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J&K में जिहाद के नाम पर महिलाओं का यौन शोषण, मारे गए आतंकियों के पास से फिर मिले कंडोम और वियाग्रा

जम्मू-कश्मीर के राजौरी के थानामंडी में घुसपैठ के दौरान मारे गए दो आतंकियों की छानबीन में उनके पास से कई कंडोम और वियाग्रा बरामद हुए हैं। आतंकियों के पास से बरामद इन चीजों को देख कहा जा रहा है कि अब आतंकियों को जम्मू-कश्मीर की निर्दोष महिलाओं का यौन शोषण करने के लिए भेजा जा रहा है।

रिपब्लिक टीवी की रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षा प्रतिष्ठान के शीर्ष अधिकारी ने उनको पुष्टि करते हुए कहा कि पहले भी सुरक्षाबलों ने कश्मीर में मारे गए आतंकवादियों के पास से इस्तेमाल किए गए कंडोम और कंडोम के पैकेट बरामद किए हैं। यौन शक्ति बढ़ाने वाली दवाओं जैसी सामग्री की बरामदगी से पता चलता है कि आतंकवादी महिलाओं के यौन शोषण में लिप्त थे

बता दें कि इससे पहले पिछले साल भी शोपियाँ में आतंकी ठिकाने से भारी मात्रा में कंडोम, वियाग्रा, गर्भनिरोधक गोलियॉं और पोर्न बरामद किया गया था। न्यूज चैनल्स के मुताबिक शोपियाँ में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने से कंडोम के 19 पैकेट, वियाग्रा टैबलेट के 5 पैकेट, पोर्न, गर्भनिरोधक गोलियों के 10 पैकेट आदि बरामद हुई थी। इन सबको देख अंदाजा लगाया गया था कि कश्मीर में इस्लाम के नाम पर जारी ‘जिहाद’ की आड़ में सेक्सुअल टेरर को अंजाम दिया जा रहा है और आतंकी कश्मीरी महिलाओं का यौन शोषण करते हैं। अब 1 साल बाद एक बार फिर ऐसी ही जानकारी सामने आई है।

उल्लेखनीय है कि एनकाउंटर के संबंध में पुलिस ने अपने बयान में बताया था कि 6 अगस्त 2021 को जम्मू-कश्मीर पुलिस को गाँव पंगई के सामान्य इलाके में आतंकियों के एक समूह के होने की सूचना मिली थी। फिर भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा एक संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया गया। तलाशी के दौरान, संयुक्त दल आतंकवादियों के करीबी संपर्क में आया, जिसके बाद उन्होंने तलाशी दल पर गोलियाँ बरसानी शुरू कर दी, लेकिन सुरक्षाबलों ने इसका प्रभावी ढंग से जवाब दिया। इस दौरान 2 आतंकवादियों को सफलतापूर्वक ढेर कर दिया गया। इनके पास से सेना को नौ मैगजीन और 232 राउंड के साथ दो एके 47 राइफल, चार ग्रेनेड, गोला-बारूद के पाउच, बैटरी, बैंडेज, गोलियाँ और रोजाना में काम आने वाली अन्य चीजें बरामद हुई हैं।

स्टार पहलवान विनेश फोगाट को कुश्ती संघ ने अस्थायी रूप से किया निलंबित, सोनम मलिक को भी नोटिस: ये है वजह

भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने टोक्यो ओलंपिक में अनुशासनहीनता को लेकर स्टार पहलवान विनेश फोगाट पर बड़ी कार्रवाई की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विनेश को कुश्ती संघ ने अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। वहीं, WFI ने 19 वर्षीय युवा पहलवान सोनम मलिक को भी दुर्व्यवहार के लिए नोटिस जारी किया है। बताया जा रहा है कि सोनम को टोक्यो ओलंपिक में जाने से पहले खुद या परिवार के किसी सदस्य के हाथों WFI के ऑफिस से पासपोर्ट लेना था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। हालाँकि, विनेश फोगाट को इस मामले पर अपना पक्ष रखने के लिए 16 अगस्त तक का समय दिया गया है। 

