Home Blog Page 3560

ममता सरकार में बेरोजगारी से कराहता बंगाल: मुर्दाघर में ‘डोम’ के 6 पदों के लिए 8,000 इंजीनियर, पोस्ट ग्रेजुएट ने किया आवेदन

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक महीने पहले नीलरतन सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ने मुर्दाघर में डोम (शवों को सँभालने) के लिए छह पदों पर भर्ती निकाली थी। आपको जानकर हैरानी होगी कि इन छह पदों के लिए लगभग 8,000 लोगों ने आवेदन किया, जिनमें इंजीनियर से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट और ग्रेजुएट भी शामिल हैं।

भर्ती की अधिसूचना के अनुसार, इस पद के लिए कम-से-कम आठवीं पास और उम्र सीमा 18-40 साल होना अनिवार्य है। वहीं, इस पद के लिए मासिक वेतन 15,000 रुपए है। इसके बावजूद 100 इंजीनियर, 500 पोस्ट ग्रेजुएट और 2,000 से अधिक ग्रेजुएट लोगों ने इस पद के लिए आवेदन किया।

राज्य सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि उच्च डिग्री वाले उम्मीदवारों का इन पदों पर आवेदन करना पश्चिम बंगाल में बेरोजगारी की दयनीय स्थिति को दर्शाता है। वहीं, अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि कुल आवेदकों में से 84 महिला उम्मीदवारों समेत 784 लोगों को 1 अगस्त 2021 को होने वाली लिखित परीक्षा के लिए बुलाया गया है।

अधिकारी ने कहा, “नौकरी के लिए शैक्षणिक योग्यता आठवीं कक्षा थी। इसका मतलब यह नहीं है कि उच्च शिक्षा वाले उम्मीदवार नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं। अगर पोस्ट ग्रेजुएट और इंजीनियर नौकरी के लिए आवेदन करते हैं तो हम कुछ नहीं कर सकते।”

नोटिस में अस्पताल के अधिकारियों द्वारा कहा गया है कि आवेदकों की आयु 18 से 40 के बीच होनी चाहिए और यदि उनके पास मुर्दाघर में काम करने का अनुभव है तो इसे उनका प्लस प्वॉइंट माना जाएगा। नोटिस में यह भी कहा गया है कि अगर उम्मीदवार डोम कम्युनिटी से हैं तो वह उनकी पहली पसंद होंगे।

गौरतलब है कि साल 2017 में मालदा अस्पताल के अधिकारियों ने ऐसे ही दो पदों के लिए आवेदन माँगा था। उस पद के लिए पोस्ट ग्रेजुएट के साथ-साथ पीएच.डी. डिग्रीधारी अभ्यार्थियों ने भी आवेदन किया था। इसी तरह साल 2019 में कूचबिहार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 8 पदों के लिए कई पोस्ट ग्रेजुएट लोगों ने आवेदन किया था।

बताया जा रहा है कि कोलकाता के सागर दत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में उच्च शिक्षित हजारों उम्मीदवारों के आवेदन मिलने के बाद अधिकारियों ने इस पद के लिए होने वाले वॉक-इन-इंटरव्यू को रद्द कर दिया था।

सोने में बदल सकता है मीराबाई चानू का सिल्वर मेडल: गोल्ड जीतने वाली चीनी खिलाड़ी को टोक्यो में डोप टेस्ट के लिए रोका

टोक्यो ओलंपिक में वेटलिफ्टिंग में भारत को सिल्वर मेडल दिलाने वाली मीराबाई चानू को गोल्ड मेडल मिल सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो यह संभव है क्योंकि गोल्ड मेडल हासिल करने वाली चीन खिलाड़ी जजिहू हो (Zhihui Hou) को टोक्यो में डोप टेस्ट के लिए रुकने के लिए कहा गया है। यदि वह इस डोप टेस्ट में फेल हो जाती हैं तो उनसे गोल्ड मेडल छीन लिया जाएगा।

49 किग्रा वर्ग के वेटलिफ्टिंग इवेंट में भारतीय वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने कुल 202 किग्रा का वजन उठाया था। चीन की हो ने इस इवेंट में कुल 210 किग्रा वजन उठाने में सफल रही थीं। तीसरे स्थान पर इंडोनेशिया की विंडी केंटिका रही थीं जिन्होंने 194 किग्रा वजन उठाया था।

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक गोल्ड मेडल जीतने वाली चीन की झिझी को टोक्यो में रुकने के लिए कहा गया है। सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया है कि झिझी का डोप टेस्ट कराया जाएगा। नियमानुसार यदि डोप टेस्ट में झिझी फेल हो जाती हैं तो उनसे गोल्ड मेडल छीन लिया जाएगा और यह दूसरे स्थान पर रहने वाली भारत की मीराबाई चानू को दिया जाएगा।

हालाँकि सिल्वर मेडल मिलने के बाद ही चानू ने कहा था कि उन्हें इस बात का गर्व है कि उन्होंने अपने देश के लिए मेडल जीता है। इसके लिए उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण और केंद्र सरकार की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम का धन्यवाद दिया था। मीराबाई चानू, कर्णम मल्लेश्वरी के बाद भारत की ओर से ओलंपिक में वेटलिफ्टिंग इवेंट में मेडल जीतने वाली दूसरी महिला हैं।

