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नेतन्याहू ने कहा, ‘नहीं माना हमास तो गाजा को जीत सकता है इजरायल’, ‘संघर्ष विराम की अमेरिकी अपील ठुकराई

इजरायल-फिलिस्तीन के बीच संघर्ष-विराम को लेकर बढ़ते हुए अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार (19 मई) को इस संघर्ष के और तेज होने और गाजा को जीतने की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि इजरायल शुरू में फिलिस्तीन आतंकी संगठन हमास के रॉकेट हमलों को रोकने की नीति पर काम कर रहा था, लेकिन अब इन हमलों के तेज होने और यहाँ तक कि फिलिस्तीनी नियंत्रण वाले गाजा पट्टी इलाके को जीतने की संभावनाओं को भी खारिज नहीं किया जा सकता।

नेतन्याहू तेल अवीव में किर्या सैन्य अड्डे पर लगभग 70 विदेशी राजनयिकों को संबोधित कर रहे थे। जहां उन्होंने उन्हें एक सप्ताह से अधिक की लड़ाई के बाद की स्थिति की जानकारी दी। इस संघर्ष के दौरान गाजा के आतंकी समूहों ने इजरायल जमकर पर रॉकेट दागे, जिसका जवाब इजरायल ने एयर स्ट्राइक के जरिए दिया है। दोनों पक्षों पर मध्यस्थों के माध्यम से युद्धविराम पर सहमत होने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है।

नेतन्याहू ने इजरायल पर रॉकेट हमले करने वाले हमास के बारे में कहा, “आप या तो उन्हें जीत सकते हैं, या आप उन्हें रोक सकते हैं।” नेतन्याहू ने कहा, “हम अभी जोरदार प्रतिरोध में लगे हुए हैं, लेकिन मुझे कहना होगा, हम किसी भी चीज से इंकार नहीं कर रहे हैं।”

इजरायल ने अमेरिका का संघर्ष विराम का प्रस्ताव ठुकराया

उधर इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन की संघर्ष को कम करने की माँग की खारिज करते हुए कहा कि वह तब तक गाजा में ऑपरेशन जारी रखने के लिए ‘दृढ़’ हैं, जब तक कि उनके उद्देश्य पूरे नहीं हो जाते।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैन्य मुख्यालय के दौरे के बाद, नेतन्याहू ने कहा कि वह अमेरिकी समर्थन की सराहना करते हैं, लेकिन शांति बहाल होने तक आगे बढ़ते रहेंगे। नेतन्याहू की यह प्रतिक्रिया बिडेन ने उन्हें फोन करके उन हमलों को कम करने के लिए कहने के बाद आई है, जिसमें अब तक सैकड़ों फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं।

नेतन्याहू ने बुधवार को बाद में अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने जोर देकर कहा गया कि इजरायल ”इजरायल अपने नागरिकों की शांति और सुरक्षा की वापसी के लिए आगे बढ़ेगा।” उन्होंने कहा कि ऑपरेशन को तब तक जारी रखने के लिए दृढ़ हैं जब तक कि इसका उद्देश्य पूरा नहीं हो जाता, जोकि अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ती दरार का संकेत है।

बिडेन का अधिक कठोर सार्वजनिक रुख पहले की उन रिपोर्टों के बाद आया है, जिनमें उन्होंने निजी तौर पर नेतन्याहू से कहा था कि वह उन्हें अनिश्चित काल तक आलोचना से नहीं बचा सकते। इसके बाद अमेरिका की तरफ से बार-बार सार्वजनिक बयान आए कि जब तक गाजा से रॉकेट दागे जाते हैं इजरायल को अपनी रक्षा करने का अधिकार है।

कॉन्ग्रेस ‘टूलकिट’ का मामला पहुँचा सुप्रीम कोर्ट: दोषी साबित होने पर पार्टी की मान्यता रद्द करने की माँग

कॉन्ग्रेस के कथित टूलकिट मामले के खिलाफ देश के शीर्ष अदालत में याचिका दायर की गई है। मामले को सरकार के खिलाफ लोगों को भड़काने और दुनिया में भारत की छवि बिगाड़ने का साजिश बताया गया है। याचिकाकर्ता वकील शशांक शेखर झा ने अंतरराष्ट्रीय साजिश का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) से जाँच और दोष साबित होने पर कॉन्ग्रेस की मान्यता रद्द करने की माँग की है।

झा ने अपनी जनहित याचिका में निर्दिष्ट किया कि धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), आईपीसी की कई धाराओं और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की धारा 13 के तहत किसी भी अपराध का खुलासा करने के लिए मामले की जाँच की जानी चाहिए।

याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार को निर्देश जारी होना चाहिए कि वह गाइडलाइंस बनाए कि कोई भी पार्टी, ग्रुप कोई भी ऐसा पोस्टर और बैनर नहीं लगाएगा जिसमें एंटी नेशनल सामग्री हो। साथ ही कोरोना से मरे लोगों के अंतिम संस्कार और शव न दिखाए जाएँ। साथ ही केंद्र सरकार को कोविड-19 महामारी के दौरान आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी के बारे में निर्देश जारी किया जाए।

