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कोरोना कोई बीमारी नहीं… अल्लाह के सामने गिड़गिड़ाकर माफी माँगने से ही खत्म होगी: SP सांसद शफीकुर्रहमान बर्क

मुरादाबाद से समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद एसटी हसन के बाद अब संभल के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने भी विवादित बयान दिया है। सपा सांसद बर्क का कहना है कि कोरोना कोई बीमारी नहीं है, बल्कि आजादे इलाही है जो अल्लाह के सामने गिड़गिड़ाकर माफी माँगने से ही खत्म होगी।

बर्क ने कहा कि कोरोना अगर बीमारी होती तो इसका इलाज मिल गया होता। कोरोना की यह बीमारी आजादे इलाही है जो अल्लाह के सामने गिड़गिड़ाकर माफी माँगने से ही खत्म होगी। वे यहीं नहीं रुके। सपा सांसद ने यह भी कह दिया कि मौजूदा भाजपा सरकार ने न केवल इस्लामिक कानून शरीयत के साथ खिलवाड़ किया है, बल्कि लड़कियों से रेप, मॉब लिंचिंग और कई जुल्म-ज्यादतियाँ करवाई की जिसके कारण ही कोरोना जैसी आसमानी आफत आई है।

सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा कि उन्होंने तो पहले ही कह दिया था कि कोरोना कोई बीमारी है ही नहीं। बर्क ने कहा कि उन्होंने पहले ही मुस्लिमों के लिए मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज पढ़ने की माँग की थी लेकिन सरकार ने इसकी इजाजत नहीं दी और आज सरकार की इन्हीं गलतियों के कारण आसमानी आफत आई है। बर्क अक्सर अपने बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राम मंदिर के शिलान्यास को गैर-कानूनी करार दिया था और कहा था कि सत्ता और हिन्दुत्व के बल पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई से फैसला लिखाया गया है।

इससे पहले सपा सांसद डॉक्टर एसटी हसन ने विवादित और गैर-जिम्मेदाराना बयान दिया था। उन्होंने कोरोना वायरस संक्रमण के दौरान हुई मौतों और पिछले दिनों देश में आए दो चक्रवातों के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया था और कहा था कि यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि भाजपा सरकार ने शरीयत में दखल दी है।

2 बार नाकाम रही, तीसरी बार शाहिदा ने शौहर का कर दिया काम तमाम; शव के 4 टुकड़े कर किचन में दफनाया

मुंबई पुलिस ने हत्या के एक चौंकाने वाले मामले का खुलासा किया है। कई दिनों से गायब रईस का शव उसके घर के किचन से बरामद किया है। उसकी हत्या के आरोप में उसकी 28 वर्षीय बीवी शाहिदा और उसके प्रेमी अमित विश्वकर्मा को गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अपने नाजायज रिश्ते को छिपाने के लिए दोनों ने मिलकर रईस का बेरहमी से कत्ल कर बाद में किचन में दफन कर दिया।

दहिसर में रहने वाली इस महिला की कारस्तानी शायद कुछ दिन छिप जाती लेकिन उसकी 6 साल की बेटी ने सारा भंडाफोड़ कर दिया। मुंबई पुलिस के जोन 11 के DCP विशाल ठाकुर के ने बताया कि उत्तर प्रदेश के गोंडा निवासी रईस का निकाह साल 2012 में शाहिदा से हुआ था। निकाह के बाद दोनों मुंबई आकर दहिसर पूर्व के खान कंपाउंड में किराए के घर में रहने लगे। दोनों के 2.5 साल का बेटा तथा 6 साल की बेटी भी थी।

रईस दहिसर में ही रेलवे स्टेशन के पास एक कपड़े की दुकान में नौकरी करता था। पुलिस के अनुसार रईस की गैरमौजूदगी में अनिकेत उर्फ अमित उसके घर आता-जाता था। उसके शाहिदा के साथ नाजायज रिश्ते बन गए थे। जब इसका शक रईस को हुआ तो पति-पत्नी में झगड़ा होने लगा। रोज-रोज की झंझट से छुटकारा पाने के लिए शाहिदा ने अपने प्रेमी के साथ उसको रास्ते से हटाने का फैसला किया।

गिरफ्तारी के बाद शाहिदा ने बताया कि उसने पूर्व में भी दो बार रईस को जान से मारने की कोशिश की थी लेकिन नाकामायब रही। बीते 20 मई को जब रईस घर से बाहर निकला तो अमित उसके घर आ गया। दोनों आपत्तिजनक अवस्था में थे कि अचानक रईस घर पहुँच गया। इसके बाद उसकी शाहिदा के साथ मारपीट हुई। इसी दौरान शाहिदा ने चाकू घोंपकर उसकी हत्या कर दी। बाद में अमित के साथ मिलकर उसका गला काटा।

इस बीच रईस-शाहिदा की 6 साल की बेटी ने सबकुछ देख लिया। महिला ने बच्ची को धमकाया और कहा कि अगर उसने कुछ बताया तो उसे भी काटकर दफना देगी। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, शाहिदा ने रईस के शव के चार टुकड़े कर किचन में दफना दिया और उसका फोन अपने पास रख लिया।

