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राजदीप की ‘गिद्ध पत्रकारिता’: दिल्ली दंगों की आरोपित नताशा के बचाव में उतरे, लिया उनकी पिता के मौत का सहारा

फरवरी 2020 में दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों की साजिशकर्ता नताशा नरवाल के पिता महावीर नरवाल की कोरोना वायरस संक्रमण से मृत्यु के एक दिन बाद पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने नताशा के खिलाफ लगे आरोपों की गंभीरता को नजरअंदाज करते हुए नताशा की हिरासत को मानवीय त्रासदी करार दिया और न्याय व्यवस्था पर भी प्रश्न उठाया।

इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने सोमवार (10 मई) को ट्वीट करके नताशा नरवाल की हिरासत को मानवीय त्रासदी बताते हुए कहा कि नताशा का जेल में रहना बताता है कि अपराधिक न्याय व्यवस्था अपनी दिशा खो चुकी है।

राजदीप सरदेसाई के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

वामपंथी प्रोपेगंडा वेबसाइट द वायर के सिद्धार्थ वरदाराजन ने भी नताशा के पिता की मृत्यु का उपयोग करते हुए UAPA के तहत जेल में बंद नताशा को बेकसूर कहा और दिल्ली पुलिस, पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को धमकी दी कि ‘सब याद रखा जाएगा।’  

सिद्धार्थ वरदाराजन के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

हालाँकि सोमवार (10 मई) को ही दिल्ली उच्च न्यायालय ने नताशा नरवाल के पिता महावीर नरवाल की मृत्यु हो जाने के कारण 3 हफ्ते की अंतरिम जमानत दी है और दिल्ली पुलिस ने भी इस जमानत का कोई विरोध नहीं किया लेकिन नताशा के पिता की मृत्यु के बाद से ही वामपंथी पत्रकार और एक्टिविस्ट नताशा के गंभीर अपराधों पर पर्दा डालने के लिए उसके पिता महावीर नरवाल की मृत्यु का उपयोग कर रहे हैं।   

दिल्ली के सीएए और हिन्दू विरोधी दंगे और नताशा नरवाल का रोल :  

24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में शुरू हुए हिंसक दंगों की साजिश के आरोप में वामपंथी समूह पिंजरा तोड़ की कार्यकर्ता नताशा नरवाल और देवांगना कालिता को 23 मई को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार किया गया था। नताशा दिल्ली के सीलमपुर में हुए सीएए विरोधी दंगों की साजिशकर्ता थी। पिछले साल ही कोर्ट में बताया गया था कि नताशा 16 और 17 फरवरी को हुई उस मीटिंग का हिस्सा थी जिसमें सीएए विरोधी दंगों की साजिश रची गई और हिंसा को भड़काने के एजेंडा तय किया गया।

सबूतों और गवाहों पर विचार करते हुए कोर्ट ने माना था कि नताशा नरवाल दिल्ली दंगों की दोषी है उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। हिंसा और सड़कों को जाम कर देने के कारण ही पुलिस पर हमले हुए और आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई भी प्रभावित हुई। हिंसा की गंभीरता को देखते हुए ही नताशा नरवाल पर UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया था।

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के नाम पर शुरू हुआ आंदोलन जल्दी ही हिन्दू विरोधी हिंसा में बदल गया। 24 फरवरी को शुरू हुए हिन्दू विरोधी दंगों में लगभग 53 लोग मारे गए थे जिनमें आईबी अधिकारी अंकित शर्मा और उत्तराखंड के दिलबर नेगी जैसे कई हिन्दू शामिल थे। दंगों में 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। इन हिन्दू विरोधी दंगों में भीड़ ने हिंदुओं को बड़ा नुकसान पहुँचाया था।   

इन दंगों में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने चार्जशीट दाखिल की थी। जिसमें दिल्ली दंगों की पूरी योजना से लेकर इसके प्रमुख सजिशकर्ताओं के नाम भी शामिल थे। इन हिन्दू विरोधी दंगों के सजिशकर्ताओं में आम आदमी पार्टी के काउन्सलर ताहिर हुसैन, उमर खालिद, शरजील इमाम, नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और कॉन्ग्रेस नेता इशरत जहाँ जैसे नाम शामिल हैं।

