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‘बुजुर्ग ने CM योगी को गाँव में नहीं घुसने दिया’: एडिटेड वीडियो शेयर कर झूठ फैलाने वाले कॉन्ग्रेस नेता पर FIR

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मेरठ जिले के दौरे से जुड़ा एक वीडियो एडिट करके गलत तरीके से सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के आरोप में कॉन्ग्रेस नेता ओमवीर यादव पर केस दर्ज किया गया है। सीएम आदित्यनाथ कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने के लिए की गई तैयारियों का जायजा लेने मेरठ के बिजौली गाँव पहुँचे थे।

पश्चिमी यूपी युवा कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ओमवीर यादव, अभिनेत्री नगमा और सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी कंवल चड्ढा सहित कुछ उपद्रवियों और विपक्षी दलों के नेताओं ने इस दौरे का एक वीडियो पोस्ट किया।

कॉन्ग्रेस नेता ओमवीर यादव के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

विपक्षियों ने इस वीडियो को शेयर करते हुए यह दिखाने की कोशिश की कि क्षेत्र के निवासियों ने सीएम आदित्यनाथ का रास्ता रोक दिया और उन्हें गाँव में प्रवेश नहीं करने दिया। हालाँकि, यह दावा गलत निकला था और अब इस मामले में यूथ कॉन्ग्रेस के वेस्ट यूपी अध्यक्ष ओमवीर यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है।

मेरठ पुलिस ने भी इस वीडियो का खंडन किया था और कहा था कि सोशल मीडिया पर जो पोस्ट किया गया है वह निराधार और भ्रामक है। यह फेक न्यूज फैलाने के दायरे में आता है। कॉन्ग्रेस नेता ओमवीर यादव के खिलाफ खरखौदा थाने में एफआईआर हुई है। एसएचओ संजय शर्मा के अनुसार ओमवीर यादव के खिलाफ आईपीसी की धारा 505 और आईटी ऐक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में दौरे पर जा रहे हैं और लोगों से कोरोना वायरस संक्रमण और उसके इलाज की स्थिति पर जानकारियाँ ले रहे हैं। इसी क्रम में सीएम आदित्यनाथ 16 मई 2021 को जनपद मेरठ के बिजौली गाँव पहुँचे। इस पर विपक्षी दलों और सीएम आदित्यनाथ के विरोधियों ने एक वीडियो शेयर किया था जिसमें बताया गया कि क्षेत्र के निवासियों ने सीएम आदित्यनाथ का रास्ता रोक दिया और उन्हें गाँव में प्रवेश नहीं करने दिया।

महाराष्ट्र में डॉक्टरों पर हमले के 436 केस: उद्धव सरकार की लापरवाही पर बॉम्बे HC ने लगाई फटकार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार (मई 19, 2021) को डॉक्टरों की सुरक्षा के मद्देनजर कोई कदम न उठाने पर महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को देखकर ऐसा नहीं लग रहा है कि वह डॉक्टरों पर होने वाले हमलों को रोकने के संबंध में गभीर हैं।

कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश दिपांकर दत्ता और जस्टिस जीएस कुलकर्णी की पीठ ने राज्य स्वास्थ्य विभाग के उप सचिव द्वारा दायर हलफनामे का जिक्र करते हुए अपनी टिप्पणी की। इस हलफनामे को 13 मई को जारी एक आदेश के मद्देनजर दायर किया गया था।

पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि वो इस बात की जानकारी दें कि डॉक्टरों पर या अस्पताल स्टाफ पर हमले की कितनी घटनाएँ दर्ज हैं और उन्हें प्रोटेक्ट करने के लिए क्या कदम उठाए गए।

इसी आदेश के मद्देनजर हलफनामे में स्वास्थ्य विभाग ने ये तो बता दिया कि पूरे राज्य भर में डॉक्टरों पर हमले के 436 केस दर्ज हुए लेकिन इनकी तारीख या फिर इनसे जुड़ी अतिरिक्त जानकारी बताने में असफल रहे। 

पीठ ने एक पन्ने का हलफनामा देखकर हैरानी जताते हुए कहा कि इसमें उच्च न्यायालय द्वारा अपने पहले के आदेश में पूछे गए किसी भी प्रश्न का जवाब नहीं है। पीठ ने कहा, “ये हैरानी की बात है कि एक पन्ने का हलफनामा दायर किया गया। अगली बार से हम ऐसे हलफनामे नहीं स्वीकारेंगे जब तक कि सरकारी वकील द्वारा इसकी जाँच नहीं की जाती।”

कोर्ट ने कहा, “हम केवल एक ही शब्द उपयोग कर सकते हैं वह दयनीय है। यह बिल्कुल बेहूदा है। राज्य अपने डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। फिर भी, जनता उम्मीद करती है कि डॉक्टर अपना सब कुछ देंगे।”

