Home Blog Page 3816

कॉन्ग्रेस टूलकिट का प्रभाव? पैट कमिंस और दलाई लामा को PM CARES फंड में दान करने के लिए किया गया था ट्रोल

सोशल मीडिया पर पीएम मोदी को बदनाम करने के लिए एक नया टूलकिट सामने आने के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी एक बार फिर से सुर्खियों में है। “कोर्नरिंग नरेंद्र मोदी एंड कोविड मिसमैनेजमेंट” शीर्षक वाले चार-पृष्ठ के दस्तावेज में पीएम केयर्स फंड को बदनाम करने की योजना थी। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या कोविड रिलीफ ट्रस्ट को बदनाम करने के लिए टूलकिट में उजागर की गई रणनीति पहले से ही अमल में है।

वायरल हो रहे ‘पीएम मोदी को बदनाम’ करने के लिए टूलकिट के अनुसार, दस्तावेजों में क्रिकेटर पैट कमिंस और तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा दोनों को सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स द्वारा घेरने की रणनीति सामने आई है।

टूलकिट के सेक्शन II (बी) में लिखा है, “अगर कोई सेलिब्रिटी PMCARES को दान करता है, तो उनसे आक्रामक तरीके से सवाल करें। अगर वे सोशल मीडिया पर हैं, तो उन्हें शर्मिंदा करने के लिए कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया विभाग का इस्तेमाल करें।” छोटे और प्रभावशाली ट्विटर यूजर्स द्वारा दो सेलिब्रिटीज से ऑनलाइन सवाल कर उन्हें परेशान किया गया है। क्या टूलकिट में ऊपर दी गई नापाक योजनाएँ पहले से ही अमल में थीं।

PM CARES Fund की स्थापना मार्च 2020 में की गई थी, जब दुनिया भर में कोरोना महामारी फैल गई थी। PM CARES फंड एक आपातकालीन कोष है, जिसे कोरोना वायरस से प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया था। प्रधानमंत्री इस ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं और इसके सदस्यों में रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री शामिल हैं।

पैट कमिंस ने कोरोना से जूझ रहे भारत के लिए मदद का हाथ आगे बढ़ाया था

26 अप्रैल को, ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर पैट कमिंस ने कोरोना से जूझ रहे भारत के लिए मदद का हाथ आगे बढ़ाया था। उन्होंने ट्वीट किया, ”भारत एक ऐसा देश है, जहाँ पिछले कुछ वर्षों से मुझे बहुत प्यार मिला है और यहाँ के लोग भी बहुत प्यारे और सपोर्टिंग हैं। मैं जानता हूँ कि पिछले कुछ समय से इस देश में कोरोना वायरस की वजह से काफी दिक्कतें पैदा हो गई हैं, जिसमें पूरे देश में अस्पतालों में ऑक्सीजन की भारी कमी का होना शामिल है। ऐसे में एक खिलाड़ी होने के नाते, मैं पीएम केयर्स फंड में 50 हजार यूएस डॉलर(लगभग 38 लाख रुपए) सहायता राशि के रूप में देना चाहता हूँ और मैं अपने साथी खिलाड़ियों से भी गुजारिश करता हूँ कि वे भी मदद के लिए आगे आएँ।”

हालाँकि, उनके इस ट्वीट के बाद उन्हें कुछ ही घंटों के बाद धमकाया जाने लगा। ट्वीटर पर वैरिफाइड अकाउंट ने पीएम केयर्स फंड की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया। कुछ ने दावा किया कि इस धन का इस्तेमाल भाजपा चुनाव लड़ने के लिए करेगी, जबकि अन्य ने आरोप लगाया कि इस धन का गलत प्रबंधन किया गया है।

एक कॉन्ग्रेस समर्थक ने पैट कमिंस को भ्रमित करने का प्रयास किया था। उसने कहा कि उनकी यह पहल बेहद सराहनीय है, लेकिन उन्होंने अपना पैसा गलत हाथों में दे दिया है। फिर, उस व्यक्ति ने बेबुनियाद दावा किया कि पीएम केयर्स फंड का इस्तेमाल मुख्य रूप से चुनाव जीतने के लिए किया गया था।

कुछ दिनों बाद, इक्का-दुक्का क्रिकेटरों ने भी घोषणा की कि उन्होंने पीएम केयर्स फंड से अपना दान यूनिसेफ ऑस्ट्रेलिया को स्थानांतरित कर दिया है। जबकि पैट कमिंस ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया।

दलाई लामा ने पीएम केयर्स फंड में दान करने का संकल्प लिया था

वहीं, पिछले महीने निर्वासित तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने पीएम केयर्स फंड में दान करने का संकल्प लिया था। कोरोना महामारी के खिलाफ भारत की लड़ाई में उनका योगदान सराहनीय था। लेकिन 1959 से भारत में रह रहे आध्यात्मिक गुरु को जल्द ही सोशल मीडिया पर कुछ लोगों की नफरत का सामना करना पड़ा। एक यूजर ने लिखा, “कृपया लोगों को दान करें, पीएम-केयर्स के जरिए नहीं।”

