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सूना पड़ा प्रोपेगेंडा का फिल्मी टेम्पलेट! या खुदा शर्मिंदा होने का एक अदद मौका तो दे 

लेफ्ट लिबरली जुटे थे। हमेशा की तरह तर्क-वितर्क वगैरह से जगह सजी हुई थी। हर बार की तरह बातचीत से यह साबित हो गया कि ये डेमोक्रेसी शैम है। देश में किसी को बात करने की आज़ादी नहीं है। कार्टूनों को परेशान किया जा रहा है। पत्रकार दुखी हैं। सरकार के कहने पर फेसबुक सेक्युलर लोगों के पोस्ट उतरवा दे रहा है। सरकार के ही कहने पर ट्विटर कार्टूनिस्ट को नोटिस भेज दे रहा है। टूलकिट लीक हो जा रही हैं। किसान आंदोलन की जगह पर बलात्कार की खबरें भी लीक हो जा रही हैं। किसानों की जमीन चोरी कर ली जा रही हैं। भला हो दीदी का नहीं तो अभी तक देश हिंदू राष्ट्र बन जाता।

बातचीत आगे चली तो पता चला कि ये केवल मायूस ही नहीं हैं, बल्कि इनकी मायूसी बढ़ती जा रही है। हाल यह है कि बेचारे सुबह, दोपहर, शाम यही सोचते हुए आधे हुए जा रहे हैं कि या खुदा, शर्मिंदा होने का मौका क्यों नहीं मिल रहा? क्या हम इतने खराब हैं कि हमें शर्मिंदा होने का एक अवसर भी न मिले? कैसे बुरे दिन आ गए हैं कि प्लेकॉर्ड लेकर एक फोटो खिंचवाने का भी उपक्रम नहीं बन पा रहा। खुदा की ऐसी भी क्या लानत कि इंसान खाए, पिए, सोए, ट्वीट भी करे पर शर्मिंदा न हो सके? पूरे आठ महीने बीत गए बिना शर्मिंदा हुए। पिछली बार हाथरस में शर्मिंदा हुए थे। 

या खुदा, एक मौका तो दे कि तेरे बंदे शर्मिंदा हो सकें। क्यों हमारा इतना कड़ा इम्तिहान ले रहा है? एक दिन के लिए ही सही, शर्मिंदा हो लेने दे। शर्मिंदा हुए बिना आठ-आठ महीने बिताना मरने के बराबर है। सत्यानाश हो इस चीन का … सॉरी, इस कोरोना का जो शर्मिंदा होने का मौका हाथ लगने नहीं दे रहा। ये न आता तो बाहर निकलते। बाहर निकलते तो उन मित्रों से मिलते जो जरूरत पड़ने पर शर्मिंदा होने का रास्ता निकाल लेते थे। ये सब आइडिये बिना मिले आते भी नहीं। 

इस लाइफ में ऐसा समय आएगा, यह सपने में भी नहीं सोचा था। कितने प्यारे दिन थे जब हर दस-पंद्रह दिन में एक बार शर्मिंदा हो लेते थे। जब मन कहता था नारे लगा लेते थे। साथ-साथ डफली बजा लेते थे। मोदी का इस्तीफ़ा माँग लेते थे। भारत को धमकी दे लेते थे कि चाहे जो कर ले, तेरे टुकड़े होकर रहेंगे, इंशा अल्लाह इंशा अल्लाह। मिलकर नेता प्रोड्यूस कर लेते थे। ब्रह्मीनिकल पैट्रिआर्की का प्लेकार्ड थमा कर जैक के साथ फोटो खिंचवा लेते थे और आज ऐसे बुरे दिन आ गए हैं कि शर्मिंदा भी नहीं हो पा रहे। 

हमें याद है वह दिन जब नारा लगवा कर उमर खालिद को नेता बना दिए थे और आज हाल यह है कि महीनों से मार्च तक नसीब नहीं हुआ है। एक मौका न बन पाया कि खान मार्केट में मिलकर सौ मीटर का ही कोई मार्च कर लेते। ये लॉकडाउन न होता तो दिल्ली की ऑक्सीजन जो मोदी ने अपने कब्ज़े में कर ली है, उसी के खिलाफ एक मार्च कर लेते। यहाँ हाल यह है कि टुकड़े-टुकड़े वाले नारे तक नहीं लगा सकते। किसी के साथ सॉलिडेरिटी तक नहीं दिखा पा रहे। ऊपर से 370 से ये भी पता नहीं चल रहा कि कश्मीर में कौन सा इंटेलिजेंट स्टूडेंट गन एक्टिविस्ट बन गया। अभी लास्ट वीक तिहाड़ में किसी से जय श्रीराम बोलवाने की खबर आई थी तब लगा था कि बहुत दिन बाद शर्मिंदा हो लेंगे पर पता चला कि वो कोई ISIS वाला है। जानते ही हैं कि ऐसे लोगों के लिए शर्मिंदा होना आसान नहीं है। 

प्रोपेगेंडा का बॉलीवुडिया टेम्पलेट पड़े-पड़े धूल खा रहा है। एक्ट्रेस बेचारी परेशान हैं। उन्हें भी शर्मिंदा हुए डेढ़ बरस हो गए हैं। पिछली बार कठुआ में शर्मिंदा हुई थी। व्यक्तिगत स्तर पर स्वरा हर दूसरे दिन शर्मिंदा हो लेती हैं पर सामूहिक शर्मिंदगी देखे बहुत समय बीत गया। फिल्मों के लगातार फ्लॉप होने से पब्लिक में शर्मिंदा हो सकती हैं, पर जो मज़ा एक्टिविज्म वाली शर्मिंदगी में है, वो मज़ा प्रोफेशन वाली शर्मिंदगी में कहाँ? अभी परसों की बात है, सोनम पूछ रही थी कि ऐसा भी क्या हो गया है कि शर्मिंदगी का एक मौका भी नहीं निकल रहा? क्या जवाब देते? चुप रह जाना पड़ा। कैसे कहते कि हम इतने निकम्मे हो गए हैं कि शर्मिंदा होने का माहौल भी नहीं बना पा रहे?

बातें हो रही थीं तभी किसी का फ़ोन बज़ा। उसने हेलो कहा और उधर से मिले सन्देश में बाद उछल पड़ा। किसी ने पूछा; क्या हुआ? उसने जवाब दिया; आखिर अल्लाह ने हमारी सुन ली। जलील का फोन था। किसी ने कहा; वो फैक्टचेकर? जवाब आया; अरे हाँ वही। बता रहा था कि शर्मिंदा होने का मौका आ गया है। सब अपने-अपने फोन पर ट्विटर खोल लो और ट्वीट करके शर्मिंदा हो लो। 

किसी ने पूछा; अरे तो हुआ क्या है वो बताओ न? जवाब आया; अरे वह एक वीडियो भेज रहा है। हमारे एक बुजुर्ग चिचा को मार कर जय श्रीराम बुलवाया गया है। उसका वीडियो जलील के पास आ गया है।

निस्तेज भी वहीं थे। उन्होंने कहा; इस वीडियो का जलील ने फैक्ट चेक तो नहीं कर लिया है? 

जवाब आया; हाँ, वो बता रहा था कि वीडियो का फैक्ट चेक उसने कर लिया है। बस वो ट्वीट करने ही वाला है। जैसे ही उसका ट्वीट आए वैसे ही दस मिनट के अंदर हम सब को शर्मिंदा हो लेना है। 

निस्तेज सुन कर बोले; जलील ने फैक्ट चेक करके वीडियो को सही बताया है तो घटना हंड्रेड परसेंट फेक है लेकिन फिर भी चलो, शर्मिंदा हो लेते हैं। महीनों बाद मौका मिला है। पता नहीं अगला मौका कब मिले। 

सुनते ही सबने अपना अपना फोन सँभाल लिया। अगले पॉंच मिनट में सब एक साथ शर्मिंदा हो रहे थे।

‘मुस्लिम जज’ ने दिया था सरेआम गाय काटने का आदेश, अंग्रेजी तोप के सामने उड़ा दिए गए थे 66 नामधारी: गोहत्या विरोधी कूका आंदोलन

क्या आपको ‘कूका आंदोलन’ के बारे में जानते हैं? जब अंग्रेजों ने भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को विफल कर के पूरे भारत को गुलाम बना लिया था और कॉन्ग्रेस पार्टी का गठन भी नहीं हुआ था, तभी सद्गुरु राम सिंह के नेतृत्व में हुए ‘कूका आंदोलन’ में 66 सिखों ने बलिदान दिया था। अंग्रेजों की शह पर मुस्लिम सरेआम गोहत्या कर रहे थे, तब इन्हीं लोगों ने इस कुकृत्य का विरोध करते हुए उन्हें सबक सिखाया था।

