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सुशील ही नहीं, इन 2 खिलाड़ियों ने भी किया खेल को बदनाम: इकबाल ने माँ-बीवी को मार डाला, तनवीर ने किया बच्ची का यौन शोषण

दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में दो गुटों की लड़ाई में 23 साल के पहलवान सागर धनखड़ की हत्या के बाद फरार चल रहे ओलंपिक विजेता सुशील कुमार को रविवार (23 मई 2021) को उनके साथी अजय के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद से खेल जगत और कुश्ती की दुनिया में हड़कंप मच गया है।

सुशील कुमार इकलौते ऐसे भारतीय खिलाड़ी हैं, जिन्होंने दो ओलंपिक मेडल जीते हैं। उनके नाम वर्ल्ड टाइटल है। इसके अलावा वह कॉमनवेल्थ गेम्स में 3 बार गोल्ड मेडल का खिताब भी अपने नाम कर चुके हैं। उन्हें पद्मश्री पुरस्कार, अर्जुन अवॉर्ड, राजीव गाँधी खेल रत्न अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है, लेकिन सुशील को शायद इस बात का अंदाजा नहीं होगा कि वह एक दिन अपने ही जूनियर रेसलर की हत्या के मामले में सलाखों के पीछे होंगे। इस कृत्य से उनकी सभी उपलब्ध्यिों पर पानी फिर गया है। साथ ही उनके फैंस भी खासा नाराज हैं।

हालाँकि, यह कोई पहला मामला नहीं है, ​जब किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी ने खेल को बदनाम किया हो। इससे पहले पूर्व भारतीय एथलीट इकबाल सिंह और तनवीर हुसैन ने अपने कुकर्मों से खेल को बदनाम करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।

मालूम हो कि अगस्त 2020 में पूर्व शॉट पुटर एथलीट इकबाल सिंह को पत्नी और माँ की हत्या के आरोप में अमेरिका में गिरफ्तार किया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेनसिलवेनिया के डेलवारे काउंटी के रहने वाले इकबाल सिंह (62 वर्षीय) ने पुलिस को फोन कर बताया कि उसने अपनी माँ और पत्नी की हत्या कर दी है।

रिपोर्ट में कहा गया था कि पुलिस जब न्यूटाउन टाउनशिप (Newtown Square, Pennsylvania) में इकबाल के आवास पर पहुँची तो उन्होंने देखा कि वह खून से लथपथ था। उसने खुद को भी चोट पहुँचाई हुई थी और उसके घर के अंदर दो महिलाओं के शव पड़े थे। इनमें से एक उसकी पत्नी थी और दूसरी माँ थी।

पंजाब के होशियारपुर के रहने वाले इकबाल ने 1983 में कुवैत में हुए एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शॉट पुट में भारत के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीता था। यह उसके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि थी। इसके बाद वह अमेरिका जाकर बस गए थे, जहाँ वह टैक्सी कैब ड्राइवर के रूप में काम करते थे।

गौरतलब है कि 80 के दशक में इकबाल भारत के शीर्ष शॉट पुट खिलाड़ियों में शामिल थे। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रद्रर्शन 18.77 मीटर था, जो उन्होंने 1988 में नई दिल्ली में हुई परमिट मीट में हासिल किया था। यहाँ उन्होंने गोल्ड मेडल जीता था। इसके अलावा भारत के ऑल टाइम लिस्ट में सिंह ने टॉप-20 में जगह बनाई थी।

इसके अलावा भारत के स्नोशू एथलीट (snowshoe athlete) तनवीर हुसैन को साल 2017 में अमेरिका में 12 साल की लड़की का यौन शोषण करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हुसैन पर आरोप था कि उसने एक नाबालिग बच्ची को जबरन किस किया था। उस समय 24 साल के तनवीर को न्यूयॉर्क की सारानैक जेल में रखा गया है, जहाँ वो 2017 में होने वाले स्नोशू चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाले थे।

द एडीरोनडैक डेली इंटरप्राइजेज अखबार के मुताबिक, सारांक लेक विलेज पुलिस ने हुसैन को एक मार्च को गिरफ्तार किया था। इससे 2 दिन पहले ही उसने डिवे माउंटेन रिक्रिएशन सेंटर में विश्व स्नोशू चैम्पियनशिप में हिस्सा लिया था। पुलिस का कहना था, ”हुसैन पर 12 साल की बच्ची के साथ शरीरिक संबंध बनाने की कोशिश करने के आरोप हैं। लड़की ने पुलिस को बताया कि 27 फरवरी की रात को हुसैन ने उसे पकड़ा और गलत तरीके से छुआ।” वहीं, हुसैन ने इन आरोपों का खंडन करते हुए भारत लौटने के लिए समझौता करने से भी इनकार कर दिया था।

बताया जाता है कि 25 फरवरी 2017 से शुरू हुई विश्व स्नोशू चैम्पियनशिप में हिस्सा लेने के लिए हुसैन ने वीजा माँगा था, लेकिन नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास ने उसे वीजा देने से इनकार दिया था।

वैक्सीन की खरीद पर पंजाब सरकार को मॉडर्ना की ‘ना’, कहा- इस मुद्दे पर सिर्फ भारत सरकार से ही होगी बात

