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राजस्थान पुलिस कॉन्स्टेबल ने खेत में किया बलात्कार, पीड़िता मानसिक रूप से कमजोर: हुआ गिरफ्तार

राजस्थान में दुष्कर्म का मामला थम नहीं रहा है। अब प्रदेश के सीकर जिले से शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। सीकर जिले के श्रीमाधोपुर थाना क्षेत्र में मानसिक रूप से कमजोर महिला से बलात्कार करने के आरोप में एक पुलिस कॉन्स्टेबल को गिरफ्तार किया गया है।

थानाधिकारी कैलाश चंद ने बताया, ‘‘आरोपित कॉन्स्टेबल लालचंद वर्तमान में शाहपुरा (जयपुर) के सर्किल अधिकारी के ड्राइवर के पद पर तैनात है। आरोपित पीड़ित महिला का पड़ोसी है और उसने 23 वर्षीय महिला का 19 अगस्त की रात को खेत में बलात्कार किया था, ऐसा आरोप है। इस संबंध में आरोपित के खिलाफ 20 अगस्त को मामला दर्ज किया गया था।’’

थानाधिकारी ने बताया कि कॉन्स्टेबल को गुरुवार (अगस्त 26, 2021) शाम गिरफ्तार किया गया और शुक्रवार (अगस्त 27, 2021) को स्थानीय अदालत में पेश किया गया। वहाँ से मजिस्ट्रेट ने आरोपित को न्यायिक हिरासत में भेज दिया

गौरतलब है कि राजस्थान से इस तरह की यह पहली घटना सामने नहीं आई है। इसी साल मार्च में अलवर के खड़ेली थाना में अपने पति के खिलाफ FIR लिखवाने गई महिला से बलात्कार का मामला सामने आया था। 26 वर्षीय पीड़िता का पति के साथ विवाद चल रहा है। 2 मार्च 2021 को वह पति के खिलाफ FIR दर्ज करवाने खेड़ली थाना पहुँची थी।

आरोप था कि खेड़ली थाने में तैनात सेकेंड ऑफिसर भरत सिंह ने पीड़िता को पति से विवाद के निपटारे का झाँसा दिया। इसके बाद वो थाना परिसर में ही बने आवास में पीड़िता को लेकर गया और वहाँ उसके साथ रेप किया। महिला ने आरोप लगाया कि सब-इंस्पेक्टर इतने पर ही नहीं रुके। उसने अगले दो दिन भी पीड़िता को बुलाया और उसके साथ रेप किया।

इसी साल मई में राज्य के मटीली थाने के सिपाही मनीराम पर कई बार बलात्कार करने का आरोप लगाकर एक महिला ने नहर में कूदकर आत्महत्या कर ली थी। अपने आखिरी संदेश में महिला ने मनीराम और उसकी पत्नी को अपनी मौत का जिम्मेदार बताया था। वीडियो के मुताबिक, मनीराम ने उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया और सिपाही की पत्नी भी उसे तंग करती थी।

एक अन्य मामले में राजस्थान के चूरू जिले में सरदारशहर पुलिस स्टेशन के निलंबित पुलिस निरीक्षक के अलावा आठ पुलिसवालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिसवालों पर आरोप था कि उन्होंने एक दलित महिला को बंधक बनाकर रखा और उसके साथ बलात्कार किया। पीड़िता ने 9 पुलिसकर्मियों पर उसके साथ पुलिस स्टेशन में ही गैंगरेप का आरोप लगाया था। 

यही नहींं इसी साल ACP कैलाश बोहरा को एक रेप पीड़िता से रिश्वत माँगने और उसका यौन उत्पीड़न करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। एंटी करप्शन ब्यूरो ने ACP कैलाश बोहरा को ऑफिस में पीड़िता के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ा था। पीड़िता ने जवाहर सर्कल थाने में किसी युवक के खिलाफ दुष्कर्म और धोखाधड़ी समेत 3 मामले दर्ज करवा रखे थे। इसी केस की जाँच का हवाला देकर अधिकारी बार-बार युवती को अपने ऑफिस बुलाते और कई बार ड्यूटी पूरी होने के बाद भी मिलने के लिए दबाव बनाते। 

2019 में राजस्थान के चुरु जिले में एक दलित युवक की पुलिस हिरासत में हुई संदिग्ध मौत के मामले में भी पुलिस पर रेप के आरोप लगे थे। मृतक की 35 वर्षीय भाभी और परिजनों ने आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों पर सामूहिक बलात्कार का आरोप लगाया था।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन बेंगलुरु में नहीं बिकेगी मांस, बूचड़खाने भी रहेंगे बंद: BBMP का फैसला

