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देश लौटीं मीराबाई चानू, भारत माता की जय-वन्दे मातरम् से गूँजा एयरपोर्ट: क्या पीछे-पीछे आएगा गोल्ड?

जापान की राजधानी टोक्यो में चल रहे ओलंपिक 2021 में देश के लिए सिल्वर मेडल जीतने के बाद वेटलिफ्टर मीराबाई चानू स्वदेश वापस आ गई हैं। वह दिल्ली एयर पोर्ट पर लैंड हुईं, जहाँ एयरपोर्ट स्टाफ समेत लोगों ने तालियों से उनका स्वागत किया गया। इस दौरान दिल्ली एयरपोर्ट पर उनके स्वागत में ‘भारत माता की जय’ औऱ ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाए गए। इसके अलावा ‘फूट रही चिंगारी है य़ह भारत की नारी है’ जैसे नारे भी लगाए गए।

मीराबाई चानू ने 24 जुलाई 2021 को महिला वेटलिफ्टिंग इवेंट के 49 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को सिल्वर मेडल दिलाया था। पहले उन्होंने क्लीन एंड जर्क में 115 किलोग्राम का भार सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद स्नैच में 87 किग्रा भार उठाकर उन्होंने भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता था। इस दौरान चानू ने कुल 202 किलो का वजन उठाया था। उनकी इस सफलता पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी थी।

इस बीच मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, टोक्यो से खबरें सामने आ रही हैं कि ओलंपिक में वेटलिफ्टिंग में भारत को सिल्वर मेडल दिलाने वाली मीराबाई चानू को गोल्ड मेडल मिल सकता है। दरअसल, वेटलिफ्टिंग में गोल्ड मेडल हासिल करने वाली चीनी खिलाड़ी जजिहू हो (Zhihui Hou) को टोक्यो में डोप टेस्ट के लिए रुकने के लिए कहा गया है। यदि वह इस डोप टेस्ट में फेल हो जाती हैं तो उनसे गोल्ड मेडल छीन लिया जाएगा। इसके बाद दूसरे स्थान पर रहीं चानू को ये दिया जा सकता है।

हालाँकि सिल्वर मेडल मिलने के बाद ही इसको लेकर वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने कहा था कि उन्हें केवल इस बात का गर्व है कि उन्होंने अपने देश के लिए मेडल जीता है। इसके लिए उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण और केंद्र सरकार की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम का धन्यवाद दिया था। मीराबाई चानू, कर्णम मल्लेश्वरी के बाद भारत की ओर से ओलंपिक में वेटलिफ्टिंग इवेंट में मेडल जीतने वाली दूसरी महिला हैं। गौरतलब है कि टोक्यो ओलंपिक 2021 में देश के लिए मेडल जीतने वाली मीराबाई चानू पहली महिला वेटलिफ्टर हैं।

‘हम आपको नहीं सुनेंगे…’: बॉम्बे हाईकोर्ट से जावेद अख्तर को झटका, कंगना रनौत से जुड़े मामले में आवेदन पर हस्तक्षेप से इनकार

बॉलीवुड गीतकार जावेद अख्तर को झटका देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (26 जुलाई 2021) को उनकी हस्तक्षेप याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इसमें अख्तर ने आरोप लगाया था बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने जानबूझकर अपने पासपोर्ट के नवीनीकरण की अनुरोध वाली याचिका में अदालत से कुछ तथ्य छिपाए हैं।

अख्तर की ओर से पेश वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि कंगना रनौत का यह बयान कि उनके खिलाफ किसी भी अदालत में कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है, झूठा और भ्रामक है। ग्रोवर ने कहा कि रनौत ने अपना पासपोर्ट हासिल करने के लिए धोखाधड़ी की है। इसलिए अपनी बात रखने के लिए अख्तर ने हस्तक्षेप याचिका दायर की थी।

हालाँकि, जस्टिस एस एस शिंदे और जस्टिस एन जे जमादार की पीठ ने अख्तर को लताड़ लगाते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया है। जस्टिस शिंदे ने टिप्पणी की, “हम आपकी बात नहीं सुनेंगे। आपको अदालत को संबोधित करने का कोई अधिकार नहीं है। अगर हम इस तरह के हस्तक्षेप की अनुमति देते हैं तो सैकड़ों आवेदन दिए जाएँगे।”

अदालत ने सुझाव दिया कि शिकायतकर्ता सरकारी वकील के कार्यालय में जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। अदालत ने कहा, “अगर इस तरह के आवेदन हैं तो इसके लिए एक वकील है, एक अभियोजक है, उनसे संपर्क करें। हम इस तरह काम नहीं कर सकते हैं।”

अख्तर की हस्तक्षेप याचिका वकील जय भारद्वाज के माध्यम से दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि अदालत द्वारा रखी गई क्वेरी में अनिवार्य रूप से रनौत के वकील रिजवान सिद्दीकी को यह पुष्टि करने की आवश्यकता है कि एक्ट्रेस के खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है।

अख्तर के वकील ग्रोवर ने बहस जारी रखी, न्यायमूर्ति जमादार ने उन्हें रुकने और अदालत को सुनने के लिए कहा। जस्टिस शिंदे ने कहा, “अगर हम इस तरह के आवेदनों को अनुमति देते हैं तो अदालतों में ऐसे मामलों की बाढ़ आ जाएगी। इस मामले में सरकारी वकील प्रतिवादी हैं। अगर आप कुछ कहना चाहते हैं तो उनके माध्यम से कहें। रिजवान मर्चेंट जैसे सक्षम वकील हैं। आप उनके माध्यम से कह सकते हैं।”

