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DRDO बनाएगी 5th जेनेरेशन का विमान ‘AMCA’, निजी कम्पनियाँ भी हो सकेंगी शामिल: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी हरी झंडी, फाइटर जेट बनाने को मोदी सरकार ने दिए थे ₹15000 करोड़

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को बनाने वाले कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है। ये पाँचवी जेनेरेशन का फाइटर जेट होंगे। इसके जरिए स्वदेशी एयरोस्पेस तकनीक को बढ़ावा दिया जाएगा। रक्षा मंत्री कार्यालय के एक्स हैंडल पर इसकी जानकारी साझा की गई है।

एक्स पर साझा पोस्ट में लिखा गया है कि भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने और घरेलू एयरोस्पेस उद्योग को मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्री ने उन्नत मध्यम युद्धक विमान (AMCA) कार्यक्रम के एक्जीक्यूशन (निष्पादन) मॉडल को मंजूरी दे दी है।

रक्षा मंत्रालय ने एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) को इसे बनाने की मंजूरी दे दी है। ADA के साथ इस 5th जेनेरेशन फाइटर जेट को बनाने में निजी कंपनियाँ भी शामिल हो सकती हैं।

पोस्ट में यह भी लिखा गया कि स्वदेशी विशेषज्ञता, क्षमता और योग्यता का उपयोग करके AMCA प्रोटोटाइप विकसित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।इससे एयरोस्पेस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 में भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए 5th जेनेरेशन वाले AMCA फाइटर जेट के निर्माण के लिए 15,000 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी।

सीएनबीसी टीवी18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम की सफलता से भारत को विदेशी फाइटर जेट पर निर्भर नहीं रहना होगा, बल्कि एयरोस्पेस इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा और स्वदेशी कंपनियाँ भी नई और अत्याधुनिक तकनीक पर काम कर सकेंगी। इससे भविष्य में भारत अपने बनाए फाइटर जेट्स अन्य देशों को बेचने की क्षमता पैदा कर सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस मॉडल के निर्माण के लिए भारतीय कंपनियों के लिए जल्द ही एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया जा सकता है। इसके बाद इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने कि लिए भारतीय सरकारी और निजी कंपनियाँ बिडिंग (bidding) में भाग ले सकती हैं। निजी कंपनियाँ ज्वाइंट वेंचर या कंसोर्टियम की तरह भी सम्मिलित हो सकती हैं।

भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद वायुसेना में लड़ाकू विमानों की कमी पर रक्षा मंत्रालय काफी ध्यान दे रहा है। देश पर अमेरिका और रूस से 5th जेनेरेशन का लड़ाकू विमान खरीदने का भी काफी दबाव है। ऐसे में स्वदेशी लड़ाकू विमान बनाने वाले इस कार्यक्रम से काफी उम्मीदें लगाई जा रही हैं। इसके निर्माण के लिए चुनी गई कंपनियाँ भी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत कर सकती हैं।

जहाँ से तीनों सेनाओं ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की थामी थी कमान… वहाँ का जारी हुआ बुकलेट, सामने आई War Room की तस्वीरें

भारतीय सेना ने हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के बारे में एक खास किताब (बुकलेट) निकाली है। इस किताब में पहली बार उस खास कमरे की तस्वीरें दिखाई गई हैं जहाँ से इस बड़े ऑपरेशन पर नज़र रखी जा रही थी।

इन तस्वीरों में आप देखेंगे कि सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह मिलकर इस ऑपरेशन पर लगातार ध्यान दे रहे थे। यह दिखाता है कि हमारी तीनों सेनाएँ किस प्रकार एकजुट होकर काम करती हैं।

यह खास कमरा असल में भारतीय सेना का कमांड सेंटर था। यहीं से ऑपरेशन सिंदूर की पूरी योजना बनाई गई और उस पर निगरानी रखी गई। इस किताब से सेना ने साफ कर दिया है कि यह ऑपरेशन पूरी तरह से सबकी जानकारी और तालमेल के साथ किया गया था, और तीनों सेनाओं के बड़े अधिकारी हर पल की खबर रख रहे थे।

रात के अंधेरे में आतंकियों पर सेना का करारा प्रहार

भारतीय सेना ने हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम से एक बेहद गोपनीय और सफल सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसमें पाकिस्तान समर्थित 9 प्रमुख आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस ऑपरेशन में 100 से ज़्यादा आतंकवादी मारे गए, जो भारत की आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस‘ नीति का स्पष्ट प्रमाण है।

जारी की गई तस्वीरों में, भारतीय सशस्त्र बलों के शीर्ष अधिकारी, जिनमें थलसेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी भी शामिल हैं, ऑपरेशन रूम से इस हमले की सीधी निगरानी करते हुए दिख रहे हैं। एक तस्वीर जो रात 1:05 बजे की है, वह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के शुरू होने के समय को दर्शाती है। इन तस्वीरों में जनरल द्विवेदी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी ड्रोन फुटेज और सैटेलाइट तस्वीरों के लाइव प्रसारण को बेहद बारीकी से देखते हुए नज़र आ रहे हैं।

यह ऑपरेशन भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों, ड्रोन्स और नौसेना के उपकरणों के सटीक समन्वय का नतीजा था। हमले में कथित तौर पर स्कैल्प क्रूज मिसाइल, लेजर-गाइडेड बम और सशस्त्र यूएवी (अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स) का इस्तेमाल किया गया। यह दिखाता है कि भारतीय सशस्त्र बल न केवल एकजुट हैं, बल्कि उनके पास अत्याधुनिक तकनीक भी मौजूद है, जिससे वे दुश्मन को उसके ही गढ़ में घुसकर मार गिराने में सक्षम हैं।

बुकलेट में क्या-क्या है?

