Home Blog Page 3511

अफगानिस्तान की 6 प्रांतीय राजधानियों पर तालिबानी कब्जा: भारत ने मजार-ए-शरीफ से अपने नागरिकों को बुलाया वापस

अफगानिस्तान में तालिबान औऱ वहाँ की सरकार के बीच जारी संघर्ष के बीच अफगानिस्तान में कॉन्सुलेट में कार्यरत भारतीय कर्मचारियों को भारत वापस लौटने को कहा है। वहाँ के मजार-ए-शरीफ शहर में स्थित कॉन्सुलेट में कुछ अधिकारी और अन्य भारतीय अभी मौजूद हैं। अब इन सभी को वहाँ से सुरक्षित निकालने की जिम्मेदारी भारतीय वायुसेना को दी गई है।

मजार-ए-शरीफ अफगानिस्तान का चौथा बड़ा शहर है। यहाँ भारत का अंतिम भारतीय वाणिज्य दूतावास स्थित है। यह शहर अफगानिस्तान के बाल्ख प्रांत के अंतर्गत आता है। तालिबान ने अब तक 6 प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा कर लिया है।

मंगलवार (10 अगस्त 2021) को मजार-ए-शरीफ से एक स्पेशल फ्लाइट नई दिल्ली के लिए रवाना हो रही है। मजार-ए-शरीफ औऱ उसके आसपास रहने वाले शाम की फ्लाइट से नई दिल्ली के लिए रवाना हो जाए। मजार में भारतीय कान्सुलेट की ओर से कहा गया है कि जो भी भारतीय नई दिल्ली रवाना होना चाहते हैं, वह तुरंत अपना पूरा नाम, पासपोर्ट नंबर और अन्य जानकारी इन नंबरों पर 0785891303, 0785891301 व्हाट्सएप पर भेज सकते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले पिछले महीने कंधार में भारतीय कॉन्सुलेट से 50 भारतीय राजनयिकों औऱ सुरक्षा अधिकारियों को वापस लाया गया था। सरकारी आँकड़ों के मुताबिक फिलहाल करीब 1500 भारतीय अफगानिस्तान में रह रहे हैं।

पिछले हफ्ते विदेश मंत्रालय ने लोकसभा में कहा था कि भारत सतर्क है और संघर्षग्रस्त देश में भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय कर रहा है।

भारतीय फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी की कंधार शहर के स्पिन बोल्डक जिले में तालिबान द्वारा की गई हत्या के बाद भी भारतीय दूतावास ने अफगानिस्तान में आने, रहने और काम करने वाले अपने नागरिकों को अपनी सुरक्षा के संबंध में अत्यधिक सावधानी बरतने और देश के विभिन्न हिस्सों में हिंसा की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर सभी प्रकार की गैर-जरूरी यात्रा से बचने के लिए कहा था।

अमेरिका की मदद से अफगान सेना ने 85 तालिबानी आतंकवादी मार गिराए, आतंक के खिलाफ ऑपरेशन अभी भी जारी

अफगानिस्तान में तालि‍बान के बढ़ते कब्‍जे और आतंक से वहाँ के नागरिक त्रस्त हैं। अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों के वापस लौटने के बाद से तालिबानी आतंकियों द्वारा बेगुनाह लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं, अफगान सेना भी अपने देश के नागरिकों को बचाने के लिए इन आतंकियों से लोहा ले रही है, जिसमें अमेरिका भी लगातार उनकी मदद कर रहा है। अफगानी सेना के जवानों को सोमवार (9 अगस्त) रात बड़ी कामयाबी मिली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हवाई हमले में 85 तालिबानी आतंकवादियों को मार गिराया है और अभी भी आतंकियों के खिलाफ अभियान जारी है।

अफगानिस्तानी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता फवाद अमान ने मंगलवार (10 अगस्त)) को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा, ”सोमवार रात सैयद करम और अहमद अबाद जिलों और पक्तिका प्रांत राजधानी के आसपास के इलाकों पर हवाई हमला किया गया, जिसमें 85 तालिबानी आतंकवादी मारे गए।”

