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CJI संजीव खन्ना ने की महाभियोग की सिफारिश, मानसून सत्र में जस्टिस यशवंत वर्मा पर होगा फैसला: घर पर मिला था पैसों का पहाड़, अब जा सकती है कुर्सी

दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज, जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़ा एक बड़ा अपडेट सामने आया है। उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव अब केंद्र सरकार की ओर से संसद में लाए जाने की संभावना है। यह फैसला उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक जाँच समिति की रिपोर्ट के बाद आई है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पूर्व चीफ जस्टिस (CJI) संजीव खन्ना की सिफारिश को राज्यसभा के सभापति और लोकसभा अध्यक्ष को भेज दिया है। इस सिफारिश में जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने की बात कही गई थी।

जानकारी के मुताबिक, चूंकि पूर्व CJI की रिपोर्ट में महाभियोग की सिफारिश है, इसलिए अब इस प्रस्ताव को संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। मानसून सत्र जुलाई के तीसरे सप्ताह तक शुरू होने की उम्मीद है।

सरकार इस मामले पर विपक्षी दलों से भी सहमति बनाने की कोशिश करेगी, क्योंकि किसी जज को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव को दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से पारित करना होता है।

आखिर क्या है पूरा मामला?

यह मामला जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से जुड़ा है। 14 मार्च 2025 को उनके सरकारी आवास पर आग लगने के दौरान बड़ी मात्रा में कैश मिलने की बात सामने आई थी। इन आरोपों की जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 22 मार्च 2025 को एक तीन सदस्यीय आंतरिक समिति का गठन किया था।

इस समिति में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जी एस संधावालिया और कर्नाटक हाई कोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस अनु सिवरमन शामिल थीं। समिति ने कई गवाहों के बयान दर्ज किए और 3 मई 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे आरोपों को विश्वसनीय पाया गया।

रिपोर्ट सामने आने के बाद, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को जांच रिपोर्ट भेजते हुए जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने की सिफारिश की। हालाँकि, जस्टिस वर्मा से इस्तीफा देने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। उन्हें 20 मार्च 2025 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था और उन्होंने 5 अप्रैल 2025 को वहाँ जज के रूप में शपथ ली, लेकिन उन्हें अभी तक कोई काम नहीं सौंपा गया है।

हाल ही में, 26 मई 2025 को, सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत जस्टिस वर्मा पर समिति की रिपोर्ट माँगने वाली एक याचिका को भी खारिज कर दिया था।

महाभियोग की प्रक्रिया कैसे काम करती है?

संविधान के अनुसार, किसी संवैधानिक अदालत के न्यायाधीश को केवल गलत व्यवहार साबित होने पर या ‘अक्षमता’ के आधार पर ही हटाया जा सकता है। न्यायाधीश जाँच अधिनियम, 1968 में इसके लिए पूरी प्रक्रिया बताई गई है।

प्रस्ताव पेश करना- किसी जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लोकसभा में कम से कम 100 सदस्यों और राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्यों के समर्थन से ही पेश किया जा सकता है।

जाँच समिति का गठन- यदि किसी भी सदन में महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है, तो अध्यक्ष/सभापति एक तीन सदस्यीय जाँच समिति का गठन करते हैं।

रिपोर्ट और बहस- यदि समिति जज को दोषी पाती है, तो उसकी रिपोर्ट सदन द्वारा अपनाई जाती है और फिर जज को हटाने पर बहस होती है।

वोट और राष्ट्रपति का आदेश- सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित होने के लिए, लोकसभा और राज्यसभा दोनों में ‘उपस्थित और वोट करने वाले’ कम से कम दो-तिहाई सदस्यों को हटाने के पक्ष में वोट करना होता है। साथ ही, पक्ष में वोटों की संख्या प्रत्येक सदन की ‘कुल सदस्यता’ के 50% से अधिक होनी चाहिए। यदि संसद ऐसा वोट पारित कर देती है, तो राष्ट्रपति जज को हटाने का आदेश जारी करते हैं।

यह देखना होगा कि सरकार इस मामले पर किस तरह आगे बढ़ती है और क्या संसद में जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित हो पाता है।

जिस साध्वी को तोड़ नहीं पाई दिग्विजय सिंह की पुलिस, उनको राष्ट्रपति ने पद्म भूषण का दिया सम्मान: दिया था- ‘हाँ हम हिंदू हैं, हिंदुस्तान हमारा है’ का नारा, भाषण के बिकते थे कैसेट

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश में अलग-अलग क्षेत्रों में योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित किया है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह के दूसरे चरण में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वर्ष 2025 के लिए पद्म पुरष्कार प्रदान किए।

यह समारोह मंगलवार (27 मई, 2025) को राष्ट्रपति भवन में हुआ। इस समारोह में दिवंगत डॉ. शारदा सिन्हा, ओसामू सुजुकी, डी नागेश्वर रेड्डी समेत 68 हस्तियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान साध्वी ऋतंभरा को भी सामाजिक कार्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

राष्ट्रपति से पद्म भूषण सम्मान पाने वाली साध्वी ऋतंभरा ने राम मंदिर आंदोलन में विशेष भूमिका निभाई थी। आंदोलन के दौरान उनके भाषणों की गूँज देशभर में फैली। उनके भाषण इतने प्रसिद्ध थे कि बाजार में इसके कैसेट्स बेचे जाने लगे। ‘महाकाल बनकर दुश्मन से टकराएँगे, जहाँ बनी है मस्जिद, मंदिर वहीं बनाएँगे’ जैसे नारों को सुनकर देशवासी के हौसले बुलंद हो जाते थे।

लेकिन राम जन्मभूमि को वापस पाने का साध्वी ऋतंभरा का संघर्ष आसान नहीं था। उन्हें नीचा दिखाने की तमाम कोशिशें तत्कालीन सरकारों ने की थी। मुस्लिम तुष्टिकरण की मसीहा इन सरकारों ने इस तरह का माहौल बनाया जैसे वह साध्वी न होकर कोई आतंकी हों।

साध्वी ऋतंभरा को आंदोलन के दौरान ईसाई मिशनरियों के खिलाफ बोलने पर कॉन्ग्रेसी दिग्विजय सिंह की सरकार ने गिरफ्तार भी कर लिया था। इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वह राम मंदिर बनाने के हक में लड़ती रहीं। 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन से पहले साध्वी ने आंदोलन से जुड़ी यादें ताजा की थी। इस दौरान उन्होंने सरयू का जल हाथ में लेकर राम मंदिर निर्माण का संकल्प वाली बात भी दोहराई थी।

