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‘वेलकम 2 में अपनी गर्लफ्रेंड को डाल दिया’: मल्लिका शेरावत से कभी हीरो कहते थे- ऑनस्क्रीन करती हो तो मेरे साथ क्यों नहीं?

मल्लिका शेरावत इन दिनों अपनी वेब सीरिज नकाब को लेकर चर्चा में हैं। हाल में उन्होंने कई इंटरव्यू दिए हैं जिनमें बॉलीवुड में कॉस्टिंग काउच से लेकर फिल्म इंडस्ट्री में खुद की एंट्री तक पर बात की है। पिंकविला को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा है कि वेलकम के सीक्वल में वे इसलिए नजर नहीं आईं क्योंकि, डायरेक्टर ने अपनी गर्लफ्रेंड को फिल्म में ले लिया।

कुछ साल पहले पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने हाथ से प्रोजेक्ट निकलने के लिए अभिनेताओं को भी जिम्मेदार ठहराया था। तब उन्होंने कहा था, “मुझे फिल्मों से इसलिए बाहर फेंक दिया गया क्योंकि हीरो कहते थे तुम मेरे साथ इंटिमेट क्यों नहीं हो सकती? तुम ऑनस्क्रीन यह सब कर सकती हो तो फिर मेरे साथ अकेले में क्यों नहीं? इस चक्कर में मैंने बहुत प्रोजेक्ट खोए।”

पिंकविला से बातचीत में मल्लिका ने कहा है, “वेलकम का सीक्वल बनेगा तो डायरेक्टर अपनी गर्लफ्रेंड को ही डालेगा उसमें। वेलकम 2 बना तो उसमें अपनी गर्लफ्रेंड को डाल दिया बताओ, अब मैं क्या करूँ?” उन्होंने कहा कि वे किसी का नाम नहीं लेना चाहतीं पर सच्चाई यही है। जब सीक्वल बनाया जाता है तो वे अपनी गर्लफ्रेंड, हीरो के गर्लफ्रेंड को फिल्म में डाल देते हैं। ऐसे में वे क्या कर सकती हैं। मल्लिका ने कहा, “बॉलीवुड में मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है। मैं कभी किसी हीरो, डायरेक्टर या प्रोड्यूसर के साथ रिश्ते में नहीं रही। यदि कोई मुझे अपने प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाना चाहेगा तो मुझे उससे जुड़कर खुशी होगी। लेकिन यदि कोई डायरेक्टर या प्रोड्यूसर या हीरो यदि अपनी गर्लफ्रेंड को लेना चाहता है तो ये उनकी च्वाइस है।”

वहीं ‘बॉलीवुड बबल’ को दिए इंटरव्यू में मल्लिका ने कास्टिंग काउच के मुद्दे पर कहा, “मैंने भी फिल्म इंडस्ट्री में इस तरह की चीजों का सामना किया है। लेकिन मेरे साथ ये उतना अधिक नहीं हो पाया। मुझे लगता है कि वो लोग मुझे किसी भी तरह का प्रपोजल देने से पहले काफी नर्वस हो जाते थे। उन्हें लगता था कि ये लड़की किसी से भी डरती नहीं है, बहुत बोल्ड है तो किसी से भी कुछ भी बोल सकती है। वास्तव में मैं बहुत ही बोल्ड और बिंदास टाइप की हूँ। जाट हूँ न इसलिए विद्रोहीपन मेरे अंदर पहले से है।”

मल्लिका ने बताया कि सभी लोगों की नजर में उनकी इमेज एक बोल्ड और बिंदास लड़की की थी। इसी चीज ने उन्हें कास्टिंग काउच से बचाने में मदद की। एक्ट्रेस ने कहा, “मैं न तो किसी डायरेक्टर या प्रोड्यूसर के कमरे में रात के समय मिलने गई और न ही बॉलीवुड की पार्टियों में गई। मैंने खुद को इन सभी चीजों से हमेशा दूर रखने की कोशिश की। मैं सोचती थी कि जो भी मेरी किस्मत में होगा वो मुझे मिलेगा ही।”

उन्होंने आगे बताया कि कई बार लोगों ने उन्हें कपड़े के चलते जज करने की कोशिश की। अगर आप शॉर्ट स्कर्ट पहनती हैं और ऑन स्क्रीन चुम्बन लेती हैं तो आपको चरित्रहीन माना जाता है। ऐसा कई बार मेरे साथ हुआ। जब स्टार्स के साथ वास्तविक जीवन में इंटीमेट नहीं होने के कारण मुझे कई प्रोजेक्ट्स खोने पड़े थे।

एक्ट्रेस बनने के लिए घर से भागना पड़ा

मूलरूप से हरियाणा की रहने वाली एक्ट्रेस ने बताया कि वह शुरू से एक्टिंग में अपना कैरियर बनाना चाहती थीं। लेकिन उनके माता-पिता इसको लेकर राजी नहीं थे। स्वामी विवेकानंद के बारे में पढ़ने के बाद उनमें हिम्मत आई। मल्लिका ने कहा, “मुझे लगा कि मैं तो घर से भागकर एक्ट्रेस बन जाऊँगी औऱ मैं भाग गई। जाट थी इसलिए जिद्दीपना मेरे अंदर था। हरियाणा में परिवार के लोग अपने बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर और टीचर बनाना ज्यादा पसंद करते हैं, लेकिन एक्टर नहीं। मैं मानती हूँ कि व्यक्ति को अपने सपने पूरे करने चाहिए, क्योंकि अगर आप खुश रहेंगे तो आप सभी को खुश रख पाएँगे। मुबई आने के बाद मेरे परिवार को लगता था उनका नाम न खराब हो इसलिए मैंने अपना नाम हिमा लांबा से बदलकर अपनी माँ के नाम शेरावत से ‘मल्लिका शेरावत’ रख लिया।”

दलित के साथ थी मुस्लिम महिला, 5 मुस्लिमों ने अगवा कर लिया: तेलंगाना में ‘शरिया पुलिस’ की गुंडई के नेटिजन्स ने दिखाए कई Video

तेलंगाना के निजामाबाद जिले से पाँच मुस्लिम पुरुषों द्वारा विवेक के रूप में पहचाने जाने वाले एक दलित हिंदू व्यक्ति के साथ मारपीट और अपहरण का मामला सामने आया है। यहाँ ध्यान देने योग्य है कि निजामाबाद राज्य में मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। रिपोर्टों के अनुसार, घटना 8 सितंबर को हुई और 11 सितंबर को पुलिस के संज्ञान में आई। पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है और तथाकथित ‘शरिया पुलिस’ के चार लोगों को गिरफ्तार किया है। लेकिन दो मुख्य आरोपित अभी भी फरार हैं।

8 सितंबर को, एक हिंदू व्यक्ति अपने वेतन के लिए आईआईआईटी बसरा में जमा करने के लिए कुछ आवश्यक दस्तावेज लेने के लिए बाइक पर एक मुस्लिम महिला के साथ निजामाबाद शहर के निजामाबाद सरकारी अस्पताल जा रहा था। ये दोनों कथित तौर पर निजामाबाद जिले में स्थित आईआईआईटी बसारा के कर्मचारी हैं, जिसे राजीव गाँधी यूनिवर्सिटी ऑफ नॉलेज टेक्नोलॉजीज के नाम से भी जाना जाता है।