याचिकाकर्ता ने कहा कि केंद्र सरकार मामले की जाँच कराए और जाँच में अगर कॉन्ग्रेस जिम्मेदार पाया जाता है और लोगों के जीवन को खतरे में डालता पाया गया और एंटी नेशनल हरकत करता पाया जाता है तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द हो। 

हालाँकि कॉन्ग्रेस ने ‘टूलकिट दस्तावेज़’ के निर्माण से स्पष्ट रूप से इनकार किया है, रिपोर्टों से पता चलता है कि लेखक वास्तव में एआईसीसी की सदस्य है। बता दें कि सौम्या वर्मा का नाम दस्तावेज़ के निर्माता के रूप में उभरा है। अब सौम्या ने लिंक्डइन सहित अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स को डिलीट कर लिया है।

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AICC के चेयरमैन राजीव गौड़ा ने स्वीकार किया कि टूलकिट के लीक हुए दो डॉक्यूमेंट्स में से एक ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमेटी (AICC) के शोध विभाग द्वारा तैयार किया गया है। कॉन्ग्रेस नेता राजीव गौड़ा ने ट्वीट करके यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि AICC ने ही सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर एक शोध पत्र तैयार किया। हालाँकि, गौड़ा ने कहा कि टूलकिट भाजपा द्वारा बनाया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा ओरिजिनल डॉक्यूमेंट के लेखक का डाटा दिखा रही है और उसे फेक डॉक्यूमेंट से जोड़ रही है।

हालाँकि, ऑपइंडिया दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर टिप्पणी नहीं कर सकता है, वास्तव में लीक हुए मोदी विरोधी टूलकिट और सेंट्रल विस्टा ‘रिसर्च’ दस्तावेज़ दोनों के बीच समानताएँ हैं।

केजरीवाल के ‘सिंगापुर झूठ’ की ढोल फटने के बाद भी AAP के दूसरे नेता कर रहे राजनीति: उल्टे-सीधे बयान पर चौतरफा लताड़

कोरोना वायरस के ‘सिंगापुर वैरिएन्ट’ पर सिंगापुर के प्रतिनिधियों और भारतीय विदेश मंत्रालय से लताड़ लगाए जाने के बाद भी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल बाज नहीं आ रहे हैं और उनके नेता अभी भी इस मुद्दे पर लगातार भारत को शर्मिंदा करने का काम कर रहे हैं।

वहीं केजरीवाल के बयान पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए भारत में सिंगापुर के राजदूत साइमन वॉन्ग ने कहा कि सिंगापुर में ऐसे झूठे दावों के लिए प्रोटेक्शन फ्रॉम ऑनलाइन फाल्सहुड एण्ड मैनिपुलेशन ऐक्ट (POFMA) है जो दिल्ली के मुख्यमंत्री पर लगाया जा सकता है लेकिन सिंगापुर भारत सरकार द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण से संतुष्ट है।

आज दिन भर आप के बाकी नेताओं का भी इस मुद्दे पर बयान जारी रहा। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के अलावा दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेन्द्र जैन ने कहा कि यह कहना गलत होगा कि सिंगापुर से जुड़ा कोई कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत में ही कई स्ट्रेन हैं और जल्दी ही सिंगापुर स्ट्रेन पर स्पष्टीकरण दिया जाएगा।

इसके अलावा दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी इसी नैरेटिव पर अपना राग अलापा। उन्होंने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार का पूरा ध्यान सिंगापुर पर है। आम आदमी पार्टी के नेता भाजपा के खिलाफ राजनीति करते हुए अब इस हद तक चले गए हैं कि उन्होंने भारत के साथ बेहतर संबंधों वाले देश को भी अपनी राजनीति में घसीट लिया। अरविन्द केजरीवाल के इस बयान पर सिंगापुर ने आपत्ति जताई।

अरविन्द केजरीवाल की भ्रामक खबर :

मंगलवार (18 मई) को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने ट्विटर पर यह दावा किया था कि सिंगापुर में कोरोना वायरस का नया वैरिएन्ट मिल है और भारत सरकार से यह अपील की थी कि सिंगापुर से सभी प्रकार की उड़ानों को बंद किया जाए जिससे यह नया वैरिएन्ट भारत न पहुँच सके।

अरविन्द केजरीवाल के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

केजरीवाल द्वारा यह दावा किए जाने के बाद सिंगापुर की सरकार ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि सिंगापुर में कहीं भी कोरोना वायरस का कोई नया वैरिएन्ट नहीं मिला है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह खुलासा किया कि सिंगापुर की सरकार ने उच्चायोग में फोन करके केजरीवाल के बयान पर आपत्ति दर्ज कराई है। विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि केजरीवाल को कोरोना वायरस के वैरिएंट्स की घोषणा करने या भारत की उड्डयन नीति के विषय में कोई अधिकार नहीं है।

सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालकृष्णन ने भी ट्विटर के माध्यम से यह सुझाव दिया कि राजनेताओं को तथ्यों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने केजरीवाल के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कोरोना वायरस का कोई ‘सिंगापुर वैरिएन्ट’ नहीं है।

केजरीवाल के गलत बयान के कारण विदेश मंत्री एस जयशंकर को भी इस संबंध में ट्विटर पर स्पष्टीकरण देना पड़ा। भारतीय विदेश मंत्री ने एक ट्वीट में सिंगापुर और भारत के मजबूत रिश्तों का हवाला दिया और कोरोना वायरस संक्रमण में ऑक्सीजन सप्लाई करने पर सराहा।

