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3 कॉन्ग्रेसी, 2 प्रोपेगंडा पत्रकार: जुबैर के अलावा इन 5 पर भी यूपी में FIR, ‘जय श्रीराम’ पर फैलाया था झूठ

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थिर लोनी थाने में मोहम्मद जुबैर और ट्विटर के अलावा सलमान निजामी, राना अयूब, डॉक्टर शमा मोहम्मद, सबा नकवी और मशकूर अहमद के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई है। इन सभी ने हिन्दू-मुस्लिम दंगा भड़काने के आपराधिक षड्यंत्र के तहत फेक न्यूज़ फैलाया कि एक मुस्लिम बुजुर्ग को हिन्दुओं ने पीटा और जबरन ‘जय श्री राम’ कहलवाया। आइए, जानते हैं कि ये पाँचों कौन हैं।

आरोप लगाया गया है कि इन लोगों ने अचानक लोक शांति को अस्त-व्यस्त करने और धार्मिक समूहों में विभाजन के लिए संदेशों को प्रचारित-प्रसारित किया। FIR के अनुसार, जो बयान ट्विटर पर प्रचारित किए गए, वो किसी व्यक्ति विशेष मात्र के नहीं थे बल्कि इनके पीछे एक स्पष्ट मंशा थी, जो आपराधिक षड्यंत्र की ओर भी इशारा करती है। हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देने के लिए ऐसा किया गया। धार्मिक सौहार्द को अस्त-व्यस्त करने के लिए इन्हें बड़े पैमाने पर प्रचारित किया गया।

FIR में इसका जिक्र किया गया है कि किस तरह इस फेक न्यूज़ के फैलने से न सिर्फ तनावपूर्ण माहौल पैदा हो गया है, बल्कि उत्तर प्रदेश में एक वर्ग विशेष के भीतर भय की भावना भर दी है। आरोपित मुख्यतः मुस्लिम मजहब के भीतर अपना प्रभाव रखते हैं। पुलिस की जाँच में पता चला कि आरोपित और पीड़ित पहले से परिचित थे। अब्दुल समद ने ताबीज देकर इसके सकारात्मक परिणाम का आश्वासन दिया था। ताबीज ने काम नहीं किया तो आरोपितों ने उसे पीट दिया। व्यक्तिगत विवाद की इस घटना में आरोपितों में हिन्दू और मुस्लिम, दोनों समुदायों के लोग थे। 

राना अयूब

राना अयूब खुद को पत्रकार बताती हैं और कई अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों के लिए लिखती भी हैं। उनके अधिकतर लेख भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करने के इरादे से लिखे गए होते हैं। फ़िलहाल ‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने उन्हें ग्लोबल एडिटर बना रखा है। Time, NYT, गार्डियन, FP और ‘द न्यूयॉर्कर’ जैसे मीडिया संस्थानों ने उन्हें लिखने के लिए जगह दी है। हाल ही में उन्होंने गंगा में लाशें बहने और कोरोना को लेकर दुनिया भर में भारत को बदनाम किया था।

हाल ही में कोविड-19 के लिए फंड्स इकट्ठा करने का दावा करने वाली राना अयूब को लेकर विवाद हुआ था, जब यह आशंका जताई गई थी कि इस कैम्पेन में राना देश के FCRA कानूनों का उल्लंघन कर रही थीं। बाद में उन्होंने इस फंड्स कैम्पेन को समाप्त कर दिया। कोरोना के दौरान उन्होंने ये फेक न्यूज़ भी फैलाया था कि एक साढ़े चार वर्ष का प्रवासी बच्चा दूध न मिलने के कारण श्रमिक ट्रेन से रेलवे स्टेशन पर पहुँचने से पहले ही मर गया।

सबा नकवी

कई वर्षों तक भाजपा और RSS को कवर करती रहीं पत्रकार सबा नकवी In Good Faith (2012), Capital Conquest (2015), Shades of Saffron: From Vajpayee to Modi (2018) और Politics of Jugaad: the coalition handbook (2019) जैसी पुस्तकें लिख चुकी हैं। कुछ ही महीनों पहले केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को उन्होंने अपनी पुस्तक गिफ्ट की थी। दोनों की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी।

सबा नकवी खुद को राजनीतिक विश्लेषक बताती हैं। साथ ही वो ओपी जिंदल यूनिवर्सिटी के ‘स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन’ में बतौर फैकल्टी भी कार्यरत हैं। वो Outlook पत्रिका की राजनीतिक संपादक रह चुकी हैं और विनोद मेहता के अंतर्गत काम करने का अनुभव है। देश-विदेश में कई अवॉर्ड्स मिलने का दावा करने वाली सबा नकवी आज भी टीवी डिबेट्स में बतौर कमेंटेटर बुलाई जाती हैं।

डॉक्टर शमा मोहम्मद

डॉक्टर शमा मोहम्मद कॉन्ग्रेस नेता हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता बना रखा है। खास बात ये है कि ‘जय श्री राम’ को बदनाम करने के लिए झूठ को आगे बढ़ाने वाली शमा मोहम्मद खुद को राष्ट्रवादी और हिन्दू संस्कृति की पहचान से जोड़ती हैं। प्रोफेशन से डेंटिस्ट डॉक्टर शमा मोहम्मद ‘ज़ोया चैरिटेबल ट्रस्ट‘ की ट्रस्टी भी हैं। उनके पति स्टेफानो पेले कारोबारी हैं। वो केरल से ताल्लुक रखती हैं।

कभी शमा मोहम्मद ने कॉन्ग्रेस सहित केरल की अन्य पार्टियों में पुरुषों के वर्चस्व का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि उन्होंने खुद इसका अनुभव किया है। उन्होंने कहा था कि केरल में महिलाओं को वो महत्व नहीं मिलता, जो बाकी राज्यों में मिलता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर मुस्लिमों से घृणा करने का आरोप लगाया था, जिसके बाद भाजपा ने उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी। उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी हमेशा पाकिस्तान को भी धमकी देते हैं, क्योंकि वो एक मुस्लिम मुल्क है।

मशकूर अहमद उस्मानी

मशकूर अहमद उस्मानी दरभंगा से ताल्लुक रखने वाले कॉन्ग्रेस के नेता हैं, जो 2017 में अलीगढ़ मुस्लिम युनिवेर्सिटी (AMU) छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं। कॉन्ग्रेस ने 2020 विधानसभा चुनाव में दरभंगा की जाले विधानसभा सीट से मशकूर अहमद उस्मानी को टिकट दिया था, लेकिन भाजपा के जीबेश कुमार ने उन्हें हरा दिया। CAA और NRC के खिलाफ आंदोलन में उनका भी हाथ था। 2018 में उन्होंने पूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी से मुलाकात कर उन्हें AMU में आमंत्रित किया था।

2018 में उनके कार्यकाल के दौरान ही AMU छात्रसंघ के कार्यालय में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर विवाद हुआ था। 2019 में देश विरोधी नारों के कारण उन पर राजद्रोह का मामला दर्ज हुआ। 2020 में सफूरा जरगर की गिरफ़्तारी के बाद UAPA की आलोचना करने के कारण उनका आधिकारिक ट्विटर हैंडल निलंबित कर दिया गया था। जिन्ना समर्थक होने के आरोपों पर उन्होंने कहा था कि वो गाँधी का अनुसरण करते हैं।

