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‘फर्जी जाति प्रमाण-पत्र से बने RAS अधिकारी’: राजस्थान के शिक्षा मंत्री के ‘प्रतिभावान रिश्तेदारों’ को लेकर नया दावा

राजस्थान कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और अशोक गहलोत सरकार में शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के रिश्तेदारों को राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के इंटरव्यू में एक समान नंबर मिलने का मामला अभी शांत नहीं हुआ था कि उन पर एक नया आरोप लगाया जा रहा है। जयपुर निवासी वकील गोवर्धन सिंह एवं अन्य ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के चेयरमैन को पत्र लिखकर कहा है कि डोटासरा के रिश्तेदारों ने RAS में चयनित होने के लिए OBC के फर्जी प्रमाण-पत्र का उपयोग किया है।

गोवर्धन एवं अन्य ने RPSC के चेयरमैन डॉ. भूपेन्द्र यादव एवं 7 अन्य सदस्यों को पत्र लिखा है। इसमें बताया गया है कि डोटासरा के समधी चुरू के जिला शिक्षा अधिकारी रमेश चंद्र पूनिया को सेवा में 32 वर्ष 3 माह की अवधि पूरी होने के बाद प्रधानाध्यापक पद पर प्रमोशन मिल गया था। ऐसे में उनकी संतान OBC क्रीमीलेयर में आएगी और उन्हें OBC आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता। गोवर्धन समेत अन्य ने आरोप लगाया है कि फिर भी रमेश चंद्र ने अपनी तीनों संतानों प्रतिभा, गौरव और प्रभा का OBC का प्रमाण-पत्र बनवा लिया। प्रतिभा डोटासरा की बहू हैं। वह RAS 2016 में ही चयनित हो गई थीं। उनके भाई गौरव और बहन प्रभा RAS 2018 में चयनित हुए हैं।

गोवर्धन एवं अन्य ने RPSC चेयरमैन डॉ. भूपेन्द्र यादव एवं 7 अन्य सदस्यों को भेजे गए पत्र में कहा है कि RPSC प्रशासन फर्जी प्रमा- पत्र मामले में सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कराए अन्यथा RPSC चेयरमैन एवं अन्य सदस्यों एवं डोटासरा के रिश्तेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। सूचना-पत्र में बताया गया है कि फर्जी प्रमाण पत्र के मामले में आईपीसी की धारा 420, 409, 406, 467, 468, 471, 166, 167 और 120-B के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।

हालाँकि डोटासरा के समधी रमेश चंद्र पूनिया ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों का पूरी तरह से खंडन किया है। उन्होंने कहा कि बच्चों का OBC प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए उन्होंने वेतन संबंधी एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रशासन को उपलब्ध कराए जिसके बाद तय योग्यता के आधार पर ही उनके बच्चों का प्रमाण-पत्र जारी किया गया है।

ज्ञात हो कि पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब RAS 2018 के इंटरव्यू में डोटासरा की बहू के भाई-बहन को RAS इंटरव्यू में 80-80 नंबर मिले, जबकि दोनों ही लिखित परीक्षा में 50 फीसदी अंक भी प्राप्त नहीं कर सके। इसके अलावा RAS 2016 में चयनित डोटासरा की बहू प्रतिभा को भी इंटरव्यू में 80 नंबर ही मिले थे। वहीं डोटासरा के बेटे अविनाश को उस साल इंटरव्यू में 85 नंबर मिले थी। हालाँकि दोनों ही परीक्षाओं के टॉपर्स की बात करें तो RAS 2016 के टॉपर भवानी सिंह को इंटरव्यू में मात्र 70 नंबर, जबकि RAS 2018 की टॉपर मुक्ता राव को 77 नंबर मिले। RAS 2016 लिखित परीक्षा में अविनाश 50 फीसदी हासिल करने में नाकाम रहे थे तो प्रतिभा को 800 की लिखित परीक्षा में 402 नंबर मिले थे।

मीडिया खबरों के मुताबिक RAS के परिणाम सामने आने के बाद शिक्षा मंत्री डोटासरा पर पद के दुरुपयोग का आरोप भारतीय जनता पार्टी लगा रही है। भाजपा का कहना है कि शिक्षा मंत्री ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रिश्तेदारों को अफसर बनवाने का काम किया है। लेकिन डोटासरा रिश्तेदारों को ‘प्रतिभावान’ बता इन सवालों को खारिज कर चुके हैं।

गौरतलब है कि डोटासरा के रिश्तेदारों को RAS के इंटरव्यू में एक समान नंबर मिलने के मामले के अलावा भी इंटरव्यू प्रक्रिया पहले से ही सवालों के घेरे में है। साक्षात्कार के दौरान ही 23 लाख रु. घूस लेकर अच्छे नंबर दिलाने के मामले में कनिष्ठ लेखाकार को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसमें राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की सदस्य राजकुमारी गुर्जर के पति का भी नाम सामने आया है।