साध्वी ने सामाजिक कार्यों में हमेशा सबसे आगे आकर काम किया। राम मंदिर आंदोलन के बाद उन्होंने वृंदावन में 2001 में वात्सल्य ग्राम की स्थापना की। यह अनाथ बच्चों और बुजुर्गों के लिए एक ऐसा घर है, जहाँ हर परिवार में माँ, मौसी और भाई-बहन का वातावरण होता है। यहाँ बच्चे उन्हें दीदी माँ कहकर उन्हें बुलाते हैं। इसी के साथ साध्वी बालिका सैनिक स्कूल और आदिवासी बेटियों के लिए स्कूल जैसी कई संस्थाएँ भी संचालित करती हैं।

गरम प्रेस से दागा, जबरन मांस खिलाया, मुस्लिम बन निकाह करने को किया मजबूर: इंदौर का रेपिस्ट कोच ‘कमीशन’ का देता था ऑफर, बंधक बना दोस्तों से भी करवाया बलात्कार

इंदौर का शूटिंग कोच मोहसिन खान हिन्दू लड़कियों को लाने के लिए कमीशन का ऑफर देता था। वह हिन्दू लड़कियों पर धर्मांतरण के लिए भी दबाव बनाता था। एक पीड़िता ने बताया है कि धर्मांतरण के लिए वह प्रेस से जलाता था। मोहसिन खान पर 5 FIR दर्ज हो चुकी हैं। पाँचवी पीड़िता ने बताया है कि उसका मोहसिन ने गैंगरेप किया था। यह भी सामने आया कि मोहसिन खान शादीशुदा महिलाओं से पैसे लूटता था। पुलिस इन सब मामले में जाँच कर रही है।

मांस खिलाया, फ़्लैट में किया बंद, गैंगरेप किया: पाँचवी पीड़िता

मोहसिन खान के खिलाफ इंदौर की ही एक हिन्दू पीड़िता सामने आई है। उसने बताया है कि 2017 में वह मोहसिन खान के घर पर काम करती थी। तब वह नाबालिग थी। वह उसके यहाँ साफ़-सफाई किया करती थी। हिन्दू पीड़िता ने बताया कि मोहसिन उसको नए कपड़े लाकर देता था और सामने बदलने को कहता था। पीड़िता के अनुसार, मोहसिन ने कई बार उसके साथ अप्राकृतिक तरीके से रेप किया। लॉकडाउन के दौरान हिन्दू पीड़िता से गैंगरेप भी हुआ।

पीड़िता ने इस मामले में FIR दर्ज करवाई है। उसने बताया है कि लॉकडाउन के दौरान उसे एक फ़्लैट पर बंद कर लिया गया और मोहसिन के साथ ही फैजान और इमरान ने उसके साथ 15 दिनों तक गैंगरेप किया। पीड़िता ने बताया कि उस पर इस्लाम कबूलने के लिए दबाव बनाया जाता था। यहाँ तक कि मोहसिन ने उसको प्रेस से भी जलाया। मोहसिन ने उसका अश्लील वीडियो भी बना लिया, जिसको वह वायरल करने की धमकी देता था।

हिन्दू पीड़िता से मोहसिन दूसरी हिन्दू लड़कियों को लाने को कहता था। वह इसके लिए कमीशन देने की बात भी कहता था। मोहसिन इस हिन्दू पीड़िता को जबरन मांस खिलाता था। उसने बताया कि एक दिन सामने ही खरगोश काट कर उसे मोहसिन ने पकवाया। पीड़िता का अब विवाह हो चुका है लेकिन मोहसिन की करतूतें सामने आने के बाद उसमे हिम्मत आई है और वह थाने पहुँची है। अब इस मामले में पुलिस जाँच कर रही है।

पैसे की भी करता था ठगी

मोहसिन शादीशुदा महिलाओं से ठगी भी करता था। उसके फोन में मिली चैट्स से यह खुलासा हुआ है। वह कई महिलाओं को पैसे भेजने को कहता था। इसके अलावा वह धोखाधड़ी भी कर चुका है। उसने ध्रुव नाम के एक लड़के से ₹1.70 लाख एक रायफल खरीदने को लिए थे। इसके बाद भी मोहसिन ने रायफल उसे मँगा कर नहीं दी और पैसे भी नहीं वापस किए। मोहसिन की पिटाई के वीडियो भी वायरल हो रहे हैं। वह सारे मामले सामने आने के बाद खजराना इलाके में छुपा था। यहाँ लोगों ने उसे ढूंढ कर पीटा।

कलावा भी कटवाया, रेप किया

मोहसिन के खिलाफ यह मामले सामने आने तब चालू हुए जब उसके पास शूटिंग सीखने आई एक पीड़िता ने अपने साथ हुई कहानी बयान की। छात्रा ने बताया कि वह साल 2021 से नवंबर 2023 तक मोहसिन की एकेडमी में शूटिंग प्रैक्टिस करती थी। एक दिन मोहसिन कोचने राइफल पकड़ने के बहाने उसके शरीर को गलत तरीके से छुआ और जांघ को दबाया।

पीड़िता ने बताया कि उसने जब विरोध किया तो मोहसिन ने करियर बर्बाद करने की धमकी दी। पीड़िता ने घटना के बाद एकेडमी जाना बंद कर दिया और कुछ समय बाद परिजनों को जानकारी दी। पीड़िता को हाल ही में और भी हिन्दू लड़कियों के साथ ऐसी ही घटनाओं की जानकारी मिली। इसके बाद 4 और पीड़िता सामने आईं।

एक और पीड़िता वकील है, जो LLM की पढ़ाई कर रही है। उसने बताया कि फरवरी 2021 में वह शूटिंग सीखने के लिए मोहसिन खान की एकेडमी गई थी। पीड़िता का आरोप है कि जुलाई 2022 में कोच ने उसे अपने फ्लैट पर बुलाया और जबरदस्ती बलात्कार किया।

पीड़िता ने विरोध किया तो कोच ने धमकी दी कि अगर उसने किसी को बताया तो उसकी बदनामी होगी और कोई उससे शादी नहीं करेगा। पीड़िता के मुताबिक, फरवरी 2022 से दिसंबर 2023 के बीच मोहसिन ने कई बार जबरन शारीरिक संबंध बनाए। 

एक और जनजातीय समाज की महिला भी पीड़िता है, जो शूटिंग एकेडमी में काम करने आई थी। पीड़िता का आरोप है कि मोहसिन उसे बार-बार अपने फ्लैट में बुलाता था और 16 मई 2025 को उसके साथ अश्लील बातें करते हुए उसके पैर छूने जैसी हरकतें कीं। जब महिला ने विरोध किया, तो मोहसिन ने उसे नीचे ही बैठने का दबाव डाला।

मोहसिन खान को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। उसके खिलाफ लगाए सारे आरोपों की जाँच चल रही है। पुलिस सभी पीड़िताओं के लगाए आरोपों पर सबूत इकट्ठा कर रही है।

