बॉर्डर पर जय किसान सभा। लॉकडाउन और धूप के कारण कुम्हलाए लोग ऊँघ रहे हैं। कुछ खड़े होकर दिल्ली की ओर देख रहे हैं। कई सप्ताह से व्यवस्था डगमगाई सी हुई है। इनसे दूर एक टेंट में नेता और उप नेता चिंतन में व्यस्त हैं।
उप नेता; उस्ताद जी, हमने सब ट्राई कर लिया। भाषण दिया, धमकी दी, गाँवों से लाने के लिए लोगों से ज़बरदस्ती कर ली, ट्रैक्टर रैली की, मसाज करवाया, लंगर खाए, गीत गाया, भांगड़ा किया… चुप रहे, माने कृषि सम्बंधित सारी चालें चल लीं पर ये गोरमिंट तो सुण ई नई रई। इधर गर्मी बढ़ती जा रही है। आँखें बंद किए चिंतन-ग्रस्त नेता बोला; ये तो है। पर तू चिंता न कर। ऊपर से ऑर्डर ना भी आया तो अपणे पास और भी बहुत त्रीके हैं गोरमिंट से अपणी माँग मनवाने के।
उप नेता बोला; ओर कोण सा तरीक़ा बच रहा उस्ताद जी? नेता बोला; बस तू चुप हो ले और देख कि कल मैं क्या करता हूँ। उप नेता ने अपने नेता की गंभीरता पर एक नज़र डाली और धरने के शुरुआती दिनों से लेकर अब तक एक-एक करके चली गई सारी चालें मन ही मन याद किया। फिर इस प्रश्न पर पहुँचा कि; करने के लिए बचा क्या है अब? ये कल क्या करने वाला है? आत्मदाह तो नई कर लेगा?
नेता ने उसे कुछ सोचते हुए देख लिया और मन में इस लघु चिंतन पर सवाल पूछने की तैयारी करने लगा। वो पूछने ही वाला था कि; तू भी कभी-कभी सोचता है क्या? तब तक उप नेता सतर्क हो गया और उसने सोचना बंद कर दिया।
दूसरे दिन नेता मंच पर पहुँचा। सामने ‘किसानों’ की भीड़ थी। भीड़ को देखकर उसने ताजे-ताजे रिकी पोंटिंग को बोल्ड किए हरभजन सिंह की तरह अपने दोनों हाथ हवा में उठाए और बोला; भाइयों यह सरकार किसाणों का खून चूसती ई जा रही है। हम इतने दिनों तक धरणे पर बैठे, ट्रैक्टर रैली की, लाल क़िला फ़तह किया, ख़लीफ़ा मियाँ से ट्वीट करवाया, भांगड़ा किया… लेकिन इस सरकार के काण के नीचे जूं नई रेंक रई। अब समय आ गया है कि हमें हमारी ताक़त दिखानी होगी।
नीचे से एक आवाज़ आई, ख़लीफ़ा मियाँ नई मियाँ ख़लीफ़ा।
नेता बोला; हाँ वई, हैं तो एक ही नाम। ख़लीफ़ा आगे लगे चाहे पीछे। पर बात वो ना है। बात ये है कि अब समय आ गया है कि हम अपणी ताक़त दिखाएँ। नीचे से एक आवाज़ और आई; तो अभी तक क्या दिखा रहे थे? जो दिखाया वो ताक़त नई थी? नेता झेंप गया। बोला; ऐसा नई है। ताक़त तो वो भी थी। पर अब कुछ और करना है।
किसी ने पूछा; क्या करना है? नेता बोला; अब हमें एग्रिकल्चर धरणा देणा पड़ेगा। आज यहाँ मैं सरकार को चेतावनी दे रहा हूँ कि उसणे क़ानून वापस ना लिए तो हम एग्रिकल्चर धरणा करेंगे।
थोड़ी देर के लिए लोग आपस में खुसर-फुसर करने लगे। नेता समझ गया कि उसकी बात लोगों को समझ नहीं आई। उसने घोषणा की; एग्रिकल्चर धरणे से मेरा मतलब है कि जब तक सरकार सारे क़ानून वापस नहीं लेती तब तक हम खेती बंद कर देंगे।
वहाँ उपस्थित चैनल के संवाददाता, कैमरामैन और यूट्यूबर ब्रेकिंग न्यूज़ की तैयारी करने लगे। सबने मन ही मन कहा; ये लगा मास्टर स्ट्रोक। अब सरकार को पता चलेगा कि किसान की ताक़त क्या होती है।
इधर शाम को अपने टेंट में नेता और उप नेता खुद को दर्शन के हवाले किए बैठे बात कर रहे थे। सामने टेबल पर गिलास रखे हुए थे जिनमें लस्सी रखी थी। उप नेता बोला; उस्ताद जी, आपने तो किसाणों को ट्रक की नई बत्ती के पीछे लगा दिया। आप तो बिलकुल ट्रक ड्राइवर की तरह स्मार्ट हो।
नेता बोला; तू इत्ते सालों से है साथ हमारे और फिर भी मुझे ट्रक ड्राइवर समझता है? अरे बेवक़ूफ़ हम ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर बैठे हैं टिकरी बॉर्डर पर नई। उप नेता झेंप गया। बोला; सोरी उस्ताद जी सोरी। मैं भूल गया था कि आप तो किसाण हो। फिर अचानक उसे लगा कि उससे फिर गलती हो गई। उसने सुधारते हुए कहा; मेरा मतलब किसाण नेता उस्ताद जी।
नेता मुस्कुराते हुए बोला; नेता! केवल नेता ! किसाण तो वो हैं जिन्हें हमणे ट्रक की बत्ती के पीछे लगाया है।
सोशल मीडिया पर एक टूलकिट कॉन्ग्रेस के नाम से वायरल हो रहा है, जिसके बारे में भाजपा नेताओं का कहना है कि ये वो दस्तावेज है, जिसके माध्यम से कॉन्ग्रेस ने अपने नेताओं को कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कुम्भ मेला को बदनाम करने के तरीके समझाए हैं। ये टूलकिट दिखाता है कि कॉन्ग्रेस पार्टी किस तरह एक महामारी के वक़्त भी राजनीति का घिनौना खेल खेलने से बाज़ नहीं आती है।
जहाँ एक तरफ कॉन्ग्रेस पार्टी इसे फेक बताते हुए इसे फ़ैलाने वालों के खिलाफ केस करने की बात कह रही है, वहीं इसके कंटेंट कुछ और ही कहानी कहते हैं। ऑपइंडिया भी इस टूलकिट के कॉन्ग्रेस द्वारा बनाए जाने की पुष्टि नहीं करता, लेकिन जो आरोप लगे हैं और चीजें सामने आई हैं उनका विश्लेषण आवश्यक है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि हिन्दुओं के एक ऐसे पवित्र त्यौहार को बदनाम करने की कोशिश कीगई, जिसका समय पूर्व समापन कर दिया गया और प्रतीकात्मक ही रखा गया।