वहीं, अख्तर ने दावा किया है कि हस्तक्षेप आवेदन की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में कंगना रनौत के वकील द्वारा दिए गए सभी बयान झूठे थे। रनौत ने अदालत को बताया था कि उनके खिलाफ केवल दो प्राथमिकी दर्ज हैं और उन्होंने एक अन्य लंबित मानहानि मामले का उल्लेख नहीं किया, जो अख्तर ने रनौत के खिलाफ दायर किया था।

‘आपने पोर्न देखा है, ₹3000 जुर्माना भरें नहीं तो गिरफ़्तारी’: फर्जी नोटिस से 1000 को लगाया चूना, ₹40 लाख की कमाई

क्या फोन में पोर्न देखने पर पुलिस तुरंत नोटिस भेज दे रही है? दरअसल, सोशल मीडिया पर एक नोटिस वायरल हो रहा है, जिसे पुलिस का बताया जा रहा है। लेकिन, सच्चाई कुछ और ही है। दरअसल, जब कुछ लोगों ने इंटरनेट पर पोर्न सर्च किया तो उनके ब्राउज़र में एक पॉपअप की नोटिस के साथ एक कंटेंट खुल जा रहा है, जिसमें लिखा है – “आप पोर्न देख रहे हैं, ये एक अपराध है। 3000 रुपए जुर्माना न भरने पर आपका कम्प्यूटर ब्लॉक कर दिया जाएगा।”

यहाँ तक कि इस फेक नोटिस में एक QR कोड तक बना हुआ है, जिसे स्कैन कर के ऑनलाइन रुपए माँगे जा रहे हैं। इसमें लिखा है, “आप भारत के कानून के तहत प्रतिबंधित पोर्नोग्राफी सामग्री (पीडोफिलिया, हिंसा और समलैंगिकता का प्रचार) साइटों पर बार-बार आने के लिए ब्लॉक किए गए हैं। आपके निर्णय नंबर के अनुसार, 3000 रुपए का जुर्माना भरना होगा। किसी भी सुविधानक माध्यम से आप जुर्माना भर सकते हैं।”

व्हाट्सएप्प से लेकर गूगल पे और पेटीएम व फोनपे तक से रुपए लेने के लिए वहाँ एक क्यूआर कोड भी दिया गया है। साथ ही झाँसा दिया गया है कि जुर्माना चुका देने पर कम्प्यूटर स्वचालित रूप से अनब्लॉक कर दिया जाएगा। जुर्माना न भरने पर कम्प्यूटर का पूरा डेटा डिलीट करने और तुरंत निवास स्थान पर पुलिस भेज कर गिरफ़्तारी की भी धमकी है। साथ ही जुर्माना चुकाने की अवधि 6 घंटे बताई गई है।

इंटरनेट पर पोर्न सर्च करने पर मिल रही ये फेक नोटिस (फोटो साभार: आजतक)

वहीं अब इस फेक ‘पुलिस के नोटिस’ पर कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। यही लोग पुलिस का फर्जी नोटिस देते थे। गिरफ्तार किए गए लोगों में दो चेन्नई के रहने वाले हैं। सोशल मीडिया से इसकी जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए केस दर्ज किया था। जिस स्थानीय मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया गया है, उसका भाई विदेश से ही इस फर्जी नोटिस को ऑपरेट कर रहा है और तकनीकी चीजों को देख रहा है।

पुलिस को कई ऐसे एकाउंट्स का पता चला है, जिसमें इस फर्जी नोटिस के जरिए लाखों रुपए वसूले गए हैं। पुलिस को अब तक 30 से 40 लाख के लेनदेन का पता चला है। लगभग 1000 से ज्यादा लोगो के साथ धोखाधड़ी की गई है। हालाँकि, दिलचस्प ये है कि पुलिस को अभी तक किसी की भी शिकायत नहीं प्राप्त हुई है। इस मामले में चेन्नई से गैब्रियल जेम्स व राम सेलवन और धिनुषनाथ को त्रिची से दबोचा है।

धनुषनाथ कम्बोडिया में रहता था और वहीं से तकनीकी सपोर्ट दे रहा था। पुलिस ने ऐसे लोगों को सामने आने को कहा है, जिन्हें ऐसी नोटिस मिली और जिनके साथ धोखाधड़ी हुई। बताते चलें कि भारत में पर्सनल स्पेस पर पोर्नोग्राफी देखना प्रतिबंधित नहीं है लेकिन पोर्न फिल्म बनाना, उसे सार्वजनिक तौर पर दिखाना, वितरित करना और प्रकाशित करना अपराध माना गया है। यदि पोर्न का कंटेन्ट रेप या शारीरिक शोषण या नाबालिग से जुड़ा है तो उस पर कार्रवाई की जाती है।

फिजियोथेरेपिस्ट बीवी को जबरदस्ती पोर्न स्टार बना रहा था शौहर, शिकायत की तो ससुराल वालों ने तीन तलाक देने को कहा: रिपोर्ट