‘मौसम’ बताने को भारत ने बनाया दुनिया का ‘बेस्ट सिस्टम’, सुपरकंप्यूटर Arka से चलेगा: जानिए महिला वैज्ञानिकों ने कैसे तैयार किया BFS, हर एक गाँव का बताएगा हाल

दुनिया के साथ कदम से कदम बढ़ाते हुए भारत नित नए कीर्तिमान रच रहा है। फिर चाहे बात भारतीय सेनाओं के कौशल की हो, भारतीय न्याय संहिता की हो या फिर संस्कृति की, देश ने हमेशा से ही अपना परचम बुलंद रखा है। इसी कड़ी में सोमवार (26 मई 2025) को देश ने अत्याधुनिक ‘भारत पूर्वानुमान प्रणाली’ यानी ‘भारत फोरकास्ट सिस्टम’ (BFS) का अनावरण किया है।

ये प्रणाली 6 किलोमीटर के रिजॉल्यूशन के साथ दुनिया का सबसे सटीक मौसम पूर्वानुमान कर सकती है। इसे सुपरकंप्यूटर अर्का से संचालित किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे खराब से खराब मौसम का पैटर्न भी विश्लेषण कर बेहद सटीक और विस्तृत पूर्वानुमान दिया जा सकता है।

सोमवार (26 मई 2025) को पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस नए सिस्टम का उद्घाटन किया। स्वदेशी विकसित हाई-रिजोल्यूशन ग्लोबल फोरकास्ट मॉडल (HGFM) को ही भारत फोरकास्ट सिस्टम कहा जा रहा है। यह प्रणाली इंडियन इंटीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी (IITM) ने विकसित की है।

इस नए सिस्टम से भीषण सर्दी हो या झमाझम बरसात, हर तरह के मौसम में बेहद सटीक और स्थानीय जगहों पर भी सही पूर्वानुमान किया जा सकता है।

BFS के साथ अब भारत अब अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघों से भी आगे निकल गया है। ऐसा इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि इन सभी देशों में उपयोग हो रहा मॉडल 9 से 14 किलोमीटर के रेजोल्यूशन पर काम करता है। लेकिन BFS का कार्यप्रणाली 6 किलोमीटर के रेजोल्यूशन पर काम कर सकता है। यानी ये अधिक सटीक जानकारी देने में सक्षम है।

12 किमी से 6 किमी रेजोल्यूशन की छलांग

अब तक भारत का मौसम पूर्वानुमान भी 12 किलोमीटर ग्रिड मॉडल पर आधारित था। नए BFS ने इस दूरी को 6 किलोमीटर तक घटा दिया है। इसके कारण पूर्वानुमान की परिधि 4-5 गाँवों के समूह के बजाय हर गाँव का पूर्वानुमान दिया जा सकता है। इस विकास के कारण वैश्विक स्तर पर भारत के इस पूर्वानुमान मॉडल की सटीकता अधिक बेहतर सिद्ध हो रही है।

मंत्रालय के अनुसार, इस छलांग से बारिश के पूर्वानुमान में 30% तक की बेहतरी देखी जा सकती है। साथ ही मानसून कोर क्षेत्र की सटीकता भी 64% तक बढ़ सकती है। इस लिहाज से देखा जाए तो इससे खेती-किसानी को काफी हद तक फायदा पहुँचेगा।

भारत- निर्मित प्रणाली, भारत के लिए प्रभावी

उद्घाटन के अवसर पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “ये स्वदेशी उपलब्धि भारत को मौसम पूर्वानुमान में वैश्विक स्तर के बीच स्थापित करती है। भारतीय प्रयास हैं, तकनीक भी भारतीय है और लाभार्थी भारतीय है। यही असली आत्मनिर्भरता है।”

ये पूरी प्रणाली ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत तैयार की गई है। इसके तहत त्रिकोणीय घनीय अष्टफलक ग्रिड (Triangular Cubic Octahedral Grid) मॉडल पर काम करता है। सरल शब्दों में कहा जाए तो ये प्रणाली पूर्वानुमान के लिए त्रिकोण, घन और अष्टफलक- तीन तरह की संरचना के उपयोग के साथ विशेष तरह का 3डी ग्रिड का इस्तेमाल किया जाता है।

इससे यह पृथ्वी की सामान्य सतह को सामान्य वर्गाकार ग्रिड की तुलना में अधिक समान रूप से बाँट देता है। इससे भविष्यवाणी अधिक सटीक हो जाती है। इसके तहत यह उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में 30° दक्षिण से 30° उत्तर अक्षांश तक में भी काम करेगा। इन क्षेत्रों में भारत के साथ कई विकासशील देश शामिल हैं।

नए सिस्टम से स्थानीय प्रशासन के साथ किसानों को अधिक सटीक पूर्वानुमान और समय पर मौसम के अलर्ट मिल सकेंगे।

BFS के लिए सुपरकंप्यूटर ‘अर्का’ को चुना गया है। ये एक हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम है। वर्तमान में IITM पुणे और NCMRWF नोएडा में है। 11.77 पेटाफ्लॉप्स की कंप्यूटिंग स्पीड और 33 पेटाबाइट्स की स्टोरेज क्षमता के साथ, अर्का मॉडल रन टाइम महज 4 घंटे कर देता है। पहले की ‘प्रत्यूष’ प्रणाली को मौसम पूर्वानुमान चलाने में 10 घंटे लगते थे।

महिला वैज्ञानिकों का नेतृत्व

BFS की एक सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि ये है कि इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व 4 महिला वैज्ञानिक कर रही हैं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नारी शक्ति’ की झलक को दिखलाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस पर कहा, “अब विज्ञान मंत्रालय महिलाओं को सशक्त नहीं कर रहा बल्कि हम उनके द्वारा सशक्त किया जा रहे हैं।”

इस अत्यधिक प्रणाली के पीछे डॉ. सुवर्णा फडनवीस, डॉ. स्वप्ना पनिक्कल, डॉ. सुष्मिता जोसेफ और डॉ. मेधा देशपांडे ने अहम भूमिका निभाई है।

जलवायु वास्तविकता के अनुरूप सच्चाई

सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण में पहले ही ये बात सामने आ चुकी है कि मौसम अस्थिरता की वजह से अचानक बारिश या हीट वेव जैसी परिस्थितियों आती हैं। इनकी वजह से फसलों की बर्बादी और खाने के सामानों में महँगाई को बढ़ाया है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 2022 से 2024 के बीच 18% दिनों में हीटवेव देखी। 2020-21 में ये सिर्फ 5% थी।

BFS को देशभर में 40 डॉपलर वेदर रडार के साथ काम करेगा। इससे इन चुनौतियों का समाधान निकल सकता है। हालाँकि सरकार रडार की संख्या बढ़ाकर 100 करने की योजना बना रही है। इससे रियल-टाइम अलर्ट और ‘नाउकास्टिंग’ यानी अगले दो घंटे की मौसम भविष्यवाणी पूरे भारत में संभव होगी।