एक अन्य यूजर्स ने दावा किया कि यह धन उन लोगों तक नहीं पहुँच सकता है, जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है। पीएम-केयर्स में योगदान करने की बजाय प्रभावितों को मुफ्त भोजन में दान देना ज्यादा फायदेमंद है।

बता दें कि सोशल मीडिया पर एक और टूलकिट धड़ल्ले से वायरल हो रहा है, जिसके बारे में भाजपा नेताओं ने दावा किया है कि ये कॉन्ग्रेस पार्टी का है। उक्त दस्तावेज पर कॉन्ग्रेस का चुनाव चिह्न हाथ छाप भी अंकित है और बताया जा रहा है कि पार्टी ने अपने नेताओं को दी गई निर्देशावली को दस्तावेज का शक्ल दिया था, जो अचानक से लीक हो गया। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने इसे ट्विटर पर शेयर करते हुए तंज कसा कि कॉन्ग्रेस इस तरीके से आपदा में लोगों की मदद कर रही है।

मायावती का उड़ाया था भद्दा मजाक: फेमिनिज्म इन इंडिया की एडिटर जपलीन पसरीचा ने 9 साल बाद माँगी माफी

जपलीन पसरीचा अक्सर अपने लेख और विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रही हैं। फेमिनिज्म इन इंडिया की संस्थापक-सीईओ व एडिटर इन चीफ जपलीन पसरीचा ने साल 2012 में बसपा सुप्रीमो मायावती को लेकर एक आपत्तिजनक (sexist jibe) ट्वीट किया था। इसको लेकर उन्होंने 9 साल बाद यानी आज (18 मई 2021) ट्वीट कर माफी माँगी है।

दरअसल, उन्होंने अपने एक ट्वीट में उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के बच्चे नहीं होने और उनके द्वारा जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन की बात करने के लिए उनका मजाक उड़ाया था।

महिलाओं के मुद्दे पर जोर शोर से अपनी बात रखने वाली जपलीन पसरीचा ने बहन मायावती का मजाक उड़ाते हुए ट्वीट किया था, ”मायावती लोकसभा में परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण के बारे में बात कर रही हैं। लालू गुस्से में बोले: बेबी, जब आप गेम खेल नहीं सकती, तो नियम मत बनाओ।”

इतने सालों के बाद ट्वीट के वायरल होने के बाद पसरीचा ने मंगलवार (18 मई 2021) को माफी माँगी। उन्होंने इसके लिए ‘internalised sexism and casteism’ को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने लिखा, ”9 साल पहले किए गए इस ट्वीट के लिए मैं बिना शर्त माफी माँगती हूँ। उस समय मैं इससे बिल्कुल अंजान थी। तब से मैंने बहुत सारे internalised sexism and casteism को अनसुना कर दिया है। मुझे माफ कर दो, हाथ जोड़ती हूँ।”

उन्होंने कहा कि नौ साल पुराने ट्वीट को लेकर उनके खिलाफ एक अभियान शुरू किया गया।

वहीं, जपलीन पसरीचा द्वारा मायावती को लेकर किए गए कमेंट पर उनकी काफी निंदा भी की गई थी।

एक यूजर ने लिखा कि तुम फेमिनिस्ट होने का दावा करती हो, चूल्लू भर पानी में डूबकर मर जाओ जपलीन।

मालूम हो कि उनके ट्वीट ने सवर्णों के खिलाफ कई जातिवादी हमलों को हवा दे दी। अम्बेडकरवादी पत्रकार सुमित चौहान ने कहा कि सवर्ण मानसिक रूप से बीमार लोग हैं और स्वभाव से अत्यधिक जातिवादी हैं। साथ ही कहा कि ये भारत में नारीवाद का झंडा उठाये घूमती हैं।

इससे पहले, स्टैंडअप कॉमेडियन नेविल शाल ने सोमवार (17 मई 2021) को 5 साल पुराने एक मजाक के लिए माफी माँगी थी, जिसमें उन्होंने ‘रिजर्वेशन-कोटे’ का मजाक उड़ाया था। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से स्टैंडअप कॉमेडियन के एक वीडियो की क्लिप काफी वायरल हो रही है। इसमें वह रिजर्वेशन और मेडिकल कॉलेज में कोटा सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं। इसे लेकर ट्विटर पर लोगों में काफी गुस्सा दिखा, जिसके बाद शाह ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक माफीनामा पोस्ट किया था।

ऑक्सीजन सिलेंडर के बदले सेक्स मामले पर NCW ने लिया संज्ञान: दिल्ली पुलिस कमिश्नर से जाँच और कार्रवाई की माँग

