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कोरोना से जंग का कर्मयोगी: जमीन पर उतर मोर्चा लेने की CM योगी की ताकत, दूसरी लहर पर UP ने ऐसे पाया काबू

कोरोना की दूसरी लहर से लगभग पूरा देश ही जूझ रहा है। महामारी इतनी भयावह है कि स्वास्थ्य सेवा किसी विकसित देश की हो या अल्प विकसित देश की, बुरी तरह से प्रभावित है। सीमित संसाधन हर देश की लड़ाई को पंगु कर रहे हैं, ऐसे में भारत इसका अपवाद कैसे हो सकता है?

लेकिन यह कठिन समय ही नागरिकों को उनके नेताओं की नेतृत्व क्षमता पहचानने का भी मौका दे रहा है। नेताओं को इस बात का भान हो या न हो, पर आम भारतीय के मन और मस्तिष्क में उनकी बातें, उनका प्रदर्शन और उनकी नेतृत्व क्षमता जमा हो रही है।

भारत देख रहा है कि उपलब्ध सीमित संसाधनों के साथ कौन मुख्यमंत्री अपने राज्य के लोगों के लिए क्या-क्या कर रहा है। कौन केवल शिकायतें कर रहा है। कौन केवल मेहनत कर रहा है। कौन प्रोपेगेंडा कर रहा है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि मीडिया किसके खिलाफ, किसके पक्ष में और किसके साथ खड़ा है। इस लड़ाई का ऐसा कोई पहलू नहीं है जो एक आम भारतीय कहीं रिकॉर्ड न कर रहा हो।

ऑक्सीजन की कमी से लेकर उसके सरप्लस तक की यात्रा के दस्तावेज लिखे जा रहे हैं। बॉलीवुड सेलेब्स द्वारा किसी मुख्यमंत्री के यश गायन वाले ट्वीट के स्क्रीनशॉट लिए जा रहे हैं। पूरे भारत को ऑक्सीजन और इंजेक्शन की सप्लाई का दावा करने वाले किसी अति औसत दर्जे के सिने स्टार को ट्रोल किया जा रहा है।

कहीं नाराज़ समर्थक अपने ही मंत्री पर ट्वीट मिसाइल दागे जा रहे हैं। विपक्षी नेता द्वारा सत्ता में वापसी कर भाजपा समर्थकों से बदला लेने की धमकी वाला वीडियो वायरल हुआ जा रहा है। जिनके बच्चों की वैक्सीन मोदी ने कथित तौर पर विदेश भेज दी, वे लॉकडाउन के नियम तोड़कर शिकायती पोस्टर चिपका रहे हैं।

इन घटनाओं के बीच यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ हर जगह दिखाई दे रहे हैं। चाहे वह हॉस्पिटल हो या आँगनबाड़ी में बना टेस्ट सेंटर। गाँव का कोविड सेंटर हो या फिर गाँव में कोरोना पीड़ितों की सहायता के लिए पहुँची टीम से बातचीत। किसी शहर में तीसरी लहर के लिए की जाने वाली तैयारी हो। हर जगह योगी दिखाई दे रहे हैं। पत्रकारों से बात करते हुए, अफसरों के साथ बैठक करते हुए, आदेश देते हुए, ऑक्सीजन सप्लाई के लिए बनने वाले प्लांट का जायज़ा लेते हुए, ऑक्सीजन ऑडिट के लिए पहुँची टीम से मुलाक़ात करते हुए! ऐसी कोई जगह नहीं जहाँ योगी दिखाई न दे रहे हों। यह बात अलग है कि वे ख़ुद कोरोना संक्रमण से लड़कर स्वस्थ हो वापस लौटे हैं।

साभार: दैनिक हिंदुस्तान

आईआईटी कानपुर और आईआईटी वाराणसी के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से बात करके अपने प्रदेश में ऑक्सीजन ऑडिट की पहल ख़ुद योगी ने की। दिल्ली के आईआईटियन मुख्यमंत्री के ठीक उलट जो आक्सीजन ऑडिट की बात का तब तक विरोध करते रहे जब तक उनके लिए यह करना संभव था।

यह विडंबना ही है कि मुख्यमंत्री के तौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश में इनसेफ्लाइटिस से लड़ाई के लिए योगी सरकार की सराहना राष्ट्रीय मंचों पर कम और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अधिक हुई। ऐसे में यह मात्र संयोग नहीं है कि कोरोना की दूसरी लहर से निपटने के इस सरकार के तरीक़ों की सराहना विश्व स्वास्थ्य संगठन कर चुका है।

करीब एक महीने पहले रोज नए संक्रमित रोगियों की संख्या क़रीब चालीस हजार से घट कर आज दस हजार के आस-पास आ पहुँची है। टीम बनाकर गाँव में मरीजों को पहचानने की बात हो या उनके इलाज के लिए एक न्यूनतम तैयारी की बात हो, योगी आदित्यनाथ ने विशेषज्ञों पर निर्भरता और विश्वास दिखाया है।

उनकी सरकार ने जिन योजनाओं पर काम शुरू किया है, वे समय पर पूरी हुई तो प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को एक नई पहचान मिलेगी। ऑक्सीजन की कमी हो या अस्पतालों में बेड बढ़ाने की आवश्यकता, इस समय योगी सरकार हर समस्या पर काम कर रही है। कोरोना की संभावित तीसरी लहर से लड़ने की तैयारियों की शुरुआत नोएडा के अस्पताल से हो चुकी है और योजना के अनुसार प्रदेश सरकार समय रहते अपनी तैयारियों को पूरा कर लेगी।

ऐसा नहीं कि इस महामारी से लड़ाई में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सब कुछ सही ही किया है। लेकिन यह अवश्य है कि उन्होंने पहले से उपलब्ध संसाधनों को न केवल बढ़ाने का काम किया है, बल्कि अपनी तरफ से हर संभव कोशिश की है कि महामारी पर क़ाबू पाया जा सके।

योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार का मूल्यांकन पहले भी हुआ है और आगे भी होगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि अब उनके नेतृत्व की क्षमता और प्रदर्शन का तार्किक मूल्यांकन भी किया जाएगा।

उमंग का गुस्सा बहुत ज्यादा है…मुझे डर लगता है: GF के सुसाइड पत्र और चैट ने खोले कॉन्ग्रेस विधायक के कई राज, केस दर्ज

मध्य प्रदेश के पूर्व वन मंत्री और वर्तमान में गंधवानी से कॉन्ग्रेस विधायक उमंग सिंघार अपनी ‘गर्लफ्रेंड’ सोनिया भारद्वाज के सुसाइड मामले में चारों ओर से घिर गए हैं। पुलिस को घटनास्थल से सुसाइड नोट बरामद होने के बाद अब वॉट्सऐप चैट से पता चला है कि सोनिया लगातार मानसिक प्रताड़ना झेल रही थीं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट बताती है कि पुलिस के हत्थे सिंघार और भारद्वाज के बीच हुई बातचीत के कई प्रमाण हैं, जिनसे लगता है कि सोनिया उमर सिंघार के साथ रिश्ते को लेकर मानसिक तनाव में थीं। हालाँकि अभी, इस पर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। इसके अलावा सूत्रों के हवाले से यह भी बताया जा रहा है कि शादी के नाम पर सोनिया को रोका जा रहा था, जिसके चलते वह काफी परेशान थीं।

आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज

इस रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस के पास सिंघार के खिलाफ काफी सबूत हैं और इसी को देखते हुए घटना के मात्र 30 घंटों के अंदर ही सिंघार को केस में आरोपित बना दिया गया है। उनके खिलाफ गैर जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है। लेकिन अभी विधायक की गिरफ्तारी नहीं हुई है। लेकिन पुलिस का कहना है कि वह जल्द ही कॉन्ग्रेस नेता को हिरासत में लेगी।

पुलिस फिलहाल हर कड़ी को जोड़ते हुए अपनी जाँच कर रही है। सोनिया का फोन जब्त करके जरूरी जाँच करवाई जा रही है। अभी तक मिले सारे सबूत और बयान सिंघार के खिलाफ हैं। शुरू में सिंघार इस मामले में आरोपित बनाए जाने से पहले मजिस्ट्रेट से जाँच की माँग कर रहे थे। हालाँकि पुलिस ने बताया कि उनके पास कॉन्ग्रेस नेता के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं जिन्हें एक-एक कर जमा किया जा रहा है।

गौरतलब है कि हरियाणा के अंबाला की रहने वाली 39 वर्षीय सोनिया भारद्वाज का शव रविवार (मई 16, 2021) को भोपाल स्थित कॉन्ग्रेस विधायक उमर सिंघार के निजी बंगले से बरामद किया गया था। सोनिया ने कथित तौर पर बंगले में फंदे से लटक कर आत्महत्या कर ली थी। सोनिया के पास से सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इसमें लिखा था,

“अब मैं और सहन नहीं कर सकती। मैंने अपनी तरफ से सबकुछ किया। पर उमंग का गुस्सा बहुत ज्यादा है। मुझे डर लगता है। वो मुझे अपनी लाइफ में जगह नहीं देना चाहता। उसकी किसी भी चीज को टच करो तो उसको बुरा लगता है। इस बार भी मैं जबरदस्ती भोपाल आई। वो चाहता ही नहीं था कि मैं भोपाल आऊँ। आर्यन सॉरी। मैं तेरी लाइफ के लिए कुछ नहीं कर पाई। मैं जो भी कर रही हूँ, अपनी मर्जी से कर रही हूँ। किसी की कोई गलती नहीं है। उमंग आपके साथ मैंने सोचा था लाइफ सेट हो जाएगी। आई लव यू। कोशिश की अडजस्ट करने की पर आपने जगह नहीं दी मुझे अपनी लाइफ में। आर्यन सॉरी।”

भोपाल के एसीपी राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता के विरुद्ध आईपीसी की धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। उन पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। वहीं कॉन्ग्रेस नेता ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह दो-तीन दिन से विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर थे। जैसे ही उन्हें इसकी जानकारी हुई वह तत्काल भोपाल आ गए। उनका कहना है कि वो खुद हैरान हैं कि सोनिया ने ऐसा क्यों किया, वो तो बहुत अच्छी मित्र थीं।

कोरोना बेकाबू, फिर भी 500 की ‘छोटी भीड़’ के सामने शपथ लेंगे वामपंथी विजयन: समारोह रोकने को SC में याचिका

जहाँ एक तरफ केरल कोरोना वायरस संक्रमण से बेहाल है, वहीं दूसरी तरफ वामपंथी गठबंधन एक भव्य समारोह के जरिए भीड़ जुटा कर अपनी सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारी में लगा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में एक सेवानिवृत्त वैज्ञानिक ने याचिका दायर कर के इस शपथग्रहण समारोह को रोकने की अपील की है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कोरोना दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए सभी राजनीतिक या धार्मिक समारोहों और प्रदर्शनों पर रोक लगाने की बात की गई है।

रिटायर्ड वैज्ञानिक केएम शाहजहाँ ने वकील उषा नंदिनी के जरिए दायर की गई याचिका में कहा है कि कम से कम 1 महीने के लिए 50 लोगों से अधिक के जुटान वाले सभी समारोहों पर रोक लगाई जाए। राजधानी तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में गुरुवार (मई 20, 2021) को दोपहर 3:30 बजे होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में 500 लोगों के शामिल होने की बात कही जा रही है। इसके लिए 80,000 स्क्वायर फ़ीट का पंडाल तैयार किया जा रहा है।

