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कोरोना की दूसरी लहर के बीच पहली बार राहत के संकेत, पर कुछ मिनटों की देरी से आंध्र में 11 की गई जान

भारत में कोरोना की दूसरी लहर के बीच पहली बार राहत के संकेत मिले हैं। ताजा आँकड़ों के मुताबिक कोरोना संक्रमण से स्वस्थ होने वालों की संख्या, संक्रमण के नए मामलों से ज्यादा है। दूसरी तरफ आंध्र प्रदेश के एक अस्पताल में 11 लोगों की मौत की खबर है।

ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने से सोमवार (10 मई 2021) शाम आंध्र प्रदेश में तिरुपति के सरकारी अस्पताल श्री वेंकटेश्वर रामनारायण रुइया हॉस्पिटल (SVRR) में 11 कोविड मरीजों की मौत हो गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चित्तूर के जिला कलेक्टर एम. हरिनारायणन ने कहा कि तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर से एसवीआरआर अस्पताल में ऑक्सीजन टैंकर के आने में देरी के कारण ऑक्सीजन की सप्लाई में लगभग 5-10 मिनट के लिए व्यवधान आया था।

कलेक्टर ने कहा, ”अस्पताल में टैंकर के आने के तुरंत बाद, ऑक्सीजन की सप्लाई बहाल कर दी गई, लेकिन उस समय तक, कोविड -19 का इलाज करा रहे 11 लोगों की मृत्यु हो गई। हम ऑक्सीजन की सप्लाई बहाल करके और मौतों को रोकने में सफल रहे।”

इस अस्पताल में लगभग 1,000 रोगियों का इलाज चल रहा था और ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होने से कई रोगियों को साँस लेने में गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई।

मृतकों के परिजनों ने की अस्पताल में तोड़फोड़

इस घटना के बाद जान गँवाने वाले मरीजों के गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में तोड़फोड़ की, जिससे डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को अपनी सुरक्षा के लिए भागना पड़ा। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए वरिष्ठ जिला अधिकारी अस्पताल पहुँचे।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने तिरुपति के एसवीआरआर अस्पताल में हुए हादसे पर दुख और शोक व्यक्त किया। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

मुख्यमंत्री ने इस घटना की व्यापक जाँच के आदेश दिए हैं और राज्य के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि राज्य के किसी भी अस्पताल में ऐसी स्थिति की दोबारा न पैदा हो। उन्होंने अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से कहा कि वे लगातार ऑक्सीजन की निगरानी करें और यह देखें कि किसी भी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी न हो।

तेलुगु देशम पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने भी इस घटना पर दुख जताया और दुखद मौतों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। नायडू ने जगन सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा इस सरकार ने अस्पतालों में पर्याप्त बुनियादी ढाँचा विकसित करने में रुचि नहीं दिखाई है।

नए केस से ज्यादा स्वस्थ होने वाले

भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर में पहली बार गिरावट के संकेत मिले हैं। 10 मई 2021 को सामने आए आँकड़ों के मुताबिक, पिछले दो महीने में पहली बार ठीक हुए लोगों की संख्या नए संक्रमितों से अधिक रही।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार सोमवार को 3,29,491 नए केस दर्ज किए गए, जबकि इस अवधि के दौरान 3,55,851 लोग ठीक हुए।

इसकी तुलना ठीक दो महीने पहले के आँकड़े से करें तो 10 मार्च, 2021 को देश में कोरोना के 22 हजार से अधिक नए मामले सामने आए थे, जबकि उस दौरान 24 घंटे के दौरान 18 हजार से अधिक लोग ठीक हुए थे।

नए केसों की संख्या 4 अप्रैल को अचानक ही नियंत्रण से बाहर चली गई जब दूसरी लहर के दौरान पहली बार भारत में 24 घंटे के दौरान एक लाख से ज्यादा केस दर्ज किए गए। महज 10 दिनों के अंदर ही 14 अप्रैल को भारत ने दो लाख केस का आँकड़ा छू लिया। कोरोना के मामलों में अचानक हुई इस बढ़ोतरी ने हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पको दबाव में ला दिया और भारत में आईसीयू बेड, स्वास्थ्यकर्मियों, मेडिकल ऑक्सीजन और मेडिसिन की भारी कमी पड़ गई।

अगले दस दिनो के अंदर ही 21 अप्रैल तक भारत में तीन लाख केस प्रति दिन आने लगे। हालाँकि स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से स्थिति में सुधार हुआ और मेडिकल ऑक्सीजन सप्लाई तेजी से बढ़ी। जीवन रक्षक दवाओं और मशीनों का युद्ध स्तर पर निर्माण और आयात किया गया। भारत ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सैन्य बलों को भी उतार दिया।