यहाँ ध्यान दिया जाना चाहिए कि दंगों पर दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के बाद एनडीटीवी और द क्विंट जैसे वामपंथी मीडिया समूहों ने दंगों के साजिशकर्ताओं का भरपूर बचाव किया था और दिल्ली दंगों पर भाजपा नेता कपिल मिश्रा के खिलाफ प्रोपेगंडा फैलाने का कार्य किया था। ऑपइंडिया ने दिल्ली दंगों पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी जो ईबुक के रूप में उपलब्ध है।

‘तारक मेहता…’ की बबीता ने माँगी माफी, जाति-विशेष के लिए वीडियो में यूज किया था आपत्तिजनक शब्द

टीवी सीरियल ‘तारक मेहता का उल्‍टा चश्‍मा’ में बबीता का क‍िरदार न‍िभाने वालीं एक्‍ट्रेस मुनमुन दत्ता विवादों में घिर गई हैं। दरअसल, हाल ही में उन्होंने अपने एक वीडियो में दलित समुदाय के लिए जातिसूचक शब्‍द का इस्‍तेमाल क‍िया, जिसके चलते वह नेटिजन्स के निशाने पर आ गईं। हालाँकि, सोशल मीडिया पर घिरने के बाद एक्‍ट्रेस ने अब माफी माँग ली है।

सोशल मीडिया पर मुनमुन दत्ता का यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह अपने यूट्यूब डेब्यू और अपनी स्किन को लेकर कहती हैं कि वो किसी @# की तरह नहीं दिखाना चाहती हैं। इस कमेंट पर उन्हें सोशल मीडिया पर घेर लिया गया।

वीडियो में वह कहती नजर आ रही हैं, “मेरे पास लिप टिंट है, जिसे मैंने अपने चेहरे पर ब्लश की तरह लगा लिया है, क्योंकि मैं बहुत जल्द यूट्यूब पर अपना डेब्यू करने वाली हूँ। मैं अच्छा दिखना चाहती हूँ, किसी @# की तरह नहीं दिखना चाहती हूँ।” एक्ट्रेस ने जिस अंदाज में इस वीडियो में जाति सूचक शब्द का इस्तेमाल किया है, वो अब चर्चा में है।

इसके तुरंत बाद, सोशल मीडिया यूजर्स ने ट्विटर पर #ArrestMunmunDutta को ट्रेंड करना शुरू कर दिया। उन्होंने माँग की कि एक्ट्रेस के खिलाफ SC/ST एक्ट लगाया जाए। हालाँकि इसके बाद दत्ता ने अपने वीडियो से संबंधित भाग को हटा दिया।

अपने इस वीडियो पर माफी माँगते हुए एक्ट्रेस ने ट्विटर पर एक नया पोस्ट शेयर किया है। उन्‍होंने ल‍िखा, ”यह एक वीडियो के संदर्भ में है, ज‍िसे मैंने कल पोस्‍ट किया था, जहाँ मेरे द्वारा इस्‍तेमाल क‍िए गए एक शब्‍द का गलत अर्थ लगाया गया है। यह अपमान, धमकी या क‍िसी की भावनाओं को चोट पहुँचाने के इरादे से कभी नहीं कहा गया था। मेरी भाषा के कारण, मुझे सही मायने में इस शब्‍द के अर्थ के बारे में गलत जानकारी थी। एक बार जब मुझे इसके अर्थ से अवगत कराया गया, तो मैंने तुरंत उस भाग को न‍िकाल द‍िया है।” उन्होंने हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषा में यह पोस्ट साझा किया है।

एक्‍ट्रेस ने आगे ल‍िखा, “मेरा हर जाति, पंथ व ल‍िंग से हर एक व्‍यक्ति के ल‍िए अत्‍यंत सम्‍मान है और समाज या राष्‍ट्र में उनके अपार योगदान को मैं स्‍वीकार करती हूँ। मैं ईमानादारी से हर एक व्‍यक्ति से माफी माँगना चाहती हूँ, जो शब्‍द के उपयोग से अनजाने में आहत हुए हैं और मुझे उसके लिए खेद है।

बता दें कि मुनमुन दत्ता पिछले 10 सालों से टीवी सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ का हिस्सा रही हैं। उन्हें दर्शक बेहद पसंद करते हैं। एक्ट्रेस ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की थी, जिसके बाद उन्होंने साल 2006 में कमल हासन की फिल्म ‘मुंबई एक्सप्रेस’ से बॉलीवुड में कदम रखा था।