शाहिदा की बातों पर और रईस के अचानक गायब होने पर जब उसके दोस्तों को शक हुआ तो उनमें से किसी ने दहिसर थाने में मुकदमे को दायर करवाया। मामले में जाँच शुरू हुई और पुलिस ने बच्ची से अकेले में पूछताछ की। बच्ची की गवाही ने सबको हक्का-बक्का कर दिया। बच्ची के बयान के आधार पर घर की किचन खुदवाकर रईस की लाश को बरामद कर लिया गया। बाद में शाहिदा ने भी अपना जुर्म कबूल लिया और पुलिस ने उसे और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया।

सेंट्रल विस्टा पर विलाप, राजस्थान में ₹125 करोड़ के प्रोजेक्ट का शिलान्यास: कॉन्ग्रेस की हिप्पोक्रेसी का ताजा नमूना

जब से मोदी सरकार ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी है तब से ही राहुल गाँधी, उनकी कॉन्ग्रेस पार्टी और पार्टी के कई नेता इस प्रोजेक्ट को रोकने के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी और शशि थरूर जैसे उसके नेताओं ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को ‘क्रिमिनल वेस्टेज’ कहते हुए इस पूरी परियोजना को ही रद्द करने की माँग की।

जहाँ एक ओर कॉन्ग्रेस सेंट्रल विस्टा को ‘जनता के पैसों की बर्बादी’ बता रही है, वहीं दूसरी ओर राजस्थान में कॉन्ग्रेस की ही सरकार ने में 125 करोड़ रुपए की पुनर्निर्माण परियोजनाओं को मँजूरी दी है। राजस्थान सरकार द्वारा जारी किए गए एक विज्ञापन में बताया गया है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत 03 जून 2021 को जोधपुर में तीन परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे।

राजस्थान कॉन्ग्रेस के द्वारा दिया गया विज्ञापन

राजस्थान सरकार द्वारा मँजूर की गई तीन परियोजनाएँ हैं: सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, इंटरनेशनल स्टैन्डर्ड ऑडिटोरियम और बरकतुल्लाह खान स्टेडियम का पुननिर्माण। इनके लिए क्रमशः 45 करोड़ रुपए, 60 करोड़ रुपए और 20 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की गई है। इसके अलावा इसके विज्ञापन पर भी कई करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।   

जैसे ही राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार का यह विज्ञापन सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, यूजर्स ने कॉन्ग्रेस की हिप्पोक्रेसी पर जमकर निशाना साधा। सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा कि कॉन्ग्रेस सेंट्रल विस्टा को जनता के पैसों की बर्बादी कहती है, लेकिन राजस्थान में खुद पुनर्विकास परियोजनाओं में करोड़ों खर्च कर रही है। केन्द्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत कई यूजर्स ने राजस्थान में वैक्सीन की बर्बादी पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि वैक्सीन की बर्बादी पर चुप रहने वाले महामारी के दौर में भी पुनर्विकास परियोजनाओं पर करोड़ों खर्च करने के लिए तैयार हैं।

राजस्थान के अलावा कॉन्ग्रेस के गठबंधन वाली महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार ने भी नरीमन पॉइंट में विधायकों के आवास (हॉस्टल) के लिए 900 करोड़ रुपए का टेंडर निकाला था। महाराष्ट्र सरकार के इस निर्णय की आलोचना की गई क्योंकि यह टेंडर ऐसे समय में निकाला गया जब राज्य Covid-19 महामारी के भीषण दौर में था और कई आर्थिक समस्याएँ सामने खड़ी थीं।  

हालाँकि मोदी सरकार पर सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को लेकर लगातार हमला करने वाले राहुल गाँधी महाराष्ट्र और राजस्थान सरकार द्वारा महामारी के समय करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के मामले पर चुप हो जाते हैं। जबकि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को मँजूरी चायनीज कोरोना वायरस संक्रमण के शुरू होने से पहले ही दे दी गई थी।  

जिसने PM मोदी के लिए कहा था- बोटी-बोटी कर देंगे, उस इमरान मसूद को कॉन्ग्रेस ने बनाया AICC सचिव

हिंदू और मोदी विरोधी बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले इमरान मसूद को कॉन्ग्रेस ने राष्ट्रीय सचिव बनाया है। बतौर ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमेटी (AICC) के सचिव उन्हें दिल्ली की जिम्मेदारी दी गई है। गुरुवार 3 जून 2021 को कॉन्ग्रेस ने ​5 नामों की घोषणा की जिन्हें AICC सचिव के तौर पर अलग-अलग राज्यों की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें एक नाम मसूद का भी है। 2014 के लोकसभा चुनावों से मसूद ने नरेंद्र मोदी की बोटी-बोटी करने की धमकी दी थी।

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट बताती है कि कोरोना काल में इमरान मसूद के काम को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है। खबर के अनुसार, पार्टी जानती है कि इस नियुक्ति से उनकी आलोचना होगी क्योंकि मसूद हमेशा ही नेगेटिव कारणों से मीडिया चर्चा में रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमेटी ने कुछ संगठनात्मक बदलाव किए हैं। इसमें कॉन्ग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के चेयरमैन पद जिम्मेदारी इमरान प्रतापगढ़ी को दी गई है। इसके अलावा कुछ AICC सचिवों की भी नियुक्ति हुई है।

पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने इन सचिवों की नियुक्ति की है। सप्तगिरि उलका को छत्तीसगढ़, दीपिका पांडे को उत्तराखंड, संजय दत्त को हिमाचल प्रदेश और ब्रजलाल बिहारी को बिहार की जिम्मेदारी मिली है।

