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किसान को विषैले करैत ने डँसा, गुस्से में साँप को चबा-चबा कर मार डाला… खुद है जिंदा: देखें VIDEO

ओडिशा के जाजपुर से हैरान कर देने वाला मामला प्रकाश में आया है। यहाँ एक शख्स को जहरीले करैत साँप ने काट लिया। इसके बाद बदले की भावना से व्यक्ति ने साँप को दाँतों से काट-काटकर मार डाला। महत्वपूर्ण बात यह रही कि व्यक्ति के काटने से साँप तो मर गया, लेकिन वह पूरी तरह से सुरक्षित रहा।

मामला जाजपुर जिले के दानागढ़ी ब्लॉक के सालिजंगा पंचायत के गंभारियापतिया गाँव का है। यहीं का रहने वाला 45 वर्षीय किसान किशोर बद्रा बुधवार (11 अगस्त 2021) को अपने खेत से रात में वापस घर लौट रहा था। इसी दौरान रास्ते में उसे उसके पैर में कुछ चुभता सा महसूस हुआ। किशोर बद्रा टार्च जलाकर देखा तो एक करैत उसके पैर पर बैठा था। साँप के काटने से गुस्साए युवक ने उसे पकड़ लिया और अपने दाँत से इतना काटा कि वो साँप ही मर गया। हालाँकि, बद्रा ने कहा, “मैंने साँप को काटा जरूर काटा था, लेकिन उसके काटने से मुझे किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई। मैंने अपने गाँव के ही एक वैद्य से अपना इलाज भी कराया था।”

इसके बाद युवक साँप को लेकर अपनी पत्नी के पास गया औऱ उसे साँप के दुस्साहस के बारे में बताया। साथ ही उसने यह भी बताया कि साँप से बदला लेने के लिए उसने उसे काटकर मार डाला। युवक द्वारा साँप को काट खाने की घटना गाँव में आग की तरह फैल गई। लोगों ने उसे डॉक्टर के पास भी जाने की सलाह दी, लेकिन युवक गाँव के ही एक पारंपरिक इलाज करने वाले के पास गया और अपना इलाज कराया। खास बात यह रही कि साँप के काटने का असर तो युवक को नहीं हुआ, लेकिन उसके काटने से साँप जरूर मर गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, की गिनती भारत के सबसे जहरीले साँपों में होती है। बताया जाता है कि इसका जहर कोबरा के जहर से भी अधिक खतरनाक होता है।

सपा कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे, वरिष्ठ नेता को धक्के मार भगाया: वीडियो वायरल होने पर कहा – ‘गर्मी के चलते हुआ’

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज में समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रदर्शन में पहुँचे पूर्व मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता रविदास मल्होत्रा को उनकी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन से धक्का मारकर किनारे कर दिया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद सपा के नगर अध्यक्ष ने बाद में सफाई भी दी।

पूरा मामला गुरुवार (12 अगस्त 2021) का है। दरअसल लखनऊ में हजरतगंज के बालू अड्डा इलाके में गंदा पानी पीने के कारण कई लोग बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हो गए। इसके बाद सपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने नगर निगम कार्यालय में नगर निगम के खिलाफ प्रदर्शन किया और नगर आयुक्त को हटाने की माँग की।

सपा कार्यकर्ताओं के इस प्रदर्शन में शामिल होने वरिष्ठ नेता रविदास मल्होत्रा भी पहुँचे। हालाँकि अपनी पार्टी का साथ देने पहुँचे मल्होत्रा अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं को रास नहीं आए और उन्होंने मल्होत्रा को धक्का मार कर किनारे कर दिया।

इस घटना से सम्बंधित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इसके साथ ही समाजवादी पार्टी की आलोचना शुरू हो गई। इसके बाद सपा के नगर अध्यक्ष सुशील दीक्षित ने वीडियो जारी करके सफाई दी।

उन्होंने कहा कि वो मल्होत्रा को पहचान ही नहीं पाए। दीक्षित ने सफाई देते हुए कहा कि प्रदर्शन दोपहर के समय किया जा रहा था, ऐसे में वहाँ गर्मी का माहौल था, जिसके चलते उन्हें चक्कर आ रहा था और वह मल्होत्रा को नहीं पहचान पाए। उन्होंने कहा कि मल्होत्रा पार्टी के सबसे बड़े नेताओं में से हैं, ऐसे में पार्टी उनका पूरा सम्मान करती है।

‘गुरुजी माँगें बिरयानी, नियाज की बिरयानी कहे- अहम ब्रह्मास्मि’: हिंदू संतों की छवि धूमिल करने वाले विज्ञापन पर बवाल, MD ने माँगी माफी