देश कोरोना महामारी की दूसरी लहर की चपेट में है। इसके साथ ही यौन उत्पीड़न की घटनाएँ भी लगातार बढ़ रही हैं। इन चुनौतीपूर्ण स्थितियों ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। जैसा कि सबको पता है भारत में ऑक्सीजन का संकट बना हुआ है। इसी बीच कुछ लोग लाचार लोगों का फायदा उठा रहे हैं।

पिछले दिनों ऐसी ही एक चौंकाने वाली घटना दिल्ली से सामने आई थी। एक लड़की ने अपने पिता के लिए ऑक्सीजन की मदद माँगने पर उसे लड़के ने सेक्स करने के लिए कहा। दूसरी लड़की ने ट्विटर इस बारे लोगों को जानकारी दी। इसके बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।

घटना के बारे में एक ट्विटर यूजर ने बताया था कि उसकी दोस्त की बहन को अपने बीमार पिता के लिए ऑक्सीजन चाहिए था। लेकिन उसके पड़ोसी ने सिलेंडर के बदले उसे साथ सोने को कहा। भवरीन कंधारी नाम की लड़की ने ट्विटर पर लिखा, “मेरी सहेली की बहन जो मेरी छोटी बहन जैसी है। वह एक एलिट कॉलोनी में रहती है। उसके पड़ोसी ने बीमार पिता के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर देने के बदले उसे साथ में सोने को कहा। इस मामले में क्या एक्शन ले सकते हैं क्योंकि %$* तो इस बात से इनकार ही करेगा।”

अब एनसीडब्ल्यू प्रमुख रेखा शर्मा ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को मामले में हस्तक्षेप करने और समयबद्ध जाँच करने के लिए लिखा है। एनसीडब्ल्यू ने आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की भी माँग की है।

एनसीडब्ल्यू ने एसएन श्रीवास्तव को पत्र लिखा, “महामारी के बीच घटना से आयोग परेशान है। इसलिए, आपको मामले में हस्तक्षेप करने और समयबद्ध तरीके से जाँच करने की आवश्यकता है। साथ ही, आरोपित के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के संबंधित धाराओं के तहत तुरंत प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए। की गई कार्रवाई को जल्द से जल्द आयोग को सूचित किया जाना चाहिए।”

इसके अलावा हाल ही में केरल में ई-पास के लिए एक रिक्वेस्ट आई जिसमें व्यक्ति ने लिखा था कि उसे सेक्स के लिए बाहर जाना है। बता दें कि कन्नूर के कन्नापुरम के इरीनेव में रहने वाले इस व्यक्ति ने वजह की जगह पर लिखा था कि वह शाम में कन्नूर की किसी जगह पर सेक्स के लिए जाना चाहता है। व्यक्ति का आवेदन चूँकि अजीब था, इसलिए असिस्टेंट कमिश्नर ने फौरन उस आदमी को पकड़कर लाने के निर्देश दिए। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, वल्ला पत्तन पुलिस ने उसे पकड़ा और पूछताछ के लिए थाने लाई।

पूछताछ में व्यक्ति ने अपनी गलती के लिए माफी माँगी। उसने बताया कि उसकी एप्लीकेशन में स्पेलिंग एरर हो गया था, जिसे वह भेजने से पहले सही करना भूल गया। उसके मुताबिक वह सेक्स की जगह ‘सिक्स ओ क्लॉक’ लिखना चाहता था। पुलिस ने उसकी बात सुनकर उसकी माफी स्वीकारी और कहा कि गैर जरूरी चीजों के लिए ई-पास की डिमांड न करें।

BMC ने कराई अपनी किरकिरी: कोविड वैक्सीन के लिए जारी किया था ग्लोबल टेंडर, किसी ने नहीं लगाई बोली

वैक्सीन निर्माताओं द्वारा एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट (ईओआई) जमा करने की अंतिम तिथि मंगलवार (18 मई 2021) को समाप्त हो गई है। वहीं, बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के हाथ सिर्फ निराशा ही लगी। टीकाकरण प्रक्रिया को तेजी लाने के लिए BMC ने बुधवार (12 मई 2021) को विदेशों में वैक्सीन निर्माताओं से एक करोड़ खुराक की खरीद के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया था। ऐसा करने वाला यह देश का पहला नगर निगम बन गया, लेकिन इसे किसी वैक्सीन निर्माता से एक भी बोली नहीं मिली।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीएमसी ने टीकों की खरीद के लिए सख्त शर्तें लगाई थीं। शर्तों में से एक यह थी कि बोली लगाने वाले वैक्सीन निर्माता को वर्क ऑर्डर जारी होने की तारीख से 3 सप्ताह के भीतर खुराक देनी होगी। वैक्सीन निर्माताओं के लिए 1 करोड़ वैक्सीन खुराक की डिलीवरी के लिए इतना कम समय पर्याप्त नहीं था।