ट्विटर ने कर दिया था जम्मू-कश्मीर के LG मनोज सिन्हा के ऑफिस का अकाउंट सस्पेंड, शिकायत के बाद किया चालू

नोट: शिकायत के बाद जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा के ऑफिस का अकाउंट फिर से चालू कर दिया गया है।

ट्विटर ने सोमवार (10 मई) को जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर या उपराज्यपाल के ऑफिस का अधिकारिक ट्विटर हैंडल @officeoflgjandk सस्पेंड कर दिया।

हालाँकि राज भवन के एक अज्ञात अधिकारी द्वारा रिपब्लिक न्यूज को यह बताया गया कि ट्विटर को सूचना दे दी गई है कि यह अकाउंट जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का अकाउंट था।

संबंधित अधिकारी ने ट्विटर द्वारा इस मामले का संज्ञान लिए जाने की संभावना व्यक्त की है और यह उम्मीद की है कि यह निर्णय किसी कन्फ्यूजन में लिया गया है।

कोरोना संक्रमित आजम खान की तबीयत अचानक से बिगड़ी, ICU में शिफ्ट: लगातार गिर रहा ऑक्सीजन लेवल

लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती समाजवादी पार्टी के नेता और रामपुर के सांसद आजम खान की तबीयत अचानक बिगड़ने के कारण उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया है। उनका ऑक्सीजन लेवल तेजी से गिर रहा था जिसकी वजह से उन्हें ICU में भर्ती करना पड़ा है। बता दें कि आजम खान सीतापुर जिला कारागार में बंद थे जहाँ वह कोरोना वायरस संक्रमित हुए थे और तबीयत खराब होने के कारण उन्हें कल (09 मई) ही सीतापुर से लखनऊ लाया गया था।  

आजम खान अपने बेटे अब्दुल्ला के साथ ही सीतापुर जिला कारागार में बंद थे। उनके बेटे अब्दुल्ला भी कोरोना वायरस संक्रमण के शिकार हो गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार आजम खान को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया था जहाँ उन्हें प्रति मिनट 4 लीटर ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही थी लेकिन ऑक्सीजन का स्तर लगातार घटता जा रहा था जिससे उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया।

अस्पताल ने सूचना दी है कि अब उन्हें 10 लीटर ऑक्सीजन प्रति मिनट के प्रेसर से दी जा रही है। हालाँकि मेदांता में ही भर्ती उनके बेटे अब्दुल्ला की तबीयत स्थिर बताई जा रही है।

सपा सांसद आजम खान बेटे सहित फरवरी 2020 से ही जेल में हैं। हालाँकि उनकी पत्नी भी जेल में थीं लेकिन उन्हें बाद में जमानत मिल गई थी। आजम खान पर रामपुर में अवैध रूप से जमीन पर कब्जा करने और फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने का आरोप है।  

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिला कारागार में बंद अखिलेश सरकार के पूर्व मंत्री आजम खान 29 अप्रैल को कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए। इसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए लखनऊ के केजीएमयू ले जाने का निर्णय लिया गया लेकिन आजम खान ने सड़क के रास्ते जाने से साफ इनकार कर दिया था। हालाँकि बाद में तबीयत बिगड़ने पर रविवार (09 मई) को आजम खान लखनऊ के मेदांता अस्पताल जाने के लिए तैयार हो गए थे।  

छत्तीसगढ़: कॉन्ग्रेस नेता के भतीजे की शादी में जमकर थिरके सैकड़ों बाराती, उड़ी कोरोना नियमों की धज्जियाँ, Video वायरल

छत्तीसगढ़ में कोरोना की बढ़ती रफ्तार के बीच कोंडागाँव से एक शादी की वीडियो सामने आई है। ये वीडियो वहाँ के विधायक और प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम के भतीजे की शादी की है। इसमें देख सकते हैं गाजे-बाजे के साथ सारी तैयारियाँ ऐसी हैं जैसे राज्य में कोरोना का नामोंनिशान ही न हो। 

वीडियो में 100-150 लोग नजर आ रहे हैं। इनमें अधिकांश को बिना मास्क के थिरकते साफ देखा जा सकता है। इसके अलावा शादी के कार्ड में भी देख सकते हैं कि प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम का नाम और ब्रैकेट में उनके विधायक पद का उल्लेख किया गया है।

शादी के कार्ड में मोहन मरकाम के नाम का भी जिक्र है।
शादी का कार्ड (साभार: दैनिक भास्कर)