पहलगाम हमले की तस्वीरें और उसके बाद सरकार ने कितनी तेज़ी से कदम उठाए और क्या-क्या तैयारियाँ कीं। ऑपरेशन सिंदूर में जिन आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, उनकी पूरी जानकारी। भारत की इस कार्रवाई को दुनिया भर से कितना समर्थन मिला। मीडिया ने इस बारे में क्या खबरें दीं और पाकिस्तान के गिराए गए ड्रोन्स का मलबा।यह बुकलेट यह भी बताती है कि भारत ने अब सीमा पार से होने वाले आतंकवाद से निपटने के लिए एक नया और पक्का तरीका अपना लिया है।

विदेश मंत्री ने की तारीफ

इन सभी दलों की कोशिशों की तारीफ करते हुए, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा, “भारत आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (बिल्कुल बर्दाश्त नहीं) की नीति पर एकजुट है। एक साथ हमारी आवाज़ आतंकवाद से लड़ने का मजबूत संदेश दे रही है।” यह बात दिखाती है कि भारत कितना दृढ़ है और आतंकवाद से लड़ने के लिए दुनिया के देशों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।

कुल मिलाकर, ऑपरेशन सिंदूर की यह किताब दिखाती है कि भारतीय सेना ने अपनी रणनीति बदल ली है, तीनों सेनाएँ बहुत अच्छे तालमेल से काम कर रही हैं, और भारत आतंकवाद के खिलाफ बिल्कुल भी नरमी नहीं बरतेगा।

सुख चैन से जियो, रोटी खाओ, वरना मेरी गोली तो है ही… भुज से पाकिस्तान को PM मोदी का सीधा संदेश: प्रधानमंत्री आवास में लगेगा सिंदूर का पौधा, महिलाओं ने की भेंट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के भुज में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा, “सुख चैन से जियो, रोटी खाओ, वरना मेरी गोली तो है ही।” पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति को दोहराते हुए कहा कि भारत की नीति आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (26 मई 2025) को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए कहा कि यह भारत की इस प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पीएम ने कहा, “भारत पर्यटन में विश्वास करता है, जो लोगों को एकजुट करता है, लेकिन पाकिस्तान जैसे देश आतंकवाद को ही अपना पर्यटन मानते हैं, जो वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है।”

पीएम मोदी ने पाकिस्तान की जनता, खासकर युवाओं और बच्चों को संबोधित करते हुए भावुक अपील की। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान की फौज और सरकार ने आतंकवाद को धंधा बना दिया है। ये लोग आतंक से पैसा कमाते हैं, और इसकी कीमत वहाँ के मासूम बच्चे और युवा चुकाते हैं।” उन्होंने पाकिस्तानी युवाओं से सवाल किया, “क्या तुम ऐसे शासन और फौज का साथ दोगे, जिसने तुम्हारा भविष्य बर्बाद कर दिया? अब फैसला तुम्हें करना है।” पीएम ने कहा कि पाकिस्तान में बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, युवाओं को नौकरी नहीं मिलती, और माँओं को बिजली-पानी के लिए तरसना पड़ता है। यह सब वहाँ की सत्ता की गलत नीतियों का नतीजा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “भारत के जवाब से पाकिस्तान घबरा गया। उन्होंने कच्छ सहित सीमा क्षेत्रों में ड्रोन भेजे… 1971 के युद्ध में कच्छ की बहादुर महिलाओं ने 72 घंटे में भुज के रनवे को ठीक करके पाकिस्तान के दुष्प्रचार को हराया था… वो महिलाएंँ मुझसे मिलीं, मुझे आशीर्वाद दिया और एक सिंदूर का पौधा भेंट किया। इसे पीएम हाउस में लगाया जाएगा।”

पीएम मोदी ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि जो भारत की संप्रभुता को चुनौती देगा, उसे बिना किसी अपवाद के परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर एक सैन्य अभियान से कहीं अधिक है। यह मानवता की रक्षा और आतंकवाद को खत्म करने का मिशन है।”

पीएम ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने पाकिस्तान को कार्रवाई का मौका दिया, लेकिन जब उसने कुछ नहीं किया, तो भारतीय सशस्त्र बलों को पूरी छूट दी गई। उन्होंने कहा, “हमारे बहादुर सैनिकों ने आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमला किया, बिना किसी नागरिक क्षेत्र या निर्दोष लोगों को नुकसान पहुँचाए। यह हमारी सेना की क्षमता और अनुशासन का प्रमाण है।”

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत की लड़ाई आतंकवाद और उसे पनाह देने वालों से है। उन्होंने कहा, “बँटवारे के बाद जिस देश (पाकिस्तान) का जन्म हुआ, उसका एकमात्र लक्ष्य भारत से दुश्मनी और नुकसान पहुँचाना है। लेकिन हमारा लक्ष्य गरीबी दूर करना, अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और विकसित भारत बनाना है।” पीएम ने गुजरात में 53,400 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया, जिसमें बिजली, सड़क, पानी और सौर ऊर्जा से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं।

नहीं गली दाल तो पुतिन को ‘पागल’ बताने लगे डोनाल्ड ट्रंप, कहा- वे निर्दोषों का खून बहा रहे, हड़पना चाहते हैं पूरा यूक्रेन: 3+ साल से जारी जंग को चुटकी में खत्म करवाने का कर रहे थे दावा

अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप लगातार कोशिश कर रहे हैं कि यूक्रेन पर रूसी हमला बंद हो जाए। इसके लिए वो टेंपररी सीजफायर से लेकर पूर्ण युद्धविराम तक की गुहार लगा चुके हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दोस्त बताने से लेकर उनसे कई बार बातचीत कर चुके हैं, यहाँ तक कि यूक्रेनी राष्ट्रपति को सार्वजनिक तौर पर हड़का भी चुके हैं। इसके बावजूद रूसी हमले नहीं रुक रहे, जिसकी वजह से डोनाल्ड ट्रंप अब गुस्से में आ चुके हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने व्लादिमीर पुतिन को पागल तक कह दिया है।

इस दौरान ट्रंप ये बताना नहीं भूले कि इनकी पुतिन से बहुत बनती है, लेकिन साथ ही जोड़ा कि बीते कुछ समय से पुतिन बदल चुके हैं। अब वो यूक्रेन का सिर्फ एक टुकड़ा नहीं, बल्कि पूरे का पूरा यूक्रेन ही कब्जाना चाहते हैं। हालाँकि ट्रंप ने ये भी जोड़ दिया कि अगर रूस यूक्रेन को पूरा कब्जाता है, तो ये रूस के पतन की शुरुआत होगी, यानी वो बर्बादी की तरफ अपने कदम बढ़ा रहा है।

ट्रंप ने अपने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्रुथ पर रविवार (25 मई 2025) को एक पोस्ट डाला और पुतिन पर जमकर भड़ास निकाली। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा, “रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मेरे हमेशा से बहुत अच्छे संबंध रहे हैं, लेकिन शायद उनके साथ कुछ ऐसा हुआ है। वह बिल्कुल पागल हो गए हैं! वह बेवजह बहुत से लोगों को मार रहे हैं, और मैं सिर्फ सैनिकों की बात नहीं कर रहा हूँ। यूक्रेन के शहरों में बेवजह मिसाइल और ड्रोन दागे जा रहे हैं।”

ट्रंप ने कहा, “मैंने हमेशा कहा है कि वे यूक्रेन का सिर्फ एक टुकड़ा नहीं, बल्कि पूरा यूक्रेन चाहते है, और शायद यह सही साबित हो रहा है, लेकिन अगर वह ऐसा करते हैं, तो इससे रूस का पतन हो जाएगा!”

ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की की भी आलोचना की और कहा कि उनके बोलने का तरीका समस्याएँ खड़ी करता है और इससे उनके देश को कोई भी फायदा नहीं होता। उन्होंने जेलेंस्की को सलाह दी कि वे इस तरह की बयानबाजी बंद करें। इसके साथ ही ट्रंप ने दावा किया कि अगर वे अमेरिका के राष्ट्रपति होते तो रूस-यूक्रेन युद्ध कभी शुरू ही नहीं होता।

ट्रंप ने कहा, “यह जेलेंस्की, पुतिन और बाइडेन की लड़ाई है, ‘ट्रंप’ की नहीं। मैं केवल एक बड़ी और भयानक आग को बुझाने में मदद कर रहा हूँ।” राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन में रूस का हालिया हमला और राष्ट्रपति जेलेंस्की की बयानबाजी शांति के प्रयासों के लिए भी बाधा बन रही है।

राष्ट्रपति पुतिन के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप का तीखा बयान यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की के उस आरोप के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिकी चुप्पी ने पुतिन को और अधिक ताकतवर बना दिया है। जेलेंस्की ने रूसी नेतृत्व पर दबाव बढ़ाने की अपील करते हुए कहा, “रूस की क्रूरता को रोका नहीं जा सकता, अगर इसे नजरअंदाज किया गया तो यह और बढ़ेगी।” उन्होंने अमेरिका और अन्य देशों की चुप्पी को पुतिन के लिए प्रोत्साहन बताया।

इस बीच, ट्रंप लगातार पुतिन के शांति वार्ता को लेकर बदलते रुख पर निराशा जताते रहे हैं। उनकी पुतिन को लेकर निराशा अब सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे रूस के खिलाफ कुछ व्यापारिक प्रतिबंध लगाने पर भी विचार कर रहे हैं।

वैसे, पहले ट्रंप रूस पर नए प्रतिबंध लगाने के लिए इच्छुक नहीं थे, पुतिन के साथ दोस्ताना रवैया अपनाते थे और जेलेंस्की को फटकार लगाते थे, लेकिन अब उन्होंने पुतिन को ‘पागल’ तक कह दिया है और रूस के खिलाफ सेकंडरी बैन लगाने पर विचार कर रहे हैं। 

बता दें कि कुछ समय पहले ट्रंप का रूस के प्रति नरम रुख भी देखने को मिला था, जब उन्होंने पुतिन से टेलीफोन पर बातचीत के बाद मॉस्को पर नए प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया था। लेकिन अब उनकी हालिया टिप्पणियाँ, जिसमें उन्होंने पुतिन पर शांति प्रयासों को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया है, अमेरिका की नीति में अस्थिरता को दिखाती हैं।

गौरतलब है कि बीते साल चुनाव अभियान के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि यदि वे सत्ता में आए तो 24 घंटे में रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करा देंगे। लेकिन अब तो करीब पाँच महीने बीत चुके हैं और उनकी तमाम कोशिशों के बावजूद रूस-यूक्रेन युद्ध में कोई कमीं नहीं आई है।

दिलचस्प बात यह है कि डोनाल्ड ट्रंप खुद को वैश्विक शांतिदूत के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में भारत-पाकिस्तान के तनाव के दौरान, जब भारत ने पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों और सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुँचाया, तब ट्रंप ने बार-बार व्यापार के जरिए इस संघर्ष को सुलझाने का दावा किया। हालाँकि उनका यह दावा भी विवादित ही रहा, क्योंकि भारत ने उनके दावे को सार्वजनिक तौर पर खारिज कर दिया।

‘भाई (फरहान) बाद में करेगा, मैं पहले वायरल करूँगी तेरा Video’: रिपोर्ट में बताया- ‘मुस्लिम गैंग’ के लिए हिंदू लड़कियों को फँसाती थी जोया, सरगना के फोन में 64 अश्लील वीडियो मिले

मध्य प्रदेश के भोपाल में हिन्दू लड़कियों को फँसाने वाले मुस्लिम गैंग के सरगना फरहान के फोन से 64 लड़कियों के वीडियो मिले हैं। इनमें से 58 एक ही कॉलेज की हैं। यह भी पता चला है कि हिन्दू लड़कियों को फँसाने में फरहान की मदद उसकी बहन जोया करती थी। जोया भी हिन्दू लड़कियों को धमकाती थी कि वह उनके अश्लील वीडियो वायरल कर देगी। फरहान हिन्दू लड़कियों को कलमा पढ़वाता था और उन्हें रोजे के बारे में बताता था। यह सब खुलासे SIT जाँच में हुए हैं।

वीडियो वायरल करने की धमकी देती थी जोया

दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार, फरहान भोपाल के TIT कॉलेज की लड़कियों को विशेष रूप से निशाना बनाता था। उसके फोन से जिन 64 लड़कियों की अश्लील वीडियो मिली हैं, उनमें से 58 लडकियाँ इसी कॉलेज की थीं। रिपोर्ट में बताया गया है कि फरहान की बहन जोया ही हिन्दू लड़कियों को फरहान के लिए फँसाती थी। वह फरहान के बाकी साथियों के लिए भी यही काम करती थी। यहाँ तक कि जब कोई लड़की फरहान से बात करना बंद कर देती थी तो वह उसे फोन कर देती।

जोया हिन्दू लड़कियों से कहती थी कि फरहान भाई उसके बात ना करने से अपसेट हैं और दबाव बनाती थी कि उससे बात करे। हिन्दू लड़कियाँ जब अपने अश्लील वीडियो वायरल किए जाने की धमकी का हवाला देती थीं तो वह खुद यही धमकी देने लगती थी। रिपोर्ट बताती है कि जोया ने एक लड़की से कहा कि फरहान भाई तो बाद में वीडियो वायरल करेंगे, पहले वही वायरल कर देगी। वहीं जोया का भाई फरहान और उसके साथी लड़कियों का धर्मांतरण करवाने की पूरी कोशिश करते थे।