गौरतलब है कि अधिकांश वैश्विक कंपनियाँ टीकों की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही हैं और मौजूदा ऑर्डर के पीछे भाग रही हैं। भले ही बीएमसी ने फाइजर, मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन जैसी कोविड वैक्सीन के विदेशी निर्माताओं के लिए अपना टेंडर खोल रखा था, लेकिन ऐसी सभी कंपनियों को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) से पहले मंजूरी लेने होती है।

नगरीय निकाय ने वैक्सीन निर्माताओं के लिए यह शर्त भी रखी थी कि बीएमसी के पास ये सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उन्हें भंडारण सुविधाओं की व्यवस्था करनी होगी। ऐसी कठोर शर्तों, स्वीकृत कार्यों के लंबित होने, लचीलेपन की कमी और वितरण प्रक्रिया जटिल होने के कारण वैक्सीन निर्माताओं ने भी इस प्रस्ताव को लेकर खास रूचि नहीं दिखाई।

उल्लेखनीय है कि फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए बेहद कम तापमान की आवश्यकता होती है। फाइजर कोविड-19 वैक्सीन के भंडारण के लिए शून्य से 70 डिग्री सेल्सियस कम तापमान चाहिए होता है। भारत के ज्यादातर हिस्सों में कोल्ड चेन में सबसे कम शून्य से 25 डिग्री सेल्सियस नीचे तक के तापमान में टीके रखे जा सकते हैं। देश के कस्बों, गाँवों और सुदूर क्षेत्रों में इतने कम तापमान वाली कोल्ड स्टोरेज चेन नहीं हैं, ऐसे में वैक्सीन को वहाँ तक पहुँचाना बेहद कठिन होता है।

इसके अलावा बीएमसी टेंडर में यह भी शर्त रखी गई थी कि कंपनियों को कोई एडवांस भुगतान नहीं किया जाएगा और वैक्सीन की डिलीवरी में देरी होने पर उन पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।

बता दें कि मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर के 13 मई 2021 को कहा था कि टीके के लिए ग्लोबल टेंडर जारी करने वाले हम दुनिया के पहले नगर निगम हैं। उन्होंने बताया कि टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि 18 मई है। वर्क ऑर्डर पूरा होने के बाद, उन्हें 3 सप्ताह से कम समय में टीके वितरित करने होंगे। इसके लिए आईसीएमआर (ICMR) और डीसीजीआई (DCGI) के दिशानिर्देशों को पूरा करना है।

₹50 हजार मुआवजा, 2500 पेंशन, बिना राशन कार्ड भी फ्री राशन: कोरोना को लेकर केजरीवाल सरकार की ‘मुफ्त’ योजना

दिल्‍ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने कोरोना महामारी में माता पिता को खोने वाले बच्‍चों को 2500 रुपए प्रति माह और मुफ्त शिक्षा देने का ऐलान किया है। सीएम केजरीवाल ने डिजिटल प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह घोषणा की। इस मौके पर अहम घोषणाएँ करते हुए उन्‍होंने बताया कि 72 लाख लोगों को इस महीने का राशन मुफ़्त मिलेगा।

आपको बता दें कि केंद्र सरकार की ओर से भी इन राशन कार्ड धारकों को पाँच किलो प्रति माह राशन दिया जा रहा है। इस हिसाब से अब इनको 10 किलो राशन मुफ्त में दिया जाएगा। 5 किलो दिल्ली सरकार देगी और 5 किलो प्रधानमंत्री योजना के तहत यानी कुल 10 किलो राशन मुफ्त मिलेगा। उन्होंने कहा कि जिनके पास राशन कार्ड नहीं है और वह गरीब हैं उनके लिए भी दिल्ली सरकार राशन की व्यवस्था करेगी। उन्‍होंने कहा कि जो लोग राशन माँगेंगे और कहेंगे कि हम गरीब हैं उनको राशन दिया जाएगा जैसे पिछली बार दिया था वैसे ही इस बार भी देंगे।

सीएम केजरीवाल ने कहा कि कोरोना से जिनकी मौत हुई, उनके परिवार को 50 हज़ार का मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा जिस परिवार में कमाने वाले व्यक्ति की कोरोना से मौत हुई, उस परिवार को ₹50000 मुआवजे के साथ साथ 2500 रुपए महीना पेंशन दी जाएगी। 

सीएम केजरीवाल ने कहा कि जिनके घरों में कोरोना की वजह से कमाने वाला शख्स नहीं रहा, उनको पेंशन देने की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि पति की मौत की स्थिति में पत्नी को, पत्नी की मौत की स्थिति में पति को और किसी अविवाहित की मौत की स्थिति में उसके माता-पिता को ये पेंशन मिलेगी।

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अगर किसी घर में किसी बच्चे के माता-पिता कि कोविड से दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो जाती है तो हर महीने 2500 रुपए का पेंशन 25 साल की उम्र तक तक बच्चे को दिया जाएगा। इसके अलावा शिक्षा का सारा खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी। उन्‍होंने कहा, “पिछले 4 से 5 दिन के अंदर मैंने और मेरे मंत्रियों ने बैठ कर इस पर काफी विचार मंथन किया। हमने यह देखने की कोशिश की कि लोग कहाँ-कहाँ मुसीबत में हैं और कहाँ-कहाँ से पैसा बचा सकते हैं सभी जगहों से पैसा निकाल कर यह योजना आपके लिए बनाई है।”

