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‘2015 से ही कोरोना वायरस को हथियार बनाना चाहता था चीन’, चीनी रिसर्च पेपर के हवाले से ‘द वीकेंड’ ने किया खुलासा: रिपोर्ट

दुनियाभर में कोरोना वायरस के कहर के बीच “द वीकेंड ऑस्ट्रेलियन” मैग्जीन ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। मैग्जीन ने 6 साल पहले 2015 के चीनी वैज्ञानिकों के रिसर्च पेपर के जरिए दावा किया है कि SARS कोरोना वायरस के जरिए चीन दुनिया के खिलाफ जैविक हथियार बना रहा था।

“द अननैचुरल ओरिजिन ऑफ सार्स एंड न्यू स्पीसीज ऑफ मैन-मेड वायरस टू जेनेटिक बायो वेपन” शीर्षक वाले इस शोध पत्र में चीनी वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य अधिकारियों ने भविष्यवाणी की थी कि किस तरह से तीसरे विश्व युद्ध में “जैविक हथियारों” का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें यह भी बताया गया है कि कैसे SARS कोरोनावायरस को “जेनेटिक हथियारों” के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें कृत्रिम रूप से हेरफेर करके मानव रोग वायरस में बदला जा सकता है। वैज्ञानिकों ने इस बात पर भी चर्चा की है कि इस वायरस को ऐसे हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसे पहले कभी नहीं देखा गया होगा।

रिसर्च पेपर की यह हैरान करने वाली जानकारी 6 साल पहले प्रकाशित हुई थी, लेकिन कोरोना के कारण उपजे वैश्विक संकट से यह अस्वाभिक रूप से समानता है। ऑस्ट्रेलियाई रणनीतिक संस्थान के कार्यकारी निदेशक पीटर जेनिंग्स ने डॉक्यूमेंट्स में “स्मोक गन” के रूप में इस रहस्य पर से पर्दा उठाया है। उन्होंने इस मामले में जोर देकर कहा, “मुझे लगता है कि यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होता है कि चीनी वैज्ञानिक कोरोना वायरस के अनेक रूपों को मिलिट्री वेपन के तौर पर इस्तेमाल करने के बारे में सोच रहे हैं। वे यह सोच रहे हैं कि इसे कहाँ डिप्लॉय किया जाय।”

कोरोना वायरस की स्वतंत्र जाँच से पीछे हट रहा चीन

जेनिंग्स कहते हैं, “इसे इस बात की संभावनाओं के बारे में जानने के लिए शुरू किया गया था कि वायरस का सैन्य इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर इसका फैलाव होता है तो इससे चीन को मदद मिलेगी। लेकिन हम इसके उलट हैं।” एएसपीआई के कार्यकारी निदेशक ने बताया कि कैसे कोरोना वायरस की उत्पत्ति की स्वतंत्र जाँच कराने से चीन बचता रहा है।

रिसर्च पेपर में पीएलए के समर्थन वाले कई लेखक थे

इस रिसर्च पेपर के 18 राइटर्स में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) से जुड़े वैज्ञानिक और हथियार विशेषज्ञ शामिल हैं। इसे साइबर वेरीफिकेशन एक्सपर्ट रॉबर्ट पॉटर ने वेरिफाई किया था। रॉबर्ट पॉटर ने इसको लेकर कहा था, “हम एक हाई कॉन्फिडेंस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि ये जेनुइन है। लेकिन अब यह किसी और पर निर्भर है कि यह कितना गंभीर है। इसे कुछ साल पहले ही ईजाद किया गया था अब चीन इसे निश्चित तौर पर हटाने की कोशिश करेगा। अब इसे कवर किया गया है।”

हालाँकि, रॉबर्ट पॉटर ने चीनी वैज्ञानिकों के रिसर्च पर चर्चा करने को लेकर संदेह व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह खुद से ही नहीं बना, बल्कि चीनी सरकार द्वारा इस पर कार्रवाई की गई थी। रॉबर्ट पॉटर आगे लिखते हैं, “यह हकीकत में बहुत ही दिलचस्प लेख है, जिसके जरिए यह दिखाया जा सके कि उनके वैज्ञानिक और शोधकर्ता क्या सोच रहे हैं।” जब कोरोना वायरस की उत्पत्ति के बारे में जानने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम ने चीन का दौरा किया था, तब इसका उल्लेख किया जाना चाहिए था।

वैज्ञानिकों ने डब्ल्यूएचओ की जाँच में खामियों की ओर किया इशारा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और चीनी विशेषज्ञ मिशन की संयुक्त टीम ने दावा किया है कि कोरोना वायरस दिसंबर 2019 से पहले चीन के वुहान प्रांत में था ही नहीं। बीते 4 मार्च को वैज्ञानिकों के एक समूह ने संयुक्त राष्ट्र को एक ओपेन लेटर लिखा था, जिसमें कोरोना वायरस के जाँच की वैज्ञानिक वैधता से समझौता किए जाने के बारे में जानकारी दी गई थी।

