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केंद्रीय मंत्री नारायण राणे पर शिवसेना ने कराई FIR, स्वतंत्रता का साल भूलने पर CM उद्धव ठाकरे की आलोचना की थी

केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता नारायण राणे के खिलाफ महाराष्ट्र के पुणे में एफआईआर दर्ज की गई है। सोमवार (23 अगस्त 2021) को शिवसेना की युवा इकाई ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की आलोचना करने को लेकर एफआईआर दर्ज कराई। राणे ने 15 अगस्त के संबोधन के दौरान देश के स्वतंत्र होने का वर्ष भूलने को लेकर मुख्यमंत्री की आलोचना की थी।

रिपोर्टों के अनुसार राणे के खिलाफ ‘आपत्तिजनक भाषा’ के इस्तेमाल को लेकर आईपीसी की धारा 153 और 505 के तहत केस दर्ज किया गया है। एबीपी की रिपोर्ट के अनुसार नासिक में भी उनके खिलाफ शिकायत की गई है और कथित तौर पर गिरफ्तारी का वारंट भी जारी कर दिया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार नासिक पुलिस ने चिपलून जाकर केंद्रीय मंत्री को गिरफ्तार करने का आदेश क्राइम ब्रांच को दिया है। इसमें कहा गया है, “राणे ने जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यह शर्म की बात है कि राज्य के सीएम को यह नहीं पता कि देश को स्वतंत्रत हुए कितने साल हो गए। वे 15 अगस्त को अपनी स्पीच के दौरान पीछे बैठे लोगों से पूछते हैं कि आजादी को कितने साल हो गए।”

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री राणे ने 2005 में शिवसेना छोड़ दी थी। वह उद्धव ठाकरे के घोर आलोचक रहे हैं। इतना ही नहीं बीजेपी की जन आशीर्वाद यात्रा के खिलाफ शिवसेना शुरू से ही आक्रामक रही है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुंबई पुलिस ने जनआशीर्वाद यात्रा निकालने वाले कार्यकर्ताओं के खिलाफ करीब 22 केस दर्ज किए हैं। कोंकण का महाड़ इलाका शिवसेना का वर्चस्व वाला क्षेत्र माना जाता है। यहीं पर राणे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उद्धव ठाकरे पर टिप्पणी की थी।

युवा सेना को चेतावनी

केस दर्ज कराए जाने के बाद अब नाराय़ण राणे के बेटे नितेश राणे ने शिवसैनिकों को चेतावनी देते हुए उन्हें शेर की माँद में घुसने से बचने की सलाह दी है। उन्होंने ट्वीट किया, “मुंबई के जुहू स्थित हमारे घर के पास युवा सेना के कार्यकर्ताओं को इकट्ठा होने के लिए कहा गया है। मुंबई पुलिस उन्हें वहाँ आने से रोक, नहीं तो जो कुछ भी होगा उसकी जिम्मेदारी हमारी नहीं होगी। शेर की गुफा में जान की हिम्मत मत करो। हम इंतजार कर रहे होंगे!”

वहीं शिवसेना सांसद विनायक राउत ने कहा है, “मोदी को अपने मंत्रिमंडल से राणे के बाहर करके उसे साफ रखना चाहिए। राणे को सिर्फ शिवसेना पर हमला करने के लिए मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था और अपना काम करते हुए वह एक नए निचले स्तर पर आ गए।”

रितेश देशमुख, सोनू सूद और ‘संघी’ मिलिंद सोमन: मुंबई मेयर के लिए कॉन्ग्रेस की पसंद, BMC में ‘एकला’ चलेगी पार्टी

2022 में बृहन्मुम्बई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव होने वाले हैं। राज्य में फ़िलहाल ‘महा अघाड़ी (MVA)’ गठबंधन सत्ता में है। इसमें शिवसेना, कॉन्ग्रेस और NCP शामिल हैं। लेकिन, कॉन्ग्रेस अब अगले चुनावों में ‘एकला चलो’ की रणनीति अपना रही है। अगले BMC चुनाव में कॉन्ग्रेस मेयर उम्मीदवार के रूप में कुछ लोकप्रिय नामों को आकर्षित करना चाहती है, जिसमें रितेश देशमुख, सोनू सूद और मिलिंद सोमन शामिल हैं

कॉन्ग्रेस के मुंबई प्रकोष्ठ की ‘स्ट्रेटेजी समिति’ ने BMC चुनावों को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की है और इसे शीर्ष नेताओं के पास विचार-विमर्श के लिए भेजा है। सोमवार (23 अगस्त, 2021) को इन नामों को विचार-विमर्श के लिए भेजा गया। फ़िलहाल मुंबई की मेयर किशोरी पडनेकर हैं, जो शिवसेना की हैं।

मार्च 2020 में सुपरमॉडल मिलिंद सोमन के बारे में जैसे ही खुलासा हुआ था कि उनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से पुराना सम्बन्ध रहा है, लिबरलों और सेकुलरों का एक बड़ा वर्ग उनके ख़िलाफ़ उतर आया था। उनकी किताब ‘मेड इन इंडिया- ए मोमॉयर’, जिसे उन्होंने लेखिका रूपा पाई के साथ मिल कर लिखा है, उस पर चर्चा के दौरान उन्होंने बताया था कि जब वो 10 वर्ष के थे, तब वो आरएसएस की शाखा में नियमित रूप से जाया करते थे।

मिलिंद मुंबई के जिस शिवाजी पार्क में पले-बढ़े, वहाँ कई बच्चे संघ की शाखा में जाया करते थे। मिलिंद सोमन ने ये भी बताया था कि आरएसएस के नजदीक जाने पर उन्हें कहीं भी ऐसा नहीं लगा कि ये संगठन राजनीतिक है। उन्हें कहीं भी राजनीति नहीं दिखी। उन्होंने बताया था कि वो संघ के जिन लोगों से मिलते थे, वो भी राजनीतिक नहीं लगे। हालाँकि, उन्होंने कहा था कि हो सकता है बाद में राजनीति संघ से जुड़ गई हो।

लाल साड़ी पहने किचन में पंखे से लटकी मिली हिरोइन: चेन्नई में यौन शोषण का केस, गोवा में मिली कंचना-3 फेम एलेक्जेंड्रा जावी की लाश