मुंबई की एक फिजियोथेरेपिस्ट ने अपने शौहर पर पोर्नोग्राफी के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया है। 29 वर्षीय पीड़िता की शिकायत के बाद खार पुलिस ने आरोपित शौहर को गिरफ्तार कर लिया है। रिपोर्ट के अनुसार उसने बीवी के प्राइवेट पार्ट में कोई वस्तु डाल उस पर पोर्नोग्राफी के लिए दवाब डाला। बीवी ने जब शिकायत दर्ज कराई तो ससुराल वालों ने उसे तीन तलाक देने को कहा।

रिपोर्टों के अनुसार, महिला का 2014 में आरोपित के साथ निकाह हुआ था। दंपती का कोई बच्चा नहीं है। पीड़ित महिला की रिश्तेदार ने मिड-डे को बताया कि ससुराल वाले उसे बच्चा नहीं होने के कारण परेशान करते थे। लेकिन वास्तव में उसका पति उसके प्रति अपनी वैवाहिक जिम्मेदारियों को नहीं निभा पाता था। आरोपित ने एक बार महिला से उसकी बहन की भी फोटो मँगवाए थे।

पीड़िता के रिश्तेदार ने बताया, “हद तो तब हो गई जब एक रात शौहर ने एक अज्ञात व्यक्ति के साथ वीडियो कॉल पर उसे लाइव-स्ट्रीम किया। उस वक्त वह सो रही थी। उसने जून में अपनी बहनों को इस बारे में बताया था।” महिला ने शिकायत में कहा है, “जब उसने मेरे अंदर कोई चीज डाली तो मैंने किसी को नहीं बताया। इसके बाद वह मुझ पर पोर्न स्टार के तौर पर काम करने का दबाव डालने लगा।”

पीड़ित महिला की माँ ने कहा, “जब मैंने उसके ससुराल वालों को मैसेज किया, तो उसके ससुर ने मुझे तीन तलाक देने के लिए कहा। जब भारत में यह गैर कानूनी है तो वह तीन तलाक क्यों देगी।” महिला फिलहाल अपने माता-पिता के साथ रह रही है। उसकी माँ के मुताबिक ससुराल वाले उसका सामान और बैंक पासबुक, पासपोर्ट आदि दस्तावेज वापस नहीं कर रहे हैं।

खार पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक गजानन काबदुले ने बताया, “FIR दर्ज कर मामले की जाँच की जा रही है। आरोपित पति को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसका फोन जब्त कर फोरेंसिक जाँच के लिए भेजा गया है। फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर हम मामले में आईटी अधिनियम के तहत कार्रवाई के बारे में फैसला लेंगे।”

रिपोर्ट्स में कहा गया कि आरोपित शौहर मुंबई के एक नामी होटल व्यवसायी का बेटा है। वह एक पोर्न एडिक्ट है। पीड़ित महिला के पति, सास-ससुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि पीड़िता का डिप्रेशन का इलाज चल रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रहे मदन लोकुर से पेगासस ‘इंक्वायरी’ करवाएँगी ममता बनर्जी, जिस NGO से हैं जुड़े उसे विदेशी फंडिंग

पेगासस मामले में जाँच के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2 सदस्यीय आयोग गठित किया है। इस आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन लोकुर करेंगे। वहीं दूसरे सदस्य कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस हैं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जिन पूर्व जस्टिस मदन लोकुर को आयोग की अध्यक्षता सौंपी है, वह अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा वित्त पोषित एक गैर सरकारी संगठन (NGO) के वरिष्ठ सदस्य हैं। वह कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (सीएचआरआई) की कार्यकारी समिति के सदस्य हैं।

CHRI वेबसाइट पर मौजूद सूचना

इस संस्था को साल 2021 में अमेरिकी विदेश विभाग, नई दिल्ली के ब्रिटिश उच्चायोग, कनाडा के उच्चायोग सहित अन्य से योगदान प्राप्त हुआ है। यूएस की ओर से इस संस्था को किए गए योगदान का उद्देश्य ‘भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों में बंदियों के लिए वकालत और आउटरीच कार्यक्रम’ चलाना था। यूके के लिए ये ‘भारत में न्याय की गति पर शोध और विदेशी राष्ट्रीय बंदियों और अपराध के शिकार लोगों पर उनका प्रभाव’ जानने के लिए था। वहीं कनाडा के लिए योगदान “Reimbursement of Expenditure” के उद्देश्य से था। इनके अलावा, सीएचआरआई को केलिडोस्कोप डायवर्सिटी ट्रस्ट, फ्रेडरिक नौमैन स्टिफ्टंग-जर्मनी, द हैन्स सीडल फाउंडेशन और अन्य से भी योगदान मिला है।

पूर्व न्यायमूर्ति मदन लोकुर उन चार न्यायाधीशों में से एक थे जिन्होंने 2018 में तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसके साथ उन्होंने सीएचआरआई के सदस्य के रूप में, एनआरसी की चालू प्रक्रिया के खिलाफ अन्य तथाकथित ‘प्रतिष्ठित नागरिकों’ के साथ बयान जारी किया था।

साभार: CHRI

बयान में उन्होंने कहा था, “संबंधित नागरिक होने के नाते, हम संवेदनशील मुद्दों पर अधिकारों के लिए भारत के संवैधानिक और अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों की पुष्टि करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय की ओर देखते हैं। इसलिए हम अवैध हिरासत और निर्वासन से संबंधित एक जटिल मामले पर भारत के मुख्य न्यायाधीश के हालिया बयानों से निराश हैं।…” बयान में पूरी प्रक्रिया को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए मुख्य न्यायाधीश के एक स्टेटमेंट पर नाराजगी जाहिर की गई थी। साथ ही मामले को ‘बंदियों’ के मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला कहा गया था और उनकी परिस्थितियों के लिए अदालत को जिम्मेदार बताया गया था।

