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गाजीपुर में हटाए गए 2 डॉक्टर: ऑक्सीजन पर कंफ्यूजन से मरीज और उनके परिवार वालों को कर रहे थे परेशान

कोरोना के इस दौर में ऑक्सीजन को लेकर हाहाकार है। इसी ऑक्सीजन पर ढुलमुल रवैये के कारण उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में 2 डॉक्टरों को हटा दिया गया। एक्शन लिया है वहाँ के DM मंगला प्रसाद ने।

गाजीपुर जिला अस्पताल के डॉ रघुनंदन और डॉ बृजेश राय पर जिला प्रशासन की गाज गिरी। ये दोनों डॉक्टर इमरजेंसी ड्यूटी कर रहे थे और एक मरीज के साथ आए परिवार वालों से ऑक्सीजन न होने का बहाना बना रहे थे।

इस बात की शिकायत मरीज के परिवार वालों ने DM से की। DM मंगला प्रसाद ने तत्काल फोन कर शिकायतकर्ता से बात की और इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर से बात करवाने को कहा। आश्चर्य की बात यह रही कि DM से बात करने के दौरान भी डॉक्टर ऑक्सीजन की उपलब्धता से अनजान थे और शिफ्ट चेंज होने का हवाला दे रहे थे जबकि ऑक्सीजन उपलब्ध था।

DM मंगला प्रसाद ने कोरोना महामारी के इस दौर में डॉक्टरों द्वारा अपनाए ढुलमुल रवैये को गंभीरता से लिया और दोनों डॉक्टरों को कार्यमुक्त कर दिया। गाजीपुर के DM ने यह भी हिदायत दी है कि अगर मरीजों को तत्काल उपचार से वंचित रखा जाता है तो संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

ऑक्सीजन की कमी की अफवाह

गाजीपुर के DM ने फोन पर ही डॉक्टर को समझाया कि ऑक्सीजन उपलब्धता पर कंफ्यूजन के कारण अफवाह फैलती है। जबकि जिले में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। ऐसे में मरीज और उनके परिजनों पर काफी दबाव होता है। इन अफवाहों के कारण और डर का माहौल बना कर पैसे ऐंठने का काम भी समाज में अपराधी तत्व के कई लोग करते हैं।

पहले से दोनों डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत

चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ जीसी मौर्या ने बताया कि दोनों डॉक्टरों द्वारा मरीजों और उनके परिजनों के साथ दुर्व्यवहार का मामला पहले से आ रहा था। दोनों डॉक्टरों को चेतावनी भी दी गई थी लेकिन वो सुधर नहीं रहे थे। ऑक्सीजन उपलब्ध होने पर भी न होने की अफवाह फैलाते रहते थे।

‘खान मार्केट के दोस्तों को 1-1 ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर, मुझ पर बहुत अधिक दबाव है’ – नवनीत कालरा का वायरल ऑडियो

कोरोना वायरस के कहर के बीच दिल्ली में ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर्स की कालाबाजारी हो रही है। इस बीच पुलिस के हाथ बिजनेसमैन नवनीत कालरा की ऑडियो क्लिप आ गई है। इसमें वह खान मार्केट गैंग के अपने दोस्तों से ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर को लेकर बात करते सुने गए हैं।

इंडिया टुडे के पास जो ऑडियो क्लिप है, उसमें नवनीत कालरा को यह कहते सुना गया है कि उनके ऊपर “बहुत अधिक दबाव” है और वह सभी कॉल्स का जवाब नहीं दे सकते हैं। कालरा कहते हैं, “मेरे पास 2 लाख कॉल्स हैं। इसलिए मैं हर किसी के पर्सनल सवालों का जवाब नहीं दे सकता हूँ। आपको कौन सा मॉडल (ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर) भेजा गया है, इसकी डिटेल्स मैसेज में दी गई है। मैं खान मार्केट के लोगों को उनके उपयोग के लिए प्रति व्यक्ति एक मशीन दे सकता हूँ।”

ऑडियो में नवनीत कालरा आगे कहते हैं, “मेरी मशीनें ऑउट ऑफ स्टॉक हो रही हैं। इसलिए अभी मैं इसे खान मार्केट के दोस्तों को भी नहीं दे सकता हूँ। इसलिए प्लीज इस मैसेज को शेयर करें। मुझ पर बहुत अधिक दबाव है।”