कर्नाटक की राजधानी में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन मांस की बिक्री पर प्रतिबंध रहेगा। ‘बृहद बेंगलुरु महानगरपालिका (BBMP)’ ने ये निर्णय लिया है। सोमवार (30 सितंबर, 2021) को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन शहर के भीतर की सभी माँस की दुकानें बंद रहेंगी। BBMP के जॉइंट डायरेक्टर (एनिमल वेलफेयर) ने अधिसूचना जारी कर के कहा है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन जानवरों की हत्या पर भी प्रतिबंध रहेगा।

BBMP ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन माँस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन बेंगलुरु के सारे बूचड़खाने भी बंद रहेंगे। इससे पहले भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और ‘गणेश चतुर्थी’ के मौकों पर BBMP ने मांस की खरीद-बिक्री और बूचड़खाने में जानवरों की हत्या पर प्रतिबंध लगाया था। बता दें कि भगवान श्रीकृष्ण की जयंती के रूप में जन्माष्टमी मनाई जाती है। द्वापर युग में इसी दिन धरती पर धर्म की स्थापना के लिए उन्होंने अवतार लिया था। इसे ‘गोकुल अष्टमी’ भी कहते हैं।

‘काश! उसे रोक लिया होता’: कंगना रनौत के साथ ‘ज़हरीले’ रिश्ते पर बोले अध्ययन सुमन – मानसिक-शारीरिक स्थिति बिगड़ गई थी

फिल्म अभिनेता अध्ययन सुमन ने अभिनेत्री कंगना रनौत के साथ रिश्ते पर बात की है। दोनों ने जनवरी 2009 में आई फिल्म ‘राज़: द मिस्ट्री कन्टीन्यूज’ में साथ काम किया था। 2008-9 के दौरान इन दोनों के रिलेशनशिप की बातें मीडिया की चर्चा में थीं। अब अध्ययन सुमन ने कहा है कि कंगना रनौत के साथ रिलेशनशिप ने उनकी मानसिक और शारीरिक, दोनों स्थितियों को बिगाड़ दिया। उन्होंने कहा कि ये एक विषाक्त (Toxic) रिश्ता था।

वरिष्ठ कॉमेडियन शेखर सुमन के बेटे अध्ययन ने कहा कि इस रिश्ते से बाहर निकलने के बाद उन्हें आगे बढ़ने में काफी समस्या हुई। उन्होंने बताया कि इस दौरान उनके पिता के कुछ शब्दों ने उनमें आत्मविश्वास का संचार किया। अध्ययन ने कहा, “असल में लड़ाई उस व्यक्ति के साथ नहीं होती है, ये अपने-आप के साथ होती है। आप बार-बार खुद को कह रहे होते हैं कि ‘मैंने रोक लिया होता या नहीं किया होता’ या ‘मैंने क्यों नहीं बात सुनी’ जैसे ख्याल दिमाग में आते हैं।”

उन्होंने कहा कि वो उस समय बड़ी इमोशनल उथल-पुथल से गुजर रहे थे। शेखर सुमन ने तब उनसे कहा था कि जब दो लोग एक-दूसरे के लिए नहीं बने होते हैं तो उन्हें अलग-अलग आगे बढ़ जाना चाहिए। हाल ही में अध्ययन सुमन तब खबरों में आए थे, जब उन्होंने कंगना रनौत पर ड्रग्स लेने के आरोप लगाए थे। असल में ये उनका 2016 का इंटरव्यू था, जो अब वायरल हुआ। उन्होंने कहा था कि वो अपनी ज़िंदगी के अंधकारमय समय को याद नहीं करना चाहते, वो आगे बढ़ चुके हैं।

उन्होंने कहा 12-13 वर्ष पहले वो युवा थे और चीजों का उन पर ज्यादा असर पड़ता था। उन्होंने कहा कि एक समय के बाद उन्हें इससे आगे बढ़ना ही था और ऐसा ही हुआ। बता दें कि सितंबर 2020 में महाराष्ट्र के तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा था कि 2016 में सुमन के जी न्यूज के शो DNA में दिए इंटरव्यू के आधार पर महा विकास अघाडी सरकार कंगना की ड्रग्स मामले की जाँच करेगी।

बता दें कि हाल ही में बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक चौंकाने वाला खुलासा किया था। अपनी स्टोरी में कंगना ने आशंका जताई थी कि शायद ट्विटर के बाद अब उनके इंस्टाग्राम पर भी खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने बताया था कि कोई चीन से उनके अकॉउंट को हैक करने की कोशिशों में लगा है। उन्होंने इसे एक बहुत बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश करार दिया था।

5 राज्यों में बनवाई 103 मस्जिदें, ₹60 करोड़ की फंडिंग: धर्मांतरण रैकेट का संबंध J&K से भी, गुजरात पुलिस पहुँची UP

गुजरात के वडोदरा शहर की पुलिस ने धर्मांतरण रैकेट की जाँच के सिलसिले में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा पहले गिरफ्तार किए गए आरोपितों (सलाहुद्दीन और उमर गौतम) के बारे में बड़ा खुलासा किया है। दोनों आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की कई धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने सलाहुद्दीन और उमर गौतम के खिलाफ आईपीसी की धारा 153-A, 465, और 120-b के अंतर्गत केस दर्ज किया है।

