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कोविड से निधन के बाद सभी पार्थिव शरीर की नि:शुल्क अंत्येष्टि कराएगी योगी सरकार, नगरीय निकाय उठाएँगे खर्च

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच उत्तर प्रदेश सरकार लगातार यह प्रयास कर रही है कि संक्रमण से निपटने के लिए यथा संभव प्रयास किए जाएँ एवं इससे संबंधित सभी पहलुओं पर कानून के अनुसार ही कार्य संचालन हो।

इसी क्रम में यूपी शासन ने यह निर्णय लिया है कि नगरीय निकाय की सीमा के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में संक्रमण के कारण हुई मौतों की दशा में शवों का अंतिम संस्कार निःशुल्क होगा और इसके लिए आवश्यक खर्च नगरीय निकाय द्वारा मुहैया कराया जाएगा।

07 मई को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने Covid-19 प्रबंधन के लिए गठित टीम-9 को निर्देशित किया कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण हुई मौतों पर शव के दाह संस्कार के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस पर यूपी शासन के नगर विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने आदेश जारी करते हुए कहा कि शवदाह गृह, कब्रिस्तान और श्मशान में संक्रमित मरीज के शव के अंतिम संस्कार का खर्च नगरीय निकाय उठाएँगे। यह आदेश नगर निगम सीमा के अंतर्गत लागू होगा। इसके साथ यह भी आदेश दिया गया है कि अंतिम संस्कार के दौरान Covid-19 प्रोटोकॉल का पूरा पालन किया जाएगा।

अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह द्वारा जारी किए गए आदेश की कॉपी

जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम-1959 की धारा-114 (20) और नगर पालिका अधिनियम-1916 की धारा-7 (जी) में की गई व्यवस्था के अनुसार, नगरीय निकाय की सीमा के अंतर्गत मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए अंत्येष्टि स्थलों, कब्रिस्तानों और शवदाह गृहों की व्यवस्था करना नगरीय निकायों का मूल कर्तव्य है।

‘केजरीवाल सहित AAP के सभी मंत्रियों के घरों की तलाशी हो, मिल सकते हैं कई ऑक्सीजन सिलिंडर’

दिल्ली में नवनीत कालरा के ‘खान चाचा रेस्टॉरेंट’ में 96 ऑक्सीजन कन्सेंट्रेटर्स बरामद होने और दिल्ली के खाद्य मंत्री इमरान हुसैन को ऑक्सीजन सिलिंडर्स की जमाखोरी पर दिल्ली हाईकोर्ट का नोटिस मिलने के बाद अरविंद केजरीवाल की सरकार चहुँओर से घिर गई है। नवनीत कालरा के बारे में पता चला है कि वो 2020 में केजरीवाल के शपथग्रहण समारोह में बतौर अतिथि मौजूद था। अब भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने AAP पर सवाल उठाया है।

दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि ये ऐसा विकट समय है, जब ऑक्सीजन के अभाव में सड़कों पर लोगों की मौत हो रही है और लोग अस्पतालों के दरवाजे पर लाइन लगा कर खड़े हैं, वो ढूँढ रहे हैं कि कहीं से ऑक्सीजन मिल जाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में इस समस्या के कारण हजारों मौतें हुई हैं और कब्रिस्तान या श्मशान घाटों में जगह नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि वहीं दूसरी तरफ दिल्ली के मंत्री के घर में 630 ऑक्सीजन सिलिंडर छिपा कर रखे गए हैं।

कपिल मिश्रा ने कहा, “दिल्ली का एक मंत्री ऑक्सीजन सिलिंडर्स की जमाखोरी कर रहा है। ऐसे में क्या 630 लोगों की मौत की जिम्मेदारी इस एक आदमी पर नहीं आएगी? क्या ये हत्या नहीं है? क्या इसे एक साजिश के तहत सैकड़ों लोगों का मर्डर नहीं कहा जाएगा? कितनी जानें बच जातीं उन सिलिंडर्स से, जो केजरीवाल के मंत्री इमरान हुसैन के घर पर रखे हुए हैं या जो नवनीत कालरा के रेस्टॉरेंट से 550 कन्सेंट्रेटर मिले हैं।”

कपिल मिश्रा ने दावा किया कि अरविंद केजरीवाल की सरकार ने जिस नवनीत कालरा को ‘दिल्ली के निर्माता’ का सम्मान दिया था, आज वो ऑक्सीजन कन्सेंट्रेटर्स की कालाबाजारी में लिप्त है और फरार चल रहा है। कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया कि सरकार चलाने वालों और उनके खास लोगों के घर से ऑक्सीजन सिलिंडर और कन्सेंट्रेटर बड़ी मात्रा में मिल रहे हैं, जबकि इनके अभाव में लोगों की जानें जा रही हैं।

उन्होंने दिल्ली के पुलिस कमिश्नर से निवेदन किया कि इमरान हुसैन को तुरंत जेल में डाला जाए। उन्होंने कहा, “इस बात की जाँच की जानी चाहिए कि दिल्ली में हुई इतनी मौतों के पीछे कोई गहरी साजिश तो नहीं? ये दिल्ली को, देश को हिलाने की, बर्बाद करने की, लोगों के मरने के बाद गंदी राजनीति करने की साजिश हो सकती है। दिल्ली पुलिस को अरविंद केजरीवाल समेत दिल्ली के सभी मंत्रियों के घरों की तलाशी लेनी चाहिए।”

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने आशंका जताई कि AAP नेताओं के घरों में न जाने कितने ऑक्सीजन सिलिंडर्स छिपाए हुए मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री हो या मुख्यमंत्री हो, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने अब तक इमरान हुसैन की गिरफ़्तारी न होने को चिंता का विषय बताया। दिल्ली के एक अस्पताल में ऑक्सीजन टैंकर से ऑक्सीजन बर्बाद करने के आरोप भी भाजपा नेता तजिंदर बग्गा ने लगाए थे।