30 अप्रैल को भारत में चार लाख केस सामने आए और इसके बाद इसमें कुछ गिरावट आई, लेकिन 4 से 8 मई के दौरान लगातार चार दिन चार लाख से अधिक केस सामने आए।

‘इस्लाम को रियायतों से आज खतरे में फ्रांस’: सैनिकों ने राष्ट्रपति को गृहयुद्ध के खतरे से किया आगाह

फ्रांसीसी सेना में सेवारत सैनिकों के एक समूह ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को खुला पत्र लिख देश की सुरक्षा के संबंध में चेताया है। Valeurs Actuelles नाम की मैग्जीन में प्रकाशित इस पत्र के मुताबिक राष्ट्रपति मैक्रों से कहा गया कि इस्लाम को दी गई उनकी रियायतों के कारण आज फ्रांस खतरे में है। खुले पत्र में चेतावनी दी गई है कि हिंसा, इस्लाम और संस्थानों के प्रति घृणा के कारण फ्रांस का पतन अनिवार्य रूप से गृहयुद्ध का कारण बनेगा और सेना को हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर करेगा। 

बता दें कि पिछले महीने भी एक ऐसा ही लेटर इसी मैग्जीन में प्रकाशित हुआ था। उसमें भी नागरिक संघर्ष (गृह युद्ध) को लेकर राष्ट्रपति को आगाह किया गया था। उस पत्र को लिखने के पीछे कुछ अधिकारी और 20 सेमी रिटायर्ड जनरल थे। 

फिलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि हालिया पत्र लिखने वाले कौन हैं और सेना में किन पदों पर हैं। खुले पत्र में कहा गया है, “हम आपके जनादेश को बढ़ाने या दूसरों पर विजय पाने की बात नहीं कर रहे हैं। हम अपने देश के अस्तित्व की बात कर रहे हैं।” इस पत्र को लिखने वालों ने खुद को मिलिट्री की युवा पीढ़ी का सैनिक कहा है। इसके मुताबिक इस्लामी कट्टरपंथ को खत्म करने के लिए उन्होंने अपनी जानें दी है। लेकिन राष्ट्रपति ने उसे देश में पनपने के लिए रियायत दे दी। 

पत्र में सैनिकों ने बताया कि साल 2015 में हमले के बाद हुए सिक्योरिटी ऑपरेशन का वे हिस्सा रहे हैं। इस दौरान उन्हें कुछ मजहबी समुदायों को देख पता चला कि फ्रांस उनके लिए एक मजाक या फिर घृणा से अतिरिक्त कुछ भी नहीं है। पत्र में कहा गया, “अगर गृहयुद्ध छिड़ जाता है तो सेना अपनी धरती पर व्यवस्था बनाए रखेगी।” इसमें ये भी कहा गया, “फ्रांस में गृह युद्ध चल रहा है और आप इसे अच्छी तरह जानते हैं।”

बता दें कि ये पत्र ऐसे वक्त में सामने आए हैं जब 2022 में फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। इन चुनावों में मरीन ले पेन को मैक्रों के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। ऐसे में मैंक्रो ने अभी तक सार्वजनिक तौर पर इन पत्रों का जवाब नहीं दिया है। लेकिन ले पेन ने पिछली बार प्रकाशित हुए पत्र के बाद अधिकारियों के पक्ष का समर्थन किया था। साथ ही अपनी बात रखने के लिए सैनिकों को सराहा भी था। इस पत्र से फ्रांस के प्रधानमंत्री नाराज हो गए थे और उन्होंने इसे राजनीति में सेना का हस्तक्षेप बताया था।

टिकरी बॉर्डर पर गैंगरेप: ‘क्रांति’ की जगह किसान आंदोलन से ‘अपराध’ की डिलिवरी, आगे क्या…

आंदोलन और अपराध का साथ बहुत पुराना रहा है। इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है जिनमें लोगों ने आंदोलन के जरिए वादा तो क्रांति की डिलिवरी का किया पर अपराध और अपराधी डिलिवर कर दिए गए। ठीक वैसे ही जैसे किसी सस्ती ई-कॉमर्स वेबसाइट से कोई नब्बे प्रतिशत डिस्काउंट में स्मॉर्टफ़ोन ख़रीदे और डिलिवर हुए पैकेट खोलने पर उसमें से गत्ते का ढेर निकल आए।

आंदोलन विरोधी पर घुटे हुए एक समाजशास्त्री का मानना है कि अच्छे उद्देश्य वाले आंदोलन अपराधी को जन्म देते हैं और बुरे उद्देश्य वाले अपराध को। इस समाजशास्त्री का तो यहाँ तक कहना था कि साधारण परिस्थितियों में आंदोलन अपराध को जन्म देता है, असाधारण परिस्थितियों में अपराध आंदोलन को जन्म देता है और विकट परिस्थितियों में आंदोलन और अपराध साथ-साथ चलते हैं। देखा जाएय तो ऐसे आंदोलनों की कमी नहीं रही है जिनमें क्रांति का इंतज़ार कर रही जनता को अपराध थमा दिया गया।

