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‘मेरे जीजा से एक्स-वाइफ कविता का अफेयर था, माँ ने कई बार रंगे हाथ पकड़ा’: शिल्पा के पति राज कुंद्रा ने किए कई खुलासे

बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा ने अपनी एक्स-वाइफ कविता के आरोपों पर पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। राज कुंद्रा ने एक इंटरव्यू में बताया है कि उनकी एक्स-वाइफ कविता का उनकी बहन के पूर्व पति के साथ अफेयर था, जिसके कारण उन्होंने अपनी शादी तोड़ने का फैसला किया था। राज का कहना है कि शिल्पा नहीं चाहती थीं कि वह कविता और उनके तलाक के पीछे की वजह को सार्वजनिक करें।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिजनेसमैन राज कुंद्रा ने एक्स-वाइफ के एक पुराने इंटरव्यू का वीडियो वायरल होने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी है। इंटरव्यू में कविता ने उनकी और राज की शादी तोड़ने के लिए शिल्पा शेट्टी को जिम्मेदार ठहराया था। राज ने इन सभी आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने पिंकविला को दिए एक इंटरव्यू में कविता से अपने तलाक के बारे में खुलकर बात की।

उन्होंने कहा, “मुझे काफी दुख पहुँचा है कि मेरी पत्नी के बर्थडे के कुछ दिन बाद 11 साल पुरानी खबर फिर से वायरल होती है और आधी-अधूरी जानकारी सामने लाने के साथ हमें बदनाम करने की कोशिश करती है। जाहिर तौर पर यह एक एजेंडा है। मैंने 12 साल तक चुप्पी साधे रखी, लेकिन अब बहुत हुआ।” उन्होंने कहा, “वह अपनी टूटी हुई शादी के लिए एक सेलिब्रिटी को जिम्मेदार ठहरा रही है, जबकि शादी टूटने का कारण वह खुद थी।”

कविता का उनकी बहन के पति के साथ अफेयर था

राज कुंद्रा ने आरोप लगाया कि जब वे लंदन में थे, तब कविता का उनकी बहन के पति के साथ अफेयर चल रहा था। उन्होंने बताया, “मेरी माँ ने कविता और जीजा वंश को एक साथ कई बार आपत्तिजनक स्थिति में रंगे हाथों पकड़ा था। वह मेरे जीजा के बेहद करीब आ गई थी। उसके साथ अधिक से अधिक समय बीता रही थी, खासकर जब मैं बिजनेस ट्रिप पर होता था। यहाँ दो परिवार बर्बाद हो रहे थे और उन्होंने जरा भी नहीं सोचा।”

बेटी से भी नहीं मिलने दिया

राज आगे कहते हैं कि वह अपनी बेटी से मिलना चाहते थे, लेकिन कविता और उनके परिवार ने ऐसा नहीं होने दिया। कोर्ट ने भी बच्ची की कस्टडी कविता को सौंप दी थी। उन्होंने कहा कि सिर्फ 40 दिन की बच्ची से बिछड़ना बहुत दुखदाई था। तब से लेकर आज तक उन्होंने अपनी बेटी को नहीं देखा है। उन्हें उम्मीद है कि एक दिन उनकी बेटी उनसे मिलने जरूर आएगी।

उन्होंने कहा, “कविता ने मुझे धोखा दिया ठीक है, मगर जिस तरह दो परिवार बर्बाद हुए हैं उसके लिए मैं उन्हें कभी माफ नहीं कर सकता। मेरे इंटरव्यू से शिल्पा नाराज हैं मगर सच को कभी न कभी सामने आना ही था।”

बता दें कि राज कुंद्रा ने लंदन की एक बिजनेस फैमिली की बेटी कविता से लॉन्ग टाइम रिलेशनशिप के बाद साल 2003 में शादी रचाई थी, लेकिन दोनों 3 साल के बाद ही अलग हो गए थे। इनका साल 2006 दिसंबर में तलाक हो गया था। इसके करीब तीन साल बाद 2009 में राज ने शिल्पा से शादी रचाई थी। राज और शिल्पा के दो बच्चे हैं।

‘पवार साहब की एंटी-भाजपा फ्रंट बनाने की तैयारी, सभी विपक्षी पार्टियों को एकजुट करने में लगी एनसीपी’: नवाब मलिक

चुनाव रणनीतिकार माने जाने वाले प्रशांत किशोर पश्चिम बंगाल से वाया पंजाब अब महाराष्ट्र पहुँच गए हैं। यहाँ उन्होंने शुक्रवार (11 जून) को मुंबई में एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार से मुलाकात की। तीन घंटे बातचीत हुई लेकिन सांसद सुप्रिया सुले और उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने मीटिंग को निजी मुलाकात बता दिया लेकिन राजनीति में कुछ भी निजी होता कहाँ है।