वडोदरा पुलिस कमिश्नर शमशेर सिंह ने बताया कि पिछले 5 सालों में आरोपितों को हवाला के जरिए 60 करोड़ के साथ-साथ विदेशी चंदे से 19 करोड़ रुपए मिले हैं। सिंह ने बताया कि हवाला फंड दुबई के रास्ते आता था। आरोपितों को एक ट्रस्ट के जरिए यूके, यूएस और यूएई से विदेशी चंदा भी मिलता था। उन्होंने बताया कि आरोपितों ने 5 राज्यों में 103 मस्जिदों का निर्माण भी करवाया है। इसके अलावा सरकार विरोधी प्रदर्शन के लिए भी हवाला फंडिंग का इस्तेमाल किया गया है और इन आरोपितों का जम्मू-कश्मीर से भी संबंध हैं।

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपित – मोहम्मद उमर गौतम और सलाहुद्दीन शेख – फिलहाल लखनऊ जेल में बंद हैं और वडोदरा पुलिस की टीम एक स्थानीय अदालत द्वारा जारी पेशी वारंट के साथ वहाँ पहुँची थी। दिल्ली निवासी उमर गौतम को जून में यूपी आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने धोखे से लोगों को इस्लाम में परिवर्तित करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

वहीं शेख को यूपी एटीएस ने पिछले महीने वडोदरा के पानीगेट इलाके से गिरफ्तार किया था। उसने कथित तौर पर गौतम और अन्य को अवैध धर्मांतरण के लिए धन मुहैया कराया था। मामले की आगे की जाँच करने के लिए वडोदरा पुलिस द्वारा पाँच सदस्यीय विशेष जाँच दल (SIT) का भी गठन किया गया था।

पिछले दिनों यूपी और गुजरात ATS की जाँच में पता चला था कि सामाजिक सेवा के नाम पर सलाउद्दीन की संस्था AFMI (अमेरिकन फेडरेशन ऑफ मुस्लिम्स ऑफ इंडियन ओरिजिन) विदेशों से फंड इकट्ठा करने का काम करती थी। इस संस्था को पिछले 5 सालों में मिले लगभग 24.48 करोड़ रुपए में से 19.03 करोड़ रुपए ट्रस्ट के FCRA खाते में आई थी, जबकि बाकी राशि हवाला के माध्यम से प्राप्त हुई थी।

बुधवार (25 अगस्त 2021) को वडोदरा पुलिस ने बताया था कि AFMI ट्रस्ट द्वारा इकट्ठा किए गए फंड में से सलाउद्दीन ने लगभग 5.91 करोड़ रुपए मौलाना उमर गौतम और अन्य सहयोगियों को गैर-मुस्लिमों के इस्लामी धर्मांतरण और गुजरात समेत अन्य राज्यों में मस्जिदों के निर्माण के उद्देश्य से दिए थे। यह फंड उमर गौतम की संस्था इस्लामिक दावा सेंटर (IDC) को दिया गया था।

1 दिन में कोरोना वैक्सीन की 1 करोड़ डोज: WHO की चीफ साइंटिस्ट खुश लेकिन राहुल गाँधी ‘फूफाजी’ अब भी नाराज़

सोशल मीडिया में लोगों का कहना है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी कोरोना वैक्सीन को लेकर ‘नाराज़ फूफाजी’ की तरह व्यवहार कर रहे हैं। ऐसा इसीलिए, क्योंकि भारत भले ही रिकॉर्ड संख्या में लोगों को वैक्सीन की डोज लगा रहा हो, लेकिन राहुल गाँधी इन सबसे आँखें मूँद कर लगातार आलोचना करने में लगे हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वैज्ञानिक भी भारत की तारीफ कर रहे, लेकिन राहुल गाँधी हैं कि मानते नहीं।

भारत ने शुक्रवार (27 अगस्त, 2021) को एक नया रिकॉर्ड बनाया, जब 1 करोड़ से भी अधिक लोगों को कोरोना वैक्सीन की डोज दी है। 10 दिनों पहले भी एक नया रिकॉर्ड बना था, जब 1 दिन में 88 लाख से भी ज़्यादा लोगों का टीकाकरण किया गया था। लेकिन, राहुल गाँधी तब भी सरकार की आलोचना ही कर रहे थे और अब भी वही कर रहे हैं। देश की आधी से भी अधिक जनसंख्या ने कम से कम वैक्सीन की एक खुराक ले ली है।