उन्होंने इसके बाद एक और ट्वीट​ किया, ”अमेरिकी वायुसेना ने मंगलवार को कपिसा प्रांत के निजरब जिले में तालिबानी आतंकियों के गढ़ों को निशाना बनाया। इसमें 2 पाकिस्तानी राष्ट्रीय आतंकवादियों सहित 12 तालिबानी आतंकवादी मारे गए। हवाई हमले में उनका एक corrugated tank और एक वाहन भी नष्ट हो गया है।”

उन्होंने बताया कि एएनडीएसएफ (Afghan National Defense and Security Forces) ने मंगलवार को काबुल प्रांत के शकर दारा जिले में आतंकियों को अपनी सरजमीं से खदेड़ने के लिए ऑपरेशन शुरू किया गया है। इसके तहत आज 1 आतंकवादी मारा गया, 3 घायल हुए और 3 अन्य को गिरफ्तार किया गया। ऑपरेशन अभी भी जारी है।

गौरतलब है कि अफगानी सेना के जवानों ने दो दिन पहले यानी 8 अगस्त को मात्र 24 घंटों के दौरान 572 आतंकवादियों को मार गिराया और 309 अन्य को घायल कर दिया था। फवाद अमान ने ट्वीट कर बताया था, ”नंगरहार, लगमन, गजनी, पक्तिया, पक्तिका, कंधार, उरुजगन, हेरात, फराह, जोजजान, सर-ए पोल, फरयाब, हेलमंद, निमरुज, तखर, कुंदुज, बदख्शां और कपिसा प्रांत में पिछले 24 घंटों के दौरान में अफगानिस्तान राष्ट्रीय रक्षा एवं सुरक्षा बल एएनडीएसएफ के अभियानों में 572 आतंकवादी मारे गए और 309 अन्य घायल हो गए।”

अनुच्छेद 370 हटने के बाद कितने लोगों ने खरीदी J&K में जमीन? संसद में मोदी सरकार ने दिया जवाब: जानें क्या है प्रक्रिया

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद ये सवाल अक्सर पूछा जाता है कि आखिर 2 सालों में कितने लोगों ने केंद्र शासित प्रदेश में जमीन ली? इसी बिंदु पर मंगलवार (अगस्त 10, 2019) को संसद में भी बात छिड़ी, जिसके बाद सरकार ने इसपे जवाब दिया। सरकार ने बताया कि 2019 अगस्त के बाद से अब तक सिर्फ दो बाहरी लोगों ने जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदी है।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा लोकसभा में एक सवाल के जवाब में ये जानकारी दी गई है। बता दें कि जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद अब वहाँ ज़मीन खरीदने में लोगों या सरकार को किसी कठिन प्रक्रिया का सामना नहीं करना पड़ रहा है। ये जानकारी भी इसी दौरान दी गई।

उल्लेखनीय है कि जब तक जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370, 35-ए लागू थी तब तक जम्मू-कश्मीर से अलग किसी राज्य का कोई भी व्यक्ति वहाँ जमीन नहीं खरीद सकता था। लेकिन मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले के बाद वहाँ कई चीजें बदलने के लिए नियमों में भी बदलाव आया। अब किसी भी राज्य का कोई शख्स वहाँ जमीन ले सकता है। इसके लिए किसी विशेष प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं है।

बता दें कि हाल ही में प्रदेश से अनुच्छेद 370 हटे दो साल हुए हैं। इस मौके पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने राज्य की नई फिल्म शूटिंग पॉलिसी जारी की। इसके अलावा केंद्र सरकार की ओर से अब राज्य में तमाम स्कीमें भी चलाई जा रही हैं। स्थानीयों को जॉब के अवसर मिल रहे हैं, लड़कियों को बराबरी का अधिकार मिल रहा, कश्मीरी पंडितों की वापसी के प्रयास हो रहे हैं और सबसे बड़ी बात वहाँ आतंकवाद की कमर टूट रही है।

आप बना सकते हैं वर्ल्ड रिकॉर्ड: सिर्फ 4 स्टेप… और ये 15 अगस्त आपके लिए हो जाएगा यादगार

