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सवाल: वैक्सीन का कॉन्ट्रैक्ट किसको? जवाब: तेरे बाप को; बदजुबानी के बाद मुंबई की महिला मेयर ने डिलीट मारा ट्वीट

मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर अब एक नए विवाद के कारण सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रही हैं। इस दफा उन्होंने एक यूजर्स को जवाब देने के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया है। इसके बाद ट्विटर यूजर उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाने लगे।

दरअसल, मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर ने एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू की वीडियो को अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर किया था। इस इंटरव्यू में मुंबई के अंदर वैक्सीनेशन के लिए उन 9 कंपनियों की बात की गई थी, जिनसे बीएमसी कॉन्ट्रैक्ट देकर वैक्सीन खरीदने की कोशिश कर रही है। 

इसी ट्वीट के नीचे जब एक यूजर ने उनसे पूछा कि किन कंपनियों को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है। जवाब में पेडनेकर ने मराठी में लिखा- तुझ्या बापाला यानी ‘तेरे बाप को।” इस ट्वीट को हालाँकि बाद में डिलीट कर दिया गया। लेकिन यूजर्स तब तक इसका स्क्रीनशॉट लेकर इसे वायरल कर चुके थे।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार भाजपा पार्षद भालचंद्र ने इस ट्वीट को पढ़कर लिखा, “मुंबई की पहली नागरिक होने के नाते, सार्वजनिक क्षेत्र में सभ्य और सुसंस्कृत भाषा (उससे) की अपेक्षा करते हैं।” समाजवादी पार्टी के नेता रईस शेख लिखते हैं कि कम से कम मेयर को उस ऑफिस का मान-सम्मान बनाए रखना चाहिए जिसे वह सँभालती हैं। ये उस ऑफिस की छवि गलत बनाता है जिसका दारोमदार उन पर है।

पत्रकार शेफाली वैद्य इस मामले में पेडनेकर के स्क्रीनशॉट शेयर करके कहती हैं, “भाइयो और बहनों मेयर किशोरी पेडनेकर एक आम नागरिक को गाली दे रही हैं, क्योंकि उसने सिर्फ एक सवाल किया। यही शिवसेना की असल परंपरा है। ये मुंबई की पहली नागरिक हैं। बहुत बढ़िया।”

सामान्य यूजर्स का पूछना है कि क्या आखिर ये तरीका होता है मुंबई वालों से बात करने का। यूजर ने सिर्फ साधारण सा सवाल किया था। लेकिन पेडनेकर इतनी अभद्रता से जवाब दिया। उन्हें इसके लिए माफी माँगनी ही चाहिए। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि किसी शिवसेना नेता से ऐसी अभद्र भाषा का प्रयोग सुनना कोई हैरानी की बात नहीं है, क्योंकि ये सब वह हमेशा करते हैं।

किशोरी पेडनेकर ने सफाई देते हुए कहा है कि ट्वीट शिवसेना के एक कार्यकर्ता ने किया था। वह एक आयोजन में थीं और उन्होंने अपना फोन उसे दे रखा था।

मालूम हो कि किशोरी पेडनेकर ने एक नर्स के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी लेकिन 1992 में वह शिवसेना से जुड़ीं और पहली बार पार्षद के तौर पर उन्हें 2002 में चुना गया। फिर 2012 और 2017 में भी वह पार्षद चुनीं गई। 2019 में उन्हें मुंबई के 77वें मेयर का पद मिला।

गौरतलब है कि किशोरी पेडनेकर पिछले दिनों कुम्भ पर बयानबाजी के कारण विवादों में आई थी। उन्होंने कुंभ को लेकर कहा था कि पिछले साल जैसे तबलीगी जमात के कारण स्थिति बिगड़ी, वैसे ही अब कुम्भ से लौटने वाले अपने-अपने राज्य में कोरोना को प्रसाद की तरह बाँटेंगे। इसलिए उन्हें प्रवेश देने से पहले उन्हीं के पैसों पर क्वारंटाइन करवाया जाना चाहिए।

‘पापा ही घर में कमाने वाले थे…’: राकेश पंडिता का शव देख फफक पड़े परिजन, त्राल में आतंकियों ने कर दी थी हत्या

बीजेपी नेता राकेश पंडिता का गुरुवार (3 जून 2021) को त्राल में अंतिम संस्कार किया गया। वे पुलवामा जिले के त्राल नगरपालिका अध्यक्ष थे। आतंकियों ने बुधवार को उनकी हत्या उस समय कर दी जब वे अपने एक दोस्त के घर आए हुए थे। हत्या की जिम्मेदारी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के विंग PAFF ने ली है। PAFF कुछ दिनों से कश्मीर घाटी में अपना प्रभाव बढ़ाने के प्रयास में है।

पंडिता का शव जैसे ही घर पहुँचा परिजन फफक पड़े। अंतिम संस्कार के बाद उनके बेटे ने कहा, “पापा ही हमारे घर में कमाने वाले थे। मेरी मम्मी हाउस वाइफ हैं और चाचा विकलांग। मैं सरकार से यही चाहता हूँ कि अगर ये साज़िश है तो पता किया जाए कि इसके पीछे कौन थे।”

इसी बीच जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष रवींद्र रैना ने कहा कि राकेश पंडिता नब्बे के दशक से ही घाटी में आतंकवाद और अलगाववाद की चुनौती के बीच डटे हुए थे। रैना ने कहा कि इस हत्या ने एक बार फिर पाकिस्तान के मंसूबों को उजागर कर दिया है और घटना को अंजाम देने वाले आतंकी चुन-चुन कर मारे जाएँगे।