एक कार में यात्रा कर रहे पाँच लोगों के एक समूह ने उन्हें सड़क पर रोक दिया। घटना के वीडियो के अनुसार, वे हिंदू व्यक्ति के साथ बेरहमी से मारपीट करते देखे गए। मुस्लिम पुरुषों ने महिला को एक हिंदू पुरुष के साथ घूमने के लिए भी फटकार लगाई, यही नहीं उस पर मुस्लिम समुदाय का नाम खराब करने का आरोप लगाया। वीडियो में एक मुस्लिम व्यक्ति को यह कहते हुए सुना गया, “कौम का नाम बदनाम हो रहा है तुम्हारी वजह से” जबकि मुस्लिम महिला उन्हें बताती है कि उसके और हिंदू पुरुष के बीच कुछ भी नहीं चल रहा है, भीड़ ने उसे थप्पड़ मार दिया। मुस्लिम आदमी यह कहते हुए हिंदू आदमी पर हमला करता रहा, “ये साज़िश है मुसलमानो के खिलाफ?

बाद में उन्हें कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया और पाँचो मुस्लिम पुरुषों द्वारा पास के इलाके में ले जाया गया और कुछ घंटों तक बंधक बनाकर रखा गया।

मुस्लिम महिला के भाई के मौके पर पहुँचने के बाद ही हिंदू पुरुष को छोड़ा गया और समझाया कि उसने उसे दस्तावेज लेने के लिए उस आदमी के साथ भेजा था। आरोपित तेलंगाना के बैंसा कस्बे के रहने वाले बताए जा रहे हैं।

11 सितंबर को, मामला पुलिस के संज्ञान में आया, और आरोपित के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 295A, और 365 (अपहरण) के तहत मामला दर्ज किया गया और एससी / एसटी अधिनियम की संबंधित धाराओं को शिकायत में जोड़ा गया। पीड़ित दलित समुदाय से ताल्लुक रखता है। इस मामले में पुलिस ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है जिन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले में दो और आरोपित हैं, जिनकी पुलिस तलाश कर रही है।

टाइम्स नाउ से बात करते हुए, पीड़ित दलित हिन्दू व्यक्ति ने कहा, “उन्होंने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप एसटी समुदाय से हैं। तुम हिंदू हो। आप एक मुस्लिम महिला के साथ कैसे यात्रा कर सकते हैं? उन्होंने मेरे साथ बेरहमी से मारपीट की।” टीआरएस नेता खलीक उर रहमान ने टाइम्स नाउ से बात करते हुए दावा किया कि उनकी पार्टी ऐसी किसी भी घटना और मॉरल पुलिसिंग के खिलाफ है, लेकिन उन्होंने इसे सांप्रदायिक हेट क्राइम कहने से इनकार कर दिया। जब एंकर ने उससे पूछा कि पीड़ित स्पष्ट रूप से कह रहा है कि हिंदू होने के कारण उस पर हमला किया गया, तो रहमान ने कहा, “आप वास्तव में मेरे मुँह में शब्द डालने की कोशिश कर रहे हैं।” उन्होंने कहा, “यह एक अपराध था जिससे मैं सहमत हूँ” लेकिन उन्होंने इसे सांप्रदायिक अपराध मानने से इनकार कर दिया।

आरएसएस ने हमले का किया विरोध

ऑपइंडिया ने इस मामले के बारे में अधिक जानने के लिए स्थानीय आरएसएस अधिकारियों से संपर्क किया। आरएसएस प्रवक्ता ने कहा कि विवेक और मुस्लिम महिला आईआईआईटी बसरा (Basara) के कर्मचारी हैं। उन्हें वेतन के लिए अपने आवेदन के साथ संलग्न करने के लिए कुछ दस्तावेजों की आवश्यकता थी जो उन्हें सरकारी अस्पताल से प्राप्त करने थे। जब वे अस्पताल की ओर जा रहे थे, तो मुस्लिम पुरुषों ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया और उन्हें रुकने के लिए कहा।

उन्होंने आगे कहा कि जब विवेक ने खुद को हिंदू बताया तो उन्होंने उसे पीटना शुरू कर दिया। उसने उनसे अनुरोध किया कि वे उसे पीटें नहीं क्योंकि वे केवल आधिकारिक काम के लिए जा रहे थे। हालाँकि, वे उसे पास के एक इलाके में ले गए जहाँ उसे जान से मारने की धमकी दी गई। बाद में महिला के भाई के हस्तक्षेप करने पर उसे छोड़ दिया गया। स्थानीय हिंदू नेताओं के हस्तक्षेप के बाद ही दो दिन बाद आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। फ़िलहाल दो आरोपित अभी फरार हैं।

ऐसी कई घटनाओं के वीडियो आये सामने

Aranya_parva नाम के एक ट्विटर यूजर ने ट्वीट्स की एक थ्रेड साझा की जिसमें कथित तौर पर ऐसी ही घटनाएँ हुईं जहाँ मुस्लिमों ने हिंदू पुरुषों को मुस्लिम महिलाओं के साथ यात्रा करने से रोक दिया। उनके द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में, कुछ मुस्लिम पुरुषों को एक बाइक को रोकते हुए देखा गया था, जिस पर एक मुस्लिम महिला यात्रा कर रही थी। पुरुषों के समूह ने न केवल उस व्यक्ति को मुस्लिम महिला के साथ यात्रा करने पर धमकी दी, बल्कि उसके हाथ से फोन छीनने की भी कोशिश की।

एक अन्य वीडियो में, एक मुस्लिम महिला के साथ सवार एक हिंदू बाइकर का दूसरी बाइक पर सवार मुस्लिम पुरुषों ने पीछा किया। अंतत: जब हिंदू व्यक्ति ने बाइक रोकी, तो उसे बार-बार अपनी पहचान बताने के लिए कहा गया और महिला से माता-पिता का नंबर माँगा गया।

एक अन्य वीडियो में, तथाकथित ‘शरिया पुलिस’ की टीमें एक मुस्लिम लड़की के माता-पिता से बात करती दिख रही हैं, जो एक हिंदू व्यक्ति को रोकने के बाद उनके साथ यात्रा कर रही थी। उन्होंने अपनी बेटी को अलग-अलग समुदाय के आदमी के साथ भेजने के लिए माता-पिता को फटकार लगाई, और उन्हें सलाह दी कि वे अपनी लड़की को मुस्लिम पुरुषों के साथ ही भेजें। उन्होंने लड़की की माँ से कहा कि लड़की को गैर-मुस्लिम पुरुषों के साथ बाहर जाने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।

शरिया पुलिस के दस्ते गैर-मुस्लिम लड़कों के साथ मुस्लिम लड़की की तस्वीरें और वीडियो भी ले रहे हैं और उन्हें शर्मसार करने के लिए सोशल मीडिया पर अपलोड करने की धमकी दे रहे हैं।

ऑपइंडिया ने ऐसी मॉरल पुलिसिंग के बारे में अधिक जानकारी के लिए पुलिस और स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