सुनवाई के दौरान पीठ ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग के उप सचिव को अगले सप्ताह तक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने ये भी बताया कि उन्हें हलफनामे में क्या-क्या चाहिए। कोर्ट ने कहा कि हलफनामे में याचिकाकर्ताओं द्वारा पिछले सप्ताह इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाने और डॉक्टरों व चिकित्सा कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए दिए गए विभिन्न सुझावों पर राज्य की प्रतिक्रिया भी शामिल होनी चाहिए।

बता दें कि इस संबंध में जनहित याचिका डॉ राजीव जोशी द्वारा दायर की गई थी। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों पर होने वाले हमलों में रोकथाम के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की माँग की थी। याचिका में बताया गया था कि महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा ऐसी घटनाएँ हुई और महाराष्ट्र सरकार ऐसे हमलों को रोकने के लिए बने बनाए कानूनी प्रावधान भी लागू नहीं कर पाई। अब मामले की सुनवाई 27 मई को होगी।

गुजरात को ₹1000 करोड़ का राहत पैकेज: पीएम मोदी ने Tauktae से नुकसान का लिया जायजा

चक्रवाती तूफान Tauktae की वजह से गुजरात, दमन-दीव में भारी नुकसान हुआ। इस नुकसान का जायजा लेने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (मई 19, 2021) को गुजरात, दमन और दीव के दौरे पर पहुँचे। पीएम मोदी सबसे पहले भावनगर पहुँचे। यहाँ उन्होंने चक्रवाती तूफान Tauktae से प्रभावित क्षेत्रों का हवाई निरीक्षण किया। 

पीएम मोदी ने गुजरात को दिया एक हजार करोड़ का राहत पैकेज

पीएम मोदी ने गुजरात में राहत कार्यों के लिए एक हजार करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की। पीएमओ बताया कि गुजरात में नुकसान के आकलन के लिए केंद्र सरकार एक अंतर-मत्रीय दल को यहां तैनात करेगी।

साथ ही केंद्र सरकार ने देश भर में तूफान Tauktae के चलते जान गंवाने वालों के परिजनों को को दो-दो लाख रुपये का मुआवजा और घायलों को 50 हजार रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया। इस भयंकर चक्रवाती तूफान से अब तक गुजरात में 13 और देश भर में मरने वालों की संख्या 45 हो गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को ऊना, दीव, जाफराबाद और महुवा इलाके का हवाई दौरा किया और चक्रवाती तूफान Tauktae के कारण हुए नुकसान का जायदा लिया। हवाई सर्वे करने के बाद पीएम मोदी की अहमदाबाद में रिव्यू बैठक किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात सीएम विजय रुपाणी की मौजूदगी में चक्रवात Tauktae की स्थिति को लेकर अधिकारियों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की।

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी के मुताबिक, चक्रवाती तूफान के कारण राज्य में कुल 13 मौतें हुई हैं, 16000 से ज्यादा घरों को नुकसान पहुँचा, 40 हजार से ज्यादा पेड़ और 70 हजार से ज्यादा बिजली के खंभे उखड़ गए जबकि 5951 गाँवों में बिजली चली गई। यह राज्य में आया, अब तक का सबसे भयावह चक्रवात बताया जा रहा है। Tauktae के कारण सौराष्ट्र से लेकर उत्तरी गुजरात के तट तक भारी बारिश देखने को मिली और कम से कम 46 तालुका में 100 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हुई जबकि 12 में 150 से 175 मिलीमीटर तक बारिश दर्ज की गई।

चक्रवात Tauktae दोपहर बाद अहमदाबाद जिले की सीमा से लगते हुए उत्तर की तरफ बढ़ गया। इससे पहले और इस दौरान भी यहाँ लगातार भारी बारिश हुई जिससे शहर के कई इलाकों में घुटनों तक जलजमाव हो गया। चक्रवाती तूफान के कारण गुजरात के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई और करीब 35 तालुका में एक इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कहा कि Tauktae अब कमजोर होकर जैसे-जैसे उत्तर की तरफ बढ़ेगा यह गहरे दबाव में बदल जाएगा।

NDTV के पूर्व पत्रकार दिनेश मानसेरा को उत्तराखंड CM ने मीडिया सलाहकार पद से हटाया

NDTV के पूर्व पत्रकार दिनेश मानसेरा को उत्तराखंड मुख्यमंत्री तीरथ सिंह के मीडिया एडवाइजर के पद से बुधवार (मई 19, 2021) को हटा दिया गया। मानसेरा की नियुक्ति के बाद से सोशल मीडिया पर उनके पुराने ट्वीट शेयर किए जा रहे थे। कुछ लोगों का उन ट्विट्स को देखकर ये भी कहना था कि भाजपा को ऐसे नेताओं के होते दुश्मनों की जरूरत नहीं है।

