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महाराष्ट्र: BMC अस्पतालों के डॉक्टर कर रहे स्टाइपेंड में बढ़ोतरी का इंतजार, कहा, ‘गंदगी’ भरे वातावरण में काम करने को ‘मजबूर’

महाराष्ट्र में एक तरफ जहाँ कोरोना वायरस संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है और स्वास्थ्य क्षेत्र पर भारी दबाव बना हुआ है वहीं बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) के अस्पतालों में दिन-रात अपनी जान जोखिम में डालकर Covid-19 से संक्रमित मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर अपने रुके हुए स्टाइपेंड की माँग कर रहे हैं और इसके लिए कैंपेन चल रहे हैं।

हाथ में ‘BMC Betrayed Us’, ‘Betrayed, Still Working’ के बैनर लिए हुए कई आवासीय डॉक्टर BMC के अस्पतालों में अपने अधिकारों की माँग कर रहे हैं। इन अस्पतालों में लोकमान्य तिलक म्युनिसिपल जनरल हॉस्पिटल, केईएम हॉस्पिटल, नायर हॉस्पिटल, राजीव गाँधी मेडिकल कॉलेज (RGMC) और छत्रपति शिवाजी महाराज हॉस्पिटल (CSMH) प्रमुख हैं जहाँ डॉक्टर अपने स्टाइपेंड की माँग कर रहे हैं।

फोटो : मुंबई मिरर

अगस्त 2020 में पास हुआ था स्टाइपेंड बढ़ाने का प्रस्ताव, अब तक नहीं मिला

ज्ञात हो कि महाराष्ट्र कैबिनेट ने अगस्त 2020 में सरकारी अस्पतालों के आवासीय डॉक्टरों के लिए प्रतिमाह 10,000 रुपए स्टाइपेंड बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया था। इसका उद्देश्य था Covid-19 महामारी के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों को अतिरिक्त लाभ प्रदान करना लेकिन डॉक्टरों को इस बढ़े हुए स्टाइपेंड का एरियर अभी तक प्राप्त नहीं हुआ।

ठाणे के RGMC और CSMH अस्पताल के डॉक्टरों ने आरोप लगाया है कि उन्हें न तो उनका स्टाइपेंड मिला है और न तो अस्पताल में बेहतर वातावरण मिल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें लगातार अस्वच्छ वातावरण में काम करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबकि, मेडिकल छात्रों ने भी बताया कि उनके कोविड इन्सेंटिव भी कम किए गए हैं। छात्रों ने बताया कि इस विषय पर ऑफिस सुपरवाइजर से बात की लेकिन छात्रों को बजट की कमी का हवाला देते हुए यह कहा गया कि फिलहाल स्टाइपेंड को रोका गया है।  

डॉक्टरों को मिलने वाले स्टाइपेंड और मेडिकल छात्रों के कोविड इन्सेंटिव को लेकर ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के कमिश्नर, एडिशनल कमिश्नर को सूचना दी गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। हालाँकि CSMH के डीन भीमराव जाधव ने कहा कि बजट की कोई कमी नहीं है और डॉक्टरों को उनका स्टाइपेंड देने की प्रक्रिया चल रही है।

डॉक्टरों ने की अस्पताल और हॉस्टल के अस्वच्छ वातावरण की शिकायत

अस्पताल और हॉस्टल के वातावरण और भोजन की गुणवत्ता पर असंतोष व्यक्त करते हुए डॉक्टरों और छात्रों ने शिकायत दर्ज की कि कैंटीन में उपलब्ध भोजन की गुणवत्ता सही नहीं है। इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में जगह-जगह पर पड़ा हुआ डिस्पोजेबल मैटेरियल और हॉस्टल में पड़ा हुआ कचरा गंदगी का कारण बन रहा है जिससे मच्छरों का संकट भी बना हुआ है।

अस्पताल में बिखरा हुआ कचरा (फोटो : टाइम्स ऑफ इंडिया)

डॉक्टरों ने कहा है कि यदि उनकी माँगे पूरी नहीं की गईं तो वे 10 मई से दौरान भूख हड़ताल करेंगे।

बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) भारत की सबसे धनी नगर पालिका है। इसका सालाना बजट कई बार भारत के छोटे राज्यों से भी कहीं अधिक होता है। वर्तमान में BMC के मेयर और डेप्युटी मेयर दोनों ही शिवसेना से ही हैं।

कंगना रनौत पर तृणमूल कॉन्ग्रेस ने करवाई FIR, CM ममता की फोटो को एडिट कर लिखी थी गंदी बात

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के विरुद्ध तृणमूल कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता रिजू दत्ता ने एफआईआर दर्ज करवाई है। दत्ता ने अपने ट्विटर पर एफआईआर की कॉपी शेयर करते हुए बताया कि बंगाल में साम्प्रादायिक हिंसा उकसाने के लिए कंगना हेट प्रोपगेंडा फैलाने की कोशिश कर रही हैं। इसके अलावा ममता बनर्जी की छवि बिगाड़ने का प्रयास भी लगातार उनके द्वारा किया जा रहा है।

अपने ट्वीट में रिजू ने बताया कि कंगना ने अपने इंस्टा पर स्टोरी शेयर करके लोगों को भड़काने का काम किया ।

जब हमने कंगना रनौत की स्टोरी चेक की, तो उसमें सारे पोस्ट ममता बनर्जी या फिर बंगाल की स्थिति को लेकर ही थे। इनमें से एक में कंगना ने ममता बनर्जी को हिंदू नरसंहार के लिए जेल में डालने की अपील की थी। इसके अलावा बंगाल पीड़ितों को सपोर्ट करने की बात भी कंगना की स्टोरी में थी।

बता दें कि बंगाल में हो रही हिंसा पर कंगना रनौत लगातार अपनी बात रख रही हैं। इंस्टाग्राम से पहले वह ट्विटर पर सक्रिय हो कर टीएमसी पर सवाल उठा रही थीं। लेकिन 4 मई को उनका अकॉउंट हमेशा के लिए सस्पेंड कर दिया गया।

इस अकॉउंट सस्पेंशन के बाद जब ऑपइंडिया ने कंगना से उनका पक्ष जानना तो उन्होंने कहा, “मैं सभी से अनुरोध करना चाहती हूँ कि बंगाल हिंसा पर ध्यान केंद्रित रखें और नरसंहार को रोकने के लिए सरकार पर दबाव डालें। पूरा ध्यान निलंबन (मेरे ट्विटर अकाउंट) पर चला गया है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं कई प्लेटफॉर्मों के माध्यम से आ सकती हूँ। इसे विवाद मत बनाइए।”