इमरान मसूद को लेकर हुए विवाद

बता दें कि इससे पहले 2019 के लोकसभा चुनावों में इमरान मसूद को कॉन्ग्रेस ने उत्तर प्रदेश की चुनाव समिति का हिस्सा बनाने का निर्णय लिया था। साल 2014 में उन्हें सहारनपुर से प्रत्याशी के तौर पर उतारा था। उस समय मसूद ने सार्वजनिक रैली में घोषणा की थी कि वह ‘नरेंद्र मोदी के टुकड़े-टुकड़े कर देगा’।

इसके अलावा साल 2019 में ही इमरान मसूद अपनी बीवी के साथ समारो में डांस करने के कारण चर्चा में आए थे। उस समय, इमरान की डांस वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मुस्लिम संगठनों और मौलानाओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। साथ ही मौलानाओं ने ये भी कहा था कि ये सब इस्लाम के ख़िलाफ़ है इसलिए इमरान को माफी माँगनी चाहिए।

वीडियो में कॉन्ग्रेसी नेता को उड़े जब-जब जुल्फें तेरी पर डांस करते देखा गया था। वीडियो को देखने के बाद इत्तेहाद उलेमा-ए-हिंद के अध्‍यक्ष मौलाना कारी मुस्तफा देहलवी ने मीडिया से हुई अपनी बातचीत में कहा, “इमरान मसूद की पत्‍नी को इस तरह के गानों पर नाचना, खुलेआम बेपर्दा होकर डांस करना जायज नहीं है, यह हराम है और इस्‍लाम इसकी इजाजत नहीं देता है। इस्‍लाम में इसकी मनाही है। इन लोगों को फौरी तौर पर अल्‍लाह से तौबा करनी चाहिए और माफी माँगनी चाहिए, यह बहुत बड़ा जुर्म है।” 

मॉडल टेनेंसी ऐक्ट: नल कौन बदलेगा? पुताई कौन करवाएगा? – किराएदार और मकान मालिक दोनों की सुरक्षा की गारंटी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार (2 जून, 2021) को हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मॉडल किराएदारी अधिनियम या मॉडल टेनेंसी ऐक्ट (MTA) के मसौदे को मंजूरी दे दी गई है। सरकार ने कहा कि इस कानून की सहायता से देश भर में मकानों को किराए पर देने और इससे संबंधित प्रक्रियाओं के कानूनी ढाँचे को दुरुस्त करने में आसानी होगी।

मॉडल टेनेंसी ऐक्ट का उद्देश्य 2022 तक सभी को मकान देने के लक्ष्य में सहायता करना है। साथ ही MTA देश में मकान मालिकों और किराएदारों के विवादों को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभा सकता है। मॉडल टेनेंसी ऐक्ट का खाका सबसे पहले 2019 में बजट के दौरान रखा गया था।

क्या है मॉडल टेनेंसी ऐक्ट और क्यों हुई इसकी आवश्यकता

  • मॉडल किराएदारी अधिनियम या मॉडल टेनेंसी ऐक्ट एक मॉडल कानून है, जिसकी अधिसूचना आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा जारी की गई थी और इसे राज्यों के पास फीडबैक के लिए भेजा गया था। यह मॉडल कानून राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक गाइडिंग कानून का काम करेगा। चूँकि संविधान के अनुसार भूमि तथा उससे संबंधित अधिकार राज्य सूची के विषय हैं, अतः राज्यों को इस पर कानून बनाने का अधिकार प्रदान किया गया है।
  • भारत में साल 2022 तक सभी को आवास की सुविधा देने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें किराए पर घर लेने की सुविधा भी शामिल है क्योंकि देश की बड़ी जनसंख्या अपने घर को छोड़ कर दूसरे राज्यों में काम की तलाश में जाती है। उन राज्यों में ये लोग अपना खुद का घर बनाने या खरीदने की तुलना में किराए पर रहना पसंद करते हैं। हालाँकि किराए की इस व्यवस्था में न तो किराएदार का शोषण हो और न ही मकान मालिक का नुकसान हो, इसके लिए इस मॉडल टेनेंसी कानून की आवश्यकता पड़ी।
  • किराएदारी व्यवस्था में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के निर्धारण के लिए इस मॉडल कानून का मसौदा जारी किया गया।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना (अर्बन) के अंतर्गत राज्यों के द्वारा एक मेमोरंडम ऑफ अंडरस्टैन्डिंग (MoU) साइन किया गया, जिसमें कहा गया कि राज्य या केंद्र शासित प्रदेश मॉडल टेनेंसी ऐक्ट के अनुसार या तो नया कानून बनाएँगे या पहले से जो कानून बने हुए हैं, उनमें संशोधन करेंगे।

क्या हैं कानून के प्रमुख बिन्दु

मॉडल टेनेंसी ऐक्ट के अंतर्गत मकान मालिकों और किराएदारों से संबंधित कई मुद्दों पर स्पष्ट रूप से विवादों के निपटान, जिम्मेदारियों और किराए के निर्धारण के विषय में बताया गया है। इन्हें किराएदारी व्यवस्था के प्रत्येक पहलू के आधार पर समझा जा सकता है।