शेयर किए जा रहे पोस्ट

बता दें कि दिनेश मानसेरा को दो दिन पहले ही मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का मीडिया सलाहकार बनाया गया था। लेकिन बुधवार को अपर मुख्य सचिव द्वारा जारी की गई अधिसूचना में बताया गया कि 17 मई वाले आदेश को सरकार ने निरस्त कर दिया है।

एक यूजर ने मानसेरा की पुरानी फोटो शेयर करते हुए तीरथ सिंह से कहा था, “बढ़िया आदमी ढूँढ कर लाए हो मीडिया एडवाइजर के लिए। कल तो भाई साब एकाउंट डिलीट कर दिए थे आज लेकिन ये फोटो निकल आई (मीडिया गिरोह के कई नामी चेहरों के साथ तस्वीर) बढ़िया है, अगले साल वैसे आपके पास जॉब रहे या न रहे इसके पास जरूर रहेगा, कॉन्ग्रेस पार्टी का।” 

कुछ लोग दिनेश को संघी बताकर उत्तराखंड सीएम के इस फैसले का बचाव कर रहे थे। हालाँकि, एक दक्षिणपंथी अकॉउंट (@squineon) से कहा गया, “मैं दिनेश मानेसर पर अपने ट्वीट डिलीट कर  दूँगा अगर वह संघ का निकला लेकिन संघी कभी मोदी को फेकू, धूर्त नहीं बोलेगा और न ही रावत जाति का उपहास उड़ाएगा।”

दिनेश के पुराने ट्वीट में उन्हें खुलकर भाजपा का विरोध करते देखा जा सकता है। इसके अलावा कुंभ को लेकर नकारात्मक संदेश आगे प्रसारित करने वालों में दिनेश मानसेरा का नाम शामिल था। ट्वीट देखकर लगता है कि उनका लगाव दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया से भी ज्यादा है।

सबसे बड़ी बात है कि जिन तीरथ सिंह के सीएम बनने के बाद से दिनेश के मीडिया एडवाइजर बनने की अटकलें लग रही थीं। उन्हीं मानेसर ने कुछ दिन पहले सीएम पद को लेकर सवाल उठाया था। अपने ट्वीट में उन्होंने पूछा था कि क्या मोदी अमित शाह की भाजपा बदल रही है।

मालूम हो कि 17 मई को जारी आदेश में दिनेश मानसेरा को मीडिया सलाहकार नियुक्त किया गया था। समाचार डॉट कॉम के अनुसार, उन्होंने 25 वर्ष पत्रकारिता को दिए। इस दौरान वह कई टीवी चैनल्स में कार्यरत रहे। उन्होंने अपनी सेवा पांचजन्य अखबार को भी दी और कुछ समय पहले तक वो एनडीटीवी में कुमाऊँ मंडल के प्रभारी थे।

दिनेश मानसेरा ने कहा- गरिमा बनी रहे इसलिए पद अस्वीकार्य

उल्लेखनीय है कि मीडिया एडवाइजर पद से निरस्त किए जाने के बाद दिनेश मानसेरा ने सोशल मीडिया पर बताया है कि उन्होंने इस पोस्ट को अस्वीकार दिया। उन्होंने पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का मीडिया सलाहकार उन्हें उनके पत्रकारिता अनुभव और व्यवहार को देखते हुए बनाया गया। लेकिन सोशल मीडिया पर अनजान लोगों तक ने इस बीच उनके और उनके परिवार वालों के बारे में बातें उछालीं।

उन्होंने कहा कि उनकी नियुक्ति के बाद उठ रहे सवालों से सीएम को भी कष्ट पहुँच रहा है क्योंकि उन्हें रखने का निर्णय सीएम का ही था। मानसेरा कहते हैं कि सीएम सरल और सज्जन व्यक्ति हैं इसलिए उन्हें पदभार करने से पहले सभी विषयों पर सोचना समझना पड़ा और यही फैसला लिया कि जब ऐसे लोग घिरे रहेंगे तो काम करने का औचित्य नहीं। वह लिखते हैं, “मुझे पद की लालसा कभी नहीं रही ये मेरे करीबी जानते हैं। मान सम्मान सबका जरूरी है। जोकि कायम रहना चाहिए…सबकी गरिमा बनी रहे इसलिए मैं इस पद को अस्वीकार करता हूँ।”