बता दें कि नवनीत कालरा दिल्ली के बिजनेसमैन हैं और वह तीन रेस्टोरेंट के मालिक हैं। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार (7 मई 2021) को इन्हीं तीनों रेस्टोरेंट में छापा मारकर 524 ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर को बरामद किया था।

524 में से 105 ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर एक रेस्टोरेंट से बरामद किया था, 96 मशीनों को खान चाचा और 9 को लुटियन दिल्ली के खान मार्केट स्थित टाउन हाल से बरामद किया था। वहीं गुरुवार को पुलिस ने 419 ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर को दक्षिणी दिल्ली के लोधी मार्केट स्थित एक बार और रेस्टोरेंट से बरामद किया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए नवनीत कालरा फरार है, उसका मोबाइल बंद है। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने कहा है कि ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर्स को ऑनलाइन ऑर्डर और व्हाट्सएप ग्रुप से मँगाया जाता था।

रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपित अक्टूबर 2020 से ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर का आयात कर रहा था। लेकिन, इस साल फरवरी में और अधिक मशीनों का आयात कर उसे इन्हीं रेस्टोरेंट में रखा गया था। इस मामले में शुक्रवार को पुलिस ने 4 लोगों को गिरफ्तार भी किया था। दिल्ली पुलिस ने कथित ब्लैक-मार्केटिंग और ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर की जमाखोरी के मामले की जाँच क्राइम ब्राँच को ट्रांसफर कर दिया है।

रेप होते समय हिंदू बच्ची कलमा पढ़ के मुस्लिम बन गई, अब नहीं जा सकती काफिर माँ-बाप के पास: पाकिस्तान से वीडियो वायरल

पाकिस्तान में एक नाबालिग हिंदू लड़की को इ्स्लामी कट्टरपंथियों ने किडनैप कर 4 दिन तक उसके साथ गैंगरेप किया। जब बच्ची का रेप किया जा रहा था, तो वो कलमा पढ़ रही थी – यह रेप करने वालों ने बताया है। बलात्कारियों का कहना है कि वो कलमा पढ़ चुकी है, इसलिए उसे अब काफिरों (अपने हिंदू माँ-पिता) के पास लौटने का कोई अधिकार नहीं है। रेप पीड़िता बच्ची को इन्हें ही सौंप दिया जाए। घटना पाकिस्तान के सिंध प्रांत के कोट गुलाम मुहम्मद की है।

सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें रेप पीड़िता ने आरोप लगाया है कि मोहम्मद तनवीर और उसके साथियों ने उसका अपहरण कर चार दिनों तक उसके साथ गैंगरेप किया। जिहाद वाच की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में पुलिस ने न तो कोई केस दर्ज किया है और न ही आरोपितों के खिलाफ कोई कार्रवाई की है।

हालात ये है कि आरोपित पूरी तरह से आजाद घूम रहे हैं और उन्होंने पीड़ित हिंदू लड़की लीलन कोहली को उन्हें दोबारा से सौंपने की माँग की है। आरोपितों का दावा है कि गैंगरेप के दौरान लड़की कलमा पढ़ रही थी, जिससे अब वो धर्मान्तरित होकर मुस्लिम बन गई है। ऐसे में अब वह अपने “काफिर” परिवार के साथ वापस नहीं लौट सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, नाबालिग के साथ बलात्कार करते समय एक आरोपित ने सोचा कि क्यों न उसका जबरन धर्म परिवर्तन कराया जाय। इसके बाद उसने नाबालिग हिंदू लड़की का रेप करते हुए उसे कलमा पढ़ने के लिए मजबूर किया। जब कोई इस्लाम अपनाता है तो उसे कलमा ही पढ़ाया जाता है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यक हैं और बहुसंख्यक इस्लामी पुरुष आए दिन हिंदू महिलाओं का अपहरण कर उनका रेप और हत्या करते हैं।

जिहाद वाच की रिपोर्ट में इस बात पर संदेह जताया गया है कि पाकिस्तान की सरकार किसी भी रूप में पीड़ित हिंदू नाबालिग लड़की की सहायता करेगी। संभावना केवल इस बात की है कि अपराध की जाँच करते समय पाकिस्तानी अधिकारी लड़की को रिहैबिलिटेशन सेंटर में डाल देंगे, लेकिन वहाँ और खराब हालात होंगे। क्योंकि वहाँ कथित तौर पर पीड़ित को उसके परिवार से मिलने नहीं दिया जाता और उसे आगे भी गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी जाती है।

अल्पसंख्यक समुदाय को कभी-कभार ही मिला इंसाफ

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में बहुसंख्यक मुसलमान जब भी किसी अल्पसंख्यक लड़की के साथ छेड़छाड़ या बलात्कार करते हैं तो ऐसी स्थिति में उसे इंसाफ मिलना मुश्किल होता है। कभी-कभार ही अल्पसंख्यक पीड़ितों का पाकिस्तान में इंसाफ मिल पाता है।

मुरादाबाद और बरेली में दौरे पर थे सीएम योगी: अचानक गाँव में Covid संक्रमितों के पहुँचे घर, पूछा- दवा मिली क्या?