करुवन्नूर बैंक घोटाला: फर्जी नाम पर बाँटे लोन, फिर करोड़ों का वसूली नोटिस; विपक्ष ने बताया- केरल का सबसे बड़ा घोटाला

केरल के त्रिशूर जिले के इरिंजालकुडा क्षेत्र में स्थित करुवन्नूर सेवा सहकारी बैंक में हुए कर्ज घोटाले के मामले में विपक्ष ने सत्ताधारी एलडीएफ सरकार पर आरोप लगाया है। विपक्ष ने कहा कि यह केरल के इतिहास की सबसे बड़ी बैंक लूट है और सीपीएम के नेतृत्व ने इस पर कार्रवाई करने की बजाय घोटाले के आरोपितों को संरक्षण देने का काम किया है।

करुवन्नूर सेवा सहकारी बैंक को सीपीएम नियंत्रित करती है। कर्ज घोटाले के संबंध में विधानसभा में चर्चा करने के लिए प्रस्ताव पेश करते हुए कॉन्ग्रेस विधायक शफ़ी पराम्बिल ने कहा कि यह घोटाला केरल के इतिहास का सबसे बड़ा बैंक घोटाला है और इस घोटाले के आगे तो पॉपुलर हीस्ट सीरीज (money heist) भी फीकी दिखाई दे रही है। पराम्बिल ने बताया कि यह कर्ज घोटाला लगभग 350 करोड़ रुपए का है।

पराम्बिल ने यह भी आरोप लगाया कि करुवन्नूर बैंक की गवर्निंग काउंसिल के कुछ सदस्यों द्वारा बैंक को लूटे जाने की जानकारी मिलने के बाद भी सीपीएम नेतृत्व ने घोटाले को दबाए रखा और गवर्निंग काउंसिल को निलंबित करने के स्थान पर घोटाले के आरोपितों को संरक्षण प्रदान करने के काम किया गया। विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने भी सवाल उठाया कि घोटाला 2018 में ही सामने आया था, उसके 3 साल बाद गुरुवार (23 जुलाई 2021) को गवर्निंग काउंसिल को बर्खास्त किया गया। सतीशन का यहाँ तक कहना है कि घोटाले की जाँच कर रहे सीपीएम के नेता घोटाले से पूरी तरह से परिचित थे। ऐसे में जब अपराध हुआ है तो क्या इस मुद्दे को पार्टी के अंदर सुलझाया जाना पर्याप्त है।

ऐसे हुआ करोड़ों के कर्ज का खेल:

पराम्बिल ने घोटाले के संबंध में एक महिला का उदाहरण दिया जो राष्ट्रीय बैंक से कर्ज लेना चाहती थी। महिला एक राष्ट्रीयकृत बैंक में ऋण लेने के लिए गई, लेकिन वहाँ इस मामले में गिरफ्तार आरोपित अरुण किरण उसे मिला और उसने महिला को करुवन्नूर सेवा सहकारी बैंक से कर्ज लेने के लिए कहा। इसके बाद महिला ने लोन के लिए सहकारी बैंक में सभी दस्तावेज जमा कर दिए। उसके बाद महिला ने इस बैंक के अधिकारियों से कोई संपर्क नहीं किया और ना ही उसके दस्तावेज ही वापस मिले। पराम्बिल ने बताया कि कुछ समय के बाद उस महिला के पास 3 करोड़ रुपए जमा करने का नोटिस आ गया, जबकि उस महिला को बैंक से एक रुपए का कर्ज नहीं मिला था।

पराम्बिल ने आरोप लगाते हुए कहा कि कर्ज देने के लिए 50 काल्पनिक नामों का प्रयोग किया गया और प्रत्येक को 50-50 लाख का कर्ज करुवन्नूर बैंक से दिया गया। इसके अलावा, कई ऐसे भी कर्जधारक थे जिन्होंने बैंक से 13 से 26 करोड़ रुपए तक का कर्ज लिया, लेकिन उसे चुकता नहीं किया। रिपोर्ट के मुतबाकि, घोटालेबाजों ने शुरू में 50,000 रुपए का कर्ज दिया और उसके बाद दस्तावेजों पर हस्ताक्षर के बाद 50 लाख रुपए का कर्ज लिया। खास बात ये है कि जिनके नाम पर ये धोखाधड़ी की गई, वो भी सीपीएम के ही समर्थक हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैंक में पाँच साल में 300 करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला हुआ है। सहकारी क्षेत्र के नियमों के अनुसार, कुल निवेश का केवल 70 प्रतिशत ही बैंक ऋण के रूप में जारी कर सकता है। लेकिन ऐसे सभी नियमों का उल्लंघन करते हुए बैंक ने 2018-19 में 437.71 करोड़ रुपए के ऋण जारी किए, जबकि कुल निवेश सिर्फ 401.78 करोड़ रुपए ही था। बैंक फ्रॉड के मामले में इससे पहले इरिंजालकुडा पुलिस ने 120 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की शिकायत पर बैंक के पूर्व सचिव और प्रबंधक सहित छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। हालाँकि, अब पता चला है कि घोटाला पहले शिकायत की गई रकम से तीन गुना अधिक है।

