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साले के फॉर्म हाउस में छिपा था ‘खाना चाचा’ वाला नवनीत कालरा, ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर की कालाबाजारी में दिल्ली पुलिस ने दबोचा

दिल्ली में कोरोना वायरस के कहर के बीच राष्ट्रीय राजधानी में ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर की कालाबाजारी करने के आरोपित बिजनेसमैन नवनीत कालरा को रविवार (16 मई 2021) देर रात दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया।

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के हवाले से एएनआई ने बताया कि नवनीत कालरा गुरुग्राम में अपने साले के फॉर्म हाउस छिपा था, जहाँ से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। कालरा पर अंतरराष्ट्रीय सेलुलर कंपनी मैट्रिक्स के साथ मिलकर दिल्ली में ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर की कालाबाजारी करने का आरोप है।

इससे पहले गुरुवार (6 मई, 2021) को दिल्ली में ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर्स की कालाबाजारी का भंडाफोड़ होने के बाद शुक्रवार (मई 7, 2021) को दिल्ली पुलिस ने खान मार्केट स्थित खान चाचा रेस्टोरेंट से 96 कॉन्सेंट्रेटर बरामद किए थे। पड़ताल में पुलिस को पता चला था कि जिन-जिन जगहों से मशीनें बरामद हुईं, उन सबके तार उद्योगपति नवनीत कालरा से जुड़े हुए हैं।

दिल्ली पुलिस को राजधानी के अलग-अलग कोनों से 6 मई को 450 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर मिले। इनमें से 419 की बरामदगी पर एक ही व्यवसायिक संस्थान का नाम प्रकाश में आया, जिसका मालिक उद्योगपति नवनीत कालरा है। छापे के दौरान, 9 से 5 लीटर क्षमता वाले 32 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर कालरा की कंपनी Nege & Ju bar से मिले। पुलिस ने राजधानी के 3 नामी-गिरामी रेस्टोरेंट पर छापेमारी करके 524 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर को भी जब्त किया था।

ऑक्सीजन की कालाबाजारी से जुड़ी नवनीत कालरा की ऑडियो क्लिप भी बीते 9 मई, 2021 को लीक हुई थी। इसमें वह यह कहते सुना गया था कि उसके ऊपर “बहुत अधिक दबाव” है और वह सभी कॉल्स का जवाब नहीं दे सकता। कालरा इस ऑडियो में कह रहा था, “मेरे पास 2 लाख कॉल्स हैं। इसलिए मैं हर किसी के पर्सनल सवालों का जवाब नहीं दे सकता हूँ। आपको कौन सा मॉडल (ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर) भेजा गया है, इसकी डिटेल्स मैसेज में दी गई है। मैं खान मार्केट के लोगों को उनके उपयोग के लिए प्रति व्यक्ति एक मशीन दे सकता हूँ।”

नवनीत कालरा पर AAP, कॉन्ग्रेस रही हैं मेहरबान

ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर कालाबाजारी के आरोपी नवनीत कालरा पर अतीत में केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस दोनों मेहरबान रही हैं। 2020 में दोबारा दिल्ली का सीएम बनने के बाद अरविंद केजरीवाल ने एक समारोह में 48 लोगों को “दिल्ली के निर्माता” के तौर पर सम्मानित किया था। कालरा उन्हीं 48 लोगों में शामिल एक नाम थे।

वहीं नवनीत कालरा को 2006 में केंद्र की कॉन्ग्रेस सरकार ने दिल्ली गोल्फ क्लब के सदस्य के तौर पर नामित किया था। कॉन्ग्रेस सरकार ने 2004-05 और 2005-06 के बीच दिल्ली गोल्फ क्लब में रॉबर्ट वाड्रा, ‘राष्ट्रीय दामाद’, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में ईएनटी विभाग के प्रमुख जेएम हंस, और खान मार्केट के नवनीत कालरा को नामित किया था।

‘बाहुबल और राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर ताहिर हुसैन ने फैलाई हिंसा, उसके ठिकाने दंगों का हब बने’: अदालत ने नहीं दी जमानत

दिल्ली की एक अदालत ने राजधानी के उत्तर-पूर्वी हिस्से में फ़रवरी 2020 में हुए दंगों के मुख्य आरोपित और आम आदमी पार्टी (AAP) के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन को जमानत देने से इनकार कर दिया। एडिशनल सेशन जज विनोद यादव ने प्रमोद और प्रिंस बंसल नामक पीड़ितों को गोली लगने के मामले में दर्ज 2 FIR पर सुनवाई की। ‘सुश्रत ट्रॉमा सेंटर’ से इनकी मेडिकल रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश की गई।

जज विनोद यादव ने कहा कि बिना किसी पूर्व-नियोजित सोची-समझी साजिश के इतने बड़े स्तर पर इतने कम समय में दंगों का फैलना संभव नहीं है। कोर्ट ने कहा कि जब आरोपित इन मामलों में घिर चुका है, वो सीधा ये कह कर नहीं बच सकता कि वह शारीरिक रूप से इन दंगों में शामिल नहीं हुआ था, इसलिए इसमें उसका कोई हाथ नहीं है। कोर्ट ने पाया कि ताहिर हुसैन ने अपने ‘बाहुबल और राजनीतिक पहुँच’ का इस्तेमाल कर क्षेत्र में सांप्रदायिक हिंसा फैलाई।

ताहिर हुसैन ने कोर्ट में अपने बचाव में तर्क पेश करते हुए कहा कि वो AAP से संबंध रखता है और परिस्थितियों में फँस कर आरोपित बन गया। उसने दावा किया कि वो एक राजनीतिक लड़ाई के बीच में फँस गया है। उसने अपने खिलाफ लगे आरोपों को खुद की छवि धूमिल करने के लिए लगे गए राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा करार दिया। उसने दावा किया कि इन मामलों में उसके खिलाफ कोई ठोस या कानूनी सबूत नहीं हैं।