संपूर्ण सरकार, संपूर्ण विज्ञान दृष्टिकोण

डॉ. जितेंद्र सिंह ने BSF के सपने को धरातल पर लाने में IITM, IMD, ISRO समेत अन्य संस्थानों के प्रयासों की सराहना की है। भारत में 20 से अधिक मंत्रालय रोजाना मौसम के डेटा पर निर्भर रहते हैं।

इनमें कृषि से लेकर परिवहन तक सभी शामिल हैं। भारत फोरकास्ट सिस्टम केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि ही नहीं है बल्कि वह राष्ट्रीय संपत्ति है जो आगामी नुकसान कम करेगी और लाभ बढ़ाएगी। इससे भारत के शीर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था बनने की राह में भी तेजी आएगी।

तालाब पर नहाती हिन्दू महिलाओं का वीडियो बनाने से रोका तो मुस्लिमों ने किया हमला, ‘अल्लाहू अकबर’ के लगाए नारे: ऑपइंडिया को पीड़ितों ने बताई आपबीती, गुजरात का मामला

गुजरात के तापी जिले में एक हिन्दू परिवार पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया। यह हमला कथित तौर पर एक जलाशय के पास नहा रहीं हिन्दू महिलाओं का वीडियो बनाने से रोकने पर हुआ। आरोप है कि मुस्लिम जलाशय के पास कपड़े बदल रहीं हिन्दू महिलाओं का वीडियो बनाना चाहते थे।

यह घटना तापी जिले के उच्छल के थुति गांव में हुई है। पीड़ित परिवार दलित है। आरोप है कि इसके बाद 15 मुसलमानों की भीड़ ने अस्पताल और सड़क पर इस परिवार को निशाना बनाया। इस मामले में उच्छल पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कर ली गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

शिकायत के अनुसार घटना रविवार (18 मई, 2025) को हुई। इस मामले में उच्छल पुलिस ने 15 ‘अज्ञात’ मुस्लिम समूहों के खिलाफ बीएनएस की धारा 115(2), 117(2), 189(2), 190, 191(2), 191(3) और जीपी एक्ट की धारा 135 के तहत मामला दर्ज किया है।

बाँध से लेकर अस्पताल तक बनाया निशाना

FIR में लगाए आरोपों के अनुसार, सूरत के किरण अस्पताल में ड्राइवर के रूप में काम करने वाले दलित व्यक्ति प्रताप सिंह चौहान अपने परिवार और पड़ोसियों के साथ बाइक और कार से उच्छल तालुका के थुती गाँव में उकाई बाँध जलाशय तक गए थे। उनके साथ महिलाएँ और बच्चे भी थे।

वे दोपहर में इसी के पास एक जलाशय में नहाने गए थे। शिकायत के अनुसार, नहाने के बाद महिलाओं में से एक बिस्तर की चादर के पीछे अपने कपड़े बदल रही थी, इसी बीच परिवार ने देखा कि कुछ मुस्लिम व्यक्ति महिला का वीडियो बना रहे थे।

FIR में बताया गया है कि इस पर ऑब्जेक्शन करने पर एक व्यक्ति पर मुस्लिम व्यक्तियों ने हमला किया। जब यह घटना सामने आई तो दलित परिवार के सभी सदस्य एकजुट हुए और उन्होंने मुस्लिम युवक से वीडियो बनाने से मना किया। इसके बाद आरोपितों ने परिवार के सदस्यों पर हमला कर दिया।

जब पुलिस ने अपराधियों में से एक के मोबाइल फोन की जाँच की तो उसमें कोई वीडियो नहीं मिला, लेकिन दूसरे ने उन्हें अपने फोन की जाँच नहीं करने दी। इसके बाद मुस्लिम लोग इलाके से बाहर चले गए।

इसके कुछ ही देर बाद, लगभग 4 बजे, 15 से 20 की मुस्लिम भीड़ हथियारों से लैस होकर वापस लौटी और सीधा हमला शुरू कर दिया। बताया गया है कि हमले के दौरान एक हिंदू गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे सोनगढ़ अस्पताल ले जाया गया।

सोनगढ़ जाते समय मुस्लिम भीड़ के दो और लोग सड़क पर आ गए और उन्होंने गाड़ी को घेर लिया। इसके बाद यह भीड़ उस अस्पताल ही पहुँच गई जहाँ यह दलित परिवार के सदस्य भर्ती थे। यहाँ मुस्लिमों पर हँगामा करने का आरोप है।

पुलिस पर भी लगाए आरोप

पीड़ित परिवार का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वे अपने दर्दनाक अनुभव को बता रहे हैं। एक युवक ने बताया कि जब वह सोनगढ़ पुलिस के पास गया तो पुलिस ने कहा, “अच्छा हुआ तुम बच गए, वरना सोनगढ़ के मुसलमान तुम्हें मार देते।” इसके अलावा, वीडियो में किसी ने इस घटना की तुलना पहलगाम आतंकी हमले से की है।

वहीं एक महिला ने बताया कि जब वह कपड़े बदल रही थी, तो दो मुस्लिम पुरुष और एक मुस्लिम महिला ऊपर से उसका वीडियो बनाने लगे। जब परिवार ने उनसे प्रश्न किया तो वे नीचे आ गए और बहस करने लगे। इसके अलावा, एक अन्य व्यक्ति ने भी वीडियो में घटना को शेयर किया।

मुस्लिम भीड़ ने लगाए अल्लाहू अकबर क नारे: पीड़ित

ऑपइंडिया से बातचीत में प्रताप सिंह चौहान ने बताया कि मुस्लिम भीड़ ने अल्लाहू अकबर के नारे लगाते हुए उनके परिवार पर हमला किया। उन्होंने बताया कि इस हमले में महिलाएँ और बच्चे भी घायल हुए, इसके अलावा सोनगढ़ अस्पताल में मुस्लिमों का एक समूह इकट्ठा हुआ और धमकियाँ दीं।

उन्होंने आगे बताया कि सोनगढ़ पुलिस ने पहले इस मामले में आरोपितों की ही दर्ज शिकायत लिख लिया था। स्थानीय हिंदू संगठन के पदाधिकारी चंदन सिंह गोहिल ने ऑपइंडिया को बताया कि आरोपियों में से एक मुस्लिम व्यक्ति है जो स्थानीय पार्षद के तौर पर काम करता है।

उन्होंने यह भी बताया कि वह पहले भी कई अपराधों में शामिल रहा है और एक बार तो पुलिस ने उसका सार्वजनिक जुलूस भी निकाला था। उन्होंने बताया कि मुस्लिम भीड़ ने परिवार के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराई और पुलिस ने उसे स्वीकार भी कर लिया।

