Home Blog Page 3806

कोविड पर राज्यों की तैयारी की अब हाई कोर्ट में खुली पोल, BMC चीफ पहले ही कर चुके है नंगा

मुंबई बीएमसी चीफ इकबाल सिंह चहल द्वारा ऑक्सीजन संकट के लिए राज्यों को जिम्मेदार ठहराए जाने के बाद एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) नियुक्त वरिष्ठ अधिवक्ता रुपिंदर खोसला ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अव्यवस्था के लिए राज्यों को ही जिम्मेदार बताया है। यहाँ तक कि दिल्ली में ऑक्सीजन के ब्लैक मार्केटिंग की आशंका भी जताई है।

उन्होंने कहा कि सरकारी आँकड़ों से पता चलता है कि उत्तर में, उत्तराखंड राज्य में 74,114 कोविड -19 मरीज हैं, यहाँ पर आवंटित ऑक्सीजन 103 मीट्रिक टन है। हिमाचल प्रदेश में 32,469 मरीज हैं और ऑक्सीजन के लिए आवंटित कोटा 15 मीट्रिक टन है। चंडीगढ़ में 8,511 मरीज हैं और आवंटित ऑक्सीजन कोटा 40 मीट्रिक टन है। हरियाणा में 1,16,867 कोविड मरीज हैं, यहाँ पर ऑक्सीजन का कोटा 267 मीट्रिक टन है। वहीं पंजाब में 74,343 मरीज हैं और आवंटित ऑक्सीजन कोटा 227 मीट्रिक टन है।

इस तरह पूरे उत्तर भारत में 3,06,304 मरीज हैं लेकिन इन पाँच राज्यों के लिए ऑक्सीजन का कुल कोटा 652 मीट्रिक टन है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में 86,232 मरीज हैं और ऑक्सीजन का कोटा 700 मीट्रिक टन है। इंडियन एक्सप्रेस से बाचतचीत में खोसला ने सवाल उठाते हुए कहा कि दिल्ली को ऑक्सीजन कोटे के आवंटन में स्पेशल ट्रीटमेंट दिया जा रहा है, ऐसे में इसके मुकाबले इन पाँच राज्यों या पूरे उत्तर भारत के लिए न्याय कहाँ है।

उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि दिल्ली में ब्लैक मार्केटिंग चल रही है और दिल्ली सरकार ऑक्सीजन कोटा का प्रबंधन और निगरानी नहीं कर पा रही है। यह भी हो सकता है कि दिल्ली में वीआईपी लोग ऑक्सीजन मैनेज कर रहे हों।

बता दें कि देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर जैसे ही आई, वैसे ही ऑक्सीजन की किल्लत खड़ी हो गई। इसको लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका पर सुनवाई हुई। इस सुनवाई में एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) नियुक्त वरिष्ठ अधिवक्ता रुपिंदर खोसला ने कहा कि हरियाणा, पंजाब और केंद्र शासित प्रदेश (UT) चंडीगढ़ कोरोना की दूसरी लहर की चुनौतियों से निपटने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थे। रुपिंदर खोसला ने राज्यों और दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी के बारे में अदालत को अवगत कराया। 

यह पूछे जाने पर कि आपको क्या लगता है कि पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश में स्वास्थ्य प्रणाली के पतन के लिए कौन जिम्मेदार है? उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि सरकारें कोविड -19 की दूसरी लहर के लिए तैयार नहीं थीं, इसलिए सिस्टम धराशायी हो गई। पहली लहर खत्म होने के बाद जश्न शुरू हो गया, लेकिन अब दूसरी लहर ने जोरदार प्रहार किया है। वेंटिलेटर, और बेड और अन्य बुनियादी ढाँचे की कमी है जो कोविड के साथ लड़ने के लिए आवश्यक है। दूसरी बात यह है कि हमारे पास वेंटिलेटर से निपटने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं हैं, जिनकी आवश्यकता है। इसलिए कुछ स्थानों पर स्टाफ है, लेकिन वेंटिलेटर नहीं हैं, और जहाँ वेंटिलेटर हैं, वहाँ कोई प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं है, इसलिए यह राज्यों द्वारा पूर्ण कुप्रबंधन है। इसके अलावा जब पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं होगी, तो कर्मचारी भी कुछ नहीं कर सकते हैं।”

गौरतलब है कि इससे पहले मुंबई बीएमसी चीफ इकबाल सिंह चहल ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि ऑक्सीजन संकट के लिए केंद्र नहीं राज्य सरकारें जिम्मेदार हैं। चहल ने कहा था कि केंद्र सरकार को देश में ऑक्सीजन संकट के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि राज्यों को ऑक्सीजन के अपर्याप्त आवंटन के लिए दोषी ठहराया जाना चाहिए।

चहल ने कहा, “भारत सरकार को इन सबके लिए दोष नहीं दिया जाना चाहिए। अगर किसी को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, तो वह राज्य हैं।” चहल ने कहा कि देश के कई राज्य यह स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे कि उनके यहाँ कोरोना के कुल कितने मामले हैं। ऐसे में केंद्र उन्हें कैसे ऑक्सीजन आवंटित करता?”

चहल ने तर्क देते हुए कहा था कि केंद्र कोविड-19 मामलों की संख्या में भारी अंतर होने के कारण राज्यों को समान मात्रा में ऑक्सीजन कैसे आवंटित कर सकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र 6,000 मामले वाले राज्य और महाराष्ट्र को समान रूप से ऑक्सीजन का आवंटन नहीं कर सकता है, जहाँ रोज 60,000 नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

कोविड: जेपी नड्डा ने कॉन्ग्रेस, राहुल को ‘पाखंड’ और ‘दोहरेपन’ के लिए लताड़ा, सोनिया गाँधी को लिखा कड़ा पत्र

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मंगलवार (11 मई, 2021) को कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी को लिखे एक कड़े पत्र में, कॉन्ग्रेस के कुछ मुख्यमंत्रियों सहित विपक्ष पर राजनीतिक फायदे के लिए उस समय जानबूझकर पर हंगामा मचाने का आरोप लगाया, जब देश एक महामारी से निपट रहा है।

नड्डा ने कॉन्ग्रेस पर कोरोना महामारी के खिलाफ जारी लड़ाई में लोगों को गुमराह करने और भय का माहौल पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संकट के इस दौर में राहुल गाँधी सहित उनके नेताओं का व्यवहार दोहरेपन और ओछेपन के लिए याद किया जाएगा। बीजेपी अध्यक्ष ने आगे कहा कि भारत कोरोना वायरस से पूरे साहस के साथ लड़ रहा है। हम चाहते हैं कि कॉन्ग्रेस लोगों को गुमराह करना, दहशत फैलाना बंद करे।

