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हिन्दू घृणा से सने पादरी स्टीफेन ने नशीली दवा देकर विवाहिता को बनाया गैंगरेप का शिकार, तमिलनाडु में 8 पर FIR

अरुमनाई क्रिश्चियन एसोसिएशन (ACA) के सचिव और ईसाई पादरी अरुमनाई स्टीफेन के खिलाफ तमिलनाडु पुलिस ने एक विवाहित महिला के साथ गैंगरेप करने और उसकी रिकॉर्डिंग करने के आरोप में केस दर्ज किया है। पादरी के साथ इस अपराध में शामिल 7 अन्य लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। पादरी स्टीफेन को कन्याकुमारी में एक कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए गिरफ्तार किया जा चुका है, जहाँ विवादास्पद कैथोलिक पादरी जॉर्ज पोनैया ने हिन्दुओं के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिया था और हिन्दू देवी-देवताओं को अपशब्द कहे थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, तिरुवत्तुर जिले के वीयन्नूर की रहने वाली 36 वर्षीय महिला ने अरुमनाई स्टीफेन और उसके 7 अन्य साथियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। शिकायत में महिला ने कहा गया है कि आरोपितों ने नशीला ड्रिंक पिलाने के बाद उसके साथ गैंगरेप किया और इस कृत्य को रिकॉर्ड भी किया। महिला का आरोप है कि उसे फॉर्महाउस ले जाया गया, जहाँ उसका कई बार रेप हुआ है।

पीड़िता ने अप्रैल में भी शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन तब आरोपितों के डीएमके के साथ संबंधों के चलते कार्रवाई नहीं की गई थी। इसके बाद पुलिस के डर से एक आरोपित जैफरसन ने आत्महत्या कर ली थी। जब भड़काऊ भाषण के मामले में स्टीफेन को गिरफ्तार किया गया तब पीड़िता ने आगे आकर एक बार फिर स्टीफेन के खिलाफ शिकायत दर्ज की। पुलिस ने स्टीफेन, डीएमके के सदस्य जॉन ब्राइट, हेन्सलिन, जेबराज और अन्य आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया है।

ज्ञात हो कि तमिलनाडु के कन्याकुमारी में रोमन कैथोलिक पादरी जॉर्ज पोन्नैया को धार्मिक समूहों के बीच नफरत और दुश्मनी फैलाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, डीएमके नेता एवं अन्य के खिलाफ विवादित टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में द्रमुक की जीत ‘ईसाइयों और मुसलमानों द्वारा दी गई भीख’ थी।

उन्होंने पीएम मोदी के लिए कहा था, “नरेंद्र मोदी का आखिरी दिन सबसे दयनीय होगा। मैं लिखकर दे सकता हूँ। अगर जिन भगवान को हम पूजते हैं वो सच में जिंदा है तो इतिहास देखेगा कि मोदी और अमित शाह के सड़े शरीर को कुत्ते और कीड़े खाएँगे।” पोन्नैया के अलावा कार्यक्रम का आयोजन करने वाले अरुमनाई स्टीफेन के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया था।

इसके अलावा उन्होंने नागरकोली के भाजपा विधायक एम आर गाँधी पर तंज कसते हुए कहा था, “वो इसलिए चप्पल नहीं पहनते क्योंकि वो भारत माता को दर्द नहीं देना चाहते और हम लोग इसलिए चप्पल पहनते हैं ताकि हमारे पैर गंदे न हों और भारत माता के कारण हमें कोई बीमारी न हो।”

बता दें कि स्टेन स्वामी के निधन के बाद 18 जुलाई को कन्याकुमारी अरुमनई में ये सभा बुलाई गई थी। इस कार्यक्रम में बोलते हुए जॉर्ज पोन्नैया ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय और अल्पसंख्यक आयोग, अल्पसंख्यकों को प्रार्थना सभा आयोजित करने से मना कर रहे हैं।

अंसार खान की छत पर पड़ोसी मुजम्मिल अल्वी ने रखे थे IED, बताया था दिल्ली दंगों का गुनहगार: दिल्ली पुलिस ने खोला सच

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के नाम पर कुछ लोगों ने अपनी पुरानी रंजिशों का बदला भी लिया है। ये साबित होता है अंसार खान से जुड़ा मामला जानने के बाद। अंसार दिल्ली दंगों में बम बनाने और सप्लाई करने के आरोपित थे। 31 जुलाई को इस संबंध में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और SWAT शार्पशूटर्स ने उनके लोनी स्थित घर में छापेमारी की थी। ये छापेमारी इसी इनपुट पर की गई थी कि अंसार IED बनाकर सप्लाई करते हैं और दिल्ली दंगों में उनका हाथ है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, डीसीपी प्रमोद कुशवाहा ने बताया कि इस मामले की जाँच में अंसार पूरी तरह से निर्दोष पाए गए हैं। पुलिस ने पता लगाया है कि ये सब उनके पड़ोसी मुजम्मिल अल्वी का किया-धरा है जिसने अपनी ज्यादती दुश्मनी निकालने के चक्कर में अंसार का नाम गंभीर आरोपों में लिया।

अंसार खान कैसे निकले निर्दोष

जाँच टीम ने हर कड़ी को जोड़ा और अंसार को कहीं से कहीं तक किसी भी आरोप से जुड़ता नहीं पाया। मगर, पुलिस को बताया गया था कि अंसार के आतंकी लिंक हैं तो उन्होंने छापेमारी की। खान खुद हैरान थे कि आखिर बेलनाकार कंटेनर उनकी छत पर कैसे मिले। इन कंटेनरों में कागजों में लिपटे पाइप बम थे। सारे बमों को बम दस्ते द्वारा निष्क्रिय किया गया और खान को त्वरित कार्रवाई के साथ पकड़ा गया। खान इस दौरान अपने तीनों बच्चों की कसम खाते रहे लेकिन सबूत उनके ख़िलाफ़ थे। 