मुंबई के ‘सिल्वर ओक’ (शरद पवार का घर) में शरद पवार और प्रशांत किशोर के बीच हुई इस मीटिंग में क्या बात हुई, यह तो किसी को भी पता नहीं लेकिन एनसीपी नेता और खुद प्रशांत किशोर ही इस मुलाकात को एक सामान्य मुलाकात बता रहे हैं। सांसद सुप्रिया सुले और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के अलावा एनसीपी नेता नवाब मलिक ने भी कहा- मीटिंग 3 घंटे चली जरूर लेकिन उसमें प्रशांत किशोर को एनसीपी का रणनीतिकार बनाने पर कोई चर्चा नहीं हुई। हालाँकि मलिक ने यह भी कहा कि पवार साहब एक एंटी-भाजपा फ्रंट बनाने के लिए सभी विपक्षी पार्टियों को एकजुट करना चाहते हैं और एनसीपी उसी दिशा में कार्य कर रही है।

महाराष्ट्र में मंत्री मलिक ने यह भी कहा कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के पास बहुत सारे आँकड़े और चुनावी सूचनाएँ हैं। उन्हें बहुत सारा अनुभव भी है, तो 3 घंटे की मुलाकात में यह मुद्दा पक्का आया होगा। मलिक ने यह भी बताया कि शरद पवार खुद विधानसभा चुनाव के पहले ही बंगाल जाना चाहते हैं लेकिन तबीयत खराब होने के कारण न जा सके।

अब प्रशांत किशोर भी ठहरे चुनाव रणनीतिकार तो वो भी इतनी आसानी से अपने पत्ते नहीं खोलने वाले सो उन्होंने भी कह दिया कि यह एक सद्भावना (गुडविल) मुलाकात थी। किशोर ने बताया कि वो शरद पवार को धन्यवाद देने के लिए आए थे जो उन्होंने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के दौरान तृणमूल कॉन्ग्रेस और ममता बनर्जी को अपना समर्थन जताया।    

पश्चिम बंगाल में टीएमसी और तमिलनाडु में डीएमके की सहायता करने के बाद शरद पवार के साथ प्रशांत किशोर की यह पहली मुलाकात है। हालाँकि यह दोनों के बीच यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दिल्ली में पीएम मोदी से व्यक्तिगत मुलाकात भी की। हालाँकि उनके साथ उपमुख्यमंत्री अजित और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री अशोक चव्हाण भी थे लेकिन संयुक्त मुलाकात के बाद उद्धव ने पीएम मोदी से व्यक्तिगत मुलाकात भी की। इस मुलाकात के बारे में पूछने पर उद्धव ने तल्खी से जवाब भी दिया था कि वो नवाज शरीफ से मिलने तो गए नहीं थे। उन्होंने कहा था कि अगर वो पीएम मोदी से निजी तौर पर मिले तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

इसके बाद एनसीपी के 22वें स्थापना दिवस के मौके पर बोलते हुए शरद पवार ने कहा था कि उन्हें शिवसेना पर भरोसा है और महाराष्ट्र की सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी। पवार ने शिवसेना को बालासाहब ठाकरे की याद भी दिलाई और कहा कि बालासाहब ने इंदिरा गाँधी को किया हुआ अपना वादा पूरा किया था और उनकी सहायता करने के लिए अपने प्रत्याशी चुनाव में नहीं उतारे थे।   

अब प्रशांत किशोर और शरद पवार की मुलाकात में कौन सी चर्चाएं हुईं, यह तो वही दोनों जाने लेकिन इतना निश्चित है कि भाजपा के विरोध में प्रशांत किशोर लगातार विपक्षी नेताओं के संपर्क में बने रहते हैं और शरद पवार के साथ मुलाकात उनकी चुनावी रणनीति का ही एक हिस्सा है जो 2024 को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है।

‘किसान’ आंदोलन में गैंगरेप, बात दबाने के लिए शव यात्रा: 2 महिलाओं ने भी नहीं की पीड़िता की मदद

केंद्र सरकार के कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर ‘किसानों’ का प्रदर्शन चल रहा है। इसी में शामिल होने के लिए बंगाल से आई 25 वर्षीय युवती के साथ टीकरी बॉर्डर पर गैंगरेप के मामले में नया एँगल सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने पीड़िता के पिता की शिकायत पर 2 महिला आरोपितों समेत 6 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

सभी आरोपित खुद को ‘किसान’ और ‘सोशल आर्मी’ का नेता बताते हैं। सभी के खिलाफ पुलिस ने गैंगरेप के अलावा अपहरण, ब्लैकमेलिंग और बंदी बनाने की धमकी देने के मामले में केस दर्ज किया है। जिन आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, उनमें अनूप सिंह चानौत, अनिल मलिक, अंकुर सांगवान, जगदीश सिंह बराड़ के अलावा दो महिला आरोपित कविता आर्य और योगिता सुहाग शामिल हैं। दोनों ही महिला आरोपितों पर युवती की आपबीती को दबाने का आरोप है।