नक्सल आंदोलन को ही ले लें। एक वर्ग को ताकतवर बनाने के वादे से शुरू हुआ था। वह वर्ग क्या बन कर निकला, किसी से छिपा नहीं है। आज उस नक्सल आंदोलन का स्वरूप ऐसा है कि कानू सान्याल और चारु मजुमदार की आत्माएँ कहीं हँसुआ और हथौड़ा लिए गर्व काट रहे होंगे। पिछले दशक का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन देखें तो पता चलेगा कि जिसके गर्भ से सदाचार को पैदा होना था, वहाँ से क्या-क्या पैदा हुआ। अखिल भारतीय स्तर के इस आंदोलन ने दिल्ली सरकार को जन्म दिया और दिल्ली को मार दिया। राजनीति बदलने के वादे वाले आंदोलन ने राजनीति से बदला ले लिया।

आंदोलनजीवियों की समस्या यह है कि वे कुछ दिनों तक आंदोलन न करें तो उन्हें अपने स्किल में ह्रास होने की चिंता सताने लगती है। लिहाज़ा पिछले दशक के अंत में उन्होंने शाहीनबाग आंदोलन किया। उससे किसका जन्म हुआ और किसकी मृत्यु, वह भी सबने देखा। अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं ने अपनी तरफ़ से काग़ज़ दिया। दादियों की तस्वीर से उन पत्रिकाओं के कवर पेज सजाए गए। दादियाँ काग़ज़ पाकर खुश। मतलब काग़ज़ नहीं दिखाएँगे, पर काग़ज़ मिला तो उस,पर चिपक जाएँगे। भीषण सर्दी में साल भर से भी छोटे बच्चों को आंदोलनकारी बनाकर डिलिवर किया गया। बिरयानी बनाई गई और जिंदगियाँ बिगाड़ी गई।

आंदोलनजीवियों ने इस बार अपने स्किल में किसी संभावित ह्रास को रोकने के लिए किसान आंदोलन किया। आंदोलन क्यों कर रहे हैं जैसे फ़ालतू प्रश्न के उत्तर में बताया गया कि हमें लगता है कि आंदोलन करना चाहिए। कृषक समाज को आंदोलन की खेती की आवश्यकता है। यह आंदोलन पंजाबी कृषि में उत्पाद मिक्स की समस्या खत्म कर देगा। यही सही समय है जब गेहूँ और धान की जगह गेहूँ, धान और आंदोलन की खेती हो। इसी आंदोलन से दक्षिण-पूर्व एशिया की जियो पॉलिटिक्स बदलेगी।

दिल्ली बंद रही और आंदोलन खुला रहा। इसने भी अपराध को जन्म दिया। गणतंत्र दिवस के दिन क्या-क्या हुआ, वह पूरे भारत ने देखा। संविधान में स्वतंत्रता सम्बंधित किसी छिपे अनुच्छेद के तहत ट्रैक्टर रैली करके आंदोलन को नया मोड़ मिला। आंदोलन उगने लगा और बड़ा होता गया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर के सेलेब किसान जुड़े। कृषि उत्पादों में टूलकिट जुड़ गया। किसी ने कहा यह तो अपराध है तो जवाब मिला; यह आंदोलन है। तुम्हारी आँख फूट गई है जो इसे अपराध बता रहे हो। 

गणतंत्र दिवस के दिन उगने वाले आंदोलन की फसल अब पकने लगी है। आंदोलन ने अपराध को जन्म दे दिया है। दिल्ली में पुलिस वालों की पिटाई से शुरू होकर आंदोलन अब बलात्कार पर पहुँच गया है। बताया जा रहा है कि आम आदमी नुमा नेता शामिल हैं। युवती की मृत्यु हो गई है और कोरोना को दोषी बता दिया गया है। इन सबके ऊपर सबसे विचलित कर देने वाली बात यह है कि इस घिनौने कृत्य का पता मुख्य आंदोलनजीवी योगेन्द्र यादव को था फिर भी उन्होंने पुलिस के पास जाना उचित न समझा। आम आदमी नुमा नेता भाग गए हैं। अगुवाई करने वाला बुद्धिजीवी गले में गमछा लपेट नैतिकता के एवरेस्ट पर बैठा शायद आंदोलन को नया मोड़ देने का प्लान बना रहा है। 

आंदोलन अब किस अपराध की खोज में निकलेगा इसका उत्तर शायद टिकरी बॉर्डर पर रुके समय के पास है। 

उद्धव ठाकरे का कार्टून ट्विटर को नहीं भाया, ‘बेस्ट CM’ के लिए कार्टूनिस्ट को भेजा नोटिस

