेट्रोल की कीमतों के बारे में नकली डेटा साझा किया था। स्वामी ने फरवरी में रामायण का हवाला देकर भारत में पेट्रोल की कीमतों पर तंज कसा था। उन्होंने कहा था कि ‘राम के भरत’ के भारत में पेट्रोल 92 रुपए और ‘सीता के नेपाल’ में 53 रुपए में है, जबकि ‘रावण की लंका’ में इसकी कीमत 51 रुपए ही है। उस दौरान भी ऑपइंडिया ने विस्तार से लिखा था कि कैसे पार्टी के असंतुष्ट नेता के ट्वीट को केवल ‘व्हाट्सएप फॉरवर्ड’ के रूप में देखा जा सकता है। यह वास्तविकता से बहुत दूर था।

यह बात तो सभी जानते हैं कि स्वामी मोदी सरकार में मंत्री बनना चाहते थे, लेकिन मंत्रिमंडल में नहीं रखे जाने से वह चिढ़ गए हैं। उन्हें अक्सर सोशल मीडिया पर गलत सूचना और बेबुनियाद आरोप लगाते हुए देखा जाता है। उन्होंने हाल ही में एक साजिश के तहत थ्योरी पेश करते हुए दावा किया था कि गणतंत्र दिवस पर लाल किले की घेराबंदी में पीएमओ शामिल था। वह मोदी सरकार के कोरोना वैक्सीन अभियान के जवाब में टीका-विरोधी अभियान भी शुरू कर चुके हैं।

इस बीच स्वामी के फेक ट्वीट का हवाला देते हुए सिद्धारमैया ने ईंधन की बढ़ती कीमतों और अन्य वस्तुओं पर इसके व्यापक प्रभाव के लिए भाजपा सरकार पर कटाक्ष किया था। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता ने हाल ही में अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ ईंधन, एलपीजी सिलेंडर और दैनिक वस्तुओं की कीमत के खिलाफ बैलगाड़ियों से एक विरोध मार्च भी शुरू किया था। सिद्धारमैया पर विधानसभा में बीजेपी की चुटकी लेते हुए कहा, “यह मैं नहीं बीजेपी के राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है, आपके पिता (पूर्व सीएम स्वर्गीय एसआर बोम्मई) के दोस्त थे।”

उन्होंने भाजपा नेतृत्व को स्वामी के गलत होने पर उन्हें बर्खास्त करने की चुनौती भी दी थी। सिद्धारमैया ने कहा, “अगर बीजेपी नेतृत्व उनके बयान को बर्दाश्त करता है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है। यह मत भूलो कि वह एक अर्थशास्त्री हैं और आपने उन्हें अपना राज्यसभा सदस्य बनाया है।”

इस पर सीएम बासवराज बोम्मई ने इस बात को स्वीकार किया कि वास्तव में स्वामी अर्थशास्त्र में एक प्रतिभाशाली व्यक्ति हैं और पार्टी ने हमेशा उन्हें इसका उचित श्रेय भी दिया है।

कर्नाटक के सीएम पर सुब्रमण्यम स्वामी का पलटवार

हालाँकि, हमेशा अपनी ही पार्टी के कड़े आलोचक रहे सुब्रमण्यम स्वामी को बोम्मई की प्रतिक्रिया अच्छी नहीं लगी। बता दें कि वह मोदी सरकार के खिलाफ पॉट-शॉट्स लेने का कोई मौका नहीं गंवाते हैं। स्वामी ने एक ट्वीट में कर्नाटक के सीएम पर पलटवार करते हुए कहा कि वह राजनीति में ‘बूटलीकिंग करके नहीं, बल्कि सच्चाई का प्रचार करके’ बढ़े हैं।

कर्नाटक कॉन्ग्रेस ने की बैलगाड़ियों की सवारी

ईंधन की बढ़ी कीमतों का विरोध करने और भाजपा को निशाना बनाने के लिए हाल ही में कर्नाटक कॉन्ग्रेस ईधन की कीमतों का उपयोग एक टूल के तौर पर कर रही है। पिछले महीने 13 अगस्त 2021 को ईंधन, एलपीजी सिलेंडर और दैनिक इस्तेमाल की वस्तुओं की बढ़ी कीमतों के विरोध में कॉन्ग्रेस के कई नेता बैलगाड़ियों पर सवार होकर कर्नाटक विधान सभा में गए थे। कर्नाटक प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार और विपक्ष के नेता सिद्धारमैया समेत कई अन्य प्रमुख नेता इस विरोध में शामिल हुए और बैलगाड़ियों में राज्य विधानसभा की यात्रा की।