भारत एक ऐसा देश है, जिसकी आत्मा हजारों वर्षों से गाँवों में बसती रही है और गाँव की अर्थव्यवस्था के लिए कृषि और जानवरों का अच्छा-खासा महत्व रहा है। उसमें भी गायों का किरदार सबसे ज्यादा रहा है, क्योंकि उनसे दूध मिलता है। साथ ही तकनीक का प्रभाव बढ़ने से पहले कृषि कार्य में भी बैलों का रोल क्या था, ये किसी से छिपा नहीं है। अंग्रेजों के समय में भी गायों का ऐसा ही महत्व था और हिन्दुओं की उनमें इतनी ही श्रद्धा थी।

अंग्रेज अक्सर हिन्दुओं और मुस्लिमों को लड़ाने के लिए तरह-तरह के तिकड़म भिड़ाते रहते थे। चूँकि वो खुद बीफ खाते थे, इसीलिए उन्होंने गोहत्या को भी भारत में मंजूरी दे दी थी। न सिर्फ हिन्दुओं, बल्कि सिखों के लिए भी गाय उतनी ही पवित्र थी। गुरु नानक ने कहा था कि ब्राह्मणों और गायों की रक्षा करनी चाहिए। गुरु गोविंद सिंह ने तुर्क को ख़त्म कर के इस पृथ्वी पर गोहत्या को निषेध करने का प्रण लिया था।

सिख सम्राट रणजीत सिंह जब तक जीवित थे, तब तक उनके साम्राज्य में गोहत्या पर प्रतिबंध रहा। लेकिन, हिन्दुओं और सिखों के लिए दुर्भाग्य ये रहा कि महाराजा का 1839 में निधन हो गया। अंग्रेजों ने लाहौर पर कब्ज़ा कर लिया। अप्रैल 1, 1846 को एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई, जब अंग्रेजों के हथियारों के केयरटेकर ने गायों के एक झुण्ड पर हमला कर के कई गायों को घायल कर दिया। स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए और उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया।

अंग्रेज अधिकारी जॉन हेनरी लॉरेंस उन्हें मनाने के लिए आया, जिस पर ईंट-पत्थरों से हमला किया गया। उसने इस हमले का क्रूर बदला लिया और कई पंडितों को फाँसी की सज़ा दे दी। कुछ अन्य को देश निकाला दे दिया गया। अंग्रेजों ने उनके हाथ में हाथखड़ी लगा कर चेहरे पर कालिख पोत कर पूरे शहर में घुमाया। लोग इतना डर गए कि अंग्रेजों ने गोहत्या को बढ़ावा देना शुरू कर दिया। हरमंदिर साहिब में एक कॉपर प्लेट पर शहर में गोहत्या पर प्रतिबंध की बात लिखी थी, लेकिन पूरे पंजाब के बारे में कुछ नहीं लिखा था।

फिर क्या था, अंग्रेजों ने इसी बात का फायदा उठाया। 1846 के बाद से ही अंग्रेजों ने ये रणनीति बना ली थी कि गोहत्या को बढ़ावा देकर हिन्दुओं और मुस्लिमों को लड़ाया जाए। पूरे पंजाब में गोहत्या को लागू कर दिया गया और साथ ही दुकानों में खुलेआम माँस की बिक्री की अनुमति भी दे दी गई। 1849 में लॉर्ड डलहौजी ने कह दिया कि किसी को भी दूसरे की आस्था को चोट पहुँचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

डिप्टी कमिश्नर एमसी सौंडर्स ने लाहौरी गेट के पास ही बूचड़खाना खोलवा दिया। अमृतसर को अंग्रेजों ने चमड़ी के व्यापार का हब बना डाला। वहाँ सिखों की जनसंख्या वैसे ही कम हो गई थी, लेकिन हिन्दू अभी भी बहुत थे। गोहत्या से दुःखी हिन्दुओं ने आपत्ति जताई, लेकिन मुस्लिमों ने कट्टरवादी रुख अपनाया और फिर दंगे हुए। मामले कोर्ट में पहुँचे। अदालत ने मुस्लिमों के हक़ में फैसला दिया। गलियों में भी माँस बिकने लगे।

नामधारी सिखों ने आंदोलन किया और इस्लामी कट्टरवादियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद मुस्लिमों की प्रतिक्रिया से दंगे भड़के। मलेरकोटा के मुस्लिम जज ने आदेश दे दिया कि प्रदर्शनकारियों के सामने ही एक बैल को काटा जाए। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व गुरुमुख सिंह कर रहे थे। कोटला की तरफ 200 नामधारी इस कुकृत्य को रोकने के लिए निकल पड़े। मलेरकोटा के अधिकारियों के साथ संघर्ष में 7 सिख मारे गए।

कइयों को पटियाला में गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें तोप के सामने बाँध कर उड़ा देने का आदेश दिया गया। फिर क्या था। उन सभी पर ‘बंगाल रेवोल्यूशन एक्ट 1818’ लगाया गया और 66 सिख ‘सत श्री अकाल’ का नारा लगाते हुए अंग्रेजों की तोप का निशाना बन गए। अगले 50 वर्षों तक उनके बलिदान को याद करने वाले काफी कम लोग ही रहे, 1928 में भगत सिंह के एक लेख में उनके बलिदान को याद किया गया।

ये घटना जून 1871 की है, जब सिखों ने बूचड़खाने पर हमले का निर्णय लिया था। ये हमला 14 जून को किया गया रात को ही क्लॉक टॉवर के पास स्थित बूचड़खाने पर हमला किया गया। इससे पहले उनका हमला विफल हो गया था, क्योंकि कुत्ते भौंकने लगे थे। इस बार उन्होंने कुत्तों के लिए भोजन लाया था। बूचड़खाने के कसाइयों ने उन्हीं हथियारों से हमला बोला, जिनसे वो गोहत्या किया करते थे।

सिखों ने उनमें से कइयों को मौत के घाट उतार दिया। कई घायल हुए और कई अपनी जान बचाने के लिए भाग निकले। बूचड़खाने में 100 से भी अधिक गायें थीं। अगले दिन 15 जून को ये खबर आग की तरह फैली और बूचड़खानों को बंद कर दिया गया। ब्रिटिश सरकार हरकत में आई और जाँच बिठाई गई। हत्याओं के बारे में सूचना देने के लिए 1000 रुपए का इनाम रखा गया। सद्गुरु राम सिंह का नाम भी इसमें सामने आया।

सद्गुरु ने सिखों से कहा कि अब बलिदान के अलावा कोई चारा नहीं है। तारा सिंह रंजन और रतन सल्दी की पुस्तक ‘SATGURU RAM SINGH AND KUKA MOVEMENT‘ के अनुसार, इनमें से संत राम सिंह को कुछ लोगों को तो छोड़ दिया गया, लेकिन उनके कई साथी फाँसी चढ़ा दिए गए। शिमला के बनगांवाला में अंग्रेजों ने गोहत्या चालू रखी थी और वहाँ इसे फन के रूप में लेते थे, इसीलिए सिखों ने वहाँ के लिए प्रस्थान किया। वहाँ भी यही घटना दोहराई गई थी।

‘उन्हें चाकू मारो, हराम रेस्तरां में जाकर खाने में जहर डाल दो’: तुर्की में आजाद घूम रही ISIS की आतंकी दुल्हन

ऑस्ट्रेलिया की पहली ‘आईएसआईएस आतंकी दुल्हन’ ज़ेहरा डूमन अपने दो बच्चों के साथ तुर्की में रह रही है। आतंकी संगठन की सदस्य होने के कारण तुर्की की अदालत ने सितंबर 2020 में उसे सात साल जेल की सजा सुनाई थी। लेकिन नवंबर 2020 में उसे तुर्की की एक अन्य अदालत ने रिहा कर दिया। 2019 के मध्य तक डूमन के पास ऑस्ट्रेलिया और तुर्की की दोहरी नागरिकता थी। वहीं, इस्लामिक स्टेट (IS) आतंकवादी समूह के साथ संबंधों को लेकर उसकी ऑस्ट्रेलियाई नागरिकता छीन ली गई थी।

डूमन और उसके बच्चे उन 70 ऑस्ट्रेलियाई महिलाओं और बच्चों में से थे, जिन्हें 2019 में आईएस के पतन के बाद पूर्वोत्तर सीरिया के अल-हवल हिरासत शिविर में रखा गया था। एक साक्षात्कार में उसने कहा था कि वह ऑस्ट्रेलिया लौटना चाहती है। हालाँकि, चार महीने बाद ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने एक पत्र के माध्यम से डूमन को सूचित किया कि उसकी ऑस्ट्रेलियाई नागरिकता रद्द कर दी गई है।