ताहिर हुसैन ने अपने पक्ष में दलील देते हुए कहा कि दंगों में शामिल होने या संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के मामलों में उसके शामिल होने के कोई वीडियो सबूत उपलब्ध नहीं हैं। उसने कोर्ट से गुहार लगाई कि उसके पीछे उसकी पत्नी, 2 नाबालिग बच्चों और एक स्कूल जाने वाले बेटे की देखरेख करने वाला कोई नहीं है। विरोधी पक्ष ने दलील दी कि एक खास समुदाय का एक समूह ये बात जानता था कि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दौरे के कारण पुलिस उनकी सुरक्षा में व्यस्त होगी, इसलिए वह समय चुना गया।

कोर्ट ने माना कि दंगाई भीड़ खतरनाक हथियारों से लैस थी। अदालत ने कहा कि इस दंगाई भीड़ ने लूटपाट, सार्वजनिक व प्राइवेट संपत्तियों को ध्वस्त करना और आगजनी के अलावा एक समुदाय के जान-माल को क्षति पहुँचाने को अपना लक्ष्य बनाया। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में ये कहना उचित नहीं होगा कि मुख्य आरोपित का लक्ष्य उस दंगाई भीड़ से अलग था। कोर्ट ने पुलिस से कहा कि गवाहों के बयान को दर्ज करने में देरी हो सकती है, क्योंकि ऐसे मामलों में गवाहों को चिह्नित करना मुश्किल कार्य होता है।

कोर्ट ने कहा कि दंगाई उस स्थिति में थे कि वो एक खास समुदाय और कानूनी एजेंसियों के खिलाफ भीड़ जुटा सकें। उन्होंने अपने समुदाय की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए, आतंक और अफरातफरी का माहौल पैदा करने के लिए और कानून-व्यवस्था को अस्थिर करने के लिए ये सब किया, ताकि केंद्र सरकार उनकी माँगों के सामने झुक जाए। कोर्ट ने कहा कि भारत के वैश्विक शक्ति के रूप में उभरने के रास्ते में ये दंगा एक जख्म की तरह बन कर आया।

अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ताहिर हुसैन के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर हैं और उसके द्वारा प्रत्यक्ष रूप से हिंसा नहीं भी की गई है तो भी वो अपने खिलाफ लगाई गई धाराओं से भाग नहीं सकता है। कोर्ट ने ये भी माना कि ताहिर हुसैन के ठिकाने ही दिल्ली कई इलाकों में सांप्रदायिक दंगों के फैलने का हब बने। कोर्ट ने कहा कि ये सब पूर्व-नियोजित था। एक सोची-समझी साजिश के तहत किया गया।

फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास का Modi’in पर हमला, वेस्ट बैंक का ‘बदला’ लेने के लिए दागे रॉकेट

मध्य इजरायल पर शनिवार (15 मई) को हुए जोरदार रॉकेट हमले के दौरान एक रॉकेट वेस्ट बैंक स्थित एक फिलिस्तीनी कस्बे से टकराया। ये रॉकेट अज्जुन शहर के करीब गिरा, जिससे नुकसान तो हुआ, लेकिन कोई घायल नहीं हुआ।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास की सैन्य शाखा ने कहा कि रॉकेट का उद्देश्य इजरायली रक्षा बलों के साथ शुक्रवार को हुई झड़प में मारे गए नौ फिलिस्तीनियों की मौत का बदला लेने के लिए मध्य इजरायल के शहर Modi’in को निशाना बनाना था।

आतंकवादी समूह ने घोषणा की, “अल-कसम ब्रिगेड ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक के शहीदों की आत्माओं के लिए और उनके खून का बदला लेने के लिए, रामल्लाह के पश्चिम में Modi’in पर बमबारी की।”

क्या है इजरायल का Modi’in

Modi’in-Maccabim-Re’ut मध्य इजरायल स्थित एक शहर है। यह तेल अवीव से लगभग 35 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व और यरुशलम से 30 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है, और उन दो शहरों से हाईवे 443 के माध्यम से जुड़ा हुआ है। 2019 में इस शहर की जनसंख्या 93,277 थी।

फिलिस्तीनी प्राधिकरण के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि शुक्रवार को आईडीएफ (इजरायल डिफेंस फोर्सेज) के साथ हिंसक झड़पों के दौरान इजरायल की गोलाबारी में कम से कम नौ वेस्ट बैंक फिलिस्तीनी मारे गए। आईडीएफ के अनुसार, दंगों में करीब 3,000 फिलिस्तीनियों ने भाग लिया था। आईडीएफ ने कहा कि “मुख्य दंगाइयों” को निशाना बनाने सहित कुछ साइटों पर लाइव फायर का इस्तेमाल किया गया था।

हमास के आतंकियों ने गाजा पट्टी से शनिवार दोपहर को मध्य इजरायल की ओर बड़े पैमाने पर रॉकेट दागे। इस हमले में रमत गान नामक 50 वर्ष के एक व्यक्ति के घर के पास रॉकेट गिरने से उसकी मौत हो गई। मध्य तटीय शहरों के साथ-साथ मेगाडलिम, एली, केफर तापुआच, रेचेलिम और अन्य वेस्ट बैंक बस्तियों में सायरन बजते हुए सुनाई दिए। रॉकेट हमले के दौरान कई रॉकेट रामल्लाह के उत्तर में फिलिस्तीनी शहरों के आसपास गिरे।

इसके अतिरिक्त, एक रॉकेट मध्य इजरायली शहर ताइबे में गिरा, जहाँ कुछ अरबी निवासियों को ऑनलाइन वायरल हुए फुटेज में इस स्ट्राइक पर जश्न मनाते देखा गया।