कुश्ती संघ के एक सूत्र के हवाले से बताया जा रहा है कि विनेश ने टोक्यो ओलंपिक के क्वार्टरफाइनल मुकाबले में नियमों का उल्लंघन किया था। उन्होंने मैच के दौरान भारतीय दल के आधिकारिक स्पांसर ‘शिवनरेश’ की पोशाक पहनने की बजाय मुकाबलों में ‘नाईकी’ की ड्रेस पहनी थी। इसके अलावा हरियाणा की विनेश ना तो खेलों के दौरान खेलगाँव में ठहरीं और ना ही उन्होंने अन्य भारतीय खिलाड़ियों के साथ ट्रेनिंग ली।

WFI के सूत्र ने पीटीआई से कहा, “यह अनुशासनहीनता है। विनेश फोगाट को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है। उन्हें कुश्ती से जुड़ी सभी गतिविधियों से प्रतिबंधित किया गया है। जब तक वह इस मामले पर अपना जबाव नहीं देती हैं तक वह किसी राष्ट्रीय या अन्य घरेलू प्रतिस्पर्धा में भाग नहीं ले पाएँगी। WFI अंतिम फैसला करेगा।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हंगरी से टोक्यो ओलंपिक में खेलने गई गई विनेश ने सोनम, अंशु मलिक और सीमा बिस्ला के बगल वाले कमरे में रहने से इनकार कर दिया था और काफी हंगामा किया था। बता दें कि विनेश टोक्यो ओलंपिक के क्वार्टरफाइनल में बेलारूस की वनेसा से करारी हार का सामना करना पड़ा था।

अनुपम श्याम को आमिर खान ने किया था डायलिसिस सेंटर का वादा, जरूरत पड़ने पर मुकरे? CM योगी ने की थी ₹20 लाख की मदद

टीवी एक्टर अनुपम श्याम के निधन के बाद 9 अगस्त को उनके भाई अनुराग श्याम ने आजतक से बातचीत में कुछ चौंकाने वाली जानकारी साझा की है। साक्षात्कार के दौरान अनुराग ने बताया कि बॉलीवुड एक्टर आमिर खान ने प्रतापगढ़ में डायलिसिस सेंटर लगवाने को कहा था। हालाँकि बाद में आमिर ने फोन उठाना बंद कर दिया। अनुराग ने कहा कि उनका भाई उनके शो ‘मन की आवाज प्रतिज्ञा 2’ के रद्द होने की अफवाहों से बहुत परेशान था।

साक्षात्कार के दौरान, अनुराग ने बताया कि अनुपम बीमार होने पर अपनी माँ से भी नहीं मिल सके। जिस समय वह बीमार थीं, उस समय अभिनेता नहीं आ सके क्योंकि प्रतापगढ़ में डायलिसिस सेंटर नहीं है। अनुपम किडनी की बीमारी के लिए नियमित डायलिसिस पर थे।

अनुराग ने कहा, “हमारा परिवार बहुत कुछ झेल रहा है। मेरी माँ का पिछले महीने निधन हो गया। अनुपम हैरान थे कि वह प्रतापगढ़ तक (जहाँ उनकी माँ रहती थी) नहीं जा सके। शहर में डायलिसिस सेंटर के बिना, अनुपम के लिए यह एक बड़ा स्वास्थ्य जोखिम होता। हमने प्रतापगढ़ में एक डायलिसिस सेंटर के लिए आग्रह किया और अनुपम इसके लिए आमिर खान के पास भी गए। खान ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह केंद्र स्थापित करने में मदद करेंगे लेकिन उन्होंने कुछ महीनों के बाद उनकी (अनुपम) कॉल उठाना बंद कर दी।”

बता दें कि एक ओर जहाँ अनुपम श्याम के निधन के बाद आमिर खान को लेकर यह जानकारी सामने आई है। वहीं दूसरी ओर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर स्वयं एक्टर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि कैसे सीएम योगी ने उनकी 20 लाख रुपए की मदद की थी। उन्होंने कहा था,

