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बांग्लादेश में मोदी दौरे के बाद कट्टरपंथियों ने हिंदू मंदिरों को बनाया निशाना, ट्रेनों-बसों को भी किया क्षतिग्रस्त

बांग्लादेश में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो दिवसीय दौरे के बाद अब वहाँ कट्टरपंथियों ने हिंदू मंदिर पर हमला बोला है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक बांग्लादेश से पीएम मोदी के लौटने के बाद हिंसा बढ़ गई है।

रिपोर्ट में बताया गया कि इस्लामिक गुटों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ हिंसक झड़प में कम से कम 10 लोगों की मौत हुई, जिसके चलते कट्टरपंथी समूह और उग्र हो गए। रविवार को पूर्वी बांग्लादेश में एक ट्रेन को भी हिफाजत-ए-इस्लाम नाम के कट्टरपंथी समूह द्वारा निशाना बनाया गया।

रॉयटर्स के अनुसार, एक पुलिस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि इस्लामी समूह के लोगों ने रविवार को एक ट्रेन पर हमला किया। इंजन रूम के साथ लगभग हर कोच को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। इसके अलावा रविवार को राजशाही के पश्चिम जिले में दो बसों में आग लगाई, जबकि सैंकड़ों प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के साथ झड़प में उन पर पत्थरबाजी की।

एक पत्रकार ने एजेंसी को बताया, “ब्राह्मणबरिया इस वक्त जल रहा है। प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न सरकारी कार्यालयों में अंधाधुंध आग लगाई और प्रेस क्लब पर भी हमला किया गया। प्रेस क्लब के अध्यक्ष सहित कई घायल हुए। हम अत्यधिक भय में हैं और बहुत असहाय महसूस कर रहे हैं। कई हिंदू मंदिरों पर भी हमला हो रहा है।

पत्रकार के अनुसार, प्रदर्शनकारी सड़कों को अवरुद्ध करने के लिए लकड़ी और रेत के बैगों का इस्तेमाल कर रहे हैं। पुलिस ने इन पर रबर की गोलियों और आँसू गैस से जवाबी कार्रवाई की है, जिसके चलते नारायणगंज में दर्जन से ज्यादा घायल हैं।

बता दें कि पीएम मोदी बांग्लादेश के 50वें स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित जश्न के मौके पर वहाँ पहुँचे थे। लेकिन हिफाजत ए इस्लाम जैसे इस्लामिक गुटों ने वहाँ उनका विरोध शुरू कर दिया। कट्टरपंथी समूहों ने पीएम मोदी पर मुसलमानों के खिलाफ होने का आरोप लगाया और दो दिन हिंसा भड़काते रहे।

उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी के ढाका पहुँचने पर शुक्रवार को मदरसों से निकलकर कट्टरपंथियों की उग्र भीड़ ने वहाँ जमकर उत्पात मचाया था। इस दौरान थाने पर पत्थरबाजी कर तोड़फोड़ हुई और थाने में आग लगाने का भी प्रयास किया गया। हालातों को काबू करने के लिए पुलिस को बल का प्रयोग करना पड़ा। जिसके बाद ओपन फायरिंग में 5 लोग मारे गए। इनमें से 4 लोग हिफाजत-ए-इस्लाम संगठन के थे। 

वाजे का सहयोगी रियाज काजी नंबर प्लेट की दुकान में प्रवेश करते कैमरे में कैद, सबूत नष्ट करने का आरोप: रिपोर्ट्स

महाराष्ट्र राज्य को हिलाकर रख देने वाले सचिन वाजे मामले में ताजा घटनाक्रम में उनके करीबी एपीआई रियाज़ काज़ी को सीसीटीवी फुटेज में विक्रोली में नंबर प्लेट की दुकान में प्रवेश करते हुए पाया गया है। रिपब्लिक टीवी की रिपोर्ट के अनुसार रियाज काजी ने नष्ट करने के इरादे से दुकान के मालिक से डीवीआर फुटेज माँगा। मालिक के साथ बातचीत के बाद उसे डीवीडी और एक कंप्यूटर ले जाते हुए देखा जा सकता है।

दुकान के मालिक को एजेंसी द्वारा पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। दुकान मालिक का बयान दर्ज किया गया है। एनआईए और एटीएस सूत्रों का हवाला देते हुए, रिपब्लिक ने कहा कि काजी को वर्तमान में सबूतों को नष्ट करने के आरोप में जाँच की जा रही है।

एनआईए और एटीएस दोनों द्वारा रियाज काजी को एंटीलिया बम कांड की जाँच और व्यापारी मनसुख हिरेन की हत्या में अपनी भूमिका जानने के लिए कई बार तलब किया गया है। विक्रोली की एक दुकान पर बनाई गई कई नंबर प्लेट एनआईए द्वारा जब्त की गई कारों से बरामद हुईं हैं। 

इससे पहले, रियाज काजी को ठाणे में सचिन वाजे के आवास परिसर से सीसीटीवी फुटेज एकत्र करते देखा गया था। सूत्रों के मुताबिक, दोनों एजेंसियों को कथित तौर पर रियाज काजी पर शक है कि सचिन वाजे को फर्जी नंबर प्लेट खरीदने और अहम सबूत नष्ट करने में मदद मिली है।