इजरायल के साथ लड़ाई में सैकड़ों फिलिस्तीनियों की मौत

इजरायल सुरक्षा बलों के अनुसार, गाजा में फिलिस्तीनी आतंकवादियों ने सोमवार (10 मई) को लड़ाई शुरू होने के बाद से इजरायल की ओर 2,300 से अधिक रॉकेट दागे हैं।

हमास के इन रॉकेट हमलों में एक छोटे बच्चे सहित दस इजरायली मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं। गाजा में, हमास द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, शनिवार को लड़ाई से मरने वालों की संख्या बढ़कर 139 हो गई, जिसमें दर्जनों बच्चे शामिल थे, जिसमें 1,000 से अधिक घायल हुए थे।

हमास और इस्लामिक जिहाद आतंकवादी समूहों ने अपने पक्ष के 20 लोगों की मौत की पुष्टि की है, हालांकि इजरायल का कहना है कि मृतकों की संख्या बहुत अधिक है और मारे गए दर्जनों लोग आतंकवादी थे। इसके अलावा, आईडीएफ का यह भी कहना है कि इनमें से कुछ मौतें इजरायल पर दागे गए उन रॉकेटों के कारण हुईं, जो अपने लक्ष्य से पहले ही गाजा पट्टी में गिर गए।

आदि शंकराचार्य और ‘शंकर दिग्विजय यात्रा’: 4 दिशा-4 मठ, एक भारत-सशक्त भारत का संकल्प

भारत भूमि में सनातन धर्म क्षीण होता जा रहा था। हिन्दू धर्म से विखंडित हुए पंथ, सनातन धर्म को ही चुनौती देने लगे थे। ऐसे में सनातन धर्म को पुनर्स्थापित करने का बीड़ा उठाया आदि शंकराचार्य ने। उन्होंने भारत भूमि की यात्रा प्रारंभ की जिसे ‘शंकर दिग्विजय यात्रा’ कहा जाता है।

यह कोई युद्ध यात्रा नहीं थी। अपितु इसे ज्ञान यात्रा कहना उचित होगा, क्योंकि आदि शंकराचार्य ने एक रणनीति बनाई थी जिसके तहत वह भारत के विभिन्न धर्म केंद्रों की यात्रा करते और वहाँ उपस्थित धर्म गुरुओं को तर्क और शास्त्रार्थ की चुनौती देते। हारने वाला व्यक्ति जीतने वाले का शिष्यत्व स्वीकार करता। यह आदि शंकराचार्य का चमत्कार ही था कि पूरे भारतवर्ष में उन्हें कोई भी नहीं हरा पाया।

आदि शंकराचार्य की दिग्विजय यात्रा (फोटो साभार : कामकोटि)

तत्कालीन बौद्ध और जैन पंथ के कई विद्वान जो हिन्दू धर्म छोड़कर गए थे, आदि शंकराचार्य से प्रभावित होकर उनके ज्ञान चक्षु खुल गए। ये सभी अपने धर्म की ओर वापस आने लगे। कितने ही धनाढ्य, व्यापारी, सैनिक, छात्र, धर्मगुरु, प्रतिनिधि और यहाँ तक कि अपराधियों ने भी आदि शंकराचार्य से प्रभावित होकर विशुद्ध सनातन धर्म का पालन करना सहर्ष स्वीकार किया। इसी क्रम में आदि शंकराचार्य पहुँचे कश्मीर, जहाँ था हिंदुओं का सबसे पवित्र तीर्थ, शारदा पीठ, जो आज पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में है।   

अखंड भारतवर्ष के महा शक्ति पीठों में से एक है, शारदा पीठ। वर्तमान में माँ शारदा का यह पवित्रतम स्थान पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से अधिकार किए गए कश्मीर के भूभाग में स्थित है। कश्मीरी हिन्दुओं, विशेषकर कश्मीरी पंडितों के लिए सबसे महत्वपूर्ण तीन मंदिरों में से एक है शारदा पीठ, जहाँ माता सरस्वती की पूजा होती है। दो अन्य तीर्थ स्थल हैं, अनंतनाग में स्थित मार्तण्ड सूर्य मंदिर एवं अमरनाथ बाबा।

POK में स्थित हिंदुओं का पवित्र तीर्थ शारदा पीठ (फोटो : Dailyo.in)

जब भगवान शंकर कुपित होकर माता सती की मृत देह को लेकर भयानक तांडव करने लगे तब श्री विष्णु ने उन्हें शांत करने के लिए सुदर्शन चक्र का उपयोग करके माता सती की मृत देह के कई भाग कर दिए। ये भाग पृथ्वी पर जहाँ भी गिरे वहाँ शक्ति पीठों की स्थापना हुई। उनमें से भी कुछ स्थान अत्यधिक महत्त्व के हैं जिन्हे महा शक्ति पीठ कहा जाता है। शारदा पीठ उनमें से एक है। यहाँ माता सती का दाहिना हाथ गिरा था। इतिहासकारों के अनुसार वर्तमान दृश्य मंदिर की स्थापना 5000 वर्षों पहले हुई है। शारदा पीठ विश्व का सबसे पुराना और महान मंदिर विश्वविद्यालय था। ज्ञान का यह केंद्र विश्व भर में अनूठा था और महान ऋषि-मनीषी भी अपने ज्ञान को सम्पूर्ण बनाने के लिए यहाँ आते थे।

