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‘शर्म आनी चाहिए 370 पर इतना बड़ा झूठ बोलते हुए…’: दिग्विजय सिंह को कश्मीरी एक्टिविस्ट डॉ अग्निशेखर ने लताड़ा

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का क्लबहाउस चैट रूम में अनुच्छेद 370 पर दिया गया बयान अब सोशल मीडिया पर हर जगह वायरल है। इसमें उन्होंने एक जगह कहा है कि अनुच्छेद 370 में कश्मीरी पंडितों को आरक्षण दिया गया था।

अब कॉन्ग्रेसी नेता की इस बात को सुनकर कश्मीरी पंडितों के हक की लड़ाई लड़ने वाले डॉ अग्निशेखर ने प्रतिक्रिया दी है। अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने सिंह की आरक्षण वाली बात को निराधार बताया। साथ ही उन्हें एक भ्रामक प्रचारक भी कहा।

पिछले 32 साल से कश्मीरी पंडितों के हक में अपनी आवाज बुलंद करने वाले डॉ अग्निशेखर का ये बयान ‘youth 4 panunkashmir’ नाम के ट्विटर अकॉउंट से ट्वीट किया गया। ‘पनुन कश्मीर’ संयोजक, डॉ अग्निशेखर की वीडियो में वह दिग्विजय सिंह को करारा जवाब देते हुए कहते हैं,

दिग्विजय सिंह ने हालिया बयान में अनुच्छेद 370 (वीडियो में यहाँ गलती से ‘अनुच्छेद 370’ को ‘धारा 370’ कहा गया है, लेकिन वास्तविकता में जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा संविधान के अनुच्छेद-370 और 35-A से मिलता था, जिसको मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 को निरस्त किया था) के हटाए जाने पर अपनी बात रखते हुए गलत बयानी की कि अनुच्छेद 370 के तहत कश्मीरी पंडितों को आरक्षण की सुविधा थी। यानी कश्मीरी पंडितों के लिए नौकरियों में एक रिजर्वेशन था जो अनुच्छेद 370 उनको देता था। उनका यह बयान बिना सिर पैर का है। गलत है, निराधार और भ्रामक है।”

वह आगे दिग्विजय सिंह को चुनौती देते हुए कहते हैं, “दिग्विजय सिंह, मैं आपको चुनौती देता हूँ। आप मेरी किसी बात का खंडन करके दिखाइए। क्या कह रहे हैं आप! कितना मूर्ख बनाएँगे आप…पहले हमारी नजर में खुद को, देश की नजर में खुद को… आप एक भ्रामक प्रचारक हैं। एक कारखाना खोला हुआ है क्या आपने झूठ फैलाने का? आप झूठ के कारखानेदार हैं

डॉ अग्रिशेखर अपनी बात रखते हुए दिग्विजय सिंह को कहते हैं, “इसी अनुच्छेद 370 के पीछे जो मुस्लिम सांप्रदायिकता की राजनीति थी जिसने अलगाववाद को जन्म दिया और जिसकी वजह से हमारा विस्थापन है, निर्वासन है। कौन सी स्थिति की रक्षा करती थी अनुच्छेद 370? किस कश्मीरियत की आप बात कर रहे हैं? कश्मीरियत जिनकी असली धरोहर है वह बाहर क्यों हैं? लाखों कश्मीर पंडितों को बेदखल किया गया। तब अनुच्छेद 370 हटी नहीं थी।”

सिंह के बयान पर आपत्ति व्यक्त करते हुए कश्मीरी पंडित एक्टिविस्ट दिग्विजय सिंह से अपील करते हैं, “भ्रामक प्रचार मत करिए। अपने को मूर्ख और हास्यासपद मत बनाइए। मैं आपको चुनौतीपूर्ण ढंग से ये कहता हूँ कि कोई रिजर्वेशन नहीं था। हिम्मत है तो मेरी बात को काटिए। आपको जो राजनीति करनी है करिए। लेकिन आपको शर्म भी आनी चाहिए इतना भयंकर झूठ कहते हुए। ”

अपनी बात खत्म करते हुए डॉ अग्रनिशेखर ने दिग्विजय सिंह की निंदा की। साथ ही अपनी व तमाम कश्मीरी पंडितों की ओर कॉन्ग्रेसी नेता के बयान का खंडन कर इसे बिलकुल गलत बताया।

बता दें कि डॉ अग्निशेखर एक लेखक हैं, एक कवि हैं और सक्रिय कश्मीरी पंडित एक्टिविस्ट हैं। उन्होंने पिछले 32 सालों में निष्पक्ष तरह से कश्मीरी पंडितों के मुद्दों को उठाया। फिर चाहे कोई भी सरकार हो उन्होंने एक एक्टिविस्ट के तौर पर हमेशा अपने लोगों की घर वापसी का प्रयास किया।