कई सबूत नष्ट किए गए

मनसुख हिरेन की मौत के मामले में मुख्य आरोपित सचिन वाजे ने कथित तौर पर एनआईए के सामने स्वीकार किया है कि उसने पाँच मोबाइल फोन नष्ट कर दिए। अधिकारियों को संदेह है कि वाजे कम से कम 13 मोबाइल फोन का उपयोग कर रहा था।

सचिन वाजे से बरामद बेहिसाब गोलियाँ

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने एक विशेष अदालत को सूचित किया था कि उसने पूर्व सहायक पुलिस निरीक्षक (API) सचिन वाजे के घर से 62 बेहिसाब गोलियाँ बरामद की थी। रिपोर्टों के अनुसार, एनआईए को 30 में से केवल 5 गोलियाँ ऐसी मिलीं जो आधिकारिक तौर पर उसकी सर्विस पिस्टल के लिए आवंटित की गई थीं।

ओवैसी ने बंगाल विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का किया ऐलान: जंगीपुरा और सागरदीघी से उतारे उम्मीदवार, TMC की बढ़ी मुसीबत

पश्चिम बंगाल में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अकेले ही चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है। शनिवार को ओवैसी ने फुरफुरा शरीफ के प्रभावशाली इस्लामी आलिम पीरजादा अब्बास सिद्दीकी का समर्थन करने की अपनी बात से यू-टर्न ले लिया। इसी के साथ बंगाल में बीजेपी और टीएमसी को टक्कर देने के लिए बना कॉन्ग्रेस, वाम मोर्चा और आईएसएफ का गठबंधन फेल हो गया है।

ओवैसी ने अपने चुनावी अभियान की शुरुआत मुर्शिदाबाद से करते हुए 2 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान भी कर दिया। AIMIM ने नूर महबूब आलम को सागरदीघी और असदुल शेख को जंगीपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतार दिया है। ओवैसी ने आने वाले दिनों में अन्य उम्मीदवार भी उतारने की बात कही है। सूत्रों के मुताबिक ओवैसी मुर्शिदाबाद की 13 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रहे हैं।

फुरफुरा शरीफ के मौलाना सिद्दीकी को समर्थन देने के सवाल पर AIMIM चीफ ने कहा कि , “किसी की जरूरत नहीं है। हम अपने बल पर चुनाव लड़ेंगे।” ओवैसी का दावा है कि कांग्रेस-लेफ्ट-आईएसएफ के संयुक्त मोर्चा का ये गठबंधन बुरी तरह से फेल होने वाला है, क्योंकि वामपंथियों के कारण मुसलमान परेशान हैं।

PM मोदी पर ओवैसी ने किया कटाक्ष

ओवैसी ने एक रैली में कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश में दावा किया है कि उसकी स्वतंत्रता के लिए उन्होंने सत्याग्रह किया था। अगर आपने ऐसा किया है तो फिर मुर्शिदाबाद के लोगों को बांग्लादेशी क्यों कहा जाता है?”

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने कहा कि वह मुसलमानों के लिए काम करने का दावा करती हैं, लेकिन उन्होंने उनके लिए कुछ भी नहीं किया। बंगाल के मुसलमान अभी भी शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य की समस्याओं से जूझ रहे हैं। ममता दो बार टीएमसी की विधायक बनीं, लेकिन बावजूद इसके शुद्ध पेयजल की कमी है।

ममता द्वारा नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध को ओवैसी ने ढोंग करार दिया और कहा कि अपनी वोट बैंक की राजनीति चमकाने और मुसलमानों का इस्तेमाल करने के लिए उन्होंने नारा दिया और भाजपा पर आरोप लगाया कि वह हिंदुओं और मुसलमानों के बीच राज्य को विभाजित करने की कोशिश कर रही है।

इससे पहले पिछले साल 2020 में मौलाना अब्बास सिद्दीकी ने खुद को ओवैसी का बड़ा फैन बताया था। आईएसएफ के नेता सिद्दीकी ने कहा था कि वो इसलिए चुनाव में हिस्सा ले रहे हैं, क्योंकि कुछ लोग धर्म के आधार पर समाज को बाँटने में लगे हुए हैं। 31% वोट शेयर के साथ पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों का रुझान काफी मायने रखता है। TMC के नेताओं ने भी स्वीकार किया है कि अब्बास सिद्दीकी एक प्रभावशाली मुस्लिम नेता हैं, जिन्होंने कई मौकों पर AIMIM का खुल कर समर्थन किया है।

वहीं ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव 2021 के लिए आदर्श अचार संहित लागू होने से कुछ ही घंटों पहले ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार ने फुरफुरा शरीफ के विकास के लिए 2.60 करोड़ रुपए आवंटित किया। जबकि, ममता सरकार ने वित्त वर्ष 2020-21 में वित्त विभाग ने 20 करोड़ रुपए आवंटित किए थे।” ताकि मुस्लिम वोटों का तुष्टिकरण किया जा सके।

केरल में CPM कैडरों ने BJP उम्मीदवार शोभा सुरेंद्रन के काफिले पर किया हमला, पार्टी कार्यकर्ता घायल

केरल में विधानसभा चुनावों से पहले, भाजपा की वरिष्ठ नेता शोभा सुरेंद्रन और पार्टी कार्यकर्ताओं पर तिरुवनंतपुरम में एक चुनावी रैली के दौरान भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के कार्यकर्ताओं ने शारीरिक हमला किया।