रूसी मॉडल एलेक्जेंड्रा जावी (24) का शव गोवा में एक फ्लैट से मिली है। राघव लॉरेंस की तमिल फिल्म कंचना-3 से प्रसिद्ध हुई जावी यहाँ किराए के फ्लैट में ब्वायफ्रेंड के साथ रहती थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, लाल रंग की साड़ी पहनी हुई अभिनेत्री का शव किचेन में लटका हुआ था।

कुछ रिपोर्ट के मुताबिक, ब्वॉयफ्रेंड से ब्रेकअप होने के बाद से जावी काफी परेशान रहती थीं और स्ट्रेस को कंट्रोल करने के लिए वो दवाइयाँ भी लेती थीं। पुलिस को एलेक्जेंड्रा के शव के आसपास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। फिर भी शुरुआती तौर पर पुलिस इसे आत्महत्या का केस मानकर चल रही है। पुलिस का कहना है कि उन्होंने किचेन में लगे सीलिंग फैन से लटककर जान दे दी। वहीं जब मौके पर उसका ब्वायफ्रेंड पहुँचा तो दरवाजा अंदर से बंद था। पुलिस ने इस मामले में किसी भी तरह के फाउल प्ले से इनकार किया है।

24 वर्षीय रूसी अभिनेत्री की मौत के बाद गोवा पुलिस ने शव मॉर्चरी में ऱखवा दिया है। अब प्रशासन को रूसी वाणिज्य दूतावास से NOC मिलने का इंतजार है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, एक्ट्रेस के ब्वॉयफ्रेंड का बयान लेकर जाँच शुरू कर दी गई है।

गौरतलब है कि इससे पहले वर्ष 2019 में मॉडल एलेक्जेंड्रा जावी ने चेन्नई में एक फोटोग्राफर पर यौन शोषण का केस दर्ज कराया था, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। वर्ष 2019 के मामले में अब चेन्नई पुलिस ने गोवा पुलिस का सहयोग करने की बात कही है। वहीं रूसी वाणिज्य दूतावास में गोवा के प्रतिनिधि एडवोकेट विक्रम वर्मा ने उक्त फोटोग्राफर के खिलाफ जाँच करने की माँग पुलिस से की है। ताकि मामले में उसकी भूमिका को जाँचा जा सके।

सरकारी संपत्तियों को बेचने की योजना नहीं है NMP, ₹6 लाख करोड़ का आएगा निवेश: सुधरेंगे रेल से रोड तक के इंफ्रास्ट्रक्चर

केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (National Monetisation Pipeline)’ को लॉन्च किया। ये केंद्रीय मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की ‘परिसंपत्ति मुद्रीकरण पाइपलाइन’ है। इस पाइपलाइन को नीति आयोग द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर से संबंधित मंत्रालयों के साथ विचार-विमर्श से विकसित की गई है। ये केंद्रीय बजट 2021-22 के तहत ‘परिसंपत्ति मुद्रीकरण (Aggregate Monetisation)’ से जुड़े फैसले पर आधारित है।

इसका अर्थ ये हुआ कि सड़क और रेलवे सहित कई संस्थानों में सरकार के पास ऐसी संपत्तियाँ हैं, जिनका भरपूर उपयोग कर के कमाई नहीं की जा रही है। ऐसा आज से नहीं, दशकों से हो रहा है। अगर इन्हीं संपत्तियों पर निवेश जुटाए जाएँ और प्राइवेट सेक्टर के माध्यम से इन्हें कमाई का जरिया बनाया जाए तो जनता का भी फायदा होगा और सरकार की कमाई भी बढ़ेगी। इसीलिए, NMP सरकारी संपत्तियों का पूरा उपयोग कर इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास, जनता के फायदे और कमाई के लिए लाया गया है।

क्या है NMP?

NMP के तहत वित्तीय वर्ष 2022 से लेकर वित्तीय वर्ष 2025 तक की चार साल की अवधि में केंद्र सरकार की मुख्‍य परिसंपत्तियों के जरिए 6 लाख करोड़ रुपए की कुल मुद्रीकरण (Monetisation) क्षमता का अनुमान लगाया गया है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने पाइपलाइन को लॉन्च करते हुए कहा, “परिसंपत्ति मुद्रीकरण कार्यक्रम पीएम मोदी के विजन से ही सटीक स्वरूप ले पाया है, जो सदैव भारत के समस्‍त आम नागरिकों के लिए बेहतरीन और किफायती बुनियादी ढाँचागत सुविधाओं तक पहुँच में विश्वास करते हैं। मुद्रीकरण के माध्यम से सृजन के दर्शन पर आधारित परिसंपत्ति मुद्रीकरण का उद्देश्य नई बुनियादी ढाँचागत सुविधाओं या अवसंरचना के निर्माण के लिए निजी क्षेत्र के निवेश का उपयोग करना है।”

यह रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए अत्‍यंत आवश्यक है जिससे आर्थिक विकास की गति को तेज करने के साथ-साथ जनहित के लिए ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों को निर्बाध रूप से एकीकृत करना भी संभव हो सकेगा।” केंद्रीय वित्त मंत्री ने वर्तमान सरकार द्वारा बुनियादी ढाँचागत सुविधाओं के त्वरित विकास और निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए लागू किए गए कई सुधारों और पहलों के बारे में भी जानकारी दी।

मुद्रीकरण का मतलब बेचना नहीं

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संस्थागत और दीर्घकालिक पूँजी का उपयोग करके सार्वजनिक क्षेत्र की मौजूदा (Brownfield) इंफ्रास्ट्रक्चर में निहित निवेश (Investment) के मूल्य को हासिल करना है, जिसे आगे सार्वजनिक निवेश के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे फायदा ये होगा कि निजीकरण (Privatisation) या औने-पौने मूल्‍यों पर परिसंपत्तियों को बेचने के बजाय व्‍यवस्थित अनुबंधात्‍मक साझेदारी के जरिए वित्त प्राप्त करने की योजना तैयार की गई है।

इसीलिए, ये आरोप गलत है कि सरकार इन सम्पत्तियों को बेच रही है। ‘Brownfield Infrastructure’ का अर्थ हुआ कि वो संपत्तियाँ, जो कई वर्षों से सरकार के हाथ में तो हैं लेकिन उसका भरपूर उपयोग नहीं हो पा रहा है। उपयोग हो भी रहा है तो उससे वित्त नहीं आ रहा। इसीलिए, इस इन्फ़्रास्ट्रक्टर के सही मूल्यों को हासिल करने के लिए प्राइवेट सेक्टर के साथ भागीदारी की जाएगी।

निजी निवेश हासिल करने के लिए चेन्नई, भोपाल, वाराणसी एंव वडोदरा सहित भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (AAI) के करीब 25 हवाई अड्डे, 40 रेलवे स्टेशनों, 15 रेलवे स्टेडियम और कई रेलवे कॉलोनी की पहचान की गई है। इन्हें निजी क्षेत्र के निवेश से विकसित किया जाएगा।

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन: क्या है ये?

