Home Blog Page 3469

तमाल भट्टाचार्य के लिए अब तालिबान ‘भरोसेमंद’ भी, इस्लामपरस्त गदगद: अफगानिस्तान से बचाकर लाई थी मोदी सरकार

‘अच्छा खाना’ और ‘क्रिकेट खेलने’ के लिए तालिबान की तारीफो के पुल बाँध चुके कोलकाता के तमाल भट्टाचार्य ने अब कट्टरपंथी इस्लामी संगठन को ‘भरोसेमंद’ भी बताया है। तमाल उन 10 बंगालियों में से एक हैं, जिन्हें 21 अगस्त की रात भारत सरकार अफगानिस्तान के हामिद करजई इंटरनेशल एयरपोर्ट से सुरक्षित बचाकर लाई थी। टीवी9 को दिए इंटरव्यू में तमाल ने तालिबान की भरोसेमंद होने के लिए की सराहना की।

उन्होंने कहा, ”हमने सोचा था कि वे (तालिबानी) हमें पकड़ लेंगे और मार डालेंगे। यह डर मेरे साथ 5-6 घंटे तक बना रहा, जब तक कि हमें कर्दन इंटरनेशनल स्कूल से सुरक्षित बाहर नहीं निकाला गया। हमने स्कूल के मालिक और वहाँ मौजूद तालिबानियों से बातचीत की। उन्होंने हमें आश्वासन दिया कि डरने की कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि वे हमारी रक्षा करेंगे। तालिबानियों ने मुझे और अन्य सभी शिक्षकों की रक्षा करने का वादा किया और सच्चाई भी यही है कि तालिबान ने अपना वादा निभाया।”

तमाल के विवादास्पद दावों को कट्टरपंथी इस्लामवादियों का भारी समर्थन मिला है, जो तालिबान द्वारा किए जा रहे अत्याचारों को उचित ठहराने के अवसरों की तलाश कर रहे थे। ट्विटर पर मोजम्मल हक सोहेल ने लिखा, “तमाल भट्टाचार्य एक भारतीय शिक्षक हैं, जो कल (रविवार) रात भारत लौटे। उन्होंने तालिबान की तारीफ की। उन्होंने कहा कि तालिबान के खिलाफ मीडिया में जो कुछ हो रहा है वह सब दुष्प्रचार है, यह बेहद घटिया मीडिया है।”

मोजम्मल हक सोहेल के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

बांग्लादेश के एक कट्टरपंथी इस्लामवादी, नज़न अहमद ने भी भारतीय मीडिया को गलत साबित करने के लिए तमाल भट्टाचार्य को धन्यवाद दिया। काबुल से रविवार (22 अगस्त) को भारत वापस लौटे तमाल ने एक लाइव इंटरव्यू में पूरी भारतीय मीडिया को गलत साबित कर दिया। उन्होंने कहा, “तालिबानी बहुत मिलनसार थे और महिलाओं सहित सभी की रक्षा करते थे। उनके मजहब से जुड़े कानूनों का सम्मान करते हुए, मैं कह रहा हूँ कि उन्होंने बहुत अच्छा काम किया है।”

नज़न अहमद का ट्वीट

एक फैसल सीजर नाम के शख्स ने लिखा, “बांग्लादेश की प्रिया साहा जैसे लोग देशद्रोही और झूठे हैं, लेकिन भारत में तमाल भट्टाचार्य जैसे कुछ लोग हैं, जो सच बोलने से पीछे नहीं हटते। पेड मीडिया जो तालिबान के बारे में नफरत फैला रहा है, उसे इस आदमी से सीखना चाहिए।”

फैसल सीजर का ट्वीट

तमाल द्वारा तालिबान की कार्रवाई को उचित ठहराने के बाद, पश्चिमबंग्लर मुस्लिम कोंथो (पश्चिम बंगाल की मुस्लिम आवाज)’ के नाम से एक फेसबुक पेज ने उनकी टिप्पणी का सहारा लेते हुए दावा किया, ”इस्लाम कभी भी महिलाओं के खिलाफ नहीं है। इस्लाम वर्तमान में एकमात्र ऐसा मजहब है, जो लैंगिक समानता की बात करता है और यही सच्चाई है। महिलाओं को संबोधित करते हुए तालिबान ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वे पढ़ सकती हैं और काम कर सकती हैं, लेकिन पुरुषों के साथ नहीं।”

फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनग्रैब

पश्चिम बंगाल के एसके फरीउद्दीन नाम के एक इस्लामवादी ने फेसबुक पर पोस्ट किया, “सार्वजनिक रूप से (तालिबान के बारे में) सच्चाई को सामने लाने के लिए तमाल भट्टाचार्य का बहुत-बहुत धन्यवाद।” वीडियो में, तमाल को यह दावा करते हुए सुना जा सकता है कि काबुल में सब कुछ बिल्कुल ठीक है और दुकानें व स्टोर हमेशा की तरह चल रहे हैं। उन्होंने ‘शरिया कानून’ की भी तारीफ करते हुए कहा था कि तालिबान शासन में छल और धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने शरिया कानून के फायदे बताते हुए कहा कि नई व्यवस्था में ग्राहकों को 150 रुपए में परोसे जाने वाले मीट (नान कबाब) की मात्रा अब दोगुनी हो गई है।

