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आम आदमी करता रहे वैक्सीन का इंतजार लेकिन पत्रकारों का हो पहले टीकाकरण: एडिटर्स गिल्ड ने लिखी चिट्ठी

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (Editor Guild of India) ने शुक्रवार (अप्रैल 30, 2021) को केंद्र सरकार से माँग की है कि हर पत्रकार को प्राथमिकता के साथ वैक्सीनेट किया जाए। उनका कहना है कि पत्रकार फ्रंटलाइन वर्कर्स की तरह काम पर डटे थे।

एडिटर्स गिल्ड ने बयान में कहा, “गिल्ड ये जानकर बेहद परेशान है कि केंद्र सरकार ने अभी तक पत्रकारों के टीकाकरण के लिए महीनों से कोई कदम नहीं उठाए हैं। इनमें से कई फ्रीलांसर हैं और उनका बीमा तक नहीं है। बाकी मीडिया संस्थानों के लिए काम करते हैं जो जरूरी नहीं कि कंपनी द्वारा कराए गए बीमा का फायदा उठाएँ।”

आगे इसमें लिखा है, “कुछ हफ्ते पहले एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने माँग की थी कि पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर मानकर प्राथमिकता से वैक्सीनेट किया जाए ताकि वह नए वैरिएंट से सुरक्षित रहें। विभिन्न राज्य सरकारों और मीडिया संस्थानों के समर्थन के बावजूद केंद्र सरकार ने इस पर प्रतिक्रिया नहीं दी।”

अब कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार के बीच एडिटर्स गिल्ड का ये बयान मीडिया के रवैये से थोड़ा विरोधाभासी है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस महामारी में कई पत्रकार अपनी मर्जी से जनता तक जानकारियाँ पहुँचाने के काम में लगे रहे। मुख्यधारा मीडिया भी कहता रहा कि वह जनता का एक भाग हैं, उनकी आवाज हैं और सामान्य जन के साथी हैं। 

फिर आखिर अब क्या हुआ? मुश्किल की घड़ी आई और तो सबसे पहले वह अपनी ताकत का इस्तेमाल कर खुद को सुरक्षित रखना चाहते हैं। सामान्य नागरिकों से जो उनकी कमिटमेंट थी वह उससे कैसे भाग सकते हैं। ये स्वार्थ नहीं तो क्या है।

मीडिया का दावा होता है कि वो जनता के लिए लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन इस बार एडिटर्स गिल्ड जैसे अपनी ताकत का उपयोग कर वैक्सीनेशन की लाइन में आगे आना चाहता है, ये साफ जाहिर है कि वह केवल अपने लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं है कि कैसे कोई आम आदमी लाइन में लग कर वैक्सीन लगवाने का इंतजार कर रहा है। एडिटर्स गिल्ड की एकजुटता यहाँ पर सामान्य जन के साथ नहीं है। वह बस आगे जाकर अपनी शक्ति का लाभ उठाना चाहते हैं।

एडिटर्स गिल्ड का कहना है कि अप्रैल 2020 से लेकर अब तक 100 से ज्यादा पत्रकार अपनी जान गँवा चुके हैं। हर मृत्यु भयावह है क्योंकि कोई भी एक व्यक्ति अपने संसार का प्रतिनिधित्व करता है। हर मृत्यु पर शोक होना चाहिए। लेकिन ये भी सच है कि भारत में अब तक 2,00,000 से ज्यादा लोग जान गँवा चुके हैं और कई अन्य लोगों की जान खतरें में है।

इसलिए इस बात का कोई तुक नहीं है कि पत्रकारों का प्राथमिकता से टीकाकरण होना चाहिए वो भी आम जनता से पहले। यही लोग हैं जो सामान्य दिनों में वीआईपी कल्चर को कोसते हैं लेकिन यदि खुद को उससे फायदा हो तो ये उसका लाभ उठाने से भी गुरेज नहीं करते।

ध्यान रहे कि अब तक इस गिल्ड ने आजतक के एंकर रोहित सरदाना की मृत्यु पर जश्न मनाने वालों के ख़िलाफ कोई बयान नहीं जारी किया है। जाहिर है कि गिल्ड के लिए हर कोई समान होगा लेकिन ये और भी स्पष्ट है कि कुछ अन्य लोग उनके लिए दूसरों की तुलना में ऊपर हैं।

‘अल्लाह आपको जन्नत में आला मक़ाम दें… आपकी कमी हमेशा खलेगी’ – हत्यारे शहाबुद्दीन की मौत पर RJD में शोक

राष्ट्रीय जनता दल के पूर्व सासंद मोहम्मद शहाबुद्दीन की शनिवार (मई 1, 2021) को दिल्ली के पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में कोरोना संक्रमण से मौत हो गई। कई मामलों में सजा काट रहा मोहम्मद शहाबुद्दीन काफी समय से तिहाड़ जेल में बंद था। कोरोना पॉजिटिव होने के बाद उसे दिल्ली के पंडित दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