एनएमपी का उद्देश्य सार्वजनिक परिसंपत्ति के मालिकों के लिए इस कार्यक्रम के सन्दर्भ में एक मध्यम-अवधि रोडमैप प्रदान करना है। इसके साथ ही निजी क्षेत्र की परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग के लिए उनकी वर्तमान स्थिति तथा संभावनाओं के बारे में भी जानकारी दी गयी है। एनएमपी पर रिपोर्ट को दो खंडों में बाँटा गया है। खंड-I एक मार्गदर्शन पुस्तिका के रूप में है, जिसमें परिसंपत्ति मुद्रीकरण के वैचारिक दृष्टिकोण और संभावित मॉडल का विवरण दिया गया है। खंड-II में मुद्रीकरण के लिए वास्तविक रोडमैप दिया गया है, जिसमें केंद्र सरकार के तहत मुख्य अवसंरचना परिसंपत्तियों की पाइपलाइन शामिल है।

कैसा होगा इसका ढाँचा

पाइपलाइन को संबंधित मंत्रालयों और विभागों से इनपुट और परामर्श के आधार पर तैयार किया गया है, साथ ही उपलब्ध कुल परिसंपत्ति का आकलन भी किया गया है। विनिवेश के माध्यम से मुद्रीकरण और गैर-प्रमुख संपत्तियों के मुद्रीकरण को एनएमपी में शामिल नहीं किया गया है। इसके अलावा, वर्तमान में, केवल केंद्र सरकार के मंत्रालयों और अवसंरचना से जुड़े केन्द्रीय उपक्रमों (सीपीएसई) की परिसंपत्तियों को शामिल किया गया है। अभी राज्यों की परिसंपत्तियों के समन्वय और आकलन की प्रक्रिया चल रही है और इन्हें उचित समय पर  शामिल करने की परिकल्पना की गई है।

प्रमुख परिसंपत्ति के मुद्रीकरण के लिए तीन प्रमुख शर्तें हैं। इसमें जोखिम-रहित और ब्राउनफील्ड परिसंपत्तियों, जिनके पास आय के स्थाई स्रोत हैं और कारोबार राजस्व अधिकारों पर निर्भर है, का चयन शामिल है। इसीलिए, इन संरचनाओं के तहत परिसंपत्तियों का प्राथमिक स्वामित्व सरकार के पास बना रहता है तथा इसमें कारोबार समाप्ति के समय परिसंपत्तियों को सार्वजनिक प्राधिकरण को वापस सौंपने की परिकल्पना की गई है।

अनुमानित क्षमता

चार साल की अवधि यानी वित्त वर्ष 2022-25 के दौरान एनएमपी के अंतर्गत कुल संपत्ति का अनुमानित मूल्य 6 लाख करोड़ रुपये है। यह अनुमानित मूल्य केंद्र द्वारा एनआईपी के अंतर्गत प्रस्तावित परिव्यय (43 लाख करोड़ रुपये) का 14 प्रतिशत है। इसमें 12 से ज्यादा संबंधित मंत्रालय और 22 से ज्यादा संपत्ति श्रेणियां शामिल हैं। सेक्टरों में सड़क, बंदरगाह, हवाई अड्डे, रेलवे, वेयरहाउसिंग, गैस और उत्पाद पाइपलाइन, बिजली उत्पादन व खनन, दूरसंचार, स्टेडियम, हॉस्पिटैलिटी और आवास शामिल हैं।

एनएमपी के अंतर्गत चिह्नित संपत्तियाँ और लेनदेन कई साधनों के माध्यम से कार्यान्वित होने का अनुमान है। इनमें सार्वजनिक निजी भागीदारी छूट जैसे प्रत्यक्ष अनुबंधित साधन और अवसंरचना निवेश ट्रस्ट (इन्विट) जैसे पूंजी बाजार साधन आदि शामिल हैं। साधन का चयन सेक्टर, संपत्ति की प्रकृति, लेनदेन के समय (बाजार स्थितियों सहित), लक्षित निवेशक विवरण और परिचालन के स्तर/ संपत्ति के स्वामी द्वारा रखे जाने वाले निवेश नियंत्रण आदि के द्वारा तय किया जाएगा।

संपत्ति मुद्रीकरण प्रक्रिया के माध्यम से सार्वजनिक संपत्ति के स्वामी को अनुमानित रूप से मिलने वाला मूल्य, या तो अग्रिम स्रोत के रूप में हो सकता है या निजी क्षेत्र निवेश के रूप में मिल सकता है। एनएमपी के अंतर्गत तय संभावित मूल्य सामान्य नियमों पर आधारित सिर्फ एक उच्च स्तरीय अनुमान है। यह संबंधित क्षेत्र के लिए लागू और उपलब्ध बाजार या लागत या बहीखाते या उपक्रम मूल्य आदि जैसे विभिन्न दृष्टिकोणों पर आधारित हैं।

कार्यान्वयन और निगरानी व्यवस्था

एनएमपी के अंतर्गत चिह्नित संपत्तियां और लेनदेन कई साधनों के माध्यम से कार्यान्वित होने का अनुमान है। इनमें सार्वजनिक निजी भागीदारी छूट जैसे प्रत्यक्ष अनुबंधित साधन और अवसंरचना निवेश ट्रस्ट (इन्विट) जैसे पूंजी बाजार साधन आदि शामिल हैं। साधन का चयन सेक्टर, संपत्ति की प्रकृति, लेनदेन के समय (बाजार स्थितियों सहित), लक्षित निवेशक विवरण और परिचालन के स्तर/ संपत्ति के स्वामी द्वारा रखे जाने वाले निवेश नियंत्रण आदि के द्वारा तय किया जाएगा।

