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‘Help India Breath’- बार-बार बदलता IMANA का कैम्पेन, हिजबुल मुजाहिद्दीन से संबंध: जानें कैसे ठगी के शिकार हुए लोग

भारत Covid-19 की दूसरी लहर से जूझ रहा है। संक्रमितों में अचानक हुई वृद्धि ने देश की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को झकझोर दिया है। अस्पताल में बेड, ऑक्सीजन और दवाओं की कमी के कारण समस्या उत्पन्न हो रही है। इस संकट के समय में कई संगठनों ने भारत की मदद के लिए कदम आगे बढ़ाया है।

ऐसे कई संगठन हैं जो जरूरत के समय में वास्तव में मदद करने के लिए आगे आ रहे हैं लेकिन कई ऐसे कई ऐसे संगठन भी हैं जो Covid-19 संक्रमण के नाम पर धोखाधड़ी कर रहे हैं। इस तरह के संगठन आम लोगों को गुमराह कर रहे हैं रहे हैं और Covid-19 राहत कार्य के नाम पर धोखाधड़ी कर रहे हैं। इसी तरह का एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) है जो अमेरिका में स्थित है। हम बात कर रहे हैं इस्लामिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (IMANA) केयर की।

IMANA का इंस्टाग्राम पेज

IMANA ने कुछ दिन पहले रातोंरात भारत में लोकप्रियता हासिल कर ली। कहा जा रहा है कि यह संगठन इंस्टाग्राम पर पेड विज्ञापन चलाकर और यहाँ तक ​​कि अपने पोस्ट को साझा करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इंफ्लुएंसर्स को भुगतान भी कर रहे हैं। ऐसा करके देश के युवाओं को निशाना बना जा रहा है। बदले में भारतीय युवा एनजीओ के फंड इकट्ठा करने वाले अभियान ‘Help India Breath’ के लिए बिना सोचे-समझे दान कर रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि IMANA एक ऐसा एनजीओ है जो अकेले मुस्लिम समाज की बेहतरी के लिए काम करता है। संगठन ने अपने परिचय में स्पष्ट रूप से लिखा है “यह उत्तरी अमेरिका में अमेरिकी-मुस्लिम स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए एक प्रमुख संसाधन नेटवर्क है।“ यह बताता है कि इसका उद्देश्य अपने मुस्लिम रोगियों की सेवा करना ही है।

इस अमेरिकी एनजीओ ने ‘Help India Breath’ नामक एक कैम्पेन की शुरुआत की जो Covid-19 के संक्रमण के संकट से भारत की लड़ाई में मदद करेगा। थोड़े समय के भीतर ही IMANA ने कैम्पेन के जरिए करोड़ों की धनराशि एकत्र कर ली।

IMANA का कैम्पेन पेज

पहले तो इस अमेरिकी एनजीओ के इरादे बेहद नेक लग रहे थे। लेकिन कुछ ही समय के भीतर सोशल मीडिया यूजर्स ने इस एनजीओ की वास्तविकता और उसके कैम्पेन पर सवाल उठाना शुरू कर दिया।

एनजीओ और उसके बदलते कैम्पेन :

IMANA को एक बार नहीं बल्कि तीन बार इंस्टाग्राम पर अपने कैम्पेन को बदलते हुए पकड़ा गया है। एक सोशल मीडिया यूजर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार एनजीओ ने शुरुआत में कुल 1.8 करोड़ रुपए की राशि दान में इकट्ठा करने का लक्ष्य रखा जिसे उसी दिन बढ़ाकर 3 करोड़ रुपए और बाद में 5.6 करोड़ रुपए कर दिया गया था।

दिलचस्प बात यह है कि हर बार कैम्पेन में लक्ष्य हासिल करने के बाद संगठन चुपचाप अपने लक्ष्य को बढ़ा देता। यह अपने आप में काफी संदिग्ध है क्योंकि आम तौर पर सभी कैम्पेन की विशिष्ट समय सीमा होती है और वो पूर्व निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के बाद समाप्त हो जाते हैं।

Help India Breath और हिजबुल मुजाहिद्दीन से उसके संबंध :

IMANA ने अपनी अधिकारिक वेबसाइट पर उल्लेख किया है उसका संबंध इस्लामिक सोसाइटी ऑफ नॉर्दर्न अमेरिका (ISNA) नाम के एक अन्य NGO के साथ है।

IMANA का About Us पेज

IMANA ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर कहा गया है कि IMANA को पहले MSA की एक शाखा के रूप में स्थापित किया गया है जो बाद में ISNA के रूप में विकसित हुई। दिलचस्प बात यह है कि ISNA पर जम्मू-कश्मीर में इस्लामिक आतंकवादी समूहों को फंडिंग करने का आरोप है।

2017 की इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार Canadian Revenue Agency (CRA) ने 2011 में NGO का ऑडिट शुरू किया था। CRA ने हिजबुल मुजाहिद्दीन से संबंध होने और जम्मू-कश्मीर में इस्लामी आतंकवादी समूहों को फंडिंग करने के आरोप में ISNA का चैरिटी स्टेटस रद्द कर दिया था।

ISNA को लिखे एक पत्र में कनाडाई अधिकारियों ने लिखा था कि उन्होंने ISNA और जमात-ए-इस्लामी के बीच संबंधों को उजागर किया है जो कि एक पाकिस्तानी इस्लामिक कट्टरपंथी समूह है और हिजबुल मुजाहिद्दीन का पैरेंट ऑर्गनाइजेशन है।

ऑडिट के अनुसार, CRA ने पाया कि टोरंटो में एक जामी मस्जिद फंड इकट्ठा करने में शामिल थी जिसके लिए उसने ISNA इस्लामिक सेवा की टैक्स रसीदें जारी की थीं। इस फंड को तब ISNA डेवलपमेंट फाउंडेशन के माध्यम से रिलीफ ऑर्गनाइजेशन ऑफ कश्मीरी मुस्लिम्स (ROKM) को भेजा गया। CRA के अनुसार ROKM जमात-ए-इस्लामी की धर्मार्थ शाखा है जो हिजबुल मुजाहिद्दीन का पैरेंट ऑर्गनाइजेशन है।

CRA ने तब कहा था, “हमारे रिसर्च से यह बताते हैं कि ROKM, जमात-ए-इस्लामी की एक धर्मार्थ शाखा है जो जम्मू-कश्मीर में अपनी सशस्त्र शाखा हिजबुल मुजाहिद्दीन की गतिविधियों के माध्यम से भारत के शासन को चुनौती देता है।“ CRA ने अंदेशा जताया कि ROKM के द्वारा इकट्ठा किया गया फंड जमात-ए-इस्लामी और उसकी सशस्त्र शाखा हिजबुल मुजाहिद्दीन के कट्टरवादी और राजनैतिक उद्देश्यों की पूर्ति करता है।