साथ ही उन्होंने अगले ट्वीट में लिखा, “हालाँकि उनके द्वारा, जिन्हें मालूम होना चाहिए कि इससे लंबे समय से चली आ रही साझेदारी खराब हो सकती है, यह गैर-जिम्मेदाराना बयान दिया गया। इसलिए मैं साफ कर देना चाहता हूँ कि दिल्ली के मुख्यमंत्री भारत के लिए नहीं बोलते।”

उद्धव ठाकरे के करीबी मंत्री ने लॉकडाउन में बना डाला करोड़ों का अवैध रिसॉर्ट: BJP नेता किरीट सोमैया ने खोली पोल

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी सरकार के कैबिनेट मंत्री और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के करीबी कहे जाने वाले अनिल परब पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। सोमैया का आरोप है कि परब ने रत्नागिरी के दपोली इलाके में कृषि भूमि पर 10 करोड़ रुपए का अवैध साईं रिसॉर्ट बनवाया और इसके लिए फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया है।

किरीट सोमैया के आरोपों के अनुसार महाराष्ट्र के मंत्री और शिवसेना नेता अनिल परब ने रत्नागिरी जिले के दपोली में एक तीन मंजिला इमारत का निर्माण कराया। परब ने 22 कमरों के इस आलीशान रिसॉर्ट का निर्माण पिछले साल लॉकडाउन (2020) में शुरू किया था। एक साल में इस रिसॉर्ट का निर्माण पूरा हुआ।

सोमैया ने आरोप लगाया है कि इस रिसॉर्ट के निर्माण के लिए न तो कोस्टल रेग्युलेशन जोन (CRZ) के तहत अनुमति ली गई और न ही रिसॉर्ट के निर्माण के लिए। चूँकि यह निर्माण समुद्र तटीय इलाके में हुआ है अतः नियमों के अनुसार निर्माण के लिए CRZ के तहत अनुमति लेना अनिवार्य है। सोमैया ने इसके बाद बताया है कि अनुमति न लेने के बाद जब रिसॉर्ट का निर्माण पूरा हुआ तब 11 मई 2021 को अनिल परब ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रिसॉर्ट को वैध कराने का प्रयास भी किया।

किरीट सोमैया द्वारा शिवसेना नेता अनिल परब पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप

भाजपा नेता किरीट सोमैया ने 6 मई 2021 को उस जगह का दौरा किया जहाँ यह रिसॉर्ट बनाया गया है। सोमैया ने जिलाधीश और केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर से इसकी शिकायत की है। सोमैया के अतिरिक्त भाजपा गोपाल शेट्टी गिरीश बापट और मनोज कोटक ने भी जावडेकर से यह माँग की है कि एक पर्यावरणीय टीम भेजी जाए जो इस रिसॉर्ट के निर्माण में CRZ के तहत किए गए उल्लंघन की जाँच कर सके।

किरीट सोमैया का कहना है कि शिवसेना के नेता अनिल परब ने 19 जून 2019 विभाष साठे से 42 गुंठा कृषि भूमि खरीदने का एग्रीमेंट किया। 26 जून 2019 को अनिल परब ने मुरुड में निर्मल ग्राम पंचायत को यह बताया कि उन्होंने साठे से कृषि योग्य भूमि खरीदी है जिस पर रिसॉर्ट बना हुआ है।

भाजपा ने मंत्री अनिल परब पर कार्रवाई की माँग की है और कहा है कि अवैध रूप से बने रिसॉर्ट को ध्वस्त किया जाए। भाजपा का मानना है कि सरकारी दस्तावेजों में छेड़छाड़ करने के कारण अनिल परब को मंत्री पद से हटा दिया जाना चाहिए।

इससे पहले भी किरीट सोमैया महाराष्ट्र के मंत्री अनिल परब पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा चुके हैं। सोमैया ने हाल ही में आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र में परिवहन मंत्रालय में भ्रष्टाचार फैला हुआ है और लगभग 500 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है जिसकी सीबीआई जाँच होनी चाहिए।

भारत में इस्लामवादियों का नया ट्रेंड: #Quds_हमारा_है अर्थात येरुशलम केवल मुसलमानों का, ‘जहरीले ट्वीट्स’ की आई बाढ़

एक तरफ जहाँ इजरायल आतंकवादी समूह हमास द्वारा किए जा रहे बेवजह के हमलों के खिलाफ अपनी भूमि और लोगों की रक्षा कर रहा है, भारत में इस्लामवादियों का एक वर्ग है जो ‘Quds’ को ‘अपनी’ साइट के रूप में घोषित करने वाले भड़काऊ मैसेज पोस्ट कर रहे हैं। बता दें कि ‘Quds’ येरुशलम का अरबी नाम है, जो यहूदियों, ईसाइयों और मुसलमानों का पवित्र स्थल है।

भारतीय मुस्लिम और इस्लामवादी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर Quds_हमारा_है  हैशटैग ट्रेंड करा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि कई इस्लामवादी राजनीतिक दल भी इस ट्रेंड का इस्तेमाल करके ब्राउनी पॉइंट लूटने करने के लिए कूद पड़े हैं। 

