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मुख्तार को लाए अब अहमद की बारी: गुजरात में बंद अतीक अहमद को यूपी लाने की योगी सरकार के मंत्री ने दिया संकेत

पंजाब सरकार की तमाम रुकावटों के बावजूद भी उत्तर प्रदेश की योगी सरकार मुख्तार अंसारी को यूपी लाने में सफल हुई। उच्चतम न्यायालय के आदेश पर मुख्तार को पंजाब की रोपड़ जेल से यूपी की बांदा जेल में लाया गया। यहाँ मुख्तार को कड़ी निगरानी में रखा गया है। वहीं अब दूसरी ओर यूपी के कुख्यात अपराधी अतीक अहमद को भी गुजरात से यूपी लाने की माँग उठ रही है। उत्तर प्रदेश के संसदीय कार्य राज्यमंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला ने कहा है कि मुख्तार अंसारी को पंजाब से लाए जाने के बाद अब अतीक अहमद को भी गुजरात से यूपी लाया जाएगा।

मंत्री के इस बयान के बाद अब यह कहा जा रहा है कि यूपी सरकार अतीक अहमद को भी वापस लाने की कार्रवाई कर सकती है। अहमद फिलहाल गुजरात के अहमदाबाद की साबरमती जेल में बंद है।

17 वर्ष की उम्र में हत्या करके पहली बार अपराध के क्षेत्र में कदम रखने वाले अतीक अहमद को लगातार राजनैतिक संरक्षण प्राप्त होता रहा। अहमद प्रयागराज के एक थाने में हिस्ट्री शीटर अपराधी के रूप में सूचित है। उसके गिरोह को अंतरराज्यीय गिरोह के रूप में लिस्टेड किया गया है।

अहमद अपराधी होने के साथ यूपी की राजनीति का सक्रिय सदस्य भी था। निर्दलीय रूप में अपने राजनैतिक कैरियर की शुरुआत करने वाला अहमद बाद में समाजवादी पार्टी और अपना दल का सदस्य बना। 2004 में सपा के टिकट पर चुनाव जीतने वाला अहमद 2014 लोकसभा और 2018 के लोकसभा उपचुनाव में हार चुका है। 2005 में अहमद का नाम बीएसपी विधायक राजू पाल की हत्या में आया था। राजू पाल ने अहमद के भाई अशरफ को चुनाव में हराया था।

19 अप्रैल 2019 में चुनाव आयोग ने अहमद को देवरिया जेल से नैनी जेल भेज गया। इसके बाद उच्चतम न्यायालय के आदेश पर अहमद को गुजरात की जेल भेज दिया गया। वर्तमान में अतीक अहमद अहमदाबाद की साबरमती जेल में है।

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आने के बाद माफियाओं और कुख्यात अपराधियों पर न केवल आपराधिक शिकंजा कसा जा रहा है अपितु उनकी अवैध संपत्तियों को भी नष्ट किया जा रहा है। मुख्तार अंसारी के अलावा अतीक अहमद की अवैध संपत्तियों पर भी कार्यवाई की जा रही है।  

बनारस के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का होगा पुरातात्विक सर्वेक्षण, खुदाई कराएगा ASI: फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दी मंजूरी

काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद मामले में वाराणसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट से पुरातात्विक सर्वेक्षण को लेकर फैसला आ चुका है। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए पुरातात्विक सर्वेक्षण को मंजूरी दी है। कोर्ट ने कहा है कि सर्वेक्षण का सारा खर्चा सरकार करेगी।

इस मामले में वाराणसी फार्स्ट ट्रैक कोर्ट में मामले को लेकर बहस 2 अप्रैल को पूरी हुई थी। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। कोर्ट में काशी विश्वनाथ मंदिर पक्ष के वकील विजय शंकर रस्तोगी, सुनील रस्तोगी और राजेन्द्र पांडेय ने पक्ष रखते हुए कहा था कि पुरातात्विक साक्ष्य के लिए ऐसा करना न्यायोचित है।