याचिका में लिखा है, “ऐसे समारोह में भीड़ जुटाने की अनुमति कोरोना के इस काल में नहीं दी जा सकती। इसमें आमंत्रण पाकर आने वाले लोग खुद के लिए ही खतरा पैदा कर रहे हैं। पंडाल के निर्माण के लिए हजारों कार्यकर्ताओं की सेवा ली जा रही है। इस ‘सुपर स्प्रेडर’ सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए केरल के सरकारी खजाने से भारी रकम खर्च की जा रही है। अपनी ताकत दिखाने और जीत का जश्न मनाने के लिए ऐसा किया जा रहा है।”

इस समारोह को सत्ता के दुरुपयोग के साथ-साथ लोगों के जीवन को संकट में डालने वाला भी बताया गया है, जिससे कोरोना के और ज्यादा फैलने की आशंका है। याचिका में दावा किया गया है कि नेतागण कोरोना के दिशानिर्देशों को नहीं मान रहे हैं। साथ ही 75 से अधिक लोगों की उपस्थिति वाले शपथग्रहण समारोहों को वर्चुअल कराने की दरख्वास्त की गई है। साथ ही माँग की गई है कि केरल के मुख्य सचिव को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया जाए।

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का कहना है कि कोरोना के आलोक में ये समारोह सादा ही होगा। उन्होंने कहा कि 2016 में जब उनका शपथग्रहण हुआ था, तब वहाँ 40,000 लोग मौजूद थे। उन्होंने कहा कि ये एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसके तहत 140 विधायकों और 29 सांसदों को समारोह में आने से नहीं रोका जा सकता। उन्होंने 500 को एक छोटी संख्या बताते हुए कहा कि न्यायपालिका और मीडिया के लोग भी लोकतंत्र के स्तम्भ हैं, ऐसे में उन्हें भी उपस्थित रहना ही होगा।

‘द न्यूज मिनट’ ने अधिवक्ता अर्यमा सुंदरम के हवाले से लिखा है कि एक शपथग्रहण समारोह में लोगों की उपस्थिति व उनकी संख्या के बारे में कोई संवैधानिक बंदिश नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल व सचिवालय कर्मचारियों के अलावा वो लोग उपस्थित रह सकते हैं, जिन्हें शपथ लेना हो। विशेषज्ञों का कहना है कि ये कार्यक्रम वर्चुअल भी हो सकता है। जब महामारी के समय में अंतिम संस्कार में भी 20 से अधिक लोग मौजूद नहीं रह सकते, इस समारोह से गलत सन्देश जाना तय है।

संवैधानिक विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसी कोई बंदिश नहीं है कि सभी विधायकों और सांसदों का इस कार्यक्रम में उपस्थित रहना अनिवार्य ही है। 2016 में जे जयललिता के निधन के बाद पनीरसेल्वम समेत 31 मंत्रियों ने बिना किसी भीड़-भाड़ के मात्र 10 मिनट में शपथग्रहण समारोह निपटा दिया था। 2017 में राजद से गठबंधन तोड़ कर नीतीश कुमार ने 15 मिनट में शपथ ले ली थी। 2019 में देवेंद्र फड़नवीस ने सुबह-सुबह मात्र 10 लोगों की मौजूदगी में सीएम की शपथ ले ली थी।

केरल के अस्पतालों में ऑक्सीजन, वेंटिलेटर्स और बेड्स के लिए मारामारी मची है। केरल के 3 जिलों में ‘ट्रिपल लॉकडाउन’ लगा हुआ है, जहाँ लोग घरेलू चीजें खरीदने के लिए भी बाहर नहीं निकल सकते। ये भी समझ से परे है कि विजयन परिणाम घोषित होने से 3 हफ्ते बाद शपथ क्यों ले रहे हैं। 3,47,627 संक्रमितों के साथ केरल देश में तीसरे स्थान पर है। कुल संक्रमितों की संख्या भी 22 लाख के पार हो गई है, जो महाराष्ट्र व कर्नाटक के बाद सर्वाधिक है।

बताते चलें कि नई कैबिनेट में विजयन ने अपने दामाद मुहम्मद रियास सहित 11 मंत्री बनाए हैं। सारे चेहरे नए हैं। पिछली सरकार में केरल की स्वास्थ्य मंत्री रहीं तथाकथित ‘केरल मॉडल’ वाली केके शैलजा को भी इस बार कैबिनेट में जगह नहीं मिली है। 77 वर्षीय मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने अपने कैबिनेट में दामाद पीए मुहम्मद रियास को भी जगह दी है, जो CPI(M) के यूथ विंग ‘डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।

प्रोपेगेंडा का यह पाप भारी: टूलकिट से पल्ला झाड़ना कॉन्ग्रेस के लिए मुमकिन नहीं, इकोसिस्टम से बाहर नहीं चलेगा ‘फेक’ वाला जुमला

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक टूलकिट (ToolKit) जारी किया। बताया कि इसे कॉन्ग्रेस पार्टी ने तैयार किया ताकि कोरोना की दूसरी लहर में योजनाबद्ध तरीके से नरेंद्र मोदी, उनकी सरकार और प्रदेशों में बीजेपी सरकारों के विरुद्ध झूठा प्रचार चलाकर उन्हें बदनाम किया जा सके। कॉन्ग्रेस की ओर से वक्तव्य आया कि इस टूलकिट से उसका कोई सम्बंध नहीं है।

कॉन्ग्रेस की प्रतिक्रिया अपेक्षा के अनुरूप ही है। एक लोकतांत्रिक देश में हर राजनीतिक दल से एक न्यूनतम सार्वजनिक व्यवहार की अपेक्षा होती है, इसलिए विपक्ष में बैठा कोई दल यह स्वीकार नहीं करेगा कि उसने सरकार और उसके नेता के विरुद्ध ऐसी साजिश रची।