इस पत्र में 26 लोगों में अपने हस्ताक्षर किए थे, जिसमें वुहान कोरोना वायरस के उत्पत्ति की निष्पक्ष जाँच की माँग की गई थी। वैज्ञानिकों ने अफसोस जताया है कि वायरस की उत्पत्ति का स्थान महामारी के फैलने के एक साल बाद भी नहीं पता चल सका है। उन्होंने कहा, “हम यह आवश्यक मानते हैं कि महामारी की उत्पत्ति के बारे में सभी परिकल्पनाओं की पूरी तरह से जाँच की जाती है और राजनीतिक या अन्य संवेदनशीलता के संबंध में सभी आवश्यक संसाधनों तक पूरी पहुँच दी जाती है।”

वैज्ञानिकों का कहना है, “हमारे विश्लेषण के आधार पर जैसा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और चीनी अधिकारियों द्वारा बुलाई गई ग्लोबल स्टडी में पता चला है कि इस वायरस के प्राकृतिक उत्पत्ति का कोई सबूत नहीं हैं।” भविष्य की समस्याओं की तरफ इशारा करते हुए पत्र में कहा गया है कि वैज्ञानिक इस तथ्य के बारे में सार्वजनिक जागरूकता लाना चाहते हैं कि उस जाँच टीम में आधे चीनी नागरिक शामिल हैं, जिनकी वैज्ञानिक स्वतंत्रता सीमित हो सकती है।

MP में कोरोना कर्फ्यू के दौरान नमाज के लिए 2 मस्जिदों में जुटी भीड़: 2 मौलवियों और 200 अन्य के खिलाफ केस दर्ज

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के कारण मध्य प्रदेश में कोरोना कर्फ्यू लागू है जिसके कारण सभी प्रकार के सामूहिक आयोजनों पर पूर्णतः पाबंदी है। हालाँकि, एमपी के छतरपुर जिले में पाबंदियों के बाद भी 2 मस्जिद में सामूहिक नमाज पढ़ने का मामला सामने आया है। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो मौलवियों समेत 200 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

घटना एमपी के छतरपुर जिले से 23 किमी दूर नौगाँव की है। बताया जा रहा है कि नौगाँव में दो मस्जिदों, जामा मस्जिद और पल्टन मस्जिद में कोरोना कर्फ्यू लागू होने के बाद भी सैकड़ों लोगों ने नमाज पढ़ी। नौगाँव के थाना प्रभारी संजय बेदिया ने बताया कि इस प्रकार के सामूहिक आयोजनों पर पूर्णतः प्रतिबंध के कारण भी दोनों मस्जिदों में भीड़ इकट्ठा हुई।

जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुँचे और Covid-19 की गाइडलाइंस का उल्लंघन करने के लिए दो मौलवियों और 200 अन्य लोगों पर IPC की धारा 188, 270 एवं 271 के तहत मामला दर्ज किया गया। हालाँकि थाना प्रभारी बेदिया ने बताया कि पहले भी इन मस्जिदों में इसी प्रकार भीड़ जुटी थी लेकिन तब चेतवानी देकर इन लोगों को छोड़ दिया गया था लेकिन इस बार Covid-19 की गाइडलाइंस का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आपको बता दें कि एमपी के अलावा हाल ही में केरल के मुन्नार में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया जहाँ एक वार्षिक कार्यक्रम का हिस्सा बने चर्च ऑफ साउथ इंडिया (CSI) के 480 पादरियों को Covid-19 प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले 100 से ज्यादा पादरी कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे। इसके अलावा 2 पादरियों की मौत हो गई थी जबकि 5 गंभीर अवस्था में थे।

इसके अलावा हैदराबाद में ईद-उल-फितर से पहले चारमीनार बाजार के पास कोविड प्रोटोकॉल्स की खुलेआम धज्जियाँ उड़ती नजर आईं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दिखा कि कैसे बाजार में घूमने वाला कोई भी व्यक्ति महामारी को लेकर गम्भीर नहीं है। सोशल डिस्टेंसिंग तो दूर की बात है ज्यादातर लोग बिना मास्क के ही नजर आए।

SC ने गठित की टास्क फोर्स: देश भर में ऑक्सीजन की करेगी मॉनिटरिंग, दिल्ली में ऑक्सीजन ऑडिट को दी मंजूरी

शनिवार (08 मई) को सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में मेडिकल ऑक्सीजन की माँग और उसके वितरण के लिए एक 12 सदस्यीय राष्ट्रीय टास्क फोर्स के गठन का आदेश दिया है। यह टास्क फोर्स देश भर में ऑक्सीजन की उपलब्धता और उसके उचित वितरण के अलावा अत्यावश्यक दवाओं और चिकित्सा सुविधाओं पर भी अपनी सिफारिश देगी।