पुलिस को कुछ शक हुआ और डीसीपी कुशवाहा ने इस मामले में जाँच के लिए स्पेशल टीम बनाई। शक उनके पड़ोसी पर गहराया। सवाल यह था कि अगर अंसार इन सबमें शामिल नहीं है तो आखिर किसने उनके विरुद्ध गलत जानकारी दी। छानबीन में देखा गया कि जिस कंटेनर की तस्वीर पुलिस को दी गई उसके आसपास कोई पीले और हरे निशान थे लेकिन पुलिस को अंसार की छत पर ऐसा कुछ नहीं मिला।

आखिरकार जाँच में निकल आया कि ये सब अल्वी का किया-धरा है जिसने पुरानी रंजिश के चलते अंसार को फँसाया। खान ने कथिततौर पर एक दफा छेड़खानी के मामले में पंचायत बुलवाकर ये निर्णय लेने को कहा था कि अल्वी के साथ क्या किया जाना चाहिए, जिसपर पहले से ही लड़कियों के शोषण के तमाम मामले दर्ज है। इसी घटना के बाद से दोनों में मनमुटाव था।

अल्वी ने उगला सच

शक होने पर पुलिस ने अल्वी को पकड़ा और घटना वाले दिन उसकी लोकेशन के बारे में पूछा। कुछ देर अल्वी ने पूछताछ में अंसार से दुश्मनी से मना किया, मगर आखिरकार उसने सारी सच्चाई उगल दी। उसने बता दिया कि कैसे उसने बम अंसार की छत पर रखे, क्योंकि वो अपनी बदनामी का बदला लेना चाहता था।

उसने आगे बताया कि उसने स्थानीय बाजार से पोटेशियम और अन्य सामग्री खरीदी थी और फिर बाँस के खंभे का उपयोग करके खान की छत पर आईईडी लगाए थे। रही बात तस्वीरों की तो वह उसने अपनी ही छत से खींचीं थी। अब इस मामले में दिल्ली पुलिस ने यूपी पुलिस की सहायता से अल्वी के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज की है और जब्त बम और सबूत भी यूपी पुलिस को सौंपे हैं। लोनी पुलिस स्टेशन में विस्फोटक अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है और आगे की जाँच जारी है। खान को क्लीन चिट दे दी गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति बायडेन के बेटे का कॉलगर्ल के साथ SEX वीडियो वायरल, कहा- ‘रूसी ड्रग डीलरों ने चुराए लैपटॉप, उनमें हैं ऐसे न्यूड वीडियो’

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन के बेटे हंटर बायडेन का साल 2019 का एक वीडियो सामने आया है। इसमें हंटर दावा कर रहे हैं कि 2018 में वेगास के एक होटल में ड्रग देकर उनका लैपटॉप रुसी ड्रग डीलरों ने चुरा लिया था।

DailyMail की रिपोर्ट में बताया गया है कि वीडियो में हंटर के अलावा एक बिना कपड़ों की कॉलगर्ल भी है, जिसके साथ सेक्स का वीडियो बनाते हुए हंटर कहते हैं कि चोरी हुए लैपटॉप में ऐसा करते हुए उनके कई वीडियो थे। यह उनका तीसरा लैपटॉप था। इसके पहले उनका एक लैपटॉप डेलावेयर से चोरी गया था और एक को फेडरल एजेंट ने अपने कब्जे में लिया था। ऐसा कहा जाता है कि हंटर के इन लैपटॉप में राष्ट्रपति जो बायडेन से सम्बंधित काफी संवेदनशील जानकारियाँ थीं।

हंटर ने वीडियो में बताया कि उनके चोरी किए गए लैपटॉप में कई सेक्स वीडियो थे और वह डरे हुए थे कि ड्रग डीलर उन वीडियो के दम पर उन्हें ब्लैकमेल करेंगे। इसके अलावा, हंटर ने यह भी कहा कि अगर उन कथित चोरों के द्वारा वो सेक्स वीडियो पोर्न या न्यूज कंपनियों को बेच दिए जाते तो वो खुद इन वीडियो से पैसे कमाने का अवसर चूक जाते। DailyMail की रिपोर्ट के अनुसार, हंटर और उनकी साथी महिला वीडियो में ड्रग लेते हुए भी दिखाई दिए।

वैसे हंटर बायडेन के दूसरे लैपटॉप से फॉरेंसिक एजेंसियों ने कई फोटो बरामद की थीं। एक फोटो में उन्हें एक महिला के बाल खींचते हुए देखा गया था। महिला अपने घुटनों पर झुकी हुई एक सेक्सुअल पोजीशन में थी। जो बायडेन के बेटे की प्रोफाइल पोर्न हब जैसे पोर्न प्लेटफॉर्म्स पर भी बनी हुई है, जहाँ उनके कई सब्सक्राइबर्स भी हैं। उनके लैपटॉप के हार्ड ड्राइव में कई ऐसी पोर्न फिल्में भी मिलीं, जहाँ हंटर मुख्य पात्र हैं। आमतौर पर हंटर अपने लैपटॉप के वेब कैमरे से इन वीडियो को रिकॉर्ड करते थे।

अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव से पहले हंटर बायडेन की यूक्रेन की एक गैस कंपनी बरिस्मा के साथ वित्तीय संबंध सामने आए थे। उस समय हंटर के पिता जो बायडेन ओबामा के शासनकाल में उप-राष्ट्रपति थे। यूएस सीनेट कमेटी की रिपोर्ट में यह कहा गया था कि कई अमेरिकी सांसद इस बात को लेकर चिंतित हैं कि जो बायडेन की यूक्रेन पॉलिसी उनके बेटे के बरिस्मा के साथ संबंधों से भी प्रभावित हो सकती है।

काबुल से 130 Km दूर तालिबान, अफगान सरकार से ‘साझा सत्ता’ का प्रस्ताव: हिंदू-सिखों को लेकर बढ़ी भारत की चिंता

अफगानिस्तान में तालिबान के तेजी से पैर पसारने पर अफगान सरकार ने पूरी जंग को खत्म करने के लिए तालिबान के सामने सत्ता बँटवारे का प्रस्ताव रखा है। सत्ता साझेदारी का यह ऑफर वार्ताकारों की मदद से तालिबान के समक्ष रखा गया है। इधर, भारत ने अफगान की स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए वहाँ के हिंदुओं और सिखों को सहायता देने का वादा किया है और दूसरी ओर भारत में रहने वाले अफगानी शर्णार्थी भी वापस अपने मुल्क लौटने से डर रहे हैं।

सत्ता साझेदारी का ऑफर

अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में से 10 की राजधानियों पर तालिबान ने कब्जा जमा लिया है। गुरुवार को उसने गजनी शहर पर भी कब्जा किया, जो राजधानी काबुल से मात्र 150 किलोमीटर की ही दूरी पर स्थित है। इसके बाद ही तालिबान द्वारा मुल्क में पूर्ण कब्जा करने की आशंकाएँ बढ़ गई हैं। एएफपी ने सरकारी वार्ताकार के हवाले से बताया, “सरकार ने कतर को मध्यस्थ के रूप में एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। इसमें तालिबान को देश में हिंसा रोकने के बदले में सत्ता में साझेदारी का प्रस्ताव दिया गया है।”

अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने बताया कि एक अमेरिकी सुरक्षा अधिकारी ने अंदेशा जाहिर किया है कि अगले 30 दिनों के अंदर राजधानी काबुल को तालिबान अलग-थलग कर देगा और अगले 90 दिनों के अंदर वह मुल्क की राजधानी काबुल पर कब्जा कर लेगा। 

भारत ने जताई चिंता, हिंदू-सिखों के साथ संपर्क में

भारत के विदेश मंत्रालय ने आज अफगान में शांति बहाली की कामना करते हुए कहा कि वह अफगान सरकार की सभी शांति पहलों का समर्थन करता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, “सुरक्षा की स्थिति चिंता का विषय है। हम लगातार मॉनिटर कर रहे हैं। हम तत्काल और लगातार सीजफायर की उम्मीद करते हैं। हम अफगानिस्तान की सभी शांति पहलों का समर्थन कर रहे हैं। हमारी प्राथमिक चिंता उस देश में शांति और स्थिरता की बहाली को लेकर है। हम एक संप्रभु अफगानिस्तान के लिए एक समृद्ध भविष्य की आशा करते हैं।”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने काबुल स्थित दूतावास के न बंद होने की जानकारी देते हुए कहा कि वह सिखों और हिंदुओं को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने बताया कि पिछले साल काबुल में स्थित दूतावास ने हिंदू और सिख समुदाय के 383 सदस्यों को अफगानिस्तान से भारत आने में मदद की थी। उन्होंने कहा, ”काबुल में हमारा मिशन अफगान हिंदू और सिखों के साथ संपर्क में है और हम उन्हें हर जरूरी सहायता सुनिश्चित करेंगे।”

याद दिला दें कि अभी हाल में यह खबर भी आई थी कि तालिबानी आतंकियों ने वहाँ गुरुद्वारे पर कब्जा कर लिया। इसके बाद कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से आग्रह किया था कि अफगानिस्तान से हिंदू और सिख समुदाय के लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था की जाए। पत्र में शेरगिल ने कहा था कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के हिसाब से करीब 650 सिख और 50 हिंदू अफगानिस्तान में फँसे हुए हैं और ये लोग तालिबान का निशाना बन सकते हैं। उन्होंने कहा था कि इन लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था की जाए।

अफगानी शर्णार्थियों ने लौटने से किया मना

उल्लेखनीय है कि अफगान की खराब स्थिति को देखकर भारत ने अपने नागरिकों को वहाँ से फौरन निकलने को कहा था, साथ ही मजार-ए-शरीफ से नई दिल्ली के लिए विशेष उड़ान का संचालन किया था। वहीं, भारत में रह रहे अफगानी शर्णार्थियों का भी अब अपने मुल्क लौटने का मन नहीं है।

दिल्‍ली के जंगपुरा में रहने वाले दाऊद शरीफी उन्हीं शरणार्थियों में से एक हैं। वह पिछले 7 साल से अधिक समय से भारत में रह रहे हैं। अफगानिस्‍तान और तालिबान के बीच जारी जंग को देखते हुए दाऊद शरीफी कहते हैं, “मैं हमेशा से अपने वतन लौटने की इच्छा रखता हूँ, लेकिन मेरे बच्चे जो इस देश (भारत) में पैदा हुए हैं, वे इसे कभी पसंद नहीं करेंगे। अफगानिस्तान में हर जगह हिंसा, युद्ध और यातनाएँ हैं। अगर कोई भी वहाँ जाएगा तो मारा जाएगा।” 