नड्डा ने मुफ्त वैक्सीन की माँग पर कॉन्ग्रेस को लताड़ा

विपक्ष द्वारा सभी के लिए वैक्सीन नि: शुल्क किए जाने की माँग को लेकर नड्डा ने कॉन्ग्रेस पार्टी की मंशा पर सवाल उठाया और कहा कि जब बीजेपी-एनडीए के नेतृत्व वाले राज्य गरीबों के लिए मुफ्त टीकों की घोषणा कर सकते हैं, तो कॉन्ग्रेस को किसने रोका है। पत्र में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के पाखंड पर भी प्रकाश डाला गया जो दक्षिणी राज्यों में अपनी चुनावी रैलियों को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद लॉकडाउन की माँग कर रहे हैं।

नड्डा ने कहा, ‘महामारी के खिलाफ इस लड़ाई में, कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी सहित शीर्ष कांग्रेस नेताओं के आचरण को दोहरेपन और क्षुद्रता के लिए याद किया जाएगा। आपकी पार्टी, आपके नेतृत्व में, लॉकडाउन का विरोध करके और फिर उसी की माँग करना, कोविड की दूसरी लहर पर केंद्र की सलाह को नजरअंदाज करते हुए, ये कहना कि हमें कोई सूचना नहीं मिली, केरल में बड़े पैमाने पर चुनावी रैलियों का आयोजन करना, जिससे कोविड के मामलों में बढ़ोतरी हुई, जबकि अन्यत्र होने वाली चुनावी रैलियों का विरोध करने का दिखावा करना, विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करना लेकिन कोविड गाइडलाइंस का पालन करने के बारे में बोलकर अपना कोई भला नहीं कर रहे हैं।

जेपी नड्डा ने चिट्ठी में वैक्सीन को लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी की तरफ से पूर्व में उठाए गए सवालों का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास में कभी भी वैक्सीनेशन को लेकर कोई संदेह नहीं रहा है, लेकिन कॉन्ग्रेस ने कोरोना वैश्विक महामारी के दौरान इसे लेकर शंका पैदा करने की कोशिश की। नड्डा ने कहा कि यह स्थिति ऐसे समय में पैदा की गई जब देश सदियों में एक बार आने वाली महामारी के संकट से जूझ रहा है।

नड्डा ने की कोविड से जंग में पीएम मोदी के प्रयासों की तारीफ

कोविड के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योगदान के बारे में नड्डा ने पत्र में लिखा है, ‘2020 में महामारी शुरू होने के बाद से ही प्रधानमंत्री सरकार के सभी अंगों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि महामारी के खिलाफ लड़ाई को गति दी जा सके। इनमें प्राथमिकता वाले क्षेत्र चिकित्सा क्षमताओं में वृद्धि करना और पीड़ित लोगों के लिए पर्याप्त सुविधाएँ सुनिश्चित करना हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास जारी हैं कि सभी हिस्से कोविड से निपटने के लिए पर्याप्त दवाओं और अन्य सामग्रियों से लैस हों। 2020 में, 8 महीनों के लिए, भारत सरकार ने 80 करोड़ भारतीयों को मुफ्त राशन प्रदान किया। अब भी वही किया जा रहा है।’

नड्डा ने कहा, ‘कोरोनोवायरस को हराने के लिए प्रधानमंत्री सभी मुख्यमंत्रियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्रियों के साथ कई बैठकों की अध्यक्षता की है, जो सौहार्दपूर्ण और शानदार माहौल में आयोजित की गई हैं। पूर्व प्रधान मंत्री और किसान नेता श्री एच डी देवगौड़ा ने स्वयँ पीएम मोदी के कई हितधारकों से सलाह लेने का उल्लेख किया था।’

नड्डा ने कॉन्ग्रेस शासित राज्यों के ‘दोहरेपन’ की आलोचना की

नड्डा ने कहा कि वह संकट के इस काल में कॉन्ग्रेस के इस रवैये से दुखी हैं, लेकिन हैरान नहीं हैं। नड्डा ने लिखा, ‘मैं बहुत दुखी होकर यह पत्र लिख रहा हूँ। मैं ऐसा पत्र कभी नहीं लिखता। लेकिन, पार्टी के मुख्यमंत्रियों सहित कॉन्ग्रेस पार्टी के सदस्यों द्वारा पैदा किए जा रहे भ्रम को देखते हुए, मैं अपने विचारों को कलमबद्ध करने के लिए मजबूर हूँ। हमें आशा है कि भारत जब अत्यधिक साहस के साथ कोविड-19 से लड़ रहा है, तो कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेता लोगों को गुमराह करने, झूठी दहशत पैदा करने और यहां तक कि केवल अपने राजनीतिक विचारों के आधार पर विरोधाभासी बयान देना बंद कर देंगे।’

नड्डा ने कॉन्ग्रेस शासित राज्यों द्वारा वेंटिलेटर्स समेत अन्य जरूरी मेडिकल उपकरणों की कमी का रोना रोने और केंद्र द्वारा उन्हें उपलब्ध कराए जाने पर उनका उपयोग न करने की ओर भी ध्यान दिलाया। नड्डा ने कहा, ‘हमने इस बात की सूचना दी थी कि कैसे कोरोनोवायरस महामारी की दूसरी लहर की शुरुआत में राजस्थान, पंजाब और झारखंड राज्यों को भेजे गए वेंटिलेटर बिना उपयोग के पड़े थे और धूल खा रहे थे।’

बता दें कि सोमवार (10 मई 2021) को कॉन्ग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई थी, जिसमें कोविड-19 प्रबंधन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला गया था।

मोदी से घृणा के लिए वे क्या कम हैं जो आप भी उसी जाल में उलझ रहे: नैरेटिव निर्माण की वामपंथी चाल को समझिए

किसी झूठ को एक बार कहिए। आपकी पिटाई हो सकती है, निंदा तो होगी ही। उसी झूठ को 10 बार कहिए। आपकी निंदा तो होगी, लेकिन कुछ लोग होंगे जो आपके झूठ को सच मानने लगेंगे। अब उसी झूठ को किसी जिहादी या कम्युनिस्ट की तर्ज पर 100 या हजार बार बोलिए। समाज में वह झूठ तो सच के तौर पर स्थापित होगा ही, बहुत छोटा तबका ही ऐसा होगा जो व्यभिचारी वामपंथियों का चाल समझ उनको नकार दे, पूरी तरह।

इस ख्याल के साथ जरा टिकरी बॉर्डर पर किसानों के नाम पर पिकनिक मना रहे धूर्तों के समूह में एक लड़की के साथ हुए बलात्कार की खबर को जोड़िए। पहली बात तो आप यह पाएँगे कि तथाकथित बुद्धिजीवियों, लिबरलों-सेकुलरों इत्यादि की सोशल मीडिया वॉल से ये खबर सिरे से गायब है। दूसरी बात, जहाँ ये खबर छपी भी है, वहाँ इन दरिंदो को अब तक ‘किसान’ के नाम से ही संबोधित किया जा रहा है। तीसरे, पूरी बेशर्मी से यह कहा जा रहा है कि ये तो भाजपा ने अपने सोशल मीडिया को खबर दी है प्लांट करने को और किसानों ने (ध्यान दीजिए) तो पहले ही आरोपितों के टेंट उखाड़ दिए हैं, खुद उन्होंने रिपोर्ट करवाई है, इत्यादि-इत्यादि। मजे की बात देखिए कि बलात्कारों को आदतन डिफेंड करनेवाले वामपंथी इस बार भी वही कर रहे हैं।