टीपू सुल्तान पार्टी ने ट्वीट किया, “अरब की सबसे बड़ी गलती यहूदियों को फिलिस्तीन में रहने की जगह देना थी।”

गौरतलब है कि येरुशलम फिलहाल इजरायल में है और फिलिस्तीन ने भी इस पर अपना दावा किया है।

एक मोहम्मद जाहिद ने आप नेता अमानतुल्ला खान को कोट करते हुए लिखा, “हम मस्जिद ए अक्सा की ओर उठने वाले हर नापाक हाथ को काट डालेंगे, ये याद रखना मस्जिद ए अक्सा कोई इमारत नहीं है, यह हमारे दिल की धड़कन है। जब तक ये है तो हम हैं, अगर ये नहीं तो हम भी नहीं।”

बता दें कि आम आदमी पार्टी के नेता के जिस ट्वीट को जाहिद ने कोट किया था, उसमें उन्होंने लिखा था, “हम फ़िलिस्तीन पर हो रहे ज़ुल्म के ख़िलाफ़ हैं। जिस तरह इजरायल फ़िलिस्तीन के लोगों पर बम बरसा कर मासूम जिंदगियों को तबाह कर रहा है। यह नाकाबिले बर्दाश्त है। ये इस्लाम विरोधी ताकतें एक दिन नेस्तानाबूद होंगी। हिंदुस्तान इस मुश्किल घड़ी में फ़िलिस्तीन के साथ है।”

Quds यरुशलम का अरबी नाम है, अल अक्सा मस्जिद को अल कुद्स (Al Quds) के नाम से भी जाना जाता है। मस्जिद यहूदियों और ईसाइयों के पवित्र स्थलों के बहुत करीब स्थित है। ऐतिहासिक महत्व वाली साइट अक्सर इज़राइल फिलिस्तीन संघर्ष में फ्लैशपॉइंट रही है।

एक अन्य यूजर ने मालेगांव के एआईएमआईएम विधायक मुफ्ती इस्माइल कासमी को उद्धृत किया और हैशटैग का इस्तेमाल किया। कासमी ने अपने ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट पोस्ट किया था जिसमें उन्होंने यूएनओ (जिसे अब यूएन के रूप में जाना जाता है) से दारुल उलूम देवबंद की माँग पर इजरायल को आतंकवादी राज्य घोषित करने का आग्रह किया था।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसे हजारों ट्वीट्स घूम रहे हैं।

कुछ तो भारत में यहूदियों को धमकाते हुए भी दिखाई दिए।

बहराइच लव जिहाद: शहंशाह खान ने ब्राह्मण बन हिन्दू युवती से रचाई शादी, पोल खुलने पर कल्लन और सद्दाम ने की पिटाई

लव जेहाद पर कठोर कार्रवाई का कानून बनाए जाने के बाद भी लव जिहाद का मामला थम नहीं रहा है। ताजा मामला जनपद बहराइच के विशेश्वरगंज इलाके का है जहाँ महराजगंज जनपद से आई एक युवती ने अपने पति के ऊपर कई तरह के गंभीर आरोप लगाए हैं।

युवती का आरोप है कि सरकाही गाँव का शहंशाह खान नाम का युवक उसके साथ हिंदू बनकर कर प्रेम किया और खुद को ब्राह्मण बता कर युवती से शादी किया। पति के घर पहुँचने के बाद युवती को पता चला कि जिस युवक से उसने प्रेम विवाह किया है वह हिंदू नहीं बल्कि मुस्लिम है।

जब युवती ने इस बात का विरोध किया युवक ने उसके साथ नशीली गोली खिलाकर जबरन यौन शोषण किया। युवती का ये भी आरोप है कि युवक के द्वारा लगातार कई दिनों तक उसे हाई पावर डोज की नशीली दवाइयाँ खिलाई गई और बंधक बनाकर रखा गया। यही नहीं, युवती के द्वारा विरोध करने पर युवक और उसके परिजनों के द्वारा जमकर पिटाई भी की गई।

युवती का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई और मुकदमा दर्ज कर लिया। बहराइच के विशेश्वरगंज थाना क्षेत्र के सरकाही निवासी सतनशाह ने कथित तौर पर धर्म बदलकर तीन माह पहले अपने प्रेम जाल में फँसा लिया। युवती का आरोप है कि शाह ने हिंदू बनकर कर प्रेम किया और स्वयं को ब्राह्मण बता कर शादी की। घर पहुँचने के बाद युवती को पता चला कि पति बना युवक मुस्लिम है तो उसने विरोध किया। इस पर उसे प्रताड़ित किया जाने लगा।

अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) कुंवर ज्ञानन्जय सिंह ने बुधवार (मई 19, 2021) को बताया कि जनपद महराजगंज के नौतनवा इलाके की रहने वाली, स्वयं को हिन्दू बता रही 22 साल की एक युवती ने 18 मई को बहराइच जिले के थाना विशेश्वरगंज में शिकायत दर्ज कराई कि थाना क्षेत्र के सरकाही गाँव के निवासी मुस्लिम युवक शहंशाह खान ने स्वयं को हिन्दू बताते हुए उससे जबरदस्ती शादी की है। महिला का आरोप है कि शहंशाह उससे जबरन शारीरिक संबंध बनाता है और शहंशाह के परिवार के कल्लन व सद्दाम उसे मारते पीटते हैं। 