आईएसआईएस में शामिल होने वाली ऑस्ट्रेलियाई आतंकी जेहरा, image via The Australian

बाद में डूमन अल-हावल से भाग गई और तस्करों की मदद से तुर्की चली गई। ऐसा करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। पिछले साल सितंबर में दक्षिणी तुर्की के शहर सनलिउरफा की एक अदालत ने उसे आईएसआईएस से जुड़े होने के कारण छह साल और दस महीने जेल की सजा सुनाई थी। दो महीने बाद वह दक्षिणी तुर्की शहर गाजियांटेप की एक अदालत में पेश हुई। अदालत ने उसे यह कहते हुए रिहा कर दिया था कि वह एकमात्र व्यक्ति है, जो अपने बच्चों- लैला और जराह की देखभाल कर सकती है। आज डूमन तुर्की के एक अनजान जगह पर अपना जीवन आनंद से गुजार रही है।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान डूमन ने बयान दिया था कि उसकी दो बार जबरन शादी की गई थी और उसके दोनों शौहर सीरिया युद्ध में मारे गए। उसने आरोप लगाया कि जब उसने वहाँ से भागने की कोशिश की तो 2017 में आईएसआईएस ने उसे कैद कर लिया था। उसने बताया कि उसका पहला बच्चा दूसरे शौहर से और दूसरा बच्चा तीसरे शौहर से हुआ है।

एक पुरानी फोटो में अपनी माँ के साथ आईएसआईएस आतंकी जेहरा डूमन, image via SBS

सुनवाई के दौरान डूमन ने इस्लाम और आईएसआईएस की ओर झुकाव के लिए अपने बचपन को दोष दिया। उसने बताया कि उसके माता-पिता का तलाक, दोनों के बिगड़े रिश्ते, ब्रेकअप और अवसाद ने उसे इस्लाम की ओर कदम बढ़ाने में मदद की। उसने बताया कि उसके किशोरावस्था में 2014 में उससे मोहम्मद अब्दुल लतीफ नाम का चरमपंथी मिला। उसने बताया, “लतीफ ने मुझसे सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क किया। वह जानता था कि मेरी जिंदगी बहुत उलझी हुई है।” उसने कहा, “मैं तुम्हें एक खुबसूरत जिंदगी दूँगा। मैंने उस पर विश्वास कर लिया।” डूमन ने बताया कि वह 19 साल की उम्र में तुर्की चली गई और 2014 में सीरिया।

वहाँ अबु बकर नाम के एक आतंकी ने आईएसआईएस के अधिकार वाले क्षेत्र में उसे पहुँचाया और उसे वहाँ रखा, जहाँ आईएस अविवाहित लड़कियों को रखता था। एक महीने बाद अब्दुल लतीफ उसे रक्का ले गया और उससे निकाह कर लिया। जहाँ वह रहती थी, वहाँ ऑस्ट्रेलिया में जन्मे कई आईएस आतंकी रहते थे। साल 2015 के एक एयर स्ट्राइक में लतीफ की मौत हो गई, उसके बाद उसने इराक के नेदोल नाम के आतंकी से निकाह कर लिया। साल 2016 में नेदोल भी मारा गया।

डूमन का पहला शौहर अब्दुल लतीफ, image via SBS

जिस समय आईएसआईएस की ओर उसका झुकाव हो रहा था, उस दौरान के उसके जीवन की कई घटनाएँ उसके कट्टरपंथी होने की झलक देती हैं। वह आईएसआईएस में शामिल होने वाले एक अन्य ऑस्ट्रेलियाई खालिद शरौफ की पत्नी तारा नेट्लटन की सबसे अच्छी दोस्त थी। डूमन भोले-भाले लोगों को आतंकवादी संगठन में भर्ती करने के लिए ‘कुख्यात’ थी।

डूमन ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर भड़काऊ सामग्री पोस्ट की थी, जिसमें पश्चिमी अधिकारियों का मजाक उड़ाने वाले ट्वीट, गैर-मुसलमानों को मारने की कसम खाना और बंदूकों के साथ खुद की तस्वीरें शामिल थीं। जब अब्दुल लतीफ से उसकी शादी हुई, तो उसने लिखा था, “आज मेरी शादी हुई है। अल्हमदुलिल्लाह (ईश्वर की स्तुति) मैंने हिजरा (तीर्थयात्रा) किया और यहाँ शादी कर ली यार, इंशाअल्लाह साथ ही मुझे एक सुंदर मौत भी मिलेगी।”

डूमन के विवादास्पद ट्वीट

शादी के तुरंत बाद उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जेहादी पोस्ट करना शुरू कर दिया। एक ट्वीट में उसने लिखा, “अमेरिका+ऑस्ट्रेलिया, कैसा लगता है कि हम सभी 5 तुम्हारी जमीन पर पैदा हुए और पले-बढ़े हैं और अब यहाँ हम तुम्हारे खून के प्यासे हैं?” एक अन्य ट्वीट में उसने अपने अनुयायियों से काफिरों (गैर-मुसलमानों) को जहर देने का आह्वान किया। उसने लिखा, “उन्हें चाकू मारो और जहर दो। अपने शिक्षकों को जहर दो, हराम रेस्तरां में जाओ और खाने में बड़ी मात्रा में जहर डाल दो।”

2019 में आईएसआईएस के पतन के बाद उसने एक साक्षात्कार में कहा था कि वह ऑस्ट्रेलिया लौटना चाहती है, क्योंकि उसके दोनों बच्चे बीमार हैं और उसके पास पैसे भी नहीं है। । उसने कहा, “मुझे पैसे रखने की अनुमति नहीं है। वे हमें यहाँ खाना नहीं देते हैं। मेरे बच्चों को कम से कम सामान्य बच्चों की तरह व्यवहार करने का अधिकार है।”

डूमन एक दर्जन से अधिक ऑस्ट्रेलियाई लोगों में से एक थी, जिनकी ऑस्ट्रेलिया सरकार ने आतंकवादी संगठन से संबंध रखने के कारण नागरिकता छीन ली थी। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने खासकर उन आतंकवादियों की नागरिकता को रद्द किया, जिनके पास दोहरी नागरिकता थी। जिनके पास केवल ऑस्ट्रेलियाई नागरिकता है, उन्हें छोड़ दिया गया था।

AltNews वाले मोहम्मद जुबैर ने किया ‘राम का नाम बदनाम’, गाजियाबाद पुलिस करेगी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक मुस्लिम बुजुर्ग की पिटाई की घटना में जबरदस्ती ‘जय श्रीराम’ का एंगल देकर झूठ फैलाने के मामले में ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर पर गाजियाबाद पुलिस कार्रवाई करेगी।

इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा था,

“टोना टोटका करने और ताबीज के नाम पर एक गर्भवती महिला की जिंदगी तबाह करने पर पीटा गया, पीटने में आदिल, आरिफ और मुशाहिद भी शामिल थे। लेकिन राम का नाम बदनाम करने और यूपी में दंगा भड़काने के लिए दंगाइयों ने कुछ और ही कहानी गढ़ डाली। गाजियाबाद पुलिस कृप्या संज्ञान ले।”

इस ट्वीट के जवाब में गाजियाबाद पुलिस ने जानकारी दी कि उन्होंने मामले में संज्ञान ले लिया है और आगे नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि कथित ‘फैक्ट चेक’ वेबसाइट ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने बिना तथ्यों को जानें 14 जून को सोशल मीडिया पर मुस्लिम बुजुर्ग की वीडियो अपलोड की थी। अपने ट्वीट में जुबैर ने लिखा था, “एक बुजुर्ग आदमी, सूफी अब्दुल समद सैफी पर गाजियाबाद के लोनी में 5 गुंडों ने हमला किया। उन्हें बंदूक की नोक पर मारा गया, प्रताड़ित किया गया और जबरदस्ती उनकी दाढ़ी काट दी गई।”

अगले ट्वीट में जुबैर ने अब्दुल के बयान की पूरी वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट में लिखा, “ये अब्दुल समद सैफी की घटना को बयान करते हुए पूरी वीडियो है। उनका दावा है कि उनसे जबरदस्ती जय श्रीराम का नारा बुलवाया गया।”

गाजियाबाद पुलिस ने बताई हकीकत

अब्दुल समद सैफी की वीडियो सोशल मीडिया पर जब वायरल हुई तो मोहम्मद जुबैर की तरह कई अन्य लोगों ने दावा किया कि उनसे यूपी के गाजियाबाद में जबरदस्ती ‘जय श्री राम’ बुलवाया गया और मारपीट कर जबरन उनकी ढाढ़ी काट दी गई।

गाजियाबाद पुलिस ने बताया कि ये घटना जून 5, 2021 की है, जिसके बारे में पुलिस के समक्ष 2 दिन बाद रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की जब पुलिस ने जाँच की, तो पाया कि पीड़ित अब्दुल समद बुलंदशहर से लोनी बॉर्डर स्थित बेहटा आया था। वो एक अन्य व्यक्ति के साथ मुख्य आरोपित परवेश गुज्जर के घर बंथना गया था। वहीं पर कल्लू, पोली, आरिफ, आदिल और मुशाहिद आ गए।