खबरों के मुताबिक, शुक्रवार (मार्च 26, 2021) को सीपीएम कार्यकर्ताओं द्वारा भाजपा नेता शोभा सुरेंद्रन के काफिले पर हमला किया गया, जिसमें कई लोग घायल हो गए। शोभा सुरेन्द्रन तिरुवनंतपुरम जिले के काज़ख़ुट्टम विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की उम्मीदवार हैं।

काफिले और बीजेपी कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश में सीपीएम कार्यकर्ताओं ने लापरवाही से मोटरबाइक चलाई। हमलावर कथित तौर पर सीपीएम की युवा शाखा डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) के थे।

हमले के बाद, DYFI सदस्य मौके से भाग गए और CPM बूथ कार्यालय के अंदर शरण ली। भाजपा नेताओं ने सीपीएम बूथ कार्यालय के बाहर विरोध किया और हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। हालाँकि, केरल पुलिस ने सीपीएम कार्यकर्ताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

सुरेंद्रन ने संवाददाताओं से कहा, “लोकसभा चुनाव के दौरान एटिंगल में सीपीएम द्वारा अपनाई गई रणनीति अब कजाककुट्टम में दोहराई जा रही है। कड़कम्पल्ली ने पहले कहा था कि वह महिलाओं का सम्मान करता है। लेकिन हमले के बाद, मंत्री के बयान की संवेदनहीनता उजागर हुई।”

केरल में बीजेपी अतिक्रमण कर रही है। दोनों गुट – कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) और लगातार वाम-गठबंधन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) आक्रामक है और राज्य में राजनीतिक हिंसा का यह दोहरा उदाहरण है।

उल्लेखनीय है कि भगवा पार्टी के राज्य में फिर से स्थान बनाने की कोशिश को देखते हुए पिछले कुछ वर्षों में इस्लामवादियों और वामपंथी समूहों ने केरल में कई आरएसएस और भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी। केरल में 140 विधायकों को चुनने के लिए 6 अप्रैल को विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इनके परिणाम 2 मई को घोषित किए जाएँगे।

पंजाब में अरुण नारंग की लिंचिंग के पीछे भाजपा का हाथ, हमारे लोगों ने केवल काले झंडे दिखाए: राकेश टिकैत

पंजाब में कृषि कानून के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने कल (मार्च 27, 2021) अबोहर से बीजेपी विधायक अरुण नारंग के साथ बीच सड़क पर बदसलूकी की और आज किसान नेता राकेश टिकैत पूरी घटना का ठीकरा भाजपा पर ही फोड़ रहे हैं। बीकेयू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने दावा किया है कि भाजपा विधायक अरुण नारंग पर हमला भाजपा ने किया। प्रदर्शनकारी तो सिर्फ़ काले झंडे दिखा रहे थे। 

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार टिकैत ने कहा, “हमारे लोग लिंचिंग में शामिल नहीं थे। हमारे लोगों ने काले झंडे जरूर दिखाए लेकिन घटना में उनकी कोई संलिप्ता नहीं है। ये सब किसानों को बदनाम करने के लिए किया गया है।” 

बता दें कि कल अबोहर से भाजपा विधायक अरुण नारंग पर हमला करते हुए बीच सड़क पर किसान प्रदर्शनकारियों ने उनके कपड़े फाड़े थे, जिसकी वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। वीडियो में नारंग को बिना कपड़ों के देखा जा सकता है।

जानकारी के मुताबिक, प्रेस वार्ता के लिए जाते समय अरुणा नारंग के साथ यह घटना मलोट में हुई। भाजपा कार्यालय पर प्रदर्शनकारी पहले से ही उनका इंतजार कर रहे थे। नारंग के पहुँचते ही सभी प्रदर्शनकारी उन पर हमलावर हो गए।

पहले उन पर इंक फेंकी गई और कार को भी गंदा किया गया। उस समय तो किसी तरह भाजपा कार्यकर्ता और पुलिस मिल कर उन्हें एक दुकान के अंदर ले गई। लेकिन वह जैसे ही बाहर आए उन पर दोबारा हमला हुआ। बर्बरता से उनके साथ खींचतान की गई। उनके कपड़े फाड़े गए। उन्हें बीच सड़क पर नंगा कर दिया गया।

उल्लेखनीय है कि प्रदर्शनकारियों के बर्ताव पर हैरानी इसलिए भी है क्योंकि अरुण नारंग भाजपा पार्टी द्वारा लाए कृषि कानून का विरोध कर रहे थे। यानी वह किसानों के समर्थन में थे। उन्होंने दिसंबर में ही कहा था कि मोदी सरकार को जल्द से जल्द इसका समाधान खोजना चाहिए।

मदरसा-मौलवी, सऊदी शेखों की फंडिंग, ISI की कठपुतली: मोदी विरोधी हिफाजत-ए-इस्लाम के बारे में जानें सब कुछ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश पहुँचने से पहले ही बांग्लादेशी कट्टरपंथियों ने दौरे का विरोध शुरू कर दिया था। वामपंथी भी इसमें उनके साथ थे। उनके दौरे के दौरान भी हिंसा हुई। उनके भारत लौटने के बाद भी बांग्लादेश से हिंसा की खबरें आ रही हैं।