देश की आजादी के 75 साल पूरे होने के अवसर केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय इस 15 अगस्त (2021) को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मना रहा है। इसके तहत राष्ट्रगान को गाने के लिए एक वेबसाइट ( https://rashtragaan.in/ ) भी शुरू की गई है। यहाँ आप राष्ट्रगान गाकर उसके वीडियो को वेबसाइट पर अपलोड कर सकते हैं। इसके जरिए संस्कृति मंत्रालय इस साल 15 अगस्त को राष्ट्रगान गाने वाले भारतीयों का एक रिकॉर्ड बनाना चाहता है।

वेबसाइट में राष्ट्रगान गाते हुए अपना वीडियो अपलोड करना होता है। वीडियो अपलोड करने के लिए चार स्टेप हैं। आइए इसकी प्रक्रिया के बारे में जानते हैं:

स्टेप 1: जैसे ही आप ( https://rashtragaan.in/) पर विजिट करते हैं तो वहाँ पर आपको दो ऑप्शंस दिखाई देंगे। इसमें से पहला ऑप्शन भाषा चुनने का है और दूसरा ऑप्शन प्रोसीड यानि आगे बढ़ने का है। अपनी पसंद की भाषा चुनने के बाद प्रोसीड पर क्लिक करके आगे बढ़ेंगे तो पार्टिसिपेंट्स यानि कि प्रतिभागी के बारे में जानकारी माँगी जाती हैं। यहाँ आवेदक का पूरा नाम, उसकी उम्र, देश का नाम और राज्य का नाम पूछा जाता है।

स्टेप 2: आवेदक के अपनी डिटेल्स भरने के बाद उसके नीचे लेट्स सिंग (गाएँ) का ऑप्शन है। इस पर क्लिक करते ही राष्ट्रगान रिकॉर्ड करने के लिए विंडो ओपन हो जाती है। कैमरा विंडो के नीचे तीन ऑप्शन हैं (रिकॉर्ड, रीस्टार्ट और अपलोड)। रिकॉर्ड पर क्लिक करते ही रिकॉर्डिंग शुरू हो जाती है। इस दौरान बैकग्राउंड में राष्ट्रगान की धुन बजती है औऱ उसी के साथ प्रतिभागी को राष्ट्रगान गाना होता है।

स्टेप-3: राष्ट्रगान को रिकॉर्ड करने के बाद अपलोड के बटन पर क्लिक कर दें।

स्टेप 4: राष्ट्रगान के वेबसाइट पर अपलोड होते ही वेबसाइट के माध्यम से ही आपको राष्ट्रगान के लिए भाग लेने के लिए ऑनलाइन ही एक सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा। सर्टिफिकेट के नीचे इसे डाउनलोड करने का ऑप्शन भी होगा, जिस पर क्लिक करके आप उसे डाउनलोड कर सकते हैं।

वेबसाइट के मुताबिक, 100 टॉप वीडियोज को 15 अगस्त पर टीवी, रेडियो और सोशल मीडिया पर भी रिलीज करने के लिए सेलेक्ट किया जाएगा।

8 साल के हिंदू बच्चे को होगी फाँसी? इस्लामी किताबों की ‘बेइज्जती’ से हुई ईशनिंदा… कई हिंदू परिवार घर छोड़ भागे

पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ किस तरह का बर्ताव किया जाता है, इसको इस घटना से आसानी से समझा जा सकता है कि वहाँ 8 साल के बच्चे के खिलाफ भी ईशनिंदा के तहत कार्रवाई कर दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी पाकिस्तान में 8 साल के हिंदू बच्चे पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया है। पाकिस्तान में ईशनिंदा की कार्रवाई झेलने वाला वह अब तक का सबसे कम उम्र का व्यक्ति बन गया है। उसे पुलिस की सुरक्षा में हिरासत में रखा गया है।

