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मोदी सरकार द्वारा भेजे गए वर्किंग वेंटिलेटर को विरोधी राज्यों ने ‘दोषपूर्ण’ बता डंप किया: रिपोर्ट में खुलासा

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), जिसे पिछले साल लगभग 30,000 वेंटिलेटर मशीनों के निर्माण का काम सौंपा गया था, ने कहा कि पंजाब जैसे राज्यों में कुछ वेंटिलेटर को ‘दोषपूर्ण’ (‘faulty’) कह कर खारिज कर दिया गया। टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के अस्पताल नियमित रिपेयर और रखरखाव के काम को कवर करने में विफल रहे, जिसके कारण वेंटिलेटर ‘खराब’ हो गए।

बीईएल के सीएमडी एमवी गौतम ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “मरीज के आईसीयू से जुड़े फ्लो सेंसर हैं और फिर ऑक्सीजन सेंसर हैं। जब हमारी टीम फरीदकोट गई तो हमने देखा कि उपयोग करने वाली सामग्रियों को बदला नहीं गया था। हर बार जब कोई नया मरीज आईसीयू में आता है तो फ्लो सेंसर को बदलना अनिवार्य होता है। दूसरी बात, कुछ वेंटिलेटर इंस्टॉलेशन के दौरान फरीदकोट के लैटीट्यूड-लॉन्गिट्यूड के साथ कैलिब्रेट नहीं किए गए थे। जब भी कोई वेंटिलेटर स्थान बदलता है, तो उस स्थान के अनुसार ऑक्सीजन का दबाव बदलना चाहिए। तीसरी बात, ऑक्सीजन सेंसर की सेल्फ लाइफ होती है। यदि आप इसे एक दर्जन रोगियों के साथ 100% ऑक्सीजन के साथ उपयोग करते हैं, तो यह खराब हो जाएगा, यह काम नहीं करेगा। ऑक्सीजन सेंसर को बदलना होगा, जो फरीदकोट में नहीं हुआ।”

केंद्र सरकार ने कहा है, “कई अस्पतालों में वेंटिलेटर लगाने के लिए साइट तैयार नहीं हैं। इसमें पाइप से ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रणाली की कमी या पाइप सिस्टम में अनुकूल ऑक्सीजन दबाव की कमी या यहाँ तक कि उचित विद्युत फिटिंग की कमी शामिल है।”

Image Credit: Rohan Dua/ToI

केंद्र सरकार ने कहा कि जहाँ निर्माता वेंटिलेटर की आपूर्ति करेंगे और उनके उचित उपयोग का प्रदर्शन करेंगे, वहीं अस्पतालों को भी कुछ उपाय करने की आवश्यकता है जिसमें, “अस्पतालों के उपयोगकर्ता कर्मचारियों का प्रशिक्षण, उन्हें सुरक्षा के लिए मैनुअल और ऑडियो-विजुअल / ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान करना शामिल है। वेंटिलेटर के उपयोग में किसी भी तरह की जानकारी की कमी” और “व्हाट्सएप ग्रुप्स, ईमेल, टेलीफोन कॉल्स और टोल-फ्री नंबरों के माध्यम से राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को पहले से ही सूचित किए गए अस्पतालों / राज्यों से प्राप्त शिकायतों का मजबूत और त्वरित अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित करें।”

नतीजतन, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी कुछ उपायों को अपनाने का निर्देश दिया गया है, जिसमें अस्पतालों में वेंटिलेटर कनेक्टर और उचित विद्युत फिटिंग की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को “निर्माताओं द्वारा प्रदान किए गए मार्गदर्शन के अनुरूप समय पर प्रतिस्थापन और ताजा उपभोग्य सामग्रियों का उपयोग सुनिश्चित करने” के लिए निर्देशित किया गया है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ मंदीप के भंडारी द्वारा 9 मई को भेजे गए एक अन्य पत्र में कहा गया है, “स्थापना की कमी विभिन्न अकाउंट्स पर हो सकती है, जैसे कि उनका उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित और कुशल जनशक्ति की कमी, अनुचित संचालन उपकरण… सुनिश्चित करें कि वेंटिलेटर का उपयोग करने के लिए दी गई जनशक्ति को संवेदनशील बनाया गया है और आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया हो।”

पहले यह बताया गया था कि पंजाब में कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के दौरान 250 वेंटिलेटर बिना इस्तेमाल किए रह गए थे। महाराष्ट्र के एक कॉन्ग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर ‘वेंटिलेटर घोटाले’ का आरोप लगाया था, जिसके बाद MoFHW को उनके दावों को खारिज करते हुए स्पष्टीकरण जारी करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