शुक्रवार (26 मार्च 2021) को मोदी बांग्लादेश पहुँचे थे। उस दिन जुमे की नमाज के बाद कट्टरपंथियों ने जमकर हिंसा और आगजनी की थी। इस दौरान हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था, जिसमें चार की मौत हो गई थी। शनिवार को पूरे बांग्लादेश में फेसबुक बंद होने की खबरें मीडिया में आती रहीं।

बांग्लादेश में मचे बवाल के पीछे जिस एक कट्टरपंथी संगठन का नाम प्रमुखता से आ रहा है वह है, हिफाजत-ए-इस्लाम। मोदी की यात्रा के विरोध में शुक्रवार को हिंसा-आगजनी में भी वह शामिल था। शनिवार को चटगाँव से ढाका तक मार्च निकाला। रविवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया था। पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के इशारे पर काम करने वाले इस कट्टरपंथी संगठन को अपनी गतिविधि जारी रखने के लिए सऊदी अरब से काफी फंडिंग मिलती है।

हिफाजत ए इस्लाम के लोग मोदी विरोध में एकत्रित (साभार: अलजजीरा)

2010 में इस कट्टरपंथी इस्लामी संगठन को बनाया गया था। इसे बनाने में बांग्लादेश के मदरसों के उलेमा और छात्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस संगठन को ISI का पूरा समर्थन है।

बांग्लादेश में मोदी विरोध में एकत्रित हिफाजत ए इस्लाम के लोग (साभार: अलजजीरा)

द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, ISI के अलावा हिफाजत-ए-इस्लाम को फाइनेंसिंग का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब के कट्टरपंथी शेखों के जरिए प्राप्त होता है। इस संगठन की प्रमुख माँग है कि बांग्लादेश को इस्लामी देश करार दिया जाए।

हिफाजत-ए-इस्लाम की स्थापना में हतज़ारी मदरसा के पूर्व डॉयरेक्टर अहमद शफी, वर्तमान अमीर ए हिफाजत अल्लामा जुनैद बाबुनगरी और इस्लामिक पार्टी इस्लामी ओइक्या जोते के चेयरमैन मुफ्ती इजहारुल इस्लाम प्रमुख नाम हैं। इनके अलावा पहली महिला क्वामी मरदसे की संस्थापक और प्रिंसपल अब्दुल मालेक हलीम भी इस संगठन के संस्थापक सदस्यों में शामिल हैं।

इस संगठन पर आरोप लगते रहे हैं कि इनका संबंध जमात-ए-इस्लामी और तालिबान जैसे आतंकी संगठनों से हैं। हालाँकि, हिफाजत इन आरोपों को खारिज करता रहा है। 7 अक्टूबर 2013 में इस संगठन के एक नेता द्वारा संचालित किए जा रहे मदरसे में विस्फोट हुआ था। छापेमारी में विस्फोटक बरामद हुए थे। लेकिन मदरसा प्रशासन का दावा था कि कम्प्यूटर का यूपीएस फटा था। 

ग्रीक देवी की मूर्ति

साल 2017 में इसी संगठन ने ग्रीक देवी की मूर्ति बांग्लादेश के सर्वोच्च न्यायालय में देख प्रदर्शन किया था। संगठन का कहना था कि बांग्लादेश में इस्लाम को कमजोर करने के लिए ये एक साजिश है। बाद में वह मूर्ति न्यायालय से हटानी पड़ी थी।

बता दें कि हिफाजत-ए-इस्लाम हमेशा से बांग्लादेश को इस्लामी देश बनाने की पैरवी करता रहा है। साल 2016 में जब सुप्रीम कोर्ट ने बांग्लादेश संविधान से इस्लाम शब्द हटाने की याचिका को स्वीकार किया था, तो इसका विरोध करते हुए धमकियाँ दी थीं। हिफाजत ने कहा था कि देश का राष्ट्र धर्म यदि इस्लाम होगा तो इससे अल्पसंख्यकों के धर्म पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

इसके अलावा इस संगठन के तमाम प्रमुख नेताओं पर हत्या, तोड़फोड़, आगजनी जैसे गंभीर आरोप हैं। इस संगठन का कहना है कि संविधान में सर्वेसर्वा अल्लाह को माना जाए और जो कोई भी इस्लाम को बदनाम करे उसके ख़िलाफ़ मौत की सजा का प्रावधान हो। इसके अलावा नास्तिकों और गैर इस्लामी लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई हो। इस्लामी शिक्षा को अनिवार्य करने, अहमदियों को गैर मुस्लिम करार देने और स्कूलों में मूर्तियों पर पाबंदी की माँग वह करता है। साथ ही हर उलेमा और मदरसा छात्र को हर इल्जाम से बाइज्जत बरी करने की भी माँग कर रहा है।

महाराष्ट्र की सियासत में नया मोड़: परमबीर के लेटर बम से शिवसेना-NCP की दोस्ती में दरार, बिहार दोहराए जाने के आसार

एंटीलिया केस और मनसुख हिरेन मौत के मामले में घिरी महाराष्ट्र सरकार एक बार फिर मुश्किलों के दौर से गुजर रही है। मामले में पूर्व पुलिस कमिश्नर के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर वसूली का आरोप लगाने के बाद से महाविकास अघाड़ी सरकार में अंदरूनी खटपट भी तेज हो गई है। अब यह खटपट शिवसेना के मुखपत्र सामना के पन्नों में भी दिखने लगी है।