हालाँकि, जब वे वहाँ जा रहे थे तो कॉन्ग्रेस के दो विधायक वेंकटरमणप्पा और बीके संगमेश रैली के दौरान हुई हाथापाई में बैलगाड़ियों से गिर गए थे। उन्होंने यह प्रदर्शन राज्य में बढ़ती महंगाई को रोकने और सत्तारूढ़ सरकार की विफलता को उजागर करने के लिए किया था।

‘प्रेमिका गाँधी, मायावती या मुख्यमंत्री’: यूपी में प्रियंका का इंतजार कर रहे कॉन्ग्रेस समर्थकों को नहीं पता वह कौन हैं? वीडियो वायरल

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक है। इस बीच जुलाई का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी का स्वागत करने के लिए एकत्र हुए कॉन्ग्रेसी प्रशंसकों को पता नहीं है कि वह कौन हैं या उनका नाम क्या है।

वीडियो मूल रूप से 16 जुलाई, 2021 को पोस्ट किया गया था, जिसमें ग्लोबल भारत न्यूज के एक न्यूज एंकर को नरेंद्र गौतम के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस समर्थकों के साथ बातचीत करते देखा जा सकता है। नरेंद्र गौतम चुनाव की तैयारी को लेकर कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा के दो दिवसीय उत्तर प्रदेश के दौरा के दौरान स्वागत के लिए इकट्ठा हुए थे। 

वीडियो में, जब पत्रकार जैनुद्दीन नाम के एक व्यक्ति से पूछता है कि वह किसका इंतजार कर रहा है, तो पहले कॉन्ग्रेस समर्थक मायावती कहता है। इस पर चौंक कर जब ग्लोबल न्यूज एंकर दोहराता है कि जैनुद्दीन मायावती की प्रतीक्षा कर रहा है। तभी पास में खड़े लोगों के कहने पर जैनुद्दीन ने अपनी गलती सुधारी और जवाब दिया “प्रियंका गाँधी।”

न्यूज एंकर आगे जैनुद्दीन से पूछते हैं, ”प्रियंका गाँधी कौन हैं?” इस पर उस व्यक्ति ने जवाब दिया कि वह राज्य की मुख्यमंत्री हैं। पत्रकार भीड़ के बीच खड़े कई कॉन्ग्रेस समर्थकों से यही सवाल करता है। ऐसा लगता है कि उनमें से किसी को भी पता नहीं है कि वे किसका इंतजार कर रहे हैं या वास्तव में प्रियंका गाँधी कौन हैं।

पत्रकार जब दूसरे समर्थक के पास पहुँचते हैं तो वह उत्साह के साथ कहता है कि वह सोनिया गाँधी का इंतजार कर रहा है, जबकि दूसरा मजाकिया अंदाज में कहता है कि वह मेनका गाँधी का इंतजार कर रहा है। इस पर जब एंकर ने चुटकी ली कि राम सुमिरन नाम के समर्थक मेनका गाँधी की प्रतीक्षा कर रहे हैं, तो कॉन्ग्रेस समर्थक ने अपनी गलती सुधारते हुए पूरे विश्वास के साथ कहा कि वह ‘प्रेमिका गाँधी’ का इंतजार कर रहा है।

जुलाई के वीडियो का यह हिस्सा आज फिर से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसे देख नेटिजन्स काफी मजे ले रहे हैं। कुछ लोगों ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने कॉन्ग्रेस नेता के जयकारे के लिए पैसे देकर भीड़ जमा की थी।

दिलचस्प बात यह है कि कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने रविवार (12 सितंबर, 2021) को कहा था कि पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा के नेतृत्व में आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ेगी।

यूपी चुनावों में मुख्यमंत्री के चेहरे के बारे में पूछे जाने पर, खुर्शीद ने कहा था, “हम प्रियंका गाँधी वाड्रा के नेतृत्व में आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। वह हमारी जीत सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। बाद में, वह मुख्यमंत्री के चेहरे की घोषणा कर सकती हैं।”

बता दें कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने वाले हैं। 2007 में राहुल गाँधी के नेतृत्व में और प्रियंका की कुछ विशेष उपस्थितियों के साथ कॉन्ग्रेस महज 7 सीटें जीतने में सफल रही थी।

मोहम्मद लाडला ने सन्नी सिन्हा की चाकू मार कर की हत्या: बिहार पुलिस ने समझा-बुझा कर भेज दिया था घर, भड़का आक्रोश

बिहार के पूर्णिया जिले में तीन दिनों के भीतर चार हत्याओं ने व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया है। 13 सितंबर को एक निजी बैंक कर्मचारी सन्नी सिन्हा की उनके पड़ोसी द्वारा की गई जघन्य हत्या ने राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़ा कर दिया है।