वहीं अकॉउंट सस्पेंड होने से पहले रिलीज की गई एक वीडियो में कंगना ने बंगाल की स्थिति बयान करते हुए लिबरलों पर सवाल उठाया था। अपनी वीडियो में उन्होंने कहा था, “…बंगाल में मर्डर हो रहे हैं, दंगे हो रहे हैं, गैंगरेप हो रहे हैं, घरों को जलाया जा रहा है, लेकिन कोई लिबरल कुछ बोल तक नहीं रहा। कोई इंटरनेशनल मीडिया भी इसे खबर नहीं कर रहा है। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि ये कौन सी कॉन्सपिरेसी चल रही है इंडिया के खिलाफ। कोई बहुत बड़ी कॉन्सपिरेसी है। ये बहुत ही ज्यादा अननेचुरल है।”

दिल्ली: खान चाचा रेस्टोरेंट से जब्त हुए 96 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर, 24 घंटे में 524 बरामद: BJP का आरोप – केजरीवाल का गेस्ट था मालिक कालरा

कोरोना और ऑक्सीजन की कमी से बेहाल दिल्ली में ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर्स की बड़ी कालाबाजारी सामने आई है। दिल्ली के सबसे पॉश इलाकों में से एक खान मार्केट में पुलिस ने कई बड़े रेस्टॉरेंट्स में छापेमारी की। इस छापेमारी में बड़ी संख्या में ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर जब्त हुए। यहाँ स्थित ‘खान चाचा रेस्टॉरेंट’ से 96 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर बरामद किए गए। बड़ी संख्या में मेडिकल उपकरण भी जब्त किए गए हैं।

साउथ दिल्ली पुलिस की छापेमारी में टाउन हॉल रेस्टॉरेंट से भी 9 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर जब्त किए गए। पुलिस ने ‘खान चाचा रेस्टोरेंट’ को सील कर दिया है। रेस्टोरेंट के मालिक नवनीत कालरा की पुलिस को तलाश है। ‘न्यूज़ 18’ की खबर के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान दिल्ली पुलिस ने राजधानी के 3 नामी-गिरामी रेस्टोरेंट पर छापेमारी कर के 524 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर्स जब्त किए हैं। इतनी बड़ी संख्या में ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर्स मिलने से हड़कंप मच गया है।

‘केंद्र दे रहा 700 MT ऑक्सीजन तो दिल्ली में कमी क्यों?’

दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने भी दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी और इससे जुड़े मामले पर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि जहाँ दिल्ली के लोग ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर्स की तलाश में इधर-उधर धक्के खा रहे हैं, अकेले खान मार्केट से 400 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर्स मिले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर्स को ब्लैक में तीन से चार गुना अधिक दाम पर बेचा जा रहा है।

तजिंदर बग्गा ने कहा कि आज के समय में ऐसा अपराध करना ‘जघन्य’ की श्रेणी में आता है और इसके लिए फाँसी की सजा भी कम है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार दिल्ली में 700 MT ऑक्सीजन अलॉट कर रही है, लेकिन कई अस्पतालों में फिर भी ऑक्सीजन की कमी के कारण मौतें हुई हैं। उन्होंने कहा कि जब मुंबई में 200 MT ऑक्सीजन ही दिया जा रहा है, फिर भी वहाँ कोई कमी नहीं है पर दिल्ली में अधिक मिलने पर भी स्थिति ठीक नहीं है।

तजिंदर बग्गा ने नवनीत कालरा को लेकर CM केजरीवाल पर साधा निशाना

तजिंदर बग्गा ने पूछा कि केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली को दी जा रही ऑक्सीजन कहाँ भेजा जा रही है? उन्होंने सवाल दागा कि कहीं इस ऑक्सीजन को जानबूझ के तो ब्लैक मार्केट में नहीं भेजा जा रहा? नवनीत कालरा के बारे में उन्होंने कहा कि 2020 में जब AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में तीसरी बार शपथ ली थी, तब ‘खास मेहमानों’ की सूची में नवनीत कालरा का नाम भी था।

‘केजरीवाल के ‘खास’ गेस्ट में शामिल था नवनीत कालरा’

उन्होंने उस समय के एक अखबार की कटिंग भी दिखाई। तजिंदर बग्गा ने कहा कि केजरीवाल ने तब दिल्ली के 50 लोगों को शपथग्रहण समारोह में बुलाने की बात कही थी और उन सबको ‘दिल्ली का निर्माता’ बताया था। बग्गा ने कहा कि शपथग्रहण समारोह में जिन्हें कभी बुलाया गया था, वो आज ऑक्सीजन की कालाबाजारी में लगे हैं। उन्होंने ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर्स के बरामद होने पर सीएम केजरीवाल की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि ऑक्सीजन जा कहाँ रहे हैं, उसका वो जवाब दें।

बता दें कि 1 दिन पहले ही लोधी कॉलोनी के एक रेस्टोरेंट व बार से 419 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर्स जब्त किए गए थे। इन्हें 70,000 रुपए प्रति ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर के दाम पर बेचा जा रहा था। उस मामले में हितेश, गौरव, सतीश और विक्रांत नामक व्यक्तियों को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई। SG तुषार मेहता कोर्ट में बता चुके हैं कि दिल्ली सरकार द्वारा माँगे गए 700 MT ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर से 30 MT ज्यादा ही बुधवार को केंद्र ने दिए हैं।

एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें लोगों को खान चाचा रेस्टोरेंट के बाहर ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर के लिए खड़े देखा जा सकता है। इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल और वॉट्ऐसप ग्रुप से ऑर्डर किए गए थे। एक चैट का स्क्रीनशॉट भी सामने आया था, जिसमें नवनीत कालरा ऑक्सीजन की सप्लाई और डिमांड को लेकर बात कर रहा होता है। ‘Nege & Ju’ से ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर्स की बरमदगी शुरू हुई थी।

इसका मालिक बी नवनीत कालरा ही है। जाना-माना कारोबारी कालरा दयाल ऑप्टिकल्स और ‘Mr Chow’ जैसे प्रतिष्ठानों का मालिक भी है। अपने फेसबुक हैंडल पर वो सेलेब्रिटीज और क्रिकेटरों के साथ तस्वीरें डालता रहता है। दिल्ली पुलिस को पेट्रोलिंग के दौरान रेस्टॉरेंट खुला नजर आया और अंदर संदिग्ध गतिविधियों का शक हुआ, जिसके बाद तलाशी ली गई। अंदर जाने पर एक व्यक्ति लैपटॉप से ऑर्डर लेता हुआ मिला।