वहाँ पर बुजुर्ग के साथ मारपीट शुरू कर दी गई। अब्दुल समद ताबीज बनाने का काम करता है। आरोपितों का कहना है उसके ताबीज से उनके परिवार पर बुरा असर पड़ा। अब्दुल समद गाँव में कई लोगों को ताबीज दे चुका था। आरोपित उसे पहले से ही जानते थे। पुलिस ने बताया कि मुख्य आरोपित पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। कल्लू और आदिल भी गिरफ्तार कर लिए गए। अन्य अभियुक्तों की जल्द गिरफ़्तारी का आश्वासन भी पुलिस ने दिया है।

आसिफ इकबाल तन्हा, देवांगना कलिता, नताशा नरवाल को HC ने दी जमानत: दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों में UAPA के तहत हुई थी गिरफ्तारी

दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार (15 जून 2021) को राष्ट्रीय राजधानी में हिंदू विरोधी दंगों के आरोपित पिंजड़ा तोड़ की नताशा नरवाल, देवांगना कलीता और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र नेता आसिफ इकबाल तन्हा को जमानत दे दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अदालत में इस मामले की सुनवाई जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस ए जे भमभानी ने की। हाई कोर्ट की बेंच ने दिल्ली दंगों के मुख्य साजिशकर्ता इन आरोपितों को 50 हजार के निजी बॉन्ड पर जमानत दी है।

इसके साथ ही कोर्ट ने UAPA के तहत गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपितों आसिफ इकबाल तन्हा, नताशा नरवाल और देवांगना कलिता को अपने-अपने पासपोर्ट जमा करने, भविष्य में गवाहों को प्रभावित न करने और सबूतों के साथ छेड़खानी न करने का भी निर्देश दिया है।

पिछले साल फरवरी में दिल्ली की सड़कों पर हिंदू विरोधी दंगे फैलाने में इन तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। उच्च न्यायालय ने हिंदू विरोधी दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर संख्या 59 के सिलसिले में तीनों आरोपितों को जमानत दे दी है। एफआईआर संख्या 59/2020 में दिल्ली पुलिस ने आसिफ तन्हा, नताशा नरवाल और देवांगना कलिता समेत कुल 15 लोगों को नामजद किया था। पुलिस ने दावा किया है कि तन्हा ने नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (CAA) के विरोध में दिल्ली में दंगे कराने में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र और 2014 से छात्र व इस्लामवादी संगठन SIO के सदस्य आसिफ को मई 2020 में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत पूर्वी दिल्ली के दंगों के पीछे एक बड़ी साजिश का हिस्सा होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इकबाल ने निचली अदालत के 26 अक्टूबर 2020 के उस निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है, जिसमें निचली अदालत ने उसे जमानत देने से इनकार कर दिया था।

दरअसल, आसिफ इकबाल ने 12 दिसंबर 2020 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया के गेट नंबर 7 से दंगे कराने और 2500-3000 लोगों के मार्च करने की बात स्वीकार की थी। उसने खुलासा किया था कि शरजील इमाम ने प्रदर्शनकारियों को 13 दिसंबर को चक्का जाम करने के लिए उकसाया और भड़काऊ भाषण दिया था।

आसिफ इकबाल ने आगे यह भी कहा कि शरजील ने कोलकाता, कोटा, लखनऊ, कानपुर, उज्जैन, इंदौर, जयपुर, पटना, सब्जीबाग, अररिया, समस्तीपुर, अहमदाबाद समेत देश में कई हिस्सों में भड़काऊ भाषण दिए। कथित तौर पर, उसने मुसलमानों से भारतीयों के खिलाफ विरोध करने और जरूरत पड़ने पर हिंसा में शामिल होने से गुरेज नहीं करने का आग्रह किया था।

हिंदू विरोधी दिल्ली दंगे के मामले में पिंजरा तोड़ की नताशा नरवाल और देवांगना कलिता 23 मई 2020 को गिरफ्तार किया था। सीलमपुर, जाफराबाद और ट्रांस-यमुना के स्थानीय लोगों ने पिंजरा तोड़ कार्यकर्ताओं पर राष्ट्रीय राजधानी में दंगे भड़काने का आरोप लगाया था। पिंजड़ा तोड़ की स्थापना 2015 में हुई थी। इनका दावा है कि ये संस्था छात्रावासों और पेइंग गेस्ट में छात्राओं के लिए पाबंदियों को खत्म करना चाहता है।

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ 24 फरवरी 2020 में हुए प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में 53 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 400 से अधिक लोग घायल हो गए थे। इस मामले में खालिद, इशरत जहाँ, ताहिर हुसैन, मीरान हैदर, नताशा नरवाल, देवांगना कलिता, आसिफ इकबाल तन्हा और शिफा उर रहमान का नाम सामने आया था।

अब्दुल की दाढ़ी काटने से लेकर आफ़ताब की हत्या तक: 19 घटनाएँ, जब झूठ निकला जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाने वाला दावा

मीडिया को हिन्दू प्रतीक चिह्नों से इतनी नफरत है कि ‘जय श्री राम’ जैसे पवित्र शब्द को बदनाम करने के लिए कई सालों से कोशिश की जा रही है, खासकर भाजपा के सत्ता में आने के बाद से। 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के साथ ही ‘जबरन जय श्री राम बुलवाने’ वाला नैरेटिव गढ़ा गया और इसके लिए कितनी ही घटनाओं में इसे जबरदस्ती घुसेड़ा गया। यहाँ हम ऐसी ही कुछ घटनाओं के बारे में बता रहे हैं।

‘मुस्लिम बुजुर्ग को पीटा-दाढ़ी काटी, बुलवाया जय श्री राम’ – पुलिस ने नकारा

आरोप लगाया गया कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक मुस्लिम बुजुर्ग से जबरदस्ती ‘जय श्री राम’ बुलवाया गया। मुस्लिम बुजुर्ग ने 4 अज्ञात लोगों पर पिटाई और जबरन दाढ़ी शेव कराने का आरोप लगाया। AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी और AltNews के जुबैर ने ‘जय श्री राम’ को बदनाम करने का बीड़ा उठाया। इन दोनों ने आरोपितों में आरिफ और मुशाहिद का नाम छिपा लिया। ये मामला ताबीज को लेकर मारपीट का निकला।

मुस्लिमों ने ही मस्जिद की दीवार पर दंगा भड़काने के लिए लिखे थे ‘जय श्री राम’

भैंसा के एएसपी किरण खरे ने कहा कि मस्जिद की दीवारों पर ‘जय श्री राम’ लिखने वाले लोगों की सीसीटीवी फुटेज से पहचान कर ली गई। आरोपितों में से एक की पहचान मोहम्मद अब्दुल कैफ के रूप में हुई और दूसरा नाबालिग निकला। घटना तेलंगाना के भैंसा की थी। कुछ महीनों पहले ही भैंसा में हिंदू समुदाय के खिलाफ दंगा भड़का था, जिसकी वजह से वहाँ पर सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हो गया था।

तनिष्क स्टोर में ‘जय श्री राम’ के नारों का खौफ? फैक्ट चेकर मो. जुबैर ने किया हिन्दुओं को बदनाम करने का प्रयास

मोहम्मद जुबैर ट्विटर पर तनिष्क विज्ञापन विवाद का फायदा उठाते हुए यह साबित करने का प्रयास करते देखा गया कि लोग ‘जय श्री राम’ का नारा लगाकर तनिष्क के शोरूम पर हमला करने की प्लानिंग कर रहे हैं या फिर तनिष्क स्टोर में मौजूद लोगों को डराने का प्रयास कर रहे हैं और हिंदू तनिष्क स्टोर के बाहर आक्रामक प्रदर्शन कर रहे हैं और शोरूम में मौजूद सभी लोगों पर हावी हो रहे हैं। ये बात भ्रामक निकली।

दरअसल, वीडियो से पता चला कि दरअसल लोग प्रदर्शन तो कर रहे थे, लेकिन जिस तरह हिन्दुओं को निशाना बनाते हुए मोहम्मद जुबैर ने अपने वीडियो के जरिए दर्शाया, वैसे नहीं। जुबैर के ही पोस्ट पर ‘बेफिटिंग फैक्ट’ नाम से एक ट्विटर यूजर ने तनिष्क शोरूम के बाहर हो रहे प्रदर्शन का वीडियो पोस्ट किया। कुछ लोग शोरूम के बाहर जमीन पर बैठकर शांतिपूर्ण तरीके से सिर्फ जय श्री राम का नारा लगा रहे थे। 

‘जय श्रीराम बुलवा, जबरन शराब पिला कर मार डाला’: कैब ड्राइवर आफताब की हत्या पर मीडिया का झूठ, UP पुलिस ने खोला राज