इन तथ्यों से यह पता चलता है कि भारतीयों को ठगा गया और उनके द्वारा इस इस्लामिक एनजीओ को दिया गया दान मुख्यतः अमेरिका में मुस्लिमों के लिए उपयोग में लाया जाएगा।

‘रोहित सरदाना को दिया गया इंजेक्शन…’ : #justiceforrohitsardana पर BJP नेताओं सहित लोगों ने उठाई जाँच की माँग

आजतक के पत्रकार रोहित सरदाना के निधन के एक दिन बाद ट्विटर पर उनकी मृत्यु से आहत लोगों ने पूरे मामले में निष्पक्ष जाँच की माँग उठाई है। ट्विटर पर हैशटैग #justiceforrohitsardana चल रहा है। इस मामले में, ट्वीट कर कई लोगों का पूछना है कि आखिर सरदाना को सिर्फ़ कोविड के हल्के लक्षण थे तब हार्ट अटैक कैसे आ गया।

भाजपा प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने ट्वीट किया, “रोहित सरदाना भाई को वो इंजेक्शन लगाया गया जो उनको सूट नहीं होता था, इलाज के वक्त कोई सीनियर भी नहीं था। ये लापरवाही है या कुछ और इसकी जाँच होनी चाहिए।”

Rohit Sardana
तजिन्द्र पाल सिंह बग्गा के ट्वीट कास्क्रीनशॉट

भाजपा नेता व डॉक्टर ऋचा राजपूत ने लिखा, “रोहित जैसे, मानसिक और शारीरिक तौर पर स्वस्थ व्यक्ति थे, को कोरोना के हल्के लक्षण थे। उन्हें कभी हार्ट अटैक नहीं आया था और न ही कोई दिल संबंधी बीमारी थी। वह सुपरस्पेशेलिटी अस्पताल के आईसीयू में कुछ घंटों में खत्म हो गए। ये सही नहीं है।”

Rohit Sardana
ऋचा राजपूत के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

अंकित जैन ने लिखा, “रोहित भैया राष्ट्र की अमानत थे। उन्हें दिया गया हर ट्रीटमेंट पब्लिक होना चाहिए। इस पूरे प्रकरण में कुछ चीजें बहुत संदेहास्पद हैं।”

Rohit Sardana
अंकित जैन के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

भाजपा सांसद संजू देवी ने मामले में उच्च स्तरीय जाँच की माँग की। उन्होंने लिखा, “मैं रोहित सरदाना की मृत्यु में स्वास्थ्य लापरवाही के लिए मेट्रो अस्पताल के ख़िलाफ उच्च स्तरीय जाँच की माँग उठाती हूँ।”

संजू देवी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

वकील गौरव गोएल ने कहा, “जाँच मेडिकल लापरवाही को उजागर करेगी।”

गौरव गोएल के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

एक अन्य यूजर ने योगी आदित्यनाथ से मामले में डीजी के नेतृत्व में एसआईटी गठित करवाकर रोहित सरदाना की मृत्यु पर जाँच करवाने की माँग उठाई। साथ ही जरूरत पड़ने पर सीबीआई माँग करने की भी अपील की।

तनमय के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

कोरोना मरीज को हार्ट अटैक आने से मरने की संभावना अधिक: रिसर्च

रोहित सरदाना की मृत्यु मामले में संभवत: कोई अस्पताल की लापरवाही रही हो, लेकिन इस बात को भी नहीं नकारा जा सकता है कि कोरोना संक्रमण में मरीज की मृत्यु हार्ट अटैक से होने के चांस बहुत होते हैं।

यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च पेपर के मुताबिक, जिन लोगों को कोरोना नहीं हुआ उनकी तुलना में कोरोना संक्रमितों की मौत ज्यादातर हार्ट अटैक से होती है। इसमें डॉ पेदराम के हवाले से इसमें लिखा है, “हमारी स्टडी दिखाती है कि हार्ट अटैक और कोविड-19 बहुत घातक कॉम्बिनेशन हैं। कोरोना संक्रमित को बहुत सजगता से मॉनिटर किया जाना चाहिए और ऐसे कदम उठाने चाहिए कि उसे हार्ट अटैक न आए, हाई रिस्क मरीजों को लगातार देखरेख में रखा जाना चाहिए।”

एक आर्टिकल हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट पर भी पब्लिश है। इसमें लिखा है कि कोरोना संक्रमण कई तरह से हार्ट को डैमेज करता है। जैसे वायरस सीधे हृदय की माँसपेशियों पर आक्रमण या वहाँ सूजन कर सकता है, और यह ऑक्सीजन की आपूर्ति और माँग के बीच संतुलन को बाधित करके अप्रत्यक्ष रूप से हृदय को नुकसान पहुँचा सकता है।

ET ने फैलाया झूठ- चेतावनी मिलने के बाद कोरोना की दूसरी लहर को केंद्र ने किया नजरअंदाज: IIT प्रोफेसर ने खोली पोल

IIT हैदराबाद के प्रोफेसर एम विद्यासागर ने शुक्रवार (अप्रैल 30, 2021) को इकोनॉमिक टाइम्स (ET) को उनका गलत बयान छापने पर जमकर लताड़ा। ET ने उनके हवाले से अपनी खबर में लिखा था कि केंद्र सरकार जानबूझकर कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर को इग्नोर करती रही।

इस आर्टिकल का शीर्षक, “Panel red-flagged onset of 2nd wave in March 1st week” है। इसे ईटी में शुक्रवार को प्रकाशित किया गया। इसमें नेशनल कोरोना वायरस सुपरमॉडल कमेटी प्रोफेसर एम विद्यासागर को कोट करते हुए कहा गया, “हमने मार्च के पहले सप्ताह में इस बात पर प्रकाश डाला था कि कोरोना की दूसरी लहर रास्ते में है और सरकार को तैयार रहना चाहिए। वह सरकार के लोगों के लिए चेतावनी थी।”

इकोनॉमिक टाइम्स से लिया गया स्क्रीनशॉट

इसमें आगे लिखा गया कि प्रोफेसर को लगता है कि लोग इस दूसरी लहर को नहीं मान रहे थे। विद्यासागर को कोट करते हुए कहा गया कि 8-9 मार्च को उन्हें पता चला था कि बीटा ‘कॉन्टैक्ट’ पैरामीटर तेजी से बढ़ रहा है और इसके बाद यह बात सरकार को बताई गई। महामारी की दूसरी लहर मार्च में आ गई थी। लेकिन लोग इससे इंकार करते रहे।

ET ने दावा किया कि सरकार दूसरी वेव को मानने से इंकार कर रही थी इसलिए वह इस स्थिति के लिए उत्तरदायी है। अपने इस दावे को सही साबित करने के लिए उन्होंने प्रोफेसर को कोट किया। शायद समाचार पत्र इस बात से अंजान था कि उन्हें इसका कितना बड़ा नुकसान हो सकता है या फिर कोई इसका विरोध कर सकता है।