‘रिवर्स लव जिहाद’ का भ्रम फैलाने की कोशिश

गौरतलब है कि जहाँ देश भर में ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) के मामले सामने आ रहे हैं, जहाँ मुस्लिम पुरुष हिंदू महिलाओं को झाँसा देने के लिए अपना नाम तक बदल लेते हैं और उनका धर्म परिवर्तन कराने के लिए उनसे निकाह कर लेते हैं, वहीं ऐसे मामलों की तस्वीर को उल्टा दिखाने की कोशिश की जा रही है। कई प्रयास किए गए हैं जहाँ मुस्लिम नेता यह दिखाने की कोशिश करते हैं कि यह हिंदू पुरुष हैं जो मुस्लिम महिलाओं को प्रेम प्रसंग में फँसाने और उनका धर्म परिवर्तन करने की कोशिश कर रहे हैं।

हाल ही में, AIMPLB के सज्जाद नोमानी का एक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने ‘लव जिहाद’ का उल्टा आरोप लगाया और दावा किया कि 5000 से अधिक मुस्लिम लड़कियों ने हिंदू धर्म अपना लिया है। हालाँकि, मुस्लिम लड़की को लुभाने के लिए हिंदू पुरुषों द्वारा मुस्लिम होने का दिखावा करने का कोई सबूत नहीं है। सभी मामलों में, मुस्लिम लड़कियों को पता था कि वे हिंदू के साथ हैं, इसलिए इन घटनाओं की तुलना लव जिहाद से नहीं की जा सकती, जहाँ मुस्लिम पुरुष हिंदू होने का दिखावा करता है।

राहुल गाँधी जी, RSS ने महात्मा गाँधी के सीने पे 3 गोलियाँ तो नहीं मारी, लेकिन कॉन्ग्रेस ने बापू के पीठ पर 3 खंजर जरूर घोंपे हैं

राष्ट्रपति महात्मा गाँधी की हत्या के नाम पर एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को बदनाम करने का प्रयास हुआ है। इस बार भी यह कोशिश कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने की है। उन्होंने पूछा है कि अगर गाँधी जी ने हिंदू धर्म को समझा और अपनी पूरी जिंदगी इस धर्म को समझने में लगा दी तो आरएसएस की विचारधारा ने उस हिंदू की छाती पर तीन गोली क्यों मारी?

गाँधी की हत्या के पीछे आरएसएस विचारधारा को जिम्मेदार बताते हुए राहुल ने कहा कि वे किसी भी विचारधारा से समझौता करने को तैयार हैं, लेकिन आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी से नहीं।

अब सबसे पहला सवाल तो यही है कि क्या राहुल गाँधी सच बोल रहे हैं? क्या सच में आरएसएस की विचारधारा ने गाँधी को मारा? अगर हाँ! तो बचपन से किताबों में ये क्यों पढ़ाया गया कि गाँधी पर गोली नाथूराम गोडसे ने चलाई थी। वे गोडसे जिसने कोर्ट में स्वीकार किया था कि उसने गाँधी पर गोली भारत के विभाजन से आहत हो कर चलाई न कि आरएसएस कि विचारधारा से प्रेरित होकर।

कोर्ट में गोडसे ने कहा था,

“…जब कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेताओं ने गाँधी जी की सहमति से इस देश को काट डाला जिसे हम पूजनीय मानते हैं तो मेरा मस्तिष्क क्रोध से भर गया। मैं साहसपूर्वक कहता हूँ कि गाँधी अपने कर्तव्य में विफल हुए और उन्होंने खुद को पाकिस्तान का पिता होना सिद्ध किया। मैंने ऐसे व्यक्ति पर गोली चलाई जिसकी नीतियों और कार्यों से करोड़ों हिंदुओं को केवल बर्बादी मिली। ऐसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं थी जिससे उस अपराधी को सजा मिलती इसलिए मैंने इस घातक रास्ते को अपनाया।”

गोडसे का यह बयान अपने आप में इस बात को सिद्ध करता है कि आरएसएस की विचारधारा का इससे कहीं कोई लेना-देना नहीं है। हाँ! वह आरएसएस से जुड़ा जरूर था। लेकिन क्या किसी संस्था या समूह से जुड़ना यह सिद्ध कर देता है कि आपकी मंशा उन्हीं से प्रेरित है? यदि जवाब हाँ में है तो किस बुनियाद पर कॉन्ग्रेस अपने आपको को एक धर्म निरपेक्ष पार्टी कहती है जबकि उससे जुड़े तमाम नेता सिर्फ और न सिर्फ हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने में प्रयासरत रहते हैं बल्कि अपने आदर्श व राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के सिद्धांतों का भी मजाक बना देते हैं।

महात्मा गाँधी का नाम ले लेकर संघ को कोसने वाले राहुल गाँधी शायद नहीं जानते कि आरएसएस की विचारधारा ने गाँधी को नहीं मारा (यह बात साबित हुई थी तभी संघ पर से बैन हटा), लेकिन कॉन्ग्रेसियों ने महात्मा गाँधी के विचारों की पीठ पर तीन खंजर जरूर घोपें हैं। अगर याद नहीं तो एक नजर मार लेते हैं:

गौभक्त गाँधी के आदर्शों पर चलने वाली पार्टी की बीफ पार्टी

महात्मा गाँधी ने कभी कहा था, “मैं ऐसा स्वराज नहीं चाहता जहाँ गायें मारी जाएँ।” लेकिन कॉन्ग्रेस के नेता क्या करते हैं? वह खुलेआम बीफ पार्टी करते हैं। खुशी जाहिर करना हो तो बीफ पार्टी होती है। विरोध करना हो तो बीफ पार्टी होती है। सबसे दिलचस्प बात ये है कि ये सब उसी केरल में होता है जिसके एक क्षेत्र वायनाड का प्रतिनिधित्व राहुल गाँधी स्वयं करते हैं।

बहुत पहले की बात न भी करें तो पिछले साल ही केरल के कोझीकोड में कॉन्ग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक पुलिस स्टेशन के सामने खुलेआम बीफ पार्टी का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में बीफ खाया भी जा रहा था और खिलाया भी जा रहा था। क्या कॉन्ग्रेस पार्टी ये बात नहीं जानती कि हिंदुओं के लिए गौ पूजनीय है या उन्हें ये नहीं पता कि गाँधी के विचार गायों को लेकर क्या थे।

जिस कॉन्ग्रेस को भंग करना चाहते थे गाँधी वही कॉन्ग्रेस उनके नाम पर कर रही राजनीति

इसी तरह महात्मा गाँधी के नाम पर उछलने वाली कॉन्ग्रेस वो पार्टी है, जिसे महात्मा गाँधी भंग करना चाहते थे और इसका जिक्र हमें  ‘द कलेक्टेड वर्क्स ऑफ़ महात्मा गाँधी’  में भी पढ़ने को मिलता है। दरअसल, कॉन्ग्रेस का गठन देश की आजादी के लिहाज से किया गया था। गाँधी चाहते थे कि पार्टी स्वतंत्रता के बाद भंग हो, क्योंकि उन्हें एहसास था कि इसके नाम का इस्तेमाल नेता अपनी निजी हितों की पूर्ति के लिए करेंगे। बाद में यही हुआ भी।

कॉन्ग्रेस को खड़ा करने में सरदार भाई वल्लभ पटेल, बाल गंगाधर तिलक, मदन मोहन मालवीय जैसे हिंदुत्वादी नेताओं की बड़ी भूमिका थी। मगर, गाँधी की हत्या के बाद कॉन्ग्रेस ने सबसे पहला काम इस विचार को मलिन करने का किया और राष्ट्रपिता की हत्या को अवसर की तरह इस्तेमाल किया। इसके अलावा पार्टी को भंग नहीं होने दिया गया और आज तक महात्मा गाँधी के नाम का इस्तेमाल अपनी विश्वसनीयता साबित करने के लिए कॉन्ग्रेसियों द्वारा किया जाता है।

दलितों को हिंदू मानते थे गाँधी, लेकिन कॉन्ग्रेस क्या करती है?

