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केरल HC में मुस्लिम-ईसाइयों को आरक्षण देने से रोकने वाली याचिका खारिज, हिंदू संगठनों पर कोर्ट ने लगाया 25,000 का जुर्माना

केरल हाईकोर्ट ने हिंदू सेवाकेंद्रम एर्नाकुलम नॉर्थ पर 25,000 रुपए का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मुस्लिम, लैटिन कैथोलिक, ईसाई नादर और अन्य अनुसूचित जातियों को दिए गए आरक्षण और वित्तीय सहायता को रद्द करने की माँग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश एस मणिकुमार और न्यायमूर्ति शाजी पी चाली ने यह कहते हुए याचिका को खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ता ने याचिका दायर करने से पहले उस पर ठीक से रिसर्च नहीं किया था।

अदालत ने हिंदू सेवाकेंद्रम को राज्य में दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए बनाए गए बैंक खाते में एक महीने के भीतर इस राशि को जमा करने का निर्देश दिया है। वहीं, डिफॉल्ट करने की स्थिति में केरल राजस्व वसूली अधिनियम, 1968 के तहत संगठन के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।

कोर्ट ने कोच्चि के हिंदू सेवाकेंद्रम के कोषाध्यक्ष श्रीकुमार मनकुझी की याचिका पर यह आदेश जारी किया है। याचिकाकर्ता ने कहा कि मुसलमानों और ईसाइयों के कुछ वर्गों को शिक्षा के साथ-साथ नौकरियों में आरक्षण प्रदान किया जाता है, उन्हें सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा माना जाता है, जबकि उनमें से अधिकांश सामाजिक या शैक्षिक रूप से पिछड़े नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केरल में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हिंदुओं को कई परेशानियाँ हैं।

सितंबर 10, 1993 को जारी एक राज-पत्र अधिसूचना (gazette notification) का हवाला देते हुए महाधिवक्ता के. गोपालकृष्ण कुरुप ने कहा कि कुछ समुदायों की पहचान पिछड़े वर्गों व राज्यवार सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के रूप में की गई है। इसके पश्चात ही केंद्र और राज्य सरकारों के आदेशों के अनुसार आरक्षण उपलब्ध है। अधिसूचना के अनुसार, मपिला और लैटिन कैथोलिक को पहले ही सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े समुदायों के रूप में पहचान की जा चुकी है, जिसके लिए आरक्षण प्रदान किया जाता है। महाधिवक्ता ने कहा कि भारत के राष्ट्रपति को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को निर्दिष्ट करने का अधिकार है।

अदालत ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम के अनुसार, केंद्र सरकार ने छह धार्मिक समुदायों- मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी (पारसी) और जैन को अल्पसंख्यक समुदायों के रूप में मान्यता दी है। इस प्रकार संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों में, यह स्पष्ट है कि कुछ समुदायों को अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, पिछड़े और अन्य पिछड़े समुदायों के रूप में मान्यता दी गई है। तभी राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा आरक्षण प्रदान किया जाता है।

बता दें कि केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार (23 जुलाई, 2021) को उस याचिका को रद्द कर दिया था, जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग के बीच आने वाले धार्मिक स्थलों को बचाने की माँग की गई थी। बताया गया था कि सड़क के बाईं ओर दो मंदिर और एक मस्जिद है, लेकिन सड़क के दाईं ओर दिखाई गई मस्जिद एक निजी मस्जिद है। केरल की सरकार ने इस निजी मस्जिद को बचाने के लिए अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए चौड़ीकरण की प्रक्रिया में बदलाव का सलाह दिया।

अल्लाह-हू-अकबर चिल्लाया, कई को गोलियों से छलनी किया: अफगानिस्तान में कट्टर इस्लाम के साथ ऐसे फैल रहा तालिबान

तालिबानी आतंकवादियों ने अफगानिस्तान के ज्यादातर इलाकों में कब्जा कर लिया है। वह यहाँ निर्दोष लोगों को मार रहे हैं। अफगान सेना भी लगातार अपने इलाकों को तालिबानियों के चंगुल से छुड़ाने का प्रयास कर रही है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कंधार प्रांत में स्पिन बोल्डक जिले में तालिबानी आतंकियों ने निर्दोष लोगों को उनके घरों से निकाल दिया और अल्लाह-हू-अकबर चिल्लाते हुए उन्हें गोलियों से छलनी कर डाला। कहा जाता है कि इन लोगों ने अफगान सरकार का समर्थन किया था।

