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नहीं रहे पोस्टर फाड़ने वाले केआर रामास्वामी: जानिए कैसे मिला ‘ट्रैफिक’ उपनाम, जिंदगी पर क्यों बनी फिल्म

सामाजिक कार्यकर्ता और ट्रैफिक रामास्वामी के नाम से विख्यात केआर रामास्वामी का मंगलवार ( 4 मई 2021) को चेन्नई में निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे। कुछ दिनों पहले रामास्वामी को इलाज के लिए चेन्नई के राजीव गाँधी जनरल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई थी, लेकिन फेफड़ों में परेशानी का इलाज चल रहा था। डॉक्टरों के मुताबिक, रामास्वामी वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे और उन्हें दिल का दौरा पड़ने के बाद बचाया नहीं जा सका।

चेन्नई के इस प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता को राज्य में बड़े पैमाने पर पोस्टर संस्कृति के खिलाफ अभियान चलाने के लिए जाना जाता था। ट्रैफिक रामास्वामी को सड़क चौड़ीकरण, अतिक्रमण और यातायात उल्लंघन के खिलाफ मद्रास हाई कोर्ट में जनहित याचिकाएँ दायर करने के लिए भी जाना जाता था।

आम आदमी से जुड़े मुद्दों पर 500 से अधिक पीआईएल

1990 के दशक में वे चेन्नई शहर के मुख्य मार्गों पर यातायात को सुचारू करने के लिए वे घंटों खड़े रहते थे। इससे केआर रामास्वामी को ‘ट्रैफिक’ उपनाम मिला। रामास्वामी ट्रैफिक को नियमित करने के बाद जल्द ही सड़क पर अतिक्रमण और ट्रैफिक से जुड़े मुद्दों में सुधार की अपनी लड़ाई को अदालत में ले गए। सैकड़ों जनहित याचिकाएँ दायर कीं जिससे वे घर-घर में पहचाना जाने वाला नाम बन गए।

केआर रामास्वामी ने अपने जीवनकाल में 500 से अधिक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की। उन्हें तमिलनाडु में कई परिवर्तनों के लिए जिम्मेदार माना जाता है। 1998 में अपनी पहली जनहित याचिका उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट में एनएससी बोस रोड पर एक फ्लाईओवर के निर्माण के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए दायर की थी। 2002 में उन्होंने मोटराइज्ड थ्री व्हीलर मेक-शिफ्ट ऑटो-रिक्शा के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर की, जिसका इस्तेमाल मछली बेचने के लिए किया जाता था।

1 अप्रैल, 1934 को एक किसान परिवार में जन्मे रामास्वामी ने अपने जीवन के पहले 18 साल अपने परिवार की मदद करते हुए बिताए। 18 साल की उम्र में उन्होंने मद्रास के तत्कालीन मुख्यमंत्री सी राजगोपालाचारी के सहायक के रूप में काम करना शुरू कर किया। राजगोपालाचारी को रामास्वामी अपना रोल मॉडल मानते थे।

एक बार रामास्वामी ने कहा था, “राजाजी ने मुझे हमेशा गलत के खिलाफ सवाल करना सिखाया। उन्होंने यह भी कहा कि मुझे हमेशा उन लोगों की बात सुननी चाहिए जो मेरी आलोचना करते हैं। हम उनके जरिए अपनी गलतियाँ खोज सकते हैं। तब से मैंने उनकी वही सलाह मानी थी।”

जयललिता के खिलाफ चुनाव भी लड़े

रामास्वामी एक निडर कार्यकर्ता थे। उन्हें चेन्नई की सड़कों पर उन्हें अक्सर राजनेताओं, व्यापारियों और आम लोगों द्वारा लगाए गए बड़े-बड़े फ्लेक्स बोर्डों और होर्डिंग्स को फाड़ते हुए देखा जा सकता था। वह एक बार उपचुनावों में जयललिता के खिलाफ भी लड़े। रामास्वामी ने तब कहा था कि उनकी लड़ाई पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ नहीं है, बल्कि तमिलनाडु में भ्रष्टाचार के खिलाफ है। हालाँकि वे महज 4590 वोट हासिल कर चुनाव हार गए थे।

अपने बेहतरीन कामों की वजह से ट्रैफिक रामास्वामी की कहानी सिल्वर स्क्रीन पर भी नजर आई। 2018 में उनकी बॉयोपिक ‘ट्रैफिक रामास्वामी’ बनी, जिसका निर्देशन विकी ने किया और उनका किरदार एस चंद्रेशखर ने निभाया था।

बंगाल हिंसा के बीच ममता बनर्जी ने ली CM पद की शपथ: चुनाव हार कैसे बन गईं मुख्यमंत्री, शिबू सोरेन जैसा होगा हाल?