कर्नाटक के बेलगावी में स्थित नियाज (NIYAAZ) होटल ने अपने बिरयानी के प्रचार के लिए हिंदू संतों की छवि धूमिल करने की कोशिश की है। विज्ञापन में देख सकते हैं कि संत के भेष में एक आदमी आसन पर भगवा पहने बैठा है और बाकी सभी अन्य लोग उसके अनुयायी बनकर उसे सुन रहे हैं।

नियाज के विज्ञापन में लिखा है, “गुरुजी, नियाज चखने के बाद कहते हैं बलिदान नहीं बिरयानी देना होगा।” यानी संत को बिरयानी इतनी पसंद आई है कि वह अब बलिदान नहीं, बल्कि बिरयानी की माँग कर रहा है।

विज्ञापन

इस पोस्ट को नियाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी शेयर किया था। इसमें लिखा था, “हमारी बिरयानी बाकी बिरयानियों से कहती है- अहम ब्रहास्मि।” अब इस पोस्ट के बाद हिंदू संगठनों ने बवाल मचाया हुआ है। हिंदुओं का कहना है कि ऐसे विज्ञापन का क्या मतलब। ये तो पूरी तरह उनकी आस्था को ठेस पहुँचाने का प्रयास है।

पुलिस ने क्षेत्र में किसी भी प्रकार की हिंसा को रोकने के लिए शहर के होटलों को बंद किया हुआ है और दुकान के बाहर पुलिस तैनात है। वहीं, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने भी पुलिस कमिश्नर से मिलकर उन्हें होटल प्रबंधन के ख़िलाफ़ ज्ञापन सौंपा है। इस मामले में कुछ स्थानीय भाजपा नेता भी हिंदुओं को आगे बढ़कर विरोध दर्ज कराने को कह रहे हैं। उन्होंने इस मामले में प्रबंधन के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस ने यही नाराजगी देख मौके पर पुलिस बल को तैनात किया है। इस बीच नियाज होटल ने भी विवादित पोस्टर को हटा दिया है और अपनी गलती के लिए क्षमा माँगते हुए वीडियो जारी की है। नियाज ग्रुप के एमडी इरशाद सौदागर इस वीडियो में कहते हैं कि इस (विज्ञापन के) कारण से जिन लोगों का भी दिल दुखा है, वह उनसे माफी माँगते हैं।

उन्होंने बताया कि मुंबई की एक एजेंसी है, जो सोशल मीडिया हैंडल करती है और उसी का उनके साथ कॉन्ट्रैक्ट है। वही लोग ये पोस्ट क्रिएटिव बनाकर शेयर करते हैं। वह कंपनी की गलती पर दिल से माफी माँगते हुए कहते हैं। उन्होंने कहा कि उनका काम 30-40 साल से चल रहा है और उनके ग्राहक हर समुदाय के हैं, साथ ही उनका स्टाफ भी हर समुदाय से है। वह कहते हैं कि नियाज़ समूह अब यह सुनिश्चित करेगा कि ऐसी कोई गतिविधि, यहाँ तक ​​कि अनजाने में, प्रचार या अन्यथा के माध्यम से न हो।

दिल्ली: 5 साल के बच्चे ने घर के बाहर पेशाब किया, गुस्साए नाबालिग पड़ोसी ने माँ की गला रेतकर हत्या की

बाहरी दिल्ली के अमन विहार इलाके में बुधवार (11 अगस्त) को एक नाबालिग लड़के ने मासूम बच्चे के सामने उसकी माँ की हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि एक 5 साल के बच्चे ने अपने पड़ोसी के घर के बाहर खेलते वक्त पेशाब कर दिया था। इसको लेकर पड़ोस में रहने वाले 17 वर्षीय लड़के ने बच्चे की माँ की गला रेतकर हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपित को पास के इलाके से गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ समय पहले सविता के 5 साल के बेटे ने पड़ोस में रहने वाले एक नाबालिग के घर के बाहर पेशाब कर दिया था। इस बात पर उनके बीच काफी झगड़ा हुआ था, लेकिन पास के ही रहने वाले एक दुकानदार ने दोनों के बीच समझौता करा दिया था।

इसके बाद 11 अगस्त की रात को नाबालिग अपने घर के बाहर सविता के बेटे के पेशाब करने पर आग-बबूला हो गया। उसने जब इस बारे में बच्चे की माँ से बात की तो दोनों के बीच फिर से विवाद बढ़ गया। इसी बीच लड़के ने उस्तरा निकालकर सविता के गले पर वार कर दिया और वहाँ से फरार हो गया।

पुलिस ने बताया कि 11 अगस्त की रात करीब 11:30 बजे उन्हें सूचना मिली कि एक महिला की अमन विहार इलाके में उस्तरा मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस की टीम जब मौके पर पहुँची तो उन्होंने वहाँ एक महिला का शव देखा। पुलिस ने अमन विहार थाने में हत्या का मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