वायरल हो रही इस वीडियो को देखने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स में खासा आक्रोश है। रमेश शर्मा हिंदुस्तानी नाम के यूजर ने लिखा, ”अल्लाह-हू-अकबर, क्या यही इस्लाम है।”

उन्होंने आगे लिखा, “ज़ालिम तालिबान इंसान नहीं शैतान के बच्चे हैं, मरने के बाद अलकायदा और तालिबानी सूअर के रूप में पैदा होंगें।”

हाल ही में अफगानिस्तान के कंधार प्रांत के स्पिन बोल्डक जिले में तालिबान ने 100 आम लोगों की बर्बरतापूर्ण तरीके से हत्या कर दी थी। तालिबान ने घरों को लूटने और लोगों की हत्याएँ करने के बाद वहाँ पर अपने झंडे भी फहरा दिए थे। अफगान गृह मंत्रालय इस हिंसा और मासूमों की हत्याओं के लिए तालिबान को जिम्मेदार ठहरा रहा है। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता मीरवाइस स्टेनेकजई ने कहा, “इस दुश्मन का यही असली चेहरा है। निर्मम आतंकियों ने पाकिस्तान में बैठे अपने हुक्मरानों के आदेश पर स्पिन बोल्डक जिले के कई इलाकों में घरों को लूटा और 100 निर्दोष नागरिकों की हत्या कर दी।” स्टेनेकजई के मुताबिक, तालिबान अपने आका के आदेश पर ऐसा कर रहा है और इस छद्म युद्ध को जातीय युद्ध का रंग देने की कोशिश कर रहा है।

गौरतलब है कि अफगानिस्तान के उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने इसे बदले की भावना से किया गया नरसंहार बताया था। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “पीड़ितों में ज्यादातर युवा, एथलीट, सीएस कार्यकर्ता, व्यवसायी, ब्लॉगर और अफगानिस्तान सरकार के साथ सहानुभूति रखने वाले लोग हैं। पाक एजेंसियाँ लंबे समय से शहर को डूरंड विरोधी लाइन के रूप में देखती हैं, जो बगल में बलूच और अचेकजई के साथ सहानुभूति रखता है।”

केरल में महाविष्णु मंदिर के पास लगे होर्डिंग, CM विजयन को बताया ‘केरल का भगवान’: लिखा ‘देवता भी थे कम्युनिस्ट’

राजनीति में बैनर और होर्डिंग आम बात हैं। अक्सर ही शहरों में बड़े नेताओं, विधायकों और मंत्रियों के होर्डिंग शहरों के प्रमुख स्थानों पर दिखाई देते रहते हैं लेकिन केरल के मलप्पुरम में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के कुछ होर्डिंग्स को लेकर सोशल मीडिया में आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया। दरअसल शनिवार (24 जुलाई 2021) को कई ऐसे होर्डिंग सामने आए जिनमें सीएम विजयन को केरल का भगवान बताया गया है। हालाँकि सीपीएम के कार्यकर्ताओं का कहना है कि इन होर्डिंग्स से उनका कोई लेना-देना नहीं है।

इन बड़े-बड़े होर्डिंग्स में सबसे अधिक चर्चा में है वलानचेरी के पचीरी महाविष्णु मंदिर के बाहर लगा हुआ सीएम विजयन का होर्डिंग। इस होर्डिंग में लिखा हुआ है, “आप पूछते हैं, भगवान कौन है? लोग जवाब देते हैं कि वही जो भोजन देता है।” इस होर्डिंग में सीएम विजयन की बड़ी सी तस्वीर बनी हुई है। महाविष्णु मंदिर के अधिकारियों ने बताया कि मई में जब लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार बनी थी और शपथ ग्रहण समारोह था तभी ये होर्डिंग लगाए गए थे।

इसके अलावा एक और होर्डिंग दिखाई दिया जिसमें सीएम विजयन के साथ कैबिनेट मंत्रियों की तस्वीर भी थी। इस होर्डिंग में लिखा हुआ था कि केरल में जहाँ प्रमुख मंदिर (श्री पद्मनाभस्वामी, श्री अय्यप्पा मंदिर, गुरुवायूर और कोंडुनगल्लुर) स्थित हैं वो स्थान लाल हो चुके हैं अर्थात वहाँ लेफ्ट का राज है। साथ ही होर्डिंग में यह भी लिखा गया था कि इससे बड़ा क्या सबूत चाहिए कि भगवान भी कम्युनिस्ट थे।