इधर, इनका एक चला है- ह्वाट्सएप यूनिवर्सिटी और आईटी सेल। यह इनके सबसे बड़े खिलाड़ी रवीश पांडेजी की देन है और जब वही अनाहूत, अनायास, अनियंत्रित कुछ भी बकते हैं तो चमचों की क्या बात? ‘कौन जात कुमार’ हों या उनके लगुए-भगुए, बिल्कुल अब्राहमिक मजहबों के पैगंबर सरीखा व्यवहार करते हैं। खाता न बही, जो उन्होंने कहा, वही सही। उसके खिलाफ जहाँ किसी ने तर्क दिए, तथ्य दिए, वह आइटी सेल वाला हो गया/गई।

आईटीसेल की क्या संघटना होती है, ट्विटर या फेसबुक (कुल मिलाकर सोशल मीडिया) कैसे काम करता है, इम्प्रेसन क्या होता है, रीच क्या होता है, ऑर्गेनिक और पेड पहुँच क्या होती है, ट्रेंड कैसे करवाया जाता है (जी, करवाया भी जाता है और यह प्रोफेशनल तरीके से होता है), या कैसे होता है, खुद ट्विटर या फेसबुक की नीति क्या है, अलगॉरिद्म क्या है, यह अगर आप इनके बौद्धिक माता-पिताओं से पूछ दें, तो वे जाहिल आसमानी गप्प सुना देंगे, फिर चेलों की क्या बिसात?

ऊपर के ये तीनों अनुच्छेद आपको पढ़वाने का मकसद यही है कि आप नैरेटिव-निर्माण या अवधारणा-निर्मिति के इस खेल को समझ सकें। ये वही खेल है, जिसमें एक बरखा ‘राडिया” दत्त श्मशान में बैठकर ‘लाइव’ होती है, तो राणा अयूब और आरफा खानम व अरुंधती ‘सुजैन’ राय जैसों के जरिए न्यूयॉर्क टाइम्स से लेकर सीएनएन, बीबीसी और वाशिंगटन पोस्ट तक में सामूहिक चिताओं की ड्रोन से ली गई तस्वीरें, ऑक्सीजन के लिए होता हाहाकार और मरते हुए लोगों की फोटो एक साथ नुमायाँ होने लगती हैं। अगर आप उस वक्त टीवी खोलें और अखबार पढ़ें तो लगेगा कि भारत पूरी तरह अफरातफरी और अराजकता से दो-चार है, जिसके जिम्मेदार केवल और केवल पीएम नरेंद्र मोदी हैं। यह होता है नैरेटिव-निर्माण, यह होती है अवधारणा-निर्मिति।

आज भी नैरेटिव क्या है? यह कि कम्युनिस्ट वे होते हैं, जो समाज की बराबरी के लिए काम करते हैं, दुनिया में सबके हको-हुकूक का झंडा बुलंद करते हैं, धर्मनिरपेक्ष समाज की स्थापना करते हैं, वगैरह-वगैरह। यह नैरेटिव ठीक उसी तरह का है, जैसे इस देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस देश को आधुनिक, विकासमान और महान बनाने का काम किया, जबकि इस देश में भ्रष्टाचार का विष-वृक्ष बोनेवाले, निर्लज्ज वंशवाद के संस्थापक, हमारे राष्ट्र को हिंदू-विरोध में फिर से इस्लामिक बनाने की ओर धकेलने वाले नेहरू ही थे।

उसी तरह का एक और नैरेटिव है कि नक्सली दरअसल गरीबी से लड़नेवाले आदिवासी-वंचित, शोषित-पीड़ित आदि-इत्यादि हैं। उसी तरह कम्युनिस्टों ने एक और नैरेटिव यह बनाया है कि वे बहुत पढ़े-लिखे, बल्कि इस दुनिया के एकमात्र पढ़े-लिखे लोग और जमात के प्रतिनिधि हैं, जो गलती से इस दीन-हीन देश को सौभाग्य पहुँचाने आ गए हैं। वे सत्य के अंतिम प्रतिनिधि हैं।

अब देखिए सच क्या है? सच यह है कि कपटी कम्युनिस्टों ने हमेशा इस देश को बाँटने का काम किया है। तोड़ने का काम किया है। झूठ को, कोरे-सफेद झूठ को स्थापित किया है। कूड़े की तरह लिखे कुछ को भी विश्व-साहित्य का महान तत्व निरूपित किया है।

शुरुआत के लिए यही देखें कि वामपंथी उपन्यासकारों (रोमिला, इरफान से लेकर बिपन चंद्र और मुखर्जी तक) ने यह बात बारहाँ हम सबको बताई कि आर्यों ने बाहर से आकर इस देश के ‘मूलनिवासियों’ के साथ धोखाधड़ी की। हालाँकि, ये सभी द्वितीयक शोध या भाषा संबंधी उलटबांसी का परिणाम है, किसी भी उपन्यासकार ने पुरातत्व या प्राथमिक शोध की मदद लेने की जहमत नहीं उठाई।

अब पूरी दुनिया में वह मिथ ध्वस्त हो चुका है, लेकिन आपके पाठ्यपुस्तकों में वही कूड़ा फैलाया जा रहा है, आपकी कई पीढ़ियों को तो उसी जूठन से लाद दिया गया। व्यभिचारी वामपंथियों ने अपने कूड़ा-लेखन की मदद से रामायण और महाभारत को मिथक बना दिया, पुराणों को इतिहास-बाह्य करार दिया, हम शुतुरमुर्ग हिंदू पागलों की तरह अपने राम और कृष्ण का ही ‘प्रमाण’ लेने लगे। आत्मघाती जो हैं।

उन्होंने सरस्वती नदी की गाथा को कल्पित सिद्ध कर दिया, पूरी सभ्यता को ही 4000 वर्षों में कसने लगे, अपने यूरोपीय आकाओं की मदद से, जिनका उच्छिष्ट खाकर ये कपटी कम्युनिस्ट और कॉन्ग्रेसी जीवित रहे, इस देश को लूटते रहे, अब, आप तमाम सबूत इनके मुँह पर मारते रहिए, इनका झूठ दानवाकार बन आपके ही मुँह पर अट्टहास करता रहेगा। आप सुनौली से लेकर हरियाणा और मध्य प्रदेश में हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता के चिह्न लेकर बैठे रहिए। नैरेटिव तो यही है कि आर्य हमलावर थे, उन्होंने बहुजनों पर अत्याचार किए।