IIT प्रोफेसर ने ET के दावों को किया खारिज

अखबार में खबर आने के कुछ घंटे बाद प्रोफेसर एम विद्यासागर ने इस रिपोर्ट की पोल खोल दी। उन्होंने खबर की तस्वीर लगाते हुए कहा, “चूँकि मुझे इस लेख में कोट किया गया है। मैं ये साफ कर देना चाहता हूँ कि मैंने कभी नहीं कहा कि कोई भी इससे ‘मना कर रहा था।’ भले ही ये एक पैराफ्रेस हो लेकिन ये एक आरोप जैसा लग रहा है, जिसे मैंने कभी नहीं लगाया। बाकी मेरी टिप्पणियाँ (सटीक तौर पर कोट की गई) इस बात को स्पष्ट करती हैं।”

खबर में विज्ञान एवं तकनीक विभाग के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा को भी कोट किया गया। उन्होंने दूसरी वेव के अलर्ट और उसमें आने वाले कोरोना केसों में उछाल पर अपनी बात रखी थी। उनका कहना था कि कोई भी अंदाजा नहीं लगा सकता था कि कि दूसरी वेव में 3-10 गुना मामलों में उछाल होगा।

मगर, इकोनॉमिक टाइम्स ने इस बात को पूर्ण रूप से उल्टा कर दिया और प्रोफेसर विद्यासागर के बयान से विरोधाभासी बताया।  हालाँकि, अपने ट्वीट में प्रोफेसर ने बताया कि प्रोफेसर शर्मा बिलकुल सही बोल रहे थे। उन्होंने कहा, “हम दूसरी वेव में आने वाले केसों की संख्या का अंदाजा नहीं लगा सके, क्योंकि महामारी के आँकड़े लगातार बेतहाशा बदल रहे थे।”

उन्होंने कहा कि केवल कुछ ही समय पहले ऐसा हुआ कि कुछ मॉडल पैरामीटर्स स्थिर हुए और हम अंदाजे लगा पाए। इन्हें महिंद्रा अग्रवाल द्वारा शेयर भी किया गया। अब हम सोच सकते हैं कि इस महामारी का पीक करीब है। संभव है कि अगले हफ्ते 4 लाख प्लस या फिर 0.1 लाख माइनस।

अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा, “डीएसटी द्वारा अपॉइंट किए जाने के बाद सरकार ने हमसे इनपुट लेने के लिए तीन चार बार कॉन्टैक्ट किया। हर बार हमने वही बताया जो इनपुट हमारे पास था। आखिरी बार यह 2 अप्रैल को हुआ था।”

उनके अनुसार, भारत सरकार मॉडलिंग कम्युनिटी के लिए अच्छा काम कर रही है अगर वह पब्लिक डोमेन में डेटा रखें। वह बताते हैं कि इसमें सकारात्मक परीक्षणों के लिए अस्पतालों का अनुपात, रोगियों के अनुक्रम डेटा, वायरस के प्रकार, आदि शामिल हैं।

गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार बताने की इच्छा रखने वाले इकोनॉमिक टाइम्स ने कोरोना के बढ़ते मामलों का ठीकरा कुंभ मेले पर फोड़ने का प्रयास किया। हालाँकि, एम विद्यासागर ने ये साफ कहा कि ये केस कैसे बढ़े इसका स्पष्ट लिंक ढूँढना मुश्किल है।

वह कहते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर उठी क्योंकि लोगों ने कोविड-19 प्रोटोकॉल्स को दरकिनार किया। लगातार शादियाँ हुईं, समारोह हुए। वह ध्यान दिलाते हैं कि कोरोना केसों में आया उछाल चुनावी रैली से पहले और कुंभ के शुरू होने से पहले से था।

टिकरी बॉर्डर पर कोरोना से पश्चिम बंगाल की 25 वर्षीय युवती की डेथ, राकेश टिकैत और गुरनाम सिं​ह पर भिवानी में केस दर्ज

दिल्ली की सीमाओं पर नए कृषि कानूनों के खिलाफ पाँच महीने से ज्यादा समय से किसानों का आंदोलन जारी है। इसी बीच आंदोलन में कई दिनों से सक्रिय पश्चिम बंगाल की 25 वर्षीय युवती ने शुक्रवार (30 अप्रैल) की सुबह दम तोड़ दिया। वह 27 अप्रैल से टिकरी बॉर्डर के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती थी। इस घटना बाद से किसानों में भय का माहौल है।

वहीं, कोरोना के प्रकोप के बावजूद अलग-अलग जगहों पर पंचायतें करने पर किसान आंदोलन के नेतृत्व दल में शामिल किसान नेता राकेश टिकैत और गुरनाम सिं​ह के खिलाफ हरियाणा के भिवानी में मामला दर्ज किया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक मृतका मोमिता बसु पश्चिम बंगाल के हुगली की रहने वाली थीं। वह 11 अप्रैल को टीकरी बॉर्डर पर जारी किसान आंदोलन में शामिल होने आई थीं। वह अलग-अलग संगठनों के साथ यहाँ पर रहीं।

कीर्ति किसान यूनियन के एक नेता राजेंद्र सिंह दीप सिंह वाला ने कहा, “मोमिता प्रदर्शन में शामिल होने के लिए 11 अप्रैल को पश्चिम बंगाल से टिकरी आई थी। चार दिन पहले उसकी हालत बिगड़ने पर उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ डॉक्टरों ने उसके फेफड़ों में संक्रमण पाया था। उन्होंने शुक्रवार को अस्पताल में अंतिम साँस ली।”

हालाँकि, किसान यूनियन के सदस्य सार्वजनिक रूप से दावा कर रहे हैं कि बसु की मौत फेफड़ों में संक्रमण के कारण हुई थी, लेकिन संदीप सिंह नाम के एक पत्रकार ने ट्विटर पर इस बात की पुष्टि की है कि कोरोना से महिला की मौत हुई है।

उन्होंने कहा कि मोमिता बसु के फेफड़ों में संक्रमण था और वह कोरोना से भी संक्रमित थीं। पत्रकार ने पुष्टि की कि टिकरी बॉर्डर पर किसानों के प्रदर्शन स्थल पर COVID-19 के कारण मौत का यह पहला मामला है, जहाँ हजारों किसान मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा के विरोध कर रहे हैं। भारत में कोरोना की दूसरी लहर बेहद घातक साबित हो रही है।

बता दें कि पिछले साल सितंबर में मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। वे कोरोना जैसी विश्व व्यापी महामारी के दौरान भी प्रदर्शन स्थल से हटने को तैयार नहीं हो रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने गुरुवार (29 अप्रैल) को कहा कि किसानों का प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि सीमा पर उनका आंदोलन कोरोना के मामलों में तेजी आने के बावजूद जारी रहेगा।

मालूम हो कि हरियाणा में कोरोना महामारी के कारण धारा 144 लागू है। इसी बीच गुरुवार को भिवानी के प्रेमनगर गाँव में किसान पंचायत का आयोजन करने के आरोप में राकेश टिकैत और गुरनाम सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