पंजाब: मंदिर में तोड़फोड़, भगवान शिव और हनुमान जी की मूर्तियों को तोड़ डाला; देवी-देवताओं की तस्वीरों को जलाकर किया राख

कॉन्ग्रेस शासित पंजाब में एक बार फिर से हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया है। बुधवार (21 जुलाई 2021) की रात भवानीगढ़ के संगरूर-पटियाला रोड पर कलौदी घनवड़ा गाँव स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर में अराजक तत्वों ने तोड़फोड़ की। वहाँ रखी मूर्तियों को खंडित कर दिया। मंदिर में लगे देवी-देवताओं के तस्वीरों को भी जल दिया। राज्य में इस महीने इस तरह की यह दूसरी घटना है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू मंदिर में घृणित अपराध का खुलासा दो स्थानीय लोगों बग्गा राम और तारी राम ने किया। गुरुवार (22 जुलाई 2021) सुबह 5 बजे ये दोनों सैर के लिए निकले थे तो उन्होंने मंदिर का हाल देखा। इसके बाद उन्होंने ग्राम प्रधान को इसके बारे में बताया। मंदिर में तोड़फोड़ का पता चलते ही कई ग्रामीणों समेत हिंदू संगठनों के लोग भी मौके पर पहुँचे।

डेली पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीणों ने बताया कि जब वे मंदिर पहुँचे तो उन्होंने देखा कि भगवान शिव और हनुमान जी की मूर्तियों को नष्ट कर दिया गया था। त्रिशूल तोड़ दिया गया था। तस्वीरें जलकर राख हो चुकीं थी। मंदिर खुली जगह में सड़क के किनारे स्थित है। इसमें कोई सीसीटीवी भी नहीं लगा है। बहरहाल ग्राम प्रधान गुरजंत सिंह की शिकायत पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है।

घटना से आक्रोशित बजरंग दल के लोगों ने प्रदर्शन भी किया है। वहीं ग्राम प्रधान ने ग्रामीणों और बजरंग दल के लोगों को मंदिर को फिर से बनाने का आश्वासन दिया है। इस मामले में डीएसपी सतपाल सिंह ने कहा, “मंदिर खुली जगह में है और रात के वक्त तोड़फोड़ की गई थी। संगरूर थाना पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।” उन्होंने आश्वासन दिया है कि घटना को अंजाम देने वाले अराजक तत्वों को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।

अहमदगढ़ के शिव मंदिर में तोड़फोड़

इससे पहले बीते 10 जुलाई 2021 को पंजाब के मलेरकोटला जिले के अहमदगढ़ के सरौद गाँव में शिव मंदिर में तोड़फोड़ का मामला सामने आया था। मंदिर की देखरेख करने वाले पूर्व कैप्टन परमजीत कुमार मंदिर गए तो उन्होंने देखा कि शिवलिंग को तोड़ा गया था और उसका एक हिस्सा बाहर पड़ा हुआ था। कुमार ने तुरंत इसके बारे में पुलिस को सूचना दी। इसके बाद अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जाँच शुरू की गई थी।

ऑपइंडिया से बात करते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) मलेरकोटला के जिलाध्यक्ष अमन थापर ने कहा था कि एक अज्ञात व्यक्ति ने मंदिर में भगवान नंदी की मूर्ति और शिवलिंग को तोड़ दिया था। उन्होंने कहा था, “प्रशासन ने मंदिर परिसर को बंद कर दिया है। हम पुलिस से मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दोषियों को गिरफ्तार करने की माँग करते हैं।” थापर ने कहा था कि पंजाब में इस तरह की घटनाएँ तेजी से बढ़ रही हैं। हाल ही में राज्य में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की खबर आई थी। उन्होंने कहा था, “यह राज्य में समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा करने का एक प्रयास है।”

स्टेन स्वामी पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने वापस लिए अपने शब्द: कहा था- हम उनके कार्यों का सम्मान करते हैं, NIA ने जताई थी आपत्ति

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के विरोध के बाद एल्गार परिषद मामले में आरोपित कथित आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता स्टेन स्वामी पर की गई टिप्पणी को आज (जुलाई 23, 2021) बॉम्बे हाईकोर्ट ने वापस ले लिया। जस्टिस एसएस शिंदे ने इस संबंध में कहा कि उन्हें ऐसा लगता है कि उनके कुछ कहने से NIA को दुख पहुँचा है। इसलिए वह अपने शब्द वापस लेते हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट हमेशा संतुलित रहने का प्रयास करता है। हालाँकि जज ने पहले की टिप्पणी को सही ठहराते हुए कहा कि वे भी इंसान हैं।