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर आधारित एक कार्टून ‘बेस्ट CM’ आपने देखा होगा। ट्विटर को यह रास नहीं आया है। इसके लिए उसने राजनीतिक कार्टूनिस्ट और व्यंग्यकार विकासो (Vikaso), यूजनरनेम @vikasopikaso को नोटिस भेजा है। ट्विटर के मुताबिक, ‘यह भारत के कानून का उल्लंघन करता है।’ वामपंथ से इतर विचार रखने वाले यूजर्स के अकाउंट मनमाने ढंग से सस्पेंड करने का ट्विटर का इतिहास रहा है।

कार्टूनिस्ट ने सोमवार (10 मई) को ट्विटर के कानूनी विभाग से प्राप्त नोटिस की प्रति को ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा, “आखिरकार, ‘बेस्ट सीएम पर एक कार्टून के लिए मुझे पहला नोटिस प्राप्त हुआ;)”।

‘बेस्ट सीएम’ कार्टून के लिए मिला नोटिस

कार्टूनिस्ट को 10 मई को भेजे एक ई-मेल में, ट्विटर के कानूनी विभाग ने सूचित किया है कि उन्हें ट्विटर अकाउंट @vikasopikaso के बारे में ”भारत से अनुरोध प्राप्त हुआ है, जो दावा करता है कि निम्नलिखित सामग्री भारत के कानूनों का उल्लंघन करती हैं।”

जिस कार्टून को बनाने के लिए कार्टूनिस्ट को नोटिस मिला है, वह 3 अप्रैल को पोस्ट किया गया था। व्यंग्यकार ने अपने स्केच के माध्यम से महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे पर कटाक्ष किया था। उद्धव ठाकरे को चित्रित करने वाले राजनीतिक कार्टून में नारंगी रंग के कुर्ते में ‘चकराये सीएम’ को चित्रित किया गया था। सीएम के सामने दो ब्रीफकेस हैं, जिनमें से एक पर ‘लॉकडाउन’ और दूसरे पर ‘वसूली’ लिखा हुआ है और उन दोनों में से एक को चुनने में वह घबराये हुए नजर आ रहे हैं।

माइक्रोब्लॉगिंग साइट ने ट्विटर उपयोगकर्ता को सूचित किया कि उन्होंने अभी तक रिपोर्ट किए गए कंटेंट पर कोई कार्रवाई नहीं की है। मेल में कहा गया है कि यदि उन्हें अकाउंट से कंटेंट को हटाने के लिए किसी अधिकृत संस्था (जैसे पुलिस या सरकार एजेंसी) से कोई कानूनी अनुरोध प्राप्त होता हैं तो यह यूजर्स को सूचित करने के लिए ट्विटर की नीति है।

ऐसा कहते हुए, ट्विटर ने कहा कि इस बीच, यूजर के पास अपने कानूनी विकल्पों को तलाशने का विकल्प है। इसमें कहा गया है कि कार्टूनिस्ट को सूचित किया गया था ताकि वह कानूनी सलाह ले सकें और अदालत में अनुरोध को चुनौती दे सकें या स्वेच्छा से सामग्री को हटा सकें या उचित लगने वाला कोई और समाधान खोज सकें।

ट्विटर पहले भी कर चुका है गैर-वामपंथी अकाउंट्स को सस्पेंड

ट्विटर ने हालाँकि इस कार्टून को हटाया नहीं है लेकिन उसका गैर-वामपंथी अकाउंट्स को खामोश करने का इतिहास रहा है। फरवरी 2020 में, ट्विटर यूजर “टीपूडा” के अकाउंट, जिसका उपयोगकर्ता नाम @PR1CELES5 है, को माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट द्वारा सस्पेंड कर दिया गया था। यह ट्विटर यूजर, जिसका वास्तविक नाम अमोल है, को ‘करेक्टेड’ कार्टून के माध्यम से कार्टूनिस्टों के पूर्वाग्रह को उजागर करने की कीमत चुकानी पड़ी थी।

इससे पहले, एक ट्विटर उपयोगकर्ता, जिसने राहुल गाँधी का मजाकिया कार्टून बनाया था, के अकाउंट को भी ट्विटर ने स्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया था, जिसने लोगों को हैरान किया कि क्या ऐसा उनकी राजनीतिक विचारधारा के कारण हुआ।

उद्धव ठाकरे सरकार ने भी अतीत में अपने आलोचकों के प्रति असहिष्णुता का प्रदर्शन किया है। पिछले साल उद्धव ठाकरे के कार्टून को शेयर करने के लिए शिवसेना के छह गुंडों ने एक रिटायर्ड नौसेना अधिकारी के साथ मारपीट की थी। नौसेना अधिकारी द्वारा वॉट्सऐप पर फॉरवर्ड कार्टून कथित रूप से उद्धव ठाकरे और उनके सहयोगियों शरद पवार और सोनिया गाँधी पर एक व्यंग्यात्मक कार्टून था।