महाराष्ट्र में निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को लेकर राजनीति और गर्म होता जा रहा है। इस मामले को लेकर महाराष्ट्र में लगातार विपक्ष हमला कर रहा है वहीं आज (मार्च 28, 2021) शिवसेना ने सामना में महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर सवाल उठाया है। शिवसेना के सासंद संजय राउत ने सामना में लिखा है कि सचिन वाजे वसूली कर रहा था और राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख को इसकी जानकारी नहीं थी? देशमुख को गृह मंत्री का पद दुर्घटनावश मिल गया।

आखिर एपीआई स्तर के अधिकारी सचिन वाजे को इतने अधिकार किसने दिए? यही जाँच का विषय है। पुलिस आयुक्त, गृहमंत्री, मंत्रिमंडल के प्रमुख लोगों का दुलारा व विश्वासपात्र रहा सचिन वाजे महज एक सहायक पुलिस निरीक्षक था लेकिन उसे सरकार में असीमित अधिकार किसके आदेश पर दिया गया। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री ने वाजे को 100 करोड़ रुपए वसूलने का टारगेट दिया था, ऐसा आरोप मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह लगा रहे हैं।

सामना में संजय राउत लिखते हैं, “अनिल देशमुख ने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से बेवजह पंगा लिया। गृहमंत्री को कम से कम बोलना चाहिए। बेवजह कैमरे के सामने जाना और जाँच का आदेश जारी करना अच्छा नहीं है। सौ सुनार की एक लोहार की ऐसा बर्ताव गृहमंत्री का होना चाहिए। पुलिस विभाग का नेतृत्व सिर्फ सैल्यूट लेने के लिए नहीं होता है। वह प्रखर नेतृत्व देने के लिए होता है। प्रखरता ईमानदारी से तैयार होती है, ये भूलने से कैसे चलेगा?”

इधर अनिल देशमुख ने जानकारी देते हुए बताया कि उन पर लगे भ्रष्टाचार और वसूली से जुड़े आरोप की जाँच अब हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे। देशमुख ने कहा, “जो आरोप मुझ पर पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर ने लगाए थे, मैंने उसकी जाँच कराने की माँग की थी। मुख्यमंत्री और राज्य शासन ने मुझ पर लगे आरोपों की जाँच उच्च न्यायालय के रिटायर्ड जज के द्वारा कराने का निर्णय लिया है। जो भी सच है वह सामने आएगा।”

उल्लेखनीय है कि मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के लेटर बम से शिवसेना-एनसीपी की दोस्ती में दरार पड़ती दिखाई दे रही है। इससे न केवल एनसीपी बल्कि शिवसेना की छवि को भी बड़ा झटका लगा है। इस पूरी पिक्चर में कॉन्ग्रेस गायब है। जाहिर है कि शिवसेना अपनी छवि बचाने के लिए इस चक्रव्यूह से निकलना चाहेगी। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि महाराष्ट्र में बिहार पैटर्न दोहराया जा सकता है।

देश के शीर्ष उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित निवास एंटीलिया के बाहर जिलेटिन की छड़ों से लदी एक कार बरामद होने के बाद क्राइम इंटेलीजेंस यूनिट (CIU) के पूर्व प्रमुख एपीआई सचिन वाजे की गिरफ्तारी से महाराष्ट्र की सियासत में नया नया मोड़ आ गया है।

बता दें कि बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद नीतीश कुमार ने राजद से नाता तोड़कर भाजपा के साथ वापस सरकार बना ली थी। माना जा रहा है कि शिवसेना एक बार पुन: पूर्व सहयोगी पार्टी भाजपा से हाथ मिला सकती है। ऐसे में कॉन्ग्रेस-राकांपा अलग-थलग पड़ जाएँगे। हालाँकि, होली से एक दिन पहले एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर इन अटकलों को और हवा दे दी है।

शिवसेना की बजाए घिर गई एनसीपी

एंटीलिया मामले की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने शुरू की तो वाजे की करतूत सामने आने लगी। इस मामले में पूरी तरह से शिवसेना को निशाना बनाया जाने लगा। सचिन वाजे को कोरोना काल के दौरान पिछले जून महीने में बहाल किया गया था। तब से यह माना जा रहा था कि वह शिवसेना का खासमखास है। वहीं, यह भी खबरें चली कि वाजे की बहाली के मुद्दे पर एनसीपी ने विरोध जताया था, लेकिन अब सिंह के पत्र से इससे पूरे प्रकरण में एनसीपी का असली चेहरा सामने आ गया है। 

अनिल देशमुख के मंत्री पद पर ग्रहण, सरकार के अस्तित्व पर सवाल

बहरहाल लेटर बम से महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के मंत्री पद पर ग्रहण लग चुका है, लेकिन महाविकास आघाड़ी सरकार के अस्तित्व पर भी सवालिया निशान लग गया है। इस घटनाक्रम के बीच बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र में बिहार पैटर्न दोहराया जा सकता है।

शिवसेना और एनसीपी में बढ़ेगी दूरी

परमबीर सिंह ने अपने पत्र में 100 करोड़ रुपए की वसूली का टारगेट तय करने के मामले में पूरी तरह से एनसीपी को ही निशाना बनाया है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि अनिल देशमुख के इस भ्रष्टाचार के संबंध में शरद पवार और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को भी अवगत कराया था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 