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण और साथ ही बढ़ती चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता को ध्यान में रखकर सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने 12 सदस्यीय राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन किया है जिसमें 10 डॉक्टर, केंद्र का कैबिनेट सचिव और स्वास्थ्य मंत्रालय का गृह सचिव भी शामिल है। केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिव को टास्क फोर्स का कन्वेनर बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट की इस बेंच में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के अलावा जस्टिस एमआर शाह भी शामिल रहे। टास्क फोर्स का प्रारंभिक कार्यकाल 6 महीने का होगा।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित यह टास्क फोर्स महामारी के दौरान की जा रही तैयारियों का जायजा लेगी और भविष्य में किसी भी आपात स्थिति की संभावना के हिसाब से दवाओं और चिकित्सा सुविधाओं की माँग, उपलब्धता और आपूर्ति को लेकर अपनी सिफारिशें पेश करेगी।

हालाँकि कोर्ट ने कहा कि जब तक टास्क फोर्स ऑक्सीजन वितरण पर अपनी सिफारिशें नहीं देती तब तक केंद्र सरकार वर्तमान व्यवस्था के अनुसार देश भर में ऑक्सीजन का वितरण करती रहेगी।  

सुप्रीम कोर्ट के द्वारा गठित इस टास्क फोर्स में डॉ. भाबतोष विश्वास, डॉ. देवेन्द्र सिंह राणा, डॉ. देवी प्रसाद शेट्टी, डॉ. गगनदीप कंग, डॉ. जेवी पीटर, डॉ. नरेश त्रेहान, डॉ. राहुल पंडित, डॉ. सौमित्र रावत, डॉ. शिव कुमार सरिन और डॉ. जरीर एफ उड़वादिया शामिल हैं। टास्क फोर्स में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार का सचिव और टास्क फोर्स के कन्वेनर के रूप में केंद्र सरकार का एक कैबिनेट सचिव भी होगा।

इसके अलावा दिल्ली में ऑक्सीजन की आपूर्ति के संबंध में भी सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पारित किया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार दिल्ली में ऑक्सीजन की आपूर्ति और उसकी दक्षता के ऑडिट के लिए एक ऑडिट समूह का गठन किया जाएगा। इस ऑडिट समूह में एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया, डॉ. संदीप बुद्धिराजा और केंद्र सरकार एवं दिल्ली सरकार से एक-एक आईएएस अधिकारी होंगे। ज्ञात हो कि इससे पहले दिल्ली सरकार ने ऑक्सीजन की ऑडिट से इनकार कर दिया था।

नेहरू के अखबार का वो पत्रकार, जिसने पोप को दी चुनौती… धर्म परिवर्तन के खिलाफ विश्व हिन्दू परिषद की रखी नींव

स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती का जन्म 1916 में आज ही के दिन (08 मई) हुआ था। महान भारतीय दर्शन अद्वैत वेदान्त के अनुयायी और भगवद्गीता, उपनिषद और अन्य हिन्दू शास्त्रों के प्रचारक स्वामी चिन्मयानन्द का जीवन कभी भी साधारण नहीं रहा। चिन्मय मिशन के संस्थापक और विश्व हिन्दू परिषद की नींव रखने वाले स्वामी चिन्मयानन्द पहले एक स्वतंत्रता सेनानी और जवाहरलाल नेहरू के द्वारा स्थापित द नेशनल हेराल्ड में पत्रकार थे। हालाँकि बालकृष्ण मेनन से स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती बनने का उनका सफर बड़ा ही रोचक है।

स्वामी चिन्मयानन्द केरल में ही जन्में और वहीं उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा भी हुई लेकिन अंग्रेजी साहित्य में पोस्ट ग्रेजुएट करने के लिए स्वामी चिन्मयानन्द लखनऊ आए। यहाँ उन्होंने 1940-43 के दौरान लखनऊ विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री हासिल की। इस दौरान उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। स्वामी चिन्मयानन्द अंग्रेजों द्वारा 1944 में गिरफ्तार किए गए। इसी दौरान उनकी मुलाकात नेशनल हेराल्ड के प्रथम संपादक के रामाराव से हुई, जिन्होंने स्वामी चिन्मयानन्द को एक पत्रकार के तौर पर नेशनल हेराल्ड में नौकरी दी। नेशनल हेराल्ड की स्थापना भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी।

पत्रकारिता के इसी कालक्रम से शुरुआत हुई स्वामी चिन्मयानन्द के आध्यात्मिक जीवन की। हुआ असल में ऐसा कि पत्रकार के तौर पर कार्य करते हुए 1947 की गर्मियों में स्वामी चिन्मयानन्द हरिद्वार के ऋषिकेश स्थित शिवानंद सरस्वती के आश्रम पहुँचे। स्वामी चिन्मयानन्द वहाँ साधुओं को उजागर करने के लिए गए थे लेकिन वहाँ पहुँचने के बाद उनके भीतर हिन्दू धर्म और उसके दर्शन को लेकर गहरी जिज्ञासा जाग उठी। इसके समाधान के लिए उन्होंने शिवानंद सरस्वती से संपर्क किया। इसके बाद 31 वर्ष की उम्र में स्वामी चिन्मयानन्द साधु बन गए और अंततः 25 फरवरी 1949 को महाशिवरात्रि के अवसर पर उन्होंने शिवानंद सरस्वती से दीक्षा ली और संन्यास ग्रहण कर लिया। इस प्रकार बालकृष्ण मेनन, स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती बन गए।