ऐसी मिसाल शायद ही मिले की कोई राजनीतिक दल चुनावों में पिछली बार से भी ज्यादा जोरदार बहुमत हासिल करे और उसका मुख्यमंत्री ही चुनाव हार जाए। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार ऐसा ही हुआ। खैर, नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी से पटखनी खाने के बावजूद ममता बनर्जी ने आज (मई 5, 2021) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

वे लगातार तीसरी बार सीएम बनी हैं। उन्होंने शपथ ऐसे वक्त में ली है जब बंगाल में राजनीतिक हिंसा चरम पर है। 2 मई को नतीजों में टीएमसी की जीत स्पष्ट होते ही विपक्ष खासकर बीजेपी समर्थकों, उनके घरों और दफ्तरों को निशाना बनाया गया। कई हत्या की भी खबर आ चुकी है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे 2 मई को घोषित किए गए थे। 292 सदस्यीय विधानसभा में TMC को 213 सीटों पर जीत हासिल हुई है। भाजपा की सीटें 2016 के 3 के मुकाबले बढ़कर 77 हो गई है। कॉन्ग्रेस और वामदलों का इस बार खाता भी नहीं खुला है। इतने जबर्दस्त जीत के बावजूद नंदीग्राम में ममता बनर्जी खुद 1622 वोटों के अंतर से चुनाव हार गईं।

ऐसे में एक सहज सवाल उठता है कि चुनाव हारने के बावजूद उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ कैसे ली? ध्यान रहे हम नैतिकता की नहीं, उन संवैधानिक प्रावधानों की बात कर रहे हैं, जिनके कारण उन्हें लगातार तीसरी बार सीएम पद की शपथ लेने का मौका मिला है।

क्या चुनाव में हारने के बाद ली जा सकती है सीएम या मंत्री पद की शपथ?

दरअसल, राज्य में मुख्यमंत्री या मंत्रियों की नियुक्ति को लेकर संविधान के आर्टिकल 164 में व्यवस्था दी गई है। इसके मुताबिक, हार के बाद भी कोई नेता मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकता है। उसके पास चुनाव लड़कर सदन की सदस्यता हासिल करने के लिएविधायक बनने के लिए 6 माह का समय रहता है। इसी कानून की धारा में व्यवस्था दी गई है कि राज्यपाल ही मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाएँगे और इसके बाद मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों का चयन करेंगे, फिर उनका शपथ ग्रहण होगा।

1971 में पहली बार सुप्रीम कोर्ट पहुँचा था ऐसा मामला

बता दें कि देश में इस तरह का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 1971 में एक केस सुप्रीम कोर्ट पहुँचा था। उस समय उत्तर प्रदेश में त्रिभुवन नारायण सिंह को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी। उस समय तक त्रिभुवन नारायण सिंह विधानसभा सदस्य नहीं थे। कॉन्ग्रेस ने तय किया था कि उनके लिए उपचुनाव करवाया जाएगा और जीतकर वे विधानसभा में आ जाएँगे। 

इस बीच त्रिभुवन नारायण सिंह के शपथ ग्रहण के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर हुई, जिसे खारिज कर दिया गया। तब हाई कोर्ट ने बताया कि संविधान के आर्टिकल 164 की धारा (1) के अनुसार, कोई भी शख्स छह माह तक विधानसभा का सदस्य बने बगैर मुख्यमंत्री या मंत्री बन सकता है। मामला सुप्रीम कोर्ट और फिर संवैधानिक बेंच के पास गया और वहाँ भी हाई कोर्ट का फैसला बरकरार रहा।

बाद में त्रिभुवन नारायण सिंह के लिए उपचुनाव हुए। बड़े-बड़े नेताओं का समर्थन मिला। लेकिन तभी इंदिरा ने अपनी ओर से राम कृष्ण द्विवेदी को उनके सामने प्रत्याशी के तौर पर उतार दिया और अंतत: मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके व्यक्ति को हारना पड़ा।

अब संविधान के इसी अनुच्छेद की तर्ज पर संभव है उपचुनाव करवाए जाएँ। जिसमें टीएमसी की पूरी कोशिश रहेगी की ममता बनर्जी को एक सीट से प्रत्याशी बनाकर जीत दिलवा दी जाए।

अगर इस बीच ऐसा नहीं होता तो इस संबंध में एक बार पंजाब मंत्री तेज प्रकाश की नियुक्ति पर कोर्ट ने बताया था कि अगर कोई मंत्री लगातार छह माह तक नियुक्त होने के बावजूद खुद को सदन के लिए निर्वाचित नहीं कर सका, तो उसका पद पर बने रहन असंवैधानिक, अनुचित, अलोकतांत्रिक और अमान्य है। कोर्ट ने यह भी साफ कहा था कि किसी सदन का सदस्य निर्वाचित हुए बगैर किसी व्यक्ति को बार-बार छह माह की अवधि बीतने के बाद मंत्री या अन्य पद नहीं दिए जा सकते। यह संविधान के अनुच्छेद 146 (4) की आत्मा के खिलाफ होगा और संविधान के साथ खिलवाड़ होगा।

इस तरह का एक प्रयास कुछ साल पहले बंगाल से सटे झारखंड में भी हुआ था। लेकिन अंतत: शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। असल में 27 अगस्त 2008 को मधु कोड़ा ने झारखंड के सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद झामुमो के तत्कालीन मुखिया शिबू सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लेकिन वे विधानसभा के सदस्य नहीं थे।

पद पर बने रहने के लिए उन्हें 6 महीने के भीतर सदन का सदस्य बनना था। लेकिन तमाड़ सीट पर हुए उपचुनाव में वे हार गए। आखिरकार शिबू सोरेन को सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा।

‘आरक्षण की सीमा 50% के पार नहीं जा सकती’: सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के मराठा आरक्षण कानून को रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट की एक संवैधानिक पीठ ने महाराष्ट्र में ‘मराठा आरक्षण’ पर रोक लगा दी है। देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा कि आरक्षण की सीमा का 50% पार करना असंवैधानिक है। संवैधानिक पीठ ने एकमत से सुनाए गए फैसले में कहा कि जैसे सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ों को आरक्षण दिया गया, उस तरह से मराठाओं के मामले में इसके पीछे कोई असाधारण तर्क नहीं है। जस्टिस अशोक भूषण ने फैसले को पढ़ कर सुनाया।