पहली बार ओलंपिक में स्केटबोर्डिंग: 13 साल की बच्चियों के गले में गोल्ड और सिल्वर, ब्रान्ज विजेता 16 बरस की

जापान की राजधानी टोक्यो में चल रहे ओलंपिक में सोमवार (26 जुलाई 2021) को एक अलग नजारा देखने को मिला, जब पोडियम पर मेडल लेने के लिए खड़ी हुईं 3 विजेता खिलाड़ियों में से 2 की उम्र मात्र 13 और एक की 16 साल थी। स्केटबोर्डिंग इवेंट में गोल्ड और ब्रॉन्ज (कांस्य) मेडल जापान की मोमिजी निशिया और नकायामा को मिला, जबकि ब्राजील की रेसा लील को सिल्वर मेडल मिला है।

स्केटबोर्ड उन चार खेलों में से एक है जिन्हें इस साल टोक्यो में आयोजित हुए ओलंपिक खेलों में शामिल किया गया है। अब ये नियमित तौर पर ओलंपिक में खेले जाएँगे। महिलाओं के स्केटबोर्डिंग इवेंट में मेजबान जापान का दबदबा रहा। हालाँकि इस खेल में जापान की परफॉर्मेंस से ज्यादा चर्चा मेडल जीतनी वाली खिलाड़ियों की उम्र की रही।

नए-नवेले स्केटबोर्डिंग इवेंट में गोल्ड मेडल जापान की मोमिजी निशिया ने जीता। निशिया की उम्र मात्र 13 साल 330 दिन है। जापान के शहर ओसाका की रहने वाली निशिया ने इसी साल रोम में हुई वर्ल्ड चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था, लेकिन उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि आज खेलों के इस महाकुंभ में उन्होंने आखिरकार गोल्ड मेडल जीत ही लिया। ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली फुना नकायामा भी जापान की रहने वाली हैं। 16 वर्षीय नकायामा के ब्रॉन्ज मेडल जीतने पर निशिया ने कहा कि उन्हें खुशी है कि उन्हीं के देश की खिलाड़ी ने उनके साथ मेडल जीता है।

ब्राजील की 13 वर्षीय रेसा लील ने 14.64 का स्कोर करके स्केटबोर्डिंग इवेंट में सिल्वर मेडल जीता। हालाँकि लील भले ही गोल्ड मेडल जीतने में सफल न हो सकी हों लेकिन उन्होंने एक रिकॉर्ड जरूर बना दिया। सिल्वर मेडल जीतने के बाद ही लील न केवल ब्राजील बल्कि ओलंपिक में मेडल जीतने वाली विश्व की सबसे युवा खिलाड़ी बन गई हैं। हालाँकि स्केटबोर्ड के इस इवेंट में फाइनल में पहुँचने वाले खिलाड़ियों में से आधे खिलाड़ियों की उम्र 16 साल से कम थी।

सावन के पहले सोमवार पर पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ने किया शिव स्त्रोत का पाठ, Video देख वामपंथियों ने कहा- मेहनत करो, भाजपा का टिकट मिलेगा

हिंदू पंचाग के अनुसार,  25 जुलाई से सावन का महीना शुरू हो चुका है और 26 जुलाई यानी आज इस माह का पहला सोमवार है। ऐसे में जहाँ पूरे विश्व के हिंदू सावन के पहले सोमवार का उत्सव मना रहे हैं। वहीं पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ने एक वीडियो शेयर की है जिसमें वह खुद गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखित रुद्राष्टकम (भगवान शंकरजी की स्तुति के लिए आठ श्लोक।)/शिव स्त्रोत का पाठ कर रहे हैं। 

वह पहले गाते हैं,

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं,
विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।

निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं,
चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥ १॥

इसके बाद अंग्रेजी में उसका मतलब बताते हुए कहते हैं, “मैं आपको नमस्कार करता हूँ, जो ईशान दिशा के ईश्वर, मोक्षस्वरुप, सर्व्यवापी ब्रह्म और वेदस्वरूप है। मैं शिव भगवान की महिमा के प्रकाश में, भौतिक गुणों से रहित, इच्छा रहित, सर्वव्यापी चेतना और स्वयं को ढकते हुए, उनकी पूजा करता हूँ।”

आगे पाठ करते हुए उन्होंने गाया,

निराकारमोंकारमूलं तुरीयं,
गिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् ।

करालं महाकाल कालं कृपालं,
गुणागार संसारपारं नतोऽहम् ॥ १॥

इसके बाद उन्होंने इसका मतलब समझाया। उन्होंने कहा, “निराकार, ओंकार के मूल, तुरीय अर्थात तीनों गुणों से अतीत, वाणी, ज्ञान और इन्द्रियों से परे, कैलाशपति, विकराल, महाकाल के काल, कृपालु, गुणों के धाम, संसार से परे, आप परमेश्वर को मैं नमस्कार करता हूँ।”