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार सक्रियता से चाइनीज कोरोना वायरस के संक्रमण का सामना कर रही है। सीएम आदित्यनाथ प्रदेश में संक्रमण की रफ्तार को रोकने और मरीजों के बेहतर उपचार के लिए अधिकारियों के साथ लगातार मीटिंग कर रहे हैं और व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने मुरादाबाद और बरेली में स्वास्थ्य सुविधाओं का निरीक्षण किया लेकिन इस दौरान सीएम आदित्यनाथ अचानक ही गाँव के दौरे पर निकल पड़े और होम आइसोलेशन में रह रहे Covid-19 संक्रमित मरीजों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। उनके इस अप्रत्याशित निर्णय का अंदाजा उनके अधिकारियों को भी नहीं था।

शनिवार (08 मई) को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुरादाबाद में इंटीग्रेटेड कोविड कमांड सेंटर का दौरा किया। इसके बाद उन्होंने सर्किट हाउस में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की। हालाँकि इसके बाद उनका बरेली का कार्यक्रम तय था लेकिन इस बीच सीएम आदित्यनाथ ने मुरादाबाद के एक गाँव मनोहरपुर का दौरा करने का अप्रत्याशित कार्यक्रम बना लिया।

मनोहरपुर पहुँच कर सीएम आदित्यनाथ पैदल ही गाँव के भ्रमण पर निकल पड़े और स्थानीय लोगों से मिलकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने लगे। इस दौरान उन्होंने लोगों के घर-घर जाकर दवाओं की उपलब्धता और कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के विषय में भी जानकारी ली। उन्होंने होम आइसोलेशन में रह रहे Covid-19 संक्रमित मरीजों के स्वास्थ्य की जानकारी भी ली।  

इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बरेली में कोविड कमांड कंट्रोल का दौरा किया। सीएम आदित्यनाथ ने वहाँ भी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से बातचीत की। इसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ इज्जतनगर थाना क्षेत्र के मुड़िया नवी अहमद नगर गाँव पहुँच गए जहाँ उन्होंने ग्रामीणों से पूछा कि क्या उन्हें कोविड की दवाएं मिल रही हैं या नहीं। उन्होंने ग्रामीणों को गाँव को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के बारे में भी सुझाव दिया।

उत्तर प्रदेश में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस संक्रमण के 26,847 नए मामले सामने आए हैं। इसके अलावा संक्रमण से 298 मौतें हुई हैं लेकिन पिछले 24 घंटों में ही स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या 34,721 रही।  

‘2015 से ही कोरोना वायरस को हथियार बनाना चाहता था चीन’, चीनी रिसर्च पेपर के हवाले से ‘द वीकेंड’ ने किया खुलासा: रिपोर्ट

दुनियाभर में कोरोना वायरस के कहर के बीच “द वीकेंड ऑस्ट्रेलियन” मैग्जीन ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। मैग्जीन ने 6 साल पहले 2015 के चीनी वैज्ञानिकों के रिसर्च पेपर के जरिए दावा किया है कि SARS कोरोना वायरस के जरिए चीन दुनिया के खिलाफ जैविक हथियार बना रहा था।

“द अननैचुरल ओरिजिन ऑफ सार्स एंड न्यू स्पीसीज ऑफ मैन-मेड वायरस टू जेनेटिक बायो वेपन” शीर्षक वाले इस शोध पत्र में चीनी वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य अधिकारियों ने भविष्यवाणी की थी कि किस तरह से तीसरे विश्व युद्ध में “जैविक हथियारों” का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें यह भी बताया गया है कि कैसे SARS कोरोनावायरस को “जेनेटिक हथियारों” के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें कृत्रिम रूप से हेरफेर करके मानव रोग वायरस में बदला जा सकता है। वैज्ञानिकों ने इस बात पर भी चर्चा की है कि इस वायरस को ऐसे हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसे पहले कभी नहीं देखा गया होगा।