उन्होंने कहा कि ना तो गायकवाड़ कमीशन और न ही हाई कोर्ट ने ऐसी किसी स्थिति के बारे में बताया है, जहाँ आरक्षण की सीमा को 50% से अधिक कर मराठाओं को इसमें डाला जाए। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के SEBC एक्ट को रद्द करते हुए कहा कि मराठा समुदाय को सामाजिक एवं आर्थिक पिछड़े समूह में रखना बराबरी के सिद्धांत का उल्लंघन है। शिक्षा और नौकरी में मराठाओं को मिले आरक्षण को शीर्षतम अदालत ने रद्द कर दिया।

हालाँकिइससे 9 सितम्बर 2020 तक मराठा कोटा से PG मेडिकल में एडमिशन लेने वाले छात्रों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। महाराष्ट्र की सरकार ने 2018 में नौकरी और शिक्षा में मराठा आरक्षण को 16% कर दिया गया था। 2019 में बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मराठा आरक्षण को बरकरार रखा, लेकिन आरक्षण को घटा कर नौकरी में 13 प्रतिशत और उच्च शिक्षा में 12 प्रतिशत कर दिया। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएँ दायर हुई थीं। 10 दिन की लगातार सुनवाई के बाद 26 मार्च 2021 को 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने फैसले को रिजर्व रख लिया था।

इंदिरा साहनी केस में सुप्रीम कोर्ट की 9 सदस्यीय पीठ ने 50% आरक्षण की सीमा निर्धारित की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसकी फिर से समीक्षा करने की कोई ज़रूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसका कई मामलों में अनुसरण किया गया है और ये स्वीकार्य भी है, इसीलिए इसकी समीक्षा की ज़रूरत नहीं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 102वें संविधान संशोधन के खिलाफ दायर याचिका रद्द कर दी, जिसमें राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग का गठन हुआ था।

दलील दी गई थी कि वह संशोधन असंवैधानिक था। सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान केंद्र सरकार का पक्ष भी जाना। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र मराठा आरक्षण के समर्थन में है। सितम्बर 2020 में एक बड़ी पीठ को इस पर विचार करने को कहा गया था कि राज्यों को सामाजिक/आर्थिक पिछड़ों की पहचान कर के आरक्षण देने का अधिकार है या नहीं। इससे पहले ये मामला बॉम्बे हाईकोर्ट में गया था।

कोरोना से लड़ने के लिए RBI के ₹50000 करोड़, आम नागरिकों और कारोबारियों को मिलेगी मदद

‘रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI)’ के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार (मई 5, 2021) को कोरोना वायरस संक्रमण और इससे उपजे आर्थिक संकट को लेकर बात की। समाधान की दिशा में कुछ अहम घोषणाएँ भी की। RBI ने लोगों को 1 दिसंबर 2021 तक लिमिटेड KYC का प्रयोग करने की अनुमति दी है। छोटे वित्तीय बैंकों को 500 करोड़ रुपए तक की संपत्ति वाले छोटे माइक्रोफिनांस संस्थाओं को लोन देने की अनुमति भी दी गई है।

RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने महात्मा गाँधी को उद्धृत करते हुए कहा कि हमारा विश्वास एक लैंप की तरह होना चाहिए, जो हमेशा जलता रहता है और आसपास के वातावरण को प्रकाशमान रखता है। हालाँकि, उन्होंने माना कि पहली प्राथमिकता लोगों की जान बचानी ही है। उन्होंने आम लोगों, MSMEs और छोटे कारोबारों के लिए ‘लोन रेजोल्यूशन फ्रेमवर्क 2.0’ की घोषणा की। 25 करोड़ रुपए तक के लोन लेने वालों को नए रिस्ट्रक्चर प्लान दिए जाएँगे।

पिछले लोन के लिए मोरेटोरियम भी बढ़ाया जाएगा। साथ ही 31 मार्च 2022 तक 50,000 करोड़ रुपए की ऑन-टैप लिक्विडिटी रेपो रेट पर ओपन की गई है। इस योजना के तहत बैंक वैक्सीन निर्माताओं, मेडिकल व्यवस्थाओं, अस्पतालों और मरीजों की मदद कर सकेंगे। 30 मार्च 2021 तक का विदेशी मुद्रा भंडार 588 बिलियन डॉलर (43.4 लाख करोड़ रुपए) का है। RBI गवर्नर ने कहा कि इससे आत्मविश्वास मिलता है कि हम इस परिस्थिति से निपट सकते हैं।

RBI के गवर्नर शक्तिकांता दास का सम्बोधन

उन्होंने इस बात से संतुष्टि जताई कि अब स्थानीय आधार पर हो रहे लॉकडाउन से कारोबारों को आगे बढ़ने का वक़्त मिल रहा है। अगर मॉनसून सामान्य रहता है तो खाद्य पदार्थों की महँगाई भी काबू में रहेगी। उन्होंने माना कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर अनुमान नकारात्मक हैं और अनिश्चित है, जिससे इसके नीचे गिरने की आशंका है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि RBI कोरोना की दूसरी लहर में नागरिकों और व्यापारों के लिए सब कुछ करेगा।