न्यूज 18 के अनुसार, दाऊद दिल्ली में अफगान शरणार्थी संघ के भी प्रमुख हैं। उनका दावा है कि अफगानिस्तान के हालात देखते हुए 30 हजार अफगान नागरिक भारत में शरण लेने की सोच रहे हैं, क्योंकि भारत उन देशों में से एक है जो अफगान शरणार्थियों को अपने यहाँ शरण देता है। यहाँ के अलावा पाकिस्‍तान और ईरान भी अफगानिस्‍तान के नागरिकों को शरण देते हैं। 

दूसरी ओर 2018 से भारत में रहने वाले अफगानी शर्णार्थी फरहाद कहते हैं, “मैं अफगानिस्तान नहीं लौट सकता क्योंकि तालिबान पेंटिंग को हराम मानते हैं उन्होंने इसे गैर-इस्लामिक करार दिया है। मेरा पेशा वहाँ स्वीकार नहीं किया जाएगा।” फरहाद बताते हैं कि उनकी पेंटिग्स उनके देश में काफी प्रसिद्ध थीं। यूनेस्को की ओर से निकाली गई एक किताब में उनका नाम भी है। वह कहते हैं कि भले ही अफगानिस्तान में चल रही लड़ाई के दौरान भारत सबसे सुरक्षित देशों में हो, लेकिन एक शरणार्थी के रूप में उनकी स्थिति हमेशा उन्‍हें परेशान करती रहेगी।

सपा सरकार में मुस्लिमों ने 1000 साल पुराना कालिका माता मंदिर का बंद कर दिया था रास्ता, अब Dy CM से मिले हिंदू

उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर में एक हजार वर्ष पुरानी प्राचीन कालिका माता मंदिर का रास्ता खुलवाने के लिए निषाद समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात की। मंदिर के पास ही मजार है और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने दीवार बनाकर मंदिर जाने का रास्ता रोक दिया है। यही नहीं, मंदिर में स्थापित काली माता की चाँदी की प्रतिमा को भी गायब कर दिया गया है।

अंबेडकरनगर के कटका थाने के भियांव गाँव में लगभग हजार साल पुराना कालिका माता का मंदिर है। इसी के पास सूफी संत मीर शाह की मजार भी है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने दीवार बनाकर मंदिर तक आने-जाने का रास्ता बंद कर दिया और ईंटों से मंदिर के मुख्य द्वार की चुनाई करके मंदिर के अंदर जाने पर भी रोक लगा दी।

यही कारण है कि मंदिर जाने वाले श्रद्धालु दूर से ही माता के दर्शन करके वापस आ जाते हैं। यहाँ रहने वाली एक बुजुर्ग महिला बताती हैं कि माता की चाँदी की प्रतिमा को भी साजिशन गायब कर दिया गया। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि सदियों से इस मंदिर में माता कालिका को कड़ाही देने के साथ धार और लौंग अर्पित करने की प्रथा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मुस्लिम समुदाय के लोगों ने देवी मंदिर को अपने कब्जे में ले रखा है और लोग उनका विरोध भी नहीं कर पा रहे हैं।

यहाँ रहने वाले निषाद माता कालिका को अपनी कुलदेवी मानते हैं। यह क्षेत्र राजभरों और निषादों की संयुक्त छावनी हुआ करता था। अब निषादों का ही एक प्रतिनिधिमंडल यूपी के उप-मुख्यमंत्री मौर्य के पास पहुँचा और उनके समक्ष मंदिर का रास्ता खुलवाने के लिए ज्ञापन दिया। उपमुख्यमंत्री मौर्य ने भी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

हाल ही में दिल्ली के आजादपुर इलाके में बने फ्लाईओवर पर मजार बने होने का मामला सामने आया था। स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी यह मजार अवैध रूप से कब्जा की गई जमीन पर बनाई गई और इसके कारण फ्लाईओवर पर अक्सर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है। हालाँकि मजार का विरोध कर रहे एक हिन्दू युवक के साथ आदर्श नगर के एसएचओ ने बदसलूकी भी की थी, जिन्हें बाद में सस्पेंड कर दिया गया।

मजबूत लोकतंत्र के लिए मजबूत गाँधी मूर्ति आवश्यक… ‘फाइल-फेंक’ विरोध देख स्वर्ग में होते होंगे इम्प्रेस!

लोकतंत्र के एक्सपर्ट और विद्वान आए दिन हमें समझाते रहते हैं कि मजबूत लोकतंत्र के लिए मजबूत विपक्ष का होना आवश्यक है। इन विद्वानों की लगातार समझाइश का ही असर है कि देश में आपातकाल लगाने और उस दौरान विपक्षी नेताओं को देश भर के जेलों में ठूँस देने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी भी अब हमें समझाने लगी है कि; मजबूत लोकतंत्र के लिए मजबूत विपक्ष का होना आवश्यक है।

मजबूत लोकतंत्र के लिए उपजी इसी कॉन्ग्रेसी चेतना का असर है कि ममता बनर्जी भी बताती हैं कि; मोजबूत बीपोक्ख का बजह से ही लोकतंत्र का रोक्खा होता है। अब तो हाल यह है कि विरोधी दलों को अपने-अपने राज्यों में खोजकर रगड़ने वाली पार्टियाँ भी कहती हैं कि; जब तक विपक्ष मजबूत नहीं होगा, लोकतंत्र कमजोर ही रहेगा।