बता दें कि 19 जुलाई 2021 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्टेन स्वामी के निधन के बाद उनकी प्रशंसा की थी। जस्टिस ने कहा था कि वह उनके द्वारा किए गए कार्यों का सम्मान करते है। न्यायमूर्ति शिंदे ने कहा था कि स्वामी के अंतिम संस्कार ने कहीं न कहीं उन्हें छुआ। वह बोले, “सामान्य तौर पर हमारे पास वक्त नहीं होता लेकिन मैंने अंतिम संस्कार (स्वामी का) देखा। यह बहुत सम्मानजनक था। वह काफी शानदार व्यक्ति थे। उन्होंने समाज के लिए काम किया था। उनके कार्य के प्रति बहुत सम्मान है। कानूनन, उनके खिलाफ जो भी है वह अलग मामला है।”

उल्लेखनीय है कि भीमा कोरेगाँव-एल्गार परिषद मामले में 84 वर्षीय स्टेन स्वामी को एनआईए ने 8 अक्टूबर 2020 को गिरफ्तार किया था। लेकिन, स्वास्थ्य समस्याओं के कारण 5 जुलाई 2021 को मुंबई के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु के बाद, जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एनजे जमादार की बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच ने अधिकारियों से मौत की जाँच करने को कहा था।

19 जुलाई को एक अपील, जिसमें एक्स सेंट जेवियर्स कॉलेज के प्रिंसिपल फादर फ्रेजर मस्कारेन (Principal Father Frazer Mascaren) को स्वामी की मृत्यु मामले में एक परिजन के तौर पर मजिस्ट्रियल जाँच में शामिल करने की अनुमति माँगी गई थी, उसी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अपनी यह टिप्पणी की। साथ ही यह बताया कि उनकी ओर से यह सुनिश्चित किया गया था कि स्टेन स्वामी की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें हर संभव चिकित्सा सुविधा मिले। कोर्ट ने यह भी कहा कि मस्कारेन को कोर्ट से या स्टेन स्वामी के उपचार को लेकर कोई शिकायत नहीं हैं।

बेटे को जान से मारने और खतना कराने की धमकी, रेप और जबरन धर्मान्तरण: शाहिद और आमिर गुरुग्राम से गिरफ्तार

राजस्थान की राजधानी जयपुर के प्रतापनगर में रहने वाली हिन्दू महिला के रेप और जबरन धर्मांतरण के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपित शाहिद मेव और उसके भाई आमिर हुसैन को गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित शाहिद साल 2016 में काम दिलाने का लालच देकर महिला और उसके बेटे को कश्मीर लेकर गया था। वहाँ जाने के बाद महिला के बेटे को जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ रेप किया और उसका जबरन धर्मान्तरण करवा दिया था।

ज्ञात हो कि 16 जुलाई 2021 को पीड़िता ने प्रताप नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस द्वारा अलग-अलग टीमों का गठन कर आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए कई जगह छापेमारी की गई। इसी दौरान पुलिस को आरोपित शाहिद और आमिर के गुरुग्राम में होने की सूचना मिली, जिस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

पीड़िता के अनुसार, उसकी आर्थिक हालत ठीक नहीं थी। ऐसे में आरोपित शाहिद ने साल 2016 में उसे अच्छा काम दिलाने के बहाने कश्मीर लेकर गया था। वहाँ जाने के बाद महिला के बेटे को जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ रेप किया और उसका जबरन धर्मान्तरण करवा दिया। धर्मांतरण के बाद शाहिद ने महिला का नाम बदलकर सोनम और उसके बेटे का नाम सरफराज कर दिया।

आरोपित शाहिद द्वारा जबरन संबंध बनाए जाने के कारण पीड़िता गर्भवती हो गई और उसने एक बेटी को भी जन्म दिया। घटना के 4 साल बाद आरोपितों के चंगुल से छूटकर महिला थाने पहुँची तो वहाँ पुलिस ने मामले को दर्ज करने से मना कर दिया। इसके बाद पीड़िता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर एक महिला और काजी समेत 5 आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

पीड़िता ने शाहिद, आमिर हुसैन, फिरदौस, बिस्मिल्लाह और काजी के खिलाफ प्रतापनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 341, 384, 376, 392, 406, 363, 365, 366 के तहत केस दर्ज किया गया है। वहीं, महिला का केस दर्ज नहीं करने के मामले में प्रतापनगर थाने के एसएचओ श्रीमोहन मीणा को भी लाइन हाजिर कर दिया गया था।

‘राजपूत बॉय’ रवीन्द्र जडेजा का ट्वीट, रैना के ‘मैं ब्राह्मण हूँ’ के बाद सोशल मीडिया पर जाति-आरक्षण को लेकर बवाल

भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी रवीन्द्र जडेजा ने एक बार फिर से सोशल मीडिया पर खुद को राजपूत ब्वॉय बताया है। इसको लेकर नेटिजन्स सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इससे पहले पूर्व क्रिकेटर सुरेश रैना ने ‘मैं ब्राह्मण हूँ’ वाला बयान दिया था, जिसके बाद रैना के साथ जडेजा पर जातिवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया था।

