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अकाउंट लॉक करने पर भड़के ‘2 करोड़ी’ राहुल गाँधी, बताया ट्विटर का ‘खतरनाक खेल’: देखें VIDEO

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के बाद ट्विटर ने कॉन्ग्रेस पार्टी के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल को भी लॉक कर दिया है। इसको लेकर राहुल गाँधी ने कंपनी पर हमला बोला है। राहुल ने अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर ‘ट्विटर का डेंजरस गेम’ शीर्षक वाला एक वीडियो जारी किया है। डेढ़ मिनट से ज्यादा के वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया है कि ट्विटर उनके अकाउंट बंद करके भारत की राजनीति में हस्तक्षेप कर रहा है।

कॉन्ग्रेस नेता ने शुक्रवार (13 अगस्त) को कहा कि मुझे लगता था कि मीडिया के बाद टि्वटर रोशनी की एक किरण है, जहाँ हम जो सोचते हैं उसे शेयर कर सकते हैं। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। ट्विटर भी वही सुनता है, जो सरकार कहती है।  

उन्होंने कहा, ”यह राहुल गाँधी पर हमला नहीं है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढाँचे पर हमला है। मेरे 19-20 मिलियन (करीब 2 करोड़) फॉलोअर्स हैं। आप उन्हें राय देने के अधिकार से वंचित कर रहे हैं। ट्विटर का रवैया पक्षपातपूर्ण हैं।”

दिलचस्प बात यह है कि राहुल गाँधी जिस ‘राय’ की बात कर रहे हैं, वह केवल उनकी क्षुद्र राजनीति का हिस्सा है। एक नाबालिग बलात्कार पीड़िता की पहचान से समझौता करने के उनके कथित अधिकार का हमारा कानून अनुमति नहीं देता है। वायनाड के सांसद ने ट्विटर पर केंद्र सरकार के निर्देश का पालन करने और उनके प्रति झुकाव रखने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अब यह स्पष्ट हो गया है कि ट्विटर एक तटस्थ मंच नहीं है। यह एक पक्षपाती मंच है, जो सरकार के अनुसार कार्य करता है।

माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट के खिलाफ, पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनके अकाउंट को लॉक करना सही निर्णय नहीं है। इससे लोगों में यह संदेश गया कि ट्विटर एक तटस्थ मंच नहीं है। सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी को धमकी देते हुए गाँधी ने कहा, “निवेशकों के लिए यह बहुत खतरनाक बात है, क्योंकि राजनीतिक तौर पर पक्ष लेने से ट्विटर पर इसका असर पड़ता है।” मालूम हो कि जब केंद्र सरकार ने ट्विटर पर लगाम लगाने के लिए उसे नए आईटी नियमों को मानने के लिए कहा था, तब राहुल गाँधी सरकार के इस फैसले को उनकी राजनीति का हिस्सा बताया था। साथ ही ट्विटर का बचाव किया था।

बता दें कि राहुल गाँधी के अलावा जिन पाँच लोगों के अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई हुई है, उनमें रणदीप सुरजेवाला, अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन, लोकसभा में पार्टी के सचेतक मनिकम टैगोर, असम प्रभारी और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और महिला कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सुष्मिता देव शामिल हैं। इसके अलावा पार्टी के प्रवक्ता गौरव वल्लभ के अकाउंट को भी लॉक किया गया है।

बीते दिनों दिल्ली में 9 साल की बच्ची से कथित बलात्कार और हत्या के मामले को लेकर कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी पीड़ित परिवार से मिले थे। इसके बाद उन्होंने इसकी तस्वीर ट्विटर पर शेयर कर दी थी। इसको लेकर राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) ने मामले में संज्ञान लेते हुए ट्विटर को राहुल गाँधी के खिलाफ एक्शन लेने को कहा था। इसके बाद ट्विटर ने राहुल गाँधी के अकाउंट को लॉक कर दिया।

कंधार पर भी तालिबानी कब्जा, 12 प्रांतीय राजधानी आतंकी चंगुल में… अपने लोगों को निकाल भाग रहा अमेरिका

अफगानिस्तान में तालिबान का आतंक दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। तालिबानी आतंकी अफगानिस्तान के एक के बाद एक शहर पर कब्जा करते जा रहे हैं। तालिबानी आतंकियों ने अफगानिस्तान में गुरुवार (12 अगस्त) रात एक और प्रांतीय राजधानी कंधार पर कब्जा कर लिया। कंधार अफगानिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और देश की 34 में से 12वीं प्रांतीय राजधानी भी है।

इससे पहले तालिबान ने अफगानिस्तान की 11 प्रांतीय राजधानियों पर एक सप्ताह में ही कब्जा कर लिया। देश में स्थिति बिगड़ते देख, अमेरिका ने अफगानिस्तान में अतिरिक्त 3,000 सैनिकों को भेजने की योजना बनाई है। हालाँकि ये सैनिक तालिबानियों से लड़ने नहीं बल्कि अपने नागरिकों को अफगानिस्तान से सुरक्षित निकालने जा रहे हैं। पेंटागन के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा कि तीन बटालियन, एक अमेरिकी सेना और दो मरीन, काबुल के हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जाएँगे, जहाँ सैन्य परिवहन विमान इंतजार कर रहे होंगे।

गजनी सिटी और हेरात पर तालिबानी कब्जा

आतंकी संगठन तालिबान ने गुरुवार को गजनी प्रांत की राजधानी गजनी सिटी पर कब्जा करने के बाद अफगानिस्तान के तीसरे सबसे बड़े शहर हेरात पर भी कब्जा जमा लिया।। इस शहर पर कब्जे के साथ ही तालिबान अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के और करीब पहुँच गया है। गजनी के सांसद मुहम्मद आरिफ रहमानी ने बताया कि यह शहर आतंकियों के नियंत्रण में आ गया है, जबकि गजनी की प्रांतीय परिषद के सदस्य अमानुल्लाह कामरानी ने कहा कि शहर के बाहर स्थित दो सैन्य ठिकानों पर अभी भी अफगान सेना का ही नियंत्रण है।