दिल्ली में ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर की कालाबाजारी पर दिल्ली पुलिस ने मैट्रिक्स सेलुलर सर्विस लिमिटेड के सीईओ गौरव खन्ना को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने गौरव के खिलाफ़ ये कार्रवाई उसके संबंध नवनीत कालरा से जुड़े होने के चलते की। ये मैट्रिक्स कंपनी गगन दुग्गल नाम के शख्स की है। वह लंदन में रहता है और उसकी कंपनी सिम बनाने का काम करती है। सी मैट्रिक्स कंपनी के नाम से 20 हजार रुपए प्रति पीस ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर भारत में इम्पोर्ट हुए और फिर इन्हें कीमतें बढ़ाकर जरूरमंदों को बेचा गया।

इरफान पठान के नाजायज संबंध: जिस दंपत्ति ने लगाया बहू के साथ चालू होने का आरोप, उसी पर FIR

भारत के पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान पर अपनी चचेरी बहन के साथ अवैध संबंध होने का इल्जाम लगाने वाले बुजुर्ग दंपत्ति पर अहमदाबाद के वेजलपुर पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया है। इस दंपत्ति ने कुछ दिन पहले ही अपनी एक वीडियो जारी करके कहा था कि इरफान पठान के ख़िलाफ़ शिकायत पर पुलिस उनकी सुनवाई नहीं कर रही। इसके बदले उन्हें ही तंग किया जा रहा है। इसलिए वह आत्महत्या करने वाली हालत में हैं।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, “वेजलपुर पुलिस थाना में सैयद इब्राहिम एवं उनकी पत्नी के खिलाफ आत्महत्या की धमकी देने का मामला दर्ज कर लिया है।”

वीडियो में इब्राहिम ने क्या कहा था?

अपनी वीडियो में सैयद इब्राहिम नाम के बुजुर्ग ने कहा था,  “मेरा नाम सैयद इब्राहिम है। मेरे छोकरे (बेटे) की बहू क्रिकेटर इरफान पठान के साथ चालू (संबंध) है। वो उसके साथ सोती है और ये सब खुद वो अपने मुँह से बोलती है। मेरे बेटे पर 8 दिन से दबाव डाल रही है कि जैसा है, वैसे चलने दे। हमने पुलिस में रिकॉर्डिंग तक दी लेकिन हमारी सुनवाई नहीं होती।”

बुजुर्ग ने पूर्व क्रिकेटर पर आरोप लगाते हुए कहा था, “इरफान पठान बड़े अधिकारियों से दबाव डलवाता है। आज हमारी ऐसी हालत आ गई कि हम सुसाइड करना चाहते हैं।” वीडियो में बुजुर्ग महिला को कहते सुना जा सकता है कि जब उनकी बहू उनके घर थी, तब भी उन्हें परेशान किया जाता था और अब भी उन्हें परेशान किया जा रहा है।

सैयद ने बताया कि उन्हें धमकियाँ मिलती हैँ। उन्होंने पुलिस विभाग को अपनी सेवा दी। बावजूद इसके आज उन्हें इंसाफ नहीं मिल रहा। वह अपील करते हैं कि उन्हें बस उनकी मौत के बाद इंसाफ दिलाया जाए। वह वीडियो में पूछते हैं कि उनकी बहू उनके बेटे के साथ रहती नहीं है, तो वह उसके साथ रिश्ते को कैसे जारी रखे? पुलिस भी उनकी सुनवाई नहीं कर रही। शिकायत करने पर उन्हें ही बुलाकर तंग किया जाता है।

बहू ने करवाया हुआ है दहेज का मामला दर्ज

सैयद इब्राहिम की वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद लोगों ने इसे बहुत तेजी से शेयर किया। इस बीच वेजपुर पुलिस थाने में पता चला कि इब्राहिम, उनकी पत्नी और बेटे के खिलाफ खुद बहू ने ही 11 मार्च, 2021 को दहेज के लिए प्रताड़ित करने की शिकायत दर्ज करवाई थी। अब पुलिस मामले की जाँच कर रही है। सैयद इब्राहिम के अनुसार उनकी बहू उन्हें झूठे इल्जाम में फँसा रही है, उसके खुद इरफान से अवैध संबंध हैं।

बता दें कि इब्राहिम की बहू इरफान पठान की चचेरी बहन है। उनके बेटे का कहना है कि उसकी पत्नी और इरफान के बीच काफी पहले से संबंध हैं और शादी के बाद भी दोनों के बीच अवैध संबंध बने हुए हैं। बेटे के मुताबिक इरफान और उसकी पत्नी अक्सर वीडियो कॉलिंग करते हैं। पत्नी अक्सर चोरी-छिपे इरफान के साथ घूमने जाती थी। लेकिन ये बातें जब पूरे परिवार को पता चलीं तो पत्नी ने उनके खिलाफ दहेज प्रताड़ना का झूठा आरोप लगा दिया।

ऑक्सीजन पर केजरीवाल सरकार से सवाल: 7 पत्रकारों को AAP ने वॉट्सऐप ग्रुप से बाहर निकाला, बड़े पत्रकारों की चुप्पी

लंबे समय तक मीडिया के चहेते रहे अरविंद केजरीवाल इन दिनों पत्रकारों से नाराज हैं। न्यूजलॉन्ड्री की एक रिपोर्ट बताती है कि उन्होंने अपने ऑफिशियल वॉट्सएप ग्रुप से हिंदुस्तान टाइम्स के 7 पत्रकारों को बाहर का रास्ता सिर्फ इसलिए दिखा दिया क्योंकि उनके पेपर में AAP की आलोचना करने वाला एक लेख प्रकाशित हुआ था।