इसके बाद अब जडेजा का यह ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उन्होंने ‘राजपूत ब्वॉय फॉरएवर’ जय हिंद लिखा।

उनके इस बयान पर सोशल मीडिया पर नेटिजन्स ने कई प्रकार के कमेंट किए। कुछ ने सराहा तो कुछ ने लताड़ा। सराहने वालों में ‘अहं ब्रम्हास्मि’ नाम के यूजर ने कहा कि जडेजा को अपने बयान पर शर्मिंदा होने के बजाय जाति और धर्म के नाम पर आरक्षण लेने वालों को शर्मिंदा होना चाहिए। सभी गौरवान्वित ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ आदि अपनी मेहनत से सफलता की ऊँचाइयों पर बैठे हैं, फिर चाहे वह सुरेश रैना हों या गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई।

एक अन्य यूजर इली मेहरा ने जडेजा के ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए कहा कि वह निश्चित ही एक एक गर्वित राजपूत हैं। एक बार एक इंटरव्यू में एक पत्रकार ने महेंन्द्र सिंह धोनी से एक सवाल पूछा कि आपके पूर्वज भारत के किस हिस्से से हैं? आम धारणा यह है कि आप जाट हैं। उन्होंने उत्तर दिया, “मेरे माता-पिता उत्तरांचल से हैं। मैं एक राजपूत हूँ, उत्तराँचल में बहुत सारे राजपूत हैं।”

पीयूष सिंह नाम के यूजर ने कहा, “आप क्षत्रिय, ब्राह्मण, ओबीसी या एससी किसी भी जाति के हो सकते हैं। केवल रैना या जडेजा ही नहीं, आप सभी को अपनी जाति पर गर्व होना चाहिए। लेकिन याद रखें कि हमारा धर्म और हमारा राष्ट्रवाद सबसे ऊपर होना चाहिए। जातिवाद से विभाजित न हों, हिंदू धर्म और राष्ट्रवाद पर एकजुट हों।”

प्रखर गौर नाम के ट्विटर यूजर ने कहा कि देश में जातिवाद का अंत तभी होगा, जब आरक्षण खत्म होगा। आरक्षण को सपोर्ट करोगे तो जाति व्यवस्था कैसे खत्म होगी। नौकरी लोगे आरक्षण के दम पर।

रवीन्द्र जडेजा के राजपूत कमेंट पर कौस्तुव द्विवेदी ने लिखा, “राजपूत वो लोग हैं, जिन्होंने इस देश की 100 वर्षों तक रक्षा की है और उन्होंने सचमुच राष्ट्र के लिए खून बहाया है। यही उनका सम्मान है। यही उनका गौरव है। हम कम से कम इतना तो कर ही सकते हैं कि हम हर गर्वित राजपूत की उस भावना का सम्मान कर सकते हैं।”

सुरेश रैना ने खुद को बताया था ब्राह्मण

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी सुरेश रैना ने तमिलनाडु प्रीमियर लीग में कंमेंटेटर के तौर पर बुलाया गया था, जहाँ उन्होंने तमिलनाडु की संस्कृति के बारे में बात करते हुए कहा था कि वो भी एक ब्राह्मण हैं, इसलिए राज्य की संस्कृति को अपनाने में उन्हें दिक्कत नहीं हुई है। इसी को लेकर उनकी काफी आलोचना की गई थी। लोगों ने उन्हें जातिवादी बताने की कोशिश की थी।

4 MP लोकसभा में जनसंख्या नियंत्रण पर पेश करेंगे प्राइवेट बिल, गोरखपुर वाले रवि किशन भी शामिल

लोकसभा में शुक्रवार (23 जुलाई 2021) को जनसंख्या नियंत्रण और उससे जुड़े मुद्दों पर 4 प्राइवेट मेम्बर बिल पेश किए जाएँगे। इनमें से 3 भाजपा सांसदों द्वारा पेश किए जाएँगे, जबकि 1 बिल जेडीयू सांसद द्वारा पेश किया जाएगा।

लोकसभा में 23 जुलाई को सदन में पेश होने वाले प्राइवेट मेम्बर बिल की सूची में इन चारों सांसदों के द्वारा पेश किए जाने वाले जनसंख्या नियंत्रण से संबंधित बिल की जानकारी दी गई है। जिन भाजपा सांसदों द्वारा लोकसभा में बिल पेश किया जा रहा है उनमें उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से सांसद रवि किशन भी शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में पहले ही जनसंख्या नियंत्रण कानून का ड्राफ्ट जारी किया जा चुका है।

रवि किशन के अलावा झारखंड के पलामू से भाजपा सांसद विष्णु दयाल राम और बिहार के औरंगाबाद से भाजपा सांसद सुशील कुमार सिंह भी जनसंख्या नियंत्रण पर प्राइवेट मेम्बर बिल पेश करने वाले हैं। भाजपा सांसदों के अलावा बिहार के ही गोपलगंज से जनता दल (यूनाइटेड) सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन भी जनसंख्या नियंत्रण से संबंधित मामलों पर लोकसभा में प्राइवेट मेम्बर बिल पेश करेंगे।