57 इस्लामिक देशों वाले OIC की आपात बैठक, ईरान के कहने पर एकजुट हुए मुस्लिम देश: इजरायल को दी गई चेतावनी

इजरायल और गाजा पट्टी पर प्रशासनिक अधिकार रखने वाले कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन हमास के बीच लगभग एक हफ्ते से चल रहे संघर्ष के दौरान रविवार को 57 देशों वाले ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) की सऊदी अरब के जेद्दा में आपात बैठक बुलाई गई। इस बैठक में कई मुस्लिम देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए जिन्होंने अल-अक्सा मस्जिद में इजरायल की कार्रवाई पर चर्चा की।

मंत्रीस्तरीय बैठक में प्रस्ताव के माध्यम से इस्लामिक उम्माह के उल्लंघन और फिलिस्तीन के खिलाफ उग्र कार्रवाई पर इजरायल को खतरनाक परिणामों की चेतावनी दी गई।

अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद हनीफ़ अतमर ने कहा कि आज फिलिस्तीनियों की जो दुर्दशा है वह इस्लामिक देशों के लिए घाव की तरह है। फिलिस्तीन के विदेश मंत्री ने कहा कि वह अल्लाह से कहना चाहते हैं कि वो अंतिम समय तक फिलिस्तीन में होने वाले अन्याय का विरोध करेंगे। तुर्की ने भी बैठक में इजरायल का विरोध किया। तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा कि इजरायल को जो चेतवानी दी गई थी उसे अनसुना कर दिया गया है और वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी में जो भी हुआ उसका एकमात्र जिम्मेदार इजरायल ही है।

बैठक में ईरान की ओर से इजरायल का कड़ा विरोध किया गया है। हाल ही में ईरान के एक शीर्ष नेता अयातुल्लाह खुमैनी ने कहा था कि इजरायल मुस्लिम देशों के खिलाफ एक आतंकी ठिकाना है और सभी मुस्लिम देशों को इजरायल के खिलाफ एकजुट होना चाहिए। OIC की बैठक में ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जरीफ़ ने कहा कि इजरायल मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार का दोषी है। इजरायल पर हमास के हमलों को जायज ठहराते हुए जरीफ़ ने कहा कि इजरायल विरोध की भाषा ही समझता है और फिलिस्तीन के लोगों को अपनी सुरक्षा का पूरा अधिकार है।

इजरायल और हमास के बीच चल रहे संघर्ष के बीच हमास के शीर्ष नेता इस्माइल हनीयेह ने कहा था कि विरोध बंद नहीं होगा और विरोध ही येरुशलम का एक मात्र रास्ता है। इस्माइल ने कहा कि फिलिस्तीनियों का एक ही लक्ष्य है, येरुशलम को फिलिस्तीन की राजधानी बनाना।

इजरायल और हमास का संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। जहाँ एक ओर हमास, इजरायल के रिहायशी क्षेत्रों को निशाना बना रहा है वहीं इजरायल भी हमास के रॉकेट हमलों का जवाब दे रहा है। इजरायल ने हाल की कुछ कार्रवाईयों में हमास को बड़ा नुकसान पहुँचाया। इजरायल ने बड़ा हवाई हमला करते हुए हमास की मेट्रो कही जाने वाली भूमिगत सुरंगों पर भयंकर बमबारी की और शनिवार के दिन ही गाजा पट्टी की एक बहुमंजिला इमारत को नष्ट कर दिया। इस इमारत में अल-जजीरा जैसे कई मीडिया समूहों के ऑफिस थे।     

केंद्र ने राज्यों को मुफ्त में दी 20 करोड़ से ज्यादा Covid वैक्सीन, अब तक इतने लोगों को लगा टीका

देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर जारी है। कोरोना वायरस के कारण हर रोज लाखों लोग देश में संक्रमित हो रहे हैं। वहीं कई लोगों की जान भी कोरोना के कारण जा रही है। इस बीच देश में कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान भी जारी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार (मई 16, 2021) को कहा है कि 20 करोड़ से ज्यादा कोरोना वैक्सीन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को मुफ्त में दी गई है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, “भारत सरकार के जरिए अब तक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 20 करोड़ से अधिक (20,28,09,250) वैक्सीन डोज मुफ्त दी गई है। 1.84 करोड़ से अधिक (1,84,41,478) वैक्सीन डोज अभी भी उनके पास उपलब्ध हैं। इसके अलावा अगले 3 दिनों में उन्हें लगभग 51 लाख डोज मिल जाएगी।”

