Home Blog Page 3691

आप और कॉन्ग्रेस के झूठ की खुली पूरी तरह पोल, श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट ने भूमि सौदों पर जारी किया विस्तृत स्पष्टीकरण

‘आप’ नेता संजय सिंह और पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से संबंधित एक भूमि सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगाने के बाद ट्रस्ट ने पूरे मामले पर अपना स्पष्टीकरण जारी किया है।

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह का आरोप है कि ट्रस्ट ने 2 करोड़ की जमीन 18.5 करोड़ में खरीदी थी। उन्होंने दावा है कि दोनों लेन-देन 5 मिनट के भीतर किए गए थे।

संजय सिंह का दावा है कि राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इशारे पर यह लेन-देन किया गया था। सिंह और पार्टी के अन्य सदस्यों ने ‘सेल डीड’ के रूप में ‘बिक्री का समझौता’ प्रस्तुत किया।

राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने स्पष्टीकरण जारी किया

अपने ऊपर लगाए जा रहे निराधार आरोपों को खारिज करते हुए ट्रस्ट ने अपने ट्विटर हैंडल के माध्यम से भूमि सौदे का विवरण साझा किया है।

भूमि के बारे में तथ्य:

ट्रस्ट ने सूचित किया है कि यह भूमि एक सड़क से सटी हुई है, जिसे भविष्य में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के पास आने वाले 4-लेन के रास्ते में बनाया जाएगा, जिससे यह एक प्रमुख भूमि बन जाएगी। 1.2080 हेक्टेयर जमीन 1423 रुपए प्रति वर्ग फुट की दर से खरीदी गई है, ट्रस्ट का कहना है कि जो बाजार के भाव से काफी कम है।

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा जारी स्पष्टीकरण। फोटो: ट्विटर

साल 2020 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अयोध्या शहर के बाहरी इलाके में 2019 में 400-500 रुपए प्रति वर्ग फुट के लिए उपलब्ध भूमि अब 1000-1500 रुपए में मिलती है। इसी तरह राम मंदिर के फैसले से पहले शहर के बीचों-बीच 1000 रुपए प्रति वर्ग फुट की दर से जमीन उपलब्ध थी, जिसकी कीमत अब 2000 रुपए से 3000 रुपए प्रति वर्ग फुट के बीच है।

इसके अतिरिक्त, भूमि के एक ही टुकड़े के लिए 2011 से कई पार्टियों के बीच समझौते किए गए थे, हालाँकि कई कारणों से ये समझौते कभी अंतिम रूप नहीं ले सके।

भूमि का विवरण:

ट्रस्ट ने अपने स्पष्टीकरण में बताया कि न्यास की जमीन खरीदने में दिलचस्पी थी, इसलिए उसने अंतिम सौदे पर पहुँचने से पहले पिछले सभी समझौतों को मंजूरी देने पर जोर दिया। इस सौदे में नौ व्यक्ति शामिल हैं, जिनमें से तीन मुस्लिम बताए जा रहे हैं। पिछले 10 वर्षों से सौदे में शामिल सभी नौ व्यक्तियों से संपर्क किया गया था।

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा जारी स्पष्टीकरण। फोटो: ट्विटर

उनकी सहमति प्राप्त होने पर ट्रस्ट ने शामिल पक्षों के साथ बैठकर यह फैसला किया और फिर अंतिम मालिकों के साथ समझौता किया। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि सभी वित्तीय लेन-देन बैंकिंग चैनलों के माध्यम से किए जाते हैं, जिसमें कोई नकदी शामिल नहीं है। ट्रस्ट ने मंदिरों और आश्रमों से तीन से चार प्लाट भी खरीदे हैं, जिन्हें पुनर्वास और पर्याप्त धनराशि के लिए उनकी पसंद की दूसरी भूमि से मुआवजा दिया जाएगा।

समझौते का विवरण:

04/03/2011 को महफूज आलम, जावेद आलम, नूर आलम बड़वारी टोला अयोध्या निवासी मुहम्मद आलम के बेटे फिरोज आलम ने गाटा (gata) बेचने के लिए कुसुम पाठक, हरीश पाठक और मोहम्मद इरफान (उर्फ नन्हे मियां) के साथ समझौता किया। sell gata संख्या 242,243,244 और 246 के लिए 1 करोड़ रुपए पर सहमति बनी। यह समझौता 3 साल के लिए वैध था। समझौते की तारीख 04.03.2011 से 04.03.2014 के बीच थी।

20/11/2017 को महफूज आलम और उपरोक्त तीन अन्य पार्टियों ने कुसुम पाठक और उनके पति हरीश पाठक ( 4 गाटा संख्या, कुल भूमि 2.334 हेक्टेयर) को एक सेल डीड (sale deed) के लिए ​रजिस्टर्ड किया। इसके लिए कुल राशि 2 करोड़ रुपए थी।