लोकतंत्र की इस कमजोरी को दूर करने के लिए ही आजकल विपक्षी दल के नेता केवल ब्रेकफास्ट और डिनर वगैरह ही खा पा रहे हैं। साथ ही खाने की अपनी राजनीतिक और सामाजिक संस्कृति को आगे बढ़ाते हुए संसद में हंगामा भी कर रहे हैं। शायद उनका यह मानना है कि खाने से मिली ताक़त लोकतंत्र की मजबूती के लिए काफी नहीं है। इसलिए जरूरी है कि संसद को चलने से रोक कर भी लोकतंत्र को मजबूती प्रदान की जाए।

संसद में विपक्ष के असंसदीय आचरण के पीछे भी शायद यही सोच है। विपक्ष बड़ी ईमानदारी से ऐसा मानता है कि इधर आचरण जैसे-जैसे असंसदीय होता जाएगा, उधर लोकतंत्र मजबूत होता जाएगा और ऐसा करना विपक्ष, आचरण और लोकतंत्र, तीनों के लिए शुभ है।

जो विपक्ष के लिए शुभ है, वह सरकार के लिए अशुभ है। ऐसे में लाजिमी है कि विपक्ष के इस असंसदीय आचरण को रोकने का सरकारी प्रयास लोकतंत्र को कमजोर करेगा। एक्सपर्ट और विद्वान लोग मजबूत विपक्ष की आवश्यकता पर इतना बल क्यों देते हैं, यह तो नहीं पता पर कभी-कभी लगता है कि इन विद्वानों का पक्के तौर पर ऐसा मानना है कि लोकतंत्र को मज़बूती प्रदान करने के लिए विपक्षी सांसदों को असंसदीय आचरण की न केवल खुली छूट होनी चाहिए बल्कि उस आचरण को रोकने की किसी भी संसदीय कोशिश के नतीजे में भारतीय लोकतंत्र की रेटिंग गिरा देनी चाहिए। ऐसे ही विद्वानों की वजह से दुनिया भर में लोकतंत्र मजबूत हो रहा है।

खैर, विद्वान चाहे जो सोचें, विपक्ष के असंसदीय आचरण की रोकथाम के लिए की गई सरकारी कोशिश की वजह से लोकतंत्र जब कमजोर पड़ने लगता है, तब विपक्षी सांसद अपने असंसदीय आचरण का स्तर ऊँचा करके देश को बताते हैं कि लोकतंत्र पर आए खतरे को फिलहाल टाल दिया गया है और उसमें आई कमजोरी को ग्लूकोन डी का घोल दे दिया गया है। उत्तर में सरकार भी उसी लोकतंत्र की रक्षा में उतर आती है और असंसदीय आचरण को संसद से अलग करने का प्रयास करती है। सरकार के इसी प्रयास को विपक्ष सरकारी अत्याचार की संज्ञा देता है। साथ ही इस अत्याचार के विरुद्ध अपनी लड़ाई में अनशन जैसा गाँधीवादी हथियार निकाल कर फायर कर देता है।

ऐसा ही एक फायर विपक्ष ने यह कहते हुए किया कि; विपक्ष की महिला सांसदों पर संसद में जो अत्याचार हुआ है, उसके विरोध में विपक्षी नेता गाँधी जी की मूर्ति के आगे विरोध प्रदर्शन करेंगे। ‘फाइल-फेंक’ विरोध तो राज्यसभा में भी हुआ, विरोध प्रदर्शन या अनशन तो कहीं भी किया जा सकता है पर गाँधी जी की मूर्ति के सामने या उसके नीचे बैठकर ऐसा करने का मज़ा ही कुछ और है। ऐसा करने से शायद गांँधी जी स्वर्ग में कहीं इम्प्रेस हो जाते होंगे।

सोचिए कि शरद पवार और डेरेक ओ’ ब्रायन लोकतंत्र की रक्षा के लिए गाँधी जी की मूर्ति के नीचे अनशन करेंगे तो महात्मा इम्प्रेस कैसे न होंगे? मुझे याद है कि एक बार बलराम जाखड़ और सुखराम देश में घटती नैतिकता और बढ़ते भ्रष्टाचार के विरोध में राजघाट में गाँधी जी की मूर्ति के नीचे अनशन पर बैठ गए थे। यह बात अलग है कि गाँधी जी कितना इम्प्रेस हुए थे, उसका कोई डेटा नहीं मिलता।

इस तरह के विरोध और अनशन की घोषणा होती है तब समझ में आता है कि गाँधी जी की मूर्तियाँ हमारे लिए जरूरी क्यों हैं? महात्मा की इन मूर्तियों के सहारे तर्कहीन राजनीतिक विरोधों को भी मान्यता दिलाने का एक पूरा इतिहास रहा है। ये मूर्तियाँ न होती तो विपक्ष अनशन और विरोध न कर पाता। विपक्ष अनशन और विरोध न कर पाता तो लोकतंत्र की कमजोरी दूर न हो पाती। ऐसे में आवश्यक है कि गाँधी जी की और मूर्तियों की स्थापना हो ताकि शरद पवार, ममता बनर्जी और डेरेक ओ’ ब्रायन जैसे लोकतंत्र के लिए चिंतित नेता उनके नीचे बैठकर अनशन करके न केवल देश को विरोध का महत्व समझा सकें बल्कि लोकतंत्र को मजबूत भी कर सकें।