महाविष्णु मंदिर की कमेटी के अध्यक्ष एम रवीन्द्रन ने कहा कि दूसरे होर्डिंग को लेकर कई लोगों ने आपत्ति जताई और कहा कि वो इन होर्डिंग्स को जला देंगे। इसके चलते वलानचेरी पुलिस से संपर्क किया गया। इसके बाद इन होर्डिंग्स को हटा दिया गया। हालाँकि रवीन्द्रन ने बताया कि सीएम विजयन को भगवान बताने वाला होर्डिंग वहीं लगा रहा और सोशल मीडिया पर होर्डिंग वायरल होने के बाद उसे मंदिर से थोड़ी और दूर (करीब 20 मीटर) लगा दिया गया। हालाँकि मंदिर समिति का कहना है कि ये होर्डिंग सीपीएम कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए हैं लेकिन सीपीएम कार्यकर्ताओं ने इन होर्डिंग्स के पीछे उनका हाथ होने से साफ इनकार किया है।

पुलिस ने सोशल मीडिया पर होर्डिंग्स के वायरल होने के बाद इनके सोर्स का पता लगाना शुरू कर दिया है। इससे पहले भी चुनाव प्रचार के दौरान केरल में कई जगह पर सीएम विजयन को ‘कैप्टन‘ बताते हुए होर्डिंग और बैनर लगाए गए थे। हालाँकि इस दौरान उनकी ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के द्वारा चुनाव के पहले विजयन को कैप्टन बताए जाने का विरोध किया गया था।

राज कुंद्रा की गिरफ्तारी के बाद भी JL Stream बना रही एडल्ट कंटेंट? ताजा छापेमारी में स्क्रिप्ट बरामद, 3-4 पोर्न एप्स जाँच के दायरे में

पोर्नोग्राफी मामले में फँसे एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के पति और कारोबारी राज कुंद्रा की मुश्‍किलें बढ़ती जा रही हैं। मुंबई पुलिस ने रविवार (25 जुलाई 2021) को बताया कि वह इस बात की जाँच कर रही है कि पोर्नोग्राफी कंटेंट स्ट्रीम करने वाले तीन-चार दूसरे एप्स से राज कुंद्रा के लिंक है या नहीं। CNN-News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, जाँच अधिकारियों ने आशंका जताई है कि कुंद्रा की गिरफ्तारी के बाद भी उनकी कंपनी जेएल स्ट्रीम द्वारा एप में एडल्ड कंटेंट जारी रखने की योजना हो। गौरतलब है कि पोर्न रैकेट मामले में कुंद्रा की कंपनी जेएल स्ट्रीम भी जाँच के घेरे में है।

कुंद्रा को पिछले हफ्ते पोर्न रैकेट मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन पर अपनी कंपनी वियान इंडस्ट्रीज के जरिए पोर्नोग्राफी एप ‘हॉटशॉट्स‘ चलाने का आरोप है। एक अधिकारी ने कहा, “Apple और Google Play स्टोर से Hotshots को हटा दिए जाने के बाद हमें विश्वास है कि उन्होंने कुछ अन्य एप सेटअप किए हैं।”

कुंद्रा और उनकी कंपनी के आईटी हेड की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने कुंद्रा की पत्नी और एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी का बयान दर्ज किया। शेट्टी ने पुलिस को बताया कि एप्स में पोर्नोग्राफी नहीं बल्कि इरॉटिका कॉन्टेंट था। वह जिस शब्द इरॉटिका का इस्तेमाल कर रही हैं, उसका मतलब होता है, “कोई भी साहित्यिक या कलात्मक काम जो यौन उत्तेजना से जुड़ा हो, लेकिन अश्लील कैटेगरी में न आए।”