2 से 18 साल के बच्चों पर ट्रायल के लिए कोवैक्सिन को मिली मंजूरी, कोरोना इलाज से हटाई गई प्लाज्मा थेरेपी

कोरोना के इलाज से प्लाज्मा थेरेपी हटा दी गई है तो वहीं ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने भारत बायोटेक की कोवैक्सिन को 2 से 18 साल के बच्चों पर ट्रायल की मंजूरी दे दी है। बताया जा रहा है कि बच्चों पर ट्रायल 10 से 12 दिन में शुरू हो जाएगा। पहले कोरोना वैक्सीन पर निगाह रखने वाली सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने इसके ट्रायल की सिफारिश की थी।

नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया, “कोवैक्सिन को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) द्वारा 2 से 18 वर्ष के आयु वर्ग में चरण II / III नैदानिक ​​परीक्षणों के लिए मंजूरी दे दी गई है। मुझे बताया गया है कि परीक्षण अगले 10-12 दिनों में शुरू हो जाएगा।”

जानकारी के मुताबिक, भारत बायोटेक की ओर से ये ट्रायल 525 वॉलंटियर्स पर किया जाएगा। ये 2 से 18 साल के बच्चों पर किया जा रहा कोवैक्सिन के क्लीनिकल ट्रायल का फेज़ 2 और फेज़ तीन होगा। ट्रायल के दौरान पहली और दूसरी वैक्सीन का डोज़ 28 दिनों के अंतर पर दिया जाएगा।

आपको बता दें कि भारत में अभी कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप चल रहा है। इस लहर ने देश के स्वास्थ्य सिस्टम को झकझोर दिया है, हालाँकि अब स्थिति सुधार की ओर है। ऐसे में एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि भारत में अभी कोरोना की तीसरी लहर भी आएगी और इसमें बच्चों पर सबसे ज्यादा असर होगा।

दुनिया में अभी बेहद कम देश हैं, जहाँ पर बच्चों को वैक्सीन लगाने का काम शुरू किया गया है। हालाँकि, अमेरिका में फाइज़र की वैक्सीन को मंजूरी मिली है, जो अब 12 साल से अधिक उम्र वाले बच्चों लगाई जा रही है।

वहीं केंद्र सरकार ने कोरोना मरीजों के इलाज के लिए क्लिनिकल परामर्श (clinical guidance) में संशोधन किया है। सरकार ने सोमवार (मई 17, 2021) को मरीजों के इलाज के लिए प्लाज्मा थेरेपी के इस्‍तेमाल को नैदानिक प्रबंधन दिशा-निर्देश से हटा दिया। सरकार ने पाया कि कोरोना मरीजों के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी गंभीर बीमारी को दूर करने और मौत के मामलों में कमी लाने में मददगार साबित नहीं हुई है।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर के एक अधिकारी ने बताया कि कार्यबल ने क्लीनिकल गाइडेंस फार मैनेजमेंट आफ अडल्ट कोविड-19 पेशेंट्स को संशोधित कर दिया है और उसमें से स्वस्थ हुए व्यक्ति के प्लाज्मा (ऑफ लेबल) को हटा दिया है। पिछली गाइडलाइंस में मध्यम स्तर की बीमारी के शुरआती दौर में (लक्षण दिखने के सात दिनों के भीतर) प्लाज्मा थेरेपी के ‘ऑफ लेबल’ इस्तेमाल की सिफारिश की गई थी।

बंगाल: मतगणना के दिन BJP कार्यकर्ताओं की हुई हत्या की SIT/CBI जाँच की माँग, ममता सरकार को SC का नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार (मई 18, 2021) को पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में दो मई को चुनाव परिणाम वाले दिन टीएमसी सदस्यों द्वारा कथित तौर पर दो भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या के संबंध में SIT या CBI से जाँच कराने का निर्देश देने की माँग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि सरकार और प्रशासन की शह पर ही विपक्षी कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा हुई। इसलिए, सुप्रीम कोर्ट दोनों हत्याओं और हिंसा के दूसरे मामलों की जाँच सीबीआई को सौंपे या फिर इसके लिए विशेष जाँच दल (SIT) का गठन करे।

जस्टिस विनीत शरण और जस्टिस वीआर गवई की पीठ ने मृतक भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार के भाई विश्वजीत सरकार और हरेण अधिकारी की विधवा द्वारा दायर इस याचिका पर राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार को भी याचिका की प्रति सौंपने के लिए कहा है। 