“वह (सीएम योगी) मुझे व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और मेरे काम को पसंद करते हैं। उनके द्वारा की गई वित्तीय मदद ने संकट के दौरान मेरी मदद की। मेरे पास कुछ बचत भी थी जिसे मैं इलाज के लिए इस्तेमाल करता था। अब, जैसा कि मैं काम पर वापस आ गया हूँ, मुझे उम्मीद है कि मैं भविष्य के लिए पैसे बचाने में सक्षम हो जाऊँगा।”

उल्लेखनीय है कि अनुपम श्याम पिछले कुछ सालों से किडनी की बीमारी से पीड़ित थे। एक हफ्ते पहले उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इंटरव्यू के दौरान अनुराग ने कहा कि अनुपम की तबीयत में सुधार हो रहा था और डॉक्टरों ने वेंटिलेटर तक हटा दिया था। हालाँकि, बीपी में तेजी से गिरावट के कारण उनकी स्थिति खराब हो गई, जिसके कारण कई अंग फेल हो गए और उनका निधन हो गया।

ईसाई डॉक्टर हिंदू मंदिर के अंदर जूते पहनकर घुसी, कहा- ‘ऐसा कोई बोर्ड नहीं, जो मंदिर के अंदर जूते पहनने से रोके’

तमिलनाडु में एक ईसाई डॉक्टर द्वारा मंदिर के अंदर जूते पहनने पर विवाद खड़ा हो गया है। यह घटना वेल्लोर के पोगोई गाँव की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला डॉक्टर कथित तौर पर उस टीम का हिस्सा थी, जो कोविड-19 का टीके लगाने के लिए गाँव आई थी। ग्रामीणों के बार-बार मना करने के बावजूद डॉक्टर ने अपने जूते नहीं उतारे। इस पर गुस्साए ग्रामीणों ने डॉक्टर का विरोध जताया और उनकी टीम से वैक्सीन लगवाने से इनकार कर दिया।

स्थानीय मीडिया के अनुसार, वेल्लोर सरकारी अस्पताल द्वारा पोगोई गाँव के मुथलम्मन मंदिर परिसर में टीकाकरण शिविर का आयोजन किया गया था। इस दौरान ईसाई डॉक्टर रेजिना को भी गाँव में कोरोना का टीका लगाने के लिए टीम के साथ भेजा गया था।

बताया जा रहा है कि मंदिर के अंदर टीकाकरण शिविर का आयोजन किया गया था। इसलिए टीम में शमिल सभी डॉक्टरों ने अपने जूते बाहर निकाल दिए थे, लेकिन रेजिना ने ग्रामीणों के कहने के बावजूद जूते नहीं उतारे। वह मंदिर के अपवित्र होने की परवाह किए बिना मंदिर के अंदर जूते पहनकर बैठ गई।

उसके इस व्यवहार से ग्रामीण आक्रोशित हो गए। जब ग्रामीणों ने उसे जूते उतारने के लिए कहा तो उसने कहा, “क्या कोई ऐसा बोर्ड है, जो कहता है कि किसी को मंदिर के अंदर जूते नहीं पहनने चाहिए?” बार-बार अनुरोध करने के बावजूद, जब रेजिना ने अपने जूते उतारने से इनकार कर दिया, तो हिंदू ग्रामीणों ने मंदिर के सामने ही उसका विरोध करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि हम तब तक वैक्सीन नहीं लगाएँगे जब तक कि वह मंदिर से बाहर नहीं निकल जाती।

कोरोना के डर से जूते पहने: डॉक्टर

मामला तूल पकड़ने के बाद इलाके के हिंदू मोर्चा के नेता आदि शिव अपने समर्थकों के साथ मंदिर पहुँचे। उन्होंने ईसाई डॉक्टर से हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान करने और उनसे जूते उतारने का अनुरोध किया, लेकिन डॉक्टर अपनी बात पर अड़ी रही।