मोहम्मद आसिफ खान नामक व्यक्ति ने एक खबर शेयर करते हुए दावा किया कि गौतम बुद्ध नगर में आफताब आलम नामक एक कैब ड्राइवर को मार डाला गया। साथ ही ये भी दावा किया कि हत्या से पहले कैब ड्राइवर को ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए बाध्य किया गया और शराब भी पीने के लिए मजबूर किया गया। दरअसल, मामला सांप्रदायिक नहीं था। कैब ड्राइवर आफ़ताब जब बुलंदशहर में एक बुकिंग को छोड़ कर वापस लौट रहे थे, तभी कुछ असामाजिक तत्व टैक्सी में बिना बुकिंग कराए ही बैठ गए। तभी सारा विवाद हुआ।

‘गफ्फार के साथ दारू के नशे में लूट के लिए हुई मारपीट’: जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाने का लगाया था आरोप

राजस्थान के सीकर में एक ऑटो चालक ने आरोप लगाया कि उससे जबरदस्ती ‘जय श्री राम’ और ‘मोदी ज़िंदाबाद’ बुलवाया गया। जनसत्ता, आजतक और नवभारत टाइम्स सहित कई मीडिया संस्थानों ने इस घटना को जगह दी। सच्चाई ये थी कि आरोपितों ने उनसे जर्दा माँगा। इसके बाद हुई कहासुनी के बाद उन्होंने ऑटो ड्राइवर को खदेड़ कर उसके साथ मारपीट की। आरोपित शराब के नशे में थे और पहले भी लूटपाट की घटनाओं में संलिप्त रहे हैं।

जिस ‘नेपाली’ का सिर मूँड़ा लिखा ‘जय श्री राम’, वो निकला भारतीय: ₹1000 के लिए कराया वीडियो शूट, 6 गिरफ्तार

वाराणसी में जिस व्यक्ति का जबरन सिर मूँड़ कर उस पर ‘जय श्री राम’ लिख दिया गया था, वो भारतीय निकला। इससे पहले ख़बर आई थी कि वो व्यक्ति नेपाली था, जिसका सिर मूँड़ कर उससे नेपाल के प्रधानमंत्री ओली के खिलाफ नारे लगवाए गए और उसे गंजे सिर पर ‘जय श्री राम’ लिख दिया गया। वाराणसी पुलिस ने खुद इस बात की सूचना दी थी कि उक्त व्यक्ति 1000 रुपए लेकर भाड़े का नेपाली बना था।

शनिवार (जुलाई 18, 2020) को एसएसपी अमित पाठक ने खुलासा किया था कि वीडियो में नेपाली बता कर पेश किया जा रहा व्यक्ति मूल रूप से भारतीय है। उसका नाम धर्मेंद्र भारतीय है। पुलिस ने बताया था कि साड़ी की दुकान में काम करने वाले धर्मेंद्र की आर्थिक तंगी का फायदा उठाते हुए कुछ लोगों ने उसे लालच दिया और वीडियो शूट करवाने के लिए ये सब ड्रामा रचा।

गोधरा में ‘जय श्री राम’ न बोलने पर मुस्लिम युवकों की पिटाई की खबर निकली झूठी

दिल्ली निवासी मो. कामिल ने आरोप लगाया कि उसके भाई से सिर्फ इस बात के लिए मारपीट की गई क्योंकि आरोपित उससे ‘जय श्रीराम’ बोलने के लिए दवाब बना रहे थे। इसके बाद हरकत में आई दिल्ली पुलिस ने पीड़ित से पूछताछ की और कहा कि यह मामला दो समुदाय के लड़कों के बीच महज झगड़े का है। यह आपसी झगड़ा था, लेकिन इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही थी। 

कुछ मीडिया संस्थानों ने क्रॉप्ड वीडियो के जरिए यह साबित करने की कोशिश की थी कि झारखंड की भाजपा सरकार में मंत्री सीपी सिंह ने कॉन्ग्रेस विधायक इरफान अंसारी को जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर किया। यह आधा सच था। भाजपा नेता को विलेन की तरह से पेश करने के लिए मीडिया संस्थानों ने जान-बूझकर पूरे वीडियो का एक ही हिस्सा दिखाया। वीडियो के शुरुआती हिस्से को देखने से पता चलता है कि सीपी सिंह जय श्री राम पर कॉन्ग्रेस विधायक के कॉमेंट का जवाब दे रहे थे।

चंदौली: खालीद ने किया आत्मदाह, मीडिया ने फैलाया झूठ

आज तक और इंडिया टुडे ने खबर चलाई कि उत्तर प्रदेश के चंदौली गाँव में खालीद ने जय श्री राम नहीं बोला, तो उसे आग में झोंक दिया गया। मगर चंदौली के एसपी संतोष कुमार सिंह ने इस बारे में बयान जारी करते हुए कहा कि पुलिस ने खालीद के बयानों में विरोधाभास पाया है। उन्होंने बताया कि एक चश्मदीद के बयान के मुताबिक, खालीद को किसी समूह ने आग में नहीं झोंका, बल्कि उसने खुद ही आग लगाई थी।

उन्होंने कहा कि बच्चा जिस तरह से अलग-अलग लोगों को अलग-अलग बयान दे रहा है, उसे देखकर ऐसा लग रहा है कि जैसे उसे किसी ने ये सारी बातें सिखाई हैं। एसपी ने बताया कि बच्चा जिस दो गाँवों के बारे में बात कर रहा है, वो दोनों गाँव अलग- अलग दिशाओं में स्थित है और जिस जगह के बारे में वो बता रहा है वहाँ की सीसीटीवी फुटेज में वो कहीं भी नहीं है। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि खालीद किसी के सिखाने पर ये बयान दे रहा है।

औरंगाबाद: शेख आमेर ने समुदाय में नाम करने के लिए बोला झूठ

शेख आमेर ने आजाद चौक से बजरंग चौक की तरफ जाते वक्त एक कार वाले से मामूली सा विवाद हो गया। आमेर ने उन लोगों को सबक सिखाने का सोचा और एक ही दिन पहले शहर के हुडको कॉर्नर पर घटी घटना को याद करते हुए उसने जय श्री राम न बोलने पर पिटाई की झूठी कहानी बनाई और पुलिस में शिकायत कर दी।

शिकायत दर्ज कराने के एक दिन बाद ही आमेर अपने बयान से पलट गया। उसने अपना बयान वापस लेते हुए कहा कि उसने अपने समुदाय के सदस्यों के बीच अपना कद बढ़ाने और उससे झगड़ा करने वाले लोगों को सबक सिखाने के लिए मनगढ़ंत कहानी के आधार पर पुलिस से शिकायत की।

औरंगाबाद: नहीं किया भीड़ ने मजबूर

इमरान इस्माइल पटेल ने दावा किया कि रात को भीड़ ने घर लौटते समय पकड़ कर मारपीट की और जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर किया। वहीं न केवल पुलिस बल्कि इमरान को बचाने वाले चश्मदीद ने भी उसके दावे की तस्दीक करने से साफ़ मना कर दिया है। पुलिस के अनुसार यह एक निजी रंजिश के चलते हुई हाथापाई थी।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है कि न केवल ‘हमसे जय श्री राम बुलवाया जा रहा है’ के दावों की बाढ़ आ रही है, बल्कि अधिकाँश दावे गलत भी साबित हो रहे हैं? अगर दावे सही साबित होते तो माना जा सकता था कि चाहे किसी के बहकावे में, चाहे हिन्दूफ़ोबिक राज्य-व्यवस्था से ऊबकर हिन्दू भड़क उठे हैं। लेकिन चूँकि लगभग सारे दावे भी गलत साबित हो रहे हैं, तो ऐसा भी नहीं है।

मुज़फ़्फ़रनगर: न दाढ़ी नोंची, न राम-नाम बुलवाया

इमाम इमलाकुर रहमान जब अपने साथ मारपीट की बात पर मुज़फ़्फ़रनगर में FIR करने पहुँचे तो न ही मामले में कोई जय श्री राम था, और न ही उन्होंने दाढ़ी नोंचे जाने की बात अपनी FIR में कही। लेकिन जब तक वह मामले की पूरी FIR करने बागपत पहुँचे (जहाँ का मामला था), यह सब चीज़ें बागपत FIR में अतिरिक्त आ गईं थीं। न केवल इन्हें एसपी ने ख़ारिज किया, बल्कि अंदेशा भी जताया कि साम्प्रदायिक एंगल जानबूझकर जोड़ा गया ताकि मामले में त्वरित कार्रवाई हो।

उन्नाव: जुमे तक अगर काज़ी साहब की बात न मानी तो…

क्रिकेट खेलने में स्थानीय लड़कों से हुए हुए विवाद और झगड़े को लेकर मदरसे के बच्चे जब काज़ी निसार मिस्बाही के पास पहुँचे तो क़ाज़ी साहब खुद ही ‘स्पिनर’ निकले। न केवल मदरसे के बच्चों से जबरन जय श्री राम बुलवाए जाने का ‘स्पिन’ उन्होंने मामले में लगा दिया, बल्कि धमकी भी दी कि अगर जुमे तक उनके बताए चार ‘दोषियों’ को उसी जुमे तक न पकड़ा गया तो ‘जो एक्शन कहीं भी नहीं हुआ, वो होगा‘