वैक्सीन निर्माता कंपनी मॉडर्ना ने पंजाब सरकार द्वारा वैक्सीन आपूर्ति की माँग को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि कंपनी अपनी नीतियों के अनुसार मात्र केंद्र सरकार से ही इस मामले पर बातचीत करती है। अमेरिकी वैक्सीन निर्माता कंपनी के अलावा पंजाब सरकार ने स्पूतनिक, फाइजर और जॉनसन एण्ड जॉनसन से वैक्सीन की खरीद के लिए संपर्क किया था।

पंजाब सरकार द्वारा जारी किए गए बयान के मुताबिक इन कंपनियों में से मात्र मॉडर्ना ने ही जवाब दिया और अपनी नीतियों का हवाला देते हुए कहा कि कंपनी वैक्सीन से संबंधित मुद्दों पर केवल भारत सरकार से ही संपर्क स्थापित करेगी। पंजाब सरकार द्वारा बताया गया कि वैक्सीन निर्माता कंपनी मॉडर्ना ने कहा कि वैक्सीन खरीद के लिए कंपनी राज्यों या निजी ग्राहकों से कोई सौदा नहीं करती।  

मॉडर्ना एक अग्रणी वैक्सीन निर्माता कंपनी है जिसने चाइनीज कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाई है जो उत्तरी अमेरिका और यूरोप में लगाई जा रही है। हालाँकि पंजाब सरकार के पास बाकी वैक्सीन कंपनियों से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।

पंजाब में अब तक कुल संक्रमितों की संख्या 5,33,973 है। राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण के 61,203 सक्रिय मरीज हैं। Covid-19 संक्रमण की दूसरी लहर से पहले यह रिपोर्ट आई थी कि पंजाब में संक्रमित मरीजों में से 80% मरीज वुहान कोरोना वायरस के यूके स्ट्रेन से संक्रमित थे। रिपोर्ट्स के अनुसार यह वैरिएन्ट सबसे पहले यूके से आने वाले एनआरआई में पाया गया था। इनमें से कई दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे अढ़तियों के आंदोलन में शामिल हो गए थे। यह माना जा रहा है कि यही कारण है कि दिल्ली में कोरोना वायरस का इन्फेक्शन तेजी से फैल गया।

बचपन में पहुँच गया था गाँव से 1,700 किमी दूर, एक वीडियो कॉल से 13 साल बाद घर लौटा झारखंड का एक युवक

अपने घर से 1700 किमी दूर रह रहा एक युवक 13 सालों बाद अपने घर लौट सका और वो भी एक वीडियो कॉल की मदद से। हम बात कर रहे हैं झारखंड के रहने वाले 18 वर्षीय दीपक देहरी की जो 5 साल की उम्र में अपने घर से अलग हो गया था।

झारखंड के रानीश्वर थाना क्षेत्र बोड़ाबथान गाँव के रहने वाले दीपक के पिता गोकुल देहरी की मृत्यु तब हो गई थी जब दीपक मात्र पाँच साल का था। पिता की मौत के बाद दीपक मसानजोर थाना क्षेत्र के धावाडंगाल में रहने लगा। इसके बाद दीपक की माँ ने उसे छोड़ दिया और और दूसरी शादी कर ली। कुछ दिनों के बाद दीपक अपनी मौसी के साथ उत्तर प्रदेश के हरदोई में रहने लगा।

मसानजोर थाना प्रभारी चंद्रशेखर चौबे ने बताया कि घर की याद आने पर दीपक देहरी बिना बताए अपनी मौसी के घर से निकल गया। उसे अपने घर जाना था लेकिन वह जानकारी के अभाव में एक दूसरी ट्रेन में बैठ गया और बीकानेर पहुँच गया।

इसके बाद दीपक देहरी बीकानेर के एक बाल गृह में रहने लगा। वहाँ उसने अपने जीवन के 13 साल बिताए। अक्सर दीपक अपने घर को याद करता था लेकिन वह अपने घर के बारे में पुख्ता जानकारी नहीं दे पाता था। दीपक के 18 वर्ष के होने के बाद बाल गृह के इंचार्ज अरविन्द ने मसानजोर थाना प्रभारी चंद्रशेखर चौबे से संपर्क किया।

थाना प्रभारी चौबे ने दीपक के बताए गए स्थानों के विवरण के अनुसार वीडियो कॉल के माध्यम से उसे वो स्थान दिखाए। दीपक तुरंत ही मसानजोर बाँध और उसके आसपास के इलाके को पहचान लिया जहाँ उसके सगे-संबंधी रहा करते थे। दीपक के मामा ने भी उसे पहचान लिया।

बीकानेर से साथ आए दो पुलिसकर्मियों ने थाना प्रभारी चौबे और अन्य पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में दीपक को उसके परिजनों को सौंप दिया। दीपक अब गाँव में रहकर ही अपने लोगों के बीच अपनी आजीविका चलाना चाहता है।

एक ही दिन में 3 लाख कोविड टेस्टिंग करने वाला देश का पहला राज्य बना यूपी: योगी सरकार की 3T बनी रामबाण