उन्होंने बताया कि अपराधी सोनगढ़ के दबंग हैं। उन्होंने बताया कि अभी दो महीने पहले ही एक आरोपित और उसके पिता को पुलिस ने जुलूस में घुमाया था। इसके अलावा, एक हत्या के मामले में उनकी भूमिका के बारे में भी आरोप लगाए गए थे। उन्होंने स्थानीय पुलिस की भी आलोचना की।

उन्होंने संकेत दिया कि एक पार्षद भी उस समूह का हिस्सा था जो लड़ाई-झगड़ा करने के लिए आया था। हिंदू नेता ने बताया दिया कि जब आरोपितों को मामला दर्ज करने के इरादे के बारे में पता चला, तो वे तुरंत शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन गए और दावा किया कि दलित परिवार ने एक मुस्लिम महिला से छेड़छाड़ की है।

उन्होंने कहा, “इस शिकायत के पीछे कोई आधार नहीं है। असल हिंदू पुरुष अपनी पत्नियों, बच्चों और परिवारों के साथ मौजूद थे, तो वे इस तरह का कैसे काम कर सकते थे?” उन्होंने पुलिस पर मामले को निपटाने के इरादे से लगातार शिकायतें दर्ज करने का भी आरोप लगाया।

हिन्दू आदमी पर पुलिस बना रही दबाव

गोहिल ने बताया कि अधिकांश समय तक इस घटना पर किसी का ध्यान नहीं गया। हालाँकि, एक-दो दिन बाद एक हिंदू व्यक्ति ने पीड़ित परिवार का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया, जिससे गुजरात में इस घटना की चर्चा होने लगी। वीडियो बनाने वाला व्यक्ति सूरत का रहने वाला है।

गोहिल ने बताया कि सूरत के संबंधित क्षेत्र के पुलिस इंस्पेक्टर ने उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया, जिसके कारण फुटेज को डिलीट कर दिया गया। हालाँकि, यह पहले ही वायरल हो चुका था। इसके बाद यह विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल संज्ञान में आया।

सोशल मीडिया पर यह वीडियो खूब वायरल हो रहा है। अधिकारियों ने इस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है और दोनों पक्षों से शिकायत भी मिली है। ऑपइंडिया से बातचीत में उच्छल थाने के पुलिस इंस्पेक्टर ने बताया कि घटना के बाद दंगा करने के आरोप में छह लोगों को पकड़ा गया है और उनके खिलाफ दो शिकायतें दर्ज की गई हैं।

गौरतलब है कि इस घटना को कई दिन बीत चुके हैं और वीडियो वायरल हुए दो दिन हो चुके हैं, लेकिन मामले के बारे में किसी भी मीडिया में कोई जानकारी सामने नहीं आई है। इसके पीछे दो संभावित कारण हो सकते हैं। एक तो यह कि मीडिया को आरोपित पार्षद का डर है, जिसका खासा प्रभाव है और दूसरा यह कि पुलिस खुद मामले को दबा रही है। सच क्या है, यह पता लगाना मुश्किल है। फिर भी यह तो स्पष्ट है कि घटना को छिपाने की कोशिशें की गई हैं और जारी हैं।

पीएम मोदी के खिलाफ जहर उगल New York के मेयर का चुनाव जीतना चाहता है जोहरान ममदानी, खुद को बताया ‘गुजराती मुस्लिम’: राम मंदिर के खिलाफ की थी रैली, हिन्दुओं ने किया विरोध

न्यूयॉर्क शहर के मेयर पद के उम्मीदवार और फिल्म निर्माता मीरा नायर के बेटे जोहर ममदानी को विरोध का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी सांसदों और भारतीय समुदाय के नेताओं ने मीरा नायर के बेटे ज़ोहरान ममदानी की आलोचना की है। दरअसल उन्होने पीएम मोदी को ‘वॉर क्रिमिनल’ कहा था। 15 मई को ‘न्यू मेयर न्यू मीडिया’ नाम के कार्यक्रम में उन्होने पीएम मोदी की इजरायल के पीएम नेतन्याहू से तुलना की थी।

2002 के गुजरात दंगों के लिए पीएम मोदी को दोषी ठहराते हुए उन्होंने कहा, “नरेंद्र मोदी ने गुजरात में मुस्लिम समुदाय का सामूहिक नरसंहार इस हद तक करने में मदद किया की कि हम यह भी नहीं मानते कि अब गुजराती मुसलमान बचे हैं। और जब मैं किसी को बताता हूँ कि मैं गुजराती मुसलमान हूँ, तो उन्हें यह जानकर झटका लगता है।”

भारतीय मुस्लिम मूल के ममदानी भारतीय हिंदू नेताओं, खासकर पीएम मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होने 2020 में मोदी की पार्टी से जुड़े हिंदुओं को “फाँसीवादी” कहा और मोदी की निंदा न करने के लिए न्यूयॉर्क के अपने सहयोगी नेताओं जेनिफर राजकुमार और केविन थॉमस की आलोचना की। राजकुमार ने ममदानी पर पलटवार करते हुए “चरमपंथी और विभाजनकारी” कहते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी और मतदाताओं से “घृणा को अस्वीकार करने का आग्रह किया, चाहे वह वामपंथी हों या दक्षिणपंथी।”

एक पत्रकार ने ममदानी से हाल ही में पूछा कि अगर वह मेयर बनते हैं और पीएम मोदी न्यूयॉर्क में रैली करते हैं और संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की माँग करते हैं तो क्या वह पीएम मोदी के साथ मंच पर शामिल होंगे। इस पर उन्होने कहा कि वो पीएम मोदी के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने गुजरात 2002 के दंगों का हवाला दिया और कहा कि उनका परिवार भारत के गुजरात से आता है और उनका परिवार मुस्लिम है, वह एक मुस्लिम हैं।

इसके बाद उन्होंने दंगों के लिए पीएम मोदी को दोषी ठहराते हुए कहा, “नरेंद्र मोदी ने गुजरात में मुसलमानों के सामूहिक नरसंहार को इस हद तक अंजाम देने में मदद की कि अब हम यह भी नहीं मानते कि गुजराती मुसलमान हैं। और जब मैं किसी को बताता हूं कि मैं गुजराती मुसलमान हूँ, तो उन्हें यह जानकर झटका लगता है कि ऐसा भी हो सकता है। और यह वह व्यक्ति है जिसे हमें उसी तरह से देखना चाहिए जैसे हम बेंजामिन नेतन्याहू को देखते हैं। यह एक युद्ध अपराधी हैं।”