वह बात और है कि न केवल पुलिस की जाँच में यह मामला भी साम्प्रदायिक रूप से खोखला निकला, बल्कि फिर भी प्रदेश के प्रमुख सचिव (सूचना) तक को मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलानी पड़ गई।

कानपुर: नशे में हुई लड़ाई पर झूठ

ऑटो-ड्राइवर आतिब पर हमला बेशक हुआ, ईंट-पत्थर से मारकर उसे मरणासन्न भी बिलकुल किया गया, लेकिन यहाँ भी जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर करने की बात झूठ निकली। पुलिस जाँच के अनुसार यह एक नशे में हुई हाथापाई थी, जिसकी परिणति आतिब को शौचालय में बाँधकर पीटने के रूप में हुई।

कूच बिहार: आप्सी मियाँ की करनी हिन्दुओं के सर

आप्सी मियाँ ने अपने हममज़हब असगर को कान पकड़ कर उठक-बैठक लगाने और जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर किया। और लिबरल गिरोह ने हिन्दुओं को जिम्मेदार ठहराने में समय नहीं लगाया। यह भी ध्यान नहीं दिया कि कुछ बिहार पश्चिम बंगाल में है- जहाँ हिन्दू खुद भी अगर जय श्री राम बोलें तो हो सकता है उन्हें गोली मारी जा सकती है। ऐसे में एक हिन्दू भला दुसरे मजहब वाले से जय श्री राम बुलवाएगा?

दिल्ली: चश्मदीदों ने मोमिन के आरोप को बताया झूठा

रोहिणी, सेक्टर-20 के मदरसे में पढ़ाने वाले मोहम्मद मोमिन ने आरोप लगाया कि जय श्री राम बोलने से इंकार करने पर कुछ लोगों ने उनकी कार को टक्कर मार दी। पुलिस ने जाँच की लेकिन एक भी चश्मदीद गवाह ने मोमिन की बात का समर्थन नहीं किया। घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी फुटेज से भी आरोपों की पुष्टि नहीं हुई।

करीमनगर: ‘मजनूँ’ की पिटाई बनी ‘जय श्री राम’

किसी समय ’15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो’ का दावा करने वाले अकबरुद्दीन ओवैसी की AIMIM के नेता रहे और आजकल ‘मजलिस बचाओ’ से जुड़े अमजद उल्लाह खान ने दावा किया कि भाजपा-संघ के लोगों ने एक दूसरे समुदाय के किशोर को पीटा क्योंकि उसने जय श्री राम कहने से मना कर दिया था। करीमनगर के कमिश्नर ने साफ किया कि उनकी जाँच में ऐसा कुछ नहीं निकला, और यह निजी कारणों से हुई हिंसा थी- यह लड़का किसी किशोरी को तंग करने को लेकर उस लड़की के पक्ष के लोगों के हाथों पिटा था। यही नहीं, पिटने वाले लड़के के भी अपने बेटे की गलती मानते हुए माफ़ी माँगी।

गुरुग्राम: बरकत का दावा निकला झूठा

मोहम्मद बरकत ने दावा किया कि गुरुग्राम में कुछ हिन्दुओं ने उसे घेर कर मारा, उसकी इस्लामी गोल टोपी फेंक दी और ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए मजबूर किया। हरकत में आई गुरुग्राम पुलिस ने 15 लोगों को हिरासत में लिया, 50 के करीब सीसीटीवी फुटेज खंगालीं, और अंत में इस नतीजे पर पहुँची कि बरकत अली के साथ मार-पीट तो हुई, लेकिन न ही उसकी टोपी किसी ने ‘फेंकी’ और न ही जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर किया गया। यही नहीं, स्वराज्य संवाददाता स्वाति चतुर्वेदी की जाँच में तो शक की सूई इस ओर भी घूमी कि बरकत को किसी ने सिखाया-पढ़ाया तो नहीं था इस घटना को साम्प्रदायिक रंग देने के लिए।

आपराधिक घटना को सांप्रदायिक मोड़

जून 2017 में राजस्थान के नागौर जिले में लोगों के एक समूह ने अपने चेहरे छुपाते हुए कुछ लोगों को कैमरे पर गाली-गलौज करते हुए और एक महिला को प्लास्टिक के पाइप से पीटते हुए, उसे जबरन धार्मिक नारे लगाने के लिए दबाव डालते हुए रिकॉर्ड किया। यह स्पष्ट नहीं था कि इस घटना को किसने रिकॉर्ड किया था, लेकिन वीडियो में साफ दिखाई दे रहा था कि लोग महिला को ‘अल्लाह’ और ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए मजबूर कर रहे थे। इस घटना में भी, मीडिया गिरोह के लोगों ने ‘अल्लाह’ वाले हिस्से को आसानी से अनदेखा कर दिया और पूरी घटना को सांप्रदायिक स्पिन देने के लिए केवल ‘जय श्री राम’ भाग पर ध्यान केंद्रित किया। यह घटना पूरी तरह से आपराधिक थी और सांप्रदायिक स्पिन के बिना भी अपने आप में काफी भयावह थी।

दिल्ली: दो समुदाय के लड़कों के झगड़े में जबरन ‘जय श्रीराम’ ठूँसा

मई 2020 में दिल्ली निवासी मो. कामिल ने आरोप लगाया कि उसके भाई से सिर्फ इस बात के लिए मारपीट की गई क्योंकि आरोपित उससे ‘जय श्रीराम’ बोलने के लिए दवाब बना रहे थे। इसके बाद हरकत में आई दिल्ली पुलिस ने पीड़ित से पूछताछ की और बताया कि यह मामला दो समुदाय के लड़कों के बीच महज झगड़े का है।

(नोट: ये चुनिंदा घटनाएँ हैं जिनकी हकीकत खबरों में आ गईं। ऑपइंडिया समय-समय पर इस सूची को अपडेट करता रहेगा, क्योंकि यह कोई संयोग नहीं बल्कि एक सोचा-समझा पैटर्न है हिंदुओं को बदनाम करने का।)

शेहला रशीद ने लिखा- मैं मुसलमान हूँ… भड़के कट्टरपंथियों ने कहा- जाहिल औरत, कुरान पढ़, अल्लाह से माफी माँग

जेएनयू की पूर्व छात्र नेता शेहला रशीद को सोमवार (जून 14, 2021) को इस्लामी कट्टरपंथियों ने ट्रोल कर दिया। रशीद की गलती बस ये थी कि वह कट्टरपंथियों द्वारा ट्रेंड करवाए जा रहे ‘Why So Proud’ हैशटैग के ख़िलाफ़ बोल गईं। इस हैशटैग के जरिए कट्टरपंथी LGBT समुदाय के ‘प्राइड मंथ’ पर नफरत फैला रहे थे। ऐसे में जब शेहला ने उनके साथ (LGBT समुदाय) अपनी असहमति व्यक्त की तो सब कट्टरपंथी उन्हें ट्रोल करने लगे।

शेहला ने लिखा था, “मैं मुसलमान हूँ और #WhySoProud hashtag की निंदा करती हूँ। हमें अपने इमान को परफेक्ट करने का काम करना चाहिए और सारी जजमेंट अल्लाह पर छोड़ देनी चाहिए। हमें अल्लाह बनके दिखाने की जरूरत नहीं और न ही दूसरों को जज करने की है। किसी को उनकी पहचान, पसंद और विश्वास के लिए पीड़ित नहीं किया जाना चाहिए। मैं इस्लामोफोबिया और होमोफोबिया का विरोध करती हूँ।”

उन्होंने कहा, “मुस्लिम चेहरों को इससे अपना पीछा छुड़ाना चाहिए, ये हमें असहिष्णु दिखाने का एक प्रयास हो सकता है या फिर वास्तविकता में ये धार्मिक मान्यताओं से प्रेरित हो सकता है। किसी भी तरह से हमें इसे अलग होना चाहिए, क्योंकि लोगों को आँकना हमारा काम नहीं है। जियो और जीने दो।”

शेहला रशीद की ये टिप्पणी कट्टरपंथियों द्वारा ट्रेंड करवाए गए #whysoproud हैशटैग के बाद आई। इसके भीतर कट्टरपंथी समझा रहे थे कि अगर इस्लाम में समलैंगिकता को हराम माना गया है तो वह एक कारण से है।

कुछ लोगों ने समलैंगिकता की तुलना शैतान की बुराइयों से की।

वहीं शेहला का कमेंट पढ़कर उन्हें कहा गया कि ये सब जेएनयू में पढ़ने के साइड इफैक्ट्स है।

एक ने शेहला की तुलना साँप से की और कहा कि ये लोग पहले हमारा समर्थन पाते हैं और सहानुभूति पाते ही कट्टर इस्लामोफोबिक हो जाते हैं।