संपत्ति मुद्रीकरण प्रक्रिया के माध्यम से सार्वजनिक संपत्ति के स्वामी को अनुमानित रूप से मिलने वाला मूल्य, या तो अग्रिम स्रोत के रूप में हो सकता है या निजी क्षेत्र निवेश के रूप में मिल सकता है। एनएमपी के अंतर्गत तय संभावित मूल्य सामान्य नियमों पर आधारित सिर्फ एक उच्च स्तरीय अनुमान है।

कार्यान्वयन और निगरानी व्यवस्था रणनीति के रूप में, संपत्ति आधार का बड़ा हिस्सा सरकार के पास रहेगा। इसीलिए, इसे ‘बेचना’ नहीं कहा जा सकता क्योंकि संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा तो अब भी सरकार के पास ही रहेगा। मुद्रीकरण को कुशलता के साथ और प्रभावी प्रक्रिया के तहत सुनिश्चित करने के क्रम में सरकार द्वारा आवश्यक नीति और हस्तक्षेप के माध्यम से इस कार्यक्रम को समर्थन दिया जाएगा। इसमें संचालन के तौर-तरीकों को व्यवस्थित करना, निवेशक भागीदारी को प्रोत्साहन और व्यावसायिक क्षमता को सुगम बनाना आदि शामिल है।

संपत्ति मुद्रीकरण डैशबोर्ड के माध्यम से वास्तविक समय पर निगरानी को जल्द ही लागू कर दिया जाएगा, जैसा आम बजट 2021-22 में बताया गया था। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ‘मुद्रीकरण के माध्यम से इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण’ को संभव बनाना है, जिसमें क्षमता के लिहाज से अपने-अपने क्षेत्रों के बड़े सार्वजनिक और निजी क्षेत्र सहयोग करें। साथ ही इससे सामाजिक व आर्थिक विकास को भी संभव बनाया जा सकेगा और देश के नागरिकों की जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।

पुजारी पहनते हैं स्त्रियों जैसे वस्त्र, नहीं होता शिव-पार्वती विवाह: 5 महाभूत स्थलों में से एक तिरुचिरापल्ली का जम्बुकेश्वर मंदिर

भगवान शिव की पूजा भूतनाथ के रूप में भी की जाती है। भूतनाथ का अर्थ है ब्रह्मांड के पाँच तत्वों, पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के स्वामी। इन्हीं पंचतत्वों के स्वामी के रूप में भगवान शिव को समर्पित पाँच मंदिरों की स्थापना दक्षिण भारत के पाँच शहरों में की गई है। ये शिव मंदिर, भारत भर में स्थापित द्वादश ज्योतिर्लिंगों के समान ही पूजनीय हैं। इन्हें संयुक्त रूप से पंच महाभूत स्थल कहा जाता है। इनमें से एक तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में स्थित तिरुवनैक्कोइल मंदिर है, जिसे जम्बुकेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। पंच तत्वों में से जल तत्व का प्रतिनिधित्व करने वाले इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग को ‘अप्पू लिंगम’ कहा जाता है। माना जाता है कि इस मंदिर के एक हॉल का निर्माण खुद भगवान शिव ने किया था।

इतिहास

जम्बुकेश्वर मंदिर का प्राचीन एवं पौराणिक इतिहास है। इस स्थान पर माता पार्वती ने देवी अकिलन्देश्वरी के रूप में भगवान शिव की तपस्या की। उन्होंने कावेरी नदी के जल से लिंगम का निर्माण किया, यही कारण है कि इसे ‘अप्पू लिंगम’ कहा जाता है। चूँकि देवी ने लिंगम की स्थापना एक जम्बू वृक्ष के नीचे की अतः यहाँ भगवान शिव को जम्बुकेश्वर के नाम से जाना गया। देवी की तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें इसी स्थान पर दर्शन दिया और शिव ज्ञान का बोध कराया।

मंदिर से प्राप्त कुछ शिलालेखों से यह ज्ञात होता है कि इसका निर्माण आज से लगभग 1800 साल पहले चोल राजा कोकेंगनन द्वारा कराया गया था। हालाँकि कई मान्यताओं के मुताबिक मंदिर को इससे भी पहले का माना जाता है। मंदिर के विषय में प्राप्त कुछ तथ्यों के मुताबिक एक मकड़ी ने भगवान शिव की तपस्या की जिसे अगले जन्म में एक राजा के रूप में जन्म लेने का वरदान प्राप्त हुआ। अपने अगले जन्म में यही मकड़ी, राजा कोकेंगनन चोलम के रूप में इस शिव मंदिर का निर्माण कराने में सफल रही।

संरचना

मंदिर में 5 प्रहरम (कॉरिडोर) हैं जिनमें से माना जाता है कि 5वें प्रहरम का निर्माण भगवान शिव द्वारा स्वयं किया गया जो मकड़ी के आकार का है। इसे ‘तिरुनित्तन तिरुमथिल’ के नाम से जाना जाता है। मंदिर में 1,000 स्तंभों वाला एक हॉल है उसके अलावा पूरे मंदिर में कई अन्य स्तंभ भी दिखाई देते हैं। इन स्तंभों में लोहे जंजीरें और 12 राशियों को उकेरा गया है। साथ ही मंदिर की दीवारों पर भी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को उकेरा गया है। मंदिर में गोपुरम का भी निर्माण किया गया है। तिरुचिरापल्ली के इस जम्बुकेश्वर मंदिर में माता पार्वती भी देवी अकिलन्देश्वरी के रूप में विराजमान हैं।

मंदिर के गर्भगृह में जिस अप्पू लिंगम की स्थापना की गई है, उसमें से हमेशा ही जल धारा निकलती रहती है। इसी कारण गर्भगृह की भूमि हमेशा गीली रहती है। चूँकि यहाँ भगवान शिव, जल तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं और शिवलिंग का निर्माण भी माता पार्वती ने जल से ही किया था, ऐसे में गर्भगृह में जल का उपस्थित रहना कोई आश्चर्य की बात नहीं है।