बता दें कि मदन लोकुर हाल ही में अशोक विश्वविद्यालय में लोकपाल के रूप में शामिल हुए थे। उन्होंने इसी शनिवार को यूएपीए कानून के खिलाफ अपनी आपत्ति जताई थी। एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में उन्होंने उन लोगों को लेकर अपनी बात रखी जिन पर यूएपीए लगा है। वह बोले, “उनके परिवार पर पड़ने वाले भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक प्रभाव को देखें, उनको, उनके बच्चे को देखें… वे स्कूल जाएँगे जहाँ सहपाठी कहेंगे कि तुम्हारे पिता एक ‘आतंकवादी’ हैं जो उन्होंने किया ही नहीं …हम इसके मानसिक पहलू को नहीं देख रहे हैं।”

उल्लेखनीय है कि ममता बनर्जी ने जिस पेगासस मामले की जाँच के लिए मदन लोकुर को नियुक्त किया है उसे लेकर मीडिया रिपोर्ट्स के दावे पहले ही खारिज किए जा चुके हैं। पेगासस को बनाने वाले समूह ने एनडीटीवी को ही यह बताया था कि जो लिस्ट दिखाकर खबरें की जा रही हैं उसका उनसे कोई लेना-देना नहीं है। इतना ही नहीं NSO समूह ने द वायर को मानहानि का केस करने की धमकी भी दी थी।

ISRO वैज्ञानिक नम्बी नारायणन जासूसी मामले में दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करे CBI, सुप्रीम कोर्ट नहीं करेगा निगरानी

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जाँच की निगरानी करने से अब इनकार कर दिया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (26 जुलाई 2021) को सीबीआई को कहा कि वो इसरो मामले में जाँच पूरी कर कानून के मुताबिक कार्रवाई करें। अदालत ने कहा कि ये जाँच और कानूनी कार्रवाई CBI की एफआईआर और जाँच के आधार पर होनी चाहिए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपित की ओर से पेश हुए एक वकील ने कोर्ट से अनुरोध किया कि इस मामले में गठित जस्टिस डीके जैन समिति की रिपोर्ट उनके साथ साझा की जाए। इस पर जस्टिस एएम खानविलकर और संजीव खन्ना की पीठ ने कहा, ”रिपोर्ट केवल एक प्रारंभिक जानकारी है। वे (सीबीआई) केवल रिपोर्ट के आधार पर आपके (आरोपित) के खिलाफ आगे नहीं बढ़ सकते हैं। उन्हें जाँच करनी है, तथ्य जुटाने हैं और फिर कानून के अनुसार आगे बढ़ना है। अंतत: इस मामले की जाँच की जाएगी। रिपोर्ट आपके अभियोजन का आधार नहीं हो सकती है।”

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर में रिपोर्ट का सार है। पीठ ने कहा कि रिपोर्ट कहती है कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है, लेकिन इसे वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया है। इस पर मेहता ने कहा कि मामले में दर्ज प्राथमिकी संबंधित अदालत में दायर की गई है और अगर अदालत अनुमति देती है तो इसे वेबसाइट पर अपलोड किया जा सकता है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल 2021 को केरल के वैज्ञानिक नम्बी नारायणन पर साल 1994 में लगे देशद्रोह के आरोप और उसके बाद हुई उनकी प्रताड़ना के मामले में CBI जाँच के आदेश दिए थे। अदालत ने माना था कि वरिष्ठ वैज्ञानिक की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाया गया और उनके मानवाधिकार का उल्लंघन हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें जिस ‘कुटिल घृणा’ का सामना करना पड़ा, उसके लिए केरल के बड़े पुलिस अधिकारी जिम्मेदार थे। अब इस मामले की जाँच CBI करेगी।

बता दें कि 1996-97 में CBI ने पाया था कि इस मामले की जाँच करने वाले केरल पुलिस के अधिकारियों ने ही सारी गड़बड़ी की है। CBI ने उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए भी केरल सरकार को शिकायती पत्र भी लिखा था। CPI (M) के ईके नायनार तब केरल के मुख्यमंत्री थे। वामपंथी सरकार ने उन अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के इंतजार का बहाना बनाया।

‘वो सबका हिसाब करता है, कल कोई तुम्हें भी बर्बाद करेगा’: गहना वशिष्ठ को याद आए भगवान, शिल्पा शेट्टी से फिर होगी पूछताछ

राज कुंद्रा पोर्न फ़िल्में शूट कर के एप के माध्यम से बचने के मामले में फ़िलहाल मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच की गिरफ्त में हैं। अब उनकी कंपनी से जुड़े तनवीर हाशमी ने कहा है कि वो 20-20 मिनट के नग्न फ़िल्में बनाते थे, जिन्हें पोर्न की श्रेणी में नहीं डाला जा सकता। वहीं मंगलवार (27 जुलाई, 2021) को बॉम्बे हाईकोर्ट में राज कुंद्रा की जमानत याचिका पर सुनवाई होगी। वहीं इस अमले में एक अभिनेत्री फ़्लोरा सैनी का नाम सामने आया था।