वेंकटेश प्रसाद ने की प्रशंसा

वेंकटेश के इस ट्वीट के बाद लोगों ने उनकी सराहना की। लोग यह देख कर हैरान हुए कि कैसे वेंकटेश आज भी सनातनी जड़ों से जुड़े हैं। कुछ लोगों ने उन्हें सावन के पहले सोमवार पर ऐसी वीडियो बनाने के लिए आभार जताया है और कुछ ने सावन से जुड़े महत्वपूर्ण जानकारी उन्हें दी। इसके अलावा कुछ वामपंथी यूजर्स ऐसे भी दिखे जिन्होंने उनके इस वीडियो पर कहा कि वह तब तक मेहनत करें जब तक कि उन्हें भाजपा से टिकट नहीं मिल जाती। वहीं कुछ लोगों ने ये बताना चाहा कि दक्षिण भारत में अभी सावन नहीं शुरू हुआ।

सावन महीने का महत्व

हिंदू कैलेंडर के मुताबिक सावन साल का पाँचवा महीना होता है। पुराणों में यह उल्लेख है कि समुद्र मंथन इसी माह में हुआ था। मंथन के दौरान जो समुद्र से चौदह दिव्य वस्तुएँ बाहर आईं उनमें एक हलाहल भी था। ब्राह्मंड को बचाने के लिए भगवान शिव ने उसका सेवन किया और उसे अपने कंठ से नीचे उतरने नहीं दिया। इसी विष के कारण महादेव का कंठ नीला पड़ा और उनका एक नाम नीलकंठ भी हुआ।

सावन का यह पूरा महीना शिवभक्ति को समर्पित है और चूँकि सोमवार का दिन शिव भगवान का माना जाता है, ऐसे में इस माह में इस दिन का विशेष महत्व हो जाता है। शिवभक्त इस माह प्रयास करते हैं कि वह सावन के सोमवार का व्रत रखें, जो नहीं रख पाते वो कम से कम पहले सोमवार का तो व्रत रखते ही हैं और मंदिर जाकर बेल पत्र, धतूरा, मिठाई और फल आदि चढ़ाते हैं।

वेंकटेश प्रसाद का हिंदू धर्म के प्रति प्रेम

बता दें कि ये पहली बार नहीं है कि प्रसाद ने हिंदू धर्म के प्रति अपनी आस्था खुल कर जाहिर की हो। इससे पहले उन्होंने नासा की इन्टर्न को ट्रोल किए जाने वालों को भी जवाब दिया था और अंबेडकर नाम का गलत इस्तेमाल करने पर ट्विटर अकॉउंट को लताड़ लगाई थी। उन्होंने कहा था, “उसकी (प्रतिमा रॉय) उपलब्धि पर खुश होने और उसके श्रद्धालु होने पर मखौल उड़ाया जा रहा है। दूसरी ओर डॉ अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर की अच्छी सेहत के लिए शिवलिंग पर दूध अर्पित किया जा रहा है। बाबा साहेब शर्मिंदा होंगे कि ये हैंडल उनका नाम इस्तेमाल कर रहा है।”

अफगानिस्तान के गजनी में तालिबान का कहर: मस्जिद के सामने 43 लोगों को गोलियों से भूना, 3000 ने शहर से किया पलायन

अफगानिस्तान में विदेशी बलों की वापसी के बाद से ही तालिबान का कहर जारी है। एक बार फिर तालिबान ने दुनिया को अपना क्रूर रूप दिखाया है। इस महीने की शुरुआत में अफगानिस्तान के मध्य प्रांत गजनी में मलिस्तान जिले पर हमले के बाद तालिबान ने 43 नागरिकों और सुरक्षा बल के सदस्यों की गोली मारकर हत्या कर दी। हालाँकि, तालिबान ने अपने ऊपर लगे इन आरोपों को सिरे से नकार दिया है।

टोलो न्यूज के अनुसार, गजनी की एक नागरिक समाज कार्यकर्ता मीना नादेरी ने रविवार (जुलाई 25, 2021) को काबुल में एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि तालिबान आतंकियों ने मलिस्तान जिले में प्रवेश करने के बाद युद्ध अपराध किए और उन नागरिकों को मार डाला, जो लड़ाई में शामिल नहीं थे। नादेरी ने मलिस्तान के निवासियों का एक संयुक्त बयान पढ़ा, जिसमें कहा गया कि उन्होंने लोगों के घरों पर हमला किया और उनकी संपत्ति लूटने के बाद मकानों को जला दिया गया।

तालिबान ने की आम नागरिकों की हत्या

टोलो न्यूज के अनुसार, हाजी नादिर ने कहा कि उनके बेटे रमजान अली (29) और इशाक अली (31) की 10 दिन पहले तालिबान ने हत्या कर दी। वे सरकारी कर्मचारी या देश के सुरक्षा बलों के सदस्य भी नहीं थे। नादिर ने कहा कि वे अपने परिवारों के साथ मलिस्तान छोड़ने की कोशिश कर रहे थे, क्योंकि इलाके में लड़ाई बढ़ गई थी। वहीं, मारे गए लोगों की बीवियों ने कहा कि तालिबान ने उनके बच्चों के सामने उनके पतियों की आँखों पर पट्टी बाँध दी। उन्हें इलाके की एक मस्जिद के पास ले गए और फिर उन्हें गोलियों से भून दिया।