वहाँ सारे नियम-कानून का पालन करते हुए श्रद्धालु जुटे थे, लेकिन उसे बदनाम करने के लिए ‘सुपर स्प्रेडर’ का नाम दिया गया। जबकि ईद को लेकर चुप्पी साध लेने और उसमें जुटी अव्यवस्थित भीड़ को ‘सुखद मिलन समारोह’ बता प्रचारित किया गया। एक और बड़ी बात ये है कि नैरेटिव बनाने, बिगाड़ने और मोड़ने का ये सारा खेल ‘दोस्त पत्रकारों’ की मदद से किया जा रहा था, खासकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया के साथ साँठगाँठ कर के।
इस ‘टूलकिट’ में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया पहले ही कुम्भ को ‘सुपर स्प्रेडर’ घोषित कर चुकी है। साथ ही ‘सामान सोच वाले’ देशी/विदेशी पत्रकारों के साथ मिल कर इस नैरेटिव को आगे बढ़ाने की बात की गई है। कोरोना आपदा काल में मदद के नाम पर भी पहले पीड़ितों की गुहार को ‘दोस्त पत्रकारों’ की मदद से वायरल करवाना था, फिर उनसे कॉन्ग्रेस को टैग करवाना था। पत्रकारों और ‘प्रभावशाली लोगों’ की मदद को तरजीह देने की बात भी की गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि बिगाड़ने के लिए किस तरह से विदेशी मीडिया के साथ हाथ मिलाया गया था, वो भी देखिए। भारत में विदेशी मीडिया संस्थानों के कॉरेस्पोंडेंट्स के माध्यम से पीएम मोदी को सभी समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। विदेशी मीडिया में लेख लिखने वाले भारतीय प्रोपेगंडा पत्रकारों को पॉइंट्स दिए गए, ताकि वो मोदी सरकार को बदनाम कर सकें। स्थानीय पत्रकारों को जलती चिताओं और लाशों की तस्वीरें देकर रिपोर्ट बनवा उसे वायरल करवाने की भी साजिश थी।
ये खतरनाक इसीलिए है क्योंकि इससे साफ़ हो गया है कि वैश्विक मीडिया में भारत को लेकर एकपक्षीय रिपोर्टिंग हो रही थी और कॉन्ग्रेस पार्टी के इशारे पर देश और प्रधानमंत्री को बदनाम किया जा रहा था। अंतरराष्ट्रीय मीडिया पहले से ही भाजपा के प्रति घृणा का भाव रखता रहा है। अब समझ में आ रहा है कि वो ‘निष्पक्ष रिपोर्टिंग’ के नाम पर कॉन्ग्रेस द्वारा दिए जाने वाले कंटेंट्स प्रकाशित कर रहे थे और सच्चाई से कोसों दूर थे।
Dividing society and spewing venom against others….Congress is a master at this. India is seeing Congress’ antics, while the nation is fighting COVID-19. I would urge Congress to go beyond ’Toolkit Models’ and do something constructive. #CongressToolkitExposed
इस ‘टूलकिट’ में जिस तरह आसानी से पूरी साजिश का ब्यौरा दिया गया है, उससे लगता नहीं कि कॉन्ग्रेस को किसी बात का भय था। वो आश्वस्त हैं कि मीडिया और प्रोपेगंडा पत्रकार उनकी तरफ से ही बैटिंग करेंगे। वहीं अंतरराष्ट्रीय मीडिया पहले से ही पश्चिमी जगह की विदेश नीतियों के हिसाब से लिखता रहा है। ये वही मीडिया है, जिसने झूठा नैरेटिव फैलाया था कि ईराक के पास मास डिस्ट्रक्शन वेपन हैं।
सीरिया में सिविल वॉर वाला झूठ फैला कर ये छिपा दिया गया कि किस तरह अमेरिका वहाँ असद सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए आतंकियों की ही मदद कर रहा था। आजकल तो अमेरिका का मीडिया वहाँ की डेमोक्रेट पार्टी का प्रोपेगंडा विंग बना हुआ है। डोनाल्ड ट्रम्प को हराने के लिए न जाने कितने प्रपंच रचे गए। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी भारत के आंतरिक मामलों में अमेरिकी हस्तक्षेप के पहले भी पक्षधर रहे हैं।
कॉन्ग्रेस के ‘डेटा एनालिटिक्स यूनिट’ के हेड प्रवीण चक्रवर्ती ने ‘द इकोनॉमिस्ट’ का एक झूठ फैलाया था कि भारत में कोरोना से 10 लाख लोग मर चुके हैं। जबकि भारत में कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या 2,78,814 है। साफ़ है कि मोदी सरकार के खिलाफ वैश्विक मीडिया और कॉन्ग्रेस पार्टी गठबंधन बना कर चल रहे हैं। जनता का विश्वास जीतने में असफल रही पार्टी अब विदेशी ताकतों के सहारे नरेंद्र मोदी की सरकार को बदनाम करने में लगी है।
महाराष्ट्र में दो अलग-अलग स्थानों से 14000 जिलेटिन की छड़ें, 4000 डेटोनेटर और अन्य विस्फोटक सामग्री जब्त की गई। राज्य के भिवंडी में सोमवार (मई 17, 2021) को विस्फोटकों की एक बड़ी खेप बरामद की गई है। यहाँ से जिलेटिन की छड़ें और डेटोनेटर जब्त किया गया। छापेमारी में, पुलिस ने जिलेटिन की 12,000 छड़ें और 3,008 डेटोनेटर जब्त किए। यह कार्रवाई ठाणे पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट-1 ने की। पुलिस ने कहा कि जिलेटिन की छड़ें 60 बक्से में पैक की गई थीं और प्रत्येक बॉक्स में 190 छड़ें थीं।
— Maha Vinash Aghadi ᴾᵃʳᵒᵈʸ (@MVAGovt) May 18, 2021
जानकारी के मुताबिक करिवली गाँव स्थित मित्तल उद्यम में विस्फोटकों का बड़ा भंडार रखे जाने की सूचना मिलने पर छापेमारी करने के लिए एक टीम गठित की गई। उसके बाद, पुलिस ने 53 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जिसकी पहचान गुरुनाथ काशीनाथ म्हात्रे के रूप में हुई है।
डीसीपी क्राइम लक्ष्मीकांत पाटिल ने कहा, “आरोपित पेशे से निर्माण सामग्री आपूर्तिकर्ता और खदान ठेकेदार है और कलवार, भिवंडी में रहता है। उसने दो कमरों में विस्फोटक रखा था। दोनों कमरे करिवली गाँव में महेश स्टोन चॉल के पास स्थित हैं और एक दूसरे से सटे हुए हैं।” उन्होंने बताया कि आरोपित को कोर्ट में पेश कर 22 मई तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