मृतक की पहचान सविता राणा उर्फ प्रिया के रूप में हुई है। 33 वर्षीय महिला महिला नर्सिंग का कोर्स करने के बाद इलाके में क्लीनिक चलाती थी। वह अपने अपने पति रोहित और 5 साल के बच्चे के साथ रहती थी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद आरोपित को पास के ही इलाके से पकड़ लिया है और जुवेनाइल कानून के तहत उस पर कार्रवाई कर रही है।

मो. मंसूरी ने 12 साल की बच्ची को आँख मारी, 100 का नोट दिखा बोला- ‘चल मेरे साथ’: कोर्ट ने सुनाई 4 साल की सजा

महाराष्ट्र के मुंबई की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 12 साल की नाबालिग लड़की को आँख मारने और 100 रुपए का नोट दिखाकर ‘चल मेरे साथ’ कहने के आरोपित को दोषी मानते हुए 4 साल जेल की सजा सुनाई है। आरोपित 28 वर्षीय मोहम्मद मंसूरी इस मामले में 2017 में गिरफ्तार किया गया था और जनवरी 2018 में जमानत पर बाहर आने के बाद वह फरार हो गया था। मंसूरी को 2018 में दोबारा गिरफ्तार किया गया था, तब से वह जेल में है।

पॉक्सो मामले की विशेष अदालत ने अपने फैसले में कहा, “आरोपित ने किसी दूसरे कारण से नहीं, बल्कि यौन शोषण करने के लिए इस तरह के इशारे किए थे।” कोर्ट ने कहा कि मंसूरी पहले से ही जेल में है, इसलिए कोर्ट की दी गई सजा में उस अवधि को भी शामिल किया जाएगा।

बच्ची की माँ ने कोर्ट को मार्च 2017 में ही बताया था कि उनकी बेटी रोती हुई उनके पास आई और मंसूरी की करतूतों के बारे में बताया। उसने बताया था कि आरोपी लड़की का पीछा करता था और उसे आँख मारकर इशारे करता था। बेटी की बात सुनने के बाद पीड़िता की माँ ने यह बात अपने पति को बताई। इसके तुरंत बाद महिला अपनी बेटी और पति के साथ मंसूरी की तलाश में गए। उन्होंने देखा कि मंसूरी पास के बाजार में आईसक्रीम खा रहा था। लड़की के बताने के बाद उसके पिता ने आरोपित को पकड़कर कसकर थप्पड़ मारा। इसके बाद लोगों की भीड़ ने उसे पुलिस को सौंपने से पहले खूब पीटा। उसे पुलिस स्टेशन ले जाया गया और एफआईआर दर्ज की गई।

इस मामले में वकील वीना शेलार ने सात लोगों से भी पूछताछ की, जिनमें बच्चा, उसकी माँ और एक शिक्षक शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में मोहम्मद मंसूरी की गिरफ्तारी के बाद उसे जमानत पर छोड़ दिया गया था, लेकिन मुकदमे की कार्यवाही में शामिल नहीं होने के बाद उसे फिर से गिरफ्तार कर लिया गया था।

वहीं, आरोपित ने दावा किया है कि लड़की ने उसे पहचानने में गलती की है। उसने नाबालिग को परेशान नहीं किया था। इसके साथ ही उसने यह भी तर्क दिया कि यह यौन उत्पीड़न का मामला नहीं है।

अदालत ने लड़की के साथ उसकी माँ की गवाही पर भरोसा किया और मंगलवार (10 अगस्त 2021) को अपने फैसले में कहा, “यह स्पष्ट है कि आरोपित ने दो से तीन मौकों पर पीड़िता का पीछा किया था और घटना की वास्तविक तारीख पर उसने उसे 100 रुपए का नोट दिखाया और उसका अपमान करने के इरादे से ‘चल मेरे साथ’ शब्द बोला। पीड़िता की एकमात्र गवाही आरोपित के अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त है।”

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‘3 आतंकी ब्लास्ट की जाँच कर रहे थे पत्रकार मनीष, जिहादियों ने की हत्या’: सुदर्शन टीवी के CEO सुरेश चव्हाणके

सुदर्शन टीवी के पत्रकार मनीष कुमार सिंह का शव 10 अगस्त 2021 को बिहार के हरसिद्धि थाना क्षेत्र के मथलोहियार गाँव के गाछी टोला चेवार में एक गड्ढे से बरामद किया गया था। वो तीन दिन से लापता थे। इलाके में लगे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने मनीष के अपहरण और हत्या के मामले में मोहम्मद अरसद आलम और अमरेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया है।