गवर्नर तालिबान से सौदा कर हुए फरार

तालिबान ने इससे पहले 12 अगस्त को अफगानिस्तान के निमरोज प्रांत की राजधानी जरंज पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया और गवर्नर के पैलेस पर भी कब्जा कर लिया। अमानुल्लाह कामरानी ने आरोप लगाया है कि गजनी प्रांत के गवर्नर और पुलिस प्रमुख ने सरेंडर करने के बाद तालिबान से सौदा कर फरार हो गए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, तालिबान आतंकियों ने सौदे के तहत गवर्नर के काफिले को भी नहीं रोका। इधर, हेलमंड की राजधानी लश्कर गाह में अफगान बलों और तालिबान के बीच लड़ाई चल रही है। बताया जा रहा है कि जरंज पर तालिबान का कब्जा हो जाने के बाद ईरान में भारत की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘चाबहार पोर्ट’ प्रभावित हो सकती है, क्योंकि जरंज के साथ भारत के भी हित जुड़े हुए हैं। 

काबुल को तालिबान अलग-थलग कर देगा: अमेरिका

अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने बताया कि एक अमेरिकी सुरक्षा अधिकारी ने अंदेशा जाहिर किया है कि अगले 30 दिनों के अंदर राजधानी काबुल को तालिबान अलग-थलग कर देगा और 90 दिनों के अंदर वह मुल्क की राजधानी काबुल पर कब्जा कर लेगा। 

गौरतलब है कि बुधवार (11 अगस्त) को तालिबानी आतंकियों ने अफगान के कुंदुज प्रांत के अधिकतर हिस्से पर कब्जा जमा लिया। यानी अब कुंदुज एयरपोर्ट भी अफगानिस्तान के हाथ से निकल गया है। यही नहीं भारतीय वायु सेना द्वारा अफगान सेना को गिफ्ट किया गया Mi-35 हिंद अटैक हेलिकॉप्टर को भी तालिबानी आतंकियों ने अपने कब्जे में ले लिया है। एमआई-35 को रूस द्वारा डिजाइन किया गया था।

कब्जे वाले एयरपोर्ट से इसकी वीडियो और तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें तालिबानी आतंकी गनशिप की रखवाली कर रहे हैं। हालाँकि, हेलीकॉप्टर के इंजन और महत्वपूर्ण पार्ट्स गायब दिख रहे हैं। वीडियो और फोटो को बारीकी से देखने पर पता चलता है कि रोटर ब्लेड जमीन पर, हेलीकॉप्टर के नीचे रखे गए थे।

₹20000 का लालच देकर दलित महिला के धर्मान्तरण की कोशिश, आरोपित से मारपीट के आरोप में 3 VHP नेता गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक दलित महिला का धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की गई। इस मामले में अफसार नाम के ई-रिक्शा चालक के साथ बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर मारपीट की। इस संबंध में यूपी पुलिस ने बजरंग दल के कार्यकर्ता अजय बैंडवाला, रमेश और डॉन केशू समेत 15 लोगों के खिलाफ धमकी औऱ मारपीट समेत कई अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। साथ ही वीएचपी के नगर मंत्री अमन गुप्ता, आरोपी अज बैंडवाला और राहुल कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है।

गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं की जानकारी मिलते ही बजरंग दल और वीएचपी के अन्य कार्यकर्ताओं ने डीसीपी दफ्तर का घेराव किया। इस दौरान वीएचपी के तीनों नेताओं को निर्दोष बताते हुए उन्हें तत्काल छोड़ने की माँग की गई। रिपोर्ट के मुताबिक मुस्लिम युवक अफसार को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने ही पुलिस को सौंपा था। बजरंग दल के लोगों के मुताबिक, दो दिन पहले ही उन्होंने इस मामले में पुलिस से कार्रवाई करने का आग्रह किया था।

इस मामले में जिस दलित महिला का धर्मान्तरण कराने की कोशिश की गई थी, उनका कहना है कि अफसार (आज तक की रिपोर्ट में अफ्तार) ने ही उन्हें धर्म परिवर्तन करने पर 20,000 रुपए देने का लालच दिया था। महिला ने आरोप लगाया है कि वो इस मामले में पुलिस के पास गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने बजरंग दल के लोगों से इसकी शिकायत की।

वीडियो में मारपीट से कौन रोक रहे

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि बजरंग दल के कार्यकर्ता अफसार का हाथ पकड़ कर उसे ले जा रहे हैं और कार्यकर्ताओं को उसके साथ मारपीट करने से रोक रहे हैं। इसमें बजदरंग दल के कार्यकर्ता आरोप लगा रहे हैं कि उसने हिंदुस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए थे। इस दौरान अफसार से हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे भी लगवाए गए।

इस घटना को लेकर डीसीपी रवीना त्यागी ने कहा है कि थाना बर्रा क्षेत्र में रामगोपाल चौराहे के पास कच्ची बस्ती का वीडियो वायरल हुआ है। इसमें एक व्य़क्ति के साथ मारपीट की जा रही है। पीड़ित की तहरीर पर कुछ ज्ञात और अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जा रही है और जो भी दोषी होगा, उसे बक्शा नहीं जाएगा।

झारखंड सरकार ने कोरोना में काम करवा लिया, अब नहीं दे रही सैलरी: ‘भीख’ माँग रहे RIMS के स्वास्थ्यकर्मी

झारखंड में कोरोना से जंग में राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर सरकारी अस्पतालों में नर्सों और लैब टेक्नीशियनों की संविदा पर भर्ती की थी। लेकिन अभी तक इन कर्मियों को वेतन नहीं दिया गया है। अकेले रिम्स (RIMS) में ही करीब 750 कर्मियों की भर्ती की गई थी, लेकिन अब रिम्स प्रशासन ने सभी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। अब प्रशासन के फैसले के विरोध में गुरुवार (12 अगस्त 2021) को भीख माँगकर विरोध प्रदर्शन किया।