भारत ने अपने नागरिकों को शुक्रवार को रात 10 बजे तक 1 करोड़ वैक्सीन लगा दी, जो अब तक का सर्वाधिक है। WHO की चीफ साइंटिस्ट डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन ने इसके लिए देश को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि आधी जनसंख्या को वैक्सीन की कम से कम एक खुराक देने की उपलब्धि भारत ने हासिल की है। उन्होंने बताया कि अब तक वैक्सीन की 62 करोड़ रोज दिए जा चुके हैं। उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्यकर्मियों से लेकर इस अभियान में शामिल लोगों को भी बधाई दी।

लेकिन, राहुल गाँधी इसके बावजूद पिछले कुछ दिनों से कोरोना वैक्सीन देने की प्रक्रिया की आलोचना में लगे हुए हैं। अप्रैल 2021 में उन्होंने वैक्सीन, मेडिकल सप्लाइज और ऑक्सीजन की कमी का दावा करते हुए पीएम मोदी पर व्यक्तिगत हमला किया था और कहा था कि उनकी छवि बनाई जा रह है, जबकि इन चीजों की कमी है। इसी तरह उन्होंने दावा कर डाला कि जुलाई आ गया है, लेकिन वैक्सीन नहीं आई।

जुलाई खत्म होने पर उन्होंने इसी ट्वीट के टेक्स्ट में फेरबदल करते हुए लिख दिया कि जुलाई चला गया है लेकिन वैक्सीन की कमी नहीं गई। कभी उन्होंने कोरोना वैक्सीन की कमी का दावा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मन की बात’ को आड़े हाथों लिया, तो कभी मोदी सरकार की वैक्सीन नीति को ‘भारत माँ के सीने में खंजर घोंपने’ का काम बता दिया। कभी उन्होंने कोरोना से मौतें बढ़ने का दावा किया तो कभी इसी बहाने उलटे-सीधे ग्राफ शेयर किए।

कुल मिला कर देखा जाए तो राहुल गाँधी सिर्फ विरोध के लिए आलोचना कर रहे हैं और उन्होंने आँकड़े जाने बिना ही सारे ट्वीट्स किए हैं। अब जब एक दिन में 1 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगी है (जो दो न्यूजीलैंड या एक स्वीडन की जनसंख्या के बराबर है), वो चुप्पी साधे हुए हैं। कॉन्ग्रेस के लोग भी उनकी राह पर चलते हुए कम जनसंख्या वाले देशों से भारत की तुलना करते हैं और अपने ही देश को नीचा दिखाते हैं।

‘ढूँढ कर मारेंगे’: US स्ट्राइक में ढेर हुआ ISIS का सरगना, काबुल एयरपोर्ट पर 175 मौतों के लिए था जिम्मेदार

काबुल एयरपोर्ट पर हुए भीषण हमले में अपने 13 लोगों के मारे जाने के बाद अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि वो इसके साजिशकर्ता को ढूँढ कर मारेगा। अब अमेरिका ने अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्से में एक जबरदस्त ड्रोन स्ट्राइक की है। राजधानी काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद ये पहली अमेरिकी कार्रवाई है। इस हमले में ISIS का एक सरगना मारा गया। कहा जा रहा है कि नंगरहार प्रांत में हुए हमले में मारे जाने वाले आतंकी ने ही काबुल एयरपोर्ट पर हमले की साजिश रची थी।

काबुल एयरपोर्ट पर हुए हमले ने कुल 175 लोगों की जान ले ली थी। IS-K ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। इस हमले के अगले ही दिन ये कार्रवाई हुई है। अमेरिका ने ‘शुरुआती संकेतों’ के आधार पर ISIS के सरगना के मारे जाने का दावा किया है। अमेरिका ने कहा कि इस हमले में कोई नागरिक हताहत नहीं हुआ है। ISIS की जिस शाखा ने हमला किया था, उसे ISKP (इस्लामिक स्टेट खोरासन प्रोविंस) या IS-K भी कहते हैं।

अमेरिका ने अपने सभी नागरिकों को सलाह दी है कि वो हामिद करजई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर न जाएँ और जल्द से जल्द वहाँ से निकलें। अमेरिका का मानना है कि एयरपोर्ट पर अभी भी बड़ा खतरा बना हुआ है। वहाँ से लोगों को निकालने की प्रक्रिया भी कई घंटों तक ठप्प पड़ी थी। चूँकि कई विमानों को वहाँ से उड़ान भरनी थी और इस हमले के कारण वो जा नहीं पाए, एयरपोर्ट पर लोगों की भीड़ और बढ़ ही गई है।

अमेरिका ने कहा है कि उसने शुक्रवार (27 अगस्त, 2021) को 12 घंटों में 4200 लोगों को अफगानिस्तान से बचा कर निकालने में सफलता पाई है। 14 अगस्त से अब तक अमेरिका ने 1,09,200 लोगों को अफगानिस्तान से निकाला है। वहीं जुलाई से जोड़ें तो ये आँकड़ा 1,14,800 हो जाता है। फ्रांस ने अफगानिस्तान से अपने सारे नागरिकों को निकाल लिया है। 3000 लोगों को निकालने के बाद फ़्रांस ने अपने अभियान की समाप्ति की घोषणा कर दी।