केंद्र द्वारा दी गई जानकारी में कहा गया है कि जो राज्य उन्हें दिए गए टीकों की तुलना में अधिक खपत (अपव्यय सहित) दिखा रहे हैं, उन्होंने सशस्त्र बलों को आपूर्ति किए गए टीकों का मिलान नहीं किया है। राज्यों को अगले तीन दिनों में 50,95,640 वैक्सीन की खुराक और मिलने वाली है। 

बता दें कि जनवरी के महीने से देश में कोरोना वैक्सीनेशन अभियान चलाया जा रहा है। देश में अब तक 18.2 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है। वहीं 4.1 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिन्हें कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज अब तक दी जा चुकी है। पिछले 24 घंटों में 17 लाख से ज्यादा लोगों को वैक्सीन की खुराक दी गई है।

देश में कितने कोरोना के मरीज?

वहीं देश में अब तक 2.46 करोड़ से ज्यादा कोरोना वायरस के मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से 2 करोड़ से ज्यादा लोग कोरोना से रिकवर हो चुके हैं। वहीं 2.7 लाख लोगों की कोरोना कारण जान भी जा चुकी है। देश में फिलहाल कोरोना वायरस के 36 लाख से ज्यादा एक्टिव केस हैं।

जिसके बूथ पर BJP ने बंगाल में ली थी बढ़त, उस कार्यकर्ता अरिंदम का शव फँदे से लटकता मिला

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद हिंसा की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इसी कड़ी में रविवार (मई 16, 2021) को फाल्टा विधानसभा में बीजेपी कार्यकर्ता अरिंदम मिडी का शव फंदे से लटकता हुआ पाया गया। बता दें कि बीजेपी ने उनके बूथ (नंबर 205) में बढ़त बनाई थी।

इससे पहले बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने एक बीजेपी कार्यकर्ता के साथ किए गए मारपीट के बारे में सूचना दी थी। उन्होंने ट्वीट करते हुए इसकी जानकारी दी। उनके ट्वीट के मुताबिक घटना टॉलीगंज की है।

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “भाजयुमो सचिव संभू सरकार को 40 शांतिदूतों द्वारा ईद का तोहफा। उन्होंने उसे मारने की कोशिश की लेकिन सौभाग्य से परिवार ने बचा लिया। लेकिन पूरा परिवार घायल है और अब पीजी अस्पताल में भर्ती है। घटना 3:00 बजे सुबह की है, लेकिन पुलिस प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है।”

गौरतलब है कि इससे पहले नादिया जिले में रोआवारी गाँव के मंडलपारा में भाजपा कार्यकर्ता का शव मिला था। यह क्षेत्र चकदहा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। मृतक की पहचान दिलीप कार्तनिया के रूप में हुई थी, जो भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता थे। वह बूथ स्तर पर पार्टी के लिए काम कर रहे थे। बताया गया कि पोलिंग के दिन कुछ अज्ञात बदमाशों ने कार्तनिया को धमकी दी थी। बाद में लगभग 11 बजे उन्हें किसी अज्ञात ने बुलाया तो वे घर से चले गए, लेकिन फिर नहीं लौटे।

इससे पहले कूचबिहार जिले के दिनहाटा टाउन मंडल के अध्यक्ष अमित सरकार का शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। मंडल अध्यक्ष का शव दिनहाटा में लटकते हुए हालत में बरामद किया गया। अमित सरकार की हत्या को लेकर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कहा था कि टीएमसी की ओर से इस हत्या को अंजाम दिया गया। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कहा कि टीएमसी चाहती है कि ऐसा करके वह बीजेपी कार्यकर्ता को डरा कर घर में बैठा देंगे लेकिन हम लोग ऐसा नहीं होने देंगे। चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए लगातार प्रयास जारी रखेंगे।

केजरीवाल सरकार द्वारा मौत के आँकड़ों में बड़ा हेर-फेर, पिछले 24 दिनों में 4500 से अधिक Covid मौतें रिकॉर्ड से गायब: रिपोर्ट

देश में कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के बीच, द हिंदू की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट बताती है कि पिछले 24 दिनों में दिल्ली की केजरीवाल सरकार द्वारा 4500 कोविड -19 मौत के मामले दर्ज नहीं किए गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, 18 अप्रैल से 11 मई के बीच अंतिम संस्कार और सरकारी मौत के आँकड़ों की तुलना करने पर 4,783 मौतों का अंतर पाया गया। बता दें कि नगरपालिका के रिकॉर्ड में जहाँ कहा गया कि बीते 24 दिनों की अवधि के दौरान 12,833 COVID मरीजों ने दम तोड़ दिया, वहीं दिल्ली सरकार ने उसी अंतराल के दौरान केवल 8,050 COVID मौतें दर्ज कीं।