माहौल खराब होता देख डॉ. रेजिना ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह कोरोना के डर से अपने जूते नहीं उतार रही है। उसने कहा कि अगर वह नंगे पैर मंदिर में बैठेगी तो उसे कोरोना हो सकता है। हालाँकि, आक्रोशित ग्रामीणों ने इस तर्क को मानने से इनकार कर दिया और उसे तुरंत मंदिर परिसर छोड़ने को कहा। गाँव वाले इस बात पर अड़े थे कि उसके जाने के बाद ही वे टीका लगवाएँगे।

बता दें कि ग्रामीणों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए ईसाई डॉक्टर की ओर से वहाँ मौजूद अन्य नर्सों और डॉक्टरों ने उनसे माफी माँगी। इसके बाद ही ग्रामीण वैक्सीन लेने के लिए राजी हुए।

‘खतरे में ईसाइयों का अस्तित्व’: घटती जन्म दर से चिंतित केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल ने शुरू की 5 या अधिक बच्चों के लिए योजना

केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (KCBC) ने ईसाइयों की घटती जन्म दर पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अगर इसी तरह ईसाइयों की संख्या घटती रही तो इस समुदाय का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

केसीबीसी ने सर्कुलर जारी करते हुए कहा, ”पहले 1950 के दशक में केरल में ईसाइयों की आबादी का 24.6% थी, लेकिन अब यह घटकर 17.2% हो गई है। ईसाई 1.8% की न्यूनतम जन्म दर वाला समुदाय बन गया है। ऐसी स्थिति में पिछले महीने (जुलाई 2021) केरल कैथोलिक चर्च ने बड़े ईसाई परिवारों के लिए कल्याणकारी योजना की घोषणा की है।” केसीबीसी ने कहा कि अनुचित विकास नीतियों के कारण उत्पन्न होने वाले सामाजिक संकटों के लिए जनसंख्या में कमी को एकमात्र समाधान के रूप में मानना तर्कसंगत नहीं है।

इसमें कहा गया है, “चीन जैसे देश और कम जन्म दर वाले विभिन्न विकसित देश अब घटती जनसंख्या के दुष्प्रभावों के कारण अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर हैं।” इस महीने की शुरुआत में केसीबीसी के मानसून शिखर सम्मेलन के दौरान इस मामले पर चर्चा हुई थी।

जुलाई 2021 में पलाई सूबा के फादर जोसेफ कल्लारंगट द्वारा जारी एक सर्कुलर पर विवाद के बीच ईसाइयों के बीच घटती जन्म दर पर चिंता व्यक्त की गई है। इसमें जिन ईसाई परिवारों के 5 या उससे अधिक बच्चे हैं, उन्हें वित्तीय सहायता देने के बारे में बात की गई है।

कैथोलिक चर्च के तहत फैमिली एपोस्टोलेट के प्रमुख फादर जोसेफ ने समाचार एजेंसी पीटीआई को हाल ही में बताया था कि चर्च के पाला सूबा के तहत फैमिली एपोस्टोलेट द्वारा शुरू की गई पहल ने उन जोड़ों को 1,500 रुपए की मासिक वित्तीय सहायता देने का फैसला किया है, जिनकी शादी साल 2000 के बाद हुई थी और जिनके 5 या उससे अधिक बच्चे हैं।

बताया जाता है कि यह चर्च द्वारा ‘परिवार के वर्ष’ समारोह के हिस्से के रूप में घोषित किया गया था। यह पहल विशेष रूप से कोरोना काल में बड़े परिवारों को सहायता प्रदान करने के लिए है। फादर जोसेफ कुट्टियनकल ने कल्याणकारी घोषणा के संदर्भ में कहा था कि हम जल्द ही आवेदन प्राप्त करना शुरू कर देंगे और सबसे अधिक संभावना है, हम अगस्त से सहायता देने में सक्षम होंगे।

रोहिंग्या देश के लिए बड़ा खतरा, उनकी पहचान हो रही है, अभी NRC लागू करने की कोई योजना नहीं: केंद्र सरकार