एसके फरीउद्दीन के फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनग्रैब

गौरतलब है कि बीते दिनों ‘अच्छा खाना’ और ‘क्रिकेट खेलने’ के लिए तमाल भट्टाचार्य ने तालिबान की प्रशंसा की थी। घर लौटने के बाद तमाल भट्टाचार्य ने तालिबान की प्रशंसा कर विवाद खड़ा कर दिया। उत्तरी दमदम इलाके के निमटा में रहने वाले 34 वर्षीय तमाल अफगानिस्तान में तब से फँसे हुए थे, जब से तालिबान ने काबुल पर कब्जा जमा लिया था। मैकेनिकल इंजीनियर तमाल काबुल के कर्दन इंटरनेशनल स्कूल में फिजिक्स और केमिस्ट्री पढ़ाते थे। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की ट्रेनिंग के वक्त से तमाल अपने स्कूल के स्टाफ क्वार्टर में रह रहे थे। हालाँकि, तालिबान के काबुल शहर पर कब्जा करने के बाद उन्हें खुद को प्रिंसिपल के आवास के अंदर बंद होने के लिए मजबूर होना पड़ा।

एबीपी न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, तमाल भट्टाचार्य ने दावा किया कि तालिबान ने न केवल उनके साथ अच्छा व्यवहार किया, बल्कि उन्हें अच्छा खाना भी खिलाया है। उन्होंने दावा किया, “तालिबानियों ने हमारे साथ क्रिकेट भी खेला।” इससे पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से तालिबान के नियंत्रण वाले काबुल से उन्हें तुरंत निकालने का अनुरोध किया था।

अकाली दल ने किया था CAA का विरोध, अफगानिस्तान के हालात देख सिरसा के बदले सुर: गुरुग्रंथ साहिब को सिर पर रख चले मोदी के मंत्री

अफगानिस्तान में सिखों के लिए आखिरी उम्मीद भी ख़त्म हो गई हैं, क्योंकि वहाँ के गुरुद्वारे भी सुरक्षित नहीं हैं। अफगानिस्तान से सिखों की पवित्र पुस्तक गुरु ग्रन्थ साहिब की तीन प्रतियाँ भारत लाई गई हैं। गुरु ग्रन्थ साहिब को ‘आदिग्रन्थ’ भी कहा जाता है। अफगानिस्तान से कई सिख पहले ही बचा कर भारत लाए गए हैं, जिनमें एक सिख सांसद भी शामिल हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी इस दौरान मौके पर उपस्थित रहे।

उन्होंने पवित्र गुरु ग्रन्थ साहिब की प्रतियों को नई दिल्ली में रिसीव किया। उन्होंने अपने सिर पर रख कर उन प्रतियों को प्राप्त किया। लोगों का कहना है कि ये घटना अफगानिस्तान में सिख परंपरा के खात्मे की ओर इशारा करती है। इससे पहले 25 मार्च, 2020 को गुरुद्वारा हर राय साहिब में इस्लामिक स्टेट ने हमला कर दिया था। इसमें 25 लोग मरे थे। तब गुरु ग्रन्थ साहिब की 7 प्रतियाँ लाई गई थीं।

इसके बाद अब अफगानिस्तान में गुरु ग्रन्थ साहिब की सिर्फ तीन प्रतियाँ ही रह गई हैं। सिखों ने बताया कि काबुल, गजनी और जलालाबाद के गुरुद्वारों से इन प्रतियों को काफी भारी मन से भारत लाया गया है। गुरु नानक देव ने कभी अफगानिस्तान की यात्रा की थी और शांति, भाईचारे एवं सहिष्णुता का संदेश दिया था। उनके उस दौरे में ही वहाँ सिख परंपरा की नींव पड़ी। तीन सिख इन तीन प्रतियों को लेकर दिल्ली पहुँचे।

इसी बीच मनजिंदर सिंह सिरसा ने CAA के कटऑफ डेट को दिसंबर 2014 से बढ़ा कर 2021 तक करने की माँग की है। ‘अकाली दल’ के नेता और ‘दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमिटी’ के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि अफगानिस्तान से आने वाले लोगों की मदद के लिए वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से माँग करते हैं कि CAA के कटऑफ डेट को बढ़ा कर 2021 किया जाए।

उन्होंने दावा किया कि इससे तालिबान के संकट के बीच अफगानिस्तान से भारत लौटने वाले लोगों को यहाँ सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार मिलेगा और साथ ही बच्चों की शिक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी। बता दें कि सिरसा हाल ही में ‘किसान आंदोलन’ में खासे सक्रिय रहे हैं और प्रदर्शनकारियों के लिए आयोजित लंगर में उनकी बड़ी भूमिका रही है। गुरुद्वारा कमिटी ने प्रदर्शनकारियों की काफी मदद की थी।

जहाँ एक तरफ अब उन्हें CAA याद आ रहा है, उनकी पार्टी इस नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करती रही है। अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल कहते हैं कि CAA में मुस्लिमों को भी जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया था कि पंजाब में कई पीड़ित मुस्लिम भी भारत की नागरिकता लेना चाहते हैं। उन्होंने ‘ये देश सबका है’ बयान देते हुए कहा था कि हर समुदाय को भारत का हिस्सा महसूस कराने की जिम्मेदारी भारत सरकार की है।

ओलंपिक मेडलिस्ट पहलवान रवि दहिया ने भगवान शिव का किया जलाभिषेक, अंदाज देख लोगों ने बताया- असली बाहुबली

टोक्यो ओलंपिक 2020 में शानदार प्रदर्शन के साथ देश को ‘सिल्वर’ मेडल दिलाने वाले पहलवान रवि दहिया की हाल में कुछ तस्वीर सामने आई हैं। इन तस्वीरों में रवि दहिया अपने घर पहुँचने के बाद शिव मंदिर में शिवलिंग पर जलाभिषेक करते नजर आ रहे हैं।

राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक पत्रिका पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर ने रवि दहिया की तस्वीरों को शेयर करते हुए बताया कि पहलवान के घर में ओलंपिक पदक जीतने की मनोकामना माँगी गई थी। उन्होंने लिखा, “ओलंपिक पदक जीतने की मनोकामना के साथ पहलवान रवि दहिया के घर में अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित थी। संकल्प पूरा हुआ, मनोकामना पूरी हुई, और फिर महादेव का जलाभिषेक! धर्मो रक्षति रक्षितः।”

अब रवि दहिया की यही तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल है। लोग उनके अंदाज को देखकर उन्हें वास्तविक जीवन का बाहुबली बता रहे हैं। कांति गला नामक यूजर लिखते हैं, “2014 के बाद पहली बार हमारे आइकन्स, सेलेब्रिटी, स्पोर्ट्समैन खुलकर अपने हिंदू कल्चर को दिखाने में शर्म या डर महसूस नहीं कर रहे। आशा है कि हमारे फिल्म स्टार हमारे खिलाड़ियों से सबक लेंगे और फर्जी सेकुलरिज्म से निकलने के बाद धर्म को फॉलो करना शुरू करेंगे।”

सोशल मीडिया यूजर पवन पांडे तो रवि दहिया की इन तस्वीरों को देखने के बाद उस लिबरल जमात पर तंज कसते हैं, जिन्हें हिंदू रीति-रिवाजों से हमेशा दिक्कत होती है। वह लिखते हैं, “अरे ये तो सेकुलरिज्म नहीं है। घी दूध खराब कर दिया भूखे बच्चों को दे देते।”

उल्लेखनीय है कि ये पहली दफा नहीं है जब कुश्ती पहलवान रवि दहिया ने शिव भगवान के प्रति अपनी आस्था का प्रदर्शन किया हो। इससे पहले भी वो उत्तराखंड के तुंगानाथ में स्थित सबसे ऊँचे शिव मंदिर में दीपक पुनिया समेत कई लोगों के साथ ट्रेकिंग करने गए थे।

‘मोटिवेटर’ विक्रांत महाजन से की मुलाकात

बता दें कि ओलंपिक में सिल्वर मेडल लाने के बाद रवि दहिया सोमवार (अगस्त 23, 2021) को अपने मोटिवेटर विक्रांत महाजन के पास गए थे। दहिया ने कहा, “एक खिलाड़ी के जीवन में मेंटर की अहम भूमिका होती है और विक्रांत महाजन ने उनका सही मार्गदर्शन किया है और आज इसका नतीजा सभी के सामने है।”

जानकारी के मुताबिक दहिया की महाजन से कुछ वर्ष पहले मुलाकात हुई थी, उस समय महाजन ने टोक्यो खेलों के लिए भारतीय एथलीटों को प्रेरित करने के लिए ‘गोएथलीट’ प्रोग्राम नामक एक अभियान शुरू किया था।

दहिया ने अपने गुरु की प्रशंसा करते हुए कहा, “शुरुआत में मेरा लक्ष्य सिर्फ ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना था, लेकिन विक्रांत ने मुझे पदक के लिए लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया और मुझे इसके लिए पूरे दिल से प्रतिबद्ध होने के लिए कहा।”

पहलवान रवि दहिया कहते हैं कि उनके पास अगले दस साल का विजन तैयार और अभी बस शुरुआत हुई है। एएनआई से बात करते हुए दहिया ने कहा, “कोच और मोटिवेटर दो अलग-अलग व्यक्ति हैं और इनकी भूमिका भी अलग है। हम स्पोर्ट्स मोटिवेटर की मदद से बेहतर परिणामों को प्राप्त कर सकते हैं।”

मालूम हो कि टोक्यो ओलंपिक 2020 में पुरुषों की 57 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती में रजत पदक विजेता रवि दहिया को हाल में कई जगहों पर सम्मानित किया गया था। उनके स्वागत में उनके गाँव में यूपी सरकार द्वारा एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन करवाया गया था। इसी तरह उनके सम्मान में दिल्ली सरकार ने उनके स्कूल का नाम उनके नाम पर रखने का फैसला किया था। 

अब मध्य प्रदेश के गुना में मुनव्वर राना पर FIR, महर्षि वाल्मीकि से की थी तालिबान की तुलना

महर्षि वाल्मीकि से तालिबान की तुलना करने के मामले में शायर मुनव्वर राना की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। मध्य प्रदेश के गुना में सोमवार (23 अगस्त 2021) को उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि भाजपा अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के राज्य सचिव सुनील मालवीय समेत वाल्मीकि समाज के कई लोगों ने शिकायत की थी।

मालवीय का आरोप है कि विवादित शायर ने महर्षि वाल्मीकि पर टिप्पणी कर न केवल उनका अपमान किया है, बल्कि वाल्मीकि समुदाय और हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने का काम किया है। गुना के पुलिस अधीक्षक राजीव मिश्रा ने बताया कि राना के खिलाफ कोतवाली थाने में मामला दर्ज किया गया है।

गौरतलब है कि राना ने बीते 19 अगस्त को न्यूज नेशन से बात करते हुए महर्षि वाल्मीकि की तुलना तालिबान से कर दी थी। विवादित शायर ने तालिबानियों को ‘अफगानी’ कहने की वकालत करते हुए कहा कि कल को वो बादशाह होंगे तो हमारा दूतावास वहाँ खुलेगा और वहाँ हमारे लोग व्यापार करेंगे। उन्होंने ‘तालिबान’ को एक ‘अच्छा लफ्ज’ बताते हुए कहा कि इसका मतलब होता है ‘छात्र’, अर्थात पढ़ने वाला।