सलमान निजामी

सलमान निजामी भी कॉन्ग्रेस के नेता हैं, जो पार्टी के लिए डिबेट में हिस्सा लेते हैं और मीडिया में कॉलम भी लिखते हैं। ये भी खुद को गाँधीवादी कहते हैं। राजनीति में आने से पहले लगभग एक दशक तक वो मीडिया में ही सक्रिय थे। उन्होंने पीएम मोदी के माता-पिता को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। दिसंबर 2017 में गुजरात चुनाव की एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके बयान का जवाब दिया था।

पीएम ने कहा था, “कॉन्ग्रेस के युवा नेता सलमान निजामी ने ट्विटर पर मुझे लिखा कि बताओ तुम्हारी माँ कौन है, तुम्हारे पिता कौन हैं? ऐसी भाषा तो दुश्मन के लिए भी इस्तेमाल नहीं की जाती। सलमान ने गुजरात में कॉन्ग्रेस के लिए प्रचार भी किया है।” तब कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला ने उन्हें पहचानने से भी इनकार कर दिया था और कहा था कि वो पार्टी में किसी भी पद पर नहीं हैं। सलमान निजामी जम्मू कश्मीर से ताल्लुक रखते हैं।

2038 तक मियाँ-मुस्लिम होंगे बहुसंख्यक, हिंदुओं के मुकाबले ट्रिपल रेट से बढ़ रही आबादी: असम CM के पॉलिटिकल सेक्रेटरी ने चेताया

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में गरीबी दूर करने के लिए अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों से आबादी नियंत्रित करने की अपील की थी। इसके लिए उन्होंने समुदाय के प्रतिनिधियों से जागरुकता फैलाने की अपील भी की थी। साथ ही कहा था कि उनकी सरकार अल्पसंख्यकों महिलाओं को शिक्षित करने का भी काम करेगी, जिससे समस्याओं का हल प्रभावी तरीके से निकाला जा सके। हालाँकि AIUDF जैसी पार्टियों और असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं ने इसे भी सियासी रंग देने की कोशिश की थी।

अब असम बीजेपी के उपाध्यक्ष जयंत मल्ल बरुआ ने अनियंत्रित जनसंख्या के नए खतरे को लेकर आगाह किया है। उन्होंने बताया है कि जनसंख्या वृद्धि की यही रफ्तार बनी रही तो असम में 2037-38 तक पूर्वी बंगाल मूल के मुस्लिम बहुसंख्यक हो जाएँगे। इन्हें असम में मियाँ-मुस्लिम कहते हैं। मल्ला नालबारी से विधायक हैं। उन्हें मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों अपना राजनीतिक सचिव भी नियुक्त किया था।

बरुआ ने सोमवार (14 जून 2021) को बताया कि 1991-2001 के बीच राज्य में हिंदुओं की आबादी 14.9 फीसदी के दर से बढ़ी, जबकि मुस्लिमों की 29.3 फीसदी। यानी इस दशक में मुस्लिमों की आबादी बढ़ने की रफ्तार हिंदुओं की करीब दोगुनी थी। उन्होंने कहा कि 2001-2011 के बीच हिंदू 10.9 फीसदी तो मुस्लिम 29.6 फीसदी की रफ्तार से बढ़े। यानी हिंदुओं के मुकाबले तिगुनी। गौर करने की बात है कि हिंदुओं की आबादी की रफ्तार इस दशक में अच्छी-खासी कम हुई। इसके उलट मुस्लिमों की बढ़ गई।

बरुआ ने बताया कि जनगणना रिपोर्ट के अनुसार 1971 में राज्य की आबादी में 71.51 फीसदी हिंदू और 24.56 फीसदी मुस्लिम थे। लेकिन 2011 में हिंदू घटकर 61.46 फीसदी तो मुस्लिम बढ़कर 34.22 फीसदी हो गए। 1971 में राज्य में दो मुस्लिम बहुल जिले थे जो 2011 आते-आते बढ़कर 11 हो गए।

उन्होंने आगे बताया कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) की रिपोर्ट-5 के अनुसार 2005-06 से 2019-20 के बीच मुस्लिम महिलाओं की रिप्रोडक्टिव रेट गिरकर 3.6 से 2.4 तो हिंदू महिलाओं की 2 से घटकर 1.6 हो गई। मुस्लिमों महिलाओं के बीच इस दर में गिरावट के बावजूद यह हिंदू महिलाओं से करीब दोगुनी है। उन्होंने बताया कि मुस्लिमों की आबादी बढ़ने की यही रफ्तार बनी रही तो 2037-38 तक राज्य में हिंदू अल्पसंख्यक हो जाएँगे। बरुआ ने जनसंख्या नियंत्रण पर आपत्ति जताने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कुछ ताकतें हैं जो प्रदेश का विकास नहीं चाहतीं।

गुजरात में धर्मांतरण के लिए नहीं कर सकेंगे शादी, आरोपित को ही साबित करना होगा ये ‘लव जिहाद’ नहीं: 10 साल तक की कैद का प्रावधान

गुजरात में लव जिहाद विरोधी कानून अमल में आ गया है। यह धर्मांतरण के मकसद से विवाह को प्रतिबंधित करता है। जबर्दस्ती या छल से धर्मांतरण रोकने के लिए यह कानून लाया गया है। इसमें 10 साल तक की सजा और 5 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। इतना ही नहीं इस कानून के मुताबिक आरोपितों पर ही यह साबित करने की भी जिम्मेदारी होगी कि मामला लव जिहाद का नहीं है।

गुजरात में यह कानून मंगलवार (15 जून 2021) से लागू हो गया। इससे पहले उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश लव जिहाद पर नकेल कसने के लिए इसी तरह का कानून ला चुके हैं। गुजरात धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2021 को विधानसभा में एक अप्रैल को बहुमत से पारित किया गया था। इसे गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने मई में मँजूरी दी थी। गुजरात धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2021 के तहत शादी के जरिए जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर सख्त सजा का प्रावधान रखा गया है।

राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने 22 मई को गुजरात धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2021 को अपनी स्वीकृति दी थी, जिसमें कुछ मामलों में 10 साल तक की कैद और 5 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने पुष्टि की कि सीएमओ की 4 जून की घोषणा के अनुसार राज्य में कानून लागू किया गया है। विधेयक पेश करते हुए सरकार ने कहा था, “वह उभरती हुई प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना चाहती है, जिसमें महिलाओं के धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से शादी का लालच दिया जाता है।”

इस कानून के तहत, केवल धर्मांतरण के उद्देश्य से विवाह या विवाह के उद्देश्य के लिए धर्मांतरण के मामले में विवाह को पारिवारिक न्यायालय या न्यायालय द्वारा रद्द कर दिया जाएगा। कोई भी व्यक्ति, प्रत्यक्ष या अन्यथा, बलपूर्वक या जबरदस्ती, या कपटपूर्ण साधनों से, या विवाह द्वारा, या विवाह में सहायता करने के लिए धर्मांतरण नहीं करवा सकेगा। मामले में लव जिहाद हुआ है या नहीं, यह साबित करने की जिम्मेदारी अभियुक्त, अभियोगकर्ता और सहायक पर होगी। लव जेहाद का जो अपराध करता है, अपराध में मदद करता है, अपराध में सलाह देता है, उन सभी को समान रूप से दोषी माना जाएगा।