यूपी के इन 7 जिलों में 18-44 साल के लोगों का वैक्सीनेशन शुरू, CM योगी ने कहा- संक्रमण में कमी, रिकवरी रेट बेहतर होना सुखद

उत्तर प्रदेश में शनिवार से 18-44 आयु वर्ग के लोगों का कोविड वैक्सिनेशन शुरू हो गया। पहले चरण में सात जिलों को वैक्सिनेशन में शामिल किया गया है। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ लखनऊ के अवंतीबाई अस्पताल पहुँचे और यहाँ उन्होंने वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत की।

सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि फ्री टीका उपलब्ध कराने के अभियान की मुख्यमंत्री रात में निगरानी करते रहे और उन्होंने शुक्रवार देर शाम सरकारी विमान भेजकर हैदराबाद से टीके की खेप मँगवाई।

इसलिए चुने गए पहले ये 7 जिले

अधिकारिक जानकारी के मुताबिक जिन सात जिलों में टीकाकरण की शनिवार को शुरुआत हुई, उनमें लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ और बरेली शामिल हैं। उन्होंने कहा था कि पहले चरण में उन सात जिलों में टीकाकरण होगा जहाँ नौ हजार से अधिक एक्टिव केस हैं।

सात जिलों के बाद शामिल होंगे अन्य जिले

अवंतीबाई अस्पताल पहुँचे योगी ने कहा कि टीकाकरण के लिए जो सॉफ्टवेयर बना है, उसका परीक्षण भी इन जिलों में किया जाएगा और उसके पश्चात अन्य जिलों में भी इसे विस्तारित किया जाएगा।

1.01 करोड़ ने ली पहली खुराक

योगी ने कहा कि देश में कोविड रोधी टीकाकरण शुरू होने के बाद से राज्य में अब तक 1.23 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं। इनमें 1.01 करोड़ वे लोग हैं जिन्होंने पहली खुराक ली है और 22.33 लाख से अधिक लोगों ने दूसरी खुराक ली है।

बनाए गए 85 अलग केंद्र

यूपी सीएम ने कहा कि राज्य में 45 वर्ष के लिए 2500 केंद्रों पर तीसरे चरण का वैक्सिनेशन शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि 18 साल से अधिक उम्र के लोगों का वैक्सीनेशन शुरू किया है। पहले चरण में हमने उन 7 जनपदों को लिया है जिनमें पॉजिटिविटी रेट और सक्रिय मामले सर्वाधिक हैं। इन 7 जनपदों में 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए अलग से 85 केंद्र बनाए हैं।

5 करोड़ वैक्सीन के लिए ग्लोबल टेंडर

योगी ने कहा कि हमें 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए भी वैक्सीन उपलब्ध हो गई है, हमने सीधे कंपनियों से वैक्सीन खरीदी है। प्रदेश में हम 5 करोड़ वैक्सीन का ग्लोबल टेंडर भी प्रारंभ कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य में संक्रमण के नए मामलों में कमी और रिकवरी रेट बेहतर होना सुखद है। हालाँकि लोगों को कोविड बिहेवियर को जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए। सीएम योगी ने टीम-9 के साथ कोरोना की स्थिति की समीक्षा करते हुए शनिवार (मई 1, 2021) को कहा कि पिछले 24 घंटो में कोविड के 30317 नए केस आए जबकि 38826 लोग कोरोना से स्वस्थ हो चुके हैं। यह स्थिति सुखद है। प्रदेश में संक्रमण कम हो रहा है और रिकवरी बेहतर हो रही है। हमें इसी प्रकार टेस्ट, ट्रैक और ट्रीट की नीति को प्रभावी ढंग से लागू रखना होगा। यह बहुत जरूरी है कि प्रदेशवासी कोविड बिहेवियर को जीवनशैली का हिस्सा बनाएँ।

उन्होंने कहा कि बीते 24 घंटों में प्रदेश में 2,66,326 कोविड टेस्ट संपन्न हुए हैं। इसमें 1,14,172 टेस्ट केवल आरटीपीसीआर माध्यम से हुए हैं। अब तक उत्तर प्रदेश में 4.10 करोड़ टेस्ट हो चुके हैं। यह देश के सभी राज्यों में सर्वश्रेष्ठ है। सीएचसी और पीएचसी स्तर पर एंटीजन टेस्ट बढ़ाए जाने की जरूरत है।

इसी के साथ-साथ प्रदेश में 2500 केंद्रों पर 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों का टीकाकरण पूर्ववत जारी है। उन्होंने कहा कि कोविड से लड़ाई में टीकाकरण अहम है। देश मे सर्वाधिक टीकाकरण उत्तर प्रदेश में हुआ है। नि:शुल्क टीकाकरण की घोषणा करने वाला उत्तर प्रदेश प्रथम राज्य है। हम सभी नागरिकों के वैक्सीनेशन के लिए नियोजित भाव से कार्य कर रहे हैं।

वहीं उत्तर प्रदेश अपर मुख्य सचिव सूचना नवनीत सहगल ने बताया, “प्रदेश में रेमडेसिविर की उपलब्धता को बढ़ाया गया है पहले 20,000 डोज़ प्रतिदिन मिलते थे, कल से यह संख्या 50,000 कर दी जाएगी। ऑक्सीजन की उपलब्धता लगातार बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। कल प्रदेश में 631 मीट्रिक टन ऑक्सीजन प्राप्त हुई।”

रोहित सरदाना की मौत पर जश्न मनाने के बाद कट्टरपंथियों ने ट्रेंड कराया #StandWithSharjeelUsmani

पत्रकारिता जगत में शुक्रवार (मार्च 30, 2021) को रोहित सरदाना के निधन के बाद मातम पसरा रहा। हर कोई आजतक के वरिष्ठ पत्रकार के देहांत की खबर सुनकर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा था। इस बीच इस्लामी कट्टरपंथियों और वामपंथियों के संदेशों ने लोगों को बुरी तरह झकझोर दिया। इनमें से एक नाम न्यूजलॉन्ड्री के स्तंभकार शरजील उस्मानी का है। वही शरजील उस्मानी जिस पर दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों में कई तरह के इल्जाम लगे थे।

कल जैसे ही सरदाना के निधन की पुष्टि हुई, शरजील उस्मानी ट्विटर पर जश्न मनाने लगा। उसने सरदाना के सहकर्मी राजदीप सरदेसाई के ट्वीट पर नफरत से भरी प्रतिक्रिया दी।

रोहित सरदाना को बड़े अक्षरों में उस्मानी ने “मनोरोगी, झूठ बोलने वाला, नरसंहार करवाने वाला” कहा। इसके अलावा ये भी लिखा कि रोहित सरदाना को पत्रकार के तौर पर नहीं याद किया जाना चाहिए।