ऐसे ही बात जब भी जाति-पाति या दलितों की होती है तो महात्मा गाँधी और आंबेडकर के बीच का एक वाकया जरूर उठता है। ये वो वाकया है जब गाँधी ने आंबेडकर के उन प्रयासों का विरोध किया था जब वह दलितों को गैर हिंदू साबित करने का प्रयास कर रहे थे। गाँधी के इसी रवैये के कारण आंबेडकर ने उन्हें दोहरे व्यवहार वाला कहा था। साथ ही उन पर लोगों को धोखा देने का आरोप भी लगाया था।

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आंबेडकर ने कहा था, “अंग्रेजी अखबार में उन्होंने खुद को जाति व्यवस्था और छुआछूत के विरोधी के रूप में पेश किया। लेकिन अगर आप उनकी गुजराती पत्रिका को पढ़ेंगे, तो आप उन्हें सबसे रूढ़िवादी व्यक्ति के रूप में देखेंगे। वह जाति व्यवस्था, वर्णाश्रम धर्म और सभी रूढ़िवादी हठधर्मियों का समर्थन करते रहे हैं।”

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आंबेडकर के ये शब्द गाँधी के लिए इसलिए थे क्योंकि उनको लगता था गाँधी पारंपरिक जाति व्यवस्था का समर्थन करते हैं। लेकिन दूसरी ओर राहुल गाँधी और उनकी पार्टी हैं जो आए दिन ऐसे लोगों से हाथ मिलाती है जिनका मकसद ही दलितों को यह महसूस कराना है कि वो हिंदुओं से अलग हैं और उनके असली सहयोगी ‘भीम-मीम’ का सच है।

राहुल गाँधी को ऐसे बयान के लिए लगी थी फटकार

गौरतलब है कि आज महात्मा गाँधी की हत्या के पीछे आरएसएस को जिम्मेदार बताने वाले राहुल गाँधी भूल गए हैं कि उन्हें अपनी ऐसी बयानबाजी के कारण कई बार शर्मिंदा होना पड़ा है। साल 2014 में ठाणे जिले के सोनाले में आयोजित चुनावी सभा में आरएसएस को गाँधी का हत्यारा बताने पर राहुल गाँधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला हुआ था। हाईकोर्ट ने चेतावनी भी दी थी कि राहुल गाँधी इस मामले में माफी माँगें या फिर मुकदमे का सामना करें। कोर्ट ने राहुल गाँधी के भाषण पर सवाल उठाए थे और आश्चर्य व्यक्त करते हुए पूछा था कि आखिर उन्होंने गलत ऐतिहासिक तथ्य का उद्धरण लेकर भाषण क्यों दिया?

इसी तरह अपने ऐसे दावों के कारण एजी नूरानी जैसे स्तंभकारों को अपने लेख के लिए माफी माँगनी पड़ी थी। इसके अलावा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष रह चुके सीताराम केसरी को भी संघ पर गाँधी की हत्या का आरोप लगाने के लिए माफी माँगनी पड़ी थी।

अंत में फिर, रही बात गोडसे के संघ से जुड़े होने की तो कपूर आयोग की रिपोर्ट में आरएन बनर्जी की गवाही है जो हत्या के समय केंद्रीय गृह सचिव थे। उन्होंने खुद कहा था कि अपराधी संघ का सदस्य था। लेकिन वह संघ की गतिविधियों से असंतुष्ट था। गोडसे खेलकूद, शारीरिक व्यायाम आदि को बेकार मानता था। और इसी असंतुष्टि के कारण उसने आरएसएस को बाद में छोड़ भी दिया था। अर्थात, यह स्पष्ट है कि गाँधी हत्या में आरएसएस का नाम बार-बार लेना लंबे समय से चली आ रही साजिश और षड्यंत्र का परिणाम है।

गुजरात के CM भूपेंद्र पटेल ने बनाई 24 मंत्रियों की टीम, विजय रुपाणी कैबिनेट से किसी को मौका नहीं

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अपनी कैबिनेट बना ली है। उन्होंने कुल 24 लोगों को जगह दी है। इनमें 10 कैबिनेट और 14 राज्य मंत्री हैं। उन्होंने पूर्ववर्ती विजय रुपाणी कैबिनेट में रहे किसी भी विधायक को मौका नहीं दिया है। उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल भी इस बार कैबिनेट में नहीं हैं।

नए मंत्र‍ियों का शपथ ग्रहण समारोह गाँधीनगर स्थित राजभवन में गुरुवार (16 सितंबर 2021) को आयोजित किया गया। राज्यपाल आचार्य देवव्रत राजभवन में नए दिलाई है। शपथ लेने वालों में विधानसभा के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले राजेंद्र त्रिवेदी भी शामिल हैं। उन्होंने शपथ ग्रहण समारोह से ठीक पहले इस्तीफा दिया था। इसके अलावा कनुभाई देसाई, किरीट सिंह राणा, नरेश पटेल, प्रदीप परमार, अर्जुन सिंह चौहान ने भी मंत्री पद की शपथ ली है। 

राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने 10 कैबिनेट मंत्रियों और 14 राज्य मंत्रियों को शपथ दिलाई, जिनमें पाँच स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री शामिल हैं। गुजरात मुख्यमंत्री कार्यालय ने जानकारी देते हुए कहा कि नए सीएम भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद की पहली कैबिनेट बैठक आज (सितंबर 16, 2021) शाम 4.30 बजे गाँधीनगर में होगी।

कैबिनेट मंत्री: राजेंद्र त्रिवेदी, जीतू वाघानी, राघव पटेल, पूर्णेश मोदी, नरेश भाई पटेल, प्रदीप सिंह परमार, अर्जुन सिंह चव्हाण, ऋषिकेश पटेल, कनुभाई देसाई, किरीट सिंह राणा, हर्ष सांघवी, बृजेश मेरजा, मनीषा वकील, जगदीश भाई पांचाल, जीतू भाई चौधरी। 

राज्य मंत्री: निमिषा सुतार, मुकेश पटेल, अरविंद रैयाणी, कुबेर डिंडोर, कीर्ति सिंह वाघेला, गजेंद्र सिंह परमार, देवा भाई मालम, राघवजी मकवाना, विनोद भाई मोराडिया।