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की तैयारियों को लेकर एक्शन मोड में आ गए हैं। हाल ही में कोरोना संक्रमण को मात देने वाले सीएम योगी स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा करने और आवश्यक आदेश पारित करने के लिए व्यक्तिगत रूप से अस्पतालों और गाँवों का दौरा कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सीएम की कोरोना के खिलाफ लड़ाई काफी जबरदस्त चल रही है। एक ओर जहाँ कोरोना के आँकड़ों में लगातार गिरावट देखी जा रही है। वहीं दूसरी ओर योगी का 3T फॉर्मूला सफल होते हुए दिखाई दे रहा है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना के बढ़ते मामलों पर काबू पाने के लिए ट्रेसिंग, टेस्टिंग और ट्रीटमेंट के ‘3T‘ फॉर्मूले का पालन किया है। नतीजतन, यूपी देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने एक ही दिन में 3 लाख कोरोना की टेस्टिंग की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, योगी सरकार ने महामारी की शुरुआत के बाद से 4.65 करोड़ से अधिक टेस्टिंग की हैं, जो देश में अभी तक सबसे अधिक है।

आँकड़ों से पता चलता है कि राज्य में की जा रही कुल टेस्टिंग में से लगभग 45% आरटी-पीसीआर है, जबकि 2% टेस्ट ट्रूनेट पद्धति के माध्यम से किए गए हैं। इसके अलावा रैपिड एंटीजन किट के माध्यम से टेस्ट किए जाते हैं।

अधिक टेस्टिंग यूपी की कोविड-19 के खिलाफ युद्ध स्तर पर तैयार की गई रणनीति का हिस्सा है। यूपी के अधिकारियों के अनुसार, राज्य ने अब प्रति दिन 1.5 लाख से अधिक आरटी-पीसीआर टेस्टिंग करने की क्षमता बनाई है। राज्य में एकत्र किए गए नमूनों में से 65% से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों के हैं।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के आँकड़ों के मुताबिक, देश में किए गए कुल टेस्ट में उत्तर प्रदेश का हिस्सा लगभग 14% है। इसके अलावा, इस साल 1 अप्रैल से यूपी में 1 करोड़ से अधिक कोविड-19 के टेस्ट किए गए हैं।

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री इटावा और कानपुर के बाद रविवार (23 मई 2021) की सुबह बुंदेलखण्ड में कोरोना मरीजों के इलाज और तीसरी लहर की तैयारी का जायजा लेने झाँसी पहुँचे। इस दौरान उन्होंने तीसरी लहर से निपटने की तैयारियों को लेकर झांसी में अफसरों को फटकार भी लगाई। सीएम ने यहाँ संक्रमित मरीजों की बढ़ती संख्या को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों को लेकर कोई लापरवाही न बरती जाए।

बता दें कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश में आंशिक कोरोना कर्फ्यू को बढ़ाकर 31 मई की सुबह 7 बजे तक कर दिया है। सीएम ने कहा कि आंशिक कोरोना कर्फ्यू के दौरान वैक्सीनेशन, औद्योगिक गतिविधियाँ, मेडिकल संबंधी कार्य आदि आवश्यक अनिवार्य सेवाएँ यथावत जारी रहेंगी। इस संबंध में विस्तृत गाइडलाइंस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

‘अल्लाह-हू-अकबर’ के साथ दंगे, आतंक, जबरन धर्म-परिवर्तन पर चुप्पी… लेकिन ‘जय श्रीराम’ नारे पर सबूत माँग रहा गैंग

हरियाणा का मेवात पिछले साल हिंदुओं पर होते अत्याचारों के कारण सुर्खियों में था और इस बार ये चर्चा में आसिफ की तथाकथित मॉब लिंचिंग की वजह से आया है। बीते वर्ष चंद चैनलों या वेबसाइट्स को छोड़ दिया जाए तो किसी ने हिंदूविहीन होते गाँवों पर बोलना तक जरूरी नहीं समझा था। लेकिन इस बार आसिफ के साथ हुई नाइंसाफी हर जगह, हर चैनल, हर पोर्टल पर है। 

कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि आसिफ ने दस साल पहले लड़की की कपड़े बदलते समय वीडियो बना ली थी, तभी से उससे लोग नाराज थे। कुछ बता रहे हैं कि आसिफ लूटपाट करता था और निकिता तोमर हत्याकांड के दोषी उसी की गैंग का हिस्सा थे। इसके अलावा ये बात भी चर्चा में हैं कि जिस पटवारी ने अपने साथियों के साथ उसे मारा, उसे ठीक 2-3 माह पहले आसिफ अपने साथियों के साथ पीटकर आया था।

एक स्थानीय व्यक्ति ने आसिफ की मौत को लेकर बनाया वीडियो

अब वैसे तो इस मॉब लिंचिंग के बाद दिखाने वाले एंगल बहुत सारे हैं। लेकिन वामपंथी मीडिया ने जो चलाया वो ये कि जय श्रीराम नारा न बोलने की वजह से आसिफ को मारा गया। नतीजन देखते ही देखते ट्विटर पर आसिफ को इंसाफ दिलाने के लिए हैशटैग ट्रेंड होने लगा। इसमें जमकर जय श्रीराम नारे को वार क्राई बताकर हिंदुओं को आतंकी कहा गया। हर मुद्दे पर चुप्पी साधे रखने वाले भी मुखर होकर ‘जय श्रीराम’ नारे के विरुद्ध बोलते दिखे।