फिल्म निर्माता मीरा नायर के बेटे ममदानी का हिंदुओं को निशाना बनाने का इतिहास रहा है। उसने न्यूयॉर्क के 250,000 इंडो-अमेरिकन समुदाय के लोगों के भीतर चिंता पैदा की है। इनमें ज़्यादातर हिंदू हैं। जब अयोध्या में राम मंदिर बनाया जा रहा था, तो उन्होंने 2020 में इसके खिलाफ एक रैली का नेतृत्व किया था। जब वे रैली में बोल रहे थे, तो वहाँ हिंदुओं के खिलाफ़ अपमानजनक टिप्पणियाँ की जा रही थीं। रैली का आयोजन खालिस्तान समर्थकों ने किया था।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने दंगों में पीएम मोदी को पहले ही क्लीन चिट दे दी है और ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि वे दंगों की साजिश रचने में शामिल थे। उन्होंने गोधरा कांड को भी नजरअंदाज किया और ये नहीं बताया कि दंगे तब भड़के थे जब अयोध्या से लौट रहे 59 हिंदू कारसेवकों को गोधरा में मुस्लिम भीड़ ने जिंदा जला दिया था, इस मामले में कई मुस्लिम गुंडों को दोषी ठहराया गया था।

2011 की जनगणना के अनुसार गुजरात में मुस्लिम आबादी लगभग 10% थी, जो पिछले दशक में बढ़ी होगी। यह दावा करना कि गुजराती मुसलमान नहीं बचे हैं, एक बेतुका बयान है और न्यूयॉर्क में भारतीय उच्चायोग से मिलकर इसका विरोध किया जाना चाहिए।

सिख समुदाय के नेता और मानवाधिकार वकील जसप्रीत सिंह ने ममदानी की आलोचना करते हुए कहा, “हमारे शहर में नफरत के लिए कोई जगह नहीं है। हम सभी के लिए समानता, प्यार और सम्मान में विश्वास करते हैं। हम मानते हैं कि सभी एक ही ईश्वर की संतान हैं। लेकिन ज़ोहरान ने अपने मंच का इस्तेमाल हिंदू विरोधी बयानबाजी को बढ़ावा देने के लिए किया है। शब्द मायने रखते हैं और भारतीय समुदाय को एकजुट करने के बजाय, वह हमें धर्म के आधार पर विभाजित करना चाहते हैं। वह मुसलमानों और हिंदुओं को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करना चाहते हैं। हिंदुओं को फाँसीवाद से जोड़ना और उनके खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करना बेहद आपत्तिजनक है।”

उन्होंने ममदानी पर हिंदू समुदाय को ‘अमानवीय’ कहने का आरोप लगाया और सवाल किया कि क्या वह न्यूयॉर्क सिटी की सेवा करने के योग्य हैं?

क्या राजदीप सरदेसाई को इंडिया टुडे ने नौकरी से निकाला, विदाई भी नहीं दी? सोशल मीडिया में लग रहे कयास, कहा था- पाकिस्तान को दे दो PoK

अंग्रेजी समाचार TV चैनल इंडिया टुडे से पत्रकार राजदीप सरदेसाई को निकाले जाने की खबरें सोशल मीडिया पर लगातार तैर रही हैं। सोशल मीडिया पर लोग एक कड़ी से दूसरी कड़ी जोड़ कर राजदीप की विदाई को लेकर चर्चाएँ कर रहे हैं।

राजदीप सरदेसाई को लेकर इन चर्चाओं को और भी बल तब मिला जब ABP न्यूज की पत्रकार मेघा प्रसाद ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “मीडिया के एक बड़े और ताकतवर व्यक्ति को बाहर निकाल दिया गया… आपके कर्म लौट कर आपको वापस मिलते हैं।”

इस ट्वीट में मेघा ने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन लोग तुरंत ही कयास लगाने लगे। कई लोगों ने दावा किया कि यह इशारा इंडिया टुडे के एंकर राजदीप सरदेसाई की तरफ है, जिन्होंने हाल ही में PoK पर एक विवादित टिप्पणी की थी।

इस आग में घी डालने का काम एक्स पर की गई कई और पोस्टों ने किया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि सरदेसाई को उनके विवादास्पद रवैये और हितों के टकराव के कारण चैनल से बिना कोई सम्मानजनक विदाई दिए हटा दिया गया है।

PoK पाकिस्तान को सौंपने की दी थी सलाह

इंडिया टुडे के डिबेट शो में उन्होंने कहा कि भारत को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) पाकिस्तान को सौंप देना चाहिए और नियंत्रण रेखा (एलओसी) को अंतरराष्ट्रीय सीमा मान लेना चाहिए। सरदेसाई ने इसे कश्मीर समस्या का ‘स्थायी समाधान’ बताया था।

राजदीप ने कहा कि आतंकवाद और जम्मू-कश्मीर के आंतरिक मुद्दों पर चर्चा जरूरी है, लेकिन पीओके वापस लेना संभव नहीं। इसको लेकर राजदीप को काफी विरोध झेलना पडा था और उनकी सोशल मीडिया पर आलोचना हुई थी।

पहले भी फैला चुके झूठ

यह पहली बार नहीं है जब राजदीप सरदेसाई से जुड़ा कोई विवाद सामने आया हो। इससे पहले जनवरी 2021 में, किसान प्रदर्शन के दौरान गलत सूचना फैलाने के कारण उन्हें इंडिया टुडे ने दो सप्ताह के लिए ऑफ एयर कर दिया था और एक महीने का वेतन काट लिया था।

सरदेसाई ने ट्वीट किया था कि गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली के दौरान मरने वाले एक प्रदर्शनकारी की मौत पुलिस की गोलीबारी में हुई थी। बाद में पुष्टि हुई थी कि उसकी मौत ट्रैक्टर के पलटने से हुई थी। इसके बाद इंडिया टुडे को उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

अब आगे सरदेसाई के साथ क्या होगा?

अगर सरदेसाई को बाहर निकाले जाने की बात आगर सच साबित होती है तो वह ऐसे ही लोगों की एक लम्बी लाइन में शामिल हो जाएँगे। इससे पहले कई को हस्तियों पत्रकारिता की आड़ में दुष्प्रचार करने के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।

इसके बाद वह रवीश कुमार, अभिसार शर्मा, अजीत अंजुम की तरह पीड़ित होने का नाटक कर सकते हैं और दावा कर सकते हैं कि उन्हें ‘असहज सवाल’ पूछने के लिए बर्खास्त कर दिया गया था और बस यूट्यूब पर चले जाएँ। यहाँ वह अपना प्रोपेगेंडा खुल कर चला सकते हैं।

नोट: यह आर्टिकल सोशल मीडिया में चल रही अपुष्ट कनफुस्कियों और कयासों पर आधारित है। खबर लिखे जाने तक इंडिया टुडे या राजदीप सरदेसाई की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी।

जो सतनाम करता था चरस की तस्करी, सबसे पहले उसे बनाया ईसाई… फिर 3000+ सिखों का धर्मांतरण: पीलीभीत में घरों से हटाए गए क्रॉस निशान