रिम्स प्रशासन द्वारा इन स्वास्थ्यकर्मियों को बाहर करने के आदेश के मुताबिक, उक्त हेल्थ वर्कर्स का अंतिम कार्य दिवस 10 अगस्त 2021 तक ही था। इन कर्मियों को हॉस्टल खाली करने का आदेश दे दिया गया है। इतना ही नहीं रिम्स ने इनका खाना भी बंद करवा दिया है। संविदा कर्मियों ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा है कि कोरोना में वो लोग अपने परिवार तक से मिलने से डरते थे, बावजूद इसके उन लोगों ने अपना काम पूरी ईमानदारी से किया।

इनका कहना है कि न तो इन्हें वेतन दिया गया और नहीं इन कर्मियों के पास स्थाई नौकरी है। आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि न तो खाने के पैसे हैं औऱ न रहने के लिए छत नसीब हो रही है। इसीलिए रिम्स के गेट के सामने भीख माँग रहे हैं ताकि अपना गुजारा कर सकें। स्वास्थ्यकर्मियों ने चेतावनी दी है कि अगर भीख भी नहीं मिली तो रिम्स परिसर में खुद को आग लगा लेंगे।

रिम्स ने एक्सपीरिएंस सर्टिफिकेट तक नहीं दिया

कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से अब तक नर्सों और लैब टेक्नीशियनों को रिम्स ने एक्सपीरिएंस लेटर तक नहीं दिया है। इनकी माँग है कि अगर रिम्स में आवश्यकता नहीं है तो किसी भी जिला अस्पताल में उन्हें नियुक्ति दी जाए। आउटसोर्स पर बहाल हुई एक नर्स के मुताबिक, बिना किसी जाँच के उन्हें काम पर रख लिया गया और अब पैसे भी नहीं दिए जा रहे हैं। हालत इतनी अधिक खराब हो गई है कि अपने घर भी जाने तक के पैसे नहीं बचे हैं।

​जम्मू-कश्मीर में BJP नेता के घर हमला, 1 बच्चे की मौत, 5 गंभीर घायल: 3 महीने में 6 भाजपा नेता इस्लामी आतंक के शिकार

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में आतंकियों ने एक बार फिर भाजपा नेता को निशाना बनाया है। गुरुवार (12 अगस्त) रात को करीब 9 बजे इस्लामी आतंकियों ने भाजपा नेता जसबीर सिंह के घर पर ग्रेनेड से हमला किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले में जसबीर सिंह, उनके पिता सहित परिवार के पाँच सदस्य घायल हो गए हैं।

हमले में घायल सभी लोगों को जीएमसी राजौरी सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ गंभीर रूप से घायल 5 वर्षीय मासूम बच्चे ने दम तोड़ दिया है। वहीं अन्य लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि खंडली इलाके में स्थित बीजेपी नेता के घर पर संदिग्ध आतंकवादियों ने ग्रेनेड फेंका और वह छत पर फट गया। सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को सील कर दिया है और आतंकियों की तलाश की जा रही है।

केंद्र शासित प्रदेश में पिछले 3 महीने में इस्लामी आतंकियों ने कई बीजेपी नेताओं पर हमला किया है। चार दिन पहले यानी 9 अगस्त को कश्मीर के अनंतनाग जिले में इस्लामी आतंकियों ने दिनदहाड़े भाजपा नेता गुलाम रसूल डार और उनकी पत्नी पर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसाईं थीं, जिसकी वजह से दोनों की मौत हो गई थी। यह घटना दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के लाल चौक इलाके की थी। गुलाम रसूल डार बीजेपी के पदाधिकारी होने के साथ-साथ सरपंच भी थे। वहीं, चार अगस्त को कुलगाम में आखरन नौपुरा में बीजेपी नेता और सरपंच आरिफ अहमद पर जानलेवा हमला किया गया था।

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में बीजेपी के जिला अध्यक्ष के बेटे पर 16 जुलाई 2021 को आतंकी हमला होने की खबर सामने आई थी। बताया गया था कि बीजेपी जिला अध्यक्ष मुहम्मद शफी मीर के बेटे इशफाक अहमद मीर पर आतंकियों ने हमला कर दिया है, जिसके बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। हालाँकि, बाद में कुपवाड़ा के एसएसपी ने इस पर सफाई देते हुए कहा था कि इशफाक पर हुआ हमला आतंकी हमला नहीं था।

इसी तरह 8 जुलाई 2021 को उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिला में आतंकियों ने भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य और पूर्व जिला प्रधान शेख वसीम उर्फ वसीम बारी, उनके भाई उमर सुल्तान और पिता बशीर शेख की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। उमर भाजपा की जिला युवा इकाई के सदस्य थे, जबकि उनके पिता बशीर शेख भाजपा के जिला उपाध्यक्ष रह चुके थे।

गौरतलब है कि आतंकवादियों ने 2 जून 2021 की शाम को त्राल में अपने घर के बाहर टहल रहे बीजेपी नेता राकेश पंडिता की गोली मारकर हत्या कर दी थी। पंडिता पुलवामा जिले के त्राल म्युनिसिपल कमेटी के चेयरमैन थे। काउंसलर होने के साथ-साथ वे बीजेपी की जिला ईकाई के सचिव भी थे। इस हमले में एक महिला भी घायल भी हुई थी, जो पंडिता के मित्र की बेटी थी।

कोडुंगल्लूर भगवती मंदिर: देवी के लिए अपशब्दों-गालियों से भरे गीत, मंदिर की छत को पीटा जाता लाठी-डंडों से