सिन्हा के परिवार द्वारा उनके घर पर आयोजित एक समारोह के बीच, नशे में धुत मोहम्मद लाडला अपने दोस्त मोहम्मद लाल के साथ बिन बुलाए आ धमका। इसके बाद दोनों ने सिगरेट पीना शुरू कर दिया। जब घरवालों ने उन्हें मना किया और बाहर निकलने के लिए कहा गया तो वह दबंगई और हंगामा करने लगे।

घर से बाहर निकाले जाने से बौखलाया मोहम्मद लाडला अपने गिरोह को इकट्ठा करके 20 से 25 लोगों के साथ लौट आया। सन्नी सिन्हा जब हंगामा कर रहे लाडला से बात करने गए तो उनके सीने में बेरहमी से वार कर दिया गया। सिन्हा की हत्या के तुरंत बाद लाडला और उसका ग्रुप मौके से फरार हो गया।

सिन्हा के परिवार ने पुलिस को दी थी चेतावनी

कथित तौर पर, सिन्हा की हत्या से पहले, स्थानीय लोगों ने लाडला और उसके गिरोह द्वारा किए गए उपद्रव के बारे में स्थानीय पुलिस को अलर्ट कर दिया था। हालाँकि, नशे की हालत में पाए गए लाडला को गिरफ्तार करने के बजाय, पुलिस ने उसे चेतावनी देकर जाने दिया।

घटना से आक्रोशित स्थानीय लोगों ने कहा कि सिन्हा की हत्या इसलिए की गई क्योंकि पुलिस ने समय पर और उचित कार्रवाई नहीं की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस संरक्षण में जिले में व्यापक रूप से ड्रग्स की बिक्री की जा रही है। स्थानीय लोगों और विश्व हिंदू परिषद के कई सदस्यों ने पेट्रोलिंग कर रही पुलिस टीमों और यातायात पुलिस पर जबरन वसूली का आरोप लगाया। 

उन्होंने कहा कि शहर में खुलेआम पुलिस के संरक्षण में नशे का कारोबार किया जा रहा है। पुलिस अवैध उगाही करने में लगी रहती है। टाईगर मोबाइल, गश्ती दल, एवं ट्रैफिक पुलिस नाजायज धन उगाही में लगी रहती है। इस तरह की घटना पर रोक नहीं लगी तो बड़े जन आन्दोलन के लिए विवश होना पड़ेगा।

मोहम्मद लाडला का फेसबुक प्रोफाइल

मुख्य आरोपित मोहम्मद लाडला की फेसबुक प्रोफाइल ने सोशल मीडिया पर आक्रोश पैदा कर दिया है। स्वराज्य की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने लाडला का फेसबुक प्रोफाइल शेयर किया है। इस पर लिखा है, “सुन लो आरएसएस बजरंग दल बीजेपी वालों हम दल नहीं खौफ बनाते हैं, इसलिए मियाँ भाई कहलाते हैं।” 

इस बीच, जदयू सांसद संतोष कुशवाहा ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि सिन्हा के मामले में तेजी से सुनवाई होगी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने एसपी दयाशंकर से बात की है, जो पहले से ही मामले की जाँच कर रहे हैं।

वहीं एक अन्य मामले में मधुबनी में कथित तौर पर नशे में धुत एक लड़के ने अपने पिता को पीट-पीट कर मार डाला। पुलिस और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

1500 पन्नों की चार्जशीट में 47 गवाह: शिल्पा शेट्टी ने कहा- ‘अपने काम में बिजी थी, नहीं जानती थी राज कुंद्रा क्या कर रहे थे’

बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी परिवार की मुश्किलों को कम करने के लिए माँ वैष्णो देवी के दरबार में पहुँचीं, जहाँ उन्होंने माता से आशीष लिया। माता के दर्शन के बाद उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि वह दर्शन कर बेहद खुश हैं। उनके पति राज कुंद्रा पोर्नोग्राफी वीडियो बनाने और ऐप के जरिए उनको पेश करने के मामले में जेल में बंद हैं। इस मामले में मुंबई पुलिस ने राज कुंद्रा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। 1500 पन्नों की चार्जशीट में 47 गवाहों के नाम दिए गए हैं। इस चार्जशीट में शिल्पा शेट्टी का पूरा बयान शामिल किया गया है, जो उन्होंने पुलिस को दिया है। मुंबई पुलिस ने शिल्पा शेट्टी के घर पहुँच कर उनसे पूछताछ की थी।