पीलीभीत में 3000 से अधिक सिखों को ईसाई बनाने का मामला उजागर होने के बाद कार्रवाई शुरू हो गई है। घरों पर लगे क्रॉस के निशान हटवाए जा रहे हैं। इससे पहले करीब 500 सिखों ने घर वापसी की थी। जिला प्रशासन ने धर्मांतरण की इस साजिश के जाँच के भी आदेश दिए हैं।

नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश पीलीभीत जिले में करीब 22 हजार सिख रहते हैं। सिख संगठनों की शिकायत के बाद आशंका जताई जा रही है कि धर्मांतरण के लिए विदेशों से फंडिंग हुई है। रिपोर्टों के अनुसार सिखों का धर्मांतरण करने के लिए पादरी नेपाल से आए थे। साथ ही धर्मांतरित लोगों के घरों में दक्षिण कोरिया के कैलेंडर मिले हैं। उल्लेखनीय है कि पीलीभीत के ग्रामीण इलाके नेपाल की खुली सीमा से सटे हैं।

दैनिक भास्कर ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में बताया है सबसे पहले जिस सिख को ईसाई बनाया गया था, उसका नाम सतनाम सिंह है। वह चरस की तस्करी करता था। टाटरगंज गाँव के रहले वाले सतननाम सिंह को पास्टर बनाया गया। उसने लालच देकर आसपास के गाँवों में ईसाई धर्मांतरण के इस रैकेट को आगे बढ़ाया।

पीलीभीत के बेल्हा गाँव के गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सचिव परमजीत सिंह के हवाले से इस रिपोर्ट में बताया गया है कि करीब 150 घरों पर क्रॉस के निशान बने हुए हैं। कुछ घरों में प्रार्थना गतिविधियाँ भी हो रही है। उन्होंने बताया है कि शिकायत के बाद प्रशासन ने घरों के बाहर लगे क्रॉस निशान हटवाने का अभियान शुरू किया है। साथ ही करीब 100 घरों में विशेष तरह के कैलेंडर मिलने की बात कहते हुए धर्मांतरण के लिए दक्षिण कोरिया से पैसा आने की आशंका जताई है।

बेल्हा गाँव के गुरुद्वारे में 9 परिवारों की एक सूची भी लगाई है। इन परिवारों का सामाजिक बहिष्कार करते हुए अपने नाम से सिंह हटाने को कहा गया है। स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष गुरदयाल सिंह के अनुसार 2002 में विदेशी पादरियों ने टाटरगंज के 2 लोगों का लालच देकर धर्मांतरण कराया था। इसके बाद से यही 2 लोग पूरा सिंडिकेट चला रहे हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि ईसाई धर्मांतरण को लेकर पहली FIR 13 मई 2025 को पीलीभीत के हजारा थाने में दर्ज कराई गई थी। टाटरगंज की मनजीत कौर ने 2 लाख रुपए और मकान का लालच देकर ईसाई बनाने का दबाव डालने का आरोप लगाया है। इस एफआईआर में भी सतनाम सिंह का नाम है।

गौरतलब है कि 3000 से अधिक सिखों को ईसाई बनाने का मामला ऑल इंडिया सिख पंजाबी वेलफेयर काउंसिल ने उजागर किया था। उसके बाद अन्य सिख संगठन और प्रशासन हरकत में आया। पिछले दिनों करीब 500 सिखों की घर वापसी भी कराई गई थी। सीमा से सटे इलाकों में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) जागरुकता अभियान भी चला रही है।

क्या है ‘कावेरी इंजन’, क्यों इस तकनीक में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की हो रही माँग: क्या हैं इसके फायदे, कहाँ अटका है काम… जानिए सब कुछ

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़े प्रयास किए हैं। इसी के चलते अब भारत हजारों करोड़ का रक्षा सामान विदेशों को बेच तक रहा है। भारत ने इसी बीच अपना स्वदेशी जेट एयरक्राफ्ट तेजस भी बनाया है।

कुछ ऐसी तकनीकें अभी भी है, जिनके लिए भारत विदेशों पर निर्भर है। लड़ाकू विमानों के इंजन ऐसी ही एक तकनीक है। भारत यह तकनीक हासिल करने के लिए ‘कावेरी’ इंजन बना रहा है। इसमें तेजी लाई जाए, इसके लिए अब लोग सोशल मीडिया पर Fund Kaveri Engine (फंड कावेरी इंजन) ट्रेंड चला रहे हैं।

यह सोशल मीडिया ट्रेंड सोमवार (26 मई, 2025) से चालू हुआ। इस दौरान नेटीजेंस ने मोदी सरकार से अपील की कि वह कावेरी इंजन के लिए और भी धनराशि मुहैया करवाएँ और जल्द से जल्द जेट इंजन के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर कर दें।

‘Zoomerjeet’ नाम के एक सोशल मीडिया हैंडल ने सबसे पहले इसकी शुरुआत की। नाम ना बताने वाले इस अकाउंट से सबसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हर ट्वीट के रिप्लाई में कावेरी इंजन को अधिक फंड देने की माँग की। यह काफी क्रिएटिव तरीके से किया गया।

प्रधानमंत्री के लगभग हर ट्वीट पर ऐसे रिप्लाई किए गए। 26 मई की शाम तक यह राष्ट्रीय स्तर का ट्रेंड बन गया और इसमें कई और लोग शामिल हो गए। अभय नाम के एक यूजर ने लिखा कि निर्मला जी (वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण) भले ही आप GST 18% की जगह 20% ले लो, लेकिन कावेरी के लिए फंड बढ़ाओ।

लोगों ने इसके लिए जल्द ही कई और क्रिएटिव तरीके निकाले और इस संबंध में पोस्टर बनाने भी चालू कर दिए। कई यूजर्स ने इसके लिए सोवियत स्टाइल वाले प्रोपेगेंडा पोस्टर बनाए और सरकार से माँग की कि जल्द कावेरी इंजन को फंड करके देश को आत्मनिर्भर बनाया जाए।

कई लोगों ने तो इसे भारत की सांस्कृतिक संप्रभुता से भी जोड़ दिया और उस तरह के पोस्टर बना कर फंडिंग की माँग की। एक यूजर ने तो कहा कि हमें इस इंजन के लिए क्राउडफंडिंग (जनता से पैसा इकट्ठा करना) की कोशिश करनी चाहिए।

इस मुहिम में रक्षा मामलों पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार शिव अरूर भी शामिल हो गए। उन्होंने अपने एक शो में भी इस संबंध में बात की।

क्या है कावेरी इंजन?