विशेष रीतियाँ

चूँकि इस मंदिर में देवी पार्वती ने भगवान शिव की उपासना की थी ऐसे में आज भी इस मंदिर में दोपहर की पूजा में पुजारी किसी महिला के समान वस्त्र धारण करके भगवान जम्बुकेश्वर की उपासना करते हैं। साथ ही पूजा के समय काली गाय की एक विशेष प्रजाति ‘कारम पासु’ को मंदिर में लाया जाता है जिसकी पूजा की जाती है।

इसके अलावा संभवतः यह भारत का इकलौता ऐसा मंदिर है जहाँ माता पार्वती और भगवान शिव के विवाह का आयोजन नहीं होता। देश के दूसरे शिव मंदिरों में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का उत्सव बड़े ही धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन इस मंदिर में ऐसा नहीं होता क्योंकि यहाँ माता पार्वती शिष्य के रूप में हैं और भगवान शिव गुरु के रूप में।

कैसे पहुँचे?

जम्बुकेश्वर का निकटतम हवाईअड्डा तिरुचिरापल्ली का अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है। यहाँ से मंदिर की दूरी लगभग 13 किमी है। इसके अलावा जम्बुकेश्वर, तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन से 12 किमी की दूरी पर है, जो भारत के कई बड़े शहरों से रेलमार्ग से जुड़ा हुआ है। जम्बुकेश्वर मंदिर की चेन्नई से दूरी लगभग 325 किमी है। सड़क मार्ग से भी जम्बुकेश्वर पहुँचा जा सकता है। राष्ट्रीय राजमार्ग 38 पर स्थित तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु और दूसरे राज्यों के बड़े शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है।

ईशनिंदा के झूठे आरोप में 20 महीने सऊदी की जेल में रहे हरीश लड़ेंगे न्याय की लड़ाई, बोले- दूसरों को हिंदू होने की सजा नहीं मिलने देंगे

ईशनिंदा के झूठे आरोपों में सऊदी अरब में 20 महीने जेल में बिताने वाले हरीश बंगेरा 18 अगस्त, 2021 को भारत लौट आए। उन्होंने स्वराज्य पत्रिका से आपबीती शेयर किया और कहा कि वह तब तक आराम नहीं करेंगे, जब तक कि उनके साथ अन्याय करने वालों को दंडित नहीं किया जाता। उन्होंने कहा, “मैं तब तक चैन से नहीं बैठूँगा जब तक उन्हें दंड न दिया जाएगा और जब उन्हें दंड दिया जाएगा, उस समय मेरा न्याय का युद्ध पूरा हो जाएगा।” उन्होंने कहा कि वह आराम नहीं करेंगे, अन्यथा उन लोगों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा जो ‘एक हिंदू को नरक में डालते हैं।’ उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने दिसंबर 2019 से एक पैसा भी नहीं कमाया है।

अपनी रिहाई को एक चमत्कार बताते हुए बंगेरा ने कहा, “उन्होंने सिर्फ दो दिन सलाखों के पीछे बिताए और अब जमानत पर बाहर हैं, जबकि मुझे एक साल आठ महीने जेल में रहना पड़ा। मुझे यह भी नहीं पता था कि मैं बाहरी दुनिया को फिर कभी देख पाऊँगा या नहीं। जिस अपराध का मुझ पर आरोप लगाया गया था, मुझे नहीं लगता था कि मैं यहाँ से कभी जिंदा निकल पाऊँगा। ईशनिंदा का आरोप, जिसमें मक्का भी शामिल हो, कोई छोटा मुद्दा नहीं था। मेरा जीवन लगभग समाप्त हो गया था।”

हरीश बंगेरा की कहानी

दिसंबर 2019 में उनके नाम और तस्वीर के तहत एक फेसबुक प्रोफ़ाइल सामने आई, जिस पर मक्का में काबा की तस्वीर के साथ एक पोस्ट प्रकाशित किया गया था। पोस्ट में लिखा था, “मेरे सभी हिंदू भाइयों… मक्का में अगला राम मंदिर… लड़ाई के लिए तैयार रहो… जय श्रीराम…मोदी हमारे साथ हैं।” इस पोस्ट पर न केवल सैकड़ों कमेंट्स आए, बल्कि सऊदी अरब में वायरल हो गया और कई सोशल नेटवर्किंग समूहों ने इसके स्क्रीनशॉट शेयर किए। इस पोस्ट पर सऊदी अरब के अधिकारियों की भी नजर पड़ी, जिसके बाद बंगेरा के लिए मुसीबतों की शुरुआत हुई।

उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया, उसके गिरफ्तार कर लिया गया और महीनों तक ईशनिंदा के आरोप में प्रताड़ित किया गया। इस दौरान बंगेरा ने समझाने की कोशिश की कि प्रोफाइल उनकी नहीं है, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। कथित तौर पर, बंगेरा ने सीएए के विरोध के बारे में एक पोस्ट साझा किया था, जिसकी वजह से 2019 में मैंगलोर में दंगे हुए थे। इसी की वजह से उनका खिलाफ पूरा उपद्रव हुआ था।

उपद्रव के बारे में बताते हुए बंगेरा ने कहा, “उन लोगों ने मुझे फोन किया, मुझे धमकाया, संदेश भेजे। उन्होंने व्हाट्सएप और फेसबुक पर मेरी तस्वीरें पोस्ट करना और मेरे बारे में अफवाहें फैलाना शुरू कर दिया। मैंने वीडियो पहले ही हटा लिया था, फिर भी मेरे गृह क्षेत्र के स्थानीय मुस्लिम जो जानते थे कि मैं कहाँ काम करता हूँ, हमला जारी रखा, जो मेरे कार्यस्थल तक पहुँच गया।”

यह सब बदला लेने के लिए किया गया था

बंगेरा ने कहा कि लोगों को उन पर हमला करने से रोकने के लिए उन्होंने एक वीडियो बनाया, जिसमें उन्होंने माफी माँगी और भविष्य में ऐसा कोई भी कंटेंट साझा नहीं करने का वादा किया, लेकिन इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा। उन्होंने कहा, “वे बदला लेना चाहते थे और उन्होंने एक नकली प्रोफ़ाइल बनाई और मक्का में मंदिर बनाने के बारे में कुछ अपमानजनक सामग्री और पोस्ट पोस्ट की। मुझे लगा कि मेरी जिंदगी खत्म हो गई है।” 