याचिका में कहा गया है, “भीड़ ने उनके गले में सीसीटीवी कैमरा का तार बाँध दिया, उनका गला घोंट दिया और उसे ईंटों और डंडों से पीटना शुरू कर दिया। उन्होंने उसका सिर फोड़ दिया और उनकी माँ के सामने उसे बेरहमी से मार डाला। उन्होंने अपने बेटे को अपनी आँखों के सामने कत्ल होते देख कर बेहोश हो गई और मौके पर ही गिर गई।”

बता दें कि 2 मई को जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आ रहे थे, तभी कोलकाता में बीजेपी के दो कार्यकर्ताओं अभिजीत सरकार और हरेण अधिकारी की हत्या कर दी गई थी। मामले में तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं के शामिल होने का आरोप है। अभिजीत सरकार ने अपनी हत्या से पहले फेसबुक लाइव पर अपनी जान को खतरे की बात भी बताई थी। आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं की तरफ से की जा रही हिंसा पर अपनी आँखें बंद रखी। जिसके चलते अभिजीत और हरेण की हत्या हो गई।

सुप्रीम कोर्ट में अभिजीत सरकार के भाई बिश्वजीत सरकार और हरेण अधिकारी की पत्नी स्वर्णलता अधिकारी ने याचिका दाखिल की है। दोनों की तरफ से वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने जस्टिस विनीत सरन और बी आर गवई की बेंच में दलीलें रखीं। जेठमलानी ने कहा कि सरकार और पुलिस ने हिंसा को बढ़ावा दिया। इन घटनाओं के प्रत्यक्षदर्शी गवाह भी मौजूद हैं। लेकिन जाँच में लीपापोती की जा रही है। 

इसलिए, यह जरूरी है कि इन घटनाओं की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जाँच हो। याचिकाकर्ताओं के वकील ने आगे कहा, “अभिजीत सरकार का शव आज तक उनके परिवार को नहीं सौंपा गया है। हम यह भी माँग करते हैं कि शव का अभी दाह संस्कार न किया जाए। उसका पोस्टमार्टम हो और उसकी वीडियोग्राफी भी करवाई जाए।” 

जजों ने थोड़ी देर की सुनवाई के बाद याचिका पर नोटिस जारी कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल सरकार, राज्य के पुलिस महानिदेशक, केंद्र सरकार और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को प्रतिवादी बनाया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के वकील को यह निर्देश दिया कि वह याचिका की कॉपी प्रतिवादियों को सौंप दें, ताकि वह जवाब दे सकें। मामले पर मंगलवार (मई 25, 2021) को अगली सुनवाई होगी।

हत्या के मामले में सुशील कुमार की अंतरिम बेल याचिका खारिज, कोर्ट ने पूछा- केस गंभीर नहीं तो भाग क्यों रहे?

23 वर्षीय पहलवान सागर राणा की हत्या मामले में फरार चल रहे ओलंपिक विजेता सुशील कुमार की अंतरिम बेल याचिका को दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने आज (मई 18, 2021) खारिज कर दिया है। इससे पहले रोहिणी कोर्ट इस केस में सुशील कुमार और उनके साथियों के ख़िलाफ़ गैर जमानती वारंट जारी कर चुकी है।

जानकारी के मुताबिक, रोहिणी कोर्ट में सुशील की ओर सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा और बुजुर्ग वकील आरएस जाखड़ ने दलील दी। उन्होंने सुशील के हवाले से कहा कि उनका (सुशील का) केस में कोई लेना-देना नहीं है। दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने पूछा कि अगर मामला इतना गंभीर नहीं है तो फिर सुशील कुमार क्यों भाग रहे हैं। पुलिस जाँच में सहयोग करें।

सुशील कुमार के वकीलों ने क्या कहा?

वकीलों ने सुशील के हवाले से कहा कि पुलिस ने उनके विरुद्ध दुर्भावनापूर्ण तरीके से केस बनाया है। साथ ही इस मामले में कई तथ्य भी छिपाए गए हैं। दलील में सुशील की ओर से कहा गया, “मैं एक अंतराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी हूँ। पद्मश्री समेत देश के तमाम प्रतष्ठित पदकों और सम्मानों से सुसज्जित हूँ। ओलिंपिक में दो बार पदक जीतने वाला खिलाड़ी हूँ। मुझे छत्रसाल स्टेडियम में मेरे आधिकारिक कर्तव्यों के वहन के लिए आवास मिला हुआ है, जहाँ मैं अपने परिवार के साथ रहता हूँ।” 

सुशील का कहना है कि उनकी वजह से किसी को कोई चोट नहीं लगी। पुलिस ने मामले में हेरफेर की। उनका मत ये भी है कि घायल व्यक्ति ने उनके विरुद्ध कोई बयान नहीं दिया है। इसके अलावा कार से जो हथियार मिले हैं वो भी उनके नहीं है। सुशील के वकील ने कहा कि इंजरी गन से नहीं हुई, फायरिंग हवा में की गई। मकसद हत्या का नहीं था इसलिए 302 आईपीसी नहीं लगनी चाहिए।