परमबीर सिंह के तबादले के बाद शिवसेना ने खुलकर उनका बचाव किया। पार्टी के मुखपत्र में दावा किया गया कि परमबीर सिंह दिल्ली की खास लॉबी के शिकार हुए, लेकिन अब सिंह के पत्र के बाद राजनीतिक परिस्थिति पूरी तरह से बदली हुई नजर आ रही है। इसके बाद शिवसेना और एनसीपी के बीच दोषारोपण की शुरुआत भी हो गई है। इससे दोनो दलों के बीच दूरी बढ़ेगी जिसका पूरा फायदा भाजपा उठाएगी।

इससे पहले कॉन्ग्रेस और शिवसेना के बीच नाराजगी भी सामने आ चुकी है। महाराष्ट्र में अलग-अलग विचारधारा वाले तीन दलों की महाविकास अघाड़ी सरकार में कॉन्ग्रेस महत्वपूर्ण घटक है। प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने शिवसेना को इसकी याद दिलाई थी। पटोले ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के चेयरमैन पद के लिए एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार की लॉबिंग कर रहे शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत को एक तरह से आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि शिवसेना को यह नहीं भूलना चाहिए कि महा विकास अघाड़ी सरकार कॉन्ग्रेस के समर्थन से ही बनी है। वे शरद पवार की वकालत न करें।

शनिवार (मार्च 27, 2021) को मुंबई से सटे भिवंडी में कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए नाना पटोले ने संजय राउत को फिर से नसीहत दी कि वे पार्टी के नेताओं पर टिप्पणी करने से बाज आएँ। अगर वे ऐसा ही करते रहे तो हमें भी कुछ सोचना पड़ेगा। पटोले ने एक तरह से साफ शब्दों में संकेत दिया कि यदि टीका-टिप्पणी बंद नहीं हुई तो कॉन्ग्रेस महाविकास आघाड़ी से अपना हाथ खींच सकती है। साथ ही, पटोले ने निकाय चुनाव अपने दम पर लड़ने का ऐलान किया। 

अब अगर उन बातों को ध्यान से समझने की कोशिश करें जो परमबीर सिंह की अर्जी में शामिल हैं तो ये भी आसानी से समझ आ जाएगा कि परमबीर सिंह का एक्टिविज्म अगर जाती दुश्मनी भर ही नहीं सिमटा है तो उससे किसे फायदा मिल रहा है – या कहें कि वो किसे फायदा पहुँचाने के लिए सक्रिय हो सकते हैं या फिर वो भी किसी बड़ी राजनीतिक रणनीति का अंदर ही अंदर हिस्सा बने हुए हैं – ये सवाल तो उठेंगे ही। वैसे भी ऐसे सवालों को हवा भी वही दे रहे हैं।

  • परमबीर सिंह की अदालती अर्जी में बताया गया कि 20 मार्च को उद्धव ठाकरे को चिट्ठी लिखने से पहले वो मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम के साथ साथ कई नेताओं से ब्रीफिंग में बता चुके थे कि अनिल देशमुख की अगुवाई में गृह मंत्रालय में क्या क्या चल रहा है।
  • जैसा कि परमबीर सिंह ने चिट्ठी में लिखा था, अदालती अर्जी में भी आरोप लगाया कि ट्रांसफर-पोस्टिंग में भ्रष्टाचार के साथ-साथ सचिन वाजे के जरिए हर महीने 100 करोड़ का टारगेट तय किया गया था।
  • चिट्ठी की ही तरह परमबीर सिंह ने अर्जी में लिखा कि सांसद मोहन डेलकर की आत्महत्या की जाँच में भी अनिल देशमुख अलग से दिलचस्पी ले रहे थे और बीजेपी के कुछ नेताओं की भूमिका की जाँच करने और उनको फँसाने के लिए पुलिस अफसरों पर दबाव डाल रहे थे।

ये तीनों ही बातें कई चीजें साफ कर दे रही हैं। जो भी गड़बड़ी चल रही है, उसकी जानकारी अगर उद्धव ठाकरे को हुई भी है तो परमबीर सिंह की ब्रीफिंग या चिट्ठी के जरिए ही हुई है – मतलब, पूरा ठीकरा अनिल देशमुख के सिर फोड़ा जा रहा है। ऐसा होना बाहर से बीजेपी के फायदे में है यानी देवेंद्र फडणवीस के फायदे की बात है और अंदर से उद्धव ठाकरे के फायदे की बात है। एनसीपी का बचाव की स्थिति में होना गठबंधन में उद्धव ठाकरे का प्रभाव बढ़ाएगा। अगर प्रभाव नहीं भी बढ़े तो सरकार को लेकर जिस रिमोट कंट्रोल की चर्चा रहती है, उसकी पकड़ और असर तो कम होगा ही।

ये सारी चीजें साफ-साफ बता और जता रही हैं कि अकेले परमबीर सिंह का एक ही तीर, एक ही साथ मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है – कहीं ये भविष्य के किसी राजनीतिक समीकरण की एडवांस ‘पावरी’ तो नहीं हो रही है?