ब‍िहार में आरजेडी के कई नेताओं ने अपराधी और हत्यारे शहाबुद्दीन की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए उसे श्रद्धांजलि दी है। आरजेडी नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर शहाबुद्दीन के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

तेजस्वी ने अपने ट्वीट में लिखा है, “पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन का कोरोना संक्रमण के कारण असमय निधन की दुःखद ख़बर पीड़ादायक है। ईश्वर उनको जन्नत में जगह दे, परिवार और शुभचिंतकों को संबल प्रदान करे। उनका निधन पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति है। दुख की इस घड़ी में राजद परिवार शोक संतप्त परिजनों के साथ है।”

तेजस्वी के इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए आरजेडी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से लिखा गया, “समस्त राजद परिवार उनके असामयिक निधन पर गहरी शोक संवेदना प्रकट करता है। ईश्वर शोकाकुल परिवार और शुभचिंतकों को दुःख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करे। आपकी कमी हमेशा खलेगी। अल्लाह आपको जन्नत में आला मक़ाम दें।”

वहीं आरजेडी सिवान के ट्विटर हैंडल से लिखा गया, “सिवान के राजनीति के स्तंभ, पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन साहब कोरोना से जंग हार गए। समस्त राजद परिवार उनके निधन पर गहरी संवेदना प्रकट करता है। ईश्वर उनके परिवार और सभी शुभचिंतकों को इस दुःख की घड़ी में हिम्मत दें। आपकी कमी हमेशा खलेगी। अल्लाह आपको जन्नत में आला मक़ाम दें।”

राजद के प्रदेश अध्यक्ष कारी सोहैब ने शोक व्यक्त करते हुए लिखा, “इस कोरोना महामारी और सिस्टम ने हमारे दल व बिहार के कद्दावर नेता, कौम के हमदर्द और पूर्व लोकसभा सांसद जनाब मोहम्मद शहाबुद्दीन साहब को हमसे छीन लिया। शहाबुद्दीन साहब के वफ़ात की ख़बर सुनकर दिली सदमा हुआ। अल्लाह उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता करे।”

इससे पहले शुक्रवार (अप्रैल 30, 2021) को उन्होंने ट्विटर पर लिखा था, “सिवान के पूर्व लोकसभा सांसद एवं बिहार के कद्दावर नेता जनाब मोहम्मद शहाबुद्दीन साहब के कोरोना संक्रमित होने के बाद अचानक से उनकी तबीयत ज़्यादा खराब होने के कारण उन्हें वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया है। आप तमाम लोग उनके सेहतयाबी के लिए ज्यादा से ज्यादा दुआ का एहतेमाम करे।”

आरजेडी नेता रविंद्र राय ने दुख व्यक्त करते हुए लिखा, “सिवान के पूर्व सांसद डॉ मोहम्मद शहाबुद्दीन साहब आज इस दुनिया को छोड़ के चले गए। सिवान ने आज एक अपना विकास पुरुष नेता खो दिया। जिसका भरपाई शायद कभी नहीं किया जा सकता। इस महान शख्सियत को तहे दिल से नमन करता हूँ। भगवान इनके आत्मा को शांति प्रदान करे।”

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने भी राजद के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के निधन पर शोक व्यक्त किया। नीतीश कुमार ने कहा कि वे बहुत लंबे समय तक सिवान से विधायक और सांसद रहे। सीएम ने उसकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने की बात कही।

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता आमिर उल्लाह खान ने भी शहाबुद्दीन की मौत पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इल्लिही राजिओन। शहाबुद्दीन साहब पूर्व सांसद का निधन, परिवार के सदस्यों के प्रति संवेदना। अल्लाह मरहूम की मकफ़रत फरमाए … अमीन।”

बता दें कि शहाबुद्दीन ने चंदा बाबू के दो बेटों को तेजाब से नहला कर मार डाला। इस मामले में उनका तीसरा बेटा गवाह था लेकिन इससे पहले कि वो अदालत पहुँचता, उसकी भी हत्या कर दी गई। लेकिन, इस मामले में आरोपित शहाबुद्दीन का उस समय कुछ नहीं हो पाया। नाम से ही सीवान और आसपास के इलाक़े थर-थर काँपते थे।

1980 के दशक तक सिवान की सियासत में आपराधिक तत्वों का बोलबाला था। 1980 के दशक में कई अपराधों में नाम आने के बाद शहाबुद्दीन ने सियासत में एंट्री की। एक दौर था, जब तेजाब कांड हो, चंद्रशेखर हत्याकांड हो या सिवान में कोई भी अपराध, शहाबुद्दीन का नाम हमेशा सुर्खियों में रहता था। जिले के अस्पताल हो, स्कूल हों या बैंक या फिर कोई भी दफ्तर… हर जगह ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर शहाबुद्दीन का कानून चलता था।