कानून का कार्यक्षेत्र: यहा ध्यान देने योग्य बात यह है कि मॉडल टेनेंसी ऐक्ट ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों के लिए समान रूप से कार्य करेगा। इसके अलावा कानून के कार्यक्षेत्र को वृहद और सर्वमान्य बनाने के लिए इसके अंतर्गत एक ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के निर्माण की बात की गई है, जो स्थानीय भाषाओं या राज्य की भाषाओं में कार्य करेगा। इससे देश के किसी भी कोने में एग्रीमेंट या अन्य दस्तावेजों को लेकर किसी प्रकार की कोई समस्या उत्पन्न नहीं होगी। इसके साथ ही यह घरेलू एवं व्यवसायिक, दोनों ही परिस्थितियों में लागू होगा।

एग्रीमेंट सबसे पहली आवश्यकता: किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में मॉडल टेनेंसी ऐक्ट के लागू होने या पहले से उपस्थित कानूनों में संशोधन होने के बाद बिना एग्रीमेंट के किसी भी संपत्ति को किराए पर लेना या देना असंभव हो जाएगा। इसके अलावा यदि मकान मालिक एग्रीमेंट के मुताबिक किराएदार को पूर्व नोटिस देता है तो किराएदार को घर या व्यवसायिक संपत्ति को खाली करना पड़ सकता है।

मकान मालिक और किराएदार की जिम्मेदारी: संपत्ति में किसी भी प्रकार के निर्माण, पेंट-पुताई, बाहरी इलेक्ट्रिकल सुधार और संबंधित रख-रखाव की जिम्मेदारी मकान मालिक की होगी जबकि नाली, दरवाजे और खिड़कियाँ, घर के अंदर के स्विच और सॉकेट, गार्डन और रसोई (किराएदार द्वारा उपयोग की जा रही) के रख-रखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी किराएदार की होगी। इसके अलावा मकान मालिक को किराए में दी गई अपनी संपत्ति का जायजा लेने के लिए 24 घंटे का पूर्व नोटिस देना होगा।

सुरक्षा जमा निधि: मकान मालिक किराए पर दी गई अपनी संपत्ति के एवज में अधिकतम दो महीने का किराया ही सुरक्षा निधि (Security Deposit) के रूप में ले सकेंगे। इसके अलावा व्यवसायिक संपत्तियों के मामले में किराएदारों को 6 महीने की अवधि के लिए सुरक्षा निधि जमा करनी होगी।

विवादों का निपटारा: मॉडल टेनेंसी ऐक्ट के तहत एक तय समय-सीमा में विवादों के निपटारे के लिए शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना पर जोर दिया गया है। साथ ही ऐक्ट में विवादों के त्वरित निपटान के लिए रेंट अथॉरिटी, रेंट कोर्ट और रेंट ट्रिब्यूनल की स्थापना के प्रावधान भी किए गए हैं। मॉडल टेनेंसी ऐक्ट में रेंट कोर्ट और रेंट ट्रिब्यूनल द्वारा विवादों के निपटारे के लिए 60 दिनों की समय सीमा तय की गई है। इस ऐक्ट की धारा-30 में स्पष्ट रूप से यह कहा गया है कि कोर्ट या ट्रिब्यूनल बनने के बाद यह मामले दीवानी अदालतों में नहीं जाएँगे। इससे इनके त्वरित निपटान में सहायता मिलेगी।

मॉडल टेनेंसी ऐक्ट के फायदे

  • केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 2011 की जनसंख्या के आँकड़ों के अनुसार बताया कि देश में लगभग 1 करोड़ घर खाली पड़े हैं, जो किराएदारी व्यवस्था में शामिल किए जा सकते हैं।
  • मॉडल टेनेंसी ऐक्ट के राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होने के पश्चात किराएदारों और मकान मालिकों के परस्पर हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। अर्थात न तो किराएदारों का उत्पीड़न किया जा सकेगा और न ही मकान मालिकों को नुकसान होगा।
  • इस ऐक्ट के तहत मकान मालिकों को किराएदारों द्वारा अपनी संपत्ति पर कब्जा जमाने के भय से मुक्ति मिलेगी और अधिकांश मकान मालिक अपने खाली पड़े घरों को किराए पर देने के लिए आगे आएँगे।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म और एग्रीमेंट की अनिवार्यता से इस ऐक्ट में पारदर्शिता की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।
  • चूँकि यह एक मॉडल कनून है, ऐसे में राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेश अपनी परिस्थितियों एवं जरूरतों के हिसाब से कानून बना सकते हैं।  
  • इस कानून के अस्तित्व में आने के बाद देश में कई हाउसिंग सोसायटी में भी किराएदारी व्यवस्था के लागू करने का रास्ता साफ हो जाएगा।
  • चूँकि यह कानून पुराने किराएदारी कानूनों को समाप्त करने के लिए नहीं कहता है, इसलिए राज्य मॉडल टेनेंसी ऐक्ट की तर्ज पर ही पुराने कानूनों में संशोधन के लिए स्वतंत्र हैं।

साल 2015 में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) की शुरुआत की गई थी, जिसका लक्ष्य है 31 मार्च 2022 तक सभी गरीबों को आवास उपलब्ध कराना। इसके तहत 20 मिलियन किफायती आवास के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के दो अंग हैं,  प्रधानमंत्री आवास योजना (अर्बन) और प्रधानमंत्री आवास योजना (रुरल)।