कश्मीर भाजपा के प्रवक्ता मंजूर भट्ट ने बताया था कि पंडिता घाटी में भाजपा के एक सक्रिय नेता थे और एक साजिश के तहत भाजपा नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। भट्ट ने कहा कि आतंकी जितने भाजपा कार्यकर्ताओं को मारेंगे, उतने और खड़े हो जाएँगे।

घटना के बाद से ही पुलिस और सेना की टीमें इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रही है। पुलिस ने बताया कि पंडिता की सुरक्षा में दो पीएसओ तैनात थे। लेकिन वे बिना सुरक्षा के ही त्राल चले गए थे। गोली लगने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। हमले में एक महिला भी घायल हुई है जो पंडिता के दोस्त की बेटी बताई जा रही है।

64 मरीजों को लौटाया गया पैसा: CM योगी के आदेश पर कार्रवाई, Covid-19 के नाम पर अस्पतालों की लूट पर रोक

उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस के इलाज के नाम पर मरीजों से ज्यादा पैसे वसूलने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद उत्तर प्रदेश प्रशासन ने कई अस्पतालों से मरीजों के पैसे वापस कराए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर पहले गौतम बुद्ध नगर में और अब हापुड़ एवं मेरठ में भी प्रशासन ने अस्पतालों से कई मरीजों के पैसे वापस कराए हैं।

उत्तर प्रदेश में कोविड अस्पतालों में कोरोना वायरस संक्रमण के लिए दर निर्धारित की गई थी। इसके अंतर्गत आइसोलेशन में भर्ती मरीजों के लिए प्रतिदिन 4800 रुपए, आईसीयू के 7800 रुपए और आईसीयू वेंटीलेंटर के 9000 रुपए तय किए थे। इसमें अस्पतालों में ऑक्सीजन, बेड, भोजन, नर्सिंग सर्विस, चिकित्सकीय जाँच एवं कंसल्टेशन भी शामिल था। इसके अतिरिक्त अस्पताल मरीज से किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूल सकते थे।

हालाँकि शासन द्वारा इलाज दरें निर्धारित करने के बाद भी मरीजों से अतिरिक्त शुल्क लेने की खबरें सामने आ रही थीं। लगातार शिकायतों के बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन को निर्देशित किया था कि अस्पतालों के खिलाफ ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई की जाए।  

ऐसी ही कुछ शिकायतें हापुड़ और मेरठ से भी प्रशासन तक पहुँची। शासन के निर्देश पर हापुड़ के डीएम ने 2 कोविड अस्पतालों को नोटिस दिया। वहीं 5 अस्पतालों से तय सीमा से अधिक शुल्क वसूल करने पर मरीजों के पैसे लौटाने के लिए कहा गया। बिल से असन्तुष्ट होने वाले मरीजों की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए हापुड़ प्रशासन ने देव नंदिनी अस्पताल में भर्ती 30 मरीजों, आरोग्य अस्पताल में भर्ती 12 मरीजों , जीएस अस्पताल में 2 मरीजों और रामा अस्पताल में 2 मरीजों से तय दर से अधिक लिए गए शुल्क को लौटाने को कहा। इस पर देव नंदिनी अस्पताल ने मरीजों को 3.50 लाख रुपए वापस भी कर दिए।

लाइव हिंदुस्तान की खबर के अनुसार मेरठ में भी ऐसी 49 शिकायतें प्रशासन को प्राप्त हुईं, जिनमें 18 शिकायतें सही पाई गईं। मेरठ प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 2 अस्पतालों से 4 लाख रुपए वापस कराए और जबकि तीन बड़े अस्पतालों के लायसेन्स रद्द किए गए हैं।

इससे पहले गौतम बुद्ध नगर में भी मरीजों से तय दर से अधिक पैसे वसूलने का मामला सामने आया था। सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश पर निर्धारित दरों से अधिक वसूली गई राशि मरीजों को वापस कराई गई थी। गौतम बुद्ध नगर में तीन मरीजों को क्रमशः 150000 रुपए, 28400 रुपए और 31247 रुपए वापस कराए गए थे। जबकि एक मरीज के अंतिम बिल में 325000 रुपए की छूट अस्पताल से प्रदान कराई गई।

Covid-19 महामारी के दौरान अस्पतालों में मरीजों से मनमानी दरों पर पैसे वसूलने के कई मामले सामने आए थे, जिन पर संज्ञान लेते हुए सीएम आदित्यनाथ ने प्रशासन को यह निर्देशित किया था कि इन शिकायतों की जाँच कर ऐसे अस्पतालों का डेटा तैयार करें। इसके लिए मरीजों और उनके परिजनों को भी यह सुविधा दी गई थी कि मरीज या उनके परिजन निजी कोविड अस्पतालों के द्वारा निर्धारित दरों से अधिक राशि वसूलने से असन्तुष्ट हैं तो वे लिखित में डीएम के पास शिकायत कर सकते हैं।  

कब्रिस्तान में गैंगरेप के बाद इंटरनेट पर डाल दी Video, 14 साल की पीड़िता ने ले ली अपनी जान: 5 आरोपितों में 3 नाबालिग

महज 14 साल की उम्र में उसने खुद की जान ले ली। वजह कब्रिस्तान में 5 लोगों ने उससे गैंगरेप किया। फिर इसका वीडियो वायरल कर दिया। इसने उसे घटना के 4 दिन बाद सुसाइड करने पर मजबूर कर दिया। मामला बेल्जियम का है।