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा जारी स्पष्टीकरण। फोटो: ट्विटर
  1. 21/11/2017 को कुसुम पाठक और हरीश पाठक ने लच्छा राम सिंह, जितेंद्र कुमार सिंह और राकेश कुमार सिंह को 4 गाटा से अधिक बेचने का समझौता किया। इसकी कुल राशि 2.16 करोड़ रुपए थी।
  2. (यह अनुबंध 17/09/2019 को रद्द करने के लिए पंजीकृत किया गया था)
  3. 17/09/2019 को कुसुम पाठक और हरीश पाठक द्वारा उपरोक्त भूमि को लच्छा राम सिंह, विश्व प्रताप उपाध्याय, मनीष कुमार, सूबेदार, बैरम यादव, रवींद्र कुमार दुबे, सुल्तान अंसारी और राशिद हुसैन को बेचने के लिए एक और समझौता किया गया था। इसकी कुल राशि 2 करोड़ रुपए थी और समझौते की वैधता 3 वर्ष थी।
  4. (यह समझौता 18/03/2021 को रद्द करने के लिए पंजीकृत किया गया था)
  5. 18/03/2021 को कुसुम पाठक और हरीश पाठक ने रवि मोहन तिवारी और इरफान उर्फ नन्हे मियां के बेटे सुल्तान अंसारी को सेल डीड द्वारा गाटा संख्या 243, 244 और 246 क्षेत्र 1.2080 हेक्टेयर भूमि बेची। इसकी कुल राशि 2 करोड़ रुपए निर्धारित की गई, सर्किल रेट पर मूल्यांकन 5.80 करोड़ रुपए, स्टांप भुगतान 5.80 करोड़ रुपए।
  6. उसी दिन रवि मोहन तिवारी और सुल्तान अंसारी ने इस जमीन को आरजेबी ट्रस्ट को बेचने का समझौता किया। 18.50 करोड़ रुपए पर सहम​ति बनी थी। ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए 17 करोड़ रुपए एडवांस के तौर पर दिए गए।

इससे पहले भी ​हमने आपको इस जानकारी से अवगत कराया था कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले विपक्ष एक गैर जरूरी मुद्दे को उठाने की कोशिश कर रहा है। राम मंदिर के निर्माण में बाधाएँ पैदा करने के लिए कई राजनीतिक दल घटिया राजनीति कर रहे हैं। वहीं हिन्दू राम मंदिर के लिए दशकों से इंतजार कर रहे हैं। वास्तव में इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

संजय सिंह ने किया हमले का दावा

कथित घोटाले की थ्योरी को विफल होते देख अब ‘आप’ नेता संजय सिंह ने दावा किया है कि भूमि सौदे पर सवाल उठाने के चलते मंगलवार सुबह कथित भाजपा के गुंडों द्वारा उन पर हमला किया गया था। सिंह ने दावा किया कि वह अपनी अंतिम साँस तक इस लड़ाई को जारी रखेंगे।

देखें ‘गलवान के वीरों’ की Video: LAC पर चीनी फौजियों को मुँहतोड़ जवाब देने के 1 साल बाद भारतीय सेना ने किया जारी

गलवान घाटी पर चीनी फौजियों के साथ हुई झड़प के एक साल बीतने पर भारतीय सेना ने एक वीडियो जारी की है। इस वीडियो में जो गाना गया है उसका शीर्षक ‘गलवान के वीर’ है। इसे गाने वाले मशहूर गायक हरिहरन हैं। इस वीडियो का मकसद उन वीरों को श्रद्धांजलि देना है जिन्होंने उस रात झड़प में अपनी जान गँवाई।

वीडियो में घाटी और पहाड़ी इलाकों के सीन को दिखाया गया है जहाँ भारत की अखंडता को बनाए रखने के लिए सेना के जवान कठिन इलाकों में कड़ी मेहनत कर रहे हैं। इस गाने के जरिए बताया गया है कि कैसे गलवान के वीरों ने अपनी जान देकर भी चीनी फौजियों को भारत की सीमा में घुसने नहीं दिया और उन्हें खदेड़ कर भगा दिया।

इस पूरे घटनाक्रम में 20 भारतीय फौजियों ने अपनी वीरगति को प्राप्त हुए थे जबकि रिपोर्ट्स के अनुसार, 43 चीनी फौजियों को इन जाबाँजों ने मौत के घाट उतार दिया था। इस झड़प के बाद आज भी ये मामला सुलझ नहीं पाया है। आज गलवान घाटी में हुए संघर्ष का एक साल पूरा होने पर खुद थलसेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे ने भी बहादुर सैनिकों को याद करते हुए कहा कि उनका शौर्य और पराक्रम हमेशा देश के दिलो-दिमाग में अंकित रहेगा।

बता दें कि 15 जून को चीनी फौजियों ने भारतीय सैनिकों पर लद्दाख बॉर्डर पर हमला किया था। भारत और चीन के सैनिकों के बीच लद्दाख सीमा पर हुए खूनी हिंसक झड़प में भारत के करीब 76 सैनिकों के घायल होने की भी खबर आई थी। बाद में यह भी मालूम चला था कि गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में डंडे और नुकीली चीजों से लैस चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर हमला किया था।

रिपोर्ट्स में कहा गया था कि चीनी सेना ने पहले से ही अपने पास लाठी-डंडे, रॉड, हॉकी स्टिक, बेसबॉल क्लब, ड्रैगन पंच, पाईप, पत्थर, कीलें, बूट की नोक जमा कर लिया था। और उसी का इस्तेमाल वे हिंसा के दौरान कर रहे थे। वहीं पहाड़ी पॉइंट 14 पर पहले से मौजूद चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों को निशाना बनाते हुए उनके ऊपर बड़े-बड़े पत्थरों को फेक कर भी हमला किया। बिना किसी हथियार के भारतीयों सैनिकों ने उनका डट कर मुकाबला किया। हालाँकि, इस झड़प में कई भारतीय सैनिकों को तो संभलने तक का मौका नहीं मिला था।

‘अगर कोई तूफान उठा, तो कैप्टन उसे रोक नहीं पाएँगे’: CM अमरिंदर के घर के बाहर इकट्ठा हुए सैकड़ों SAD समर्थक

पंजाब के सिसवान में स्थित मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के आवास पर मंगलवार (जून 15, 2021) को सैंकड़ों की तादाद में शिरोमणि अकाली दल के समर्थकों का जमावड़ा लगा। कोविड नियमों को ताक पर रखकर इकट्ठा हुई इस भीड़ को अलग करने के लिए पंजाब पुलिस ने वाटर कैनन का प्रयोग किया। इसके अलावा अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को भी प्रदर्शन का नेतृत्व करने पर हिरासत में ले लिया गया।