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को भाजपा नेता और पूर्व मंत्री लता उसेंडी ने सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा कि ये नियमों की अवहेलना है। उन्होंने मोहन मरकाम पर पद और ताकत का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और दावा किया कि शादी में विधायक भी मौजूद थे। अब शादी की यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

जानकारी के मुताबिक, कॉन्ग्रेस नेता के भतीजे की शादी 5 मई को थी। इसके चलते शहर के कई घरों में इस शादी का निमंत्रण भी गया। हालाँकि 28 अप्रैल को इसी जिले के कलेक्टर ने आदेश जारी किया कि 5 मई तक राज्य में शादी नहीं होंगी। अन्य जितनी शादियाँ थीं सब पर रोक लग गई। लेकिन दिलचस्प बात ये है कि कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे की शादी तय समय तय तारीख पर ही संपन्न हुई।

गौरतलब है कि राज्य में यदि कोरोना संक्रमण के फैलने की बात करें तो इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि केवल 9 मई को वहाँ 9 हजार से ज्यादा मामले सामने आए। इसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 8 लाख 51 हजार 476 संक्रमित हो गई है। वहीं सक्रिय केस अब 1,26,547  हैं।

‘राहुल वोहरा को ऑक्सीजन की जगह खाली मास्क लगाकर चले गए’: दिल्ली के राजीव गाँधी अस्पताल की लापरवाही उजागर, Video

मशहूर यूट्यूबर और कंटेंट क्रिएटर राहुल वोहरा की 9 मई को कोरोना संक्रमण के कारण मौत के बाद अब उनकी पत्नी ज्योति ने एक वीडियो साझा किया है। इस वीडियो के साथ ज्योति तिवारी ने अपने पति राहुल वोहरा की मौत के लिए राजीव गाँधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल को जिम्मेदार ठहराया है। 

अपने पोस्ट में ज्योति ने लिखा, “हर राहुल को इंसाफ मिले। मेरा राहुल चला गया, ये सबको पता है। पर कैसे गया, ये किसी को नहीं पता। राजीव गाँधी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, ताहिरपुर दिल्ली। इस तरह से इलाज किया जाता है वहाँ। उम्मीद करती हूँ कि मेरे पति को इंसाफ मिलेगा। एक और राहुल इस दुनिया से नहीं जाना चाहिए।”

ज्योति द्वारा शेयर की गई वीडियो में राहुल बेहद कमजोर दिख रहे हैं। साफ पता चलता है कि उन्हें साँस लेने में दिक्कत है। वे वीडियो में ऑक्सीजन मास्क दिखाते हुए कहते हैं, “आज इस मास्क की बहुत कीमत है, बिना इसके मरीज छटपटा जाता है, लेकिन इसमें कुछ नहीं आ रहा। कुछ भी नहीं आ रहा इसमें। अटेंडेट आई थी, मैंने उसको बोला लेकिन वो बस एक बोतल में पानी भरकर चले जाते हैं।”

राहुल ने वीडियो में कहा कि अटेंडेंट को आवाज लगाने पर वे एक-एक, डेढ़-डेढ़ घंटे बाद आते हैं। मास्क में ऑक्सीजन न आने पर मदद के लिए किसी अटेंडेंट को बोलो तो वह एक मिनट में आने का बोलकर गायब हो जाता है। उनको ये नहीं समझ आ रहा है कि पानी की बोतल में पानी कम रखना है और फ्लो बढ़ाना है।

बता दें कि राजीव गाँधी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, ताहिरपुर का दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के साथ साल 2019 में उद्घाटन किया था। ये अस्पताल दिल्ली सरकार चलाती थी।

अस्पताल से निराश होकर राहुल ने कुछ समय पहले खुद भी पोस्ट किया था। उन्होंने लिखा था कि वो कोविड पॉजिटिव हैं और एडमिट हैं। लेकिन 4 दिन से उनकी हालत में सुधार नहीं है। उन्होंने पोस्ट करके लोगों से पूछा था कि क्या कोई अस्पताल है जहाँ उन्हें ऑक्सीजन बेड मिल जाए।

दरअसल, जिस समय एक्टर ने यह पोस्ट किया उस समय उनका ऑक्सीजन लेवल लगातार गिर रहा था और उन्हें देखने वाला कोई नहीं था। राहुल ने पोस्ट में बताया था कि वो बहुत मजबूरी में अपना पोस्ट लिख रहे हैं, क्योंकि उनके घरवालों से कुछ नहीं संभल रहा।