आदि शंकराचार्य के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘शंकर दिग्विजय’ में उनके कश्मीर प्रवास और शारदा पीठ की उनकी यात्रा का वर्णन है। कहा जाता है कि शारदा पीठ के चार द्वारों में से तीन द्वार तभी खुले थे, जब तीन दिशाओं के सर्वज्ञानी शास्त्रार्थ में विजय प्राप्त कर उन द्वारों तक पहुँचे। दक्षिण द्वार अभी भी बंद था क्योंकि कश्मीर के दक्षिण से आने वाला कोई भी शास्त्रार्थ में इतना पारंगत नहीं था। किन्तु तत्कालीन भारतवर्ष ने एक ऐसा संन्यासी देखा था, जिसने मात्र 8 वर्षों की उम्र में ही सनातन धर्म के सभी ज्ञात शास्त्रों को पढ़कर उन्हें समझ लिया था।

आदि शंकराचार्य जब शारदा पीठ पहुँचे तब उनके साथ शास्त्रार्थ करने के लिए विभिन्न दर्शनों में पारंगत विद्वान उपस्थित हुए। अलग-अलग पंथ के कई गुरु, शोधकर्ता, शिक्षक और लेखक पहुँचे लेकिन आदि शंकराचार्य ने सभी को जीत लिया। अंत में जब आदि शंकराचार्य दक्षिण द्वार खोलने गए तब एक मधुर आवाज ने उनसे रुकने को कहा। माता शारदा ने स्वयं आदि शंकराचार्य से शास्त्रार्थ की इच्छा जताई। शास्त्रार्थ प्रारंभ हुआ और बहुत समय तक चला। अंत में माता शारदा, आदि शंकराचार्य के तर्कों से सहमत हुईं और शारदा पीठ का दक्षिण द्वार खुल गया। उनकी विद्वता को देखते हुए ही उन्हें सर्वज्ञपीठम की उपाधि मिली थी। 

आदि शंकराचार्य को कश्मीर में ही शिव के साथ माता शक्ति के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ और शक्ति के अस्तित्व का अद्भुत ज्ञान हुआ। आदि शंकर ने जहाँ माता शक्ति के वर्णन में महान ग्रन्थ ‘सौंदर्य लहरी’ की रचना की वह स्थान शंकराचार्य मंदिर और जिस पहाड़ी पर यह मंदिर स्थित है उसे शंकराचार्य पर्वत कहा गया। हालाँकि पहले यह मंदिर गोपाद्रि मंदिर कहा जाता था जहाँ एक शिवलिंग स्थापित है। इस मंदिर को भी कुतबुद्दीन के बेटे सिकंदर ने नष्ट कर दिया था। बाद में स्वतंत्रता के पश्चात मंदिर में शिवलिंग के पीछे आदि शंकराचार्य की एक प्रतिमा स्थापित की गई।

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर स्थित शंकराचार्य मंदिर (फोटो : जागरण)

कश्मीर के अन्य मंदिरों की तरह शारदा पीठ भी तोड़ दिया गया। इस्लामिक कट्टरपंथियों के लिए कुछ भी महान नहीं था। उनके लिए मंदिर की प्राचीनता और महानता मायने नहीं रखती थी। उनके लिए इतना ही पर्याप्त था कि मंदिर हिन्दुओं के हैं। आज भी शारदा पीठ अपनी प्राचीनतम पहचान पुनः प्राप्त करने की प्रतीक्षा में है।

भारत राष्ट्र के एकीकरण का जो कार्य आदि शंकराचार्य ने किया था वह साधारण मनुष्य के बस की बात नहीं है। केरल के कलाड़ी में नंबूदरी ब्राह्मण शिवगुरु और आर्यम्बा के घर पैदा हुए आदि शंकराचार्य अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। संतानहीन रहने के कारण शिवगुरु और आर्यम्बा ने तमाम अनुष्ठान किए, तब उन्हें स्वप्न में एक दैवीय ब्राह्मण ने दो विकल्प दिए। पहला विकल्प था दीर्घायु लेकिन मूर्ख पुत्र और दूसरा विकल्प था अल्पायु किन्तु अत्यंत बुद्धिमान संतान। सनातन धर्म में गहरी आस्था रखने वाले माता-पिता समझ गए कि उनकी संतान उनकी नहीं अपितु धर्म और समाज की सेवा के लिए जन्म लेने वाला है, तो उन्होंने अल्पायु पुत्र ही चुना। 32 वर्ष की आयु में आदि शंकराचार्य ने सनातन धर्म के उत्थान के लिए जो कार्य किया वह यही सिद्ध करता है कि उनका जन्म दैवीय संयोग से ही हुआ था।

आदि शंकराचार्य की दिग्विजय यात्रा का उद्देश्य ही था, सनातन धर्म की स्थापना करना। उन्होंने न केवल दूसरे पंथों के विद्वानों को अपना शिष्य बनाया अपितु सनातन धर्म में ही जो विभिन्न परंपराओं के नाम पर बँटे हुए थे उन्हें भी संगठित किया। भारत की चार दिशाओं में चार मठों की स्थापना का उनका उद्देश्य ही था भारतवर्ष का एकीकरण।

अल्लाह-हू-अकबर चिल्लाती भीड़ का हमला: यहूदी खून से लथपथ, बचाव में उतरी लड़की का यौन शोषण

इजराइल और फिलिस्तीन के बीच जारी जंग के बीच विदेशों में रहने वाले फिलिस्तीनी समर्थक वहाँ रह रहे यहूदियों को निशाना बना रहे हैं। इसी कड़ी में कनाडा में रहने वाले यहूदी लोगों को फिलिस्तीन समर्थक भीड़ के हिंसक हमले का शिकार होना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, 15 मई को फिलिस्तीन समर्थक भीड़ ने एक व्यक्ति पर हमला कर दिया जो एक अन्य यहूदी व्यक्ति को बचाने की कोशिश कर रहा था। हिंसक भीड़ अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाते हुए उसे लाठियों से पीटा। उस पर पथराव किए गए।