मेरा तो मानना है कि भविष्य में जो दल देश में गाँधी जी की अधिक मूर्तियों की स्थापना करने की बात अपने चुनावी घोषणापत्र में करेगा, उसे लोकतंत्र का सबसे हितैषी दल माना जाएगा। इधर गाँधी जी की मूर्तियाँ स्थापित होती जाएँगी और उधर अमेरिका में बैठा कोई एनजीओ भारत के लोकतंत्र की रेटिंग बढ़ाता जाएगा और फिर एक दिन लोकतंत्र के एक्सपर्ट और विद्वान हमें समझाते हुए कहेंगे; मजबूत लोकतंत्र के लिए मजबूत गाँधी मूर्ति का होना आवश्यक है।

बिग बॉस वाली मूस जट्टाना ने खुद को बताया ‘बायसेक्सुअल’, कहा- लड़के हैं पसंद लेकिन शादी लड़की से

बिग बॉस ओटीटी पर प्रतिभागी के रूप में आईं मुस्कान जट्टाना (मूस जट्टाना) ने खुद को ‘बायसेक्सुअल‘ बताया और कहा कि वैसे तो उन्हें लड़के पसंद हैं, लेकिन शादी वो किसी लड़की से करेंगी। जट्टाना, ओटीटी प्लेटफॉर्म पर चल रहे बिग बॉस शो की सबसे विवादित प्रतिभागी मानी जा रही हैं।

शो के तीसरे एपिसोड में एक अन्य प्रतिभागी प्रतीक सहजपाल से बात करते हुए जट्टाना ने यह खुलासा किया कि वह बायसेक्सुअल हैं। उन्होंने कहा कि वह लड़कों को पसंद करती हैं, लेकिन एक लड़की के साथ जुड़ाव उनके लिए ज्यादा जरूरी है। हालाँकि, जट्टाना ने यह स्वीकार किया कि जहाँ तक शादी की बात है, वो किसी लड़की के साथ शादी करना पसंद करेंगी, अगर उनके संबंध उसके साथ अच्छे रहें तो।

जट्टाना को लेकर बिग बॉस शो में कई बार दूसरे प्रतिभागियों द्वारा यह कहा गया कि उनका व्यवहार सही नहीं है। एक अन्य प्रतिभागी मिलिंद गाबा के बारे में अपशब्दों का उपयोग करने पर उनकी बहसबाजी भी हो चुकी है। शो की एक अन्य सदस्य भोजपुरी फिल्मों की अभिनेत्री अक्षरा सिंह ने दावा किया कि जट्टाना ने उनके साथ बेहद बुरे लहजे में बात की। अक्षरा ने बताया कि जब उन्होंने मिलिंद के बारे में पूछा तो जट्टाना ने कहा, “गाबा मेरी गां** में है।” इसके अलावा, अक्षरा ने यह भी कहा कि जट्टाना ने उनके काम के बारे में अपमानजनक तरीके से कहा था, “ये जो तुम भोजपुरी गाना वाना गाती हो….” अक्षरा ने बताया कि जट्टाना की ऐसी बातें सुनकर वो रो पड़ी थीं।

मुस्कान जट्टाना एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं जो टिकटॉक, इंस्टाग्राम और यूट्यब पर सक्रिय रही हैं। इंस्टाग्राम पर जट्टाना के लगभग 1,87,000 फॉलोवर हैं। ज्ञात हो कि बिग बॉस ओटीटी को बॉलीवुड निर्माता करण जौहर होस्ट कर रहे हैं। इसमें मुस्कान, अक्षरा, सहजपाल और गाबा के अलावा कई अन्य प्रतिभागी हैं, जिनमें बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी की बहन शमिता शेट्टी भी शामिल हैं।

अपनी लड़की को खोजना छोड़ दो, वर्ना जिंदा जला देंगे: विशाल बन हिंदू लड़की को फँसाने वाले अकलीन कुरैशी की धमकी

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के शाही कस्बे में बीए सेकेंड ईयर में पढ़ने वाली हिंदू छात्रा से नजदीकी बढ़ाकर अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने और फिर उसका अपहरण करने का मामला सामने आया है। आरोपित अकलीम कुरैशी ने सबसे पहले खुद को विशाल बताकर लड़की के साथ नजदीकियाँ बढ़ाईं, उसके बाद पीड़िता का अपहरण कर लिया। उसने युवती की खोजबीन कर रहे परिजनों को दूर रहने की धमकी देते हुए जिंदा जलाने की धमकी दी है।

हालाँकि, जब छात्रा उसके ब्लैकमेलिंग और धमकियों के आगे नहीं झुकी तो एक दिन जब लड़की दुकान में सामान लेने के लिए गई थी तो वहाँ से उसका अपहरण कर लिया। अपहरण के बाद इन आरोपों से खुद को बचाने के लिए आरोपित ने पोस्ट ऑफिस के जरिए शाही थाने को एक पत्र भेजा। इसमें लड़की के नाम से लिखा कि उसने (लड़की) अपना धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपना लिया है और आरोपित अकलीम के साथ निकाह कर लिया है। हालाँकि, जब इसकी जानकारी को खंगाला गया तो निकाह की बात झूठी निकली।