स्वामी चिन्मयानन्द हिन्दू धर्म के उत्थान के लिए योगदान देना चाहते थे और उनका उद्देश्य था कि विश्व भर के हिन्दू संगठित होकर इस कार्य में अपना योगदान दें। 1963 में स्वामी चिन्मयानन्द ने पहली बार एक वैश्विक हिन्दू संगठन का विचार पूरे हिन्दू समाज के सामने रखा और हिन्दू धर्म के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया कि हिन्दू धर्म के उत्थान और एकत्रीकरण के लिए हिंदुओं के प्रतिनिधि एक साथ मिलकर प्रयत्न करें। उनके इस विचार से तत्कालीन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक शिवराम शंकर आपटे बहुत प्रभावित हुए।

अगस्त 1964 में स्वामी चिन्मयानन्द और आरएसएस प्रचारक आपटे ने संदीपनी आश्रम में एक सभा का आयोजन किया जहाँ हिन्दू संगठनों के कई प्रतिनिधि पहुँचे। इसी सभा में हिंदुओं के बड़े संगठनों में से एक विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना हुई। इसी सभा में स्वामी चिन्मयानन्द को संगठन का अध्यक्ष और आपटे को महासचिव नियुक्त किया गया। विश्व हिन्दू परिषद का उद्देश्य तय हुआ, हिंदुओं और हिन्दू धर्म का उत्थान एवं विकास।

अगस्त 1964 में ही पोप ने घोषणा की कि उस साल नवंबर में इंटरनेशनल यूकेरिस्टिक कॉन्फ्रेंस (International Eucharistic conference) का आयोजन बॉम्बे में होगा। विश्व हिंदू परिषद के गठन और भविष्य में उसकी रूप-रेखा/कार्यशैली आदि पर नवंबर 1964 की यह घटना खासा महत्व रखती है। Religion, Caste & Politics in India नाम की एक किताब है। लेखक हैं – Christophe Jaffrelot – इस किताब के पेज 228 और 229 को पढ़िए।

Christophe Jaffrelot की किताब Religion, Caste & Politics in India से साभार
Christophe Jaffrelot की किताब Religion, Caste & Politics in India से साभार
Christophe Jaffrelot की किताब Religion, Caste & Politics in India से साभार

भारत के पिछड़े इलाकों (तब के बिहार, अभी के झारखंड) में उस समय गरीब-लाचार हिंदुओं को लालच-प्रलोभन देकर ईसाई बनाने का धंधा जोरों पर था। स्वामी चिन्मयानन्द इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानते थे। इसी बात की चर्चा RSS के मुखपत्र The Organiser में भी की गई थी। चर्च के बढ़ते प्रचार-प्रसार और हिंदुओं के साथ-साथ देश की आदिवासी जनसंख्या के धर्म परिवर्तन पर अंकुश लगाने के लिए ही विश्व हिंदू परिषद (VHP) अपने आप को तैयार करती है।

विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना करते समय स्वामी चिन्मयानन्द ने कहा था, “जिस दिन प्रत्येक हिन्दू जागृत होगा और उसे अपनी हिन्दू पहचान पर गर्व होगा, उस दिन परिषद का कार्य पूर्ण हो जाएगा और उन्हें (स्वामी चिन्मयानन्द) इसका पुरस्कार प्राप्त हो जाएगा। एक बार हिन्दू, अपने हिन्दू धर्म में वापस आ गए तो फिर सब ठीक हो जाएगा।“  

हिन्दू धर्म और उसके दर्शन के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले स्वामी चिन्मयानन्द का निधन 3 अगस्त 1993 को हुआ। उनके द्वारा स्थापित चिन्मय मिशन आज भी विश्व भर में हिन्दू वेदान्त और स्वामी चिन्मयानन्द के विचारों का प्रचार-प्रसार कर रहा है।

थाइलैंड की कॉलगर्ल का लखनऊ में कोरोना से निधन, एजेंट सलमान की मदद से आई थी इंडिया: यूपी पुलिस को रैकेट की तलाश

कोरोना वायरस के कहर के बीच एक बिजनेसमैन के बेटे के बुलावे पर इंडिया आई थाईलैंड की कॉल गर्ल का कोरोना से निधन हो गया। उसे इलाज के लिए लखनऊ के लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उसने अंतिम साँस ली। व्यवसायी के बेटे द्वारा 7 लाख रुपए खर्च कर उसे भारत लाया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, भारत पहुँचने के दो दिन बाद वह बीमार हो गई और 3 मई को निधन हो गया।