दिग्विजय सिंह ने दिए कॉन्ग्रेस के साथ आर्टिकल 370 लौटने के संकेत

गौरतलब है कि पाकिस्तानी पत्रकार शाहजेब जिल्लानी से दिग्विजय सिंह की बातचीत की ऑडियो वायरल होने के बाद यह पता चल रहा है कि वह केंद्र से मोदी सरकार के जाने का इंतजार क्यों कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस नेता ने ऑडियो में कहा है,

“जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को हटाया गया, तब कश्मीर में लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन नहीं किया गया था। इस दौरान इंसानियत को ताक पर रखा गया और इसमें कश्मीरियत भी नहीं थी। सभी को काल कोठरी में बंद कर दिया गया था, क्योंकि मुस्लिम बहुल राज्य में एक हिंदू राजा था।” 

सिंह ने कहा, “दोनों ने साथ काम किया था। दरअसल, कश्मीर में सरकारी सेवाओं में कश्मीरी पंडितों को आरक्षण दिया गया था। इसलिए अनुच्छेद-370 को रद्द करना और जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा कम करना अत्यंत दुखद निर्णय है। हमें निश्चित रूप से इस मुद्दे पर फिर से विचार करना होगा।”

दिग्विजय सिंह ने पाकिस्तानी पत्रकार से मोदी सरकार के अनुच्छेद-370 को निरस्त करने के फैसले पर विचार करने का वादा किया। अनुच्छेद-370, जिसके कारण जम्मू-कश्मीर को स्वतंत्रता के बाद भी शेष भारत से अलग रखा गया, जिसके दम पर कॉन्ग्रेस या अन्य सरकारों ने वहाँ तनावपूर्ण माहौल पैदा किया। घाटी में हिंदुओं का नरसंहार हुआ।

दिग्विजय सिंह कहते हैं कि वे कश्मीरी पंडित ही थे, जिन्हें नौकरियों में आरक्षण मिला। यानी इससे उनका मतलब था कि राज्य के मुसलमानों द्वारा घाटी के हिंदुओं के साथ अच्छा व्यवहार किया गया था? जबकि सच्चाई यह है कि मुस्लिम कट्टरपंथी और जिहादियों ने हिंदु महिलाओं के साथ बलात्कार, हत्या और कश्मीर में नरसंहार कर उन्हें भगा दिया ​था।

जिस हिंदू लड़की को भगाने के कारण जेल गया था गुलाबुद्दीन, बाहर आते ही उसे दोबारा ले भागा: अलीगढ़ मामले में केस दर्ज

यूपी के अलीगढ़ जिले में 2 दिन पहले अपनी दादी के साथ जा रही एक हिंदू किशोरी को इमरान और गुलाबुद्दीन नाम के दो मुस्लिम युवकों ने रास्ते से जबरन उठा लिया और बाइक पर बैठाकर अपने साथ ले गए। घटना गभाना थाना क्षेत्र के कटरा मोड़ की है। घटना की जानकारी होते ही बीजेपी कार्यकर्ता इकट्ठा होकर थाने पहुँच गए और कार्रवाई की माँग करने लगे। बढ़ते हंगामे को देखकर पुलिस ने आनन-फानन में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया और कार्रवाई का आश्वासन देकर मामले को शांत कराया।

बताया जा रहा है नाबालिग लड़की अपनी दादी के साथ चंडौस थाना क्षेत्र के गाँव पहावटी में अपने बुआ के घर जा रही थी। दोनों बरौली से टैंपो में बैठकर कटरा मोड़ पहुँची थीं और वहाँ से आगे जाने के लिए दूसरे टैंपो के इंतजार में खड़ी थीं। उसी दौरान गुलाबुद्दीन और इमरान उस जगह पहुंचे और नाबालिग बेटी को जबरन बाइक पर बिठा लिया और उसे अपने साथ लेकर चले गए। हालाँकि, लड़की की दादी ने एक आरोपी गुलाबुद्दीन को पहचान लिया।

पहले भी हो चुका लड़की का अपहरण :

थाना जवां की बरौली चौकी क्षेत्र के एक गाँव के निवासी व्यक्ति का कहना है कि 08 अप्रैल 2017 को उसकी नाबालिग बेटी को इमरान व गुलाबुद्दीन उठाकर ले गए थे। इस मामले का कोर्ट में ट्रायल चल रहा है। मामले में एक आरोपित गुलाबुद्दीन पिछले दिनों ही जेल से जमानत पर छूटकर आया है। बाहर आते ही उसने लड़की का दोबारा अपहरण कर लिया।

पुलिस ने जल्द बरामदगी का दिया आश्वासन :