100000 मरीजों को हर दिन ऑक्सीजन दे रहा मुकेश अम्बानी का RIL, 1000 MT का प्रतिदिन उत्पादन

कोरोनावायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच रिलायंस समूह सक्रियता से देश की सहायता के लिए आगे आया है। महाराष्ट्र को 100 टन ऑक्सीजन मुफ्त में उपलब्ध कराने से लेकर अब देश का सबसे बड़ा ऑक्सीजन उत्पादक बन गया है रिलायंस समूह। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) देश में सबसे ज्यादा मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन कर रहा है। वर्तमान में रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी और उसके दूसरे अन्य औद्योगिक क्षेत्रों से 1000 मीट्रिक टन मेडिकल लिक्विड ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है जो कि देश के कुल मेडिकल ऑक्सीजन उत्पादन का लगभग 11% है।

RIL के अनुसार कंपनी का मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन शून्य से आज 1000 मीट्रिक टन तक पहुँच गया है जिससे प्रतिदिन लगभग 100,000 मरीजों की ऑक्सीजन की आवश्यकताओं की पूर्ति हो रही है। कंपनी के अनुसार चेयरमैन मुकेश अंबानी खुद ही ऑक्सीजन के उत्पादन और उसके सरल परिवहन की समीक्षा कर रहे हैं।

RIL के द्वारा दिए गए आँकड़ों के अनुसार अप्रैल 2021 में रिलायंस के द्वारा 15,000 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन लगभग 15,00,000 मरीजों को मुफ्त में उपलब्ध कराई जा चुकी है।

रिलायंस कंपनी ने बताया कि ARAMCO, BP और भारतीय वायु सेना की सहायता से ऑक्सीजन परिवहन के लिए 24 ISO कंटेनर्स को एयरलिफ्ट किया जा चुका है और आगे अधिक ISO कंटेनर्स की व्यवस्था करने की योजना है।

RIL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने कहा, “रिलायंस के लिए Covid-19 के इस बढ़ते संक्रमण के दौरान लोगों की जान बचाने से अधिक जरूरी कुछ भी नहीं है।“ उन्होंने जामनगर के अपने इंजीनियर्स पर गर्व करते हुए कहा कि उन्होंने संकट की इस घड़ी में मेडिकल ऑक्सीजन की आवश्यकता की पूर्ति के लिए राष्ट्रसेवा के भाव से जो कार्य किया है वह सराहनीय है।

मेडिकल ऑक्सीजन के उत्पादन और उसके परिवहन के लिए रिलायंस ने दो स्तर पर आधारित रणनीति बनाई है। पहली रणनीति है, जामनगर और दूसरे औद्योगिक केंद्रों में मेडिकल ऑक्सीजन के तीव्र उत्पादन के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं पर ध्यान देना और दूसरी रणनीति है, लोडिंग-अनलोडिंग और परिवहन साधनों तथा प्रक्रियाओं का संवर्धन।

रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन और मुकेश अंबानी की पत्नी नीता अंबानी ने कहा कि महामारी के इस दौर में एक-एक जान कीमती है और देश की सहायता करने के लिए रिलायंस सब कुछ करेगा।

रिलायंस ने बताया कि उसके द्वारा विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ‘मुफ्त’ में मेडिकल ऑक्सीजन मुहैया कराई जा रही है। महामारी के दौरान देश में रिलायंस अब तक 55,000 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति कर चुका है।   

Remdesivir के लिए देश में हर जगह मारामारी, महाराष्ट्र के रायगढ़ में रोक: 90 मरीजों पर इंजेक्शन का साइड इफेक्ट

कोरोना वायरस के इलाज में रेमडेसिविर इंजेक्शन को बहुत कारगर माना जा रहा है। इसलिए देश में रेमडेसिविर की मारामारी बढ़ गई है। कई राज्यों में इसकी कालाबाजारी हो रही है। महाराष्ट्र सरकार इस इंजेक्शन को खरीदने के लिए काफी प्रयास कर रही है। लेकिन अब इस इंजेक्शन के साइड इफेक्ट (किसी खास कंपनी के) नजर आने लगे हैं।

ताजा मामला महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले का है। यहाँ 90 कोरोना मरीजों में इसके साइड इफेक्ट देखने को मिले हैं, जिसके चलते पूरे जिले में रेमडेसिविर इंजेक्शन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है।

महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि (एफडीए) मंत्री राजेंद्र शिंगणे ने कहा कि रायगढ़ जिले में कम से कम 90 कोरोना मरीजों को एक विशेष ब्रांड की रेमडेसिविर की खुराक दी गई थी, जिसके गंभीर दुष्परिणाम देखने को मिले हैं। इतनी ज्यादा तादाद में मरीजों की शिकायत मिलने के बाद पूरे जिले में इंजेक्शन के प्रयोग पर रोक लगा दी गई है।

शिंगणे ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया, “यह घटना गुरुवार (29 अप्रैल 2021) को जिले के तीन अस्पतालों में सामने आई। जिन कोरोना मरीजों को इलाज के लिए हेटेरो हेल्थ केअर कंपनी का रेमडेसिविर इंजेक्शन दिया गया था, उन सभी ने इससे साइड इफेक्ट (दुष्प्रभाव) की शिकायत की थी।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह चौंकाने वाली घटना तब सामने आई, जब इंजेक्शन देने के बाद कुछ मरीजों को सर्दी और बुखार की शिकायत शुरू हुई। इसके बाद तुरंत जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसके बारे में सूचित किया। मंत्री ने आश्वसत किया है कि स्थिति नियंत्रण में है और सभी मरीजों की हालत अब स्थिर है। अब चिंता का करने की कोई जरूरत नहीं है।

बताया जा रहा है कि रायगढ़ जिले में हेटेरो हेल्थ केअर कंपनी की कोविफोर इंजेक्शन की 500 डोज भेजी गई थी। इस दवा को तकरीबन 120 मरीजों पर इस्तेमाल किया गया, जिसमें से 90 मरीजों में इसके साइड इफेक्ट्स होने की बात सामने आई है। 

मामला प्रकाश में आने के बाद मुंबई में एफडीए अधिकारियों ने कोविफोर ब्रांड से जुड़े लोगों को तुरंत निलंबित कर दिया है और संबंधित चिकित्सा अधिकारियों द्वारा इस पूरी घटना की जाँच होने तक अपने बैच को वापस बुला लिया है।

इस घटना के बाद अब इसके इस्तेमाल पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है। रेमडेसिविर इंजेक्शन को कोरोना संक्रमण से बचाने वाला माना जाता है। इसे खरीदने के लिए लोगों को लंबी-लंबी लाइनें लगानी पड़ रही हैं। कुछ लोग जरूरतमंदों को ऊँचे दामों पर नकली इंजेक्शन बेच रहे हैं। ऐसे में रेमडेसिविर इंजेक्शन असली है या नकली, ये जानना बेहद जरूरी हो गया है।

हाल ही में दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की डीसीपी और आईपीएस अधिकारी मोनिका भारद्वाज ने दो ट्वीट के जरिए रेमडेसिविर की नकली और असली शीशी की पहचान कैसे की जाए इसकी जानकारी दी है। उन्होंने रेमडेसिविर इंजेक्शन के असली और नकली पैकेट की तस्वीरें शेयर करते हुए बताया है कि कि हम असली रेमडेसिविर के पैकेट की पहचान कैसे कर सकते हैं।

सीतापुर जेल में बंद सपा नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला कोरोना पॉजिटिव, अलग बैरक में किए गए आइसोलेट

उत्तर प्रदेश के रामपुर से सांसद और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनका बेटा अब्दुल्ला आजम कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। दरअसल, आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान इन दिनों यूपी की सीतापुर जेल में बंद है। यहाँ कुल 13 बंदियों की आरटीपीसीआर रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार देर रात मेडिकल रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। इसके बाद से सभी को जेल के अंदर एक अलग बैरक में आइसोलेट कर दिया गया है।

प्रभारी जेल अधीक्षक आरएस यादव ने बताया कि जेल में 69 कैदियों की गुरुवार (29 अप्रैल 2021) को आरटीपीसीआर जाँच कराई गई थी। शुक्रवार रात इसकी रिपोर्ट आई, जिसमें रामपुर सांसद आजम खान, अब्दुल्ला आजम समेत कुल 13 बंदी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। 12 कैदियों को अलग बैरक में रखा गया है। वहीं सांसद आजम खान पहले से ही अलग बैरक में थे। 

बताया जा रहा है कि सभी का इलाज कारागार चिकित्सक ने शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग को कुछ और बंदियों की जाँच कराने के लिए कहा गया है, जल्द ही उन सभी का कोरोना टेस्ट कराया जाएगा।

बता दें कि आजम खान को पिछले साल फरवरी में जेल भेजा गया था। उनके साथ उनका बेटा अब्दुल्ला आजम भी जेल में बंद है। दरअसल, 27 फरवरी 2020 को सांसद को उसके परिवार (पत्नी और बेटे) के साथ सीतापुर की जेल में शिफ्ट किया गया था।