सुशील पर 1 लाख रुपए का इनाम

गौरतलब है कि 5 मई को छत्रसाल स्टेडियम में हुई घटना के बाद से सुशील कुमार फरार हैं। पुलिस ने उसके ऊपर एक लाख रुपए का इनाम घोषित किया है। वहीं उसके पीए अजय को पकड़ने पर 50 हजार रुपए देने की घोषाणा की है। इससे पहले सुशील कुमार के ख़िलाफ़ लुकआउट नोटिस भी जारी हुआ था। वहीं, उससे पूर्व मामले में 24 साल के प्रिंस दलाल को गिरफ्तार किया गया था। दलाल को डबल बैरेल लोडेड बंदूक के साथ दबोचा गया था।

वैक्सीन की दोनों डोज ली, मौत की अफवाह उड़ी… आखिरकार कोरोना से हार गए डॉ. केके अग्रवाल

पद्मश्री से सम्मानित मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. केके अग्रवाल का सोमवार रात (17 मई 2021) 12 बजे कोरोना संक्रमण से निधन हो गया। हैरानी की बात यह है कि उन्होंने वैक्सीन की दोनों डोज ली हुई थी। फिर भी वह कोरोना संक्रमित हुए और आखिरी वक्त में उनकी हालत ऐसी हो गई कि उन्हें बचाने के लिए वेंटिलेटर तक की जरूरत पड़ गई।

वैक्सीन लगवाने के बाद बीवी से बातचीत की वीडियो हुई थी वायरल

याद दिला दें कि कुछ दिन पहले डॉ केके अग्रवाल की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। जिसमें उनकी पत्नी अकेले-अकेले वैक्सीन लगवाने पर उन पर नाराज हो रही थीं और वह अपनी पत्नी को लगातार मनाने की कोशिश कर रहे थे। उनकी पत्नी ने फोन पर कहा था, “बहुत अजीब हो यार तुम। मुझे साथ क्यों नहीं ले गए।” इस दौरान वह बार-बार कह रहे थे, “मैं तो बस पता करने गया था उन्होंने कहा कि अभी लगवा लो।”

इसके अलावा उनके कोविड संक्रमित होने के बाद भी एक वीडियो सामने आई थी। वीडियो में वह अपना कोविड एक्सपीरियंस शेयर कर रहे थे। अपनी वीडियो में उन्होंने ये भी स्पष्ट किया था कि यदि वैक्सीन के बाद भी कोरोना होता है तो आपको गंभीर निमोनिया हो सकता है। लेकिन वैक्सीन से मत डरिए, ये कोरोना से बचाता है।

संक्रमित होने के बाद कहा- निमोनिया हो गया है, लेकिन शो मस्ट गो ऑन

वीडियो में उन्होंने कहा था, “मैं भी संक्रमण से गुजर रहा हूँ। मुझे कोविड निमोनिया हो गया है, जो कि बढ़ रहा है। इसके बावजूद मुझे राज कपूर के शब्द याद आते हैं- द शो मस्ट गो ऑन… पिक्चर अभी बाकी है। लोग उन्हें शो मैन मानते हैं, लेकिन वो शो मैन नहीं, बल्कि धरती के सबसे प्रैक्टिकल इंसान थे। शो मस्ट गो ऑन। मेरे जैसे लोग ऑक्सीजन पर भी क्लासेस लेंगे और लोगों को बचाने की कोशिश करेंगे। मैं केके अग्रवाल नहीं, मैं मेडिकल प्रोफेशन में हूँ। हमारा जॉब है जुगाड़ू ओपीडी बनाना। मतलब आप 100-100 पेशेंट बुलाना, जिनमें एक तरह के लक्षण हों। उन्हें 15 मिनट में कंसल्टेशन देकर भेज दीजिए। इसी तरह माइल्ड और दूसरे केसेज को इकट्ठा बुलाइए, लेकिन अब वन-टू-वन कंसल्टेशन का समय चला गया है।”

गौरतलब है कि डॉ केके अग्रवाल का निधन आज हुआ। मगर, उनकी मौत की अफवाहें पहले से भी उड़ा दी गई थीं। 14 मई को उनके परिवार ने इनका खंडन किया था और बताया था कि डॉ अग्रवाल गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, लेकिन फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है। अफवाहों पर विश्वास न करें।

पद्मश्री से थे सम्मानित

केके अग्रवाल IMA के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के अलावा हार्ट केयर फाउंडेशन के भी प्रमुख थे। 2005 में उन्हें भारतीय चिकित्सा क्षेत्र में दिया जाने वाला सबसे प्रतिष्ठित बीसी रॉय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। साल 2005 में ही उन्हें विश्‍व हिंदी सम्‍मान, डॉक्‍टर डीएस मुंगेकर नेशनल आईएमए अवॉर्ड, नेशनल साइंस कम्‍युनिकेशन अवॉर्ड, फिक्‍की हेल्‍थकेयर पर्सनालिटी ऑफ द ईयर अवॉर्ड और राजीव गाँधी एक्‍सीलेंस अवॉर्ड भी मिले। इसके बाद वर्ष 2010 में भारत सरकार ने उन्‍हें पद्मश्री से सम्‍मानित किया गया। वे लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी शामिल थे।