ये लेख 6 मई को अखबार में छपा। इसकी हेडलाइन Anatomy of Capital oxygen crisis: 5 things Delhi govt didn’t get right है। इसमें मुख्यत: बताया गया कि कैसे AAP सरकार ऑक्सीजन सप्लाई करने में विफल हुई, कैसे वह दिल्ली में ऑक्सीजन का वितरण नहीं कर पाई, कैसे उन्होंने ऑक्सीजन रिफिलिंग सिलेंडर के बारे में जागरूकता नहीं फैलाई, कैसे मरीजों की मदद के लिए कोई सेंट्रालाइज्ड नंबर नहीं तैयार किया, कैसे दिल्ली में पीएसए प्लांट लगाने को मना किए गए और कैसे दूसरी लहर में सरकार ने रिस्पॉन्स किया।

हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित इस रिपोर्ट को स्वेता गोस्वामी ने लिखा था। इसे पढ़ने के बाद अरविंद केजरीवाल के मीडिया कॉर्डिनेटर विकास योगी ने 7 रिपोर्टरों को ग्रुप से बाहर का रास्ता दिखा दिया। IANS पत्रकार नवनीत मिश्रा ने AAP की इस हरकत का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर शेयर किया।

नवनीत ने लिखा, “जिस रिपोर्टर ने कोरोना प्रबंधन में दिल्ली सरकार की 5 बड़ी लापरवाही उजागर की,उसे प्रवक्ता ने आधिकारिक मीडिया वॉट्सएप ग्रुप से बाहर कर दिया। क्या दिल्ली सरकार की यही है अभिव्यक्ति की आजादी? कुछ साल पहले 1 टीवी पत्रकार को भी ऐसे बाहर किया गया था। दिल्ली सरकार को सच्चाई बतानी चाहिए।”

गौरतलब हो कि स्क्रीनशॉट में नजर आने वाला ग्रुप AAP का ऑफिशियल मीडिया ग्रुप है, जिसमें 150 से ज्यादा पत्रकार जुड़े हुए हैं। सरकार इस पर प्रेस रिलीज और हेल्थ बुलेटिन आदि भेजती है। लेकिन ध्यान देने वाली बात है कि AAP की इस बचकाना हरकत पर केवल कुछ लोगों ने आवाज उठाई। बाकी सबने इस पर चुप्पी साधी हुई है।

न्यूजलॉन्ड्री से बातचीत में पत्रकारों ने दिल्ली सरकार के गैर जिम्मेदाराना रवैये को उजागर किया और बताया कि कैसे पत्रकारों को इस तरह ग्रुप से निकालने संबंधी सवाल करने पर वह उन मीडियाकर्मियों को भी जवाब नहीं दे रहे, जिन्हें वो पर्सनली जानते हैं। पत्रकारों ने यह भी बताया कि भले ही केजरीवाल प्रेस कॉन्फ्रेंस रोज करते हों, लेकिन किसी पत्रकार को कॉन्फ्रेंस में उनसे सवाल पूछने की आजादी नहीं है।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जहाँ चुनिंदा लोगों ने पत्रकारों को बाहर करने पर अपनी आवाज उठाई, वहीं कई वरिष्ठ पत्रकार ग्रुप में ऐसे भी रहे, जिन्होंने केजरीवाल सरकार की नजरों में उतरने से बचने के लिए मौन धारण किए रखा।

न्यूजलॉन्ड्री की रिपोर्ट में पत्रकार का हवाला देते हुए लिखा गया, “ग्रुप में 150 से अधिक पत्रकार हैं और उनमें से बहुत वरिष्ठ संवाददाता हैं। लेकिन कुल 6 लोगों ने निष्कासन पर सवाल उठाया, बाकी सभी चुप रहे।” आगे पत्रकार के हवाले से कहा गया, “यह बहुत स्पष्ट है कि कोई भी सरकार को दुखी नहीं करना चाहता है। शायद वे डरते हैं कि उन्हें जानकारी नहीं मिलेगी या फिर उनका संगठन उनके बोलने पर उनका समर्थन नहीं करेगा।”

गौरतलब है कि कोरोना संकट के बीच दिल्ली ऑक्सीजन की कमी के कारण बेहाल है। लेकिन AAP पार्टी इस समय भी उन मीडियाकर्मियों पर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं जिन्होंने इन हालातों के लिए उन्हें जिम्मेदार कहा। अभी कुछ समय पहले ही एक आरटीआई में खुलासा हुआ था कि अरविंद केजरीवाल ने साल 2021 के शुरुआती तीन महीनों में कैसे 150 करोड़ रुपए आरटीआई में उड़ा दिए। वहीं 2 साल में एड पर 800 करोड़ का खर्च किया गया।

बंगाल में महिलाओं को हर दिन रेप की धमकी, बेटियों को राज्य से बाहर भेजना चाहती हैं पीड़िताएँ: NCW की जाँच में खुलासा

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की एक टीम ने पश्चिम बंगाल का दौरा कर के वहाँ राजनीतिक हिंसा से पीड़ित महिलाओं के साथ बातचीत की और स्थिति की समीक्षा की। NCW की टीम ने पाया कि कई महिलाओं को बलात्कार की धमकियाँ मिल रही हैं। अधिकतर महिलाएँ चाहती हैं कि उनकी बेटियाँ राज्य के बाहर चली जाएँ। जाँच टीम ने पाया कि बंगाल पुलिस ने भी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम नहीं उठाए।