इस बीच कनाडा के कई स्थानों पर कनाडा की पुलिस भीड़ को भगाने और यहूदी लोगों को हमले से बचाने की कोशिशें करती दिखी।

पुरुष को बचाने की कोशिश में यहूदी लड़की से छेड़छाड़

ट्विटर यूजर EliKohn3 ने कहा कि जिन यहूदी लड़कियों पर हमला किया गया था, उन्होंने उनमें से एक से बात की थी। लड़की ने EliKohn3 को बताया कि वीडियो में देखे गए बूढ़े व्यक्ति को बचाने की कोशिश में उसके साथ छेड़छाड़ की गई। लड़की के मुताबिक, “उन्होंने हम पर पत्थर, पानी की बोतलें और काँच की बोतलें फेंकी। पुलिस हमें उस पार्किंग स्थल तक ले जा रही थी, जहाँ हमारी कार थी। पार्किंग में मैंने एक बुजुर्ग यहूदी व्यक्ति को भागते हुए देखा। भीड़ ने उसके बाल खींचे और जैसे ही वह मुड़ा वे उछल पड़े। उन्होंने उसे लाठियों से भी पीटा। जैसे ही मैं उनपर चिल्लाई तो भीड़ में से एक ने मुझे लात मारी और कईयों ने मेरी छाती को पकड़कर मुझे किस करने के बाद चिल्लाते हुए भाग निकले।”

टोरंटो यहूदी एडवोकेसी द्वारा शेयर किए गए वीडियो के कमेंट में एक इंस्टाग्राम यूजर ने बताया कि उस व्यक्ति को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया था और वह ठीक था। उसने यह भी बताया कि इसी तरह के हमले कनाडा में पिछले कुछ घंटों के भीतर फिलिस्तीन समर्थक भीड़ और देश में रहने वाले इजरायल समर्थक लोगों द्वारा किए गए मार्च के दौरान हुए हैं।

न्यू यॉर्क में ‘स्टार ऑफ डेविड’ पहने हुए व्यक्ति पर हुआ था हमला

इससे पहले 12 मई को ऐसी खबरें सामने आई थीं, जिसके मुताबिक “स्टार ऑफ डेविड” पहने हुए एक व्यक्ति एक यहूदी व्यक्ति पर फिलिस्तीन समर्थक भीड़ ने हमला कर दिया था। जब पुलिस उसे बचाने की कोशिश कर रही थी, तब वह खून से सना हुआ था। खून से लथपथ आदमी के पीछे दौड़ती भीड़ फिलिस्तीन समर्थक उस पर चश्मा और पत्थर फेंकते हुए “F**K You,” “Run p**sy,” “f**king p**sy run” चिल्ला रही थी।

इस घटना का वीडियो पत्रकार एंडी एनजीओ ने ट्विटर पर शेयर किया था। यह हमला स्थानीय समायानुसार शाम करीब सात बजे हुआ था। रिपोर्ट्स से पता चला है कि मौखिक विवाद के बाद फिलिस्तीन समर्थक भीड़ में से ही एक व्यक्ति ने यहूदी व्यक्ति पर मेटल की कुर्सी से हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

पहले इजरायल पर हुआ हमला

फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास द्वारा यहूदी राष्ट्र पर हवाई हमले के बाद इजरायल और फिलिस्तीन के बीच तनाव बढ़ गया था। मंगलवार (11 मई 2021) को फिलिस्तीनी आतंकवादी संगठन हमास ने इजराइल में सैकड़ों रॉकेट दागे और बड़े पैमाने हवाई हमले किए। हालाँकि, आयरन डोम के नाम से विख्यात इजराइली डिफेंस सिस्टम ने हमास के सभी रॉकेट्स को हवा में ही नष्ट कर दिया।

इसके बाद पलटवार करते हुए इजराइल ने गाजा पट्टी के अंदर फिलीस्तीनी आतंकी संगठन हमास पर अपने हमले तेज कर दिए। इजराइल की डिफेंस फोर्स ने हमास पर एयर स्ट्राइक कर उसके कई ठिकानों को तबाह कर दिया। मंगलवार को जवाबी हमले में इजराइल ने हवाई हमले में हमास की गगनचुंबी इमारतों को आवासीय भवनों को निशाना बनाया।

वहीं बुधवार को इजराइल ने हमास की मेट्रो के नाम से जानी जाने वाली अंडर ग्राउंड सुरंग पर हमला कर उसे तबाह कर दिया। इसका उपयोग हमास आतंकवादियों को छुपाने और हथियारों की तस्करी के लिए करता था। गुरुवार को आईडीएफ ने गाजा में मीडिया समूहों के दफ्तरों को भी उड़ा दिया। इसको लेकर इजराइली डिफेंस फोर्स ने कहा कि हमास उन इमारतों का इस्तेमाल हमास उन पर हमले के लिए कर रहा था। तबसे लगातार हमले जारी हैं।

WHO, नीति आयोग बाद अब बॉम्बे HC ने Covid से निपटने के ‘यूपी मॉडल’ को सराहा, पूछा- क्या कर रही है महाराष्ट्र सरकार?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और नीति आयोग के बाद अब बॉम्बे हाई कोर्ट ने कोरोना वायरस संक्रमण के रोकथाम के लिए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार और उनके ‘यूपी मॉडल’ की सराहना की है। बॉम्बे हाई कोर्ट मुख्यतः बच्चों को Covid-19 से बचाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किए गए उपायों से संतुष्ट नजर आई।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए गए ट्वीट में कहा गया कि प्रदेश सरकार द्वारा महामारी से लोगों को बचाने और संक्रमण पर अंकुश लगाने की मुहिम को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सराहा है।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि बॉम्बे हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कोरोना वायरस संक्रमण से बच्चों को बचाने के लिए किए गए उपायों पर आधारित मीडिया रिपोर्ट्स पर संज्ञान लेते हुए महाराष्ट्र सरकार से पूछा कि क्या उनके द्वारा भी ऐसे उपाय किए जा रहे हैं? बॉम्बे हाई कोर्ट की इस पीठ में मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और जस्टिस गिरीश कुलकर्णी थे।