मामला पंजाब प्रांत के रहीम यार खान जिले का है, जहाँ पिछले सप्ताह बच्चे को ईशनिंदा के मामले में जमानत दे दी गई थी। इसके बाद से बच्चे का परिवार अंडर ग्राउंड हो गया है। हालाँकि, पिछले सप्ताह ही जमानत के विरोध में कट्टरपंथियों की भीड़ ने एक हिंदू मंदिर पर भी हमला कर दिया था। इसके बाद कई हिंदू परिवार वहाँ से अपना घर छोड़कर चले गए हैं। फिलहाल, इलाके में सेना को तैनात किया गया है। शनिवार (7 अगस्त 2021) को मंदिर पर हमले के मामले में 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, 8 साल के हिंदू बच्चे पर आरोप है कि उसने पिछले महीने एक मदरसे के पुस्तकालय में एक कालीन पर जानबूझकर पेशाब किया, जहाँ पर धार्मिक किताबें रखी गई थीं। वहाँ के कानून के अनुसार यह ईशनिंदा है। आपको बता दें कि पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोपों में मौत की सजा हो सकती है।

द गार्जियन नाम की न्यूज वेबसाइट को लड़के के परिवार ने बताया, “उसे (लड़का) ईशनिंदा क्या है, ये भी नहीं पता और उसे जबरन मामले में फँसाया जा रहा है। उसे अभी भी समझ नहीं आया है कि उसका अपराध क्या था और उसे एक हफ्ते के लिए जेल में क्यों रखा गया था? हमने अपनी दुकानें और काम छोड़ दिया है। पूरा समुदाय डरा हुआ है और हमें उनके (मुस्लिमों) बदले की कार्रवाई का डर है। हम इस क्षेत्र में वापस नहीं जाना चाहते हैं। हमें नहीं लगता कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस और सार्थक कार्रवाई की जाएगी।”

एक बच्चे के खिलाफ दर्ज ईशनिंदा के आरोपों ने कानूनी विशेषज्ञों को चौंका दिया है। इससे पहले पाकिस्तान में इतनी कम उम्र के बच्चों ईशनिंदा का आरोप नहीं लगा था।

इस मामले में पाकिस्तानी सांसद और पाकिस्तान हिंदू परिषद के प्रमुख रमेश कुमार ने कहा, “मंदिर पर हमले और आठ साल के नाबालिग लड़के के खिलाफ ईशनिंदा के आरोपों ने मुझे वास्तव में झकझोर कर रख दिया है। हमले के डर से 100 से अधिक हिंदुओं ने अपने घर खाली कर दिए हैं।”

वहीं मानवाधिकार कार्यकर्ता कपिल देव ने 8 साल के नाबालिग बच्चे पर लगे आरोपों को वापस लेने की माँग की और सरकार से अपना घर छोड़कर जा रहे हिंदुओं को सुरक्षा देने की माँग की। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में हिंदू मंदिरों पर हमले बढ़े हैं, जो चरमपंथ और कट्टरता के बढ़ते स्तर को दर्शाता है। हाल के हमले हिंदुओं के उत्पीड़न की एक नई लहर प्रतीत होते हैं।”

विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के राजदूत को किया तलब

हिंदू मंदिर को निशाना बनाने के मामले में भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के राजदूत को तलब कर पाकिस्तान के मुस्लिम बहुल इलाके में रहने वाले हिंदू समुदाय को सुरक्षा देने की माँग की।

14 घंटे पहले गार्ड को गोली मार भागे थे 3 बदमाश, UP पुलिस के साथ मुठभेड़ में 2 हुए ढेर: तीसरे की तलाश जारी

उत्तर प्रदेश की जौनपुर पुलिस ने मंगलवार (10 अगस्त) को दो शातिर बदमाशों को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ आज सुबह साढ़े पाँच बजे सिंगरामऊ थाना क्षेत्र के बहरा पीली नदी के समीप हाईवे और रेलवे क्रासिंग के बीच हुई। बताया जा रहा है कि मारे गए बदमाशों में से एक का नाम अभिषेक गौतम और दूसरे का नाम नितिन मौर्य है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुठभेड़ में मारे गए दोनों बदमाश सोमवार (9 अगस्त) को धनियामऊ में कैश वैन लूटने के प्रयास में और गार्ड को गोली मारने की घटना में शामिल थे। जौनपुर पुलिस अधीक्षक अजय साहनी ने बताया कि मंगलवार की सुबह 4 बजे गश्त के दौरान पुलिस को दो संदिग्ध लोगों की सूचना प्राप्त हुई। सूचना पर आसपास के थानों की पुलिस को अलर्ट कर दिया गया।