सनातन हिन्दू धर्म में भगवान को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। हिन्दू, सगुण और निर्गुण, दोनों रूपों में भगवान को मानते हैं और उनकी उपासना करते हैं। हमें बचपन से ही ईश्वर की भक्ति और उनका सम्मान करना सिखाया जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि केरल के त्रिशूर में एक मंदिर है, जहाँ स्थापित इष्टदेवी को अपशब्द कहे जाते हैं। मंदिर की इष्टदेवी कोई और नहीं बल्कि महाकाली का एक स्वरूप भद्रकाली हैं, जो अपने क्रोध के लिए जानी जाती हैं। हालाँकि श्री कुरुम्बा भगवती की खासियत यह है कि देवी भद्रकाली भक्तों के द्वारा कहे गए अपशब्दों से प्रसन्न होती हैं और यह प्रथा मंदिर के सालाना त्यौहार का एक हिस्सा है।

मंदिर का इतिहास

कोडुंगल्लूर भगवती मंदिर के नाम से भी प्रसिद्ध इस मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है और भगवान विष्णु के छठवें अवतार परशुराम से जुड़ा हुआ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार दारुका नामक दैत्य से केरल क्षेत्र और यहाँ रहने वाले लोगों की रक्षा करने के लिए परशुराम ने भगवान शिव से प्रार्थना की। तब महादेव के आदेश के अनुसार परशुराम ने इस तीर्थ स्थान का निर्माण कराया और देवी भद्रकाली की पूजा की। इसके बाद देवी ने दारुका दैत्य का नाश किया।

सनातन के महान संत आदि शंकराचार्य ने भी इस स्थान की यात्रा की थी। यहाँ उन्हें एक अत्यंत प्रभावशाली शक्ति का आभास हुआ था, तब उन्होंने यहाँ 5 श्रीचक्र स्थापित किए थे। माना जाता है कि आज भी इन 5 श्रीचक्रों के कारण मंदिर को शक्ति प्राप्त होती है। वर्तमान दृश्य मंदिर के बारे में भी कोई जानकारी प्राप्त नहीं है लेकिन यह माना जाता है कि इस मंदिर को बाद में पश्चिमी चेर वंश के राजा चेरमन पेरुमल द्वारा निर्मित कराया गया।

मंदिर की जानकारी

10 एकड़ भूमि क्षेत्र के मध्य में बने कोडुंगल्लूर भगवती मंदिर का निर्माण केरल वास्तुशैली में हुआ है। मंदिर परिसर चारों ओर से पीपल और बरगद के वृक्षों से घिरा हुआ है। मंदिर के गर्भगृह में सप्तमातृकाएँ विराजमान हैं। इन सभी की प्रतिमाएँ उत्तरमुखी हैं। इसके अलावा मंदिर में भगवान गणेश और वीरभद्र भी स्थापित हैं। देवी भद्रकाली की आठ भुजाओं वाली प्रतिमा भी उत्तरमुखी है। इस प्रतिमा का निर्माण कटहल की लकड़ी से हुआ है। देवी की आठ भुजाएँ शस्त्रों और सनातन प्रतीक चिन्हों से सुसज्जित हैं।

मंदिर के त्यौहार

श्री कुरुम्बा भगवती मंदिर अपने त्यौहार के लिए ही जाना जाता है। दरअसल यहाँ मनाया जाने वाला ‘भरणि’ उत्सव कई मायनों में विशेष है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस त्यौहार के दौरान भक्त, देवी भद्रकाली को अपना ही रक्त समर्पित करते हैं। इसके अलावा इस त्यौहार में देवी भद्रकाली के लिए अपशब्दों से भरे गीत गाए जाते हैं। कोडुंगल्लूर भरणि उत्सव हर साल मार्च-अप्रैल (मीनम नाम के मलयालम मास) के दौरान मनाया जाता है। इस त्यौहार का पहला दिन ‘कोझिकल्लू मूडल’ के नाम से जाना जाता है। इस दौरान ‘वेलिचप्पड’ कहे जाने वाले देवी भद्रकाली के विशेष भक्त देवी को अपना रक्त समर्पित करते हैं। इन्हें देवी का प्रतिनिधि भी माना जाता है।

‘अस्वति कवु तीनडल’ त्यौहार का दूसरा दिन है। इस दिन राजशाही परिवार के सदस्य देवी भद्रकाली की पूजा करते हैं। मंदिर के अनोखे उत्सव के दौरान वेलिचप्पड मंदिर के आसपास तलवार हाथ में लेकर दौड़ते हैं और इस दौरान मंदिर की छत को भी लाठी-डंडों से पीटा जाता है। इसके अलावा देवी भद्रकाली के लिए अपशब्दों और गालियों से भरे गीत गाए जाते हैं। कहा जाता है कि इन अपशब्दों को सुनकर देवी भद्रकाली प्रसन्न होती हैं।

कैसे पहुँचें?

त्रिशूर पहुँचने के लिए नजदीकी हवाईअड्डा कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो यहाँ से लगभग 50 किलोमीटर (किमी) की दूरी पर है। त्रिशूर रेलवे स्टेशन दक्षिण भारत का एक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है। त्रिशूर रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग 34 किमी है। इसके अलावा केरल के लगभग सभी प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग से त्रिशूर पहुँचना आसान है। राष्ट्रीय राजमार्ग 47 त्रिशूर के पास से ही होकर गुजरता है।

महाकाल परिसर में खुदाई में मिला वृहद शिवलिंग, 2100 साल पुराने मंदिर का अवशेष: नरकंकाल से तेज हुई मुगल आक्रांताओं द्वारा नरसंहार की आशंका

उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में विस्तारीकरण का कार्य कई महीनों से चल रहा है। इसी दौरान मंगलवार (10 अगस्त 2021) को खुदाई के दौरान एक विशाल शिवलिंग और भगवान विष्णु की प्रतिमा मिली। इसके अलावा मंदिर के दक्षिणी भाग में जमीन से लगभग 4 मीटर नीचे एक प्राचीन दीवार भी मिली है, जो लगभग 2,100 साल पुरानी मानी जा रही है। हालाँकि, पुरातत्व विभाग की टीम द्वारा इस शिवलिंग की जाँच की जा रही है, जिसके बाद यहाँ स्थित प्राचीन मंदिर के बारे में रहस्य सुलझाया जा सकेगा।