बता दें कि महाराष्ट्र में 10 वर्ष की आयु के लगभग 10,000 बच्चे संक्रमित हो चुके हैं, ऐसे में हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र की सरकार से उत्तर प्रदेश की तरह बच्चों को सुरक्षित रखने के उपायों पर विचार करने को कहा।

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस संक्रमण से बच्चों को बचाने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के प्रत्येक बड़े शहर में 50 से 100 पीडियाट्रिक बेड और अन्य चिकित्सा सुविधाओं से लैस पीआईसीयू बनाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा हर जिले में आईसीयू की तर्ज पर संक्रमण के इलाज के संसाधनों से युक्त बेड्स की व्यवस्था अस्पतालों में की जाएगी।

इससे पहले नीति आयोग ने भी उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की ऑक्सीजन परिवहन और ट्रैकिंग रणनीति की सराहना की थी। नीति आयोग ने उत्तर प्रदेश के ऑक्सी-ट्रैकर मॉनिटरिंग सिस्टम का उदाहरण देते हुए कहा कि इसके माध्यम से ऑक्सीजन टैंकर्स और ऑक्सीजन आपूर्ति की रियल टाइम मॉनिटरिंग हो रही है जिससे राज्य अब 250 मीट्रिक टन की जगह 1000 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति कर पा रहा है।

इसके अलावा आयोग ने उत्तर प्रदेश के 90,000 गाँवों में Covid-19 के मरीजों तक पहुँचने और उनके इलाज के लिए सरकार द्वारा अपनाई गई ‘ट्रिपल टी’ (TTT) रणनीति को अन्य राज्यों द्वारा अपनाने की सलाह दी। ट्रिपल टी का अर्थ है टेस्ट, ट्रेस और ट्रीट।

गौरतलब है कि पिछले दिनों भारत में कोरोना संक्रमण के फैलते प्रकोप के बीच वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने योगी सरकार के डोर-टू-डोर कैम्पेन की तारीफ की थी। WHO ने अपने एक लेख में बताया था कि कैसे योगी सरकार ने महामारी के समय में आवश्यक कदम उठाते हुए उन्हें जमीनी स्तर पर लागू किया।

इजराइली एयर स्ट्राइक में 42 मरे, गाजा शहर के तीन बिल्डिंग खाक: अघोषित युद्ध के सातवें दिन हमास चीफ के घर पर बरसे बम

इजराइल और फिलीस्तीन के बीच खूनी संघर्ष अभी भी जारी है। इजराइल ने सातवें दिन रविवार (16 मई 2021) को गाजा पट्टी में हमास प्रमुख के घर पर बम बरसाए। वहीं, इस्लामी समूह ने भी तेल अवीव पर जमकर रॉकेट बैराज दागे। दोनों तरफ से भीषण बमबाजी की गई। शाम होते-होते गाजा शहर पर भी इजरायल द्वारा एयर स्ट्राइक किया गया जिसमें कई सिविलियन के मारे जाने की भी भी खबर है।

रविवार शाम को गाजा शहर में की गई इजरायली एयर स्ट्राइक में तीन इमारतें तबाह हुईं और लगभग 42 लोग मारे गए। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल और फिलिस्तीन के बीच लड़ाई चलती रहेगी। वहीं गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि मारे गए लोगों में 16 महिलाएँ और 10 बच्चे हैं।

बता दें कि आज ही इजराइल पर गाजा से हो रही रॉकेट फायरिंग की भारत ने UN में की निंदा! संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा, “गाजा से इजरायल में नागरिक आबादी को लक्षित कर अंधाधुंध रॉकेट फायरिंग की जा रही है, जिसकी हम निंदा करते हैं।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल ने आज येहाया अल-सिनवार के घर पर हमला किया, जो कि 2017 से हमास के राजनीतिक और सैन्य विभाग के प्रमुख है। हालाँकि, अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है कि हमले के वक्त हमास प्रमुख वहाँ मौजूद था या नहीं। वहीं, स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इजराइल की ओर से किए गए एयर स्ट्राइक्स में कम से कम 3 फिलीस्तीनी मारे गए हैं और कई घायल हैं।

बताया जा रहा है कि इजराइल में रॉकेट हमलों को लेकर बजते सायरन के बीच लोग बम शेल्टर्स में भागते नजर आए। तेल अवीव और इसके आसपास में भागते हुए करीब 10 लोग घायल हुए हैं।

मालूम हो कि सोमवार 10 मई 2021 से शुरू हुए इजराइल हमले में अब तक गाजा में कम से कम 148 लोग मारे जा चुके हैं। इनमें 41 बच्चे भी शामिल हैं। वहीं, इजरायल ने भी अपने यहाँ 10 नागरिकों की मौत की जानकारी दी है, जिसमें 2 बच्चे शामिल हैं।

कई सालों में यह सबसे भीषण संघर्ष है

अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र और इजिप्ट के दूत दोनों पड़ोसी देशों में शांति कायम करने के लिए कोशिश में जुटे हैं, लेकिन अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आज इस अशांति को लेकर बैठक हुई है। इजराइल और फिलीस्तीन के बीच कई सालों में यह सबसे भीषण संघर्ष है। दरअसल, इजराइल और हमास दोनों की ओर से लगातार हमले जारी हैं। उन्होंने कहा है कि वे देश में शांति बहाल करने के लिए इसे कुछ दिन और जारी रखेंगे।