घटना की जानकारी होने पर पीड़ित पक्ष के साथ भाजपा नेता थाने पहुँच गए। उन्होंने लव जिहाद का आरोप लगाते हुए युवती की बरामदगी व दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की माँग काे लेकर नारेबाजी करना शुरू कर दिया। इस दौरान उनकी एसएसआई बिजेंद्र शर्मा से तीखी नोंक-झोंक हो गई। पुलिस ने मामले में रिपोर्ट दर्ज करने के साथ ही आरोपियों की गिरफ्तारी व युवती की जल्द बरामदगी का आश्वासन दिया, तब जाकर मामला शांत हो सका। इंस्पेक्टर सुबोध कुमार उपाध्याय ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर जाँच की जा रही है।

बीजेपी महानगर मंत्री ने कहा- हरकतों से बाज आएँ :

वहीं, बीजेपी महानगर मंत्री संजू बजाज ने कहा है कि आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जिहादी मानसिकता के लोग कान खोलकर सुन लें और अपनी हरकतों से बाज आएँ वरना हमारे यहाँ हिन्दू लड़कों की कमी नहीं है। वे क्रिया की प्रतिक्रिया भी अच्छी तरह दे सकते हैं।

‘राजस्थान में गहलोत सरकार करा रही पायलट खेमे के विधायकों की फोन टैपिंग और जासूसी’: MLA वेद प्रकाश सोलंकी

राजस्थान सरकार में सियासी संग्राम बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में पायलट खेमे के एक विधायक वेद प्रकाश सोलंकी ने गहलोत सरकार के ऊपर फोन टैपिंग का आरोप लगाया है। सोलंकी का कहना है कि राजस्थान में विधायकों की फोन टैपिंग कराई जा रही है। हालाँकि उनकी फोन टैपिंग हो रही है या नहीं, इस बारे में उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, कॉन्ग्रेस विधायक वेद प्रकाश सोलंकी ने कहा, “मुझे नहीं पता कि मेरा फोन टैप हो रहा है या नहीं। लेकिन कुछ विधायकों ने कहा कि उनके फोन टैप किए जा रहे हैं। 2-3 विधायकों ने कल सीएम को इसकी जानकारी दी। इस संबंध में मेरी सचिन पायलट से कोई बातचीत नहीं हुई।”

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, सोलंकी ने कहा कि इस मामले के सामने आने के बाद विधायकों में दहशत है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए ये सब ठीक नहीं है। गहलोत सरकार के ऊपर विधायकों की जासूसी और फोन टैपिंग का आरोप लगाते हुए वह बोले कि यह सब विधायकों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, जो सही नहीं है।

सोलंकी के अनुसार पार्टी खेमे के कई विधायक अपने फोन टैपिंग की शिकायत कर चुके हैं। शुक्रवार को भी 3 विधायकों की टैपिंग की बात कही गई थीं। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कार्यकर्ताओं को फर्जी मामलों में फँसाकर बदनाम करने की धमकी दी जा रही है।

इतना ही नहीं वरिष्ठ आइएएस और आइपीएस अधिकारियों को पायलट खेमे के विधायकों से दूरी रखने व उनके काम नहीं करने के लिए कहा गया है। छोटे कर्मचारियों तक को दूर-दराज के क्षेत्रों में तबादलों की धमकी दी जा रही है। सोलंकी ने आरोप लगाया कि मंत्री पायलट समर्थक विधायकों से मिल तक नहीं रहे, जबकि वह कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता हैं।

बता दें कि सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच गहमागहमी की बातचीत पिछले साल भी तूल पकड़ी थी। हालाँकि, बातचीत के बाद मामला सुलझ गया और पायलट कॉन्ग्रेस में बने रहे। लेकिन अब पायलट खेमे के विधायकों के ऐसे बयान आने के बाद ये अटकलें दोबारा लगने लगीं है कि शायद पायलट का मूड बदल रहा हो।

इस बीच राजस्थान कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आज कहा कि सचिन पायलट न तो पार्टी से नाराज हैं और न ही सरकार से। उन्होंने सचिन की नाराजगी को लेकर कहा कि वे कॉन्ग्रेस के साथ हैं और राजस्थान में सरकार को किसी तरह का कोई खतरा नहीं।

वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा, “आज फिर से कॉन्ग्रेस के एक विधायक कह रहे हैं कि ‘कई विधायक कहते हैं कि उनके फ़ोन टेप हो रहे हैं,जासूसी हो रही है’ कॉन्ग्रेस बताए कि ये विधायक कौन हैं? सो जा बेटा गब्बर आ जाएगा की तर्ज पर कॉन्ग्रेस सरकार अपने ही विधायकों को डरा रही है। कॉन्ग्रेस बताए गब्बर कब आएगा।”

ब्लैक फंगस की दवा जीएसटी फ्री, वैक्सीन पर 5 फीसदी टैक्स, सितंबर तक मिलती रहेगी छूट: वित्तमंत्री ने की कई घोषणाएँ

केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार (12 जून 2021) को बताया कि ब्लैक फंगस के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा ‘एम्फोटेरेसिन बी’ को जीएसटी फ्री करने की मंजूरी दे दी गई है। इसके अलावा, ‘टोसिलिजुमैब’ दवा पर से भी जीएसटी हटाया गया है। कोरोना के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली रेमडेसिविर दवा पर से जीएसटी को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की 44वीं बैठक में ये फैसले लिए गए हैं। कोरोना संक्रमण को देखते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई काउंसिल की बैठक में बताया कि केंद्र सरकार 75 फीसदी वैक्सीन खरीद रही है और उस पर जीएसटी भी भर रही है। लोगों को सरकारी अस्पतालों में फ्री में लगने वाली वैक्सीन का जनता पर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ेगा।

केंद्रीय मंत्री ने जीएसटी से होने वाली आय का 70 फीसदी राज्यों के साथ शेयर करने की बात कही है।

वित्त मंत्री ने कहा कि बिजली की भट्टियों और टेम्परेचर चेक करने वाले उपकरणों पर से जीएसटी को घटाकर 5 फीसदी और एम्बुलेंस पर से जीएसटी को 28 फीसदी से घटाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया है। ये दरें सितंबर तक मान्य रहेंगी।

इसके अलावा मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन पर से 12 से घटाकर 5 फीसदी, वेंटिलेटर, मास्क और हेलमेट में भी जीएसटी को 12 से घटाकर 5% कर दिया गया है। सैनिटाइजर पर से भी जीएसटी को 18 फीसदी से घटकार 5 प्रतिशत किया गया है। हाई फ्लो नेजल कैनुला से 12 से घटाकर 5 प्रतिशत जीएसटी कर दिया गया है।

यहाँ लिस्ट दी गई है जिनमें छूट दी गई है।

जीएसटी काउंसिल द्वारा दी गई छूट की लिस्ट
जीएसटी काउंसिल द्वारा दी गई छूट की लिस्ट

वित्तमंत्री के साथ इस बैठक में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर समेत वित्त मंत्रालय के सीनियर अधिकारी भी मौजूद रहे।

TMC में लौटते ही सुरक्षित हुए मुकुल रॉय? गृह मंत्रालय से की Z कैटेगरी सुरक्षा वापस लेने की माँग: रिपोर्ट्स

तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) में लौटते ही क्या अब मुकुल रॉय को कोई खतरा नहीं रहा? मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो कुछ ऐसा ही है क्योंकि टीएमसी में वापस लौटने के एक दिन बाद ही मुकुल रॉय ने गृह मंत्रालय को चिट्ठी लिखी है और अपनी सुरक्षा वापस लेने की माँग की है। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहते हुए पश्चिम बंगाल के हिंसात्मक माहौल के चलते उन्हें यह सुरक्षा दी गई थी।

न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से खबर दी कि शनिवार (12 जून) को मुकुल रॉय ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर अपनी केन्द्रीय सुरक्षा हटाने की माँग की है। हालाँकि रिपोर्ट्स के मुताबिक गृह मंत्रालय ने अभी तक इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया था।

आपको बता दें कि मुकुल रॉय नवंबर 2017 में टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। इसके बाद उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बनाया गया था। इसके बाद उन्हें सीआरपीएफ की Y+ सुरक्षा प्रदान की गई थी। हालाँकि पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ समय से जारी हिंसा के बीच गृह मंत्रालय ने उनकी सुरक्षा बढ़ाने का निर्णय लिया था और मार्च 2021 में ही Z कैटेगरी की सुरक्षा दी गई थी।

शुक्रवार (11 जून) को ही मुकुल रॉय एक बार फिर भाजपा को छोड़कर टीएमसी में शामिल हुए। रॉय ने टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी, उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में अपने बेटे शुभ्रांशु रॉय के साथ टीएमसी में वापसी की। सूत्रों के अनुसार उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी में लौटते ही केन्द्रीय गृह मंत्रालय को अपनी सुरक्षा हटाने के संबंध में चिट्ठी भेज दी।

हालाँकि पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं पर अभी भी हमले बंद नहीं हुए हैं। बंगाल के विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद शुरू हुई हिंसा अभी भी जारी है और कई भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ गंभीर मारपीट और हत्या तक की खबरें आ रही हैं। शुक्रवार (11 जून) को ही पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में भाजपा सांसद डॉ. जयन्त कुमार रॉय पर हमला हुआ। टीवी9 के अनुसार, जलपाईगुड़ी जिले के राजगंज प्रखंड में डॉ. जयन्त पर हमला शाम 5 बजे हुआ। हमले में 2 लोगों के घायल होने की खबर आई। दोनों को अस्पताल में भर्ती किया गया। भाजपा सांसद रॉय ने टीएमसी पर हमला करने का आरोप लगाया।

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए जयन्त रॉय ने बताया, “करीब 5 बजे TMC के गुंडों ने मुझ पर हमला किया। उन्होंने मुझ पर बाँस और डंडे से हमला किया। मेरे हाथ में और सर में चोट लगी है। मेरे साथ अन्य कार्यकर्ताओं पर भी हमला हुआ है। पश्चिम बंगाल में कोई कानून-व्यवस्था नहीं बची है।”