महाकाल मंदिर परिसर में चल रहा खुदाई का कार्य

विस्तारीकरण के कार्य में लगे मजदूरों ने शिवलिंग मिलने की जानकारी समिति को दी, जिसके बाद इसकी सूचना पुरातत्व विभाग को दी गई। बुधवार की सुबह उज्जैन पहुँचे पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने खुदाई में मिली प्रतिमाओं का अध्ययन किया। पुरातत्व अधिकारी ध्रुवेंद्र जोधा ने शिवलिंग के बारे में बताया कि यह शिवलिंग लगभग 5 फुट का है। यह जितना जमीन के ऊपर है उतना ही जमीन के अंदर भी है।

जोधा के अनुसार, 9वीं-10वीं शताब्दी का यह जलाधारी शिवलिंग परमारकालीन है। इसके अलावा शिवलिंग के आसपास जो ईंटें दिखाई दे रही हैं, वे गुप्तकालीन यानी 5वीं शताब्दी की बताई जा रही हैं। इसके साथ ही यहाँ पर 10वीं शताब्दी की एक चतुर्भुजी भगवान विष्णु की प्रतिमा भी मिली है, जो स्थानक मुद्रा में है।

महाकाल मंदिर परिसर में चल रहा खुदाई के दौरान मिला शिवलिंग

महाकाल मंदिर के विस्तारीकरण के कार्य के दौरान मंदिर के उत्तरी हिस्से में 11वीं-12वीं शताब्दी का मंदिर जमीन के नीचे दबा हुआ है, जिसमें स्तम्भ खंड, शिखर के भांग, रथ का भांग, भरवाई कीचक ये सब शामिल हैं। इसके अलावा महाकाल मंदिर के दक्षिणी भाग में जमीन से 4 मीटर नीचे एक प्राचीन दीवार मिली है, जिसकी आयु लगभग 2,100 वर्ष मानी जा रही है। मंदिर की वास्तुकला और कलाकारी काफी सुंदर बताई जा रही है। हालाँकि, मंदिर के भूमिगत होने के विषय में फिलहाल कोई जानकारी नहीं मिली है।

कुछ दिनों पहले यहाँ मानव कंकाल भी मिले थे। विस्तारीकरण कार्य में चल रही खुदाई के दौरान यहाँ मंदिर के अवशेषों के साथ मानव हड्डियाँ और जानवरों की हड्डियाँ भी मिली थीं। पुरातत्व एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब मंदिरों पर आक्रमण किया जा रहा था, उसी समय के ये मानव कंकाल हो सकते हैं। इन कंकालों के अध्ययन से यह पता चल पाएगा कि ये कंकाल मुगलकालीन इस्लामिक आक्रमण के हैं या उनसे पहले आए मुस्लिम आक्रांताओं के आक्रमण के समय के।

हालाँकि, अधिक संभावना मुगलकालीन की ही जताई जा रही है, जब मुगल कट्टरपंथियों ने आक्रमण करके न केवल मंदिरों में लूटपाट और उनका विध्वंस किया था, बल्कि मंदिर के भक्तों और साधुओं का बड़े पैमाने पर नरसंहार भी किया था।

फण्ड की कमी से जूझते बिहार के 5000+ पुस्तकालय बंद: जानें National Library Day पर लाइब्रेरियों का हाल

बिहार की गिनती शायद भारत के सबसे कम साक्षरता दर वाले राज्यों में होगी। इसके वाबजूद भी यहाँ अख़बारों की रीडरशिप भारत में शायद सबसे ऊँची होगी। लोगों के पढ़ने के शौक के बाद भी अगर आप बिहार के किसी छोटे कस्बे में हैं तो किताब खरीदना या जुटाना बड़ा ही मुश्किल काम है। यहाँ लाइब्रेरी तो बस गिनती के दिखेंगे, किताबों की दुकानें भी कस्बों में कम ही है। अब आप सोचेंगे की फिर ये हिंदी पट्टी के लोग हिंदी की किताबें पढ़ते कैसे हैं? तो उसका तरीका ये है कि स्टेशन पर मौजूद A.H.W. Wheeler वाली दुकानों से हमारी किताबों की जरूरत पूरी होती है। वैसे तो यहाँ सबसे आसानी से नेपोलियन हिल की किताबें मिलेंगी आपको लेकिन साहित्य भी थोड़ा मिल जाता है।

पुस्तकालयों की कमी की वजह देखें तो फण्ड की कमी से बिहार के 5000 से ज्यादा पुस्तकालय बंद हो चुके हैं। करीब दस करोड़ की आबादी वाला बिहार पुस्तकालयों में किताबों की खरीद के लिए प्रति वर्ष मात्र दस लाख देता है। प्रति व्यक्ति किताबों पर खर्च जहाँ ज्यादातर राज्यों में 7 पैसे प्रति व्यक्ति है, वहीं बिहार में ये एक पैसा प्रति व्यक्ति हो जाएगा। अगर कर्मचारियों की बहाली और उनकी तनख्वाह का मामला देखें तो स्थिति और भी बुरी है। जब बिहार में पाँच हज़ार पुस्तकालय बंद हो रहे थे तो तुलनात्मक रूप से कर्नाटक राज्य में 7000 पुस्तकालय हैं।

ये दुर्दशा केवल सार्वजनिक पुस्तकालयों की ही है। यूपीएससी की तैयारी करने वाले कई छात्र पटना में निजी पुस्तकालयों में पढ़ते हैं। अधिकतर ये निजी पुस्तकालय कोचिंग संस्थान चला रहे होते हैं और इनके बोर्ड न चाहते हुए भी दिखेंगे। बिहार से जहाँ इतने छात्र ऐसी प्रतियोगिता परीक्षाओं में कामयाब होते हैं, वहाँ बिहार सरकार पुस्तकालय क्यों नहीं बनवाती ये पता नहीं। राज्य सरकार क्यों जिम्मेदार है? क्योंकि पुस्तकालय नियम-कानूनों के हिसाब से राज्य का मसला होता है।