अजय साहनी के मुताबिक, पुलिस से जब बाइक सवार बदमाशों का आमना-सामना हुआ तो उन्होंने पुलिस टीम पर फायर कर दिया। इस दौरान एक इंस्पेक्टर की जैकेट को छूती हुई गोली निकल गई, जबकि ए​​क सिपाही जख्मी हो गया। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए दोनों बदमाशों पर गोलियाँ चला दीं, जिससे वे घायल हो गए। इसके बाद बदमाशों को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। उन्होंने बताया कि घटना के 14 घंटे बाद ही एनकाउंटर किया गया।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मौके से नौ एमएम की पिस्टल और कारतूस बरामद हुई है। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने कई थाने की फोर्स जिला अस्पताल पर तैनात कर दी थी। बता दें कि बक्शा थाना क्षेत्र के धनियामऊ बाजार में सोमवार दोपहर को कैश वैन लूटने के प्रयास में इन बदमाशों ने गार्ड को गोलियों से छलनी कर उसकी हत्या कर दी थी। इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के बाद फरार तीन में से दो लुटेरों को पुलिस ने आज मुठभेड़ में मार गिराया, जबकि तीसरा बदमाश फरार है।

पढ़ाई के लिए बार-बार बोलती थी माँ, 15 साल की बेटी ने बेल्ट से गला घोंट मार डाला

महाराष्ट्र के नवी मुंबई में एक 15 साल की नाबालिग लड़की ने पढ़ाई पर हुई बहस के बाद अपनी माँ का कराटे की बेल्ट से गला घोंट दिया। पुलिस का कहना है कि लड़की ने शुरू में इसे आक्समिक मौत का मामला बताया। हालाँकि फॉरेंसिक जाँच में पता चला कि महिला की मौत गला दबाए जाने से हुई थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूरी घटना 30 जुलाई 2021 को नवी मुंबई के एरोली इलाके की है। रबाले पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी का कहना है कि लड़की और उसकी 40 वर्षीय माँ के बीच अक्सर झगड़े होते थे। महिला चाहती थी कि उसकी बेटी मेडिकल का कोर्स करे, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।

धीरे-धीरे दोनों के बीच पढ़ाई के कारण विवाद इतना बढ़ गया था कि लड़की ने माँ के ख़िलाफ़ पिछले महीने शिकायत भी की थी। इसके बाद पुलिस ने कथिततौर पर परिवार के सदस्यों की काउंसलिंग की। मगर, 30 जुलाई को लड़की ने जानकारी दी कि उसकी माँ गिरकर मर गई हैं। पुलिस ने जानकारी मिलने के बाद शव को फॉरेंसिंक जाँच के लिए भेजा, जहाँ रिपोर्ट्स में साफ आया कि मौत गला दबाए जाने से हुई है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अधिकारी ने बताया कि लड़की से जब पुलिस ने पूछताछ की तो उसने बताया कि उसने ही अपनी माँ का पढ़ाई के ऊपर हुई लड़ाई के बाद कराटे बेल्ट से गला घोंट दिया था। पुलिस के मुताबिक लड़की को सोमवार को हिरासत में ले लिया गया है और उसके ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

आरोपित लड़की ने बताया कि उसकी माँ दिन-रात उसे पढ़ाई के लिए टॉर्चर किया करती थी। लेकिन उसका पढ़ाई में मन नहीं लगता था। वह बहुत असहज महसूस करती थी। घटना वाले दिन जब दोनों के बीच झगड़ा हुआ तो उसने गुस्से में माँ को मारा। उसके मुताबिक, उसकी माँ भी उसे मारने के लिए चाकू लाई थी। हालाँकि उसने खुद को बचा लिया। फिर माँ ने बेल्ट उठा ली, जिसे कुछ देर में लड़की ने छीना और उससे माँ की हत्या कर दी। घटना के समय सिर्फ दोनों ही घर पर थे।