लोधी कॉलोनी मामले में हुई जाँच के बाद पता चला कि ये लोग चीन से ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर व अन्य मेडिकल उपकरण मँगा रहे थे। इन्हें 20-25 हजार रुपए में खरीदते थे और उसे 70-75 हजार रुपए में बेचते थे। दिल्ली पुलिस कस्टम से संपर्क कर के ये जाँच करने में जुटी है कि ये कहीं व्यक्तिगत उपयोग के लिए खरीद कर (जैसा कि सरकार ने अनुमति दी है) कमर्शियल रूप से तो नहीं बेचे जाते थे। मंडी के कुल्लर फार्म के एक वेयरहाउस का भी पता चला, जहाँ ये ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर्स स्टोर कर के रखे गए थे।

‘बहुत ओछी हरकत कर दी’: आंध्र वाले जगन सहित कई CM-मंत्री हेमंत सोरेन पर बिफरे, PM मोदी को लेकर किया था ट्वीट

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन चौतरफा घिर गए हैं। कई राज्यों के मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर किए गए ट्वीट पर उन्हें घेरा है। इसे ओछी राजनीति करार देते हुए उन्हें इससे बचने की नसीहत दी है।

असल में कोरोना संकट के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल (मई 6, 2021) कई राज्यों के मुख्यमंत्रीत्रियों से फोन पर बात कर उनके राज्य की स्थिति को जाना। लेकिन, इस कॉल के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी राजनीति करने लगे। सोरेन ने ट्वीट कर कहा कि कॉल पर पीएम ने सिर्फ अपने मन की बात की। अगर वह काम की बात करते या सुनते तो ज्यादा बेहतर होता।

सोरेन के इसी ट्वीट पर तमाम राज्यों के मुख्यमंत्रियों की अब प्रतिक्रिया आ रही है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने कहा है, “मेरे मन में आपके लिए बहुत सम्मान है, लेकिन भाई के नाते मैं अपील करता हूँ कि चाहे हमारे बीच कोई भी मतभेद हो, मगर इस स्तर पर राजनीति करना सिर्फ हमारे देश को कमजोर बना देगा।”

रेड्डी ने कहा कि कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ इस लड़ाई में ये समय पीएम पर ऊँगली उठाने का नहीं, बल्कि एक साथ आकर पीएम मोदी का मजबूत हाथ बनकर महामारी को हराने का है।

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा, “मेरे ख्याल से जब भी पीएम मोदी कॉल करते हैं, तो वह सब सुनिश्चित कर रहे होते हैं। मैं उनके जज्बे को सलाम करता हूँ जो उन्होंने मणिपुर की चुनौतियों को समझने के लिए दिखाया।”

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेमा खांडू ने कहा कि ये समय एक साथ आकर लड़ाई लड़ने का है। हम लोग तब तक सुरक्षित नहीं है जब तक ‘हम सारे’ सुरक्षित नहीं हैं।

मिजोरम के मुख्यमंत्री ने भी ट्विटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कॉल करने पर उनकी तारीफ की और कहा, “हम खुशकिस्मत हैं कि हमें इतना सक्रिय, ध्यान रखने वाले नरेंद्र मोदी जैसे प्रधानमंत्री मिले। निजी तौर पर मुझे पर सहज महसूस होता है, वो कॉल करते हैं, मेरे राज्य के बारे में पूछते हैं, जंगल में लगी आग और शरणार्थियों की परेशानी का जायजा लेते हैं।”

नगालैंड के मुख्यमंत्री ने हेमंत सोरेन के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका अनुभव कहता है कि पीएम मोदी राज्यों के प्रति हमेशा संवेदनशील रहते हैं। इसलिए उनकी सहमति हेमंत सोरेन के साथ नहीं है। नागालैंड के सीएम ने अपने ट्वीट में सोरेन के लिए कहा, “उम्मीद है वो अपना बयान ठीक करेंगे।”

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी झारखंड के सीएम के ट्वीट पर जवाब दिया है। उन्होंने लिखा, “ये दुर्भाग्य है कि आप पीएम मोदी की चिंता और लोगों के लिए किए जा रहे उनके कार्यों पर राजनीति कर रहे हैं। पीएम मोदी की हर कोशिश और कार्रवाई सिर्फ नागरिकों और राष्ट्र के लिए होती है।”

असम के मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने लिखा है, “आपका यह ट्वीट न सिर्फ़ न्यूनतम मर्यादा के ख़िलाफ़ है बल्कि उस राज्य की जनता की पीड़ा का भी मजाक़ उड़ाना है जिनका हाल जानने के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी ने फ़ोन किया था। बहुत ओछी हरकत कर दी आपने।मुख्यमंत्री पद की गरिमा भी गिरा दी।”

उल्लेखनीय है कि झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में यूपीए की सरकार है। सरकार में झामुमो के अलावा कॉन्ग्रेस और राजद भी शामिल है। राज्य में फ़िलहाल कोरोना के 60,633 सक्रिय मामले हैं और अब तक 2,70,089 लोग कोविड-19 से संक्रमित हो चुके हैं। पिछले 1 दिन में यहाँ 6974 नए मामले सामने आए हैं और 133 लोगों की मौत हुई है, जिससे कुल मृतकों का आँकड़ा 3479 पहुँच गया है। झारखंड में असम, पंजाब और जम्मू-कश्मीर से भी कम टेस्टिंग हुई है।

कुछ दिन पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए प्रधानमंत्री के साथ हो रही मुख्यमंत्रियों की ‘इन हाउस बैठक’ का लाइव प्रसारण चालू कर दिया था, जिसके लिए उन्हें पीएम मोदी ने बीच बैठक में टोका भी था।

सेवा भारती के खिलाफ वामपंथी पत्रकार फैला रहे प्रोपेगेंडा, इससे बेपरवाह कोविड महामारी में बेमिसाल सेवा कर रहा RSS का ये संगठन

भारत में बढ़ते कोरोना वायरस के संक्रमण के बीच जब स्वास्थ्य सुविधाएं भीषण दबाव में हैं तब कई संगठन हैं जो निःस्वार्थ भाव से देश की मदद के लिए आगे आए हैं। इन संगठनों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संबंधित सेवा भारती प्रमुख रूप से सक्रिय है। संक्रमण की पहली लहर की तरह दूसरी लहर में भी सेवा भारती संगठन देश को अपनी सहायता प्रदान कर रहा है।