हालाँकि ऐसा नहीं है कि मुकुल रॉय कभी सुरक्षित रहे थे। बीते साल दिसंबर में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हमला किया था। इस घटना में बंगाल प्रभारी और भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय और मुकुल रॉय भी घायल हुए थे। इसके बाद मुकुल रॉय ने ही पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन की माँग करते हुए कहा था कि टीएमसी के कार्यकर्ता हिंसा और गुंडागर्दी पर उतारू हैं।

पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के खिलाफ जारी हिंसा के कारण कई कार्यकर्ता और समर्थक बंगाल छोड़कर असम के लिए पलायन कर रहे हैं। इन हमलों का आरोप टीएमसी पर लगाया जा रहा है और यह भी कहा जा रहा है कि टीएमसी के गुंडे लगातार लोगों के साथ लूटपाट भी कर रहे हैं और भाजपा का समर्थन करने वालों को प्रताड़ित कर रहे हैं।

पूर्व मिसेज इंडिया राजस्थान ने बड़े व्यापारी को हनीट्रैप में फाँसा, रेप मामले में फँसाने की धमकी देकर करोड़ों ठगे

राजस्थान की राजधानी जयपुर से हनीट्रैप का मामला उजागर हुआ है। वहाँ एक बड़े व्यापारी को पूर्व मिसेज इंडिया राजस्थान ने अपने प्रेम जाल में फाँसा और उससे करोड़ो रुपए ठग लिए। अब मामले की आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसके साथ उसके पति हेड कॉन्सटेबल से भी पूछताछ हो रही है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, श्यामनगर थाने के एएसआई जय सिंह ने बताया कि प्रियंका चौधरी नाम की महिला उत्तम मार्ग की रहने वाली है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। उसका पति भी राजस्थान पुलिस में हेड कांस्टेबल है। 

बता दें कि इस हनीट्रैप मामले में घासीलाल चौधरी नाम के व्यापारी ने 3 जून को शिकायत की थी। वह पॉश पार्श्वनाथ कालोनी के रहने वाले हैं। उनका आरोप है कि प्रियंका ने उन्हें जाल में फँसाकर लाखों रुपए ऐंठे। गहने बनवाए। बाद में दुष्कर्म मामले में फँसाने की धमकी देकर ब्लैकमेल किया और अब उनके 400 गज का प्लॉट माँग रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस ने शुरू में इस मामले को छिपाकर जाँच की। लेकिन बाद में भारी दबाव बनने पर प्रियंका को गिरफ्तार किया गया। व्यापारी का आरोप है कि  2016 में प्रियंका चौधरी पति के साथ घर पर आई थी। उसने खुद को व्यापारी के गाँव के पास का बताकर किराए पर मकान माँगा। 

मकान में रहने के बाद उससे पारिवारिक संबंध बनाए और व्यापारी के काम का पता लगते ही उससे नजदीकियाँ बढ़ानी शुरू कर दीं। इसके बाद वह धीरे-धीरे जरूरत के नाम पर रुपए माँगती थी। प्रियंका ने व्यापारी को अपने जाल में फाँस कर अपने लिए सोने के गहने भी बनवाए थे। व्यापारी का आरोप है कि प्रियंका ने उनसे लाखों रुपए ऐंठे और दबाव बनाकर ब्लैक मेल करती रही।

पुलिस को अब तक की जाँच में पता चला है कि 2019 में मिसेज इंडिया राजस्थान बनने वाली प्रियंका लग्जरी लाइफ जीने की शौकीन हैं। उसे पार्टी में जाना और महंगे शौक रखना पसंद है। पुलिस इस मामवे में हेड कॉन्सटेबल पति की जाँच कर रही है। पता लगाया जा रहा है कि व्यापारी को ठगने के इस मामले में उसका क्या रोल है। प्रियंका अब पुलिस की गिरफ्त में है।

आईएस में शामिल केरल की 4 महिलाओं को वापस नहीं लाएगी मोदी सरकार, अफगानिस्तान की जेलों में है कैद

अफगानिस्तान में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) में शामिल हुई केरल की चार महिलाओं के भारत वापस आने की संभावना नहीं है। हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है कि केरल की ये चार महिलाएँ अफगानिस्तान की जेल में बंद हैं, जिन्हें भारत वापस लौटने की इजाजत नहीं दी जाएगी। ये महिलाएँ अफगानिस्तान के खुरासान प्रांत में अपने पतियों के साथ इस्लामिक स्टेट में शामिल होने के लिए गई थीं।

केरल की ये महिलाएँ 2016-18 में अफगानिस्तान के नंगरहार पहुँची थीं। इस दौरान उनके पति अफगानिस्तान में अलग-अलग हमलों में मारे गए थे। ये महिलाएँ इस्लामिक स्टेट के उन हजारों लड़ाकों में शामिल थीं, जिन्होंने नवंबर और दिसंबर 2019 में अफगानिस्तान के अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था।