16 साल की हिंदू लड़की को बंधक बना 40 साल के मो. जुनैद ने तीन दिन तक किया रेप, दी जान से मारने की धमकी

पंजाब के अमृतसर में 16 वर्षीय हिंदू लड़की को दरगाह पर जाना महँगा पड़ गया। वह अमृतसर के जीटी रोड के पास बनी पंजपीर की मजार पर अक्सर माथा टेकने जाया करती। इसी दौरान उससे मिले 40 साल के मोहम्मद जुनैद ने उसे अपनी बातों के जाल में फँसाकर दोस्ती कर ली। इसके बाद आरोपी उसे बाइक पर ले गया और तीन दिन तक उसके साथ बलात्कार किया।

आरोपित जुनैद के खिलाफ सदर थाना पुलिस ने दुष्कर्म, अपहरण व हत्या की धमकी देने का केस दर्ज किया है। हालाँकि, दरिंदा अभी भी कानून की पकड़ से बाहर है। सदर थाने के प्रभारी इंस्पेक्टर परवीन कुमार ने बताया कि आरोपित की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।

मेडिकल में बलात्कार की पुष्टि हुई

किशोरी का परिवार मजदूरी करके अपना भरण-पोषण करता है। युवती के परिजनों के मुताबिक वह पंजपीर की दरगाह पर अक्सर माथा टेकने के लिए जाते थे। इसी दौरान आरोपी से उसकी मुलाकात हुई थी। मकबूलपुरा थाने की एसआई अमनदीप कौर ने बताया कि पीड़िता का सिविल हॉस्पिटल में इलाज कराया जा रहा है। मेडिकल में उसके साथ रेप किए जाने की पुष्टि हो चुकी है।

22 मार्च को घर से जबरन उठा लिया था

पीड़िता के परिवारवालों ने आरोप लगाया है आरोपित 22 मार्च को बाइक से उनके घर गया और लड़की को लेकर कोर्ट चला गया और वहाँ उससे खाली पेपर पर हस्ताक्षर करवा लिया। आरोपी ने कहा कि वो उससे शादी करेगा। इसके बाद जुनैद लड़की को दादुआना गाँव के एक खाली मकान में ले गया और तीन दिन तक उसकी अस्मत को नोचता रहा।

हिंदू महासभा ने की आवाज बुलंद कहा- दिलाएँगे इंसाफ

हिंदू लड़की से रेप के मामले में अब हिंदू महासभा उसे इंसाफ दिलाने के लिए आगे आई है। महासभा के राज्य अध्यक्ष राज कुमार शर्मा और जिला अध्यक्ष गुलशन राय ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार और प्रशासन इस पर रोक नहीं लगा पाता है तो वे अपने तरीके से इससे निपटेंगे। महासभा ने कहा कि वह पीड़ित परिवार को हर तरह की कानूनी सहायता देगा।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के बरेली में 14 साल की नाबालिग दलित हिन्दू लड़की को खालिद नाम के मुस्लिम युवक ने हिंदू नाम रखकर पहले झूठे प्रेम जाल में फँसाया और फिर उसके साथ 4 बार रेप किया। एक दिन जब लड़की को उसकी हकीकत का पता चला तो उसने उससे मिलना बंद कर दिया। इसके बाद आरोपित ने उसका अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल किया।

40+ मस्जिदों को प्लास्टिक से ढक दिया UP पुलिस-प्रशासन ने, ‘जूता मार होली’ के लिए स्पेशल व्यवस्था

जिस तरह उत्तर प्रदेश के मथुरा के बरसाना और नंदगाँव की ‘लट्ठमार होली’ (लाठी के साथ होली का जश्न) दुनिया भर में प्रसिद्ध है, उसी तरह शाहजहाँपुर जिले में हर वर्ष होली के दिन खेली जाने वाली ‘जूता मार होली’ की भी एक अलग पहचान है। शाहजहाँपुर की इस होली के लिए इस बार जश्न की खास तैयारी की जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक यहाँ प्रशासन ने इलाके में करीब 43 मस्जिदों को प्लास्टिक की शीट से ढक दिया है, ताकि होली के दिन यहाँ कोई अप्रिय घटना ना हो पाए। पुलिस प्रशासन पूरी मुस्तैदी से जुट गया है। आयोजकों के मुताबिक, इस बार ‘लाट साहब’ दिल्ली से आएँगे, जबकि पिछली बार ‘लाट साहब’ रामपुर से लाए गए थे। होली के दिन भैंसा गाड़ी पर निकलने वाले जुलूस में ‘लाट साहब’ मुख्‍य आकर्षण होते हैं।

दरअसल यहाँ शहर में लाट साहब के 2 जुलूस निकलते हैं। जहाँ बड़े लाट साहब और छोटे लाट साहब का जुलूस निकाला जाता है। जिसमें एक शख्स को लाट साहब बनाकर भैंसा गाड़ी पर बैठाया जाता है और फिर उसे जूते और झाड़ू मार कर पूरे शहर में घुमाया जाता है। इस दौरान आम लोग लाट साहब को जूते भी फेंक कर मारते हैं।

क्या होता है जूता मार होली में?