बंगेरा की पत्नी ने भारत से उनका समर्थन किया

बंगेरा की पत्नी को शक था कि पूरा मामला उनके पति के खिलाफ साजिश है। बंगेरा के दोस्त लोकेश, कार्यकर्ता रवींद्र शानभाग, अभिमाता और अन्य स्थानीय संगठन उनकी पत्नी के समर्थन में आए। उन्होंने उडुपी पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज की, जिसके बाद दो दोषियों को फर्जी प्रोफ़ाइल बनाने और पोस्ट प्रकाशित करने के लिए गिरफ्तार किया गया।

उडुपी पुलिस ने फर्जी प्रोफाइल के पीछे कर्नाटक के मूडाबिद्री के दो मुस्लिम भाइयों अब्दुल हुयेज और अब्दुल थुएज को नामजद किया। उन्हें अक्टूबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन वे फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। उनके खिलाफ निचली अदालत में मामला चल रहा है।

दोनों के खिलाफ पर्याप्त सबूत होने के बाद स्थानीय नेताओं ने मामले को फॉलो किया और भारत सरकार द्वारा सऊदी अरब सरकार को उनकी रिहाई के लिए संदेश भेजा। उडुपी से भाजपा सांसद और कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे ने बंगेरा की वापसी में प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने कथित तौर पर कर्नाटक के गृह विभाग के माध्यम से विदेश मंत्रालय के सचिव को लिखा था और जाँच में तेजी लाने के लिए खुफिया प्रमुख कमल पंत के साथ बात की थी।

बंगेरा ने कहा, “शोभा मैम ने मुझे आश्वासन दिया है कि वह सुनिश्चित करेंगी कि दोषियों को सजा मिले। नहीं तो और भी कई हरीश बंगेरा होंगे जिनके पास वह समर्थन और संसाधन नहीं होंगे, जो मुझे मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था।”

कथित तौर पर, सऊदी अरब में अफवाहें फैलाने वालों पर झूठी अफवाहों और मानहानि का मामला दर्ज किया गया था। उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। बंगेरा ने कहा, “मुझे लगता है कि उनमें से चार को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। आप देखिए, वहाँ का कानून पर किसी का ‘प्रभाव’ नहीं है। यह भारत नहीं है।”

बंगेरा ने अपनी वापसी संभव बनाने के लिए भगवान को धन्यवाद दिया

जब वे जेल में थे, उनकी पत्नी, मित्र और उनका समर्थन करने वाले संगठन के लोग अनेगुंडी मंदिर गए और शपथ ली कि अगर बंगेरा सुरक्षित लौटेंगे तो वे मंदिर की पदयात्रा करेंगे। उन्होंने कहा, “गणपति ने इसे संभव बनाया है।” स्वराज्य को साक्षात्कार देने से पहले बंगेरा ने मंदिर की तीर्थयात्रा पूरी की।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लॉन्च किया ₹6 लाख करोड़ का नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन प्रोग्राम: जानें इसकी प्रक्रिया

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार (23 अगस्त) को नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन यानी एनएमपी प्रोग्राम को लॉन्च किया। इस दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि भारत को यह समझना होगा कि हमारी संपत्ति का अधिकतम लाभ उठाने का समय आ गया है। सरकार केवल अंडर-यूटिलाइज्ड एसेट्स को ही बेचेगी। इसका हक सरकार के पास ही रहेगा, जबकि प्राइवेट सेक्टर के पार्टनर्स को तय समय के बाद अनिवार्य रूप से वापस करना होगा।

निर्मला सीतारमण ने कहा कि हम कोई जमीन नहीं बेच रहे हैं। केवल इसमें निजी हिस्सेदारी लाकर हम इसे बेहतर तरीके से मॉनेटाइज (मुद्रीकरण) करने जा रहे हैं। मॉनेटाइजेशन के बाद जो भी संसाधन प्राप्त किए जाएँगे, उससे हम आगे आधारभूत ढाँचा खड़ा करने के लिए बेहतर ढंग से निवेश करेंगे।

इस मौके पर नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन ने साल 2022 से 2025 तक 4 वर्ष की अवधि में केंद्र सरकार की कोर एसेट के माध्यम से 6 लाख करोड़ रुपए की कुल मुद्रीकरण क्षमता का अनुमान लगाया है। यानी सरकारी बुनियादी ढाँचा संपत्तियों को निजी क्षेत्र को कमाई के लिए लीज पर देकर केंद्र की मोदी सरकार करीब 6 लाख करोड़ रुपए जुटाने की तैयारी कर रही है। इसमें सड़क, परिवहन और राजमार्ग, रेलवे, बिजली, पाइपलाइन और प्राकृतिक गैस, नागरिक उड्डयन, शिपिंग बंदरगाह और जलमार्ग, दूरसंचार, खाद्य और सार्वजनिक वितरण, खनन, कोयला और आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन में शामिल हैं।

अमिताभ कांत ने कहा, “हम नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन को कामयाब बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। हमें लगता है कि बेहतर ऑपरेशन और मैनेजमेंट के लिए प्राइवेट सेक्टर में आना बेहद जरूरी है। इसलिए हम जमीनी स्तर पर मजबूती से काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

बता दें कि मोदी सरकार नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन में अपनी ब्राउनफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर संपत्तियों से पैसे जुटाने की योजना बना रही है। NMP केंद्र सरकार के 4 साल की योजनाओं के हिसाब से बनी एक योजना है। इसे सरकार की एसेट मॉनेटाइजेशन इनीशिएटिव के हिसाब से मध्यम अवधि का एक रोड मैप कहा जा सकता है।

‘रामभक्ति में तज दिया अपने सिर का ताज…’: कल्याण सिंह को याद कर सीएम योगी ने किया भावुक ट्वीट