देशभर में एनआरसी लागू करने को लेकर केंद्र सरकार ने मंगलवार (10 अगस्त 2021) को केंद्रीय गृह मंत्रालय लोक सभा में जानकारी दी है कि अभी तक एनआरसी को लेकर कोई भी फैसला नहीं किया गया है। इसके साथ ही रोहिंग्या (Rohingya) मुस्लिमों के मुद्दे पर केंद्र ने स्पष्ट किया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी कर रोहिंग्याओं की पहचान करने के लिए कहा गया है।

लोकसभा में एक सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने यह भी कहा कि सरकार ने 2021 की जनगणना के पहले चरण के साथ नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अपडेट करने का फैसला किया है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “अब तक सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर (NPR) तैयार करने का कोई निर्णय नहीं लिया है।” अभी तक NRC को केवल असम में ही अपडेट किया गया है। जब 2019 में NRC की अंतिम सूची प्रकाशित हुई, तो 3.3 करोड़ आवेदकों में से कुल 19.06 लाख को बाहर कर दिया गया था।

एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए मंत्री ने कहा कि कोई भी व्यक्ति जो असम में एनआरसी तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान दावों और आपत्तियों के निर्णयों के परिणाम से संतुष्ट नहीं है, वह विदेशी ट्रिब्यूनल के समक्ष तारीख से 120 दिनों के भीतर अपील कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि चूँकि असम में एनआरसी से बाहर किए गए लोगों को उनके लिए उपलब्ध सभी संभावित कानूनी उपायों को समाप्त करना बाकी है, इसलिए इस स्तर पर उनकी राष्ट्रीयता के सत्यापन का सवाल ही नहीं उठता है।

उन्होंने यह भी कहा कि चूँकि अवैध प्रवासी चोरी से बिना किसी पासपोर्ट के देश के अंदर घुसते हैं ऐसे में उनकी संख्या को लेकर कोई केंद्रीय डेटा उपलब्ध नहीं है।

केंद्रीय मंत्री ने रोहिंग्याओं को देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि अवैध प्रवासी रोहिंग्याओं के देश में आए दिन किसी न किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल होने की खबरें सामने आती रहती हैं।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कॉन्ग्रेस सांसद बेनी बेहानन द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए बताया कि इस साल जनवरी 2021 से अब तक एफसीआरए (विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम) कानून के तहत 115 पंजीकृत संघों / गैर सरकारी संगठनों का ऑडिट किया गया है।

श्रीनगर के लाल चौक के पास से CNS का पत्रकार आदिल फारूक 2 ग्रेनेड के साथ रंगेहाथ गिरफ्तार, पूछताछ जारी

कश्मीर के श्रीनगर में लाल चौक के पास सीआरपीएफ ने आदिल फारूक नामक पत्रकार को 2 ग्रेनेड्स के साथ गिरफ्तार किया है। ये गिरफ्तारी अमीरा कदल के नजदीक हुए ग्रेनेड हमले के कुछ मिनट बाद हुई है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस समय आदिल से पूछताछ कर रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार आदिल प्रेस एन्क्लेव में CNS न्यूज एजेंसी का सब-एडिटर है।

जम्मू-कश्मीर से जुड़ी जानकारी ट्विटर पर सक्रियता के साथ साझा करने वाले आदित्य राज कॉल ने यह सूचना अपने ट्वीट के माध्यम से दी है। उन्होंने ट्वीट में लिखा है कि श्रीनगर के प्रेस एन्क्लेव के पास पत्रकार आदिल फारूक को ग्रेनेड के साथ रंगेहाथ गिरफ्तार कर श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। डीआईजी और एसएसपी उससे पूछताछ कर रहे हैं। फारूक मूल रूप से दक्षिण कश्मीर में पुलवामा के पंपोर के ख्रेव के पास का रहने वाला है। पुलिस को बड़ी सांठगांठ का शक है।