रोजा-कलमा सिखाते थे

रिपोर्ट बताती है कि फरहान और उसके साथी लड़कियों को बताते थे कि उनकी दुआ में बहुत ताकत होती है। वह हिन्दू धर्म के खिलाफ भी भड़काते थे। यहाँ तक कि रोजे रखने को लेकर भी वह लड़कियों को ब्रेनवाश करते थे और कलमा सिखाते थे। इस मामले में अब SIT जाँच भी जारी है। मामले में फरहान के साथ ही 4 और आरोपित पकड़े गए हैं। एक आरोपित अब भी फरार है। उसे पकड़ने का प्रयास चल रहा है। इनसे पूछताछ में रोज नए खुलासे हो रहे हैं।

जिन लड़कियों को फँसाया, उसके खाते से शेयर ट्रेडिंग

इस मामले में SIT जाँच भी जारी है। SIT जाँच में सामने आया है कि फरहान ने 2 लड़कियों के खाते से शेयर ट्रेडिंग किया करता था। पुलिस को पता चला है कि वह इन लड़कियों के खाते से लाखों का लेनदेन कर चुका है। उसने इन खातों में ₹15 लाख का लेनदेन किया है।

फरहान के खातों में भी ₹50 लाख का लेनदेन हुआ है। यह भी पता चला है कि उसे ₹1 लाख की एक्स्ट्रा कमाई होती थी। यह पैसा वह लड़कियों को फँसाने पर खर्च करता था। फरहान से और पूछताछ हो रही और पता किया जा रहा है कि उसके किससे लेनदेन हुए हैं।

गौरतलब है कि भोपाल में हिन्दू लड़कियों को निशाने पर लेकर उनका रेप करने वाला ‘मुस्लिम गैंग’ के सवाब लिए यह कर रहा था। मुस्लिम गैंग इस काम को इस्लाम के नजरिए से अच्छा मानती थी। इसके लिए वह ज्यादा से ज्यादा हिन्दू लड़कियों को निशाना बना रहे थे।

वह वीडियो बनाकर लड़कियों को प्रताड़ित करते थे। यह सारे खुलासे मुस्लिम गैंग के सरगना फरहान ने किए हैं। मुस्लिम गैंग के सरगना फरहान ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसे हिन्दू लड़कियों का रेप करने, उन्हें फँसाने और वीडियो के बहाने धमकाने का कोई भी पछतावा नहीं है। उसने पुलिस को बताया है कि यह इस्लाम के हिसाब से सवाब का काम है।

मामले में फरार आरोपित को पुलिस पकड़ने के लिए जोर लगा रही है।

बंगाल में फेसबुक के जरिए 90 हजार लड़कियों का अपहरण, राज्य के ही पुलिस अधिकारी ने किया खुलासा: BJP ने शेयर किया Video, कहा- बेटियाँ अपने घरों में भी सुरक्षित नहीं

पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सोमवार (26 मई 2025) को एक वीडियो साझा किया, जिसमें पश्चिम बंगाल पुलिस ने स्वीकार किया कि फेसबुक के जरिए 90,000 लड़कियों का अपहरण हो चुका है। यह खुलासा अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले आया है, जिससे ममता बनर्जी की तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) सरकार पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बीजेपी ने इस वीडियो के जरिए दावा किया कि राज्य में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा खतरे में है।

वीडियो में एक पुलिस अधिकारी कहते हैं, “फेसबुक के माध्यम से अब तक 90,000 लड़कियों का अपहरण हुआ है।” इसके साथ ही एक अन्य मामले में एक छठी कक्षा की छात्रा को इंस्टाग्राम के जरिए ब्लैकमेल कर फंसाने की बात सामने आई है। बीजेपी ने इसे ममता सरकार की नाकामी बताया और कहा कि “बंगाल की बेटियाँ अपने घरों में भी सुरक्षित नहीं हैं।”

पश्चिम बंगाल में पहले भी कानून-व्यवस्था को लेकर विवाद हो चुके हैं। बीजेपी नेताओं ने टीएमसी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ममता बनर्जी की सरकार अपराधों पर नियंत्रण में विफल रही है। खासकर, सोशल मीडिया के दुरुपयोग से होने वाले अपराधों ने चिंता बढ़ा दी है। बीजेपी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “यह भयावह सच्चाई है कि बंगाल अब ‘बंगालर मेये’ (बंगाल की बेटियों) के लिए सुरक्षित नहीं है।”

इस वीडियो ने राज्य में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर बहस को और तेज कर दिया है। इस वीडियो का बड़ा वर्जन आप यहाँ देख सकते हैं।

छोटी उम्र में ‘प्यार के नाम’ पर सेक्स की आजादी देना चाहता है सुप्रीम कोर्ट, लव जिहाद से लेकर जबरन धर्मांतरण को बढ़ावा मिलने का अंदेशा: इस ‘सलाह’ के खतरे बड़े

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक अहम सलाह दी है। कोर्ट ने कहा है कि किशोरों के बीच सहमति से बनने वाले प्रेम-संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और देश में यौन व प्रजनन स्वास्थ्य शिक्षा (सेक्स एजुकेशन) की नीति बनाने पर विचार करना चाहिए। ऐसा इसलिए ताकि किशोरों को प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज (पोक्सो) एक्ट के तहत जेल न जाना पड़े।

यह सलाह एक मामले की सुनवाई के दौरान आई, जब कोर्ट ने सरकार को इस मुद्दे पर एक विशेषज्ञ समिति बनाने और 25 जुलाई 2025 तक रिपोर्ट देने को कहा। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह इस रिपोर्ट के आधार पर आगे के निर्देश देगा।

ये मामला अभी क्यों उठा?

यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल की एक महिला की कानूनी लड़ाई से शुरू हुआ। इस महिला के पति को पोक्सो एक्ट के तहत 20 साल की जेल हुई थी, क्योंकि जब वह 14 साल की थीं, तब उनके बीच सहमति से रिश्ता था। महिला अपने पति को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुँची। इस मामले को देखते हुए कोर्ट ने दो वरिष्ठ महिला वकीलों, माधवी दीवान और लिज मैथ्यू, को इस संवेदनशील मुद्दे पर सलाह देने के लिए नियुक्त किया। इन वकीलों ने कहा कि पोक्सो एक्ट का मकसद बच्चों को यौन शोषण से बचाना है, लेकिन किशोरों के बीच सहमति वाले रिश्तों में इसका सख्ती से लागू करना कई बार गलत नतीजे देता है। इससे न सिर्फ किशोरों को, बल्कि उनके परिवारों को भी नुकसान होता है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पहले तो पति की सजा बरकरार रखी थी, लेकिन सजा के अमल पर रोक लगाकर एक कमेटी का गठन कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट की ‘न्यायमित्र’ कमेटी ने कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखे, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने महिला के पति की सजा खत्म कर दी। इस फैसले के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बेहद लचीला रुख अपनाया। सुप्रीम कोर्ट ने महिला के संघर्षों, उसके भविष्य, दोनों के बच्चे और उनके साथ रहने को भी अपने फैसले में शामिल किया। इस मामले के बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से इस अहम मुद्दे पर सोच विचार करने के लिए कहा।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से दो बड़े कदम उठाने को कहा है…

किशोरों के सहमति वाले रिश्तों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना: कोर्ट ने कहा कि पोक्सो एक्ट के तहत 18 साल से कम उम्र के किशोरों के बीच सहमति से बने रिश्तों को अपराध न माना जाए। कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह इस मुद्दे की जाँच के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाए। इस समिति में महिला और बाल विकास मंत्रालय के सचिव, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और कुछ विशेषज्ञ शामिल हों। कोर्ट ने यह भी कहा कि समिति में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) की डॉ. पेखम बसु, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट जयिता साहा, और दक्षिण 24 परगना के जिला सामाजिक कल्याण अधिकारी संजीब रक्षित को स्थायी सदस्य के तौर पर शामिल किया जाए। समिति को इस मुद्दे पर विचार करके 25 जुलाई 2025 तक अपनी रिपोर्ट देनी होगी।

यौन और प्रजनन स्वास्थ्य शिक्षा की नीति बनाना: कोर्ट ने यूनेस्को की एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि भारत में यौन शिक्षा सिर्फ सेकेंडरी स्कूलों में दी जाती है, और वह भी बहुत सीमित तरीके से। कोर्ट का कहना है कि अगर किशोरों को सही समय पर यौन और प्रजनन स्वास्थ्य की जानकारी दी जाए, तो वे अपने फैसलों के कानूनी और सामाजिक परिणामों को बेहतर समझ सकेंगे। कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह इस दिशा में एक ठोस नीति बनाए।

हाई कोर्ट के फैसलों को लेकर क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने कई हाई कोर्ट्स के फैसलों का जिक्र किया, जो इस मुद्दे पर पहले ही संवेदनशील रुख अपना चुके हैं। कोर्ट ने खास तौर पर दिल्ली, मद्रास और कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसलों का उल्लेख किया…

मद्रास हाई कोर्ट: इस कोर्ट ने कई मामलों में कहा कि पोक्सो एक्ट का मकसद सहमति वाले रिश्तों को अपराध बनाना नहीं था। कोर्ट ने यह भी माना कि सहमति वाले रिश्तों में ‘पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट’ की परिभाषा लागू नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इसमें ‘हमला’ जैसी कोई बात नहीं होती। 2001 में भी मद्रास हाई कोर्ट ने सुझाव दिया था कि ऐसे रिश्तों को सजा से बचाने के लिए कानून में बदलाव करना चाहिए।

कलकत्ता हाई कोर्ट: इस कोर्ट ने कहा कि पोक्सो एक्ट में ‘पेनेट्रेशन’ को एकतरफा हरकत माना गया है, यानी इसे सिर्फ आरोपित की हरकत माना जाता है। लेकिन सहमति वाले रिश्तों में यह जिम्मेदारी सिर्फ एक पक्ष पर नहीं डाली जा सकती।

दिल्ली हाई कोर्ट: हाल ही में फरवरी 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक लड़के को राहत देते हुए उसके खिलाफ पोक्सो का मामला रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कानून का मकसद शोषण और दुरुपयोग को रोकना है, न कि प्रेम को सजा देना। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रेम एक बुनियादी मानवीय अनुभव है और किशोरों को भी सहमति से भावनात्मक रिश्ते बनाने का हक है, बशर्ते उसमें कोई दबाव या शोषण न हो।

हाई कोर्ट्स ने यह भी माना कि अगर ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई की जाए, तो इससे पीड़ित (लड़की) और उसके परिवार को भी नुकसान हो सकता है। कई बार हाई कोर्ट्स ने ऐसे मामलों को रद्द किया, जहाँ आगे कार्रवाई करना पीड़ित के लिए ही हानिकारक था।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि ज्यादातर लोग इस बात से अनजान हैं कि सहमति की उम्र (एज ऑफ कंसेंट) को 2012 में 16 साल से बढ़ाकर 18 साल कर दिया गया है। इस अनजानपन की वजह से कई किशोर अनजाने में कानून तोड़ रहे हैं। पोक्सो एक्ट के तहत अगर कोई 18 साल से कम उम्र का व्यक्ति यौन संबंध बनाता है, तो उसे अपराध माना जाता है, भले ही वह सहमति से हो।

इसके अलावा कोर्ट ने माना कि किशोरावस्था में हार्मोनल और जैविक बदलावों की वजह से लड़के-लड़कियाँ रिश्तों की ओर आकर्षित होते हैं। ऐसे में उन्हें सजा देने के बजाय, उनके माता-पिता और समाज को उनका समर्थन और मार्गदर्शन करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि किशोरों के फैसलों को बड़ों के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि इससे उनके प्रति सहानुभूति की कमी हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट की सलाह से साफ है कि पोक्सो एक्ट और यौन शिक्षा को लेकर कुछ बदलाव जरूरी हैं। कुछ अहम बिंदु इस प्रकार हैं-

कानून में लचीलापन: सहमति वाले रिश्तों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के लिए पोक्सो एक्ट में बदलाव की जरूरत है। खासकर 16-18 साल के किशोरों के मामले में कानून को और संवेदनशील करना होगा।

यौन शिक्षा का महत्व: स्कूलों में यौन और प्रजनन स्वास्थ्य शिक्षा को अनिवार्य करना चाहिए। इससे किशोरों को अपने शरीर, रिश्तों, और कानूनी सीमाओं की सही जानकारी मिलेगी।