इसके साथ ही राना ने कहा था, “वाल्मीकि रामायण लिख देता है तो वो देवता हो जाता है, उससे पहले वो डाकू होता है। इंसान का कैरेक्टर बदलता रहता है। वाल्मीकि का जो इतिहास था, उसे तो हमें निकालना पड़ेगा न। हमें तो अफगानी अच्छे लगते हैं। वाल्मीकि को आप भगवान कह रहे हैं, लेकिन आपके मजहब में तो किसी को भी भगवान कह दिया जाता है। वो लेखक थे। उनका काम था रामायण लिखना, जो उन्होंने किया।”

राना के इस बयान को वाल्मीकि समाज ने हिन्दुओं की आस्था के साथ किया गया खिलवाड़ बताया था। इसके बाद राना के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने राना के खिलाफ SC/ST एक्ट और धारा 153A, 295A और 501(1)(B) के अंतर्गत केस दर्ज किया था। अब मध्य प्रदेश के गुना में दर्ज किए गए केस को भी लखनऊ के हजरतगंज ट्रांसफर किया जाएगा।

काबुल में यूक्रेन के विमान को अज्ञात लोगों ने किया हाईजैक, ईरान ने खारिज किया दावा: रिपोर्ट्स

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से यूक्रेन के एक विमान को अज्ञात लोगों द्वारा हाईजैक करने की खबर आ रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये विमान यूक्रेनी नागरिकों को बाहर निकालने के लिए अफगानिस्तान पहुँचा था। यूक्रेन के डिप्टी विदेश मंत्री येवगेनी येनिन ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। वहीं, रूसी मीडिया का दावा है कि इस प्लेन को हाईजैक के बाद ईरान की तरफ ले जाया जा रहा है।

रूसी न्यूज एजेंसी ताश की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन के डिप्टी विदेश मंत्री येवगेनी येनिन (Yevgeny Yenin) ने कहा, “रविवार को कुछ लोगों द्वारा हमारे विमान को हाईजैक कर लिया गया। हाईजैकर्स हथियारों से लैस थे। मंगलवार को ये विमान गायब कर दिया गया। यूक्रेनी लोगों को एयरलिफ्ट करने के बजाय विमान में सवार कुछ अज्ञात लोग इसे ईरान ले गए। हमारे तीन अन्य एयरलिफ्ट प्रयास भी सफल नहीं हो पाए, क्योंकि हमारे लोग एयरपोर्ट तक नहीं पहुँच पाए।”

रिपोर्ट के अनुसार, येवगेनी येनिन ने मीडिया को यह भी जानकारी दी, “22 अगस्त को हमें पता चला कि हमारे एक प्लेन को हाईजैक कर लिया गया। फिर 24 अगस्त को पता चला कि विमान चोरी कर लिया गया है। यह प्लेन यूक्रेन के नागरिकों को एयरलिफ्ट करने के बजाए यात्रियों के एक अज्ञात समूह के साथ ईरान की तरफ ले जाया जा रहा है।”

रूसी न्यूज एजेंसी ताश की खबर के अनुसार, यह दावा किया गया कि रविवार को 31 यूक्रेनी नागरिकों सहित 83 लोगों के साथ एक सैन्य विमान अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से यूक्रेन की राजधानी कीव पहुँचा। यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया कि इस विमान के जरिए 12 यूक्रेनी सैन्यकर्मियों की स्वदेश वापसी हुई है। इसके अलावा, विदेशी पत्रकार और मदद माँगने वाले कुछ लोगों को भी बाहर निकाला गया है।

वहीं दूसरी तरफ, ईरान ने यूक्रेन के इस बात का खंडन किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ ईरान के एविएशन रेगुलेटर ने यूक्रेन के दावे का खंडन करते हुए कहा कि यूक्रेनी विमान 23 अगस्त की रात मशहद में फ्यूल के लिए रुका और फिर यूक्रेन चला गया और रात 9:50 बजे कीव पहुँचा।

रिपोर्ट के अनुसार, येवगेनी येनिन ने इस मामले में आगे कुछ भी नहीं बताया है कि विमान का क्या हुआ, यूक्रेन इस विमान को वापस लेगा या नहीं और यूक्रेन इस विमान को वापस लेने के लिए क्या कर रहा है?

अपडेट: वहीं मेहर न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट में यूक्रेन के विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि यूक्रेन के किसी भी विमान का अपहरण नहीं हुआ है। ईरान ने भी ऐसे किसी दावे का खंडन किया है कि यूक्रेन का विमान हाईजैक करके ईरान लाया गया है। अभी तक की यही रिपोर्ट है आगे जो भी होगा स्थिति पूरी तरह से क्लियर होते ही स्पष्ट कर दी जाएगी।

‘गोलू बनकर आया… हाथ पकड़े-गाल छूए’: 13 साल की बच्ची ने इंदौर के चूड़ी वाले तस्लीम की बताई करतूत, POCSO एक्ट के तहत केस

मध्य प्रदेश के इंदौर में चूड़ीवाले की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इंदौर पुलिस ने 25 वर्षीय चूड़ी विक्रेता तस्लीम अली के खिलाफ 13 साल की बच्ची को गलत तरीके से छूने और परेशान करने का मामला दर्ज किया है।