बता दें कि इससे पहले आतंकियों ने आज (अगस्त 10, 2021) ही सुरक्षाबलों को निशाना बनाते हुए हरि सिंह हाई स्ट्रीट इलाके में ग्रेनेड हमला किया था। इस दौरान धमाका हुआ, जिससे 9 स्थानीय घायल हो गए। सबको जल्द से जल्द अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद पुलिस ने आतंकियों को पकड़ने के लिए घेराबंदी शुरू की और कुछ देर में पत्रकार आदिल लालचौक के पास पकड़ा गया।

‘लड़के-लड़की अलग-अलग… साथ में बनते हैं नाजायज संबंध’: मदरसा टीचर, NCPCR ने कहा – पढ़ा रहे औरंगजेब काल का पाठ्यक्रम

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की एक रिपोर्ट ने मदरसों को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। दावा है कि मदरसों में 400 साल पुराने पाठ्यक्रम को पढ़ाया जा रहा है जो अंधविश्वास पर आधारित है न कि विज्ञान पर। एनसीपीसीआर का कहना है कि ऐसे ‘अनमैप्ड’ मदरसों में कई बच्चे पढ़ते हैं जहाँ शिक्षा के नाम पर बताया जाता है कि सूरज पृथ्वी के चक्कर लगाता है।

टाइम्स नाऊ ने इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट की है। वीडियो में मौलवी अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। मौलवियों का कहना है कि वो कुरान हदीस को नहीं बदल सकते, धार्मिक पुस्तक वैसी की वैसी पढ़ाई जाती हैं। इसके साथ बच्चों को अन्य विषय (अंग्रेजी, कम्प्यूटर और मैथ्स) भी पढ़ाए जाते हैं जैसे दूसरे बच्चे पढ़ते हैं। इसके अलावा वीडियो में एक मौलवी ये भी बता रहे हैं कि आखिर लड़के-लड़कियों के मदरसे क्यों अलग होते हैं।

उनके मुताबिक, यदि लड़के-लड़कियों को एक ही मदरसे में बिठाया जाए तो उसके दुष्परिणाम देखने को मिलते हैं। दोनों में दोस्ती हो जाती है, नाजायज संबंध बन जाते हैं। ऐसे में दोनों के अलग-अलग मदरसे रखे गए हैं। लेकिन उनको किताबें वही पढ़ाई जाती हैं जो आम स्टूडेंट पढ़ते हैं।

इस मामले पर NCPCR के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो का कहना है कि औरंगजेब के शासन के समय मदरसों का पाठ्यक्रम तैयार हुआ और आज भी भारत के कई ‘अनमैप्ड’ मदरसों में वही पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है। ये बात सही है कि कई जगह ये पढ़ाया जाता है कि सूरज, पृथ्वी का चक्कर लगाता है।

वह भारतीय कानून का हवाला देकर कहते हैं कि जब कानून में ये लिखा है कि बच्चे को नहीं पीटा जाएगा। ऐसे में ये बोलना कि तीन थप्पड़ मारना जायज है बच्चे को, तो ये तो अपराध की श्रेणी में आता है, इसलिए इसे रिपोर्ट का पार्ट बनाया गया है। इसके बाद वो भेदभाव के मुद्दे को उठाते हैं और कहते हैं कि अगर बचपन में ही ये भाव बच्चों में पैदा किया जाएगा कि लड़कियाँ एक कमतर जीवन जीने की अधिकारी हैं, तो वो बड़े होकर लड़कियों का महिलाओं का शोषण करने की प्रवृत्ति की ओर बढ़ेंगे। 

‘श्रीजेश के सम्मान में केरल सरकार को 1 दिन भी बर्बाद नहीं करना चाहिए’ – पूर्व ओलंपिक खिलाड़ी ने दिखाया आईना

टोक्यो में हुए ओलंपिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया। लेकिन कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम के गोलकीपर पीआर श्रीजेश के लिए केरल की वामपंथी सरकार ने कोई भी घोषणा नहीं की। केरल की एलडीएफ सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं।