पुलिस ने पाँचों आरोपितों को हिरासत में ले लिया है। इनमें से तीन नाबालिग हैं। 2 आरोपितों की उम्र 18-19 साल है। जानकारी के मुताबिक, पीड़िता गवेरे निवासी थी। वह 15 मई को गेन्ट में वेस्टरबेग्राफप्लाट्स कब्रिस्तान में एक दोस्त से मिलने गई थी। वहाँ उसके दोस्त के साथ अन्य लोग भी थे। उन्होंने गैंगरेप के बाद घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दी।

घटना के 4 दिन बाद लड़की ने आत्महत्या कर ली। उसके किसी दोस्त ने उसके माता-पिता को बताया कि उसका गैंगरेप हुआ था। सूचना पाते ही पुलिस ने वीडियो और तस्वीर में नजर आ रहे युवकों का पता लगाया। इनमें से तीन 14-15 साल की उम्र के निकले और बाकी दो 18 और 19 साल के निकले।

पुलिस ने पाँचों को हिरासत में ले लिया। अदालत में वकील ने भी लड़की की मौत के पीछे इन्हीं पाँचों को संदिग्ध बताया। तीनों नाबालिगों को जुवेनाइल जज ने एक क्लोज्ड संस्थान में रखने के आदेश दिए हैं और बाकी दोनों आरोपितों की गिरफ्तारी कर ली गई है।

गवेरे के मेयर ने इस घटना पर कहा है कि वह पीड़िता को अच्छे से जानते थे और जो कुछ भी उसके साथ हुआ वह बेहद भयावह और अमानवीय है। न्याय मंत्री विंसेंट वैन क्विकर्नबॉर्न ने ट्विटर पर वादा किया कि घटना के पीछे जिम्मेदार लोगों को सजा दिलवाई जाएगी। मंत्री ने घटना को घृणित बताते हुए कहा, “इसे बयान करने के लिए शब्द नहीं हैं। संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया है और जाँच जारी है।”

लड़की के पिता का कहना है कि उनकी बेटी पिछले कुछ समय से कुछ चीजों से जूझ रही थी। वह कठिनाइयों का सामना कर रही थी। ऐसे में ये तथ्य और तस्वीरें उसके लिए किसी आखिरी तिनके जैसी थीं। एक 14 साल की बच्ची को ऐसी चीजों से नहीं गुजरना चाहिए। उसने अपना सब कुछ खोते हुए देखा। अगर ये लोग नहीं होते तो शायद वो यहाँ होती। अब उनको सिर्फ न्याय की उम्मीद है।

गौरतलब है कि कब्रिस्तान में लड़की से दुष्कर्म का ये मामला उसी समय प्रकाश में आया है जब दिल्ली में 48 साल के एक मौलवी पर मस्जिद के भीतर एक नाबालिग लड़की का बलात्कार करने का आरोप लगा और उसकी गिरफ्तारी हुई। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने मंगलवार (जून 1, 2021) को जानकारी दी थी। पुलिस ने इस मामले की FIR दर्ज करने के बाद आरोपित मौलवी को अदालत में पेश किया था। कोर्ट ने उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेज दिया था।

मुस्लिमों के बीच काला लिबास, हिन्दुओं के बीच चंदन लगाना: प्रियंका के बहरूपिया पर विश्वास कर कौन देगा वोट?

यदि स्लेट सफा चट्ट रहे तो फिर उस पर इच्छानुसार कुछ भी लिखा जा सकता है। छात्र वर्णमाला से लेकर व्याकरण और गिनती से लेकर पहाड़ा तक, कुछ भी टीप सकता है। और छात्र यदि पढ़ने की ऐक्टिंग करने वाला हो तो फिर पढ़ाई करने का आभास देते हुए वह उस पर फूलपत्ती भी आँक सकता है। उत्तर प्रदेश चुनावों के परिप्रेक्ष्य में कॉन्ग्रेस पार्टी अपनी सफा चट्ट स्लेट पर वही फूलपत्ती आँकने में जुट गई है। ऐसे में किसी को इस बात पर आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि अभी कुछ महीने पहले तक माथे पर चन्दन लगा और माता की चुनरी ओढ़ कर पूजा करते हुए फोटो खिंचवाने वाली कान्ग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा जी ने अब उत्तर प्रदेश में उलेमाओं के साथ वर्चुअल मीटिंग शुरू कर दी है। यह सफा चट्ट स्लेट पर पहाड़ा है या फूलपत्ती, यह तो समय ही बता पाएगा।

पार्टी का मानना है कि उसे अपने पुराने मुस्लिम वोट बैंक को पाने की कोशिश फिर से करनी चाहिए। कोई भी राजनीतिक दल करेगा क्योंकि राजनीति में कोशिश करना ही सफलता का आधार होता है पर जो वोट बैंक तीस वर्ष पहले छिटक कर चला गया था, उसे वापस पाने के लिए क्या उलेमाओं के साथ वर्चुअल मीटिंग काफी होगी?