कॉन्ग्रेस की ओर से आया यह वक्तव्य तब और भी अपेक्षित लगता है जब सरकार के नेता नरेंद्र मोदी हों क्योंकि मोदी की कथित घटती लोकप्रियता अभी तक केवल सोशल मीडिया विमर्श का ही हिस्सा रही है और इसे लेकर किसी तरह का हालिया सर्वे प्रकाशित नहीं हुआ है। कोरोना की तीव्र दूसरी लहर के दौरान नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की असफलता को लेकर परंपरागत मीडिया और सोशल मीडिया में दावे भले किए जा रहे हैं पर फिलहाल एक वृहद् परिप्रेक्ष्य में उन्हें अभी तक मात्र दावों के रूप में ही देखा जाएगा, ऐसे दावे जो समय-समय पर पहले भी किए जाते रहे हैं। ऐसे में कॉन्ग्रेस इस टूलकिट के साथ किसी भी तरह से दिखना नहीं चाहेगी।

टूलकिट को लेकर बीजेपी, कॉन्ग्रेस और इन दलों के समर्थकों की प्रतिक्रियाएँ और काफी हद तक सोशल मीडिया में चल रहा शोर भी अपेक्षा के अनुरूप है। जैसा मैंने लिखा, कॉन्ग्रेस सार्वजनिक तौर पर यह नहीं चाहेगी कि इस टूलकिट से उसका किसी भी तरह का सम्बंध साबित हो। दूसरी ओर बीजेपी यही चाहेगी कि ऐसे सबूत पेश किए जाएँ जो साबित कर दें कि इसका सम्बंध कॉन्ग्रेस से है। राजनीतिक विमर्श में यह विषय अगले कई दिनों तक छाया रहेगा। इस पर तर्क, वितर्क और कुतर्क देखने को मिलेंगे जो लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा हैं।

इस टूलकिट में क्या-क्या लिखा है यह राजनीतिक विमर्शों में सक्रिय रहने वालों को पता है। लिहाजा उन्हें यहाँ दोहराने की आवश्यकता नहीं है। पर इस टूलकिट की सच्चाई क्या है, शायद इस प्रश्न का उत्तर निकट भविष्य में पता न चल सके। कॉन्ग्रेस पार्टी उसे बदनाम करने और इसके खुद के साथ जोड़ने को लेकर बीजेपी के विरुद्ध शिकायत कर चुकी है। लेकिन क्या इतना करना काफी होगा? क्या एक ​शिकायत पार्टी को इस टूलकिट के खुलासे से पैदा होने वाले विमर्श से अलग कर सकेगी? मेरे विचार से लंबे समय तक प्रश्नों से खुद को दूर रखने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके नेताओं के लिए ऐसा संभव न हो सकेगा।

इस टूलकिट के सम्बंध में प्रश्न पूछे जाएँगे। कॉन्ग्रेस पार्टी उन प्रश्नों का उत्तर दे या न दे पर वह इनसे अपना पल्ला नहीं झाड़ सकेगी क्योंकि वर्तमान समय महत्वपूर्ण है जब यह खुलासा हुआ है। यह टूलकिट भीषण महामारी से जूझ रहे भारतवर्ष में कॉन्ग्रेस पार्टी, उसकी सहयोगी मीडिया, उसके पाले वाले बुद्धिजीवी और उसके बनाए इकोसिस्टम के आचरण के बारे में है। पिछले कई वर्षों में राहुल गाँधी की राजनीतिक जवाबदेही देखी नहीं गई, न तो उनकी पार्टी के सामने और न ही भारतवर्ष की जनता के सामने।

उनकी राजनीति अभी तक अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ वीडियो में कठिन दर्शन झाड़ने, मेहनत करके इकट्ठा की गई भीड़ के सामने मानलॉग डिलिवर करने और ठोस प्रश्नों पर चुप रहने पर निर्भर रही है। पर उनकी यह रणनीति तभी तक चल सकती है जब तक बात उनकी पार्टी के प्रति उनकी जवाबदेही की हो रही है। वे ऐसा राजनीतिक आचरण तभी तक अफोर्ड कर सकते हैं जब तक वे अपने दल से मुखातिब हैं। पर जब बात भारतवर्ष के लोकतंत्र और अन्य दलों को लेकर होगी, उनका यह आचरण मान्य नहीं होगा।

इस टूलकिट के आधार पर प्रश्न पूछा जाएगा कि उसमें जो कुछ लिखा गया है वैसा हुआ या नहीं? दल ने इस टूलकिट में वर्णित योजना के अनुसार अपने इकोसिस्टम के जिस किसी जिस शाखा से जो करने के लिए कहा, उसने वैसा किया या नहीं? सरकार के खिलाफ प्रोपेगेंडा के जिन स्वरूपों का वर्णन इस टूलकिट में है वैसा ही प्रोपेगेंडा हुआ या नहीं? इकोसिस्टम से पार्टी ने जो अपेक्षा रखी, उसने अपना वह किरदार निभाया या नहीं? ये सारे प्रश्न पूछे जाएँगे और चूँकि इस बार एक ऐसी टूलकिट लीक हुई है जिसे बनाने वाले और उसके क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी लेने वाले देसी हैं, कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व के लिए इससे खुद को अलग कर पाना लगभग असंभव होगा।

‘गोमूत्र व गोबर से नहीं, कॉमन सेन्स से ठीक होता है कोरोना’: BJP नेता की मौत का 2 पत्रकारों ने बनाया था मजाक, लगा NSA

मणिपुर के पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम और राजनीतिक एक्टिविस्ट एरेन्द्रो लेइचोमबम के खिलाफ ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA)’ के तहत मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले इन दोनों को अदालत से जमानत मिल गई थी। दोनों के वकील चोंगथम विक्टर ने कहा कि लेइचोमबम और वांगखेम को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इन्हें गुरुवार (मई 13, 2021) को गिरफ्तार कर के रविवार तक के लिए पुलिस कस्टडी में भेजा गया था।