अधिकारी ने बताया कि उन्होंने जब्त विस्फोटकों को वाडा में एक सुरक्षित घर में रखा है। भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 286 आर/डब्ल्यू विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 की धारा 5 के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है। मामले में आगे की जाँच जारी है।
महाराष्ट्र के अमरावती से विस्फोटक बरामद
ग्रामीण पुलिस ने आतंकवाद विरोधी प्रकोष्ठ और स्थानीय अपराध शाखा इकाई के साथ सोमवार (मई 17, 2021) को महाराष्ट्र के अमरावती जिले के तिवासा तालुका के घोटा में स्थित एक फार्म गोदाम से 1300 जिलेटिन की छड़ें और 835 डेटोनेटर जब्त किए।
आरोपित युवराज उद्धव नखले (42) को अवैध रूप से विस्फोटक रखने के आरोप में हिरासत में लिया गया है। छापेमारी में जिलेटिन स्टिक, डेटोनेटर और विस्फोटक से लैस ट्रैक्टर समेत 4 लाख के विस्फोटक जब्त किए गए। घोटा गाँव के के रहने वाले आरोपित ने विस्फोटक की आपूर्ति के लिए ईश्वर मोहोद का नाम लिया है। अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
अंतर्राष्ट्रीय समाचार आउटलेट सीएनएन ने पाकिस्तानी स्तंभकार आदिल राजा को बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई आदिल राजा के ‘एक और हिटलर की जरूरत है’ वाले ट्वीट के बाद की गई है। उसके हिटलर समर्थक बयान ने परोक्ष रूप से एक और यहूदी नरसंहार का आह्वान किया, जिसके बाद अमेरिकी बहुराष्ट्रीय मीडिया संगठन ने उनके साथ संबंध तोड़ने का फैसला किया।
आदिल रजा द्वारा किया गया ट्वीट
सीएनएन ने बाद में एक बयान जारी कर विवादास्पद फ्रीलांसर के साथ संबंध तोड़ने की जानकारी दी। बयान में कहा गया है, “आदिल राजा की रिपोर्टिंग ने इस्लामाबाद से कुछ समाचार एकत्र करने के प्रयासों में योगदान दिया। हालाँकि, उनके इन घृणित बयानों को देखते हुए, वह किसी भी क्षमता में सीएनएन के साथ फिर से काम नहीं करेंगे।”
“As a freelancer, his reporting contributed to some newsgathering efforts from Islamabad. However, in light of these abhorrent statements, he will not be working with CNN again in any capacity.” pic.twitter.com/CfxQrSKyqY
बता दें कि आदिल राजा 2013 से सीएनएन के साथ फ्रीलांस कंट्रीब्यूटर के रूप में कार्यरत था। उसने रविवार (मई 16, 2021) दोपहर लगभग 12:45 बजे हिटलर समर्थक टिप्पणी को ट्वीट किया और काफी आलोचना होने के बाद इसे डिलीट कर दिया। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके ट्वीट को यहूदी विरोधी बताया और फ्रीलांसर को यहूदियों के खिलाफ नफरत फैलाने और परोक्ष रूप से उनके नरसंहार का आह्वान करने के लिए लताड़ा।
‘एक और हिटलर की जरूरत’ वाले ट्वीट के बाद से आदिल के अन्य ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इन्हीं में से एक में उसने कहा था कि वह फीफा विश्व कप के फाइनल में जर्मनी का समर्थन इसलिए कर रहा था, क्योंकि एडॉल्फ हिटलर जर्मन था और उसने ‘यहूदियों के साथ अच्छा किया’ था। बता दें कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हिटलर ने जर्मनी में यहूदियों का नरसंहार किया था।
यहीं नहीं आदिल के अंदर भारत के प्रति इतना जहर भरा है कि वह फिलिस्तीन के हालात की तुलना कश्मीर से करता है। 15 मई 2021 को उसने ट्वीट किया कि फिलिस्तीन में जैसा यहूदी (इजराइल) कर रहे हैं, वैसा ही ‘भारतीय हिंदू अधिकृत कश्मीर में कर रहे हैं’। यहाँ उसने कश्मीर को ‘अधिकृत कश्मीर’ कहा, जबकि ‘अधिकृत कश्मीर’ भारत का एक अभिन्न अंग है जो कि पाकिस्तान और चीन द्वारा अवैध रूप से कब्जा किए गए कश्मीर का हिस्सा है।
हाल ही में इजराइल और फिलिस्तीन के बीच हिंसक झड़प शुरू होने के बाद से ही पाकिस्तान में इजराइल के खिलाफ नफरत उफान मार रही है। आदिल से पहले पाकिस्तानी एक्ट्रेस वीना मलिक ने भी हिटलर को कोट करते हुए यहूदियों के नरसंहार की बात की थी।
कॉन्ग्रेस पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को लेकर सोशल मीडिया पर लोग अक्सर चुटकी लेते रहते हैं। उन पर मीम बना बनाकर उसे तमाम जगह शेयर किया जाता है। साथ ही अगर वह बोलने में कहीं कोई गलती कर दें तो भी यूजर्स उन्हें ट्रोल करने से पीछे नहीं हटते।
इन दिनों भी कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के नाम पर सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है। ये तस्वीर वैसे तो अमेरिकन सीरीज फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे से ली गई है। लेकिन सोशल मीडिया यूजर इसमें नजर आने वाले एक्टर को राहुल गाँधी बताकर सवाल कर रहे हैं।
दरअसल, ये सारा मामला एक भारतीय यूजर अनु के ट्वीट से शुरू हुआ। जिसने @meandwh नाम के ट्विटर अकाउंट से शेयर की गई एक्ट्रेस Dakota Johnson और एक्टर Jammie Dornan की तस्वीर पर कमेंट किया। अनु ने इस तस्वीर पर चुटकी लेते हुए लिखा, “मैंने यह तस्वीर अपनी माँ को दिखाई, जिसे देख उन्होंने पूछा कि राहुल गाँधी की गर्लफ्रेंड कब बन गई?”