एएसपी ने बताया कि आरोपों के आधार पर विशेश्वरगंज थाने में शहंशाह खान व अन्य के खिलाफ दुष्कर्म, मारपीट व 3/5 उ0प्र0 विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिबंध कानून 2020 की सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज हुआ है।

अपर पुलिस अधीक्षक कुँवर धनन्जय सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह लव जिहाद का मामला प्रतीत होता है लिहाज़ा मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आगे की कार्यवाही की जा रही है। उन्होंने बताया कि दोनों की पहले फोन पर बात हुई और फिर दोनों ने शादी कर ली। दोनों में पहले भी झगड़े थे लेकिन अब युवती ने आरोपित पर नए आरोप लगाए हैं, जिसके बाद आरोपित पति को पूछताछ करने के लिए थाना लाया गया है।

7 महीने तक चुप्पी, फिर कोविड की दूसरी लहर के बाद चिट्ठियों की बौछार: RTI में महाराष्ट्र CM और PM की बातचीत का खुलासा

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले महाराष्ट्र में लंबे समय से सबसे अधिक कोरोना वायरस के मामले सामने आ रहे हैं। वह काफी समय से कोरोना के नए मामलों में शीर्ष पर बनी हुई है। हालाँकि महाराष्ट्र सरकार महामारी से निपटने का प्रयास कर रही है, लेकिन फिर भी यहाँ पर अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक केस सामने आ रहे हैं। अब एक आरटीआई में पता चला है कि राज्य में कोरोना केस के बावजूद राज्य सरकार ने 7 महीनों से केंद्र सरकार से मदद के लिए संपर्क नहीं किया है।

आरटीआई कार्यकर्ता विवेक पांडे द्वारा दायर एक आरटीआई में यह पता चला कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने अगस्त 2020 के अंतिम सप्ताह में पीएम को एक पत्र लिखा और अप्रैल 2021 के पहले सप्ताह तक उनसे संवाद नहीं किया। उस समय तक, राज्य दूसरी लहर के अत्यधिक दबाव में था। बीच में केंद्र सरकार ने ही मार्च 2021 में महाराष्ट्र सरकार से हाई अलर्ट पर रहने के लिए संपर्क किया था क्योंकि राज्य कोविड -19 महामारी की दूसरी लहर की पीक पर था।

पांडे ने अपने आवेदन में क्या पूछा?

पांडे ने अपने आवेदन में सरकार से दो सवालों का जवाब देने के लिए कहा।

1. उन्होंने जुलाई 2020 और अप्रैल 2021 के बीच कोविड -19 के खिलाफ लड़ाई के लिए मदद माँगने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से महाराष्ट्र के सीएम के बीच ऑफिशियल कम्युनिकेशन की सॉफ्ट या हार्ड कॉपी माँगी।

2. उन्होंने जुलाई 2020 से अप्रैल 2021 के बीच कोविड -19 के खिलाफ लड़ाई में मदद के लिए महाराष्ट्र के सीएम द्वारा भारत के पीएम को भेजे गए पत्रों की सॉफ्ट या हार्ड कॉपी माँगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ सीएम के कम्युनिकेशन के बारे में पहले प्रश्न के उत्तर में महाराष्ट्र सरकार ने कोई सॉफ्ट या हार्ड कॉपी प्रदान नहीं की। उनके जवाब से यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने किसी सहायता के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय से संपर्क किया था या नहीं।

सीएम ने पीएम को लिखे अपने पत्र में क्या लिखा था?

सीएम ठाकरे और पीएम मोदी के बीच ऑफिशियल कम्युनिकेशन में सीएम ने राज्य में टेस्टिंग बढ़ाने के लिए फंड आवंटन की माँग की थी। उन्होंने कहा कि राज्य 151 प्रयोगशालाओं में कोविड-19 के लिए टेस्टिंग कर रहा है और आईसीएमआर राज्य को किट और उपभोग्य वस्तुएँ उपलब्ध करा रहा है। हालाँकि, केंद्र सरकार द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार सितंबर 2020 से उन्हें प्रदान नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से 26 अगस्त, 2020 के पत्र में किट और उपभोग्य सामग्रियों की आपूर्ति जारी रखने को कहा

7 महीने की चुप्पी, फिर अप्रैल 2021 के बाद चिट्ठियों की बौछार

अगस्त में पत्र के बाद, सीएम कार्यालय से कोई कम्युनिकेशन शुरू नहीं किया गया था। बाद में, अप्रैल 2021 में, सीएम ने राज्य में परीक्षण और टीकाकरण को तेज करने की बात कही। उन्होंने केंद्र से और अधिक वैक्सीन खुराक की माँग की और टीकाकरण के लिए आयु सीमा कम करने के लिए केंद्र को धन्यवाद दिया। उन्होंने आगे केंद्र सरकार से आयु सीमा को 25 तक कम करने पर विचार करने का अनुरोध किया ताकि अधिक नागरिकों को टीका लग सके।

मुख्यमंत्री ने 5 अप्रैल, 2021 के पत्र में टीकाकरण करवाने के लिए आयु सीमा घटाकर 25 करने को कहा