रिसर्च पेपर की यह हैरान करने वाली जानकारी 6 साल पहले प्रकाशित हुई थी, लेकिन कोरोना के कारण उपजे वैश्विक संकट से यह अस्वाभिक रूप से समानता है। ऑस्ट्रेलियाई रणनीतिक संस्थान के कार्यकारी निदेशक पीटर जेनिंग्स ने डॉक्यूमेंट्स में “स्मोक गन” के रूप में इस रहस्य पर से पर्दा उठाया है। उन्होंने इस मामले में जोर देकर कहा, “मुझे लगता है कि यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होता है कि चीनी वैज्ञानिक कोरोना वायरस के अनेक रूपों को मिलिट्री वेपन के तौर पर इस्तेमाल करने के बारे में सोच रहे हैं। वे यह सोच रहे हैं कि इसे कहाँ डिप्लॉय किया जाय।”

कोरोना वायरस की स्वतंत्र जाँच से पीछे हट रहा चीन

जेनिंग्स कहते हैं, “इसे इस बात की संभावनाओं के बारे में जानने के लिए शुरू किया गया था कि वायरस का सैन्य इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर इसका फैलाव होता है तो इससे चीन को मदद मिलेगी। लेकिन हम इसके उलट हैं।” एएसपीआई के कार्यकारी निदेशक ने बताया कि कैसे कोरोना वायरस की उत्पत्ति की स्वतंत्र जाँच कराने से चीन बचता रहा है।

रिसर्च पेपर में पीएलए के समर्थन वाले कई लेखक थे

इस रिसर्च पेपर के 18 राइटर्स में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) से जुड़े वैज्ञानिक और हथियार विशेषज्ञ शामिल हैं। इसे साइबर वेरीफिकेशन एक्सपर्ट रॉबर्ट पॉटर ने वेरिफाई किया था। रॉबर्ट पॉटर ने इसको लेकर कहा था, “हम एक हाई कॉन्फिडेंस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि ये जेनुइन है। लेकिन अब यह किसी और पर निर्भर है कि यह कितना गंभीर है। इसे कुछ साल पहले ही ईजाद किया गया था अब चीन इसे निश्चित तौर पर हटाने की कोशिश करेगा। अब इसे कवर किया गया है।”

हालाँकि, रॉबर्ट पॉटर ने चीनी वैज्ञानिकों के रिसर्च पर चर्चा करने को लेकर संदेह व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह खुद से ही नहीं बना, बल्कि चीनी सरकार द्वारा इस पर कार्रवाई की गई थी। रॉबर्ट पॉटर आगे लिखते हैं, “यह हकीकत में बहुत ही दिलचस्प लेख है, जिसके जरिए यह दिखाया जा सके कि उनके वैज्ञानिक और शोधकर्ता क्या सोच रहे हैं।” जब कोरोना वायरस की उत्पत्ति के बारे में जानने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम ने चीन का दौरा किया था, तब इसका उल्लेख किया जाना चाहिए था।

वैज्ञानिकों ने डब्ल्यूएचओ की जाँच में खामियों की ओर किया इशारा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और चीनी विशेषज्ञ मिशन की संयुक्त टीम ने दावा किया है कि कोरोना वायरस दिसंबर 2019 से पहले चीन के वुहान प्रांत में था ही नहीं। बीते 4 मार्च को वैज्ञानिकों के एक समूह ने संयुक्त राष्ट्र को एक ओपेन लेटर लिखा था, जिसमें कोरोना वायरस के जाँच की वैज्ञानिक वैधता से समझौता किए जाने के बारे में जानकारी दी गई थी।

इस पत्र में 26 लोगों में अपने हस्ताक्षर किए थे, जिसमें वुहान कोरोना वायरस के उत्पत्ति की निष्पक्ष जाँच की माँग की गई थी। वैज्ञानिकों ने अफसोस जताया है कि वायरस की उत्पत्ति का स्थान महामारी के फैलने के एक साल बाद भी नहीं पता चल सका है। उन्होंने कहा, “हम यह आवश्यक मानते हैं कि महामारी की उत्पत्ति के बारे में सभी परिकल्पनाओं की पूरी तरह से जाँच की जाती है और राजनीतिक या अन्य संवेदनशीलता के संबंध में सभी आवश्यक संसाधनों तक पूरी पहुँच दी जाती है।”