इस प्रावधान का उल्लंघन करने पर कम से कम तीन साल और अधिक से अधिक 5 साल तक की कैद और कम से कम दो लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है। वहीं, महिला अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति से संबंधित है तो सजा का प्रावधान चार से सात वर्ष का कारावास और तीन लाख रुपए के जुर्माने से दंडनीय होगा।

इन प्रावधानों का पालन नहीं करने वाले संगठन का पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा और ऐसे संगठन को कम से कम तीन साल की कैद और अधिकतम 10 साल तक की कैद और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। ऐसा संगठन आरोप-पत्र दाखिल करने की तिथि से राज्य सरकार से वित्तीय सहायता या अनुदान के लिए पात्र नहीं होगा। इस अधिनियम के तहत अपराधों को गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध माना जाएगा और पुलिस उपाधीक्षक के पद से नीचे के अधिकारी द्वारा जाँच नहीं की जाएगी।

35 मौके, जब AltNews वाले मोहम्मद जुबैर ने फैलाई फेक न्यूज़: बच्चियों को करता है टारगेट, कट्टरपंथियों का है ढाल

खुद को फैक्ट-चेकर बताने वाले प्रोपेगंडा पोर्टल AltNews का सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर फेक न्यूज़ फैलाने में एक्सपर्ट है। उसने अब तक हिन्दू धर्म और भाजपा को बदनाम करने के चक्कर में न जाने कितने ही फेक न्यूज़ फैलाए हैं। हाल ही में उसने ‘जय श्री राम’ को बदनाम करने के लिए ऐसा झूठ फैलाया कि उस पर FIR दर्ज हो गई। यहाँ हम उन मौकों की बात कर रहे हैं, जब-जब उसने फेक खबरों के सहारे प्रोपेगंडा रचा।

ऑल्टन्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर द्वारा नाबालिग लड़की की तस्वीर सार्वजानिक करने के बाद संगठन ने लड़की के ऑनलाइन उत्पीड़न और धमकियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हुए आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई थी। उन्होंने जुबैर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट दर्ज करने के लिए आयोग से अनुरोध किया था, और उसके खिलाफ POCSO और अन्य संबंधित कानूनों के तहत मामला दर्ज करने को कहा था। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने उसके खिलाफ कार्रवाई भी की।