पुलिस ने मृतक कॉल गर्ल के परिवार को शव सौंपने के लिए थाईलैंड दूतावास से संपर्क किया। हालाँकि, शव का दावा करने के लिए कोई भी आगे नहीं आया। इसके बाद प्रशासन ने उसे भारत लाने वाले एजेंट की उपस्थिति में ही उसका अंतिम संस्कार करवा दिया। खबरों के अनुसार एजेंट की पहचान एक सलमान के तौर पर हुई है।

इस बीच यूपी पुलिस ने शहर के अंतरराष्ट्रीय सेक्स रैकेट की जाँच शुरू कर दी है। अधिकारी इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि उसके संपर्क में कौन-कौन आया था। पुलिस के अनुसार, वह राजस्थान के एक ट्रैवल एजेंट के संपर्क में थी। ट्रैवल एजेंट ने ही उसे लखनऊ भेजा था।

लखनऊ के बिजनेसमैन के बेटे खुद थाईलैंड दूतावास से संपर्क कर बीमार होने पर उन्हें स्थिति की जानकारी दी थी। इसके बाद ही भारत के विदेश मंत्रालय की मदद से थाईलैंड दूतावास ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया।

उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर का कहर लगातार जारी है। राज्य में वर्तमान में कोविड-19 के 2,54,118 एक्टिव केस हैं।

‘मदरसा छाप, मिर्जापुर का ललित’: दिल्ली में ऑक्सीजन की बर्बादी पर तजिंदर बग्गा और अमानतुल्लाह के बीच छिड़ा वाक युद्ध

शुक्रवार को दिल्ली भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने दिल्ली के सरकारी अस्पताल डीडीयू हॉस्पिटल का वीडियो जारी किया और आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार के अधिकारी ऑक्सीजन बर्बाद कर रहे हैं जिससे दिल्ली में ऑक्सीजन संकट पैदा हो। बग्गा के आरोप के बाद आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान और तजिंदर पाल सिंह बग्गा के बीच ट्विटर पर जंग छिड़ गई।   

अमानतुल्लाह खान ने अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए बग्गा पर फेक न्यूज फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि बग्गा को पढ़-लिख लेना चाहिए जिससे उन्हें कोई रोजगार मिल सके।

इस पर तजिंदर बग्गा ने कहा कि बाटला हाउस इनकाउंटर को फर्जी बताने वाला और मोहनचंद शर्मा के बलिदान का अपमान करने वाला आज फेक न्यूज की बात कर रहा है। बग्गा ने अमानतुल्लाह खान को ‘मदरसा छाप दंगाई विधायक’ भी कहा जिस पर अमानतुल्लाह खान ने कहा कि बग्गा ‘व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी’ से ज्ञान लेते हैं और खान ने बग्गा को यह भी कहा कि ‘छोटू’ बड़ा हो गया।  

तजिंदर बग्गा ने अमानतुल्लाह खान को ‘मिर्जापुर का ललित’ बुलाते हुए कहा कि अमानतुल्लाह खान और उसके ऑक्सीजन चोर आप विधायक इमरान हुसैन पर दिल्ली की जनता सर्जिकल स्ट्राइक करेगी।   

राष्ट्रीय राजधानी में कोरोना वायरस संक्रमण पर असफल रहने वाली दिल्ली की आप सरकार की खासी आलोचना हो रही है। दिल्ली की सरकार ने दिल्ली में ऑक्सीजन ऑडिट को भी नकार दिया। दिल्ली सरकार के द्वारा ऑक्सीजन के ऑडिट के लिए मना करने का कारण स्पष्ट नहीं है लेकिन आँकड़े कहते हैं कि दिल्ली सरकार मुंबई से चार गुना अधिक ऑक्सीजन की माँग कर रही है जबकि मुंबई में कोरोना वायरस के सक्रिय संक्रमित मरीजों की संख्या (54,162) दिल्ली (87,907) के आधे से थोड़ा ही अधिक है।

ऑक्सीफ्लोमीटर की कालाबाजारी में पकड़ा गया कॉन्ग्रेस नेता: महिला TI ने मरीज की परिजन बन किया भंडाफोड़

इंदौर में ऑक्सीफ्लोमीटर की कालाबाजारी करने वाले कॉन्ग्रेस के मंडल अध्यक्ष यतींद्र वर्मा का राजेंद्र नगर की TI ने एक फोन कॉल से भंडाफोड़ कर दिया। पड़ताल में पुलिस को वर्मा के पास से 2 ऑक्सी फ्लो मीटर बरामद हुए। पुख्ता सबूतों के आधार पर पुलिस ने कॉन्ग्रेस के मंडल अध्यक्ष को देर रात पकड़ा।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, राजेंद्र नगर टीआई अमृता सोलंकी ने वर्मा को पकड़ने के लिए एक मरीज की परिजन बनकर उससे संपर्क किया। सोलंकी ने कहा कि कोरोना संक्रमण के चलते ऑक्सीजन की बहुत ज्यादा जरूरत पड़ रही है। ऐसे में लोग किसी प्रकार ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था तो कर ले रहे हैं, लेकिन उसमें लगने वाले ऑक्सी फ्लो मीटर के लिए उन्हें भटकना पड़ रहा है। इसी स्थिति का फायदा उठाकर लोग इसकी जमकर कालाबाजारी कर रहे हैं। ये लोग तीन से चार गुना तक वसूल रहे हैं।

