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‘भूमाफिया राकेश टिकैत ने कब्ज़ा ली 3 बीघा जमीन, रात भर में तबाह करवा दी फसल’: महिला ने CM योगी से लगाई न्याय की गुहार

भारतीय किसान यूनियन (BKU) के अध्यक्ष नरेश टिकैत के भाई राकेश टिकैत के खिलाफ एक महिला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई है। पिछले 6 महीने से दिल्ली की सीमा पर ‘किसान आंदोलन’ के बहाने जमे राकेश टिकैत ने हाल ही में हुए 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ प्रचार किया था। पीड़ित महिला ने राकेश टिकैत और उनके बेटे चरण सिंह को ‘भूमाफिया’ बताते हुए जमीन पर कब्ज़ा करने के आरोप लगाए हैं।

आरोप है कि पिता-पुत्र ने मिल कर मुजफ्फरनगर में एक किसान की लाखों की जमीन पर न सिर्फ अवैध कब्जा किया, बल्कि खेत में खड़ी फसल को तहस-नहस भी कर डाला। पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई है कि वो कड़ी कार्रवाई करें। शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित किनौनी गाँव की सुशीला देवी और उनके बेटे विनीत बालियान ने कहा कि उनकी 3 बीघा से अधिक जमीन रेलवे अधिग्रहण में आ गई थी।

इसके बाद राकेश टिकैत और उनके बेटे चरण सिंह ने रविवार (मई 30, 2021) की रात उनके खेत पर अवैध कब्जा करते हुए उसमें खड़ी फसल को तबाह करवा दिया। ‘Zee News’ की खबर के अनुसार, पीड़ित परिवार ने कहा, “राकेश टिकैत किसान नेता नहीं बल्कि बहुत बड़े भूमाफिया हैं। वो छोटे किसानों की जमीनों पर जबरन कब्ज़ा कर लेते हैं।” महिला ने कहा कि जिला प्रशासन से लगातार गुहार लगाए जाने के बावजूद पिता-पुत्र के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

हालाँकि, ये पहली बार नहीं है जब राकेश टिकैत विवादों में आए हों। ब्राह्मण समाज पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर सनातन धर्म के खिलाफ जहर फैलाने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ फरीदाबाद में शिकायत दर्ज कराई गई थी और केस दर्ज करने की माँग की गई थी। शिकायत में कहा गया था कि वो लोगों की धार्मिक भावनाओं को भड़का कर सरकार के खिलाफ लोगों को इस आंदोलन में जोड़ना चाहते हैं।

पिछले दिनों दिल्ली बॉर्डर से तस्वीर आई थी कि वहाँ कोविड नियमों को ताक पर रखकर इफ्तार पार्टी का आयोजन हुआ और अब खबर है कि राकेश टिकैत का जन्मदिन भी गाजीपुर बॉर्डर पर ही मनेगा। नरेश टिकैत इसके लिए दिल्ली बॉर्डर पर आएँगे। उन्होंने 11 क्विंटल रसगुल्ले भी बनवाए हैं। सिसौली क्षेत्र के आसपास के गाँवों के किसानों ने तो उनके जन्मदिन को एक उत्सव के रूप में मनाने की योजना बनाई है।

हेमकुंट फाउंडेशन ने कोविड सेंटर के बहाने प्रदर्शनकारी किसानों को किया राशन सप्लाई, खाली करने को कहने पर प्रताड़ना का रोया रोना

कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच गुरुग्राम के सेक्टर 61 में हेमकुंड फाउंडेशन द्वारा स्थापित एक अस्थायी कोविड केयर सेंटर को गोदाम में बदलकर आंदोलनकारी ‘किसानों’ को राशन पहुँचाने के आरोप में वहाँ से हटा दिया गया है। जिस जमीन पर यह अस्थायी कोविड केयर सेंटर था, वो जननायक जनता पार्टी के नेता की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हेमकुंट के सामुदायिक विकास निदेशक हरतीरथ सिंह द्वारा कोविड केयर सेंटर स्थापित करने के लिए 20,000 वर्ग फुट जमीन माँगे जाने के बाद इस विवादित एनजीओ को दो महीने के लिए यह जमीन लीज पर दी गई थी। हालाँकि, एनजीओ ने जल्द ही इस इस सेंटर को प्रदर्शनकारी ‘किसानों’ को राशन देने के लिए गोदाम में बदल दिया।

इस मामले मे टेंट हाउस संचालक जगत सिंह ने बताया, “हमने यह जमीन फाउंडेशन को केवल दो महीने के लिए एक अस्थायी कोविड केंद्र के लिए दी थी। कोरोना मामलों की सँख्या में गिरावट के कारण कई दिनों तक इसमें कोई मरीज नहीं था और जमीन मालिक ने उन्हें जमीन खाली करने के लिए कहा। फाउंडेशन के कुछ वॉलंटियर्स ने उनसे कहा कि वे किसानों को विरोध प्रदर्शन में राशन बाँट रहे हैं और हम उन्हें जमीन का उपयोग गोदाम के रूप में नहीं करने दे सकते। हमने चार दिन पहले फाउंडेशन को सूचित किया था लेकिन उन्होंने अभी तक खाली नहीं किया है।”

‘गुंडों’ ने कोरोना केयर सेंटर को नष्ट किया

हटाए जाने के बाद एनजीओ ने एक बयान जारी कर आरोप लगाया है, “हमें आपकी मदद की जरूरत है! गुड़गाँव में हमारा ऑक्सीजन सेंटर जबरन बर्बाद कर दिया गया है। हमारे सामानों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया है। लोगों की मदद करने के लिए हमें गुरुग्राम के सिटी सेंटर या उसके आसपास 20,000 स्क्वॉयर फिट जमीन की जरूरत है।”

एनजीओ ने दावा किया है कि लोगों के एक समूह ने हमारे सेंटर पर घात लगाकर हमला कर दिया था और लीज के दो महीने की सीमा पार करने को लेकर इसे नष्ट कर दिया। फाउंडेशन ने कथित तौर पर दावा किया है कि उसने इसके मेंटेनेन्स पर ₹3.5 लाख का भुगतान भी किया है। हालाँकि, घटना के बाद बादशाहपुर के एसडीएम सतीश यादव के नेतृत्व में पुलिस की एक टीम मौके पर पहुँची और स्थिति को शाँत करवाया। लेकिन, कोई केस नहीं दर्ज किया गया। एसडीएम ने बताया कि हम एनजीओ के मेंबर और जमीन के मालिक से बात कर रहे हैं और उन्हें जमीन खाली करने के लिए कुछ और समय देने के लिए कह रहे हैं, क्योंकि फाउंडेशन सामाजिक कार्य कर रहा है।

FCRA के नियमों का उल्लंघन कर रहा हेमकुंट फाउंडेशन?