वैज्ञानिकों का कहना है, “हमारे विश्लेषण के आधार पर जैसा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और चीनी अधिकारियों द्वारा बुलाई गई ग्लोबल स्टडी में पता चला है कि इस वायरस के प्राकृतिक उत्पत्ति का कोई सबूत नहीं हैं।” भविष्य की समस्याओं की तरफ इशारा करते हुए पत्र में कहा गया है कि वैज्ञानिक इस तथ्य के बारे में सार्वजनिक जागरूकता लाना चाहते हैं कि उस जाँच टीम में आधे चीनी नागरिक शामिल हैं, जिनकी वैज्ञानिक स्वतंत्रता सीमित हो सकती है।

MP में कोरोना कर्फ्यू के दौरान नमाज के लिए 2 मस्जिदों में जुटी भीड़: 2 मौलवियों और 200 अन्य के खिलाफ केस दर्ज

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के कारण मध्य प्रदेश में कोरोना कर्फ्यू लागू है जिसके कारण सभी प्रकार के सामूहिक आयोजनों पर पूर्णतः पाबंदी है। हालाँकि, एमपी के छतरपुर जिले में पाबंदियों के बाद भी 2 मस्जिद में सामूहिक नमाज पढ़ने का मामला सामने आया है। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो मौलवियों समेत 200 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

घटना एमपी के छतरपुर जिले से 23 किमी दूर नौगाँव की है। बताया जा रहा है कि नौगाँव में दो मस्जिदों, जामा मस्जिद और पल्टन मस्जिद में कोरोना कर्फ्यू लागू होने के बाद भी सैकड़ों लोगों ने नमाज पढ़ी। नौगाँव के थाना प्रभारी संजय बेदिया ने बताया कि इस प्रकार के सामूहिक आयोजनों पर पूर्णतः प्रतिबंध के कारण भी दोनों मस्जिदों में भीड़ इकट्ठा हुई।

जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुँचे और Covid-19 की गाइडलाइंस का उल्लंघन करने के लिए दो मौलवियों और 200 अन्य लोगों पर IPC की धारा 188, 270 एवं 271 के तहत मामला दर्ज किया गया। हालाँकि थाना प्रभारी बेदिया ने बताया कि पहले भी इन मस्जिदों में इसी प्रकार भीड़ जुटी थी लेकिन तब चेतवानी देकर इन लोगों को छोड़ दिया गया था लेकिन इस बार Covid-19 की गाइडलाइंस का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आपको बता दें कि एमपी के अलावा हाल ही में केरल के मुन्नार में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया जहाँ एक वार्षिक कार्यक्रम का हिस्सा बने चर्च ऑफ साउथ इंडिया (CSI) के 480 पादरियों को Covid-19 प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले 100 से ज्यादा पादरी कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे। इसके अलावा 2 पादरियों की मौत हो गई थी जबकि 5 गंभीर अवस्था में थे।

इसके अलावा हैदराबाद में ईद-उल-फितर से पहले चारमीनार बाजार के पास कोविड प्रोटोकॉल्स की खुलेआम धज्जियाँ उड़ती नजर आईं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दिखा कि कैसे बाजार में घूमने वाला कोई भी व्यक्ति महामारी को लेकर गम्भीर नहीं है। सोशल डिस्टेंसिंग तो दूर की बात है ज्यादातर लोग बिना मास्क के ही नजर आए।

SC ने गठित की टास्क फोर्स: देश भर में ऑक्सीजन की करेगी मॉनिटरिंग, दिल्ली में ऑक्सीजन ऑडिट को दी मंजूरी

शनिवार (08 मई) को सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में मेडिकल ऑक्सीजन की माँग और उसके वितरण के लिए एक 12 सदस्यीय राष्ट्रीय टास्क फोर्स के गठन का आदेश दिया है। यह टास्क फोर्स देश भर में ऑक्सीजन की उपलब्धता और उसके उचित वितरण के अलावा अत्यावश्यक दवाओं और चिकित्सा सुविधाओं पर भी अपनी सिफारिश देगी।

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण और साथ ही बढ़ती चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता को ध्यान में रखकर सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने 12 सदस्यीय राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन किया है जिसमें 10 डॉक्टर, केंद्र का कैबिनेट सचिव और स्वास्थ्य मंत्रालय का गृह सचिव भी शामिल है। केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिव को टास्क फोर्स का कन्वेनर बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट की इस बेंच में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के अलावा जस्टिस एमआर शाह भी शामिल रहे। टास्क फोर्स का प्रारंभिक कार्यकाल 6 महीने का होगा।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित यह टास्क फोर्स महामारी के दौरान की जा रही तैयारियों का जायजा लेगी और भविष्य में किसी भी आपात स्थिति की संभावना के हिसाब से दवाओं और चिकित्सा सुविधाओं की माँग, उपलब्धता और आपूर्ति को लेकर अपनी सिफारिशें पेश करेगी।