दिल्ली में छेड़खानी का विरोध करने पर मुसलमान-परिवार ने पड़ोसियों के साथ मिलकर ध्रुव त्यागी और उनके बेटे पर हमला किया। ध्रुव की मौत हुई, तथाकथित मीडिया, चिंतक, गंगा-जमनी तहजीब के पैरोकार वगैरह की चुप्पी याद कीजिए, केजरीवाल के मुँह में जमा दही देखिए और अख़लाक़ का मसला याद कीजिए। कश्मीर से कैराना और बरेली से बदायूँ देख लीजिए। कुंभ पर नक्सलियों की चीत्कार याद कीजिए और हैदराबाद में हो रहे जुम्मे की नमाज़ को देखिए। बंगाल में कट रहे हिंदुओं को देखिए और इस देश के तथाकथित पीपल्स इंटेलेक्चुअल की चुप्पी और झूठ देखिए। यही है नैरेटिव-निर्माण।

अभी भी आप सोशल मीडिया या मीडिया को देखिए तो पाएँगे कि मोदी के कट्टर समर्थक भी इन नैरेटिव के जाल में फँसकर उनकी निंदा कर रहे हैं, भले ही एक डिस्क्लेमर लगा दें कि वे अंधभक्त नहीं हैं, सजग आलोचना कर रहे हैं। हालाँकि, वह ये भूल जाते हैं सजग आलोचना के चक्कर में वे कॉन्ग्रेसी-कौमी जाल में फँसकर अपने नेतृत्व पर ही सवाल उठा रहे हैं। संकट की घड़ी में वे टूलकिट वालों के ही नैरेटिव में फँस जा रहे हैं।

एक अंतिम उदाहरण से अपनी बात खत्म करूँगा। स्वरा भास्कर हों या उनकी तरह का कोई भी लेफ्टिस्ट, वह हमास जैसे आतंकी संगठन का झंडा गर्व से उठाता है, इजरायल को आतंकी देश बताता है, लेकिन अफगानिस्तान में 80 बच्चियाँ हलाक कर दी गईं, इस पर वे कुछ नहीं बोलते। यहाँ तक कि अपने रेपिस्ट को भी वे बचाते हैं।

हिंदुओं को सत्यनिष्ठा की इतनी हुड़क है कि वे राम मंदिर बनवाने वाले, कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने वाले, तीन तलाक को मिटाने वाले, सीएए लागू करने और एनआरसी की राह बनानेवाले मोदी की भी ‘सजग औऱ स्वस्थ आलोचना’ का लोभ संवरण नहीं कर पाते, जबकि यह वक्त चट्टानी एकता के साथ अपने नेता के साथ खड़े रहने का है। विरोध के लिए मोदी के पास लोगों की कमी थोड़े न है?

केजरीवाल सरकार ने बंद पड़े इंदिरा गाँधी अस्पताल में दिखाए 150 बेड खाली: HC ने लापरवाही के लिए लगाई फटकार

दिल्ली में ऑक्सीजन की किल्लत और अस्पतालों में बेड की कमी के कारण लगातार दिल्लीवासी परेशान हैं। ऐसे में केजरीवाल सरकार अपनी लापरवाहियाँ करने से बाज नहीं आ रही। हाल में दिल्ली सरकार की वेबसाइट पर खाली बेडों की संख्या बिना सत्यापन के अपलोड कर दी गई। बाद में परेशानी किसे हुई? उन लोगों को जो सरकार की इस वेबसाइट पर भरोसा करके अस्पताल तक गए।

जानकारी के मुताबिक द्वारका स्थित इंदिरा गाँधी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल को लेकर दिल्ली सरकार ने दावा किया कि ये अस्पताल चालू हो गया और दो दिन बाद भी यहाँ अस्पताल खाली पड़े हैं। दिल्ली सरकार द्वारा की गई इस घोषणा के प्रमाण दिल्ली सरकार की ऐप पर भी है। यहाँ भी द्वारका में स्थित इंदिरा गाँधी अस्पताल में 150 बेड खाले दिखाए जा रहे हैं।

इस लापरवाही के मद्देनजर दिल्ली हाईकोर्ट ने अब दिल्ली सरकार से जवाब माँगा है। दिल्ली सरकार के वकील का कहना है कि एसओ सर्टिफिकेट देर से मिलने के कारण ऐसा हुआ।

साभार: नवभारत टाइम्स

कोर्ट ने सरकार को कहा, “दिल्ली सरकार के लिए ऐसी चीजें करना उचित नहीं है। शनिवार को कहा गया कि अस्पताल शुरू हो गया और अब मंगलवार दोपहर कहा जा रहा है कि अब भी चालू नहीं।”

मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस विपिन संघी और रेखा पल्ली की पीठ ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए भविष्य में दोबारा ऐसी लापरवाही न करने के निर्देश दिया। जिसके बाद कोर्ट की बात सुन दिल्ली सरकार के वकील ने अदालत में माफी माँगी। कोर्ट ने उनसे हलफनामा दायर करने को कहा। साथ ही सख्ती से कहा कि अधिकारियों से सरकार बोले कि वो गलत जानकारी न दें।

इस दौरान दिल्ली के प्रधान सचिव स्वास्थ्य डॉ आशीष वर्मा ने अदालत को बताया कि परिचालन में देरी हुई क्योंकि अस्पताल में उपलब्ध कराए गए ऑक्सीजन सिलेंडर का उपयोग नहीं किया जा सकता था, क्योंकि पीईएसओ प्रमाणन प्राप्त नहीं हुआ था। वर्मा ने अदालत को बताया कि अभी प्रमाणन प्राप्त किया गया है और आज से अस्पताल प्रवेश के लिए खुला है।

बता दें कि दिल्ली सरकार ने इससे पहले भी इस अस्पताल को लेकर दावा किया था कि शनिवार से इंदिरा गाँधी अस्पताल कोविड अस्पताल में तब्दील हो जाएगा। आदेशानुसार इस अस्पताल में प्रारंभ में 250 बिस्तर होंगे और बाद में संख्या बढ़ाई जाएगी। हालाँकि, दो दिन बाद जब ऐसा नहीं हुआ तो मामला कोर्ट पहुँचा और दिल्ली सरकार की लापरवाहियों पर उन्हें फटकार लगी।

AAP के ही हाथ नहीं काले, ‘खान चाचा’ वाले नवनीत कालरा पर कॉन्ग्रेस सरकार भी रही थी मेहरबान

कोरोना संकट में ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर कालाबाजारी के आरोपी बिजनेसमैन नवनीत कालरा को कभी तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार का संरक्षण प्राप्त था। साल 2006 में राज्यसभा में तत्कालीन शहरी विकास मंत्री अजय माकन से पूछे गए एक प्रश्न ने इसकी पोल खुलती है। अजय माकन से ये प्रश्न पूछा था तरलोचन सिंह ने, जिसमें उन्होंने पूछा था कि क्या यह सच है कि केंद्रीय शहरी विकास मंत्री दिल्ली गोल्फ क्लब के स्थायी सदस्य बनने वाले व्यक्तियों को नामित करते हैं।

इसके अलावा, माकन से यह सवाल भी पूछा गया था कि 2004-05 और 2005-06 के बीच किन व्यक्तियों को गोल्फ क्लब में नामांकित किया गया था। इस सवाल पर कॉन्ग्रेस के अजय माकन ने उन लोगों के नामों के साथ जवाब दिया, जिन्हें कॉन्गेस सरकार ने दिल्ली गोल्फ क्लब में नामांकित किया था।