जानकार बता रहे हैं कि सप्ताह में दो बार मीटिंग करने से वोट बैंक के पार्टी के पास वापस आने की संभावना बढ़ जाएगी। ये जानकार यह भी बताते हैं कि पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुसलमानों को अपने साथ लेना चाहती है क्योंकि वहाँ इस्लामिक शिक्षा के केंद्र हैं। मतलब यह कि पार्टी हर वो काम करने के लिए तैयार है, जिससे मुसलमानों का वोट उसे मिल सके। बिना इस बात की चिंता किए कि जिस ध्रुवीकरण का आरोप पार्टी भाजपा पर लगाती है, उसकी शुरुआत खुद कर रही है।

राजनीति हो या कॉर्पोरेट, सारे संभावित सिद्धांत और दर्शन उपलब्ध होने के बावजूद नेता और राजनीतिक दल सबसे पहले व्यावहारिकता और पूर्व सफलता के रेप्लिकेशन की ही शरण में जाते हैं। राजनीतिक सलाहकारों और रणनीतिकारों द्वारा दलों के नेताओं को याद कराया जाता है कि; एक बार जब बीस साल पहले या तीस साल पहले ये समस्या आई थी, या वो वाला संकट आया था तब आपकी दादी, नानी, नाना, पापा ने ये राजनीतिक चाल चली थी और स्थिति नियंत्रण में आ गई थी।

प्रियंका वाड्रा भी इस समय शायद ऐसी ही किसी राजनीतिक सलाह को मानकर पुराने दिनों की कॉन्ग्रेसी रणनीति दोहराना चाहती हैं। साथ ही कॉन्ग्रेस पार्टी शायद पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को मिली सफलता से भी प्रेरित है और सफलता के उसी मॉडल को उत्तर प्रदेश में दोहराना चाहती है। पर मुस्लिम वोटिंग के पश्चिम बंगाल मॉडल को उत्तर प्रदेश में दोहराना कॉन्ग्रेस के लिए आसान होगा? यदि आसान न होगा तो भी, क्या संभव होगा? यह ऐसा प्रश्न है, जिसे पीछे नहीं फेंका जा सकता और उसके कई कारण हैं।

कोई भी इमारत हवा में नहीं बल्कि नींव पर खड़ी होती है। ऐसे में कॉन्ग्रेस की इस कवायद पर पहला प्रश्न यह उठेगा कि ममता बनर्जी की जिस सफलता को कॉन्ग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में दोहराना चाहती है, उसके लिए पार्टी के पास राज्य में संगठन है? और यदि है तो क्या पर्याप्त है?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के समय ममता बनर्जी की अपनी पार्टी के पास एक मज़बूत संगठन था, जिसकी सफलता की संभावना पर विश्वास करके मुसलमान तृणमूल कॉन्ग्रेस को वोट करने के लिए मन बना पाए। उसमें भी ऐसा वोट बैंक शामिल था, जिसे कॉन्ग्रेस पार्टी और वामपंथियों ने कई जगह खुद ममता के पास जाने का रास्ता दिखाया। दोनों दलों ने अपने मुस्लिम वोट बैंक को बताया कि; हम नहीं जीत सकते इसलिए ‘सेक्युलर’ राजनीति को ऑक्सीजन देने के लिए यह आवश्यक है कि आप अपना वोट बैंक ममता बनर्जी के पास ले जाएँ। जिस कॉन्ग्रेस पार्टी के पास उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में संगठन तक नहीं है, उसकी सफलता की संभावना पर उलेमा, मौलाना या मुस्लिम समुदाय विश्वास कर सकेगा?

दूसरा प्रश्न यह है कि उत्तर प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियाँ वैसी ही हैं, जैसी पश्चिम बंगाल की थीं? पश्चिम बंगाल में ‘सेक्युलर’ राजनीतिक दलों/गुटों की संख्या तीन थी, जिसमें राजनीतिक शक्ति के अनुसार तृणमूल कॉन्ग्रेस हर लिहाज से सबसे बड़ा दल है। कॉन्ग्रेस और वामपंथी दल के पास संगठन कुछ ही इलाकों में बचा है। उनके पास बाकी के संसाधन भी मजबूत नहीं थे। प्रश्न यह है कि क्या ऐसी ही स्थिति उत्तर प्रदेश में है?

उत्तर प्रदेश में ‘सेक्युलर’ वोट लेने के लिए भी तीन दल हैं, जिनमें कॉन्ग्रेस सबसे कमज़ोर है। भाजपा से मुकाबले की दौड़ में समाजवादी पार्टी सबसे आगे है क्योंकि उसके पास मुस्लिम वोट के अलावा भी अपना एक वोट बैंक है। यही बात बसपा पर भी लागू होती है। पर यहाँ प्रश्न उठता है कि कॉन्ग्रेस के पास क्या है? कॉन्ग्रेस की तो यह हालत है कि उसे राज्य की सभी विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवार खोजना भी असंभव सा जान पड़ेगा। क्या मुसलमान वोट बैंक उस राजनीतिक दल पर विश्वास कर सकता है, जिसका नेता उत्तर प्रदेश छोड़कर केरल चला गया?

पश्चिम बंगाल में मुस्लिम वोट बैंक का ट्रांसफर इसलिए सरल रहा क्योंकि वहाँ वोट एक पार्टी के पक्ष में जाने थे। क्या उत्तर प्रदेश में ऐसा हो सकता है? शायद नहीं। और यदि मुस्लिम वोट बैंक के लिए समाजवादी पार्टी, कॉन्ग्रेस और बसपा पश्चिम बंगाल मॉडल को रेप्लिकेट करना चाहेंगे तो तीनों दलों को समान वोट मिले, इसके लिए कोई कारगर मॉडल बनाया जाना आसान होगा? यदि ऐसी कोई संभावना हो भी तो उसका आधार क्या होगा? और बाकी के दो दल किसी एक दल के पक्ष में मुस्लिम वोट बैंक ट्रांसफर करना भी चाहेंगे तो क्या वह दल कॉन्ग्रेस हो सकता है? ये ऐसे प्रश्न हैं, जिनका उत्तर कॉन्ग्रेस पार्टी को खोजना होगा।

उसके अलावा प्रश्न यह उठेगा कि राहुल गाँधी और प्रियंका वाड्रा की लगभग चार वर्षों की उस मेहनत का क्या हासिल होगा, जिसकी वजह उन्होंने बार-बार साबित करने की कोशिश की है कि हिन्दू हितों के सबसे बड़े वाहक वही हैं? मंदिर-मंदिर घूमकर पूजा, संगम में स्नान और खुद को गंगा पुत्री बताना ऐसे ही मेहनत वाले काम हैं, जिन्हें आगे रखकर हिन्दुओं का विश्वास जीतने की कोशिश की गई थी। जिस सफा चट्ट स्लेट पर एक समय हिन्दू आस्था वाला अध्याय लिखा गया था, उसे फिर से साफ़ करके उसी पर मुस्लिम आस्था वाला अध्याय लिखना कितना सरल होगा?