बीते दिनों आजम की पत्नी व रामपुर सदर सीट से विधायक तंजीन फातिमा को जमानत मिल गई थी। वहीं, 80 से अधिक मुकदमों में दोषी पाए गए आजम और उसके बेटे को जमानत नहीं मिल पाई है।

13 साल तक सेना में रह कर देश की सेवा, मेजर से रिटायर होकर बॉलीवुड में आए बिक्रमजीत कंवरपाल का कोरोना से निधन

बॉलीवुड इंडस्ट्री से एक दुखद खबर सामने आई है। टीवी और बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता बिक्रमजीत कंवरपाल का कोरोना से निधन हो गया है। 52 वर्षीय कंवरपाल अभिनेता बनने से पहले आर्मी के अफसर रह चुके थे। वह साल 2002 में आर्मी से रिटायर्ड हो गए थे। इसके बाद उन्होंने साल 2003 में एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा था।

बिक्रमजीत कंवरपाल ने टेलीविजन धारावाहिकों जैसे दीया और बाती हम, ये हैं चाहतें, दिल ही तो है और 24 में प्रमुख भूमिका निभाई थी। इसके अलावा वह पेज 3, पाप, कॉरपोरेट, अतिथि तुम कब जाओगे, मर्डर 2, हे बेबी, प्रेम रतन धन पायो, साहो, द गाजी अटैक और रॉकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ द ईयर जैसी फिल्मों में भी नजर आए थे।

अभिनेता के निधन की खबर फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने सोशल मीडिया पर दी है। अशोक पंडित के अलावा एक्टर मनोज बाजपेयी, श्रिया पिलगांवकर, रोहित रॉय, नील नितिन मुकेश सहित कई बॉलीवुड सितारों ने ट्वीट कर उनके निधन पर शोक जताया है।

फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने ट्वीट किया, “आज सुबह कोरोना के कारण अभिनेता मेजर बिक्रमजीत कंवरपाल के निधन के बारे में सुनकर दुख हुआ। वे एक सेवानिवृत्त सेना अधिकारी थे, जिन्होंने कई फिल्मों और टेलीविजन धारावाहिकों में सहायक भूमिकाएँ निभाई थीं। उनके परिवार और दोस्तों के प्रति हार्दिक संवेदना।”

मनोज बाजपेयी ने लिखा, ”हे भगवान, कितना दुखद समाचार है। हम एक दूसरे को 14 सालों से जानते थे, 1971 फिल्म की शूटिंग पर हमारी पहचान हुई थी। बहुत हैरानी वाली खबर।”

अभिनेता नील नितिन मुकेश ने लिखा, ”बेहद दुखद खबर, मैं मेजर बिक्रमजीत को कई सालों से जनता था। मैंने और उन्होंने साथ में कई फिल्मों में काम किया था। हमारी साथ में आखिरी फिल्म बायपास रोड थी। वह एक बेहतरीन, ऊर्जा से भरे और प्रोत्साहित करने वाले इंसान थे। उन्हें हमेशा उस ही रूप में याद किया जाएगा। आपको याद करूँगा मेरे प्यारे दोस्त।”

वहीं बॉलीवुड निर्देशक विक्रम भट्ट ने भी अभिनेता के निधन पर शोक जाहिर किया है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर बिक्रमजीत की एक फोटो शेयर करते हुए लिखा कि मेजर बिक्रमजीत कंवरपाल का निधन हो गया। इस क्रूर महामारी ने उन्हें हमसे छीन लिया।

बता दें कि कोरोना महामारी के चलते फिल्म जगत को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब तक कई कलाकारों ने कोरोना महामारी के कारण अपनी जान गँवा दी है।

बेकाबू कोरोना: 24 घंटे में पहली बार 4 लाख+ नए मरीज, 3521 की मौत – 2.98 लाख हुए ठीक

कोरोना का प्रचंड रूप नियंत्रण में आने की बजाय हर रोज और अधिक विकराल होता जा रहा है। कोरोना हर रोज, अपने पिछले रिकॉर्ड तोड़ रहा है। बीते चौबीस घंटे में देश में चार लाख से भी ज्यादा नए कोरोना मामले सामने आए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक देश में 4,01,993 नए कोरोना मामले सामने आए हैं, जो अपने आप में बेहद डरावने हैं। इसके अलावा बीते चौबीस घंटे में 3523 लोगों की कोरोना के कारण जान भी चली गई।

कोरोना के नए मामले सामने आने के बाद देश में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 1,91,64,969 हो गई है। वहीं 3,523 नई मौतों के बाद कुल मौतों की संख्या 2,11,853 हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में अब तक 1,56,84,406 लोग रिकवर हो चुके हैं, जबकि इस समय 32,68,710 एक्टिव केस हैं। मृतकों की संख्या बढ़कर अब 2,11,853 हो गई है। आईसीएमआर के मुताबिक, देश में पिछले 24 घंटे के अंदर 19,45,299 कोरोना जाँच की गई है।