ये ट्वीट उस्मानी ने राजदीप सरदेसाई के ट्वीट पर किया था। लोगों ने इसे देखा तो उस्मानी को खूब खरी खोटी सुनाई। तभी कुछ इस्लामी कट्टरपंथी आए और देखते ही देखते ट्विटर पर #StandWithSharjeelUsmani ट्रेंड करने लगा।

एक शेख नाम के ट्विटर यूजर ने कहा कि शरजील ने वो किया जो उसे करना था। अगर देश को बचाना है, तो हर किसी को उसकी तरह ही बनना होगा।

सीएए प्रदर्शनों को भड़काने वालों में से एक आफरीन फातिमा ने कहा कि लिबरलों को न केवल सरदाना के कर्मों पर लीपा-पोती करने के लिए शर्म आनी चाहिए बल्कि मुस्लिम युवाओं को भड़काने के लिए भी शर्मिंदा होना चाहिए। आफरीन के मुताबिक जो लोग सरदाना के लिए लिख रहे हैं वो इस्लामोफोबिया फैला रहे हैं।

इसी प्रकार सैंकड़ों लोगों ने शरजील उस्मानी की भाषा में ट्वीट में किया और यहाँ तक कहा कि जब सरदाना को किसी समुदाय के ख़िलाफ़ नफरत फैलाने में शर्म नहीं आई तो उन्हें सच बोलने में क्यों आएगी।

अब इस बात को जानने के लिए कि आखिर ट्विटर पर एक हैशटैग के साथ तमाम कट्टरपंथी किसे समर्थन दे रहे हैं, तो हमें उस्मानी के एक ट्वीट थ्रेड को देखना होगा। इसे उसने ट्विटर पर अपनी आलोचना के बाद शेयर किया था।

इस थ्रेड में उस्मानी ने खुद को उत्पीड़ित समुदाय का कहते हुए उन लोगों पर अपना गुस्सा उतारा जो उसे मृत्यु का जश्न मनाने पर बुरा भला बोल रहे थे। उसने लिबरलों को निशाने पर लेते हुए कहा कि ये लोग चाहते हैं कि एक उत्पीड़ित समुदाय का व्यक्ति तय की गई सीमाओं में ही बात रखे। 

उसने कहा कि सरदाना मुस्लिमों के नरसंहार करवा रहा था और उसके सहकर्मी अब भी यही कर रहे हैं। वह कहता है कि वह सरदाना को याद करने की बजाय उन पीड़ितों को याद करेगा जिन्हें उसने (रोहित सरदाना ने) क्रिमिनल कहा और वह अब भी जेल में हैं।

यहाँ ध्यान रहे कि उस्मानी जिस पत्रकार के लिए घटिया बातें कर रहा है, उनका निधन कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद हुआ। उससे पहले उन्होंने सिर्फ अपना काम किया बिना शरजील इमाम जैसे हिंदू विरोधी दंगों में शामिल लोगों का महिमामंडन किए।

उस्मानी कहता है कि अगली बार जब कोई फासीवादी मरे तो लोगों को उसपर उदास नहीं होना चाहिए। ये सबसे बड़ा मानवता का काम होगा।

गौरतलब है कि शरजील उस्मानी के एक-एक शब्द इस्लामी एजेंडा के वाहक हैं। इसी के तहत लोगों की मृत्यु का जश्न मनाया जाता है। उसका होना भी लिबरल मीडिया और बुद्धिजीवियों की देन है। यही लिबरल कुछ दिन पहले एल्गार परिषद 2021 में उसकी स्पीच पर तालियाँ पीट रहे थे।

वहाँ भी इस उस्मानी ने हिंदू समुदाय के विरुद्ध जहर उगला था। उसकी टिप्पणियों पर जब लोगों ने सवाल उठाए तो कई गिरोह के लोगों ने उसे जस्टिफाई किया। इसके अलावा इसी उस्मानी ने कश्मीरी पंडितों को ‘most pampered minority’ कहा था। तब भी लिबरलों ने इसके बयान का बचाव किया था।

मगर, अब ये उस्मानी पूरी तरह से अपनी हकीकत दिखा चुका है और अब चाहकर भी लोग इसके कुकर्मों पर पर्दा नहीं डाल सकते। लिबरलों ने इसे पाला-पोसा और इसका बचाव करके इतना बड़ा कर दिया कि ये खुलकर नफरत फैलाने लगा। ऐसे में हम हैरान कैसे हों कि ये अब खुलकर किसी की मृत्यु पर जश्न मनाता है।

शहाबुद्दीन… सब इंस्पेक्टर रामसागर सिंह याद आए, पत्रकार राजदेव रंजन याद आए

यहाँ गोली नहीं छूटेगा तो क्या अगरबत्ती जलेगा… मुन्ना शुक्ला पैदा ही कानून तोड़ने के लिए हुआ है

ज्यादा दिन नहीं हुए जब नाइट कर्फ्यू के दौरान डांस पार्टी का आयोजन करने वाले बिहार के पूर्व बाहुबली विधायक मुन्ना शुक्ला का यह वीडियो वायरल हुआ था। अजीब संयोग है कि उसकी तरह ही जरायम की दुनिया से आया शहाबुद्दीन भी इसी दौर में मर गया। शहाबुद्दीन उस दौर में मरा है, जब बिहार की कानून-व्यवस्था फिर से सवालों के घेरे में है। तब मरा है जब उसके सरपरस्त रहे लालू यादव को जमानत मिल गई है और एम्स ने कहा है कि परिजन जब चाहे उन्हें घर ले जाए। वह उस महामारी से मरा है, जिससे भारत में दो लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर उसकी मौत की खबर को पीड़ादायक बताया है। ‘जन्नत में जगह’ मिलने की दुआ की है। बिहार के मुख्यमंत्री ने ‘गहरी शोक संवेदना’ व्यक्त की है। नीतीश कुमार की सरकार में शामिल पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की हम (HUM) के प्रवक्ता दानिश रिजवान का कहना है कि इस मौत से ‘पूरा बिहार सदमे में है’।

मैं शहाबुद्दीन की मौत पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की बात नहीं करना चाहता। न उन अवसरवादियों की ‘नैतिकता’ की पड़ी है, जो रोहित सरदाना की मौत का जश्न मना रहे थे और आज यह पाठ पढ़ा रहे हैं कि मौत के बाद किसी की आलोचना नहीं होनी चाहिए। मैं अपनी और आपकी बात करना चाहता हूँ। शहाबुद्दीन का नाम सुनते ही आपके जेहन में क्या उभरता है?