इन दोनों के खिलाफ भाजपा महासचिव पी प्रेमानंद मितेई और पार्टी के उपाध्यक्ष उषम देबाम की शिकायत के बाद मामला दर्ज किया गया था। मणिपुर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष प्रोफेसर साइखोम टिकेंद्र सिंह के निधन के बाद इन दोनों ने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इन्होंने भाजपा नेता की मौत का मजाक बनाते हुए लिखा था कि गोमूत्र और गोबर से कोरोना ठीक नहीं हो सकता।

वांगखेम ने लिखा था, “गोबर और गोमूत्र कोरोना को ठीक नहीं कर सकते। ये एक आधारहीन तर्क है। अब कल हम मछली खाएँगे।” वहीं लेइचोमबम ने लिखा था, “कोरोना गोबर व गोमूत्र से नहीं, बल्कि विज्ञान और कॉमन सेन्स से ठीक होता है। प्रोफेसर जी की आत्मा को शांति मिले।” सोमवार को इम्फाल वेस्ट के DM द्वारा जारी किए गए आदेश के अनुसार 40 वर्षीय लेइचोमबम और 41 वर्षीय वांगखेम के खिलाफ NSA की धाराएँ लगाई गईं।

इस मामले की FIR पहले ही दर्ज की जा चुकी है। DM ने कहा कि ये दोनों ही आरोपित पुलिस कस्टडी में हैं और निकट भविष्य में जमानत पर छूट कर बाहर आ सकते हैं, जिसके बाद आशंका है कि वो फिर से उन्हें गतिविधियों में लिप्त हो जाएँगे जो न सिर्फ प्रदेश की सुरक्षा के लिए खतरा है बल्कि कानून-व्यवस्था को बनाए रखने में भी बाधक है। इसीलिए, ‘वैकल्पिक बचाव की व्यवस्था’ के तहत इनके खिलाफ कार्रवाई ज़रूरी है।

अब अगली नोटिस तक वो हिरासत में रहेंगे। वकील विक्टर ने कहा कि इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी जाएगी। उन्होंने कहा कि गोबर और गोमूत्र पर बातें की जा रही थीं और दोनों ने बस उस पर प्रतिक्रिया भर दी है, जिसके लिए कठोर कानून नहीं लगाया जा सकता। इससे पहले इम्फाल वेस्ट के CJM ने दोनों को 50,000 के मुचलके पर जमानत दी थी और कहा था कि वो भविष्य में ऐसी गलती न करें और पूछताछ के लिए उपलब्ध रहें।

कोरोना के सिंगापुर स्ट्रेन पर केजरीवाल का डबल फैक्टचेक, झूठा डर दिखा दिल्ली के CM ने कराई जगहँसाई

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दावे को सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय ने खारिज कर दिया है। उन्होंने ट्वीट कर दावा किया था कि सिंगापुर में कोरोना संक्रमण नया रूप आया है जो बच्चों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। साथ ही इसके भारत में तीसरी लहर के तौर पर आने की आशंका जताई थी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि सिंगापुर वैरिएंट जैसा कुछ नहीं है।

बता दें कि भारतीय मीडिया में सिंगापुर स्ट्रेन को लेकर खबरें केजरीवाल के बयान के बाद से आनी शुरू हुईं। केजरीवाल ने मंगलवार (18 मई 2021) को कहा, “सिंगापुर में पाया गया कोरोना का नया रूप बच्चों के लिए बेहद खतरनाक बताया जा रहा है, भारत में ये तीसरी लहर के रूप में आ सकता है। केंद्र सरकार से मेरी अपील है कि सिंगापुर के साथ हवाई सेवाएँ तत्काल प्रभाव से रद्द हों और बच्चों के लिए भी वैक्सीन के विकल्पों पर प्राथमिकता के आधार पर काम हो।”

इसी बयान के बाद 18 मई को तमाम खबरें मीडिया में प्रकाशित हुईं, जिसमें सीएम के हवाले से बताया गया कि सिंगापुर में पाया जाने वाला कोरोना वायरस वैरिएंट बहुत खतरनाक है। सिंगापुर स्वास्थ्य मंत्रालय ने हिंदुस्तान टाइम्स और एनडीटीवी में प्रकाशित खबरों का उल्लेख अपने बयान में किया है। 

बाद में केजरीवाल के ट्वीट पर सिंगापुर के राजदूत की प्रतिक्रिया आई। उन्होंने स्वास्थ मंत्रालय की रिपोर्ट शेयर करके लिखा, “इस बात में कोई सच्चाई नहीं है कि सिंगापुर में एक नया COVID स्ट्रेन है। Phylogenetic टेस्टिंग से पता चला है कि सिंगापुर में हाल के हफ्तों में B.1.617.2 वैरिएंट ही बच्चों समेत कई कोविड मामलों में पाया जा रहा है।” केंद्रीय विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी केजरीवाल के दावों पर सवाल उठाते हुए बताया कि मार्च 2020 से ही अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें बंद हैं।

सिंगापुर के बयान के बाद तमाम लोगों की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर देखने को मिली। प्रिशा नाम की यूजर ने सिंगापुर को सॉरी कहते हुए लिखा, “ये हमारा दुर्भाग्य है कि दिल्ली के लोगों ने ऐसे ब्लफमास्टर को फ्री पानी और आधी बिजली के लिए चुना। इसने पिछले 7 साल में कोई अस्पताल नहीं बनवाए और इसका मोहल्ला क्लिनिक सिर्फ प्रोपगेंडा हैबिलकुल इसकी तरह। इसलिए माफ करिए। कृपया इसकी भाँति अन्य भारतीयों को न समझें।”

भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने इस पर प्रतिक्रिया दी और सिंगापुर राजदूत को कहा, “सर, आपको प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं है। ये एक गिरा हुआ मंत्री है।”

हेनाली भवसर ने कहा, “अरविंद केजरीवाल कुछ शर्म कर लो। हमारे सिंगापुर के साथ अच्छे संबंध हैं उन्हें मत बर्बाद करो। भारत में सिंगापुर के राजदूत इसे गंभीरता से न लें। इनकी आदत है झूठ और नफरत फैलाने की। हम इनकी ओर से माफी चाहते हैं।”