मॉडल टेनेंसी ऐक्ट के अस्तित्व में आने के बाद इस लक्ष्य को पूरा करने में सहायता मिलेगी। क्योंकि जैसा कि पहले ही बताया गया है कि अधिकांश प्रवासी कामगार अपना निजी घर बनाने के स्थान पर किराए पर घर लेना ज्यादा पसंद करते हैं और यदि मॉडल टेनेंसी ऐक्ट उचित सुरक्षा और बेहतर जवाबदेही सुनिश्चित कर पाया तो न केवल लाखों प्रवासी कामगारों को रहने का ठिकाना मिलेगा बल्कि मकान मालिकों की आय के स्रोत के भी खुलेंगे।

‘रामदेव को नहीं रोक सकते’: DMA से दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा- कोरोना की दवाई खोजें, समय बर्बाद न करें

एलोपैथ पर बाबा रामदेव के बयान और पंतजलि के कोरोनिल के खिलाफ दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन (DMA) ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दिल्ली हाई कोर्ट ने आज (जून 3, 2021) योग गुरु की बातों को एक राय बताते हुए कहा कि इसे अभिव्यक्ति की आजादी के तौर पर देखा जाना चाहिए।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार DMA द्वारा फाइल किए गए मुकदमे पर जस्टिस सी हरि शंकर की एकल पीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने बाबा रामदेव के बयान पर कहा, “यह एक राय है…कोई भी मामला जहाँ बयानों पर रोक लगाने की बात हो उसे अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत परीक्षण किया जाता है। ये एक अधिकार है…इस्तेमाल की गई भाषा आपत्तिजनक हो सकती है।”

कोर्ट ने आगे कहा, “मुझे नहीं लगता कि आपका एलोपैथिक पेशा इतना नाजुक है.. ये किसी का विचार है कि एलोपैथिक दवाओं की अक्षमता के कारण इतने लोग मारे गए हैं। मुझे लगता है कि यह अनुच्छेद 19(1)(ए) के अंतर्गत आता है।”

कोर्ट ने कहा कि व्यक्ति अपनी राय रख सकते हैं। इसके लिए उनके खिलाफ मुकदमा दायर नहीं किया जा सकता है। अदालत ने कहा,

“अगर मुझे लगता है कि कुछ विज्ञान फर्जी है, कल मुझे लगता है कि होम्योपैथी नकली है…तो क्या आपका मतलब है कि वे मेरे खिलाफ मुकदमा दायर करेंगे? यह जनता की राय है।रामदेव एक व्यक्ति हैं।उन्हें एलोपैथी पर विश्वास नहीं है। उनका मानना ​​​​है कि योग और आयुर्वेद से सब कुछ ठीक हो सकता है। अब ये सही या गलत हो सकता है। एलोपैथिक किसी के लिए काम करती है और किसी के लिए नहीं, यह सबका अपना-अपना नजरिया है। हम इस मामले में नोटिस जारी कर सकते हैं, लेकिन हम रामदेव को रोक नहीं सकते हैं।”

अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बाबा रामदेव को अन्य बातों के साथ पतंजलि की कोरोनिल पर ये जानकारी फैलाने के लिए कि वो एक कोविड ट्रीटमेंट है, समन जारी किया। इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि वह बिना रामदेव बाबा का पक्ष जानें कोई भी आदेश पास नहीं कर सकते।

कोर्ट ने DMA की ओर से पेश वकील से यह भी सवाल किया, “क्या ये धारा 91 का केस है? आप यहाँ कुछ भी नहीं कह सकते हैं। आप कहते हैं, “हे भगवान! रामदेव ने कुछ कह दिया… आप लोगों को तो इस समय महामारी से बचाने के तरीके खोजने चाहिए न कि कोर्ट में आकर समय बर्बाद करना चाहिए।”

DMA की ओर से दलीलें और कोर्ट के तर्क

वरिष्ठ वकील राजीव दत्ता ने इस मामले को डॉक्टरों के अधिकार से जोड़ा और जब कोर्ट ने पूछा कि क्या बाबा रामदेव का बयान जनमानस को नुकसान पहुँचा रहा है, तो वकील ने कहा, “यह सदस्यों को प्रभावित कर रहा है। खुले में दिया गया बयान प्रभाव डालता है। वह डॉक्टरों के नाम ले रहे हैं। वह विज्ञान को फर्जी बता रहे हैं। वो भी इस महामारी में…”

दत्ता ने बताया कि रामदेव कोरोनिल को कोरोना से ठीक होने वाली दवाई बता रहे हैं। इसी पर जस्टिस बोले, “मुझे नहीं लगता कि आपका एलोपैथिक पेशा इतना नाजुक है।” उन्होंने कहा, “मान लेते हैं कि उन्होंने जो कहा है वह गलत, भ्रामक, शरारती हैं… फिर भी मैं समझता हूँ कि यह आम जनता को प्रभावित करने वाला एक बयान है। इसके लिए सीपीसी के तहत प्रावधान है। धारा 95 सीपीसी के अलावा जनहित के तहत मुकदमा दायर नहीं किया जा सकता।”

सुनवाई में दत्ता ने कहा कि केंद्र सरकार भी यह बयान दे चुकी है कि कोरोनिल कोविड-19 से नहीं बचाती और इसका ऐसे प्रचार नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि बाबा रामदेव इसके इम्युनिटी बूस्टर होने पर स्पष्टीकरण दें। कोर्ट ने दत्ता के इस तर्क पर कहा कि बाबा रामदेव इस पर बयान दे चुके हैं। अब आपकी शिकायत का क्या मतलब। वह तो कहते ही हैं कि ये एक इम्यूनिटी बूस्टर है।