हालाँकि जहाँ एक ओर संगठन अपने समाज सेवा के कार्य में जुटा हुआ है तो वहीं ‘द वायर’ और ‘कारवाँ’ जैसे वामपंथी मीडिया समूहों के लिए काम करने वाली पत्रकार नेहा दीक्षित ट्विटर के माध्यम से RSS से संबंधित संगठनों के खिलाफ अपना प्रपंच फैला रही हैं। दीक्षित ने अपने ट्वीट में कहा कि ‘सेवा इंटरनेशनल’ जनजातीय इलाकों के बच्चों को बरगलाते हैं और भाजपा सरकार के अपराधों में भी सहयोग देते हैं।

नेहा दीक्षित के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

आपको बता दें कि राष्ट्रीय सेवा भारती और सेवा इंटरनेशनल दोनों ही RSS से संबंधित हैं। राष्ट्रीय सेवा भारती जहाँ भारत में राष्ट्रीय स्तर पर संचालित है वहीं सेवा इंटरनेशनल भारत और अमेरिका में सक्रिय हैं, जिसका कार्य है फंड इकट्ठा करना और चिकित्सकीय उपकरणों की खरीद करना।

ऑपइंडिया से चर्चा करते हुए सेवा भारती के दिल्ली प्रांत के अध्यक्ष रमेश अग्रवाल ने कहा कि सेवा भारती को ऐसे प्रोपेगेंडा और झूठे प्रचार से कोई फर्क नहीं पड़ता। सेवा भारती न तो पत्रकार और न ही ऐसे किसी झूठे दावे पर कोई एक्शन लेने वाला है। अग्रवाल ने कहा कि सेवा भारती एक समाज सेवी संस्थान है जहाँ कार्यकर्ताओं को सेवा करना ही सिखाया जाता है। उन्होंने पत्रकार नेहा दीक्षित द्वारा लगाए झूठे आरोपों पर कहा, “वो क्या कहते हैं इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। हम छोटी लाइन के सामने बड़ी लाइन खींचने में विश्वास रखते हैं।“ 

द वायर की पत्रकार नेहा दीक्षित ने 2016 में आउटलुक के लिए एक लेख लिखा था, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि RSS के दो संगठनों राष्ट्र सेविका समिति और सेवा भारती ने असम से 31 जनजातीय लड़कियों को पंजाब और गुजरात लाकर उनका ‘हिन्दूकरण’ किया।

हालाँकि सेवा भारती ने दीक्षित के दावों पर कोई प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया लेकिन सोशल मीडिया के यूजर्स ने दीक्षित को आईना दिखा दिया।

कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर में सेवा भारती संगठन द्वारा किए जा रहे कार्यों के बारे में रमेश अग्रवाल बताते हैं कि संगठन ने दिल्ली में ऑक्सीजन की भारी कमी को देखते हुए ‘प्राणवायु सेवा’ शुरू की है। इस अभियान के तहत कार्गो ट्रक पोर्टेबल मेडिकल वैन में बदले गए हैं जिनमें ऑक्सीजन, मास्क और अत्यावश्यक सुविधाओं और पेशेवर चिकित्सा स्टाफ के साथ 4 बेड उपलब्ध हैं। सेवा भारती की इस पहल का उद्देश्य है मरीजों को अस्पतालों में बिस्तर मिलने तक ऑक्सीजन की कमी से बचाना।

इसके अलावा सेवा भारती द्वारा होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों को भी ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जा रही है। यह सेवा बिल्कुल मुफ्त है। संगठन ऑक्सीजन सिलेंडरों की सुरक्षा निधि के तौर पर कुछ राशि लेता है जो कि रिफंडेबल होती है।  

सेवा भारती के पोर्टेबल वैन से मरीजों को मिल रही ऑक्सीजन की सुविधा

हालाँकि इसके अलावा भी सेवा भारती संगठन कई अन्य समाज सेवा के कार्य करता रहता है। ऑपइंडिया ने दिल्ली के मजनूँ का टीला इलाके में रह रहे शरणार्थी परिवारों के लिए सेवा भारती द्वारा किए जा रहे राहत कार्यों पर रिपोर्ट दी थी। इन शरणार्थी परिवारों ने ऑपइंडिया को बताया था कि उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन दिल्ली की आप सरकार ने उनकी कोई सहायता नहीं की। हालाँकि इन शरणार्थियों ने बताया कि RSS और सेवा भारती शुरू से ही उनकी सहायता कर रहे हैं और महामारी के समय में भी उन्हें सहायता मुहैया करा रहे हैं।  

RSS का समाज सेवा संगठन सेवा भारती :

सेवा भारती संगठन का मुख्यालय दिल्ली में है। संगठन द्वारा पूरे देश में राहत कार्य किया जाता है। सेवा भारती के समर्पित कार्यकर्ता लगातार समाज सेवा का कार्य करते रहते हैं जो महामारी में भी चल रहा है। खाने के पैकेट, मास्क, सैनिटाइजर, दवाइयाँ और अन्य आवश्यक सहायता सेवा भर्ती के लगभग 2.10 लाख कार्यकर्ताओं के द्वारा पूरे देश में जरूरतमंदों को पहुँचाई जा रही है।

दिल्ली में सेवा भारती की 45 रसोइयाँ

अकेले दिल्ली में ही सेवा भारती की 45 रसोइयाँ कार्यरत हैं जहाँ से सेवा भारती के 5,000 कार्यकर्ता लगभग 75,000 दिल्ली वासियों को भोजन उपलब्ध कराते हैं। इन रसोइयों में Covid-19 प्रोटोकॉल का पूर्णतः पालन करते हुए और चिकित्सकों एवं सरकार की सलाह को ध्यान में रखते हुए भोजन का निर्माण किया जाता है। सेवा भारती के कार्यकर्ता झंडेवालान मंदिर जैसे कई अन्य मंदिर ट्रस्ट के साथ मिलकर रोज हजारों लोगों को भोजन की आपूर्ति कर रहे हैं।

एक ही पेड़ से लटके मिले बीजेपी के 2 वर्कर, NCW की मुखिया से ममता सरकार ने बंगाल दौरा रद्द करने को कहा

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने दो और कार्यकर्ताओं की हत्या का इल्जाम तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) पर लगाया है। घटना मालदा के उत्तर लक्ष्मीपुर की है। यहाँ दो भाजपा कार्यकर्ताओं का शव एक ही पेड़ से लटका मिला। इससे पहले, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की प्रमुख रेखा शर्मा ने बताया कि उन्हें राज्य में एक और दिन रहने की इजाजत देने से ममता सरकार ने इनकार कर दिया है। वे चुनावी नतीजों के बाद भड़की हिंसा की पीड़ित महिलाओं का दर्द जानने के लिए राज्य के दौरे पर थीं।