पिछले कुछ समय से देश में लगातार जनसंख्या नियंत्रण नीति की माँग की जा रही है। उत्तर प्रदेश और असम की भाजपा सरकारों ने तो इस पर काम भी शुरू कर दिया है। असम में हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली सरकार के द्वारा दो बच्चों वाली नीति लागू की जा चुकी है। हालाँकि देश भर में यह माँग उठाई जा रही है कि जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसे कानून का निर्माण किया जाए जो सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर समान रूप से लागू हो।

क्या होता है प्राइवेट मेम्बर बिल

कोई भी सांसद जो मंत्री पद पर नहीं है, उसके द्वारा पेश गया बिल प्राइवेट मेम्बर बिल माना जाता है। इस बिल से संबंधित ड्राफ्ट के निर्माण की जिम्मेदारी इसे पेश करने वाले संसद सदस्य की होती है। संसद के किसी भी सदन में प्राइवेट मेम्बर बिल पेश किया जा सकता है, लेकिन इसे सिर्फ शुक्रवार को ही चर्चा के लिए सदन में रखा जा सकता है। हालाँकि ऐसे बिल एक महीने के एडवांस नोटिस के बाद ही पेश किए जाते हैं। अक्सर किसी मुद्दे पर सदन का ध्यान दिलाने के लिए प्राइवेट मेम्बर बिल संसद में पेश किए जाते हैं, लेकिन इनके कानून में परिवर्तित होने की गुंजाइश बहुत कम होती है। पिछली बार 1970 में कोई प्राइवेट मेम्बर बिल कानून के रूप में परिवर्तित हो सका था। उसके बाद अभी तक संसद में कोई भी प्राइवेट मेम्बर बिल पास नहीं हो सका है।

तालिबान ने 380 लोगों का किया अपहरण, 100 की हत्या कर लाश को सड़कों पर फेंका: अफगानिस्तान सरकार ने पाक को ठहराया दोषी

अफगानिस्तान में कंधार के स्पिन बोल्डक जिले में तालिबान ने 100 आम लोगों की बर्बरतापूर्ण तरीके से हत्या कर दी। इसकी पुष्टि अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय ने की है। तालिबान ने घरों को लूटने और लोगों की हत्याएँ करने के बाद वहाँ पर अपने झंडे भी फहरा दिए हैं। अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय ने इसे तालिबान का असली चेहरा बताया है।

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता मीरवाइस स्टेनेकजई ने कहा, “इस दुश्मन का यही असली चेहरा है। निर्मम आतंकियों ने पाकिस्तान में बैठे अपने हुक्मरानों के आदेश पर स्पिन बोल्डक जिले के कई इलाकों में घरों को लूटा और 100 निर्दोष नागरिकों की हत्या कर दी।” स्टेनेकजई के मुताबिक, तालिबान अपने आका के आदेश पर ऐसा कर रहा है और इस छद्म युद्ध को जातीय युद्ध का रंग देने की कोशिश कर रहा है।

अफगानिस्तान के उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने इसे बदले की भावना से किया गया नरसंहार बताया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “पीड़ितों में ज्यादातर युवा, एथलीट, सीएस कार्यकर्ता, व्यवसायी, ब्लॉगर और अफगानिस्तान सरकार के साथ सहानुभूति रखने के संदिग्ध लोग हैं। पाक एजेंसियाँ लंबे समय से शहर को डूरंड विरोधी लाइन के रूप में देखती हैं, जो बगल में बलूच और अचेकजई के साथ सहानुभूति रखता है।”

इस मामले में कंधार प्रांतीय परिषद के सदस्य फिदा मोहम्मद अफगान ने कहा कि है कि ईद के ठीक एक दिन कुछ हथियारबंद लोग घर से उनके दो बेटों का अपहरण कर ले गए और उनकी हत्या कर दी। अफगान भी भी स्पिन बोल्डक के निवासी हैं।

फिदा मोहम्मद का कहना है कि हत्या करने वालों का कहना है कि वे किसी आंदोलन (तालिबान) से नहीं जुड़े हैं, लेकिन वे जो भी हैं उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए। फिदा ने कहा, “कुछ लोगों का कहना है कि उन लोगों ने 380 नागरिकों का अपहरण किया है और जिनकी हत्या कर दी गई गई है, उनकी लाश अभी भी वहाँ पड़ी है।”

अफगानिस्तान के सुरक्षा बलों ने भी हत्या का आरोप तालिबान पर लगाते हुए कहा है कि नागरिकों के शव अभी भी स्पिन बोल्ड इलाकों में पड़े हुए हैं।