मैं तो जब भी यह नाम सुनता हूँ एक बेबस बाप चंदेश्वर प्रसाद याद आ जाते हैं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष चंद्रशेखर याद आते हैं। सब इंस्पेक्टर रामसागर सिंह याद आते हैं। पत्रकार राजदेव रंजन याद आते हैं। वह डर याद आता है जो जेल में बंद शहाबुद्दीन को जमानत मिलने पर सीवान में पसर जाता था। यकीन मानिए, शहाबुद्दीन याद आता भी नहीं है।

16 दिसंबर 2020 की रात चंदेश्वर प्रसाद यानी चंदा बाबू भी इस दुनिया को छोड़कर चले गए थे। उनकी मौत से तीन दिन पहले ही शहाबुद्दीन कोर्ट की इजाजत के बाद अपने बीवी-बच्चों से मिला था। लेकिन, चंदा बाबू को बेटों का कंधा नसीब नहीं हो पाया था। क्यों?

कभी सीवान के जाने-माने व्यवसायी रहे चंदा बाबू ने शहाबुद्दीन को रंगदारी और अपनी जमीन देने से इनकार कर दिया था। जवाब में उनके दो बेटों गिरीश और सतीश का अपहरण कर लिया गया। उन्हें शहाबुद्दीन के गाँव प्रतापपुर स्थित उसकी कोठी पर ले जाया गया। 16 अगस्त 2004 को वहाँ दोनों भाइयों को तेज़ाब से नहला दिया गया और तब तक ऐसा किया गया, जब तक उनकी तड़प-तड़प कर मौत न हो गई। इस मामले में गवाह रहे चंदा बाबू के तीसरे बेटे राजीव रोशन की कोर्ट जाते समय हत्या कर दी गई।

चंद्रशेखर 1996 में सीवान लौटे। मकसद था अपनी पार्टी भाकपा (माले) को मजबूत करना। सीवान को गुंडागर्दी से मुक्ति दिलाना। 31 मार्च 1997 को बीच चौराहे पर उन्हें गोलियों से भून दिया गया। इसका ऑर्डर देना वाला शहाबुद्दीन था और अंधाधुंध फायरिंग करने वाले उसके गुर्गे। हिंदुस्तान अखबार के पत्रकार रहे राजदेव रंजन की 2016 में सरेराह गोली मारकर हत्या कर दी गई। बाद में मुकदमा वापस लेने के लिए उनकी पत्नी को शहाबुद्दीन के नाम से धमकी मिलती रही।

मुझे प्रतापपुर में 15 मार्च 2001 को पुलिस पर चली वे गोलियाँ याद आती हैं, जिसकी गूँज पूरे देश ने सुनी थी। मुझे प्रतापपुर के बगल का वह गाँव खलीलपुरा याद आता है जहाँ शहाबुद्दीन के गुर्गों ने सब-इंस्पेक्टर रामसागर सिंह को घेर कर मार डाला था। मुझे सीवान जिले का बिंदुसर गाँव याद आता है, जहाँ के चंद्रशेखर रहने वाले थे। 2016 में शहाबुद्दीन को जमानत मिलने की खबर आने के बाद जिस गाँव में अजीब तरह का सन्नाटा और भय पसर गया था।

यह सच है कि बाद के वर्षों में शहाबुद्दीन का सीवान में वर्चस्व कमजोर पड़ गया। वह खुली हवा से ज्यादा जेल की कोठरी में रहा। उसके अपराध के भय से पैदा डर, राजद की पूरी ताकत जुड़ने के बावजूद उसकी पत्नी हिना शहाब को जीत नहीं दिला पाए। यह भी सच है कि कल के सीवान का ‘साहब’, सीवान में समानांतर सरकार चलाने वाला, ‘दरबार’ लगाने वाला शहाबुद्दीन बहुत बेबस और लाचार होकर मरा। पूरी ताकत लगाने के बावजूद अपने पिता के जनाजे तक में शामिल नहीं हो पाया।

संभव है कल को आँकड़ों के हिसाब से उसके अपराधों को कमतर ठहराने की कोशिश होगी। उसके मजहब का हवाला देकर उसे ही प्रताड़ित बताने की कोशिश होगी। पर सच यही है कि गिरीश और सतीश की हत्या आँकड़ों में केवल दो मर्डर ही दिखते हैं, लेकिन उन्हें तेजाब से नहलाने और तड़पा-तड़पा कर मारने से पैदा हुआ खौफ किसी आँकड़ों में दर्ज नहीं होता है। वह कोई सामान्य अपराधी नहीं था। पाकिस्तान की आईएसआई तक से उसके संबंध सामने आए थे।

2020 में हाई कोर्ट ने जब उसे पैरोल पर सीवान जाने देने की अनुमति को लेकर दिल्ली और बिहार की सरकारों से रिपोर्ट माँगी थी, तो दोनों सरकारों ने ही हाथ खड़े कर दिए थे। ये बताता है कि बिहार तो दूर, दिल्ली का शासन-प्रशासन भी, जंगलराज का दौर खत्म होने के डेढ़ दशक बाद भी, शहाबुद्दीन पर लगाम कसने में खुद को नाकाम पाता था, खासकर जब वह जेल से बाहर हो। उसे तिहाड़ भी इसलिए शिफ्ट किया गया था, क्योंकि बिहार के जेल से वह बेधड़क अपना साम्राज्य चला लेता था। ऐसे ही नहीं उसने जेल से निकलते ही नीतीश कुमार को ‘परिस्थितियों का मुख्यमंत्री’ कह दिया था।

भले आज राजनीतिक लोकाचार में नीतीश कुमार उसकी मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त कर रहे हों। लेकिन सच यही है कि शहाबुद्दीन की मौत कोरोना संक्रमण से हुई केवल एक और मौत नहीं है। यह उस डर की मौत है जो उसके होने से पैदा होता था।

बत्रा अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से एक डॉ सहित 8 मरीजों की मौत, हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार को लगाई फटकार

सरकार और प्रशासन के दावों के उलट देश की राजधानी दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में ऑक्सीजन का संकट बरकरार है। इस बीच दिल्ली के बत्रा अस्पताल में बुरी खबर आ रही है। बत्रा अस्पताल के डायरेक्टर का कहना है कि यहाँ पर भर्ती 8 मरीजों की मौत ऑक्सीजन की कमी के चलते हो गई है। जिसमें एक डॉक्टर भी शामिल हैं।

इनमें 6 आईसीयू में भर्ती थे, जबकि 2 नॉर्मल वार्ड में भर्ती थे। ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण सभी 8 मरीजों की जान गई है। अस्पताल में भर्ती तकरीबन 300 मरीजों की भी जान भी संकट में है। 

यहाँ पर बता दें कि कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे दिल्ली के बत्रा अस्पताल में शनिवार (मई 1, 2021) को एक बार फिर ऑक्सीजन की किल्लत हो गई। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, यहाँ पर कुल 307 मरीज भर्ती थे। इस दौरान ऑक्सीजन नहीं मिलने से 8 मरीजों की मौत हो गई। 

बत्रा अस्पताल ने इस बाबत शनिवार को दिल्ली हाई कोर्ट को जानकारी दी है। इसके मुताबिक, उनके यहाँ ऑक्सीजन की भारी किल्लत है। बत्रा अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि शनिवार सुबह 6 बजे से SOS में थे। हमारे पास 307 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 230 ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं।

अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. एससीएल गुप्ता ने बताया कि शनिवार सुबह सात बजे से ही वह दिल्ली सरकार से गुहार लगा रहे थे कि कुछ ही घंटे की ऑक्सीजन बची है। इसके बावजूद ऑक्सीजन नहीं मिली। उन्होंने कहा कि हर 10 मिनट पर वह संबंधित अधिकारियों को अपडेट दे रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने समय पर ऑक्सीजन नहीं भेजा। इस कारण 12.45 से डेढ़ बजे तक मरीज बिना ऑक्सीजन के रहे। इसमें आठ मरीजों की मौत हो गई।

सेना से क्यों मदद नहीं माँगी

दिल्ली सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और उनकी असफलता को देखते हुए कोर्ट आग बबूला हो गया और कहा कि अगर स्थिति आपसे सँभल नहीं रही थी तो सेना की माँग करनी चाहिए थी। हाईकोर्ट ने कहा कि इस वक्त हर कोई तनाव में हैं, यहाँ तक कि हम खुद तनाव में हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने सवाल उठाया और कहा कि दिल्ली सरकार ने अब तक आर्मी, नेवी और एयरफोर्स की मदद के लिए रिक्वेस्ट क्यों नहीं की है।

बुनियादी ढाँचे की स्थापना के लिए सशस्त्र बलों की मदद लेने के सुझावों पर दिल्ली सरकार के वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि इस प्रक्रिया में हम उच्चतम स्तर पर हैं। हमारी सरकार इसे देख रही है और जल्द ही दिल्ली में 15000 और बेड जुड़ जाएँगे। हम 15 हजार अतिरिक्त बेड लगा रहे हैं, लेकिन हमारे पास इन बेड्स के लिए ऑक्सीजन नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि आपने सेना की माँग क्यों नहीं की। अगर आप सेना से अनुरोध करते तो वे अपने स्तर पर काम करते। उनका अपना बुनियादी ढाँचा है।

दिल्ली में कोरोना के 27 हजार से अधिक नए मामले 

दिल्ली में शुक्रवार (अप्रैल 30, 2021) को कोरोना संक्रमण की वजह से 375 और मरीजों की मौत हो गई, जबकि कोविड-19 के 27,047 नए मामले सामने आए। वहीं संक्रमित होने की दर 32.69 प्रतिशत रही। यह जानकारी दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग की नवीनतम बुलेटिन में दी गई है। शुक्रवार को लगातार नौवाँ दिन था, जब दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण से 300 से अधिक मौतें हुईं। बुलेटिन के अनुसार दिल्ली में संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 11,49,333 हो गई जिसमें से 10.33 लाख से अधिक संक्रमण मुक्त हो गए हैं। वहीं मृतक संख्या 16,147 है।

2 मई को ही आएँगे यूपी पंचायत चुनाव के नतीजे, SC ने मतगणना पर रोक लगाने से किया इनकार

उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव के नतीजे 2 मई को ही घोषित किए जाएँगे। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार (1 मई, 2021) को यूपी पंचायत चुनावों की मतगणना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। दरअसल, कोर्ट ने 829 मतगणना केंद्रों पर कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन किए जाने का राज्य निर्वाचन आयोग का आश्वासन स्वीकार करते हुए मतगणना की इजाजत दी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद किसी भी तरह के जश्न और रैलियों की अनुमति नहीं दी जाएगी।

उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोरोना संकट को देखते हुए मतगणना को स्थगित कर दिया जाए तो कोई आसमान नहीं टूट पडे़गा। कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए, क्या आपने विचार किया है कि मतगणना को स्थगित किया जा सकता है? हर जगह संकट है। क्या आपके पास स्वास्थ्य सुविधाएँ हैं? जाँच उपलब्ध है?’ यदि दो-तीन हफ्ते के लिए काउंटिंग को टाल दिया जाए तो आसमान नहीं टूट पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग से जारी किया गया दिशा-निर्देश भी माँगा है।

कोर्ट ने यूपी चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण की माँगते हुए आगे कहा कि 2 लाख से अधिक सीटों की मतगणना होगी, जिसके लिए केवल 800 केंद्र हैं। तो आप हर केंद्र पर लगभग 800 सीटों की गिनती करेंगे। प्रत्येक सीट पर कई उम्मीदवार होंगे, ऐसे में आप काउंटिंग स्टेशन पर प्रति व्यक्ति 75 लोगों की सीमा को कैसे सुनिश्चित करेंगे।

इस पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल भाटी ने कहा कि यूपी पंचायत चुनावों के लिए मतगणना रविवार को निर्धारित की गई है, क्योंकि राज्य में साप्ताहिक कर्फ्यू लगा हुआ है। ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करना आसान होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी चुनाव आयोग को संबंधित याचिकाओं पर इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा सुनवाई पूरी होने तक मतदान केंद्रों की सीसीटीवी फुटेज संभाल कर रखने का निर्देश दिया है। 

बता दें कि शनिवार को बीते 24 घंटे में भारत में कोरोना वायरस के 4 लाख से अधिक नए मामले सामने आए और 3500 से अधिक लोगों की मौत हुई। शुक्रवार को दायर इस याचिका में चुनावी ड्यूटी के दौरान कोरोना की वजह से जान गँवाने वाले अधिकारियोंं का हवाला देते हुए वोटों की गिनती पर रोक लगाने की माँग की गई थी। इसको लेकर कोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया था, लेकिन अब कोर्ट ने मंजूरी दे दी है कि कल (2 मई) अपने नियत समय पर ही मतगणना होगी।

मेरे पापा ऑक्सीजन की कमी से मरे: बरखा दत्त का आरोप, एंबुलेंस ड्राइवर ने कहा – ‘मैडम ने खुद चेक किया, भरा था गैस’

पत्रकार बरखा दत्त को गुरुवार (अप्रैल 29, 2021) को उनके पिता एसपी दत्त के निधन की दुखद सूचना मिली। बरखा दत्त ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोविड पॉजिटिव पाए जाने के बाद उनके पिता का निधन हो गया। एयर इंडिया के पूर्व अधिकारी (एसपी दत्त) ने मंगलवार (अप्रैल 27, 2021) को कोरोना वायरस संक्रमण के कारण दम तोड़ दिया।

देश इस समय कोरोना वायरस की दूसरी लहर से जूझ रहा है। इस विकट परिस्थिति में बरखा दत्त सड़क पर निकल कर रिपोर्टिंग कर रही हैं। और इसी बीच बरखा दत्त ने अपने पिता को खो दिया।

अपने पिता की मौत के कुछ दिनों बाद, सीएनएन के किम ब्रूनहुबर के साथ एक इंटरव्यू में बरखा दत्त ने कहा, “मेरे पिता ने मुझसे अंतिम शब्द कहा था कि मुझे घुटन हो रही है। कृपया मेरा इलाज करें और मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की। जो प्राइवेट एंबुलेंस उन्हें लेकर हॉस्पिटल गई, उसमें लगा ऑक्सीजन सिलेंडर काम नहीं कर रहा था।”