  1. मोहम्मद जुबैर ने एक वीडियो शेयर कर के आरोप लगाया था कि लोनी में अब्दुल समद नाम के एक बुजुर्ग से जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाया गया, जबकि आरोपितों में आरिफ, आदिल और मुशाहिद भी शामिल थे। पुलिस की जाँच में ये मामला सांप्रदायिक नहीं निकला।
  2. मोहम्मद जुबैर ने एक अखबार की कटिंग ट्वीट की। इस खबर का शीर्षक था- “गो सेवा के नाम पर 20 लाख का दान जूता फरार हुआ पुजारी।” जो तस्वीर मोहम्मद जुबैर ने ट्वीट की वो उस समय की खबर नहीं बल्कि चार साल पहले राजस्थान की एक घटना थी। मोहम्मद जुबैर का ये तस्वीर पोस्ट करने का असली उद्देश्य श्रीराम मंदिर निर्माण को लेकर चल रहे देशव्यापी समर्पण निधि अभियान से जुड़ा हुआ साबित करते हुए लोगों को गुमराह करने का था।
  3. प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘ऑल्टन्यूज़’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने ‘दी लल्लनटॉप’ वेबसाइट के इंटरव्यू का एक हिस्सा शेयर किया। इस वीडियो में एक व्यक्ति मोदी सरकार की खामियों को गिनाता नजर आता है। साथ ही दावा किया गया कि यह शख्स मोदी समर्थक है। उसका फेसबुक प्रोफ़ाइल खँगालने पर पता चला कि उसने खुद को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का भावी विधायक उम्मीदवार बताया था
  4. मोहम्मद जुबैर ट्विटर पर तनिष्क विवाद का फायदा उठाते हुए यह साबित करने का प्रयास करते देखा गया कि लोग ‘जय श्री राम’ का नारा लगाकर तनिष्क के शोरूम पर हमला करने की प्लानिंग कर रहे हैं या फिर तनिष्क स्टोर में मौजूद लोगों को डराने का प्रयास कर रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद पता चला कि वहाँ कोई हिंसा या धमकी नहीं दी गई, बल्कि शांतिपूर्ण विरोध हुआ।
  5. हाथरस कांड के बाद सोशल मीडिया पर राहुल-प्रियंका के ठहाकों का वीडियो के वायरल हुआ, जो कार से वहाँ जा रहे थे। ऑल्टन्यूज़ ने ‘इंडिया टुडे’ से एक कदम आगे जाते हुए पूरी धूर्तता के साथ शीर्षक तो ‘हाथरस जाते हुए वीडियो’ का रखा लेकिन अपने आकाओं की जिस तस्वीर का फैक्टचेक किया है वह राहुल-प्रियंका के हाथरस जाते समय की नहीं बल्कि 2019 के आम चुनावों से पहले की है।
  6. जुबैर ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में गोंडा के विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कुछ सदस्यों ने पुलवामा आतंकी हमले के ख़िलाफ़ विरोध रैली में देश विरोधी नारे लगाए। गोंडा पुलिस ने साफ़ किया कि VHP के विरोध प्रदर्शन से जुड़े वीडियो का इस्तेमाल ‘भ्रष्ट’ उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है और कहा कि इस तरह के नारे आयोजन के दौरान नहीं लगाए गए थे।
  7. जामिया की लाइब्रेरी में जब पुलिस पर पत्थरबाजी हुई तो प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘ऑल्टन्यूज़’ ने दावा किया कि वीडियो में दिख रहे छात्र के हाथ में पत्थर नहीं, वॉलेट है। मोहम्मद जुबैर ने उस खबर को आगे बढ़ाया, लेकिन पोल खुलने पर लोगों का जवाब देना ही बंद कर दिया।
  8. मोहम्मद जुबैर ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें दो जैन मुनि बैठे दिख रहे हैं और कुछ लोग हाथ जोड़ कर खड़े हैं। बस, फिर क्या था! इसी तस्वीर के सहारे उसने दावा कर दिया कि ये लॉकडाउन का उल्लंघन हो रहा है। जबकि सच्चाई ये थी कि जैन मुनि कोरोना काल में जनसेवा कर रहे थे और लोगों व पशु-पक्षियों को भोजन दे रहे थे। उस फंक्शन की एक और तस्वीर थी, जिसे ज़ुबैर ने छिपा लिया। उस तस्वीर में भोजन सामग्रियों के पैकेट्स और फल-फूल रखे हुए थे, जिनका वितरण किया जा रहा था।
  9. ज़ुबैर के AltNews सहित मीडिया के कई प्रमुख स्रोतों ने इस खबर को स्पष्ट तौर पर यह साबित करने का प्रयास किया है कि अमरोहा में एक दलित को मंदिर में जाने के कारण गोली से मार दिया गया। जुबैर ने खुद इस फेक न्यूज़ को ट्वीट किया। अमरोहा पुलिस ने खुद छानबीन के बाद एक वीडियो जारी कर स्पष्ट करते हुए कहा कि इस घटना में युवक की जाति और मंदिर में प्रवेश का कोई प्रसंग था ही नहीं।
  10. एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें अल्लामा कौकब नूरानी नाम का एक मौलवी, कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर बेहद भ्रामक जानकारी और अफवाह फैलाते हुए देखा जा सकता था। जुबैर ने उक्त मौलाना का बचाव करते हुए अपना पाकिस्तान प्रेम जाहिर किया और लिखा, “वो आदमी पाकिस्तान से है (Raukab Noorani Okarvl), भारत से नहीं। वैसे वीडियो देख के, नैनो चिप वाली नोट का वीडियो याद आ गया।”
  11. ज़ुबैर ने दावा किया कि जहाँ मेक्सिको में टीवी के माध्यम से पढ़ाई कराई जा रही है, भारत में दूरदर्शन पीएम मोदी के ‘मन की बात’ के प्रसारण में लगा हुआ है। बाद में जब लोगों ने बताया कि भारत में 3 दर्जन से भी अधिक चैनल पठन-पाठन के काम में लगे हुए हैं, उसने अपनी ट्वीट्स डिलीट कर दी।
  12. उसने सोलापुर में आग लगने की खबर शेयर की। उसने अप्रैल में ये वीडियो शेयर किया जबकि ये फ़रवरी का निकला। बाद में उसने भी माना कि उसने जिस वीडियो को रीट्वीट किया था, वो 2 महीने पुराना है।
  13. इसके बाद उसने दावा किया कि पीएम मोदी के ‘मन की बात’ के वीडियो पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के डर से कमेंट्स ऑफ कर दिया गया है। हालाँकि, पीएमओ इंडिया के पेज पर सारे वीडियोज पर कमेंट्स वर्षों से ऑफ हैं। जबकि नरेंद्र मोदी और भाजपा के यूट्यूब चैनल पर इसी वीडियो पर कमेंट किया जा सकता है।
  14. जब महंत गोपालदास के कोरोना पॉजिटिव होने की खबर आई तो उसने एडिटेड फोटो शेयर कर के दावा किया कि सरसंघचालक मोहन भागवत उनके बगल में ही बैठे थे। जबकि ये तस्वीर फोटोशॉप्ड है।
  15. खबर आई थी कि अमेरिका के टाइम्स स्क्वायर पर राम मंदिर का बिलबोर्ड दिखाया जाएगा। जुबैर ने दावा किया कि इस कार्यक्रम को कैंसल कर दिया गया है। जबकि तय समय पर राम मंदिर के डिजिटल बिलबोर्ड का प्रदर्शन हुआ।
  16. उसने अपने पेज ‘अनऑफिसियल सुब्रमण्यन स्वामी’ से दावा किया कि भाजपा स्ट्रांग रूम से ईवीएम चुरा रही है। फैक्टहंट द्वारा फैक्ट चेक के बाद उसने पेज के एडमिन्स में से एक पर दोष डाल कर इतिश्री कर ली।
  17. उसने एक तस्वीर शेयर कर के दावा किया कि किसानों के साथ पुलिस आतंकियों की तरह व्यवहार कर रही है। बाद में खुलासा हुआ कि ये वीडियो 2013 है, जब केंद्र में यूपीए की सरकार थी। ये तस्वीर कविता कृष्णन ने ट्वीट की थी, जिसे जुबैर ने आगे बढ़ाया।
  18. श्रीलंका में हुए हमले के बाद वहाँ के एक मंत्री ने पत्र लिखा, जिसमें कहा गया था कि ख़ुफ़िया अधिकारियों को पहले से इसकी भनक थी। जब अभिजीत मजूमदार और आनंद रंगनाथन जैसे लोगों ने इस पत्र को आगे बढ़ाया तो जुबैर ने आतंकियों के बचाव के लिए उसे फेक करार दिया। जबकि मंत्री ने खुद अपने हैंडल से उसे डाल रखा था।
  19. उसने एक विरोध प्रदर्शन का वीडियो शेयर कर के लिखा कि दिल्ली में इतना बड़ा विरोध होने के बावजूद मीडिया इसे नहीं दिखा रहा। जबकि असलियत ये थी कि वो वीडियो मुंबई का था।
  20. जब देश भर में मॉब लिंचिंग को लेकर मुद्दा गरमाया हुआ था और इसे लेकर नैरेटिव बनाया जा रहा था, तब मोहम्मद जुबैर ने कॉन्ग्रेस शासनकाल का एक विरोध प्रदर्शन का वीडियो शेयर किया, ताकि लोग मोदी सरकार पर हमला बोल सकें।
  21. उसने दावा किया कि विश्व हिन्दू परिषद् के कार्यकर्ताओं ने ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ का नारा लगाया। गोंडा पुलिस ने इन ख़बरों का खंडन करते हुए कहा कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था।
  22. उसने अपने फेसबुक पेज से किया कि कश्मीरी छात्र रक्तदान कर रहे हैं। जबकि वो तस्वीर एक घायल व्यक्ति की थी, जो विरोध प्रदर्शन के दौरान जख्मी हो गया था। अस्पताल में उसका इलाज हो रहा था।
  23. मोहम्मद जुबैर ने अंजू घोष को बांग्लादेशी अभिनेत्री बताते हुए भाजपा की आलोचना की। लेकिन, दिलीप घोष ने उनका जन्म प्रमाण पत्र शेयर कर के उसके झूठ पर विराम लगाया।
  24. पीएम मोदी ने बताया था कि प्रधानमंत्री बनने से पहले वो अपने कपड़े खुद धोया करते थे। बाद में जुबैर ने एक खबर शेयर कर किया, जिसमें लिखा था कि वो पीएम मोदी का धोबी था। उसकी हार्ट अटैक से मृत्यु हुई। उसने ये साबित करने का प्रयास किया कि पीएम मोदी अपने कपड़े खुद नहीं धोते थे, वो झूठ बोल रहे। जबकि उसी खबर में लिखा था कि वो धोबी मोदी के कपड़े प्रेस करता था, धोता नहीं था।
  25. जम्मू कश्मीर के डिप्टी ग्रैंड मुफ़्ती ने दूसरे समुदाय के लिए अलग मुल्क की माँग की, जिस पर ऑपइंडिया ने खबर प्रकाशित की। जुबैर ने किसी अन्य क्लेम का फैक्ट-चेक शेयर कर के दावा कर दिया कि ये खबर गलत है।
  26. कठुआ मामले में विशाल जंगोत्रा निर्दोष है या नहीं, इस सम्बन्ध में ऑपइंडिया ने जब खबर प्रकाशित की तो जुबैर ने इसकी आलोचना की। जबकि बाद में वो कोर्ट से भी निर्दोष साबित हुआ, तब जुबैर की बोलती बंद हो गई।
  27. उसने उस ट्वीट को आगे बढ़ाया, जिसमें ग्रेटर नोएडा हत्याकांड के आरोपित सोनू पाठक का भाजपा से जुड़ाव बताया गया था। बाद में पता चला कि वो कोई और सोनू पाठक है, हत्या आरोपित नहीं।
  28. कन्हैया कुमार ने दावा किया कि बेगूसराय में एक फेरीवाले को पाकिस्तान जाने की बात कह के गोली मार दी गई। जबकि बाद में खुलासा हुआ कि ये घटना सांप्रदायिक थी ही नहीं, किसी चीज की खरीद-बेच को लेकर झगड़ा हुआ था, जिसके बाद ये घटना हुई।
  29. जब तबलीगी जमात वालों ने महामारी फैलाई और मौलाना साद के ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें वो समुदाय के लोगों को कोरोना से न डरते हुए सारी इस्लामी गतिविधियाँ जारी रखने की सलाह दी, तो मोहम्मद जुबैर ने इस ऑडियो को फेक बताया। दिल्ली पुलिस ने इन दावों को ही फेक बता दिया और ऑडियो सही निकला।
  30. उसने दावा किया कि एक दलित लड़के को मंदिर में घुसने पर मार डाला गया। सच्चाई ये थी कि 5000 रुपए के लोन को लेकर ये वारदात हुई थी। उस मंदिर का इतिहास रहा है कि उसमे दशकों से दलित जाकर पूजा-पाठ करते आ रहे हैं।
  31. उसने दावा किया कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा कभी टीपू जयंती समारोह में हिस्सा लेते थे और अब इसका विरोध करते हैं। साथ ही उसने समारोह की तस्वीर भी शेयर की। जबकि वो फोटो ”कर्नाटक जनता पक्ष अल्पसंखज्यक समारोह’ का था, टीपू जयंती का नहीं।
  32. मोहम्मद जुबैर ने दावा किया कि नीतेश कुमार ने 263 करोड़ रुपए की लागत से जिस सत्तर घाट पुल का उद्घाटन किया था, वो बाढ़ से ढह गया है। जबकि सच्चाई ये है कि सत्तर घाट पुल से 2 किलोमीटर दूर स्थित एक छोटी पुलिया का पहुँच पथ टूटा था, पुल नहीं।
  33. अर्बन नक्सलियों के पास से आपत्तिजनक पुस्तक ‘वॉर एंड पीस’ जब्त हुआ, जिसकी चर्चा बॉम्बे हाईकोर्ट में हुई। बाद में पीएम मोदी का भी ‘वॉर एंड पीस’ पुस्तक पढ़ते हुए तस्वीर जुबैर ने वायरल की। उसे ये नहीं पता था कि किताब का नाम तो समान था लेकिन नक्सलियों वाली इसी नाम की पुस्तक विश्वजीत रॉय ने लिखी थी जबकि पीएम मोदी लिओ टॉलस्टॉय की किताब पढ़ रहे थे।
  34. उसने एक फेक न्यूज़ शेयर कर के दावा किया कि मेजर गोगोई को एक लड़की के साथ आपत्तिजनक अवस्था में गिरफ्तार किया गया है।
  35. उसने एक तस्वीर शेयर कर के दावा किया कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने विवेक तिवारी के परिवार से बातचीत के समय उन्हें अपने से दूर रखा जबकि एक अन्य तस्वीर में सीएम योगी परिवार के बच्चों को पास बुला कर उनकी पीठ थपथपाते हुए बात करते दिख रहे हैं। उसने इस तस्वीर को छिपा लिया।