22 अप्रैल, 2021 को ऑफिशियल कम्युनिकेशन में, सीएम ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की उपलब्धता के बारे में बात की और आरोप लगाया कि राज्य को दवा का आवंटित कोटा नहीं मिल रहा है। उन्होंने पीएम से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया था कि राज्य को इंजेक्शन मिले ताकि लोगों की जान बचाई जा सके।

सीएम ने 22 अप्रैल, 2021 के पत्र में पीएम से राज्य को आवंटित रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध कराने को कहा

30 अप्रैल, 2021 को, उन्होंने पीएम को लिखा कि उन्होंने राज्यों को अपने स्वयं के कोविड-19 टीकाकरण प्लेटफॉर्म की अनुमति देने का सुझाव दिया, जहाँ नागरिक 18-45 आयु वर्ग के लिए ओपनिंग स्लॉट के रूप में पंजीकरण कर सकते हैं, जिससे कोविन सर्वर पर अत्यधिक दबाव पड़ेगा। उन्होंने पीएम से राज्यों को सीधे अन्य निर्माताओं से वैक्सीन खरीदने की अनुमति देने के लिए भी कहा।

सीएम ने पीएम से 30 अप्रैल, 2021 के पत्र में राज्यों को सीधे निर्माताओं से टीके खरीदने की अनुमति देने को कहा

कोविड -19 दूसरी लहर के लिए राज्यों के साथ केंद्र सरकार की बातचीत

रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 बैठकों के दौरान राज्यों को कोविड -19 की दूसरी लहर के बारे में चेतावनी दी थी। मुख्यमंत्रियों के साथ अपनी बातचीत में, पीएम मोदी ने देश के कुछ हिस्सों में बढ़ते संक्रमण का मुद्दा उठाया था। भाजपा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उन्हें उछाल से निपटने के लिए उपाय करने को भी कहा था।

जब मार्च के आसपास संक्रमण फिर से बढ़ने लगा तो 17 मार्च को विभिन्न मुख्यमंत्रियों के साथ पीएम मोदी की बैठकों में, उन्होंने उन्हें संक्रमण में एक नए स्पाइक के बारे में सचेत किया था और इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, तत्काल कदम उठाने के लिए कहा था।

दरअसल, देश के हालात पर नजर रखने के लिए पीएम मोदी ने पिछले साल 23 सितंबर से शुरू होकर इस साल 23 अप्रैल तक मुख्यमंत्रियों के साथ 6 बार बातचीत की। ऐसी बैठकों के दौरान, पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों से लगातार 60 जिलों पर ध्यान केंद्रित करने और टेस्टिंग को पर्याप्त रूप से बढ़ाने के लिए कहा था। हालाँकि कोविड की दूसरी लहर आने पर महाराष्ट्र सरकार ने इसके लिए केंद्र सरकार पर दोष मढ़ा। जबकि सच्चाई यह है कि उन्होंने मदद के लिए पीएम कार्यालय से कोई संपर्क ही नहीं किया।

नारदा स्टिंग मामला: TMC नेताओं को कलकत्ता HC से नहीं मिली जमानत, कल फिर होगी सुनवाई

पश्चिम बंगाल में नारदा स्टिंग मामले में गिरफ्तार तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के नेताओं को फिलहाल कलकत्ता हाई कोर्ट से जमानत नहीं मिल सकी। आज (19 मई) को हुई वर्चुअल सुनवाई में टीएमसी के नेताओं को राहत नहीं मिल सकी। अब मामले में अगली सुनवाई गुरुवार (20 मई) को होगी।

सोमवार (17 मई) की सुबह सीबीआई ने ममता सरकार के मंत्री फिरहाद हाकिम, सुब्रत मुखर्जी, विधायक मदन मित्रा और पूर्व मेयर शोभन चटर्जी को पूछताछ के लिए अपने दफ्तर ले गई थी। बाद में इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। हालाँकि उसी शाम को जस्टिस अनुपम मुखर्जी के नेतृत्व वाली विशेष सीबीआई अदालत ने चारों आरोपितों को जमानत दे दी थी जिस पर सीबीआई ने कलकत्ता हाई कोर्ट में सीबीआई अदालत के निर्णय के खिलाफ अपील की। इस पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने टीएमसी नेताओं की जमानत पर रोक लगाते हुए 19 मई तक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। जिसके बाद टीएमसी नेताओं को प्रेसिडेंसी जेल भेज दिया गया था।

आरोपित टीएमसी नेताओं ने कलकत्ता हाई कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की जिस पर बुधवार को फिर से सुनवाई हुई। टीएमसी के चारों नेताओं की ओर से कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी कोर्ट में पेश हुए। सिंघवी ने कोर्ट से टीएमसी नेताओं को अंतरिम जमानत दिए जाने का अनुरोध किया।

गौरतलब है कि टीएमसी नेताओं की गिरफ़्तारी पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सीबीआई ऑफिस पहुँच गई थीं और 6 घंटे वहीं बैठी रहीं। इस पर प्रश्न करते हुए कार्यकारी चीफ जस्टिस राजेश बिंदल ने सिंघवी से पूछा कि मुख्यमंत्री के 6 घंटे सीबीआई ऑफिस में बैठे रहने को किस प्रकार सही ठहराएँगे? इस पर सिंघवी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जो भी किया वह गाँधी का तरीका था। इस पर असहमति जताते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि इसका मतलब है कि क्या अब ये कानूनी मुद्दे सड़क पर सुलझाए जा सकेंगे?