भाजपा की बंगाल ईकाई ने ट्वीट कर कहा है, “दोहरी हत्या का मामला। मालदा के उत्तर लक्ष्मीपुर में टीएमसी के गुंडों ने भाजपा कार्यकर्ता मनोज मंडल (21) और चैतन्य मंडल (19) को मारकर पेड़ पर लटका दिया। अब बंगाल पुलिस पड़ताल करने और टीएमसी गुंडों को सजा दिलवाने की जगह इसे सुसाइड या फेक करार देगी।”

इधर रेखा शर्मा को दौरा रद्द करने की सलाह देने का आधिकारिक कारण कोरोना संक्रमण के कारण लागू किए गए नए उपायों को बताया गया है। शर्मा ने खुद सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी दी है। वे 5 मई को कोलकाता पहुॅंची थीं। हालात को लेकर ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाने के मकसद से उन्होंने अपना दौरा एक दिन और बढ़ाना चाहा था, लेकिन बंगाल सरकार ने तत्काल इससे इनकार कर दिया। इसका कारण कोरोना के हालात से निपटने में अधिकारियों की व्यस्तता को बताया गया है।

शर्मा ने 6 मई को ट्वीट कर बताया कि दो दिन के दौरे में वे कई महिलाओं से मिलीं। उनकी पीड़ा को जाना। उनकी खौफनाक आपबीती दर्ज की।

हिंसा के बाद हालात का जायजा लेने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 6 मई को अतिरिक्त सचिव गोविंद मोहन के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम को राज्य के दौरे पर भेजा था। इस टीम ने कई हिंसा प्रभावित इलाकों में जाकर जायजा लिया। टीम ने राज्यपाल जगदीप धनखड़ से भी मुलाकात की है।

उल्लेखनीय है कि मालदा में डबल मर्डर से पहले बीजेपी के एक किसान नेता की हत्या की खबर आई थी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने 26 साल के किशोर मंडी की हत्या की जानकारी दी थी। मंडी झाड़ग्राम (Jhargram) के बिनपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा किसान मोर्चा के मंडल सचिव थे।

इसके अलावा ये भी पता चला कि बंगाल में भाजपा का समर्थन करने वाले मुस्लिमों को भी नहीं बख्शा जा रहा है। ‘ABP न्यूज़’ के पत्रकार विकास भदौरिया ने जानकारी दी है कि मेटियाब्रुज मंडल 2 में भाजपा के मंडल उपाध्यक्ष शेर मोहम्मद खान को मारा-पीटा गया। वहाँ के वॉर्ड संख्या 139 के रहने वाले खान के घर में घुस कर भीड़ ने उनके साथ गाली-गलौज किया। सार्वजनिक रूप से उन्हें थप्पड़ मारे गए और प्रताड़ित किया। उनके परिवार के साथ भी मारपीट हुई।

‘ईद’ की शॉपिंग में उड़ रही कोविड प्रोटोकॉल की धज्जियाँ, हैदराबाद के चारमीनार के पास बिन मास्क दिखी लोगों की जबर्दस्त भीड़, देखें Video

हैदराबाद में ईद-उल-फितर से पहले चारमीनार बाजार के पास कोविड प्रोटोकॉल्स की खुलेआम धज्जियाँ उड़ती नजर आईं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दिखा कि कैसे बाजार में घूमने वाला कोई भी व्यक्ति महामारी को लेकर गम्भीर नहीं है। सोशल डिस्टेंसिंग तो दूर की बात है ज्यादातर लोगों बिना मास्क के ही नजर आए।

डेक्कन क्रॉनिकल के हैदराबाद संस्करण में 6मई 2021 को प्रकाशित संबंधित खबर

जानकारी के मुताबिक, वायरल हो रहा वीडियो 5 मई 2021 का है। राज्य में कर्फ्यू का समय 9 बजे से शुरू होता है। ऐसे में व्यापारी 8:30 तक दुकान खोले रखते हैं और ईद के कारण पिछले कुछ दिनों में यहाँ बड़ी तादाद में भीड़ जमा हो रही है। लोग ईद से पहले कपड़े, गहने और तमाम तरह का सामान लेने बाजार आ रहे हैं।

साउथ जोन डीसीपी ने चारमीनार बाजार के पास एकत्रित भीड़ को लेकर कहा, “शहर के कुछ हिस्सों में (कोविड प्रोटोकॉल्स के) कुछ उल्लंघन हुए हैं। हम ऐसे उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ मामले दर्ज कर रहे हैं, विशेष रूप से चारमीनार में और उसके आसपास।”

डीएसपी ने बताया कि 20 अप्रैल से नाइट कर्फ्यू लगने के बाद से अब तक 698 केस मास्क न पहनने पर और 146 केस सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने पर दर्ज हुए हैं। इसके अलावा 4 मुकदमे सार्वजनिक सभा करने पर हुए हैं और 253 मुकदमे नाइट कर्फ्यू उल्लंघन पर दर्ज हुए हैं।

तेलंगाना HC लगा चुका है राज्य सरकार को फटकार

बता दें कि तेलंगाना हाईकोर्ट ने कोविड के बढ़ते मामलों को देखते हुए बुधवार को राज्य में सख्त पाबंदी लगाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने नाइट कर्फ्यू और वीकेंड लॉकडाउन के अलावा भी सख्त पाबंदियों को लागू करने को कहा था।

राज्य सरकार को टेस्टिंग कम करने पर फटकारते हुए कोर्ट ने कहा, “ सरकार को सावधान रहने और कोविड टेस्टिंग बढ़ाने के हमारे निर्देश को पिछले हफ्तों में अनसुना किया गया। सरकार ने लगातार टेस्टिंग घटाई। पिछले हफ्ते से ये 92000 से 70000 पर आ गई। इससे तो अपने आप संक्रमित लोगों की संख्या कम पता चलेगी। आप इसके बूते कह रहे हैं कि कोविड केसों में कमी आई है।”

राज्य को प्रति दिन एक लाख COVID परीक्षण करने का आदेश देते हुए, पीठ ने टिप्पणी की, “निजी केंद्रों पर परीक्षण स्थिर है लेकिन सरकारी केंद्रों में कम हो रहा है।”  इस पर सार्वजनिक स्वास्थ्य निदेशक डॉ जी श्रीनिवास राव ने बताया कि 1100 टेस्टिंग सेंटर पर बहुत कम लोग टेस्ट के लिए आ रहे हैं। इसलिए टेस्टिंग की संख्या कम हो रही है।