श्रीकृष्ण को मानते थे पहला काउंसलर

दिल्ली से स्कूली शिक्षा लेने के बाद उन्होंने नागपुर यूनिवर्सिटी से 1979 में एमबीबीएस की डिग्री ली। फिर एमडी करके वह डॉक्टरी पेशे में बने रहे। न्होंने कई किताबें लिखी है। इसमें से एक का नाम-एलोवेदा है। अपनी इस किताब में उन्होंने भारत की प्राचीनतम चिकित्‍सीय पद्धति आयुर्वेद और मॉर्डन चिकित्‍सा पद्धति का समावेश किया। बाद में उनकी किताब के कई चैप्‍टर इंटरनेशनल प्रेस में भी पब्लिश हुए। वह मानते थे कि महाभारत के श्री कृष्‍ण विश्‍व के सबसे पहले काउंसलर थे। उन्‍होंने ये भी कहा था कि महाभारत हमारे मन में आते कई सवालों का एकमात्र जवाब है।

वैक्सीन के बाद कोरोना से मौत के तीन कारण

बता दें कि डॉ केके अग्रवाल के निधन के बाद लोगों के मन में वैक्सीन को लेकर फिर संशय उठ गए है। कई लोगों को लगने लगा होगा कि ये वैक्सीन के कारण हुआ या कई लोगों को लग रहा होगा कि वैक्सीन का कोई प्रभाव नहीं है, तो लगवाएँ क्यों। ऐसे में हमें डॉ केके अग्रवाल के बयान को याद करने की जरूरत है जिसमें उन्होंने बताया था कि अगर वैक्सीन के बाद कोरोना बढ़ रहा है तो उसकी क्या वजह है। अपनी स्थिति को लेकर वह बोले थे कि उन्हें निमोनिया हो गया है जो बढ़ रहा है। डॉक्टरों का मानना है कि कभी कभी पर्याप्त एंटीबॉडीज नहीं बनने के कारण भी वैक्सीन लगवाने के बावजूद संक्रमित होने का खतरा रहता है।

ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले 111 साल के बुजुर्ग ने खोला अपनी लंबी उम्र का राज, तोड़ा जैक लॉकेट का रिकॉर्ड

ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले 111 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति डेक्सटर क्रूगर ने दुनिया के सामने अपने लंबे जीवन का रहस्य बताया है। रिटायर्ड पशुपालक ने दावा किया है कि वह मुर्गे के दिमाग (Chicken Brain) को खाने की वजह से इतने लंबे समय से जीवित हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने सोमवार (17 मई 2021) को प्रथम विश्व युद्ध के वेटरन जैक लॉकेट (Jack Lockett) के सबसे अधिक उम्र तक जीने के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। जैक लॉकेट का साल 2002 में निधन हो गया था, वह 111 साल और 123 दिन के थे।

डेक्सटर अभी 111 वर्ष और 124 दिन के हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोशन (एबीसी) को दिए इंटरव्यू में बताया कि पोल्ट्री फार्म में मुर्गे का दिमाग खाने की वजह से उनकी उम्र लंबी है। इस समय वह ग्रामीण क्वींसलैंड के रोमा कस्बे में स्थित एक नर्सिंग होम में रहते हैं।

क्रूगर ने कहा, ”मुर्गे का दिमाम। आप जानते हैं, इनका एक सिर होता है और उसके भीतर एक दिमाग होता है। वो छोटी सी चीज खाने में बहुत ही टेस्टी लगती है।” वहीं, क्रूगर के 74 वर्षीय बेटे ग्रेग ने अपने लंबे जीवन के लिए अपने पिता की सरल जीवनशैली को क्रेडिट दिया।

नर्सिंग होम के मैनेजर मेलानी कैल्वर्ट ने बताया कि क्रूगर यहाँ रहने वाले लोगों में सबसे ज्यादा तेज दिमाग वाले व्यक्ति हैं। वह, फिलहाल अपनी आत्मकथा लिख रहे हैं। कैल्वर्ट ने बताया कि 111 साल का होने के बावजूद उनकी याददाश्त काफी तेज है।

बता दें कि ‘ऑस्ट्रेलियन बुक रिकॉर्ड्स’ के फाउंडर जॉन टेलर पुष्टि की कि क्रूगर अब तक के सबसे बुजुर्ग ऑस्ट्रेलियाई व्यक्ति बन गए हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया की सबसे बुजुर्ग महिला क्रिस्टीनी कुक के नाम पर थी। इनका साल 2002 में 114 साल और 148 दिन की उम्र की निधन हो गया था।