मुसलमानों के बीच जाने पर काला लिबास पहनना और हिन्दुओं के बीच जाने पर चंदन लगाना प्रियंका के लिए आसान होगा पर उस पर विश्वास करके वोट कर देना वोटर के लिए आसान नहीं होता। साथ ही पार्टी के अंदर और बाहर प्रश्न यह भी उठेगा कि जो प्रियंका कर रही हैं, उस रणनीति को क्या राहुल का भी समर्थन प्राप्त है? यह प्रश्न इसलिए भी उठेगा क्योंकि यह धारणा अब तक आम हो चुकी है कि कॉन्ग्रेस में दोनों के अपने-अपने गुट हैं।     

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में बस आठ महीने बचे हैं। ऐसे में कॉन्ग्रेस के लिए मुस्लिम वोट बैंक का विश्वास जीतने लायक संगठन इतनी जल्दी तैयार कर लेना आसान न होगा। उलेमाओं के साथ मीटिंग वगैरह करके कॉन्ग्रेस पार्टी अधिक से अधिक किसी संभावित गठबंधन के लिए बार्गेनिंग पॉवर इकट्ठा करने की कोशिश भले कर सकती है पर मीटिंग की बुनियाद पर मुस्लिम वोट बैंक हासिल कर लेना पार्टी के लिए फिलहाल दूर की कौड़ी है।              

पूजा के वक्त महंत पर होता हमला? डासना मंदिर में घुसे संदिग्धों को थी यति नरसिंहानंद की पल-पल की खबर

गाजियाबाद के डासना स्थित शिव-शक्ति धाम परिसर में बुधवार (जून 2, 2021) की रात काशिफ़ और विपुल नाम के दो व्यक्ति घातक ड्रग सायनाइड और सर्जिकल ब्लेड के साथ घुस गए थे। दोनों फ़िलहाल पुलिस की गिरफ्त में हैं। 20 दिनों में ये दूसरी बार है जब महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या का प्रयास किया गया। अब पता चला है कि मंदिर में घुसे इन दो संदिग्धों को महंत यति की गतिविधियों की पूरी जानकारी थी।

‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, ये दोनों ऐसे समय में मंदिर परिसर में घुसे थे जब नरसिंहानंद सरस्वती पूजा-पाठ में तल्लीन होते हैं और अपनी सुरक्षा से अलग होते हैं। महंत की दिनचर्या की बातें करें तो वो प्रतिदिन शाम 7 बजे से लेकर पौने 9 बजे तक मंदिर परिसर में हवन करते हैं। इसके बाद आरती की जाती है। इस दौरान वो अपने साथ सुरक्षा नहीं रखते। संदिग्धों को इसकी पूरी सूचना थी।

तभी वो तो रात के ठीक 8-9 बजे के मध्य में ही मंदिर परिसर में दाखिल हुए। इस समय महंत यति अपने अनुयायी अनिल यादव के लालकुआँ में स्थित दफ्तर से ‘सुदर्शन न्यूज़’ के एक लाइव डिबेट शो में हिस्सा ले रहे थे। इसी कारण संदिग्धों से उनका आमना-सामना नहीं हो पाया और शक होने पर सेवादारों ने उन दोनों को पकड़ लिया। महंत के करीबियों ने पुलिस को भी उनकी सुरक्षा के प्रति गंभीर रहने और लापरवाही न बरतने का आग्रह किया है।

डासना के मंदिर में दबोचे गए दो संदिग्ध

अनुयायियों का कहना है कि देश में कई शहरों में उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए, धमकी भरी नारेबाजी हुई 20 दिन पहले ही जम्मू कश्मीर से आया मोहम्मद डार उर्फ़ जहाँगीर दबोचा गया था, लेकिन फिर भी उनकी सुरक्षा में सिर्फ एक गार्ड की तैनाती की गई है। पुलिसकर्मियों से निवेदन किया गया है कि वो मंदिर परिसर में आने वालों की सघन जाँच करें। पूर्व में भी उन पर हमले के कई असफल प्रयास हो चुके हैं।

बता दें कि इन दोनों ने मंदिर के प्रमुख द्वार के बाहर एंट्री रजिस्टर में अपना नाम डॉक्टर विपुल विजय वर्गीय नागपुर और काशी गुप्ता के रूप में कराई थी। अनिल यादव ने पुलिस में इस मामले की शिकायत दर्ज कराई है। काशिफ़ ने पूछताछ में बताया कि विपुल से उसकी दोस्ती फेसबुक के जरिए हुई थी और फिर फोन पर बातचीत होने लगी। उसका कहना है कि विपुल कुछ दिनों से गाजियाबाद आया हुआ था और उसे डासना के मंदिर का दर्शन करना था, इसीलिए वो उन्हें यहाँ लेकर आया था।

‘तुम्हारी गाय को फ# करूँगा’ कहने वाला रैपर MC कोड लापता: ‘लाश’ की तस्वीर वायरल, जानें सच