कोर्ट ने मामले की सुनवाई में यह भी कहा कि किसी भी जगह पर लोगों को एकत्रित होने से रोका जाए। हालाँकि, 5 मई के इस वीडियो को देख ऐसा कहीं से नहीं लग रहा है कि कोई भी कोविड प्रोटोकॉल का पालन कर रहा है या प्रशासन भी कोर्ट के आदेश को सख्ती से लागू करवाने का प्रयास कर रहा है।

ईद से दस दिन पहले अफजलगंज, मदीना, चार मीनार, नामपल्ली में लगातार कोविड प्रोटोकॉल्स की धज्जियाँ उड़ रही हैं। ये सब उस समय है जब पुलिस को सख्त नियम लागू करके सभाओं को रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

कोविड का खतरनाक वैरिएंट मिलने के बावजूद हैदराबाद में इकट्ठा होकर पढ़ी गई नमाज

कोरोना की दूसरी लहर ने देश में हाहाकार मचाया हुआ है। हर रोज 3 से 4 लाख केस देश में नए आ रहे हैं। इतना ही नहीं कोरोना के नए वैरिएंट NK440 ने भी आंध्र प्रदेश, तेलंगाना समेत दक्षिण भारत के राज्यों की टेंशन बढ़ाई है, जिसे पुराने वैरिएंट से 15 गुना अधिक घातक माना जा रहा है। लेकिन इसके बावजूद हैदराबाद में ईद की शॉपिंग के दौरान कोविड नियमों का उल्लंघन वाकई चिंताजनक है।

तेलंगाना में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 6000 नए केस सामने आए और 52 मौतें भी हुईं। इसके अलावा समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा जारी की गई आज की कुछ तस्वीरों में देख सकते हैं कि हैदराबाद में रमजान के आखिरी जुमे के दिन बड़ी तादाद में इकट्ठा होकर नमाज अदा की गई। यहाँ भी कई नमाजियों के चेहरे से मास्क बिलकुल गायब हैं। 

लोगों का इन तस्वीरों को देख कर पूछना है कि क्या वहाँ हालात इतने अच्छे हैं कि इन लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क लगाने की जरूरत तक महसूस नहीं हो रही। एक यूजर का ये भी कहना है कि जब समुदाय के लोग मजहब के नाम पर कोविड नियमों पर उल्लंघन करते हैं, तो प्रशासन चुप होकर सब देखता रहता है?

पंजाब में कॉमेडियन संकेत भोंसले पर कोविड प्रोटोकॉल तोड़ने का केस, राहुल गाँधी का मजाक बनाने वाले एड में दिखे थे

कॉमेडियन संकेत भोसले और सुगंधा मिश्रा ने हाल ही में पंजाब के फगवाड़ा में में शादी की थी। पंजाब पुलिस ने शादी समारोह में कोरोना नियमों के उल्लंघन के आरोप में मामले में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है। दोनों की शादी बीते 26 अप्रैल को हुई थी। उसके 9 दिन बाद पुलिस ने इस जोड़ी के खिलाफ शिकायत दर्ज की। दंपती के अलावा पंजाब सरकार ने क्लब कबाना रिसॉर्ट के मैनेजर के खिलाफ भी केस दर्ज किया है। यही शादी समारोह हुआ था।

सरकारी आदेशों का उल्लंघन करने के मामले में संकेत भोसले और उनकी पत्नी सुगंधा मिश्रा के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 188 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पंजाब पुलिस ने कपल की शादी का एक वीडियो वायरल होने के बाद उनके खिलाफ केस दर्ज किया। इस बात की जानकारी फगवाड़ा के एसपी सरबजीत सिंह बाहिया ने दी है।

महामारी के बीच यह शादी काफी प्राइवेट रखी गई थी, जिसमें परिवार और करीबी दोस्तों को ही बुलाया गया था। हालाँकि, पंजाब सरकार ने कोविड-19 नियमों का उल्लंघन करने के मामले में दंपती के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। नियमों के अनुसार, 10 से अधिक लोग किसी भी शादी के कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो सकते हैं।

कौन हैं संकेत भोसले और सुगंधा मिश्रा

संकेत भोसले एक कॉमेडियन, मिमिक्री कलाकार और अभिनेता हैं। बहुमुखी प्रतिभा के धनी अभिनेता ने संजय दत्त और सलमान खान जैसे बॉलीवुड अभिनेताओं की कॉमेडी करके प्रसिद्धि हासिल की है। वहीं सुगंधा मिश्रा मिश्रा कॉमेडियन, गायक और टेलीविजन होस्ट हैं। उन्होंने कॉमेडी शो- द कपिल शर्मा शो में विभिन्न किरदार निभाए हैं और कई अन्य टीवी शो में भी वो दिख चुकी हैं।

विज्ञापन में राहुल गाँधी का मजाक

संकेत भोसले मुंबई के स्टोरिया (Storia) फूड्स ऐंड बेवरेज प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी के विवादित विज्ञापन में भी दिखे थे। इस विज्ञापन के जरिए राहुल गाँधी का मजाक उड़ाने का आरोप कॉन्ग्रेसियों ने लगाया था।

स्टोरिया (Storia) फूड्स ने टैग लाइन- विश इट नेवर गेट्स ओवर के जरिए तीन एड लॉन्च किए थे। हर एड 45 सेकेंड का था। पहले एड में क्रिकेट लीग प्रेस कॉन्फ्रेंस का सीन था। दूसरे एड में दिखाया गया था कि कलाकार कैसे वर्कआउट मिलने के बाद स्टोरिया का ड्रिंक न मिलने पर नाराज हो जाता है। विवादित विज्ञापन स्टोरिया के चॉकलेट शेक का था।

तीनों एड किसी न किसी की पैरोडी थी। लेकिन विवादित विज्ञापन में दिखी महिला और युवक कथित तौर पर सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के गेटअप में दिखते थे। इसी वजह से यह एड विवाद में आ गया था।

इसको लेकर पिछले हफ्ते कॉन्ग्रेस नेता मुंबई के अंधेरी ईस्ट स्थित बेवरेज कंपनी के कार्यालय पहुँच गए थे। एक वीडियो सामने आया था जिसमें दिख रहा था कि कोरोना पाबंदियों के बावजूद कई कार्यकर्ताओं ने दफ्तर में घुसकर तोड़फोड़ मचाई। कुछ कॉन्ग्रेस नेताओं को सोनिया गाँधी जिंदाबाद, राहुल गाँधी जिंदाबाद, मुंबई कॉन्ग्रेस जिंदाबाद के नारे लगाते भी देखा गया था।

हिंसा वही जो पिया मन भाए?