समाज की सोच बदलना: समाज को किशोरों के रिश्तों को अपराध की तरह देखने के बजाय, उन्हें समझने और समर्थन देने की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट की यह सलाह किशोरों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा कदम है। पोक्सो एक्ट जरूरी है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल किशोरों और उनके परिवारों को नुकसान पहुँचा सकता है। सहमति वाले रिश्तों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और यौन शिक्षा की नीति बनाने से न सिर्फ किशोरों को सही दिशा मिलेगी, बल्कि समाज में यौन शोषण के खिलाफ लड़ाई भी मजबूत होगी।

हालाँकि सुप्रीम कोर्ट की सलाह को देखें, तो ये पश्चिमी देशों की व्यवस्थाओं, सामाजिक बुनियादों, स्वच्छंदता, अपराधिक माइंडसेट… जैसे नजरियों को ध्यान में रख रहा है। माननीय सुप्रीम कोर्ट को इन मुद्दों पर भारत की व्यापकता को देखना होगा। क्योंकि पश्चिमी समाजों में जो नियम चल सकते हैं, वे भारत में भारी नुकसान पहुँचा सकते हैं।

भारत में पहले से ही जबरन बाल विवाह, नाबालिग लड़कियों की निकाह, शादी के नाम पर मानव तस्करी और धर्म परिवर्तन के लिए ग्रूमिंग जैसी गंभीर समस्याएँ हैं। अगर किशोरों के बीच सहमति वाले यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया, तो ये एक कानूनी खामी बन सकती है, जिसका गलत लोग फायदा उठा सकते हैं।

पोक्सो एक्ट का मकसद प्रेम को रोकना नहीं है, लेकिन इसे इसलिए भी बनाया गया था ताकि बड़े लोग नाबालिग लड़कियों के साथ ‘किशोर प्रेम’ के नाम पर शादी या रिश्ते बनाकर उनका शोषण न करें। कई बार निकाह का रास्ता अपनाकर पोक्सो एक्ट से बचा जाता है। उदाहरण के लिए, जून 2022 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने शरिया का हवाला देकर कहा था कि 16 साल की मुस्लिम लड़की निकाह के लिए योग्य है। क्या ऐसी नरमी तस्करों और शोषण करने वालों को और हिम्मत नहीं देगी, जो पहले से ही सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं?

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व चेयरमैन प्रियंक कानूनगो ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “नाबालिग अपनी सरकार नहीं चुन सकते, उन्हें वोट देने का अधिकार भी नहीं है। क्या हम उनसे यह उम्मीद कर रहे हैं कि वे अपने यौन साथी को समझदारी से चुनें? सावधान रहें, इससे नाबालिग लड़कियों के साथ निकाह और बाल विवाह के अन्य रूपों को वैधता मिल सकती है।”

दरअसल, यह सिर्फ कानूनी भाषा का मामला नहीं है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जटिलताओं का भी सवाल है। अगर 14 या 15 साल की उम्र के बच्चों के बीच सहमति वाले रिश्तों को कानूनन मंजूरी दे दी गई, तो प्रेम और शोषण के बीच की रेखा और धुँधली हो जाएगी। सहमति की जाँच कौन करेगा? गरीब और हाशिए पर रहने वाली लड़की, जो 14-15 साल की है, क्या वाकई में दबाव या लालच को ‘प्रेम’ समझने की गलती से बच पाएगी?

भारत में बाल विवाह अभी भी एक बड़ी समस्या है। हर साल हजारों, बल्कि लाखों बाल विवाह हो रहे हैं। अगर किशोरों के यौन संबंधों को कानूनन सामान्य कर दिया गया, तो धार्मिक संगठन, खाप पंचायतें और तस्करी करने वाले गिरोह कमजोर लड़कियों को शादी या शोषण की स्थिति में धकेल सकते हैं और वो भी कानूनी तौर पर सुरक्षित होकर।

यह सच है कि कुछ मामलों में पोक्सो एक्ट का गलत इस्तेमाल होता है और इस पर ध्यान देना जरूरी है। लेकिन कानून में बदलाव बहुत सोच-समझकर करना होगा, न कि एकदम से सब कुछ बदल देना चाहिए। कुछ जरूरी कदम हो सकते हैं-

उम्र का अंतर तय करना: रिश्ते में शामिल दोनों लोगों की उम्र में कितना अंतर होना चाहिए, इसका एक नियम बनाया जाए।

बेहतर काउंसलिंग: किशोरों को सही सलाह और मार्गदर्शन देने के लिए काउंसलिंग सिस्टम को मजबूत करना होगा।

माता-पिता की भूमिका: माता-पिता को इस प्रक्रिया में शामिल करके किशोरों को सही दिशा दिखानी होगी।

मजबूत सुरक्षा: किसी भी बदलाव के साथ ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जो शोषण को रोके।

अगर ये सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो ‘युवा प्रेम को बचाने’ का नेक इरादा समाज और खासकर कमजोर लड़कियों के लिए मुसीबत बन सकता है। इसका फायदा वे लोग उठा सकते हैं, जो पहले से ही नाबालिगों का शोषण करते आए हैं।

कोर्ट और कानून बनाने वाले भले ही ‘सहमति’ और ‘प्रेम’ की बात करें, लेकिन सच ये है कि नाबालिगों को वोट देने, गाड़ी चलाने, या कई दूसरी चीजों की इजाजत नहीं है, और इसके पीछे ठोस वजह है। फिर क्या अब हम ये मान लें कि वे यौन संबंधों के लिए सहमति देने के लिए तैयार हैं?

सुप्रीम कोर्ट का इरादा भले ही अच्छा हो, लेकिन भारत जैसे देश में ऐसी सलाह को बहुत सावधानी से लागू करना होगा। पश्चिमी देशों का नजरिया यहाँ काम नहीं करेगा। अगर सांस्कृतिक और सामाजिक संदर्भ को ध्यान में नहीं रखा गया, तो ये फैसले प्रेम को बचाने की बजाय शोषण को वैध कर सकते हैं। सरकार और समाज को मिलकर एक ऐसा रास्ता निकालना होगा, जो किशोरों के हितों की रक्षा करे, लेकिन साथ ही शोषण करने वालों को कोई मौका न दे।

मृत्यु दर घटी, जच्चा-बच्चा की जान बची… घर-घर जब पहुँचा साफ पानी: बुंदेलखंड के 70 गाँवों की ‘जल जीवन मिशन’ ने बदली तस्वीर, रिसर्च में खुलासा

जल जीवन मिशन यानी जेजेएम बुंदेलखंड के विकास में मील का पत्थर साबित हो रहा है। बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी ने अपने स्टडी में इसकी जानकारी दी है। जल जीवन मिशन योजना के तहत हर घर जल परियोजना का फायदा 7 जिलों के 70 गाँवों को हो रहा है। इससे ये पता चलता है कि कैसे पाइप से पीने के पानी ने स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, सामाजिक संरचना और ग्रामीण विकास में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं?