बता दें कि पहले मोहम्मद जुबैर भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी के नाम से पैरोडी पेज ‘सुसु स्वामी’ चलाता था। जुबैर को हर चीज का राजनीतिकरण करने में भी मजा करता है। चाहे मामला रेप से जुड़ा क्यों न हो। कठुआ रेप मामले में जब पुलिस के कुछ दावों में नजर आई कमियों को लेकर ऑपइंडिया ने सवाल किए थे, तब ऑल्ट न्यूज का ये संस्थापक सामने आया और ऑपइंडिया को रेपिस्टों का हितैषी बताने लगा था।

म्यूट वीडियो में भी स्वरा भास्कर को सुनाई दे गई आवाज़, जुबैर पर FIR के बावजूद नहीं छोड़ा ‘जय श्रीराम’ पर झूठ फैलाना

बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने भी अब गाजियाबाद के लोनी में आपसी विवाद में हुई एक घटना को सांप्रदायिक रंग दिया है। और तो और, स्वरा भास्कर को एक म्यूट वीडियो में भी आवाज़ सुनाई दे गई। स्वरा ने इस सम्बन्ध में मंगलवार (जून 15, 2021) को रात सवा 9 बजे ट्वीट किया। इससे साफ़ है कि उन्होंने ये सब AltNews वाले मोहम्मद जुबैर और ट्विटर पर FIR की खबर सामने आने के बाद किया।

स्वरा भास्कर ने अपनी ट्वीट में लिखा, “गाजियाबाद पुलिस ने 3 मुस्लिमों को आरोपित क्या बनाया, मेरी टाइमलाइन पर दक्षिणपंथी और संघी उल्टियाँ करने पहुँच गए हैं। अरे बेहूदों, मुख्य आरोपित परवेश गुज्जर है, ये एक वास्तविकता है। ये व्यक्ति वीडियो में भी दिख रहा है, जो कैमरा के सामने ही बुजुर्ग पीड़ित को ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए मजबूर कर रहा है। हाँ, ये मेरे धर्म और मेरे ईश्वर को दूषित करने का प्रयास है।”

स्वरा भास्कर ने लिखा कि इस घटना के कारण वो शर्मिंदा हैं और बाकी लोगों को भी शर्म आनी चाहिए। इस ट्वीट में स्वरा भास्कर ने लिखा कि वीडियो में ‘जय श्री राम’ नारा लगाने को मजबूर किए जाने की बात सुनाई दे रही है, जबकि सच्चाई ये है कि ट्विटर पर वायरल हुए वीडियो में साउंड ही नहीं है और ये म्यूट है। फिर, स्वरा भास्कर को उसमें आवाज़ कैसे सुनाई दे गई? क्या उन्होंने कोई एलियन तकनीक का इस्तेमाल किया?

स्वरा भास्कर को म्यूट वीडियो में भी सुनाई दे गई आवाज़

गाजियाबाद पुलिस ने इस ट्वीट की रिप्लाई में अपने पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) के बयान का वीडियो भी ट्वीट किया, लेकिन इसके बावजूद स्वरा ने अपना ट्वीट डिलीट करना गवारा नहीं समझा। एक अन्य ट्वीट में स्वरा ने तंज कसते हुए लिखा कि कुछ मुस्लिमों के एक मुस्लिम बुजुर्ग को पीटा, उसकी दाढ़ी काट दी और ‘जय श्री राम’ बोलने को मजबूर किया, इस पर मैं विश्वास कर लूँगी। साथ ही पूछा कि क्या यही पूरी कहानी है?