वीडियो में सुना जा सकता है कि गवाह ने अपराध के सांप्रदायिक होने का कोई संकेत नहीं दिया।

हद्द तब हुई जब मकतूब नाम की वेबसाइट पर आफरीन फातिमा का लेख प्रकाशित हुआ और उन्होंने उसकी हेडलाइन में घोषणा की कि जय श्रीराम एक युद्ध घोष ही है और अगर ऐसा नहीं है तो इस बात को साबित किया जाए। 

आफरीन फातिमा के लेख की हेडिंग

आफरीन ने अपने लेख की शुरुआत कुंभ से की और कोरोना की दूसरी लहर का सारा ठीकरा इस पर फोड़ा। इसके बाद उन्होंने मेवात में हुई मॉब लिंचिंग के लिए जय श्रीराम के नारे को जिम्मेदार ठहरा दिया। आफरीन ने बताया कि ये नफरत का कारोबार भाजपा के आने के बाद बढ़ा है लेकिन ‘जय श्रीराम’ का इतिहास बहुत पुराना है। 2019 में भी तबरेज को इसी नारे के कारण मारा गया था। इसके बाद संसद में ओवैसी को भी भाजपा सांसदों ने जय श्री राम बोलकर तंग किया था।

आफरीन का ये लेख पहली लाइन से पढ़कर ऐसा लगता है कि उनके लिए मुद्दा आसिफ नहीं बल्कि हिंदू लोग, कुंभ के रूप में एक परंपरा, और जय श्रीराम के नाम पर निश्चित नारा है। लेखिका ने बस इन सबके प्रति अपनी घृणा को प्रांसगिक बनाने के लिए आसिफ का जिक्र किया और अपना पूरा लेख उस जय श्रीराम को युद्ध घोष साबित करने की दिशा में लिख डाला। दिलचस्प बात ये है कि इस लेख का आधार बनाए गए मुद्दे में पुलिस ने किसी प्रकार के साम्प्रदायिक एंगल को नकारा है।

लेखिका ने अपने लेख में सेकुलरिज्म का संतुलन बनाए रखने के लिए एक ये जरूर जगह लिखा है कि जय श्रीराम का मतलब सिर्फ भगवान राम की विजय से है और ये अपने आप हिंसक नहीं हो जाता। लेकिन, आगे अपना एजेंडा चलाते हुए वह ये भी समझाने की कोशिश करती हैं कि यदि इसका ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य देख लें तो पता चलेगा कि बाबरी मस्जिद के विध्वंस के पीछे इसी नारे ने लोगों को उकसाया था। 

एजी नूरानी की किताब के हवाले से उन्होंने बताया कि कारसेवक, साधू, संन्यासी सब 6 दिसंबर 1992 को गुस्से में त्रिशूल लेकर, तलवार उछाकर जय श्रीराम चिल्ला रहे थे। इसके बाद इसमें रामानंद सागर की रामायण और बीआर चोपड़ा की महाभारत आदि का हवाला भी दिया गया। तमाम कोट्स के प्रयोग से लेखिका बताती रहीं कि वो जो-जो जिक्र कर रही हैं सब जय श्रीराम नारे को युद्ध घोष साबित करता है।

उन्होंने बताया कि कैसे आरएसएस सोचती है कि मुस्लिम राम को भारतीय प्रतीक मानें। इसके अलावा ज्ञानेंद्र पांडे भी तो किताब में ये लिखते हैं कि राम सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक नायक हैं जिनकी हर भारतीय को सम्मान करना चाहिए। चाहे वह हिंदू हो या नहीं हो।

अब आप सोचिए कि जो उदाहरण आफरीन दे रही हैं उसमें समस्या क्या है और कहाँ है। एक तरफ हिंदुस्तान की बहुसंख्यक आबादी है जो अपने धर्मानुसार श्रीराम को पूजनीय मानती है और उनकी आराधना करती है। दूसरी ओर आफरीन हैं जो इसी श्रद्धा रखने वालों को किसी आतंकी से कम प्रतिबिंबित नहीं कर रहीं। 

समझ नहीं आता कि उन्हें श्रीराम को सम्मान देने में समस्या है या फिर ये मानने में दिक्कत है कि एक हिंदू ने ये कह दिया कि वह भारत के चिह्न हैं या हर वर्ग को उनका सम्मान करना चाहिए।  सेकुलरिज्म का रोना रोने वालों को यहाँ कुछ तो शर्म आनी चाहिए कि आखिर अपने ईश्वर के सम्मान देने की बात या उन पर विचार लिखने की बात एक वार क्राई कैसे हो गया?

इस नारे के साथ तैयार होने जा रहा आज अयोध्या में राम मंदिर का ट्रस्ट ऑक्सीजन प्लांट लगाकर लोगों की जान बचाने में जुटा है। इसी नारे को दिन रात जपने वाले तमाम आरएसएस स्वयंसेवक राम का नाम मुँह पर लेकर घर-घर जाकर लोगों को मदद मुहैया करवा रहे हैं और आफरीन फातिमा कहती हैं कि उन्हें साबित किया जाए कि ये एक वार क्राई नहीं है। उन्हें कौन कैसे समझाए- इस नारे से श्रद्धा का भाव जुड़ा है, युद्ध का उद्घोष नहीं!