केरल: कोरोना की दूसरी लहर के बीच जुटे 350 पादरी, 100 संक्रमित; 2 की मृत्यु-5 गंभीर

केरल के मुन्नार में पिछले महीने एक वार्षिक कार्यक्रम का हिस्सा बने चर्च ऑफ साउथ इंडिया (CSI) के 100 से ज्यादा पादरी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें से दो की मृत्यु हो चुकी है और 5 गंभीर अवस्था में हैं। संक्रमितों में CSI मॉडरेटर और साउथ केरल सूबे के बिशप रेव ए धर्माराज रसालम भी शामिल हैं। वे फिलहाल होम क्वारंटाइन में हैं। मीडिया रिपोर्ट के दौरान पिछले माह हुए रीट्रीट कार्यक्रम में कोविड नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गई थी।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, पादरियों और समुदाय सदस्यों की कॉन्फ्रेंस पिछले माह 13 अप्रैल से 17 अप्रैल के बीच सीएसआई क्राइस्ट चर्च में हुई थी। 350 पादरी अलग-अलग जगह से इस मीट को अटेंड करने आए थे। खबर में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि कार्यक्रम को टालने के अनुरोध के बावजूद बैठक हुई। साथ ही कहा गया था कि अगर कोई पादरी इसमें शामिल नहीं हुआ तो उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

इस मीट के लिए पादरियों को तिरुवनंतपुरम के एलएमएस चर्च से मुन्नार के लिए बस में ट्रैवल करना पड़ा। इसके बाद काज़ुकोड, वत्सपारा के CSI चर्च के 52 वर्षीय पादरी रेव बिजूमॉन बीमार हुए और पिछले गुरुवार उनकी मृत्यु हो गई। इसी तरह थिरुमाला के पास सीएसआई चर्च, पुन्नककुगल के 43 वर्षीय पादरी रेव शिने बी राज ने भी कोविड संक्रमण के कारण इस मंगलवार दम तोड़ दिया। कई अन्य पादरी भी डॉ. सोमरवेल सीएसआई मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अपना इलाज करवा रहे हैं, वहीं कुछ होम क्वारंटाइन में हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, CSI ट्रस्ट एसोसिएशन के सचिव और ज्वाइंट क्रिश्चियन काउंसिल के सदस्य जैकब मैथ्यू ने कहा कि सरकार और काउंसिल के निर्देशों को मीटिंग के दौरान पूरी तरह नकारा गया। वहीं केंद्रीय केरल चर्चों और कोच्चि चर्चों की मीट को कोविड के बढ़ते मामलों के कारण आगे बढ़ा दिया गया था। लेकिन साउथ केरल के सीएमआई ने बिना राज्य सरकार को जानकारी दिए ये मीट आयोजित की।

हालाँकि, सीएसआई अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर रहा है। सीएसआई के साउथ केरल सूबे के सचिव टीटी प्रवीण ने दावा किया कि संक्रमण कार्यक्रम के कारण नहीं फैला। इल्जाम लगाकर सिर्फ एक नेगेटिव अभियान चलाया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि रीट्रीट को कोविड नियमों के मद्देनजर और राज्य सरकार की अनुमति के साथ आयोजित किया गया। सचिव ने माना कि कुछ पादरी कोविड पॉजिटिव हो गए हैं, लेकिन उनके अनुसार ये सब रीट्रीट के चलते नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जिन दो पादरियों की मृत्यु हुई है उसका कारण उनकी बीमारी थी।

बता दें कि एक पादरी के रीट्रीट में शामिल होने के बाद वह कोविड पॉजिटिव पाए गए। उन्होंने बताया कि कम से कम 30 पादरी अस्पताल में भर्ती हैं। कोई एक्शन अभी तक ऑर्गेनाइजर के विरुद्ध नहीं लिया गया, जबकि ये रीट्रीट पिछले माह ही आयोजित हुआ था।

मालूम हो कि इस समय केरल कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों की सूची में दूसरे नंबर पर है। यहाँ 17 लाख से ज्यादा लोग कोविड पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें से 3.57 लाख एक्टिव केस हैं।

बंगाल में BSF जवानों के घर पर भी हमले, TMC के गुंडों ने की तोड़फोड़, आगजनी और मारपीट: ‘नेटवर्क 18’ के पत्रकार का दावा

पश्चिम बंगाल में रविवार (मई 2, 2021) को हुई मतगणना में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की जीत के साथ ही उसके गुंडे सक्रिय हो गए। राज्य भर में कई भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या हुई। उनके घर तोड़े गए और भाजपा के दफ्तरों को आग के हवाले कर दिया गया। अब ‘नेटवर्क 18 ग्रुप’ के प्रबंध संपादक ब्रजेश कुमार सिंह ने जानकारी दी है कि पश्चिम बंगाल में देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले BSF जवानों को भी नहीं बख्शा जा रहा है।

ब्रजेश ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया है कि पश्चिम बंगाल में सीमा रक्षकों के घरों पर भी हमले हो रहे हैं। उन्होंने अपने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि ममता बनर्जी की पार्टी TMC के कार्यकर्ताओं ने दो अलग-अलग जगहों पर BSF जवानों के घरों पर हमले किए हैं। उन्होंने बताया कि तोड़फोड़ व आगज़नी के साथ-साथ मारपीट की गई है। उन्होंने जवानों और उनके परिवार पर हुए हमले को शर्मनाक करार दिया।