टीआई ने बताया कि उनके पास इस संबंध में रात में शिकायत आई थी। उन्हें बताया गया कि कोई यतींद्र नाम का आदमी अधिक दाम पर ऑक्सी फ्लो मीटर दिलवा रहा है। जब उन्होंने मरीज का परिजन बनकर बात की। तो ये आरोप सही निकले। वर्मा की ओर से जवाब आया कि वह 7 हजार रुपए में ऑक्सी फ्लो मीटर का इंतजाम करवाके तीन पुलिया पर डिलीवरी दे देगा।

टीआई ने वर्मा के सामने अपनी कोई मनगढ़ंत परेशानी बताई और कहा कि वह घर के पास आकर डिलीवरी दे सकते हैं तो बेहतर होगा। लंबी बातचीत के बाद वर्मा मान गया। वह RTO पर कार से डिलीवरी करने पहुँचा। इसके बाद उसे 7 हजार रुपए दिए गए और जैसे ही वो ऑक्सी फ्लो मीटर निकाल कर देने लगा, टीआई ने उसे दबोच लिया।

सख्ती से पूछताछ में यतींद्र ने सारी सच्चाई उगल दी। उसने बताया कि अरबिंदों अस्पताल के पास उसका किराए का मकान है। उसने वहीं ऑक्सी फ्लो मीटर रखे हुए हैं। जब पुलिस टीम बताई जगह पर पहुँची तो ऑक्सी फ्लो मीटर बरामद हो गए। अब आगे की पूछताछ हो रही है। पता लगाया जा रहा है कि आखिर कालाबाजारी के लिए वह ये ऑक्सी फ्लो मीटर कहाँ से लेकर आया।

दैनिक भास्कर (साभार) में प्रकाशित राजेंद्र नगर टीआई अमृता सोलंकी और यतींद्र वर्मा के बातचीत के अंश:

TI : हैलो।
वर्मा : हैलो।
TI : वर्मा भैया बोल रहे हैं क्या?
वर्मा : जी, यतींद्र वर्मा बात कर रहा हूँ।
TI : भैया, मुझे आपका नंबर मेरे भाई साहब ने दिया था। बोला था कि ऑक्सी फ्लो मीटर की व्यवस्था नहीं हो पाएगी तो आप कर देंगे क्या?
वर्मा : जी, किसने बोला आपको, किसने नंबर दिया था?
TI : एक राजू भैया हैं, क्या है कि हमारी मम्मी घर पर ही हैं और हमारे पास सिलेंडर तो है, लेकिन उसमें लगने वाला ऑक्सीमीटर नहीं है। उन्होंने कहा था इस नंबर पर बात कर लेना। भैया व्यवस्था करवा देंगे।
वर्मा : मैम, ऑक्सीमीटर मेरे पास तो नहीं है, पर मैं उपलब्ध करवा दूँगा। पर 7 हजार से कम में नहीं आएगा मैडम। किसी के पास एक पड़ा है। करवा दूँगा व्यवस्था आपको।
TI : कितने में आएगा?
वर्मा : 7 हजार रुपए में।
TI : चलेगा भैया अभी बहुत जरूरत है, मेरी मम्मी पॉजिटिव है भैया ।
वर्मा : मैम तो आप एक काम करिए, आप किसी को पहुँचा सकते हैं तो 3 पुलिया चौराहे पर किसी को पहुँचा दीजिए।
TI : कौन से चौराहे पर भैया ।
वर्मा : तीन पुलिया चौराहे पर कार्तिक मेडिकल पर पहुँचा दीजिए।
TI : तीन पुलिया किधर आएगा भैया।
वर्मा : मैम आप कहाँ से बोल रहे हैं।
TI : भैया मैं अन्नापूर्णा से बोल रही हूँ।
वर्मा : मैम, परदेशीपुरा के पास तीन पुलिया आता है। यहाँ पर किसी को पहुँचा दीजिए।
TI : यहाँ आकर आपको काॅल कर लूँ।
वर्मा : जी, मैं करवा दूँगा।
TI : थैंक्यू भैया ।

जिन किसानों का CM अमरिंदर करते थे समर्थन, उन्होंने ही कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा; कहा- ‘नहीं मानेंगे लॉकडाउन’