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा शेयर वीडियो में देख सकते हैं कि अकाली समर्थक कैसे मुख्यमंत्री के आवास के बाहर खड़े हैं वो भी बिना किसी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किए हुए। ज्यादातर के चेहरे पर मास्क भी नहीं है। इन सबके बीच में सुखबीर सिंह बादल को भी देखा जा सकता है।

बता दें कि पंजाब सीएम के घर के बाहर इकट्ठा हुई भीड़ के पास माँगों की लंबी सूची थी। इनका कहना था कि टीकाकरण की बिक्री और चिकित्सा आपूर्ति की खरीद में सामने आई कई विसंगतियों के मामले में सीबीआई की जाँच हो।

दूसरा ये चाहते थे राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू को बर्खास्त किया जाए। इसके अलावा विपक्षी दल की यह भी माँग है कि राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए भूमि अधिग्रहण बाजार दरों पर किया जाए और प्रभावित जमीन मालिकों को विस्थापन मुआवजा दिया जाए।

अकाली दल के प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने महामारी के दौरान राज्य के लोगों की पीड़ा का लाभ उठाने के लिए राज्य में कॉन्ग्रेस सरकार को आड़े हाथों लिया। चीमा ने कहा कि वैक्सीन और फतेह किट धोखाधड़ी ने पंजाबियों की अंतरात्मा को झकझोर दिया है।

वहीं दल के प्रमुख ने सत्ताधारी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य सरकार टीकाकरण से लेकर छात्रवृत्ति और किसानों की जमीन अधिग्रहण तक कई घोटालों में लिप्त है। वह कहते हैं, “अगर कोई तूफान उठा, तो कैप्टन उसे रोक नहीं पाएँगे, भले ही वह अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल करे।”

पुलिस हिरासत में लिए जाने से पहले सुखबीर सिंह बादल ने यह भी कहा कि टीकाकरण में घोटाला हुआ है, फतेह किट में घोटाला हुआ है, अनुसूचित जाति की छात्रवृत्ति में घोटाला हुआ है और अब किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है।

राहुल गाँधी का ‘बकवास’ ट्वीट देख भड़के CM योगी, दिया करारा जवाब, कहा- ‘सच आपने कभी बोला नहीं, जहर फैलाने में लगे हैं’

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति की पिटाई मामले में धार्मिक एंगल की बात को गाजियाबाद पुलिस द्वारा नकारे जाने के बावजूद राहुल गाँधी ने इस पर श्रीराम का नाम लेकर ट्वीट किया। इस ट्वीट को देख उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उन पर भड़क गए और उन्हें समझाया कि कैसे राहुल गाँधी झूठ फैलाकर मानवता को शर्मसार करने का काम कर रहे हैं।

राहुल गाँधी ने गाजियाबाद घटना पर अपना ट्वीट किया था, “मैं ये मानने को तैयार नहीं हूँ कि श्रीराम के सच्चे भक्त ऐसा कर सकते हैं। ऐसी क्रूरता मानवता से कोसों दूर है और समाज व धर्म दोनों के लिए शर्मनाक है।”

इस ट्वीट पर बहुत लोगों की प्रतिक्रिया आई। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके इस ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए उन्हें कहा, “प्रभु श्री राम की पहली सीख है- ‘सत्य बोलना’ जो आपने कभी जीवन में किया नहीं। शर्म आनी चाहिए कि पुलिस द्वारा सच्चाई बताने के बाद भी आप समाज में जहर फैलाने में लगे हैं। सत्ता के लालच में मानवता को शर्मसार कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की जनता को अपमानित करना, उन्हें बदनाम करना छोड़ दें।”

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर हाल में एक वीडियो वायरल हुई थी। इसमें एक मुस्लिम व्यक्ति ने चार अज्ञात लोगों पर गाजियाबाद में सुनसान पड़े एक मकान में ले जाकर उसे ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने के लिए मजबूर करने, पिटाई करने और दाढ़ी काटने का आरोप लगाया था।

हालाँकि,  गाजियाबाद पुलिस ने कहा कि वह 5 जून को हुई इस कथित घटना में पहले ही प्राथमिकी दर्ज कर चुकी है, लेकिन दो दिन बाद सात जून को पुलिस को इसकी सूचना दी गई। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अमित पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर के निवासी अब्दुल समद ने अपनी शिकायत में इस तरह के आरोप नहीं लगाए हैं जैसे कि वीडियो में लगाए गए। उन्होंने बताया कि इस मामले में पुलिस परवेश गुर्जर नाम के एक व्यक्ति को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है, जिसने आलिम के रूप में काम करने वाले समद से ताबीज लिया था।

पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की जब पुलिस ने जाँच की, तो पाया कि पीड़ित अब्दुल समद बुलंदशहर से लोनी बॉर्डर स्थित बेहटा आया था। वो एक अन्य व्यक्ति के साथ मुख्य आरोपित परवेश गुज्जर के घर बंथना गया था। वहीं पर कल्लू, पोली, आरिफ, आदिल और मुशाहिद आ गए।

वहाँ पर बुजुर्ग के साथ मारपीट शुरू कर दी गई। अब्दुल समद ताबीज बनाने का काम करता है। आरोपितों का कहना है उसके ताबीज से उनके परिवार पर बुरा असर पड़ा। अब्दुल समद गाँव में कई लोगों को ताबीज दे चुका था। आरोपित उसे पहले से ही जानते थे।