शपथ ग्रहण के दौरान सीएम भूपेंद्र पटेल और पूर्व सीएम विजय रूपाणी मौजूद थे। यह बदलाव ऐसे वक्त में हुआ है, जब राज्य में विधानसभा चुनावों में करीब एक साल ही रह गया है।

बता दें कि भूपेंद्र पटेल अहमदाबाद के घाटलोडीया से विधायक हैं। 2017 में उन्होंने कॉन्ग्रेस के शशिकांत पटेल को 1.17 लाख वोटों से मात दी थी, जो उस विधानसभा चुनाव की सबसे बड़ी जीत भी थी। पाटीदार समुदाय से आने वाले भूपेंद्र को आनंदीबेन पटेल का करीबी माना जाता है। पटेल से घाटलोडिया विधानसभा का प्रतिनिधित्व यूपी की राज्यपाल और गुजरात की पूर्व सीएम आनंदीबेन पटेल ही किया करती थीं।

‘डिस्मेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व’: वैश्विक स्तर पर हिंदू घृणा की खेती, कनाडा की घटना पहली उपज

कनाडा में हिंदुओं के खिलाफ हेट क्राइम की एक घटना 11 सितंबर को हुई जिसमें एक हिंदू परिवार को हिंसा का सामना करना पड़ा। मिसिसागा में बारबर रोड के एक पार्क में हिंदू आस्था से जुड़े एक सामाजिक कार्यक्रम के आयोजन के दौरान दो युवकों ने परिवार के साथ मारपीट और पत्थरबाजी की। हालाँकि प्रशासन ने तुरंत आवश्यक कदम उठाए पर हिंदुओं के खिलाफ पिछले कुछ समय से बढ़ती हिंसा चिंता का विषय है। वैसे तो किसी धार्मिक आस्था का पालन करने वालों के विरुद्ध सामाजिक हिंसा पश्चिमी देशों के लिए कोई नई बात नहीं है पर हाल के महीनों में हिंदुओं के खिलाफ ऐसी घटनाएँ बढ़ी हैं। कुछ घटनाएँ ऊपर से देखने में सामान्य अपराध भले ही लगें पर उनकी विवेचना की जाए तो वे सामान्य अपराध से आगे की बात लगती है।

कनाडा में भी हिंदुओं के खिलाफ हिंसा में बढ़ोतरी देखी गई है। हिंदू विरोधी हिंसा की ऐसी घटनाएँ पिछले वर्ष केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि कानूनों को लेकर पंजाब में ‘किसानों’ के विरोध के साथ और अधिक दिखाई देने लगी है। हाल के महीनों में हिंदुओं के विरुद्ध योजनाबद्ध तरीके से केवल दुष्प्रचार ही नहीं किया जा रहा है बल्कि तमाम आयोजनों में हिंदुओं पर शारीरिक हमले भी देखे गए। ऐसी कुछ घटनाओं में खालिस्तान समर्थकों का भी हाथ देखा गया। हिंदुओं के विरुद्ध माहौल बनाने में इन्होने प्रमुख भूमिका निभाई है। ऐसा नहीं कि यह भूमिका केवल जमीन पर दिखाई दी है। हिंदुओं के प्रति खालिस्तान समर्थकों का अपमानजनक व्यवहार सोशल मीडिया पर खालिस्तानी डिस्कोर्स का एक प्रमुख अंग रहा है।

भारत से बाहर रहने वाले खालिस्तान समर्थक अभियान चलाकर प्रवासी हिंदुओं का जगह-जगह विरोध करते रहे हैं और उनके विरुद्ध हिंसा को भड़काने की कोशिश करते भी दिखाई दिए हैं। यही कारण है कि बढ़ती हिंसा को लेकर हिंदुओं की कुछ संस्थाओं ने न केवल विरोध किया बल्कि सरकार को ज्ञापन भी दिए। कुछ खालिस्तानी समर्थक अपने मोदी विरोध में इतने अंधे हो गए हैं कि उन्हें हर हिंदू मोदी का समर्थक लगता है। कनाडा के परिप्रेक्ष्य में देखें तो पाएँगे कि वहाँ की संसद में भी परोक्ष और अपरोक्ष रूप से ऐसे लोगों की मौजूदगी है। इसी वर्ष मार्च में खालिस्तान समर्थक एक सांसद के रिश्तेदार के खिलाफ कानूनी जाँच भी हुई थी क्योंकि भारतीयों द्वारा निकाले गए तिरंगा यात्रा में हिंदुओं पर हमला करते हुए उनका एक वीडियो वायरल हुआ था।

हिंदुओं के विरुद्ध बढ़ते हेट क्राइम में खालिस्तान समर्थकों के अलावा और भी लोगों का हाथ रहा है। हाल ही में हुए डिस्मैंट्लिंग ग्लोबल हिंदुत्वा कॉन्फ्रेंस के प्रचार की भी हिंदू विरोधी माहौल बनाने में खासी भूमिका रही है जिसका प्रभाव शायद भविष्य में दिखाई दे। यह अनुमान लगाया जा सकता है कि आनेवाले समय में इस कॉन्फ्रेंस से निकलने वाले स्वरों का हिंदुओं के विरुद्ध बन रहे माहौल को भड़काने में भूमिका रहेगी। इस कॉन्फ़्रेन्स में अकादमिक डिस्कोर्स के नाम पर चाहे जो बताया या कहा जाए, सच यही है कि यह मूलतः हिंदुत्व और हिंदुओं के विरुद्ध एक ग्लोबल प्रॉपेगैंडा है जिसका उद्देश्य विश्व भर में हिंदुओं के विरुद्ध माहौल बनाना है।

यह बात कॉन्फ्रेंस में कही गई बातों से साफ़ झलकती है। हिंदुत्व और हिन्दुइज़्म के बीच अंतर बताने से शुरू हुआ एक डिस्कोर्स अंत में दोनों को एक बताता हुआ देखा गया। वैसे भी अब हिंदू यह समझता है कि हमारे मीडिया या बुद्धिजीवियों द्वारा हिंदुत्व को हिन्दुइज़्म से अलग बताने की साजिश और उसके उद्देश्य का पर्दाफाश हो चुका है। इस कॉन्फ्रेंस के पीछे आयोजकों की मंशा साफ झलक रही है। कभी हास्यास्पद तथ्य तो कहीं सच का हवाला देकर हिंदुओं के विरुद्ध खड़े किये गए इस तथाकथित एकेडेमिक डिस्कोर्स में जिन्हें विद्वान बनाकर पेश किया गया उनके बारे में भी पूरी दुनियाँ को पता है। ऑड्री ट्रस्की हो या कविता कृष्णन, हिंदुत्व के इन विरोधियों के विचार, इनकी राजनीति और इनके प्रॉपगैंडा और उनके उद्देश्य अब हिंदुओं से छिपे नहीं हैं। हाँ, उन्हें हिंदुओं के बीच और व्यापक स्तर पर फैलाने की आवश्यकता हमेशा रहेगी।