मामला बढ़ने के बाद आरोपित की धमकियों से डरे लड़की के परिजनों ने बुधवार (11 अगस्त 2021) को जिले के एसएसपी से मिलकर सहायता की गुहार लगाई। एसएसपी ने पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द न्याय का आश्वासन दिया है। साथ ही कहा है कि जल्द ही आरोपित को भी पकड़ लिया जाएगा। आरोपित की लास्ट लोकेशन को ट्रेस कर लिया गया है, जो कि सीबीगंज में थी। हालाँकि, अभी तक सभी आरोपित पुलिस की पहुँच से बाहर हैं। शाही थाने के प्रभारी सौरभ सिंह के मुताबिक, युवती कहाँ और किन हालात में है अभी तक पता नहीं चल सका है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में इलाके के सभासद खलीबुल हसन खान पर आरोप है कि उसी ने वारदात को अंजाम देने में अकलीम कुरैशी की मदद की थी। दोनों के ही खिलाफ नामजद रिपोर्ट लिखी गई है और पुलिस उनके करीबियों से पूछताछ कर रही है। बीते 5 अगस्त 2021 से अकलीम औऱ सभासद खलीबुल हसन खान ने अपना मोबाइल फोन बंद कर रखा है।

हिंदू नाबालिग लड़की का कब्रिस्तान ले जाकर रेप, बेगुसराय से अहमद गिरफ्तार, पुलिस को मो. लड्डू की तलाश

बिहार के बेगुसराय से हिंदू समाज की एक नाबालिग लड़की के साथ रेप का मामला प्रकाश में आया है। एक महादलित परिवार से आने वाली 11 वर्षीय पीड़िता शौच के लिए रात को घर से बाहर निकली थी, तभी दूसरे समुदाय के दो युवकों ने उसे पकड़ा और कब्रिस्तान में ले जाकर उसके साथ रेप किया। बाद में लड़की को सड़क पर छोड़ दिया गया। कुछ लोगों की नजर जब पीड़िता पर गई तो उसके घरवालों को सूचित किया गया और दो दिन बाद थाने में शिकायत दर्ज हुई। अब तक पूरे केस में एक आरोपित गिरफ्तार हुआ है। दूसरे की तलाश जारी है। पीड़िता का मेडिकल हो चुका है। पुलिस रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।

कब्रिस्तान में मारपीट के बाद किया रेप

पूरा मामला 8 अगस्त 2021 को रात 11-11:30 बजे का है। हालाँकि, शिकायत पर मुकदमा 10 तारीख को दर्ज हुआ। बेगुसराय के डंडारी थाना के कटहरी गाँव की 11 वर्षीय पीड़िता ने ऑपइंडिया को बताया कि वह 8 अगस्त को रात में शौच के लिए घर से बाहर निकली ही थी कि तभी उसके पड़ोस में गैराज में काम करने वाले मोहम्मद लड्डू और मोहम्मद सिन्टू वहाँ मोटरसाइकल से आए और उसका मुँह दबाकर उसे पकड़कर अपने साथ कब्रिस्तान में ले गए। दोनों ने वहाँ उसके साथ मारपीट करके दुष्कर्म किया। नाबालिग की माँ ने भी ऑपइंडिया से बातचीत में पुष्टि की है कि दोनों आरोपित उनके घर के पास बनी एक दुकान (गैराज) पर काम करते थे। इनके नाम मोहम्मद लड्डू और मोहम्मद सिन्टू हैं।

पीड़िता की आपबीती, पुलिस की कार्रवाई, बजरंग दल का समर्थन

पीड़िता की ओर से थाने में दी गई शिकायत की एक कॉपी ऑपइंडिया के पास है। इसमें नाबालिग ने आपबीती बताई है। शिकायत के मुताबिक, उसे दोनों आरोपितों ने जबरन बाइक पर बैठाया और एक किलोमीटर (किमी) दूर बने कब्रिस्तान ले जाकर थप्पड़ मारे। इसके बाद मोहम्मद सिन्टू ने उसे पकड़े रखा और मोहम्मद लड्डू ने उसका बलात्कार किया। लड़की बेहोशी जैसी हालत में हो गई तब जाकर उसे पास की सड़क पर छोड़ दोनों फरार हो गए।

पीड़िता को सड़क पर देख कुछ लोगों ने उसके घरवालों को सूचित किया और मामले में शिकायत लिखवाई गई। ऑपइंडिया ने इस बाबत डंडारी थाने में भी बात की। पुलिस अधिकारी ने हमें बताया कि इस मामले में एक आरोपित की गिरफ्तारी हो गई है। उसका असली नाम मोहम्मद अहमद आजम उर्फ मोहम्मद सिन्टू है। मोहम्मद लड्डू अभी फरार है। उसे पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। लड़की का मेडिकल करवा दिया गया। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

इस केस के संबंध में बजरंग दल के विभाग संयोजक पंकज सिंह भी जिला प्रशासन से जल्द से जल्द अपराधियों की गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बजरंग दल बच्ची को न्याय दिलाने तक उनके साथ रहेगा। आज उन्होंने अपने अन्य साथियों के साथ पीड़िता के परिवार से मुलाकात की है।

क्यों हैं सब मौन?

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले एक रेप का ऐसा ही मामला दिल्ली के कैंट थाना इलाके के पुरानी नांगल से भी आया था। वहाँ एक 9 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। मामले ने इतना तूल पकड़ा था कि बड़े-बड़े नेता से लेकर कई लोगों ने इस मुद्दे पर आवाज उठाई। आरोपितों को सजा दिलाने की माँग के साथ-साथ भर-भर कर हिंदुओं को, पुजारियों को, ब्राह्मणों को कोसा गया था। अब ऐसा ही मामला बिहार के बेगुसराय से है, लेकिन पूरे मुद्दे पर मीडिया कवरेज शायद ही आपको देखने को मिले।

कारण क्या है? ये शायद मीडिया के कथित दिग्गज पत्रकार और मौकापरस्त राजनेता ही बता पाएँगे कि आखिर रेप पीड़िताओं के लिए आवाज उठाने में इतना भेदभाव क्यों होता है। क्या सुदूर गाँव में हो रही ऐसी घटनाओं पर आवाज तभी उठाई जाएगी, जब पीड़िता के दोषी हिंदू या पुजारी होंगे और घटनास्थल मंदिर या श्मशान घाट होगा? क्या जिंदा बची पीड़िता ये उम्मीद नहीं बाँध सकती कि उसे भी इंसाफ दिलाया जाएगा या उसकी गलती ये है कि वह एक ऐसी जगह की निवासी है, जहाँ विपक्षी पार्टियाँ पहुँचकर अपनी राजनीति नहीं कर पाएँगे?