‘कावेरी’ उस इंजन प्रोग्राम का नाम है, जिसे डिफेन्स रिसर्च एंड डेवेलपमेंट आर्गेनाईजेशन (DRDO) भारत के लिए विकसित कर रहा है। DRDO की GTRE लैब इसे बना रही है। योजना है कि यह कावेरी इंजन आने वाले समय में हमारे स्वदेशी लड़ाकू विमानों में लगाया जाएगा। इस पर लम्बे समय से काम चल रहा है। कुछ तकनीकी सीमाओं और कभी कभार फंडिंग की कमी के चलते यह प्रोजेक्ट लटका हुआ है। सबसे पहले कल्पना की गई थी कि कावेरी इंजन को भारत के अपने लड़ाकू विमान LCA तेजस में लगाया जाएगा।

कावेरी इंजन के समय पर तैयार ना हो पाने और इसका प्रदर्शन आशानुरूप ना होने के चलते इसे LCA तेजस प्रोग्राम से अलग कर दिया गया था। इसके LCA तेजस में अमेरिकी कम्पनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) के बने F404 इंजन लगाए गए हैं। भारत अब बड़ी संख्या में तेजस विमान बना रहा है लेकिन अमेरिकी कम्पनी GE इंजन की डिलीवरी में देरी कर रही है। इसके चलते नए तेजस मार्क-1A विमानों का निर्माण धीमी गति से हो रहा है। इसका सीधा प्रभाव भारत की एयरफ़ोर्स पर पड़ रहा है, जो विमानों की कमी से जूझ रही है।

क्यों हुई कावेरी इंजन बनाने में देरी?

इसमें कोई संदेह नहीं है कि कावेरी इंजन एक महत्वपूर्ण परियोजना है और इसके बनने पर तकनीकी क्षमताओं में कई गुने की बढ़ोतरी होगी। हालाँकि, इसमें काफी देरी हुई है। इसके पीछे बड़ा कारण इंजन बनाने में होने वाले तकनीकी जटिलताएँ हैं।

इस इंजन को बनाने के लिए एयरोथर्मल डायनेमिक्स, मैटेरियल साइंस, एडवांस्ड मेटलर्जी और कंट्रोल सिस्टम जैसे मामलों में रिसर्च करनी पड़ी है। यह सभी तकनीकें बनाना काफी कठिन है। एक और समस्या भारत को इस इंजन के तकनीकी विकास में मदद ना मिलना है।

इसके अलावा इंजन की तकनीकों को बनाने के लिए विशेषज्ञों और इन्फ्रा की कमी भी है। कई बार भारत में विकसित तकनीकों के टेस्ट के लिए रूस पर निर्भर रहना पड़ा है। इसके अलावा विकसित होने के बाद भी इंजन केवल 70-75 kN (किलोन्यूटन) का थ्रस्ट ही पैदा कर पाया था।

यह शक्ति उस इंजन क्षमता से कम थी, जिसकी जरूरत भारतीय विमानों को थी। तेजस जैसे विमानों को 90-100 kN की आवश्यकता थी। ऐसे में अब इसे AMCA और UCAV जैसे प्रोजेक्ट के लिए विकसित किया जा रहा है।

इससे पहले फ्रांस की स्नेक्मा के साथ इस इंजन के विकास की बात चल रही थी। लेकिन 2013 में इस पर भी सहमति नहीं बनी क्योंकि यह कम्पनी पूरी तकनीकें साझा नहीं करना चाहती थी। भारत को यह स्वीकार नहीं था।

Fund Kaveri Engine में क्या माँग?

नेटीजेंस की माँग है कि जो भी तकनीकें अभी भारत हासिल नहीं कर पाया है, इसके लिए लगभग ₹16000-₹17000 करोड़ की फंडिंग की दी जाए। उनका कहना है कि अभी तक कावेरी प्रोग्राम को ₹2000 करोड़ की फंडिंग मिली है, जो कम है।

नेटीजेंस ने इसके लिए विदेशों का उदाहरण दिया है, जहाँ एक जेट इंजन के निर्माण पर ₹40 हजार करोड़ तक का खर्च किया गया है। उनका कहना है कि यदि इस काम के लिए फंडिंग बढ़ा दिए जाए तो यह प्रोग्राम जल्दी पूरा हो सकेगा और भारत इस संबंध में आत्मनिर्भर हो जाएगा। इसी लिए यह ट्रेंड चलाया जा रहा है।

DRDO बनाएगी 5th जेनेरेशन का विमान ‘AMCA’, निजी कम्पनियाँ भी हो सकेंगी शामिल: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी हरी झंडी, फाइटर जेट बनाने को मोदी सरकार ने दिए थे ₹15000 करोड़

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को बनाने वाले कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है। ये पाँचवी जेनेरेशन का फाइटर जेट होंगे। इसके जरिए स्वदेशी एयरोस्पेस तकनीक को बढ़ावा दिया जाएगा। रक्षा मंत्री कार्यालय के एक्स हैंडल पर इसकी जानकारी साझा की गई है।

एक्स पर साझा पोस्ट में लिखा गया है कि भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने और घरेलू एयरोस्पेस उद्योग को मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्री ने उन्नत मध्यम युद्धक विमान (AMCA) कार्यक्रम के एक्जीक्यूशन (निष्पादन) मॉडल को मंजूरी दे दी है।

रक्षा मंत्रालय ने एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) को इसे बनाने की मंजूरी दे दी है। ADA के साथ इस 5th जेनेरेशन फाइटर जेट को बनाने में निजी कंपनियाँ भी शामिल हो सकती हैं।

पोस्ट में यह भी लिखा गया कि स्वदेशी विशेषज्ञता, क्षमता और योग्यता का उपयोग करके AMCA प्रोटोटाइप विकसित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।इससे एयरोस्पेस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 में भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए 5th जेनेरेशन वाले AMCA फाइटर जेट के निर्माण के लिए 15,000 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी।

सीएनबीसी टीवी18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम की सफलता से भारत को विदेशी फाइटर जेट पर निर्भर नहीं रहना होगा, बल्कि एयरोस्पेस इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा और स्वदेशी कंपनियाँ भी नई और अत्याधुनिक तकनीक पर काम कर सकेंगी। इससे भविष्य में भारत अपने बनाए फाइटर जेट्स अन्य देशों को बेचने की क्षमता पैदा कर सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस मॉडल के निर्माण के लिए भारतीय कंपनियों के लिए जल्द ही एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया जा सकता है। इसके बाद इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने कि लिए भारतीय सरकारी और निजी कंपनियाँ बिडिंग (bidding) में भाग ले सकती हैं। निजी कंपनियाँ ज्वाइंट वेंचर या कंसोर्टियम की तरह भी सम्मिलित हो सकती हैं।

भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद वायुसेना में लड़ाकू विमानों की कमी पर रक्षा मंत्रालय काफी ध्यान दे रहा है। देश पर अमेरिका और रूस से 5th जेनेरेशन का लड़ाकू विमान खरीदने का भी काफी दबाव है। ऐसे में स्वदेशी लड़ाकू विमान बनाने वाले इस कार्यक्रम से काफी उम्मीदें लगाई जा रही हैं। इसके निर्माण के लिए चुनी गई कंपनियाँ भी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत कर सकती हैं।