हिंदुओं के विरुद्ध यदि वैश्विक माहौल बनाने या साजिश करने के पीछे के कारण साफ़ हैं। कॉन्फ्रेंस के लिए 11 सितंबर का चुना जाना भी केवल संयोग नहीं है। यह उस सोच के तहत किया गया प्रयास है जिसमें कुछ हिंदू विरोधी लोग और संस्थाएँ मिलकर उन तथ्यों पर चूना पोत देना चाहते हैं जिसके लिए 11 सितंबर का दिन अमेरिका में याद किया जाता है। हिंदुत्व को वैश्विक खतरा बताने के पीछे सोच यह है कि इस्लामिक आतंकवाद से जूझ रही दुनियाँ को एक बनावटी डिस्कोर्स थमा कर उसे किसी और रास्ते पर लगा दिया जाए ताकि पहले से चल रही तमाम भ्रांतियों की रक्षा की जा सके। यह सोच और प्रोपेगेंडा से उपजी स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक हिंदुओं की सतर्कता आज की ही नहीं भविष्य की भी आवश्यकता है।

दक्षिण भारत में ‘इस्लामी खिलाफत’ चाहता था अल-हिंद का आतंकी, हिंदू नेताओं की हत्या की थी साजिश: NIA की चार्जशीट से खुलासा

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) के अल-हिंद मॉड्यूल से जुड़े एक आतंकवादी के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की है। इससे पता चला है कि आतंकवादी ने दक्षिण भारत में ‘इस्लामी खिलाफत’ स्थापित करने की कोशिश में था। इस मामले में एनआईए की ओर से दायर यह दूसरी चार्जशीट है। एजेंसी द्वारा पहली चार्जशीट जुलाई 2020 में चेन्नई में विशेष एनआईए अदालत के समक्ष दायर की गई थी।

टाइम्स नाउ का दावा है यह चार्जशीट उसके पास है। इसमें बताया गया है कि आईएसआईएस आतंकवादियों ने बेंगलुरु को बेस के रूप में चुना था। 2019 से कर्नाटक और तमिलनाडु में साजिशों को लेकर कई बैठकें की थी। प्रतिबंधित आतंकवादी समूह ISIS की विचारधारा का प्रचार करने में लगा था। पुलिस अधिकारियों और हिंदू नेताओं की हत्या के लिए हथियारों और विस्फोटकों को इकट्ठा करने की साजिश रची गयी। एनआईए का कहना है कि आरोपित ने एक अज्ञात आईएसआईएस हैंडलर के साथ साजिश रची थी।

3 सितंबर को दायर चार्जशीट में चेन्नई निवासी 39 वर्षीय शिहाबुद्दीन (उर्फ सिराजुदीन और खालिद) के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी, आर्म्स एक्ट 1959 की धारा 25(1)(ए) और गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम 1967 की धारा 18, 20, 38 और 39 के तहत आरोप लगाए गए हैं। शिहाबुद्दीन को एनआईए ने जनवरी 2021 में स्पेशल सब-इंस्पेक्टर ए विल्सन की नृशंस हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। एनआईए के मुताबिक, आईएसआईएस आतंकवादी शिहाबुद्दीन मुंबई में हथियार और गोला-बारूद इकट्ठा करने और आपूर्ति करने में एक बड़ी साजिश का हिस्सा था।

जनवरी 2020 में तमिलनाडु के पुलिस अधिकारी एसएसआई विल्सन को मारने के लिए शिहाबुदीन और उसके सहयोगियों द्वारा बन्दूक और गोला-बारूद का इस्तेमाल किया गया था। एसएसआई को मारने के बाद शिहाबुद्दीन कतर भाग गया था। 6 जनवरी, 2021 को कतर से आने पर उसे एनआईए द्वारा चेन्नई हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया था।

एसएसआई विल्सन की हत्या में शुरुआती जाँच से पता चला था कि उसके हत्यारे ‘स्व-घोषित जिहादी’ थे, जिन्होंने जनवरी 2020 में बेंगलुरु में तमिलनाडु पुलिस द्वारा अपने आईएसआईएस सहयोगियों की गिरफ्तारी का बदला लेने के लिए पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने विल्सन की नृशंस हत्या के सिलसिले में 6 आरोपित आईएसआईएस आतंकवादियों के खिलाफ चेन्नई में विशेष एनआईए अदालत के समक्ष आरोप पत्र दायर किया है। चार्जशीट में विल्सन हत्या मामले में अब्दुल शमीम, वाई तौफीक, खाजा मोहिदीन, महबूब पाशा, एजस पाशा और जफर अली को आरोपित बताया गया है। इन पर आईपीसी की धारा 120 बी, 302, 353 और 506 (ii) 34 के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा यूए (पी) एक्ट 1967 के तहत 16, 18, 18बी, 20, 23, 38 और 39 और आर्म्स एक्ट की धारा 25(1बी)(ए) और 27 के तहत आरोप लगाए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि बेंगलुरु में महबूब पाशा और 16 अन्य लोगों के खिलाफ सद्दुगुंटेपल्या पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था। बेंगलुरु के गुरप्पनपाल्या के रहने वाले महबूब पाशा और खाजा मोइदीन, जो तमिलनाडु में विभिन्न आतंकवाद और हत्या के मामलों में आरोपित है, ने दक्षिण भारत में युवा मुस्लिमों की भर्ती करके एक आतंकवादी समूह का गठन किया। एनआईए ने 23 जनवरी, 2020 को मामला फिर से दर्ज किया था और 1 फरवरी को तमिलनाडु पुलिस से मामला अपने हाथ में ले लिया था। जाँच से पता चला कि आरोपितों ने अल-हिंद मॉड्यूल का गठन किया था और अप्रैल 2019 में बेंगलुरु को अपने बेस के रूप में चुना था।

चार्जशीट में यह भी कहा गया कि पुरुषों को जंगलों में जीवनयापन करने और हिंदू नेताओं और सरकारी अधिकारियों का शिकार करने के लिए प्रशिक्षित किया गया था। आरोपितों ने आतंकवादी हमले को अंजाम देने के बाद शरण लेने के लिए कोलार, कोडागु और अन्य स्थानों (कर्नाटक), जंबुसर (गुजरात), रत्नागिरी (महाराष्ट्र), चित्तूर (आंध्र प्रदेश), बर्दवान और सिलीगुड़ी आदि स्थानों पर सुरक्षित ठिकानों की पहचान की। जाँच के क्रम में आरोपितों के घरों और संपत्ति से प्रशिक्षण सामग्री जैसे धनुष, तीर, रस्सी की सीढ़ी, पानी की चरखी, जंगल के जूते, स्लीपिंग बैग, टेंट, जंबो बैग आदि जब्त किए गए। इसके साथ ही आरोपित व्यक्तियों के पास से बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री भी जब्त किए गए।

ऑनलाइन भर्ती की कोशिश

इसके अलावा एनआईए ने 25 आईएसआईएस संदिग्धों की भी पहचान की है, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे अफगानिस्तान में हैं और अफगानिस्तान संकट के बाद जिहाद के लिए भारतीयों को ऑनलाइन भर्ती करने का प्रयास कर रहे हैं। एनआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “बेंगलुरू आईएसआईएस मॉड्यूल में विदेशी हैंडलर की पहचान अभी तक नहीं हुई है। उनके चैट में उसका नाम ‘भाई’ है।”