IT विभाग ने PFI का 80जी पंजीकरण किया रद्द, कहा- इस्लामी संगठन समुदायों के बीच ‘सद्भावना’ और ‘भाईचारे’ को कर रहा नष्ट

आयकर विभाग ने मंगलवार (15 जून 2021) को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का 80जी पंजीकरण रद्द कर दिया है। आयकर विभाग ने कहा कि इस्लामी संगठन समुदायों के बीच ‘सद्भावना’ और ‘भाईचारे’ को खत्म कर रहा है।

22 मार्च, 2021 के एक आदेश में कहा गया है कि आईटी विभाग ने आयकर नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का 80G पंजीकरण रद्द कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि पीएफआई ने आईटी अधिनियम की धारा 13(1)(बी) और धारा 12एए(4)(ए) का उल्लंघन किया है। आयकर कानून का सेक्‍शन 80G कुछ निश्चित रिलीफ फंड्स और चैरिटेबल संस्थानों को डोनेशन या दान देकर टैक्स कटौती का लाभ पाने का विकल्प उपलब्ध कराता है।

पूर्व खंड कहता है कि धर्मार्थ संस्थानों को छूट धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए एक ट्रस्ट के मामले में या इस अधिनियम के शुरू होने के बाद स्थापित की गई धर्मार्थ संस्था के मामले में लागू नहीं होगी। यदि किसी विशेष धार्मिक समुदाय या जाति के लाभ के लिए ट्रस्ट या संस्था बनाई या स्थापित की जाती है तो उसे इसका लाभ नहीं मिलेगा।”

बाद वाले खंड में ऐसे धर्मार्थ संगठन के पंजीकरण को रद्द करने का प्रावधान है। आदेश में कहा गया है कि पीएफआई समुदायों के बीच सद्भाव और भाईचारे को नष्ट करने में लगा हुआ है। आयकर अधिनियम की धारा 80G लोगों को जनकल्याणकारी गतिविधियों में भाग लेने के लिए छूट प्रदान करती है। कुछ ट्रस्ट या चैरिटी को दान करने पर व्यक्ति कर में छूट का दावा कर सकते हैं।

पिछले साल जनवरी में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सीएए विरोधी दंगों के दौरान पीएफआई सदस्यों द्वारा की गई हिंसा के कारण पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की माँग की थी। पीएफआई के सदस्यों को अक्सर आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाया गया है, जिसमें सांप्रदायिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हत्या भी शामिल है।

फरवरी में, केरल के चेलारी में पीएफआई ने अपने स्थापना दिवस पर रैली निकाली थी। इस रैली का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। वीडियो में परेड में आरएसएस की वेशभूषा पहने कुछ युवकों को जंजीर से जकड़ा हुआ दिखाया गया था। इसके अलावा अल्लाहु अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर रसूलुल्लाह और जुलूस के दौरान नारे लगाने वाले अन्य लोगों सहित कई इस्लामी नारे लगाने वालों की पुष्टि की गई थी।

कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पीएफआई का हिंसा फैलाने का इतिहास

पीएफआई का हिंसा करने का काफी पुराना इतिहास है। नागरिकता संशोधन अधिनियम के मद्देनजर हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों और देश भर में हिंसा की जाँच के दौरान, पीएफआई की भूमिका संदिग्ध रही है और पीएफआई के कई सदस्यों को दंगों में शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा पिछले साल नवंबर में कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने देश के विभिन्न हिस्सों में दंगों और हिंसा के लिए उकसाने के आरोपित किसानों के विरोध को अपना समर्थन दिया और प्रदर्शनकारियों को संविधान के संरक्षण के लिए संघर्ष करने के लिए कहा था।

पीएफआई और SIMI जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठन विभिन्न राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की फंडिंग के लिए कुख्यात हैं। दिसंबर 2019 में CAA के विरोध प्रदर्शनों के दौरान गृह मंत्रालय के साथ शेयर की गई एक खुफिया रिपोर्ट ने कुछ ‘राजनीतिक दलों’ की तरफ इशारा किया था और SIMI जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

इजराइली एंबेसी के बाहर विस्फोट प्लांट करने वालों की वीडियो जारी, सूचना देने वाले को NIA देगी ₹10 लाख का इनाम

दिल्ली में बने इजरायली दूतावास के पास 29 जनवरी को हुए बम ब्लास्ट मामले में दो संदिग्धों की तस्वीरें सामने आई है। NIA द्वारा शेयर की गई वीडियो में दो व्यक्ति दिख रहे हैं। ये लोग उसी तरफ जा रहे हैं जहाँ धमाका हुआ था।

58 सेकेंड की वीडियो में शुरू में देख सकते हैं कि एक संदिग्ध ने नीली और एक ने काली शर्ट पहनी है। बाद में दोनों काले रंग के कपड़ों में दिखते हैं। कहा जा रहा है कि दूतावास के बाहर विस्फोट इन्हीं दोनों ने बम प्लांट किया। अब एनआईए ने दोनों की सूचना देने वाले को 10 लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा की है।

NIA ने ट्वीट किया, “एनआईए इंडिया, नई दिल्ली में इजराइली दूतावास के पास विस्फोट से संबंधित एनआईए केस आरसी-02/2021/एनआईए/डीएलआई के संबंध में सीसीटीवी फुटेज में देखे गए दो संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करने में मदद करने के लिए जानकारी तलाश रहा है।”

NIA ने ट्वीट किया, “इन व्यक्तियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जानकारी देने पर 10 लाख रुपए (प्रत्येक के लिए) की नकद राशि इनाम में दी जाएगी। अगर आप किसी को पहचानते हैं तो [email protected], [email protected] या 011-24368800 और 9654447345 पर जानकारी दें।” NIA ने आरोपितों के वीडियो और फोटो के लिए गूगल ड्राइव का लिंक भी शेयर किया है।