पत्नियों ने बताया किस तरह तालिबान ने की हत्या

इशाक अली की पत्नी जमाल ने कहा, “हमलोग रास्ते में ही थे कि तालिबान ने हमें रोक लिया। दोनों को तालिबान ले गया और उन्हें मार दिया।” रमजान की पत्नी जुलेखा ने कहा, “उन्हें बाहर ले जाया गया और उनके घर से थोड़ी दूर ले जाकर मार दिया गया।” टोलो न्यूज ने बताया कि मारे गए लोगों के पाँच बच्चे हैं, जो फिलहाल काबुल में हैं और उनमें से सबसे बड़ा सात साल का है। अफगानिस्तान से लगातार इस तरह की घटनाएँ सामने आ रही हैं।

3,000 लोगों ने छोड़ा मलिस्तान

जो लोग मलिस्तान में लड़ाई के बाद विस्थापित हुए हैं, उन्होंने ये भी कहा है कि तालिबान ने लोगों से भोजन इकट्ठा किया और एक घोषणा जारी कर कहा कि वे इस्लामी अमीरात नियमों के आधार पर लोगों, विशेषकर महिलाओं के साथ व्यवहार करेंगे। टोलो न्यूज ने आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि तालिबान के हमले के बाद पिछले 10 दिनों में कम से कम 3,000 लोग मलिस्तान से विस्थापित हुए हैं।

‘भीमा-कोरेगाँव केस से खुद को अलग करें जस्टिस शिंदे, स्टेन स्वामी की तारीफों के बाँधे थे पुल’: CJI रमना को पत्र

बॉम्बे हाईकोर्ट के जज जस्टिस एसएस शिंदे ने 19 जुलाई, 2021 को आतंकवाद के आरोपित स्टेन स्वामी की तारीफों के पुल बाँधे। बता दें कि स्टेन स्वामी नक्सली था। साथ ही वो भीमा-कोरेगाँव मामले में आरोपित भी था। अब एक समूह ने देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र लिख कर कहा है कि जस्टिस शिंदे को भीमा-कोरेगाँव केस से अलग होने को कहा जाए। ‘लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी (LRO)’ नामक संस्था ने ये पत्र लिखा है।

CJI एनवी रमना को लिखे गए पत्र में LRO ने कहा है कि वो एक ऐसे मुद्दे की तरफ उनका ध्यान दिलाना चाहता है, जो काफी गंभीर है। साथ ही जस्टिस शिंदे के बयान का जिक्र किया गया। उन्होंने कहा था, “सामान्य तौर पर हमारे पास वक्त नहीं होता लेकिन मैंने अंतिम संस्कार (स्वामी का) देखा। यह बहुत सम्मानजनक था। वह काफी शानदार व्यक्ति थे। उन्होंने समाज के लिए काम किया था। उनके कार्य के प्रति बहुत सम्मान है। कानूनन, उनके खिलाफ जो भी है वह अलग मामला है।”

साथ ही जस्टिस एसएस शिंदे ने स्टेन स्वामी के ‘मानवीय कार्यों’ का जिक्र करते हुए उनकी प्रशंसा की थी। साथ ही कहा था कि मेडिकल बेल एप्लिकेशन पर विचार करने के दौरान भी ये सब देखा जाता है। साथ ही ये भी कहा था कि स्टेन स्वामी के खिलाफ जो कुछ भी था, वो एक अलग मुद्दा है। निधन के बाद स्टेन स्वामी की प्रशंसा करते हुए जस्टिस शिंदे ने उसे प्रतिष्ठित और दयालु करार दिया था।

LRO ने अपने पत्र में कहा कि स्टेन स्वामी को लेकर इस तरह का बयान देकर जस्टिस एसएस शिंदे ने ‘न्यायिक उपयुक्तता’ का उल्लंघन किया है। साथ ही याद दिलाया है कि ये सब उन्होंने इसके बावजूद कहा, जब वो स्टेन स्वामी की जमानत याचिका से लेकर भीमा-कोरेगाँव से जुड़े अन्य मामलों की भी सुनवाई कर रहे हैं। LRO ने कहा है कि एक बड़े आपराधिक मामले के आरोपित के ‘कार्यों’ की तारीफ़ करने वाले जज की निष्पक्षता और न्याय पर सवाल खड़े होते हैं।

LRO ने कहा कि भले ही जस्टिस एसएस शिंदे ने अपना बयान वापस ले लिया हो, लेकिन उन्हें न्याय व्यवस्था के हित में भीमा-कोरेगाँव से जुड़े सभी मामलों से खुद को अलग कर लेना चाहिए। LRO ने सोशल मीडिया पर इस पत्र को साझा करते हुए कहा कि स्टेन स्वामी के लिए ‘बड़ा सम्मान’ रखने वाले जस्टिस शिंदे को भीमा-कोरेगाँव से जुड़े मामलों की सुनवाई से हट जाना चाहिए। 84 वर्षीय स्टेन स्वामी को NIA ने गिरफ्तार किया था और वो जेल में बंद था।