NCW की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने शुक्रवार (मई 7, 2021) को ये जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पीड़ित महिलाएँ अपने साथ हुए अत्याचार को लेकर आवाज़ भी नहीं उठाना चाहतीं, क्योंकि उन्हें डर है कि इसके बाद उनके साथ कुछ बुरा किया जा सकता है। पश्चिम बंगाल में रविवार को चुनावी नतीजे आने के साथ ही TMC के गुंडों पर भाजपा, कॉन्ग्रेस और CPI(M) ने हिंसा के आरोप लगाए हैं। भाजपा के डेढ़ दर्जन कार्यकर्ता मारे जा चुके हैं।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दावा किया कि 1 लाख भाजपा कार्यकर्ताओं और उनके परिजनों को TMC के गुंडों की हिंसा और प्रताड़ना के कारण पलायन करना पड़ा है। नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र से एक वीडियो सामने आया था, जिसमें 2 महिलाओं को सड़क पर घसीट-घसीट कर पीटा जा रहा था। एक महिला को उसकी बेटी के सामने उठक-बैठक कराया गया। इस तरह की कई अन्य घटनाओं का NCW ने संज्ञान लिया।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने मंगलवार को बताया था कि वो इस घटनाओं की जाँच के लिए अपनी एक टीम राज्य में भेज रही है। NCW ने अपने बयान में कहा, “हमारी टीम को कई पीड़िताओं के बारे में पता चला है, जिन्हें हिंसा के कारण अपना घर छोड़ कर पलायन करना पड़ा। उनमें से कई अभी भी शेल्टर होम्स में रहने को मजबूर हैं। उन महिलाओं ने बताया कि TMC के गुंडों ने उनका शारीरिक शोषण किया और उनके घरों को तहस-नहस कर दिया गया।”

जाँच टीम को कई महिलाओं ने बताया कि उनके घरों को आग के हवाले कर दिया गया है। इन महिलाओं ने बताया कि उन्हें रोज बलात्कार की धमकियाँ मिल रही हैं। पुलिस-प्रशासन उन्हें उचित सुरक्षा मुहैया कराने में नाकाम रहा है। पीड़ित महिलाओं ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि वो बड़े-बुजुर्गों को घर में छोड़ कर ही भागने को मजबूर हुई हैं और उन्हें अब उनकी चिंता खाए जा रही है। जिन शेल्टर होम वो रह रही हैं, वहाँ भी कोई सुविधाएँ नहीं हैं।

कोरोना महामारी के इस दौर में उन्हें वहाँ न तो कोई मेडिकल सुविधाएँ दी जा रही हैं और न ही स्वस्थ भोजन या स्वच्छ पीने के पानी की कोई व्यवस्था है। जाँच टीम की अध्यक्ष खुद रेखा शर्मा ही थीं। उन्होंने कई महिलाओं से बात की, जो अपनी बेटियों को बंगाल से बाहर भेजना चाहती हैं। NCW ने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। महिलाओं से जुड़े मामलों से निपटने के लिए महिला पुलिसकर्मी भी कम हैं।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा कि महिलाओं के साथ हो रहे अपराध से निपटने के लिए पुलिस को उचित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। आयोग ने कहा कि महिलाओं को पता ही नहीं है कि उनके लिए सरकार कौन सी योजनाएँ चलाती हैं। ऐसी पीड़ित महिलाओं के पुनर्वास के लिए कोई योजना नहीं है। NCW ने महिलाओं के बीच केंद्र सरकार द्वारा उनके कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं को लेकर जागरूकता फैलाने पर भी बल दिया।

पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण कड़ाई बढ़ा दी गई है। महिला आयोग की टीम ने कहा कि उसे और भी पीड़ित महिलाओं से मिलना था लेकिन राज्य के अधिकारियों ने कोरोना दिशा-निर्देशों का बहाना बना कर ये मुलाकात नहीं होने दी। NCW की टीम राज्यपाल जगदीप धनखड़ से भी मिली, जिन्होंने सभी जिलों के DM-SP से ऐसे मामलों में हुई FIR की रिपोर्ट्स तलब करने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ अपराध के मामलों में पुलिस अधिकारियों को रिपोर्ट्स के साथ राष्ट्रीय महिला आयोग के समक्ष पेश होने के लिए निर्देश दिया जाना चाहिए। केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम ने भी बंगाल में कई हिंसा पीड़ित स्थलों का दौरा किया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी जाँच के लिए ऐसी ही एक टीम गठित की है। उधर कोलकाता हाईकोर्ट ने भी हिंसा को लेकर राज्य सरकार से रिपोर्ट माँगी है।

‘मुस्लिम पंचर नहीं बनाएँगे तो आप गाड़ी कैसे चलाएँगे’: सीनियर कॉन्ग्रेसी नेता ने वीडियो में खुलेआम कही मांस-मिस्त्री की बात

कर्नाटक के दक्षिण बेंगलुरु से भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने “बेड के लिए रिश्वत” घोटाले के सिलसिले में दक्षिण बेंगलुरु के कोविड -19 वॉर रूम में काम करने वाले 17 मुस्लिम कर्मचारियों का नाम लिया था। इसके बाद कर्नाटक कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने बीजेपी सांसद पर निशाना साधा। कॉन्ग्रेस नेता ने इस घोटाले के साथ मुस्लिमों का नाम जोड़े जाने पर भाजपा नेता को फटकार लगाई।

डीके शिवकुमार ने बेड घोटाले के मामले में तेजस्वी सूर्या से सवाल किया कि उनकी कार टूट जाए या टायर पंचर हो जाती है अथवा उनकी साइकल टूट जाती है, तो ऐसी स्थिति में वो कहाँ जाएँगे।

मुस्लिमों की वकालत करते हुए कॉन्ग्रेस नेता ने कहा, “अगर वे मांस नहीं काटेंगे हैं, तो वे इसे कहाँ से लाएँगे। अगर मुस्लिम पंचर की दुकान नहीं चलाएगा तो वे गाड़ी कैसे चलाएँगे। यदि वे मैकेनिक की दुकानें नहीं चलाते हैं, तो आप साइकिल/मोटरसाइकिल की सवारी नहीं कर सकते। अगर मुस्लमान काम नहीं करेंगे तो क्या तेजस्वी सूर्या के घर के लोग मरम्मत का काम करेंगे?”