भाजपा के नेतृत्व वाले निकाय ने आरोप लगाया है कि AAP के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार मौत के आँकड़ों को दबाकर और संदिग्ध कोरोना वायरस रोगियों को टैली से बाहर करके वास्तविक कोविड ​​मौत को छिपाने का जानबूझ कर प्रयास कर रही है।

नॉर्थ एमसीडी के मेयर जय प्रकाश ने आरोप लगाया, “महामारी शुरू होने के बाद से दिल्ली सरकार (मृत्यु के) आँकड़े छिपा रही है। उन्होंने दाह संस्कार के लिए जलाऊ लकड़ी की खरीद में मदद के हमारे अनुरोध की अनदेखी की, ताकि नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़े, वे हमारे COVID अस्पतालों से लेकर अंतिम संस्कार स्थलों तक हर जगह लगे डॉक्टरों और सफाई कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करने के लिए भी धनराशि दबाए बैठे हैं।”

‘संख्या में अंतर ‘अन्य तकनीकी’ कारणों से हो सकती है’

एमसीडी के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने मरने वालों की संख्या में बेमेल होने के लिए अन्य ‘तकनीकी कारणों’ को जिम्मेदार ठहराया। अधिकारी ने कहा, “दो मुख्य कारण हैं: सरकार संदिग्ध कोविड ​​मामलों को छोड़कर, जानलेवा बीमारियों वाले मरीजों और गैर-दिल्ली निवासियों को मृत्यु दर से बाहर रख रही है। इन कारणों के बावजूद हमारे लिए सभी नामित COVID निकायों का अंतिम संस्कार प्रोटोकॉल के अनुसार किया जाता है।”

आगे कारण बताते हुए अधिकारी ने कहा, “दूसरा कारण COVID रोगियों के शवों को उनकी मृत्यु के दिन के लिए नहीं रखा जा रहा है। कई बार परिवार किसी न किसी कारण से ऐसे शवों पर दावा करने से मना कर देते हैं; फिर इन्हें पुलिस, एनजीओ और गुड सेमेरिटन द्वारा कई निकायों के जत्थों में अंतिम संस्कार के लिए अंतिम संस्कार स्थलों पर लाया जाता है।”

दिल्ली सरकार ने उन आरोपों का भी खंडन किया है जिसमें कहा गया है कि अस्पताल में भर्ती होने के दौरान या अस्पताल के बाहर समय पर भर्ती नहीं होने पर कई मरीजों की मौत हो जाती है।

दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने टिप्पणी की, “हम सभी मामलों में पूरी तरह से पारदर्शी हैं और विशेष रूप से महामारी में, सभी मौतों का हिसाब है। कई उदाहरणों में, अस्पताल या घर पर नकारात्मक परीक्षण के बाद COVID द्वारा बढ़े हुए कॉमरेडिडिटी के कारण मरीजों की मृत्यु भी हो जाती है।”

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि सरकार ने सब कुछ ‘पारदर्शी’ रखा है

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने 29 अप्रैल को मीडिया को बताया कि सरकार ने सब कुछ ‘पारदर्शी’ रखा है। आरोपों के जवाब में जैन ने कहा, “यह चीजों का राजनीतिकरण करने का समय नहीं है। 6 महीने पहले भी यही मामला देखा गया था लेकिन फिर बाद में यह साबित हो गया कि आँकड़े सही थे। सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण बात, यहाँ कोई नहीं चाहता कि एक भी जान चली जाए। दूसरी बात, हमें संख्या छिपाने का कोई अधिकार नहीं है। मृत्यु प्रमाण पत्रों का लगातार ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है और यदि मृत्यु COVID-19 के कारण हुई है, तो उनमें इसका उल्लेख किया जा रहा है।”

दिल्ली में कोविड मामले

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार (मई 16, 2021) को कहा कि दिल्ली में काफी अच्छे स्तर पर रिकवरी हो रही है। कोरोना भी तेजी से कम हो रहा है। उन्होंने कहा कि हमने अब तक कोरोना से बिगड़े हालातों पर जो काबू पाया वह एक दम से बिगड़ न जाए इसलिए दिल्ली में लॉकडाउन को एक और हफ्ते के लिए बढ़ाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार (मई 15, 2021) को बताया था कि दिल्ली में धीरे-धीरे कोरोना कम हो रहा है। पिछले 24 घंटे में कोरोना केस और कम होकर 6500 पर आ गए हैं। संक्रमण दर भी घटकर 11% हो गई है। कल संक्रमण दर 12% थी। भगवान से ये ही प्रार्थना है कि जल्द से जल्द कोरोना खत्म हो जाए।