हाल ही में हिंदू धर्म के अपमान वाले अपने पुराने वीडियो सोशल मीडिया वायरल होने के बाद विवादों में रहा रैपर एमसी कोड (MC Kode) कोड बुधवार (2 जून) को कथित तौर पर नई दिल्ली से लापता हो गया।

कई सोशल मीडिया यूजर्स ने हाल ही में हिंदुओं और महाभारत, गीता और गायों पर एमसी कोड द्वारा किए गए अपमानजनक कमेंट्स वाले वीडियो का पर्दाफाश किया था, जिसके एक हफ्ते बाद, वह कथित तौर पर लापता हो गया है। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स के अनुसार, एमसी कोड ने इंस्टाग्राम पर एक संदेश पोस्ट किया था जिसमें उसने अपनी जीवन लीला समाप्त करने की धमकी दी थी।

एमसी कोडे, जिसका हैंडल ‘forreal_kode’ नाम से हैं, ने इंस्टाग्राम पर एक लंबी पोस्ट पोस्ट करते हुए कहा कि कैसे वह जीवन की लगातार पीड़ा, परीक्षा और क्लेश का सामना कर रहा है, जिसने वीडियो वायरल होने के बाद उसे कमजोर बना दिया है। अपने पोस्ट में, एमसी कोड ने कहा कि वह यमुना नदी पर बने एक सुनसान पुल पर खड़ा है, जहाँ वह लहरों को ‘अपने मुसीबत में दी गई आवाज का जवाब’ देते देख सकता है।

अपने जीवन को समाप्त करने की धमकी देते हुए, रैपर ने कहा कि वह केवल माफी माँग सकता है क्योंकि उसके स्वार्थी कामों से निश्चित रूप से बहुत दुख होगा। उसने साथ ही दूसरों से अपने साथ जुड़े लोगों को परेशान न करने का भी आग्रह किया और कहा कि वह किसी भी चीज के लिए किसी को भी नहीं बल्कि खुद को दोषी ठहराता है।

आदित्य तिवारी, जिसने रैपर के रूप में फेमस होने के लिए अपना नाम एमसी कोड रखा है, नई दिल्ली स्थित एक रैपर है। वर्षों से, वह मुंबई, गुजरात, गुवाहाटी, जयपुर, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सहित कई राज्यों में रैप बैटल्स की मेजबानी, भागीदारी और उनमें जज की भूमिका निभाता रहा है।

एमसी कोड के इंस्टाग्राम पोस्ट ने अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हलचल मचा दी है और कई लोग रैपर की तलाश कर रहे हैं, जिसने यमुना नदी में कूदकर अपनी जान देने की धमकी दी है।

एमसी कोड की ‘डेड बॉडी’ की वायरल तस्वीर फेक

सोशल मीडिया में जहाँ कई लोग विवादास्पद रैपर का पता लगाने में मदद कर रहे हैं,तो वहीं कुछ ट्विटर यूजर्स सोशल मीडिया में गलत सूचना फैलाने में लिप्त हैं, जो दावा कर रहे हैं रैपर ने पहले ही अपना जीवन समाप्त कर ली है।

एक ट्विटर यूजर ने गुरुवार (3 जून) को एक मृत व्यक्ति की तस्वीर पोस्ट करते हुए दावा किया कि मृतक एमसी कोड है। ट्विटर यूजर ने दावा किया कि रैपर का शव, जिसने पहले सुसाइड नोट पोस्ट किया था, दिल्ली में यमुना बैंक के पास प्रगति थर्मल पावर स्टेशन के पास बरामद किया गया।

मोनीश द्वारा साझा की गई तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में जंगल की आग की तरह फैल गईं, जिससे यूजर्स में अनावश्यक घबराहट फैल गई।

हालाँकि, सोशल मीडिया में वायरल हुई तस्वीर एमसी कोड से जुड़ी नहीं है।

फैक्ट चेक:

ट्विटर यूजर ने जिन तस्वीरों को एमसी कोड के शव के रूप में शेयर किया, वे वास्तव में बांग्लादेश में 2017 में एक दुखद घटना के बाद ली गई थीं।

10 अक्टूबर, 2017 को, रोहिंग्या शरणार्थियों को ले जा रही एक ओवरलोड नाव कॉक्स बाजार के पास पलट गई थी, जिसमें कम से कम 14 रोहिंग्या शरणार्थी मारे गए थे, जिनमें से अधिकांश बच्चे थे। आप समर्थक द्वारा एमसी कोड के शव के रूप में साझा की गई तस्वीरें 2017 की दुखद घटना के दौरान खींची गई थीं।

सोशल मीडिया यूजर्स के अनुसार, ट्विटर यूजर द्वारा रैपर एमसी कोड के शव के रूप में जारी की गई तस्वीर पूरी तरह से फर्जी है क्योंकि यह चार साल पहले बांग्लादेश के पास हुई एक नाव त्रासदी से जुड़ी है।

सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि एमसी कोड का ‘गायब होने’ का इतिहास रहा है। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने बताया है कि यह पहली बार नहीं है जब रैपर लापता हुआ है और वह पहले भी ऐसा कर चुका है। एक पुराने सोशल मीडिया पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि आदित्य तिवारी उर्फ ​​एमसी कड़े 2014 में भी एक बार ‘लापता’ हो गया था।