रही बात वॉर क्राई की। विचार करिए कि ये कैसी मानसिकता है कि एक ओर ISIS जैसा संगठन और पाकिस्तान के तमाम आतंकी संगठन एक तय नारे ‘अल्लाह-हू-अकबर’ को आधार बनाकर हिंदुओं को निशाना बनाते हैं। लेकिन यदि इस पर कोई कुछ बोल दे तो आँख-नाक-मुँह सब फूल जाता है। वहीं लिखने वालों को सामाजिक सौहार्द का ख्याल रखने की सलाह दे दी जाती है। मगर श्रीराम नारे पर उंगली उठाने पर किसी की उंगली तक नहीं काँपती! शायद इन लोगों को पता है कि जिस देश में लोगों को श्रीराम के अस्तित्व पर अटूट विश्वास है उसे तो अभिव्यक्ति की आजादी पर मलीन किया ही जा सकता है।

ये हिपोक्रेसी नहीं तो क्या है कि दिल्ली दंगों में नारा ए तकबीर के नारों के बीच हिंदुओं को मार दिया गया और जब बात इल्जाम देने की आई तो ‘दोनों पक्षों ने दंगे किए…’कहकर बात रफा-दफा हो गई। इसी तरह जय श्रीराम कहने वाला रिंकू शर्मा लोगों के जहन से उतर गया। लेकिन शरजील उस्मामी जैसा कट्टरपंथी अब भी “istandwithsharjeel” की शरण में सुरक्षित है।

राम राज्य का अर्थ आज भी भारतीयों के लिए वही है जिसमें हर किसी को समानता और अपने अधिकारों के साथ जीने का हक हो। इसकी परिभाषा सिर्फ कट्टरपंथियों और वामपंथियों ने मोड़ी है। हिंदू कभी ये कहने नहीं आता कि दूसरे धर्म के लोग अपना मजहब छोड़ कर सनातन शरण में आ जाएँ उससे राम राज्य बनेगा। उसके बावजूद सेकुलरिज्म के नाम पर दूसके समुदाय के लोग जरा सा सम्मान श्रीराम के नाम पर देने पर तैयार नहीं है। आफरीन का लेख ही इसी आधार पर है कि बताइए लोग भारत जैसे देश में श्रीराम को यहाँ का प्रतीक कैसे मान लेते हैं।

इस बात को समझिए कि मॉब लिंचिंग जैसा अपराध कोई जस्टिफाई नहीं करता। न तबरेज की लिंचिंग पर किसी ने अपराधियों को छोड़ने की माँग की थी न आसिफ के मामले में करेंगे। लेकिन इन मामलों में ‘जय श्रीराम’ को ले आना उसे प्राथमिकता से चलाना सिर्फ ये बताता है कि समस्या अपराध से नहीं है एक धर्म से है। लेख में तमाम नाम है जिन्हें लेकर दावा किया गया है कि जय श्रीराम नारे के सताए हैं। एक बीबीसी की हेडिंग का भी जिक्र है जो कहती है कि हिंदू नारा अब ‘मर्डर क्राई’ बन चुका है।

सोचिए कि इन्हें जय श्रीराम को मर्डर क्राई तक कहने में गुरेज नहीं है। लेकिन आप दक्षिणपंथी होने के साथ कट्टर हैं- यदि सिर्फ ये कह दें कि शाहीन बाग प्रदर्शन में अल्लाह-हू-अकबर के नारों के साथ दीपक चौरसिया के साथ मार पीट हुई या फिर इस नारे के साथ बेंगलुरु में हिंसा हुई या दिल्ली दंगों में नारा ए तकबीर बोल कर हिंदू की लाश गली में फेंक दी गई या अमेरिका, पेरिस तमाम जगह एक घोष के बाद किसी का सिर कलम हुआ।

आप नहीं कह सकते! क्योंकि आप पर बहुसंख्यक होने का भार है। अब आफरीन ही आपको बताएँगी कि जय श्रीराम कहकर मुस्लिमों को लिंच करना एक परंपरा हो गई है। इस बीच आपने यदि ये बताने की कोशिश कर दी कि केवल भारत में ही नहीं पूरे विश्व में एक कट्टरपंथी विचारधारा एक नारे का प्रयोग कर रही है तो आप इस्लामोफोबिक हो जाएँगे। समाज के दुश्मन कहे जाएँगे। 

आपको इस इकोसिस्टम में सर्वाइव करने के लिए एक इस्लामी आतंकी के पकड़े या मारे जाने पर उसकी सोच या विचारधारा तक नहीं जाना होगा। आपको उसके लिए संवेदनाएँ इकट्ठा करनी होंगी-कभी उसका बैकग्राउंड बताकर, कभी शिक्षा बताकर, कभी प्रोफेशन बताकर। इसके अलावा एक समय आएगा कि आपको इसी इकोसिस्टम में रहने के लिए अपने तिलक लगाने, कलावा पहनने पर प्रमुखता से साबित करना पड़ेगा कि आप आतंकी मानसिकता के नहीं है। आपका जय श्रीराम कहना आस्था का विषय है न कि वार क्राई का।

बंगाल: अब दमदम में लटकता मिला BJP कार्यकर्ता प्रसेनजीत दास का शव, दूसरे का मारकर फोड़ा सिर, TMC पर आरोप

पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद शुरू हुई हिंसा कम होने का नाम नहीं ले रही है। 2 मई को राज्य में विधानसभा चुनाव परिणाम आने और तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) की सरकार बनने के बाद जहाँ एक ओर हजारों की संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक राज्य से पलायन कर चुके हैं वहीं अभी भी इन पर हो रहे हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। रविवार (23 मई) को भी एक भाजपा कार्यकर्ता का शव फंदे से लटकता हुआ मिला और दो अन्य घटनाओं में भाजपा कार्यकर्ताओं से मारपीट की गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कोलकाता के दमदम पार्क इलाके में एक भाजपा कार्यकर्ता का शव फंदे से लटकता हुआ मिला। शव भाजपा कार्यकर्ता प्रसेनजीत दास (40) का बताया जा रहा है। दास दमदम पार्क के हरिचन्द पल्ली इलाके में रहते थे। चुनाव परिणाम आने के बाद से ही दास तृणमूल के गुंडों के डर से छुपे हुए थे लेकिन हाल ही में उनके पिता की तबीयत सही नहीं थी जिससे वो घर लौटे थे।

परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया है कि इलाके के गुंडों ने दास के साथ मारपीट की थी। इसके अलावा परिवार के सदस्यों और भाजपा ने आरोप लगाया कि टीएमसी की पूर्व पार्षद शंपा चक्रवर्ती ने गुंडों से भाजपा के लिए काम करने वालों को पकड़कर मारने के लिए कहा है।

एक दूसरी घटना में उत्तर दिनाजपुर के बालुरघाट कस्बे के रवीन्द्रनाथ इलाके में एक भाजपा कार्यकर्ता के साथ मारपीट की गई, उसका सिर फोड़ दिया गया और उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। भाजपा कार्यकर्ता छोटन मालाकार के साथ उस समय मारपीट की गई जब वह बाजार जा रहे थे। मारपीट का आरोप टीएमसी के कार्यकर्ताओं पर है। मालाकार बालुरघाट भाजपा शक्ति केंद्र के प्रमुख हैं।

इसके अलावा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने आरोप लगाया है कि बराकपुर ABVP के अध्यक्ष ऋषभ सरकार के घर पर टीएमसी के गुंडों ने हमला किया और मारपीट की। टीएमसी के गुंडों पर ऋषभ के परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट करने और लैपटॉप एवं फोन लूटने का आरोप है।

आपको बता दें कि 8 चरणों में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम 02 मई 2021 को घोषित किए गए। चुनाव परिणामों में तृणमूल कॉन्ग्रेस ने एक बार फिर सत्ता में वापसी की। हालाँकि तभी से ही राज्य में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थकों के खिलाफ हिंसा का दौर प्रारंभ हो गया जो अभी भी चल रहा है। हजारों की संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक राज्य से पलायन कर रहे हैं और असम में शरण ले रहे हैं।

चीन में 100 किलोमीटर की रेस: खराब मौसम की वजह से हादसा, 21 लोगों ने गँवाई जान

चीन में 100 किलोमीटर की क्रॉस-कंट्री माउंटेन रेस में भाग लेने वाले 21 लोगों की मृत्यु हो गई है। खराब मौसम के कारण गांसु प्रांत के बैयिन शहर में यह हादसा हुआ है। स्थानीय अधिकारियों ने जानकार दी है कि रविवार (मई 23, 2021) को यहाँ ओलावृष्टि, बर्फबारी और उसके जमने व तेज हवाओं की वजह से इस रेस में दौड़ लगाने वाले 21 लोगों की मृत्यु हो गई है।

इस दौड़ में 172 प्रतियोगियों ने भाग लिया था, जिनमें से राहत दल ने 151 लोगों को सुरक्षित बचा लिया है। इनमें से कुछ की तबियत खराब है, जिन्हें अस्पताल ले जाया गया है। 

बैयिन शहर के मेयर, झांग जुचेन ने रविवार को कहा कि मौसम में अचानक बदलाव के कारण यह हादसा हुआ है। आगे की जाँच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है। रेस्क्यू हेडक्वार्टर के अनुसार दोपहर करीब एक बजे 20 से 31 किलोमीटर के बीच दौड़ का ऊँचाई वाला हिस्सा अचानक विनाशकारी मौसम से प्रभावित हो गया।

थोड़े ही समय बाद स्थानीय क्षेत्र में ओलावृष्टि, बर्फबारी, बारिश और तेज हवाएँ चलने लगीं। इससे तापमान में गिरावट आ गई। इसके बाद मैराथन दौड़ को स्थगित कर दिया गया और राहत दल के करीब बारह सौ सदस्य बचाव कार्य में जुट गए। रात में राहत दल को जगह-जगह फँसे लोगों को निकालने में दिक्कतें भी आईं।

पर्वतीय मैराथन का आयोजन करवाने वाले आयोजकों ने माफी माँगी है। आपको बता दें कि इस प्रांत में पहले भी प्राकृतिक आपदाएँ आती रही हैं। साल 2010 में भयानक भूकंप की वजह से एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। इस इलाके में अक्सर भूकंप आते रहते हैं। येलो रिवर स्टोन ऊँची ऊँची पहाड़ियों के लिए जाना जाता है और यहाँ पर अक्सर फिल्मों की शूटिंग होती रहती हैं।