इस मामले में 9 मई 2021 को ऑपइंडिया ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी कि कैसे कुछ संगठन और लोग कोरोना रिलीफ के नाम पर एफसीआरए कानूनों को तोड़ सकते हैं।

भारत सरकार के पास भारत में रजिस्टर्ड एनजीओ की एक डायरेक्टरी है। अधिकांश गैर सरकारी संगठनों ने सूची में अपने नाम शामिल करा लिए हैं क्योंकि यह एफसीआरए के लिए आवेदन करने की शर्तों में से एक है। हमने DARPAN पर हेमकुंट को काफी सर्च किया, लेकिन वह कहीं भी नहीं मिला। उसमें हमें हेमकुंट नाम का एक ही एनजीओ मिला, जो पंजाब में रजिस्टर्ड था। हम यह कह सकते हैं कि शायद फाउंडेशन ने DARPAN पर अपना रजिस्ट्रेशन नहीं कराया हो, लेकिन यह संस्था बीते 10 साल से सामाजिक कार्य कर रही है। लेकिन फिर भी उन्होंने DARPAN पर रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं कराया यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है।

हमें रिसर्च में पता चला है कि एनजीओ को केटो, मिलाप और डोनेटकार्ट जैसी क्राउडफंडिंग वेबसाइटों के जरिए विदेशी डोनर्स ने फंडिंग की है। खास बात यह है कि हेमकुंट फाउंडेशन ही है, जो खालसा एड के बाद दिल्ली के बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों के लिए काम करने वाले संगठनों में से एक था। प्रदर्शन करने वाले किसानों के लिए टेंट सिटी बनाने का काम इन्होंने ही किया था। हालाँकि, अभी यह पता नहीं चल सका है कि एनजीओ कोरोना राहत कार्य के नाम पर इकट्ठा धनराशि को अपने दूसरे प्रोजेक्ट पर तो नहीं लगा रहा है।

34 ट्विटर अकाउंट, सालाना खर्च ₹2 करोड़: निशाने पर BMC, बिना टेंडर के ही निजी कंपनी को ​दे दिया था कॉन्ट्रैक्ट

महाराष्ट्र में बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) के द्वारा अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के संचालन के लिए सालाना 2 करोड़ रुपए खर्च करने के निर्णय की जमकर आलोचना हो रही है। इन सोशल मीडिया अकाउंट्स में BMC के मुख्य ट्विटर अकाउंट @mybmc समेत कुल 34 ट्विटर अकाउंट शामिल हैं। इनमें से अधिकतर वैरिफाइड भी नहीं हैं।

इससे पहले उपमुख्यमंत्री अजित पवार के सोशल मीडिया अकाउंट्स को हैन्डल करने के लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा लगभग 6 करोड़ रुपए खर्च करने का फैसला किया गया था। आलोचना होने के बाद इस निर्णय को वापस ले लिया गया था। अब महाराष्ट्र की विभिन्न पार्टियों के नेता BMC द्वारा सोशल मीडिया अकाउंट्स के संचालन के लिए सालाना 2 करोड़ खर्च करने के निर्णय पर पुनर्विचार करने की माँग कर रहे हैं।

फोटो सोर्स : टाइम्स ऑफ इंडिया

बिना टेंडर के दे दी जिम्मेदारी

BMC ने 2019 में बिना टेंडर जारी किए S2 इंटरनेशनल लिमिटेड को अपने ट्विटर अकाउंट्स के संचालन के लिए 5.8 करोड़ रुपए का कॉन्ट्रैक्ट दे दिया था। यह कॉन्ट्रैक्ट जुलाई 2022 तक के लिए दिया गया था। इनमें BMC के मुख्य ट्विटर अकाउंट @mybmc समेत 34 ट्विटर अकाउंट हैं। इन 34 ट्विटर अकाउंट में 24 वार्डों और अन्य विभागों के अकाउंट भी शामिल हैं। हालाँकि 12 फरवरी को एक रिपोर्ट आई थी कि इन 34 एकाउंट्स में 12 तकनीकी कारणों से निष्क्रिय थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक BMC प्रमुख ने कहा कि यह ट्विटर अकाउंट BMC के न्यूज सोर्स की तरह कार्य करते हैं और लोगों में जागरूकता और सूचनाओं को पहुँचाने में उपयोगी हैं। BMC प्रमुख ने यह भी बताया कि इन सोशल मीडिया अकाउंट्स के उपयोग के लिए स्टैन्डिंग कमेटी ने अप्रूवल दिया। हालाँकि इस पर प्रश्न उठाते हुए सपा विधायक रईस शेख ने कहा कि एक ओर मुंबई पुलिस का मात्र एक ट्विटर हैंडल है, जबकि BMC के 34, ऐसे में खर्च भी बढ़ता है और उलझन भी उत्पन्न होती है।

यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि 13 मई को महाराष्ट्र सरकार ने Covid-19 महामारी और उसके कारण उत्पन्न आर्थिक तंगी के बावजूद भी उपमुख्यमंत्री अजित पवार के सोशल मीडिया अकाउंट्स के संचालन और उनकी छवि सुधारने के लिए 6 करोड़ रुपए खर्च करने का निर्णय लिया था। हालाँकि इस निर्णय की आलोचना होने के बाद अजित पवार ने खुद यह निर्णय रद्द करने का फैसला किया।

‘हिंदुत्व ठगों’ को धमकी, भगवा व स्वस्तिक का अपमान: जो राकेश पंडिता के हत्यारों की भाषा, लेफ्ट और विपक्ष की वही है बोली

जम्मू कश्मीर के त्राल में भाजपा नेता राकेश पंडिता की हत्या कर दी गई। अभी एक साल भी पूरे नहीं हुए, जब जून 2020 में अनंतनाग में सरपंच अजय पंडिता की हत्या की गई थी। अजय कॉन्ग्रेस के नेता थे, राकेश भाजपा के हैं। जम्मू कश्मीर में इस्लामी आतंकियों के लिए पार्टी मायने नहीं रखती, बल्कि धर्म मायने रखता है। अगर आप हिन्दू हैं और अपने धर्म पर गर्व करते हैं, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने अच्छे इंसान हैं।