गौरतलब है कि लुटियंस दिल्ली में 29 जनवरी, 2021 की शाम को इजरायल के दूतावास के बाहर हुए बम विस्फोट हुआ था। इसके बाद पूरी दिल्ली को हाई अलर्ट पर रखा गया। खासकर एयरपोर्ट्स और सरकारी इमारतों की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। पेवमेंट के निकट हाई-सिक्योरिटी जोन में हुए इस धमाके में आसपास खड़ी गाड़ियों के शीशे फूट गए थे। CISF (केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) ने महत्वपूर्ण स्थलों पर सुरक्षा कड़ी कर दी थी।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस धमाके में किसी के हताहत न होने की बात कही थी। साथ ही बताया था कि एजेंसियाँ इसके बारे में और कुछ पता लगा रही हैं। घटना के समय यहाँ से कुछ ही दूरी पर राजपथ पर स्थित एपीजे अब्दुल कलाम रोड पर बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी चल रही थी। एक गमले में डाले गए IED को सड़क पर रख दिया गया, जिसे धमाके का कारण माना गया था।

पाठकों तक हमारी पहुँच को रोक रही फेसबुक, मनमाने नियमों को थोप रही… लेकिन हम लड़ेंगे: ऑपइंडिया एडिटर-इन-चीफ का लेटर

प्रिय पाठकों, 

पहले मैं बता देती हूँ कि आखिर मैं ये पत्र क्यों लिख रही हूँ और क्यों मैंने निर्णय लिया है कि मैं महीने में ये आपको कम से कम 1 बार तो जरूर लिखूँगी। जब मैं ऑपइंडिया से जुड़ी, उस समय हम एक बहुत छोटी ईकाई थे और पाठकों से हमारी बातचीत मात्र नियमित नहीं बल्कि बहुत व्यक्तिगत और उपयोगी भी थी। हम जैसे-जैसे आगे बढ़े ये परस्पर संवाद का सिलसिला कम होता गया।

सोशल मीडिया के जरिए हम एक दूसरे से जुड़े थे, लेकिन इसके भँवर में बातचीच कम होती गई, संदेश कहीं गायब से होने लगे। कम से कम जहाँ से मैं देखती हूँ, हमारी बातचीत बिलकुल कम ही हो गई। काम का भार बढ़ने और संसाधनों के समान रहने के कारण टीम का हर सदस्य अपनी क्षमता की अधिकतम सीमा तक काम करता है।

आशा करती हूँ कि ये पत्र एक नई शुरुआत होंगे। मैं जानती हूँ कि इससे दो तरफा संवाद नहीं होगा लेकिन ये एक कोशिश है कि आप सबके साथ हमारी ईमानदारी से बातचीच हो और एक प्रयास है कि सही मायनों में आप हम से जुड़े रहें। हम ज्यादा से ज्यादा कोशिश करेंगे ये बताने की कि भीतर क्या चल रहा है। अगर हुए तो,  हम आपको अपनी उपलब्धियाँ और अपने संघर्ष भी बताएँगे। वैकल्पिक मीडिया के पास दुनिया में घटित हो रही चीजों से आँख मूँदकर कोने (Ivory tower) में बैठने की लग्जरी नहीं होती। इसका अस्तित्व ही मीडिया के उस हिस्से का विरोध है, जो पारदर्शिता को धता बताते हैं, या फिर लोगों को धोखे में रख कर पारदर्शिता का दिखावा करते हैं।

मैं झूठ नहीं कहूँगी, पिछले कुछ माह हमारे लिए कुछ संघर्ष वाले रहे। हम जैसे बढ़े हमसे उम्मीदें भी बढ़ गईं। एक तरफ जहाँ ये सब गर्व की बात थी कि फ्रीलांसरों द्वारा चलाए जा रहे एक ब्लॉग से हमने एक छोटे समय में अपने पाठकों में इतना दर्जा पा लिया कि वो हमसे अधिक की उम्मीदें करने लगे। दूसरी ओर हमारे पास मौजूद संसाधनों से उन उम्मीदों को पूरा करना भी हमारे लिए एक चुनौती रहा, चाहे ज्यादा हो या कम।

इन सबको एक दुष्चक्र की तरह सोचें। हमें नहीं मालूम कि हम अधिक संसाधन कहाँ से लाएँ, जब तक कि हम वह चीजें नहीं करते, जिनके लिए बड़े संसाधनों की आवश्यकता है।

अब जब हम इन सबके लिए संसाधन जुटाने के लिए संघर्ष कर रहे है, इस क्रम में हमारे ज़रूरत से ज्यादा दुश्मन बन गए हैं। कम से कम मेरे मामले में तो हमने जितना सोचा था उससे काफी ज्यादा। आप देखिए, मैंने ऑपइंडिया ज्वाइन किया था क्योंकि मुझे लिखना पसंद था और मुझे नहीं पता कि कब ये सब मेरे लिए मुझसे ज्यादा बड़ा हो गया। मैं दूसरों के लिए नहीं बोल पाती और मुझे यकीन है कि टीम के बाकी सदस्य भी ऐसा महसूस करते होंगे। कुछ ऐसे प्रोजेक्ट होते हैं जो आप अपने लिए उठाते हैं और जब आप उसे समझते हैं तो वह समझ उस प्रोजेक्ट को बरकरार रखने का कारण बन जाती है। आज यही ऑपइंडिया है।