इसके बाद कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस अरिजित बनर्जी की पीठ ने मामले की सुनवाई को गुरुवार (20 मई) दोपहर 2 बजे तक के लिए टाल दिया।

टीएमसी नेताओं की गिरफ़्तारी पर कोलकाता में निजाम पैलेस यानी सीबीआई दफ्तर के बाहर तृणमूल कार्यकर्ताओं (टीएमसी) ने जमकर हंगामा व उत्पात मचाया था। सीबीआई दफ्तर के बाहर सुरक्षा में तैनात केंद्रीय बलों पर टीएमसी कार्यकर्ताओं ने पत्थरबाजी भी की थी। अपने नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में सबसे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुबह करीब 10:48 बजे सीबीआई दफ्तर पहुँच गईं और 6 घंटे तक वहीं बैठी रहीं। उन्होंने एजेंसी को अपनी गिरफ्तारी की चुनौती भी दी थी और टीएमसी ने सीबीआई पर बदले के तहत कार्रवाई करने का आरोप लगाया था।

नारदा स्टिंग मामले में सीबीआई ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेताओं को गिरफ्तार करने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ भी याचिका दायर की थी।

आपको बता दें कि बंगाल में साल 2016 के विधानसभा चुनाव से पहले नारदा स्टिंग टेप सार्वजनिक हुए था। स्टिंग ऑपरेशन कथित तौर पर नारदा न्यूज पोर्टल के मैथ्यू सैमुअल ने किया था। इन स्टिंग्स में टीएमसी नेताओं को कथित तौर पर कंपनी के प्रतिनिधियों से रुपए लेते हुए देखा गया था। 

यूपी में लोगों को 3 महीने का मुफ्त राशन, कोरोनाकाल में अनाथ हुए बच्चों का पूरा खर्च उठाएगी योगी सरकार

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कोविड-19 से उत्पन्न परिस्थितियों के कारण गरीबों और जरूरतमंदों को तत्काल राहत पहुँचाने के लिए सभी राशन कार्ड धारकों को 3 माह की अवधि तक राशन मुफ्त देने का फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश में गुरुवार (मई 20, 2021) को प्रधानमंत्री गरीब कल्‍याण अन्‍न योजना के तहत 3.30 करोड़ पात्र कार्ड धारकों में 3 महीने का मुफ्त राशन वितरित किया जाएगा। योगी सरकार ने फैसला लिया है कि जिन पात्र व्यक्तियों के राशन कार्ड नहीं बने हैं। अभियान चलाकर उनके भी राशन कार्ड बनाए जाएँगे और उन्हें तत्काल राशन उपलब्ध कराया जाएगा।

हर कार्ड धारक को 3 किलो गेहूँ के साथ 2 किलो चावल दिया जाएगा। कम्युनिटी किचन और फूड पैकेट के जरिए रोज हजारों गरीबों तक भोजन पहुँचा रही योगी सरकार ने देश के सबसे बड़े राशन वितरण अभियान के लिए चाक चौबंद तैयारी की है। योगी सरकार ने अपने मंत्रियों, विधायकों और अफसरों को मुफ्त राशन वितरण अभियान की निगरानी के लिए जिलों में तैनात रहने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश सरकार के मंत्री और विधायक अलग-अलग जिलों में मौजूद रहकर राशन वितरण अभियान की शुरुआत करेंगे।

पोर्टेबिलिटी के आधार पर मिलेगा राशन

राशन वितरण की निगरानी के लिए सरकारी दुकानों पर नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए राशन वितरण ई पास मशीनों के जरिए किया जाएगा। पात्र गृहस्थी योजना के 13,41,77,983 लोगों के साथ अंत्‍योदय अन्‍न योजना के 1,30,07,969 पात्रों को भी मुफ्त राशन वितरण योजना का लाभ मिलेगा। यूपी के कार्ड धारकों के अलावा पोर्टेबिलिटी के आधार पर कोई भी पात्र कार्ड धारक प्रदेश की सरकारी राशन की दुकानों से मुफ्त राशन प्राप्त कर सकेगा। मई महीने का राशन वितरण गुरुवार से शुरू होकर 31 मई तक चलेगा। 29 से 31 मई तक पोर्टेबिलिटी के आधार पर पात्र लोगों को राशन वितरण किया जाएगा।

80 हजार सरकारी राशन दुकानों पर खाद्यान्न उपलब्ध

कम्युनिटी किचन और फूड पैकेट के जरिए पहले ही गरीबों तक भोजन पहुँचा रही योगी सरकार ने अब मुफ्त राशन वितरण अभियान के लिए बड़े स्‍तर पर तैयारी की है। प्रदेश की लगभग 80 हजार सरकारी राशन दुकानों तक खाद्यान्न पहुँचाने के साथ कोविड प्रोटोकॉल के पालन के भी निर्देश जारी किए गए हैं। खाद्यान्न वितरण में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ टोकन सिस्टम लागू किया जा रहा है, ताकि भीड़ जुटने से रोका जा सके। राज्‍य सरकार ने हर राशन दुकान पर सेनेटाइर, साबुन और पानी की उपलब्‍धता अनिवार्य की है। ई पास मशीनों के इस्तेमाल से पहले सैनिटाइजेशन जरूरी होगा। एक दुकान पर एक समय में अधिकतम 5 उपभोक्‍ता ही मौजूद रह सकेंगे।