गले में तार बाँधा, ईंट-डंडों से पीटा, माँ के सामने कर दी हत्या: सुप्रीम कोर्ट से BJP वर्कर की विधवा, बंगाल में चुनाव बाद भड़की थी हिंसा

पश्चिम बंगाल में 2 मई 2021 को चुनावी नतीजों में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की जीत सुनिश्चित होने के बाद हिंसा भड़क उठी थी। विपक्ष खासकर बीजेपी समर्थक इस दौरान निशाने पर थे। बीजेपी से जुड़े जिन लोगों की हत्या की गई उनमें अभिजीत सरकार और हारन अधिकारी भी शामिल थे। हिंसा की सीबीआई जाँच या विशेष जाँच दल (SIT) के गठन को लेकर इनके परिजनों की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया है।

याचिका पर सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि किस बेरहमी से इनकी हत्या की गई। अभिजीत सरकार की पत्नी जो इस घटना की चश्मदीद भी हैं ने बताया, “भीड़ ने उनके गले में सीसीटीवी कैमरे का तार बाँध दिया। गला दबाया। ईंट और डंडों से पीटा। सिर फाड़ दिया और माँ के सामने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। आँखों के सामने बेटे की हत्या होते देख उनकी माँ बेहोश होकर मौके पर ही गिर गईं।”

सरकार की दो मई को उनके घर से बाहर घसीट कर हत्या कर दी गई थी। हमले से ठीक पहले वे दो बार फेसबुक पर लाइव हुए और टीएमसी गुंडों के हमले को लेकर बताया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील महेश जेठमलानी ने शीर्ष अदालत को बताया कि सरकार के शव का अभी तक अंतिम संस्कार नहीं हुआ है। लिहाजा उनके पोस्टमार्टम की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए। साथ ही अदालत को बताया कि जिनकी हत्या की गई वे बीजेपी से जुड़े थे। इस दौरान राज्य प्रशासन और पुलिस ने मूकदर्शक रहकर हिंसा करने वालों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने इन मामलों में कार्रवाई और अदालती निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया।

दूसरी ओर बंगाल हिंसा को लेकर दाखिल एक जनहित याचिका पर मंगलवार 18 मई 2021 को कलकत्ता हाई कोर्ट में भी सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने कहा कि हिंसा के पीड़ित मानवाधिकार आयोग (NHRC) और महिला आयोग (NCW) जैसी संस्थाओं में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। आयोगों से ऐसी शिकायतों को तत्काल राज्य के पुलिस महानिदेशक को प्रेषित करने के निर्देश भी पाँच जजों की पीठ ने दिए। हाई कोर्ट में अब इस मामले की 25 मई को सुनवाई होगी।

बंगाल हिंसा को लेकर पिछले दिनों विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने चौंकाने वाले दावे किए थे। एक बयान में संगठन ने बताया था कि इस हिंसा से बंगाल के 3500 से ज्यादा गाँव प्रभावित हुए हैं। 40 हजार से अधिक हिंदू पीड़ित हैं। इनमें बड़ी संख्या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) के लोगों की है।

विहिप के अनुसार हिंसा के दौरान बंगाल में कई जगह महिलाओं पर बर्बर अत्याचार हुआ। खेतों, दुकानों और घरों को नष्ट कर दिया गया। लूट और मारपीट नहीं करने के एवज में उनसे जबरन पैसा वसूला जा रहा। मछली व्यवसाइयों के तालाबों में जहर डाल दिया गया। कई जगहों पर हिंदुओं से उनके आधार, वोटर और राशन कार्ड समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज छीन लिए जाने की बात भी कही गई थी।

बच्चों व महिलाओं की आड़ में छिपने वाले आतंकियों के लिए इजरायल की ‘निंजा तकनीक’, दुश्मन को यूँ ढेर करता है बिन धमाके वाला छोटा पैकेट

फिलिस्तीन में स्थित आतंकी संगठन हमास की तरफ से किए जाने वाले रॉकेट फायर्स का इजरायल की तरफ से भरपूर जवाब दिया जा रहा है। जिस सटीकता से इजरायल ने हमास के ठिकानों को तबाह किया है, उससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि उसके पास ‘निंजा मिसाइल तकनीक’ मौजूद है। अमेरिका के पास भी 6 ब्लेड वाले निंजा मिसाइल मौजूद हैं। गाज़ा में बमबारी से तबाह एक कार की तस्वीर के आधार पर दावा किया जा रहा है कि इजरायल ने भी इस तकनीक को विकसित कर लिया है।

मंगलवार (मई 18, 23021) को Citroen Xsara मॉडल की एक सफ़ेद कार इजरायल के हमले का निशाना बनी। ‘इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF)’ ने बताया कि उसने हमास के आत्मघाती सबमरीन के संचालकों को निशाना बनाया है। IDF ने इस हमले का जो वीडियो जारी किया, उसमें देखा जा सकता है कि कार के ड्राइवर की तरफ एक मिसाइल आता है, जिससे कार की खड़कियाँ और दरवाजे तो तबाह हो जाते हैं लेकिन कार वहीं मौजूद रहती है।

ड्राइवर की मौत हो जाती है और मिसाइल आगे जाकर सड़क पर गिरती है। जिस सटीकता और कुशलता से ये हमला हुआ, वो छोटी मिसाइलों से ही संभव है। लीबिया, सीरिया और इलाक़ में अमेरिका भी R9X मिसाइलों का उपयोग करता रहा है, जो बल के साथ-साथ 6 ब्लेड्स का इस्तेमाल करती हैं। लोग पूछ रहे हैं कि इजरायल ने कहीं अमेरिका के साथ मिल कर इसका अपना वर्जन तो नहीं बना लिया? निंजा मिसाइल से गाड़ी पर किए जाने वाले हमलों में एक छेद भर बनता है लेकिन गाड़ी यूँ ही खड़ी रहती है।