जाँच अधिकारियों ने CNN-News18 को बताया कि कुंद्रा की अलमारी में से पाए गए दस्तावेजों में हिंदी में लिखी एक ताजा स्क्रिप्ट भी है। ये स्क्रिप्ट रोमन लिपि और देवनागरी दोनों में है। अधिकारियों को संदेह है कि कुंद्रा की गैर मौजूदगी में भी शूटिंग जारी रखने की योजना थी। हालाँकि, शूटिंग इरॉटिका के लिए थी या पोर्न के लिए, अभी तक इसका खुलासा नहीं हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चार महीने पहले शिल्पा शेट्टी को अपने पति की कंपनी जेएल स्ट्रीम का प्रचार करते हुए देखा गया था, जो अब पोर्न रैकेट मामले में मुंबई पुलिस की जाँच के दायरे में हैं। जेएल स्ट्रीम भी वही कंपनी है, जहाँ शिल्पा की माँ सुनंदा सुरेंद्र शेट्टी कथित तौर पर सितंबर 2020 तक डायरेक्टर थीं।

शनिवार (24 जुलाई) को मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच को वियान इंडस्ट्रीज के एक कर्मचारी ने राज कुंद्रा के ऑफिस की दीवार में छिपाई गई एक अलमारी के बारे में बताया, जिसके बाद पोर्नोग्राफी मामले में नए सिरे से छापेमारी की गई। तलाशी लेने पर पुलिस ने उस अलमारी से कुछ कागजात और कुछ बक्से बरामद किए हैं।

क्राइम ब्रांच के एक सूत्र के अनुसार, बरामद किए बक्से में वित्तीय लेन-देन से संबंधित और मुख्य रूप से क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित फाइलें हैं। उन्होंने कहा कि अलमारी को एक दीवार में बनाया गया था, जिसे अच्छी तरह से छुपाया गया था। सूत्र ने कहा, ”कुंद्रा ने पहले इस अलमारी के बारे में खुलासा नहीं किया था।”

बता दें कि कुंद्रा की ही कंपनी के 4 कर्मचारी उनके खिलाफ गवाह बनने के लिए आगे आए हैं। ये चारों इस मामले में महत्वपूर्ण गवाह साबित होंगे। राज कुंद्रा को 19 जुलाई, 2021 को गिरफ्तार किया गया था। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच का कहना है कि राज कुंद्रा व उनके साथी जाँच व पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे हैं।

‘अपनी ही कब्र खोद ली’: टाइम्स ऑफ इंडिया ने टोक्यो ओलंपिक में भारतीय तीरंदाजी टीम की हार का उड़ाया मजाक

टोक्यो ओलंपिक के तीरंदाजी (आर्चरी) के मिक्स्ड इवेंट में दीपिका कुमारी और प्रवीण जाधव की जोड़ी क्वार्टर फाइनल तक पहुँच कर हार गई। उनकी हार ने करोड़ों भारतीयों को निराश कर दिया लेकिन देश के अग्रणी समाचार पत्र टाइम्स ऑफ इंडिया ने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने के स्थान पर उनका मजाक उड़ाया।

रविवार (25 जुलाई 2021) को टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक लेख प्रकाशित किया जिसका शीर्षक था, “Tokyo Olympics : India’s archers dig their own grave, again (टोक्यो ओलंपिक : भारतीय तीरंदाजों ने एक बार फिर अपनी ही कब्र खोद ली)”। लेख को आर्चिमन भादुड़ी ने लिखा है जिनके अनुसार किसी खेल में हारना अपनी कब्र खोदने के जैसा है। जहाँ एक ओर लेख का शीर्षक खिलाड़ियों का अपमान करने जैसा था वहीं लेख का रवैया खिलाड़ियों के प्रति मिला-जुला था।

टाइम्स ऑफ इंडिया के लेख का स्क्रीनशॉट

दक्षिण कोरिया के किम जे ड्योक और आन सन से हारने के बाद टाइम्स ऑफ इंडिया ने दावा किया कि भारतीय खिलाड़ी औसत से भी कम थे और उन्होंने विरोधियों को थाली में सजाकर जीत सौंप दी। लेख में कहा गया कि हालाँकि दोनों ही तरफ के खिलाड़ी कमजोर थे लेकिन तीरंदाजी का पावरहाउस माने जाने वाले दक्षिण कोरिया के खिलाड़ियों द्वारा 35 का स्कोर किया जाना यह बताता है कि भारत ने उन्हें जीत का तोहफा खुद ही दे दिया।