बधाई हो! जो DTC के इति​हास में कभी न हुआ, वह केजरीवाल सरकार ने कर दिखाया: 99% बसों की उम्र पूरी

दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (DTC) के द्वारा चलाई जा रही 3,760 बसों को ‘ओवरएज‘ घोषित कर दिया गया है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि ये अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार 1971 में शुरू हुई राज्य परिवहन सेवा के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 99% लो फ्लोर सीएनजी बसें अपनी तकनीकी परिचालन सीमा (टेक्निकल ऑपरेशनल लिमिट) को पार कर चुकी हैं। DTC, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सरकार के अधिकार क्षेत्र में है, जहाँ पिछले कई सालों से अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि ऐसी बसों को ‘ओवरएज’ घोषित कर दिया जाता है जब उनका परिचालन 8 साल से अधिक हो चुका होता है। जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्युअल मिशन (JNNURM) के कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक लो फ्लोर सीएनजी बसें अधिकतम 12 वर्षों तक अथवा 750,000 किमी तक परिचालन में रह सकती हैं। इन बसों की खराब हालत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इनमें से कोई भी बस 6-8 साल पुरानी नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार मात्र 32 बसें 8-10 साल पुरानी हैं। उनके अलावा 3072 बसें 10-12 साल पुरानी और 656 ऐसी बसें हैं जो परिचालन सीमा (12 साल) को भी पार कर चुकी हैं। हालाँकि वर्तमान में 3,760 बसों के मुकाबले DTC को 5,500 बसों की जरूरत है और AAP सरकार तो दिल्ली हाईकोर्ट में यह हलफनामा भी दाखिल कर चुकी है कि दिल्ली को लगभग 11,000 बसों की आवश्यकता है। लेकिन अब इन ओवरएज बसों में ब्रेकडाउन की समस्या भी उत्पन्न हो रही है और साथ ही इनकी प्रतिदिन के फेरों की संख्या में भी कमी देखने को मिल रही है।

दिल्ली में संचालित निजी बसों को भी यदि जोड़ दिया जाए तो भी बसों की संख्या 6,750 ही रह जाती है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट की माने तो पिछली बार 2008 में DTC नई बसों की खरीद करने करने में सफल रहा था। इसके बाद 2013 से 2019 के बीच बसों की खरीद का टेंडर जारी किया तो गया, लेकिन पूरा नहीं हो सका। वर्तमान में DTC की ऐसी हालत देखते हुए नई बसों की खरीद के लिए बड़ी संख्या में टेंडर जारी करना मुश्किल प्रतीत होता है। हालाँकि ऐसे समय में जब DTC की बसों को ओवरएज घोषित कर दिया गया है तो उन्हें कायदे से संचालन से बाहर कर देना चाहिए।

एक तरह से देखा जाए तो DTC द्वारा ओवरएज बसों का संचालन लोगों की जान के साथ खिलवाड़ है। DTC के द्वारा पिछले कुछ सालों में स्क्रैप की गई बसों की संख्या भी न के बराबर रही है। 2020-21 में जहाँ मात्र 2 बसों को स्क्रैप किया गया वहीं वर्तमान वित्तीय वर्ष में स्क्रैप की गई बसों की संख्या शून्य रही है। DTC के ही मैनेजिंग डायरेक्टर विजय भादुड़ी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया है कि अब नई बसों की खरीद करना आवश्यक हो गया है, क्योंकि वर्तमान में संचालित बसों का मेंटेनेंस खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। दिल्ली के ट्रांसपोर्ट मंत्री कैलाश गहलोत ने भी DTC बसों की जर्जर हालत को स्वीकार करते हुए कहा है कि अरविन्द केजरीवाल को भी इसकी चिंता है और उनकी सरकार अगले 7 महीनों में 1,300 बसों खरीद करने जा रही है।

बीती 10 जुलाई 2021 को दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल द्वारा गठित 3 सदस्यीय समिति ने DTC को एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (AMC) को खत्म करने का आदेश दिया था। यह आदेश प्रक्रियात्मक खामियों के चलते दिया गया था। उपराज्यपाल द्वारा 16 जून को बसों की खरीद और AMC में हुए कथित घोटाले की जाँच के लिए समिति का गठन किया गया था। समिति ने बसों की खरीद और वर्तमान बसों के मेंटेनेंस के लिए अलग-अलग जारी किए गए टेंडर को लेकर असंतोष प्रकट किया था। समिति ने पाया था कि ये टेंडर प्रवृत्ति में प्रतिरोधात्मक थे और साथ ही इनकी दरें भी काफी ऊँची रखी गई थीं।

येदियुरप्पा ने किया कर्नाटक के CM पद से इस्तीफे का ऐलान, BJP के लिए खोला था दक्षिण का दरवाजा