पश्चिम बंगाल ने उन्हें गलत साबित कर दिया है जिन्होंने यह सोचा था कि इस बार विधानसभा चुनावों के परिणाम के बाद शायद हिंसा न हो। ऐसा सोचने के पीछे लोगों के अपने-अपने कारण होंगे पर मतदान के दौरान हर बार की तुलना में इस बार हिंसा की कमी शायद इसका सबसे बड़ा कारण होगा। पर लोगों की आशा के विपरीत चुनाव परिणामों के बाद हिंसा हुई और देखा गया कि पहले की तुलना में बहुत अधिक थी। जैसे हिंसा न होने की आशा के पीछे लोगों के अपने-अपने कारण थे, वैसे ही हो रही हिंसा पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ भी हैं।  

सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस की ओर से पहली प्रतिक्रिया यह थी कि; कोई हिंसा नहीं हुई और हिंसा के जो वीडियो शेयर किए जा रहे हैं, वे पुराने हैं। दूसरी यह थी कि; हम तो चुनाव जीते हैं। भला हम क्यों हिंसा करेंगे? तीसरी प्रतिक्रिया भी आई और वो यह थी कि; भारतीय जनता पार्टी के अलग-अलग धड़े आपस में ही लड़ रहे हैं।  

वामपंथियों में से अधिकतर चुप रहे और कुछ ही बोले, यह बात अलग है कि उनके वोटर और ‘समर-थकों’ के खिलाफ भी हिंसा हुई। कॉन्ग्रेस पार्टी ने ममता बनर्जी की खुशी में अपनी खुशी खोज ली है। उसने चुप्पी साध ली। भारतीय जनता पार्टी की ओर से भी प्रतिक्रिया आई जिसमें हिंसा को लोकतंत्र के विरुद्ध बताया गया।  

पत्रकारों और मीडिया की ओर से भी प्रतिक्रिया आई। अधिकतर प्रादेशिक मीडिया और पत्रकारों की पहली प्रतिक्रिया चुप्पी थी। पहली प्रतिक्रिया के बाद सबसे लोकप्रिय प्रतिक्रिया यह रही कि; राजनीतिक हिंसा पश्चिम बंगाल के लिए नई बात नहीं है और ऐसा पहले से होता रहा है। पर लोगों को सबसे आश्चर्यचकित जिस प्रतिक्रिया ने किया, वह ऐसी थी जिसने भारत में मीडिया की तटस्थता को एक नई परिभाषा दी। यह प्रतिक्रिया वाम-तंत्री मीडिया की ओर से थी जिसमें कहा गया कि; पश्चिम बंगाल में हिंसा तो हो रही है पर वह सांप्रदायिक हिंसा नहीं है।  

जैसे कोई कह रहा हो; हिंसा जब तक सांप्रदायिक न हो, तब तक उसे मानवता के विरुद्ध नहीं माना जा सकता। हो सकता है अगली प्रतिक्रिया जेएनयू के किसी समाजशास्त्री की ओर से आए, जिसमें वो बताए कि पश्चिम बंगाल में हिंसा की घटनाओं पर इतनी भिन्न प्रतिक्रियाओं का अर्थ ही यह है कि प्रदेश में लोकतंत्र मजबूत है और बाकी के भारत को इसी लोकतंत्र से सीखने की आवश्यकता है। यह भले काल्पनिक लगे पर इतिहास को देखते हुए इसे असंभव करार देने का मन नहीं हो रहा।      

प्रश्न यह उठता है कि ऐसी भीषण हिंसा पर अलग-अलग लोगों की इतनी भिन्न प्रतिक्रियाएँ कैसे? आखिर जो सामने दिख रहा है उसमें ऐसा क्या है जो छिपा हुआ है और जिसे कुछ लोग तो देख पा रहे हैं पर कुछ लोग नहीं देख पा रहे? एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में हुई किसी भी हिंसा पर इतनी अलग-अलग प्रतिक्रिया कैसे आ सकती है? चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा तृणमूल कॉन्ग्रेस, कॉन्ग्रेस, वाम दल और मीडिया भी था। फिर ऐसी भीषण हिंसा की एक स्वर में निंदा असंभव क्यों है?      

तृणमूल कॉन्ग्रेस हो रही हिंसा को लेकर जो कुछ भी कह रही है, वह क्या केवल इसलिए कह पा रही है क्योंकि उसे पता है कि उससे कोई प्रश्न नहीं करेगा? पार्टी की सोच का आधार चाहे जो हो पर यह जरूर है कि मीडिया ने चुप्पी साधकर प्रदेश में होने वाली हिंसा को लोकतंत्र का अभिन्न अंग बना दिया है। परिणाम स्वरूप वह न केवल खुद अपनी इस थ्योरी में विश्वास करता है बल्कि यह भी चाहता है कि आम भारतीय भी यह मान ले कि प्रदेश में राजनीतिक हिंसा रोजमर्रा के जीवन का अंग है और इसलिए मीडिया और बुद्धिजीवियों को अधिकार है कि इसे लेकर आश्चर्यचकित होने वालों को वह जाहिल करार दे दे।  

यह सच है कि राजनीतिक हिंसा पश्चिम बंगाल के लिए नई बात नहीं है पर वर्तमान में जो स्थिति है, हालात वहाँ तक कैसे पहुँचे? देश में होने वाले चुनाव सुधारों का असर बाकी प्रदेशों में होने वाली हिंसा पर हुआ पर पश्चिम बंगाल इसका अपवाद क्यों रहा?