अभिनेत्री ने कथित तौर पर मुंबई पुलिस को बताया है कि वह अपने काम में बहुत व्यस्त थी, जिसकी वजह से उन्हें राज कुंद्रा के काम के बारे में पता नहीं है। मुंबई पुलिस को दिए अपने बयान में शिल्पा ने कहा, “कुंद्रा ने 2015 में वियान इंडस्ट्रीज लिमिटेड की शुरुआत की और मैं 2020 तक डायरेक्टर के पद पर थी और फिर व्यक्तिगत करणो से पद से इस्तीफ़ा दे दिया। मुझे Hotshots या Bollyfame ऐप्स के बारे में जानकारी नहीं है। मैं अपने काम में बहुत व्यस्त थी और इसलिए मुझे इस बात की जानकारी नहीं थी कि कुंद्रा क्या कर रहे थे।”

पुलिस ने चार्जशीट में दावा किया है कि कुंद्रा ने पोर्न रैकेट के दिन-प्रतिदिन के संचालन के लिए वियान इंडस्ट्रीज के मुंबई ऑफिस का इस्तेमाल किया। मुंबई पुलिस का कहना है कि Hotshots या Bollyfame कुछ ऐसे एप्लिकेशन थे, जिनके जरिए आरोपित ने अश्लील कंटेंट ऑनलाइन अपलोड की थी। शिल्पा शेट्टी के अलावा, कुंद्रा और थोर्प के खिलाफ मामले को साबित करने के लिए 47 गवाहों के बयान हैं।

राज कुंद्रा मामले में शिल्पा शेट्टी का पुलिस को दिया पूरा बयान

पोर्न मामले में गिरफ़्तार राज कुंद्रा के घर पर 23 जुलाई को छापेमारी के दौरान मुंबई क्राइम ब्रांच की प्रॉपर्टी सेल ने उनका बयान दर्ज किया था। इस दौरान शिल्पा शेट्टी ने कहा था, “मैं किनारा बंगले पर पिछले 10 साल से रहती हूँ, तीन साल पहले प्रदीप बक्शी, परिवार के एक सदस्य की शादी में आए थे, तभी मेरी मुलाक़ात उनसे हुई थी।”

शिल्पा ने अपने करियर के बारे में बात करते हुए अपने बयान में कहा, “मेरा जन्म मुंबई में हुआ और चेंबुर के सेंट ऐन्थॉनी गर्ल्स हाईस्कूल में 10 वीं तक की पढ़ाई हुई है, 12 वीं तक की पढ़ाई माटुंगा के पोद्दार कोलेज में हुई है। 12 वीं में पढ़ते समय मुझे ‘बाज़ीगर’ फ़िल्म में बतौर हीरोइन काम मिला और इसके बाद मैंने पढ़ाई छोड़ दी, अब तक मैंने 360 फ़िल्मों में काम किया है।”

शिल्पा ने आगे राज कुंद्रा से अपनी पहली मुलाकात के बारे में कहा, “साल 2007 में मैं बिग बॉस का शो करने के लिए यूके गई थी, जहाँ पर म्यूजिक शो डायरेक्टर फ़रत हुसैन (कुंद्रा और मेरा कॉमन फ़्रेंड) के ज़रिए राज कुंद्रा से मुलाक़ात हुई। पहचान दोस्ती और दोस्ती प्यार में बदल गई और फिर 22 नवंबर 2009 में हमने शादी कर ली। राज कुंद्रा के एनआरआई होने की वजह से शादी से पहले ही मैंने उन्हें कहा था कि शादी के बाद मुझे भारत में रहना है इसके बाद हम शादी के बाद भारत में रहने के लिए आ गए।”

शिल्पा ने बयान में आगे कहा, “साल 2009 में राज कुंद्रा ने आईपीएल में राजस्थान रॉयल नाम की टीम में 75 करोड़ रुपए निवेश किए। इस कंपनी में 4 विदेशी पार्टनर हैं जिसने राज कुंद्रा के 13 प्रतिशत भागीदारी है। आईपीएल में कुंद्रा पर बेटिंग के आरोप लगने के बाद उन्हें राजस्थान रॉयल की भागीदारी से निकाल दिया गया।”

उन्होंने आगे कहा, “साल 2012 में कूंद्रा ने सतयुग गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी शुरू की इसके बाद बेस्ट टीवी प्राइवेट सेलिब्रिटी होम शोपिंग नाम की कंपनी शुरू की। साल 2015 में राज कुंद्रा ने विहान इंडस्ट्रिस लिमिटेड नाम कंपनी शुरू की। इस कंपनी के माध्यम से एनिमेशन, कार्टून और एप्लिकेशन बनाने का काम किया जाता है। इस कम्पनी में मेरा 24.50 प्रतिशत शेयर है, इस कंपनी में 7 हज़ार शेयर होल्डर हैं।”