हालाँकि कोर्ट ने कहा कि जब तक टास्क फोर्स ऑक्सीजन वितरण पर अपनी सिफारिशें नहीं देती तब तक केंद्र सरकार वर्तमान व्यवस्था के अनुसार देश भर में ऑक्सीजन का वितरण करती रहेगी।  

सुप्रीम कोर्ट के द्वारा गठित इस टास्क फोर्स में डॉ. भाबतोष विश्वास, डॉ. देवेन्द्र सिंह राणा, डॉ. देवी प्रसाद शेट्टी, डॉ. गगनदीप कंग, डॉ. जेवी पीटर, डॉ. नरेश त्रेहान, डॉ. राहुल पंडित, डॉ. सौमित्र रावत, डॉ. शिव कुमार सरिन और डॉ. जरीर एफ उड़वादिया शामिल हैं। टास्क फोर्स में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार का सचिव और टास्क फोर्स के कन्वेनर के रूप में केंद्र सरकार का एक कैबिनेट सचिव भी होगा।

इसके अलावा दिल्ली में ऑक्सीजन की आपूर्ति के संबंध में भी सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पारित किया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार दिल्ली में ऑक्सीजन की आपूर्ति और उसकी दक्षता के ऑडिट के लिए एक ऑडिट समूह का गठन किया जाएगा। इस ऑडिट समूह में एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया, डॉ. संदीप बुद्धिराजा और केंद्र सरकार एवं दिल्ली सरकार से एक-एक आईएएस अधिकारी होंगे। ज्ञात हो कि इससे पहले दिल्ली सरकार ने ऑक्सीजन की ऑडिट से इनकार कर दिया था।

नेहरू के अखबार का वो पत्रकार, जिसने पोप को दी चुनौती… धर्म परिवर्तन के खिलाफ विश्व हिन्दू परिषद की रखी नींव

स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती का जन्म 1916 में आज ही के दिन (08 मई) हुआ था। महान भारतीय दर्शन अद्वैत वेदान्त के अनुयायी और भगवद्गीता, उपनिषद और अन्य हिन्दू शास्त्रों के प्रचारक स्वामी चिन्मयानन्द का जीवन कभी भी साधारण नहीं रहा। चिन्मय मिशन के संस्थापक और विश्व हिन्दू परिषद की नींव रखने वाले स्वामी चिन्मयानन्द पहले एक स्वतंत्रता सेनानी और जवाहरलाल नेहरू के द्वारा स्थापित द नेशनल हेराल्ड में पत्रकार थे। हालाँकि बालकृष्ण मेनन से स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती बनने का उनका सफर बड़ा ही रोचक है।

स्वामी चिन्मयानन्द केरल में ही जन्में और वहीं उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा भी हुई लेकिन अंग्रेजी साहित्य में पोस्ट ग्रेजुएट करने के लिए स्वामी चिन्मयानन्द लखनऊ आए। यहाँ उन्होंने 1940-43 के दौरान लखनऊ विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री हासिल की। इस दौरान उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। स्वामी चिन्मयानन्द अंग्रेजों द्वारा 1944 में गिरफ्तार किए गए। इसी दौरान उनकी मुलाकात नेशनल हेराल्ड के प्रथम संपादक के रामाराव से हुई, जिन्होंने स्वामी चिन्मयानन्द को एक पत्रकार के तौर पर नेशनल हेराल्ड में नौकरी दी। नेशनल हेराल्ड की स्थापना भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी।

पत्रकारिता के इसी कालक्रम से शुरुआत हुई स्वामी चिन्मयानन्द के आध्यात्मिक जीवन की। हुआ असल में ऐसा कि पत्रकार के तौर पर कार्य करते हुए 1947 की गर्मियों में स्वामी चिन्मयानन्द हरिद्वार के ऋषिकेश स्थित शिवानंद सरस्वती के आश्रम पहुँचे। स्वामी चिन्मयानन्द वहाँ साधुओं को उजागर करने के लिए गए थे लेकिन वहाँ पहुँचने के बाद उनके भीतर हिन्दू धर्म और उसके दर्शन को लेकर गहरी जिज्ञासा जाग उठी। इसके समाधान के लिए उन्होंने शिवानंद सरस्वती से संपर्क किया। इसके बाद 31 वर्ष की उम्र में स्वामी चिन्मयानन्द साधु बन गए और अंततः 25 फरवरी 1949 को महाशिवरात्रि के अवसर पर उन्होंने शिवानंद सरस्वती से दीक्षा ली और संन्यास ग्रहण कर लिया। इस प्रकार बालकृष्ण मेनन, स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती बन गए।