I showed this to mom and she asked Rahul Gandhi ki girlfriend kab ban gayi ????? https://t.co/DZkegp8OhQ
इसके बाद इस तस्वीर पर राहुल गाँधी से जोड़कर ट्वीट किए जाने लगे। कई भारतीयों ने तस्वीर पर प्रतिक्रिया दी। एक ने लिखा, “राहुल गाँधी की भी गर्लफ्रेंड हैं लेकिन मेरी नही है।” सुपर्णा ने लिखा, “मुझे नहीं पता कि आखिर ये ईसाई राहुल गाँधी जैसा क्यों लग रहा है।”
बता दें कि तस्वीर में जिस जैमी को राहुल गाँधी बताकर कॉन्ग्रेस नेता की चुटकी ली जा रही है, वह आयरिश एक्टर हैं। उन्होंने फिफ्टी शेड्स सीरिज में काम किया है। जिसकी स्टोरी लाइन से लेकर साउंडट्रैक्स को रिलीज के समय काफी सराहा गया था।
उल्लेखनीय है कि राहुल गाँधी की तुलना जैमी से बहुत समय से होती रही है। समय-समय पर एक्टर की तस्वीर शेयर कर लोग उसे राहुल गाँधी की तस्वीर बता देते हैं। 2015 में भी जब फिल्म आई थी, तब लोगों ने मजाक उड़ाते हुए कहा था कि उन्हें लगता है फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे में राहुल गाँधी हैं।
केरल में वामपंथी नेता पिनराई विजयन मई 2016 में पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। इस साल हुए विधानसभा चुनावों में वे दोबारा जनादेश हासिल करने में कामयाब रहे। लेकिन इस बार उन्होंने अपनी पुरानी सरकार के सभी मंत्रियों को बदल दिया है।
वैसे टिकट बँटवारे में जिस तरह विजयन ने अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को तरजीह दी थी, उससे ही ही साफ़ हो गया था कि अब CPI(M) में ‘विजयन युग’ शुरू हो चुका है। लेकिन, सभी मंत्रियों को एक साथ किनारे किए जाने का अनुमान किसी ने नहीं लगाया था। नई कैबिनेट में विजयन ने अपने दामाद मुहम्मद रियास सहित 11 मंत्री बनाए हैं। सारे चेहरे नए हैं।
पिछले मंत्रिमंडल के एक भी सदस्य को मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने अबकी जगह नहीं दी है। उन्हें न सिर्फ मुख्यमंत्री, बल्कि पार्टी के संसदीय दल का नेता भी चुना गया। CPI(M) के प्रवक्ता एएन शमशीर ने कहा कि केरल का न्य मंत्रिमंडल युवाओं और वरिष्ठों के मेल से बना है। इससे पहले केरल की वामपंथी पार्टियों में वीएस अच्युतानंदन का सिक्का चला करता था। कोरोना से हुई तबाही, सोना तस्करी और सबरीमाला पर श्रद्धालुओं के आक्रोश के बावजूद विजयन सत्ता में वापसी करने में सफल रहे।
सबसे बड़ी बात तो ये है कि पिछली सरकार में केरल की स्वास्थ्य मंत्री रहीं केके शैलजा को भी इस बार कैबिनेट में जगह नहीं मिली है। मीडिया के वामपंथी वर्ग ने चुनाव के दौरान जम कर उनका इंटरव्यू लिया था और उनकी तारीफों के पुल बाँधे थे। यहाँ तक कि केंद्र सरकार को भी कोरोना से निपटने के ‘केरल मॉडल’ अपनाने की सलाह दी गई थी। हालाँकि कुछ दिनों बाद ही इस मॉडल का जनाजा निकल गया था। 3,62,313 सक्रिय संक्रमितों के साथ केरल इस मामले में तीसरे स्थान पर बना हुआ है।
निपाह वायरस से निपटने का श्रेय भी वामपंथी मीडिया ने केके शैलजा को ही दिया था। सवाल ये है कि अगर वो इतनी ही कार्यकुशल थीं तो उनकी ही पार्टी की सरकार उनकी सेवा क्यों नहीं लेना चाहती? CPI(M) ने ये कह कर बचाव किया है कि टीम को पूरी तरह बदल देना उसकी नीति रही है लेकिन विजयन के फिर से मुख्यमंत्री बनने को लेकर उसके पास कोई जवाब नहीं। केरल में अधिकतम 21 मंत्री हो सकते हैं।
Only the CM will be there (from the previous Kerala cabinet), rest 11 ministers are new. It is a blend of youngsters and the old: AN Shamseer, CPI(M) leader on the new Kerala cabinet that will be sworn in on May 20th pic.twitter.com/Uq7peoRJIW
77 वर्षीय मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने अपने कैबिनेट में दामाद पीए मुहम्मद रियास को भी जगह दी है, जो CPI(M) के यूथ विंग ‘डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। 44 वर्षीय रियास को वामपंथियों के गढ़ कोझिकोड के बेपोर से टिकट दिया गया था। इससे पहले 2009 में वो इसी इलाके से लोकसभा चुनाव हार चुके हैं। जून 15, 2020 को 44 वर्षीय मुहम्मद रियास ने विजयन की बेटी वीणा से शादी रचाई थी।
केरल की प्रमुख सत्ताधारी पार्टी ने कहा है कि किस मंत्री को कौन सा विभाग मिलेगा, ये मुख्यमंत्री ही तय करेंगे। कहा जा रहा है कि कैबिनेट के सभी नाम भी विजयन ने ही तय किए हैं। LDF गठबंधन में CPI व अन्य छोटे दल भी हैं, जिन्हें मंत्रिमंडल में शेयर मिला। इस चुनाव में वरिष्ठ वामपंथी नेताओं ईपी जयराजन, एके बालन, थॉमस इस्साक और जी सुधाकरन को किनारे कर उनका टिकट काट दिया गया था, जिससे विजयन के एकछत्र शासन का रास्ता साफ़ हुआ।
बेंगलुरु पुलिस, बेंगलुरु फायर डिपार्टमेंट, ड्रग कंट्रोलिंग डिपार्टमेंट और बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या के ऑफिस के प्रयासों से 12 मई को श्रेयस अस्पताल में संभावित ऑक्सीजन संकट टल गया। हालाँकि, सोनू सूद का चैरिटी फाउंडेशन इस नेक काम का श्रेय लेने के लिए खबरों में बना रहा। सभी मीडिया रिपोर्टों ने सोनू सूद और उनके फाउंडेशन को ऑक्सीजन की व्यवस्था करने का श्रेय दिया और इस दौरान कहीं भी तेजस्वी सूर्या के ऑफिस का जिक्र नहीं किया गया।