शिल्पा के अनुसार, विहान में राज कुंद्रा डायरेक्टर हैं और उमेश कामत एक्ज़ीक्यूटिव असिस्टेंट के पद पर काम करता है। इस कंपनी में वह अप्रैल 2015 से जुलाई 2020 तक डायरेक्टर के पद पर थी और फिर व्यक्तिगत करणों से पद से इस्तीफ़ा दे दिया। दिसंबर 2020 में व्यापार बढ़ाने के लिए जेएल स्ट्रीम नाम की कम्पनी शुरू की। जेएल स्ट्रीमिंग के माध्यम से सोशल स्ट्रीमिंग एप्लिकेशन चलाया जाता है। इसके द्वारा शॉर्ट वीडियो बनाए जाते हैं इसके अलावा चैटिंग एप्लिकेशन और स्ट्रीमिंग की जाती है। इस कंपनी में राज कुंद्रा बतौर सीईओ, तो रायन थॉर्प चीफ़ प्रोडक्शन ऑफिसर और करीब 40 लोग काम करते हैं इस कंपनी का सब कुछ राज कुंद्रा देखते हैं।

राज कुंद्रा के कारोबार के बारे में बात करते हुए शिल्पा शेट्टी कहती हैं कि साल 2019 में सौरभ कुशवाहा के आर्म्स प्राइम में भागीदार बने। आर्म्स प्राइम में पूनम पांडे और दूसरे कलाकार खुद की मर्ज़ी से अंगप्रदर्शन करते हैं इस बारे में राज कुंद्रा से पूछने पर उन्होंने बताया कि यह ओटीटी प्लेटफॉर्म अच्छा चल रहा है और अच्छा फ़ायदा हो रहा है। इसके बाद कुंद्रा ने उन्हें बताया कि सौरभ कुशवाहा से उनका कुछ विवाद हुआ जिसके बाद वो उस कंपनी से बाहर निकल गए।

शिल्पा ने आगे कहा, “मैंने साल 2018 में शिल्पा योग प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी शुरू की थी। इस कम्पनी के व्यवहार के बारे में कंपनी की डायरेक्टर अनिशी शर्मा को पता है। इसके बाद साल 2018 में एसएसके नाम की कंपनी मनीष कुमार की पार्टनरशिप में शुरू की। इस कम्पनी में 70 प्रतिशत की भागीदारी मेरी थी और 30 प्रतिशत की भागीदारी मनीष की थी, पर कुछ समय बाद मनीष की 7 से 10 प्रतिशत की भागीदारी बढ़ा दी।”

अकाउंट डिटेल देते हुए शिल्पा ने कहा, “मेरा राज कुंद्रा के साथ पंजाब नेशनल बैंक में ज्वाइंट अकाउंट है, इस अकाउंट से राज ने होम लोन लिया है इस लोन के पैसे भरने के लिए मैंने कभी कभी अपने दूसरे बैंक अकाउंट से पैसे इस अकाउंट में ट्रांसफ़र किए हैं। मेघा जैसवल को में पिछले 4 साल से पहचानती हूँ। वो वियान में अकाउंटेंट है। मैंने नवंबर 2020 में मेघा के साथ मिलकर ड्रीम कलेक्शन प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी शुरू की और इस कंपनी में मैंने इन्वेस्टमेंट किया था, जिसमें मेघा को डायरेक्टर बनाया था। इसमें संदीप अरोरा और चारु अरोरा भी डायरेक्टर हैं।”

आगे जानकारी देते हुए शिल्पा शेट्टी ने बताया कि उमेश कामत वियान इंडस्ट्री में काम करता है। उसे फ़रवरी 2021 में गिरफ़्तार किया गया, इस बारे में पता चलते ही उन्होंने इस बारे में पूछा तो राज ने बताया की उमेश कामत और गहना वशिष्ठ ने स्वतंत्र रूप से अलग से अश्लील वीडियो बनवाकर उसे बेचा था। Bollyfame ओटीटी के बारे में उन्हें कुछ नहीं पता। इसके अलावा उन्हें उसी दिन पता चला की वियान कंपनी से हॉटशॉट के लिए बनाए गए अश्लील वीडियो प्रदीप बक्शी के केनरीन कम्पनी को भेजे जाते हैं।

इसके साथ ही शिल्पा ने कहा, “मैं मेरे काम में व्यस्त रहने की वजह से राज कुंद्रा क्या काम कर रहे हैं यह कभी पूछा नहीं और वो मुझे अपने काम से जुड़ी बात कभी नहीं बताते इस वजह से इस मामले में मुझे कुछ नहीं पता।”