शिवकुमार ने तेजस्वी सूर्या से यह भी सवाल किया, “अगर मुसलमान पंचर ठीक नहीं करेंगे या आपके गाड़ियों की मरम्मत नहीं करेंगे तो आप कहाँ जाएँगे? क्या आप कभी भी उनकी तरह मैकेनिक बन सकते हैं?”

डीके शिवकुमार ने भाजपा सांसद पर इस मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया है।

दरअसल, बीजेपी के युवा मोर्चा अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने बुधवार (5 मई 2021) को दक्षिण बेंगलुरु स्थित कोविड -19 वार रूम का दौरा किया था। इसी दौरान उन्होंने 17 मुसलमानों का नाम लिया था। उन्होंने कोविड-19 बेड घोटाले के खुलासे के बाद वार रूम में काम करने वाले 17 कर्मचारियों की योग्यता पर सवाल उठाया था।

दौरे के दौरान युवा सांसद के साथ बोम्मनहल्ली से भाजपा के विधायक एम सतीश रेड्डी और बसावनगुड़ी से विधायक रवि सुब्रमण्यम उनके साथ थे। सुब्रमण्यम को अधिकारियों से यह पूछते हुए भी सुना गया था, “क्या आपने इन लोगों को मदरसा या निगम (बीबीएमपी) के लिए नियुक्त किया है?”

भाजपा सांसद की टिप्पणी का वीडियो वायरल होने के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी तेजस्वी सूर्या को घेरते हुए उनकी गिरफ्तारी की माँग की है। इस बीच वार रूम की देखरेख करने वाली एजेंसी ने मामले की जाँच होने तक सभी 17 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है।

ऐसे हुआ बीबीएमपी-बेड घोटाले का खुलासा

कोरोना संकट के बीच हो रहे इस घोटाले का खुलासा उस वक्त हुआ जब मंगलवार (4 मई 2021) को बेंगलुरू दक्षिण से बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या, तीन अन्य भाजपा विधायकों- सतीश रेड्डी, रवि सुब्रह्मण्य और उदय गरुडाचार के साथ बीबीएमपी वार रूम का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बेड अलॉटमेंट के अवैध धंधे का भंडाफोड़ कर दिया। इसमें बड़े पैमाने पर अधिकारियों और निजी एजेंटों के बीच आपसी साठगाँठ का खुलासा हुआ।

बीजेपी सांसद ने आरोप लगाया था कि बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) के कुछ अधिकारियों ने होम आईसोलेशन में रहकर कोरोना का इलाज करा रहे मरीजों के नाम पर बेड बुक करने के लिए बिचौलियों और दलालों के साथ हाथ मिला रखा था। ये इन बेड्स को अन्य मरीजों को जरूरत से ज्यादा कीमत पर बेच रहे थे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सूर्या ने कहा था कि बेंगलुरु शहर में पर्याप्त बेड हैं। हालाँकि, वार रूम के कर्मी बिस्तरों को रोकने का रैकेट चला रहे हैं। वे लोगों से पैसे लेकर उन्हें बेड अलॉट कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बीबीएमपी अधिकारियों, आरोग्य मित्र अस्पतालों और निजी एजेंट आपसी साठगाँठ के तहत इस अपराध में लिप्त थे।

इसके अलावा, सूर्या ने वार रूम में हायर किए 17 लोगों की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाया था और उनसे उनकी पैरेंट एजेंसी के बारे में जानकारी हासिल की। सूर्या ने जिन लोगों से पूछताछ की थी, उसमें मंसूर अली, ताहिर अली खान, सादिक पाशा, एमडी जायद, अलसाई साहेर, उमर खान, सलमान उरीफ, जमील पाशा, जबीउल्ला खान, सईद हसनैन, सईद शाहिद, सईद शहबाज, हैं यूनुस, सैयद मोहिन और सैयद मुकेश शामिल थे।

‘बरगद के नीचे बैठ गोमूत्र और कोरोनिल खाओ’: कोरोना+ हुईं कंगना रनौत, कट्टरपंथियों ने कहा – ‘बंगाल में FIR से डर गई’

बॉलीवुड की मौजूदा शीर्ष अभिनेत्रियों में से एक कंगना रनौत कोरोना वायरस से संक्रमित हो गई हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों से वो न सिर्फ थकान और कमजोरी महसूस कर रही थीं, बल्कि उनकी आँखों में भी जलन हो रहा था। वो हिमाचल प्रदेश के मनाली स्थित अपने घर जाना चाहती थीं, जिसके लिए उन्होंने शुक्रवार (मई 7, 2021) को अपना कोरोना टेस्ट कराया। अगले दिन उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।

‘थलाईवी’ की अभिनेत्री कंगना रनौत ने खुद को क्वारंटाइन कर लिया है। उन्होंने कहा, “मुझे पता ही नहीं था कि पिछले कुछ दिनों से ये वायरस मेरे शरीर के अंदर पार्टी कर रहा था। अब जब मुझे पता चल गया है, मैं इसे तबाह कर दूँगी। आप लोग किसी भी अन्य शक्ति को अपने ऊपर हावी मत होने दीजिए। अगर आप डरेंगे तो ये आपको और डराएगा। आइए, हम सब मिल कर कोविड-19 को बर्बाद कर दें।”

कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम के माध्यम से खुद के कोरोना संक्रमित होने की जानकारी देते हुए लिखा, “आखिर ये है क्या? ये कुछ समय के लिए होने वाला एक फ्लू ही तो है, जिसे खूब मीडिया कवरेज मिली और अब ये लोगों को डरा रहा है। हर-हर महादेव!”