तुर्की ने भी अपने सभी लोगों को वहाँ से निकाल लिया है। अफगानिस्तान से आए शरणार्थियों को बसाने के लिए अमेरिका ने प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद वहाँ जिस तरह से आतंकी संगठन सक्रिय हुए हैं, उसने भारत के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है। अमेरिका ने कहा है कि तालिबान व हक्कानी नेटवर्क अलग-अलग समूह हैं। राष्ट्रपति जो बायडेन ने हर कीमत पर अपने नागरिकों की सुरक्षा की बात कही है।

बताते चलें कि ISIS-K या इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (ISKP) – ISIS या इस्लामिक स्टेट का क्षेत्रीय सहयोगी है, जिसकी स्थापना ईराक और सीरिया में हुई थी। इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत, या ISKP, इस्लामिक स्टेट आतंकी समूह की अफगान शाखा है। यह अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत में सक्रिय है। साल 2015 में ISKP की स्थापना अफगान तालिबान के असंतुष्ट सदस्यों और उसके पाकिस्तानी समकक्ष TTP को मिलाकर की गई थी। इस खतरनाक इस्लामिक आतंकी संगठन के अधिकतर रंगरूट अफगानिस्तान और पाकिस्तान के मदरसों से निकलते हैं।

‘डोनर्स के फंड का सही इस्तेमाल नहीं, एजेंसियाँ कर रहीं जाँच’: राणा अयूब के सोशल वर्क की Ketto ने खोली पोल

फंड इकट्ठा करने वाले प्लेटफॉर्म केटो (ketto) ने पत्रकार राणा अयूब के सोशल वर्क की पोल खोली है। पता चला है कि इस प्लेटफॉर्म से फंड रेज होने के बाद उसका सही इस्तेमाल नहीं हुआ और इस फंड का बहुत हिस्सा अब भी अकाउंट में ही है। केटो ने राणा द्वारा चलाए जा रहे कैंपेन में शामिल डोनर्स को मेल भेजकर बताया कि भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा यह सूचित किया गया है कि राणा अयूब द्वारा जुटाए गए धन का उपयोग अभियानों में उल्लिखित उद्देश्यों के लिए नहीं किया गया था।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक केटो पर राणा अयूब ने तीन कैंपेन चलाए। एक झुग्गीवासियों और किसानों के लिए; दूसरा असम, बिहार और महाराष्ट्र में राहत कार्य के लिए और तीसरा भारत में कोविड -19 प्रभावित लोगों की मदद के लिए। मालूम हो कि इन अभियानों की वैधता के बारे में संदेह पहले से ही उठाया गया था, क्योंकि पत्रकार होने के बावजूद, अयूब एफसीआरए पंजीकरण के बिना विदेशी दान स्वीकार कर रहीं थी और इस प्रकार वह FEMA के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर रही थीं।

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केटो द्वारा भेजा गया मेल

प्लेटफॉर्म के अनुसार, राणा अयूब ने उन्हें बताया है कि उन्हें अभियानों में लगभग ₹2.69 करोड़ मिले थे, जिसमें भारतीय दानदाताओं से ₹1.90 करोड़ और विदेशी दान में $1.09 लाख शामिल थे। एकत्र किए गए कुल ₹2.69 करोड़ में से, उन्होंने लगभग ₹1.25 करोड़ खर्च किए और उन्हें कर के रूप में फंड से ₹90 लाख का भुगतान करना बाकी है। इसका मतलब है कि लगभग ₹1.44 करोड़ अभी भी खातों में पड़े हैं। इसमें से ₹90 लाख टैक्स लायबिलिटी है, जबकि शेष ₹54 लाख कभी भी इच्छित लाभार्थियों तक नहीं पहुँचे।

केटो ने कहा कि वे अभियान के दानदाताओं को इसकी सूचना दे रहे हैं, क्योंकि इस मामले को भारत में कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने उठाया है। उन्होंने बताया कि वह अपने मंच पर अभियानों के माध्यम से जुटाए गए धन के उपयोग की पुष्टि, या पर्यवेक्षण नहीं करते हैं। केटो ने कहा कि दानदाताओं को उपयोग किए गए धन के विवरण के लिए प्रचारकों से संपर्क करना होगा।

बता दें कि कोविड-19 राहत कार्य के नाम पर फंड रेजिंग में सामने आई हेरफेर के बाद राणा अयूब ने इस अभियान को खत्म कर दिया था। इस मामले में ऐसे सवाल उठे थे कि राणा देश के FCRA कानूनों का उल्लंघन कर रही थीं। इसके अलावा लोगों की चिंता ये भी थी कि वह एक एनजीओ के माध्यम से अभियान चलाने के बजाय अपने निजी बैंक खातों का उपयोग कर रही थीं। सभी प्रश्नों के बीच राणा ने इस साल मई में अपने फंड रेजिंग अभियान को समाप्त करने का फैसला किया था।