कर्नाटक में दो साल सरकार चलाने के बाद मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने एक कार्यक्रम में ऐलान किया है कि वह अपना सीएम का पद छोड़ने वाले हैं। वह आज (जुलाई 26, 2021) लंच के बाद इस संबंध में राज्यपाल से मुलाकात करेंगे, यह जानकारी भी उन्होंने खुद दी है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, उन्होंने कर्नाटक में सरकार के 2 साल पूरे होने पर आयोजित एक कार्यक्रम में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “मैंने इस्तीफा देने का फैसला किया है। मैं लंच के बाद राज्यपाल से मुलाकात करूँगा।”

अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि उन्हें कर्नाटक के लोगों के लिए काफी काम करना है। भावुक मन से हुए येदियुरप्पा ने कहा कि वह हमेशा अग्निपरीक्षा से गुजरे हैं।

कार्यक्रम में वह बोले, “मैं हमेशा अग्नि परीक्षा से गुज़रा हूँ। दो महीने (2019 में) मुझे अपना मंत्रिमंडल बनाने को नहीं मिला। बाढ़ आई और मैं पागलों की तरह घूमता रहा। बाद में मंत्रिमंडल का गठन किया गया।”

बता दें कि साल 2019 में करीब 1 माह की हलचल के बाद बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा ने 26 जुलाई 2019 को सीएम पद की शपथ ली थी। शपथ के साथ ही उन्होंने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली थी। लेकिन हाल में 16 जुलाई को प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद उन्होंने 17 जुलाई भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। इसके बाद गृह मंत्री अमित शाह ने भी उन्हें राज्य में कड़ी मेहनत करने की सलाह दी थी। उस दौरान सीएम येदियुरप्पा ने कहा था कि अगर पीएम मोदी कहेंगे तो वो इस्तीफा देने को भी तैयार हैं।

मालूम हो कि 26 जुलाई को कर्नाटक में भाजपा सरकार के दो साल पूरे होने से पहले ही इस इस्तीफे के कयास लग चुके थे। हालाँकि, जब पीएम मोदी से मिलने के बाद उन्होंने कहा कि वह सभी निर्देश मानने को तैयार हैं और आगामी चुनावों में कड़ी मेहनत करेंगे तो इन कयासों पर कुछ विराम लगा। लेकिन आज सीएम ने कार्यक्रम में खुद अपने इस्तीफा देने की बात कह दी। इससे पहले वह कह चुके हैं कि वह भाजपा की विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध हैं।

शाहजहाँ को 75% हिन्दू बताने वाले जावेद अख्तर, वाराणसी में 76 मंदिर किसने गिरवाए थे? ओरछा का मंदिर किसने तोड़ा?

वो पहले फिल्मों की कहानियाँ व पटकथा लिखते थे, जिसमें ब्राह्मणों को मजाकिया ढंग से दिखाया जाता था और मौलवियों के लिए इज्जत बढ़ाने वाले किरदार गढ़े जाते थे। फिर वो गीतकार बन बैठे। अकबर की तारीफ़ में ‘अजीमो-शाह-शहंशाह’ जैसे गाने लिखे। अब वो ट्विटर ट्रोल हो गए हैं। नाम है – जावेद अख्तर। खुद को नास्तिक कहते हैं, नास्तिकों वाला अवॉर्ड लेते हैं। लेकिन, इस्लामी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए शाहजहाँ और बराक ओबामा की तुलना करते हैं।

जावेद अख्तर ने एक ट्वीट किया। इसमें उन्होंने लिखा, “अमेरिकी राष्ट्रपति रहे बराक ओबामा केन्या से ताल्लुक रखते थे। उनकी चाचियाँ अब भी केन्या में रहती हैं। लेकिन, चूँकि ओबामा का जन्म अमेरिका में हुआ था, इसीलिए उन्हें वहाँ का राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का अधिकार मिला। वहीं शाहजहाँ भारत में मुगलों की पाँचवीं पीढ़ी का था। उसकी माँ और दादी राजपूत समुदाय से थीं। लेकिन, वो शाहजहाँ को विदेशी कहते हैं।”

सबसे पहले बात बराक ओबामा के बारे में करते हैं, जो अमेरिका के पहले ‘अश्वेत’ राष्ट्रपति थे। हाँ, उनके पिता केन्या से थे। उनके पिता बराक ओबामा सीनियर केन्या के एक सफल अर्थशास्त्री थे। उनकी माँ एन्न डनहम अमेरिका की एक मानव-विज्ञानी (Anthologist) थीं। 2008 में राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार के दौरान बराक ओबामा ने कहा था कि वो एक केन्याई ‘अश्वेत पिता’ और अमेरिकी ‘श्वेत माँ’ की संतान हैं।

क्या शाहजहाँ ने कहीं भी खुद को ‘हिन्दू’ बताया है या खुद के हिन्दू होने पर गर्व किया है? नहीं। जावेद अख्तर ने अपनी ट्वीट में लिखा है कि माँ और दादी के हिन्दू होने के कारण शाहजहाँ का खून 75% हिन्दू था। अगर शाहजहाँ 75% हिन्दू था तो फिर जावेद अख्तर उसे हिन्दू ही क्यों नहीं कहते? क्या 25% मुस्लिम भी मुस्लिम होता है? बराक ओबामा की तरह कभी शाहजहाँ ने कहा या लिखा है कि उसे अपनी माँ के हिन्दू होने पर गर्व है?