जनता का CM, जनता के बीच: जमीन पर सबसे अधिक सक्रिय रहे CM योगी, परिणाम UP में तेजी से घटता संक्रमण

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं जमीनी स्तर पर राज्य में कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रयासरत हैं। सीएम आदित्यनाथ लगातार संक्रमण की स्थिति का जायजा लेने और रोकथाम के उपायों के बेहतर क्रियान्वयन के लिए राज्य के गाँवों की यात्रा कर रहे हैं।

शनिवार (22 मई) को पत्रकार शिल्पी सेन ने ट्वीट करके बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने इटावा में Covid-19 कन्टेनमेंट जोन का दौरा किया। पत्रकार द्वारा अपलोड किए गए वीडियो में सीएम आदित्यनाथ लोगों और पुलिस अधिकारियों के साथ चर्चा करते हुए देखे जा सकते हैं। उन्होंने कन्टेनमेंट जोन में दवाओं की आपूर्ति की जानकारी भी ली। 

शनिवार (22 मई) को सीएम योगी आदित्यनाथ ने कानपुर में कोविड कमांड एण्ड कंट्रोल सेंटर का दौरा किया। इसके अलावा वे 17 मई और 21 मई को क्रमशः मुजफ्फरनगर और लखीमपुर के दौरे पर भी थे, जहाँ उन्होंने कोविड कमांड एण्ड कंट्रोल सेंटर में तैयारियों का जायजा लिया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अलीगढ़ में 13 मई को इंटीग्रेटेड कमांड एण्ड कंट्रोल सेंटर का दौरा किया था। इसके पहले मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा यह जानकारी दी गई थी कि 8 मई को सीएम आदित्यनाथ मुरादाबाद पहुँचे थे जहाँ उन्होंने मनोहर गाँव का निरीक्षण किया था और लोगों को मिलने वाली दवाओं की पूरी जानकारी ली थी।

कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने यह आदेशित किया था कि घर में इलाज कराने वाले लोगों को भी ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था कराई जाएगी। ऑक्सीजन की बढ़ती माँग को देखते हुए सीएम आदित्यनाथ ने निर्णय लिया था कि प्रत्येक जिले में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए जाएँगे।

ऑक्सीजन की माँग और आपूर्ति के प्रबंधन के लिए प्रदेश में मॉनिटरिंग सिस्टम भी बनाया गया जो ऑक्सीजन की रियल टाइम मॉनिटरिंग करता है। इसके अलावा संक्रमण की तीसरी लहर को लेकर भी उत्तर प्रदेश में तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं।

गाँवों में संक्रमण को बढ़ने से रोकने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने मॉनिटरिंग समितियों का गठन किया है। इन समितियों में आशा, आँगनवाड़ी और एएनएम कार्यकर्ता शामिल हैं, जो उत्तर प्रदेश सरकार के ‘टेस्ट-ट्रेस-ट्रीट’ की रणनीति पर ग्रामीण क्षेत्रों में 1 लाख से अधिक Covid-19 टेस्ट रोजाना कर रही हैं। गाँवों को संक्रमण से मुक्त करने के लिए योगी सरकार ने ‘मेरा गाँव कोरोना मुक्त गाँव’ अभियान भी शुरू किया है।

सक्रिय मरीजों की गिरती संख्या :

23 मई को उत्तर प्रदेश में सक्रिय मरीजों की संख्या घटकर 94,482 रह गई। Covid19India के आँकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में नए संक्रमित मरीजों और सक्रिय मरीजों की सँख्या में गिरावट देखने को मिल रही है। राज्य में जहाँ लोगों में संक्रमण से ठीक होने की दर 93.2% हो गई है वहीं मृत्यु दर मात्र 1.1% के आसपास है।

उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण का गिरता ग्राफ (साभार : Covid19India.org)

यह सब लगातार बढ़ती हुई टेस्टिंग और टीकाकरण के कारण संभव हो पाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश न केवल संक्रमण की दूसरी लहर के प्रभाव को काफी हद तक कम करने में सफल रहा बल्कि राज्य में अब तीसरी लहर से निपटने की तैयारियाँ भी जोरों से चल रही हैं।  

कोरोना में जब अपनों ने छोड़ा हाथ, RSS ने दिया साथ: 200+ मृतकों का किया अस्थि विसर्जन

कोरोना महामारी ने मानवीय संवेदनाओं को भी तार-तार कर रखा है। साँसों के साथ छोड़ने के साथ ही अपने भी दूरी बना रहे हैं। किसी को शव को अंत्येष्टि का इंतजार है, तो किसी को अस्थियों को अपनों के हाथ नदियों में प्रवाहित होने का, लेकिन संक्रमण के भय ने अपनों को भी दूर कर दिया है। ऐसे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक सेवा कार्यों से मानवता की नई इबारत लिख रहे हैं। जिन शवों को अपने छोड़ गए, उनकी अंत्येष्टि से लेकर अस्थि विसर्जन तक की व्यवस्था कर रहे हैं।