पिछले कुछ दिनों से कंगना रनौत आध्यात्मिक पोस्ट्स भी शेयर कर रही थीं। उन्होंने हाल ही में सद्गुरु जग्गी वासुदेव के वीडियो शेयर किए थे। ट्विटर से निलंबित किए जाने के बाद इंस्टा स्टोरीज के माध्यम से वो लगातार अपनी बात रखती रहती हैं।

कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम के माध्यम से दी जानकारी

जहाँ कई लोगों ने कंगना रनौत के जल्दी ठीक होने की, कुछ लोग ऐसे भी हैं जो उनके बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कर रहे हैं और उनका मजाक उड़ा रहे हैं। प्रयाग नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “बरगद के पेड़ के नीचे बैठा दो। बहुत ऑक्सीजन देता है वो। जल्दी ठीक हो जाएगी हमारी दीदी।”

इस यूजर ने डिलीट कर लिया अपना ट्वीट

रेहान अफरोज खान ने हँसने वाली तस्वीर पोस्ट की। गौरव सिंह नामक यूजर ने लिखा, “मोदी-मोदी करो और पेड़ के नीचे बैठ जाओ।” एक यूजर ने लिखा कि पश्चिम बंगाल में FIR होने के बाद कंगना रनौत पुलिस से बचने के लिए ‘नाटक’ कर रही हैं। दानिश नाम के यूजर ने लिखा, “मुझे कोरोना वायरस के लिए दुःख है। वायरस ने वायरस को जकड़ लिया।”

एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “उन्हें बाबा रामदेव का ब्रीथिंग एक्सरसाइज करनी चाहिए। दवा के रूप में कोरोनिल का उपयोग करना चाहिए। बाल्टी भर के गौमूत्र के साथ ‘भाभी पापड़’ खाना चाहिए। हाँ, गायत्री मंत्र पढ़ना मत भूलना। उन्हें कुछ नहीं होगा।”

एक यूजर ने लिखा कि ये ट्विटर से जाने का साइड इफेक्ट है। एक ने सलाह दी कि वो बगल के जंगल में जाकर ऑक्सीजन ले लें। एक ने उन्हें ‘आंटी जी’ कहते हुए लिखा कि अब कंगना को पता चलेगा कि ऑक्सीजन कहाँ से आता है।

कंगना रनौत पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते ट्विटर यूजर्स

रेहान अहमद ने लिखा, “कंगना रनौत हमेशा के लिए कोरोना पॉजिटिव रहें – खुद के लिए, मोदी के लिए, अपने फैंस के लिए।” कुछ ट्विटर यूजर्स ने लिखा कि अब हमें कंगना के लिए नहीं, कोरोना वायरस के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

मोहम्मद राशिद इमाम ने लिखा, “इसे बाबा रामदेव का कोरोनिल दो वरना ये भी सिस्टम की भेंट चढ़ जाएगी। एक ने लिखा कि कंगना को डॉक्टर या वेंटिलेटर की नहीं, गाँव में पेड़ों की ज़रूरत है। एक यूजर ने तो यहाँ तक दावा कर दिया कि ये प्रोपेगंडा है।

यदुवंशी अशोक ने लिखा, “भगवान करे इसे ऑक्सीजन की ज़रूरत पड़े।” हुडा अहमद ने लिखा कि कंगना इसे अपने खिलाफ साजिश बता देंगी। एक अन्य ने लिखा, “इतनी नेगेटिव महिला पॉजिटिव कैसे हो गई?”

एक ट्विटर यूजर ने कंगना को ही बता दिया ‘वायरस’

बताते चलें कि अभिनेत्री कंगना रनौत के विरुद्ध तृणमूल कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता रिजू दत्ता ने एफआईआर दर्ज करवाई है। दत्ता ने अपने ट्विटर पर एफआईआर की कॉपी शेयर करते हुए बताया कि बंगाल में साम्प्रादायिक हिंसा उकसाने के लिए कंगना हेट प्रोपगेंडा फैलाने की कोशिश कर रही हैं और इसके अलावा ममता बनर्जी की छवि बिगाड़ने का प्रयास भी लगातार उनके द्वारा किया जा रहा है। अपने ट्वीट में रिजू ने दावा किया कि कंगना ने अपने इंस्टा पर स्टोरी शेयर करके लोगों को भड़काने का काम किया ।

रमजान का आखिरी जुमा: मस्जिद में यहूदियों का विरोध कर रहे हजारों नमाजियों पर इजरायल का हमला, 205 रोजेदार घायल

इजरायल की पुलिस ने पूर्वी जेरुसलम स्थित अल-अक़्सा मस्जिद में भीड़ जुटा कर नमाज पढ़ रहे मुस्लिमों पर हमला किया, जिसमें 205 रोजेदार घायल हो गए। इनमें से अधिकतर फिलिस्तानी थे। जेरुसलम को लेकर पिछले एक सप्ताह से फिर से इजरायल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष चालू है। शुक्रवार (मई 7, 2021) को रमजान महीने का आखिरी जुमा था, ऐसे में अल-अक़्सा मस्जिद में हजारों लोग जुटे हुए थे।

वहाँ इजरायल के खिलाफ नारेबाजी हुई और फिलिस्तानियों ने आरोप लगाया कि यहूदियों ने मुस्लिमों को उनके घर से निकाल कर कब्ज़ा कर लिया है। नमाज के बाद भी कई लोग वहाँ रुक कर इजरायल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। ‘शेख जर्राह’ इलाके के लोगों के समर्थन में कुछ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ता भी पहुँचे हुए हैं।