बता दें कि इस मामले की सूचना पुलिस को कैसे मिली, इसे लेकर रिपोर्ट्स में अलग-अलग जानकारी है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, मृतक के भाई ने पुलिस को फोन पर बताया था कि वह काफी देर से घर की बेल बजा रहा है लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला। बहुत देर बाहर खड़े रहने पर उसको शक हो रहा है। भाई की शिकायत के बाद जब पुलिस उनके घर पहुँची तब भी किसी ने दरवाजा नहीं खोला। जब बल का प्रयोग करके दरवाजा तोड़ा गया तो महिला सामने पड़ी थी और उसके गले पर कराटे वाला बेल्ट बंधा था। दूसरे कमरे में जब पुलिस पहुँची तो बेटी सो रही थी। पुलिस ने जानकारी ली तो उसने बातों को घुमाया, मगर बाद में सारा अपराध कबूल लिया।

‘मौलाना साद, अकबरुद्दीन और टिकैत आज़ाद क्यों?’: अश्विनी उपाध्याय गिरफ्तार, उनके प्रदर्शन में आए साधु पर जानलेवा हमला

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए भाजपा नेता व सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय को गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि उनके ‘भारत जोड़ो आंदोलन’ में मुस्लिम विरोधी नारे लगे। इधर इसी आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए आए बिहार के साधु नरेशानंद पर गाजियाबाद के डासना स्थित शिव-शक्ति मंदिर में चाकुओं से जानलेवा हमला किया गया।

जहाँ एक तरफ साधु नरेशानंद अस्पताल में जीवन और मौत से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अश्विनी उपाध्याय पुलिस की गिरफ्त में हैं। उनसे लगभग 6 घंटे तक पूछताछ चली। इस विरोध प्रदर्शन में हजारों लोग शामिल हुए थे। वो खुद को इस प्रकरण से पहले ही अलग कर चुके हैं और पुलिस से कहा है कि आपत्तिजनक नारेबाजी करने वालों से उनका कोई लेनादेना नहीं है। साथ ही उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की माँग भी की।

‘इंडिया स्पीक्स डेली’ के संपादक संदीप देव ने इस पर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि जहाँ 15 मिनट में हिंदुओं को खत्म कर देने की धमकी देने वाला असदुद्दीन ओवैसी का भाई अकबरुद्दीन विधानसभा में बैठा है, वहीं कोरोना फैलाने वाले मौलाना साद को मनाने के लिए खुद NSA अजीत डोभाल को जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि लाल किले पर जिसके आंदोलन में खालिस्तानी झंडा फहराया गया, वो राकेश टिकैत अब भी सीमा पर बैठ है और उसे कोई कुछ नहीं करता।

उन्होंने इस दौरान हरियाणा में ‘किसान आंदोलन’ में रेप कि घटनाओं पर भी बात की। साथ ही उन्होंने पूछा कि जब ये लोग बचे हुए हैं तो अश्विनी उपाध्याय को गिरफ्तार क्यों किया गया? उन्होंने कहा कि कोन्ग्रेस की सरकार रहती तो समझ जा सकता था कि वो हिंदुओं के खिलाफ है, लेकिन भाजपा सरकार में ये हैरानी वाली बात है। उन्होंने कहा कि पुलिस भी औपचारिक रूप से नहीं कह रही कि गलती क्या है।

अश्विनी उपाध्याय की गिरफ़्तारी पर संदीप देव ने अपनी बात रखी

बता दें कि संदीप देव ही वो व्यक्ति हैं, जिनके यहाँ साधु नरेशानंद आए हुए थे। उन्होंने ही डासना के मंदिर में उनके ठहरने की व्यवस्था की थी। नरेशानंद सरस्वती इससे पहले भी डासना मंदिर में आते रहे थे और महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के वो करीबी हैं। मंदिर परिसर में पुलिस की उपस्थिति के बावजूद ये हमला हुआ। पुलिस हर पहलु की जाँच करने की बात कह रही है। पुलिस ने कहा कि जल्द इसका खुलासा किया जाएगा।