इसके अलावा अपने आखिरी संदेश में राहुल ने लिखा था, “मुझे भी ट्रीटमेंट अच्छा मिल जाता तो मैं भी बच जाता। तुम्हारा राहुल वोहरा।” अपनी डिटेल्स देते हुए आखिर में उन्होंने कहा था, “जल्द जन्म लूँगा और अच्छा काम करूँगा। अब हिम्मत हार चुका हूँ।”

सीतलकुची हिंसा: 6 CISF जवानों को समन, शुभेंदु बोले- CID ममता बनर्जी के निर्देश पर काम कर रही, यह उनके दायरे से बाहर

पश्चिम बंगाल में चौथे चरण के चुनाव (10 अप्रैल 2021) के दौरान कूचबिहार जिले के सीतलकुची में सेंट्रल फोर्स की फायरिंग में चार लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में एक महीने बाद सोमवार (10 मई 2021) को पश्चिम बंगाल की सीआईडी ने सीआरपीसी की धारा 160 के तहत CISF के 6 जवानों को समन जारी किया है, जिसमें दो अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि थाने में तैनात एएसआई रैंक के दो अधिकारियों सुब्रत मंडल और राफा बर्मन को पूछताछ के लिए मंगलवार को बुलाया गया है। वहीं, CISF के 6 जवानों को समन भेजने पर बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि CID जबरदस्ती राजनीति से प्रेरित होकर काम कर रही है, उनको बुलाने का कोई अधिकार नहीं है।

नंदीग्राम से विधायक शुभेंदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में चुना गया है। उन्होंने कहा कि मैं राज्य के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए काम करूँगा। मैं इसके सकारात्मक प्रयासों के लिए सरकार की मदद करूँगा, लेकिन राज्य में हो रही हिंसा के खिलाफ अपनी आवाज भी उठाऊँगा।

शुभेंदु अधिकारी ने सीतलकुची मामले पर कहा कि यह CID के दायरे में नहीं आता है, क्योंकि CRPF और CISF गृह मंत्रालय के अंतर्गत आता है। CID ममता बनर्जी और TMC के निर्देश पर काम कर रही है।

पश्चिम बंगाल में चौथे चरण के चुनाव के दौरान कूच बिहार जिले के सीतलकुची में सेंट्रल फोर्स की फायरिंग में चार लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना को लेकर यह भी कहा गया था कि सीआईएसएफ के जवानों ने अपनी आत्मरक्षा के लिए फायरिंग की थी। पश्चिम बंगाल में तीसरी बार मुख्यमंत्री बनते ही ममता बनर्जी ने इस मामले की जाँच के लिए SIT का गठन किया था।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में अप्रैल 10, 2021 को विधानसभा चुनाव के चौथे चरण में 44 सीटों पर मतदान हो रहे थे। इस दौरान कूच बिहार में फायरिंग में 4 लोग मारे गए। कूच बिहार के सीतलकुची में वोटिंग करने के लिए मतदान केंद्र पर लाइन में खड़े एक 18 साल के युवक की भी हत्या कर दी गई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार हिंसक भीड़ ने केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बलों (सीआईएसएफ) की एक टीम पर हमला कर हथियार छीनने का प्रयास भी किया था, जिसके बाद आत्मरक्षा में सीआईएसएफ की टीम को मजबूरी में ओपन फायर करना पड़ा था।

इस फायरिंग में चार उपद्रवियों मोनिरुज्जमान, हमीदुल मियाँ, नूर अल्मा मियाँ और समीउल हक की मौत हो गई थी। हालाँकि, मामले को राजनैतिक रंग देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि केन्द्रीय बलों ने वोटिंग के लिए लाइन में खड़े व्यक्तियों पर गोली चलाई है।

बंगाल के गवर्नर का त्राहिमाम संदेश: हिंसा पर ममता सरकार नहीं दे रही जवाब, प्रभावित इलाकों में अब खुद जाएँगे

पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद भड़की हिंसा को लेकर राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने एक बार फिर चिंता जताई है। उन्होंने राज्य की ममता बनर्जी सरकार पर इस संबंध में जवाब नहीं देने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि प्रशासनिक असहयोग के बावजूद वे हिंसा प्रभावित इलाकों के दौरे पर जाएँगे।