योगिता से पूछताछ में पुलिस को यह मालूम हुआ है कि पीड़िता के साथ हुई घटना के बारे में आंदोलन से जुड़े बहुत से लोगों को पता चल चुका था, मगर इस मामले में कार्रवाई की पहल नहीं की गई। उसने पीड़िता की आपबीती का वीडियो भी बनाया था। 16 मई 2021 की दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, कविता और योगिता से दो-दो बार पुलिस पूछताछ कर चुकी है।

इस मामले की जाँच के लिए डीएसपी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई है। एसएचओ सिटी, सीआईए-2 इंचार्ज और महिला थाने की एसएचओ एसआईटी इसमें शामिल हैं। युवती के पिता का आरोप है कि योगेंद्र यादव को युवती के साथ किसान नेताओं द्वारा ‘गलत काम’ किए जाने की जानकारी थी। योगेंद्र यादव ने स्वीकार किया है कि वो घटना के बारे में पहले से जानते थे।

युवती से रेप मामले में AAP नेता गिरफ्तार

25 वर्षीय युवती से गैंगरेप की वारदात में शामिल आरोपित अनिल मलिक को हाल ही में पुलिस ने हरियाणा के भिवानी से गिरफ्तार कर लिया है। उस पर 25 हजार रुपए का इनाम भी है। पूछताछ में मलिक ने कबूल किया था कि उसने रेप का वीडियो बना लिया था और उसी के सहारे पीड़िता को ब्लैकमेल करता था। युवती से ट्रेन में और फिर ‘किसान आंदोलन’ के तम्बू में भी बलात्कार हुआ था।

गैंगरेप के मामले को दबाने के लिए ‘शव यात्रा’

युवती की कोरोना से बीते 30 अप्रैल 2021 को मौत के बाद ‘किसानों’ ने उसे शहीद बताकर उसकी शव यात्रा निकाली थी। उस दौरान कोविड प्रोटोकॉल तक को फॉलो नहीं किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त किसान मोर्चा ने युवती के साथ हुए गैंगरेप के मामले को दबाने के लिए उसकी शव यात्रा निकाली थी।

दैनिक जागरण की 13 मई 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस को पीड़िता का मोबाइल मिल चुका है। बताया जा रहा है कि मोबाइल में जो चैट, फोटो, वीडियो और दूसरी चीजें हैं, वे इस मामले में पुलिस के लिए एक पुख्ता सुबूत हैं।

‘तैमूर की अम्मी नहीं हैं माँ सीता के रोल के लायक… शूर्पणखा बन सकती हैं’: ट्विटर पर ट्रेंड हुआ #BoycottKareenaKhan

बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर खान अपनी आने वाली फिल्म ‘सीता’ को लेकर सुर्खियों में हैं। फिल्म में सीता का किरदार निभाने के लिए जब से उन्होंने 12 करोड़ रुपए माँगे है तभी से न केवल फिल्म के डायरेक्टर-प्रोड्यूसर सोच में पड़े हुए हैं बल्कि सोशल मीडिया यूजर्स भी इस पर जमकर रिएक्शन दे रहे हैं।

ट्विटर पर आज #BoycottKareenaKhan ट्रेंड हो रहा है। यूजर्स का कहना है कि वह तैमूर की अम्मी को माँ सीता के रोल में नहीं देखना चाहते और इसलिए फिल्म मेकर्स को करीना के अलावा दूसरी अभिनेत्रियों को ये रोल असाइन करना चाहिए।

कुछ लोग इस रोल के लिए कंगना रनौत को सबसे सटीक बताते हुए कह रहे हैं कि करीना पर शूर्पणखा का रोल सूट करता है न कि सीता का। कुछ का कहना है कि पहले करीना के शौहर सैफ अली खान ने तांडव में हिंदू भावनाओं को आहत किया और अब करीना वही करने आ रही हैं।

भाजपा हरियाणा के आईटी व सोशल मीडिया हेड अरुण यादव ने संदेश जारी कर कहा है,

“जय श्रीराम साथियों! मुझे अभी तक यह समझ में नहीं आया है कि बॉलीवुड के लोग खान गैंग हिंदू आस्थाओं के साथ खेलना कब बंद करेंगी। मुझको तो ऐसा लगता है कि इनको हमारा मजाक बनाने में मजा आने लगा है। तुम सोच भी कैसे सकते हो कि करीना कपूर खान, तैमूर की माँ, सैफ अली खान की बीवी कैसे माँ सीता का रोल कर सकती है। उसको तुम 13 करोड़ रुपए भी दोगे। इसमें क्या गुण है। ये क्यो निभाएगी माँ सीता का रोल। शर्म करो। जो हमारी सनातन संस्कृति को समझते हैं उन्हें इस रोल के लिए लो। अगर तुमने इस खान गैंग को, करीना कपूर खान को माँ सीता के रोल में लिया तो इसका विरोध होगा और ये फिल्म रिलीज होने नहीं दी जाएगी।”