कुछ कट्टरपंथियों ने शेहला को जाहिल औरत कहा। वहीं कुछ ने जेएनयू छात्रनेता को ये कहकर घेरा कि 1400 साल पहले कुरान उनके सभी तर्कों को काट चुकी है। इसलिए अब उन्हें अल्लाह से माफी माँगनी चाहिए।

जोहान खान ने कहा, “शेहला बहन,दुनिया का ज्ञान लेने के अलावा कम से कम थोड़ा कुरान पाक में lgbt के बारे में पढ़ो। अल्लाह से दुआ करो कि तुम्हे इस मुद्दे पर सही बुद्धि आए।”

समलैंगिकता के विरुद्ध नफरत फैलाने का काम करते-करते एक कट्टरपंथी यूजर ने समलैंगिकता के लिए मौत के दंड को जस्टिफाई किया। अयाज सिद्दकी नाम के यूजर ने कहा कि हो सकता है समलैंगिक लोगों को मारना अन्याय लगे लेकिन इसकी इजाजत शरिया लॉ में मिलती है।

बता दें कि इस्लामी कट्टरपंथियों ने पिछले वर्ष भी ऐसा हैशटैग चलाया था। तब भी समलैंगिकता को हराम बताने का प्रयास हुआ था। कट्टरपंथियों का कहना था कि चूँकि मुसलमानों को अल्लाह को जवाब देना होगा इसलिए उन्हें समझ लेना चाहिए कि समलैंगिकता इस्लाम में हराम है।

माँ से नाराज होकर घर से भागी 14 वर्षीय किशोरी से गैंगरेप, ई-रिक्शा चालक इकरामुद्दीन, शकील, नफीस, नूर सहित 6 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इटौंजा इलाके में अपनी माँ से नाराज होकर घर से भागी 14 वर्षीय नाबालिग किशोरी के साथ गैंगरेप की खबर सामने आई है। नाबालिग किशोरी को इकरामुद्दीन नाम के एक ई-रिक्शा चालक ने अकेले देखकर उसे खाना खिलाने और नौकरी दिलाने का झाँसा देकर अपने साथ ले गया। वहीं उसने अपने साथियों को बुलाकर मंडियाव इलाके में एक किराए के कमरे में नाबालिग के साथ गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया।

आरोपित इकरामुद्दीन ने पीड़िता किशोरी को वहीं बंधक बना लिया था। यूपी पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए 18 घंटे के अंदर सभी 6 आरोपितों को पकड़कर इस मामले का खुलासा किया। यूपी पुलिस ने बताया कि किशोरी को मुक्त करा लिया गया है साथ ही आरोपितों को जेल भेज दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित किशोरी लखनऊ की रहने वाली है। रविवार (जून 13, 2021) की सुबह नाबालिग किशोरी का अपनी माँ से किसी बात पर झगड़ा हो गया। जिससे नाराज होकर नाबालिग किशोरी घर से बाहर निकल गई। घर से कुछ दूर पैदल चलने पर उसे ई-रिक्शा चालक इकरामुद्दीन मिल गया। नाबालिग बच्ची को देखकर ई-रिक्शा चालक इकरामुद्दीन समझ गया कि वह अपने घर से गुस्से में भागी हुई है। मौके का फायदा उठाकर इकरामुद्दीन ने किशोरी को खाना खिलाने और नौकरी दिलाने की बात की और अपने साथ मंडियाव इलाके के एक कमरे पर ले गया। जहाँ साथियों के साथ उसने गैंगरेप किया।

इधर जब किशोरी के परिजनों को उनकी बच्ची काफी देर तक नहीं मिली तो उन्होंने इटौंजा थाना क्षेत्र में एफआईआर दर्ज कराई। जिसके बाद लखनऊ ग्रामीण की पुलिस ने कई जगह की सीसीटीवी फुटेज निकालकर तलाशी शुरू कर दी। रिपोर्ट के अनुसार, एसपी ग्रामीण हृदयेश कुमार ने बताया कि इन्हीं फुटेज में से एक में किशोरी ई-रिक्शा चालक के साथ देखी गई। इस फुटेज के आधार पर ई-रिक्शा चालक इकरामुद्दीन को तलाश करके गिरफ्तार किया गया।

यूपी पुलिस की पूछताछ में आरोपित इकरामुद्दीन ने अपने साथ गैंगरेप में शामिल सभी आरोपितों के नाम उगल दिए। ई-रिक्शा चालक इकरामुद्दीन की निशानदेही पर ही अन्य सभी आरोपितों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने किशोरी का बयान दर्ज कर मेडिकल के लिए भेजा और गिरफ्तार आरोपितों को भी जेल भेज दिया है।

किशोरी के साथ गैंगरेप करने वाले आरोपितों में इकरामुद्दीन के अलावा उसके अन्य साथी शकील उर्फ छोटू, उत्तम शर्मा, मोहम्मद नफ़ीस, नूर मोहम्मद उर्फ पुन्नू और रितेश यादव उर्फ भोला शामिल है। इन सभी ने नाबालिग किशोरी के साथ गैंगरेप करने के अलावा मारपीट भी की।

राम मंदिर की जमीन पर ‘खेल’ के दो सूत्र: अखिलेश यादव के करीबी हैं सुल्तान अंसारी और पवन पांडेय, 10 साल में बढ़े दाम

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में अड़ंगा लगाने की कोशिशों में AAP और सपा जुट गई है। जहाँ AAP राज्य में पाँव जमाने में लगी हुई है, वहीं सपा सत्ता में वापसी के रास्ते तलाश रही है। अब ‘दैनिक भास्कर’ ने खुलासा किया कि जिस 100 बिस्वा (लगभग 3 एकड़) जमीन को लेकर ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है, उसे 2011 में समाजवादी पार्टी के नेता सुल्तान अंसारी ने 2 करोड़ रुपए में खरीदा था। 

अखिलेश यादव के नजदीकी हैं घोटाले का आरोप लगाने वाले

सुल्तान अंसारी ने ही इस जमीन को 18.5 करोड़ रुपए में राम मंदिर ट्रस्ट को बेचा है। भास्कर ने अपनी पड़ताल के हवाले से बताया है कि ट्रस्ट पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय ‘पवन’ और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से सुल्तान के काफी अच्छे रिश्ते हैं। दोनों की कई तस्वीरें भी ‘दैनिक भास्कर’ के पास हैं। अब तेज़ नारायण पांडेय कह रहे हैं कि आरोप तथ्यों के आधार पर हैं, न कि सुल्तान अंसारी के कहने पर।

उन्होंने अपने आरोपों को सही बताते हुए कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट ने अब तक 50 से भी अधिक जमीन रजिस्ट्री की है और उन सभी की जाँच की जानी चाहिए। वहीं जिस जमीन को लेकर आरोप लगाया गया है, पिछले 4 सालों में उसका 10 बार एग्रीमेंट हुआ है। सुल्तान के पिता ने 2011 में ये जमीन बबलू पाठक से खरीदी थी। बबलू और सुल्तान, दोनों प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते हैं। ट्रस्ट ने सुल्तान से 100 बिस्वा और बबलू से 80 बिस्वा जमीन ली है।

2011 में सुल्तान अंसारी ने 2 करोड़ रुपए का एग्रीमेंट पर जमीन खरीदी। ट्रस्ट को बेचने से पहले पुरानी कीमत चुका कर अपने नाम बैनामा कराया। बैनामा का अर्थ है कि सरकारी दस्तावेज में जमीन को किसी के नाम करना। फिर उसने 18 करोड़ रुपए में ये भूमि ट्रस्ट को बेच दी। इसीलिए, जमीन का दाम 2 करोड़ रुपए से 18 करोड़ रुपए 10 मिनट नहीं, बल्कि पूरे एक दशक में पहुँचा है। केंद्र ने खुद की अधिगृहित की हुई 70 एकड़ जमीन ट्रस्ट को दी है।

मंदिर का विस्तार प्लान 108 एकड़ का है, इसीलिए इसके आसपास की जमीनों को लेना ज़रूरी था। बाग़ बिजेसी की जिस जमीन को लेकर विवाद है, वो 2010 से पहले फिरोज खान के नाम पर थी। फिरोज ने 2010 में 180 बिस्वा जमीन बबलू पाठक को बेच दी। 2011 में इसमें से 100 बिस्वा जमीन का एग्रीमेंट बबलू ने इरफ़ान खान उर्फ़ नन्हे मियाँ से किया। एडवांस के रूप में उसे 10 लाख रुपए मिले।