पिछले सप्ताह तालिबान ने स्पिन बोल्डक इलाके पर कब्जा कर लिया था। फ्राँस 24 द्वारा रिलीज की गई वीडियो फुटेज के मुताबिक, तालिबान के उन्मादी आतंकियों की भीड़ इलाके पर टूट पड़ी। उन्होंने घरों को लूट लिया और उस क्षेत्र में ड्यूटी कर रहे सरकारी कर्मचारियों की गाड़ियों को छीन लिया। वो बाइक पर बाजार में घूम-घूम कर लूट कर रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, स्पिन बोल्डक वही क्षेत्र है, जो कि अफगानिस्तान को सीधे-सीधे पाकिस्तान के बलूचिस्तान से जोड़ता है। इस बीच तालिबान ने 90 फीसदी अफगानिस्तान पर कब्जे का दावा किया है।

TMC सांसद शांतनु सेन निलंबित: राज्यसभा में IT मंत्री से पेपर छीन फाड़ा, उपसभापति की तरफ था उछाला

तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के सांसद शांतनु सेन को अनुशासनहीनता दिखाने के कारण राज्यसभा के मानसून सत्र से निलंबित कर दिया गया है। सेन ने गुरुवार (22 जुलाई 2021) को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के हाथ से स्टेटमेंट पेपर छीना था और फाड़ कर फेंक दिया था।

ज्ञात हो कि गुरुवार को आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव पेगासस मामले पर स्टेटमेंट देने के लिए खड़े हुए थे। इस दौरान राज्यसभा में तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसदों ने भारी हंगामा शुरू कर दिया। इसी बीच टीएमसी सांसद शांतनु सेन ने आईटी मंत्री के हाथ से स्टेटमेंट पेपर छीनकर फाड़ दिया। इतना ही नहीं, सेन ने पेपर फाड़ने के बाद उसके टुकड़े उपसभापति की कुर्सी की तरफ उछाल दिए। इसके बाद मार्शल को बीच-बचाव के लिए आना पड़ा। वहीं, कुछ अन्य विपक्षी सांसद सदन के वेल में पहुँचे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

उपसभापति हरिवंश ने वैष्णव को अपना बयान पूरा करने देने के लिए विरोध करने वाले सांसदों से अपनी-अपनी सीटों पर वापस जाने का आग्रह किया। हालाँकि, कागज छीनने और फाड़ने की वजह से मंत्री अपना पूरा स्टेटमेंट नहीं पढ़ पाए और उन्होंने इसकी एक प्रति सदन के पटल पर रख दी। इस पूरे हंगामे के चलते राज्यसभा की कार्यवाही को शुक्रवार (23 जुलाई 2021) सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया था।

शुक्रवार को राज्यसभा सत्र के दौरान सभापति एम वेंकैया नायडू ने आईटी मंत्री वैष्णव के हाथ से पेपर छीनने की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सदन में जो भी हुआ, वह सही नहीं था और एक मंत्री के हाथ से पेपर छीनकर उसे फाड़ना इस सदन की कार्यवाही का निम्नतम बिन्दु था। नायडू ने यह भी कहा कि ऐसी हरकतें सीधे तौर पर संसदीय लोकतंत्र पर आघात है। इसके पहले 21 सितंबर 2020 को भी सदन में अनैतिक व्यवहार के चलते टीएमसी के डेरेक ओ’ ब्रायन और AAP सांसद संजय सिंह समेत 8 सांसदों को राज्यसभा से निलंबित किया गया था।

ज्ञात हो कि राज्यसभा की नियमावली के नियम क्रमांक 255 के मुताबिक किसी भी सदस्य के निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है। राज्यसभा के सभापति नियम संख्या 255 के तहत अपनी राय में किसी भी सदस्य के आचरण को अत्यंत नियम-विरुद्ध पाए जाने पर, उसे तत्काल सदन से बाहर जाने के लिए निर्देशित कर सकते हैं। टीएमसी सांसद शांतनु सेन के मामले में भी सदन में निलंबन का प्रस्ताव रखा गया जो बहुमत से पारित हो गया। इसके बाद राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने सेन को सदन छोड़ने का आदेश दिया।

‘1992 में 100 करोड़ भी नहीं, 2021 आते-आते हजारों करोड़ कैसे? किसी से छिपा नहीं है’: दैनिक भास्कर के पूर्व पत्रकार

आयकर विभाग ने टैक्स चोरी के आरोपों में मीडिया समूह दैनिक भास्कर के विभिन्न शहरों में स्थित परिसरों में छापेमार कार्रवाई की। ये छापेमारी भोपाल, जयपुर, अहमदाबाद और कुछ अन्य स्थानों पर की गई है। आयकर विभाग की इस कार्रवाई के बाद पूरा विपक्ष एकजुट हो गया और सरकार को घेरने का सिलसिला चालू हो गया। 

विपक्षी दल के नेताओं ने कहा कि सरकार की नीतियों की आलोचनात्मक खबरें छापने वाले दैनिक भास्कर और भारत समाचार पर आयकर विभाग की यह कार्रवाई मीडिया को डराने का प्रयास है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व राज्य सभा सदस्य दिग्विजय सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ देश भर के विपक्षी नेताओं ने आयकर विभाग की इस कार्रवाई पर सरकार पर जमकर निशाना साधा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि पत्रकारों और मीडिया समूहों पर हमला लोकतंत्र को कुचलने का एक और क्रूर प्रयास है।

इस सबके बीच यह देखना काफी दिलचस्प है कि दैनिक भास्कर में काम कर रहे या काम कर चुके पत्रकार की इस पर क्या राय है, वो इस पर क्या सोचते हैं? उनका इस छापेमारी को लेकर क्या वक्तव्य है?