साथ ही वो बार-बार मुख्य आरोपित का नाम लेती रहीं। उन्होंने कॉन्ग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी के उस ट्वीट को भी शेयर किया, जिसमें उन्होंने इस खबर को फैलाते हुए लिखा था कि वो ये मानने को तैयार ही नहीं हैं कि श्रीराम के सच्चे भक्त ऐसा कर सकते हैं। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा कि देश-विदेश में रहने वाे हिन्दू चाहते हैं कि मुस्लिम आतंकवाद की निंदा करें, लेकिन उनके ईश्वर के नाम पर ‘क्रूरता’ पर वो चुप हैं, जिससे मैं शर्मिंदा हूँ।

बता दें कि लोनी थाने में फेक न्यूज़ फैलाने के आरोप में मोहम्मद जुबैर, मीडिया पोर्टल ‘द वायर’, राणा अयूब, सलमान निजामी और सबा नकवी, सबा मोहम्मद और मक़सूर उस्मानी के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। पुलिस ने कहा कि आरोपित और पीड़ित पहले से परिचित थे। अब्दुल समद ने ताबीज देकर इसके सकारात्मक परिणाम का आश्वासन दिया था। ताबीज ने काम नहीं किया तो आरोपितों ने उसे पीट दिया। व्यक्तिगत विवाद की इस घटना में आरोपितों में हिन्दू और मुस्लिम, दोनों समुदायों के लोग थे।

भारत में छिन गई ट्विटर की ढाल, अब ‘गड़बड़ी’ पर पड़ेगा कानून का डंडा: गाजियाबाद में FIR भी दर्ज

नए आईटी कानूनों पर टालमटोल कर रहे माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर की मुसीबतें बढ़ गई है। भारतीय आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिली सुरक्षा का अधिकार उससे छिन गया है। इसका मतलब है कि अब गैरकानूनी या भड़काऊ पोस्ट पर ट्विटर पर भी कार्रवाई हो सकती है। गाजियाबाद पुलिस ने उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की है। यह मामला एक मुस्लिम बुजुर्ग की पिटाई के मामले में जय श्रीराम का एंगल जबरन ठूँस कर फेक न्यूज फैलाने से जुड़ा है।

ट्विटर से थर्ड पार्टी कंटेंट को लेकर सरकार द्वारा प्राप्त ‘कानूनी संरक्षण’ छीन लिया गया है। दरअसल, आईटी मंत्रालय के नए नियमों के मुताबिक कंपनी को एक वैधानिक अधिकारी, भारत में एक प्रबंध निदेशक सहित अन्य अधिकारियों की नियुक्ति करनी थी, लेकिन इन अधिकारियों की नियुक्ति नहीं हो पाई है। अब कोई यूजर यदि ट्विटर पर ‘गैर-कानूनी सामग्री’ एवं ‘भड़काऊ पोस्ट’ शेयर करता है तो आईपीसी की आपराधिक धाराओं के तहत कंपनी से पुलिस पूछताछ कर सकती है। 

एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में आधिकारिक सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि अधिकारियों की नियुक्ति करने में असफल होने पर सरकार के ‘कानूनी सुरक्षा कवच’ से वंचित होने वाली ट्विटर भारत में अमेरिका की पहली सोशल मीडिया कंपनी बन गई है। आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत ट्विटर को ‘कानूनी संरक्षण’ मिला हुआ था। वहीं, गूगल, यूट्यूब, फेसबुक, ह्वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम को यह संरक्षण मिलता रहेगा। 

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के एक सूत्र ने कहा, “आईटी की नई गाइडलाइन का पालन करने के लिए कंपनी को अतिरिक्त समय दिया गया था, लेकिन वह तय समय में गाइडलाइन का पालन नहीं कर पाई है। हमने इस बारे में उसे बार-बार याद दिलाया और अतिरिक्त समय भी दिया। अब ट्विटर ने अपना कानूनी संरक्षण खो दिया है। अब थर्ड पार्टी गैर-कानूनी कंटेंट पर उसे आईपीसी की धाराओं का सामना करना होगा।”     

बताया जाता है कि ट्विटर के साथ-साथ सिग्नल पर भी ऐसी ही कार्रवाई हो रही है। इंटरमीडियरी दर्जा खत्म होने बाद ये दोनों प्लेटफॉर्म सामान्य मीडिया की श्रेणी में आ जाएँगे और तब इन पर विदेशी निवेश की सीमा आदि का बंधन भी शुरू हो जाएगा। 

दरअसल, ट्विटर को भारत में 25 मई तक अपने अधिकारियों की नियुक्ति करनी थी, लेकिन कंपनी ने कोरोना संकट, लॉकडाउन एवं अन्य तकनीकी पहलुओं का हवाला देकर इन नियुक्तियों में देरी की। ट्विटर ने शुरू में कुछ नियुक्तियाँ की थी, लेकिन सरकार ने इन्हें यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ये अधिकारी बाहरी कानूनी परामर्शदाता थे या ऐसे लोग थे, जिन्हें अमेरिकी कंपनी ने सीधे तौर पर नियुक्त नहीं किया था।

भारत में ट्विटर के प्रवक्ता ने कहा कि उसने एक ‘अंतरिम’ अनुपूरक अधिकारी की नियुक्ति की है। प्रवक्ता ने कहा कि अधिकारी की नियुक्ति के बारे में ब्योरे अभी आईटी मंत्रालय के साथ साझा नहीं किए गए हैं, लेकिन इसे जल्द साझा किया जाएगा।

वहीं, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी पर पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी ने ट्विटर के प्रतिनिधियों को समन किया है। इन्हें 18 जून को कमेटी के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया है। इसमें नए IT कानूनों पर चर्चा हो सकती है।

  • दरअसल, टूलकिट मामले पर केंद्र सरकार ने ट्विटर को सख्त हिदायत देते हुए कहा था कि ट्विटर मैनिपुलेटेड मीडिया टैग का इस्तेमाल बंद करे, क्योंकि अभी टूलकिट मामले की एजेंसी जाँच कर रही है। केंद्रीय IT मंत्रालय ने कहा था कि एजेंसी टूलकिट के कंटेंट की जाँच कर रही है, न कि ट्विटर की। केंद्र ने कहा था कि जब तक यह मामला जाँच के दायरे में है तब तक ट्विटर अपना फैसला नहीं सुना सकता है। दरअसल, ट्विटर ने BJP के प्रवक्ता संबित पात्रा के कुछ ट्वीट पर मैनिपुलेटेड मीडिया का टैग लगाकर दिखाया था। ये ट्वीट कांग्रेस की टूल किट को लेकर किए गए थे।
  • केंद्र ने कहा था कि जब तक यह मामला जाँच के दायरे में है तब तक ट्विटर अपना फैसला नहीं सुना सकता है। दरअसल, ट्विटर ने BJP के प्रवक्ता संबित पात्रा के कुछ ट्वीट पर मैनिपुलेटेड मीडिया का टैग लगाकर दिखाया था। ये ट्वीट कांग्रेस की टूल किट को लेकर किए गए थे।

AltNews वाले जुबैर, राणा अयूब, द वायर सहित 9 पर FIR: ताबीज की लड़ाई में ‘जय श्रीराम’ घुसेड़ दंगा भड़काने की मंशा

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक AltNews वाले मोहम्मद जुबैर और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Twitter के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मोहम्मद जुबैर ने एक वीडियो शेयर कर के आरोप लगाया था कि लोनी में अब्दुल समद नाम के एक बुजुर्ग से जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाया गया, जबकि आरोपितों में आरिफ, आदिल और मुशाहिद भी शामिल थे। पुलिस की जाँच में ये मामला सांप्रदायिक नहीं निकला। ताबीज देने को लेकर मारपीट हुई थी।

गाजियाबाद के लोनी थाने में मंगलवार (जून 15, 2021) को दर्ज FIR में लिखा है कि पुलिस को विश्वस्त सूत्रों से पता चला कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ। उस वीडियो में कुछ लोग अब्दुल समद नाम के बुजुर्ग व्यक्ति की पिटाई करते हुए और उसकी दाढ़ी काटते हुए दिख रहे हैं। FIR के अनुसार, सोशल मीडिया में इस वीडियो के साथ दावा किया गया कि आरोपित हिन्दू समुदाय से हैं, जिन्होंने बुजुर्ग से जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाया।