घटनाओं का कालक्रम
ऑपइंडिया ने श्रेयस अस्पताल के डॉ. समित हविनाल द्वारा लिखे गए पहले पत्र को एक्सेस किया, जिसमें 12 मई को हुई घटनाओं की शृंखला की व्याख्या की गई थी। कृपया ध्यान रखें कि हम किसी को भी अस्पताल के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था करने की पूरी प्रक्रिया में शामिल होने से बदनाम नहीं कर रहे हैं। हम में से हर कोई इस संकट से बचने के लिए दूसरों की मदद करने की पूरी कोशिश कर रहा है।
डॉ. समित ने कहा कि रात करीब 11 बजे उन्हें अस्पताल से फोन आया कि ड्यूरा सिलेंडर से लिक्विड ऑक्सीजन लीक हो रही है जिसके कारण अपर्याप्त प्रवाह हो रहा है। अस्पताल में दो ड्यूरा सिलेंडर हैं जिनका उपयोग वे निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए रोटेशन में करते हैं। उनका एक सिलेंडर उस समय रिफिलिंग के लिए भुरुका गैस में था, लेकिन वहाँ एक बड़ी कतार थी।
पत्र के पहले संस्करण में तेजस्वी सूर्या के नाम का उल्लेख
बैकअप सिलिंडर भी एक घंटे में खत्म होने वाला था और 19 मरीजों की जान दाँव पर लगी हुई थी। उन्होंने तुरंत श्रेयस अस्पताल के पीआरओ अरुण को फोन किया और सूद चैरिटी फाउंडेशन की मेघा चौधरी को फोन करके 5-6 सिलेंडर देने का अनुरोध किया। मेघा ने आगे फाउंडेशन की ओर से हशमत रजा को अनुरोध भेजा और भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या के सुमुख, ओएसडी सहित कई अधिकारियों को अलर्ट किया। तात्कालिकता को समझते हुए, सुमुख ने तुरंत डॉ. समित को बुलाया और उनसे सारी जानकारी ली।
सुमुख के पास सारी जानकारी लेने के बाद, उन्होंने जल्द से जल्द ऑक्सीजन प्राप्त करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। उन्होंने भुरुका गैस में कतार को दरकिनार कर जल्द से जल्द ड्यूरा सिलेंडर भरने की कोशिश की। सिलेंडर को रिफिल किया गया था, लेकिन अस्पताल पहुँचने में 60 मिनट और लगने थे। इस बीच महालक्ष्मी लेआउट इंस्पेक्टर कंथाराजू और उनकी टीम जिला दमकल अधिकारी जगदीश को लेकर अस्पताल पहुँच गई। एहतियात के तौर पर वे अपने साथ फायर एंबुलेंस लेकर गए थे। एसीपी रीना सुवर्णा भी टीम की मदद के लिए अस्पताल पहुँचीं।
पत्र के पहले संस्करण में तेजस्वी सूर्या के नाम का उल्लेख
ड्रग कंट्रोल ऑफिसर हरीश और सुरेश ने भी अस्पताल को फोन किया और तुरंत पास के अस्पताल से कुछ सिलेंडर की व्यवस्था की। जल्द ही ड्यूरा सिलेंडर अस्पताल पहुँच गया और विभिन्न विभागों की मदद से एक बड़ा संकट टल गया। डॉ. समित ने अपने पत्र में सोनू सूद फाउंडेशन, पुलिस विभाग, अग्निशमन विभाग, औषधि नियंत्रण विभाग और तेजस्वी सूर्या के ऑफिस से सुमुख को धन्यवाद दिया।
COVID संकट के लिए कार्रवाई में वॉर रूम
एमपी तेजस्वी सूर्या के कार्यालय में विशेष कर्तव्य अधिकारी के रूप में काम करने वाले सुमुख ने बताया कि सरकार में एक विभाग है जो इस तरह के किसी भी SOS कॉल को रिसीव करने के कुछ ही मिनटों के भीतर कार्य करता है। उन्होंने बातचीत के दौरान रोहित का उल्लेख किया, जो एक स्वयंसेवक है और कोविड -19 राहत प्रदान करने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रोहित को ही अस्पताल में किसी मरीज से सूचना मिली थी कि कुछ ऑक्सीजन का संकट चल रहा है। सुमुख ने तुरंत डॉ. समित को बुलाया और स्थिति का जायजा लिया और पुलिस विभाग, दमकल विभाग और ड्रग कंट्रोलर्स को तुरंत अस्पताल पहुँचने के लिए कहा।
उन्होंने पत्र में उल्लिखित गैस एजेंसी को भी बुलाया और कतार को बायपास कर दिया ताकि तत्काल आधार पर सिलेंडर को रिफिल किया जा सके। इस बीच, पुलिस ने कुछ सिलेंडरों के साथ अस्पताल की मदद की और श्रेयस अस्पताल में सुमुख द्वारा डॉक्टर को फोन करने के 90 मिनट के भीतर संभावित संकट टल गया।
सोनू सूद फाउंडेशन
ऑपइंडिया से बात करते हुए, सोनू सूद फाउंडेशन से जुड़े हशमत रज़ा ने दावा किया कि उनके सहयोगी मेघा को ऑक्सीजन संकट के बारे में पता चला और उन्हें अलर्ट किया। रज़ा ने अपनी टीम को जुटाया जो उनके पास मौजूद 5-6 सिलेंडरों के साथ अस्पताल पहुँची। उन्होंने गैस फिलिंग स्टेशन पर कतार को भी बायपास करवाया ताकि ड्यूरा सिलेंडर को रिफिल कर तत्काल अस्पताल पहुँचाया जा सके।
जब हमने उनसे पूछा कि वे गैस रिफिलिंग स्टेशन पर लंबी कतार को कैसे बायपास करने में कामयाब रहे, तो उन्होंने दावा किया कि उनके संगठन ने स्वास्थ्य मंत्री के पीआरओ को बुलाया था जिन्होंने इसे करवाया। पूरी बातचीत के दौरान उन्होंने एक बार भी सुमुख या तेजस्वी सूर्या का नाम नहीं लिया।
— Sood Charity Foundation (@SoodFoundation) May 14, 2021
यहाँ तक कि सूद चैरिटी फाउंडेशन की ओर से शेयर किए गए ट्वीट में भी तेजस्वी सूर्या का नाम नहीं लिया गया।
समित के मुताबिक घटना का कालक्रम