चारों महिलाओं की पहचान सोनिया सेबस्टियन उर्फ आयशा, मेरिन जैकब उर्फ मरियम, निमिशा उर्फ फातिमा ईसा और रफाएला के रूप में हुई है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, दो अन्य भारतीय महिलाओं और एक पुरुष ने भी अफगानिस्तान के अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था।

13 देशों के इस्लामिक स्टेट के 408 सदस्य अफगानिस्तान की जेलों में बंद

इस साल अप्रैल में अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशालय के प्रमुख अहमद जिया सरज ने खुलासा किया कि 13 देशों के इस्लामिक स्टेट के 408 सदस्य अफगानिस्तान की जेलों में बंद हैं। इसमें 4 भारतीय, 16 चीनी, 299 पाकिस्तानी, 2 बांग्लादेशी, 2 मालदीव के और अन्य शामिल थे, जो पूर्व में आईएस में शामिल हुए थे। सराज ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान सरकार ने कैदियों को निर्वासित करने के लिए 13 देशों के साथ बातचीत शुरू कर दी है।

केरल की महिलाओं का इस्लामिक आतंकवाद में गहरा विश्वास

दिल्ली में अफगानिस्तान के अधिकारियों ने इस मसले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। काबुल में वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि उन्हें भारत के फैसले का इंतजार है। द हिंदू के अनुसार, चारों महिलाओं की घर वापसी को लेकर सरकार की विभिन्न एजेंसियों के बीच कोई सहमति नहीं बन पा रही है। इसकी संभावना भी बहुत कम है कि उन्हें भारत वापस लौटने की इजाजत दी जाएगी।

आत्मसमर्पण के एक महीने बाद दिसंबर 2019 में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने काबुल में अपने बच्चों के साथ जेल में बंद चारों महिलाओं से मुलाकात की थी। अधिकारी ने बताया, इन महिलाओं की वापसी और उन्हें सरकारी गवाह बनने की अनुमति देने पर विचार किया गया, लेकिन जब अधिकारियों ने इन महिलाओं का इंटरव्यू लिया, तो उन्हें पता चला कि वो बहुत कट्टरपंथी सोच रखती हैं। उनका इस्लामिक आतंकवाद पर गहरा विश्वास है, इसलिए भारत द्वारा अफगानिस्तान के अधिकारियों से उन पर मुकदमा चलाने का अनुरोध किया जा सकता है। भारत के अनुरोध पर इंटरपोल ने इन महिलाओं के खिलाफ रेड नोटिस जारी किया है।

ईरान से पैदल ही अफगानिस्तान पहुँचे

बता दें कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) द्वारा 2017 में दायर चार्ज शीट के अनुसार, सेबस्टियन ने 2016 में केरल के 21 पुरुषों और महिलाओं के समूह के साथ अफगानिस्तान में आईएसकेपी (ISKP) में शामिल होने के लिए भारत छोड़ दिया था। वे ईरान से पैदल ही अफगानिस्तान पहुँचे थे।

एनआईए ने कहा कि केरल के कासरगोड की सेबस्टियन 31 मई, 2016 को अपने पति अब्दुल राशिद अब्दुल्ला के साथ मुंबई हवाई अड्डे से भारत से रवाना हुई थी। जाँच एजेंसी ने कहा, “पति-पत्नी ने जुलाई, 2015 में रमजान के दौरान पडन्ना और कासरगोड में आईएस और जिहाद का समर्थन करने के लिए सिक्रेट क्लासेस आयोजित की थीं। सेबस्टियन इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट हैं।

आईएस से खासा प्रभावित एक अन्य महिला मेरिन जैकब उर्फ मरियम की शादी पलक्कड़ निवासी बेस्टिन विंसेंट से हुई थी। दोनों 2016 में आईएस के नियंत्रण वाले इलाके में रहने के लिए अफगानिस्तान भाग गए थे। इस जोड़े ने अपनी शादी के बाद इस्लाम धर्म अपना लिया और विंसेंट याह्या के नाम से जाने जाने लगा। विन्सेंट को बाद में अफगानिस्तान में मार दिया गया था। विन्सेंट का भाई बेक्सन और उसकी पत्नी निमिशा उर्फ फातिमा भी उनके साथ अफगानिस्तान भाग गए थे। इन दोनों ने भी इस्लाम धर्म अपना लिया था।

रफाएला की शादी कासरगोड के 37 वर्षीय डॉक्टर इजस कल्लुकेतिया पुराइल से हुई थी। यह आईएस के सदस्यों में से एक था। इसने अगस्त 2020 में पूर्वी अफगानिस्तान के जलालाबाद की एक जेल में धावा बोल दिया था। हमले में लगभग 30 लोग मारे गए थे।