देश भले ही कोरोना महामारी की दूसरी लहर से जूझ रहा हो, लेकिन ‘किसान आंदोलन’ अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। किसान प्रदर्शनकारी पहले की तरह भीड़ जुटा रहे हैं और कुंभ व चुनावी रैलियों के खिलाफ आवाज़ उठाने वाला मीडिया शांत है। अब पंजाब में किसानों ने वहाँ लगे वीकेंड लॉकडाउन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। किसान प्रदर्शनकारियों ने ऐलान किया कि वो वीकेंड लॉकडाउन के दिशानिर्देशों का खुला उल्लंघन करेंगे।

पंजाब का कोई एक नहीं बल्कि कई किसान संगठन कोरोना दिशानिर्देशों की धज्जियाँ उड़ाते हुए सड़क पर उतरे। किसानों ने दुकानदारों पर दबाव बनाया कि वो अपनी दुकाने खोलें और सरकार का आदेश नहीं मानें, लेकिन दुकानदारों ने इससे इनकार कर दिया और कहा कि वो जिला प्रशासन जैसा बताएगा वैसा ही करेंगे। शनिवार (मई 8, 2021) को मोगा में भारतीय किसान यूनियन एकता (उग्राहान) के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में जुटे।

संगठन के कार्यकर्ताओं ने नेचर पार्क में एकत्रित होकर राज्य व केंद्र सरकार के खिलाफ जम कर नारेबाजी की। नेचर पार्क से लेकर मोगा के जोगिंदर सिंह मुख्य पार्क तक मार्च निकाला। लेकिन, दुकानदारों के संघ ने किसानों का समर्थन नहीं किया। पठानकोट में भी किसानों ने निकल कर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने सभी जिला कमिश्नरों को अपने हिसाब से लॉकडाउन लगाने का निर्देश दिया था।

मुख्यमंत्री ने ‘किसान संघर्ष मोर्चा’ के लॉकडाउन विरोधी प्रदर्शन को नजर में रखते हुए किसी भी तरह के उल्लंघन को सख्ती से निपटने के आदेश दिए थे। उन्होंने कहा था कि 32 किसान यूनियनों का मोर्चा सरकार पर अपनी राय नहीं थोप सकता। ये वही कैप्टेन अमरिंदर सिंह हैं, जिन्होंने दिल्ली की सीमाओं पर बैठे इन्हीं किसानों का कई बार समर्थन किया था। उन्होंने केंद्र सरकार को इनकी माँगें मान लेने की कई बार अपील की थी।

किसान नेताओं ने अपने भाषण में कहा कि हम लॉकडाउन को नहीं मानेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को कड़ाई में ढील देनी चाहिए, ताकि केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और तेज़ हो। किसान नेता अपने साथ काफी महिला प्रदर्शनकारियों को भी साथ लाए थे। लाउडस्पीकर से दुकानदारों से अपील की जा रही थी कि वो अपनी दुकानें खोलें। प्रदर्शन को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती हुई थी।

स्वाति चतुर्वेदी पर HT के पत्रकार ने लगाया ‘कंटेंट चुराने’ का आरोप, हिमंत बिस्वा सरमा पर NDTV में लिखा था लेख

पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी पर कंटेंट प्लेजेरिज्म का आरोप लगा है। ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ के एक पत्रकार ने उन पर कंटेंट कॉपी करने का आरोप लगाया है। HT के एसोसिएट एडिटर जिया हक़ ने ये आरोप लगाया है। जिस लेख की चोरी का आरोप लगा है, वो असम के दिग्गज भाजपा नेता हिमंत बिस्वा सरमा पर है। असम सहित पूरे उत्तर-पूर्व में भाजपा को स्थापित करने में हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा रोल है। वो पहले कॉन्ग्रेस में हुआ करते थे।

जिया हक़ ने ट्विटर के माध्यम से दोनों ही लेखों का स्क्रीनशॉट शेयर किया और उस पैराग्राफ के बारे में बताया, जिसका उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से कॉपी करने का आरोप लगाया। ये लेख मई 3, 2021 को लिखा गया था। इस लेख के उस पैराग्राफ में लिखा था, “हिमंत बिस्वा सरमा ने अरुणाचल प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने में मदद की। उन्होंने कॉन्ग्रेस को हटा कर वहाँ भाजपा की सरकार बनवाई। उन्होंने मणिपुर में सबसे बड़ी पार्टी कॉन्ग्रेस को अपदस्थ कर भाजपा गठबंधन की सरकार बनवाई।”

इस लेख में आगे लिखा था, “उन्होंने 2017 में मणिपुर में भाजपा की सरकार बनवाई। उन्होंने मेघालय में नॉन-कॉन्ग्रेस सरकार बनवाने में उनकी बड़ी भूमिका रही। वहाँ उन्होंने नागा पीपल्स फ्रंट और नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी को भाजपा के साथ लाने में बड़ी भूमिका निभाई।” वहीं स्वाति चतुर्वेदी के लेख में भी लगभग यही चीजें लिखी हुई प्रतीत हो रही हैं। दोनों ही लेखों में उन्हें ‘HBS’ कह कर सम्बोधित किया गया है।