केंद्र सरकार ने इसके लिए एक राजा राम मोहन राय लाइब्रेरी फाउंडेशन बनाया है जो करीब 15-16 हज़ार पुस्तकालयों को फंड देती है। बिहार के पुस्तकालयों में लोग नहीं हैं, इसलिए यहाँ से फंड लेने के लिए जरूरी कागज़ भी नहीं भेजे जा सके। ऐसी स्थिति के बाद भी देखें तो सिन्हा लाइब्रेरी के वाचनालय (रीडिंग रूम) में बैठकर अपनी किताबों से पढ़ते कई नौजवान नजर आ जाएँगे। जबतक तैयारी चल रही है, तबतक तो दिखेंगे ही। फिर बाद में अफसर बनने पर नियमों को सुधारना याद न रह पाए तो और बात है।

आज के भारतीय पुस्तकालयों में जाएँ तो वहाँ बच्चों के लिए क्या होता है? पुस्तकालयों में जाना अगर बचपन में सिखाया नहीं गया हो, तो वयस्क को पुस्तकालय जाना कहना काफी कुछ हिन्दी कहावत जैसा “बूढ़े तोते को राम राम रटाना” ही होगा। ये पुस्तकालय की इकलौती समस्या है ऐसा भी नहीं है। यहाँ पुस्तकालय का सदस्य बनने के नियम भी किसी पुराने दौर के ही हैं। अभी के पटना के सिन्हा लाइब्रेरी (आखरी बची हुई पब्लिक लाइब्रेरी) के नियम किस दौर के हैं पता नहीं।

यहाँ एक चिट्ठी/फॉर्म पर किसी गेज्जेटेड ऑफिसर का ऑफिस का पता लिखकर पुस्तकालय में देना होता है। जिसे पुस्तकालय वाले पोस्टकार्ड की तरह डाक से उस अधिकारी के दफ्तर भेजेंगे। जब वो अधिकारी उस चिट्ठी/फॉर्म पर अपने दस्तखत करके और मुहर लगाकर दे तब आप सिन्हा लाइब्रेरी के सदस्य हो सकते हैं। साधारण डाक से वो पोस्टकार्ड जैसा फॉर्म कितना पहुँचता होगा और आईएएस अफसरों से गारंटर के तौर पर हस्ताक्षर करवा सकने वाले लोग ऐसी मेहनत कितनी करेंगे ये अंदाजा लगाना बिलकुल भी मुश्किल नहीं। पुस्तकालयों की दशा पर कुछ अध्ययन हुए थे, लेकिन फिर आगे उनपर क्या काम हुआ, मालूम नहीं।

ऐसी हालत में विपत्ति भी बिहार के लिए एक वरदान बनकर आई। कोरोना की वजह से जब लॉकडाउन लगा, तो दिल्ली जैसी जगहों पर केजरीवाल जैसे लोगों ने बिहार के प्रवासियों को कोई मदद नहीं दी। नतीजा ये हुआ कि उन्हें पैदल ही बिहार की ओर लौटते हुए सभी ने देखा। जब ये लोग गाँव पहुँचे, और लम्बे समय तक वहाँ निवासियों की तरह रहे, अतिथियों की तरह नहीं, तो उनका ध्यान गाँव की अवस्था पर भी गया। नब्बे के दशक के आस पास शुरू हुए पलायनों ने गाँव को काफी बदल डाला था। जिन पुस्तकालयों पर कभी शाम में पूरे इलाके के बुद्धिजीवी बैठते चर्चाएँ होतीं, छात्रों को जिनके जरिए छात्रवृति वगैरह भी मिलती थी वो सभी बंद हो चुके थे। सरकार की अनदेखी तो इसका कारण थी ही, गाँव के लोगों को अपना कर्तव्य भी याद आया।

मिथिलांचल के कई ग्राम अब अपने पुस्तकालयों को पुनःजीवित करने में जुट गए। ऐसा नहीं था कि ये प्रयास पहले शुरू नहीं हुए थे। इधर के वर्षों में जबसे हालात सुधरे थे, तभी से इसपर लोगों का ध्यान जा रहा था। अब जब लोग इकठ्ठा हुए तो इसमें गति आई। लालगंज के पुस्तकालय की स्थापना 7 नवम्बर 1950 में हुई थी। ये पुस्तकालय 1980 तक गाँव की कई सामुदायिक गतिविधियों का केंद्र रहा था। 1984-85 में बाढ़ और फिर रोजगार के लिए, अपराधों के कारण जब पलायन होने लगा तो युवा पीढ़ी इसे भूलने लगी। तीन दशक बीतते बीतते ये पुस्तकालय बंद हो गया था। गाँव के लोगों ने एक बार फिर से सामुदायिक प्रयास करके इसे जीवित कर दिया।

यदुनाथ सार्वजनिक पुस्तकालय के बारे में बात करते हुए संस्था के सचिव उदय जी और ग्रामीण निर्भय मिश्र बड़े चाव से बताते हैं। पुस्तकालय रुके नहीं, लगातार चलने के लिए धन उपलब्ध हो, इसकी व्यवस्था के बारे में उदय जी बताते हैं कि ये पूरी तरह चंदे से दोबारा शुरू हो पाया है। ग्रामीणों ने चंदा एक जगह इकठ्ठा करके उसे एक फिक्स्ड डिपाजिट में जमा किया जिसे संस्था के सदस्य निकाल नहीं सकते। उससे होने वाली ब्याज की आय से काम चलता है। पुराने दौर की याद करते हुए उदय जी बताते हैं कि न्याय दर्शन के प्रख्यात विद्वानों ने इसकी शुरुआत की थी और अपने दौर में जयप्रकाश नारायण भी इस पुस्तकालय को देखने आए थे। फ़िलहाल ये पुस्तकालय शाम में खुलता है। ग्रामीणों के सहयोग से अब यहाँ कई आयोजन होते हैं।