शव को मुखाग्नि देने वाला कोई नहीं है। जो परिजन आ भी रहे हैं, वे डरे हुए हैं। ऐसे में स्वयंसेवकों के समूह ने मदद का बीड़ा उठा लिया है। वे अस्थि संचयन करते हैं, फिर चितास्थल की सफाई करते हैं। ट्रक से लकड़ी उतारकर उसे व्यवस्थित करते हैं। जिस शव को मुखाग्नि देने वाला नहीं है, तो उसकी अंत्येष्टि की विधियाँ पूरी करते हैं।

जानकारी के मुताबिक भोपाल में संघ के स्वयंसेवकों ने 200 से ज्यादा लोगों की अस्थियों को होशंगाबाद जाकर विधि-विधान के साथ नर्मदा नदी में विसर्जित किया। होशंगाबाद के मंगल घाट पर अस्थियाँ विसर्जित करने की प्रक्रिया पूरी की गई। संघ के स्वयंसेवक की टोली बनाकर 200 से ज्यादा अस्थियों के साथ भोपाल से नर्मदापुरम (होशंगाबाद) निकले। इस दौरान मध्य भारत के प्रांत संघचालक अशोक पाण्डेय ने पुष्पांजलि अर्पित कर नर्मदापुरम के मंगल घाट पर पूजन के बाद इन अस्थियों को नर्मदा में विसर्जित कर दिया।

इस दौरान स्वयंसेवकों ने कई परिवारों को ऑनलाइन भी जोड़ा। उन्होंने पूरे विधि-विधान से ऑनलाइन ही रस्में पूरी कीं। कोरोना काल में मध्य भारत प्रांत के स्वयंसेवकों ने 53 स्थानों पर अंतिम संस्कार के लिए अपनी सेवाएँ दी। आरएसएस कार्यकर्ता ने शनिवार (मई 22, 2021) को 17 लोगों की अस्थियाँ नर्मदा में विसर्जित की।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश में भी आरएसएस के स्वयंसेवक ने एक पुजारी का अंतिम संस्कार किया। प्रदेश के नांगल सोती में बुखार से पीड़ित एक पुजारी का देहांत हो गया। जिसके अंतिम संस्कार के लिए परिवार नहीं पहुँचा तो नांगल पुलिस और RSS के स्वयंसेवकों ने बैराज गंगा घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया।

DM के बाद अब छत्तीसगढ़ के SDM की ‘गुंडई’ – पहले थप्पड़ मारा, फिर सड़क पर करवाई उठक-बैठक… कोई कार्रवाई नहीं

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में कलेक्टर रणबीर शर्मा द्वारा एक युवक को थप्पड़ मारने का मामला चल ही रहा था कि इसी बीच एक और वीडियो सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा ये वीडियो सूरजपुर के ही भैयाथान के एसडीएम प्रकाश सिंह राजपूत का है। एसडीएम ने लॉकडाउन के दौरान सड़क पर दिख गए एक युवक को पहले तो थप्पड़ जड़ा, फिर उससे बीच सड़क पर उठक-बैठक भी करवाई। बताया जा रहा है कि अभी तक SDM पर कार्रवाई करने की कोई बात सामने नहीं आई है।

इस वीडियो में लोग सीएम भूपेश बघेल को टैग कर ट्विटर पर शेयर कर रहे हैं। वीडियो में आप देख सकते हैं कि एसडीएम लॉकडाउन का पालन करवाने के लिए कैसे सड़क पर दादागिरी पर उतर आए हैं। वह लोगों से उठक-बैठक करवा रहे हैं और सबको भगा रहे हैं। इसी बीच एसडीएम को ये युवक मिल गया, जिसको उन्होंने बीच सड़क पर थप्पड़ जड़ दिया। इतना ही नहीं उसके बाद उससे सबके सामने उठक-बैठक भी करवाई। इस दौरान वह युवक हाथ जोड़कर माफी माँगता नजर आया।

दरअसल, इससे पहले छत्तीसगढ़ में ही शनिवार (मई 22, 2021) की दोपहर को कलेक्टर साहब की दबंगई देखने को मिली थी। कलेक्टर रणबीर सिं​ह ने सड़क पर निकले एक युवक का मोबाइल पटककर तोड़ दिया और इसके बाद उसको थप्पड़ जड़ दिया था। हालाँकि, घटना का वीडियो वायरल होने के बाद कलेक्टर साहब रणबीर शर्मा ने अपने व्यवहार के लिए माफी माँगी है।

रणबीर शर्मा ने अपने बयान में कहा, “उसने कहा कि वह टीकाकरण के लिए बाहर गया था, लेकिन उनके पास कोई उचित दस्तावेज नहीं था। बाद में उसने कहा कि वह अपनी दादी से मिलने जा रहा है। जब उसने दुर्व्यवहार किया तो मैंने गुस्से में उसे थप्पड़ मार दिया। वह 23-24 साल का था, 13 साल का नहीं। मुझे खेद है और अपने व्यवहार के लिए क्षमा चाहता हूँ।”

इस मामले को लेकर राज्य की किरकिरी होने पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सूरजपुर कलेक्टर रणबीर शर्मा को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि किसी भी अधिकारी का शासकीय जीवन में इस तरह का आचरण स्वीकार्य नहीं है। बता दें कि कलेक्टर शर्मा पर साल 2015 में रिश्वतखोरी का आरोप भी लग चुका है।