फ़्लोरा सैनी ने कहा है कि उनकी कभी राज कुंद्रा से बातचीत नहीं हुई है। खुलासा हुआ था कि राज कुंद्रा के अलावा एक और आरोपित उमेश कामत उनके बारे में बातें कर रहे थे। फ़्लोरा सैनी ने कहा कि अगर वो नहीं बोलतीं तो लोगों को लगता कि वो कुछ छिपा रही हैं। साथ ही दावा किया कि दो लोग उनके पीठ पीछे उनके बारे में बात कर रहे हैं तो ज़रूरी नहीं कि उन्हें पता ही हो। उन्होंने कहा कि उस बातचीत में बोल्ड दृश्य करने वाली अन्य अभिनेत्रियों के नाम भी लिए गए थे।

वहीं क्राइम ब्रांच एक बार फिर से अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी से पूछताछ की तैयारी कर रहा है। साथ ही उनके फोन की क्लोनिंग भी लेगा, ताकि सभी डेटा की जाँच की जा सके। इससे पहले हुई पूछताछ में शिल्पा शेट्टी ने अपने पति के एप ‘Hotshots’ के कंटेंट की पूरी जानकारी होने से अनभिज्ञता जताई थी। पुलिस ने इस मामले में राज कुंद्रा के बँगले पर छापेमारी कर के 48 TB स्टोरेज के एडल्ट कंटेंट जब्त किए हैं, जिनमें वीडियोज और फोटोज शामिल हैं।

कानपुर में राज कुंद्रा के दो बैंक खातों को सीज किया गया है। SBI के अधिकारियों ने बताया कि इन बैंक खातों में कई करोड़ रुपए जमा कराए गए थे। अरविंद श्रीवास्तव नामक के एक व्यक्ति के बारे में पता चला है, जो राज कुंद्रा की प्रोडक्शन कंपनी चलाता था। उसकी पत्नी हर्षिता के बैंक खातों का इस्तेमाल कर के रुपए मँगाए जाते थे। श्याम नगर में रहने वाले अरविंद के पिता का कहना है कि वो 2 सालों से घर नहीं आया, लेकिन समय-समय पर खर्च के लिए रुपए भेजता है।

फरवरी 2021 में अरविंद के खिलाफ मुंबई पुलिस ने लुकआउट नोटिस भी जारी किया था। अरविंद के पिता को बहू हर्षिता के बैंक खाते में भेजे गए रुपयों के बारे में कुछ नहीं पता। वो कहते हैं कि उन्हें ये तक नहीं पता कि अरविंद क्या काम करता है। इस मामले में अभिनेत्री गहना वशिष्ठ व अन्य दो लोगों को समन भेजा गया था। राज कुंद्रा के दफ्तरों में मिले गुप्त आलमारी व दस्तावेजों की जाँच की जा रही है।

वहीं गहना वशिष्ठ ने आज एक इंस्टाग्राम पोस्ट शेयर कर के लिखा कि सच सामने आएगा। उन्होंने लिखा, “भगवान सबका देखता है और सबका हिसाब भी यही होता है। मैं आज फँसी हूँ। कल तुम फँसोगे। भगवान किसी को नहीं छोड़ते। सबसे महत्वपूर्ण है कि उपरवाले की लाठी में आवाज़ नहीं होती। न मैं कल गलत थी, ना मैं आज गलत हूँ। करो, करो। जितना करना है करो। अगर बड़ा बनने के लिए तुम्हें दूसरों को बर्बाद करना है, कल कोई तुम्हें और तुम्हारे परिवार को भी इसी तरह बर्बाद करेगा।”

गहना वशिष्ठ की ताज़ा इंस्टाग्राम पोस्ट

गहना वशिष्ठ ने ये भी लिखा कि याद रखने की ज़रूरत है कि ऊपर वाला मौजूद है। उधर राज कुंद्रा पर आरोपों को लेकर कई लोगों ने इंस्टाग्राम पर अभिनेता करण कुंद्रा पर निशाना साधा। उन्होंने सफाई दी कि वो राज नहीं हैं, जैसा कि लोग समझ रहे। तीन-चार अन्य पोर्न एप्स से भी राज कुंद्रा के सम्बन्ध खँगाले जा रहे हैं। राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी के जॉइंट बैंक खातों की भी जाँच की जा रही है।

 कुंद्रा की अलमारी में से पाए गए दस्तावेजों में हिंदी में लिखी एक ताजा स्क्रिप्ट भी है। ये स्क्रिप्ट रोमन लिपि और देवनागरी दोनों में है। अधिकारियों को संदेह है कि कुंद्रा की गैर मौजूदगी में भी शूटिंग जारी रखने की योजना थी। हालाँकि, शूटिंग इरॉटिका के लिए थी या पोर्न के लिए, अभी तक इसका खुलासा नहीं हुआ है। चार महीने पहले शिल्पा शेट्टी को अपने पति की कंपनी जेएल स्ट्रीम का प्रचार करते हुए देखा गया था, जो अब पोर्न रैकेट मामले में मुंबई पुलिस की जाँच के दायरे में हैं।

रूठे कॉन्ग्रेसियों के लिए मौसम अच्छा… पर सचिन पायलट न सिद्धू हैं और न राजस्थान की आबोहवा पंजाब जैसी