फरहान अख्तर को मिली VIP वैक्सीन, जावेद अख्तर ने Covid पर महाराष्ट्र सरकार की तारीफों में पढ़े कसीदे

देश भर में 1 मई से 18 साल से ऊपर के युवाओं के लिए वैक्सीनेशन की शुरुआत हो चुकी है। इसके बाद से लोग वैक्सीन लगवाने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच बॉलीवुड अभिनेता फरहान अख्तर ने शनिवार को (8 मई 2021) को ट्वीट कर बताया कि उन्होंने मुंबई के अंधेरी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में कोविड-19 वैक्सीन की पहली डोज लगवाई है।

इसके लिए उन्होंने मुंबई पुलिस और बीएमसी के प्रति आभार व्यक्त किया है। साथ ही कहा कि अपनी बारी का इंतजार करने वालों को इस प्रक्रिया में 2-3 घंटे लगते हैं। इसलिए कृपया धैर्य रखें, अगर जरूरत हो तो पानी और स्नैक ले जाएँ। सुरक्षित रहें। हालाँकि, यहाँ केवल एक समस्या है कि 47 वर्षीय अभिनेता विशेष रूप से इस वैक्सीन के पात्र नहीं थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अंधेरी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में वैक्सीनेशन अभियान केवल 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए शुरू किया गया है। फरहान अख्तर 60 वर्ष से अधिक उम्र के नहीं हैं। इसलिए, यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें विशेष साइट पर यह वैक्सीन कैसे मिली।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकारियों का दावा है कि साइट अभी संचालन में नहीं है। कथित तौर पर सहायक नगर आयुक्त के-पश्चिम (अँधेरी), विश्वास मोते ने मैसेज व कॉल का कोई जवाब नहीं दिया। ऐसे में अभी तक अधिकारियों ने इस मामले पर कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण जारी नहीं किया है। इसलिए यह माना जा रहा है कि फरहान अख्तर ने अपनी पहुँच का फायदा उठाते हुए खुद के लिए कोविड-19 वैक्सीन का इंतजाम करवाया है।

वहीं, फरहान के कोविड-19 वैक्सीन की पहली डोज लेने के बाद उनके पिता व गीतकार जावेद अख्तर ने ट्वीट करके महाराष्ट्र सरकार की तारीफ की थी। उन्होंने कहा कि दूसरों को महाराष्ट्र और बीएमसी से सीखना चाहिए कि Covid-19 से कैसे लड़ा जाए। हालाँकि, उनकी यह बात कई सोशल मीडिया यूजर्स को पसंद नहीं आई। उन्होंने जावेद अख्तर के ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रियाएँ दीं।

जावेद अख्तर ने लिखा, “मैं मानता हूँ कि दूसरों को महाराष्ट्र सरकार और बॉम्बे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन से एक या दो सबक सीखने चाहिए, जो कोविड के खतरे से पूरी क्षमता के साथ लड़ रहे हैं।“

एक यूजर ने इसे ‘जोक ऑफ द डे’ कहा और जावेद अख्तर को अपने काम पर ध्यान देने की सलाह दी थी।

बता दें कि देश इस समय कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर से लड़ रहा है। पिछले कई हफ्तों से लगातार साढ़े तीन लाख से अधिक नए मामले सामने आ रहे हैं, जो पिछले कुछ दिनों से बढ़कर 4 लाख से भी अधिक हो रहे हैं। वहीं, राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र की स्थिति देश भर में सबसे गंभीर है, जहाँ कई हफ्तों से लगातार 50,000 से अधिक कोरोना मरीज रोज मिल रहे हैं।

महाराष्ट्र की ऐसी स्थिति के बाद भी गीतकार जावेद अख्तर का ट्वीट करके ठाकरे सरकार की तारीफ करना सोशल मीडिया यूजर्स को रास नहीं आ रहा है। हालाँकि, कुछ यूजर्स इसे उनके फैमिली कनेक्शन से भी जोड़कर देखकर रहे हैं।

‘नहीं हुई चुनाव बाद बंगाल में हिंसा’: कलकत्ता HC को ममता सरकार ने दिया जवाब, 18 मई को होगी अगली सुनवाई

पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हो रही हिंसाओं के विषय में दायर की गई याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट की पाँच जजों की पीठ ने राज्य की ममता बनर्जी सरकार से रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा था जिस पर रिपोर्ट देते हुए सरकार ने कहा है कि राज्य में तृणमूल कॉन्ग्रेस की सरकार बनने के बाद कोई हिंसा नहीं हुई है। इसके अलावा राज्य सरकार ने जवाब देने के लिए समय माँगा जिस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 18 मई 2021 की तारीख दे दी।