बरखा दत्त ने कहा, “उन्हें लाने में देरी हो गई, क्योंकि शहरों में अभी भी एंबुलेंस के लिए कोई ग्रीन कॉरिडोर नहीं है। जब तक हम अस्पताल पहुँचे, उनका ऑक्सीजन स्तर गिर गया था क्योंकि एंबुलेंस में लगा ऑक्सीजन (सिलेंडर) फेल हो चुका था। उन्हें इंटेनसिव केयर यूनिट (ICU) में ले जाना पड़ा। इसके बाद वो फिर वापस नहीं आए।”

बरखा दत्त ने आगे कहा, “इस घटना के 48 घंटे भी नहीं हुए थे, जब हम उनका अंतिम संस्कार करने के लिए शमशान घाट गए। यहाँ पर जगह नहीं थी। कई परिवारों के बीच लड़ाइयाँ हो रही थीं। मुझे मेरे पिता का अंतिम संस्कार करने के लिए पुलिस को बुलाना पड़ा। ऐसी मुश्किल घड़ी में ये सब करना काफी कष्टप्रद रहा।”

दत्त ने कहा, “मैं इसलिए बोल रही हूँ क्योंकि मुझे इस बात का एहसास है कि इस क्षति के बावजूद मैं ज्यादातर भारतीयों की तुलना में भाग्यशाली हूँ। आज, मैं भारत के अनाथों के बारे में सोच रही हूँ।” उन्होंने यह भी कहा कि अस्पतालों के बाहर इंतजार कर रहे परिवारों या मृतक का अंतिम संस्कार करने की स्थिति को देख कर उनका दिल टूट गया है। दत्त ने यह भी दावा किया कि कोरोना वायरस मरीजों में से एक के भाई ने उन्हें बताया कि परिवार को भगवान के भरोसे पर छोड़ दिया गया है।

एंबुलेंस ड्राइवर ने दिया स्पष्टीकरण

बरखा दत्त द्वारा किए गए खुलासे के बाद, हमें बताया गया है कि एम्बुलेंस के ड्राइवर और केयरटेकर को अपने मालिक की तरफ से काफी कुछ सुनना पड़ा। जबकि ड्राइवर ने समझाया था कि जब भी किसी की मौत होती है, तो उसे दुख होता है। उन्होंने यह भी कहा कि शायद संकट के समय किए गए दावे पूरी तरह से सच नहीं होंगे। इसके बाद, एम्बुलेंस ड्राइवर और उसके मालिक ने इस आरोप से इनकार किया कि वाहन में ऑक्सीजन सिलेंडर काम नहीं कर रहा था।

एम्बुलेंस चालक सोनू ने कहा कि ऑक्सीजन सिलेंडर भरा हुआ था और बरखा दत्त ने खुद ही सप्लाय की जाँच की थी। ऑडियो बातचीत को पल्स द्वारा प्रकाशित किया गया था। उन्होंने कहा कि पत्रकार ने ऑक्सीजन की आपूर्ति के बारे में एडवांस में पूछताछ की थी। उनके अनुसार, उन्होंने अपने पिता को अस्पताल पहुँचाने से पहले मास्क और ऑक्सीजन के प्रवाह दोनों की जाँच की थी।

(Video Courtesy: Youtube/The Pulse)

सोनू ने दावा किया, “उन्होंने यात्रा के दौरान मुझे बाधित किया और बार-बार मुझसे ऑक्सीजन की आपूर्ति की जाँच करने के लिए कहा। मैंने उन्हें आश्वासन दिया कि यह ठीक काम कर रहा है। हम बिना किसी समस्या के अस्पताल पहुँचे थे। हमारे साथ उनके दो वाहन भी थे। मरीज का केयरटेकर भी उनके साथ था। मैं भी 15-20 मिनट के लिए आपातकालीन विभाग के बाहर खड़ा था। मरीज बिना किसी परेशानी के एम्बुलेंस से नीचे उतर गया।”

उसने दोहराया, “मैंने उनके घर की पहली मंजिल से एम्बुलेंस तक मरीज को व्यक्तिगत रूप से पहुँचाया था। वह झूठ क्यों बोल रही है? मैंने उन्हें दिखाया था कि मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर ठीक से काम कर रहा था। बरखा दत्त के दो ड्राइवरों और एक सुरक्षा गार्ड सहित कई गवाह थे। मैं झूठ नहीं बोल रहा हूँ।” सोनू ने आगे कहा कि एम्बुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर गायब होने के दावे झूठे हैं और उन्होंने पत्रकार को इसका डेमो भी दिया था।

एंबुलेंस के ड्राइवर ने कहा कि मरीज (बरखा के पिता) के एंबुलेंस में चढ़ने से पहले बरखा ने एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर की जाँच करने के लिए कहा। ड्राइवर का दावा है कि बरखा ने उससे पूछा कि बड़ा सिलेंडर है या छोटा? इतना ही नहीं, बरखा ने उससे यह सवाल भी किया कि छोटी एंबुलेंस में बड़ा ऑक्सीजन सिलेंडर क्यों है? बरखा द्वारा जाँच कर लेने के बाद ड्राइवर ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने मरीज के लिए ऑक्सीजन मास्क रखा है? इस पर बरखा ने कहा कि क्यों उसके पास नहीं है? इसका जवाब देते हुए ड्राइवर ने कहा कि उसके पास एक है लेकिन ज्यादातर मरीज अपना ऑक्सीजन मास्क इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। मगर यदि उनके पास नहीं है तो एंबुलेंस में एक है।

सोनू ने आगे कहा कि हॉस्पिटल जाने के दौरान एंबुलेंस को बीच में रोक कर फिर से सिलेंडर के सुचारू रूप से काम करने पर सवाल उठाया गया था। उस समय ड्राइवर ने दिखाया था कि ऑक्सीजन सिलेंडर वास्तव में काम कर रहा था। उसने यह भी दावा किया कि बरखा दत्त झूठ बोल रही थीं और अगर वह सच कह रहीं, तो उन्होंने एक फोटो खींची थी।

पल्स ने बताया कि उन्हें सोनू और बरखा के बीच बातचीत का ऑडियो क्लिप मिला था। बरखा दत्त ने CNN से कहा कि ऑक्सीजन न मिलने की वजह से उनके पिता की हालत गंभीर हो गई, जबकि एंबुलेंस ड्राइवर ने दोहराया कि एंबुलेंस से उतरते वक्त मरीज सामान्य था। इसके साथ ही सोनू ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि बरखा दत्त ने अपने पिता के आवास से अस्पताल तक की यात्रा से पहले ऑक्सीजन की आपूर्ति और मास्क की कार्यप्रणाली की स्वयं जाँच की थी।