स्वामी चिन्मयानन्द हिन्दू धर्म के उत्थान के लिए योगदान देना चाहते थे और उनका उद्देश्य था कि विश्व भर के हिन्दू संगठित होकर इस कार्य में अपना योगदान दें। 1963 में स्वामी चिन्मयानन्द ने पहली बार एक वैश्विक हिन्दू संगठन का विचार पूरे हिन्दू समाज के सामने रखा और हिन्दू धर्म के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया कि हिन्दू धर्म के उत्थान और एकत्रीकरण के लिए हिंदुओं के प्रतिनिधि एक साथ मिलकर प्रयत्न करें। उनके इस विचार से तत्कालीन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक शिवराम शंकर आपटे बहुत प्रभावित हुए।

अगस्त 1964 में स्वामी चिन्मयानन्द और आरएसएस प्रचारक आपटे ने संदीपनी आश्रम में एक सभा का आयोजन किया जहाँ हिन्दू संगठनों के कई प्रतिनिधि पहुँचे। इसी सभा में हिंदुओं के बड़े संगठनों में से एक विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना हुई। इसी सभा में स्वामी चिन्मयानन्द को संगठन का अध्यक्ष और आपटे को महासचिव नियुक्त किया गया। विश्व हिन्दू परिषद का उद्देश्य तय हुआ, हिंदुओं और हिन्दू धर्म का उत्थान एवं विकास।

अगस्त 1964 में ही पोप ने घोषणा की कि उस साल नवंबर में इंटरनेशनल यूकेरिस्टिक कॉन्फ्रेंस (International Eucharistic conference) का आयोजन बॉम्बे में होगा। विश्व हिंदू परिषद के गठन और भविष्य में उसकी रूप-रेखा/कार्यशैली आदि पर नवंबर 1964 की यह घटना खासा महत्व रखती है। Religion, Caste & Politics in India नाम की एक किताब है। लेखक हैं – Christophe Jaffrelot – इस किताब के पेज 228 और 229 को पढ़िए।

Christophe Jaffrelot की किताब Religion, Caste & Politics in India से साभार
Christophe Jaffrelot की किताब Religion, Caste & Politics in India से साभार
Christophe Jaffrelot की किताब Religion, Caste & Politics in India से साभार

भारत के पिछड़े इलाकों (तब के बिहार, अभी के झारखंड) में उस समय गरीब-लाचार हिंदुओं को लालच-प्रलोभन देकर ईसाई बनाने का धंधा जोरों पर था। स्वामी चिन्मयानन्द इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानते थे। इसी बात की चर्चा RSS के मुखपत्र The Organiser में भी की गई थी। चर्च के बढ़ते प्रचार-प्रसार और हिंदुओं के साथ-साथ देश की आदिवासी जनसंख्या के धर्म परिवर्तन पर अंकुश लगाने के लिए ही विश्व हिंदू परिषद (VHP) अपने आप को तैयार करती है।

विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना करते समय स्वामी चिन्मयानन्द ने कहा था, “जिस दिन प्रत्येक हिन्दू जागृत होगा और उसे अपनी हिन्दू पहचान पर गर्व होगा, उस दिन परिषद का कार्य पूर्ण हो जाएगा और उन्हें (स्वामी चिन्मयानन्द) इसका पुरस्कार प्राप्त हो जाएगा। एक बार हिन्दू, अपने हिन्दू धर्म में वापस आ गए तो फिर सब ठीक हो जाएगा।“  

हिन्दू धर्म और उसके दर्शन के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले स्वामी चिन्मयानन्द का निधन 3 अगस्त 1993 को हुआ। उनके द्वारा स्थापित चिन्मय मिशन आज भी विश्व भर में हिन्दू वेदान्त और स्वामी चिन्मयानन्द के विचारों का प्रचार-प्रसार कर रहा है।

थाइलैंड की कॉलगर्ल का लखनऊ में कोरोना से निधन, एजेंट सलमान की मदद से आई थी इंडिया: यूपी पुलिस को रैकेट की तलाश