अजय माकन द्वारा राज्यसभा को दी गई प्रतिक्रिया

अजय माकन ने सवाल का जवाब देते हुए कहा था कि कॉन्ग्रेस सरकार ने रॉबर्ट वाड्रा, ‘राष्ट्रीय दामाद’, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में ईएनटी विभाग के प्रमुख जेएम हंस, और खान मार्केट के नवनीत कालरा को नामित किया था। उन्होंने आगे बताया कि क्लब हर साल दो ‘बिन-बारी’ के सदस्यों को स्वीकार करता है और उनमें से सरकार द्वारा नामित एक सदस्य नवनीत कालरा था, जो अब कोरोना संकट में ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर कालाबाजारी का आरोपित है।

नवनीत कालरा के खिलाफ जारी है लुकआउट नोटिस

दिल्ली पुलिस ने फरार रेस्टोरेंट मालिक नवनीत कालरा के खिलाफ एक लुकआउट नोटिस जारी किया है। कालरा, खान बाजार के ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर ब्लैक-मार्केटिंग रैकेट में आरोपी है और तभी से फरार चल रहा है, जब दिल्ली पुलिस ने दिल्ली और फार्महाउस के पॉश इलाकों में उसके रेस्टोरेंट की चेन पर छापा मारते हुए 500 से ज्यादा ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर्स बरामद किया था।

मालूम हो कि गुरुवार (6 मई, 2021) को दिल्ली में ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर्स की कालाबाजारी का भंडाफोड़ होने के बाद शुक्रवार (मई 7, 2021) को दिल्ली पुलिस ने खान मार्केट से 96 और कॉन्सेंट्रेटर बरामद किए थे। पड़ताल में पुलिस को पता चला था कि जिन-जिन जगहों से मशीनें बरामद हुईं, उन सबके तार उद्योगपति नवनीत कालरा से जुड़े हुए हैं।

दिल्ली पुलिस को राजधानी के अलग-अलग कोनों से 6 मई को 450 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर मिले। इनमें से 419 की बरामदगी पर एक ही व्यवसायिक संस्थान का नाम प्रकाश में आया, जिसका मालिक उद्योगपति नवनीत कालरा है। छापे के दौरान, 9 से 5 लीटर क्षमता वाले 32 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर कालरा की कंपनी Nege & Ju bar से मिले।

इसके बाद पुलिस ने वहाँ से तीन लोगों को गिरफ्तार किया। ये लोग पुलिस को मंडी गाँव के खुल्लर फार्म तक ले गए, जहाँ से 387 कॉन्सेंट्रेटर और बरामद किए गए। इसके अलावा खान मार्केट के मशहूर रेस्टोरेंट ‘खान चाचा’ से भी 96 कॉन्सेंट्रेटर बरामद किए गए थे। यानी कुल मिला कर कालरा के तमाम व्यवसायिक संस्थानों से अब तक 524 कंसन्ट्रेटर बरामद हुए हैं।

नवनीत कालरा ने ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर्स चीन से लगभग 20,000-25,000 रुपए में आयात किया, और दिल्ली में उन्हें कम से कम 70,000 रुपए में बेचा, ऐसा करके उसने कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान दिल्ली में ऑक्सीजन संकट की वजह से बढ़ी इस मशीन माँग का फायदा उठाकर जमकर मुनाफा कमाया। कथित तौर पर, वे अब तक लगभग 50 यूनिट बेच चुके हैं।

नवनीत कालरा दिल्ली में कई भोजनालय चलाता है और रिटेल दयाल ऑप्टिकल्स का मालिक है, जिसकी स्थापना उनके पिता दयाल दास कालरा ने की थी। दिल्ली में उनके रेस्तरां सबसे प्रसिद्ध हैं, और वहाँ सेलेब्रिटीज और राजनेताओं का अक्सर आना-जाना रहता है।

वैक्सीन ही नहीं, दारू के लिए भी कतार: ठेके खुले-लगी भीड़, छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस सरकार कर रही होम डिलिवरी

छत्तीसगढ़, यूपी समेत पूरे देश में कोरोना की दूसरी लहर का कहर जारी है और संक्रमण को रोकने के लिए प्रदेश में लॉकडाउन लगा हुआ है। यूपी सरकार के आदेश के बाद जिले में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए 17 मई तक कोरोना कर्फ्यू को बढ़ा दिया गया है। वाराणसी में कोरोना कर्फ्यू के बीच स्थानीय प्रशासन ने शराब की दुकानों को खोलने को लेकर दिशा निर्देश जारी किया। मंगलवार (मई 11, 2021) से वाराणसी में सुबह 7 बजे से दोपहर 1 बजे तक शराब की दुकानें खुली रहेंगी। वहीं छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन शराब की बिक्री की वजह से सर्वर क्रैश होने की खबरें आ रही हैं।

शराब की दुकानों पर किसी तरह की विवाद न हो इसके लिए प्रशासन ने थानों को भी अलर्ट जारी किया है। प्रशासन की ओर से जारी निर्देश के मुताबिक, इन सभी दुकानों पर सोशल डिस्टेंसिग के नियमों का पालन करना जरूरी होगा। शराब की दुकानों के अलावा दूध, सब्जी, ब्रेड, फल, बेकरी, मिठाई की दुकानें, फल और सब्जी मंडी दोपहर एक बजे तक खुली रहेंगी। इनके अलावा सभी तरह के मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और अन्य दुकानें पूरी तरह बंद रहेंंगे।

वाराणसी के अलावा नोएडा और गौतम बुद्ध नगर जिले में सभी शराब और बीयर की दुकानें को मंगलवार से खोलने का आदेश जारी किया गया है। आदेश के अनुसार, शराब और बीयर की दुकान सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक खुलेंगी। दुकान खुलने के बाद ठेके के बाहर लोग शराब लेने के लिए टूट पड़े। हालात शर्मनाक करने वाले थे, क्योंकि इतनी लंबी लाइन किसी भी दवा की दुकान पर नजर नहीं आई। शराब के लिए लोग सड़क किनारे वाहन खड़े कर कतार में लग गए। 

बता दें कि छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में शराब की ऑनलाइन बिक्री और होम डिलीवरी की अनुमति दे दी है। छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन के बीच शराब की होम डिलीवरी के लिए शुरू किए ऐप पर पहले ही दिन इतना भार आ गया कि ऐप क्रैश हो गया। सुबह 9 बजे से लोग इस ऐप के जरिए शराब की होम डिलीवरी के लिए जुट गए, जिसका नतीजा यह हुआ कि महज कुछ ही देर में ऐप क्रैश हो गया। गौरतलब है कि पिछले दिनों केजरीवाल ने जैसे ही कर्फ्यू का ऐलान किया वैसे ही दिल्ली के ठेकों पर लंबी लंबी कतारें देखने को मिली थी।