बड़े युद्ध की तैयारी में चीन! ताइवान से चल रहे तनाव के बीच सामने आया युद्धाभ्यास का वीडियो

ताइवान और दक्षिण चीन सागर मे चल रहे तनाव के बीच चीन ने एक बड़े युद्धाभ्यास का वीडियो जारी किया है। वीडियो में चीन के इस युद्धाभ्यास की तीव्रता को देखकर ऐसा लग रहा है मानो वह किसी बड़े युद्ध की तैयारी कर रहा हो। चीन के सैन्य विशेषज्ञ भी इस युद्धाभ्यास को ताइवान के साथ संभावित युद्ध से जोड़ कर देख रहे हैं।

चीन द्वारा जारी किए गए इस वीडियो से यह ज्ञात नहीं हुआ है कि यह युद्धाभ्यास कब और कहाँ किया गया लेकिन यह वीडियो ऐसे समय में आया है जब अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और जापान एक संयुक्त सैन्य अभ्यास में शामिल हुए। चीन के सैन्य विशेषज्ञ सोंग झोंगपिंग ने भी कहा है कि चीन की सेना द्वारा यह अभ्यास ताइवान से संभावित युद्ध के चलते किया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वीडियो में चीन का 40,000 टन वजनी युद्धपोत ‘टाइप 075’ देखा गया जो एक साथ 30 हेलिकॉप्टर और 1,000 सैनिकों को ले जाने की क्षमता रखता है।

पिछले कुछ सालों से लगातार ताइवान और चीन के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। एक ओर जहाँ ताइवान का शीर्ष नेतृत्व कहता आया है कि उनका देश चीन की संपत्ति नहीं है बल्कि एक प्रभुत्व सम्पन्न देश है वहीं दूसरी ओर चीन, ताइवान पर अपना अधिकार बताता रहता है। इसके अलावा अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने भी ताइवान के अपने संबंधों को बढ़ाने की शुरुआत की थी। इस पर चीन के विदेश मंत्रालय द्वारा चेतावनी दी गई थी।

पिछले कई महीनों से ताइवान ने लगातार यह शिकायत की कि चीन के लड़ाकू विमान ताइवान के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ) के अंदर घुसे। हालाँकि चीन अभी भी ताइवान के वायुक्षेत्र का उल्लंघन कर रहा है और उसकी यह गैर-जिम्मेदाराना हरकत यह बताती है कि चीन, ताइवान के साथ तनाव को समाप्त करने के लिए बिल्कुल भी गंभीर नहीं है।

कई देशों के रक्षा विशेषज्ञ यह स्वीकार करते हैं कि आज के समय में चीन और ताइवान युद्ध के मुहाने पर खड़े हैं और एक छोटी सी भी तनावपूर्ण घटना दक्षिण चीन सागर समेत पूरे हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में संघर्ष का कारण बन सकती है।    

CM खट्टर के विरोध में किसानों ने तोड़े बैरिकेड्स: लाठीचार्ज, राकेश टिकैत ने दी धमकी- ‘अब UP में BJP को हरवाएँगे’

हरियाणा के हिसार में एक कोविड अस्पताल का उद्धाटन करने पहुँचे मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का किसानों ने जमकर विरोध किया और उन्हें रोकने के लिए पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को किसानों ने तोड़ दिया। इसके बाद हालात को काबू करने के लिए पुलिस ने लाठियाँ भाँजी और आँसू गैस के गोले भी छोड़े। वहीं राकेश टिकैत ने भी बीजेपी को धमकी दी है।

रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पुलिस की इस कार्रवाई में कई किसानों के घायल होने की खबर सामने आई है। घटना हिसार जिले के हांसी की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, कृषि कानून को लेकर गुस्साए किसान सीएम के आगमन से पहले से ही वहाँ पर सैकड़ों की संख्या में उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री के पहुँचते ही उन्होंने हंगामा करना शुरू कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया। इस घटना में डीएसपी अभिमन्यु लोहान के भी घायल होने की खबर है।

इस बीच सीएम ने प्रदर्शनकारी किसानों से वापस जाने की अपील करते हुए कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के प्रयासों को मजबूत करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि हालात सामान्य होने के बाद वे फिर से आंदोलन कर सकते हैं।

बता दें कि केंद्र के नए कृषि कानूनों को रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी की माँग को लेकर नवंबर 2020 से हजारों किसान, मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान दिल्ली की सीमाओं सिंघू, टिकरी और गाजीपुर में डेरा डाले हुए हैं।