सबसे पहले तो बराक ओबामा को शरणार्थी, घुसपैठिया और आक्रांता के बीच का अंतर समझना चाहिए। हम उनकी मदद कर देते हैं। जैसे, पाकिस्तान से प्रताड़ित हिन्दू यहाँ अपनी जान बचाने के लिए आते हैं तो वो शरणार्थी हुए, क्योंकि अधिकारियों को इसकी जानकारी होती है और वो चोरी-छिपे नहीं आते। म्यांमार और बांग्लादेश से जो रोहिंग्या मुस्लिम यहाँ आकर फर्जी आईकार्ड लेकर बस जाते हैं और अपराध करते हैं, वो घुपैठिए हैं।

अब आ जाइए आक्रांता पर। एक आक्रांता वही है, जो किसी दूसरे प्रदेश में जाकर वहाँ का सत्ताधीश बन बैठता है। जो किसी दूसरे प्रदेश पर कब्जे के इरादे से हमला करता है। हिंसा करता है। भारत के इस्लामी आक्रांताओं का इतिहास देखें तो वो धर्मांतरण करवाते थे, तलवार के दम पर। हिन्दुओं का नरसंहार करते थे। मंदिरों को ध्वस्त करते थे। देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को विखंडित करते थे।

क्या शाहजहाँ की तुलना बराक ओबामा से हो सकती है? पहले जानते हैं कि शाहजहाँ ने क्या किया था। ओरछा एक जगह है। ये मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में स्थित है। एकमात्र ऐसा मंदिर है यहाँ, जहाँ श्रीराम की पूजा राजा के रूप में होती है। सन् 1627 में महाराजा बीर सिंह देव के निधन के बाद उनके बेटे जुझार सिंह गद्दी पर बैठे। उधर शाहजहाँ गद्दी पर बैठे। नए मुग़ल बादशाह पर उन्हें संदेह था, इसीलिए अपने पिता के विपरीत मुगलों से दूरी बना ली।

शाहजहाँ के शासन काल का ये शुरुआती दौर था, ऐसे में उसने इस विद्रोह से सख्ती से निपटने का फैसला करते हुए फ़ौज की तीन बड़ी टुकड़ियों को ओरछा भेजा। खुद आगरा से ग्वालियर में बैठ कर वो युद्ध का निरीक्षण करने लगा। ओरछा के सिंहासन पर बिठाने के लिए एक दूसरा दावेदार ले आया। जुझार सिंह को बातचीत की मेज पर आना पड़ा। कुछ दिनों बाद फिर विद्रोह हुआ। अबकी शाहजहाँ ने बेटे औरंगजेब को वहाँ स्थिति सुलझाने के लिए भेजा।

जुझार सिंह को जंगलों में शरण लेनी पड़ी, जहाँ गोंड एवं भील विरोधियों ने उसे मार डाला। मुग़ल सैनिकों ने जुझार सिंह का सिर काट कर और उसके खजाने से 1 करोड़ रुपए शाहजहाँ को उपहार के रूप में भेजे। इसके बाद उसने इसका ‘दंड’ हिन्दुओं को देने का निश्चय किया। ओरछा में राजा राम के प्रमुख मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया। लोगों पर अत्याचार हुए। जुझार सिंह के पोते को जबरन इस्लाम कबूलवाने को मजबूर किया गया।

अपनी पुस्तक ‘A Short History of the Mughal Empire‘ में माइकल फिशर (Michael Fisher) ने इस घटना का जिक्र किया है। ओरछा के चतुर्भुज मंदिर का खजाना भी लूट लिया गया। इतना ही नहीं, ‘बादशाहनामा’ में इसका जिक्र है कि शाहजहाँ ने काशी में निर्माणाधीन या बन कर तैयार हो चुके 76 मंदिरों को ध्वस्त करवा दिया था। उसके राज में मंदिर के निर्माण पर पूरी तरह पाबंदी लगी हुई थी।

अब जावेद अख्तर जवाब दें कि क्या कभी बराक ओबामा ने अमेरिका में किसी चर्च को ध्वस्त किया? क्या बराक ओबामा ने कभी ईसाई धर्म को भला-बुरा कहा? इन सबका जवाब है – नहीं। बराक ओबामा तो खुद ही एक प्रैक्टिसिंग ईसाई हैं। वो कह चुके हैं कि जीसस के उपदेशों के कारण उनका झुकाव ईसाई धर्म की तरफ हुआ। उनका पालन-पोषण ईसाई माहौल में हुआ। ओबामा ही नहीं, अमेरिका में आज तक जितने भी राष्ट्रपति हुए हैं, सब ईसाई ही रहे हैं।