जिन्होंने इस घटना की सत्यता को जाँचे बिना ही इसे सांप्रदायिक रंग दे दिया, उसमें मोहम्मद जुबैर, मीडिया पोर्टल ‘द वायर’, राणा अयूब, सलमान निजामी और सबा नकवी, सबा मोहम्मद और मशकूर अहमद उस्मानी शामिल हैं। FIR में इन सभी के नाम का जिक्र है। आरोप लगाया गया है कि इन लोगों ने अचानक लोक शांति को अस्त-व्यस्त करने और धार्मिक समूहों में विभाजन के लिए संदेशों को प्रचारित-प्रसारित किया गया।

मोहम्मद जुबैर फैक्ट-चेक का दावा करने वाले प्रोपेगंडा पोर्टल AltNews का सह-संस्थापक है। राणा अयूब विदेशी मीडिया के लिए लिख कर भारत विरोधी प्रोपेगंडा फैलाती हैं। वहीं सबा नकवी कई साल तक भाजपा को कवर करती रही हैं, लेकिन अब सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ फैलाती है। सलमान निजामी कॉन्ग्रेस के नेता हैं। मक़सूर उस्मानी AMU छात्र संघ के अध्यक्ष थे और दरभंगा से सम्बन्ध रखते हैं।

FIR के अनुसार, जो बयान ट्विटर पर प्रचारित किए गए, वो किसी व्यक्ति विशेष मात्र के नहीं थे बल्कि इनके पीछे एक स्पष्ट मंशा थी, जो आपराधिक षड्यंत्र की ओर भी इशारा करती है। हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देने के लिए ऐसा किया गया। धार्मिक सौहार्द को अस्त-व्यस्त करने के लिए इन्हें बड़े पैमाने पर प्रचारित किया गया। ये स्पष्ट रूप से विभिन्न समुदायों में वैमनस्य पैदा करने के लिए किया गया है। FIR में लिखा है:

“इन भ्रामक ट्वीट्स को कुछ ही समय में हजारों लोगों ने रीट्वीट किया। ऐसे ट्वीट करने वाले वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनेता लोग हैं, जिन्होंने जानबूझ कर बिना किसी प्रमाणिकता और तथ्यों के सत्यापन के दो समुदायों के बीच शत्रुता, वैमनस्य और घृणा पैदा किया गया। पुलिस की जाँच में पता चला कि आरोपित और पीड़ित पहले से परिचित थे। अब्दुल समद ने ताबीज देकर इसके सकारात्मक परिणाम का आश्वासन दिया था। ताबीज ने काम नहीं किया तो आरोपितों ने उसे पीट दिया। व्यक्तिगत विवाद की इस घटना में आरोपितों में हिन्दू और मुस्लिम, दोनों समुदायों के लोग थे। झूठी खबर जम कर फैलाई गई और Twitter ने भी इसे रोकने के लिए कोई कोशिश नहीं की।”

FIR में इसका जिक्र किया गया है कि किस तरह इस फेक न्यूज़ के फैलने से न सिर्फ तनावपूर्ण माहौल पैदा हो गया है, बल्कि उत्तर प्रदेश में एक वर्ग विशेष के भीतर भय की भावना भर दी है। आरोपित मुख्यतः मुस्लिम मजहब के भीतर अपना प्रभाव रखते हैं, ऐसे में उनसे अधिक जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है। पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर इतने फॉलोवर्स वाले लोगों से सोच-समझ कर पोस्ट करने की अपेक्षा की जाती है।

बता दें कि इस FIR में ट्विटर इंडिया के अलावा ट्विटर इंक के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। वहीं मोहम्मद जुबैर ने बड़ी चालाकी से 20 घंटे से भी अधिक समय के बाद अपने ट्वीट को डिलीट तो कर दिया, लेकिन माफ़ी नहीं माँगी। उन्होंने कहा कि ‘फ़िलहाल’ पीड़ित का जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाने वाला आरोप पुलिस और स्थानीय पत्रकारों के वर्जन से मेल नहीं खाता है, इसीलिए वो इस ट्वीट को डिलीट कर रहे हैं।

गाजियाबाद पुलिस ने बताया कि ये घटना जून 5, 2021 की है, जिसके बारे में पुलिस के समक्ष 2 दिन बाद रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की जब पुलिस ने जाँच की, तो पाया कि पीड़ित अब्दुल समद बुलंदशहर से लोनी बॉर्डर स्थित बेहटा आया था। वो एक अन्य व्यक्ति के साथ मुख्य आरोपित परवेश गुज्जर के घर बंथना गया था। वहीं पर कल्लू, पोली, आरिफ, आदिल और मुशाहिद आ गए। वहीं मारपीट हुई

आदिवासी नाबालिग बहनों की रेप के बाद हत्या, पेड़ से टाँग दी लाश: मुजम्मिल, नजीबुल और फारूक सहित 7 गिरफ्तार

असम के कोकराझार जिले में दो आदिवासी नाबालिग बहनों की पेड़ से टँगी लाश की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। बलात्कार के बाद इनकी हत्या की गई और फिर उनकी लाश पेड़ से लटका दी गई। मामले के मुख्य आरोपितों मुजम्मिल शेख, नजीबुल शेख और फारूक रहमान सहित सभी 7 को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने ट्वीट कर इनकी गिरफ्तारी की जानकारी दी है। उन्होंने लिखा, “मुजम्मिल शेख, नजीबुल शेख और फारूक रहमान को कोकराझार में दो नाबालिग आदिवासी लड़कियों के दुष्कर्म और हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया है। इस घृणित अपराध में पहले दोनों लड़कियों को मार दिया गया और फिर उनके शवों को पेड़ की टहनी से लटका दिया गया। असम पुलिस ने इस मामले में अच्छा काम किया है।” इससे पहले रविवार (13 जून 2021) को वे पीड़ित परिवार से मिलने पहुँचे थे और पुलिस को जल्द से जल्द मामले की गुत्थी सुलझाने के आदेश दिए थे।

पिछले सप्ताह अभ्याकुती गाँव के पास जंगल में नाबालिग बहनों की लाश मिलने के बाद उनके परिवार ने रेप के बाद हत्या किए जाने की आशंका जताई थी। हालाँकि पुलिस शुरुआत में इसे सुसाइड का मामला मान रही थी। इंडियन एक्सप्रेस ने कोकराझार के एसपी थुबे प्रतीक विजय कुमार के हवाले से बताया है कि दोनों लड़कियों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आनी अभी बाकी है। लेकिन मामले में गिरफ्तार किए गए सात लोगों ने 14 से 16 के बीच की इन लड़कियों के साथ दुष्कर्म और उन्हें जान से मारने की बात कबूली है।

एसपी ने बताया कि आरोपितो ने अपने कबूलनामे में कहा है कि वे दोनों लड़कियों को जानते थे। जहाँ लड़कियों का परिवार रहता है, उससे सटे इलाकों के ही आरोपित भी रहने वाले हैं। उन्होंने कहा कि यह एक ब्लाइंड केस था जिसे 72 घंटों के भीतर सुलझा लिया गया है।