टिकैत बोले आंदोलन खत्म नहीं होगा

इस बीच भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने एक टीवी इंटरव्यू में स्पष्ट कहा है कि आंदोलन तब तक खत्म नहीं होगा, जब तक सरकार बातचीत नहीं करेगी। उन्होंने धमकी दी कि अगर सरकार ने किसानों की बात नहीं सुनी तो यूपी में बीजेपी को हरवाएँगे।

बंगाल में भाजपा की हार में अपना योगदान बताते हुए टिकैत ने दावा किया कि यूपी में जो जिला पंचायत के चुनाव हुए हैं, उनमें 3000 से अधिक सीटें थी, जिसमें से 600 सीटें बीजेपी ने जीती हैं, उसमें भी 200 सीटों पर उसने बेइमानी की है, तो ये उसकी हार ही हुई न। इस बीच बता दें कि किसानों ने काला दिवस मनाने का ऐलान किया है।

भाकियू नेता ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा का अगला मिशन यूपी उत्तराखंड है। जब उनसे किसानों की जान कोरोना के खतरे में डालने को लेकर पूछा गया तो टिकैत ने कहा, “मौत तो होगी। आंदोलन लड़ लेंगे तो कोरोना से लड़ेंगे। उससे सरकार और हम दोनों लड़ रहे हैं। अगर यहाँ से गए तो सरकार और कोरोना दोनों मारेंगे। बेहतर है एक से ही मरें।”

भाग गया AAP नेता, पीछे पड़ी दिल्ली पुलिस: वैक्सीन निर्यात के विरोध में पोस्टर मामला, गरीबों को लालच दे बैनर लगवा रही पार्टी

दिल्ली में भारत द्वारा दूसरे देशों को वैक्सीन निर्यात किए जाने के विरोध में पोस्टर लगाए जाने पर 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन पोस्टर्स पर लिखा गया था, “मोदी जी हमारे बच्चों की वैक्सीन विदेश क्यों भेज दिया?”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कई लोगों को जमानत पर छोड़ दिया गया है। अब इस मामले में कई AAP नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं, जो दिल्ली में कई जगहों पर ऐसे पोस्टर लगवा रहे हैं।

दिल्ली पुलिस ने भी ट्वीट करके जानकारी दी कि लॉकडाउन लागू कराने के लिए जब पुलिस भ्रमण पर थी, तब कई इलाकों में दीवारों पर इन चिपके हुए पोस्टर्स को देखा गया। मंगोलपूरी में पोस्टर लगाने वालों से पूछताछ करने पर उन्होंने जानकारी दी कि इसके पीछे वार्ड 47 के अध्यक्ष और AAP के सदस्य अरविन्द गौतम का हाथ है। AAP नेता अरविन्द फिलहाल फरार है।

इसके अलावा बैनर लगाने वाले एक व्यक्ति राहुल त्यागी ने बताया कि उसे आम आदमी पार्टी के पार्षद धीरेन्द्र कुमार के ऑफिस से 11 मई को 20 बैनर दिए गए। राहुल को ये बैनर कल्याणपुरी में लगाने के लिए कहा गया। इसके बदले उसे 600 रुपए मिलते। त्यागी ने बताया कि उसे और राजीव कुमार को बैनर दिए गए जबकि दिलीप तिवारी और शिवम दुबे को पोस्टर लगाने का काम दिया गया।

त्यागी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उसे पैसे भी नहीं मिले हैं और उसकी मोटरसाइकिल भी पुलिस थाने में ही है। त्यागी के रिश्तेदारों ने बताया कि उसके पिता ऑटो-रिक्शा ड्राइवर हैं और लॉकडाउन में उनकी कमाई नहीं हो पा रही है।

आम आदमी पार्टी के पार्षद धीरेन्द्र कुमार ने इन आरोपों से इनकार किया है हालाँकि शनिवार की रात को AAP ने भी पोस्टर में लिखी हुई लाइनें पोस्ट कीं। हालाँकि राहुल गाँधी भी इस मुद्दे पर राजनीति करने से पीछे नहीं हटे और उन्होंने भी ट्वीट किया कि उन्हें भी गिरफ्तार किया जाए।  

द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के कई अलग-अलग इलाकों में इस घटना से संबंधित मामले दर्ज किए गए। ये मामले प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन ऐक्ट, आईपीसी की धारा 269 और 34 के तहत दर्ज किए गए।

जिस अंग्रेज की बीवी के लिए PM नेहरू ने भेजा था इंडियन नेवी का जहाज, उसके लेटर-डायरी पर इंग्लैंड ने लगाई रोक