वायरल वीडियो में अली को गोविंद नगर इलाके में कुछ लोगों द्वारा पीटते देखा गया था। इसके बाद इंदौर पुलिस ने तीन मुख्य आरोपितों समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पुलिस अब तक दो मुख्य आरोपितों राकेश पवार और राजकुमार भटनागर को गिरफ्तार कर चुकी है।

यह घटना तब सुर्खियों में आई जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो साझा किया गया, जिसमें चूड़ी विक्रेता तस्लीम अली को लोगों के एक समूह द्वारा पीटते हुए दिखाया गया था। वीडियो में एक शख्स उसकी पिटाई कर रहा था और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए उकसा रहा था। इस वीडियो पर नेटिजन्स के एक वर्ग ने जमकर अपनी भड़ास निकाली।

कॉन्ग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा, “यह वीडियो अफगानिस्तान का नहीं बल्कि इंदौर का है। सीएम शिवराज चौहान के सपनों की भूमि में एक मुस्लिम चूड़ी विक्रेता को लूटा जा रहा है। नरेंद्र मोदी, क्या आपको यह भारत चाहिए था? इन आतंकियों के खिलाफ कब कार्रवाई होगी?”

मामले में असली हकीकत सामने आने से पहले उनके ट्वीट को खूब शेयर किया गया।

पुलिस के अनुसार, जिस वक्त मारपीट करने वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज की जा रही थी तो उसी दौरान दूसरे समुदाय के लोगों के एक समूह ने थाने के बाहर भी विरोध-प्रदर्शन किया। अली की शिकायत के आधार पर, इंदौर पुलिस द्वारा आईपीसी की धारा 153-ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 141 (गैरकानूनी सभा), 147 (दंगा), 395 (डकैती), 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

एक वीडियो बयान में, पुलिस ने कहा कि पुलिस स्टेशन के बाहर जमा भीड़ ने पुलिस की एक नहीं सुनी, जबकि अली को पीटने वालों खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की जा रही थी। इसीलिए भीड़ जमा करने वालों के खिलाफ भी भड़काने का मामला दर्ज किया गया है। जिले में सभी थानों को अलर्ट कर दिया गया है और नागरिकों से किसी भी तरह के बहकावे नहीं आने को कहा गया है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर किसी भी रिपोर्ट को वेरिफाई किए बिना फॉरवर्ड नहीं करने की सलाह पुलिस ने दी है।

तस्लीम अली के खिलाफ केस

इस घटना को लेकर मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सोमवार (23 अगस्त) को ट्वीट किया था, ”इंदौर में दो समुदायों के बीच हुए विवाद के मामले में दोनों पक्षों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार एक विशेष समुदाय का व्यक्ति हिन्दू नाम रखकर चूड़ियाँ बेच रहा था, जिसके कारण सारा विवाद हुआ।” उन्होंने कहा, “हमारे यहाँ सावन महीने में बहन-बेटियों के चूड़ियाँ पहनने की परम्परा है, उसने महिलाओं को केवल चूड़ियाँ पहनाने के लिए हिन्दू नाम रखा था, जबकि वह किसी दूसरे समुदाय का है। इसी तरह से उसके पास से दो आधार कार्ड बरामद हुए हैं।”

अली के खिलाफ दर्ज शिकायत में नाबालिग लड़की ने कहा है कि वह रविवार दोपहर करीब दो बजे उसके घर आया था और उस दौरान बच्ची के पिता घर से बाहर थे। पीड़िता ने बताया है कि अली ने उसे चूड़ियाँ बेचने के लिए अपनी पहचान छुपाई और ‘आधा जला’ आधार कार्ड दिखाते हुए खुद को गोलू बताया। लड़की ने कहा, “वह रविवार दोपहर करीब 2 बजे हमारे घर आया था, जब मेरे पिता बाहर थे। उसने अपनी पहचान गोलू के रूप में बताई और आधा जला हुआ आधार कार्ड दिखाया। हमने उससे चूड़ियाँ खरीदना शुरू किया। जैसे ही मेरी माँ पैसे लेने गई, चूड़ी-विक्रेता ने मुझे गंदी नजर से देखते हुए मेरा हाथ पकड़ कर कहा, “मैं तुम्हें चूड़ियाँ पहनने में मदद करूँगा’। उसने मेरे गालों को भी गलत तरीके से छुआ।”

पीड़िता का कहना है कि जब आरोपित ने उसे छुआ तो वह चीख पड़ी। इससे पीड़िता की माँ घबरा गई और उसे बचाने के लिए दौड़ी, जिसके बाद अली ने कथित तौर पर लड़की को धमकाया और भाग गया। इस बीच पड़ोसियों और स्थानीय लोगों ने उसे पकड़ लिया। इंदौर पुलिस ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) और IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 471 (फर्जी दस्तावेजों को असली के रूप में उपयोग करना) के तहत मामला दर्ज किया है।

फर्जी पहचान पत्र का मामला

पुलिस के मुताबिक अली के पास से फर्जी दस्तावेज पाए गए। उसके पास दो आधार कार्ड थे। एक में नाम ‘मोर सिंह का बेटा असलम’ और दूसरे में ‘मोहर अली का बेटा तस्लीम’ था। पुलिस अधीक्षक आशुतोष बागरी ने कहा, “पुलिस को अली के कैरी बैग से अलग-अलग नामों के दो आधार कार्ड और एक जला हुआ मतदाता पहचान पत्र मिला है, जिसमें उसका नाम स्पष्ट नहीं था। लेकिन पिता के नाम के कॉलम में ‘मोहन सिंह’ छपा हुआ है। पुलिस को उसके पास से एक अलग नाम का वोटर आईडी कार्ड भी मिला है।