अब इस मामले में सुदर्शन न्यूज चैनल के सीईओ सुरेश चव्हाणके ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से मुलाकात की और अपने चैनल के पत्रकार की निर्मम हत्या की जाँच की माँग को लेकर एक पत्र सौंपा। चव्हाणके ने चिट्ठी को ट्वीट करते हुए कहा कि बिहार के मधुबनी के पत्रकार मनीष कुमार की हत्या सुदर्शन चैनल के काम से खुन्नस खाए बैठे जिहादियों ने की है।

पत्र में कहा गया है कि सुदर्शन न्यूज चैनल के पत्रकार मनीष सिंह अपनी निडर पत्रकारिता के कारण हमेशा भ्रष्ट और जिहादी मानसिकता वाले लोगों के निशाने पर थे। पत्र के अनुसार 7 अगस्त को मनीष सिंह के लापता होने की खबर मिली। इसके बाद जब उनके पिता ने पुलिस से शिकायत की तो पुलिस ने उदासीन रवैया दिखाते हुए कहा कि वो किसी लड़की के साथ गया होगा, खुद ही वापस आ जाएगा।

सुरेश चव्हाणके ने आरोप लगाया है कि मृतक मनीष के पिताजी ने बताया है कि जिन अपराधियों को पुलिस ने जल्दबाजी में गिरफ्तार किया है, उनके जरिए मनीष की हत्या को व्हाइटवॉश करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने पुलिस पर हत्या के पीछे के असली मकसद को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

मनीष के पिता का कहना है कि मनीष एक स्टोरी पर काम कर रहे थे और वही उनकी हत्या का कारण हो सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस इसकी जाँच करने के लिए इच्छुक नहीं है और बिना उचित जाँच के मामले को जल्दबाजी में बंद कर रही है।

सुरेश चव्हाणके ने कहा है कि मनीष बिहार में मोतिहारी और अरेराज जैसी जगहों पर तीन बड़ी आतंकवादी घटनाओं के लिंक को खंगाल रहे थे। जिन तीन बड़ी आतंकी घटनाओं की जाँच मनीष कर रहे थे, उसमें बाँका मस्जिद विस्फोट, दरभंगा पार्सल विस्फोट और सीवान विस्फोट शामिल है। उनका कहना है कि मनीष के पिता के अखबार में काम करने वाले स्थानीय पत्रकार अफजल आलम को मनीष की जाँच के बारे में पता चल गया था और वो उनसे लगातार इसके बारे में सवाल पूछता था। मनीष के पिता का आरोप है कि जब से पता चला कि मनीश सुदर्शन न्यूज में शामिल हुआ है, उनके दुश्मन कई गुना बढ़ गए थे। उनकी हत्या में जिहादी तत्व शामिल हैं।

चव्हाणके ने पत्र के अंत में कहा है कि मनीष के पिता के मुताबिक उनकी (मनीष) हत्या करने वाले जिहादी तत्व देश भर में सुदर्शन न्यूज के पत्रकारों के लिए भी खतरा बड़ा हैं। सुरेश चव्हाणके ने मनीष की हत्या की निष्पक्ष जाँच की माँग की है।

सुदर्शन न्यूज के पत्रकार मनीष सिंह की हत्या

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 8 अगस्त 2021 को मनीष हरसिद्धि थाना क्षेत्र के मठ लाहौरिया गाँव में एक समारोह में शामिल होने के लिए घर से निकले थे, लेकिन उसके बाद से ही उनका फोन स्विच ऑफ आ रहा था। बाद में उनकी बाइक हरसिद्धि गाँव में मिली थी। मनीष को लगातार जान से मारने की धमकियाँ मिल रही थीं और उनका जमीन का विवाद भी चल रहा था। विवाद को लेकर संजय सिंह ने 25 जुलाई को स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

मनीष के लापता होने के बाद, उसके पिता ने हरसिद्धि पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने दो पत्रकारों समेत 12 लोगों का नाम लिया था। ये दो पत्रकार मोहम्मद अरसद आलम और अमरेंद्र सिंह हैं।

मामले की जाँच के दौरान पुलिस को स्थानीय लोगों ने एक शव मिलने की सूचना दी। मौके पर पहुँची पुलिस ने शव की शिनाख्त के लिए संजय सिंह को बुलाया। शव फूला हुआ औऱ क्षत-विक्षत था। हालाँकि, संजय सिंह ने जूते से मनीष की पहचान की। रिपोर्ट्स के अनुसार हत्यारों ने मनीष को बहुत टॉर्चर किया था, उनकी आँखें निकाल ली गई थीं और उसके चेहरे पर चोट के निशान थे।

राहुल गाँधी को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सीनियर वकील बोल रहीं झूठ, तोड़-मरोड़ रहीं कानून को?