कश्मीरी पंडितों के लिए ये सब नया नहीं है। हैरान कर देने वाली बात ये है कि ये सब कुछ उस नए जम्मू कश्मीर में हो रहा है, जहाँ अनुच्छेद-370 के प्रावधानों के लिए अब कोई जगह नहीं है। ये सब उस जम्मू कश्मीर में हो रहा है, जहाँ सेना और पुलिस लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ उनकी भलाई के लिए भी काम करते हैं। उस जम्मू कश्मीर में हो रहा है, जहाँ सत्ता अब उन आतंकियों के प्रति नरम रुख रखने वाले अब्दुल्लाह या मुफ़्ती परिवार के पास नहीं है।

दक्षिण कश्मीर के त्राल में राकेश पंडिता की हत्या की जिम्मेदारी आतंकी संगठन ‘लश्कर-ए-तैय्यबा’ के मुखौटा संगठन ‘पीपल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट’ ने ली है। आपके लिए ये जानना ज़रूरी है कि संगठन ने इस हत्याकांड की जिम्मेदारी लेते हुए किन शब्दों का प्रयोग किया है। उसने अपने ‘प्रेस रिलीज’ में कहा है कि उसके कैडर ने ‘हिन्दू फासिस्ट राकेश पंडिता को न्यूट्रलाइज कर दिया।’ आतंकी संगठन ने दावा किया कि पंडिता मुखबिरों का एक नेटवर्क तैयार कर रहे थे।

साथ ही उन पर ड्रग्स की तस्करी से लेकर अन्य ‘अनैतिक क्रियाकलापों’ में लिप्त होने का भी आरोप लगाया। PAFF ने अपनी ‘प्रेस रिलीज’ में कहा, “अगर हिंदुत्व ठग सोचते हैं कि उनके दुष्ट इरादे कश्मीर में जड़ जमा लेंगे तो वो बहुत बड़े भ्रम में जी रहे हैं। उनकी हर एक गतिविधि पर हमारी नजर है और हम समुचित तरीके से उनसे निपटेंगे।” इस ‘प्रेस नोट’ में स्वस्तिक वाले भगवा झंडे में तीर मारते हुए भी प्रदर्शित किया गया है।

आतंकी संगठन ने अपनी ‘प्रेस रिलीज’ में ‘हिंदुत्व’ को ठहराया जिम्मेदार

ये काफी डरावना है। क्या ये वही भाषा नहीं है, जिसका सहारा लेकर भारत के विपक्षी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर निशाना साधते रहे हैं? क्या ये वही भाषा नहीं है, जिसका इस्तेमाल कर के हिन्दुओं को नीचा दिखाया जाता रहा है? अगस्त 2018 में कॉन्ग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा था कि वो हिंदुत्व के किसी भी रूप में विश्वास नहीं रखते हैं। उन्होंने कहा था कि सॉफ्ट या हार्ड हिंदुत्व में उनका कोई भरोसा नहीं है।

क्या हिंदुत्व सचमुच में एक ऐसा शब्द है, जो आतंकवाद का पर्यायवाची है? वीर सावरकर ने इसकी परिभाषा देते हुए कहा था कि प्रत्येक व्यक्ति जो सिन्धु से समुद्र तक फैली भारत भूमि को साधिकार अपनी पितृभूमि एवं पुण्यभूमि मानता है, वह हिन्दू है। आतंकवादियों के लिए भारत को अपना देश मानना गलत हो सकता है, लेकिन भारत के मुख्यधारा की राजनीति से जुड़े लोग अगर इस तरह की बयानबाजी करें तो इसका अर्थ है कि उनकी और आतंकियों की भाषा व सोच समान है।

भारत में भी वामपंथी दल हैं, जो यही सोच रखते हैं। कोरोना काल में भी CPI(M) जैसे दल इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल करते रहे। इस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को ‘कोरोना कुप्रबंधन’ के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इसका कारण ‘हिंदुत्व दृष्टिकोण’ है। अर्थात, कोरोना के कारण लोगों की मौत के लिए हिंदुत्व को दोष दे दिया गया। पार्टी ने ‘हिंदुत्व ड्रामा’, ‘हिंदुत्व नासिका’ और ‘हिंदुत्व दृष्टिकोण’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया।

इसी तरह CPI ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपराध के लिए भी ‘हिंदुत्व समूहों का घृणास्पद अभियान’ को जिम्मेदार ठहराया। हिंदुत्व को एक जहरीला प्रोपेगंडा करार दिया। अगर कहीं कोई मुस्लिम मरता है तो इसके लिए ‘हिंदुत्व’ दोषी है – ये बात लोगों के मन में भरी गई। अगर इसी सोच से प्रभावित होकर कोई आतंकवादी बन जाए और हिन्दुओं की हत्या करने लगे तो ऐसे दलों की मंशा सफल होती दिखती है।

फासिस्ट – ये एक ऐसा शब्द है जिसे सामान्य बना दिया गया है। अब आतंकी भी उसी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। शाहीन बाग़ आंदोलन और CAA विरोधी अभियान में नरेंद्र मोदी को न जाने कितनी बार फासिस्ट कहा गया होगा। स्वस्तिक का अपमान तो वहाँ भी हुआ था। स्वस्तिक का अपमान आतंकी भी अपनी ‘प्रेस नोट’ में कर रहे हैं। गीतकार जावेद अख्तर ने पीएम मोदी को फासिस्ट कहा। पाकिस्तानी अख़बार Dawn ने भी इस भाषा का इस्तेमाल किया।

यहाँ तक कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी एक तस्वीर शेयर की थी, जिसमें एक व्यक्ति झाड़ू से स्वस्तिक को मार रहा था। पत्रकार सबा नकवी ने सोशल मीडिया पर स्वस्तिक के टुकड़े-टुकड़े होने वाली तस्वीर शेयर की। घृणा फैलाते-फैलाते अब यही हरकतें लाशें गिराने का माध्यम भी बन रही हैं। AltNews जैसे मीडिया संस्थान ने स्वस्तिक को लेकर गलत सूचनाएँ फैलाईं। उसने स्वस्तिक के अपमान को ढकने की कोशिश की थी।

तथाकथित इतिहासकार रामचंद्र गुहा से लेकर वामपंथी दलों तक ने उन्हें फासिस्ट कहा। अब हिन्दुओं को फासिस्ट कह कर मारा जा रहा है। हिटलर ने 60 लाख यहूदियों की बेरहम तरीके से हत्या कराई थी। क्या किसी हिन्दू पर किसी मुस्लिम को थप्पड़ मारने का झूठा आरोप भी लग जाए तो इसके लिए उसकी तुलना 60 लाख लोगों के हत्यारे से कर दी जाएगी? इसे ही नैरेटिव गढ़ना कहते हैं। यहाँ लोग तथ्य को नज़रअंदाज़ कर भाषा पकड़ते हैं।