ब्रजेश के अनुसार, पहला मामला जलपाईगुड़ी ज़िले के रानीरहाट इलाक़े का है, जहाँ छुट्टी पर आए BSF जवान कमल सेन के घर पर TMC से जुड़े गुंडों ने हमला बोला। साथ ही कमल और परिवार वालों के साथ मारपीट कर उन्हें घायल कर दिया। ब्रजेश की मानें तो कमल सेन के घर, ट्रैक्टर और बाइक में भी आग लगा दी गई। घायल जवान के सिलिगुड़ी के अस्पताल में भर्ती होने की बात कही जा रही है।

वरिष्ठ पत्रकार के मुताबिक, दूसरी घटना कूचबिहार की है। यहाँ सुशांत बर्मन नामक BSF जवान के घर पर हमला किया गया और लूट मचाई गई है। उन्होंने बताया है कि हमले की वजह से बर्मन के परिवार के सदस्य घर छोड़कर भागे हुए हैं। उनकी जान को ख़तरा है। जवान का भाई भाजपा समर्थक है और इसे ही हमले का कारण बताया जा रहा है। जानकारी दी गई है कि इस मामले में शिकायत भी दर्ज हुई है।

‘नेटवर्क 18 ग्रुप’ के मैनेजिंग एडिटर ब्रजेश कुमार सिंह ने दी BSF जवानों पर हमले की जानकारी

ब्रजेश कुमार सिंह ने ट्विटर पर लिखा, “ये दोनों ही घटनाएँ ये बताने के लिए काफी हैं कि पश्चिम बंगाल में हालात क्या हैं। अगर सीमा ऱक्षक खुद या उनके परिवार और मकान सुरक्षित नहीं हैं, तो आम आदमी की कौन कहे। जो लफ़ंगों, गुंडों और घुसपैठियों से देश को बचाते हैं, खुद उनके घर पर ये लफ़ंगे हमले कर रहे हैं। हद है ये सब।” हालाँकि, मीडिया के अन्य स्रोतों में ये खबर अभी नहीं आई है।

ब्रजेश ने बताया कि BSF के उच्चाधिकारियों ने दोनों ही मामलों में स्थानीय प्रशासन और पुलिस से कड़ी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। उन्होंने लिखा, “देखना ये होगा कि ममता बनर्जी के बंगाल में खुद सीमा रक्षकों के परिवारों को न्याय मिलेगा या नहीं, वो भी अगर हमले करने वाले उनकी खुद की पार्टी TMC के कार्यकर्ता हों।” बता दें कि पश्चिम बंगाल में हिंसा के खिलाफ आज बीजेपी धरना देगी। पार्टी के राष्ट्रीय जेपी नड्डा खुद बंगाल में कैंप कर रहे हैं।

ये भी खबर आई थी कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद उपजी राजनीतिक हिंसा के बाद सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं ने बंगाल छोड़ दिया है। बंगाल के पड़ोसी राज्य असम के मंत्री व भाजपा नेता हिमंता बिस्वा सरमा ने खुद इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था, ”एक दुखद घटनाक्रम में 300-400 बंगाल के भाजपा कार्यकर्ताओं और उनके परिवार के सदस्यों ने अत्याचार और हिंसा का सामना करने के बाद असम में धुबरी पार किया है। हम उन्हें आश्रय और भोजन दे रहे हैं।”

बंगाल हिंसा पर AltNews और बूम लाइव का खेला: TMC गुंडों के बचाव में पुराने माल का फैक्टचेक

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की जीत सुनिश्चित होने के बाद से ही वहाँ से हिंसा की खबरें आ रहीं हैं। पूरे राज्य से हिंसा की कई घटनाएँ सामने आई हैं। टीएमसी के गुंडों पर विपक्षी पार्टी खासकर भाजपा के कार्यकर्ताओं पर हमले करने, उनके घर में घुसकर उत्पात मचाने और दफ्तरों में तोड़फोड़ का आरोप है। 

सोशल मीडिया पर इन घटनाओं के तमाम वीडियो मौजूद हैं। लोग इन्हें शेयर कर कर देश का ध्यान बंगाल की स्थिति पर दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। टीएमसी को लेकर सवाल पूछा जा रहा है कि वह बंगाल में अपने विपक्ष के लिए इतनी हिंसक क्यों हो रही है।

इनमें कुछ वीडियो ऐसे भी हैं जो इतना शेयर नहीं हुई, लेकिन ऑल्ट न्यूज ( Alt News) और बूम लाइव (BoomLive) जैसे ‘फैक्टचेक’र TMC के बचाव के लिए तुरंत फैक्टचेक करने लगे। चंद वीडियोज को लेकर बता दिया गया कि पुराने वीडियो शेयर कर राज्य को बदनाम करने का प्रयास हो रहा है।

पुरानी वीडियो से बंगाल में हिंसा को छिपाने का प्रयास

हाल में ऑल्ट न्यूज ने एक आर्टिकल प्रकाशित किया। इसमें कहा गया कि एक ओ़डिशा की वीडियो है जहाँ भीड़ ने पुलिस पर हमला किया था, अब इस वीडियो को नतीजों के बाद हुई हिंसा के तौर पर शेयर किया जा रहा है। लेख में बताया गया कि ये वीडियो फर्जी जानकारी देने के लिए फैलाया गया और साथ ही आग में घी डालने के लिए।