दत्ता फिर दलील देते हैं कि कोरोनिल से पतंजलि ने 25 करोड़ रुपए बनाए। इस पर कोर्ट ने पूछा तो क्या उन्हें इसका दोष दिया जाए कि लोगों ने कोरोनिल खरीदी? न्यायधीश हरि शंकर ने कहा कि कोरोनिल इलाज है या नहीं ये अदालत नहीं कह सकती, ये कहना मेडिकल विशेषज्ञों का काम है।

इस पूरी सुनवाई में दत्ता ने अंतरिम राहत के लिए दबाव डाला और माँग की कि रामदेव को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आपत्तिजनक सामग्री प्रकाशित करने से रोका जाए और बिना शर्त माफी माँगने को कहा जाए।

दत्ता ने कोर्ट से यह भी कहने को कहा कि कोरोनिल कोविड​​​​-19 के इलाज के रूप में काम नहीं करता है और इस बात को आयुष मंत्रालय भी कह चुका है। हालाँकि इस पर कोर्ट ने कहा, “मंत्रालय ऐसा नहीं कहता। उसने कोई निष्कर्ष नहीं दिया है… जहाँ तक ​​मुझे पता है, एक घोषणा देना… यह एक शामिल प्रक्रिया है। इसके लिए व्यापक अध्ययन और शोध की आवश्यकता होगी।”

आगे ऐसा बयान जारी न करें

बता दें कि इस पूरे मामले पर बाबा रामदेव की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव नायर पेश हुए। उन्होंने बताया कि रामदेव ने 22 मई को अपने बयान वापस ले लिए थे। इस पर अदालत ने कहा, “आगे अपने मुवक्किल को ऐसा कोई बयान न देने के लिए कहें।” जस्टिस ने यह भी कहा, “मुझे उनके कोरोनिल पर बयान देने से कोई आपत्ति नहीं है… नायर एक बहुत सम्मानित वरिष्ठ हैं। मुझे यकीन है कि उनके मुवक्किल उनकी बात सुनेंगे।” कोर्ट ने कहा कि इस मामले में हम कोई भी आदेश जारी नहीं कर रहे हैं और हमें पूरी उम्मीद है कि भविष्य में उनके क्लाइंट कोई बयान नहीं जारी करेंगे।”

खालिस्तान समर्थन के लिए जिसका किया था विरोध, उसे ही पार्टी में लेकर आए कैप्टेन अमरिंदर: 3 AAP विधायक अब कॉन्ग्रेस में

पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) को तगड़ा झटका लगा है। AAP के 3 विधायकों ने कॉन्ग्रेस का रुख किया है, जिसमें खालिस्तानी एजेंडा ‘रेफेरेंडम 2020’ का समर्थन करने वाले सुखपाल सिंह खैरा भी शामिल हैं। उनके साथ दो अन्य विधायक पिरमल सिंह और जगदेव सिंह कमालू भी कॉन्ग्रेस में शामिल हुए। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने तीनों विधायकों से मुलाकात की।

इसे कैप्टेन द्वारा पंजाब कॉन्ग्रेस में अपने कद को बरक़रार रखने के संघर्ष के रूप में भी देखा जा रहा है क्योंकि राज्य में पार्टी अभी अंतर्कलह से गुजर रही है। पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू समेत कुछ कैबिनेट मंत्रियों ने भी कैप्टेन के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। कैप्टेन अमरिंदर सिंह भी आज पार्टी आलाकमान द्वारा नियुक्त पैनल से मुलाकात के लिए दिल्ली में हैं। दिल्ली जाने से ठीक पहले उन्होंने तीनों विधायकों को कॉन्ग्रेस की सदस्यता दिलाई।

सुखपाल सिंह खैरा फ़िलहाल कपूरथला के भोलाथ से विधायक हैं। ये कॉन्ग्रेस में उनकी घर-वापसी है क्योंकि 1994 में रामगढ़ के पंचायत सदस्य के रूप में राजनीति शुरू करने वाले खैरा पंजाब यूथ कॉन्ग्रेस के उपाध्यक्ष, पंजाब कॉन्ग्रेस के सचिव, कपूरथला में कॉन्ग्रेस के जिलाध्यक्ष और पंजाब कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता जैसे संगठन के अहम पदों पर रह चुके हैं। दिसंबर 2015 में वो AAP में शामिल हो गए थे।

उन पर हेरोइन तस्कर गुरदेव सिंह को संरक्षण देने का आरोप लग चुका है। इस मामले में उनके खिलाफ 17 मामले दर्ज किए गए थे, लेकिन एक सरकारी पैनल ने सभी को गलत करार दिया। जनवरी 2018 में अलग खालिस्तानी मुल्क की सिख कट्टरपंथियों की माँग का समर्थन करने के कारण AAP में ही कई लोग उनके खिलाफ हो गए थे। तब इन्हीं कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने उनके बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा था कि वो पंजाब के इतिहास और अपने बयान के दुष्परिणामों की समझ से दूर ‘ड्रामा’ कर रहे हैं।