लगता है रूठने वाले कॉन्ग्रेसियों के दिन फिरने का मौसम चल रहा है। पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू में अपना भविष्य स्थापित करने के बाद कॉन्ग्रेस हाईकमान की नज़र अब राजस्थान पर है। दल के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल और अजय माकन ने शनिवार (24 जुलाई 2021) को जयपुर का दौरा किया। प्रदेश के विधायकों, मंत्रियों और अन्य नेताओं के साथ बैठक की। इन बैठकों के बाद प्रदेश में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और भूतपूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के कैम्पों के बीच लगभग एक वर्ष से चल रही राजनीतिक लड़ाई के समाधान की आशा जगी है। पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के विवाद को फिलहाल मिले विराम के पश्चात दल, उसके नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच यह आशा अवश्य जगी होगी कि राजस्थान में चल रहे राजनीतिक विवाद का भी कोई समाधान निकलने वाला है।

वैसे तो अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी की ओर से जयपुर पहुँचे अजय माकन ने राज्य में अलग-अलग गुट और नेताओं के साथ अपनी बैठकों के बाद यह बयान दिया कि प्रदेश इकाई में नेताओं के बीच किसी तरह का विवाद नहीं है। पर उनका यह बयान औपचारिकता से अधिक कुछ नहीं लगता। उनके बयान से प्रश्न यह उठता है कि यदि विवाद नहीं है तो फिर उनके और प्रदेश के कॉन्ग्रेसी नेताओं के बीच एक साथ इतनी बैठकों का कारण क्या है? यदि कोई विवाद नहीं है तो फिर पायलट कैंप पिछले एक वर्ष से बीच-बीच में सक्रिय क्यों हो जाता है? क्यों इस सक्रियता की वजह से प्रदेश कॉन्ग्रेस में राजनीतिक भूचाल आ जाता है? यदि विवाद नहीं हैं तो फिर राजनीतिक विश्लेषक सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच किसी तरह की समानता क्यों खोजने लगते हैं? या फिर सचिन पायलट को उप मुख्यमंत्री पद से क्यों हटाया गया? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनके उत्तर औपचारिक बयानों में नहीं मिलेंगे।

पंजाब में कॉन्ग्रेस पार्टी का जो अंदरूनी विवाद था वह फिलहाल दब गया है और भविष्य में प्रदेश में पार्टी की राजनीति चाहे जिस ओर रुख करे, इस समय तो यही लगता है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हालात से समझौता कर लिया है। पार्टी हाईकमान द्वारा पंजाब इकाई में राजनीतिक विवाद के समाधान खोजने के कारण ही राजस्थान में लंबे समय से चल रहे विवाद के समाधान की आशाएँ जगी हैं। पर यहाँ जो बात गौर करने वाली है वो यह है कि राजस्थान और पंजाब इकाइयों में बागी नेताओं में असंतोष और उससे उपजे राजनीतिक विवाद में अंतर है।

पंजाब कॉन्ग्रेस में कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री के तौर पर चुनौती देनेवाला कोई नेता नहीं था। नवजोत सिंह सिद्धू जो लड़ाई लड़ रहे थे वह उनके अपने कद और वर्चस्व की लड़ाई अधिक थी। इसकी तुलना में राजस्थान इकाई में सचिन पायलट को पिछले विधानसभा चुनावों के समय से ही मुख्यमंत्री पद का दावेदार माना जाता रहा है। ऐसी सोच के पीछे पहला कारण यह है कि सचिन पायलट में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक भविष्य का नेता देखते रहे हैं। दूसरा कारण यह कि पिछले विधानसभा चुनावों के पहले से ही प्रदेश की राजनीति में सचिन पायलट की सक्रियता काफी बढ़ गई थी और कुछ पार्टी नेताओं, समर्थकों और राजनीतिक विश्लेषकों का यह मानना था कि प्रदेश में पार्टी की जीत का श्रेय पायलट को अधिक जाता है।

ऐसे में सचिन पायलट की पार्टी में स्थिति काफी हद तक वैसी ही है जैसी मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया की थी। कम से कम इस मामले में पायलट और सिद्धू में कोई समानता नहीं है। इन दोनों नेताओं के बीच समानता केवल असंतोष तक ही है। ऐसे में सबका ध्यान इस बात पर रहेगा कि पार्टी हाईकमान राजस्थान इकाई में उपजे राजनीतिक विवाद के लिए किस तरह का समाधान लेकर आता है।

पंजाब में जो कुछ हुआ उसे देखते हुए अशोक गहलोत चौकन्ने अवश्य हुए होंगे। उन्हें शायद इस बात की चिंता होगी कि दल का केंद्रीय नेतृत्व पंजाब में मिले समाधान से उत्साहित होगा और हो सकता है कोई ऐसा कदम उठाए जिससे कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरह ही उनका कद भी छोटा प्रतीत हो। यह ऐसी बात है जो गहलोत को चिंतित अवश्य करेगी। एक और बात इस समय गहलोत के पक्ष में जाती नहीं दिख रही और वो यह है कि पिछले कई महीनों में प्रदेश में प्रशासन की स्थिति कमज़ोर हुई है।