ऑल्ट न्यूज लेख से लिया गया स्क्रीनशॉट

अब ये कहने की जरूरत नहीं है कि ऑल्ट न्यूज के लेख में पुरानी वीडियो का हवाला देकर लोगों को ये बताने की कोशिश की गई कि बंगाल में कोई हिंसा नहीं हो रही, बस रिपोर्ट्स में ये सब दिखाया जा रहा है। इस पुराने वीडियो के फैक्टचेक से लोगों के मन में संदेह उत्पन्न करने का प्रयास हुआ। साथ ही बंगाल की बदतर स्थिति को भी प्रोपेगेंडा दिखाने की कोशिश हुई। 

दिलचस्प बात यह है कि एक ओर जहाँ ऑल्ट न्यूज ने टीएमसी के गुंडों को बचाने के लिए पुराने वीडियो का फैक्टचेक किया, वहीं जो यूजर्स इनकी हरकतों से अच्छे से वाकिफ थे उन्होंने फैक्टचेक की मंशा पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए। कुछ यूजर्स तो ऐसे थे जो बंगाल हिंसा के मद्देनजर पहले ही ये बता चुके थे कि अगर ऑल्ट न्यूज किसी प्रकार का फैक्टचेक लेकर आया तो उन्हें हैरानी नहीं होगी।

दरअसल, ये ऑल्ट न्यूज का पुराना तरीका है जहाँ फैक्टचेक करके एक नैरेटिव तैयार किया जाता है या फिर सच्चाई से लोगों का ध्यान भटकाने का प्रयास होता है।

उदाहरण के लिए महामारी की शुरुआत में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें एक सब्जी विक्रेता थूक लगाकर सब्जी बेच रहा था। वीडियो किसी भी समय की रही हो, लेकिन सब्जी विक्रेता की हरकत घृणित थी। ऑल्ट न्यूज ने इस वीडियो तक का बचाव किया। इसके बाद ऐसी तमाम घटनाएँ दर्ज की गई जहाँ ऑल्ट न्यूज ने चुनिंदा वीडियोज के फैक्टचेक किए और इस बार भी उन्होंने यही काम किया।

ऑल्ट न्यूज के बाद एक अन्य वेबसाइट बूम लाइव भी ऐसी पुराने वीडियो का फैक्टचेक करती पाई गई। अपने लेख में बूम लाइव ने बताया कि पुराने और एडिटेड वीडियो को अभी का बताकर सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। जाहिर है कि ये तरीका भी केवल और केवल पाठकों को असली हिंसा से भ्रमित करने के लिए किया गया और बताने की कोशिश हुई कि बंगाल की स्थिति पर झूठ बताने के लिए पुराने वीडियो शेयर हो रहे हैं।

बूम लाइव पर शेयर हुआ फैक्ट चेक

ऑल्ट न्यूज और बूम लाइव जैसे प्रोपेगेंडा साइट्स के परोसे गए झूठ से दूर हकीकत यह है कि बंगाल में नतीजों के बाद से वहाँ हिंसा हो रही है। टीएमसी की जीत होते ही पार्टी के समर्थक जगह-जगह हिंसा कर रहे हैं। विपक्षी पार्टियों पर हमले बोल रहे हैं।

बता दें कि टीएमसी को विधानसभा चुनाव में 213 सीट पर जीत मिली है, जबकि 77 सीटों पर भाजपा की जीत हुई है। इसके बाद से हिंसा की घटनाएँ इतनी बढ़ गई हैं कि सुप्रीम कोर्ट में इसके लिए याचिका दायर हुई। कॉन्ग्रेस व वामपंथियों ने भी अपने टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हिंसा के आरोप लगाए हैं।

चीन से दुनिया को नया खतरा, 21 टन का रॉकेट आउट ऑफ कंट्रोल: आबादी वाले इलाके पर गिरा तो होगी भारी तबाही

पूरी दुनिया को कोरोना वायरस संक्रमण देने के बाद अब चीन से एक नया खतरा पैदा हो गया है। असल में उसका रॉकेट ‘लॉन्ग मार्च 5B’ नियंत्रण से बाहर हो गया। 21 टन वजनी यह रॉकेट यदि आबादी वाले इलाके पर गिरा तो भारी तबाही हो सकती है।

यह रॉकेट चीन के ‘स्पेस स्टेशन मॉड्यूल’ को लेकर गया था। यह 30 मीटर लंबा है। अब यह प्रति सेकेंड 7 किलोमीटर की रफ़्तार से दुनिया भर में घूम रहा है। न्यूयॉर्क, मैड्रिड, बीजिंग, चिली और न्यूजीलैंड के ऊपर से भी गुजरा है।

इससे पहले मई 2020 में इसी तरह का रॉकेट लॉन्च किया गया था, जिसके मलबे कई गाँवों में गिरे थे। आशंका जताई जा रही है कि ये रॉकेट भी कहीं भी गिर सकता है। ये सोमवार (मई 10, 2021) से पहले धरती पर गिर सकता है। फ़िलहाल ये हर 90 मिनट में पृथ्वी की कक्षा का चक्कर काट रहा है। ‘लॉन्ग मार्च 5B कोर’ का स्टेज SpaceX के ‘Falcon 9‘ के सेकेंड स्टेज से 7 गुना ज्यादा बड़ा है।