तरबूज काट थूकता था, फिर बेचता था: मोहम्मद फरमान की करतूत CCTV में कैद, गिरफ्तार

हाल के दिनों वीडियो सामने आए हैं, जिसमें भोजन पकाने या खाद्य पदार्थ बेचने वालों ने उसमें थूक कर ग्राहकों को खिलाया। इस तरह का ताज़ा मामला अब मुजफ्फरनगर से सामने आया है, जहाँ एक व्यक्ति काटी हुई तरबूज में थूक कर उसे बेच रहा था। ये घटना शहर कोतवाली क्षेत्र के रामपुरी की है, जहाँ एक फल/सब्जी बेचने वाले ने ये करतूत की। आरोपित फरमान को पुलिस ने धर-दबोचने में कामयाबी पाई है।

मुजफ्फरनगर पुलिस ने जानकारी दी है कि थाना कोतवाली नगर पुलिस द्वारा सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर अभियुक्त को गिरफ्तार किया जा चुका है और अन्य विधिक कार्यवाही की जा रही है। एक मोहल्ला वाली की तहरीर पर पुलिस ने FIR दर्ज की। ये घटना सोमवार (मई 17, 2021) की है, जब रामपुरी में फरमान एक रेहड़े पर सब्जी व फेल बेच रहा था। उसी समय उसकी हरकतों का वीडियो CCTV में रिकॉर्ड हो गया।

वीडियो में देखा जा सकता है कि वो अचानक एक तरबूज उठाता है और उसमें लगे कट पर थूक देता है। स्थानीय व्यक्ति प्रदीप की शिकायत के पुलिस ने उसकी तलाश कर उसे गिरफ्तार किया। आरोपित सरवट पीर थाना सिविल लाइन का रहने वाला है। उसे मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। शहर कोतवाल योगेश शर्मा ने उसकी गिरफ़्तारी की पुष्टि की है। गाजियाबाद, हापुड़ और मेरठ के अलावा दिल्ली में भी ऐसे मामले सामने आए थे।

मार्च 2021 में गाजियाबाद में मोहसिन नाम का एक व्यक्ति गिरफ्तार किया गया था जो रोटियों में थूक रहा था। गुरुग्राम से भी इसी तरह का एक वीडियो सामने आया था। दिल्ली से मोहम्मद खालिक, मोहम्मद इब्राहिम और अनवर को खाने में थूकते हुए पाया गया था। मेरठ का नौशाद शादी समारोहों में भोजन पकाते समय थूका करता था। शामली में इसी तरह का एक मामला सामने आया था। पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं।

Tauktae के तबाही मचाने के बाद एक और चक्रवाती तूफान ‘Yaas’ के आने की आशंका, जानें कहाँ और कब

भारत के पश्चिमी भाग में स्थित अरब सागर में उत्पन्न हुए  Cyclone Tauktae के बाद अब बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र उत्पन्न हो रहा है। इसे लेकर मीडिया और सोशल मीडिया में चर्चा है कि बंगाल की खाड़ी में बन रहे इस कम दबाव के क्षेत्र के तीव्र होकर Cyclone Yaas में परिवर्तित होकर आगामी 23 से 27 मई के बीच पश्चिम बंगाल के तट से टकराने की आशंका है। यह दावा किया जा रहा है कि इस सुपर साइक्लोन के कारण भारत के पूर्वी तट समेत पश्चिम बंगाल के सुंदरबन इलाके में बारिश और तूफान की संभावना है।

देश के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव माधवन राजीवन ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत करते हुए कहा कि बंगाल की खाड़ी के मध्य पूर्वी क्षेत्र और उसके आसपास के इलाकों में एक कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है जिसका समय 23 मई अनुमानित है। राजीवन ने कहा, “यह सिस्टम 27 मई को ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटों से टकरा सकता है। हमारे मॉडल्स में इस कम दबाव क्षेत्र के निर्माण की जानकारी प्राप्त हो रही है लेकिन पूरी जानकारी अगले 2 या 3 दिन में उपलब्ध हो जाएगी।“ हालाँकि राजीवन ने यह भी बताया कि यदि ऐसा कोई चक्रवाती तूफान बनता भी है तो वह संभवतः Cyclone Tauktae जितना खतरनाक नहीं होगा।

अगर आया साइक्लोन तो नाम होगा Yaas, जानिए क्यों

हालाँकि क्षेत्रीय मौसम विभाग ने किसी भी चक्रवाती तूफान (Super Cyclone) की जानकारी देने से इनकार किया है। रिपब्लिक की खबर के अनुसार मौसम विभाग ने अपने बयान में कहा है कि विभाग द्वारा केवल एक कम दबाव के क्षेत्र की जानकारी दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में मध्य-पूर्वी क्षेत्र के आसपास 23 मई तक एक कम दबाव का क्षेत्र बनेगा।