डॉ समित ने ऑपइंडिया से बात करते हुए घटनाओं के कालक्रम की पुष्टि की, जैसा कि उनके अस्पताल द्वारा पहले जारी पत्र में उल्लेख किया गया है। उन्होंने विशेष रूप से सुमुख के बारे में बात की, तेजस्वी के सूर्या के ओएसडी, पुलिस विभाग, अग्निशमन विभाग और ड्रग कंट्रोलर्स ने उन्हें समय पर ऑक्सीजन प्राप्त करने में मदद की। उन्होंने उल्लेख किया कि उन्होंने मदद के लिए सोनू सूद के फाउंडेशन को कॉल किया था, जिन्होंने संभवतः सूर्या के कार्यालय को अनुरोध भेजा, जिसके बाद सभी एक्शन में आ गए।
पत्र के दूसरे संस्करण से सूर्या का नाम गायब
हमें मिले पत्र के दूसरे संस्करण में तेजस्वी सूर्या के कार्यालय का नाम पूरी तरह से हटा दिया गया था। सुमुख का नाम था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि उन्होंने किस तरह से मदद की, क्योंकि उनके पद का कहीं भी उल्लेख नहीं किया गया था।
पत्र का अंतिम संस्करण, जहाँ तेजस्वी सूर्या के कार्यालय का नाम पूरी तरह से हटा दिया गया था
पत्र के इस संस्करण को बेंगलुरु शहर के पुलिस आयुक्त कमल पंत ने भी पोस्ट किया था, जिन्होंने लिखा था, “यह सब जीवन बचाने के बारे में है! @mhlayoutps, @acpjcnagar, सोनू सूद फाउंडेशन के पीआई श्री कंथाराजू और अन्य विभागों के अधिकारियों द्वारा त्वरित प्रतिक्रिया और समय पर एक्शन ने श्रेयस अस्पताल में लगभग 30-कोविड रोगियों की जान बचाई। जब 12 मई की रात को ऑक्सीजन रिसाव का पता चला तो वे अस्पताल पहुँचे और समय रहते आपातकालीन सिलेंडर की व्यवस्था की। हमारे #COVIDHeroes को प्रणाम। बहुत सराहना!”
They rushed to the hospital when an O2 leak was detected on the night of May 12 and arranged emergency cylinders in the nick of time. Kudos to our #COVIDHeroes. Greatly appreciate!? (2/2)
बेंगलुरु सिटी के नॉर्थ डिवीजन के पुलिस उपायुक्त धर्मेंद्र कुमार मीणा ने लिखा, “श्री कंथराज, पीआई महालक्ष्मी और टीम अन्य रिस्पॉन्डर्स के साथ मौके पर पहुँचे और श्रेयस में जीवन के लिए ऑक्सीजन रिसाव की स्थिति को कम करने के लिए @acpjcnagar की देखरेख में अस्पताल में तेजी से तकनीशियन और अतिरिक्त ऑक्सीजन सिलेंडर जुटाए। वेल डन टीम।”
Shri Kanthraj,PI Mahalaxmi nd team along with other responders risen to occasion and swiftly mobilised technician and spare oxygen cylinders to mitigate a life threatening O2 leak situation at Shreyas Hospital under supervision of @acpjcnagar.Well Done Team.@CPBlr@DgpKarnatakahttps://t.co/NnUA3KTQcPpic.twitter.com/RqjUSKms8Y
— Dharmender Kumar Meena, IPS (@DCPNorthBCP) May 13, 2021
सुमुख ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “यह संभव है कि सूद चैरिटी फाउंडेशन खुद को किसी राजनीतिक दल से नहीं जोड़ना चाहता था, इसलिए उन्होंने पत्र से सूर्या के कार्यालय का नाम हटा दिया। हालाँकि, सरकार के प्रयासों को बदनाम करना और किसी ऐसी चीज का श्रेय लेना सही नहीं है जिसमें आपकी भागीदारी लगभग न के बराबर थी।”
हाल ही में अभिनेता सोनू सूद के मददगार अवतार का एक और भांडा फूटा था। सोनू सूद ने ओडिशा के बरहामपुर के गंजम सिटी अस्पताल में एक मरीज के लिए बिस्तर की व्यवस्था करने का दावा किया जिस पर गंजम के कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट ने सोनू सूद के इस फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए ट्विटर पर प्रशासन के आधिकारिक अकाउंट के जरिए बताया कि जिस मरीज के लिए बेड अरेंज करने का दावा किया गया है वो मरीज स्टेबल कंडीशन में होम आइसोलेशन में है।
ऐसा संदेह किया जा रहा है कि सोनू सूद वास्तव में किसी की मदद किए बिना भी कोविड -19 रोगियों के लिए मदद की व्यवस्था करने के लिए क्रेडिट का झूठा दावा कर रहे थे। उन्होंने हाल ही में एक ट्विटर यूजर को प्लाज्मा की आपूर्ति करने के लिए क्रेडिट खाया था, जिसने एक मरीज के लिए उनसे मदद माँगी थी, लेकिन बाद में, ट्विटर यूजर ने खुद स्पष्ट किया कि उसके परिवार को ऐसी किसी व्यवस्था के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
पश्चिम बंगाल में नारदा केस में गिरफ्तार नेताओं की तबीयत जेल में बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें मदन मित्रा, सोवन चटर्जी और सुब्रत मुखर्जी शामिल हैं। इन्हें एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सोमवार (17 मई 2021) को चार नेताओं की टीएमसी ने इस केस में गिरफ्तारी की थी। जिन नेताओं की गिरफ्तारी की गई थी उनमें ममता बनर्जी की मौजूदा सरकार के मंत्री फिरहाद हाकिम और सुब्रत मुखर्जी शामिल हैं। सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक मदन मित्रा और पूर्व मेयर सोवन चटर्जी को भी गिरफ्तार किया गया था।
इनकी गिरफ्तारी के बाद से राज्य का राजनीतिक पारा गरम है। गिरफ्तारी की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद सीबीआई दफ्तर पहुँच गईं थी। वहॉं धरने पर बैठते हुए उन्होंने एजेंसी को खुद की गिरफ्तारी की चुनौती दी। TMC कार्यकर्ताओं ने जाँच एजेंसी के दफ्तर पर पत्थरबाजी और बैरिकेड तोड़कर भीतर दाखिल होने की कोशिश भी की थी।
West Bengal: Police brings TMC leader Subrata Mukherjee to SSKM Hospital, Kolkata.