देश में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जिंदगी की जंग जीतने के लिए आज यानी 1 मई से कोविड टीकाकरण का तीसरा चरण शुरू हो रहा है। इसके अंतर्गत 18 साल से ऊपर वालों को कोरोना वैक्सीन लगाई जाएगी। कई राज्यों में आज टीकाकरण के तीसरे चरण की शुरुआत हो रही है, तो कई राज्यों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। भले ही टीकाकरण का तीसरा चरण आज से शुरू कर दिया गया है लेकिन राज्यों को इसे सही तरह से शुरू में करने में अभी वक्त लगेगा।

देश की राजधानी दिल्ली और महाराष्ट्र इस समय कोरोना हॉटस्पॉट बने हुए हैं। दिल्ली में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 27,047 नए मामले सामने आए हैं। वहीं 375 मरीजों की कोरोना के कारण मौत हो गई है। अकेली दिल्ली में ही इस समय सक्रिय मरीजों की संख्या 99,361 पहुँच गई है। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में सबसे अधिक प्रभावित राज्य है कोई है तो वो है महाराष्ट्र। महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 62,919 नए मामले सामने आए। 828 लोगों की कोरोना के कारण मौत हो गई। फिलहाल महाराष्ट्र में 6,62,640 सक्रिय मामले हैं।

बिहार में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण पिछले 24 घंटे के दौरान मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह समेत 80 और लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद प्रदेश में संक्रमण से मरने वालों की संख्या शुक्रवार (अप्रैल 30, 2021) को 2560 हो गई। प्रदेश में अब तक संक्रमित हुए लोगों की संख्या बढ़ कर 470317 हो गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह की कोरोना संक्रमण से हुई मौत पर शोक और गहरी संवेदना व्यक्त की है।

ऐसी विकट स्थिति में केवल केंद्र या राज्य सरकारें ही महामारी से निपटने के लिए योजना नहीं बना रहीं बल्कि कई अन्य संस्थान भी अपने बूते पीड़ितों की मदद करने में लगे हैं। इसी क्रम में अलग-अलग राज्यों के विभिन्न मंदिर कोरोना संक्रमितों की सहायता के लिए आगे आए हैं। किसी ने दान पेटी देकर मदद की, तो किसी ने मंदिर परिसर को कोविड सेंटर बना दिया। बता दें कि इनमें वही मंदिर शामिल हैं, जिन्हें सामान्य दिनों में वामपंथी अपने निशाने पर लेते हैं। यहाँ होने वाले धर्म-कर्म के पाठ पर आपत्ति उठाते हैं। इन्हें मिलने वाले दान पर सवाल करते हैं। लेकिन जब संकट की घड़ी आती है, तब यही मंदिर निःस्वार्थ भाव के साथ जनता की मदद को आगे आ जाते हैं। 

18 महीने का बच्चा, 2 दिन तक भूखे-प्यासे माँ की लाश से खेलता रहा: पड़ोसियों ने छुआ तक नहीं, पुलिस ने गोद लिया

कोरोना संकट के भयावह दौर में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाले कई ​किस्से सुनने और देखने को मिले हैं। महामारी की वजह से कई परिवारों में अंधेरा छा गया है। इसी बीच महाराष्ट्र के पुणे में झकझोर देने वाला एक मामला सामने आया है।

​रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिंपरी चिंचवड इलाके में एक महिला की कोरोना से मौत हो गई। दो दिनों तक माँ के शव के पास उनका डेढ़ साल का बच्चा बिलखता रहा, लेकिन कोरोना के डर से किसी ने भी महिला और उनके बच्चे को हाथ नहीं लगाया। मामले की सूचना पुलिस को मिलने के बाद वहाँ पहुँचीं महिला कॉन्सटेबलों ने बच्चे को गोद में उठाया और माँ की जिम्मेदारी निभाई।

पुलिस ने बताया कि उन्हें महिला का शव बीते सोमवार (26 अप्रैल 2021) को मिला था, लेकिन उनकी मौत की संभावना दो दिन पहले की बताई जा रही है। इस दौरान महिला का डेढ़ साल का बच्चा उनके शव के पास भूखा-प्यासा बिलखता रहा। लेकिन कोरोना का डर लोगों में इस कदर फैला हुआ है कि किसी ने भी बच्चे के पास जाने की हिम्मत नहीं की।