ये भाषा खूनी हो जाती है और इसके दुष्परिणाम हिन्दुओं को भुगतने पड़ते हैं। कभी राकेश पंडिता को, कभी अजय पंडिता को। अगर आज कोई ऐसा आतंकी संगठन ऐसा कह रहा है कि उसकी ‘हिंदुत्व ठगों’ की हर एक गतिविधि पर नजर है, तो ये खतरे से खाली नहीं है। 56 वर्षीय राकेश पंडिता अपने सुरक्षा गार्ड्स को छोड़ कर ही जम्मू गए थे। फिर वो त्राल में अपने दोस्त मुस्ताक अहमद से मिलने गए।

उन पर नजर रखी जा रही थी, तभी तो सुरक्षा गार्ड्स को न पाकर उनकी हत्या कर दी गई। किसी ग्रामीण ने ही उनकी मुखबिरी की थी, ऐसा उनके करीबियों द्वारा शक जताया जा रहा है। जम्मू कश्मीर भाजपा इसे पाकिस्तान की करतूत बता रही है। लेकिन, असली दोषी यहाँ के ही वो नेता और मीडिया समूह हैं, जो हिंदुत्व को बार-बार ‘आतंकवाद’ के पर्यायवाची के रूप में प्रयोग में लाते हैं। हिन्दुओं को बदनाम कर के उनके खिलाफ लोगों को बरगलाते हैं।

किसी अच्छी चीज को भी हजार लोग हजार जगह हजार बार गाली दें तो लोगों को लगने ही लगेगा कि इसमें कुछ न कुछ खोट है। ‘हिंदुत्व’ को लेकर यही किया जा रहा है, जहाँ पाकिस्तान, इस्लामी आतंकी, लेफ्ट और कुछ विपक्षी नेता एक ही पन्ने पर हैं। ‘मॉब लिंचिंग’ के अफवाह से लेकर हिन्दू प्रतीकों के अपमान तक, उन्होंने ब्रेनवॉश कर के लोगों, खासकर मुस्लिमों के मन में ये बिठाया है कि उनकी हर समस्या के लिए हिन्दू ही दोषी हैं।

राकेश पंडिता के बेटे पारस ने पिता की मौत के पीछे किसी साजिश की संभावना से इनकार नहीं किया और कहा, ”जब उनकी डेथ हुई थी तो उससे पहले उन्होंने मुझे फोन किया था, अब जब मैं सोच रहा हूँ तो लग रहा है कि उन्हें पता था कि ऐसा कुछ होने वाला है। धोखा दिया या क्या पता किसी ने मिलीभगत की हो।” राकेश पंडिता की पत्नी ने कहा कि कश्मीरी पंडिता यहाँ के कट्टरपंथियों को खटकते हैं, इसीलिए उनके पति की हत्या कर दी गई। उनके अनुसार, कट्टरपंथी कहते थे कि त्राल में कई लोग ऐसे थे जो कहते थे कि मुस्लिम ही अध्यक्ष बनेगा हिंदू नहीं।

महाराष्ट्र: कोरोना से मौतों का आँकड़ा एक लाख के पार, आधी से ज्यादा मौतें दूसरी लहर के दौरान, देश की कुल मौतों का 30%

कोरोना वायरस की दूसरी लहर बेहद घातक साबित हो रही है। देश भर में महाराष्ट्र इस महामारी से सबसे अधिक प्रभावित होने वाला राज्य है। राज्य में कोरोना से मरने वालों की संख्या 1 लाख को पार कर गई है। यह देश में कोरोना से हुई कुल मौतों के 30 फीसदी के बराबर है। गुरुवार (3 जून 2021) को महाराष्ट्र में कोरोना से 650 नई मौतें दर्ज की गईं, जिससे यह आँकड़ा एक लाख पार कर गया है। इसमें 2800 से अधिक वे मौतें भी शामिल हैं, जिन्हें राज्य ने अन्य बीमारियों के कारण होने वाली मौतों का नाम दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य में कोरोनो संक्रमण से अब तक (3 जून 2021) कम से कम 100233 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से लगभग आधी मौतें दूसरी लहर के दौरान यानी 15 फरवरी के बाद हुई हैं। कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप अभी भी जारी है।

अभी भी देश भर में कोरोना से हो रही मौतों में से फीसदी अकेले महाराष्ट्र में हो रही हैं। कुल मिलाकर भारत में अब तक 3.4 लाख से अधिक कोरोना वायरस से संबंधित मौतों में राज्य का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा है। महामारी की शुरुआत से ही यह अनुपात लगभग स्थिर बना हुआ है।

महाराष्ट्र में मुंबई, पुणे में कोरोना से सर्वाधिक मौतें

रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे में सबसे ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं। मुंबई में मरने वालों की संख्या 15000 के करीब है, जबकि पुणे में 12700 लोग कोरोना से अपनी जान गँवा चुके हैं। वहीं, ठाणे में 8000 से अधिक और नागपुर में 6500 से अधिक लोगों की कोरोना के कारण मौत हो चुकी है।

यही नहीं, महाराष्ट्र में कोरोना के मामले देश भर में सबसे अधिक हैं। अब तक लगभग 58 लाख लोग कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। वहीं, राज्य में कोरोना से सबसे अधिक मौतें दर्ज हुई हैं। हालाँकि, कोरोना मृत्यु दर में महाराष्ट्र की स्थिति पंजाब की तुलना में ठीक है।

देश के कुल कोरोना मामलों में पंजाब का दो फीसदी हिस्सा है, लेकिन संक्रमण से होने वाली मौतों में उसका योगदान 4.5 फीसदी है। पंजाब में अब तक 15000 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य में सबसे अधिक केस-फेटलिटी रेशियो (case fatality ratios या CFR) भी है। यहाँ कोरोना मृत्यु दर 2.58 है। यह इकलौता ऐसा राज्य है, जहाँ यह दर 2 से अधिक है। महाराष्ट्र में यह दर 1.73 है, जबकि भारत की कोरोना मृत्यु दर केवल 1.31 है।

बता दें कि महाराष्ट्र में इन दिनों होने वाली मौतों में से आधे से अधिक वे हैं जो कम से कम एक सप्ताह पहले हुई थीं। उदाहरण के लिए गुरुवार (3 जून 2021) को रिपोर्ट की गई 654 मौतों में से केवल 307 पिछले एक हफ्ते में हुई थीं। इसके अलावा, शेष वे मौतें थीं जो बहुत पहले हुई थीं, लेकिन अभी तक उनकी गिनती नहीं की गई थी।