मौसम विभाग का कहना है कि इस पूरे क्षेत्र की निगरानी की जा रही है और वर्तमान में किसी भी चक्रवाती तूफान की संभावनाएं मात्र कम दबाव के क्षेत्र तक ही सीमित है। यदि इस कम दबाव के क्षेत्र से किसी चक्रवाती तूफान का निर्माण होता भी है तो उसकी पूरी जानकारी और चेतावनी दी जाएगी। मौसम विभाग द्वारा यह भी बताया गया है कि यदि चक्रवात उत्पन्न होगा तो उसका नाम ‘Cyclone Yaas’ होगा। यह नाम ओमान द्वारा दिया गया है। ‘Yaas’ का तात्पर्य है निराशा।   

गुजरात में अपना प्रभाव दिखाने के बाद अब Cyclone Tauktae कमजोर पड़ने लगा है। एनडीआरएफ के प्रमुख एस एन प्रधान ने मंगलवार को बताया कि चक्रवात का सबसे खराब दौर बीत चुका है और अब चक्रवात कमजोर पड़ जाएगा। हालाँकि भारतीय मौसम विभाग ने कहा कि चक्रवात अब उत्तर भारत की ओर बढ़ चुका है जिसके कारण पंजाब, हरियाणा और सटे इलाकों में बारिश की संभावना है।

नेहरू से राहुल तक, अयोध्या से कुंभ तक… इस्लामी कट्टरपंथियों की तरह कॉन्ग्रेस के निशाने पर हिंदू

ज्यादा दिन नहीं बीते हैं जब दिल्ली के पहाड़गंज स्थित एक होटल में पुलिस ने दबिश देकर जान मोहम्मद डार उर्फ जहाँगीर को दबोचा था। इस इस्लामी आतंकी के पास से हथियार के अलावा भगवा वस्त्र, कलावा, कुमकुम मिले थे। बताया जाता है कि साधु के वेश में उसे गाजियाबाद के डासना स्थित शिव-शक्ति पीठ के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या करनी थी।

यह इकलौता उदाहरण नहीं है जब हिंदू प्रतीकों की आड़ में इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदुओं को निशाना बनाने की कोशिश की। याद करिए लखनऊ में भगवा कुर्ता पहने जेहादियों द्वारा कमलेश तिवारी की हत्या। या फिर याद करिए मुंबई में 2008 में हुए आतंकी हमले के दौरान हाथ में कलावा बाँध निदोर्षों पर ताबड़तोड़ फायरिंग करते हुए इस्लामिक जेहादी को। आप याद करते जाएँगे पर ऐसी घटनाओं की फेहरिस्त खत्म नहीं होगी।

यह अजीब विडंबना है कि जब भी बात हिंदुओं की, उनके अराध्य और आस्था की या फिर परंपराओं की आती है, देश का सबसे पुराना राजनीतिक दल, देश पर सबसे ज्यादा समय तक शासन करने वाली पार्टी, प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष तौर पर सबसे लंबे समय तक हुकूमत करने वाला परिवार, इस्लामिक कट्टरपंथियों की तरह ही अपना चरित्र दिखलाता है। नेहरू से राहुल गाँधी तक कॉन्ग्रेस ने सियासत के कई मोड़ देखे, लेकिन हिंदू घृणा और मुस्लिम तुष्टिकरण की उसकी चाल वैसी ही रही है।

हिंदुओं से कॉन्ग्रेस की घृणा का ताजा-ताजा उदाहरण उसका लीक टूलकिट है। इसमें कुंभ को कोरोना का सुपर स्प्रेडर बताकर प्रोपेगेंडा को हवा देने की रणनीति का खाका खींचा गया है। साथ ही ताकीद की गई कि यदि कोई इसके जवाब में ईद का जिक्र करे तो उसकी अनदेखी कर देनी है।

ज्यादा दिन नहीं बीते हैं जब इस तरह का चरित्र कॉन्ग्रेस ने अयोध्या राम मंदिर के लिए चलाए गए देशव्यापी धन संग्रह अभियान या उससे पहले अयोध्या में भूमिपूजन और उससे भी पहले राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर दिखाया था। इसी साल फरवरी में यूपीए की सरकार में मंत्री रहे कॉन्ग्रेसी पवन बंसल में कहा था कि उनसे भी राम मंदिर के लिए चंदा माँगा गया, लेकिन उन्होंने नहीं दिया। कॉन्ग्रेस विधायक और पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया ने राम मंदिर के लिए धन संग्रह को दारूबाजी से ही जोड़ दिया था।

राहुल और प्रियंका की आज की कॉन्ग्रेस से एक पीढ़ी पीछे चलें तो राम सेतु पर यूपीए सरकार का सुप्रीम कोर्ट में दिया हलफनामा हमारे सामने है। इस हलफनामे के जरिए भगवान राम के अस्तित्व को कॉन्ग्रेस ने तब नकारा था, जब पर्दे के पीछे से राहुल की माँ सोनिया गाँधी हुकूमत को हाँक रही थी। इसी दौर में कॉन्ग्रेस के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश के संसाधनों पर बहुसंख्यक हिंदुओं के अधिकार को एक तरह से खारिज करते हुए अल्पसंख्यकों का पहला हक बताया था।