दरअसल, भारतीय हॉकी टीम ने 41 साल में पहली बार ओलंपिक में कोई मेडल जीता। इसके पाँच दिन बीत चुके हैं, बावजूद मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है। श्रीजेश को ओलंपिक में उनके दमदार प्रदर्शन के बावजूद नकद प्रोत्साहन से सम्मानित नहीं किया गया। खास बात यह है कि 33 वर्षीय श्रीजेश सामान्य और उच्च शिक्षा विभाग के कर्मचारी हैं।

गोलकीपर श्रीजेश केरल अर्नाकुलम जिले के पलिक्करा के रहने वाले हैं। हालाँकि, श्रीजेश मंगलवार (10 अगस्त 2021) की शाम को 5 बजे कोचीन एयरपोर्ट पर पहुँचेंगे, जहाँ कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड में उनका स्वागत किया जाएगा। इस दौरान खेल मंत्री वी अब्दुर्रहमान भी उपस्थित रहेंगे।

दूसरे राज्यों ने की धनवर्षा

केरल के उलट पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों ने अपने यहाँ के ओलंपिक पदक विजेताओं को सरकारी नौकरी, पदोन्नति और भारी नकद पुरस्कार की पेशकश की है। सामान्य भावना यह है कि केरल सरकार ने श्रीजेश को निराश किया है, जो मैनुअल फ्रेडरिक्स के बाद पदक जीतने वाले केवल दूसरे केरलवासी हैं।

हरियाणा सरकार ने पुरुषों की भाला फेंक में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाले नीरज चोपड़ा को 6 करोड़ रुपए का नकद इनाम देने की घोषणा की है। इस बीच, पंजाब सरकार ने ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे प्रत्येक खिलाड़ी को एक करोड़ रुपए का नकद पुरस्कार देने का एलान किया है। इसके अलावा पंजाब सरकार ने नीरज चोपड़ा के लिए भी नकद पुरस्कार की घोषणा की है।

मध्य प्रदेश सरकार ने हॉकी स्टार विवेक सागर और मध्य प्रदेश हॉकी अकादमी के पूर्व छात्र नीलकांत शर्मा को एक करोड़ रुपए और चौथे स्थान पर रही महिला हॉकी टीम के प्रत्येक सदस्य को 31 लाख रुपए देने का फैसला किया है।

वहीं टोक्यो ओलंपिक में अपने ऐतिहासिक रजत पदक के बाद भारोत्तोलक साइखोम मीराबाई चानू को जल्द ही मणिपुर सरकार द्वारा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (खेल) के रूप में नियुक्ति देगी। इसके अलावा चानू को एक करोड़ रुपए का इनाम भी दिया जाएगा।

जब इतने सारे राज्य बढ़-चढ़ कर विजेता खिलाड़ियों के लिए घोषणा कर रहे हैं, केरल सरकार ने श्रीजेश की उपलब्धियों को नज़रअंदाज़ कर दिया। इसी बीच यूएई स्थित वीपीएस हेल्थकेयर के अध्यक्ष और एमडी डॉ. शमशीर वायलिल ने उन्हें 1 करोड़ रुपए के नकद पुरस्कार की घोषणा की।

केरल सरकार की उदासीनता पर पूर्व ओलंपियन टीसी योहन्नान ने कहा, “श्रीजेश ने केरल को गौरवान्वित किया है, इसलिए वो बेहतर स्वागत के हकदार हैं। उन्होंने वर्षों तक जो कड़ी मेहनत की है, उसे देखते हुए उन्हें सम्मानित करने में राज्य सरकार को एक दिन भी बर्बाद नहीं करना चाहिए। सरकार के पास अभी भी कुछ करने का वक्त है। ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाले नीरज चोपड़ा को सम्मानित करने के लिए आम जनता से दान लेने के लिए सरकार को एक फंड बनाना चाहिए।”