देश में कोरोना संक्रमण की वजह से अब तक 340702 लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें सबसे अधिक 100233 महाराष्ट्र में, 30531 कर्नाटक में, तमिलनाडु में 25665, दिल्ली में 24447 कोरोना मरीजों की मौत हो चुकी है।

‘मोदी को मारना चाहता हूँ’: सलमान को पुलिस ने दबोचा तो कहा- जेल जाना चाहता था, वहीं मेरा मन लगता है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जान से मारने की धमकी देने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपित ने फोन कॉल के जरिए पीएम को मारने की धमकी दी थी। उसकी पहचान 22 वर्षीय सलमान के तौर पर हुई है। सलमान ने कॉल पर पीएम मोदी को मारने की इच्छा जाहिर की थी।

सलमान ने पुलिस को कल रात पीसीआर 112 पर कॉल करके कहा, “मैं मोदी को मारना चाहता हूँ।” इस कॉल के बाद पुलिस ने पड़ताल शुरू की और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के खजूरी खास इलाके से कॉल करने वाला गिरफ्तार हुआ। पूछताछ में उसने बताया कि उसने इस तरह की बात इसलिए कही क्योंकि वह जेल जाना चाहता था।

पुलिस ने छानबीन की तो पता चला कि सलमान पर पहले ही कई मुकदमे दर्ज हैं और इस समय वह बेल पर बाहर था। उसे वापस जेल जाने की इच्छा हुई इसलिए उसने पुलिस को फोन करके ऐसी धमकी दी। जब उससे पूछा गया कि वो जेल क्यों जाना चाहता है तो उसने कहा, “वहीं मेरा मन लगता है।”

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने बताया कि चूँकि मामला पीएम मोदी से जुड़ा हुआ है इसलिए इस विषय पर खुफिया एजेंसी के अधिकारी भी आरोपित से पूछताछ करेंगे। कुछ रिपोर्ट्स बतताती हैं कि उसने गुरुवार (जून 4, 2021) रात पुलिस को कॉल करने से पहले स्मैक ली हुई थी। इसके अलावा रात के 10 बजे उसके पिता ने भी उसे डाँटा था।

बता दें कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक और शख्स ने जान से मारने की धमकी दी थी। नवंबर 2020 में भी दिल्ली पुलिस को एक कॉल आया था। कॉल करने वाले ने पुलिस से कहा था कि वो प्रधानमंत्री को जान से मार देगा। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया था। पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि नशे में यह हरकत की थी।

इसके अलावा अगस्त 2020 को नोएडा पुलिस ने एक शख्स को गिरफ्तार किया था। आरोपित ने 100 नंबर पर फोन करके पीएम मोदी को जान से मारने की धमकी दी थी। पुलिस ने तुरन्त युवक का कॉल ट्रेस किया और नोएडा के ममूरा से उसे गिरफ्तार किया था। इस युवक ने भी नशे की हालत में पुलिस को फोन करके प्रधानमंत्री को जान से मारने की धमकी दी थी।

इजरायल में खिचड़ी सरकार के आसार, पर नेतन्याहू से भी टाइट हैं अरबपति बेनेट: बच्चों से कह दिया- सबसे ज्यादा तुम्हारे पिता से घृणा…

इजरायल में वर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की विदाई लगभग तय हो चुकी है। सबसे ज्यादा समय तक (12 वर्ष) सत्ता में बने रहने वाले नेतन्याहू विपक्षी पार्टियों के बीच गठबंधन की घोषणा के बाद अब संभवतः देश का नेतृत्व नहीं कर पाएँगे। पिछले कुछ वर्षों से इजरायल में राजनैतिक अस्थिरता का माहौल था और कोई भी पार्टी बहुमत हासिल नहीं कर पाई थी। ऐसे में इजरायल की विपक्षी पार्टियों ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को हटाने के लिए एक साथ आने का फैसला किया है।

बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी पर भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं जिनकी जाँच चल रही है। हालाँकि नेतन्याहू हर बार अपने ऊपर लगे आरोपों को नकारते रहे हैं। लेकिन अब इजरायल की 8 विपक्षी पार्टियों ने उनके खिलाफ लामबंद होने का निर्णय लिया है। इनमें दक्षिणपंथी विचारधारा वाले नेफ्ताली बेनेट और मध्यमार्गी (सेंट्रिस्ट) विचारधारा वाले यायर लैपिड समेत 6 अन्य पार्टियों के नेता शामिल हैं। दक्षिणपंथी नेफ्ताली बेनेट, इस नए गठबंधन के सत्तासीन होने के बाद प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।

अरबपति बेनेट को नेतन्याहू से भी सख्त माना जाता है। वह वेस्ट बैंक पर इजरायल के एकाधिकार का सपना रखते हैं। सरकार बनाने के लिए दक्षिणपंथी, वामपंथी और मध्यमार्गी दलों के एक साथ आने के फैसले का बचाव करते हुए उन्होंने इसे देश के लिए जरूरी बताया है। बकौल बेनेट उन्होंने अपने बच्चों भी कह दिया है कि इसके कारण वे इजरायल में शायद सबसे ज्यादा घृणा करने वाले व्यक्ति होंगे, लेकिन यह देश के ​हित में हैं।

इजरायल के वर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को पद से हटाने के लिए विपक्षी पार्टियों ने जो गठबंधन किया है उसमें, लैपिड की येश अतीद, ब्लू एण्ड व्हाइट पार्टी, दक्षिणपंथी येमिना, न्यू होप, मेरेत्ज पार्टी, लेबर पार्टी, यिसरायल बेतेनु और अरब रा’अम शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इजरायल की इन विपक्षी दलों के पास गठबंधन निर्णय लेने के लिए बुधवार तक का समय था। अंततः विपक्षी दलों ने समय सीमा समाप्त होने के 35 मिनट पहले इजरायल के राष्ट्रपति रोएवन रिवलिन को ईमेल लिखकर गठबंधन सरकार बनाने की सूचना दी। विपक्षी दलों ने यह दावा किया है कि गठबंधन के पास बहुमत का आवश्यक (62 सदस्य) आँकड़ा है। इजरायल की 120 संसद सदस्यों वाली नेसेट (Knesset) में सरकार बनाने के लिए बहुमत का आँकड़ा 61 है, अर्थात विपक्ष के दावे के अनुसार उनका गठबंधन आराम से सरकार बनाने में सफल रहेगा।