निमरोज के गवर्नर पैलेस पर तालिबान का कब्जा, करेंसी एक्सचेंज पर भी: भारत की ‘चाबहार पोर्ट’ परियोजना पर असर?

तालिबान ने अफगानिस्तान के निमरोज (Nimruz) प्रांत की राजधानी जरंज (Zaranj) पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया और गवर्नर के पैलेस पर भी कब्जा कर लिया है। हालाँकि, यह खबर पहली नजर में महीनों से चल रहे अफगान संघर्ष की एक ‘रूटीन न्यूज’ लग सकती है, लेकिन वास्तविकता में यह भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है। जरंज पर तालिबान का कब्जा हो जाने के बाद ईरान में भारत की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘चाबहार पोर्ट’ प्रभावित हो सकती है।

अफगानिस्तान में अमेरिका और नाटो सेनाओं की वापसी के साथ शुरू हुआ संघर्ष अब बढ़ता जा रहा है। तालिबान और अफगानिस्तान की सेना के बीच भीषण युद्ध चल रहा है, जिसमें कभी तो अफगानी सेना हावी होती दिखाई देती है, लेकिन तालिबान भी लगातार शहरों पर कब्जा करता जा रहा है। सड़कों, सैन्य चौकियों और महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर पर कब्जा करके तालिबान अफगानिस्तान की सेनाओं के मूवमेंट को ब्लॉक करना चाहता है, ताकि किसी प्रकार की सहायता एक स्थान से दूसरे स्थान तक न पहुँचाई जा सके। इसी क्रम में तालिबान ने निमरोज प्रांत की राजधानी जरंज पर कब्जा कर लिया। सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जहाँ तालिबानी आतंकी प्रांत के गवर्नर के पैलेस पर ‘पार्टी’ करते हुए देखे जा सकते हैं। इसके अलावा, जरंज के करेंसी एक्सचेंज पर भी तालिबान का कब्जा हो चुका है।

जरंज पर कब्जा चिंता का विषय क्यों?

जरंज पर तालिबान का कब्जा होना भारत के लिहाज से उचित नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि जरंज के साथ भारत के भी हित जुड़े हुए हैं। यह हित है, ईरान में भारत द्वारा निर्मित जा रहे चाबहार पोर्ट की सुरक्षा का। हालाँकि, जरंज से चाबहार पोर्ट की दूरी लगभग 900 किमी है तो ऐसे में तालिबान सीधे तौर चाबहार पर हमला या कब्जा नहीं कर सकता, लेकिन चिंता की बात है जरंज की रणनीतिक स्थिति। दरअसल जरंज, अफगानिस्तान और ईरान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित है और अफगानिस्तान के देलाराम (Delaram) से जरंज तक सड़क निर्माण भारत द्वारा ही कराया गया था, जिसके माध्यम से भारत की योजना अफगानिस्तान के गारलैंड हाइवे होते हुए हेरात, कांधार, काबुल और मजार-ए-शरीफ तक पहुँचने की थी।

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ओमान की खाड़ी में स्थित चाबहार पोर्ट और उसके बाद अफगानिस्तान, भारत की उस रणनीति का एक हिस्सा हैं, जहाँ भारत, पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान समेत मध्य-पूर्वी एशिया के देशों तक अपनी पहुँच बढ़ा सकता है। कजाखिस्तान, तजीकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और किर्गिस्तान जैसे देशों में भारत के व्यापार को पहुँचाने के लिए चाबहार पोर्ट और अफगानिस्तान बहुत महत्व के क्षेत्र हैं। इसके अलावा अफगानिस्तान के माध्यम से भारत न केवल मध्य-पूर्व एशिया, बल्कि रूस और यूरोप तक भी अपनी पहुँच को मजबूत कर सकता है। अफगानिस्तान के जरंज पर तालिबान के कब्जे के कारण अफगानिस्तान को नुकसान तो होगा ही, भारत को भी अपनी रणनीति में परिवर्तन करना पड़ेगा।

निश्चित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेशी मामलों के मंत्री एस. जयशंकर इस पूरे घटना क्रम में नजर रखे हुए हैं और इस मामले में अपने समकक्षों के संपर्क में भी हैं। लेकिन, भारत के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि पहले ही कई बार यह ख़बरें आ चुकी हैं कि पाकिस्तान और ISI, अफगानिस्तान में भारत की सहायता और भारत की ही फंडिंग के माध्यम से बनाई गई सम्पत्तियों को निशाना बनाना चाहते हैं। इसमें पाकिस्तान के कई सैन्य अधिकारी एवं आतंकी इस काम में तालिबान की सहायता कर रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान, तालिबानी आतंकियों द्वारा जरंज जैसे सीमाई और रणनीतिक इलाकों में कब्जा करने का लाभ अवश्य उठाना चाहेगा।