सामाजिक कार्य विभाग ने राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन के अनुरोध पर यह अध्ययन किया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शोध का निष्कर्ष क्षेत्र- सर्वेक्षण, सामुदायिक साक्षात्कार और जमीनी अवलोकन पर आधारित हैं। अध्ययन में गुणात्मक सुधार और परिवर्तन की मानवीय कहानियों दोनों को शामिल किया गया है।

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी ने अपने अध्य्यन में कहा कि 7 जनपदों में 10-10 गाँवों में सर्वे किया है। इसमें कहा गया है कि इन गाँवों में हर परिवारों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है। इससे लोगों की सेहत में सुधार आया है। पाचन समेत जल से होने वाली बीमारियों से लोगों को छुटकारा मिल रहा है।

यूनिवर्सिटी की टीम ने ढाई महीने में ये शोध किया है। 4 संकाय सदस्यों और शोधकर्ताओं की एक टीम ने बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, झांसी, जालौन, महोबा और ललितपुर के दस-दस गाँवों को कवर किया। टीम का नेतृत्व एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. यतींद्र मिश्रा ने किया। अध्ययन में महिलाओं, युवाओं, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्कूली शिक्षकों, छात्रों और लाभार्थियों के साथ बातचीत को शामिल किया गया है।

डॉ. यतीन्द्र मिश्रा ने कहा, “हर घर जल पहल ने पानी उपलब्ध कराने से कहीं ज़्यादा काम किया है। इसने उन लोगों को सम्मान, स्वास्थ्य और स्थिरता प्रदान की है जो लंबे समय से पानी की कमी से जूझ रहे थे। लेकिन अब हमें पानी की उपलब्धता से जिम्मेदारी की ओर बढ़ना होगा और संरक्षण और स्थिरता को ग्रामीण प्रगति के अगले चरण का केंद्र बनाना होगा।”

रिपोर्ट में स्वास्थ्य सुधार, शिक्षा, रोजगार, आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन, सामाजिक सामंजस्य और दृष्टिकोण समेत पाँच बिन्दुओं पर अध्ययन किया गया है।

शिक्षा पर योजनाओं का असर

जल जीवन योजना में हर स्कूल शामिल है। स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ी है और स्कूल छोड़कर जाने वाले बच्चों की संख्या कम हुई है। स्कूल की टंकी में अब पानी रहता है। शौचालय की व्यवस्था होने की वजह से लड़कियों की संख्या स्कूल में बढ़ी है।

मातृ मृत्युदर में कमी

इन गाँवों में माँओं की मृत्युदर में कमी आई है। बच्चे-जच्चे की सेहत में सुधार हुआ है। दूर से जल लाने की वजह से महिलाओं के गर्दन और कमर में दर्द रहता था जिससे निजात मिली है। दूषित जल से ग्रामीणों को मुक्ति मिली है। दुषित जल से हड्डियाँ कमजोर होती है। इसके इलाज में काफी खर्च होता है।

आर्थिक और सामाजिक फायदा

शुद्ध पेयजल की मौजूदगी से रहन-सहन का स्तर ऊपर उठा है। लोगों के बीच भेदभाव में कमी आई है। महिलाएँ सेहतमंद हो रही हैं जिससे खेती-बाड़ी, पशुपालन और दूसरे उत्पाद में भागीदारी बढ़ी है। महिलाओं के रोजगार में वृद्धि हुई है। महिलाओं के चिकित्सा खर्च पर 95 फीसदी कमी आई है।

जातिगत दूरियाँ हुई कम

गाँवों में सामाजिक संबंध मजबूत हुए हैं। लोगों के बीच आपसी सहयोग में वृद्धि हुई है साथ ही सामाजिक तनाव में कमी आई है। महिलाओं का आत्मबल मजबूत हुआ है। ग्रामीण सामाजिक समरसता मजबूत हुई है। बाल विवाह और दहेज प्रथा में 93 फीसदी कमी आई है।

स्वरोजगार में बढ़ोतरी

गाँव में स्वरोजगार के अवसर बढ़े हैं। कृषि लायक जमीन बढ़ी है क्योंकि बंजर जमीन को जल मिल रहा है। इससे फसलों का उत्पादन बढ़ रहा है। सरकार के स्वरोजगार का काम आगे बढ़ा है जिससे युवाओं का पलायन कम हुआ है। कृषि और पशुपालन के कार्य बढ़ रहे हैं। स्वरोजगार के कारण करीब 92 फीसदी युवाओं ने गाँव में रहने को प्राथमिकता दी है

PM मोदी ने दाहोद को दी ₹24 हजार करोड़ की सौगात, दिखाई पहली ‘इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव’ को हरी झंडी: वडोदरा के रोड शो में कर्नल सोफिया कुरैशी के भाई-बहन से भी मिले

पीएम मोदी दो दिनों के गुजरात दौरे पर हैं। उन्होने दाहोद में पहले इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव संयत्र का उद्धाटन किया। सोमवार (26 मई 2025) को पीएम वडोदरा में रोड शो करने के बाद दाहोद पहुँचे थे। पीएम ने जिस लोकोमोटिव विनिर्माण संयंत्र का उद्घाटन किया है उससे रेलवे के बुनियादी ढाँचे और माल ढुलाई क्षमता को बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी।

इसके अलावा पीएम मोदी ने 24 हजार करोड़ रुपए की लागत से कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण भी किया। गुजरात के इस पहले रेलवे यूनिट से लोकोमोटिव इंजन, बोगियाँ वगैरह बनाई जाएगी। लोकोमोटिव इंजन से 4600 टन के कार्गो का वहन होगा। इस लोकोमोटिव संयंत्र में 10 साल में 1200 इंजन तैयार किए जा सकेंगे। इनमें से कुछ का निर्यात किया जा सकेगा।