गौरतलब है कि पिछले 2 सालों में इजरायल में 4 बार राष्ट्रीय चुनाव हुए लेकिन कोई भी पार्टी बहुमत हासिल करने में असफल रही। हालाँकि मार्च 2020 के चुनावों के बाद बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने बैनी गैंत्ज की ब्लू एण्ड व्हाइट पार्टी के साथ गठबंधन कर सरकार बनाई। दिसंबर 2020 में यह गठबंधन टूट गया।

उसके बाद मार्च 2021 में एक बार फिर इजरायल में चुनाव हुए जिनमें बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन एक बार फिर वह बहुमत हासिल करने में असफल रही। नेतन्याहू द्वारा बहुमत साबित करने में असफल रहने के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी येश अतीद को बहुमत साबित करने का निमंत्रण दिया गया था।    

हालाँकि यहाँ ध्यान देने की बात यह है कि इतनी राजनैतिक अस्थिरताओं के बाद भी इजरायल और हमास के हाल के संघर्ष के दौरान इजरायल में एक शानदार राजनैतिक सामंजस्य देखने को मिला। अल-जजीरा से बातचीत के दौरान विपक्ष के प्रमुख नेता नेफ्ताली बेनेट ने कहा था कि जब हमारे ऊपर सैकड़ों रॉकेट दागे जाएँगे तो हम एक साथ लड़ेंगे और जीतेंगे। बेंजामिन नेतन्याहू के समर्थन पर नेट ने स्पष्ट तौर पर कहा था,

“देखिए हम एक लोकतांत्रिक देश हैं और यह हमारे लिए गर्व की बात है। आलोचना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एक हिस्सा होती है पर हमारे इजरायल में एक तरह का अलिखित नियम है कि दुश्मन के साथ लड़ाई की बात पर हम एकसाथ खड़े रहते हैं। ऐसे में किसी को जरा भी संशय नहीं होना चाहिए, हम हमास के एक-एक कमांडर को खोज कर मारेंगे। उनके पीछे तब तक पड़े रहेंगे, जब तक हम जीत नहीं जाते।“      

5G इंटरनेट से भी फास्ट है एक्टिविज्म: इधर से पिटीशन डालो, उधर से तारीख लो – टूलकिट सेलेब्रिटी के लिए स्पेशल ऑफर

देश में 5G टेस्टिंग को रुकवाने के लिए जूही चावला ने मुकदमा दायर कर दिया। इन दिनों मुक़दमे कुछ न कुछ रुकवाने के लिए ही किए जा रहे हैं। सेंट्रल विस्टा से लेकर वैक्सीन ट्रायल और कानून से लेकर इन्वेस्टीगेशन तक, सब कुछ रुकवाने के लिए लोग अदालत पहुँच जाते हैं। कभी-कभी लगता है जैसे हज़ारों लोग ऐसी चीजों की लिस्ट बनाने में लगे हुए हैं जो चल रही हैं। लिस्ट बनाई जा रही हैं, मॉडिफाई की जा रही हैं, फाइनल की जा रही हैं, ड्राइव में डाली जा रही हैं। उद्देश्य वही एक; चलने वाली हर चीज को रुकवा देना है। जो चल रहा है, उसे रुकवाना है। जो दौड़ रहा है, उसका गीयर चेंज करवाना है। जिसने चलना नहीं शुरू किया है, उसके रास्ते में गड्ढा खुदवा देना है। 

लिस्ट भी इसी दर्शन के हिसाब से बन रही हैं। एक लिस्ट में ऐसी चीजें हैं, जो दौड़ रही हैं। दूसरी में ऐसी जो केवल चल रही हैं। तीसरी ऐसी चीजें की हैं, जो चलने वाली हैं। उनकी एक सब्सिडियरी लिस्ट हैं, जिसमें ऐसी चीजें हैं जो एक वर्ष बाद चल सकती हैं। डेटा इकट्ठे किए जा रहे हैं।

घुटे हुए आधा दर्जन साहबों के सामने टेबल पर लिस्टों की ढेर लगी है। साहब ने एक लिस्ट देखा और फिर चश्मे को पोंछा। फिर लिस्ट देखा और मन ही मन बोले; अच्छा, ये भी चल रहा है! हमने तो सोचा था कि ये चल नहीं पाएगा। चलने दो, कल ही पिटीशन डलवाता हूँ। देखूँगा कैसे चलता है। फिर उन्होंने आवाज़ लगाईं; अरे आहूजा, ये चलने वाली चीजों की नई लिस्ट है। एक काम कर, ये वह ड्रामा इन डेमोक्रेसी वाले परवेज़ को भेज। बोल लिस्ट में पहली जो तीन चीज है, उन्हें रोकवाने के लिए हाई कोर्ट में कल ही पिटीशन डलवाए। कोई जरूरत हो तो बताए। और हाँ, कुछ इधर-उधर करे तो याद दिला देना कि साला केवल नुक्कड़ नाटक खेलने के लिए सात साल तक PSU से CSR फंड्स लेकर गया है। उसमें से कितने का नाटक खेला है और कितने की नौटंकी, सब मुझे पता है।

साहब मन ही मन खुद को शाबाशी देते हुए आगे की लिस्ट पर बढ़ जाते हैं। लिस्ट देखते हुए कहते हैं; ये भी चल रहा है? इस सरकार को सब कुछ चलाना है। साले बेवकूफ हैं सब। जनता का भला करके ही मरेंगे। ठीक है, देखता हूँ बेटा कि कितने दिन चलते हो। अरे निकुंज, ये लिस्ट सितारा देवी को भेज और बोल कि अगले हफ्ते भर में चार पिटीशन फाइल करे। बोल कि अपनी एक्टिविस्ट वाली प्रोफाइल मीडिया में एक्टिवेट करवाए, केस की हियरिंग चार दिन के भीतर मैं तिवारी को बोलकर इंश्योर करवा दूँगा।

साहब के कमरे में रुका समय साहब को निहारे जा रहा है। 

खैर, मुक़दमे की सुनवाई में जूही चावला के किसी फैन ने गाना गा दिया। अब फैन है तो गाना ही गाएगा न, गाली थोड़े देगा। पर बेचारे का भाग्य देखिए कि गाना गाने के लिए अदालत ने अवमानना का नोटिस थमा देने की धमकी दे दी। फैन बेचारा मन ही मन सोच रहा होगा कि; गाना तो मीका और हनी सिंह भी गाते हैं, उन्हें तो कभी अदालत ने नोटिस थमाने की धमकी तो नहीं दी! घुटा हुआ फैन होता तो प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देता और कहता कि अवमानना के नोटिस की धमकी संगीत और कला पर हमला है। न्याय व्यवस्था पर सरकार ने कब्ज़ा कर लिया है और इस धमकी से कला का अपमान करवा रही है। एनजीओ का मालिक होगा तो गायका-धिक्कार के हनन के विरोध में अदालत के खिलाफ ऊँची अदालत में केस कर देगा। 