ब्रिटिश कैबिनेट ऑफिस ने भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन और उनकी पत्नी एडविना की डायरियों और उनके पत्रों को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है। माउंटबेटन परिवार पर किताब लिखने वाले ब्रिटिश लेखक एंड्रू लोनी 2017 से प्रयास कर रहे थे कि माउंटबेटन परिवार के पत्र और डायरियाँ सार्वजनिक किए जाएँ। इसके लिए वो लगभग 2 करोड़ 60 लाख रुपए (£250 000) भी खर्च कर चुके।

ब्रिटिश कैबिनेट ऑफिस और साउथहैम्पटन विश्वविद्यालय ने इन्हें ‘देश के लिए सुरक्षित’ बताते हुए लेखक लोनी की अपील ठुकरा दी। हालाँकि लेखक का मानना है कि माउंटबेटन और उनकी पत्नी एडविना के इन पत्रों और डायरियों को सार्वजनिक करने से भारत के विभाजन और एडविना के रिश्तों के रहस्य सामने आ सकते हैं।

द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार साउथहैम्पटन विश्वविद्यालय ने बताया कि उन्हें ब्रिटिश सरकार से निर्देश आया है कि माउंटबेटन और उनसे जुड़े कुछ दस्तावेजों को सार्वजनिक न किया जाए। इस पर लेखक लोनी यह आशंका जताते हैं कि इन दस्तावेजों में निश्चित ही कुछ विशेष रहस्य हैं अन्यथा इन्हें गुप्त रूप से सुरक्षित रखने के लिए न कहा जाता।

कई शिक्षाविदों का भी यही मानना है कि सुरक्षित रखे गए ये दस्तावेज भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन, भारत की आजादी और विभाजन तथा माउंटबेटन की पत्नी एडविना के साथ भारत के पहले प्रधानमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता जवाहरलाल नेहरू के संबंधों को उजागर कर सकते हैं।

जवाहरलाल नेहरू और वायसराय की पत्नी एडविना माउंटबेटन के रिश्ते हमेशा से ही रहस्य का विषय रहे। कई लोगों की लिखी हुई किताबों और उपलब्ध दस्तावेजों से यह जानकारी सामने आती है कि नेहरू और एडविना के बीच जो रिश्ता था, वह किसी अधिकारिक जान-पहचान से कहीं अधिक था।

एडविना की बेटी पामेला हिक्स भी नेहरू से खास प्रभावित थीं और उन्होंने यह बात अपनी किताब ‘डॉटर ऑफ एम्पायर’ में बताई है। उन्होंने बीबीसी से बात करते हुए बताया था कि उनकी माँ एडविना और नेहरू एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे।

पामेला हिक्स ने तब कहा था कि नेहरू की पत्नी की पहले ही मौत हो चुकी थी। उनकी शादीशुदा बेटी इंदिरा गाँधी भी दिल्ली से बाहर रहती थीं। तब नेहरू की मुलाकात एक आकर्षक महिला से होती है। दोनों के बीच एक चिंगारी पैदा होती है और दोनों एक दूसरे के प्यार में डूब जाते हैं।

नेहरू के जीवनीकार स्टेनली वॉलपर्ट ने अपनी किताब ‘नेहरू: अ ट्राइस्ट विद डेस्टिनी’ में बताया कि माउंटबेटन के नाती लॉर्ड रेम्सी के अनुसार खुद लॉर्ड माउंटबेटन, एडविना को लिखी गई नेहरू की चिट्ठियों को प्रेम-पत्र कहा करते थे।

जब भारत स्वतंत्र हो गया और ब्रिटिश भारत छोड़ कर चले गए तब भी नेहरू और एडविना की मुलाकात होती रहती थी। जवाहरलाल नेहरू जब भी लंदन जाते थे, एडविना के साथ कुछ दिन जरूर बिताते थे। इसकी पुष्टि लंदन में तत्कालीन भारतीय उच्चायोग में काम करने वाले खुशवंत सिंह ने अपनी आत्मकथा ‘ट्रुथ, लव एण्ड लिटिल मेलिस’ मे की है।

जब 59 वर्ष की आयु में एडविना की मृत्यु 1960 में हुई तो सरकारी खर्चे पर लेडी माउंटबेटन को श्रद्धांजलि देने की व्यवस्था की गई थी। उनकी इच्छा के अनुसार लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा उन्हें समुद्र में दफन किया गया। ऐसे में नेहरू भी पीछे नहीं रहे। नेहरू ने भारतीय नौसेना के फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल को एस्कॉर्ट के रूप में और साथ ही उनकी याद में पुष्पांजलि देने के लिए भेजा था।