‘हिंदू बम, RSS का गेमप्लान, बाबरी विध्वंस जैसा’: आज सेंट्रल विस्टा से सुलगे लिबरल जब पोखरण पर फटे थे

सेंट्रल विस्टा की जरूरत तो मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने भी सार्वजनिक तौर पर महसूस की थी। लेकिन वो सरकार ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ की शिकार थी तो केवल बातें हुईं। उस दिशा में जमीन पर कोई काम नहीं हुआ। मोदी सरकार के नेतृत्व में अब इस पर जमीनी काम शुरू हुए हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से इसके खिलाफ पूरा लिबरल गिरोह प्रोपेगेंडा करने में जुटा है। ठीक उसी तरह जैसा इस जमात ने 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण के बाद किया था।

भारत ने 1998 में 11-13 मई के बीच एक के बाद एक 5 न्यूक्लियर ब्लास्ट (परमाणु परीक्षण) कर पूरी दुनिया को चौंका दिया था। खुद को विश्व में परमाणु ताकत के तौर पर स्थापित किया था। तमाम अंतराष्ट्रीय दबाव के बावजूद भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तत्परता से पोखरण में खेतोलोई गाँव के पास परमाणु परीक्षण किए गए थे।

इन सफल परीक्षणों के बाद से 11 मई का दिन हर साल नेशनल टेकनॉलजी डे के तौर पर मनाया जाने लगा। बताया जाता है कि पोखरण पर निगरानी रखने के लिए अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए ने 4 सैटेलाइट लगाई थीं। लेकिन भारत ने बड़े सुनियोजित ढंग से उन्हें चकमा दिया और ये परीक्षण सफल रहा।  

कुल पाँच परीक्षण हुए। इनमें से 3 का परीक्षण 11 मई को हुआ, जबकि बाकी 13 मई को किए गए। इनमें एक फ्यूजन बम और बाकी फिजन बम थे। पूरा मिशन अब्दुल कलाम की अगुवाई में अंजाम दिया गया था। जब परीक्षण के सफल होने की घोषणा की गई तो अमेरिका तक हैरान रह गया। चीन ने भी भारत के परमाणु शक्ति-सम्पन्न बनने पर आपत्ति जताई थी। 

लेकिन इन बाहरी ताकतों के अलावा देश में भी एक जमात ऐसी थी जो वाजपेयी हिम्मत दिखाने से चिढ़ गई थी। इनमें उस समय के विपक्षी नेताओं से लेकर मीडिया गिरोह तक शामिल था।

उस समय सोनिया गाँधी ने कहा था कि असली ताकत तो संयम दिखाने में है। शक्ति प्रदर्शन में नहीं। वहीं सीपीआईएम का कहना था कि ये सब राजनीतिक लाभ पाने के लिए हुआ। CPI (M) के तत्कालीन महासचिव हरकिशन सिंह सुरजीत का कहना था कि भारत के प्रधानमंत्री और उनके साथी पाकिस्तान को उकसाने में लगे हुए हैं। वे भड़काऊ भाषणों से पाकिस्तान को युद्ध के लिए ललकार रहे हैं। भाजपा के ऐसे कदम से केवल क्षेत्रों में तनाव बढ़ेगा।

1998 में वामपंथी नेताओं ने इस परमाणु परीक्षण को बाबरी विध्वंस से जोड़ते हुए आरोप लगाया था कि संघ परिवार ने पहला धमाका 6 दिसंबर 1992 में किया था। पार्टी के तत्कालीन जनरल सेक्रेट्री ने जून 1998 में हिंदूफोबिया दिखाते हुए अपनी स्पीच में परमाणु बम को ‘हिंदू बम’ कहा था। साथ ही इल्जाम लगाया था कि राम मंदिर का नारा जैसे मुस्लिमों को टारगेट करता है वैसे ही परमाणु बम को पाकिस्तान के लिए तैयार किया जा रहा है। शरद यादव जैसे नेताओं ने इसे आरएसएस का गेमप्लान बताते हुए कहा था कि इसे भारत को अंध हिंदू राष्ट्रवादियों का देश बनाने की साजिश से जोड़ा था।

बंगाल में BJP का चेहरा बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी का पहला लेख, कहा- TMC की लेफ्ट जैसी दुर्गति होगी

2016 में 3 सीट हासिल करने वाली बीजेपी ने इस बार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में 77 सीटों पर सफलता हासिल की है। नंदीग्राम में उसके प्रत्याशी रहे शुभेंदु अधिकारी ने तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ही पटखनी दे दी। 10 मई 2021 को बीजेपी ने अधिकारी को पार्टी विधायक दल का नेता चुना। इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस के लिए लिखे गए एक लेख में अधिकारी ने भविष्य की रणनीतियों का खाका पेश किया है।

लेख में उन्होंने राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा के लिए तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे जनादेश का अपमान करार दिया है। कहा है​ कि राज्य ने हाल ही में रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती मनाई है, जिन्होंने कहा था, ‘चित्त जहाँ भयशून्य, उच्च मस्तक नित रहता’, लेकिन आज के बंगाल में लोगों का मन स्वतंत्र नहीं है और वर्तमान स्थिति को देखते हुए सिर भी शर्म से झुका हुआ है।

उन्होंने चुनावी जीत के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा बीजेपी समर्थकों को निशान बनाकर की गई हिंसा की आलोचना करते हुए लिखा, “एक वर्तमान केंद्रीय मंत्री पर उन गुंडों द्वारा हमला किया गया जिनका संबंध सत्ताधारी पार्टी से था। ये अकेली ऐसी घटना नहीं थी। पूरे राज्य में हिंसा अबाध गति से जारी रही।”

‘टीएमसी ने की विपक्ष को भयभीत करने की कोशिश’

शुभेंदु ने लिखा है कि टीएमसी ने जनादेश का अपमान करते हुए राज्य भर में आंतक फैलाया और लोकतंत्र की संस्कृति को नष्ट करने का हरसंभव प्रयास किया गया। उन्होंने कहा, “बंगाल के लोगों ने टीएमसी को शासन करने के लिए स्पष्ट जनादेश दिया था, न कि राज्य भर में आतंक फैलाने के लिए नहीं। सरकार के स्तर पर बहुत कुछ किया जाना है। कोविड को नियंत्रण में लाना है। लेकिन शीर्ष नेतृत्व समर्थित टीएमसी कैडर राज्य में लोकतंत्र की संस्कृति को नष्ट करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। अपनी रैलियों में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री इतनी व्यस्त थीं कि उन्हें प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में आयोजित कोविड की बैठकों में शामिल होना समझदारी नहीं लगी।”