6 ब्लेड्स वाले मिसाइलों से जब हमला किया जाता है तो ये छेद किसी तारे की आकृति का बनता है। ये छोटे से लक्ष्य को भेद कर दुश्मन को मार गिराता है। सामान्य रॉकेट जब गिरते हैं तो वहाँ ब्लास्ट होता है और आसपास की चीजें तबाह हो जाती हैं, लेकिन ‘निंजा मिसाइलों’ में ऐसा नहीं होता। हालाँकि, गाज़ा पट्टी वाले हमले में कार को कई अन्य जगह भी नुकसान होता दिखा है, लेकिन कार और उसका रंग फिर भी स्पष्ट दिख रहा है।

वहाँ पर दो अन्य गाड़ियाँ भी खड़ी थीं, जिन्हें थोड़ा नुकसान पहुँचा है। लेकिन, पारम्परिक मिसाइलों से अगर हमला किया जाता तो शायद तबाही का मंजर कहीं ज्यादा ही होता। एक विशेषज्ञ ने कहा कि मिसाइल के हमले में किसी एक व्यक्ति का मारा जाना, उस मिसाइल हमले के लक्ष्य को पहचानने की सूक्ष्मता को दिखाता है। हालाँकि, इजरायल के पास अमेरिका का R9X मौजूद नहीं है। लेकिन, जिस मिसाइल से हमला हुआ वो उसी तरह का कोई वर्जन है।

इजरायल ने ये तकनीक इसलिए भी विकसित की होगी क्योंकि गाज़ा पट्टी के आतंकी अक्सर महिलाओं और बच्चों के पीछे छिपने की कोशिश करते हैं। छोटी मिसाइलों में बम सामग्रियों की जगह 45 किलो का धातु प्रयोग में लाया जाता है, जो लक्ष्य को भेद देता है। इसके 6 ब्लेड्स लक्ष्य तक पहुँचने के एकदम पहले बाहर आते हैं। 2017 में सीरिया में अलकायदा के सरगना अबू खयर अल-मासरी को मारने में इसके पहली बार इस्तेमाल हुआ था।

इसके बाद से कई देशों में छोटे लक्ष्यों को भेदने के लिए अमेरिका ने इनका इस्तेमाल किया है। लीबिया, ईराक, यमन और सोमालिया के अलावा 2019 में अफगानिस्तान में भी इसका प्रयोग किया गया। मान लीजिए कुछ लोग साथ बैठ कर डिनर कर रहे हैं और उनमें से किसी एक को चिह्नित कर मार गिराना है, तो ये मिसाइल कारगर है। ये ड्राइवर को नुकसान पहुँचाए बिना गाड़ी में बैठे दुश्मन को ढेर कर सकता है।

अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी अलकायदा के सबसे बड़े सरगना ओसामा बिन लादेन को मार गिराने के लिए इन्हीं मिसाइलों का प्रयोग किया था, लेकिन बाद में सील कमांडो को भेजा गया। इजरायल का कहना है कि लगातार नौवें दिन उस पर रॉकेट्स फायर किए जा रहे हैं, ऐसे में वो जवाब देता रहेगा। इजरायल के पास मिसाइल हमलों से बचने के लिए ‘आयरन डोम‘ सिस्टम भी है। उसने कहा है कि वो लोगों की जान बचाने के लिए माफ़ी नहीं माँगेगा।

नोबेल पुरस्कार पाने के लिए जेफरी एपस्टीन नामक व्यक्ति के साथ रिलेशनशिप में थे बिल गेट्स

दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर और दुनिया के चौथे सबसे अमीर शख्स बिल गेट्स को लेकर आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं। डेली बीस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अरबपति बिल गेट्स शादीशुदा होने के बावजूद जेफरी एपस्टीन (Jeffery Epstein) नामक व्यक्ति के साथ रिलेशनशिप में थे।

बिल गेट्स का मानना ​​था कि यौन उत्पीड़न के जुर्म में दोषी करार दिए जा चुके एपस्टीन की वजह से उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार हासिल करने में मदद मिल सकती है। गेट्स फाउंडेशन के एक पूर्व कर्मचारी ने मीडिया आउटलेट को बताया कि फाउंडेशन की कॉम्यूनिकेशन टीम को बताया गया था दोनों के बीच संबंध स्थापित किए गए थे, ताकि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार आसानी से मिल सके।

पूर्व कर्मचारी ने कहा, “हम सब जानते थे कि इस रिश्ते से बिल गेट्स और मेलिंडा के रिश्ते में दरार पड़ सकती है। उस व्यक्ति ने जेफरी एपस्टीन का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी लोग जानते थे कि यह आदमी सही नहीं था।”

डेली बीस्ट ने पूर्व कर्मचारी के हवाले से कहा, “उन्होंने (गेट्स) सोचा था कि जेफरी उनकी मदद करेगा। वह सही लोगों को जानेंगे। इससे उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार आसानी से मिल सकता है, जिसे बिल दुनिया में सबसे अधिक महत्व देते हैं। पूर्व कर्मचारी ने आगे कहा कि मुझे लगता है कि वह अंततः निराश थे कि यह काम नहीं कर सके।”

बिल गेट्स के एक प्रवक्ता ने इस बात से इनकार किया है कि उन्होंने नोबेल पुरस्कार पाने के लिए जेफरी एपस्टीन से मदद माँगी थी। प्रवक्ता ने आगे कहा कि नोबेल पुरस्कार निश्चित रूप से एक महान सम्मान होगा। यह कहना गलत है कि बिल गेट्स यह सम्मान पाने के लिए पागल थे और इसे उन्होंने अपना टारगेट बनाया हुआ था।

उन्होंने कहा, “अगर एपस्टीन के पास गेट्स की ओर से किसी भी पुरस्कार या सम्मान से संबंधित किसी भी प्रक्रिया में खुद को सम्मिलित करने की योजना थी। तो इसकी जानकारी न तो गेट्स को थी और न ही उनके साथ काम करने वाले अन्य किसी व्यक्ति को थी।”