तीरंदाजी के कथित एक्सपर्ट आर्चिमन भादुड़ी ने लिखा कि दीपिका कुमारी और प्रवीण जाधव में कोई सामंजस्य नहीं था। लेख में बताया गया कि पहले खेल में भी दीपिका और प्रवीण सहज नहीं नजर आ रहे थे, भले ही उन्होंने 1-3 से पिछड़ने के बाद वापसी की और चीनी जोड़ी को हरा दिया। लेख में लिखा गया कि प्रवीण ने अपने गलत शॉट्स के कारण ओलंपिक में भारत के अभियान को समाप्त कर दिया।

आलोचना किसी भी खिलाड़ी के जीवन का हिस्सा है और उसके बेहतर बेहतर प्रदर्शन के लिए जरूरी है लेकिन उस खिलाड़ी की उपलब्धियों को कमजोर बताना मात्र उसके विश्वास को ठेस ही पहुँचाता है। दीपिका और प्रवीण, दोनों ही एक साधारण से परिवेश से उठकर आज खेलों के सबसे बड़े इवेंट में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। दीपिका खुद विश्व की नंबर 1 तीरंदाज हैं, ऐसे में टाइम्स ऑफ इंडिया के लेख का शीर्षक और गैर-तार्किक आलोचना सिर्फ दोनों खिलाड़ियों के प्रयासों को धूमिल ही करती है।

‘BJP नेताओं को स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा नहीं फहराने देंगे’: किसान यूनियनों ने दी नई धमकी, पूरे हरियाणा में विरोध प्रदर्शन की चेतावनी

दिल्ली सीमा पर आंदोलन कर रहे किसान संघों ने अब नई धमकी दी है। किसान संघों ने ताजा चेतावनी जारी करते हुए कहा कि वे स्वतंत्रता दिवस पर भाजपा नेताओं और मंत्रियों को राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराने देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे हरियाणा में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

अन्य किसान संघ 15 अगस्त की रणनीति तैयार करने के लिए बैठक करने की योजना बना रहे हैं। टाइम्स नाउ से बात करते हुए, एक किसान नेता ने कहा कि वे राज्य में ट्रैक्टर परेड निकालेंगे और भाजपा नेताओं को काले झंडे दिखाएँगे। जींद के एक किसान ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा, “ये झंडे के लायक नहीं है।”

शनिवार (जुलाई 24, 2021) को भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने धमकी देते हुए कहा था, “किसान संसद से किसानों ने गूँगी-बहरी सरकार को जगाने का काम किया है। किसान संसद चलाना भी जानता है और अनदेखी करने वालों को गाँव में सबक सिखाना भी जानता है। भुलावे में कोई न रहे।”

पिछले दिनों भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने अब समानांतर संसद चलाने की धमकी दी थी। टिकैत ने यह धमकी आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार द्वारा ‘किसानों’ को केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति देने के बाद दी। वहीं, प्रदर्शन स्थल पर तथाकथित किसानों ने विरोध प्रदर्शन कवर करने गए मीडियाकर्मी पर लाठियों से हमला किया।

राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए लगभग एक साल से विरोध प्रदर्शन कर रहे टिकैत ने कहा, “किसान अपनी संसद चलाएँगे। सदन में किसानों के लिए आवाज नहीं उठाने पर संसद सदस्यों (सांसदों) की उनके निर्वाचन क्षेत्रों में आलोचना की जाएगी।”

इससे पहले टिकैत ने सरकार को धमकाया कि अगर इस बार कानून रद्द नहीं किया गया तो किसानों के ट्रैक्टर लाल किले के अलावा संसद का भी रास्ता जानते हैं। इसके अलावा पंजाब के पटियाला में किसानों ने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर हमला कर दिया था। भाजपा नेताओं ने पुलिस के इशारे पर किसानों के द्वारा मारपीट करने का आरोप लगाया।

गौरतलब है कि 26 जनवरी को किसानों के विरोध के दौरान कई लोग पुलिस से भिड़ गए थे, जबकि कई लोग लाल किले में घुस गए थे और वहाँ धार्मिक झंडा भी फहराया था। प्रदर्शनकारी प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली के लिए निर्धारित मार्ग से भटक गए और पुलिस पर हमला कर दिया। कई प्रदर्शनकारियों को लाठियों, तलवारों से पुलिसकर्मियों का पीछा करते देखा गया और कई ने अपने ट्रैक्टरों से बसों में टक्कर मार दी।

भारत में अवैध रूप से घुसे 15 रोहिंग्या असम में दबोचे गए, UP के अलीगढ़ में रह रहे थे सभी

रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) ने शनिवार (24 जुलाई 2021) को असम के करीमगंज जिले के बदरपुर रेलवे स्टेशन से 15 अवैध रोहिंग्या घुसपैठिये को हिरासत में ले लिया, जिनमें 6 नाबालिग और 3 महिलाएँ शामिल हैं। ये लोग त्रिपुरा की राजधानी अगरतला जाने के लिए स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। इस दौरान इनकी संदिग्ध गतिविधियों को देखकर आरपीएफ ने हिरासत में ले लिया।

पूछताछ के दौरान पता चला कि उनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं है और ये अवैध रूप में भारत में दाखिल हुए थे। उन्होंने आरपीएफ को यह भी बताया कि ये लोग उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में रह रहे थे और वहाँ से कुछ दिन पहले ही सिलीगुड़ी पहुँचे थे। उसके बाद पैसेंजर ट्रेन द्वारा सिलीगुड़ी से बदरपुर रेलवे स्टेशन पहुँचे थे। यहाँ से ये लोग अगरतला जाने के लिए ट्रेन का इंतजार कर रहे थे।

आरपीएफ का कहना है, “15 रोहिंग्या मुसलमानों में 6 नाबालिग और 9 वयस्क हैं, जिनमें 3 महिलाएँ भी शामिल हैं। ये अगरतला जाने वाले थे और सिलचर-अगरतला ट्रेन में चढ़ने के लिए प्लेटफॉर्म पर बैठकर उसका इंतजार कर रहे थे।”

पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे म्यांमार के रखाईन प्रांत के मांडू के रहने वाले हैं और रोहिंग्या समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। आरपीएफ ने आगे की जाँच के लिए इन्हें जीआरपी के हवाले कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि ये लोग त्रिपुरा के रास्ते बांग्लादेश जाने की कोशिश कर रहे थे।

इनके पास से तीन पहचान पत्र भी बरामद हुआ है, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा शरणार्थियों को जारी किया जाने वाला पहचान पत्र बताया जा रहा है। इसके साथ ही इनके पास से 9 मोबाइल फोन और 50,000 रुपये नकद बरामद किये गए हैं।

हिरासत में लिए गए लोगों में कौसर (19), मोहम्मद अयूब (28), मोहम्मद सैयद (30), सुबेरा (18), मोहम्मद अनीस (14), मोहम्मद इस्माईल (16), मोहम्मद रफीक (19), सुना मेहर (28), जैनब बेगम (30), राफिया (7), मुस्लिम (5), दिलारा (9), नूर अजीदा (7), मोहम्मद इस्लाम (6) और नूर फातिमा (3) शामिल हैं।

‘सचिन पायलट को CM बनाओ’: कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं के सामने जम कर हंगामा, मंत्रिमंडल विस्तार से पहले बुलाई थी बैठक

राजस्थान कॉन्ग्रेस में कलह शांत करने के लिए कैबिनेट विस्तार की योजना बनाई गई, लेकिन अब वो भी सफल होती नहीं दिख रही है। मंत्रिमंडल में फेरबदल से पहले ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री सचिन पायलट के समर्थकों के बीच बहस और हंगामेबाजी हुई। ये सब राजस्थान के में पार्टी के अध्यक्ष और शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा बुलाई गई एक बैठक में हुआ है। बैठक के शुरू होते पायलट समर्थक समूह उग्र हो गया।

रविवार (25 जुलाई, 2021) को ये आपात बैठक बुलाई गई थी। कॉन्ग्रेस के कई कार्यकर्ताओं ने उस बैठक में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट को अशोक गहलोत की जगह नया मुख्यमंत्री बनाने के लिए हंगामा शुरू कर दिया। पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और राजस्‍थान प्रभारी अजय माकन की मौजूदगी में ये सर हंगामा हुआ। हालाँकि, बैठक में पहुँचे पायलट इतना कुछ होने के बावजूद खुद शांत ही रहे और कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

कॉन्ग्रेस को लगता है कि पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के साथ ही उसने वहाँ का कलह समाप्त कर दिया है। इसीलिए, पार्टी हाईकमान अब राजस्थान पर ध्यान दे रहा है। पार्टी के दोनों राष्ट्रीय नेता मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ चर्चा के बाद दिल्ली रवाना हो गए हैं। दोपहर 12 बजे वो वहाँ से निकले। अंदाज लगाया जा रहा है कि आबकी कैबिनेट विस्तार में गहलोत खेमे के कई मंत्रियों का पत्ता कटेगा।