दरअसल प्रदेश में हिंसा का जो रूप हम आज देख रहे हैं, वह वाम जनित हिंसा का ही विस्तार है। 1970 के दशक में वामपंथियों द्वारा शुरू की गई हिंसा ने उनके सत्ता में आने के बाद एक नया रूप ले लिया। “सत्ताधारी को हिंसा के बल पर सत्ता से हटाना है” जैसा सिद्धांत सत्ता में आने के बाद “तुमने विपक्ष को वोट करने की हिम्मत कैसे की?” में परिवर्तित हो गया और वामपंथी दलों के सत्ता से हटाए जाने के साथ भी नहीं गया क्योंकि जाते-जाते वामपंथी यह सिद्धांत ममता बनर्जी को दे गए और उन्होंने इसका खूब इस्तेमाल किया। हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों से पहले 2018 के पंचायत चुनावों में हुई हिंसा इस सिद्धांत के प्रयोग का सबसे बड़ा उदाहरण है। उनकी सरकार के विरुद्ध कोलकाता उच्च न्यायालय की टिप्पणी इस बात का सबसे बड़ा सबूत है।         

ऐसे में तृणमूल कॉन्ग्रेस का प्रश्न कि “हमने तो चुनाव जीता है, हम हिंसा क्यों करेंगे?” बेमानी है। दल को यह विश्वास है कि उससे प्रश्न नहीं पूछा जाएगा क्योंकि प्रदेश की सत्ता में अब वामपंथ भले न हो, वाम-तंत्र आज भी मौजूद है और मज़बूती के साथ टिका हुआ है। हाँ, वामपंथियों के समय में और आज के बीच एक अंतर यह है कि तब के मीडिया ने हिंसा पर कभी बहस भले न किया हो पर हिंसा की रिपोर्टिंग जरूर करता था। अब रिपोर्टिंग तक नहीं करता। तब के वाम-तंत्री संपादक संभावित बहस में नैतिकता का प्रश्न उठाकर अपने वैचारिक शासकों को धर्मसंकट (वैसे वामपंथियों के लिए धर्मसंकट जैसा शब्द शायद सही न हो) में नहीं डालना चाहते थे पर अब तो रिपोर्टिंग न करके उन्हें शर्मिंदा भी नहीं करते। जो लॉयल दैन द क्वीन हैं, वे एक कदम आगे जाकर बहस करते हुए यह साबित करने की कोशिश करते हैं कि; प्रदेश में हो रही हिंसा सांप्रदायिक नहीं है इसलिए हिंसा के आरोप को खारिज कर दिया जाना चाहिए।

ऐसा शायद इसलिए है कि साल दर साल वाम-तंत्री मीडिया ने केवल सांप्रदायिक हिंसा की बात और उस पर बहस करके यह साबित करने की कोशिश की कि हिंसा केवल एक ही तरह की होती है और वह है सांप्रदायिक हिंसा। उसके अलावा किसी और हिंसा पर न तो बहस की जरूरत है और न ही उसके निंदा की। अभी हाल ही में 26 जनवरी के दिन दिल्ली में किसान आंदोलन के नाम पर की गई हिंसा हाल के दिनों में इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। पूरे देश ने देखा कि कैसे उस हिंसा को उचित ठहराने की कोशिश की गई। 

वामपंथी हिंसा और उसकी वाम-तंत्री रिपोर्टिंग का क्रमिक विकास देखने लायक है। “जो है उसमें से अपने मतलब का सीन ही देखना है” से चलकर “कुछ नहीं दिख रहा है” तक के सफर में मात्र तीन दशक लगे जो वाम-तंत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इस उपलब्धि का अगला पड़ाव क्या होगा, यह देखना रोचक होने के साथ-साथ शोध का भी विषय होगा।        

‘रहस्यमयी पार्सल’ से जानवर कूरियर कर रहा चीन, कोरोना के बाद Blind Box के खुलासे ने दुनिया को चौंकाया

वुहान कोरोना वायरस के जरिए दुनिया भर में अनगिनत जिंदगियों को खतरे में डालने वाला चीन एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार सुर्खियों की वजह है, ‘ब्लाइंड बॉक्स (Blind Boxes)’। दरअसल ब्लाइंड बॉक्स उन पार्सलों को कहा जा रहा है जिनके माध्यम से खरीदारों को जानवरों की डिलिवरी की जा रही है। खरीदारों को जानवर कूरियर सेवा के माध्यम से ‘रहस्यमयी पार्सल’ (ब्लाइंड बॉक्स के रूप में संदर्भित) के जरिए भेजा जा रहा है। इस नई घटना ने कम्युनिस्ट शासन वाले देश में जानवरों के साथ दुर्व्यवहार पर एक वैश्विक बहस छेड़ दी है।

सोमवार को पश्चिमी चीन के चेंग्दू नामक स्थान में चेंग्दू आईझीजिया (Aizhijia) एनिमल रेस्क्यू सेंटर ने ZTO नामक कूरियर कंपनी के ट्रक से 160 बिल्लियों और कुत्तों को रेस्क्यू किया। सभी जानवर 3 महीने से कम उम्र के थे और उनमें से 4 मरे हुए थे। इसके अलावा कई जानवर विषाणुओं से संक्रमित थे।  

रायटर्स के द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो में कुत्तों और बिल्लियों के बच्चों को गोदाम में एक पार्सल में कैद देखा जा सकता है। चेंग्दू आईझीजिया (Aizhijia) एनिमल रेस्क्यू सेंटर के वॉलंटियर्स पूरी रात गोदाम में रहे और जानवरों को खाना खिलाया। स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा पिल्लों और बिल्ली के बच्चों का भी निरीक्षण किया गया। गुरुवार को, समूह ने बताया कि 38 को छोड़कर सभी जानवरों को पुनर्वास के लिए केंद्र में वापस लाया गया था। शेष 38 जानवरों को मेडिकल सहायता दी जा रही है। जानवरों की देखभाल की और 38 जानवरों को इलाज के लिए भेज दिया गया। शेष बचे जानवरों को पुनर्वास के लिए सेंटर लाया गया।

कूरियर कंपनी ने जानवरों के अवैध परिवहन के लिए माफी माँगी है। रिपोर्ट के अनुसार ये Blind Boxes 1700 किमी दूर शेनझेन तक डिलिवर किए गए। जानवरों के परिवहन पर विवाद होने के बाद कंपनी ने डिलिवरी एक्जिक्युटिव को बर्खास्त कर दिया है। चीन में जानवरों के परिवहन पर रोक है। ऐसे में कूरियर कंपनी ZTO ने चीन के पोस्टल रेगुलेशन का उल्लंघन करने के लिए माफी माँगी है।

चीन में Taobao जैसी वेबसाइटों में चूहों, कछुओं और छिपकलियों वाले Blind Boxes भी बिक्री के लिए दर्ज हैं। हालाँकि चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने इन Blind Boxes की आलोचना की और ‘मिस्ट्री पार्सल’ उर्फ ‘ब्लाइंड बॉक्स’ को ‘जीवन की अपवित्रता’ बताया। शिन्हुआ ने विक्रेताओं और खरीदारों से अपील की है कि वो जानवरों के प्रति दया भाव दिखाएं।