तब एक AAP नेता ने ही कहा था कि भारी वित्तीय फंडिंग के लिए खैरा इस तरह के बयान दे रहे हैं। कनाडा, अमेरिका और यूरोप में सिख कट्टरवादी अक्सर इन चीजों को बढ़ावा देते हैं। AAP ने उन्हें उसी साल पार्टी विरोधी गतिविधियों में सलिप्त रहने के कारण बाहर का रास्ता दिखा दिया था। फिर उन्होंने अपनी अलग ‘पंजाब एकता पार्टी’ का गठन किया था। उस समय खैरा पंजाब में नेता प्रतिपक्ष थे। अब कैप्टेन अमरिंदर उनका स्वागत कर रहे हैं।

ये भी गौर करने वाली बात है कि ये 3 नेता कॉन्ग्रेस में तब आए हैं, जब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और प्रभारी हरीश रावत दिल्ली में विधायकों से बातचीत और कलह सुलझाने में व्यस्त हैं। सीएम अमरिंदर ने कहा कि पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गाँधी की अनुमति से इन तीनों को पार्टी में लाया गया है और प्रदेश अध्यक्ष व प्रभारी का ‘आशीर्वाद’ भी कुछ दिनों में लिया जाएगा, क्योंकि वो अभी व्यस्त हैं।

पंजाब में कॉन्ग्रेस की कलह सुलझाने के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे, हरीश रावत और दिल्ली के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल के रूप में एक तीन सदस्यीय पैनल का गठन किया गया है। आलाकमान पर दबाव बनाने के लिए 6 कैबिनेट मंत्रियों ने मुख्यमंत्री अमरिंदर की वर्चुअल बैठक के बहिष्कार का मन बना लिया था, लेकिन अंत में उन्होंने इसे ठीक नहीं समझा। आज अमरिंदर सिंह के साथ बैठक के बाद पैनल आलाकमान को रिपोर्ट सौंपेगा।

पंजाब सरकार के निजी अस्पतालों को कोवैक्सिन बेचने पर उठे सवाल, प्रति खुराक कमाया 660 रुपए का मुनाफा

जाब सरकार के राज्य कोटे के तहत खरीदे गई कोवैक्सिन को निजी अस्पतालों को बेचने के फैसले पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे पंजाब सरकार ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के नाम पर अपने इस कदम से प्रति खुराक 660 रुपए का लाभ कमाया है।

इसके अलावा, निजी अस्पताल को प्रति खुराक 500 रुपए का लाभ होता है क्योंकि ग्राहक को टीके की एक खुराक के लिए 1,560 रुपये का भुगतान करना होता है।

दिलचस्प बात यह है कि परिभाषा के अनुसार कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के मूल में परोपकार होता है, जो पंजाब सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम में कहीं भी दिखाई नहीं देता है।

पंजाब सरकार ने निजी अस्पतालों को बेचीं 20000 वैक्सीन

हाल ही में खरीदी गई एक लाख वैक्सीन में से, पंजाब सरकार ने राज्य भर के निजी अस्पतालों को 1,060 रुपए प्रति खुराक की दर से कम से कम 20,000 वैक्सीन बेचीं, जिसकी कीमत 400 रुपए थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, निजी अस्पताल वैक्सीन की प्रति खुराक के लिए कम से कम 1560 रुपए वसूल रहे हैं।

अभियान में शामिल अधिकारियों का दावा है कि सरकार ने टीकाकरण सीएसआर फंड के नाम से एक अलग बैंक खाता बनाया है और निजी अस्पताल इस खाते में ही पैसा जमा करते हैं। वैक्सीन की खरीद में शामिल राज्य के अधिकारियों ने कहा कि निजी अस्पतालों से एकत्र अतिरिक्त धन का उपयोग वैक्सीन खरीदने के लिए किया जाएगा।

हाईप्रोफाइल सेक्स रैकेट का पर्दाफाश, दो एक्ट्रेस गिरफ्तार, ₹1.80 लाख में तय हुआ था एक रात का सौदा

महाराष्ट्र के ठाणे में एक हाईप्रोफाइल सेक्स रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें दो एक्ट्रेस को भी गिरफ्तार किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ठाणे क्राइम ब्रांच ने बुधवार (2 जून) दोपहर में छापा मार कर ठाणे के पाचपाखड़ी इलाके में एक घर में चल रहे सेक्ट रैकेट का भंडाफोड़ किया। पुलिस ने मौके से दो  एक्ट्रेस, दो महिला एजेंट और एक पुरुष दलाल समेत कुल पाँच लोगों को गिरफ्तार किया। अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज करके आगे की जाँच क्राइम ब्रांच द्वारा की जा रही है।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, दो हीरोइन ठाणे के पाचपाखड़ी इलाके की एक प्राइवेट सोसाइटी में चल रहे सेक्स रैकेट में शामिल थीं। दोनों अभिनेत्रियाँ मुंबई के एक बड़े सेक्स रैकेट के संपर्क में थीं। लेकिन वेश्यावृत्ति के लिए उन्होंने ठाणे शहर को चुना क्योंकि उन्हें यहाँ पुलिस से उतना डर नहीं था, लेकिन आखिरकार पुलिस ने उन्हें अरेस्ट कर लिया।

एक रात के लिए 1.80 लाख में तय हुआ था सौदा

एक रात के लिए दलालों ने ने ग्राहकों से 2 लाख रुपए की माँग की थी और 1 लाख 80 हजार में सौदा तय हुआ था।  ये भी पता चला है कि उनके ग्राहकों में अमीर लोग शामिल हैं, जिनकी क्राइम ब्रांच तलाश कर रही हैं।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार की गई दोनों हीरोइन तमिल फिल्मों में लीड रोल निभाने के साथ ही कुछ बॉलीवुड फिल्मों में भी साइड रोल और सीरियल्स में लीड रोल निभा चुकी हैं।