सुल्तान अंसारी नन्हे का ही बेटा है, जिसकी बबलू पाठक से अच्छी दोस्ती है। एग्रीमेंट की वैधता 3 वर्षों की ही होती है, इसीलिए 2015 में बबलू ने सुल्तान के नाम फिर से वो जमीन कर दी। सुल्तान हर 3 साल पर अपने परिवार के सदस्यों के नाम एग्रीमेंट कराता रहा। बबलू ने कभी बकाया रुपया लेने के लिए दबाव नहीं डाला, जिससे पता चलता है कि दोनों के बीच अच्छी दोस्ती थी। मार्च 2021 में ट्रस्ट ने बबलू से 80 बिस्वा और सुल्तान से 100 बिस्वा जमीन खरीदी।

अयोध्या में जमीन के भाव बढ़ना अप्रत्याशित नहीं है, क्योंकि होटल्स, मॉल और मार्केट खोलने के लिए कई बड़े कारोबारियों ने जमीन ली है। उत्तर प्रदेश सरकार कई विकास परियोजनाओं के लिए जमीन ले रही है। राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ये बदलाव आया। जिले में जमीन का दाम 20-50 लाख बिस्वा के आगे-पीछे चल रहा है। राम मंदिर ट्रस्ट के महामंत्री राय ने भी बयान जारी कर सब साफ किया है।

‘जी न्यूज़’ की खबर के अनुसार, अयोध्या में जिस जमीन को लेकर राम मंदिर ट्रस्ट पर आरोप लगाए गए, दस्तावेज पर उसका मालिकाना हक कुसुम पाठक का था, जिन्होंने 2010-11 में ही जमीन का समझौता रवि मोहन तिवारी और सुल्तान अंसारी से कर लिया था। फिर सितंबर 19, 2019 को कागज़ी समझौता हुआ और कीमत 2 करोड़ रुपए तय हुई। इसीलिए, 2 साल बाद उसी रेट पर बैमाना भी हुआ।

चंपत राय ने राम मंदिर के श्रद्धालुओं को बताई सच्चाई

चंपत राय ने कहा कि आरोप की भाषा में वक्तव्य देने वाले व्यक्तियों ने आरोप लगाने से पहले तीर्थ क्षेत्र के किसी भी पदाधिकारी से तथ्यों की जानकारी नहीं की, इससे समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने समस्त श्री राम भक्तों से निवेदन किया कि वे ऐसे किसी दुष्प्रचार में विश्वास न करें। उन्होंने कहा कि श्री राम जन्म-भूमि तीर्थ क्षेत्र’ मंदिर को वास्तु शास्त्र के अनुसार भव्य स्वरूप प्रदान कराने, शेष परिसर को सभी प्रकार से सुरक्षित तथा दर्शनार्थियों के लिए सुविधापूर्ण बनाने के लिए कार्य कर रहा है।

चंपत राय ने आगे बताया कि इस निमित्त मंदिर के पूर्व व पश्चिम भाग में निर्माणाधीन परकोटा व रिटेनिंग वॉल की सीमा में आने वाले महत्वपूर्ण मंदिरों/स्थानों को परस्पर सहमति से क्रय किया जा रहा है। न्यास का निर्णय है कि इस प्रक्रिया में विस्थापित होने वाले प्रत्येक संस्थान/व्यक्ति को पुनर्वासित किया जायेगा। पुनर्वास हेतु भूमि का चयन सम्बन्धित संस्थानों/व्यक्तियों की पूरी सहमति के साथ ही किया जा रहा है।

उन्होंने जानकारी दी कि बाग बिजेसी, अयोध्या स्थित 1.20 हेक्टेयर भूमि इसी प्रक्रिया के अंतर्गत जैसे कौशल्या सदन जैसे महत्वपूर्ण मंदिरों की सहमति से पूर्ण पारदर्शिता के साथ क्रय की गई है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि उपर्युक्त वर्णित भूमि अयोध्या रेलवे स्टेशन के समीप मार्ग पर स्थित एक प्रमुख स्थान (प्राइम लोकेशन) है। इस भूमि के सम्बन्ध में वर्ष 2011 से वर्तमान विक्रेताओं के पक्ष में भिन्न-भिन्न समय (2011, 2017 व 2019) में अनुबंध संपादित हुआ।

उन्होंने बताया, “खोजबीन करने पर भूखण्ड हमारे उपयोग हेतु अनुकूल पाए जाने पर सम्बन्धित व्यक्तियों से संपर्क किया गया। भूमि का जो मूल्य माँगा गया, उसकी तुलना वर्तमान बाजार मूल्य से की। अंतिम देय राशि लगभग 1423 रुपए प्रति वर्गफीट तय हुई जो निकट के क्षेत्र के वर्तमान बाजार मूल्य से बहुत कम है। मूल्य पर सहमति हो जाने के पश्चात सम्बन्धित व्यक्तियों को अपने पूर्व के अनुबंधों को पूर्ण करना आवश्यक था, तभी सम्बन्धित भूमि तीर्थ क्षेत्र को प्राप्त हो सकती थी।”

यही कारण है कि तीर्थ क्षेत्र के साथ अनुबंध करने वाले व्यक्तियों के पक्ष में भूमि का बैनामा होते ही तीर्थ क्षेत्र ने अपने पक्ष में पूर्ण तत्परता एवं पारदर्शिता के साथ अनुबंध हस्ताक्षरित किया व पंजीकृत कराया। उन्होंने बताया कि तीर्थ क्षेत्र का प्रथम दिवस से ही निर्णय रहा है कि सभी भुगतान बैंक से सीधे खाते में ही किए जाएँगे और सम्बन्धित भूमि की क्रय प्रक्रिया में भी इसी निर्णय का पालन हुआ है। यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि सरकार द्वारा लगाए गए सभी कर आदि का भुगतान हो जाए।

फाइव स्टार होटल से पकड़ी गई हिरोइन नायरा शाह, आशिक हुसैन के साथ चरस फूँक रही थी

मुंबई पुलिस ने ड्रग्स का सेवन करने के आरोप में तेलुगु एक्ट्रेस नायरा नेहल शाह (Naira Shah) और उनके दोस्त आशिक साजिद हुसैन को गिरफ्तार किया है। दोनों पर बिना इजाजत होटल के कमरे में बर्थडे पार्टी आयोजित करने और ड्रग्स का सेवन करने के आरोप हैं।

पुलिस ने मुंबई के उप-महानगरीय जुहू इलाके में स्थित एक फाइव स्टार होटल में रेड डालकर यह कार्रवाई की है। हालाँकि, बाद में अभिनेत्री को बांद्रा कोर्ट ने जमानत पर रिहा कर दिया। नायरा ने तेलुगु फिल्म मिरुगा, बुर्रा कथा और इ-ई में काम किया है।

सांताक्रूज पुलिस के अनुसार, रविवार (13 जून 2021) को एक्ट्रेस नायरा शाह का जन्मदिन था और वह अपने दो साथियों के साथ होटल के एक कमरे में पार्टी कर रही थी। पुलिस को सूचना मिली कि होटल के एक कमरे में ड्रग्स पार्टी हो रही है, इसके बाद यहाँ रेड की गई और रोल की गई चरस वाली सिगरेट के साथ एक्ट्रेस को गिरफ्तार किया गया।

सांताक्रूज पुलिस ने बताया कि अभिनेत्री को NDPS एक्ट के तहत गिरफ्तार करने के बाद सोमवार को बांद्रा कोर्ट में पेश किया गया था। बाद में कोर्ट ने नायरा को जमानत पर रिहा कर दिया। दूसरी तरफ, पुलिस कार्रवाई में गोवा का एक शख्‍स मौका पाते ही फरार हो गया, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है।

पुलिस के मुताबिक, रविवार रात हुई इस रेड के बाद सोमवार सुबह एक्ट्रेस नायर शाह का मेडिकल करवाया गया। मेडिकल की रिपोर्ट आने के बाद अगर एक्ट्रेस की बॉडी में तय मात्रा से ज्यादा ड्रग्स मिलती है, तो उनकी मुसीबत बढ़ सकती है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि जिस दौरान रेड हुई, तीनों नशे का सेवन कर रहे थे।

सांताक्रुज पुलिस ने बताया कि पुलिस को पता चला कि एक होटल में एक अभिनेत्री की बर्ड डे पार्टी हो रही जहाँ ड्रग्स का इस्तेमाल हो रहा है। वहाँ फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े अन्य लोग भी हैं। पुलिस ने बताया कि सूचना को सत्यापित करने के लिए पुलिस को सादे कपड़े में वहाँ भेजा गया। उसके बाद, करीब तीन बजे होटल में रेड की गई।

सांताक्रुज पुलिस स्टेशन के सीनियर पीआई दयानेश्वर रामनाथ गनोरे ने बताया, “हमें जो सूचना मिली थी, उसके अनुसार हमने पाया कि अभिनेत्री और उसका दोस्त उच्च गुणवत्ता का चरस सिगरेट में रोल करके पी रहे थे।” कहा जाता है कि आरोपी हुसैन कई सारे बॉलीवुड सेलेब्रिटिज का नजदीकी है और उनके लिए समय-समय पर पार्टी का आयोजन करते रहता है।