वहीं सचिन पायलट खेमे के कुछ विधायकों को मंत्री बनाया जाएगा। खबर ये भी है कि अब अशोक गहलोत के हाथ में कुछ नहीं रहा और सोनिया गाँधी खुद सारे नामों पर मुहर लगाएँगी। यानि, अब आलाकमान ही सब कुछ करेगा। गहलोत सरकार में नियमानुसार 9 और मंत्री बनाए जा सकते हैं। जिला और ब्लॉक स्तर की कॉन्ग्रेस की टीमों का भी गठन होना है, ऐसे में जुलाई के अंत में अजय माकन फिर राजस्थान आएँगे।

अब राजस्थान से प्रस्तावित नामों की सूची लेकर दिल्ली लौटे माकन और राव की सोनिया गाँधी से मुलाकात हो सकती है। सोनिया गाँधी की ही झंडी के बाद मंत्रिमंडल विस्तार के लिए तारीखों का ऐलान भी होगा। लेकिन, सचिन पायलट के समर्थकों द्वारा ने बखेड़ा खड़ा किए जाने से पार्टी में फिर से चिंता की लहर दौड़ गई है। इसी सप्ताह कभी मंत्रिमंडल विस्तार का ऐलान हो सकता है। इसके बाद दोनों खेमा अगली रणनीति तय करेगा।

न्यूड शूट के लिए उमेश कामत ने हर दिन ऑफर किए थे ₹25000: राज कुंद्रा मामले में एक और मॉडल ने खोली पोल

राज कुंद्रा मामले में रोजाना नए खुलासे हो रहे हैं। ऐसी कई स्ट्रगलिंग एक्ट्रेस की कहानियाँ अब सामने आ रही हैं, जो पोर्नोग्राफी का शिकार हुई हैं। हाल ही में एक और एक्ट्रेस ने अपना दर्द बयाँ किया है और बताया है कि कैसे उसे पॉर्न बिजनेस में लाने के लिए लालच दिया गया। 

पॉर्न बिजनेस में आने का दिया लालच

स्ट्रगलिंग एक्ट्रेस निकिता फ्लोरा सिंह ने राज कुंद्रा के पीए उमेश कामत पर पॉर्न बिजनेस में लाने के लिए लालच देने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस बात की जानकारी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर दी।

‘एक लड़की का हुआ तलाक’

निकिता फ्लोरा सिंह ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, “मुझे उमेश कामत ने पिछले साल नवंबर में राज कुंद्रा के ऐप हॉटशॉट के लिए न्यूड शूट करने के लिए कहा था लेकिन मैंने मना कर दिया। उमेश कामत ने मुझे रोजाना 25 हजार रुपए देने की पेशकश की लेकिन मैंने न्यूड होकर शूट करने से इनकार कर दिया। हैरानी की बात कि अब दोनों गिरफ्तार हो गए हैं। भगवान का शुक्र है कि मैं राज कुंद्रा जैसे बड़े नाम के झाँसे में नही आईं, जिसने कई मासूम लड़कियों को वल्गर एक्ट का लालच दिया। झारखंड की एक लड़की का अपने पति से तलाक हो गया क्योंकि उसने उनके लिए शूटिंग की थी।”

उल्लेखनीय है कि पॉर्न फ़िल्में बना कर ऐप के माध्यम से बेच कर कमाई करने के आरोपों में फँसे अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। अब उनकी ही कंपनी के 4 कर्मचारी उनके खिलाफ गवाह बनने के लिए आगे आए हैं। ये चारों इस मामले में महत्वपूर्ण गवाह साबित होंगे। राज कुंद्रा को 19 जुलाई, 2021 को गिरफ्तार किया गया था। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच का कहना है कि राज कुंद्रा व उनके साथी जाँच व पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे हैं।

शिल्पा शेट्टी से भी हुई पूछताछ

बताते चलें कि पोर्नोग्राफी मामले में राज कुंद्रा के फँसने के बाद शुक्रवार (जुलाई 23, 2021) को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीम ने कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी के बंगले पर भी छापेमारी की थी। साथ ही क्राइम ब्रांच ने पोर्नोग्राफी मामले में शिल्पा शेट्टी का स्टेटमेंट भी दर्ज किया था।