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव ने नई सूचना सभी जिलों के संबंधित अधिकारियों को भेज दी है। निर्णय के अनुपालन में सभी राशन कार्ड धारकों को 03 माह (जून, जुलाई एवं अगस्त, 2021 ) का राशन नि:शुल्क दिया जाना है। भारत सरकार द्वारा निर्गत SDRF की गाइडलाइन के अन्तर्गत उक्त व्यय अनुमन्य नहीं है।

वित्त विभाग द्वारा इस संबंध में खाद्य एवं रसद विभाग को पहले ही अतिरिक्त बजट आवंटित किया जा चुका है। ऐसे में सभी राशन कार्ड धारकों को नि:शुल्क खाद्यान्न वितरण खाद्य एवं रसद विभाग को आवंटित विभागीय बजट से किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2021-22 में वितरण की प्रक्रिया के सम्बन्ध में विस्तृत दिशा-निर्देश खाद्य एवं रसद विभाग द्वारा अलग से जारी किए जाएँगे।

गौरतलब है कि कोरोना की पहली लहर के दौरान भी योगी सरकार ने पात्र कार्ड धारकों को 8 महीने तक मुफ्त राशन वितरण किया था। 5 किलो खाद्यान्‍न प्रति यूनिट की दर से राज्‍य सरकार ने सरकारी दुकानों से पिछले साल अप्रैल से नवंबर तक 60 लाख मी. टन खाद्यान्न का मुफ्त वितरण किया था, जो कि देश में एक रिकार्ड है।

कोरोना से अनाथ हुए बच्चों का पूरा खर्च उठाएगी योगी सरकार

वहीं कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के कारण जो बच्चे अनाथ और निराश्रित हो गए हैं, उनके लिए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार नई नीति लाने वाली है। राज्य सरकार ने बुधवार (मई 19, 2021) को यह फैसला लिया। उत्तर प्रदेश सरकार का मानना है कि ऐसे बच्चे जो अनाथ और निराश्रित हो गए हैं, वह राज्य की संपत्ति हैं।

सरकारी योजना के तहत कोरोना वायरस के कारण जिन बच्चों के माता-पिता की मौत हो गई है, उनके भरण-पोषण सहित सभी तरह की जिम्मेदारी राज्य सरकार द्वारा मुहैया कराई जाएगी। राज्य सरकार जल्द ही इस योजना के तहत बच्चों की देखभाल का जिम्मा उठाएगी।

महिला एवं बाल विकास विभाग को इस संबंध में तत्काल विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। जैसे ही महिला एवं बाल विकास विभाग कार्ययोजना तैयार की जाएगी, वैसे ही इसे लागू करने का भी कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

हाथरस में चोरी का खुलासा: 1.5 साल पहले चोरी की गई अष्टधातु की 3 मूर्तियाँ बरामद, 4 गिरफ्तार, 2 अवैध तमंचे बरामद

उत्तर प्रदेश में हाथरस जिले के सिकंदरामऊ थाना क्षेत्र के पूर्दिल नगर कस्बे में स्थित सैकड़ों वर्ष प्राचीन ठाकुर मुरली मनोहर जी के मंदिर से 28 नवंबर 2019 की रात को डकैतों ने धावा बोलकर सैकड़ो वर्ष पुरानी करोड़ों रुपए की अष्ट धातु की मूर्तियाँ लूट ली थी। पुलिस ने अब इस मामले का खुलासा करते हुए चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। यूपी पुलिस ने ट्वीट करते हुए इसकी जानकारी दी।

जानकारी के अनुसार, इस घटना के बाद खुलासे के लिए हाथरस पुलिस के साथ SOG और STF भी लगीं थीं लेकिन सफलता नहीं मिल पाई थी। वहीं क्षेत्रीय लोगों द्वारा भी कई महीने तक मूर्तियों की बरामदगी के लिए आंदोलन भी किया गया था लेकिन मूर्तियाँ बरामद नहीं हुईं। अब पुलिस अधीक्षक हाथरस द्वारा नए सिरे से तेज तर्रार इंस्पेक्टर जगदीश चन्द्र के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया। इसके बाद से ही मूर्तियों की बरामदगी के प्रयास शुरू कर दिए गए।

अष्टधातु की तीन मूर्तियाँ बरामद की गईं

पुलिस अधीक्षक हाथरस विनीत जायसवाल ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि पुरदिल नगर मंदिर से चोरी हुई करोड़ों रुपए की अष्टधातु की तीन मूर्तियों को बरामद कर लिया गया है। साथ ही घटना को अंजाम देने वाले चार आरोपितों को भी गिरफ्तार किया गया है। बरामद की गई मूर्तियों में एक राधा जी की, एक कृष्ण जी की और एक लड्डू गोपाल जा की मूर्तियाँ हैं।

2 अवैध तमंचे और कारतूस बरामद हुए हैं। इस गुड वर्क को अंजाम देने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपए के नगद इनाम देने की घोषणा की गई है। यूपी पुलिस ने बताया कि यह मूर्ति लगभग 19वीं सदी की है।