प्रशासनिक अव्यवस्था के कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिसकी वजह से केवल मुख्यमंत्री गहलोत की ही नहीं, बल्कि दल के केंद्रीय नेतृत्व की भी आलोचना हुई है। भ्रष्टाचार, हत्या और बलात्कार की ऐसी कई घटनाएँ हुई हैं जिनकी वजह से प्रदेश नेतृत्व इस समय कठघरे में खड़ा है। कोरोना महामारी को लेकर राज्य में फैली अवयवस्था ने गहलोत सरकार की विश्वसनीयता घटाई है। टीकाकरण के दौरान टीकों की बर्बादी हो या फिर स्वास्थ्य मंत्री के गलत कारणों से समाचार में बने रहने की कला, राज्य सरकार की किरकिरी लगातार हुई है। उधर दलितों पर लगातार हो रहे अत्याचार की खबरें समाचार पत्रों का स्थायी फीचर हैं।

यह ऐसा समय है जब सचिन पायलट सरकार में नहीं हैं। ऐसे में सरकार को मिल रही बदनामी किसी भी तरह से उनके हिस्से आने से रही। ये ऐसी बातें हैं जो पायलट और उनके कैंप को लंबे चले राजनीतिक विवाद में एक तरह की बढ़त सी देती है। ऐसे में फिलहाल अशोक गहलोत के लिए खतरे की घंटी बज रही होगी पर जो बात उनके पक्ष में जाती है वह ये है कि फिलहाल राज्य में पंजाब की तरह विधानसभा चुनाव अगले वर्ष नहीं हैं। ऐसे में गहलोत के लिए राजनीतिक दांव-पेंच के लिए काफी जमीन है।

यही कारण है कि राज्य में किसी बड़े उलट-फेर की संभावना कम दिखाई दे रही है और फिलहाल वर्तमान मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए कोई बड़ा खतरा दिखाई नहीं दे रहा। अधिकतर संभावना यही है कि चूँकि प्रदेश में मंत्रियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है इसलिए पायलट कैंप के कुछ विधायकों को मंत्री पद देकर फिलहाल पायलट को शांत करने की कोशिश की जाएगी। हाँ, यह समाधान कितना स्थायी होगा या गहलोत क्या कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरह ही कोई भी समाधान स्वीकार कर लेंगे, यह ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर समय के साथ ही मिलेगा। पर यह अवश्य कहा जा सकता है कि पार्टी के अंदरूनी विवादों का स्थायी समाधान फिलहाल संभव नहीं दिखाई देता।

PM मोदी पर भड़ास से खुश, खालिस्तानी भिंडरावाले और पन्नू की आलोचना से भड़का संयुक्त किसान मोर्चा: मनसा को किया निलंबित

किसान आंदोलन में भाषण के दौरान पंजाब किसान यूनियन के अध्यक्ष रूलदू सिंह मनसा को अपनी स्पीच के दौरान खालिस्तानी आतंकी जरनैल सिंह भिंडरावाले की आलोचना करना महँगा पड़ गया। 25 जुलाई 2021 को एक्शन लेते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने रुलदू सिंह मनसा को 15 दिनों के लिए निलंबित कर दिया है। उन्होंने भाषण के दौरान प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन सिख फॉर जस्टिस के मुखिया गुरुपतवंत सिंह पन्नू पर सिख युवाओं का ब्रेनवॉश करने का आरोप लगाया था।

दरअसल, मनसा के बयान पर पंजाब के 32 सिख समूहों ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद मनसा के खिलाफ यह कार्रवाई की गई। मनसा पर सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप लगाया गया था। यूनियन लीडर हरिंदर सिंह लखोवाल ने 32 सिख समूहों की बैठक की अध्यक्षता की और जगजीत सिंह दल्लेवाल ने संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक की अध्यक्षता की थी।

कुंडली सीमा पर पत्रकारों से बात करते हुए दल्लेवाल ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के मंच से मनसा ने जो भाषण दिया था, उससे सिखों की भावनाएँ आहत हुई हैं और ये हमारे संगठन की नीतियों के खिलाफ है। वहीं लखोवाल ने रूलदू सिंह के भाषण को सिखों और बलिदानियों के खिलाफ बताया था। इसी के बाद मनसा पर 15 दिनों के लिए किसी भी मंच से कोई भी बयान देने पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

भिंडरावाले और एसएफजे के पन्नू के खिलाफ मनसा का भाषण

रिपोर्ट के मुताबिक, रूलदू सिंह मनसा ने 21 जुलाई 2021 को प्रदर्शनकारी किसानों को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने विरोध प्रदर्शनों में खालिस्तानी ताकतों के घुसपैठ को लेकर बात की थी। हालाँकि, उन्होंने जरनैल सिंह भिंडरावाले या खालिस्तान आंदोलन का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका भाषण स्पष्ट रूप से खालिस्तानियों के खिलाफ था।

मनसा ने कहा था, “वे अमेरिका में बैठे हैं। मैं उन्हें सरकार द्वारा किराए पर लिए गए कुत्ते कहूँगा। ये भौंकते ही रहते हैं, लेकिन हम जानते हैं कि कैसे (अमृतसर) वहाँ बैठा एक कुत्ता पंजाब में युवाओं को भड़का रहा है। इनके उकसावे के कारण ही हमारे 25,000 युवा पुलिस के हाथों बलिदान हो गए। अब पन्नू नाम का यह कुत्ता ये करो, वो करो भौंक रहा है। एक और है हमेशा किसान नेताओं के खिलाफ बोलता है। मेरे दोस्तों आपकी कमाई डॉलर क्यों है? यहाँ आओ, ताकि तुम इस युद्ध की हकीकत जान सको। विदेश में बैठकर सुझाव देना आसान है।”