हर्ष मंदर के घर और दफ्तर में ED का छापा: छापे से 3 घंटे पहले ही बर्लिन के लिए भरी उड़ान, बाल गृह में मिली वित्तीय गड़बड़ी

पूर्व IAS अधिकारी और विवादित मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर के दिल्ली स्थित घर औऱ दफ्तरों पर गुरुवार (16 सितंबर 2021) को प्रवर्तन निदेशालय ने छापेमारी की। मंदर दिल्ली में दो चिल्ड्रेन होम्स चलाते हैं, जिनमें जाँच एजेंसियों को पैसों के मामले में गड़बड़ी किए जाने की जानकारी मिली थी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। हालाँकि, जाँच एजेंसी के छापे से करीब तीन घंटे पहले ही वह पत्नी के साथ जर्मनी के लिए रवाना हो गए।

मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर बर्लिन स्थित रॉबर्ट बोश्च एकेडमी में 6 महीने की फेलोशिप प्रोग्राम के लिए गए हैं। उन्होने अपनी पत्नी के साथ दिल्ली से सुबह करीब 3 बजे की फ्लाइट बर्लिन के लिए ली। वहीं उसके तीन घंटे के बाद वसंतकुंज स्थित उनके घर औऱ सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज के उनके ऑफिस पर रेड की गई। इसके अलावा जाँच एजेंसी ने उनके एनजीओ द्वारा चलाए जा रहे दोनों चिल्ड्रेन होम्स में भी रेड की गई।

क्या है मामला

दरअसल, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के निर्देश पर दिल्ली पुलिस ने हर्ष मंदर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसमें कहा गया था कि दिल्ली के मेहरौली स्थित हर्ष मंदर के दो चिल्ड्रेन होम्स अमन घर (लड़कों के लिए) और खुशी रेनबो (लड़कियों के लिए) में पैसों के लेनदेन को लेकर अनियमितता पाई गई थी।

बाल गृह के लड़कों को सीएए के विरोध में भेजा था

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मंगलवार (27 जुलाई) को दिल्ली हाईकोर्ट को बताया था कि उन्होंने विभिन्न विसंगतियों और उल्लंघनों को पाए जाने के बाद ही हर्ष मंदर से जुड़े दो बाल गृहों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी। एनसीपीसीआर के मुताबिक, बच्चों ने बताया था कि बड़े लड़कों को सीएए (CAA) के विरोध में प्रदर्शन स्थल पर भेजा गया था। वहीं, एक बच्चे ने तो यहाँ तक कह दिया कि पीएम मोदी सिर्फ हिंदुओं की सुनते हैं और पाकिस्तान से लड़ते हैं।

आयोग ने कहा कि लड़कियों में से एक ने आयोग को बताया कि वह 4-5 लड़कियों के साथ सीएए के विरोध में जंतर-मंतर गई थी। उन्होंने यह भी पाया कि बड़े लड़कों को भी विरोध स्थलों पर भेजा गया था। बच्चों को विरोध के लिए भेजना किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 83(2) का उल्लंघन है। बता दें कि हर्ष मंदर सोनिया गाँधी के करीबी रहे हैं। वह प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के कट्टर विरोधी हैं।

विराट कोहली का बड़ा ऐलान: T20 वर्ल्ड कप 2021 के बाद छोड़ेंगे भारतीय टी20 टीम की कप्तानी

भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने भारतीय टी20 टीम की कप्तानी छोड़ने का बड़ा ऐलान किया है। वह आगामी टी20 वर्ल्ड कप के बाद इस फॉर्मेट में टीम इंडिया के कप्तान नहीं रहेंगे। उन्होंने गुरुवार (16 सितम्बर, 2021) शाम को अपने टि्वटर हैंडल पर इस फैसले की घोषणा की। लेकिन वो बतौर बल्लेबाज टीम से जुड़े रहेंगे।

इसके साथ ही विराट कोहली के टी20 टीम की कप्तानी छोड़ने के बाद ये सवाल भी उठ रहा है कि आखिर उनके बाद टीम की कमान कौन सँभालेगा? फिलहाल इस रेस में रोहित शर्मा सबसे आगे बताए जा रहे हैं हैं जिनका बतौर टी20 कप्तान रिकॉर्ड काफी अच्छा है।