धर्मांतरण से इनकार करने पर माजिद खान ने 3 दोस्तों के साथ मिलकर किया नाबालिग का गैंगरेप, गर्भवती होने पर हुआ खुलासा

मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में एक नाबालिग के साथ कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार की खबर सामने आई है। पुलिस का कहना है कि मुख्य आरोपित 15 वर्षीय लड़की को अपनी दोस्ती के जाल में फँसाकर उस पर जबरन इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव बना रहा था। धर्मांतरण से इनकार करने पर चार लोगों ने नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फर्जी पहचान और जबरन धर्म परिवर्तन के प्रयास की एक और घटना है। पुलिस बताती है, इस जघन्य अपराध को महाराष्ट्र के मालेगाँव में अंजाम दिया गया, जहाँ किशोरी मजदूरी करती थी। यहीं, वह 23 वर्षीय युवक के संपर्क में आई थी, जिसने लड़की को मोहित के रूप में अपना परिचय दिया जबकि उसका असली नाम माजिद खान है। खान ने नाबालिग से दोस्ती करने के बाद उसे शादी का झाँसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया।

पिछले साल अक्टूबर में माजिद ने लड़की पर जबरन इस्लाम मजहब अपनाने के लिए दबाव बनाया। जब उसने धर्मांतरण का विरोध किया तो खान ने अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया।

मेडिकल जाँच से पता चला लड़की गर्भवती थी

इसके बाद लड़की मध्य प्रदेश के उज्जैन में अपनी बहन के घर शिफ्ट हो गई, लेकिन उसने पुलिस से संपर्क नहीं किया। इस साल अप्रैल में उसे पेट में दर्द हुआ, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। यहाँ उसकी मेडिकल जाँच से पता चला कि वह गर्भवती थी। अस्पताल में उसकी समय से पहले डिलीवरी हुई, लेकिन बच्चे की मौत हो गई।

इस बात का खुलासा तब हुआ, जब लड़की ने अस्पताल में एक अन्य महिला को अपनी आपबीती सुनाई। उस महिला ने पीड़िता की आपबीती सुनने के बाद एक हिंदू संगठन और उज्जैन के एएसपी अमरेंद्र सिंह को इसकी सूचना दी।

मामला प्रकाश में आने के बाद पुलिस ने भारतीय दंड संहिता, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम और मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

मालूम हो कि मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे को प्रलोभन, धमकी एवं बलपूर्वक विवाह के नाम पर प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष से उसका धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास नहीं कर सकता है।

महाराष्ट्र पुलिस से सहयोग माँगा

राज्य पुलिस ने आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए महाराष्ट्र पुलिस से सहयोग माँगा। फिर इस महीने की शुरुआत में नाबालिग पीड़िता की मदद से पुलिस ने खान को उज्जैन बुलाया और उसे मालेगांव पुलिस को सौंपते हुए उसकी गिरफ्तारी दर्ज की।

उज्जैन के पुलिस अधीक्षक सतेंद्र शुक्ला ने बताया, “हम मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के बालिका गृह में मामला दर्ज करने के बारे में कानूनी राय भी ले रहे हैं, क्योंकि महाराष्ट्र में धर्म स्वतंत्रता अधिनियम लागू नहीं होगा।”

बताया जा रहा है कि डीएनए टेस्ट करने के लिए पिछले हफ्ते समय से पहले डिलीवरी कर बच्चे को निकाला गया। अन्य तीन आरोपितों की गिरफ्तारी अभी बाकी है। पुलिस इनकी तलाश में जुट गई है।

‘राजदंड कैसा होना चाहिए, महाराज ने दिखा दिया’: लोनी घटना के ट्वीट पर नहीं लगा ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ टैग, ट्विटर सहित 8 पर FIR

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में मुस्लिम बुजुर्ग व्यक्ति के साथ पिटाई की घटना को सांप्रदायिक एंगल देकर बढ़ावा देने के मामले में योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने मामले के मद्देनजर ट्विटर के ख़िलाफ़ एफआईआर करवा दी है। कथिततौर पर, केस में 8 अन्य के ख़िलाफ़ भी मुकदमा दर्ज हुआ है।

योगी सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आरोप लगाया है कि उन्होंने झूठे दावे के साथ शेयर होती वीडियो पर कोई कार्रवाई नहीं की जबकि आम तौर पर ट्विटर भ्रामक खबरों को ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ कहता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, अभी उनके पास इस मामले की एफआईआर नहीं है। लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है कि यूपी सरकार ने ट्विटर के विरुद्ध मुकदमा करवाया हो। सरकार की शिकायत का आधार यही है कि पुलिस द्वारा सच्चाई बताए जाने के बाद भी ट्विटर ने इस वीडियो पर मैनिपुलेटेड मीडिया का टैग नहीं लगाया और भ्रामक ट्वीट्स को बढ़ावा मिलता रहा।

योगी सरकार के इस फैसले के बाद ट्विटर पर ही सोशल मीडिया यूजर्स अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत उमरांव लिखते हैं, “लोनी घटना के बाद आए ट्विट्स के मद्देनजर योगी सरकार ने ट्विटर के विरुद्ध मुकदमा दायर किया है और कहा है कि ट्विटर ऐसे ट्वीट पर मैनिपुलेटेड मीडिया का टैग नहीं लगा पाया। राजदंड कैसा होना चाहिए, महाराज ने दिखा दिया है।”

बता दें कि इस घटना पर इससे पहले स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को लताड़ लगाई थी। सीएम योगी ने राहुल के ट्वीट के जवाब में कहा था, “प्रभु श्री राम की पहली सीख है- ‘सत्य बोलना’ जो आपने कभी जीवन में किया नहीं। शर्म आनी चाहिए कि पुलिस द्वारा सच्चाई बताने के बाद भी आप समाज में जहर फैलाने में लगे हैं। सत्ता के लालच में मानवता को शर्मसार कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की जनता को अपमानित करना, उन्हें बदनाम करना छोड़ दें।”

मुस्लिम बुजुर्ग से मारपीट पर पुलिस ने क्या कहा

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुई थी। ये वीडियो एक मुस्लिम व्यक्ति अब्दुल समद की है। जिन्होंने 4-6 अज्ञात लोगों पर गाजियाबाद में सुनसान पड़े एक मकान में ले जाकर उनसे ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने के लिए मजबूर करने, पिटाई करने और दाढ़ी काटने का आरोप लगाया था। इस वीडियो को राहुल गाँधी जैसे नेताओं और ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मो जुबैर जैसे प्रोपगेंडाबाजों ने शेयर करके जय श्रीराम के नारे पर सवाल उठाया था।

हालाँकि, गाजियाबाद पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए बताया कि वह 5 जून को हुई इस कथित घटना में पहले ही प्राथमिकी दर्ज कर चुकी है, लेकिन दो दिन बाद सात जून को पुलिस को इसकी सूचना दी गई। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अमित पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर के निवासी अब्दुल समद ने अपनी शिकायत में इस तरह के आरोप नहीं लगाए हैं जैसे कि वीडियो में लगाए गए। उन्होंने बताया कि इस मामले में पुलिस परवेश गुर्जर नाम के एक व्यक्ति को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है, जिसने आलिम के रूप में काम करने वाले समद से ताबीज लिया था।