CBI arrested Mukherjee and 3 others in connection with Narada case yesterday. pic.twitter.com/B8Vg7Nruh9
बाद में चारों नेताओं को सीबीआई की विशेष अदालत ने जमानत दे दी। लेकिन हाई कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। इसके बाद इन नेताओं को सोमवार की रात प्रेसिडेंसी जेल भेज दिया गया। जेल पहुँचने के कुछ घंटों के बाद ही सुब्रत मुखर्जी ने तबीयत खराब होने की शिकायत की, जिसके बाद उन्हें एसएसकेएम अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद मित्रा और चटर्जी को भी तबीयत खराब होने पर अस्पताल लाया गया।
इससे पहले हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व में धरने और ट्रायल कोर्ट परिसर में हजारों समर्थकों के साथ राज्य के कानून मंत्री की मौजूदगी को लेकर आपत्ति दर्ज की थी। हाई कोर्ट ने कहा कि अगर नेताओं को गिरफ्तार किए जाने के बाद इस तरह की घटनाएँ होती हैं तो लोगों का न्यायपालिका में विश्वास खत्म हो जाएगा।
इसके बाद कलकत्ता हाई कोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और जस्टिस अर्जित बनर्जी ने अगले आदेश तक गिरफ्तार नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा, “न्यायिक व्यवस्था में नागरिकों का विश्वास होना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये उनके लिए अंतिम विकल्प है। लोगों को ऐसा लग सकता है कि कानून-व्यवस्था की जगह भीड़तंत्र हावी है। खासकर ऐसे मामले में, जहाँ राज्य की मुख्यमंत्री CBI दफ्तर में भीड़ का नेतृत्व कर रही हों और कानून मंत्री अदालत के परिसर में। अगर आप कानून के राज़ में विश्वास रखते हैं तो ऐसी घटनाएँ नहीं होनी चाहिए।”
बिहार के गया जिले में तीन दलित युवकों के साथ बदसलूकी की घटना प्रकाश में आई है। पुलिस का कहना है कि एक ग्राम पंचायत में तीन दलित लड़कों पर बैटरी चोरी के इल्जाम में, उनके कपड़े उतार कर उन्हें मारा गया और पूरे गाँव भर में उनकी परेड करवाई गई।
हिंदुस्तान टाइम्स में 18 मई को प्रकाशित अविनाश कुमार की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने कहा कि रविवार (अप्रैल 16, 2021) को इस संबंध में वीडियो वायरल हुई थी। कथिततौर पर इसमें नजर आया था कि लड़कों से जबरदस्ती उठक बैठक करवाई गई, उनसे गाँव का गोल चक्कर लगवाया गया।
इस दौरान बाकी लोग सिर्फ मोबाइल पर उनकी फिल्म बनाते रहे। कोई उनकी मदद को आगे नहीं आया। बात बढ़ने पर शनिवार को इस संबंध में गाँव में तनाव का माहौल रहा। हालाँकि बाद में दोनों समुदायों के नेताओं से बात करके स्थित कंट्रोल कर ली गई।
The boys were allegedly made to do sit-ups, run around in circles, while some villagers filmed the humiliation on their mobile phones.
गया के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आदित्य कुमार ने बताया कि घटना की जाँच के लिए पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया है। इसके अलावा इस मामले में दुकान के मालिक मोहम्मद शेरू आलम, मोहम्मद ज़िन्नत, मोहम्मद तेज़ू, अमरजीत सिंह, मोहम्मद नासिर और मोहम्मद अख्तर को गिरफ्तार किया गया है। इनके ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 341, 342, 323, 504,506, 34 के अलावा आईटी एक्ट, एससी एसटी एक्ट, पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है।
गौरतलब है कि चोरी के इल्जाम में दलितों के साथ बर्बरता की एक तस्वीर पिछले साल राजस्थान से भी सामने आई थी। नागौर में 2 दलित भाइयों के साथ बर्बतापूर्ण तरीके से मारपीट करके उन्हें तड़पाने के लिए उनके प्राइवेट पार्ट्स में पेट्रोल डालकर स्क्रू ड्राइवर घुसाया गया था।
दोनों भाई बाइक सर्विसिंग करवाने गए थे। लेकिन वहाँ उन पर चोरी का इल्जाम लगाते हुए उनसे मारपीट की जाने लगी। इस घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। वीडियो में दिखा था कि उन्हें कितनी बुरी तरह मारा गया और पीटने के बाद जान से मारने की धमकी भी दी गई।
इजरायल और फिलिस्तीन के संघर्ष में जहाँ अधिकतर लोग आतंकवादियों के सफाई के लिए यहूदी मुल्क की प्रशंसा कर रहे हैं, वहीं मीडिया का एक वर्ग ऐसा है जो मान ही नहीं सकता है कि इस्लामी कट्टरता या आतंकवाद जैसी किसी चीज का अस्तित्व भी है और इसीलिए वो लगातार इजरायल को बदनाम करने में लगा हुआ है। ‘वाशिंगटन पोस्ट’ के एक लेख में इजरायल के नागरिकों की सुरक्षा करने वाले ‘आयरन डोम’ को इस हिंसा का कारण बताया गया है।
बता दें कि इजरायल का ‘आयरन डोम’ एक एरियल एंटी-मिसाइल सिस्टम है जो गाज़ा की तरफ से आने वाले रॉकेट हमलों की पहचान करता है और फिर उन्हें मार गिराया जाता है जिससे यहाँ के नागरिकों को नुकसान नहीं होता। पिछले एक दशक में इसने हमास के हजारों ऐसे रॉकेट्स को रोका है, जो इजरायल में तबाही मचा सकते थे। ‘वाशिंगटन पोस्ट’ का कहना है कि इस के कारण इजरायल समस्या के समाधान में ‘उत्तेजना’ नहीं दिखा रहा।
ये ‘आयरन डोम’ सिस्टम किसी चमत्कार से कम नहीं है, जो शॉर्ट-रेन्ज रॉकेट्स का काल है। ये हमास की तरफ से आने वाले 90% रॉकेट्स को ब्लॉक करता है। विशेषज्ञ इसे इजरायल का ‘इन्सुरेंस पॉलिसी’ भी बताते हैं। हमास एक बार में दर्जनों रॉकेट्स छोड़ता है, इस उम्मीद में की संख्या ज्यादा होने पर एकाध अपने लक्ष्य पर लग जाए। अमेरिका का ‘पेट्रियट सिस्टम’ भी तुलनकतमक रूप से इसके पीछे है।
WATCH as the Iron Dome Aerial Defense System intercepts rockets over southern Israel: pic.twitter.com/xUz3bMuTzz
क्या मीडिया का ये वर्ग चाहता है कि कोई देश अपनी सुरक्षा न करे और अपने लोगों को सिर्फ इसीलिए मरने के लिए छोड़ दे, क्योंकि हमला इस्लामी कट्टरपंथियों व आतंकियों की तरफ से किया जा रहा है? अपनी सुरक्षा की व्यवस्था करना भी अब पाप हो गया क्योंकि इससे ‘समाधान की उत्तेजना’ कम होती है? सोचिए, अगर ये तकनीक नहीं होती तो पिछले दो हफ़्तों से गाज़ा की तरफ से रॉकेट्स की जो बरसात की गई है उससे एक छोटे से देश में कितनी भीषण तबाही मचती!