PM मोदी ने किया डिफेंस ऑफिस कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन: विरोधियों पर बरसे, कहा- यह भी सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (16 सितम्बर, 2021) को दिल्ली के कस्तूरबा गाँधी मार्ग और अफ्रीका एवेन्यू स्थित रक्षा कार्यालय परिसरों (Defence Office Complexes) का उद्घाटन किया। पीएम मोदी ने इस दौरान लोगों को सम्बोधित करते हुए सेंट्रल विस्‍टा प्रोजेक्‍ट के विरोधियों पर भी निशाना साधा। उन्‍होंने कहा, “जो लोग सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के पीछे डंडा लेकर पड़े थे वे बड़ी चतुराई से इस प्रोजेक्‍ट (डिफेंस कॉम्प्लेक्स) पर बिलकुल चुप रहते थे। ये भी सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का ही हिस्सा है।”

डिफेंस कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन के मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि हम 21वीं सदी के भारत की सैन्य ताक़त को हर तरह से मज़बूत बनाने में जुटे हैं। एक से एक आधुनिक हथियारों से लैस करने में जुटे है। ऐसे में देश की सुरक्षा से जुड़ा कामकाज दशकों पुराने परिसरों में हो वह कैसे संभव हो सकता है? आज दिल्ली ‘न्यू इंडिया’ विजन के अनुरूप आगे बढ़ रही है। ये नए डिफेंस ऑफिस कॉम्प्लेक्स अब हमारी सेनाओं के लिए सभी आधुनिक सुविधाओं के साथ बेहतर कामकाजी परिस्थितियों में काम करना संभव बनाएँगे।”

इस मौके पर पीएम मोदी ने सेंट्रल विस्टा की वेसाइट भी लॉन्च की।

PM मोदी ने कहा कि इन दो नए डिफेंस कॉम्पेल्क्स में रक्षा मंत्रालय से जुड़े 7000 कर्मचारी शिफ्ट होंगे। इससे 24 घंटे काम करने वाले जवानों को सहूलियत होगी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हर काम प्रभावी ढंग से हो सकेगा। प्रधानमंत्री ने बताया कि देश की नई संसद का निर्माण भी जल्द पूरा होगा।

पीएम मोदी ने कहा, “जब हम राजधानी की बात करते हैं तो वो सिर्फ एक शहर नहीं होता है। किसी भी देश की राजधानी उस देश की सोच, संकल्प, सामर्थ्य और संस्कृति का प्रतीक होती है। भारत तो लोकतंत्र की जननी है। इसलिए भारत की राजधानी ऐसी होनी चाहिए, जिसके केंद्र में लोक हो, जनता हो। आज जब हम जीवन में सुगमता और ईज ऑफ डूइंग बिजनस पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, तो आधुनिक बुनियादी ढाँचा समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सेंट्रल विस्टा के विकास में जो काम हो रहा है उसके पीछे यही विचार है।”

पीएम ने कहा, “डिफेंस ऑफिस कॉम्प्लेक्स का भी जो काम 24 महीने में पूरा होना था वो सिर्फ 12 महीने के रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया है। वो भी तब जब कोरोना से बनी परिस्थितियों में लेबर से लेकर तमाम दूसरी चुनौतियाँ सामने थीं। कोरोना काल में सैकड़ों श्रमिकों को इस प्रोजेक्‍ट में रोजगार मिला है।”

बता दें कि नए रक्षा कार्यालय परिसर व्यापक सुरक्षा प्रबंधन के उपायों के साथ अत्याधुनिक और ऊर्जा कुशल है। इन इमारतों की मुख्य विशेषताओं में एक है निर्माण में नई और टिकाऊ निर्माण तकनीक, एलजीएसएफ (लाइट गेज स्टील फ्रेम) का उपयोग। पीएमओ ने कहा कि इस तकनीक के कारण पारंपरिक आरसीसी निर्माण की तुलना में निर्माण समय 24-30 महीने कम हो गया। भवन संसाधन कुशल हरित प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हैं और पर्यावरण के अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा देते हैं।

इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पुराने रक्षा परिसर इतने जर्जर हो गए थे कि टूटने के कगार पर थे। अब 7,000 से अधिक कर्मचारी और अधिकारी नए परिसर में अच्छी कार्यकारी परिस्थितियों में काम कर सकेंगे।

उद्घाटन से पहले चीफ आफ डिफेंस स्टाफ जनरल विपिन रावत ने पूजा की। इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट, आवास और शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी, आवास और शहरी कार्य राज्य मंत्री कौशल किशोर, सीडीएस जनरल विपिन रावत और सशस्त्र बलों के प्रमुख भी मौजूद रहे।

पाकिस्तानी नौका ‘अल्लाह पावाकल’ को भारतीय तटरक्षकों ने पकड़ा: 12 थे सवार, लेकर आए गुजरात

भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) ने सीमा में घुसी पाकिस्तानी नौका पकड़ी है। इस पर 12 लोग सवार थे। सभी को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है। नाव अवैध तरीके से भारत की जल सीमा में प्रवेश कर गया था।

जानकारी के मुताबिक गुजरात सीमा के पास घुसपैठियों पर नजर रखने वाली भारतीय तटरक्षक जहाज ‘राजरतन’ ने सर्विलांस मिशन के दौरान पाकिस्तानी नौका ‘अल्लाह पावाकल’ का पता लगाया और तटरक्षक बल के जवानों ने तुरंत इस नाव को कब्जे में ले लिया। मौसम खराब होने के बावजूद पाकिस्तानी नौका ‘राजरतन’ की नजरों से बच नहीं पाई। जाँच के लिए नौका गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले के ओखा लाई गई है।

एक अन्य घटनाक्रम में आईसीजी ने 13 सितंबर की रात दीव में वनकबारा में डूब रही नौका से सात मछुआरों को सुरक्षित निकाला था। ‘अल्लाह पावाकल’ को भारतीय तटरक्षकों ने ऐसे वक्त में पकड़ा है जब दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के बड़े आतंकी साजिश को नाकाम करते हुए 6 आतंकियों को गिरफ्तार किया है।

इनमें से दो आतंकी पाकिस्तान से प्रशिक्षण लेकर लौटे थे। ये आतंकी दिल्ली, महराष्ट व यूपी को दहलाने की साजिश रच रहे थे। आतंकियों के इस मॉड्यूल का पर्दाफाश होने के साथ ही पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई व अंडरवर्ल्ड की साँठगाँठ सामने आई थी। ये आतंकी नवरात्रि, रामलीला, दशहरा के दौरान हमलों को अंजाम देने वाले थे। दिल्ली, यूपी, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में सीरियल बम ब्लास्ट की साजिश इनके आकाओं ने रची थी। दिल्ली पुलिस ने बताया कि अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का भाई अनीस भी टीम का हिस्सा था और हवाला नेटवर्क के जरिए फंडिंग की जा रही थी।

‘ओम जय जगदीश’ पर सैनिकों की आरती: गुल पनाग के पिता ने गुमराह किया, मोदी को घसीट लिबरल करने लगे हुआं-हुआं