पिछले हफ्ते वायरल हुआ था रैपर MC कोड का विवादित वीडियो

पिछले हफ्ते सोशल मीडिया में हिंदू धर्म और उसकी मान्यताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ करते और गाली देते एमसी रैपर का एक पुराना वीडियो वायरल हुआ था। एक ‘रैप बैटल’ के दौरान रैपर एमसी कोड (MC Kode) ने हिन्दू धर्म का अपमान किया। उक्त रैपर ने हिन्दू धर्म की पवित्र पुस्तकों महाभारत और भगवद्गीता पर अश्लील टिप्पणी की थी। एमसी कोड ने एक रैप बैटल के दौरान कहा, “अगर तुम हिन्दू हो मैं तुम्हारी पवित्र गाय को फ़$ करूँगा। मैं तुम्हारे महाभारत पर मास्टरबेट (हस्तमैथुन) कर दूँगा।” महाभारत का नाम लेने से पहले वो ‘क्या था, क्या था’ बोलता है, जिस पर कुछ रैपर्स उसे ‘भगवद्गीता’ का नाम बताते हैं और फिर वो इस पुस्तक का नाम भी लेता है।

नई दिल्ली में रहने वाले एमसी कोड का असली नाम आदित्य तिवारी है और उसने ये नाम रैपर के रूप में लोकप्रिय होने के लिए रखा है। मुंबई, गुजरात, गुवाहाटी, जयपुर, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से लेकर कई जगहों पर वो ‘रैप बैटल्स’ आयोजित कर चुका है और ऐसे रैप बैटल्स की होस्टिंग और जजिंग भी करता रहा है। विवादित वीडियो जून 12, 2016 का है जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इस ‘रैप बैटल’ में वो सामने वाले रैपर की माँ को लेकर अश्लील बातें करता है और फिर हिन्दू धर्म की पुस्तकों पर आ जाता है। महाभारत, गीता और गाय के साथ वो बार-बार ‘फ़किं$-फ़$ग’ जैसे अश्लील शब्द का इस्तेमाल करता है। ‘Redbull’ कंपनी भी एमसी कोड को प्रमोट करती रही है। हालाँकि, ‘Redbull’ की वेबसाइट पर एमसी कोड से जुड़े कंटेंट्स पर ‘404 एरर’ दिखा रहा है। उसने मार्च 2021 में एमसी कोड का एक प्रोफाइल तैयार किया था।

वीडियो वायरल होने के बाद, एमसी कोडे ने पूरे मामले को लेकर माफी माँगी थी और उसने अपने सभी गानों को स्ट्रीमिंग और यूट्यूब से हटाने का अनुरोध किया था।

यहाँ यह उल्लेखनीय है कि अभी तक उक्त रैपर के लापता होने या उसके साथ किसी दुर्घटना की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पड़ोसन ने ईद की पार्टी में बुलाया, 3 युवकों से 2 बार करवाया विवाहिता का गैंगरेप: अश्लील वीडियो भी शूट किया, पति ने खाया ज़हर

मेरठ में ईद की पार्टी में बुला कर विवाहिता का गैंगरेप किए जाने के मामला सामने आया है। आरोप है कि विवाहिता की पुरानी पड़ोसन ने उसे ईद की पार्टी के बहाने बुलाया, फिर कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ मिला कर पिला दिया। पीड़िता के बेहोश होने के बाद तीन युवकों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया। इतना ही नहीं, आरोपितों ने गैंगरेप का वीडियो भी शूट कर लिया। काफी देर बाद पीड़िता को होश आया।

आरोप है कि उसके होश में आने के बाद आरोपितों ने वीडियो इंटरनेट पर वायरल करने की धमकी देते हुए फिर से उसका रेप किया। पीड़िता ने कुछ दिन बाद अपने पति को इसकी जानकारी दी। पति को इस वारदात से गहरा धक्का लगा और शर्म के कारण अवसाद में आकर उसे ज़हर खा लिया। परिजनों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उसका इलाज चल रहा है। ये मामला लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र की है।

पीड़िता अपने पति के साथ रहती थी। दोनों ने हाल ही में किराए का मकान बदल लिया था। वो कहीं और रहने लगे थे। विवाहिता की पुरानी पड़ोसन ने उसे ईद की पार्टी के बहाने अपने घर बुलाया। वो अपने बच्चों के साथ ईद की दावत समझ कर पहुँच गई। लेकिन, वहाँ उसका गैंगरेप हुआ और अश्लील वीडियो शूट कर लिया गया। पीड़िता ने घर आकर किसी को कुछ नहीं बताया, लेकिन वो काफी गुमशुम रहती थी।

पति ने जब इसका कारण पूछा तो उसने सारी बात बता दी। पीड़िता ने परिजनों के साथ थाना पहुँच कर गैंगरेप की तहरीर दी, जिसके बाद FIR दर्ज की गई। CO अरविंद चौरसिया ने मामला संज्ञान में आने की पुष्टि की है उन्होंने कहा कि पीड़िता का मेडिकल टेस्ट कराया जा रहा है और जल्द ही आरोपितों की गिरफ़्तारी होगी। आरोपितों में से एक युवक पीड़िता के मोहल्ले का ही रहने वाला है। पीड़िता के बाद दो बार गैंगरेप होने की रिपोर्ट दर्ज की गई है।

दरअसल, जिस दिन ये वारदात हुई उस दिन रात देर होने के कारण पीड़िता का पति अपनी पुरानी पड़ोसन के यहाँ अपनी पत्नी को लेने पहुँचा था, लेकिन पड़ोसन ने पीड़िता की तबियत खराब होने की बात कहते हुए कल सुबह ले जाने को कहा। पुरानी जान-पहचान होने के कारण पति ने महिला पर भरोसा कर लिया। मेरठ पुलिस ने ट्विटर पर कहा कि थाना प्रभारी लिसाड़ी गेट को जाँच/कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया है।