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी का ट्विटर एकाउंट अस्थायी तौर पर लॉक किया गया है और माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ने कहा है कि यह कार्रवाई POCSO एक्ट के अंतर्गत राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के द्वारा दिए गए आदेश के बाद की गई है। ट्विटर ने बुधवार (11 अगस्त 2021) को दिल्ली की अदालत में सूचना दी कि राहुल गाँधी ने नाबालिग रेप पीड़िता के परिवार के सदस्यों की फोटो एक ट्वीट में शेयर करके ट्विटर की नीतियों का उल्लंघन किया है।

इसके बाद कई कॉन्ग्रेस नेताओं ने अपनी प्रोफाइल फोटो में राहुल गाँधी लिखकर ट्विटर का विरोध किया और उसे एक पक्षपाती सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बताया। खुद राहुल गाँधी ने यूट्यूब पर वीडियो पोस्ट कर ट्विटर द्वारा की गई कार्रवाई को गलत बताते हुए उस पर मोदी सरकार के इशारों पर काम करने का आरोप लगाया।

हालाँकि, सिर्फ कॉन्ग्रेस नेता ही राहुल गाँधी के एकाउंट को लॉक किए जाने को लेकर परेशान नहीं हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने भी राहुल गाँधी के खिलाफ ट्विटर की कार्रवाई के संबंध में नाबालिग पीड़ितों के लिए बनाए गए कानून को लेकर झूठी जानकारी दी।

इंदिरा जयसिंह ने राहुल गाँधी का बचाव करते हुए लिखा कि रेप पीड़ित की पहचान उजागर न करने का प्रावधान जीवित पीड़ित के लिए लागू होता है न कि मृत पीड़ित के लिए। अपने ट्वीट के साथ उन्होंने ट्विटर इंडिया, शशि थरूर और राहुल गाँधी को टैग किया।

अक्सर राष्ट्रहितों के विपरीत आचरण करने वाली और आतंकियों एवं अर्बन नक्सल की सहायता करने वाली इंदिरा जयसिंह ने राहुल गाँधी के बचाव में अपने ट्वीट में दो बिंदुओं पर गुमराह करने का कार्य किया है। पहला यह कि कानून सिर्फ जीवित पीड़ितों की पहचान उजागर न करने के लिए प्रतिबद्ध है और दूसरा यह कि अगर पीड़ित की मौत हो जाती है तो उसकी पहचान उजागर न करने से रोकने का कोई औचित्य ही नहीं बनता है। हालाँकि, कानून इस मामले में पूरी तरह से स्पष्ट है।

जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2015 की धारा 74 के अंतर्गत बच्चे की पहचान को किसी भी तरह के मीडिया में उजागर करने की मनाही है और POCSO एक्ट, 2012 की धारा 23 भी ऐसा करने से रोकती है। POCSO एक्ट के अंतर्गत जिस पहचान को उजागर करने को प्रतिबंधित किया गया है उसमें बच्चे का नाम, पता, परिवार की जानकारी, फोटो, स्कूल, पड़ोसी और अन्य ऐसी जानकारी जिससे बच्चे की पहचान सामने आती हो, शामिल हैं। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के अंतर्गत ऐसा करने की अनुमति है लेकिन जब पीड़ित के हित के लिए ऐसा करना आवश्यक लगे और इसके लिए भी बोर्ड ऑफ कमेटी अनुमति प्रदान करे।

जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2015 की धारा 74
POCSO एक्ट, 2012 की धारा 23

सरकार 2018 में यह स्पष्ट कर चुकी है कि इन दोनों कानूनों के प्रावधान मृत पीड़ितों पर भी लागू होंगे। NCPCR के मीडिया एडवाइजर जी मोहंती ने 2018 में कहा था कि सरकार का यह स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण है, क्योंकि अक्सर मीडिया समूहों और पुलिस द्वारा गलती की जाती है लेकिन सरकार के स्पष्टीकरण से साफ है कि मृत पीड़ित की पहचान को उजागर नहीं किया जाना चाहिए।

ऑपइंडिया से बात करते हुए NCPCR प्रमुख प्रियंक कानूनगो ने बताया कि ये कानून सिर्फ पीड़ित नहीं बल्कि उसके भाई-बहनों और परिवार के सदस्यों की सुरक्षा के लिए भी कार्य करते हैं। उन्होंने बताया कि अगर पीड़ित की पहचान उजागर होती है तो न केवल पीड़ित बल्कि उसके परिवार के सदस्यों के जीवन पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ सकता है, ऐसे में अगर पीड़ित की मौत हो चुकी है तो भी उसकी पहचान को उजागर करना गैर-कानूनी है।

कानूनगो ने आगे बताया कि सिर्फ जिला सत्र न्यायाधीश ही पीड़ित या उससे जुड़ी पहचान को सार्वजनिक करने की अनुमति दे सकता है, अगर यह पीड़ित के हित में हो। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित के परिवार के सदस्यों को भी इसकी अनुमति नहीं है।