अदालत में कुछ मामलों पर हमारी लड़ाई जारी है, जिनमें से एक केस इंडिया टुडे द्वारा दायर किया गया है, एक पत्रकार द्वारा जो हमारे लिए प्रतिष्ठा का मामला बन गया है, एक जिहादी द्वारा और कुछ अन्य, जिसमें वह कोर्ट केस भी शामिल है जिसमें मेरे परिवार और मुझसे पूछताछ की गई। इसके अलावा फेसबुक के साथ एक और लड़ाई हफ्तों से चल रही है।

ऑपइंडिया हिंदी का पेज फेसबुक पर अनपब्लिश होने की कगार पर है। ऐसे में फेसबुक के साथ हमारी ये लड़ाई में कई उतार-चढ़ाव आ रहे हैं। इनका अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। कारण बहुत तुच्छ और मोटिवेटिड हैं। ऐसा लगता है मानो कोई अदृश्य हाथ है जिसने न केवल ऑपइंडिया की रीच को कम किया हो बल्कि जानबूझकर कमियाँ खोजीं जो उनके मनमाने स्टैंडर्ड के ख़िलाफ़ निकलें और वह उनका इस्तेमाल उन्हें रोकने के लिए करें जिनसे वह सहमत नहीं थे।

फेसबुक ने जिन पोस्टों पर नाराजगी जताई, उनमें से एक रिपोर्ट थी जिसमें विस्तृत रूप से बताया गया था कि पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं की बेरहमी से हत्या की जा रही थी, जो कि हाल ही में देखी गई राजनीतिक हिंसा का सबसे बुरा रूप थी। आप पूछते हैं ऐसा क्यों हुआ? ठीक है, लेकिन फेसबुक तो पहले ही ‘इंस्टैंट आर्टिकल’ को डिसेबल कर चुका है। अब पता नहीं उन्हें ये पोस्ट पसंद नहीं आया या इसके पीछे राजनीतिक या अन्य कारण था, लेकिन इस बार उन्होंने इस एक्शन की वजह हमारी फीचर इमेज को बताई।

फेकबुक द्वारा हटाया गया पोस्ट

अब फेसबुक ने एक ऐसी रिपोर्ट को क्यों डिलीट किया जिसमें भाजपा कार्यकर्ता का शव पेड़ से लटका मिला था? क्यों फेसबुक को ऐसा लगता है कि ये खबर उनकी कम्युनिटी गाइडलाइन्स के विरुद्ध है? ऐसा इसलिए, क्योंकि उन्हें लगता है कि आर्टिकल की तस्वीर “हिंसा को बढ़ावा देती है और उसका महिमामंडन करती है।” मगर, जी नहीं। ऐसा नहीं था। खबर में इस्तेमाल की गई तस्वीर एक प्रतीकात्मक तस्वीर थी न कि वास्तविक घटना और वास्तविक पीड़ित की। उसका कोई चेहरा ही नहीं था। न ही हिंसा का जश्न मनाया जा रहा था। वह सिर्फ हिंसक घटना की एक रिपोर्ट थी।

इस लगातार उठा-पटक के बीच हमें फेसबुक से सिर्फ एक लिंक मिला जिसमें शुरू में ही मनमाने दिशा निर्देशों का जिक्र शामिल था। ये रोबोटिक रिस्पांस दिखाता है कि आखिर फेसबुक अपने उन उपभोक्ताओं का कितना ध्यान रखते हैं जो उनके राजनीति मत की ओर झुकने से मना कर देता है।

फेसबुक, ऑपइंडिया के अंग्रेजी पेज को भी निशाना बना रहा है। क्यों? क्योंकि फैक्टचेकर जो फेसबुक से जुड़े हैं उन्होंने तय किया है कि वह ऑपइंडिया को चुप कराएँगे। फेसबुक और उनके फैक्टचेकर मिलकर, ऐसे इमेल जिन्हें पढ़ा जाए तो लगता है कि किसी 13 साल के नौ सिखिए ने उन्हें लिखा हो, के साथ उन लोगों को सता रहे हैं जो उनके साथ मेल नहीं खाते।

मामले को बद्तर बनाने के लिए, भले ही हम फेसबुक के सामने बेनिफिट ऑफ डाउट रखें, तो भी उनके पास ऐसा कोई तंत्र नहीं है कि पब्लिशर फेसबुक तक डायरेक्ट पहुँच सके। जब ये ऐसी हरकत करते हैं तो पब्लिशर को क्या करना चाहिए, इनसे भीख माँगे या इनके हाथ जोड़ें ये समझाने के लिए कि आखिर ये गलत क्यों थे।

कई मीटिंगो, ईमेल और बातचीत के बाद, जहाँ हमने फेसबुक से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि एक ऐसा तंत्र हो जहाँ प्रकाशक राजनीतिक रूप से प्रेरित और पक्षपाती ‘तथ्य-जाँचकर्ताओं’ के बजाय फेसबुक पर ही शिकायत कर सके। हमारी रिक्वेस्ट बहरे कानों में पड़ी।

फिर भी, जंग चल रही है। ये उतार-चढ़ाव हो रहे हैं और जब भी हम उचित समझेंगे, हम मामले को अधिकारियों तक पहुँचाएँगे, लेकिन अब हम जो गहराई से जानते हैं, वह यह है कि यह अब हमारे बनाम उनके (फेसबुक) बीच की लड़ाई बन गई है। शायद यह हमेशा से था, लेकिन जैसे-जैसे हम ऊपर चढ़ते हैं, अहसास और मजबूत होता जाता है। हमें लगता है कि जिस ताकत का सामना हमें करना पड़ रहा है, वह लगभग हर हफ्ते हम पर पूरे जोर के साथ हमला बोलती है।