कुणाल सिंह नाम के यूजर लिखते हैं, “त्रेतायुग में भी शूर्पणका जगतजननी माता ‘सीता’ का स्थान लेना चाहती थी और आज कलयुग में भी एक ‘शूर्पणका’ माता ‘सीता’ का स्थान लेना चाहती है।”

देबारूपा पालित कहती हैं, “हमें 12 करोड़ से मतलब नहीं है। प्वाइंट ये हैं कि करीना बेगम…नशेड़ी किसी भी तरह से माँ सीता के रोल में फिट नहीं बैठती हैं।”

एंटी लिबरल गाय ने लिखा है, “करीना कपूरा खान हिंदू देवी माँ सीता का किरदार निभाकर करोड़ो कमाती हैं और वही करीना कपूर खान कभी भी हिंदू धर्म को मलीन करने में कोई कसर नहीं छोड़ती। और हम बेवकूफ जो एक हिंदूफोबिक कलाकारों की मूवी देखते हैं।”

लोगों का इस ट्रेंड में ट्वीट कर करके पूछना है कि आखिर बॉलीवुड को हो क्या गया है। क्यों सीता माँ के रोल में वह करीना को लेना चाहते हैं जो एक ड्रग एडिक्ट हैं और धर्म को बदनाम करती है। इन्हें रोका क्यों नहीं जाता।

गौरतलब है कि करीना कपूर खान अका बेबो बॉलीवुड की उन एक्ट्रेस में से हैं, जो सबसे अधिक कमाई के लिए जानी जाती हैं। यही कारण है कि वह आमतौर पर फिल्म साइन करने से पहले अपनी फीस को लेकर डिस्कस करती हैं।

बॉलीवुड हंगामा की एक रिपोर्ट में इस संबंध में लिखा है, “वह (करीना) अपनी एक फिल्म के लिए 6 से 8 करोड़ रुपए चार्ज करती हैं। ऐसे में इस फिल्म के लिए करीना ने 12 करोड़ रुपए माँग कर फिल्ममेकर को बड़ा झटका दिया है। फिलहाल वे (फिल्ममेकर) अपने फैसले पर एक बार फिर से विचार कर रहे हैं। इसलिए हो सकता है कि फिल्म में वह किसी यंग एक्ट्रेस को भी कास्ट कर सकते हैं, इसको लेकर बातचीत अभी भी जारी है। लेकिन, बेबो अब भी फिल्ममेकर की पहली पसंद बनी हुई हैं।”

बता दें कि ‘बाहुबली’ फिल्म के मशहूर लेखक केवी विजेंद्र प्रसाद ने ‘सीता- द इनकार्नेशन’ फिल्म की कहानी लिखी है और इसका निर्देशन अलौकिक देसाई करेंगे।  बताया जा रहा है कि फिल्म में सीता के दृष्टिकोण से रामायण की कहानी को फिल्माया जाएगा। फिल्म को अस्थायी रूप से ‘सीता- द इनकार्नेशन’ (Sita– The Incarnation) टाइटल दिया गया है।

बाइक को झील में फेंक दिया कॉन्ग्रेसियों ने… क्योंकि उनके नेताओं ने मोदी सरकार का विरोध करने बोला: देखें वीडियो

युवा कॉन्ग्रेस के सदस्यों ने शुक्रवार (11 जून 2021) को मोदी सरकार के विरोध में तेलंगाना के हैदराबाद स्थित हुसैन सागर झील में एक बाइक फेंक दी।

द न्यूज मिनट द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में दिख रहा है कि युवा कॉन्ग्रेस के 5-6 कार्यकर्ता शहर में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के विरोध में एक बाइक को झील में फेंक रहे हैं। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक बाइक को उठाकर रेलिंग पर रखा, उसके बाद उसे झील में धकेल दिया।

उन्होंने देश भर में डीजल, पेट्रोल और एलपीजी की बढ़ी हुई कीमतों को पूरी तरह से वापस लेने की माँग की। गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने बुधवार (9 जून) को घोषणा की थी कि वह शुक्रवार को पेट्रोल पंपों के बाहर ‘प्रतीकात्मक विरोध’ करेगी।

कुछ राज्यों में ईंधन की कीमतें ₹100 को पार कर जाने के बाद कॉन्ग्रेस ने सभी राज्य इकाइयों को सड़कों पर उतरने और विरोध प्रदर्शन करने का निर्देश दिया था। लेकिन कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं (दिमाग से पैदल) ने शायद ये नहीं समझा कि विरोध प्रतीकात्मक करना है। कुछ ज्यादा ही सीरियस हो गए। 70-80 हजार की बाइक फेंक दी। इतने में तो 700-800 लीटर पेट्रोल आ ही जाती।

इससे पहले, कॉन्ग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को निर्देश दिया था कि एक ऐसा अभियान चलाया जाए, जिससे मूल्य वृद्धि, बेरोजगारी, नौकरी छूटने और वेतन में कमी से पीड़ित लोगों पर इसके प्रभाव पड़े। उनके निर्देशों का पालन करते हुए युवा कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने लोगों का ध्यान खींचने के लिए एक बाइक को झील में फेंक दिया।