क्या किसी देश में जन्म लेने भर से किसी आक्रांता का वंशज वहाँ का हो जाता है, भले ही वो वहाँ की कला, संस्कृति, परंपराओं और धर्म को नष्ट करने में लगा हुआ हो? जिसे हिन्दू राजाओं का सिर कलम करवाने में मजा आता हो? बराक ओबामा से शाहजहाँ की तुलना बस एक छलावा है। वैसे भी शाहजहाँ की छवि इन मुगलपरस्तों ने ‘एक रोमांटिक राजा’ की बनाई हुई है, सिर्फ इसीलिए क्योंकि मुमताज से उसने शादी की थी।

बराक ओबामा को अमेरिका की संस्कृति से प्रेम है, लेकिन शाहजहाँ को मंदिरों से नफरत थी। बराक ओबामा ईसाई हैं और अमेरिका में 70% ईसाई रहते हैं। दुनिया में सबसे ज्यादा ईसाई अमेरिका में ही रहते हैं। बराक ओबामा को ‘यूनाइटेड चर्च ऑफ क्राइस्ट (UCC)’ में बाप्टाइज किया गया था, जबकि शाहजहाँ मंदिरों को ध्वस्त करता था। जावेद अख्तर ने एक इस्लामी कट्टरपंथी आक्रांता से एक राष्ट्राध्यक्ष से तुलना कर दी, जो जनता का वोट पाकर राष्ट्रपति बना था।

शाहजहाँ के हरम में 8000 रखैलें थीं जो उसे उसके अब्बू जहाँगीर से विरासत में मिली थी। उसने अब्बू की ‘संपत्ति’ को और बढ़ाया। उसने हरम की महिलाओं की व्यापक छँटनी की तथा बुजुर्ग महिलाओं को भगा कर अन्य हिन्दू परिवारों से जबरन महिलाएँ लाकर हरम को बढ़ाता ही रहा। कहते हैं कि उन्हीं भगाई गई महिलाओं से दिल्ली का रेडलाइट एरिया जीबी रोड गुलजार हुआ था और वहाँ इस धंधे की शुरूआत हुई थी। वो हिन्दू महिलाओं का मीनाबाजार लगाया करता था।

12 साल के भाई के सामने 15 साल की लड़की से गैंगरेप: घर में घुस गए थे राहिब, साहिब, आरिफ और मारूफ

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में 15 साल की नाबालिग लड़की से उसके 12 साल के छोटे भाई के सामने ही 4 दरिंदों ने गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया। आरोपितों ने गन प्वाइंट पर लेकर लड़की को हवस का शिकार बनाया औऱ उसका वीडियो भी बना लिया। फिर जान से मारने की धमकी दे फरार हो गए।

मामला फुगाना थाना क्षेत्र के जोगियाखेड़ा गाँव का है। जहाँ पीड़िता के माँ-बाप रिश्तेदारी में गए थे। इसी का फायदा उठाकर एक आरोपित छत के रास्ते घर के अंदर घुसा औऱ सो रही पीड़िता और उसके भाई को गन प्वाइंट पर ले लिया। इसके बाद उसने घर के मुख्य दरवाजे को खुलवाया।

पीड़िता ने जैसे ही दरवाजा खोला तो बाहर पहले से मौजूद तीन अन्य आरोपित गन के साथ अंदर आ गए। इसके बाद चारों ने छोटे भाई के सामने ही उससे गैंगरेप किया। उसका वीडियो भी बना लिया औऱ किसी को बताने पर उसे वायरल करने की धमकी भी दी। चारों आरोपितों की पहचान राहिब, साहिब, आरिफ औऱ मारूफ के तौर पर हुई है। सभी पीड़िता के गाँव के रहने वाले हैं।

जब आरोपित चले गए और पीड़िता के माँ-बाप घर लौटे तो उसने उन्हें इसके बारे में बताया। इसके बाद पीड़िता के पिता ने फुगाना थाने में एफआईआर दर्ज कराई। रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता के पिता ने आऱोपित पक्ष की ओर से बार-बार जान से मारने की धमकी दिए जाने का आरोप लगाया है। पीड़िता के पिता ने कहा, “हम दोनों औरंगाबाद गए थे। राहिब की छत मेरे घर की छत से लगी हुई है। वह मेरे घर में कूद आया औऱ पहले मेरे लड़के को तमंचा सटाकर गोली मारने की धमकी दी। इसके बाद दरवाजा खुलवाया औऱ तीन लोग अंदर आए सभी ने मेरी लड़की के साथ दुष्कर्म किया। सभी मेरे ही गाँव के हैं।”

मुजफ्फरनगर देहात के अपर पुलिस अधीक्षक ने कहा, “अरमान नाम के एक व्यक्ति ने सूचना दी थी कि पीड़िता के साथ गाँव के 4 लोगों ने दुष्कर्म किया है। सभी एक-दूसरे को अच्छी तरह से जानते थे। तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पीड़िता का मेडिकल कराया गया है औऱ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए जिला स्तर पर 5 टीमों का गठन किया गया है औऱ गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। मामले में ठोस कार्रवाई की जाएगी।”