इन सबके के चलने के बीच, एक बेवकूफ ने वीडियो पर हमें ‘बास्टर्ड’ कहा। इस बीच मुझे सुझाव दिया गया कि शायद NCW से संपर्क करना उचित प्रक्रिया होगी। आखिर तमाम झूठों के आधार पर ऐसी गालियाँ खुलेआम वीडियो में दी जा रही है। हालाँकि, निजीतौर पर, मुझे नहीं लगता हमें ऐसा करना चाहिए। NCW उन महिलाओं के लिए काम करती है जो वाकई प्रभावित होती हैं। महिलाएँ जिनके साथ घरेलू हिंसा होती हैं, महिलाएँ जिन्हें डराया जाता है, महिलाएँ जिन्हें बेदखल किया जाता है आदि। मैं, निजीतौर पर और ऑपइंडिया एक संस्थान के तौर पर, हमेशा इन संस्थानों के गलत इस्तेमाल के ख़िलाफ़ हैं।

हम लड़ेंगे। लेकिन हम अपनी मर्यादा के साथ लड़ेंगे और अपने सम्मान को बरकरार रखेंगे।

कहने के लिए और भी बहुत कुछ है, लेकिन शायद यह समय रुकने का है इससे पहले कि एक पत्र का जो मतलब होता है उसकी जगह वह अंतहीन शेखी न बन जाए।

अगले माह तक।

हमें पढ़ते रहें। समर्थन देते रहे। आप वह ताकत हैं जो हमें निरंतर चलने की हिम्मत देती है।

नोट: मूल लेख इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ें।

‘जो मस्जिद शहीद कर रहे, उसी के हाथों बिक गए, 20 दिलवा दूँगा- इज्जत बचा लो’: सपा सांसद ST हसन का ऑडियो वायरल

उत्तर प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्ष (Zila Panchayat Adhyaksh) की कुर्सी के लिए जोड़-तोड़ का खेल शुरू हो गया है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद डॉ. एस.टी. हसन और सपा के एक जिला पंचायत सदस्य डॉ. रिजवान की बातचीत का ऑडियो सामने आया है।

ऑडियो में सांसद हसन कह रहे हैं, “तुम सपा के टिकट पर चुनाव लड़ो। क्या मुसलमानों ने तुम्हें इसलिए वोट दिया था कि तुम उस पार्टी को वोट दो, जो मुसलमानों की मस्जिदों को शहीद कर रही है, जो मुसलमानों की पहचान मिटाने पर तुली है देश में। तुम्हें नेता मैंने बनाया, समाजवादी पार्टी के टैग की वजह से तुम जीते हो और अब तुम बिक गए।”

खबर के मुताबिक, 10 मिनट 34 सेकंड के इस ऑडियो में सांसद डॉ. एस.टी. हसन कह रहे हैं, “तुम मुझे बेवकूफ समझ रहे हो या तुम अधिक चालाक हो… अगर तुम बिक गए हो तो बताया क्यों नहीं कि मैं भी बिक गया। तुम साफ-साफ बताओ इरादा क्या है? तुमने मेरा नाम मिट्टी में मिला दिया। तुमने वह किया जो मेरा दुश्मन भी नहीं करता। तुमने मुझे धोखा दिया। तुमसे बड़ा एहसान फरामोश कौन होगा।”

वहीं, ऑडियो में जिला पंचायत सदस्य डॉ. रिजवान कह रहे हैं, “डॉक्टर साहब वो (सपा वाले) 10 दे रहे थे। अब उन्होंने बढ़ाकर 20 किया होगा।” इस पर सांसद कहते हैं, “तुम्हें क्या लगता है? भाजपा वाले 30-35 देंगे। वो 20 से ज्यादा बिलकुल नहीं देंगे, तो समाजवादी पार्टी के 20 क्या बुरे थे? जब सपा वाले तुम्हारे घर 20 लेकर पहुँचे थे, तब तो तुमने यह कह दिया कि डॉक्टर साहब (सांसद) को दे दो, मेरे मालिक वही हैं।”

ऑडियो में जिला पंचायत सदस्य को कहते सुना जा रहा है, “डॉक्टर साहब उन्होंने (भाजपा) मेरा लाइसेंस कैंसिल करा दिया था।” इस पर सांसद कहते हैं, “लाइसेंस तो बहाल हो जाता, सपा की सरकार आने पर, लेकिन तुम महज 10 महीने के लालच में फँस गए। तुम क्या समझते हो, समाजवादी पार्टी की सरकार आएगी तो तुम बहुत बड़ी मुसीबत में फँस जाओगे। तुम्हारे सारे लाइसेंस कैंसिल हो जाएँगे।”

वायरल ऑडियो को लेकर सांसद डॉ. एस.टी. हसन का कहना है कि यह बातचीत उन्हीं की है। उन्होंने कहा कि वह अपने जिला पंचायत सदस्य को समझाने के लिए फोन किया था। वह उन्हें समझा रहे थे कि पार्टी से जीते तो पार्टी का साथ दो। किसी लालच में मत आओ। भाजपा ने उन्हें किसी रिसॉर्ट में रखा है, लेकिन वो शायद किसी मोटे लालच में आ गए हैं।

सपा की ओर से भी सदस्यों को 20 लाख रुपए दिए जाने के सवाल पर सांसद ने कहा कि उन्होंने 20 लाख नहीं कहा। 20 की बात हुई है। वो 20 हजार भी तो हो सकता है।

गौरतलब है कि मुरादाबाद जिला पंचायत में कुल सदस्यों की संख्या 39 है, जिनमें बसपा के 12, सपा के 11, भाजपा के 10, आम आदमी पार्टी के 01 और निर्दलीय 05 सदस्य हैं।

मंदिर में तोड़ी राम-जानकी की मूर्तियाँ, भाग निकले बदमाश: आक्रोशित लोगों ने कहा – दंगा फ़ैलाने की साजिश