न जॉब रही, न कार्टून बिक रहे… अब PM मोदी को कोस रहे: ट्विटर के मेल के सहारे वामपंथी मीडिया का प्रपंच

भाजपा विरोधी कार्टूनिस्ट मंजुल ने 04 जून को ट्विटर के जरिए मोदी सरकार पर यह आरोप लगाया था कि सरकार उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन करने का प्रयास कर रही है। मंजुल ने ट्विटर के भेजे गए ईमेल का स्क्रीनशॉट पोस्ट करते हुए लिखा था कि अच्छा हुआ मोदी सरकार ने ट्विटर से उनका एकाउंट बंद करने के लिए नहीं कहा क्योंकि वह धर्म विरोधी हैं, नास्तिक हैं जो मोदी को भगवान नहीं मानते हैं। हालाँकि मंजुल को ट्विटर द्वारा भेजा गया ईमेल एक सामान्य ईमेल था जो अक्सर ऑपइंडिया और कई अन्य सोशल मीडिया एक्टिविस्ट को भी भेजा जाता है।

इसके तुरंत बाद यह खबर आई कि नेटवर्क-18 के द्वारा मंजुल के साथ किया गया कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया गया। बस फिर क्या था द वायर और न्यूजलॉन्ड्री जैसे वामपंथी प्रोपेगेंडा न्यूज पोर्टल ने इस खबर को अपने नैरेटिव के तहत पकड़ लिया। द वायर ने तो नेटवर्क 18 द्वारा कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने की खबर को ट्विटर से मिले ईमेल से जोड़ दिया। द वायर ने यह भी दावा किया कि नेटवर्क 18 के साथ 6 साल से काम कर रहे मंजुल को कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने की किसी योजना के बारे में नहीं बताया गया बल्कि यह अचानक से लिया गया एक फैसला है।  

अब यदि द वायर के नैरेटिव के इतर भी इस पर तथ्यात्मक रूप से गौर करें तो यह समझ आएगा कि अक्सर कंपनियाँ फ्रीलांस तौर पर काम करने वाले कर्मचारियों के साथ अपने कॉन्ट्रैक्ट खत्म करती रहती हैं। इसके पीछे अपने खर्च को कम करना एक बड़ा कारण होता है अथवा कंपनी द्वारा यह समझना कि फ्रीलांस के तौर पर काम करने वाला एक कर्मचारी अब कंपनी के योग्य नहीं रहा। यह कंपनी का अपना फैसला होता है और इसे ट्विटर से मिले सिर्फ एक ईमेल से जोड़ना सही नहीं क्योंकि ट्विटर की लीगल टीम से ऐसे मेल सैकड़ों यूजर्स को मिलते रहते हैं।

हालाँकि, नेटवर्क 18 के साथ काम करने वाले एक फ्रीलांसर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उसे भी तत्काल प्रभाव से हटाया गया है और संभवतः नेटवर्क 18 ने यह निर्णय इस महामारी के दौरान अपने खर्चों को कम करने के लिए लिया है।

मार्च 2021 में वामपंथी मीडिया पोर्टल बजफीड ने अमेरिका के अधिग्रहीत किए गए न्यूज पोर्टल हफपोस्ट के 47 पत्रकारों, एडिटर और प्रोड्यूसर को हटाने का निर्णय लिया था। बजफीड के सीईओ ने बताया था कि कंपनी को लाभ कमाने के लिए कुछ अलग उपाय करने होंगे जिनमें कर्मचारियों की छँटनी भी शामिल है।

चाइनीज कोरोना वायरस महामारी के चलते भारत में कई ऐसे निर्णय देखने को मिले जब मीडिया समूहों ने अपने कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया हो। अप्रैल 2020 में ही इंडिया टुडे और वामपंथी प्रोपेगेंडा न्यूज पोर्टल द क्विंट ने ऐसे ही कुछ निर्णय लिए थे। द क्विंट ने जहाँ अपने 45 कर्मचारियों को अनिश्चितकालीन अवकाश पर जाने के लिए कह दिया था वहीं इंडिया टुडे ने अपने दिल्ली आधारित अखबार मेल टुडे को बंद करने की घोषणा कर दी थी।

इससे यह पता चलता है कि मीडिया समूह अक्सर अपने खर्चों को कम करने के लिए छँटनी करते रहते हैं और मंजुल के साथ नेटवर्क 18 द्वारा कॉन्ट्रैक्ट खत्म किया जाना उसी प्रक्रिया का एक हिस्सा है, न कि जैसा द वायर और न्यूजलॉन्ड्री ने बताया।