अब यहाँ 5000 के लगभग किताबें हैं। कर्मचारी बताते हैं कि धर्म और मैथिली साहित्य पढ़ने वालों की संख्या अच्छी खासी है, लेकिन अंग्रेजी की किताबें भी पढ़ी जाती हैं। किताबों के बारे में उन्होंने बताया कि इसमें से कुछ स्थानीय विधायक-सांसद इत्यादि ने दान में भी दी हैं। कुछ प्रकाशनों के सौजन्य से आईं। इसमें उन्होंने जोड़ा कि ग्रामीणों ने अपनी रूचि की पुस्तकें खरीदकर जमा की हैं। जो दान में मिली किताबें हैं, उनमें पाठकों की कभी उतनी रूचि नहीं दिखी। पाठकों और गाँव के लोगों का पुस्तकालय से जुड़ाव बना रहे, इसके लिए प्रश्नोत्तर और भाषण की प्रतियोगिताएँ छात्रों के लिए आयोजित की जाती हैं। सबसे ज्यादा किताबें पढ़ने वाले पाठक को “श्यामानंद झा सम्मान” और कुछ राशि भी इनाम में दी जाती है।

ऐसा ही एक और पुस्तकालय डॉ. सर गंगानाथ वाचनालय भी है। इस पुस्तकालय के सचिव नवीन झा भी बताते हैं कि उन्होंने ग्रामीण लोगों के व्हाट्स एप्प ग्रुप के साथ शुरुआत की थी। सरकारी मदद के अभाव और पलायन की वजह से ये 1956 में स्थापित वाचनालय भी बंद हो गया था। हालाँकि इस पुस्तकालय के पास एक भवन था लेकिन वो भी जर्जर स्थिति में था। ग्रामीणों से बात करके पुस्तकालय के लिए अलमारियाँ कुछ ही घंटों में इकठ्ठा हो गईं। नवीन झा ने बताया कि पाठकों का सम्मान, भाषण इत्यादि की प्रतियोगिताएँ वो भी आयोजित करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने जोड़ा कि गाँव में हाई स्कूल करीब सवा सौ वर्षों से है, इसलिए पढ़े-लिखे, पुस्तकों का महत्व समझने वाले लोगों की कोई कमी नहीं थी। कमी थी तो केवल सामुदायिक प्रयासों की।

सामुदायिक प्रयासों के बारे में गाँव के ही मदन झा बताते हैं कि अगर शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े, प्रोफेसर इत्यादि गाँव लौटते हैं तो पाँच-सात दिनों के लिए वो बच्चों की कक्षाएँ भी लेते हैं जिससे ग्रामीण बच्चों का फायदा होता है।

पुस्तकालयों के लिए आयोजित होने वाले राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस को एसआर रंगनाथन जी के जन्मदिवस के अवसर पर प्रत्येक वर्ष 12 अगस्त को मनाया जाता है। ये दावे से नहीं कहा जा सकता कि इस दिन बिहार के पुस्तकालयों या देश भर के पुस्तकालयों के लिए कुछ विशेष होगा ही। हो सकता है कुछ जगहों पर राज्य सरकारों का इस मुद्दे पर ध्यान जाए।

संभावना है कि अधिकांश लोग इसे भुला ही देंगे। ऐसे में बिहार के इन ग्रामों से प्रेरणा ली जा सकती है। अगर सामुदायिक प्रयास हों, तो कम साधनसंपन्न ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को भी किताबें मिल सकेंगी। सामुदायिक प्रयास हों, तो ग्राम समाज भी आपस में एक दूसरे से और जुड़ा हुआ रहेगा। बाकी इस दिशा में राजनैतिक प्रयास भी हों तो और बेहतर, मगर जबतक ये नहीं होता, तबतक इंतज़ार और सही, इंतज़ार और सही!

हिन्दू घृणा से सने पादरी स्टीफेन ने नशीली दवा देकर विवाहिता को बनाया गैंगरेप का शिकार, तमिलनाडु में 8 पर FIR

अरुमनाई क्रिश्चियन एसोसिएशन (ACA) के सचिव और ईसाई पादरी अरुमनाई स्टीफेन के खिलाफ तमिलनाडु पुलिस ने एक विवाहित महिला के साथ गैंगरेप करने और उसकी रिकॉर्डिंग करने के आरोप में केस दर्ज किया है। पादरी के साथ इस अपराध में शामिल 7 अन्य लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। पादरी स्टीफेन को कन्याकुमारी में एक कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए गिरफ्तार किया जा चुका है, जहाँ विवादास्पद कैथोलिक पादरी जॉर्ज पोनैया ने हिन्दुओं के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिया था और हिन्दू देवी-देवताओं को अपशब्द कहे थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, तिरुवत्तुर जिले के वीयन्नूर की रहने वाली 36 वर्षीय महिला ने अरुमनाई स्टीफेन और उसके 7 अन्य साथियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। शिकायत में महिला ने कहा गया है कि आरोपितों ने नशीला ड्रिंक पिलाने के बाद उसके साथ गैंगरेप किया और इस कृत्य को रिकॉर्ड भी किया। महिला का आरोप है कि उसे फॉर्महाउस ले जाया गया, जहाँ उसका कई बार रेप हुआ है।

पीड़िता ने अप्रैल में भी शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन तब आरोपितों के डीएमके के साथ संबंधों के चलते कार्रवाई नहीं की गई थी। इसके बाद पुलिस के डर से एक आरोपित जैफरसन ने आत्महत्या कर ली थी। जब भड़काऊ भाषण के मामले में स्टीफेन को गिरफ्तार किया गया तब पीड़िता ने आगे आकर एक बार फिर स्टीफेन के खिलाफ शिकायत दर्ज की। पुलिस ने स्टीफेन, डीएमके के सदस्य जॉन ब्राइट, हेन्सलिन, जेबराज और अन्य आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया है।