उत्तर प्रदेश के 40 लाख अन्नदाताओं को योगी सरकार की सिंचाई योजना से मिलेगा लाभ, ₹1,249 करोड़ की परियोजना

उत्तर प्रदेश के किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिंचाई परियोजनाएँ शुरू की हैं। इसके तहत प्रदेश सरकार ने अगले साल तक 16.49 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचित करने का लक्ष्य रखा है। इससे प्रदेश के करीब 40.56 लाख किसानों को लाभ पहुँचने की बात कही जा रही है।

इस योजना को योगी सरकार ने इसी साल जनवरी के महीने में लागू किया था। दैनिक जागरण की 26 जनवरी 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक, योगी कैबिनेट ने विभिन्न बाँधों के सुधार और पुनर्वास के लिए 1,249 करोड़ रुपए की परियोजना को स्वीकृत करके भारत सरकार को भेजा गया था।

प्रदेश सरकार की सिंचाई परियोजना में उत्तराखंड के 4 और यूपी के 39 बाँधों को शामिल किया गया है। इसके अलावा उत्तराखंड की सीमा में आने वाली 24 छोटी नहरों के देखरेख का जिम्मा वहाँ की सरकार को दे दिया गया था। हालाँकि, इसका स्वामित्व यूपी सरकार के पास ही रहेगा।

इस सिंचाई परियोजना को सरयू नहर, उमरहा, रतौली, लखेरी, भावनी, मसगाँव, चिल्ली, बड़वार झील और बबीना आदि के जरिए मूर्त रूप दिया जाएगा। वैसे तो इन सिंचाई परियोजनाओं से सभी क्षेत्रों (पूर्वांचल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड) के किसानों को फायदा होगा, लेकिन इससे सबसे ज्यादा फायदा बुंदेलखंड के किसानों को होगा।

उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर एके सिंह के मुताबिक, प्राथमिकताओं के आधार पर प्रदेश सरकार ने एक मार्च 2020 से 31 मार्च 2021 के दौरान रसिन बांध परियोजना (चित्रकूट), बंडई बांध परियोजना (ललितपुर) को पूरा किया। इनसे इन जिलों में 2,290 और 3,025 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि की सिंचाई हुई है। जाखलौन पंप कैनाल (ललितपुर) के टॉप पर 2.50 क्षमता के सोलर प्लांट से बिजली का उत्पादन भी हो रहा है।

मुख्य अभियंता के मुताबिक, आगामी दिनों में बुंदेलखंड की चिल्ली, कुलपहाड़ और शहजाद जैसी परियोजनाएँ प्रदेश के लिए मॉडल बनेंगी।

एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 11 मार्च 2021 को बुंदेलखंड के दौरे के दौरान महोबा जिले में अर्जुन सहायक सिंचाई परियोजना के अंतर्गत बन रहे लहचुरा बाँध का निरीक्षण करने के बाद कहा था कि 2,600 करोड़ रुपए की लागत से बन रही यह परियोजना बाँदा, महोबा और हमीरपुर के किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी। उन्होंने कहा था कि इससे इन तीनों जिलों के 168 गांवों के 1.5 लाख किसानों को लाभ मिलेगा।

उन्होंने यह भी कहा था कि इस परियोजना से करीब 4 लाख लोगों को पीने का शुद्ध पानी मिलेगा और 15 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की सुविधा मिलेगी। इस परियोजना के तहत सिंचाई क्षमता को 44,382 हेक्टेयर तक बढ़ाया जाएगा।

नहीं मिली मछली की मुंडी तो चल गई कुर्सियाँ, बारात में हुई ताबड़तोड़ मारपीट में 11 लोग घायल हो पहुँचे अस्पताल

कोई भी समारोह हो और वहाँ खाने की शानदार व्यवस्था हो जाए तो समारोह में चार चाँद लग जाते हैं लेकिन अगर वहीं खाने की व्यवस्था न हो या खाने में स्वाद ही न हो तो पूरा माहौल खराब हो जाता है। ऐसा ही एक मामला बिहार के गोपालगंज से सामने आया है जहाँ शादी समारोह में मछली की मुंडी परोसने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया और विवाद इतना बढ़ गया कि 11 लोग आपस में लड़कर लहूलुहान हो गए और बात पुलिस तक पहुँच गई।

तो घटना कुछ इस तरह है:

गोपालगंज के भोरे थाना क्षेत्र के सिसई टोला के भटवलिया गाँव में गुरुवार (10 जून) को छठू गोंड के यहाँ बारात आई हुई थी। छठू ने बाकायदा शादी समारोह के लिए मछली और चावल की व्यवस्था कराई थी। छठू के ही किसी रिश्तेदार सुदामा गोंड ने बताया कि राजू गोंड और मुन्ना गोंड मेहमानों को मछली परोस रहे थे। इसी बीच पड़ोसी अजय गोंड और अभय गोंड अपने खासम-खास मेहमानों को लेकर आए और उन्हें खाने के लिए बैठा दिया।