गिरफ्तार की गई हीरोइनों का कहना है कि लॉकडाउन में फिल्मों की शूटिंग बंद हो जाने और काम नहीं मिलने की वजह से उन्होंने वेश्यावृत्ति का धंधा शुरू किया था। चौंकाने वाली बात ये है कि जिस सेक्स रैकेट से ये दोनों जुड़ी थीं, उसके मुंबई की नामी तार कथित तौर पर कई नामी अभिनेत्रियों से भी जुड़े हैं।

क्राइम ब्रांच के अधिकारी के मुताबिक, ठाणे क्राइम ब्रांच यूनिट-1 टीम को इस इलाके में सेक्स रैकेट चलाए जाने की जानकारी मिली थी, जिसके बाद उन्होंने यहाँ छापा मारकर इन दोनों हीरोइनों को गिरफ्तार कर लिया।

ये दोनों अभिनेत्रियाँ पहले से तय सौदे के तहत ठाणे की पाचपाखाड़ी नटराज सोसाइटी में आईं। इनके आने की सूचना जैसे ही पुलिस को मिली, क्राइम ब्रांच ने छापा मारकर मौके से दो हीरोइनों, दो महिला एजेंट और एक पुरुष समेत पाँच लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

सवाल: वैक्सीन का कॉन्ट्रैक्ट किसको? जवाब: तेरे बाप को; बदजुबानी के बाद मुंबई की महिला मेयर ने डिलीट मारा ट्वीट

मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर अब एक नए विवाद के कारण सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रही हैं। इस दफा उन्होंने एक यूजर्स को जवाब देने के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया है। इसके बाद ट्विटर यूजर उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाने लगे।

दरअसल, मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर ने एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू की वीडियो को अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर किया था। इस इंटरव्यू में मुंबई के अंदर वैक्सीनेशन के लिए उन 9 कंपनियों की बात की गई थी, जिनसे बीएमसी कॉन्ट्रैक्ट देकर वैक्सीन खरीदने की कोशिश कर रही है। 

इसी ट्वीट के नीचे जब एक यूजर ने उनसे पूछा कि किन कंपनियों को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है। जवाब में पेडनेकर ने मराठी में लिखा- तुझ्या बापाला यानी ‘तेरे बाप को।” इस ट्वीट को हालाँकि बाद में डिलीट कर दिया गया। लेकिन यूजर्स तब तक इसका स्क्रीनशॉट लेकर इसे वायरल कर चुके थे।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार भाजपा पार्षद भालचंद्र ने इस ट्वीट को पढ़कर लिखा, “मुंबई की पहली नागरिक होने के नाते, सार्वजनिक क्षेत्र में सभ्य और सुसंस्कृत भाषा (उससे) की अपेक्षा करते हैं।” समाजवादी पार्टी के नेता रईस शेख लिखते हैं कि कम से कम मेयर को उस ऑफिस का मान-सम्मान बनाए रखना चाहिए जिसे वह सँभालती हैं। ये उस ऑफिस की छवि गलत बनाता है जिसका दारोमदार उन पर है।

पत्रकार शेफाली वैद्य इस मामले में पेडनेकर के स्क्रीनशॉट शेयर करके कहती हैं, “भाइयो और बहनों मेयर किशोरी पेडनेकर एक आम नागरिक को गाली दे रही हैं, क्योंकि उसने सिर्फ एक सवाल किया। यही शिवसेना की असल परंपरा है। ये मुंबई की पहली नागरिक हैं। बहुत बढ़िया।”

सामान्य यूजर्स का पूछना है कि क्या आखिर ये तरीका होता है मुंबई वालों से बात करने का। यूजर ने सिर्फ साधारण सा सवाल किया था। लेकिन पेडनेकर इतनी अभद्रता से जवाब दिया। उन्हें इसके लिए माफी माँगनी ही चाहिए। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि किसी शिवसेना नेता से ऐसी अभद्र भाषा का प्रयोग सुनना कोई हैरानी की बात नहीं है, क्योंकि ये सब वह हमेशा करते हैं।

किशोरी पेडनेकर ने सफाई देते हुए कहा है कि ट्वीट शिवसेना के एक कार्यकर्ता ने किया था। वह एक आयोजन में थीं और उन्होंने अपना फोन उसे दे रखा था।

मालूम हो कि किशोरी पेडनेकर ने एक नर्स के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी लेकिन 1992 में वह शिवसेना से जुड़ीं और पहली बार पार्षद के तौर पर उन्हें 2002 में चुना गया। फिर 2012 और 2017 में भी वह पार्षद चुनीं गई। 2019 में उन्हें मुंबई के 77वें मेयर का पद मिला।

गौरतलब है कि किशोरी पेडनेकर पिछले दिनों कुम्भ पर बयानबाजी के कारण विवादों में आई थी। उन्होंने कुंभ को लेकर कहा था कि पिछले साल जैसे तबलीगी जमात के कारण स्थिति बिगड़ी, वैसे ही अब कुम्भ से लौटने वाले अपने-अपने राज्य में कोरोना को प्रसाद की तरह बाँटेंगे। इसलिए उन्हें प्रवेश देने से पहले उन्हीं के पैसों पर क्वारंटाइन करवाया जाना चाहिए।