यहाँ बनने वाले लोकोमोटिव इंजन से देश की जरूरत पूरी होगी और ‘मेक इन इंडिया’ के तर्ज पर इसे बनाया जाएगा। पीएम मोदी ने न सिर्फ इस संयंत्र का उद्घाटन किया बल्कि इंजन में बैठकर इसकी पूरी जानकारी भी ली। इस दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और गुजरात के सीएम भी मौजूद रहे।

पीएम मोदी के रोड शो में सड़क के दोनों ओर काफी संख्या में लोग मौजूद रहे। रोड शो के दौरान भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी का परिवार भी था जिन्होने पीएम मोदी का पूरे उत्साह के साथ माला पहनाकर स्वागत किया।

कर्नल सोफिया कुरैशी के भाई संजय कुरैशी के मुताबिक “पहली बार पीएम मोदी को देखा। उन्होने इशारों में हमारा अभिवादन किया। मैं रक्षा बलों और भारत सरकार का आभारी हूँ” वहीं उनकी जुड़वाँ बहन शायना सुनसारा ने कहा कि पीएम से मिलकर उन्हें अच्छा लगा। मेरी बहन पूरे देश की बहन है और उससे सबको प्रेरणा मिलती है।

पीएम मोदी सोमवार और मंगलवार गुजरात के दौरे पर हैं। इस दौरान पीएम 77 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की परियोजनाओं की शुरुआत करने जा रहे हैं।

जिनको साथ मिलाकर रची शेख हसीना के तख्तापलट की साजिश, अब वही मोहम्मद यूनुस को कर रहे डंडा: बांग्लादेशी फौज भी नाराज, यूँ ही नहीं भारत के खिलाफ शुरू किया प्रलाप

बांग्लादेश वर्तमान में राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री शेख हसीना का तख्तापलट कर सत्ता में आए मोहम्मद यूनुस की कुर्सी डगमगा रही है। उनकी अंतरिम सरकार और फ़ौज के बीच तनातनी जगजाहिर हो गई है। मोहम्मद यूनुस अपनी सत्ता जाने के डर से भारत विरोधी प्रलाप पर उतर आए हैं। बांग्लादेश में चल रहे राजनीतिक संकट को यूनुस ‘भारत की साजिश’ करार दे रहे हैं। उन्होंने एक मीटिंग में यह बात कही है।

भारत रच रहा ‘बर्बाद’ करने की साजिश: यूनुस

बांग्लादेश में जारी उठापटक के बीच मोहम्मद यूनुस ने रविवार (25 मई, 2025) को एक बैठक बुलाई थी। यह बैठक बांग्लादेश के राजनीतिक दलों एवं अन्य संगठनों के साथ थी। इस बैठक में राजनीतिक दलों ने माँग की कि वह जल्द आम चुनाव करवाएँ। हालाँकि, मोहम्मद यूनुस ने चुनावों को लेकर कोई भी रोडमैप नहीं दिया और भारत के खिलाफ जहर उगला। मोहम्मद यूनुस ने कहा कि भारत जुलाई, 2024 के बाद बांग्लादेश में हुए बदलावों को स्वीकार नहीं कर रहा है।

इस बैठक में शामिल नागरिक ओइक्य परिषद के मुखिया महमूदुर रहमान मन्ना ने बताया, “उन्होंने (यूनुस) चर्चा की शुरुआत यह कहकर की कि हम एक बड़े संकट में हैं। इस संकट से उनका मतलब भारतीय के अपनी बढ़त स्थापित करने से था। भारत हमारे यहाँ आए बदलाव को कतई स्वीकार नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि अगर संभव हो तो भारत हमें एक दिन में खत्म करना चाहता हैं और इसके लिए वह हर संभव कोशिश कर रहा है।”

फ़ौज से चल रहा झगड़ा

मोहम्मद यूनुस यह बातें ऐसे समय में कह रहे हैं जब देश की फौज और आवामी लीग के प्रतिबंधित होने के बाद बची प्रमुख पार्टी BNP उनके खिलाफ हो गई है। मोहम्मद यूनुस ने अगस्त, 2025 में सत्ता हथियाई थी। तब लोगों को उम्मीद थी कि कुछ ही महीनों के भीतर चुनाव हो जाएँगे। हालाँकि, यूनुस अब खुद गद्दी पर बने रहना चाहते हैं। उन्होंने लगभग 10 माह बीतने के बाद भी चुनावों को लेकर कोई प्लान नहीं दिया है।

इसके चलते BNP उनसे खफा है। वहीं फ़ौज के मुखिया वकार उज जमाँ भी मोहम्मद यूनुस के खिलाफ हो गए हैं। हाल ही में मोहम्मद यूनुस की सरकार ने म्यांमार के रोहिंग्या की मदद के लिए एक कॉरिडोर संयुक्त राष्ट्र को देने का ऐलान किया था। इसका फ़ौज ने तगड़ा विरोध किया। फ़ौज के मुखिया जमाँ ने इसे सुरक्षा खतरा बताया और ‘बकवास’ करार दिया। इसके बाद मोहम्मद यूनुस की सरकार को पीछे हटना पड़ा।

इस्तीफे की धमकी भी नहीं आई काम

फ़ौज के मुखिया जमाँ ने यह सारी बातें आर्मी कमांडरों की एक कॉन्फ्रेंस में कही थीं। उन्होंने मोहम्मद यूनुस को दिसम्बर, 2025 तक चुनाव करवाने को भी कहा था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि देश को चुनी हुई सरकार ही ढंग से चला सकती है ना कि बिना चुनाव के सत्ता में आए हुए लोग। इस सबके बाद मोहम्मद यूनुस ने इस्तीफ़ा देने की धमकी भी दी थी। हालाँकि, यह धमकी शाम तक फर्जी साबित हुई और यूनुस ने सत्ता छोड़ने में कोई ख़ास रुचि नहीं दिखाई।

इन सबके बाद अपनी कुर्सी बचाने को मोहम्मद यूनुस ने भारत पर दोष मढ़ना चालू कर दिया है। हालाँकि, भारत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह बांग्लादेश में लोकतंत्र समर्थक है और जल्द से जल्द चुनाव देखना चाहता है। बांग्लादेश के भारत विरोधी रवैये के बाद भी भारत ने अभी कोई सख्त कदम उसके खिलाफ नहीं उठाया है। लेकिन यूनुस का यह प्रलाप लगातार जारी है। अभी भारत ने इस पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है।