गौरतलब है कि इजराइली डिफेंस फोर्स (IDF) ने शनिवार (मई 15, 2021) शाम एयरस्ट्राइक कर उस 12 मंजिला अपार्टमेंट (गाजा टावर) को तबाह कर दिया था, जहाँ अमेरिकी मीडिया एसोसिएट प्रेस (AP) और कतर के मीडिया हाउस अल जजीरा सहित कई समाचार समूहों के ऑफिस थे।

हमले से पहले IDF ने एक अनाउंसमेंट किया था। इसमें लोगों से अपने घर खाली करने के लिए कहा गया। ठीक एक घंटे बाद इजराइल के फाइटर प्लेन ने बमबारी शुरू कर दी और कुछ ही सेकेंड में 12 मंजिला बिल्डिंग तबाह हो गई।

इजराइल डिफेंस फोर्स ने ट्विटर के माध्यम से जानकारी दी कि क्यों उस इमारत को निशान बनाया गया, जहाँ अल-जजीरा समेत अन्य मीडिया समूहों के कार्यालय थे। इजराइल डिफेंस फोर्स (@IDF) ने ट्वीट करके बताया कि हमास गाजा की ऊँची इमारतों का उपयोग इजरायल के खिलाफ संचार साधने, कमांड-कंट्रोल, हमले की प्लानिंग और खुफिया सूचनाओं को इकट्ठा करने के लिए कर रहा है और जब हमास इन इमारतों को सैन्य उपयोग में ले रहा है तो ये इमारतें निश्चित तौर पर सैन्य लक्ष्य भी बन जाती हैं।

वहीं, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अल जज़ीरा और अन्य मीडिया आउटलेट्स वाले गाजा की ऊँची इमारत के मालिक का कहना था कि उन्हें इजराइल की सेना से एक कॉल आया था, जिसमें उन्हें चेतावनी दी गई थी कि उनकी इमारत को हवाई हमले से निशाना बनाया जाएगा।

अपने पैरेंट्स से डेटिंग से लेकर शराब तक सब करती हूँ शेयर: अनुराग कश्यप की बोल्ड बेटी आलिया ने किया खुलासा

बॉलीवुड फिल्ममेकर अनुराग कश्यप अक्सर अपने बयानों के चलते सुर्खियों में रहते हैं। वहीं, उनकी बेटी आलिया कश्यप भी अपने बोल्ड अंदाज को लेकर सोशल मीडिया में छाई रहती हैं।

अपने बिंदास अंदाज के लिए फेमस आलिया कश्यप ने हाल ही में अपने यूट्यूब चैनल पर खुलासा किया कि वह अपने पेरेंट्स से कभी भी कोई भी बात नहीं नहीं छिपाती हैं। यहाँ तक की डेटिंग और ड्रिंक करने की बात भी वह उनसे शेयर करती हैं। आलिया ने आगे कहा कि वह अपने पेरेंट्स अनुराग कश्यप और आरती बजाज के बेहद करीब हैं और उन्हें अपना बेस्ट फ्रेंड मानती हैं।

हाल ही में स्टारकिड ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें वह अपना मेकअप रूटीन करती नजर आ रही हैं। उन्होंने इसका कैप्शन दिया, “चिट-चैट मेरे साथ तैयार हो जाओ! ब्रंच एंड बीच डे।” इस दौरान आलिया अपने फैंस के कुछ सवालों के जवाब देती हुई नजर आईं।

फैंस का पहला सवाल था, “अपनी रिलेशनशिप को लेकर वह अपने पेरेंट्स के साथ कितना फ्रेंडली हैं?” इस पर जवाब देते हुए फिल्ममेकर की बेटी ने कहा कि वह अपने पैरेंट्स से एक-एक बात खुलकर करती हैं। आलिया ने कहा, “जब मैं बड़ी हो रही थी, तो मेरे माता-पिता ने सख्ती की बजाए मुझसे दोस्त की तरह व्यवहार किया। इसलिए मैं उनसे कुछ नहीं छिपाती हूँ। मैं उनके साथ हर मामले में ओपन हूँ और उनके साथ मेरी अच्छी दोस्ती है।”

उन्होंने कहा कि जाहिर है, “सभी टीनएजर शराब और इस तरह की कई चीजों के आदी होते हैं, लेकिन जब मैंने ऐसा कुछ किया तो इसको लेकर अपने पैरंट्स से कभी भी झूठ नहीं बोला। मैंने उन्हें हर बात खुले तौर पर बताई, क्योंकि मेरा मानना है कि यह सब नॉर्मल है। मैं झूठ नहीं बोलने वाली और यह भी नहीं कहूँगी कि मैंने टीनएज में शराब नहीं पी थी। बेशक, मैं ये सब करती हूँ, लेकिन माता-पिता को बताकर।”

फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शन में यहूदियों के लिए F*ck जैसे शब्दों का उपयोग, उनकी माँ-बेटियों से बलात्कार के नारे: वीडियो

हमास के खिलाफ चलाए जा रहे इजरायल के अभियान के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें कथित तौर पर कुछ फिलिस्तीनी समर्थक यहूदियों के लिए अपमानजनक और घृणित भाषा का उपयोग कर रहे हैं। घटना लंदन के फिंचले रोड की बताई जा रही है। सोशल मीडिया पर किए गए दावे के अनुसार यह घटना रविवार की शाम की बताई जा रही है।

वीडियो में फिलिस्तीनी समर्थक यहूदियों, उनकी माँ-बेटियों के लिए F*ck जैसे अपशब्दों का उपयोग कर रहे हैं और उनका बलात्कार करने की धमकी दे रहे हैं। यह वीडियो तेजी से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रहा है।