मेरठ से ही हाल ही में रेप की एक और घटना सामने आई है। हापुड़ रोड पर स्थित केयर नर्सिंग होम में खरखौदा के घोसीपुर गाँव निवासी वार्ड बॉय कासिम ने नशे का इंजेक्शन देकर ICU में भर्ती मजीदनगर की युवती का रेप किया। अपनी करतूतों को छिपाने के लिए कासिम ने ही CCTV को 40 मिनट तक बंद कर दिया था। उसने रेप से पहले पीड़िता को बेहोशी का इंजेक्शन लगाया गया था। साथ ही किसी को कुछ बताने पर ज़हर का इंजेक्शन लगाने की धमकी दी थी।

‘अल्लाह मेरी हिफाजत कर रहा है’: यूजर ने उठाया हिजाब पहनने पर सवाल तो बिग बॉस फेम सना खान ने दिया ये जवाब

पिछले साल नवंबर में मुफ्ती अनस सैयद से विवाह के बाद फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने की घोषणा करने वाली सना खान सोशल मीडिया के जरिए फैंस से जुड़ी रहती हैं। सना अक्सर इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीरें शेयर करती हैं। हाल ही में जब उन्होंने हिजाब में अपनी एक तस्वीर शेयर की तो एक फैन ने उनके हिजाब पहनने पर सवाल उठाया, जिसका उन्होंने खुद जवाब दिया।

इंस्टाग्राम में हिजाब पहने हुए अपनी एक तस्वीर शेयर करते हुए सना खान ने लिखा, ”सुनो! लोगों से डरते क्यों हो? क्या तुमने ये आयत नहीं पढ़ी। अल्लाह जिसे चाहे इज्जत देता है और अल्लाह जिसे चाहे जिल्लत देता है” कभी इज्जत में जिल्लत छुपी होती है और कभी जिल्लत में इज्जत।”

यूजर ने हिजाब पहनने पर किया सवाल, सना खान ने दिया जवाब

इस पूर्व एक्ट्रेस की इस तस्वीर पर ढेरों कमेंट्स आए, लेकिन एक यूजर के कमेंट ने सबका ध्यान खींचा, जिसने लिखा, ”इतनी पढ़ाई लिखाई कष्ट करके क्या फायदा वही तो सेम सबके जैसा पर्दे के अंदर रहना।”

सना ने इसके जवाब में लिखा, ”मेरे भाई जब पर्दा में रहके मैं अपना बिजनेस कर सकती हूँ, शानदार ससुराल वाले और पति मिल सकता है तो और क्या चाहिए। सबसे बड़ी बात अल्लाह हर तरह से मेरी हिफाजत कर रहा है। आल्हामदुलिल्लाह।”

सना खान ‘बिग बॉस 6’ और खतरों के खिलाड़ी जैसे रिएलिटी शो में नजर आ चुकी हैं। इसके अलावा वह कई हिंदी और साउथ इंडियन फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं। पिछले साल 20 नवंबर को फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने के बाद उन्होंने 21 नवंबर 2020 को इस्लामी मौलवी मुफ्ती अनस सईद से सूरत में निकाह कर लिया था।

कासिम ने बेहोशी का इंजेक्शन देकर ICU में भर्ती युवती का किया रेप: CCTV बंद कर 40 मिनट करता रहा मनमानी, यूपी पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित एक अस्पताल के वार्ड बॉय पर ही बलात्कार का आरोप लगा है। आरोप है कि उक्त वार्ड बॉय ने नशे का इंजेक्शन देकर ICU में भर्ती युवती का रेप किया। इस मामले के सामने आने के बाद लिसाड़ी गेट थाने में FIR दर्ज की गई। यूपी पुलिस ने आरोपित को हिरासत में ले लिया है और और आगे की कार्रवाई की जा रही है। आरोपित कासिम खरखौदा के घोसीपुर गाँव का रहने वाला है।

जबकि 18 वर्षीय पीड़िता मजीदनगर में अपने परिवार के साथ रहती है। उसे बुखार होने के बाद हापुड़ रोड पर स्थित केयर नर्सिंग होम में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। लड़की का आरोप है कि रात के 3 बजे आरोपित कासिम ने उसका रेप किया। उसने धमकी दी कि अगर पीड़िता ने किसी को इस घटना के बारे में बताया तो वो ज़हर का इंजेक्शन लगा देगा। गुरुवार (मई 29, 2021) को पीड़िता को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया।

घर जाने के बाद उसने अपनी भाभी को इस वारदात के बारे में बताया। फिर पीड़िता ने परिजनों के साथ लिसाड़ी गेट थाना पहुँच कर तहरीर दी। पुलिस आरोपित कासिम से पूछताछ कर रही है। पुलिस ने जब अस्पताल का CCTV फुटेज खँगाला तो पाया कि 3 बजे के आसपास आरोपित वार्ड बॉय पीड़िता के शरीर के साथ छेड़खानी कर रहा था। इसके बाद अगले 40 मिनट तक कैमरे बंद रहे। इसे उसकी ही करतूत बताई जा रही है।

पुलिस ने CCTV फुटेज अपने कब्जे में ले ली है। आशंका है कि अपनी करतूतों को छिपाने के लिए कासिम ने ही CCTV को 40 मिनट तक बंद कर दिया था। इस दौरान वो खुल कर मनमानी करता रहा। शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपित पक्ष के कुछ लोग थाने पहुँच गए और उन्होंने पीड़िता के परिजनों पर समझौते का दबाव बनाया। CO अमित राय ने बताया कि मामले की गहनता से जाँच की जाएगी। परिजनों का आरोप है कि रेप से पहले पीड़िता को बेहोशी का इंजेक्शन लगाया गया था।