दूसरी ओर, मध्य प्रदेश के कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता अमीनुल खान सूरी ने अली का एक वीडियो साझा किया। इसमें अली कहता है, “कुछ साल पहले मेरे गाँव में मेरे निक नेम ‘भूरा’ के नाम से मेरा पहचान पत्र बनाया गया था, जबकि आधार कार्ड में मेरा नाम तस्लीम अली लिखा गया था। इनमें से कोई भी पहचान दस्तावेज नकली नहीं है और ये दोनों असली हैं।” हालाँकि, दो अलग-अलग नामों वाले आधार कार्ड रखने के मामले में अली ने कोई जवाब नहीं दिया है।

अली ने पाँच-छह लोगों के खिलाफ उसे पीटने की शिकायत दर्ज कराई है। उसने आरोप लगाया है कि भीड़ ने उसके खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और 10,000 रुपए नकद, मोबाइल फोन, पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज छीन लिए। उसका यही भी आरोप है कि भीड़ ने उसके पास से 25,000 रुपए कीमत की चूड़ियाँ भी छीन लीं।

नारायण राणे के खिलाफ 49 FIR, BJP दफ्तरों पर शिवसैनिकों की पत्थरबाजी: गिरफ़्तारी के लिए निकली नासिक व पुणे पुलिस

शिवसेना ने केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री नारायण राणे पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर विवादित टिप्पणी करने का आरोप लगाया है। पार्टी के सांसद विनायक राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर कहा है कि वो नारायण राणे को अपनी कैबिनेट से हटाएँ। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे के खिलाफ ‘निंदनीय टिप्पणी’ करने वाले नारायण राणे के पास पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।

उन्होंने पीएम मोदी को लिखा, “हमारे राज्य के मुख्यमंत्री को लेकर पत्रकार परिषद में पद की मर्यादा भूल कर नारायण राणे द्वारा जो टिप्पणी की गई, वो अत्यंत निंदनीय है। वो ऐसा कह कर समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं, यह मेरे समझ से परे है। ये हमारे देश के प्रधानमंत्री का अपमान है। मैं आपसे विनती व अनुरोध करता हूँ कि नारायण राणे से इस्तीफा लेकर उन्हें तुरंत मंत्रिपद से हटाया जाए। आशा है आप त्वरित कार्रवाई करेंगे।”

शिवसेना सुप्रीमो के खिलाफ टिप्पणी के लिए नारायण राणे के खिलाफ महाराष्ट्र में अब तक 3 FIR दर्ज किए जा चुके हैं। मुंबई में शिवसेना कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। पत्थरबाजी कर रहे शिवसेना कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा। इस घटना में नारायण राणे के दो समर्थकों के अलावा दो पुलिसकर्मी भी घायल हो गए हैं। रायगढ़ के महाद में सोमवार (23 अगस्त, 2021) को दिए गए एक बयान के कारण ये हंगामा हो रहा है।

आरोप के अनुसार, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने कहा था, ये शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री को ये नहीं पता कि हमें स्वतंत्र हुए कितने वर्ष हुए हैं। अपने भाषण के दौरान उन्होंने पीछे मुड़कर अपने सहयोगी से पूछा था। अगर मैं वहाँ होता तो उन्हें जोरदार थप्पड़ मारता।” मुंबई में नारायण राणे के घर के बाहर उनकी तस्वीरें जलाई गईं। शिवसेना के कार्यकर्ता पार्टी का झंडा लेकर उनके घर का घेराव करने पहुँचे थे।

नारायण राणे ने ये कह कर अपने बयान का बचाव किया है कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। उन्होंने कहा कि मीडिया को उनके बयानों की पुष्टि करनी चाहिए, वरना वो केस दायर करेंगे। PTI की खबर के अनुसार, जब गिरफ़्तारी की आशंका को लेकर राणे से सवाल पूछे गए तो उन्होंने पूछा कि क्या वो उन्हें एक साधारण व्यक्ति दिखते हैं? शिवसेना के यूथ विंग ‘युवा सेना’ के कार्यकर्ताओं ने भी गुंडागर्दी की।

महाराष्ट्र में कई जगह नारायण राणे को ‘मुर्गी चोर’ बताते हुए उनके पोस्टर्स लगाए गए। बता दें कि लगभग 50 वर्ष पहले चेम्बूर में एक पोल्ट्री की दुकान चलाया करते थे। वो भाजपा से पहले शिवसेना में हुआ करते थे और पार्टी के संस्थापक बाल ठाकरे के करीबी थे। महाद में ‘युवा सेना’ के नेता सिद्धेश पाटेकर ने नारायण राणे के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। नासिक की साइबर सिटी और पुणे पुलिस ने भी ऐसे FIR दर्ज किए हैं।

नारायण राणे के खिलाफ ‘भारतीय दंड संहिता (IPC)’ की धाराओं (विभिन्न धार्मिक, नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूहों या जातियों या समुदायों के बीच सद्भाव के ‌खिलाफ किया गया कृत्य, जिससे सार्वजनिक शांति भंग होती हो), 159 (लोक शांति को भंग करना), 504 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान करना उकसाना) 505 (विभिन्न समुदायों के बीच शत्रुता, घॄणा या वैमनस्य की भावनाएँ पैदा करने के आशय से असत्य कथन) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