पर फैन लोगों की समस्या यह है कि वे बेचारे फैन ही हो सकते हैं, एक्टिविस्ट नहीं बन सकते। एक्टिविज्म केवल उनके अंदर होता है जिनके ये फैन होते हैं। 

फैन के गाने की चर्चा की वजह से ही देश को पता चला कि जूही चावला भी अब एक्टिविस्ट बन गई हैं। सरकार हो या पत्रकार, मानवा-धिक्कार वाला सबके ऊपर भारी पड़ता है इसलिए एक्टिविज्म सबसे पसंदीदा प्रोफेशन है। मेम साहब ने मुख्य प्रोफेशन से संन्यास ले लिया। किसी ने पूछा क्यों लिया तो जवाब मिला; अब क्वालिटी टाइम बिताना चाहती हैं। आम इंसान होता तो पूछता; तो अभी तक जो बिताया वो रद्दी टाइम था? पर ख़ास आदमी था तो फट से सुझाव दे दिया; क्वालिटी टाइम बिताना है तो एक्टिविस्ट बन जाओ। 

साहब तीस वर्षों तक अफसरशाही में रहे। उनमें से सात वर्ष शिक्षा मंत्रालय में सेक्रेटरी थे। कुछ नया नहीं किया पर रिटायर होते ही क्वालिटी टाइम बिताने के उद्देश्य से शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एनजीओ खोल लिया। सरकारी और प्राइवेट सेक्टर से फण्ड से की व्यवस्था हो गई है। क्वालिटी टाइम बीत रहा है। जरूरत पड़ने पर कोई चलती हुई चीज रुकवाने के लिए इस्तेमाल हो जाते हैं। उसकी जरूरत न हुई तो हर छह-आठ महीने में एक बार देश में लोकतंत्र की गिरावट पर कोई ज्वाइंट लेटर साइन करने के काम आ जाते हैं। 

एक्टिविज्म का भला हो रहा है और क्वालिटी टाइम बीत जा रहा है। एक साहब को और क्या चाहिए? कल को देख सकते हैं कोई और एक्टर क्वालिटी टाइम बिताते-बिताते बोर हुआ तो अदालत पहुँच गया। अदालत पूछेगा; क्या कष्ट है? वो बोलेगा; कुछ खास नहीं, ये जो FDI देश में आ रही है, उसकी वजह से उद्योग बढ़ जाएँगे। बढ़ जाएँगे तो पर्यावरण को नुकसान पहुँचेगा। मैं बस इतना चाहता हूँ कि देश में FDI बंद होना चाहिए। पर्यावरण का नाश FDI से हो रहा है। 

अदालत से जवाब आएगा; अच्छा, आप एक पेटिशन लगा दें। सुनवाई करवा देता हूँ। कल की तारीख दूँ? अगर कहें तो आज की दे देता हूँ। रात दस बजे सुनवाई कर लेते हैं।

मल्होत्रा साहब यह सुन लेंगे तो अपना सिर दीवार पर यह सोचते हुए मार लेंगे कि; सोलह बरस हो गए मेरे मकान का केस चलते हुए, अदालत बहादुर मुझे आठ महीने में एक बार तारीख केवल इसलिए देते हैं ताकि बता सकें कि आठ महीने बाद ही फिर तारीख दे पाएँगे और यहाँ इसे कल की तारीख देने को तैयार हैं। 

कोई क्रिकेटर किसी दिन अदालत पहुँच जाएगा। बोलेगा; ये सरकार जो राजधानी की रफ़्तार से मालगाड़ी चलवाना चाहती है, उसका ट्रायल रुकना चाहिए क्योंकि किसानों के प्रोडूस समय पर मंडियों में पहुँच जाएँगे और सप्लाई रोबस्ट हो जाएगी तो चीजों का दाम नहीं बढ़ेगा और किसानों को कोई फायदा नहीं होगा। अदालत बोलेगी, ठीक है, आप एक काम करो, पेटीशन फाइल कर दो, हम केस सुन लेंगे। उसकी भी केस की सुनवाई वर्चुअल हुई तो क्रिकेटर का कोई फैन कमेंट्री में चिल्ला सकता है; ये लगा VSNL चौका!

अदालत केस लेती रहेगी, तारीख देती रहेगी और सरकार अपना समय अदालतों  में खर्च करती रहेगी और उधर अमेरिका में बैठा कोई एनजीओ रिपोर्ट पब्लिश करके भारत में लोकतंत्र की डाउनग्रेडिंग करता रहेगा।

‘नहीं छोड़ेंगे दिल्ली’: गाजीपुर बॉर्डर पर अब टिकैत के जन्मदिन का जश्न, 11 क्विंटल रसगुल्ला लेकर आ रहा खानदान

कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर चल रहा कथित किसान आंदोलन अब तरह-तरह के जश्न मनाने का स्थल बन गया है। पिछले दिनों बॉर्डर से तस्वीर आई थी कि वहाँ कोविड नियमों को ताक पर रखकर इफ्तार पार्टी का आयोजन हुआ और अब खबर है कि राकेश टिकैत का जन्मदिन भी गाजीपुर बॉर्डर पर ही मनेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत शुक्रवार (जनवरी 4, 2021) को अपने छोटे भाई राकेश टिकैत का जन्मदिन मनाने के लिए गाजीपुर बॉर्डर आ रहे हैं। जन्मदिन धूमधाम से मने इसके लिए उन्होंने अपने ही घर पर 11 क्विंटल रसगुल्ले भी बनवाए हैं।

गाजीपुर आते समय उन्होंने बागपत में राष्ट्र वंदना चौक पर पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि कोरोना बड़ी महामारी है। कानून इसके सामने छोटे हैं। ये कानून बाद में भी लागू हो सकते हैं। लेकिन सरकार जिद्द पर अड़ी है। विधानसभा चुनाव से पहले किसान आंदोलन को 1 वर्ष पूरा हो जाएगा। तब यह आंदोलन और भी उग्र हो जाएगा और पूरे देश में फैलेगा।

वहीं राकेश टिकैत ने भी एक बार फिर ऐलान किया है कि किसान किसी कीमत पर राष्ट्रीय राजधानी नहीं छोड़ेंगे। उनके मुताबिक, “केंद्र सरकार चाहती है कि आंदोलन को हरियाणा में शिफ्ट कर दिया जाए। हम ये नहीं होने देंगे। हम सरकार को उनके मनसूबों में कामयाब नहीं होने देंगे। हम दिल्ली किसी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।” बीकेयू नेता का कहना है कि हरियाणा के टोल प्लाजा पर स्ट्राइक जारी रहेगी, लेकिन प्रदर्शन का केंद्र दिल्ली ही रहेगा। 