दरअसल, पिंपरी-चिंचवड के दिघी इलाके में रहने वाली मृतक महिला का नाम सरस्वती राजेश कुमार है। मूलत: उत्तर प्रदेश की रहने वाली महिला के पति गाँव गए हुए हैं। सरस्वती और उनका डेढ़ साल का बच्चा घर में अकेले रह रहे थे। इस दौरान महिला की मौत हो गई। उस समय घर में उनके डेढ़ साल के बच्चे के अलावा कोई भी नहीं था।

बच्चे को तो ये भी पता नहीं था कि अब उसकी माँ इस दुनिया में नहीं रही। वह मासूम शव के साथ कभी खेलता, कभी रोता, कभी भूख-प्यास से छटपटाता रहा। दो दिनों तक बच्चा इसी तरह बैठा रहा। हालाँकि इसके बारे में पड़ोसियों को पता चल गया था कि बच्चा अपनी माँ के शव के पास बैठा है, लेकिन ऐसे में भी कोई बच्चे को अपनी गोद में उठाने नहीं आया।

महामारी के डर से मर गई संवेदनाएँ

रिपोर्ट्स के मुताबिक आस-पड़ोस के लोगों को आशंका थी कि महिला की मौत कोरोना से हुई है। हालाँकि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है, क्योंकि बच्चे की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई है। आस-पास के लोगों को महिला की मौत की जानकारी तब लगी, जब दो दिन बाद घर से बदबू आने लगी। इसके बाद मकान मालिक ने पुलिस को इसकी सूचना दी। जब घर का दरवाजा खोला गया तो महिला मृत मिली और बच्चा शव के पास लेटा हुआ रो रहा था।

‘कपड़े उतारो, देखूँगा बॉडी रोल के लिए सही है या नहीं’ – कास्टिंग काउच पर ईशा अग्रवाल का खुलासा

बॉलीवुड की चमचमाती दुनिया के कुछ राज ऐसे हैं जो बेपर्दा हो चुके हैं, लेकिन बदले नहीं हैं। ग्लैमर से भरी इस दुनिया का एक सच है कास्टिंग काउच, जिसका दर्द बहुत से कलाकारों ने झेला है। अक्सर कोई ना कोई कलाकार अपने कास्टिंग काउच से जुड़े अनुभव को साझा करता है। अब ‘कहीं है मेरा प्यार’ की अभिनेत्री ईशा अग्रवाल ने भी अपने कास्टिंग काउच की चौंकाने वाली कहानी बताई है।

मिस ब्यूटी टॉप ऑफ द वर्ल्ड 2019 का खिताब जीत चुकीं ईशा अग्रवाल ने स्पॉटबॉय को दिए एक इंटरव्यू में कास्टिंग काउच का खुलासा किया। ईशा अग्रवाल ने बताया, “मनोरंजन जगत में मेरा सफर आसान नहीं रहा। मुझे इसमें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लातूर जैसे छोटे कस्बे से आना और मुंबई की गलियों में नाम बनाना किसी चुनौती से कम नहीं है। जब आप एक छोटे शहर से आते हैं तो सबसे पहले आपके शोबिज में जाने के विचार को स्वीकार नहीं करते हैं, इसलिए अपने आप में यह एक बड़ी चुनौती है। लेकिन किसी तरह मैंने खुद को साबित करके अपने माता-पिता को मना लिया और पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद मुंबई पहुँच गई और ऑडिशन देने लगी।”

ईशा अग्रवाल ने आगे बताया, “कास्टिंग काउच आज भी सच है। जब मैं मुंबई में नई आई थी तो एक कास्टिंग पर्सन ने मुझे अपने ऑफिस में बुलाया था। जब मैं अपनी बहन के साथ उसके ऑफिस में पहुँची तो उसने कहा कि उसने कई बड़े कलाकारों को कास्ट किया है और मुझे भी वो अच्छा प्रॉजेक्ट देगा। अचानक से उसने मुझसे कहा कि मैं अपने कपड़े उतार दूँ क्योंकि उसे मेरा शरीर देखना है। इसका कारण उसने बताया कि वो मेरे शरीर को देखकर बताएगा कि वो रोल के लिए फिट है या नहीं। मैंने उसके ऑफर को तुरंत मना कर दिया और अपनी बहन के साथ बाहर निकल गई। उसने मुझे कई दिन मैसेज भेजे लेकिन फिर मैंने उसे ब्लॉक कर दिया।”

ईशा अग्रवाल ने मुंबई में अपने सपने पूरे करने के लिए आने वाले लोगों को सलाह दी। ईशा अग्रवाल ने कहा, “आपको बहुत से लोग मिलेंगे, जो कहेंगे कि वो बड़ी कास्टिंग कंपनी से हैं उनसे बच के रहें। वो आपको कई ऑफर देंगे, लेकिन इस ट्रैप से आपको बचना है। हमेशा सही का चुनाव करें, अगर आप में काबिलियत है तो बिना किसी कॉम्प्रोमाइज के आपको सफलता जरूर मिलेगी।”