राज्यपाल ने कहा कि चुनावी नतीजों के बाद राज्य के हालात बेहद चिंताजनक हैं। राजनीतिक बदले की हिंसा, आगजनी, लूट की घटनाएँ अब डराने-धमकाने और जबरन वसूली तक पहुँच गई है। राज्यपाल ने यह बात ऐसे समय में कही है जब सोमवार (10 मई 2021) को ही राज्य में 43 मंत्रियों ने शपथ ली है। इससे पहले उन्होंने 5 मई को भी हिंसा पर चिंता जताई थी, जब ममता बनर्जी ने लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

राज्यपाल धनखड़ ने कहा है कि अपने संवैधानिक दायित्वों के तहत उन्होंने प्रभावित इलाकों का दौरान करने का फैसला किया। इस संबंध में राज्य सरकार से आवश्यक इंतजाम करने को कहे। लेकिन, राज्य सरकार की प्रतिक्रिया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थी। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद वे आने वाले दिनों में हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में जाएँगे।

उन्होंने कहा कि हिंसा को लेकर राज्य सरकार के रवैए को उनसे बेहतर कोई नहीं जानता। कोई जवाबदेही नहीं है। तीन मई को इस संबंध में राज्य के डीजीपी, कोलकाता के पुलिस कमिश्नर और एडिशनल होम सेक्रेटरी से रिपोर्ट तलब की थी, जो अब तक नहीं मिली है। अधिकारियों ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी होम को रिपोर्ट भेजी, पर उन्होंने आज तक ये रिपोर्ट मुझे फॉरवर्ड नहीं की है। राज्यपाल ने कहा कि जमीनी हालात बेहद खराब हैं, लेकिन सरकार का रवैया ऐसा है जैसे कोई हिंसा ही नहीं हुई हो।

हेलिकॉप्टर माँगा तो कहा-पायलट के साथ दिक्कत है

राज्यपाल का कहना है कि उन्होंने प्रभावित इलाकों में जाने के लिए हेलिकॉप्टर की माँग की थी। लेकिन इसका कोई जवाब नहीं मिला। अनाधिकारिक तौर पर उन्हें बताया गया कि हेलिकॉप्टर और पायलट्स के साथ कुछ समस्या है। उन्होंने पूछा कि क्या संवैधानिक मुखिया को सूचना देने का ये तरीका होता है। साथ ही यह भी कहा कि कोलकाता पुलिस कमिश्नर ने जो रिपोर्ट उन्हें देने के लिए चीफ सेक्रेटरी होम को भेजी थी, वह भी उन्हें नहीं दी गई।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे दो मई को आए थे। नतीजों में तृणमूल कॉन्ग्रेस की जीत तय होते ही राजनीतिक खून खराबे का नया दौर शुरू हो गया था। टीएसमी के गुंडों पर विपक्षी दलों खासकर बीजेपी के कार्यकर्ताओं, उनके घरों और दफ्तरों को निशाना बनाने का आरोप है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा पार्टी के 14 कार्यकर्ताओं की हत्या होने की बात कहे जाने बाद से भी पार्टी की राज्य ईकाई कुछ और कार्यकर्ताओं की हत्या का दावा कर चुकी है। इस हिंसा में पिछले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी 16 लोगों की मौत की पुष्टि की थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय की चार सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग टीम भी राज्य का दौरा कर चुकी है।

मुकेश अंबानी के RIL ने दिया कोविड रिलीफ में सर्वाधिक योगदान: हॉस्पिटल, ऑक्सीजन, पीपीई किट से लेकर मास्क का निर्माण

मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडिया लिमिटेड (RIL) और रिलायंस फाउंडेशन भारत में कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान चल रहे राहत कार्यों में सर्वाधिक योगदान देने वाले औद्योगिक घरानों में से एक हैं।

IANS के द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के लिए जामनगर और मुंबई में RIL ने अब तक 1,875 बेड स्थापित किए हैं। भारत का पहला 100 बिस्तरों वाला कोविड केयर इलाज केंद्र भी मुकेश अंबानी के रिलायंस समूह द्वारा अप्रैल 2020 में स्थापित किया गया था। इसके अलावा RIL ने मुंबई, सूरत और अन्य जगहों पर क्वारंटीन और आइसोलेशन सुविधा तैयार की है। रिलायंस फाउंडेशन ने मुंबई में हिन्दू हृदय सम्राट बालासाहब ठाकरे ट्रामा केयर अस्पताल में 10 बिस्तरों वाला एक डायलिसिस सेंटर भी स्थापित किया है।