ज्ञात हो कि तमिलनाडु के कन्याकुमारी में रोमन कैथोलिक पादरी जॉर्ज पोन्नैया को धार्मिक समूहों के बीच नफरत और दुश्मनी फैलाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, डीएमके नेता एवं अन्य के खिलाफ विवादित टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में द्रमुक की जीत ‘ईसाइयों और मुसलमानों द्वारा दी गई भीख’ थी।

उन्होंने पीएम मोदी के लिए कहा था, “नरेंद्र मोदी का आखिरी दिन सबसे दयनीय होगा। मैं लिखकर दे सकता हूँ। अगर जिन भगवान को हम पूजते हैं वो सच में जिंदा है तो इतिहास देखेगा कि मोदी और अमित शाह के सड़े शरीर को कुत्ते और कीड़े खाएँगे।” पोन्नैया के अलावा कार्यक्रम का आयोजन करने वाले अरुमनाई स्टीफेन के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया था।

इसके अलावा उन्होंने नागरकोली के भाजपा विधायक एम आर गाँधी पर तंज कसते हुए कहा था, “वो इसलिए चप्पल नहीं पहनते क्योंकि वो भारत माता को दर्द नहीं देना चाहते और हम लोग इसलिए चप्पल पहनते हैं ताकि हमारे पैर गंदे न हों और भारत माता के कारण हमें कोई बीमारी न हो।”

बता दें कि स्टेन स्वामी के निधन के बाद 18 जुलाई को कन्याकुमारी अरुमनई में ये सभा बुलाई गई थी। इस कार्यक्रम में बोलते हुए जॉर्ज पोन्नैया ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय और अल्पसंख्यक आयोग, अल्पसंख्यकों को प्रार्थना सभा आयोजित करने से मना कर रहे हैं।

अंसार खान की छत पर पड़ोसी मुजम्मिल अल्वी ने रखे थे IED, बताया था दिल्ली दंगों का गुनहगार: दिल्ली पुलिस ने खोला सच

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के नाम पर कुछ लोगों ने अपनी पुरानी रंजिशों का बदला भी लिया है। ये साबित होता है अंसार खान से जुड़ा मामला जानने के बाद। अंसार दिल्ली दंगों में बम बनाने और सप्लाई करने के आरोपित थे। 31 जुलाई को इस संबंध में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और SWAT शार्पशूटर्स ने उनके लोनी स्थित घर में छापेमारी की थी। ये छापेमारी इसी इनपुट पर की गई थी कि अंसार IED बनाकर सप्लाई करते हैं और दिल्ली दंगों में उनका हाथ है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, डीसीपी प्रमोद कुशवाहा ने बताया कि इस मामले की जाँच में अंसार पूरी तरह से निर्दोष पाए गए हैं। पुलिस ने पता लगाया है कि ये सब उनके पड़ोसी मुजम्मिल अल्वी का किया-धरा है जिसने अपनी ज्यादती दुश्मनी निकालने के चक्कर में अंसार का नाम गंभीर आरोपों में लिया।

अंसार खान कैसे निकले निर्दोष

जाँच टीम ने हर कड़ी को जोड़ा और अंसार को कहीं से कहीं तक किसी भी आरोप से जुड़ता नहीं पाया। मगर, पुलिस को बताया गया था कि अंसार के आतंकी लिंक हैं तो उन्होंने छापेमारी की। खान खुद हैरान थे कि आखिर बेलनाकार कंटेनर उनकी छत पर कैसे मिले। इन कंटेनरों में कागजों में लिपटे पाइप बम थे। सारे बमों को बम दस्ते द्वारा निष्क्रिय किया गया और खान को त्वरित कार्रवाई के साथ पकड़ा गया। खान इस दौरान अपने तीनों बच्चों की कसम खाते रहे लेकिन सबूत उनके ख़िलाफ़ थे। 

पुलिस को कुछ शक हुआ और डीसीपी कुशवाहा ने इस मामले में जाँच के लिए स्पेशल टीम बनाई। शक उनके पड़ोसी पर गहराया। सवाल यह था कि अगर अंसार इन सबमें शामिल नहीं है तो आखिर किसने उनके विरुद्ध गलत जानकारी दी। छानबीन में देखा गया कि जिस कंटेनर की तस्वीर पुलिस को दी गई उसके आसपास कोई पीले और हरे निशान थे लेकिन पुलिस को अंसार की छत पर ऐसा कुछ नहीं मिला।

आखिरकार जाँच में निकल आया कि ये सब अल्वी का किया-धरा है जिसने पुरानी रंजिश के चलते अंसार को फँसाया। खान ने कथिततौर पर एक दफा छेड़खानी के मामले में पंचायत बुलवाकर ये निर्णय लेने को कहा था कि अल्वी के साथ क्या किया जाना चाहिए, जिसपर पहले से ही लड़कियों के शोषण के तमाम मामले दर्ज है। इसी घटना के बाद से दोनों में मनमुटाव था।

अल्वी ने उगला सच

शक होने पर पुलिस ने अल्वी को पकड़ा और घटना वाले दिन उसकी लोकेशन के बारे में पूछा। कुछ देर अल्वी ने पूछताछ में अंसार से दुश्मनी से मना किया, मगर आखिरकार उसने सारी सच्चाई उगल दी। उसने बता दिया कि कैसे उसने बम अंसार की छत पर रखे, क्योंकि वो अपनी बदनामी का बदला लेना चाहता था।

उसने आगे बताया कि उसने स्थानीय बाजार से पोटेशियम और अन्य सामग्री खरीदी थी और फिर बाँस के खंभे का उपयोग करके खान की छत पर आईईडी लगाए थे। रही बात तस्वीरों की तो वह उसने अपनी ही छत से खींचीं थी। अब इस मामले में दिल्ली पुलिस ने यूपी पुलिस की सहायता से अल्वी के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज की है और जब्त बम और सबूत भी यूपी पुलिस को सौंपे हैं। लोनी पुलिस स्टेशन में विस्फोटक अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है और आगे की जाँच जारी है। खान को क्लीन चिट दे दी गई है।