शुभेंदु ने कहा कि 2 मई को नतीजे आने के बाद टीएमसी कैडरों को बंगाल में राजनीतिक विरोधियों को भयभीत करने के स्पष्ट निर्देश मिले थे। उन्होंने इस निर्देश का अक्षरश: पालन किया। उन्होंने लिखा है, “हमारी पार्टी (बीजेपी) के दर्जनों कार्यकर्ता मारे गए हैं, हजारों अपने घरों से भागने को मजबूर हुए। किसी को भी नहीं बख्शा गया। महिलाएँ, बच्चे, किसान, गरीब या युवा। टीएमसी ने हमारे संविधान के हर सिद्धांत का उल्लंघन किया है।” शुभेंदु ने लिखा है कि टीएमसी कैडरों ने उस कॉन्ग्रेस और लेफ्ट के ऑफिसों को भी नहीं बख्शा, जिसने बीजेपी को हराने के लिए टीएमसी की मदद करने का हरसंभव प्रयास किया था, भले ही इसके चक्कर में उनका खुद का आँकड़ा शून्य पर पहुँच गया।

शुभेंदुने लिखा कि नंदीग्राम ने टीएमसी को इतना प्यार दिया। अगर नंदीग्राम आंदोलन न होता तो 2011 में टीएमसी की जीत कभी नहीं होती। लेकिन जब नंदीग्राम ने इस बार टीएमसी को नकार दिया तो पार्टी के कार्यकर्ता यहाँ के लोगों से बदला ले रहे हैं। चुने हुए प्रतिनिधियों पर हमले किए जा रहे हैं।

‘बीजेपी की हार पर जश्न मनाने वाले टीएमसी की हिंसा पर चुप’

शुभेंदु ने टीएमसी प्रायोजित हिंसा पर चुप्पी साधने वालों से भी सवाल किया। उन्होंने लिखा है, “बीजेपी के साथ वैचारिक मतभेद रखने वाले कुछ लोग पश्चिम बंगाल के परिणामों से खुश थे। लेकिन टीएमसी प्रायोजित हिंसा पर उन्होंने चुप्पी साध रखी है। टीएमसी कैडरों की आक्रामकता की आलोचना करने के लिए एक भी शब्द नहीं। मौतों पर एक शब्द नहीं। महिलाओं पर हुए हमलों पर एक शब्द नहीं। वे अपने ‘भारत के विचार’ के बारे में बात करने का कोई अवसर नहीं छोड़ते हैं, लेकिन जब उदार लोकतांत्रिक भारत के इस विचार को पश्चिम बंगाल में दूषित किया जा रहा है तो वे आसानी से अपनी आँखें और कान बंद कर लेते हैं।”

‘संयमित रही बीजेपी, टीएमसी मर्यादा भूली’

शुभेंदु ने जीत के नशे में मर्यादा भूलने वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस को असम और पुदुचेरी में एनडीए की जीत का उदाहरण दिया, जहाँ बीजेपी की जीत के बावजूद ऐसी कोई हिंसा नहीं हुई। उन्होंने कहा, “जब टीएमसी चुनाव में हार जाती है, तो वे ईवीएम को दोष देने का कोई मौका नहीं छोड़ती है। क्या हमने सुना कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने ईवीएम को दोष दिया है?”

दौरान बार-बार चुनाव आयोग और केंद्रीय सुरक्षा बलों पर निशाना साधने के लिए भी ममता बनर्जी की पार्टी को लताड़ लगाते हुए लिखा है, “इस बार टीएमसी ने चुनाव आयोग और केंद्रीय बलों के खिलाफ एक आक्रामक अभियान चलाया। लेकिन, अगर मुझे ठीक से याद है, तो टीएमसी ही हमेशा चरणबद्ध चुनाव चाहती थी ताकि लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को प्रकट किया जा सके। टीएमसी हमेशा वोट डालने से पहले मतदाताओं के लिए उचित सुरक्षा चाहती थी। अब क्या बदल गया है? उत्तर स्पष्ट है।”

उन्होंने कहा है कि बीजेपी 3 से 77 सीटों तक पहुँची है और उनकी पार्टी बंगाल में लंबे समय तक टिकेगी और राज्य का गौरव वापस लाने के लिए संघर्ष करती रहेगी। टीएमसी की सत्ता और पैसे की ताकत का विरोध जारी रहेगी। साथ है कहा है कि अगर टीएमसी ऐसे ही हरकतें जारी रखती है तो उसकी दुर्गति भी लेफ्ट जैसी होगी।

‘माँ को बता देना एक दिन मुख्यमंत्री बनूँगा’: चाइल्ड आर्टिस्ट से असम के CM बने हिमंत बिस्वा सरमा की फैमिली से मिलिए

असम के नए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा अपने कॉलेजों के दिनों से ही आश्वस्त थे कि उन्हें एक दिन मुख्यमंत्री बनना है। मात्र 22 साल की उम्र में उन्होंने अपने इरादे जाहिर कर दिए थे। पत्नी रिनिकी भुइयाँ से सरमा ने शुरुआती दिनों ही कह दिया था, “अपनी माँ से बता दो कि मैं एक दिन मुख्यमंत्री बनूँगा।” रिनिकी उस समय मात्र 17 साल की थीं।

रिनिकी का जब सरमा के साथ प्रेम शुरू हुआ तो उन्होंने सवाल किया कि आखिर वह अपनी माँ को क्या बताएँगी कि हिमंत क्या करते हैं। इस पर उन्हें जवाब मिला, “मैं एक दिन असम का मुख्यमंत्री बनूँगा।” सरमा की बात ने रिनिकी को चौंकाया, मगर बाद में उन्हें महसूस हुआ कि जिससे वह शादी करने वाली हैं वह शख्स अपने लक्ष्य को लेकर इतना स्प्ष्ट है कि उसके पास राज्य के लिए सपने हैं।

रिनिकी की शादी हिमंत से 2001 में हुई। वह उस दौरान विधायक थे। बाद में वह मंत्री भी बने। 10 मई 2021 को जब सरमा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो निकी ने कहा, “उनका (हिमंत का) सपना पूरा हो गया।” वह बोलीं, “जब उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हुए देखा तो मुझे विश्वास ही नहीं हुआ कि यह सच है।” 

रिनिकी कहती हैं, “शपथ से एक दिन पहले मैंने हिमंत से पूछा कि मुख्यमंत्री पद का दावेदार कौन हैं तो उन्होंने जवाब दिया- मैं। एक पल के लिए लगा वह मेरी टाँग खींच रहे हैं।” वह बताती हैं, “हिमंत तो मेरे लिए हमेशा हिमंत ही रहे। मैंने कभी उन्हें सीएम पद से जोड़कर नहीं देखा। मुझे ऐसा सोचने में समय लगेगा।”

सरमा की तारीफ करते हुए वे कहती हैं कि उन्होंने कोरोना में जैसे हालात सँभाला है, वो सराहनीय है। हालाँकि कोरोना का खत्म होना अभी दूर है, लेकिन वो इस लड़ाई को ईमानदारी से लड़ रहे हैं।

मालूम हो कि सरमा की पत्नी मीडिया उद्यमी हैं। दोनों के दो बच्चे हैं। 19 साल के नंदिल बिस्व सरमा और 17 साल की सुकन्या सरमा। हिमंत कॉलेज के दिनों से ही राजनीति में सक्रिय थे। उन्होंने कॉटन कॉलेज से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इसके बाद गवर्मेंट लॉ कॉलेज से एलएलबी कीऔर गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में पीएचडी की डिग्री ली।