ऐसा भी नहीं है कि भाजपा और हिंदुत्व के उभार ने कॉन्ग्रेस को हिंदू घृणा में सनने को राजनीतिक तौर पर मजबूर किया है। आजादी के बाद से ही उसका यह चरित्र लगातार दिखता रहा। सबसे पहले तो देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इसका प्रदर्शन किया था। ये नेहरू ही थे जो अयोध्या से रामलला को उनके भाइयों के साथ बेदखल करवाने पर अमादा थे।

आज राजनीतिक जमीन पर कॉन्ग्रेस भले नेहरू-इंदिरा के जमाने की तरह मजबूत नहीं रही। लेकिन, हिंदुओं की आस्था पर उसका हमला उसी सुनियोजित तरीके से जारी है। यही कारण है कि जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज जैसों को आगे आकर इससे सचेत करना पड़ रहा है। जैसा कि उन्होंने कहा है, एक सुनियोजित तरीके से भारत की संस्कृति, भारत के संस्कार, परंपरा, मूल्यों, विशेषकर सांस्कृतिक निष्ठा पर प्रहार किया जा रहा है।

जरूरी है कि अब हर हिंदू कॉन्ग्रेस और उसके शीर्ष परिवार से सवाल करे कि आखिर चरित्र में वह इस्लामी कट्टरपंथियों की तरह क्यों दिखती है? चूके तो नतीजे कश्मीर जैसे घातक हो सकते हैं।

‘Toolkit के 2 डॉक्यूमेंट, एक असली और एक नकली’: कॉन्ग्रेस नेता ने कबूला उनकी पार्टी ने बनाया था ‘टूलकिट’

सोशल मीडिया पर मंगलवार (18 मई 2021) को एक दस्तावेज जम कर शेयर किया गया जिसके बारे में यह दावा किया गया कि ये ‘कॉन्ग्रेस का टूलकिट’ है। इसमें कुम्भ मेला को बदनाम करने, ईद का महिमामंडन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि धूमिल करने और जलती चिताओं व लाशों की तस्वीरें शेयर कर भारत को बदनाम करने का खाका था। अब कॉन्ग्रेस नेता राजीव गौड़ा ने स्वीकार किया कि टूलकिट के लीक हुए दो डॉक्यूमेंट्स में से एक ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमेटी (AICC) के शोध विभाग द्वारा तैयार किया गया है।

कॉन्ग्रेस नेता राजीव गौड़ा ने ट्वीट करके यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि AICC ने ही सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर एक शोध पत्र तैयार किया। हालाँकि गौड़ा ने कहा कि टूलकिट भाजपा द्वारा बनाया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा ओरिजिनल डॉक्यूमेंट के लेखक का डाटा दिखा रही है और उसे फेक डॉक्यूमेंट से जोड़ रही है।

इससे पहले यह सामने आया था कि सेंट्रल विस्टा से संबंधित डॉक्यूमेंट सौम्या वर्मा द्वारा बनाया गया जो कि कॉन्ग्रेस नेता राजीव गौड़ा की सहयोगी हैं।  

लीक डॉक्यूमेंट का मेटाडाटा

डॉक्यूमेंट लीक होने के बाद कॉन्ग्रेस ने यह दावा किया कि यह डॉक्यूमेंट नकली है और एफआईआर कराने की धमकी भी दी लेकिन अब कॉन्ग्रेस के ही नेता ने यह स्वीकार किया है कि एक डॉक्यूमेंट असली है।   

हालाँकि ऑपइंडिया इन डॉक्यूमेंट्स की वैधता पर कोई टिप्पणी नहीं करता है लेकिन फिर भी जिस डॉक्यूमेंट को राजीव गौड़ा ने सही बताया है और लीक हुए दूसरे डॉक्यूमेंट में कई समानताएं हैं। राजीव गौड़ा द्वारा शेयर किए गए डॉक्यूमेंट (जिन्हें गौड़ा ने सही बताया है) और दूसरे डॉक्यूमेंट के ‘हेडर और फुटर’ में पूरी समानता दिखाई दे रही है।  

सेंट्रल विस्टा डॉक्यूमेंट का हेडर नोट
दूसरे डॉक्यूमेंट का हेडर नोट
कॉन्ग्रेस नेता राजीव गौड़ा द्वारा शेयर किया गया डॉक्यूमेंट का फुटर नोट
दूसरे डॉक्यूमेंट का फुटर नोट

कॉन्ग्रेस का टूलकिट :