इजरायल की पुलिस और सेना ने पानी, आँसू गैस और रबर कोटेड बुलेट्स से हमला बोला है। साथ ही उन्होंने पिछले कुछ महीनों से फिलिस्तीन के खिलाफ ग्रेनेड्स का प्रयोग भी किया है। दर्जनों फिलिस्तीनियों को गिरफ्तार किया गया है।

अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा है कि वो जेरुसलम में हिंसा को लेकर चिंतित है और दोनों ही पक्षों से तनाव कम करने के लिए निर्णायक कदम उठाने का आग्रह करता है। अमेरिका ने कहा कि रमजान के आखिरी हफ्ते में ऐसी हिंसा ठीक नहीं है और फिलिस्तीनी परिवारों के लिए वो चिंतित है।

वहीं संयुक्त राष्ट्र ने इजरायल से कहा है कि जेरुसलम में उसकी गतिविधियाँ ‘युद्ध अपराध’ की श्रेणी में आ सकती है। UN ने इजरायल से ‘अवैध निष्कासनों’ पर रोक लगाने को कहा है। UN ने कहा कि पूर्वी जेरुसलम फिलिस्तीन में आता है और वहाँ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून लागू होते हैं।

इजरायल की पुलिस-सैनिक कार्रवाई में 88 फिलिस्तीनी रोजेदारों को रबर बुलेट्स लगे। अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। इजरायल ने कहा है कि उसके 17 पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं।

कई इस्लामी मुल्कों ने इस घटना की निंदा की है। इजरायल की पुलिस का कहना है कि वहाँ दंगों और आगजनी को रोकने के लिए उसने ये कदम उठाया। पुलिस ने कहा कि मजहब या कुछ के भी नाम पर दंगे कर के पुलिसकर्मियों को चोट पहुँचाने की हरकतें बर्दाश्त नहीं की जाएँगी। इजरायल उस क्षेत्र को ‘टेम्पल माउंट’ कहता है।

एक जनाजा, 150 लोग और 21 दिन में 21 मौतें: राजस्थान के इस गाँव में सबसे कम टीकाकरण, अब मौत का तांडव

राजस्थान के सीकर स्थित खीरवा गाँव में एक व्यक्ति के जनाजे में लापरवाही होने के कारण अब तक 21 लोगों की जान जा चुकी है। पिछले 21 दिनों में इस गाँव के 21 घरों से जनाजे उठ चुके हैं। पहले तो गाँव के ही लोग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे थे, लेकिन लगातार होती मौतों से अब वो भी दहशत में हैं। प्रशासनिक अमला भी देर से सक्रिय हुआ और अब लोगों की जाँच कर के उन्हें क्वारंटाइन करने की प्रक्रिया चालू की गई है।

खीरवा गाँव में संक्रमण की शुरुआत अप्रैल 21, 2021 से हुई। इस गाँव के मोहम्मद अजीज गुजरात में कारोबार करते थे। उनकी मौत वहीं हो गई। इसके बाद बॉडीकिट में पैक कर के उनके शव को गाँव लाया गया। लापरवाही ये की गई कि शव को सीधे कब्रिस्तान ले जाने की बजाए उनके घर ले जाया गया। वहाँ पर परिजनों ने शव को किट से बाहर निकाल दिया। साथ ही जनाने में 150 से भी अधिक लोग शामिल हुए।

शव को बॉडीकिट से बाहर निकाल कर कब्रिस्तान में दफनाने और जनाजे में 150 लोगों के शामिल होने का दुष्प्रभाव ये हुआ कि संक्रमण पूरे गाँव में फ़ैल गया। गाँव में रोज किसी न किसी की मौत होने लगी। पहले तो बुजुर्गों की मौत हुई, जिसे ग्रामीणों ने प्राकृतिक समझा और गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन, मौतों का सिलसिला थमा नहीं। प्रशासन ने भी अपनी जाँच में ग्रामीणों को ही दोषी ठहराया है।

पिछले दिनों यहाँ गफूर खान (101 साल), जन्नत बानो (62 साल), हाफिजां बानो (95 साल), इलायची बानी (78 साल), सलामत बानी (65 साल), महताब खान (87 साल), बिहारलीलाल शर्मा (78 साल), जावेद खान (32 साल), बिस्मिल्ला (80 साल), मजीद खान (88 साल), बिस्मिल्लाह बानो (83 साल), जन्नत बानो (73 साल), छोटू खान (81 साल), ताज बानो (71 साल), बानू (70 साल), हाजरा बानो (81 साल) और आलम खातून (69 साल) की मौत हुई है। इसके बाद प्रशासन ने गाँव में निरीक्षण किया।

उपखण्ड अधिकारी डॉक्टर कुलराज मीणा ने बताया कि राज्य के शिक्षा मंत्री के निर्देश के बाद गाँव में एक जिला स्तरीय टीम भेज कर निरीक्षण की प्रक्रिया पूरी की गई। इसमें सामने आया कि पूरे प्रखंड में सबसे कम टीकाकरण खीरवा गाँव में ही हुआ है। स्थानीय नागरिकों ने न सिर्फ शुरूआती लक्षणों को छिपाया, बल्कि डोर टू डोर सर्वे में भी सहयोग नहीं किया। उन्हें मुफ्त में मेडिकल किट दिए गए, लेकिन इसका उपयोग ही नहीं किया गया।

अब गाँव के लोगों को कहा गया है कि वो अधिक से अधिक संख्या में टीकाकरण और सैम्पिंग करवाएँ। पंचायत में और लोगों के घरों में भी सैनिटाइजर का छिड़काव कराया जा रहा है। जिन परिवारों में मृत्यु हुई है, वहाँ खास नज़र रखी जा रही है। लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्र में हुई इस घटना को लेकर राज्य के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि ये उनके लिए सीख है, जो कोरोना को गंभीरता से नहीं लेते।