वकील अनिंद्या सुंदर दास के द्वारा पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हो रही हिंसा पर कार्रवाई की माँग करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी जिसमें दास ने कहा था कि राज्य में विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद कानून व्यवस्था बिगड़ गई है और राज्य में कई हत्याएँ हो चुकी हैं। इसके कारण कई राजनैतिक कार्यकर्ता और आम नागरिक राज्य छोड़कर जा रहे हैं। इस याचिका पर आदेश देते हुए हाईकोर्ट ने राज्य की ममता बनर्जी सरकार से हिंसा पर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा था।

कलकत्ता हाईकोर्ट में राज्य की ओर से जवाब देते हुए महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने कहा कि उनकी रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 09 मई के बाद से कोई चुनाव बाद हिंसा नहीं हुई है। इसके अलावा दत्ता ने याचिका में पुलिस पर लगाए गए निष्क्रियता और लापरवाही के आरोपों पर कहा कि पुलिस ने सभी शिकायतों पर ध्यान दिया है। दत्ता ने माँग की कि सभी तथ्यों और याचिका से संबंधित सभी पहलुओं पर जवाब प्रस्तुत करने के लिए राज्य सरकार को और समय दिया जाए, जिस पर कोर्ट ने सुनवाई आगे बढ़ा दी। अगली सुनवाई 18 मई 2021 को होगी।

केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल वाय जे दस्तूर ने कहा कि दूसरी पार्टियों के प्रवक्ता भी मीडिया में कह रहे हैं कि उनके लोगों के साथ भी हिंसा हुई है। दस्तूर ने कोर्ट में कहा कि राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग दोनों को ही हिंसा की शिकायतें मिल रही हैं। साथ ही महिला आयोग और राज्य अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग को भी शिकायतें मिली हैं। ये शिकायतें उन लोगों की हैं जो पुलिस के पास नहीं जा पा रहे हैं। दस्तूर ने कोर्ट से इन आयोगों के पास पहुँची शिकायतों पर पुलिस द्वारा मामला दर्ज करने का आदेश देने की माँग की।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने यह कहते हुए कि पहले से कुछ बेहतर दिखाई दे रही हैं, राज्य सरकार को याचिका पर अपना जवाब देने के लिए समय दे दिया।

ज्ञात हो कि पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं और कई अन्य व्यक्तियों के खिलाफ लगातार हिंसा जारी है। राज्य से लगातार लूटपाट, हत्या, आगजनी और मारपीट की खबरें आ रही हैं। इस पर गृह मंत्रालय ने भी अपनी एक 4 सदस्यीय टीम बंगाल भेजी है जो हिंसा की जाँच करेगी और सीधे ही गृह मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपेगी। 06 मई को बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने भी आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हिंसा की रिपोर्ट उन्हें सौंपने से राज्य के अधिकारियों को रोक दिया था। ममता बनर्जी सरकार द्वारा जवाब देने से इनकार करने के बाद राज्यपाल धनखड़ ने कहा कि अब वे स्वयं हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे।  

चीन का मशहूर Glass Bridge आँधी से टूटा, घूमने आया शख्स 330 फीट की ऊँचाई पर लटका

चाइनीज माल को लेकर हमेशा से कहा जाता रहा है कि ये बेकार होते हैं। इन पर विश्वास करना खुद से बेमानी करने जैसा है। जब आपको भी चीन में हुई उस घटना के बारे में पता चलेगा, तो आपके मुँह से यही निकलेगा ‘व्हाट दी फक’ ऐसा कैसे हो सकता है।

हाल ही में चीन के मशहूर ग्लास ब्रिज की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। दरअसल, चीन के लोंगजिंग शहर (Longjing City) में पियान (Piyan) माउटेंट पर बने काँच के इस ब्रिज पर दरारें आ गई हैं। 330 फीट की ऊँचाई पर बना यह ब्रिज पयर्टकों के आकर्षण का केंद्र है, लेकिन अब शायद ही कोई इस घटना को सुनने के बाद अपनी जान जोखिम में डालकर यहाँ जाना चाहेगा।

‘द सन’ की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार (7 मई, 2021) को लोंगजिंग शहर में 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आँधी आई थी, जिसके बाद पुल के कुछ काँच के टुकड़े उड़ गए थे। इस दौरान वहाँ घूमने आया एक शख्स वहीं फँस गया।

चीन के 330 फीट ऊँचे इस ब्रिज की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं

बताया जा रहा है कि वह 330 फीट ऊँचे इस ब्रिज की रेलिंग पकड़कर वह काफी देर तक लटका रहा। इसकी सूचना जब अग्निशमन दल, पुलिस और पर्यटन विभाग से जुड़े अधिकारियों को मिली, तो उन्होंने वहाँ पहुँचकर उसे सुरक्षित नीचे उतारा।