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान एवं हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह के पार्थिव शरीर का सोमवार (अगस्त 23, 2021) को बुलंदशहर जिले के नरौरा में गंगा नदी के तट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। कल्याण सिंह के पुत्र और एटा से बीजेपी सांसद राजवीर सिंह ने ‘जय श्री राम’ और ‘कल्याण सिंह अमर रहे’ के नारों के बीच मुखाग्नि दी। कल्याण सिंह के पौत्र राज्यमंत्री संदीप सिंह भी मुखाग्नि प्रक्रिया में शामिल हुए।

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कल्याण सिंह के अंतिम संस्कार के दौरान पूरी व्यवस्था का संचालन खुद ही कर रहे थे। उन्होंने अंतिम संस्कार के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा, “अंतिम विदाई का यह कार्यक्रम अभी संपन्न हुआ है। मैं भारत माता के ऐसे सपूत को प्रदेशवासियों की तरफ से विनम्र श्रद्धांजलि देता हूँ। उनके आराध्य, हम सबके आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम से ही प्रार्थना करता हूँ कि उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें। हम सबको इतनी सामर्थ्य दें कि जो उनके संकल्प थे, उन्हें आगे ले जाकर पूरे प्रभावी ढंग से क्रियान्वित कर सकें।”

सीएम ने आगे कहा, “उन्होंने सार्वजनिक जीवन में एक लंबा समय व्यतीत किया, लेकिन दृढ़ता और मूल्यों के साथ समझौता किए बगैर अपनी लोक आस्था और लोक कल्याण के लिए पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। आज वे हमारे बीच में भौतिक रूप से नहीं, लेकिन उनके विचार, उनके कृत्य उत्तर प्रदेश के प्रत्येक नागरिकों को, भारतीय राजनीति को प्रेरणा और प्रकाश प्रदान करती रहेगी। मैं प्रदेशवासियों की तरफ से उन महान आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ और ईश्वर से उनके दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान देने की कामना करता हूँ।”

मुख्यमंत्री ने उनके पंचतत्व में विलीन होने का बाद पूर्व सीएम को ट्वीट करते हुए याद किया। उन्होंने कल्याण सिंह को रामभक्त बताते हुए लिखा, “राम भक्ति में उन्होंने शासन-सत्ता का त्याग किया और राम की शरण में चले गए।”

योगी आदित्यनाथ ने अपने ट्वीट मे लिखा, “रामभक्ति में तज दिया अपने सिर का ताज, राम शरण की ओर चले परम रामभक्त आज।” उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट किए। उन्होंने लिखा, “स्वर्गीय कल्याण सिंह जी का अटूट विश्वास था कि प्रभु श्री राम का भव्य-दिव्य मंदिर श्रीराम जन्मभूमि पर ही बनेगा। आज कोटि-कोटि जनों की आस्था के प्रतीक मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के भव्य-दिव्य मंदिर का निर्माण अवधपुरी में सतत जारी है।”

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “श्रद्धेय कल्याण सिंह जी का राजनीतिक जीवन मूल्यों व आदर्शों हेतु जाना जाता है। उनके द्वारा शासन में जो शुचिता, पारदर्शिता व दृढ़ता का परिचय दिया गया, वह आज भी उत्तर प्रदेश सरकार के लिए मानक है। मजबूत आदर्शों की मजबूत नींव हेतु नया उत्तर प्रदेश सदैव आपका ऋणी रहेगा।”

बता दें कि, कल्याण सिंह ने राम मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी। यही नहीं, इस आंदोलन के जरिए वे बीजेपी में कद्दावर नेता बन गए और हिंदुत्व के सबसे बड़े चेहरे बने। इसके अलावा यूपी में पहली बीजेपी के पूर्ण बहुमत की सरकार कल्याण सिंह के नेतृत्व में ही बनी। वहीं, आज योगी आदित्यनाथ भी बीजेपी के ब्रांड हिंदुत्व के सबसे बड़े चेहरे हैं। अंतिम संस्कार के दौरान योगी जिस तरह से सभी कार्य जिस सक्रियता से कर रहे थे, वह उनके कल्याण सिंह के प्रति भाव को दर्शाता है।

अफगानिस्तान में फँसे भारतीय शिक्षक ने पीएम मोदी और शाह से लगाई बचाव की गुहार, बंगाल पहुँचते ही करने लगा तालिबान की तारीफ

अफगानिस्तान से रविवार (22 अगस्त) को अपने घर लौटने के बाद कोलकाता निवासी तमाल भट्टाचार्य ने तालिबान की प्रशंसा कर विवाद खड़ा कर दिया। उत्तरी दमदम इलाके के निमटा में रहने वाले 34 वर्षीय तमाल अफगानिस्तान में तब से फँसे हुए थे, जब से तालिबान ने काबुल पर कब्जा जमा लिया था। मैकेनिकल इंजीनियर तमाल काबुल के कर्दन इंटरनेशनल स्कूल में फिजिक्स और केमिस्ट्री पढ़ाते थे। मैकेनिकल इंजीनियर की ट्रेनिंग के वक्त से तमाल अपने स्कूल के स्टाफ क्वार्टर में रह रहे थे। हालाँकि, तालिबान के काबुल शहर पर कब्जा करने के बाद उन्हें खुद को प्रिंसिपल के आवास के अंदर बंद होने के लिए मजबूर होना पड़ा।

तमाल ने आरोप लगाया कि उन्होंने भारतीय दूतावास से संपर्क किया, लेकिन कई प्रयासों के बावजूद वह हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक नहीं पहुँच सके। बाद में उन्होंने शुक्रवार (20 अगस्त) को रात 11 बजे हवाई अड्डे के गेट पर पहुँचने का दावा किया, लेकिन सरकारी अधिकारियों और दस्तावेजों की कमी के कारण अमेरिकी सुरक्षा बलों ने उन्हें वापस भेज दिया। उन्होंने कहा कि तालिबानी हवाई अड्डे के आसपास थे और उन्हें पास के एक विवाह कक्ष में रात बितानी पड़ी। आनंद बाजार पत्रिका से बात करते हुए तमाल ने कहा, ”कृपया पीएम मोदी और अमित शाह को सूचित करें, ताकि हमें जल्द से जल्द यहाँ से निकाला जा सके।”