दिल्ली हाईकोर्ट में रेप पीड़िता के परिवार के सदस्यों की पहचान को उजागर करने के कारण राहुल गाँधी के खिलाफ NCPCR के द्वारा कार्रवाई करने की माँग करते हुए याचिका दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान ट्विटर ने बताया कि उसके द्वारा कार्रवाई करते हुए राहुल गाँधी का ट्वीट हटाया गया और उनका एकाउंट अस्थायी तौर पर लॉक किया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता मकरंद सुरेश म्हाडलेकर ने राहुल गाँधी पर कार्रवाई करने की माँग करते हुए याचिका दायर की थी।

‘यहाँ से चले जाओ नहीं तो पूरी बिल्डिंग उड़ा देंगे’: दिल्ली पुलिस ने आमिर खान और राजमान को मार गिराया, बरामद 6-7 बैग की वस्तुओं का पुलिस ने नहीं किया खुलासा

दिल्ली के खजूरी खास इलाके में पुलिस ने मुठभेड़ में दो बदमाशों को ढेर कर दिया है। बताया जा रहा है कि रोहिणी जिले की बेगमपुर पुलिस ने खजूरी थाने को सूचना दी थी कि एक मकान में दो बदमाश भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटकों के साथ छिपे हुए हैं। इसके बाद बेगमपुर और उत्तरी पूर्वी खजूरी थाने की संयुक्त टीम ने बुधवार (11 अगस्त) को रात ढाई बजे के करीब दोनों को सरेंडर करने के लिए कहा। बदमाशों ने सरेंडर करने की बजाय पुलिस की टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। दोनों ओर से चली गोलियों में दोनों वांछित अपराधी मारे गए।

वहीं, खजूरी थाने के दो सिपाही गोली लगने से जख्मी हो गए हैं। बदमाशों की पहचान आमिर खान (लोनी) और राजमान (अशोक विहार) के रूप में हुई है। दोनों पर चोरी, हत्या, लूटपाट और हत्या के प्रयास के मामले दर्ज थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपराधियों को पकड़ने के लिए एक टीम का गठन किया गया था। देर रात करीब 11.30 बजे संयुक्त टीम ने उस मकान को घेर लिया, जिसमें बदमाश छुपे बैठे थे।

बताया जा रहा है कि उस तीन मंजिला बिल्डिंग में करीब 15 परिवार रह रहे थे। पुलिस ने पहले सभी को बिल्डिंग से सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद अपराधियों से सरेंडर करने के लिए कहा। लेकिन बदमाशों ने सरेंडर न करके अपने पास भारी मात्रा में हथियार होने की बात कही। उन्होंने कहा कि पुलिस ने अगर उन्हें पकड़ने की कोशिश की तो वह खुद को गोली मार लेंगे और बिल्डिंग समेत नजदीकी इलाके को बम से उड़ा देंगे। ये कहते हुए उन्होंने खिड़की से पुलिस पर गोलियाँ चलानी शुरू कर दी। दूसरी ओर से पुलिस ने भी फायरिंग शुरू कर दी। करीब तीन घंटे चले ऑपरेशन के दौरान बदमाश रुक-रुककर फायरिंग करते रहे। आखिर में करीब 2.30 बजे पुलिस ने दोनों बदमाशों को ढेर कर दिया।

बता दें कि पुलिस ने बदमाशों के कमरे से 6 से 7 बैग बरामद किए हैं। बैग में क्या है फिलहाल इसका खुलासा नहीं किया गया है। पुलिस के मुताबिक, टीम को बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि बदमाशों के पास कितने हथियार और गोला-बारूद है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसी खबर मिली थी कि दोनों बदमाश स्वतंत्रता दिवस पर कुछ गड़बड़ कर सकते हैं। 

संसद में विपक्षी सांसदों ने मार्शलों का गला दबाया, राज्यसभा गठित कर सकती है जाँच कमिटी

मॉनसून सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों द्वारा संसद में हंगामा करने और अधिकारियों के साथ बदसलूकी करने के बाद अगले कुछ दिनों में राज्यसभा द्वारा एक जाँच समिति का गठन किया जा सकता है। ये समिति मार्शलों के उन बयानों की जाँच करेगी, जिनमें उन्होंने विपक्षी सांसदों पर मारपीट करने का आरोप लगाया था।

News18 के अनुसार, संसद के उच्च सदन के अध्यक्ष उप-राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू मानसून सत्र के दौरान 11 अगस्त 2021 को राज्यसभा में विपक्षी सांसदों द्वारा सुरक्षा अधिकारियों के साथ हुई मारपीट की जाँच करने का आदेश दे सकते हैं।