उल्लेखनीय है कि इस पूरे मामले में एक ओर राणा अयूब यह घोषणा कर चुकी थीं कि वो एफसीआरए के उल्लंघन से बचने के लिए विदेशी दान वापस कर देंगी, लेकिन दूसरी ओर केटो मेल यह स्पष्ट करता है कि उन्होंने किसी भी विदेशी दान को वापस नहीं किया है। उन्होंने विदेशी चंदे में $1.09 लाख एकत्र किए थे और केटो मेल में किसी भी धनवापसी का उल्लेख नहीं है, जिसका अर्थ है कि उन्होंने दान वापस करने के बारे में झूठ बोला था।

DU के सिलेबस से महाश्वेता देवी की ‘द्रौपदी’ हटाने का NDTF ने किया समर्थन, वामपंथियों के हिंदू विरोधी प्रोपेगेंडा को किया बेनकाब

दिल्ली यूनिवर्सिटी ने बीए (ऑनर्स) अंग्रेजी पाठ्यक्रम से महाश्वेता देवी की लघुकथा ‘द्रौपदी’ को सिलेबस से हटा दिया है। साथ ही तमिल लेखक बामा और सुकरिथरणी की रचनाओं को भी सिलेबस से हटाया गया है। इस पर जारी विवाद के बीच नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (NDTF) ने इस बदलाव का स्वागत किया है।

असल में महाश्वेता देवी की लघुकथा को लेकर कई प्रश्न उठे थे। इसके बाद यूनिवर्सिटी की अकादमिक परिषद ने मामले को संज्ञान में लेते हुए इसे हटाने का फैसला किया। अब ‘द्रौपदी’ के स्थान पर एक छोटी कहानी ‘ह्यसुल्तानाज ड्रीम्स’ को सिलेबस में शामिल किया गया है।

NDTF के अध्यक्ष एके भागी और महासचिव वीएस नेगी ने ऑपइंडिया को भेजे बयान में कहा है कि संगठन सेमेस्टर V और VI के लिए बीए (ऑनर्स) अंग्रेजी पाठ्यक्रम में हुए बदलावों का समर्थन करता है। उन्होंने बताया कि ये छोटे लेकिन महत्वपूर्ण संशोधन एम्पॉवर्ड ओवरसाइट कमेटी द्वारा किए गए थे, जिसे डीयू की एग्जीक्यूटिव काउंसिल (Executive council) ने 2019 में नियुक्त किया था।

तकरीबन 125 शिक्षविदों वाले अकादमिक काउंसिल ने इस संशोधन को स्वीकारा, जिनमें से 87 ने इस बदलाव को लेकर अपनी सहमति दी और 15 ने निर्णय के समय अपनी असहमति व्यक्त की। संगठन ने अपने बयान में अंग्रेजी विभाग के शिक्षकों के एक वर्ग की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने हिंदू धर्म और प्राचीन सभ्यता को बदनाम करने, सामाजिक जातियों के बीच दुश्मनी को कायम रखने, आदिवासियों के बीच उग्रवादी माओवाद और नक्सलवाद को प्रोत्साहित करने आदि के लिए अकादमिक स्वायत्ता का गलत उपयोग किया। इन सबके विरुद्ध जब आवाज उठाई गई और जाँच की गई, तो ये राजनीतिक शोर करने लगे।

बता दें कि ‘द्रौपदी’, महाश्वेता देवी द्वारा बंगाली में लिखी गई एक लघुकथा है और गायत्री स्पिवक द्वारा इसका अंग्रेजी में अनुवाद किया गया है। इस कहानी को डीयू के पाठ्यक्रम में कई वर्षों से पढ़ाया जा रहा था। कहने को यह एक आदिवासी महिला के अपमान के इर्द-गिर्द घूमता है, लेकिन हिंदू धर्म को नीचा दिखाने का एक कपटी प्रयास है। कहानी में केवल महिला के प्राइवेट बॉडी पार्ट, यौन दुराचार और यौन हमलों का अश्लील विवरण है। NDTF का कहना है कि इस कहानी का परिचय प्रतिष्ठित महाभारत के चरित्र के लिए विशेष रूप से आपत्तिजनक है। 

अपने बयान में संगठन ने वामपंथियों के फर्जी प्रोपगेंडा पर भी बल दिया जहाँ वो ये रोना रो रहे हैं कि पाठ्यक्रम से दलित लेखकों को हटाया जा रहा है। उदहारण के लिए एक संदेश वायरल है, जिसमें लिखा है-