‘अवैध बांग्लादेशी मुस्लिम असम में चिंता का विषय, हमें इस पर एक्शन लेना ही होगा’: CM हिमंत बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार (10 अगस्त, 2021) को न्यूज चैनल टाइम्स नाऊ में असम-मिजोरम सीमा विवाद, गोहत्या और अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के अलावा कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि सभी अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को बाहर निकालना हमारा प्राथमिक उद्देश्य है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “अवैध बांग्लादेशी प्रवासी यानी मुस्लिम, जिन्होंने हमें चुनाव में एक भी वोट नहीं दिया। उन अवैध बांग्लादेशी मुसलमानों को निकालना है। मैं हर एक बूथ पर गया, मुझे पता है कि एक भी मुस्लिम वोटर ने बीजेपी को एक भी वोट नहीं दिया। ऐसे में बीजेपी पर आरोप लगाया जाता है कि वह वोट पाने के लिए असम में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को संरक्षण देती है। तो NRC और CAA को लेकर आप क्या कहेंगे। ये आरोप निराधार हैं। अवैध बांग्लादेशी मुसलमान असम में चिंता का विषय है, हमें इस पर एक्शन लेना ही होगा।”

इसके साथ ही उन्होंने सीमा विवाद को लेकर कॉन्ग्रेस को आड़े हाथों लिया। सीएम ने कहा कि असम-मिजोरम सीमा विवाद कॉन्ग्रेस की देन है। उनकी गलतियों के कारण यह आज और बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस यह कभी नहीं चाहती थी कि नॉर्थ ईस्ट एक रहे।

उन्होंने आगे कहा कि सीमा विवाद को तत्काल हल नहीं किया जा सकता है। दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद का ये मामला दशकों पुराना और काफी जटिल है। ऐसे में इसका हल एक रात में नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए समय लगेगा।

सीएम ने कहा कि विवाद की शुरुआत में ही पीएम मोदी ने मुझसे बात की थी कि उन्हें यह सब देखकर बहुत पीड़ा होती है। उन्होंने मुझसे कहा था कि पूर्वोत्तर को एकजुट होना चाहिए। ऐसे विवाद पूरे देश के लिए शर्मनाक हैं। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी असम-मिजोरम सीमा विवाद को राष्ट्रीय मुद्दा मानते हैं। वह इसे हल करने के लिए कोई भी पहल करने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि असम सर्वोच्च न्यायालय या केंद्र सरकार के किसी भी सुझाव को मानने के लिए तैयार है, भले ही वह वन क्षेत्र को अभी जैसा ही बनाए रखने के लिए हो। यह राजनीतिक दलों से परे है। यहाँ तक कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनी कमेटियाँ भी इस मसले का समाधान नहीं कर पाईं। मैं असम-मिजोरम सीमा विवाद के संबंध में किसी भी न्यायिक जाँच का सामना करने के लिए तैयार हूँ। मिजोरम के साथ हमारे बहुत अच्छे संबंध हैं। सीएम ने कहा कि औपनिवेशिक शासन ने असम-मिजोरम सीमा विवाद की नींव रखी और आजादी के बाद यह विवाद बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि गृ​ह मंत्री अमित शाह का असम-मिजोरम दौरा इस मसले के समाधान की शुरुआत है।

इसके साथ ही सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने असम में गोहत्या रोकथाम कानून का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यह कानून गाँधी जी की विचारधारा से प्रेरित है। मैं इन मवेशियों की आबादी की रक्षा करना चाहता हूँ।

बता दें कि 26 जुलाई को असम-मिजोरम सीमा विवाद संघर्ष में असम पुलिस के 6 जवान मारे गए थे और कछार एसपी सहित 50 से अधिक लोग घायल हो गए थे। असम और मिजोरम सरकारों के प्रतिनिधियों ने हाल ही में एक संयुक्त बयान जारी किया और अंतर-राज्यीय सीमा विवाद को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने पर सहमत हुए। दोनों राज्य की सरकारें खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों में असम और मिजोरम में रहने वाले लोगों के बीच शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए सभी आवश्यक उपाय करने पर सहमत हुई हैं।