पहले राउंड में तो उन्हें मछली के दो-दो पीस मिल गए लेकिन उन्हें तो मछली की मुंडी चाहिए थी। फरमाइश की गई, लेकिन किसी कारणवश उन्हें मछली की मुंडी नहीं मिल पाई। अब जब पसंद का भोजन न मिले तो पारा ऊपर चढ़ ही जाता है। मछली की मुंडी न दिए जाने पर राजू और मुन्ना की पिटाई कर दी गई। जब तक छठू और घर के समझदार लोग पहुँचते, यहाँ कुर्सियाँ चलने लगी थीं। कुर्सियाँ चली भी तो इतनी कि दोनों पक्षों से कुल 11 लोग घायल हो गए।

एक पक्ष से घायल हुए अजय गोंड, अभय गोंड, राजा गोंड, हीरालाल गोंड और सुदामी देवी एवं दूसरे पक्ष से घायल हुए सुदामा गोंड, मुन्ना गोंड, अमित गोंड, राजू गोंड व सरली देवी। दोनों पक्षों में नाराजगी इस हद तक बनी रही कि वो एक ही अस्पताल में भर्ती भी नहीं हुए। एक पक्ष के घायलों को ले जाया गया भोरे के रेफरल अस्पताल और दूसरे पक्ष के घायल पहुँचे सदर अस्पताल।

भला हो गाँव के समझदार लोगों का जिन्होंने मामला शांत कराया लेकिन बात पुलिस तक पहुँच चुकी है। पुलिस ने बताया कि घायलों ने इलाज के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और पुलिस भी अलग-अलग बयान लेकर प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई कर रही है।

‘आग लगाओ आग’: मेवात में जुनैद की मौत के बाद भीड़ ने किया पुलिस पर हमला; लाठी-डंडे-पत्थर फेंकने के बाद लगाई आग

हरियाणा के मेवात में पुलिस कस्टडी में एक युवक की मौत के बाद समुदाय विशेष के लोगों ने पुलिस पर हमला बोल दिया। मृतक के परिजनों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर पुलिस पर पथराव किया, गाड़ी में तोड़फोड़ की और बाद में उसमें आग लगा दी।

दरअसल, 2 हफ्ते पहले जुनैद नाम के शख्स को फरीदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच ने धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया था। मगर, पुलिस द्वारा कस्टडी में लिए जाने के बाद उसकी मौत हो गई। युवक की मौत से गुस्साए लोगों ने पलवल-होडल रोड जाम कर दिया और जब पुलिस वहाँ जाम को खुलवाने पहुँची तो उन पर हमला कर दिया गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस कर्मियों को देखते ही जाम लगाने वाले लड़कों ने उनके वाहनों को क्षतिग्रस्त किया। उसके बाद पुलिस वाहन में आग लगा दी। हालात देख अन्य थाने की पुलिस टीम मौके पर बुलाई गई। कहा जा रहा है कि पुलिस अधिकारियों के समझाने के बाद भीड़ में शामिल लोग सड़क खाली करने को तैयार नहीं हैं। 

ग्रामीणोंं का आरोप है कि पुलिस कर्मियोंं ने युवक को दो दिन तक अवैध हिरासत में रख उसके साथ मारपीट की और बाद में परिजनों से पैसे लेकर उसे छोड़ा। लेकिन थर्ड डिग्री मिलने से जुनैद की मौत हो गई। स्थानीय रिपोर्ट्स बताती हैं कि जुनैद के दो सगे भाई अब भी फरीदाबाद पुलिस की हिरासत में हैं। परिजन कह रहे हैं कि वह बेगुनाह हैं और उन्हें छोड़ा जाए।

मामले के संबंध में सुदर्शन पत्रकार गौरव मिश्रा ने ट्वीट किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को टैग करते हुए पूछा कि आखिर मेवात के हालात कब बदलेंगे। ट्वीट में बताया गया है, “मेवात में आज जुनैद के मौत के बाद पुलिस वालों को शांतिदूतों ने मारा पीटा थाने को आग के हवाले कर दिया पुलिस की गाड़ियों को तोड़ा फोड़ा गया।” 

वीडियो में देख सकते हैं कि बीच रोड पर भीड़ बेकाबू हो गई है। पुलिस की गाड़ी पर लाठी डंडों और पत्थरों से वार हो रहा है। गाली दे देकर लुंगी पहने लोग उस पर लात मार रहे हैं। कई किशोर गाड़ी पर पत्थर फेंक रहे हैं। बीच में आवाज भी आती है- आग लगाओ आग।

गौरतलब है कि हरियाणा का मेवात पिछले साल से चर्चा में है। अभी हाल में ये मेवात आसिफ की मॉब लिंचिंग की वजह से चर्चा में आया था। उससे पहले वहाँ गौ तस्करी और हिंदुओं पर अत्याचार की घटनाओं के कारण मेवात सुर्खियों में था।