रिपोर्ट के अनुसार, शख्स को सबसे पहले अस्पताल ले जाया गया, क्योंकि वह इस घटना की वजह से काफी डर गया था। वहीं, सोशल मीडिया पर लोग चीन में हुई इस घटना को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोग चीन की चीजों को लेकर मजा​क भी उड़ा रहे हैं, क्योंकि वह लंबे समय तक नहीं टिकती है।

काँच टूटने से पहले ये ब्रिज ऐसा दिखता था

बता दें कि चीन के हुनान प्रांत के चांगचियाचिए शहर में भी एक मशहूर काँच का पुल है, जिसकी लंबाई 430 मीटर है और ये छह मीटर तक चौड़ा है।

बंगाल में BJP के सभी 77 MLA को केंद्र सरकार की ओर से सुरक्षा, हार गए प्रत्याशियों को भी महीने भर सिक्यॉरिटी

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद से ही हिंसा जारी है। राज्य से भाजपा कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों के खिलाफ हिंसा की खबरें आ रही हैं। हाल ही में बंगाल के दौरे पर गए केन्द्रीय राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन पर भी हमला किया गया। अब मीडिया खबरों के अनुसार राज्य में हिंसा की स्थिति को देखते हुए केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य के सभी भाजपा विधायकों को केन्द्रीय सुरक्षा देने का निर्णय लिया है।

मीडिया के मुताबिक पश्चिम बंगाल के सभी 77 भाजपा विधायकों को X-कैटेगरी सुरक्षा प्रदान की जाएगी। भाजपा के सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार सभी निर्वाचित विधायक हिंसाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करेंगे और प्रभावित लोगों से भी मिलेंगे। सूत्रों के मुताबिक हिंसा की स्थितियों को देखते हुए भाजपा विधायकों की सुरक्षा के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है कि विधायकों को 6 अतिरिक्त केन्द्रीय सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराए जाएँगे।

भाजपा के सूत्रों से यह जानकारी भी सामने आ रही है कि 293 सीटों पर चुनाव लड़ने वाले सभी भाजपा प्रत्याशियों को सुरक्षा दी गई है। पहले हारे हुए प्रत्याशियों को 10 मई तक ही सुरक्षा दी गई थी लेकिन हिंसा को देखते हुए बंगाल की भाजपा ईकाई ने यह सुरक्षा बढ़ाने की अपील की। इस पर निर्णय लेते हुए केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने 31 मई तक सभी प्रत्याशियों की सुरक्षा को बढ़ा दिया है।

इसके अलावा आज (10 मई) ही कोलकाता में हुई भाजपा की विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेन्दु अधिकारी को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुन लिया गया। शुभेन्दु विधानसभा में विपक्ष के मुख्य नेता होंगे।

भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद शुभेन्दु अधिकारी ने कहा कि वह 2 बार सांसद और 3 बार विधायक रह चुके हैं, ऐसे में वह ममता बनर्जी के व्यवहार से भली-भाँति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि उनका पहला कर्त्तव्य है राज्य को हिंसा मुक्त बनाना। इसके अलावा बैठक में मदारीहाट से विधायक चुने गए मनोज टिग्गा को भाजपा के विधायक दल का मुख्य ह्विप चुना गया।

नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली ने गँवाई कुर्सी, संसद में बहुमत साबित करने में हुए असफल

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली सोमवार (10 मई 2021) को संसद के निचले सदन में विश्वासमत हार गए। दरअसल, ओली को 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में विश्वासमत जीतने के लिए कुल 136 मतों की जरूरत थी, लेकिन वह बहुमत साबित करने में असफल रहे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रतिनिधि सभा के विशेष सत्र में आज ओली ने औपचारिक रूप से विश्वास प्रस्ताव पेश किया और सभी सदस्यों से इसके पक्ष में मतदान करने की अपील की। हालाँकि वह अपने पक्ष में बहुमत जुटा पाने में नाकाम रहे, जिसके चलते उनके हाथ से पीएम पद चला गया है।

गौरतलब है कि पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ नीत नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) के ओली सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद उन्हें निचले सदन में बहुमत साबित करना था। इसको लेकर नेपाल में आज संसद का विशेष सत्र बुलाया गया था।

इस प्रक्रिया के दौरान निचले सदन में कुल 232 वोट डाले गए। 93 सांसदों ने ओली के पक्ष में मत किया, जबकि 124 सांसदों ने उनके खिलाफ वोट किया। वहीं, 15 सांसदों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया और 35 सांसद वोटिंग से गायब रहे। ज्ञात हो कि इसके साथ ही आर्टिकल 100(3) के मुताबिक अपने आप ही ओली पीएम पद से हट गए हैं।

बता दें कि नेपाल में पिछले साल 20 दिसंबर को यह राजनीति संकट शुरू हुआ था, जब राष्ट्रपति भंडारी ने प्रधानमंत्री ओली की अनुशंसा पर संसद को भंग कर 30 अप्रैल और 10 मई को नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश दिया था। ओली ने यह अनुशंसा सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में सत्ता को लेकर चल रही खींचतान के बीच की थी।