असम में स्टूडेंट यूनियन से उन्होंने राजनीति की शुरुआत की। बाद में वह कॉन्ग्रेस में शामिल हुए। 2001, 2006 और 2011 में जलुकबारी से लगातार तीन बार विधायक निर्वाचित हुए। 2015 में उन्होंने भाजपा ज्वाइन की। 

2016 में कॉन्ग्रेस को राज्य में शिकस्त देने के बाद वह भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री बने और इस तरह सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़ते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री पद तक का सफर तय किया। उनकी माँ मृणालिनी देवी ने कहा कि उनके लिए मदर्स डे पर ये सबसे अच्छा तोहफा है।

दिलचस्प बात यह है कि हमेशा से राजनीति को लक्ष्य समझने वाले सरमा चाइल्ड आर्टिस्ट भी रहे हैं। एक मशहूर गाने में उन्होंने हाथी पर बैठकर असमिया मूवी में एक्टिंग की थी। कॉलेज तक पहुँचते पहुँचते वह वाद-विवाद में भी इतने निपुण हो गए थे कि कई सालों तक उन्हें डिबेट प्रतियोगिताएँ जीतीं। आज उनके हाथ में अगले पाँच साल के लिए असम राज्य की कमान है।

टिकरी बॉर्डर पर किसानों के टेंट में गैंगरेप: पीड़िता से योगेंद्र यादव की पत्नी ने भी की थी बात, हरियाणा जबरन ले जाने की थी खबर

टिकरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन के बीच एक 26 साल की युवती का यौन उत्पीड़न हुआ और किसान नेता योगेंद्र यादव इस पर चुप रहे। 8 मई को जब युवती के पिता ने इस बाबत थाने में शिकायत दी तब पता चला कि यादव को लड़की के साथ हुए दुष्कर्म का पहले से अंदाजा था।

इसके बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यादव ने अपने ऊपर लग रहे आरोपों पर सफाई दी। उन्होंने स्वीकारा कि उन्हें पता था लड़की के साथ कुछ गलत हुआ है। यादव ने कहा कि चुनाव के मद्देनजर किसान सोशल आर्मी की ओर से 1 अप्रैल को कुछ सदस्य बंगाल पहुँचे। वहाँ उन्हें लड़की मिली जिसने प्रदर्शन में शामिल होने की इच्छा जाहिर की। 

यादव के मुताबिक, शीर्ष नेताओं को इसकी जानकारी तक नहीं थी। 18-19 अप्रैल को जब वह बीमार हुई, उसे दवाइयाँ दी गई।उसमें कोविड के लक्षण थे। उसे अस्पताल ले जाया गया। 22-23 अप्रैल तक उसकी हालत बिगड़ती रही। यादव के अनुसार, 24 तारीख को जाकर उनको बंगाल से आई युवती का पता चला, वो भी तब जब उसके पिता ने उन्हें मदद के लिए संपर्क किया।

यादव स्वीकार करते हैं कि उन्होंने अपनी बांग्ला भाषी पत्नी को लड़की से बात करने को कहा, जहाँ लड़की ने उन्हें अपने शोषण की हल्की-फुल्की हिंट दी। 25 अप्रैल को यादव ने खुद उसको संपर्क किया लेकिन लड़की के पिता ने कहा कि उसे कहीं और ले जाया गया है। ये जानने के बाद यादव ने लड़की को फोन किया और उससे बात की।

यादव कहते हैं, “चूँकि मैं बांग्ला थोड़ी बोलता हूँ, मैंने उससे पूछा कि क्या उसे ले जाने वाले लोग अच्छे लोग हैं, उसने कहा कि नहीं। मुझे संदेह हुआ। मैंने उसे उन लोगों से बात करवाने को कहा। जब मैंने उनके साथ बात की, तो अनिल और अनूप कार में थे। मैंने उनसे पूछा कि वे उसे कहाँ ले जा रहे हैं। उन्होंने मुझे सूचित किया कि वे उसे अपने पिता के पास बंगाल ले जा रहे हैं।”

यादव कहते हैं कि उन्हें उन दोनों ने कहा कि वह आगरा क्रॉस कर गए हैं। हालाँकि जब लोकेशन भेजने की बात आई तो लोकेशन हरियाणा की निकली। उन्होंने दोबारा युवती को फोन किया और दोनों से कहा कि अगर बात को गंभीरता से नहीं लिया तो एक्शन लिया जाएगा। इसलिए कार को तुरंत दिल्ली लेकर आओ।

25 अप्रैल को लड़की के दिल्ली लौटते ही योगेंद्र यादव ने उसे अस्पताल में भर्ती करवाने के इंतजाम किए। 29 अप्रैल को उसके पिता यहाँ आए, लेकिन 30 तारीख को लड़की ने दम तोड़ दिया। 1 मई को युवती के पिता योगिता नाम की महिला के साथ यादव के पास गए और कहा कि ये सब सिर्फ कोविड के कारण नहीं हुआ, बल्कि उससे ज्यादा के कारण हुआ।

अब यहाँ यादव स्वीकारते हैं कि 1 मई को उन्हें पता चल चुका था कि लड़की का यौन उत्पीड़न हुआ। 3 मई को प्रदर्शनस्थल पर कमेटी बैठी और सबने पीड़िता को अपना समर्थन दिया। उन्होंने किसान सोशल आर्मी का टेंट वहाँ से हटवा दिया, उनका बॉयकॉट किया। लेकिन सबकुछ जानने के बावजूद मामले की शिकायत पुलिस में नहीं की।

हाल में दैनिक भास्कर की खबर के बाद जब योगेंद्र यादव की भूमिका का खुलासा हुआ तो उनपर खुलकर मामले को दबाने के आरोप लगने लगे। ऐसे में उन्होंने जवाब दिया कि उन्होंने सोचा था कि मामले में शिकायत का पहला अधिकार घरवालों का है। टाइम्स नॉउ से बातचीत में योगेंद्र यादव ने कहा कि वे मामले को लेकर स्पष्ट थे। परिवार का अधिकार था कि वह कानून के पास जाए। अगर परिवार इस संबंध में शिकायत नहीं करता तो वे लोग करवाते।

उल्लेखनीय है कि 30 अप्रैल को लड़की की मृत्यु के एक हफ्ते बाद तक उसे शहीद कहकर किसान आंदोलन को तूल दिया जा रहा था। लेकिन 8 मई को बहादुरगढ़ में जब लड़की के पिता ने उसके यौन शोषण की शिकायत दी तो सारी हकीकत खुली। शिकायत में 6 लोगों के नाम हैं- अनिल मलिक, अनूप सिंह छनौत, अंकुर सांगवान, कविता आर्या, जगदीश ब्रार और योगिता सुहाग। इनमें से अनिल और अनूप पर लड़की के साथ दुष्कर्म करने की बात सामने आई है। पुलिस ने इनके विरुद्ध आईपीसी की धारा 120बी, 342, 354,365, 376D और 506 मुकदमा दर्ज किया है।