ये पहली बार नहीं है कि कोई नियंत्रण से बाहर रॉकेट धरती पर गिरने जा रहा हो, लेकिन ये सबसे ज्यादा खतरनाक हो सकता है। 1990 के बाद से 10 टन से ज्यादा वजन वाला ऐसा कुछ भी पृथ्वी पर नहीं गिरा है। मई 2020 में एक चीनी रॉकेट धरती पर गिरा था। इसके अधिकतर मलबे अटलांटिक महासागर में गिरे थे। आइवरी कोस्ट पर भी इसका कुछ हिस्सा गिरा था। अगर कुछ मिनट भी इधर-उधर होता तो ये न्यूयॉर्क में तबाही मचा सकता था।

इससे पहले चीन की स्पेस एजेंसी CNSA का ‘Tiangong-1‘ स्पेस स्टेशन से संपर्क टूट गया था, जिसके बाद वो 2017 में पृथ्वी पर गिर गया था। ये दक्षिणी प्रशांत महासागर के ऊपर जल कर गिरा। मौसम और हवाओं की वजह से ये कुछ ही देर में एक महादेश से दूसरे में जा सकते हैं, इसलिए वैज्ञानिकों के लिए इसके गिरने की जगह का अंदाज़ा लगाना कठिन है। हालाँकि कहा जा रहा है कि इसके किसी आबादी वाले इलाके में गिरने की आशंका कम ही है।

वैज्ञानिकों ने कहा है कि लोगों को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि पृथ्वी की कक्षा में आते ही इसके अधिकतर हिस्से जल गए होंगे। जो हिस्से बचे होंगे, वो है मेल्टिंग पॉइंट वाले मैटेरियल से बने होंगे लेकिन वो भी किसी वीरान इलाके या फिर महासागर में ही गिरेंगे। धरती का 75% हिस्सा पानी से भरा है और बाकी के 25% में भी अधिकतर इलाके वीरान पड़े हुए हैं, इसलिए लोगों को इससे नुकसान होने का खतरा बेहद ही कम है।

इसके मलबे को CZ-5B नाम दिया गया है। चूँकि ये पृथ्वी की धुरी की ओर 41 डिग्री से झुका हुआ है, इसलिए इसके 41N और 41S लैटीट्यूड में गिरने की आशंका है। इससे सबसे खतरनाक स्थिति में स्पेन, इटली या ग्रीस पर असर पड़ सकता है। अंतरिक्ष में अमेरिका को टक्कर देने के लिए चीन खुद का स्पेस स्टेशन बना रहा है। पश्चिमी स्पेस एजेंसियों ने रॉकेट के गिरने को चीन की नज़रअंदाज़ी का परिणाम बताया है।

क्या कहता है सिरम इंस्टिट्यूट द्वारा ब्रिटेन में बड़े निवेश का ऐलान? PM मोदी के साथ वर्चूअल समिट में बोरिस जॉनसन ने की घोषणा

अदार पूनावाला की कम्पनी सिरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ब्रिटेन में करीब 2400 करोड़ रूपए का निवेश करने वाली है। एक रिपोर्ट के अनुसार कंपनी यह निवेश वैक्सीन सम्बंधित रीसर्च और क्लीनिकल ट्रायल की सुविधाएँ बनाने में करने जा रही है पर भविष्य में वैक्सीन उत्पादन पर भी विचार कर सकती है।

जैसा कि ज्ञात है, पुणे स्थिति सिरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया विश्व की सबसे बड़ी वैक्सीन उत्पादक कंपनी है और ऐस्ट्रा जेनेका के साथ मिलकर कोविशिल्ड नामक वैक्सीन बना रही है जिसका इस्तेमाल भारत में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए होने वाले टीकाकरण में हो रहा है। कम्पनी भारत में ही नहीं बल्कि विश्व भर में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए होने वाले टीकाकरण में प्रमुख भूमिका निभा रही है। भारत में कम्पनी की वर्तमान उत्पादन क्षमता 7 करोड़ डोज प्रति माह की है और इस वर्ष की जुलाई तक यह क्षमता बढ़कर 10 करोड़ डोज प्रति माह हो जाएगी।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के कार्यालय से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि निवेश की इस योजना के तहत कंपनी ब्रिटेन में एक सेल्स ऑफिस, वैक्सीन पर अनुसंधान और क्लीनिकल ट्रायल के लिए सुविधाएँ तैयार करेगी साथ ही ब्रिटेन में सिंगल डोज वाली एक नेजल वैक्सीन के प्रथम चरण का क्लिनिकल ट्रायल भी शुरू करने जा रही है। नेजल वैक्सीन आम नेजल ड्राप की तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा। विज्ञप्ति में यह भी बताया गया कि सीरम इंस्टिट्यूट का यह निवेश भारत और ब्रिटेन के बीच एक वृहद व्यापार समझौते का हिस्सा है और इस निवेश से लगभग साढ़े छ हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री जॉनसन के बीच आज मंगलवार 4 मई को होने वाली वर्चुअल वार्ता के पहले यह घोषणा भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार समझौते के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्रेक्सिट से निकलने के बाद ब्रिटेन भारत को अपने उत्पादों के लिए एक बड़ा बाजार मानता है। यह बात अलग है कि भारत खुद अब मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी योजनाओं के तहत अपनी जरूरतों के लिए उत्पादन करने के साथ ही दुनियाँ के लिए उत्पादन का महत्वपूर्ण केंद्र बनने की आकांक्षा रखता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता कितना वृहद हो सकेगा, यह देखने वाली बात होगी।