आपको बता दें कि अंग्रेजों के प्रति अपना आक्रोश प्रकट करने के लिए यहाँ एक व्यक्ति को अंग्रेज का प्रतीक लाट साहब बनाकर उसे भैंसा गाड़ी पर बिठाया जाता है और फिर जूतों और झाड़ू से पीटा जाता है। सांप्रदायिक सौहार्द ना खराब हो इसके लिए पुलिस और प्रशासन हर थाना स्तर पर पीस मीटिंग का आयोजन करता है और आपसी सहमति के बाद मस्जिदों को पूरी तरीके से ढक दिया जाता है। 

फिलहाल यहाँ जूते मार होली खेलने की परंपरा दशकों पुरानी है। पुलिस अधीक्षक आनंद का कहना है कि शहर में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पैरा मिलिट्री फोर्से, पीएसी और कई जिलों की पुलिस फोर्स बुलाई गई है, जो मस्जिदों और पूरे शहर की सुरक्षा करेगी। साथ ही ड्रोन के जरिए भी जुलूस पर नजर रखी जाएगी।

दशकों पुरानी है परंपरा

शाहजहांपुर शहर की स्थापना करने वाले नवाब बहादुर खान के वंश के आखिरी शासक नवाब अब्दुल्ला खान पारिवारिक लड़ाई के चलते फर्रुखाबाद चले गए और 1729 में 21 वर्ष की आयु में वापस शाहजहाँपुर आए। वह हिंदू-मुसलमानों के बड़े प्रिय थे और इसी बीच होली का त्यौहार आ गया और तब दोनों समुदाय के लोग उनसे मिलने के लिए घर के बाहर खड़े हो गए। जब नवाब साहब बाहर आए तो लोगों ने होली खेली। बाद में उन्हें ऊँट पर बैठाकर शहर का एक चक्कर लगाया गया, इसके बाद से यह परंपरा बन गई।

1857 तक हिंदू और मुस्लिम दोनों मिलकर यहाँ होली का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाते थे तथा नवाब साहब को हाथी या फिर घोड़े पर बैठा कर शहर में घुमाया जाता था परंतु हिंदू और मुस्लिमों का यह सौहार्द प्यार अंग्रेजों को रास नहीं आया। इसके बाद 1858 में बरेली के सैन्य शासक खान बहादुर खान के सैन्य कमांडर मरदान अली खान ने एक टुकड़ी के साथ शाहजहाँपुर में हिंदुओं पर हमला कर दिया, जिसमें तमाम हिंदू और मुसलमान मारे गए थे। तब शहर में सांप्रदायिक तनाव हो गया।

1947 के बाद नवाब साहब के जुलूस का नाम बदल कर प्रशासन ने ‘लाट साहब’ कर दिया और तब से यह लाट साहब के नाम से जाना जाने लगा। इसी दौरान अंग्रेज यहाँ से चले गए और फिर अंग्रेजों के प्रति लोगों में जो आक्रोश था, उससे ही इस नवाब के जुलूस का रूप विकृत हो गया।

चर्च के बाहर बम बाँध खुद को उड़ा लिया – 2 की मौत, 14 घायल: CCTV में कैद हुआ ब्लास्ट, दूर तक बिखरे क्षत-विक्षत टुकड़े

विश्व के सबसे बड़े इस्लामिक देश इंडोनेशिया के मकस्सर शहर में रविवार को एक कैथोलिक चर्च के बाहर एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को बम विस्फोट करके उड़ा लिया। ‘ईस्टर होली वीक’ के पहले दिन हुए इस ब्लास्ट में 2 लोगों की मौत जबकि 14 के घायल होने की रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय मीडिया में अब तक आई है।

दक्षिण सुलावेसी पुलिस के प्रवक्ता ई जुल्पान के मुताबिक जिस वक्त ये ब्लास्ट हुआ, उस दौरान अधिकतर लोग चर्च के भीतर ही थे। धमाके के बाद घटना स्थल पर मानव शरीर के क्षत-विक्षत टुकड़े मिले हैं। रिपोर्ट लिखे जाने तक हालाँकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वो केवल हमलावर के थे या किसी और के भी हैं।

चर्च के पादरी ने कहा- 10 लोग घायल हुए

जिस चर्च के बाहर यह ब्लास्ट हुआ, उसके पादरी फादर विल्हेमुस तुलक ने स्थानीय मेट्रो टीवी को बताया कि एक व्यक्ति आत्मघाती हमलावर को पकड़े हुए घायल हो गया था, जिसे मिला कर कुल 10 लोग इसमें घायल हुए हैं, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर थी। ब्लास्ट इतना तेज था कि पास की पार्किंग में खड़ी कारें भी इससे क्षतिग्रस्त हो गईं। फिलहाल घटनास्थल के चारों तरफ से सील कर पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है।

आतंकी संगठन JAD पर हमले का शक

इस हमले के पीछे किसका हाथ है, यह अभी तक पता नहीं चल सका है। अभी तक किसी आतंकी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी भी नहीं ली है। लेकिन, पुलिस ने इस सुसाइ़ड अटैक के लिए इस्लामिक स्टेट से प्रेरित आतंकी संगठन जमाह-अंशरुत-दौला (JAD) को जिम्मेदार माना है। इसी आतंकी संगठन ने 2018 में इंडोनेशिया के चर्चों और सुरबाया शहर में एक पुलिस चौकी पर हमला किया था। उस घटना में 30 से अधिक लोग मारे गए थे।

2020 में इंडोनेशिया में सबसे घातक इस्लामी आतंकवादी हमला बाली के पर्यटक द्वीप पर हुआ था, जिसमें हमलावरों ने 202 लोगों का कत्लेआम किया था। मरने वाले ज्यादातर विदेशी टूरिस्ट थे। एक समय इंडोनेशिया ने उग्रवाद को कुचल दिया था, लेकिन हाल के वर्षों में वहाँ इस्लामी उग्रवाद रह-रहकर अपना फन उठाना शुरू कर दिया है।