सोशल मीडिया पर एक टूलकिट धड़ल्ले से वायरल हुआ, जिसके बारे में भाजपा नेताओं ने दावा किया कि ये कॉन्ग्रेस पार्टी का टूलकिट है। उक्त टूलकिट डॉक्यूमेंट पर कॉन्ग्रेस का चुनाव चिह्न हाथ का पंजा भी अंकित है और बताया जा रहा है कि पार्टी ने अपने नेताओं को दी गई निर्देशावली को दस्तावेज का शक्ल दिया था, जो अचानक से लीक हो गया।

इस ‘टूलकिट’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को कोरोना के प्रबंधन में असफल रहने का दावा करते हुए इसके पीछे कुम्भ मेला, चुनावी रैलियों और सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को जिम्मेदार ठहराया है। टूलकिट में नेताओं को बताया गया है कि कैसे देश के विभिन्न कोने में मोदी सरकार को घेरना है। साथ ही हरिद्वार में लगे कुम्भ को कोरोना का ‘सुपर स्प्रेडर’ करार देते हुए लिखा गया है कि भाजपा अपने फायदे के लिए हिन्दू धर्म का राजनीतिकरण करती है। वहीं टूलकिट में ईद पर सख्त हिदायत दी गई है कि ईद में जुटने वाली भीड़ विभिन्न परिवारों और समुदायों का एक सुखद मिलन समारोह है।

‘मुस्लिमों की रैली पर हिन्दू करते हैं पत्थरबाजी’: Unacademy का हिंदूफोबिया, लोगों ने कहा – ‘उम्माह एकेडमी’

हिंदूफोबिया से ग्रसित कंपनियों की सूची में अब एक नया नाम Unacademy का जुड़ा है। ये पोर्टल न सिर्फ हिन्दू-मुस्लिम तनाव का माहौल पैदा करने वाले कंटेंट्स बच्चों को परोस रहा है, बल्कि हिन्दुओं के प्रति छात्रों में घृणा का भाव भी जगा रहा है। इसकी करतूतों से तंग लोगों ने सलाह दी है कि ये अपना नाम बदल कर ‘उम्माह एकेडमी’ कर ले। वकील प्रखर बंसल ने ऐसा ही एक सवाल शेयर किया।

सवाल कुछ इस प्रकार है, “X नाम के एक शहर में मुस्लिम लोगों का एक समूह अपनी रैली निकाल रहा था। वे अपने नारे लगा रहे थे और अपना त्यौहार मना रहे थे। जब वे एक हिन्दू बहुल कॉलोनी की गलियों से गुजर रहे थे, तो क्षेत्र के हिन्दुओं ने उन पर पत्थरबाजी शुरू कर दी और दावा किया कि उन्होंने हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई है। क्या ये दावा सही है?” इसका जवाब चुनने के लिए 3 विकल्प दिए गए। वो तीनों विकल्प हैं –

  • हाँ, उन्होंने शब्दों के द्वारा, यानी नारे लगा कर हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई।
  • हाँ, उन्होंने दृश्यप्रस्तुति के द्वारा, यानी उस इलाके में रैली निकाल कर हिन्दुओं को धार्मिक भावनाओं को आहत किया।
  • नहीं, उनका इरादा किसी भी वर्ग के नागरिकों यानी हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का नहीं था।

आगे बढ़ने से पहले बता दें कि Unacademy बेंगलुरु में स्थित एक शैक्षिक तकनीकी कंपनी है। जिसे 2010 में एक यूट्यूब चैनल के रूप में गौरव मुंजाल द्वारा क्रिएट किया गया था। 2015 में इसे एक कंपनी का रूप दिया गया और हजारों शिक्षकों व छात्रों को इससे जोड़ा गया। विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों को ये लाइव क्लास की सुविधा देता है और अलग-अलग प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए मैटेरियल्स उपलब्ध कराता है।

कई अन्य लोगों ने भी Unacademy द्वारा इस तरह हिन्दूघृणा फैलाने के सबूत दिए। एक ‘Unacademy Plus’ के सब्सक्राइबर ने बताया कि बच्चों की अंग्रेजी की पुस्तकों के माध्यम से आयुर्वेद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रोपेगंडा चलाया जा रहा है। UPSC की तैयारी के लिए इस पोर्टल का प्रयोग करने वाले छात्रों का भी कहना है कि वीडियो लेक्चर्स के जरिए हिन्दू विरोधी प्रोपेगंडा फैलाया जा रहा है।

अगर ऊपर दिए गए सवाल को ही ले लें तो आप पाएँगे कि जो नैरेटिव फैलाया जा रहा है, वास्तविकता में उसके एकदम उलट चीजें हो रही हैं। एक तो अधिकतर हिन्दू त्योहारों, विसर्जन और कार्यक्रमों को ही पत्थरबाजी का सामना करना पड़ता है। ऊपर से तमिलनाडु में मुस्लिम समुदाय ने ही हिन्दुओं द्वारा रैली निकालने पर आपत्ति जताई, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट में गया। जबकि बच्चों को झूठ परोसा जा रहा है।