राजदीप की ‘गिद्ध पत्रकारिता’: दिल्ली दंगों की आरोपित नताशा के बचाव में उतरे, लिया उनकी पिता के मौत का सहारा

फरवरी 2020 में दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों की साजिशकर्ता नताशा नरवाल के पिता महावीर नरवाल की कोरोना वायरस संक्रमण से मृत्यु के एक दिन बाद पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने नताशा के खिलाफ लगे आरोपों की गंभीरता को नजरअंदाज करते हुए नताशा की हिरासत को मानवीय त्रासदी करार दिया और न्याय व्यवस्था पर भी प्रश्न उठाया।

इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने सोमवार (10 मई) को ट्वीट करके नताशा नरवाल की हिरासत को मानवीय त्रासदी बताते हुए कहा कि नताशा का जेल में रहना बताता है कि अपराधिक न्याय व्यवस्था अपनी दिशा खो चुकी है।

राजदीप सरदेसाई के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

वामपंथी प्रोपेगंडा वेबसाइट द वायर के सिद्धार्थ वरदाराजन ने भी नताशा के पिता की मृत्यु का उपयोग करते हुए UAPA के तहत जेल में बंद नताशा को बेकसूर कहा और दिल्ली पुलिस, पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को धमकी दी कि ‘सब याद रखा जाएगा।’  

सिद्धार्थ वरदाराजन के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

हालाँकि सोमवार (10 मई) को ही दिल्ली उच्च न्यायालय ने नताशा नरवाल के पिता महावीर नरवाल की मृत्यु हो जाने के कारण 3 हफ्ते की अंतरिम जमानत दी है और दिल्ली पुलिस ने भी इस जमानत का कोई विरोध नहीं किया लेकिन नताशा के पिता की मृत्यु के बाद से ही वामपंथी पत्रकार और एक्टिविस्ट नताशा के गंभीर अपराधों पर पर्दा डालने के लिए उसके पिता महावीर नरवाल की मृत्यु का उपयोग कर रहे हैं।   

दिल्ली के सीएए और हिन्दू विरोधी दंगे और नताशा नरवाल का रोल :  

24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में शुरू हुए हिंसक दंगों की साजिश के आरोप में वामपंथी समूह पिंजरा तोड़ की कार्यकर्ता नताशा नरवाल और देवांगना कालिता को 23 मई को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार किया गया था। नताशा दिल्ली के सीलमपुर में हुए सीएए विरोधी दंगों की साजिशकर्ता थी। पिछले साल ही कोर्ट में बताया गया था कि नताशा 16 और 17 फरवरी को हुई उस मीटिंग का हिस्सा थी जिसमें सीएए विरोधी दंगों की साजिश रची गई और हिंसा को भड़काने के एजेंडा तय किया गया।

सबूतों और गवाहों पर विचार करते हुए कोर्ट ने माना था कि नताशा नरवाल दिल्ली दंगों की दोषी है उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। हिंसा और सड़कों को जाम कर देने के कारण ही पुलिस पर हमले हुए और आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई भी प्रभावित हुई। हिंसा की गंभीरता को देखते हुए ही नताशा नरवाल पर UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया था।

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के नाम पर शुरू हुआ आंदोलन जल्दी ही हिन्दू विरोधी हिंसा में बदल गया। 24 फरवरी को शुरू हुए हिन्दू विरोधी दंगों में लगभग 53 लोग मारे गए थे जिनमें आईबी अधिकारी अंकित शर्मा और उत्तराखंड के दिलबर नेगी जैसे कई हिन्दू शामिल थे। दंगों में 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। इन हिन्दू विरोधी दंगों में भीड़ ने हिंदुओं को बड़ा नुकसान पहुँचाया था।   

इन दंगों में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने चार्जशीट दाखिल की थी। जिसमें दिल्ली दंगों की पूरी योजना से लेकर इसके प्रमुख सजिशकर्ताओं के नाम भी शामिल थे। इन हिन्दू विरोधी दंगों के सजिशकर्ताओं में आम आदमी पार्टी के काउन्सलर ताहिर हुसैन, उमर खालिद, शरजील इमाम, नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और कॉन्ग्रेस नेता इशरत जहाँ जैसे नाम शामिल हैं।

यहाँ ध्यान दिया जाना चाहिए कि दंगों पर दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के बाद एनडीटीवी और द क्विंट जैसे वामपंथी मीडिया समूहों ने दंगों के साजिशकर्ताओं का भरपूर बचाव किया था और दिल्ली दंगों पर भाजपा नेता कपिल मिश्रा के खिलाफ प्रोपेगंडा फैलाने का कार्य किया था। ऑपइंडिया ने दिल्ली दंगों पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी जो ईबुक के रूप में उपलब्ध है।