बिहार के पश्चिम चम्पारण के बेतिया में स्थित राम-जानकी मंदिर में बदमाशों ने प्रतिमाओं को विखंडित कर दिया है। मंदिर में हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को विखंडित किए जाने के कारण स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। आक्रोशित लोगों ने आगजनी भी की और जल्द से जल्द दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। ये घटना बेतिया नगर के बसवरिया धुनियापट्टी स्थित राम जानकी मंदिर की है।

पुलिस ने बताया कि वो तेज़ी से इस मामले में कार्रवाई कर रही है और मंदिर के पुजारी के लिखित शिकायत पर नगर थाना में अज्ञात असामाजिक तत्वों पर मामला दर्ज कर के छानबीन भी प्रारंभ कर दी गई है। स्थानीय लोगों ने इस घटना को साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि मंदिर के आसपास नशेड़ियों और जुआड़ियों का अड्डा लगा रहता है, लेकिन पुलिस सब कुछ जानते हुए भी मूकदर्शक बनी रहती है।

जगदंबा नगर में हुई इस घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने तोड़फोड़ भी की। ये घटना रविवार (जून 13, 2021) की सुबह की है। पुजारी ने बताया कि सुबह 6 बजे उन्होंने मंदिर में साफ-सफाई का काम संपन्न किया था, जिसके बाद वो अपनी नित्यक्रिया के लिए चले गए थे। जब वो मंदिर में वापस आए तो उन्होंने देखा कि राम-जानकी की प्रतिमाओं को विखंडित कर दिया गया था। बसवरिया स्थित इस मंदिर में आसपास के लोग काफी श्रद्धा रखते हैं।

उनका कहना है कि ऐसा कर के शहर में सांप्रदायिक दंगे की साजिश रची जा रही है। उन्होंने पुलिस से कहा कि इस मामले में कार्रवाई के अलावा ऐसे अन्य बदमाशों पर भी कड़ी नजर रखने की आवश्यकता है। घटना की सूचना मिलते ही DSP मुकुल परिमल पांडे के नेतृत्व में नगर थाना, मुफस्सिल थाना व कालीबाग थाना की पुलिस वहाँ पहुँची। डीएसपी के आश्वासन के बाद लोगों ने सड़क जाम हटाया।

TMC पंचायत प्रधान ने कॉन्ग्रेस सहयोगी ISF को दी धमकी, कहा- पार्टी में शामिल हो जाओ, नहीं तो भुगतना होगा परिणाम

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस की जीत के बाद से राजनीतिक हिंसा के साथ खूनी खेल जारी है। प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं को हिंसा, बलात्कार, सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार का निशाना बनाया गया है। इसी बीच मंगलवार (15 जून 2021) को आज तक के डिप्टी डायरेक्टर अनुपम मिश्रा ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया है, जो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में तृणमूल कॉन्ग्रेस के पंचायत प्रधान को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के भांगर में इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के कार्यकर्ताओं को धमकाते हुए देखा गया।

मिश्रा के अनुसार, टीएमसी नेता ने आईएसएफ कार्यकर्ताओं को धमकी दी है कि अगर वे ममता बनर्जी की पार्टी में शामिल नहीं हुए तो उन्हें 100 दिन के भीतर परिणाम भुगतना होगा। टीएमसी नेता ने कहा, “मैं यह बहुत स्पष्ट और सोच समझकर ठंडे दिमाग से कह रहा हूँ। इसे बार-बार दोहरा रहा हूँ कि आप सभी हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम करें। उनके साथ मुद्दों पर चर्चा करें और योजना बनाएँ।”

इसके साथ ही पंचायत प्रधान को यह कहते हुए भी सुना गया कि आपने अब तक जो कुछ भी किया है वह अतीत की बात है। इसे भूल जाओ और हमारे साथ जुड़ जाओ। हमें आपको स्वीकार करने में कोई आपत्ति नहीं होगी। अन्य जगहों की तुलना में हमने यहाँ आप पर अत्याचार नहीं किया। हम आपको केवल यह कह रहे हैं कि हमारे साथ आओ और अपने क्षेत्र में शांति से रहो।

वीडियो में टीएमसी नेता और पूर्व विधायक अरबुल इस्लाम पंचायत प्रधान के ठीक बगल में बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं। मालूम हो कि इस साल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भांगर से टिकट न मिलने के बाद अरबुल इस्लाम के समर्थकों ने टीएमसी कार्यालय में तोड़फोड़ करने के बाद उसमें आग लगा दी थी। यहाँ यह उल्लेख भी करना जरूरी है कि अब्बास सिद्दीकी के नेतृत्व में आईएसएफ भांगर विधानसभा क्षेत्र से अपनी पहली सीट जीतने में सफल रही थी। आईएसएफ की सहयोगी राष्ट्रीय सेक्युलर मजलिस पार्टी के मोहम्मद नवसाद सिद्दीकी ने विधानसभा चुनाव में भांगर सीट जीती थी।

बता दें कि विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद टीएमसी के कार्यकर्ता एक 60 वर्षीय महिला के घर में जबरन घुस गए थे। उन्होंने लूटपाट करने से पहले 6 साल के पोते सामने ही बुजुर्ग का गैंगरेप किया। पीड़ित महिला ने बताया कि 3 मई को खेजुरी विधानसभा सीट से बीजेपी की जीत के बाद 100-200 टीएमसी कार्यकर्ताओं की भीड़ ने उसके घर को घेर लिया और उसे बम से उड़ाने की धमकी दी। इस डर से उसकी बहू अगले दिन घर छोड़कर चली गई। इसके बाद 4-5 मई को पाँच टीएमसी कार्यकर्ताओं ने चारपाई से बाँधकर 6 साल के पोते के सामने उसका गैंगरेप किया।