मंजुल के एक सहयोगी ने ऑपइंडिया को बताया कि मंजुल ने डीएनए से यही सोच कर इस्तीफा दिया था कि वह एक फ्रीलांसर के रूप में अपना करियर बेहतर ढंग से बना पाएँगे और महीने की तनख्वाह से अधिक पैसे कमा पाएँगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं। मंजुल के सहयोगी ने बताया कि मंजुल अपने इस गलत फैसले के लिए बाहरी कारणों को दोष दे रहे हैं और आशा है कि जो पब्लिसिटी उन्हें मिली है उससे अब वो ज्यादा पैसे कमा रहे होंगे। मंजुल पहले जी मीडिया समूह के मालिकाना वाले डीएनए में कार्टूनिस्ट थे लेकिन उन्होंने वहाँ से इस्तीफा देकर फ्रीलांसर के तौर पर काम करना शुरू किया था और अपने कार्टूनों के जरिए भाजपा विरोधी एजेंडा फैलाने लगे।  

हालाँकि मंजुल, द वायर और न्यूजलॉन्ड्री के दावे पूरी तरह गलत है और यह मोदी सरकार के खिलाफ प्रोपेगेंडा चलाने का एक प्रयास ही है। ऐसे तो ऑपइंडिया को भी कई ईमेल ट्विटर की लीगल टीम भेज चुकी है तो क्या यह माना जाए कि भारत सरकार ऑपइंडिया को भी खत्म करना चाहती है? वामपंथी एजेंडाबाज अक्सर मोदी सरकार को घेरने के लिए माहौल बनाते रहते हैं और ट्विटर द्वारा ईमेल भेज कर आवाज दबाने का नैरेटिव भी उसी एजेंडे का एक हिस्सा है।

UP के ‘ऑपरेशन’ क्लीन में अतीक गैंग की ₹46 करोड़ की संपत्ति कुर्क, 1 साल में ₹2000 करोड़ की अवैध प्रॉपर्टी पर हुई कार्रवाई

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार लगातर राज्य के अपराधियों और उनके द्वारा अर्जित अवैध संपत्तियों के विरुद्ध कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में प्रयागराज पुलिस ने अपने ऑपरेशन क्लीन में बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद की गैंग को निशाने पर लिया हुआ है। पिछले 1 हफ्ते में अतीक गैंग के सदस्यों की 46 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की गई और अब आगे 22 सदस्य ऐसे हैं जिनकी कुंडली प्रयागराज पुलिस लगातार खंगाल रही है। 

बता दें कि कोरोना संकट के चलते कुछ समय से प्रशासन की ओर से गुंडों माफियाओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई पर रोक लगी थी। हालाँकि 5 जून को इस पर दोबारा कार्रवाई शुरू हुई। अब अतीक अहमद के बाद विधायक विजय मिश्रा, पूर्व ब्लाक प्रमुख दिलीप मिश्रा, रामलोचन यादव जैसे माफिया और इनकी गिरोह से जुड़े लोग भी पुलिस की रडार पर हैं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस अतीक अहमद के अतिरिक्त विधायक विजय मिश्रा, पूर्व ब्लाक प्रमुख दिलीप मिश्रा, मो जावेद उर्फ पप्पू गंजिया, पूर्व सपा विधायक विजमा यादव, रामलोचन यादव, गणेश यादव की कुंडली नए सिरे से खंगाल रही है।

1 हफ्ते में किस-किसकी संपत्ति हुई कुर्क

5 जून को पूर्व विधायक खालिद अजीम उर्फ मो अशरफ़ की धूमनगंज थाना क्षेत्र के कसारी मसारी में स्थित करीब 25 करोड़ रुपए की भूमि पर सरकारी बोर्ड लगाकर कुर्की की कार्रवाई की गई थी। 7 जून को मो अशरफ की ही 11 बिस्वा जमीन जिसकी कीमत 2.25 करोड़ रुपए है, उसकी कुर्की हुई थी

इसी क्रम में 8 जून को अतीक गैंग के खास शूटर आरोपित माजिद अनवारुल हक उर्फ बच्चा मुंशी व अकबर की करीब 5.41 करोड़ की 3 बीघा 3.5 बिस्वा जमीन पर पुलिस ने कुर्की के बाद सरकारी नोटिस बोर्ड लगाया था। 11 जून को अतीक के शूटर जुल्फिकार पर कार्रवाई करते हुए उसकी 14 करोड़ रुपए की 70 बिस्वा जमीन की कुर्की हुई थी।

उल्लेखनीय है कि, इन माफियाओं की अवैध संपत्तियों के विरुद्ध कार्रवाई पिछले साल सितंबर से शुरू हुई थी। इसके बाद अपराध और गुंडई के बल पर अर्जित की गई संपत्तियों पर या तो कुर्की की कार्रवाई हुई है या फिर इनके अवैध निर्माणों को ध्वस्त करवाया गया है। सब मिलाकर 2000 करोड़ रुपए की संपत्ति पर प्रशासन ने अपनी कार्रवाई की है।

एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह बताते हैं कि यह कार्रवाई गैंगस्टर एक्ट 14 (1) के तहत हुई है। धूमनगंज के इंस्पेक्टर अनुपम शर्मा ने कहा कि कुर्की की जाने वाली जमीन की किसी भी प्रकार की बिक्री और निर्माण पर पूर्णतया रोक रहती है और इसका उल्लघंन करने वालों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बांग्लादेश के रास्ते भारत में घुसे चायनीज का गुरुग्राम में 100 कमरों का होटल, मुंबई में अब्दुल रज्जाक बिजनेस पार्टनर

बांग्लादेश के रास्ते भारत में अवैध रूप से दाखिल होने वाले चीनी नागरिक को पश्चिम बंगाल के मालदा में बीएसएफ द्वारा गिरफ्तार करने के बाद पूछताछ में कई खुलासे हुए हैं। हान जुनवे (36) नाम के इस चीनी नागरिक का गुरुग्राम में 100 कमरों वाला अपना एक होटल है, जिसका नाम “स्टार स्प्रिंग” है। उस होटल में चीनी नागरिक के साथ-साथ भारतीय भी काम करते हैं।

पूछताछ में हान ने बताया कि वह भारत में चीन के लिए जासूसी करता था। इसके साथ ही वह भारतीय सिम को चीन भेजता था, जिसका इस्तेमाल अकाउंट हैक करने और अन्य वित्तीय फ्रॉड करने के लिए किया जाता था। हान ने बताया कि उसने अपना कारोबार गुरुग्राम के अलावा मुंबई और हैदराबाद में भी फैला रखा था।

हान की एक कंपनी हैदराबाद में पंजीकृत है, जबकि गुरुग्राम के डीएलएफ फेज-3 के प्लाट नंबर टी-14/9 में वह 80 कमरों वाला स्टार स्प्रिंग नाम से होटल चलाता था। इससे पहले डीएलएफ फेज-3 में ही 30 कमरों का पीजी चलाता था।

हाल ही में हान के बिजनेस पार्टनर सुन जियांग को लखनऊ एटीएस ने गिरफ्तार किया था। हान को एटीएस केस के कारण भारतीय वीजा नहीं मिला था। इस कारण उसने बांग्लादेश का बिजनेस वीजा लिया और वहाँ से अवैध रूप से भारत में घुसने की कोशिश की थी।

हान के संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने की जानकारी इसी साल जनवरी में मिली थी, जब उत्तर प्रदेश की एंटी टेररिस्ट स्क्वॉयड (एटीएस) टीम ने होटल में छापा मारा था। हालाँकि, जुनवे दिसंबर में ही चीन भाग गया था, इस वजह से पकड़ में नहीं आया। एटीएस ने उसकी कंपनी में नंबर-दो की हैसियत वाले डेविड और डायरेक्टर प्रशांत कुमार पोट्टेंल्ली सहित कई अन्य कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था।

वहीं, हान के मुंबई स्थित कारोबार के बारे में कहा जाता है कि वहाँ अब्दुल रज्जाक नाम का उसका बिजनेस पार्टनर है। रज्जाक अभी फरार चल रहा है और एटीएस उसकी तलाश कर रही है।

हान जुनवे ने जनवरी 2019 में गाव नाथुपुर निवासी जेवीएल प्रोपर्टीज एंड ट्रेवल्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर पारुल लोहिया से मुलाकात की थी। सौदा तय होने पर जेवीएल प्रापर्टीज एंड ट्रेवल्स प्राइवेट लिमिटेड और हान जुनवे की हैदराबाद वाली कंपनी के बीच एग्रीमेंट हुआ। होटल के अधिकतर कमरे पहले बुक रहते थे, लेकिन कोरोना संकट शुरू होने के बाद हान ने किराया देना बंद कर दिया था। दिसंबर 2020 में वह यह कहते हुए चीन चला गया था कि आकर बकाया राशि देगा। तब एटीएस को पता चला कि हान भारतीय सिम को चीन भेजता था।

छापे के दौरान एटीएस की टीम ने जेवीएल प्रापर्टीज एंड ट्रेवल्स के डायरेक्टर पारुल लोहिया से भी पूछताछ की थी। लोहिया ने बताया था कि लीज एग्रीमेंट करने के बाद वह केवल किराया लेने के लिए जाते थे। लोहिया का कहना है कि जैसे ही उन्हें हान के बारे में जानकारी मिली, उन्होंने फरवरी में लीज कैंसिल करने का नोटिस दे दिया था। दो महीने होटल खाली रहा। अप्रैल में पजेशन ले लिया। देश के कई राज्यों में उनका होटल का काम है। अब आगे से वह पूरी छानबीन के बाद ही एग्रीमेंट करेंगे।

होटल डीएलएफ फेज-तीन थाने से केवल डेढ़ से दो किलोमीटर की दूरी पर है, लेकिन पुलिस को इस बारे में कुछ भी पता नहीं चला। थाना प्रभारी विनीत कुमार ने स्वीकार किया कि चीनी नागरिक संदिग्ध गतिविधियों में शामिल है, इसका पता एटीएस के छापे के बाद ही चला।