इससे पहले, सरकार ने राज्यसभा के पीठासीन अधिकारी को एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें मार्शलों के पत्र थे। इसमें मार्शलों ने सदन के पटल पर सांसदों के व्यवहार पर अपनी आपबीती सुनाई थी। यह रिपोर्ट राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू को विपक्षी सांसदों द्वारा सदन के भीतर बड़े पैमाने पर व्यवधान उत्पन्न करने और 11 अगस्त को अधिकारियों के साथ हाथापाई के बाद सौंपी गई थी।

ऑपइंडिया द्वारा एक्सेस की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊपरी सदन में 11 अगस्त को दोपहर 2 बजे उस वक्त हंगामा शुरू हुआ था, जब सदन में संविधान के 127वें संशोधन विधेयक पर चर्चा की जा रही थी। रिपोर्ट में कहा गया है, “जैसे ही विधेयक को राज्यसभा में विचार और पारित करने के लिए पेश किया गया, विपक्षी सांसद इसमें व्यवधान डालने के लिए सदन के वेल में आ गए और सदन के पटल पर चढ़कर उस पर रखी किताबों/कागजातों को फाड़ने की कोशिश की।”

सभापति को सौंपी गई रिपोर्ट के मुताबिक, “अध्यक्ष और मानक संचालन प्रक्रियाओं के निर्देशों के अनुसार, संसद सुरक्षा सेवा के अधिकारी पहले से ही सदन की मेज के चारों ओर तैनात थे, ताकि मेज पर रखी गई वस्तुओं को संभावित नुकसान से बचाया जा सके। साथ ही महासचिव, राज्य सभा व अन्य अधिकारियों की हंगामे के दौरान सुरक्षा की जा सके।”

सरकार की रिपोर्ट के अलावा राज्यसभा में सांसदों के पीटने से घायल हुए राकेश नेगी नाम के मार्शल ने भी संसद सुरक्षा सेवा के निदेशक को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने 11 अगस्त को राज्यसभा के अंदर हुई घटनाओं का जिक्र किया है।

नेगी ने पत्र में उल्लेख किया है कि 11 अगस्त को उन्हें राज्यसभा चैंबर के अंदर मार्शल की ड्यूटी करने के लिए निर्देशित किया गया था। नेगी के मुताबिक, हंगामे के दौरान विपक्षी सांसदों- एलमारन करीम और अनिल देसाई ने मार्शलों द्वारा बनाए गए सुरक्षा घेरे को तोड़ने की कोशिश की।

सुरक्षा अधिकारी राकेश नेगी ने सूचित किया था कि माकपा सांसद एलाराम करीम और शिवसेना सांसद अनिल देसाई ने सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की थी और इस कड़ी में एलाराम करीम ने उन्हें (राकेश नेगी) सुरक्षा घेरे से बाहर निकलने के लिए उनकी गर्दन पकड़ ली। इसके कारण नेगी को कुछ देर के लिए उनका दम घुटता सा महसूस हुआ था।

महिला सुरक्षा अधिकारी अक्षिता भट ने निदेशक (सुरक्षा) को सौंपी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जब उन्होंने सांसदों को सुरक्षा घेरा तोड़ने से रोकने की कोशिश की तो दो महिला कॉन्ग्रेस सांसद- छाया वर्मा और फूलो देवी नेताम ने आगे बढ़कर पुरुष सांसदों को आक्रामक रूप से सुरक्षा घेरा तोड़ने और मेज तक पहुँचने का रास्ता बनाया।

दो महिला सांसदों ने सुरक्षा अधिकारियों द्वारा बनाए गए सुरक्षा घेरे को तोड़ने में पुरुष सांसदों की मदद करने की कोशिश के दौरान अक्षिता भट का हाथ पकड़कर उन्हें घसीटा। अक्षिता भट ने लिखा, “हालाँकि, अपने कर्तव्यों का पालन करने वाले एक अधिकारी के प्रति उनकी (महिला सांसदों) आक्रामकता और हिंसक व्यवहार के बावजूद, मैंने उनका धीरे-धीरे विरोध करके गरिमा और मर्यादा बनाए रखी और उन्हें सदन के पटल पर आने से रोकने में कामयाब रही।”

सीसीटीवी कैमरे से पकड़ा गया विपक्षी सांसदों का झूठ

संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार (11 अगस्त 2021) को विपक्ष द्वारा बड़े पैमाने पर व्यवधान उत्पन्न किया गया। उन्होंने राज्यसभा के भीतर सुरक्षा अधिकारियों के साथ मारपीट की। राज्यसभा के वरिष्ठ सांसदों द्वारा की जा रही हिंसा को कंट्रोल करने के लिए मॉर्शल्स को बुलाना पड़ा। वहीं, विपक्षी दलों ने पहले आरोप लगाया था कि उन्हें पिटवाने के लिए सरकार ने बाहर से लोगों को बुलाया था।