पुणे पुलिस की एक टीम जाँच के लिए निकल भी गई है। नारायण राणे की जन आशीर्वाद यात्रा के खिलाफ इससे पहले 46 अन्य FIR भी दर्ज किए गए थे। उन पर कोरोना नियमों के उल्लंघन के आरोप में भी मामले दर्ज किए गए हैं। 39 FIR मुंबई में दर्ज हैं और 7 मित्र-भायंदर व वसई-विरार पुलिस में। नासिक में भी शिवसेना कार्यकर्ताओं ने भाजपा दफ्तर पर पत्थरबाजी की है। अमरावती और रत्नागिरी में भी विरोध प्रदर्शन हुए हैं।

नासिक पुलिस भी नारायण राणे की गिरफ़्तारी के लिए निकल गई है। वहीं नारायण राणे के बेटे विधायक नीतीश राणे ने आरोप लगाया है कि रत्नागिरी के पास उन्हें रोका गया है और मुंबई पुलिस ने उन्हें पीटने की धमकी दी है। नासिक पुलिस कमिश्नर ने दीपक पांडे ने उनकी गिरफ़्तारी के आदेश दिए हैं। शिवसेना कार्यकर्ताओं पर भाजपा कार्यकर्ताओं की पिटाई व दफ्तरों पर पत्थरबाजी के आरोप भी लगे हैं।

नारायण राणे ने कहा है कि वो जन-आशीर्वाद यात्रा को नहीं रोकेंगे और ये चलती रहेगी। उन्होंने पूछा कि उद्धव ठाकरे ने कुछ दिनों पहले जब भाजपा नेता सिद्धार्थ लाड के खिलाफ ऐसा ही बयान दिया था, तब उनके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? भाजपा की महाराष्ट्र यूनिट ने इसे बदले की कार्रवाई बताया है। 2019 लोकसभा चुनाव और दशहरा रैली में उद्धव ठाकरे द्वारा पीएम मोदी के खिलाफ दिए गए बयानों की पार्टी ने याद दिलाई है।

नीतीश राणे ने भी ट्विटर पर चेतावनी देते हुए लिखा, “खबर है कि युवा सेना के सदस्यों को हमारे जूहू आवास के बाहर इकट्ठा होने को कहा गया है। या तो मुंबई पुलिस उन्हें वहाँ जाने से रोके या फिर जो कुछ भी वहाँ होता है ये हमारी जिम्मेदारी नहीं होगी। शेर की माँद में जाने की हिम्मत मत करो। हम इंतजार कर रहे होंगे।” उन्होंने उद्धव ठाकरे के ‘रिश्तेदारों’ पर मुंबई पुलिस को गाली देने का आरोप भी लगाया।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री राणे ने 2005 में शिवसेना छोड़ दी थी। वह उद्धव ठाकरे के आलोचक रहे हैं। इतना ही नहीं बीजेपी की जन-आशीर्वाद यात्रा के खिलाफ शिवसेना शुरू से ही आक्रामक रही है। कोंकण का महाड़ इलाका शिवसेना का वर्चस्व वाला क्षेत्र माना जाता है। 1999 में बाल ठाकरे ने मुख्यमंत्री के रूप में उनके नाम को चुना था। हालाँकि, शिवसेना से मनमुटाव के बाद वो भाजपा में आ गए थे।

‘मुश्किल में सलमान खान को रोकने वाला अधिकारी’: CISF ने मीडिया रिपोर्टों को बताया झूठा

हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसमें एक CISF अधिकारी को अभिनेता सलमान खान को एयरपोर्ट पर रोकते हुए देखा गया था। अधिकारी ने नियम का पालन करते हुए सलमान खान को एयरपोर्ट के सिक्योरिटी चेक वाले दरवाजे से अंदर जाने के लिए कहा था। लोगों ने अपना कर्तव्य निभाने के लिए इस अधिकारी की तारीफ की थी।

इसके बाद कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि इस घटना के बाद इस अधिकारी की मुश्किलें बढ़ गईं है। सीआईएसएफ ने ऐसी रिपोर्टों को गलत बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि इस CISF अधिकारी का मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है। कहा गया था कि अधिकारी के खिलाफ इस घटना को लेकर एक मीडिया संस्थान से बात करने के लिए कार्रवाई की गई है। सीआईएसएफ ने ट्वीट कर इन सूचनाओं को गलत करार दिया है।

गौरतलब है कि सलमान खान फिल्म ‘टाइगर 3’ की शूटिंग के लिए रूस जा रहे थे। एयरपोर्ट के इंट्रेंस पर जाने के दौरान जब वे सिक्योरिटी चेक स्किप कर रहे थे तो उक्त CISF जवान ने उन्हें रोका था। उक्त CISF जवान की पहचान ASI सोमनाथ मोहंती के रूप में हुई है। सलमान खान के करीबियों का कहना है कि अभिनेता ने फैंस और फोटोग्राफरों से बचने के लिए ऐसा किया था। इस वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों ने उनकी प्रशंसा करते हुए कहा था कि सेलेब्रिटी हों या नेता, उन्हें नियम का पालन करना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि मीडिया रिपोर्टों के दावे के आधार पर हमने भी शुरुआती खबरें बनाई थी। सीआईएसएफ के हवाले से जानकारी आने के बाद सूचनाओं को अपडेट कर दिया गया है।

‘JNU और TISS के छात्रों को आतंकी संगठनों ने किया था भर्ती, अपनी सरकार बनाना चाहते थे भीमा-कोरेगाँव के आरोपित’: NIA

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने कहा है कि दिल्ली में स्थित JNU और मुंबई में स्थित TISS के छात्रों को भीमा-कोरेगाँव मामले में आतंकी गतिविधियों के लिए भर्ती किया गया था। NIA ने 17 पन्नों का एक दस्तावेज अदालत में डाफ्ट चार्जेज के रूप में पेश किया है। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) और टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) पहले से ही वामपंथी गतिविधियों के लिए बदनाम रहा है।