‘ओपन यूनिवर्सिटी ऑफ इजरायल’ के प्रोफेसर और ‘राजनीतिक वैज्ञानिक’ यागिल लेवी द्वारा लिखे गए इस लेख में इस ‘आयरन डोम’ को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है, क्योंकि ये इजरायल को गाज़ा के हमलों से बचाव के अलावा जवाबी कार्रवाई के लिए ताकत प्रदान करता है। लेख में लिखा गया है कि इससे गाज़ा पर बमबारी का खर्च कम हो जाता है, इजरायल को नागरिकों के जानमाल की क्षति की चिंता नहीं रहती और गाज़ा समस्या का राजनीतिक समाधान नहीं निकल पाता।
लेख की भाषा पर गौर कीजिए, “इस संघर्ष से पहले तक पिछले एक दशक में इजरायल के मायर 18 नागरिक ही हमास के हमले में मारे गए हैं। इससे इजरायल पर एक घरेलू दबाव पैदा होता है कि वो गाज़ा के क्षेत्रों पर कब्ज़ा करे। हमास को उखाड़ फेंके। दक्षिणपंथी गुट की तरफ से ऐसा दबाव आता है। जब-जब हमास ने टनल का प्रयोग कर के इजरायल में घुसना चाहा, इजरायल ने जमीनी ऑपरेशन लॉन्च कर दिया।”
मीडिया संस्थान के कहने का मतलब ये है कि इजरायल को अपने लोगों को मरने के लिए छोड़ देना चाहिए और एकमात्र प्राथमिकता आतंकी संगठन हमास की माँगों को संतुष्ट करने को दिया जाना चाहिए। लेकिन, इस लेख में बड़ी चालाकी से इस बात की चर्चा तक नहीं की गई है कि ताज़ा संघर्ष हमास द्वारा रॉकेट्स छोड़ने के साथ शुरू हुआ। अगर हमास को समाधान चाहिए तो उसने हिंसा का रुख क्यों अख्तियार किया?
‘वाशिंगटन पोस्ट’ को इस बात से परेशानी है कि UN द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से इजरायल और ‘सावधान’ हो गया है। तोप, रॉकेट्स और ड्रोन्स के माध्यम से पश्चिमी देश भी अपने दुश्मनों पर दूर से हमले करते रहे हैं, फिर इजरायल ने क्या गलत किया? खुद बराक ओबामा ने राष्ट्रपति रहते ‘आयरन डोम’ के लिए 2014 में 225 मिलियन डॉलर (आज की तारीख़ में 1642.95 करोड़ रुपए) की फंडिंग दी थी। अमेरिका ने इस पर गर्व जताया था।
2014 के युद्ध के बाद ये इजरायल-फिलिस्तीन सीमा पर सबसे खतरनाक स्थिति है। ‘वाशिंगटन पोस्ट’ का कहना है कि इसने इजरायल को ‘सुरक्षा का झूठा एहसास’ दे रखा है। लेवी ये चर्चा करना भी नहीं भूले हैं कि ये हमेशा के लिए नहीं रहेगा और तकनीक की ये सफलता की जगह ‘राजनीतिक समाधान’ निकलना चाहिए। सवाल ये है कि निर्दोष नागरिकों की जान बचाने वाली तकनीक से किसी को क्यों कोई समस्या होनी चाहिए?
एक तो यहूदी पूरी दुनिया में काफी कम संख्या में बचे हुए हैं और सदियों से ‘Anti-Semitism’ का शिकार रहने, यूरोप/रोमन/इस्लामी ताकतों के हाथों नरसंहार झेलने और अपने मुल्क इजरायल के इस्लामी मुल्कों से घिरा होने के बावजूद अगर उन्होंने अपनी सुरक्षा के तगड़े इंतजाम कर के जानमाल की क्षति से बचने की व्यवस्था की है तो इसमें समस्याजनक क्या है? लिबरल गिरोह अब इस बात से भी परेशान है कि इजरायल अब खुद की सुरक्षा में भी इतना आक्रामक है।
ये वही लोग हैं, जो जम्मू कश्मीर में भी आतंकियों द्वारा आम नागरिकों की हत्या पर चुप्पी साध लेते हैं लेकिन जब भारतीय सेना आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करती है तो मानवाधिकार का बाग अलापने लगते हैं। इनकी चिरकाल की इच्छा ये रहती है कि कोई भी देश इस्लामी आतंकवाद से न तो अपनी सुरक्षा की व्यवस्था करे और न ही हमलों के प्रत्युत्तर में वार करे। तो क्या यहूदी ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाते हुए खुद का गला काट लें ताकि ‘वाशिंगटन पोस्ट’ जैसे संस्थान संतुष्ट हों?