‘पत्रिका’ की खबर के अनुसार, गाँव के लोग अब भी कह रहे हैं कि सभी मौतें कोरोना से नहीं हुई होंगी, इनमें से कई प्राकृतिक भी हो सकती है। गाँव के अरशद अयूब पठान का कहना है कि संक्रमित शव के साथ जो 30 लोग आए थे, उनमें से कोई कोरोना पॉजिटिव नहीं आया है। उन्होंने अंदेशा जताया कि शव से संक्रमण फैलने की सूचना गलत हो सकती है। गाँव के 6 कोरोना संक्रमित अभी साँवली अस्पताल में भर्ती हैं लेकिन फिर भी लोग कह रहे कि हम जागरूक हैं और जो मरे हैं, उनमें से अधिकतर की उम्र 70 से अधिक थी।

गाँव के सरपंच हाकिम अली का कहना है कि इस गाँव में किसी-किसी साल में एक भी मौत नहीं होती थी और ज्यादा से ज्यादा 5-6 लोग मरते थे, लेकिन ये आँकड़ा काफी ज्यादा है। गोविंद सिंह डोटासरा ने अपने ट्वीट डिलीट कर लिया है, जिसमें उन्होंने शव के छूने से संक्रमण फैलने की बात कही थी। संक्रमण के प्रभाव की जाँच के लिए 157 RT-PCR सैम्पल लिए गए हैं। अब डोटासरा ने स्थानीय प्रशासन के हवाले से दावा किया है कि उक्त शव कोरोना संक्रमित का नहीं था।

पुणे के अस्पतालों में ऑक्सीजन की ऑडिट से रोज 30 टन की बचत, दिल्ली सरकार ऑडिट से जता रही आपत्ति

देश भर के अस्पतालों में कोरोना महामारी के बीच ऑक्सीजन की ज़रूरत पड़ रही है और लगातार सभी राज्यों को इसकी आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। जहाँ दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने ऑक्सीजन के उपयोग की ऑडिट कराने से आपत्ति जताई, वहीं पुणे के अस्पतालों में ऑडिट होने के कारण प्रतिदिन लगभग 30 टन ऑक्सीजन की बचत हो रही है। पुणे के कोविड डेडिकेटेड हॉस्पिटल्स (CDH) को इससे खासा फायदा मिल रहा है।

पुणे और पिम्परी चिंचवाड़ के अस्पतालों में ऑक्सीजन ऑडिट होने से मरीजों को भी इसका पूरा लाभ मिल रहा है। दोनों जगहों की नगरपालिकाओं ने कहा है कि मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन का उचित उपयोग, आपात स्थिति में इसके उपयोग और मरीज के भोजन करते समय या बेड पर न होने के समय ‘हाई फ्लो नजल ऑक्सीजन (HFNO)’ को रोकने से बड़ी मात्रा में इसकी बचत की जा रही है, वो भी बिना मरीजों को कोई परेशानी हुए।

सस्सून जनरल हॉस्पिटल, पुणे व पिम्परी के जम्बो कोविड यूनिट्स और यशवंत चव्हाण मेडिकल हॉस्पिटल रोज 6 टन ऑक्सीजन की बचत करते हैं। सस्सून जनरल हॉस्पिटल के एडमिनिस्ट्रेशन कंट्रोलर एस चोकलिंगम ने कहा कि आतंरिक ऑडिटिंग और टाइमली मॉनिटरिंग के माध्यम से वो ऑक्सीजन की बचत कर रहे हैं। पिम्परी चिंचवाड़ मुनिसिपल कॉर्पोरेशन (PCMC) डिप्टी कमिश्नर स्मिता जगड़े ने कहा कि 15 दिन पहले तक सब कुछ इतना ठीक नहीं था।

उन्होंने बताया कि दो हफ्ते पहले तक ऑक्सीजन की माँग ज्यादा थी और इसकी बचत भी नहीं हो पा रही थी। लेकिन, अब स्थिति बेहतर है क्योंकि ‘ऑक्सीजन नर्सों’ की नियुक्ति, मरीजों को उचित ऑक्सीजन स्तर पर रखने, ‘प्रोन पोजीशन’ वाला व्यायाम करवाने और लीकेज को ठीक करने जैसे कई उपाय किए गए। साथ ही ऑक्सीजन की सप्लाई को भी निर्बाध बनाया गया है, जिससे इसका उचित उपयोग हो रहा है।

कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग पुणे (CoEP) जम्बो यूनिट के डीन श्रेयांश कपाले ने कहा कि ऑडिट की मदद से ऑक्सीजन की प्रतिदिन होने वाली खपत को हम 22 टन से 16 टन तक लाने में कामयाब रहे हैं। साथ ही मरीजों को अलग-अलग हिस्सों में बाँटा गया – जिन्हें ऑक्सीजन की ज़रूरत नहीं हो, जिन्हें कम ऑक्सीजन की ज़रूरत हो और जिन्हें ज्यादा की। साथ ही समुचित प्रेशर के साथ ऑक्सीजन को उन वॉर्ड्स में डाइवर्ट किया गया।

इन सब फायदों के बावजूद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में केंद्र सरकार के ऑक्सीजन के उपयोग की ऑडिट करने पर आपत्ति जताई। सुप्रीम कोर्ट में SG तुषार मेहता ने जोर देकर कहा कि दिल्ली में ऑक्सीजन के उपयोग की ऑडिट करने की जरूरत है। ऑडिट से न सिर्फ सही प्रबंधन होता है, बल्कि काम में भी तेज़ी आती है। मुंबई में भी इससे फायदा हो रहा है। आरोप है कि दिल्ली में ऑक्सीजन के स्टॉक को सही तरीके से बाँटा नहीं जा रहा है।