सोमवार को होगी सुनवाई

राज कुंद्रा की जमानत याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट सोमवार (जुलाई 26, 2021) को सुनवाई करेगा। राज कुंद्रा को पॉर्न और अश्लील फिल्में बनाने और उन्हें ऐप पर गैरकानूनी तरीके से स्ट्रीम किए जाने का आरोप है। हालाँकि राज कुंद्रा ने खुद पर लगे आरोपों से साफ इनकार किया है और कहा है कि उनकी गिरफ्तारी गैर-कानूनी है। पुलिस ने अश्लील और पॉर्न फिल्में बनाने का मामला फरवरी 2021 में दर्ज किया था। इसके बाद मामले की जाँच में पॉर्न फिल्में बनाने वाले रैकेट के तार राज कुंद्रा और उनकी कंपनी वियान इंडस्ट्रीज से जुड़े पाए गए। गौरतलब है कि एक्ट्रेस पूनम पांडे, शर्लिन चोपड़ा और सागरिका शोना सुमन पहले ही राज पर कई आरोप लगा चुकी हैं।

उन्नाव में शैक्षणिक संस्थान को अवैध मस्जिद में बदलने की कोशिश, ग्रामीणों की शिकायत पर यूपी पुलिस ने रोका निर्माण कार्य

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने गाँव में अवैध तरीके से मस्जिद बनाने की कोशिश की है। इस संबंध में हिन्दू समुदाय के लोगों ने इसका विरोध किया है। 22 जुलाई को बेहटामुजावर थाना क्षेत्र के गाँव मिट्ठूखेड़ा, सिकंदरपुरा, तहसील सफीपुर के निवासियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायती पत्र भेजकर कार्रवाई करने की माँग की।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मुस्लिम समुदाय के लोग गाँव में कई वर्षों से मौजूद शैक्षणिक संस्थान को एक अवैध मजहबी स्थान मस्जिद में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद हिंदू समुदाय के करीब डेढ़ दर्जन लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायती पत्र भेजकर कार्रवाई की माँग की है। गाँव में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस को इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद एक टीम वहाँ पहुँची और दोनों पक्षों में समझौता कराया। बताया जा रहा है कि पुलिस ने गाँव के 42 लोगों के खिलाफ शांति भंग करने से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

बेहटामुजावर थाना क्षेत्र के गाँव मिट्ठूखेड़ा निवासी मुन्नीलाल, प्रेमशंकर, सुनील कुमार, रमेश सिंह, लवकुश व रामनरेश आदि ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजा है। शिकायत में कहा गया है कि गाँव में 6 मुस्लिम और 35 हिंदू परिवार हैं। मुस्लिम परिवार गाँव में एक ऐसे स्थान पर जहाँ एक शैक्षणिक संस्थान पहले से मौजूद है, वहाँ पर एक अवैध मस्जिद बनाने के लिए बाहर से धन जुटा रहे हैं। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि असामाजिक तत्व निर्माणाधीन मस्जिद में आते रहते हैं, जिससे ग्रामीणों को परेशानी हो रही है। बताया जा रहा है कि बीते 21 जुलाई को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने शिक्षण संस्थान को मस्जिद में तब्दील करने के प्रयास में लाउडस्पीकर और माइक लगाने की भी कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों द्वारा विरोध करने के बाद इस योजना फिलहाल टाल दिया गया।

उस शिकायत को उन्नाव के आशीष सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर साझा किया है। उनके ट्वीट के जवाब में, उन्नाव पुलिस ने जवाब दिया कि पुलिस द्वारा निर्माण कार्य रोक दिया गया है और 16 लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है।

दैनिक जागरण ने बेहटा मुजावर के थाना प्रभारी इंद्रपाल सिंह के हवाले से बताया दोनों पक्षों के बीच एसडीएम के सामने समझौता करा दिया गया है। निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई है। धारा 151 (संज्ञेय अपराधों के रोकने के लिए गिरफ्तारी) के तहत कार्रवाई करते हुए और गाँव में शांति बनाए रखने लिए एक समुदाय के 16 और दूसरे समुदाय के 26 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। ग्रामीणों ने बताया कि कथित धार्मिक स्थल पर पिछले करीब 15 वर्षों से शिक्षण संस्थान चल रहा है।