देश में ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए भी रिलायंस अग्रणी रूप से सहायता कर रहा है। RIL इस समय देश का सबसे बड़ा ऑक्सीजन उत्पादक है जो प्रतिदिन 1,000 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन कर रहा है। यह भारत के कुल ऑक्सीजन उत्पादन का लगभग 11% है एवं इससे 100,000 मरीजों को रोजाना मुफ़्त में ऑक्सीजन मिल रही है। आयात पर निर्भरता कम करने के लिए रिलायंस समूह अपने औद्योगिक केंद्रों में 1 लाख पीपीई किट और मास्क का निर्माण कर रहा है।

दान की बात करें तो रिलायंस समूह पीएम केयर्स और अन्य सहायता फंड में अब तक 556 करोड़ रुपए दान कर चुका है। अपने अन्न सेवा मिशन के माध्यम से रिलायंस समूह ने 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 80 जिलों में 5.5 करोड़ खाद्य पैकेट मुहैया कराए हैं। रिलायंस द्वारा मई-जून 2021 तक 2 करोड़ खाद्य पैकेट मुहैया कराने का लक्ष्य रखा गया है।

लाखों मास्क, पीपीई किट और कोविड अवेयरनेस बुकलेट के अलावा रिलायंस 18 राज्यों के 249 जिलों में कोविड सेवा में लगे 14,000 एम्बुलेंस और वाहनों को 5.5 लाख लीटर से अधिक मुफ़्त ईधन उपलब्ध करा चुका है।

रिलायंस के अतिरिक्त अन्य औद्योगिक समूह भी कर रहे सहायता :

रिलायंस के अतिरिक्त भी अन्य औद्योगिक समूह भी कोरोना वायरस संक्रमण के विरुद्ध इस लड़ाई में अपना योगदान दे रहे हैं। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन और विप्रो ने 1,125 करोड़ रुपए की सहायता दी है। इसके अलावा पुणे स्थित आईटी केंद्र को 450 बिस्तर वाले कोविड केयर अस्पताल में बदल दिया गया है। आईटी कंपनी इन्फोसिस ने भी 200 करोड़ रुपए का दान दिया है। साथ ही इन्फोसिस ने लगभग 1 मिलियन गरीबों और प्रवासी मजदूरों के लिए 2.4 मिलियन खाद्य पैकेट्स की व्यवस्था भी की है और पुलिस और फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए मास्क और सैनिटाइजर का प्रबंध भी किया है।

वेदांता समूह ने भी 201 करोड़ रुपए की सहायता की घोषणा की है जिसमें से 101 करोड़ रुपए पीएम केयर्स फंड को और शेष राशि फ्रंटलाइन वर्कर्स, दिहाड़ी मजदूरों और व्यापारिक सहयोगियों के कर्मचारियों को सहायता के रूप में दिए जाएँगे। इसके अलावा वेदांता ने ‘मील्स फॉर ऑल’ स्कीम भी लॉन्च की है जिसके अंतर्गत लाखों दिहाड़ी मजदूरों और गरीबों को मुफ़्त में भोजन उपलब्ध कराया जाता है। 

फार्मास्युटिकल कंपनी सिपला ने भी 25 करोड़ रुपए का योगदान दिया है। इसमें से 9 करोड़ रुपए पीएम केयर्स फंड में दिए गए गए हैं। शेष राशि से डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के लिए ग्लव्स, मास्क और सैनिटाइजर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सिपला प्रवासी मजदूरों के लिए भी आवश्यक वस्तुओं, खाद्य पैकेटों और राशन किट की व्यवस्था कर रहा है।

‘ऑक्सीजन संकट के लिए मोदी सरकार नहीं, राज्य सरकारों को ठहराया जाना चाहिए जिम्मेदार’: BMC चीफ

भारत कोरोनो वायरस की दूसरी लहर से जूझ रहा है। कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में ऑक्सीजन की सप्लाई बेहद जरूरी हो गई है। दिल्ली, महाराष्ट्र समेत कई राज्य सरकारें ऑक्सीजन की कमी के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही हैं, लेकिन मुंबई बीएमसी चीफ इकबाल सिंह चहल ने कहा है कि ऑक्सीजन संकट के लिए केंद्र नहीं राज्य सरकारें जिम्मेदार हैं।

इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में चहल ने कहा कि केंद्र सरकार को देश में ऑक्सीजन संकट के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्यों को ऑक्सीजन के अपर्याप्त आवंटन के लिए दोषी ठहराया जाना चाहिए।

चहल ने कहा, “भारत सरकार को इन सबके लिए दोष नहीं दिया जाना चाहिए। अगर किसी को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, तो वह राज्य हैं।” चहल ने कहा कि देश के कई राज्य यह स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे कि उनके यहाँ कोरोना के कुल कितने मामले हैं। ऐसे में केंद्र उन्हें कैसे ऑक्सीजन आवंटित करता?”

‘सटीक ऑक्सीजन आवंटन के लिए केसों की सही संख्या बताएँ राज्य’

चहल ने तर्क देते हुए कहा कि केंद्र कोविड-19 मामलों की संख्या में भारी अंतर होने के कारण राज्यों को समान मात्रा में ऑक्सीजन कैसे आवंटित कर सकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र 6,000 मामले वाले राज्य और महाराष्ट्र को समान रूप से ऑक्सीजन का आवंटन नहीं कर सकता है, जहाँ रोज 60,000 नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अगर राज्य ठीक से जाँच करें, तो कोविड-19 मामलों की संख्या बहुत अधिक होगी। इसके अनुसार ही केंद्र सरकार उन्हें ऑक्सीजन आवंटित कर सकता है। लेकिन अगर वे ठीक से कोरोना के मामलों की रिपोर्ट नहीं करेंगे और कम मामले दिखाएँगे तो उनका ऑक्सीजन आवंटन उन मामलों की संख्या के अनुसार ही होगा, जिसे वे केंद्र को रिपोर्ट कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में हम केंद्र को इसका दोष नहीं दे सकते हैं।

‘अस्पतालों पर बेड बढ़ाने का दबाव बड़े शहरों में ऑक्सीजन संकट का जिम्मेदार’

यह पूछे जाने पर कि दिल्ली में निरंतर ऑक्सीजन संकट के पीछे क्या कारण हो सकता है। इस पर चहल ने बताया कि मुंबई और दिल्ली सहित कई बड़े शहरों में जब कोरोना के केस बढ़ते हैं, तब अस्पतालों पर बेड बढ़ाने के लिए दबाव डाला जाता है। हालाँकि, इस बात पर ध्यान नहीं दिया जाता है कि अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति सीमित है। चहल ने जोर देकर कहा कि जब कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हों ऐसी स्थिति में जंबो कोविड केंद्रों पर बेड बढ़ाए जाने चाहिए, जहाँ ऑक्सीजन की आपूर्ति का विस्तार किया जा सकता है।

बीएमसी कमिश्नर ने बताया कि 16-17 अप्रैल की रात को उनके पास खबर आई कि मुंबई में 6 अस्पतालों में ऑक्सीजन नहीं है। उन्होंने बताया कि इन अस्पतालों में 168 मरीज थे। इन्हें शिफ्ट कराने के लिए बीएमसी की ओर से रात को 1 बजे 5 बजे के बीच 150 एंबुलेंस लगाई गईं। सभी मरीजों को कोविड सेंटर लाया गया, जहाँ 3,600 बेड खाली थे। इनमें से 850 बेड ऑक्सीजन युक्त थे। बीएमसी सभी मरीजों की जान बचाने में सफल रही।

बीएमसी प्रमुख ने किया पूर्ण लॉकडाउन न लगाने के केंद्र के फैसले का समर्थन

चहल देश में पूर्ण लॉकडाउन लागू नहीं करने के केंद्र सरकार के फैसले से भी सहमत दिखे। उन्होंने तर्क दिया कि जिन राज्यों में कोरोना के कम मामले हैं, वे देशव्यापी लॉकडाउन का खामियाजा क्यों भुगतें। उन्होंने कोरोनो वायरस की दूसरी लहर से निपटने के लिए केंद्र के फैसले की सराहना की और राज्य सरकारों को आईना दिखाया।

बता दें कि ऑक्सीजन संकट के लिए जिम्मेदार राज्यों में एक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चहल का यह करारा जबाब है। दरअसल, महाराष्ट्र में कोरोना संकट के लिए ठाकरे सरकार शुरू से ही केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है। हालाँकि चहल ने अपने इंटरव्यू में उनके झूठ को बेनकाब कर दिया है।