गौरतलब है कि हाल ही में दंगल की फेम एक्ट्रेस फातिमा सना शेख ने इस पर बात की थी।  एक इंटरव्यू में फातिमा ने कास्टिंग काउच पर बड़ा बयान दिया था। फातिमा ने कहा था, “बेशक मैं भी कास्टिंग काउच का शिकार हुई हूँ। मेरे साथ कई बार ऐसा हुआ है, जब मेरे को कहा गया था कि अगर काम चाहिए तो सेक्स करना पड़ेगा। वहीं कई बार मेरे प्रोजेक्टस भी दूसरे लोगों के पास पहुँच गए, क्योंकि उनके पास रिफरेंस था।”

मर गया था, फिर मौत पर संशय… अब पक्की मौत: तेजाब डाल मारने वाला शहाबुद्दीन कोरोना वायरस से मरा

नोट1: अब खबर पक्की हो गई है। मोहम्मद शहाबुद्दीन मर गया है।

नोट2: मोहम्मद शहाबुद्दीन के मौत की यह रिपोर्ट जो पहले लिखी गई थी, उसमें अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। समाचार एजेंसी ने अपने ट्वीट को डिलीट करते हुए नई जानकारी दी है। इसके अनुसार परिवार वालों और RJD के नेता के विरोधाभाषी बयान के कारण यह गलतफहमी हुई है।

ABP न्यूज के विकास भदौरिया की मानें तो मोहम्मद शहाबुद्दीन अभी जिंदा है और उसका इलाज चल रहा है।

बिहार के सिवान के पूर्व आरजेडी सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन का कोरोना से शनिवार (मई 1, 2021) को मौत हो गई। दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल में पूर्व RJD सांसद शहाबुद्दीन की कोरोना से मौत हो गई। दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल में अपराधी और हत्यारे शहाबुद्दीन ने आज आखिरी साँस ली।

कई मामलों में सजा काट रहा मोहम्मद शहाबुद्दीन काफी समय से तिहाड़ जेल में बंद था। कोरोना पॉजिटिव होने के बाद उसे दिल्ली के पंडित दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

जानकारी के मुताबिक मोहम्मद शहाबुद्दीन वेंटिलेटर पर था। हालत गंभीर होने के चलते उसने आज दम तोड़ दिया। बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार और जेल प्रशासन को आदेश दिया था कि वह पूर्व आरजेडी सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन का इलाज करवाए और निगरानी भी करे। 

तिहाड़ जेल प्रशासन को शहाबुद्दीन के कोरोना संक्रमित होने के पता तब लगा, जब 20 अप्रैल को उसकी हालत अचानक बिगड़ने लगी। जिस तरह के लक्षण उसके शरीर में नजर आए, उसके मद्देनजर कोरोना संक्रमण जाँच कराई गई। रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही शहाबुद्दीन को तुरंत तिहाड़ जेल के डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया।

गौरतलब है कि पिछले दिनों दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्देश पर शहाबुद्दीन को 18 घंटों के लिए अपने परिजनों से मुलाकात के लिए समय दिया गया था। कड़ी सुरक्षा में उसे परिजनों से मुलाकात कराया गया। उच्च-न्यायालय ने सशर्त पैरोल के तहत उसे सुविधा दी थी कि वो 6-6 घंटे के लिए दिल्ली में कहीं भी मुलाकात कर सकता है। बता दें कि ये सब चंदेश्वर प्रसाद उर्फ़ चंदा बाबू की मृत्यु के बाद हुआ, जिनके 3 बेटों को शहाबुद्दीन ने मार डाला था।

शहाबुद्दीन ने चंदा बाबू के दो बेटों को तेजाब से नहला कर मार डाला। इस मामले में उनका तीसरा बेटा गवाह था लेकिन इससे पहले कि वो अदालत पहुँचता, उसकी भी हत्या कर दी गई। लेकिन, इस मामले में आरोपित शहाबुद्दीन का उस समय कुछ नहीं हो पाया। नाम से ही सीवान और आसपास के इलाक़े थर-थर काँपते थे।

1980 के दशक तक सिवान की सियासत में आपराधिक तत्वों का बोलबाला था। 1980 के दशक में कई अपराधों में नाम आने के बाद शहाबुद्दीन ने सियासत में एंट्री की। एक दौर था, जब तेजाब कांड हो, चंद्रशेखर हत्याकांड हो या सिवान में कोई भी अपराध, शहाबुद्दीन का नाम हमेशा सुर्खियों में रहता था। जिले के अस्पताल हो, स्कूल हों या बैंक या फिर कोई भी दफ्तर… हर जगह ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर शहाबुद्दीन का कानून चलता था।