दुर्गा पूजा से लेकर रामनवमी जैसे त्योहारों में हिन्दुओं को प्रतिमा विसर्जन के दौरान मस्जिदों या मुस्लिम बहुल इलाकों से गुजरते हुए पत्थरबाजी का सामना करना पड़ता है। ईद की रैली या किसी मस्जिद पर पत्थरबाजी की खबर आपने सुनी है? मंदिरों में घुस कर प्रतिमाएँ खंडित कर दी जाती हैं। लेकिन, ये सब छात्रों को नहीं बताया जाता। उन्हें काल्पनिक ‘गंगा-जमुनी’ तहजीब सिखाई जाती है, जिसमें पीड़ित मुस्लिम होते हैं और अत्याचारी हिन्दू।

वैसे ये पहली बार नहीं है जब Unacademy को लेकर इस तरह का विवाद सामने आया हो। सितम्बर 2020 में UnAcademy कोचिंग सेंटर के एक शिक्षक वरुण अवस्थी को अपने एक वीडियो में छात्रों को ऐके-47 बंदूक उठाने के लिए उकसाते हुए पाया गया था। इससे पहले भी अनअकैडमी के एक शिक्षक ने ब्राह्मण को टारगेट करते हुए एक वीडियो पोस्ट किया था। वहीं एक अन्य शिक्षक ने राम मंदिर आंदोलन का मज़ाक उड़ाया था। 

‘सच बोलने वाला बन जाता है आपका दुश्मन’: नवजोत सिद्धू का ‘धमकी’ को लेकर CM अमरिंदर सिंह पर वार

कॉन्ग्रेस की पंजाब इकाई में गुटबाजी बढ़ने की अटकलों के बीच राज्य के पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह पर फिर से निशाना साधते हुए मंगलवार (मई 18, 2021) को आरोप लगाया कि पार्टी में उनके साथियों को सच बोलने को लेकर धमकाया जा रहा है। 

सिद्धू का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब कॉन्ग्रेस विधायक और पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान परगट सिंह ने हाल ही में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के राजनीतिक सलाहकार संदीप संधू पर धमकाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी की घटना पर राज्य सरकार से सवाल करने के बाद उन्हें धमकी दी गई।

अमरिंदर और सिद्धू ने धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी की जाँच को लेकर सार्वजनिक रूप से एक दूसरे पर निशाना साधा है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने पिछले महीने पंजाब पुलिस के विशेष जाँच दल (SIT) द्वारा कोटकपूरा गोलीकांड को लेकर पेश की गई जाँच रिपोर्ट को रद्द कर दिया था। पुलिस ने धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी का कोटकपूरा में विरोध कर रहे लोगों पर 2015 में कथित रूप से गोलीबारी की थी। सिद्धू ने इस मामले में अमरिंदर सिंह पर जिम्मेदारी से बचने का आरोप लगाया है।

सिद्धू ने अपने ट्विटर हैंडल पर परगट सिंह के संवाददाता सम्मेलन का वीडियो अपलोड करते हुए ट्वीट किया, “लोगों के मुद्दे उठा रहे मंत्री, विधायक और सांसद पार्टी को मजबूत कर रहे हैं, अपने लोकतांत्रिक कर्तव्यों को पूरा कर रहे हैं और अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं… लेकिन सच बोलने वाला हर व्यक्ति आपका दुश्मन बन जाता है। अपनी पार्टी सहयोगियों को धमकाकर आप अपनी डर और असुरक्षा को दर्शाते हैं।” 

हालाँकि, कॉन्ग्रेस ने मंगलवार को कहा कि राज्य में पार्टी के बीच कोई गुटबाजी नहीं है, बल्कि नेताओं के अलग-अलग विचार हैं। पंजाब से राज्यसभा सदस्यों प्रताप सिंह बाजवा और शमशेर सिंह दुलो ने भी मुख्यमंत्री की आलोचना की है और उनके कई फैसलों पर सवाल उठाए हैं।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस विधायक परगट सिंह ने सोमवार (मई 17, 2021) को मीडिया को दिए एक बयान में खुलासा किया कि उन्हें पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरफ से धमकी भरा मैसेज देने के लिए कैप्टन संदीप संधू का फोन आया था। कॉल पर कैप्टन संधू ने कथित तौर पर कहा कि सीएम ने कहा है कि उन्होंने कॉन्ग्रेस विधायक परगट सिंह के खिलाफ सभी दस्तावेज एकत्र कर लिए हैं और उन्हें कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।