विराट कोहली ने ट्वीट में लिखा, “इस फैसले तक मैं काफी समय लेकर पहुँचा हूँ। मैंने अपने करीबी लोगों से काफी चर्चा की। रवि शास्त्री, रोहित शर्मा जो कि टीम के अहम सदस्य हैं उनसे बातचीत के बाद ही मैंने ये फैसला लिया। मैंने फैसला किया है कि टी20 वर्ल्ड कप के बाद मैं टी20 टीम की कप्तानी छोड़ दूँगा। बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली और सचिव जय शाह, सभी सेलेक्टर्स से भी मैंने इसपर बातचीत की है। लेकिन मैं भारतीय टीम की सेवा जारी रखूँगा।”

बता दें कि भारतीय टीम आगामी टी20 वर्ल्ड कप में 24 अक्टूबर को अपने अभियान की शुरुआत करेगी। भारत का पहला मुकाबला चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ होगा।

गौरतलब है कि विराट कोहली का बतौर टी20 कप्तान रिकॉर्ड शानदार रहा है। विराट कोहली की कप्तानी में भारत ने 65 फीसदी से ज्यादा टी20 मैच जीते हैं जो कि धोनी से 6 फीसदी ज्यादा है। विराट कोहली ने 45 में से 27 टी20 मैचों में जीत दिलाई, जबकि 14 में हार मिली। 2 मैच टाई रहे और 2 मैचों का कोई नतीजा नहीं निकला। विराट कोहली का जीत प्रतिशत 65.11 रहा है। वहीं एमएस धोनी ने 72 टी20 मैचों में भारत की कप्तानी की, जिसमें से 41 में जीत मिली और 28 में हार। एक मैच टाई रहा और 2 मैच बेनतीजा रहे। उनका जीत प्रतिशत 59.28 है। 

‘ईसाई लड़कियों पर काला जादू करते हैं मौलवी’: केरल के चर्च ने लव जिहाद से बचाने को जारी की हैंडबुक, 9 स्टेप का जिक्र

केरल में ईसाइयों को लव जिहाद से बचाने के लिए चर्च संगठन और बिशप बार-बार अपने समुदाय को इसके खतरे को लेकर चेताते रहे हैं। इस मामले में कई पादरियों ने बात करते हुए यह समझाने की कोशिश की है कि कैसे ईसाई लड़कियों का पहले ब्रेनवॉश कर उन्हें मुस्लिम लड़कों के जरिए फँसाया जाता है। इसके बाद यह सिलसिला आईएसआईएस आतंकवादी के तौर पर जाकर समाप्त होता है।

सिरो मालाबार चर्च के पाला सूबा के बिशप मार जोसेफ कल्लारंगट की हालिया टिप्पणियों ने इस बात को उजागर किया है कि केरल के ईसाई युवा न केवल ‘लव जिहाद’ बल्कि ‘नारकोटिक्स जिहाद’ के भी शिकार होते जा रहे हैं। इस मामले में चिंताओं को बढ़ाते हुए थमारसेरी सूबा के कैटेसिस विभाग ने राज्य में इस्लामी संगठनों द्वारा किए जा रहे ‘लव जिहाद’ के खिलाफ समुदाय को चेतावनी देते हुए एक पुस्तिका जारी की है।

कथित तौर पर चर्च की हैंडबुक में कक्षा X, XI और XII में धार्मिक अध्ययन की कक्षाओं की छात्राओं को सचेत करने और इसके बारे में शिक्षित करने के लिए ‘लव जिहाद’ के तौर-तरीकों को लेकर विस्तृत जानकारी दी गई है। इसमें बताया गया है कि लव जिहाद को नौ चरणों में लागू किया जाता है और इस पुस्तिका में इसके प्रत्येक फेज के बारे में जानकारी दी गई है।

इसके तहत लड़कियों को व्यक्तियों के साथ शारीरिक संपर्क या आकस्मिक दोस्ती के खिलाफ चेतावनी दी गई है। यहाँ तक ​​​​कि व्यक्तिगत वस्तुओं, उपहारों आदि जैसी साधारण चीजों का भी इस्तेमाल उन्हें ‘फँसाने’ के लिए किया जा सकता है।

इस्लामिक मौलवी करते हैं ‘काला जादू’

चर्च की हैंडबुक में बताया गया है कि अक्सर मौलवी ईसाई लड़कियों को बहकाने के लिए कथित तौर पर ‘काले जादू’ का इस्तेमाल करते हैं। इसमें बताया गया है कि काला जादू लड़कियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली चीजों जैसे कि पेन, रूमाल या उसके बालों के स्ट्रैंड का उपयोग करके किया जाता है।