हालाँकि, जिया हक ने एकदम से ऐसा नहीं कहा कि उनके लेख को चुराया गया है या फिर कॉपी किया गया है। उन्होंने लिखा, “ये पैराग्राफ स्वाति चतुर्वेदी द्वारा हिमंत बिस्वा सरमा पर लिखे गए लेख का है। ये लेख उन्होंने NDTV पर लिखा है। ये लेख आज आया है। जबकि दूसरी तरफ ये मेरे लेख का स्क्रीनशॉट है, जो मैंने 3 मई को लिखा था।” हालाँकि, ये पहली बार नहीं है जब स्वाति चतुर्वेदी पर प्लेजेरिज्म का आरोप लगा हो।

इससे पहले ‘द इकोनॉमिस्ट’ के पत्रकार स्टेनली पिग्नल ने उन पर अपनी ट्वीट्स कॉपी करने का आरोप लगाया था। उनका विवादों में रहने का पुराना इतिहास रहा है। मई 2020 में अभिनेता ऋषि कपूर के निधन के बाद उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा था, “भविष्यवाणी: हम जल्द ही पीएम मोदी की हत्या करने की साजिश के बारे में सुनेंगे।”

20 दिन के अंदर AMU में 26 मौत: 16 सेवारत फैकल्टी सदस्य और 10 रिटायर्ड कर्मियों ने कोरोना से तोड़ा दम

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में पिछले 20 दिनों में 26 लोगों की कोरोना के कारण मृत्यु हो गई। इनमें 16 सदस्य यूनिवर्सिटी में कार्यरत थे और 10 रिटायर्ड हो चुके फैकल्टी सदस्य थे। यूनिवर्सिटी के कुलपति तारिक मंसूर के बड़े भाई की भी इस बीच कोरोना के कारण मौत हुई और ऋग्वेद में डॉक्टरेट करने वाले पहले मुस्लिम स्कॉलर को भी कोरोना निगल गया।

इस समय 16 कर्मचारियों समेत कुछ फैकल्टी सदस्यों का इलाज जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। इनमें से कुछ की हालत बेहद गंभीर है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, एएमयू के प्रवक्ता शैफई किदवई ने बताया कि चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर शादाब अहमद खान (58) और कंप्यूटर विज्ञान विभाग के प्रोफेसर रफीकुल जमान खान (55) ने शुक्रवार को वायरस के कारण दम तोड़ दिया। प्रवक्ता ने कहा कि उप-कुलपति मंसूर के भाई उमर फारूक (75) की भी कोरोना से मौत हो गई। वह यूनिवर्सिटी कोर्ट के पूर्व सदस्य और मोहम्मदन एजुकेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्य थे।

वहीं बुधवार को मशहूर संस्कृत स्कॉलर और संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो खालिद बिन यूसुफ (56) का निधन हो गया था। वे ऋग्वेद में डॉक्टरेट पाने वाले पहले मुस्लिम स्कॉलर थे।

सेवारत फैकल्टी मेंबर, जिन्होंने इस माह में कोरोना संक्रमण के कारण दम तोड़ा, उनमें पोस्ट हार्वेस्ट इंजिनियरिंग विभाग के प्रोफेसर मोहम्मद अली खान (60), राजनीति विज्ञान विभाग के प्रो काजी मोहम्मद जमशेद (55), मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो साजिद अली खान (63), संग्रहालय विभाग के अध्यक्ष मोहम्मद इरफान (62), महिला अध्ययन केंद्र के डॉ अजीज फैसल (40), इतिहास विभाग के डॉ जिबरईल (51), अंग्रेजी विभाग के डॉ मोहम्मद यूसुफ अंसारी (46), उर्दू विभाग के डॉ मोहम्मद फुरकान संभली (43) और जूलॉजी विभाग के प्रोफेसर सैयद इरफान अहमद (62) का नाम शामिल हैं।

बता दें कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मौतों का सिलसिला पिछले माह से ही शुरू हो रखा है। पिछले माह उर्दू विभाग के फैकल्टी मेंबर प्रोफेसर मौला बख्स अंसारी, धर्मशास्त्र विभाग के प्रोफेसर एहसानुल्लाह फहद, और विश्वविद्यालय पॉलिटेक्निक AMU सईद में चमड़े और जूते के अनुभाग के प्रभारी उज्मन (51) की कोरोना से मौत हो गई थी। इनके अलावा, अब तक सेवानिवृत्त हो चुके 10 फैकल्टी सदस्य भी कोविड के कारण दम तोड़ चुके हैं। इनमें जेएनएमसी के पहले बैच के छात्र, प्रोफेसर एम मुबाशीर (77), मेडिकल कॉलेज के पहले प्रिंसिपल और यूनिवर्सिटी के पहले छात्र शामिल हैं।