बता दें कि दिल्ली सीमाओं पर किसान आंदोलन को पिछले 26 मई को 6 माह पूरे हो गए। ऐसे में किसानों ने जगह-जगह काला दिवस मनाया था। अब बीकेयू प्रवक्ता राकेश टिकैत का यहाँ 54वाँ जन्मदिन मन रहा है। सिसौली क्षेत्र के आसपास के गाँवों के किसानों ने तो उनके जन्मदिन को एक उत्सव के रूप में मनाने की योजना बनाई है। दिल्ली सीमा पर होने जा रहे इस कार्यक्रम में नरेश टिकैत तथा उनके पौत्र रघु एवं वंश टिकैत एवं टिकैत परिवार की महिलाएँ भी शामिल होंगी।

जमीन हड़पने के आरोप

उल्लेखनीय है कि दिल्ली सीमा पर होने जा रहे इस जन्मदिन समारोह से ठीक पहले मुजफ्फरनगर के शाहपुर जिले में स्थित किनौनी गाँव में राकेश टिकैत और उनके बेटे चरण सिंह पर एक किसान की लाखों की जमीन पर अवैध कब्जा करने, खेत में खड़ी फसल को तहस-नहस करने का आरोप लगा है। 

पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई है और टिकैत के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है। शिकायतकर्ता सुशीला देवी और उनके बेटे विनीत बालियान का आरोप है कि उनकी 3 बीघा से ज्यादा जमीन रेलवे अधिग्रहण में आई थी। मगर राकेश टिकैत और उनके बेटे ने 30 मई की रात उनके खेत पर अवैध कब्जा करके उसमें उगी फसल को बर्बाद कर दिया।

इस पूरे मामले पर नरेश टिकैत का कहना है कि शिकायत करने वाली महिला पागल है। उनके अनुसार, “हमने उसकी सिफारिश अधिकारियों से की है। उनका घर के बँटवारे का विवाद है। जमीन रेलवे ने अधिग्रहण की है। उसके देवर और जेठ का जमीन पर कब्जा है। उन्हें मुआवजा मिल रहा है। हमने अधिकारियों से कहा कि महिला को भी मुआवजा मिल सकता है तो दिलाया जाए।”

वुहान लैब से ही निकला है कोरोना वायरस… 730395 अरब रुपए पूरी दुनिया को दे चीन: डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कोरोना वायरस को लेकर चीन को जिम्मेदार ठहराते हुए उस पर हमला बोला है। ट्रंप ने शुक्रवार (4 जून 2021) को कहा, ”मैंने सही कहा था कि चीनी वायरस वुहान लैब से ही आया है। अब तो हर कोई यहाँ तक कि जो तथाकथित दुश्मन हैं, उन्होंने भी यह कहना शुरू कर दिया है कि चीनी वायरस के वुहान लैब से फैलने की बात पर राष्ट्रपति ट्रंप सही थे।”

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इस महामारी से होने वाली मौतों और नुकसान की भरपाई के लिए चीन को अमेरिका और दुनिया को 10 ट्रिलियन डॉलर (7,30,395 अरब रुपए) का भुगतान करना चाहिए।

दुनिया भर में कोरोना महामारी फैलाने वाले चीन पर भड़कते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ”बराक ओबामा प्रशासन ने बेवकूफी की और वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के लिए फंडिग किया।”

ट्रंप ने कहा, ”जब मैंने इस बारे में सुना, तब मैंने फैसला किया कि अब किसी भी हालत में चीन को फंड नहीं दिया जाएगा।” उन्होंने यह भी जिक्र किया कि महामारी की शुरुआत में ही उन्होंने चीन के साथ सब कुछ बंद कर दिया था, जिस पर संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर फॉसी ने आपत्ति जताई थी।

मालूम हो कि अमेरिका के टॉप कोरोना वायरस सलाहकार डॉ. एंथोनी फौसी के निजी ईमेल सामने आने के बाद वुहान लैब से आने वाले चीनी वायरस को लेकर एक बार फिर से बहस छिड़ गई है। वाशिंगटन पोस्ट, बजफीड न्यूज और सीएनएन द्वारा सूचना की स्वतंत्रता अधिनियम (एफओआईए) के माध्यम से जनवरी से जून 2020 तक 3,000 से अधिक पेजों का ईमेल प्राप्त किया गया था।

ईमेल से अमेरिका में कोरोना प्रकोप के शुरुआती दिनों के बारे में पता चला है। डॉ. फौसी और उनके सहयोगियों ने शुरुआती दिनों में इस सिद्धांत पर ध्यान दिया कि COVID-19 वायरस चीन की वुहान लैब से लीक हो सकता है।। ‘लैब लीक’ ईमेल के संबंध में डॉक्टर ने सीएनएन न्यूज चैनल को बताया कि उन्हें अभी भी इस बात पर यकीन नहीं हो रहा है कि वुहान लैब से कोरोना वायरस की उत्पत्ति हुई है।

उन्होंने कहा कि उन्हें याद नहीं है कि उस संशोधित ईमेल में क्या लिखा है, लेकिन यह बिल्कुल असंभव है। उनके अनुसार यह सोचना समझदारी से परे है कि चीन ने जानबूझकर कुछ ऐसा बनाया है, ताकि वह खुद को और दुनिया के अन्य लोगों को मार सके। हालाँकि, डॉ. फौसी के इस विवादास्पद दावे को पिछले साल विशेषज्ञों ने खारिज कर दिया था, जिन्होंने कहा था कि यह “बिल्कुल असंभव” था। इस बात की पुष्टि करने के लिए अभी तक कोई साक्ष्य भी सामने नहीं आया है।

वहीं, हाल के दिनों में कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जाँच को लेकर चीन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाया गया। जाँच को लेकर शुरू हुईं कवायदों का भारत ने भी पुरजोर समर्थन किया है। भारत ने बीते हफ्ते शुक्रवार (28 मई 2021) को कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर आगे की जाँच के आह्वान का समर्थन किया और इस तरह के अध्ययन के लिए चीन और अन्य पक्षों के सहयोग की माँग की थी।

बता दें कि दुनिया में कोरोना वायरस फैलाने के लिए शुरू से ही डोनाल्ड ट्रंप चीन को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं। उन्होंने कई बार अपने संबोधन में कोरोना को चाइनीज वायरस कहा था।