एक प्रेस रिलीज में थमारसेरी सूबा के धार्मिक शिक्षा निदेशक फादर जॉन पल्लीक्कवयाल ने दावा किया है कि सूबा की 160 महिलाओं को ‘लव जिहाद’ में फँसाया गया था। इसमें आगे कहा गया है कि शिकायत मिलने पर की गई जाँच में यह सामने आया है कि कम से कम 100 से अधिक महिलाओं और लड़कियों को अलग-अलग प्रकार के ‘यौन आतंकवाद’ के जरिए फँसाया गया था।

इस्लामिक संगठन ने की किताबें जब्त करने की माँग

चर्च की हैंडबुक पर आपत्ति जताते हुए NAM अब्दुल खादर की अध्यक्षता वाली समस्त अधिकार संरक्षण परिषद ने पुस्तक को तत्काल जब्त करने की माँग की।

उन्होंने किताब में की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए अजीब बयान दिया कि ‘इस्लाम में दूसरे समुदायों की महिलाओं के यौन शोषण को मंजूरी दी गई है, क्योंकि ऐसा करने से जन्नत नसीब होता है।’ मुस्लिम सुन्नी संगठन ने एक बयान में इसे विभिन्न समुदायों के बीच कलह पैदा करने की जानबूझकर की जा रही कोशिश करार दिया है।

सूबा ने माँगी माफी

चर्च के लव जिहाद वाले हैंडबुक पर मुस्लिमों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध के बाद थमारसेरी के सूबा ने माफी माँगी है। उन्होंने कहा है कि किताब को प्रकाशित करने का इरादा केवल युवाओं को ईसाई धर्म में बनाए रखना और महिलाओं की रक्षा करना था। फादर जॉन पल्लिकवयाल ने कहा, “अगर किसी को कोई गलतफहमी हुई है या इससे वो आहत हुए हैं तो हम खेद व्यक्त करते हैं।”

जेसुइट प्रीस्ट ने इसे ‘संघ की साजिश’ बताया

चर्च और ईसाई समुदाय की महिलाओं और युवा लड़कियों के यौन शोषण के कई मामलों के बावजूद जेसुइट पादरी-कार्यकर्ता सेड्रिक प्रकाश ने एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें उसने बिशपों को ‘संघ परिवार के जाल’ में फँसने से बचने को लेकर चेताया है। पादरी औऱ कार्यकर्ता ने अपने पत्र में जोर देकर कहा कि इस तरह की कहानियाँ अनिवार्य राष्ट्रीय मुद्दों को दबाने का एक तरीका है।

ईसाइयों के सामने गंभीर खतरों का जिक्र करते हुए उन्होंने पत्र में कहा, “हाल के कुछ मामलों से स्पष्ट है कि किसी के लिए भी उस संघ परिवार के दुष्प्रचार का हिस्सा बन जाना कितना आसान है, जो किसी अन्य धर्म के प्रचार और उनकी मान्यताओं के अधिकार को नकारता है।”

बिशप और सरकार को बदनाम करने की कोशिश करते हुए फादर प्रकाश ने आरोप लगाया कि चर्च वित्तीय और यौन शोषण सहित विभिन्न चर्च घोटालों को सुलझाने में असमर्थ है।

सिरो-मालाबार चर्च ने पहले भी सर्कुलर जारी किए थे

सिरो-मालाबार चर्च के पाला सूबा के बिशप मार जोसेफ कल्लारंगट ने हाल ही में कहा था कि केरल के युवा ईसाई लड़कों और लड़कियों को न केवल ‘लव जिहाद’ के लिए, बल्कि ‘नारकोटिक्स जिहाद’ के लिए भी निशाना बनाया जा रहा है। इससे पहले इसी साल अगस्त में चर्च ने ईसाई परिवारों को अपने समुदाय की युवा लड़कियों को फँसाने की कोशिश कर रहे विभिन्न ‘समूहों’ के खिलाफ चेतावनी जारी की थी।

इसी तरह से केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल (KCBC) ने भी इस मुद्दे पर आँखें मूँद कर बैठने और ‘लापता महिलाओं और बच्चों’ के मामले में सही तरीके से जाँच नहीं करने को लेकर राज्य और केंद्र सरकार को खरी-खोटी सुनाई थी। सिरो मालाबार चर्च के मीडिया आयोग ने पिछले वर्ष एक आधिकारिक प्रेस रिलीज जारी कर कहा था कि केरल से इस्लामिक स्टेट में शामिल होने वाली 21 महिलाओं में से आधी ईसाई समुदाय से हैं।

हालाँकि, विभिन्न प्रकार के ‘जिहादों’ के बारे में जागरूकता बढ़ाने की कोशिश करने के कारण केरल में कई सूबा चर्चों के निरंतर प्रयासों को तीखे विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है।