खास बात यह है कि जब तक मनसा ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बयानबाजी की, तब तक सभी ठीक थे, लेकिन जैसे ही उन्होंने आतंकवादियों के खिलाफ बोला तो उससे सिख समूह ‘आहत’ हो गया। मनसा ने अपना भाषण के 9 मिनट 30 सेकेंड तक केंद्र सरकार और पीएम मोदी के खिलाफ बात की तो वो सही था, लेकिन केवल 45 सेकेंड ही उन्होंने इन आतंकियों के खिलाफ बात की तो संयुक्त किसान मोर्चा को उससे दिक्कत हो गई। अपने भाषण के दौरान मनसा अपने भाषण के दौरान केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों को भड़काते रहे, जबकि ये कानून किसानों को बेहतर बुनियादी ढाँचा और उपज बेचने के अधिक विकल्प प्रदान करने के लिए लाए गए हैं।

भाषण के दौरान मनसा ने लोगों से जमीनों को बचाने की अपील करते हुए आरोप लगाया कि नए कानून से किसानों की जमीन छीन ली जाएगी। हकीकत में यह कानून किसानों की भूमि को डिपोजिट के तौर पर शामिल किए बिना ही कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की शक्ति देता है। इसके साथ ही मनसा ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी के खिलाफ लड़ने की भी बात की। साथ ही पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनावों में किसान नेताओं के चुनाव लड़ने को लेकर भी संकेत दिया।

किसान आंदोलन

केंद्र सरकार द्वारा पिछले साल सितंबर 2020 में पारित किए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठन नवंबर 2020 से दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं। इन विरोध प्रदर्शनों से न केवल दिल्ली, बल्कि आस-पास के राज्यों में व्यापारियों को करोड़ों का नुकसान हुआ है। गणतंत्र दिवस पर दंगे हुए। उन दंगों में 300 से अधिक पुलिस कर्मी घायल हुए थे। अब एक बार फिर से इन कथित प्रदर्शनकारी किसानों स्वतंत्रता दिवस पर किसी भी मंत्री को तिरंगा नहीं फहराने और 15 अगस्त को हरियाणा में ट्रैक्टर रैली करने की धमकी दी है।

ममता सरकार में बेरोजगारी से कराहता बंगाल: मुर्दाघर में ‘डोम’ के 6 पदों के लिए 8,000 इंजीनियर, पोस्ट ग्रेजुएट ने किया आवेदन

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक महीने पहले नीलरतन सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ने मुर्दाघर में डोम (शवों को सँभालने) के लिए छह पदों पर भर्ती निकाली थी। आपको जानकर हैरानी होगी कि इन छह पदों के लिए लगभग 8,000 लोगों ने आवेदन किया, जिनमें इंजीनियर से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट और ग्रेजुएट भी शामिल हैं।

भर्ती की अधिसूचना के अनुसार, इस पद के लिए कम-से-कम आठवीं पास और उम्र सीमा 18-40 साल होना अनिवार्य है। वहीं, इस पद के लिए मासिक वेतन 15,000 रुपए है। इसके बावजूद 100 इंजीनियर, 500 पोस्ट ग्रेजुएट और 2,000 से अधिक ग्रेजुएट लोगों ने इस पद के लिए आवेदन किया।

राज्य सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि उच्च डिग्री वाले उम्मीदवारों का इन पदों पर आवेदन करना पश्चिम बंगाल में बेरोजगारी की दयनीय स्थिति को दर्शाता है। वहीं, अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि कुल आवेदकों में से 84 महिला उम्मीदवारों समेत 784 लोगों को 1 अगस्त 2021 को होने वाली लिखित परीक्षा के लिए बुलाया गया है।

अधिकारी ने कहा, “नौकरी के लिए शैक्षणिक योग्यता आठवीं कक्षा थी। इसका मतलब यह नहीं है कि उच्च शिक्षा वाले उम्मीदवार नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं। अगर पोस्ट ग्रेजुएट और इंजीनियर नौकरी के लिए आवेदन करते हैं तो हम कुछ नहीं कर सकते।”

नोटिस में अस्पताल के अधिकारियों द्वारा कहा गया है कि आवेदकों की आयु 18 से 40 के बीच होनी चाहिए और यदि उनके पास मुर्दाघर में काम करने का अनुभव है तो इसे उनका प्लस प्वॉइंट माना जाएगा। नोटिस में यह भी कहा गया है कि अगर उम्मीदवार डोम कम्युनिटी से हैं तो वह उनकी पहली पसंद होंगे।

गौरतलब है कि साल 2017 में मालदा अस्पताल के अधिकारियों ने ऐसे ही दो पदों के लिए आवेदन माँगा था। उस पद के लिए पोस्ट ग्रेजुएट के साथ-साथ पीएच.डी. डिग्रीधारी अभ्यार्थियों ने भी आवेदन किया था। इसी तरह साल 2019 में कूचबिहार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 8 पदों के लिए कई पोस्ट ग्रेजुएट लोगों ने आवेदन किया था।

बताया जा रहा है कि कोलकाता के सागर दत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में उच्च शिक्षित हजारों उम्मीदवारों के आवेदन मिलने के बाद अधिकारियों ने इस पद के लिए होने वाले वॉक-इन-इंटरव्यू को रद्द कर दिया था।