सिरम इन्स्टिटूट द्वारा निवेश की इस घोषणा को भारत में एक अलग नज़रिए से देखे जाने के अनुमान भी लग रहे हैं पर ब्रिटेन के एक अख़बार को दिए अपने इंटर्व्यू में पूनावाला ने बताया कि वे वहाँ अपने निवेशकों और शेयर धारकों से मिलने गए हैं। अनुमान के पीछे शायद एक कारण यह भी था कि उसी इंटर्व्यू में उन्होंने उन्हें मिलने वाली धमकी की चर्चा करते हुए ब्रिटिश अख़बार को बताया कि उनसे जो कहा गया, उस बात को धमकी कहना उसे कम करके आँकने जैसा होगा। इन अनुमानों पर अब विराम लग जाना चाहिए क्योंकि सिरम इंस्टिट्यूट के साथ और भारतीय कम्पनियों ने भी ब्रिटेन में निवेश की घोषणा की हैं और ये घोषणाएँ भारत-ब्रिटेन के बीच एक बड़े व्यापार समझौते का हिस्सा हैं जिनमें लगभग बीस भारतीय कंपनियाँ ब्रिटेन में आईटी, बायोटेक और फ़ार्मा जैसे क्षेत्रों में निवेश करेंगी।

ये घोषणाएँ भारत और ब्रिटेन के बीच मज़बूत होते व्यापार सम्बंधों का सबूत हैं और उस समय हुई हैं जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के बीच एक वर्चूअल समिट होने जा रही है। भारतीय कंपनियों द्वारा ब्रिटेन में निवेश भारत के उद्योग जगत की विकसित देशों में विश्वसनीयता और तकनीकी क्षमता का सबूत भी हैं।   

बंगाल हिंसा के कारण सैकड़ों BJP वर्कर घर छोड़ भागे असम, हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा- हम कर रहे इंतजाम

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद उपजी राजनीतिक हिंसा के बाद सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं ने बंगाल छोड़ दिया है। बंगाल के पड़ोसी राज्य असम के मंत्री व भाजपा नेता हिमंता बिस्वा सरमा ने खुद इसकी जानकारी दी है।

उन्होंने मंगलवार को (4 मई 2021) को ट्वीट किया,”एक दुखद घटनाक्रम में 300-400 बंगाल के भाजपा कार्यकर्ताओं और उनके परिवार के सदस्यों ने अत्याचार और हिंसा का सामना करने के बाद असम में धुबरी पार किया है। हम उन्हें आश्रय और भोजन दे रहे हैं।” उन्होंने ममता बनर्जी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि दीदी को लोकतंत्र के इस कुरूप नृत्य को रोकना होगा! बंगाल बेहतर का हकदार है।

मालूम हो कि 2 मई 2021 को तृणमूल कॉन्ग्रेस ने राज्य में बहुमत लेकर दोबारा सत्ता वापसी की, वहीं भाजपा ने 77 सीटें जीतीं। इस दौरान ममता बनर्जी सुवेंदु अधिकारी से हार गईं। इसी के बाद से वहाँ लगातार भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले होने लगे। किसी को बेरहमी से प्रताड़ित किया गया, तो किसी की हत्या कर दी गई।

हत्या, हिंसा, आगजनी का आरोप टीएमसी के गुंडों पर लगा है। रविवार (मई 2, 2021) को अभिजीत सरकार नामक एक भाजपा कार्यकर्ता ने TMC के गुंडों की हरकतों के बारे में बताया। उसके कुछ ही देर बाद उनकी हत्या कर दी गई।

अभिजीत सरकार ने फेसबुक लाइव के माध्यम से अपनी बात रखी थी। उन्हें पता भी नहीं था कि फेसबुक पर लाइव कैसे आते हैं, लेकिन उन्होंने किसी तरह वीडियो बनाया और बताया कि TMC के गुंडे लगातार बमबारी कर रहे थे और उन्होंने उनके घर और दफ्तर को तहस-नहस कर डाला। उन्होंने कहा कि उनकी एक ही गलती है कि वे भाजपा कार्यकर्ता हैं।

हालाँकि, ऐसी घटनाओं के बावजूद तृणमूल कॉन्ग्रेस की जीत का कई लोगों ने महिमामंडन किया गया। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग व बॉलीवुड अभिनेत्री गुल पनाग के पिता ने टीएमसी की जीत पर लिखा, “एक तिरस्कृत महिला का गुस्सा नरक के प्रकोप जैसा होता है (Hell hath no fury like a woman scorned)।” इसको लेकर सोशल मीडिया पर नेटीजन्स ने उन्हें जमकर लताड़ा।  

बता दें कि पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा के मद्देनजर आज (मई 4, 2021) भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा (जेपी नड्डा) ने कोलकाता पहुँचकर तृणमूल कॉन्ग्रेस को चेतावनी देते हुए कहा कि वह लोकतांत्रिक लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार है।

नड्डा ने कहा, “हम इस विचाराधारा की लड़ाई और टीएमसी की गतिविधियाँ जो असहिष्णुता से भरी हैं, उसके खिलाफ लड़ने को प्रतिबद्ध हैं। हम लोकतांत्रिक तरीके से लड़ने को तैयार हैं। मैं अब साउथ परगना 24 जाऊँगा और चुनाव परिणाम आने के कुछ ही घंटों बाद मारे गए पार्टी कार्यकर्ताओं के घरों का दौरा करूँगा।”