“डीयू में सालभर पहले दलित टीचर डॉ. ऋतु सिंह को अपमानित करके निकाल दिया जाता है। फिर एक दलित एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नीलम को थप्पड़ जड़कर अपमानित किया जाता है। अब महाश्वेता देवी की लघु कहानी ‘द्रौपदी’ (आदिवासी महिला विद्रोह आधारित) को डीयू से हटाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं।”

संगठन ने बयान में खुल कर बताया कि कैसे वामपंथी संगठन हमेशा से राष्ट्रवादियों लेखकों द्वारा लिखित कहानियों का विरोध करता रहा है, क्योंकि वो उनके एजेंडे में फिट नहीं बैठते।

संगठन ने कहा है कि वामपंथियों का काम हमेशा से समाज को सामाजिक और धार्मिक संघर्षों के कैंसर के साथ इंजेक्ट करना रहा है। लेकिन देशभक्तों और राष्ट्रवादियों के रूप में एनडीटीएफ उनके जहरीले कैंसर वाले दृष्टिकोण का विरोध करने के लिए प्रतिबद्ध है और विश्वविद्यालय प्रशासन से अंग्रेजी विभाग द्वारा बनाए गए सभी पाठ्यक्रमों को स्कैन करने की माँग करता है।

डीयू ने जारी किया स्पष्टीकरण

इस संबंध में दिल्ली विश्वविद्यालय ने गुरुवार (अगस्त 26, 2021) को एक बयान जारी किया था। अपने बयान में डीयू ने पूरे मामले पर अपना रुख स्पष्ट किया। डीयू ने इसमें जोर देकर कहा था कि पाठ्यक्रम को ‘लोकतांत्रिक प्रक्रिया’ के माध्यम से पारित किया गया है।

Delhi University’s media statement. Image Source: Twitter

बयान में कहा गया था, “वर्तमान पाठ्यक्रम का ध्यानपूर्वक अध्ययन करने से स्पष्ट रूप से विषयवस्तु की विविधता के संदर्भ में पाठ्यक्रम की समावेशी प्रकृति का पता चलता है और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों ख्याति के विभिन्न प्रसिद्ध विद्वानों के अग्रणी कार्यों को उनके धर्म, जाति और पंथ पर विचार किए बिना शामिल किया गया है। विश्वविद्यालय के अनुसार, अकादमिक क्षेत्र में उत्कृष्टता इन विशेषताओं के अधीन नहीं है।”

नीरज चोपड़ा को बड़ा सम्मान: पुणे का आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट हुआ उनके नाम, राजनाथ सिंह ने गोल्डन ब्वॉय की मौजूदगी में किया ऐलान

टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाले नीरज चोपड़ा को सेना ने बड़ा सम्मान दिया है। पुणे के आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट (ASI) का नाम अब सूबेदार नीरज चोपड़ा स्टेडियम होगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार (27 अगस्त 2021) को इसका ऐलान किया। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम में थल सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे और नीरज चोपड़ा भी मौजूद थे।

राजनाथ सिंह ने ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता जेवलिन थ्रोअर को सम्मानित भी किया। सेना से जुड़े नीरज भी दक्षिणी कमांड में ही तैनात हैं। राजनाथ ने इस मौके पर कहा कि केंद्र सरकार खेलों को प्रोत्साहन देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री खुद को खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने में जुटे हैं। केंद्र सरकार खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए हर प्रयास कर रही है और राज्य भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं।

इससे पहले रक्षा मंत्री ने ट्वीट कर बताया था कि वे पुणे जा रहे हैं जहॉं वे दक्षिणी कमान का दौरा करेंगे और ओलंपिक में भाग लेने वाले सशस्त्र बलों के एथलीटों के साथ बातचीत करेंगे। उल्लेखनीय है कि जैवलिन थ्रो (भाला फेंक) में नीरज से पहले किसी भारतीय खिलाड़ी को ओलंपिक का मेडल नहीं मिला था। वे टोक्यो ओलंपिक में भारत की तरफ से गोल्ड जीतने वाले भी एकमात्र खिलाड़ी थे।

नीरज पिछले दिनों अपने एक इंटरव्यू को लेकर चर्चा में थे। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में उन्होंने खुलासा किया था कि गोल्डन थ्रो से पहले उन्हें अपना भाला नहीं मिल रहा था। नीरज ने बताया था कि फाइनल राउंड की शुरुआत में वे अपने जेवलिन को खोज रहे थे और उन्हें वह मिल नहीं रहा था। तभी, उन्होंने पाकिस्तान के अरशद नदीम को अपने जैवलीन के साथ घूमते देखा। नीरज ने उनसे जेवलिन लौटाने को कहा और इसके बाद उन्होंने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। नीरज ने बताया कि इसके कारण ही वे पहले थ्रो के थोड़े हड़बड़ाहट में थे।

इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया में कई तरह के कयास लगने लगे थे। कई लोगों ने आशंका जताई कि यह नीरज के जेवलिन के साथ टेंपरिंग की कोशिश हो सकती है। हालॉंकि बाद में नीरज ने खुद एक वीडियो बयान जारी कर इन कयासों पर विराम लगा दिया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी अपनी जैवलिन एक साथ रखते हैं जिसे सभी थ्रोअर यूज कर सकते हैं। ये खेल का नियम है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है और जब मैंने उनसे अपना जैवलिन माँगा तो उन्होंने लौटा दिया।

‘सुशांत की हत्या हुई, दिशा को रेप के बाद मारा गया’: नारायण राणे बोले- जानता हूँ किसने अपने भाई की बीवी पर तेजाब हमले को कहा

केंद्रीय मंत्री नारायण राणे की गिरफ्तारी के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में शुरू हुआ बवाल थमता नहीं दिख रहा है। राणे ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को फिर से निशाने पर लिया है। साथ ही कहा है कि सुशांत सिंह राजपूत की हत्या की गई थी और दिशा सालियान को रेप के बाद मारा गया था।

उल्लेखनीय है कि सुशांत सिंह राजपूत 14 जून 2020 को बांद्रा के अपने घर में लटके मिले थे। बीते साल ही 8 जून को उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान ने कथित तौर पर आत्महत्या की थी। सुशांत के मामले की सीबीआई जाँच कर रही है। उस समय भी राणे ने दिशा की रेप के बाद हत्या किए जाने का आरोप लगाया था।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार राणे ने कहा, “मैंने कुछ गलत नहीं किया। वो (शिवसेना) सत्ता का मजा ले रहे हैं, तो मुझे गिरफ्तार कर लिया। महाराष्ट्र कोरोना मामलों में नंबर 1 पर है, कोई एक्शन नहीं लिया गया। सुशांत सिंह राजपूत की हत्या हुई, दिशा सालियान को रेप के बाद मारा गया। आरोपित अब भी खुलेआम घूम रहे हैं।”

रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने कहा, “सुशांत सिंह राजपूत और दिशा सालियान की मौत से जुड़ा केस अभी खत्म नहीं हुआ है। हमें रचनात्मक काम करना है। घर में बैठकर काम नहीं करना है।” उन्होंने कहा, “पुराने मामले खोदे जाएँगे तो मैं चुप नहीं रहूँगा। अभी मेरी आवाज खराब है, जब ठीक हो जाएगी तो जोर से भी कहूँगा।”

राणे ने कहा, “मेरे घर के सामने आए शिवसैनिकों का पुलिस ने स्वागत किया। पिछले दो सालों में शिवसेना ने कोंकण क्षेत्र को क्या दिया है? उन्होंने सोचा कि अगर वे मेरे खिलाफ कार्रवाई करेंगे तो मुझे डर लगेगा। लेकिन हमारी यात्रा सफल रही।”

शिवसेना नेताओं पर टिप्पणी करते हुए राणे ने कहा, “संजय राउत बिना मतलब के बोलते हैं। विनायक और संजय राउत शिवसेना के पतन की ओर ले जाएँगे… कोंकण और कश्मीर के बीच की दूरी ममता बनर्जी और उनके पीएम बनने के बीच के अंतर को दर्शाती है।”

मिड-डे की रिपोर्ट बताती है कि नारायण राणे ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि वो जानते हैं कि अपने भाई की बीवी पर तेजाब फेंकने के लिए किसने किससे कहा था। सीएम उद्धव ठाकरे पर अप्रत्यक्ष रूप से हमला बोलते हुए राणे ने कहा, “एक केंद्रीय मंत्री को गिरफ्तार करके किसी ने क्या हासिल किया? मैं कदम दर कदम मामले सामने लाऊँगा।”

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ एक टिप्पणी को लेकर राणे की गिरफ्तारी हुई थी। उन्होंने कहा था, “ये शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री को ये नहीं पता कि हमें स्वतंत्र हुए कितने वर्ष हुए हैं। अपने भाषण के दौरान उन्होंने पीछे मुड़कर अपने सहयोगी से पूछा था। अगर मैं वहाँ होता तो उन्हें जोरदार थप्पड़ मारता।”

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे राणे ने कहा, “शिवसेना का एक लड़का- वरुण सरदेसाई मेरे घर (मुंबई में) के बाहर आया था और मुझे धमकी दी थी। अगर वह अगली बार आता है, तो वह वापस नहीं जाएगा।” मालूम हो कि सरदेसाई शिवसेना की युवा शाखा का नेता है। युवा सेना के कार्यकर्ताओं ने राणे की टिप्पणी को लेकर मंगलवार को मुंबई में राणे के बंगले के बाहर प्रदर्शन किया था। वहीं एक पूर्व शिवसैनिक अरुण पाठक ने राणे का सिर कलम करने पर 51 लाख रुपए की घोषणा की थी। अरुण पाठक ने धमकी दी थी कि वह राणे की अस्थियों को काशी में विसर्जित होने नहीं देगा।