हालाँकि, इन माननीयों के झूठ का पर्दाफाश बहुत जल्द हो गया। सरकार ने राज्यसभा का सीसीटीवी फुटेज जारी किया, जिसमें साफ देखा जा सकता था कि विपक्षी सांसद मार्शलों पर हमला कर रहे थे। राज्यसभा सत्र के दृश्यों से पता चला है कि कॉन्ग्रेस की महिला सांसद फूलो देवी नेताम और छाया एक महिला मार्शल को पीट और घसीट रही थीं।

घटना के दौरान घर पर सदन में मौजूद रहे केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि फुटेज से पता चलता है कि महिला मार्शल का गला घोंटने की कोशिश की गई थी। वीडियो में टीएमसी सांसद डोला सेन संसद सुरक्षा सेवा की महिला अधिकारियों से बहस करती और धक्का-मुक्की करती नजर आ रही हैं। सेन ने संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ भी धक्का-मुक्की की।

इसके अलावा टीएमसी नेता नासिर हुसैन, शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी और टीएमसी नेता अर्पिता घोष को सदन के वेल में पेपर फाड़कर पीठासीन अधिकारी के ऊपर फेंकते देखा गया। कॉन्ग्रेस नेता फूलो देवी नेताम और छाया वर्मा ने एक महिला अधिकारी को धक्का दिया, घसीटा और उसके सिर पर भी मारा। कॉन्ग्रेस सांसद नेताम को अपने कंधे से महिला अधिकारी सिर पर मारने की कोशिश करते और उसे घसीटते हुए देखा गया।

मार्शलों से मारपीट के बाद विपक्षी नेताओं ने संसद से वाकआउट कर दिया। फुटेज से साफ है कि विपक्ष के नेताओं के अभद्र व्यवहार के कारण राज्यसभा में हंगामा हुआ। विपक्षी नेताओं ने न केवल सदन का कामकाज बाधित किया बल्कि ड्यूटी पर तैनात मार्शलों के साथ मारपीट भी की थी।

ट्विटर के बाद अब राहुल गाँधी के फेसबुक और इंस्टाग्राम अकॉउंट पर गिरेगी गाज! NCPCR ने की माँग

दिल्ली कैंट के नांगला इलाके में 9 साल की बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म मामले में पीड़िता के परिजनों की तस्वीर रिवील करने पर कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रहीं। पहले ट्विटर ने उनके विरुद्ध कार्रवाई की और अब फेसबुक व इंस्टाग्राम को भी इस संबंध में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने पत्र लिखा है।

फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट करने को लेकर NCPCR ने कार्रवाई करने की माँग की है। इसमें कथिततौर पर नाबालिग पीड़िता के परिवार की पहचान का खुलासा हो रहा था, जो कि पॉक्सो एक्ट के विरुद्ध है। इसी पर आयोग ने संज्ञान लिया और Facebook व Instagram को पत्र भी ल‍िखा।

NCPCR ने फेसबुक व इंस्टाग्राम को चिट्ठी लिखते हुए कहा है कि उनके प्लेटफार्म पर पड़ी राहुल गाँधी की पोस्ट बलात्कार पीड़िता की पहचान को उजागर कर रही है और भारतीय कानूनों का उल्लंघन कर रही है, इसीलिए उसे प्लेटफॉर्म से हटाया जाए।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने ऐसे ही तस्वीरें ट्विटर पर शेयर की थी, जिसके बाद राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) ने मामले में संज्ञान लेते हुए ट्विटर को राहुल गाँधी के खिलाफ एक्शन लेने को कहा था। इसके बाद ट्विटर ने राहुल गाँधी के अकाउंट को लॉक कर दिया था। साथ में ट्विटर प्रवक्ता ने इस मामले में कहा था कि वह आपत्तिजनक कंटेट को हटाने के बाद इन अकाउंट्स को दोबारा चालू कर देंगे।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया हेड रोहन गुप्ता ने ट्विटर पर सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इसने पूरे भारत में उनके नेताओं और कार्यकर्ताओं के 5,000 अकाउंट को पहले ही ब्लॉक कर दिया है। उन्होंने कहा कि ट्विटर को यह समझने की जरूरत है कि ट्विटर या सरकार द्वारा उन पर दबाव नहीं डाला जा सकता है।

बता दें कि ट्विटर की यह कार्रवाई केवल राहुल गाँधी के विरुद्ध नहीं हुई थी बल्कि कॉन्ग्रेस पार्टी के आधिकारिक अकॉउंट को भी लॉक किया गया था। इसकी जानकारी पार्टी ने खुद दी थी। ट्विटर का कहना था कि उन्होंने नियमों के उल्लंघन पर अकॉउंट लॉक किया है। वहीं पार्टी ने बताया था कि रणदीप सुरजेवाला समेत पाँच सीनियर लीडर्स के अकाउंट्स को भी ट्विटर ने लॉक किया।