दावों के अनुसार फिलिस्तीनी समर्थक प्रदर्शनकारी फिंचले रोड स्थित यहूदी कम्युनिटी सेंटर के पास रैली निकाल रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने लोगों से फिलिस्तीन का समर्थन करने की अपील भी की।  

15 मई को फिलिस्तीनी समर्थक भीड़ ने कनाडा में यहूदियों पर हमला किया। इस हमले में फिलिस्तीनी समर्थकों ने अल्ला-हू-अकबर का नारा लगाते हुए यहूदियों पर पत्थरबाजी की और एक यहूदी लड़की का उत्पीड़न भी किया।

12 मई को अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में एक दूसरी घटना में फिलिस्तीनी समर्थकों की भीड़ ने एक यहूदी पर हमला किया। भीड़ यहूदी के पीछे भाग रही थी और उस पर ग्लास और पत्थर फेंक रही थी। इसके अलावा भीड़ ने उस यहूदी के लिए बेहद गंदे अपशब्दों का उपयोग भी किया।

मोदी सरकार द्वारा भेजे गए वर्किंग वेंटिलेटर को विरोधी राज्यों ने ‘दोषपूर्ण’ बता डंप किया: रिपोर्ट में खुलासा

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), जिसे पिछले साल लगभग 30,000 वेंटिलेटर मशीनों के निर्माण का काम सौंपा गया था, ने कहा कि पंजाब जैसे राज्यों में कुछ वेंटिलेटर को ‘दोषपूर्ण’ (‘faulty’) कह कर खारिज कर दिया गया। टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के अस्पताल नियमित रिपेयर और रखरखाव के काम को कवर करने में विफल रहे, जिसके कारण वेंटिलेटर ‘खराब’ हो गए।

बीईएल के सीएमडी एमवी गौतम ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “मरीज के आईसीयू से जुड़े फ्लो सेंसर हैं और फिर ऑक्सीजन सेंसर हैं। जब हमारी टीम फरीदकोट गई तो हमने देखा कि उपयोग करने वाली सामग्रियों को बदला नहीं गया था। हर बार जब कोई नया मरीज आईसीयू में आता है तो फ्लो सेंसर को बदलना अनिवार्य होता है। दूसरी बात, कुछ वेंटिलेटर इंस्टॉलेशन के दौरान फरीदकोट के लैटीट्यूड-लॉन्गिट्यूड के साथ कैलिब्रेट नहीं किए गए थे। जब भी कोई वेंटिलेटर स्थान बदलता है, तो उस स्थान के अनुसार ऑक्सीजन का दबाव बदलना चाहिए। तीसरी बात, ऑक्सीजन सेंसर की सेल्फ लाइफ होती है। यदि आप इसे एक दर्जन रोगियों के साथ 100% ऑक्सीजन के साथ उपयोग करते हैं, तो यह खराब हो जाएगा, यह काम नहीं करेगा। ऑक्सीजन सेंसर को बदलना होगा, जो फरीदकोट में नहीं हुआ।”

केंद्र सरकार ने कहा है, “कई अस्पतालों में वेंटिलेटर लगाने के लिए साइट तैयार नहीं हैं। इसमें पाइप से ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रणाली की कमी या पाइप सिस्टम में अनुकूल ऑक्सीजन दबाव की कमी या यहाँ तक कि उचित विद्युत फिटिंग की कमी शामिल है।”

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केंद्र सरकार ने कहा कि जहाँ निर्माता वेंटिलेटर की आपूर्ति करेंगे और उनके उचित उपयोग का प्रदर्शन करेंगे, वहीं अस्पतालों को भी कुछ उपाय करने की आवश्यकता है जिसमें, “अस्पतालों के उपयोगकर्ता कर्मचारियों का प्रशिक्षण, उन्हें सुरक्षा के लिए मैनुअल और ऑडियो-विजुअल / ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान करना शामिल है। वेंटिलेटर के उपयोग में किसी भी तरह की जानकारी की कमी” और “व्हाट्सएप ग्रुप्स, ईमेल, टेलीफोन कॉल्स और टोल-फ्री नंबरों के माध्यम से राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को पहले से ही सूचित किए गए अस्पतालों / राज्यों से प्राप्त शिकायतों का मजबूत और त्वरित अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित करें।”

नतीजतन, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी कुछ उपायों को अपनाने का निर्देश दिया गया है, जिसमें अस्पतालों में वेंटिलेटर कनेक्टर और उचित विद्युत फिटिंग की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को “निर्माताओं द्वारा प्रदान किए गए मार्गदर्शन के अनुरूप समय पर प्रतिस्थापन और ताजा उपभोग्य सामग्रियों का उपयोग सुनिश्चित करने” के लिए निर्देशित किया गया है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ मंदीप के भंडारी द्वारा 9 मई को भेजे गए एक अन्य पत्र में कहा गया है, “स्थापना की कमी विभिन्न अकाउंट्स पर हो सकती है, जैसे कि उनका उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित और कुशल जनशक्ति की कमी, अनुचित संचालन उपकरण… सुनिश्चित करें कि वेंटिलेटर का उपयोग करने के लिए दी गई जनशक्ति को संवेदनशील बनाया गया है और आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया हो।”

पहले यह बताया गया था कि पंजाब में कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के दौरान 250 वेंटिलेटर बिना इस्तेमाल किए रह गए थे। महाराष्ट्र के एक कॉन्ग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर ‘वेंटिलेटर घोटाले’ का आरोप लगाया था, जिसके बाद MoFHW को उनके दावों को खारिज करते हुए स्पष्टीकरण जारी करने के लिए मजबूर होना पड़ा।