सूत्रों के मुताबिक चीनी नागरिक के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए बीएसएफ की टीम गुरुग्राम पहुँच सकती है। टीम न केवल होटल का निरीक्षण करेगी बल्कि पारुल लोहिया से भी पूछताछ कर सकती है।

अस्पताल में भर्ती युवक को जिंदा जलाने की कोशिश, CCTV फुटेज से आरोपित M. रजक को MP पुलिस ने किया गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक व्यक्ति को जिंदा आग के हवाले करने का प्रयास किया गया। घटना सागर के जिला अस्पताल की है जहाँ दामोदर कोरी नाम के व्यक्ति को जिंदा जलाने की कोशिश की गई। घटना जिला अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। फिलहाल आरोपित पुलिस की गिरफ्त में बताया जा रहा है।

मीडिया खबरों के मुताबिक दामोदर कोरी और आरोपित मिलन रजक के बीच किसी बात को लेकर हाथापाई हुई। इस मारपीट में दामोदर घायल हुआ जिसके बाद वह अपने इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती हुआ था। उसी रात आरोपित रजक भी अस्पताल में दाखिल हुआ और उसने दामोदर के ऊपर पेट्रोल छिड़ककर उसे आग के हवाले कर दिया। अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ ने आग बुझाकर पुलिस को घटना की सूचना दी।

अस्पताल के सीसीटीवी में साफ तौर पर यह दिखाई दिया कि आरोपित मिलन रजक (M. रजक) लाइटर लेकर अस्पताल में घूम रहा था। इसके बाद वह एक कोने में जाकर आग जलाता है और दामोदर के पास जाकर उसे आग के हवाले कर देता है। दामोदर अस्पताल में इधर-उधर भागता नजर आया, साथ ही आरोपित रजक भी अस्पताल से बाहर जाता हुआ नजर आया।

दामोदर का इलाज सागर के ही बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में चल रहा है, जहाँ उसकी हालत स्थिर बनी हुई है। पुलिस ने आरोपित मिलन रजक को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ गोपालगंज थाने में आईपीसी की धारा 307 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

सागर के एडिशनल एसपी विक्रम सिंह ने बताया कि प्रारम्भिक जाँच से यही पता चला है कि आरोपित ने दामोदर को आग से जलाने के लिए पेट्रोल का ही इस्तेमाल किया था। पीड़ित के बयान के आधार पर भी आरोपित मिलन रजक की पहचान की गई और उसे गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि आरोपित से पूछताछ जारी है।

राजस्थान में 2 बच्चियों से रेप, एक ने की आत्महत्या: मोइनुद्दीन पर केस, प्राइवेट टीचर ने अश्लील वीडियो बना किया वायरल

राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार में नाबालिग बच्चियों के साथ दरिंदगी की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं। जोधपुर जिले के भोपालगढ़ और फलौदी कस्बे से नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार किए जाने का मामला सामने आया है। भोपालगढ़ वाले मामले में पीड़ित नाबालिग ने कुएँ में कूदकर आत्महत्या कर ली। वहीं फलौदी कस्बे वाले मामले में आरोपितों ने नाबालिग का अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, भोपालगढ़ थाना क्षेत्र में नाबालिग से बलात्कार के मामले में पीड़ित के चाचा ने गाँव के ही मोइनुद्दीन के खिलाफ रेप का केस दर्ज कराया है। पुलिस ने आरोपित की तलाश तेज कर दी है।

वहीं फलौदी कस्बे में निजी स्कूल के शिक्षक ने 15 वर्षीय नाबालिग छात्रा का अश्लील वीडियो बनाकर उसका रेप करने की कोशिश की। लड़की को परेशान देख पिता ने उसे ननिहाल भेज दिया। इधर आरोपितों ने उसका अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। फिलहाल लड़की के पिता की शिकायत पर पुलिस ने तीन आरोपित शिक्षकों को हिरासत में ले लिया है। अब उनके मोबाइल फोन की जाँच की जा रही है।

इससे पहले जोधपुर के ही शेरगढ़ में सरकारी स्कूल के दो शिक्षकों ने 6 साल की बच्ची के साथ दरिंदगी की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इसी साल (2021) की शुरुआत में ही शेरगढ़ के मोकमगढ़ स्थित बाबा की नामबाड़ी में सरकारी स्कूल के दो शिक्षकों ने स्कूल में ही 6 साल की बच्ची से 3-4 बार रेप किया था। जब एक रेप कर रहा था तो दूसरा आरोपित गेट के बाहर पहरा देता था।

पुलिस के मुताबिक, बच्ची के पेट में दर्द होने के बाद उसके पिता उसे अस्पताल ले गए और जाँच के बाद डॉक्टरों ने उसके प्रेग्नेंट होने की बात कही। फिलहाल मामले की जाँच अभी चल ही रही थी कि जिले में दुष्कर्म की ये वारदात सामने आ गई।