भारतीय सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल व एक्ट्रेस गुल पनाग के पिता हरचरणजीत सिंह पनाग ने बुधवार (सितंबर 15, 2021) को इंडियन आर्मी की एक वीडियो शेयर की। इस वीडियो में सेना के जवान ‘ओम जय जगदीश हरे’ के संगीत पर ताली बजाते और हिंदू परंपरा के अनुसार आरती करते नजर आ रहे हैं।

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एच एस पनाग ने इस वीडियो को शेयर कर ये दिखाना चाहा था कि कैसे औपचारिक सैन्य परेडों में बदलाव आया है। इस वीडियो पर कई लिबरल और कट्टरपंथियों ने अपनी प्रतिक्रिया दी और ऐसा दर्शाया कि मोदी सरकार के केंद्र में आने के बाद ये सब शुरू हुआ।

किसी ने इसे शर्मनाक बताया और किसी ने बताया कि राजनीति, धर्म, संप्रदाय, जाति, प्रांत, भेदभाव से दूर रहने वाली भारतीय सेना को बर्बाद करने की तैयारी की जा रही है। आरफा खानुम शेरवानी ने लिखा, “भारत के लोकतांत्रिक संविधान का मजाक। अब भी कोई शक है क्या कि विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र कैसे एक धर्म आधारित राज्य में तब्दील हो रहा है।”

मोना अंबेगांवकर कहती हैं, “एकदम बेहूदा। इनके हाथ में घंटा कब दिया जाएगा।” आरजे सायमा ने तो इसे अविश्वसनीय करार दिया और हैरानी जताते हुए कहा, “क्या? क्या अब ये सब होगा? अविश्वसनीय।”

मालूम हो कि ट्विटर पर लिबरलों के रिएक्शन देख कोई भी इस भ्रम में पड़ जाए कि मोदी सरकार ने भारतीय सेना की तस्वीर बदल दी है। लेकिन हकीकत ये है कि ऐसे संगीत पर पहली बार भारतीय सेना ताली बजाते या फिर ईश्वर के ध्यान में नहीं नजर आई है। साल 2008 में भी ऐसी वीडियो सामने आई थी जिसमें ये संगीत सुनाई दिया था। इसके अलावा भारतीय परंपराओं का अनुपालन व सब धर्मों का सम्मान अलग-अलग मौकों पर भारतीय सेना करती रही है।

हैरानी की बात तो ये है कि 1969 से 2008 तक भारतीय सेना में सेवा देने के बाद भी पनाग इस बात को नहीं समझ सकें हैं कि पूजा-पाठ आरती, त्योहार मनाना, ये सब सेना में होता है। कई उदाहरण है जब सैनिक वॉर क्राई के तौर पर पहले अपने देवी-देवताओं को याद करता है। उदाहरण के लिए:

राजपुताना राइफल्स- राजा राम चंद्र की जय।
राजपूत रेजीमेंट- बोल बजरंग बली की जय।
डोगरा रेजीमेंट- ज्वाला माता की जय।
सिख रेजीमेंट- जो बोले सो निहाल।
गरवाल राइफल्स-बद्री विशाल लाल की जय।
कुमाँऊ रेजीमेंट- कालका माता की जय।
जम्मू-कश्मी राइफल्स-दुर्गा माता की जय।

इसके बाद तमाम उदाहरण भी हैं जब भारतीय जवान हिंदू परंपराओं को मानते हैं। साथ ही साथ हर धर्म की इज्जत करते हैं। 2018 की रिपोर्ट बताती है कि जब 2018 में 12वीं सिख लाइट इन्फैंट्री कोकराझार में स्थानांतरित हुई, तो उन्होंने बैसाखी मनाने की परंपरा को जारी रखा। तस्वीरों में एक सिख सैनिक को बैसाखी पर पथ के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के लिए मार्ग का नेतृत्व करते हुए दिखाया गया है। इसी तरह भारतीय सेना का बैंड ‘अबाइड बाय मी’ भी बजाता है जोकि एक ईसाई मंत्र है।

इसके अलावा भारतीय सेना में विभिन्न धर्मों के विद्वान भी समय समय पर विशेष गाइडेंस के लिए बुलाए जाते रहे हैं। इस काम के तो विज्ञापन भी अखबारों में आते हैं। ऐसे में भारतीय सेना की छवि धूमिल करने का क्या मतलब। पनाग द्वारा शेयर वीडियो में भारतीय सेना के जवान सिर्फ अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। वो किसी बाढ़ प्रभावित इलाके के ग्रामीण को बचाने से पहले उसकी जाति नहीं पूछते। अंतत: ये साफ है कि पनाग द्वारा किया गया ट्वीट पूरी तरह गलत है और जवानों द्वारा की जा रही आरती के लिए पीएम मोदी को जिम्मेदार ठहराना बिलकुल फर्जी है।

रेल पटरी पर मरा मिला 6 साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या करने वाला, मंत्री ने कहा था- पकड़ेंगे तो एनकाउंटर करेंगे

तेलंगाना में 6 साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या करने के आरोपित पल्लाकोंडा राजू की लाश मिली है। रिपोर्टों के अनुसार 30 साल के राजू का शव घानपुर स्टेशन के पास रेल पटरी पर मिला। बीते 9 सितंबर को बच्ची के साथ इस जघन्य वारदात को हैदराबार के सैदाबाद इलाके में अंजाम दिया गया था। उसके बाद से ही राजू की तलाश की जा रही थी।

रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से बताया गया है कि गुरुवार 16 सितंबर 2021 की सुबह उसकी लाश मिली। अधिकारी के सुसाइड का अंदेशा जताया है। चश्मदीदों के अनुसार राजू सुबह के करीब 8:40 बजे कोणार्क एक्सप्रेस की चपेट में आ गया। इस संबंध में तेलंगाना के डीजीपी ने ट्वीट कर जानकारी दी है।

इससे पहले तेलंगाना के श्रम मंत्री ने चमकुरा मल्ला रेड्डी ने उसके पकड़े जाने पर एनकाउंटर की बात कही थी। राजू की तलाश में हैदराबाद सिटी पुलिस ने 10 लाख रुपए के इनाम की भी घोषणा की थी। इस घटना के बाद से लोगों में काफी आक्रोश था। स्थानीय लोग और सियासी दल राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए आरोपित की गिरफ्तारी और सख्त सजा की माँग कर रहे थे। कुछ लोग इस मामले में भी दिशा रेप ऐंड मर्डर केस की तरह आरोपित के एनकाउंटर की भी माँग कर रहे थे। जिसके बाद राज्य के श्रम मंत्री चमकुरा मल्ला रेड्डी ने मंगलवार ( 14 सितंबर 2021) को कहा था, “हम आरोपित को जल्दी ही ढूँढ़ लेंगे और उसका एनकाउंटर (Encounter) कर देंगे।”

गौरतलब है कि हैदराबाद में 9 सितंबर को 6 साल की मासूम बच्ची की कथित तौर पर बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने बच्ची का शव एक बंद घर से बरामद किया था। आरोपित पल्लकोंडा राजू बच्ची के पड़ोस में ही रहता था। वारदात के बाद से वह फरार हो गया था। पुलिस ने उसके तलाश में 15 टीमें बनाई थी। आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी उसकी तलाश की जा रही थी।