‘भारत छोड़ों आंदोलन’ की वर्षगाँठ पर जंतर-मंतर पर ‘भारत जोड़ो आंदोलन’ का आयोजन किया गया था, जिसमें हजारों लोग पहुँचे थे। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस आंदोलन के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए आज शाम को एक और प्रदर्शन की योजना बनाई है। दिलीप मंडल ने भी ट्विटर पर अश्विनी उपाध्याय को गिरफ्तार किए जाने की माँग की थी। उपाध्याय ने कहा था कि वीडियो में दिख रहे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, वो उन्हें नहीं जानते।

वहीं महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के करीबी अनिल यादव ने डासना वाली घटना पर बयान देते हुए कहा, “हमला करने वाले इस्लामी जिहादी हैं। वह पहले भी कई बार मंदिर में घुस चुके हैं। रात महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती नहीं मिले तो दूसरे स्वामीजी पर हमला कर दिया।” घायल नरेशानंद महंत यति के शिष्य हैं। मंदिर प्रबंधन के लोगों का कहना है कि ये लोग महंत यति की हत्या के इरादे से ही आए थे।

बच्ची की आँख निकाली, उसके खून से ताबीज बना कर गर्भवती को पहनाया: आलिम परवेज गिरफ्तार

बिहार के मुंगेर में बीते गुरुवार (5 अगस्त 2021) को 8 वर्षीय बच्ची की निर्मम हत्या के मामले की गुत्थी को सुलझा लिया गया है। मुंगेर पुलिस ने खुलासा किया है कि युवक ने पत्नी के गर्भस्थ शिशु को बचाने के लिए काला जादू करने वाले आलिम परवेज के कहने पर बच्ची की आँख के खून से ताबीज बनाने के लिए इस वारदात को अंजाम दिया था।

मामला साफियाबाद ओपी क्षेत्र के परहम का है। यहीं के रहने वाले दिलीप चौधरी की पत्नी का पहले गर्भपात हो गया था। इसी कारण वो पत्नी के साथ खगड़िया जिले के टोना-टोटका करने वाले आलिम परवेज आलम के पास गया। वहाँ उसने उससे अपनी समस्या बताई, जिसके बाद परवेज ने उसे पहले रोहू मछली की कुर्बानी देने को सलाह दी। इसके बाद उसने एक मुर्गे की कुर्बानी दिलवाई।

इस दौरान दिलीप की पत्नी को गर्भ ठहर गया तो उसने ये बात परवेज आलम को बताई। गर्भ की सलामती के लिए ब्लैक मैजिक, टोना-टोटका का दावा करने वाले परवेज आलम ने दिलीप को 10 साल से कम के किसी लड़के या लड़की की कुर्बानी देने की सलाह दी। परवेज ने दिलीप को बताया कि इंसान के आँख के खून से बनी ताबीज अगर उसकी पत्नी अपने गले में पहनती है तो उसकी पत्नी का गर्भ सुरक्षित रहेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक मुंगेर के एसपी जगन्नाथ रेड्डी ने जानकारी दी है कि दिलीप अपनी पत्नी के साथ बीते 10 साल से परवेज आलम के पास जाता रहा है और पहले से ही उसकी चार संताने हैं। इनमें से दो बेटियाँ औऱ 2 बेटे हैं। ऐसे में आलिम की सलाह पर दिलीप बच्चे की तलाश में जुट गया। 4 अगस्त 2021 को वह ईट-भट्ठे के पास अपने दोस्त तनवीर के मुर्गी फॉर्म पर गया था, जहाँ तनवीर के साथ दशरथ नाम का युवक पहले से मौजूद था। दिलीप ने अपने दोस्तों को अपनी परेशानी बताई। इसी दौरान उसे खेत से घर जा रही बच्ची दिख गई। आरोपितों ने उसे चाकलेट देने के बहाने बुलाया और पीट-पीट कर अधमरा कर दिया। रात 12 बजे बच्ची की गला रेतकर हत्या कर दी। उन्होंने उसकी दाँयीं आँख निकाल ली और बायीं आँख को भी फोड़ दिया। उसके नाक, होंठ, चेहरे व कूल्हे पर जख्म के निशान थे।