कोरोना वायरस के कहर के बीच एक बिजनेसमैन के बेटे के बुलावे पर इंडिया आई थाईलैंड की कॉल गर्ल का कोरोना से निधन हो गया। उसे इलाज के लिए लखनऊ के लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उसने अंतिम साँस ली। व्यवसायी के बेटे द्वारा 7 लाख रुपए खर्च कर उसे भारत लाया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, भारत पहुँचने के दो दिन बाद वह बीमार हो गई और 3 मई को निधन हो गया।

पुलिस ने मृतक कॉल गर्ल के परिवार को शव सौंपने के लिए थाईलैंड दूतावास से संपर्क किया। हालाँकि, शव का दावा करने के लिए कोई भी आगे नहीं आया। इसके बाद प्रशासन ने उसे भारत लाने वाले एजेंट की उपस्थिति में ही उसका अंतिम संस्कार करवा दिया। खबरों के अनुसार एजेंट की पहचान एक सलमान के तौर पर हुई है।

इस बीच यूपी पुलिस ने शहर के अंतरराष्ट्रीय सेक्स रैकेट की जाँच शुरू कर दी है। अधिकारी इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि उसके संपर्क में कौन-कौन आया था। पुलिस के अनुसार, वह राजस्थान के एक ट्रैवल एजेंट के संपर्क में थी। ट्रैवल एजेंट ने ही उसे लखनऊ भेजा था।

लखनऊ के बिजनेसमैन के बेटे खुद थाईलैंड दूतावास से संपर्क कर बीमार होने पर उन्हें स्थिति की जानकारी दी थी। इसके बाद ही भारत के विदेश मंत्रालय की मदद से थाईलैंड दूतावास ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया।

उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर का कहर लगातार जारी है। राज्य में वर्तमान में कोविड-19 के 2,54,118 एक्टिव केस हैं।

‘मदरसा छाप, मिर्जापुर का ललित’: दिल्ली में ऑक्सीजन की बर्बादी पर तजिंदर बग्गा और अमानतुल्लाह के बीच छिड़ा वाक युद्ध

शुक्रवार को दिल्ली भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने दिल्ली के सरकारी अस्पताल डीडीयू हॉस्पिटल का वीडियो जारी किया और आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार के अधिकारी ऑक्सीजन बर्बाद कर रहे हैं जिससे दिल्ली में ऑक्सीजन संकट पैदा हो। बग्गा के आरोप के बाद आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान और तजिंदर पाल सिंह बग्गा के बीच ट्विटर पर जंग छिड़ गई।   

अमानतुल्लाह खान ने अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए बग्गा पर फेक न्यूज फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि बग्गा को पढ़-लिख लेना चाहिए जिससे उन्हें कोई रोजगार मिल सके।

इस पर तजिंदर बग्गा ने कहा कि बाटला हाउस इनकाउंटर को फर्जी बताने वाला और मोहनचंद शर्मा के बलिदान का अपमान करने वाला आज फेक न्यूज की बात कर रहा है। बग्गा ने अमानतुल्लाह खान को ‘मदरसा छाप दंगाई विधायक’ भी कहा जिस पर अमानतुल्लाह खान ने कहा कि बग्गा ‘व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी’ से ज्ञान लेते हैं और खान ने बग्गा को यह भी कहा कि ‘छोटू’ बड़ा हो गया।  

तजिंदर बग्गा ने अमानतुल्लाह खान को ‘मिर्जापुर का ललित’ बुलाते हुए कहा कि अमानतुल्लाह खान और उसके ऑक्सीजन चोर आप विधायक इमरान हुसैन पर दिल्ली की जनता सर्जिकल स्ट्राइक करेगी।   

राष्ट्रीय राजधानी में कोरोना वायरस संक्रमण पर असफल रहने वाली दिल्ली की आप सरकार की खासी आलोचना हो रही है। दिल्ली की सरकार ने दिल्ली में ऑक्सीजन ऑडिट को भी नकार दिया। दिल्ली सरकार के द्वारा ऑक्सीजन के ऑडिट के लिए मना करने का कारण स्पष्ट नहीं है लेकिन आँकड़े कहते हैं कि दिल्ली सरकार मुंबई से चार गुना अधिक ऑक्सीजन की माँग कर रही है जबकि मुंबई में कोरोना वायरस के सक्रिय संक्रमित मरीजों की संख्या (54,162) दिल्ली (87,907) के आधे से थोड़ा ही अधिक है।