NIA ने बताया है कि इन दोनों ही शैक्षिक संस्थानों के छात्रों को आतंकी गतिविधियों के लिए बहाल किया गया था। भीमा-कोरेगाँव के जो आरोपित हैं, उन्हीं अर्बन नक्सलियों ने इन छात्रों को बहाल किया था। NIA के अनुसार, इन आरोपितों की साजिश थी कि सारे आरोपित प्रतिबंधित संगठनों से ताल्लुक रखते थे और एक समानांतर ‘जनता सरकार’ की स्थापना करना चाहते थे। साजिश थी कि सरकार की शक्ति को छीन कर एक सशस्त्र सत्ता खड़ी की जाए।

आरोपित CPI (माओवादी) के सदस्य थे। इनकी साजिश थी कि छात्रों को आगे कर के आतंकी गतिविधियों को किया जाए, ताकि इन्हें अंतरराष्ट्रीय संगठनों व बुद्धिजीवियों का समर्थन मिले। 15 आरोपितों के खिलाफ NIA ने 17 ड्राफ्ट आरोप तय किए हैं। ये आरोपित मानवाधिकार और सिविल अधिकारों के एक्टिविस्ट्स के रूप में एक अलग मुखौटा पहने हुए थे। इनके खिलाफ IPC UAPA की धाराएँ लगाई गई हैं।

आतंकवाद के लिए इन्होंने फंड्स भी इकट्ठे किए। इसके लिए प्रतिबंधित आतंकी संगठन के बैनर तले काम किए जा रहे थे। इनका मकसद था कि दलितों व अल्पसंख्यकों को सरकार के खिलाफ भड़काया जाए और उनमें देशविरोधी भावनाएँ भरी जाएँ। भारत सरकार व महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ ‘युद्ध’ के लिए हथियारों का वितरण भी किया गया था। नेपाल व मणिपुर के हथियार सप्लायर्स से इसके लिए संपर्क किया गया था।

हाल ही में भीमा-कोरेगाँव मामला तब चर्चा में आया था जब बॉम्बे हाईकोर्ट के जज जस्टिस एसएस शिंदे ने आतंकवाद के आरोपित स्टेन स्वामी की तारीफों के पुल बाँधे थे। बता दें कि स्टेन स्वामी नक्सली था। साथ ही वो भीमा-कोरेगाँव मामले में आरोपित भी था। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र लिख कर कहा था कि जस्टिस शिंदे को भीमा-कोरेगाँव केस से अलग होने को कहा जाए। स्टेन स्वामी की ट्रायल के दौरान ही मौत हो गई थी।

अधर में अफगान क्रिकेट, भारत में ‘तालिबान’ नाम से बन गई टीम; राजस्थान में अलादीन खाँ ट्राफी खेलने भी उतरी

राशिद खान जैसे कई अफगानी क्रिकेटरों ने पिछले कुछ सालों में पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। लेकिन तालिबान का शासन आने के बाद अफगानिस्तान में क्रिकेट के भविष्य को लेकर अनिश्चितता छा गई है। क्रिकेटर तनाव में हैं। दूसरी ओर, भारत के राजस्थान में तालिबान नामक एक क्रिकेट टीम के लोकल टूर्नामेंट में हिस्सा लेने की खबर सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान के जैसलमेर में अलादीन खाँ स्मृति क्रिकेट ट्रॉफी में तालिबान नाम की एक टीम ने हिस्सा लिया। इस टीम ने एक मैच खेला, जिसमें उसे जीत मिली। लेकिन सोशल मीडिया में आलोचना के बाद आयोजकों ने माफी माँगते हुए इस टीम को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया।

प्रतियोगिता के आयोजक इस्माइल खान ने सफाई पेश करते हुए कहा कि क्रिकेट के लिए ऑनलाइन आवेदन आए थे। इसी कारण इसको लेकर ध्यान नहीं रख पाए। हम सभी से माफी चाहते हैं। ज्ञात हो कि जैसलमेर के जेसूराना गाँव में हर साल इस टूर्नामेंट का आयोजन किया जाता है। इस साल यह 22 अगस्त 2021 से शुरू हुई थी।

फोकस नहीं कर पा रहे अफगान खिलाड़ी

तालिबान के कब्जे के बाद से क्रिकेट के दीवाने अफगानिस्तान की राष्ट्रीय टीम के कई खिलाड़ियों को खेल पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो रहा है। इस बीच 3 सितंबर से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच होने वाली वनडे सीरीज स्थगित कर दी गई है।

इन हालातों को लेकर तेज गेंदबाज नवीन-उल-हक ने बीबीसी रेडियो को दिए इंटरव्यू में बताया कि उनके साथियों की आँखों में, उनकी आवाज में और उनके संदेशों तक में डर बसा हुआ है। हक ने कहा, “तालिबान ने कहा है कि वे किसी खिलाड़ी को परेशान नहीं करेंगे, लेकिन कोई नहीं जानता।”

तालिबान के खौफ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि काबुल पर तालिबानी कब्जे से कुछ दिन पहले अफगानिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व राष्ट्रीय कप्तान मोहम्मद नबी ने दुनिया के नेताओं से अफगानिस्तान को अराजकता से बचाने की अपील की थी। दरअसल, अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी ने वर्ष 1996-2000 के वक्त ताजा कर दिया दिया है, जब उसने कट्टर इस्लामिक कानूनों को लागू किया था।