दैनिक भास्कर में काम कर चुके एलएन शीतल ने फेसबुक के जरिए इस मुद्दे पर अपनी राय रखी। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, “मीडिया कोई पवित्र गाय नहीं, जिसे ‘रक्षाकवच’ हासिल है! देश के सबसे बड़े मीडिया हाउस – ‘भास्कर समूह’ पर IT और ED की छापेमारी को मीडिया पर हमला बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि सरकार ने भास्कर ग्रुप के सत्ताविरोधी तेवरों से चिढ़कर उसे सबक सिखाने और अन्य अख़बारों/चैनलों को डराने के लिए यह कार्रवाई की है।”

वो आगे कहते हैं, “ऐसा कहने वालों को मालूम होना चाहिए कि कोई भी अखबार या न्यूज चैनल ऐसी कोई ‘पवित्र गइया’ बिल्कुल नहीं, जिसे रक्षा-कवच प्राप्त है। कौन नहीं जानता कि विभिन्न अख़बार और चैनल बैनर की आड़ में तमाम तरह के ग़लत-सलत धन्धे करते हैं और अपने उन धन्धों से जुड़ी अवैध गतिविधियों की अनदेखी करने के लिए सरकारों पर अड़ी-तड़ी डालने में कोई कसर बाकी नहीं रखते। भास्कर सिरमौर है इनमें।”

एलएन शीतल का फेसबुक पोस्ट

इतना ही नहीं, उन्होंने मीडिया ग्रुप के कारनामों का काला चिट्ठा भी खोला। उन्होंने लिखा, “अख़बार के नाम पर सरकारों से औने-पौने दामों में ज़मीनें हथियाना और फिर उन ज़मीनों का मनमाना इस्तेमाल करना विशेषाधिकार है इनका। बिल्डरों के साथ मिलकर फ्लैट-डुप्लेक्स बनवाने-बिकवाने और व्यापारियों से मिलकर उनके उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए अपने पाठकों को उकसाने का धत्कर्म करने में सबसे तेज गति वाला है यह समूह!”

शीतल आगे लिखते हैं, “मीडिया भी एक इंडस्ट्री है। तो फिर किसी अन्य इंडस्ट्री की तरह उस पर भी छापे क्यों नहीं पड़ सकते? लेकिन छापे पड़ते ही कुछ लोग चीखना-चिल्लाना शुरू कर देते हैं कि बदले की कार्रवाई हो रही है। कोई मीडिया हाउस, जो ’92 में 100 करोड़ का भी नहीं था, वह ’21 आते-आते हज़ारों करोड़ का कैसे हो गया, यह किसी से छिपा नहीं है। इसे समझने के लिए ज़्यादा ज्ञान की ज़रूरत नहीं है।”

उन्होंने लिखा, “भास्कर सबसे ताक़तवर, सबसे बड़ा, सबसे निर्भीक और सबसे तेज रफ्तार वाला मीडिया समूह है, जैसा कि वह दावा करता है! उसकी आवाज में बहुत ज़्यादा दम है, उसकी पहुँच बहुत दूर तलक है, सरकारें उससे थर्राती हैं, ऐसा वह परोक्ष/अपरोक्ष ढंग से ध्वनित करता है!! तो फिर डर किस बात का? अगर उसने कर-चोरी नहीं की है तो वह विपक्ष के दम (?) पर संसद को हिला सकता है, महँगे से महँगे वकीलों की फ़ौज के बूते सुप्रीम कोर्ट में दमदारी से अपनी बात रख सकता है, अपने विशालतम पाठक-परिवार की ताक़त पर चुनाव नतीजों को मनमाफ़िक कर सकता है! जब वह आकाश-पाताल एक कर सकता है तो IT/ED की औकात ही क्या!!”

दैनिक भास्कर मीडिया समूह के पूर्व पत्रकार की बातों को संदर्भ में देखा जाए और कल से लेकर आज तक जो ‘प्रेस की आजादी पर कायरतापूर्ण हमला’ और ‘आपातकाल’ का रोना शुरू हो गया है, उस पर ध्यान दिया जाए तो बचाव वाली लॉबी चालू तो हो गई है। कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सिंह सूरजेवाला और लिबरल मीडियाकर्मी रोहिणी सिंह ने आयकर विभाग की कार्रवाई को सरकार की कायरतापूर्ण कार्रवाई बताया।