आनंदबाजार पत्रिका की रिपोर्ट का स्क्रीनग्रैब

तमाल के माता-पिता के अनुसार, शनिवार (21 अगस्त) दोपहर को तालिबान ने तमाल को उठाया था। एबीपी आनंद ने बताया कि भारतीय नागरिक ने उन्हें व्हाट्सएप पर एक संदेश के माध्यम से वहाँ क्या हो रहा है इसके बारे में सूचित किया था। उसके माता-पिता ने दावा किया कि उसे कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने पूछताछ के बाद रिहा कर दिया था। आखिरकार, तमाल को 10 अन्य बंगाल निवासियों के साथ भारतीय वायु सेना (IAF) के कर्मियों वहाँ से बाहर निकाला। वह शनिवार देर रात फ्लाइट में सवार हुए और रविवार सुबह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुँचे।

तमाल ने अच्छे खाने और क्रिकेट के लिए तालिबान को धन्यवाद दिया

उसी दिन तमाल नई दिल्ली से फ्लाइट लेकर कोलकाता लौट गए। तमाल, जिसे भारत सरकार ने तालिबानियों से सफलतापूर्वक बचाया था, उसने घर पहुँचने के बाद तालिबान की प्रशंसा की। एबीपी न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, तमाल भट्टाचार्य ने दावा किया कि तालिबान ने न केवल उनके साथ अच्छा व्यवहार किया, बल्कि उन्हें अच्छा खाना भी खिलाया है। उन्होंने दावा किया, “तालिबानियों ने हमारे साथ क्रिकेट भी खेला।” इससे पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से तालिबान के नियंत्रण वाले काबुल से उन्हें तुरंत निकालने का अनुरोध किया था।

एबीपी आनंद की रिपोर्ट का स्क्रीनग्रैब

नेटिज़न्स ने तालिबान से बचाए गए भारतीय नागरिक के दोहरे मापदंड पर सवाल उठाया

तमाल भट्टाचार्य के दोहरे रवैया पर नेटिज़न्स चकित थे। ट्विटर यूजर कीया घोष ने टिप्पणी की, “तस्वीर 1: काबुल में फँसा एक व्यक्ति संकट में पीएम मोदी और अमित शाह से मदद की गुहार लगाता है। पीएम से खुद को तालिबानियों के कब्जे से निकालने का अनुरोध करता है। तस्वीर 2: कोलकाता में उतरने के बाद वह तालिबानियों की प्रशंसा करता है। उसने तो यहाँ तक कह दिया है कि उन्होंने हमारे साथ क्रिकेट खेला। ऐसा कहकर उन्होंने एक सच्चा कम्युनिस्ट होने का सबूत दिया है।”

एक अन्य यूजर ने अफसोस जताते हुए कहा, “उनके जैसे लोगों को निगरानी में रखना जरूरी है। आतंकियों का साथ देने वाला किसी आतंकी से कम नहीं होता। उनके (तमाल) जैसे लोग इस देश के लिए खतरनाक हैं।”

एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, “कौन है यह बेवकूफ? मैं भारत सरकार (GOI) से उसे (अफगानिस्तान) वापस भेजने का आग्रह करता हूँ।”

अफगानिस्तान के काबुल से 87 भारतीयों को लेकर एयर इंडिया का एक विशेष विमान रविवार (22 अगस्त) को दिल्ली के लिए रवाना हुआ था। शनिवार को भारतीय वायु सेना (IAF) का एक परिवहन विमान भारतीयों को काबुल से ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे ले गया था, जहाँ से उन्होंने भारत के ल‍िए उड़ान भरी थी।

उज्जैन में पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने वालों के बचाव में आए दिग्विजय सिंह, गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा- नहीं होगी नए सिरे से जाँच

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके दिग्विजय सिंह ने उज्जैन में पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी करने वालों का बचाव किया है । उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश पुलिस को वास्तविकता का पता लगाना चाहिए और यदि गिरफ्तारी हुई है तो प्रकरण वापस लेना चाहिए।

उज्जैन में 19 अगस्त 2021 को मुहर्रम के दिन ताजिया उठाने के दौरान पाकिस्तान समर्थित नारेबाजी की गई थी। इसके संबंध में ऑल्ट न्यूज की फैक्ट चेक रिपोर्ट को आधार मानते हुए कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीट करके कहा, “फेक न्यूज़ के आधार पर “काजी साहब जिंदाबाद” को “पाकिस्तान जिंदाबाद” बता कर कई लोगों पर मुक़दमे दायर हो गए। मप्र पुलिस को कार्रवाई करने के पूर्व वास्तविकता का पता लगा लेना चाहिए था। यदि गिरफ़्तारी हुई है तो प्रकरण वापस लेना चाहिए।”

दिग्विजय सिंह के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए हुए मप्र के गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि मध्य प्रदेश में तालिबानी सोच और राष्ट्र विरोधी मानसिकता वालों को नहीं बख्शा जाएगा। सिंह के बयान पर गृहमंत्री मिश्रा ने कहा कि दिग्विजय सिंह अपनी तुष्टिकरण की मानसिकता के चलते विरोधी लोगों के पक्ष में खड़े होते आए हैं और उन्हें ऐसे लोगों एक नेतृत्व कर पाकिस्तान ले जाना चाहिए। उन्होंने उज्जैन मामले की नए सिरे से जाँच की बात को सिरे से नकार दिया।

दिग्विजय सिंह ने ऑल्ट न्यूज की जिस रिपोर्ट को आधार माना है, उसमें यह दावा किया गया है कि सोशल मीडिया पर वायरल उज्जैन के वीडियो का एनालिसिस करने पर यह पता चलता है कि वीडियो में पाकिस्तान जिंदाबाद नहीं, बल्कि काजी साब जिंदाबाद का नारा लगाया गया था। ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा ने वीडियो के बेहतर क्वालिटी वाले क्लिप्स का एनालिसिस करने का दावा किया है।

ज्ञात हो कि गुरुवार (19 अगस्त 2021) को उज्जैन में मोहर्रम के अवसर पर देश विरोधी नारे लगाने का मामला सामने आया था। गीता कॉलोनी में मोहर्रम का ताजिया उठ रहा था, इसी दौरान देश विरोधी नारे लगे और कई युवक पाकिस्तान जिंदाबाद चिल्लाने लगे। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपितों की पहचान की थी और 15 लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में शनिवार की शाम तक 12 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।