इसके बाद आरोपित दिलीप बच्ची के खून से सने कपड़े में लपेटकर आँख लेकर आलिम के पास गया, जिससे उसने ताबीज बनाकर उसे पत्नी के गले में पहनाने को दिया। बहरहाल, पुलिस ने चारों आरोपितों आलिम परवेज, दिलीप, दशरथ और तनवीर को गिरफ्तार कर लिया है।

मृतक बच्ची के माता-पिता ने दावा किया है कि उनकी बच्ची के साथ रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। हालाँकि, पोस्टमार्टम में रेप की बात से इनकार किया गया है।

क्रिस्चियन ट्रिनिटी अब बिकनी पर भी, तीन बिंदुओं पर लिखा ‘फादर, सन और होली स्पिरिट’: क्रॉस का अपमान बता भड़के ईसाई

सोशल मीडिया पर ‘SSENSE’ नामक रिटेलर ने एक ऐसे बिकनी का ब्रांड पेश किया, जिस पर ‘Father’, ‘Son’, और ‘Holy Spirit’ लिखा था। इस बिकनी ब्रांड का नाम ‘Praying’ है। बता दें कि ‘SSENSE’ कनाडा के मॉनट्रियल में स्थित एक मल्टी ब्रांड रिटेलर है। इसकी स्थापना 2003 में हुई थी। लोगों ने बिकनी के तीन बिंदुओं पर ‘फादर, सन और स्पिरिट’ लिखे जाने को ईशनिंदा करार देते हुए कार्रवाई की माँग की।

‘SSENSE’ ने जैसे ही इंस्टाग्राम पर इस ब्रांड को पेश किया, कई ईसाईयों ने इससे आपत्ति जताई। इंस्टाग्राम पेज पर इसके 10 लाख से भी अधिक फॉलोवर्स हैं। एक यूजर ने लिखा कि ये खासा अपमानजनक है। एक ने इसे गैर-ज़रूरी और अपमानजनक करार दिया। उनका कहना था कि इस तरह की बिकनी लाने के लिए आपसे कहा किसने था? एक यूजर ने पूछा कि जब तुम्हारे पास क्रिएटिविटी नहीं है तो क्या तुम लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करोगे?

ईसाईयों ने रिटेलर पर घृणा की हदें पार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वो क्रॉस के साइन का मजाक बना रहे हैं और उससे लाभ कमाने की सोच रहे हैं। लोगों ने इसे ईसाई धर्म का अपमान बताया, क्योंकि इस बिकनी पर क्रॉस की तरह ही तीन बिंदुओं पर ‘फादर’, ‘सन’ और ‘होली स्पिरिट’ लिखा हुआ है। एक ईसाई यूजर ने चुनौती दी कि अगर हिम्मत है तो वो इस्लाम मजहब को लेकर इस तरह की बिकनी बना कर दिखाए।

‘SSENSE’ के ईसाई यूजर्स इस बिकनी से हुए नाराज़

बता दें कि ‘फादर’, ‘सन’ और ‘ होली स्पिरिट’ को ईसाई मजहब में ‘ट्रिनिटी’ के रूप में जाना जाता है। ईसाई मजहब के अनुसार, इस ‘त्रित्व’ का अर्थ है कि एक ही ईश्वर में तीन व्यक्ति हैं – पिता, पुत्र तथा पवित्र आत्मा। कहा जाता है कि: त्रित्व के सिद्धांत पर ईसाईयों द्वारा इसीलिए विश्वास किया जाता है, क्योंकि उसकी शिक्षा जीसस क्राइस्ट ने दी है। पादरी भी अक्सर इन शब्दों का उच्चारण करते हैं। ‘क्रॉस’ को इसका प्रतीक माना जाता है।