पामेला हिक्स ने बताया कि जब उनका शोक संतप्त परिवार घटनास्थल पर माल्यार्पण के बाद हट गया था तो भारतीय फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल उस जगह पर आया और नेहरू के निर्देशों के अनुसार मैरीगोल्ड के फूलों से उस पूरे एरिया को आच्छादित कर दिया गया था।

ऐसे ही कई रहस्य हो सकते हैं, जिनके कारण ब्रिटिश कैबिनेट ने माउंटबेटन और उनकी पत्नी के पत्रों और डायरियों को सार्वजनिक करने से मना किया होगा।

भारत और ब्रिटेन में पाए गए नए कोरोना स्ट्रेन पर भी असरदार है भारत बायोटेक की COVAXIN: स्टडी में खुलासा

कोरोना महामारी की दूसरी लहर में वायरस के नए वैरिएंट्स चिंता का विषय बने हुए हैं। इस बीच भारत बायोटेक की तरफ से कहा गया है कि उनका देशी कोरोना टीका कोवैक्सिन सभी नए कोरोना वैरिएंट्स पर असरदार है, इसमें भारत, यूके आदि में पाए नए वैरिएंट्स भी शामिल हैं।

इसमें B.1.617 और B.1.1.7 कोरोना वैरिएंट्स भी शामिल हैं जो भारत और यूनाइटेड किंगडम में पाए गए थे। वैक्सीन के बारे में यह बात रविवार (मई 16, 2021) को भारत बायोटेक ने ही कही। भारत बायोटेक की तरफ से बताया गया है कि वैक्सीन के इस्तेमाल पर B.1.1.7 (जो यूके में पहले मिला था) और वैक्सीन स्ट्रेन (D614G) के न्यूट्रिलाइजेशन में कोई बदलाव नहीं देखा गया है। भारत बायोटेक ने नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वाईरोलॉजी और इंडिया काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के साथ मिलकर यह ताजा स्टडी की है।

सभी स्ट्रेन पर कारगर है वैक्सीन

आईसीएमआर की ओर इस स्टडी को लैब के अंदर किया गया। स्टडी में पाया गया कि वैक्सीन के बाद यूके वेरिएंट और वैक्सीन स्ट्रेन के बीच न्यूट्रलाइजेशन में कोई अंतर नहीं पाया गया। खास बात ये है कि ऑक्सफोर्ड की कोविशील्ड वैक्सीन भी ब्रिटेन समेत सभी वैरिएंट पर असरदार रही है। हालाँकि, दक्षिण अफ्रीका के स्ट्रेन पर इसका असर कम देखने को मिला है। लेकिन खास बात ये है कि द अफ्रीका वाले स्ट्रेन के केस भारत में देखने को नहीं मिले हैं।

इससे पहले, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के वैज्ञानिकों ने अपने शोध की अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट्स में जानकारी दी कि भारतीय वैक्‍सीन कोविशील्‍ड और कोवैक्सिन कोरोना वायरस के बी.1.617 वैरिएंट के खिलाफ कुछ ही एंटीबॉडी तैयार कर पा रही हैं, लेकिन ये वैक्सीन कोरोना के अन्‍य वैरिएंट पर प्रभावी हैं।

कोरोना वायरस का B.1.617 वैरिएंट पहली बार महाराष्‍ट्र में पाया गया था। आईसीएमआर और नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) के वैज्ञानिक कोरोना पॉजिटिव मरीजों के सैंपल एकत्र कर रहे थे। इसके बाद उन्‍होंने इन सैंपल को जनवरी से लेकर अब तक कोरोना वायरस के विभिन्‍न वैरिएंट B.1.1.7 (ब्रिटेन), B.1.351 (दक्षिण अफ्रीका), P 2 वैरिएंट (ब्राजील) और B.1.617 वैरिएंट पर जाँचा। इस समय भारत में B.1.617 वैरिएंट बड़ी संख्‍या में बढ़ता दिख रहा है।

भारत में दो कोरोना वैक्सीन की जा रहीं इस्तेमाल, स्पूतनिक की भी खेप आई

कोवैक्सीन उन तीन वैक्सीन्स में से एक है जिनको भारत में इस्तेमाल की मंजूरी मिली है। इसके अलावा सिरम इंस्टिट्यूट की कोविशील्ड और रूस की स्पूतनिक कोरोना वैक्सीन का भारत में इस्तेमाल हो रहा है। देश में अब तक 18 करोड़ से ज्यादा (18,22,20,164) कोरोना टीके लगाए जा चुके हैं। देश में 1 मई से 18 साल से 44 साल तक के लोगों का कोरोना टीकाकरण शुरू हुआ। इससे पहले 45 साल से ऊपर के लोगों को कोरोना टीका लगाया जा रहा था।