बता दें कि बिल गेट्स और मिलिंडा गेट्स के तलाक के साथ ही उनके 27 वर्षों के रिश्ते का अंत हो गया है। हाल ही में कंपनी के कामकाज के दौरान भी उनके एक अफेयर की बात सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, माइक्रोसॉफ्ट की ही एक महिला कर्मचारी के साथ बिल गेट्स का अफेयर था और वो उसे डेट पर चलने के लिए भी कहते थे।

‘मोदी स्ट्रेन’: कैसे कॉन्ग्रेस टूलकिट ने की PM मोदी की छवि खराब करने की कोशिश? NDTV भी हैशटैग फैलाते आया नजर

सोशल मीडिया पर 18 मई को एक टूलकिट कॉन्ग्रेस के नाम से वायरल हुआ, जिसमें भारत, केंद्र सरकार और पीएम मोदी की छवि को खराब करने का दुर्भावनापूर्ण प्रयास देखा गया। कॉन्ग्रेस का कहना है कि टूलकिट नकली है और उसने कानूनी कार्रवाई की धमकी दी है।

टूलकिट में एक वर्ग ऐसा था जो विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि खराब करने की बात कर रहा था। उस सेक्शन में, यह उल्लेख किया गया था कि “संकट और कुप्रबंधन” के बावजूद, पीएम मोदी की अप्रूवल रेटिंग कॉन्ग्रेस पार्टी की अपेक्षा से अधिक है। उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी के सदस्यों और वालंटियर से इस स्थिति को ‘उनकी छवि को खराब करने और उनकी लोकप्रियता को कम करने के अवसर’ के रूप में लेने का आग्रह किया।

‘पीएम मोदी की छवि खराब करने के लिए हर संसाधन का इस्तेमाल करें’

पाँच सबसेक्शनों में विभाजित, सेक्शन में कहा गया कि वे समय के साथ विकसित संसाधनों का उपयोग करके पीएम मोदी की छवि को कैसे खराब कर सकते हैं। पहला बिंदु पीएम मोदी या भाजपा समर्थकों की तरह दिखने वाले अकाउंट को सक्षम करना और सरकार के खिलाफ एजेंडा को आगे बढ़ाना था।

दूसरे बिंदु पर चर्चा की गई कि कैसे भारत में विदेशी संवाददाताओं और विदेशी प्रकाशनों के लिए लिखने वाले इंडियन ओपेड लेखकों को ‘पीएम मोदी के अंतर्गत कुप्रबंधन’ पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करने के लिए किया जा सकता है।

टूलकिट के क्रिएटरों ने सभी से अंतिम संस्कार और शवों के ‘नाटकीय चित्रों’ का उपयोग करने का आग्रह किया। सभी ने देखा है कि पिछले कुछ हफ्तों से इस तरह की तस्वीरें कैसे सामने आ रही हैं, जिससे जनता में परेशानी हो रही है। उन्होंने आगे सभी को उन पत्रकारों से संपर्क करने के लिए कहा जो अंतिम संस्कार को कवर कर रहे हैं और स्थानीय स्तर पर ‘सही छवि’ को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं।

टूलकिट ने सभी से पीएम मोदी के खिलाफ अपमानजनक वाक्यांशों का उपयोग करने के लिए ‘अपने खेमे के बुद्धिजीवियों और राय बनाने वालों’ से संपर्क करने का आग्रह किया। यह बताया गया कि बुद्धिजीवियों और राय बनाने वालों को ‘राजनीतिक रूप से उपयोग किए जाने पर अधिक स्वीकार्यता’ होनी चाहिए।

सोशल मीडिया स्वयंसेवकों से #ModiStrain का इस्तेमाल करने का आग्रह किया

इस सेक्शन में मुझे सबसे ज्यादा झटका यह लगा कि कॉन्ग्रेस टूलकिट म्यूटेंट कोविड -19 स्ट्रेन इंडियन स्ट्रेन या मोदी स्ट्रेन कहकर भारत और पीएम मोदी की छवि खराब करना चाहता है। हमने मोदी स्ट्रेन शब्द की खोज की और इस वाक्यांश के इस्तेमाल के बाद से एक टाइमलाइन बनाने की कोशिश की। जिसमें हमने यही पाया।

हैशटैग #ModiStrain 22 अप्रैल, 2021 से चलाया जा रहा है। बहुत सारे सोशल मीडिया उपयोगकर्ता जो कॉन्ग्रेस के अनुयायी प्रतीत होते हैं, हैशटैग का उपयोग कर रहे हैं।

अप्रैल 2021 से ट्विटर यूजर्स द्वारा मोदी स्ट्रेन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है

हैशटैग और फ्रेज “#IndiaStrain” और “India Strain” सोशल मीडिया पर अधिक प्रमुखता से उपयोग किए जाते हैं। अप्रैल 2021 की दूसरी छमाही तक, ट्विटर पर इसका उपयोग तेजी से बढ़ा, और उनमें इंडियन स्ट्रेन के उल्लेख के साथ ट्वीट्स की एक लहर थी।

NDTV जैसे भारतीय मीडिया हाउसों को शब्द और हैशटैग फैलाते हुए देखा जा सकता है।

सत्यापित समाचार आउटलेट द्वारा वाक्यांश और हैशटैग “इंडिया स्ट्रेन” और “#इंडियास्ट्रेन” का उपयोग किया जा रहा है

यह देखना दिलचस्प है कि हर कोई इंडियन स्ट्रेन या इंडिया स्ट्रेन वाक्यांश का उपयोग करने के लिए इतना उतावला है, जबकि वे इसे चीनी वायरस या वुहान वायरस कहने के खिलाफ थे।

नोट- ऑपइंडिया स्वतंत्र रूप से टूलकिट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं कर सका है।