आज कोर्ट का फैसला पक्ष में आने के बाद अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने इसका स्वागत किया। रस्तोगी ने कहा कि पुरातात्विक सर्वेक्षण के बाद ये साफ हो जाएगा कि विवादित स्थल कोई मस्जिद नहीं, बल्कि आदि विशेश्वर महादेव का मंदिर है।

मालूम हो, इस संबंध में रस्तोगी ने दिसंबर 2019 में सिविल जज की अदालत में स्वयंभु ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर की ओर से एक आवेदन दायर किया था, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर का सर्वेक्षण करने का अनुरोध किया गया था

इसके अलावा, याचिकाकर्ता हरिहर पांडे, उन्होंने भी इस सर्वेक्षण की माँग थी। भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, हरिहर ने कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि उन्होंने इसके लिए लंबी लड़ाई है। अब इस फैसले से ज्ञानवापी मस्जिद को हटाने का रास्ता क्लियर होगाा।

इधर, मस्जिद की इंतेजामिया कमेटी के सैयद यासीन ने बताया कि वह कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे। साथ ही समिति, ऐसा सर्वे करने के लिए किसी को मस्जिद में दाखिल नहीं होने देगी। वहीं, यासीन के बयान पर हरिहर पांडे का कहना है कि पुरातत्व विभाग सुरक्षाकर्मियों के साथ आएगा, उन्हें रोकना मस्जिद समिति के बस के बाहर है। अब सर्वे भी होगा और सच भी सामने आएगा।

‘देशमुख के बाद राज्य के दो और मंत्री 15 दिन में देंगे इस्तीफा, राष्ट्रपति शासन के लिए उपयुक्त स्थिति’: महाराष्ट्र BJP प्रमुख

महाराष्ट्र में गृहमंत्री अनिल देशमुख के इस्तीफे के बाद राज्य के भाजपा प्रमुख चंद्रकांत पाटिल ने एक बड़ा दावा किया है। पाटिल ने गुरुवार (अप्रैल 8, 2021) को कहा कि राज्य के दो और मंत्रियों को 15 दिन में इस्तीफा देना पड़ेगा। उनके अनुसार, राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिहाज से उपयुक्त स्थिति है। 

पाटिल का यह बयान मुंबई पुलिस के निलंबित अधिकारी सचिन वाजे का पत्र मिलने के बाद सामने आया है। इसमें वाजे ने देशमुख पर आरोप लगाया कि देशमुख ने उन्हें नौकरी पर वापस रखने के लिए उनसे 2 करोड़ रुपए माँगे थे, वहीं परिवहन मंत्री अनिल परब ने कॉन्ट्रैक्टर्स से रुपए इकट्ठा करने को कहा था।

पाटिल ने समाचार एजेंसी पीटीआई से गुरुवार को कहा, “भविष्य में क्या रखा है इसका अनुमान आम आदमी लगा सकता है।” उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा, “आने वाले 15 दिनों में 2 अन्य राज्य मंत्रियों को इस्तीफा देना होगा। कुछ लोग इन मंत्रियों के विरुद्ध कोर्ट जाएँगे और उसके बाद इन्हें अपना पद छोड़ना होगा।”

महाराष्ट्र में भाजपा प्रमुख ने ये भी आरोप लगाया कि राज्य की महागठबंधन सरकार एक संगठित अपराध में लिप्त है। बीजेपी नेता पाटिल ने कहा कि राज्य में जो चल रहा है, उससे विशेषज्ञ यह बता सकते हैं कि राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए और क्या चाहिए। 

उन्होंने पूछा, ”अगर आप हर चीज के लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराना चाहते हैं तो राज्य का प्रशासन केंद्र सरकार के हाथ में क्यों नहीं दे देते।”  बीजेपी नेता पाटिल ने आरोप लगाया कि अनिल देशमुख एक पाखंडी है, क्योंकि वह मुंबई उच्च न्यायालय की सीबीआई जाँच के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गए हैं।

गौरतलब है कि एंटिलिया केस और मनसुख हिरेन की मौत के मामले में निलंबित हो चुके सचिन वाजे की चिट्ठी बुधवार को मीडिया में सामने आई थी। इसमें सचिन वाले ने महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी सरकार के कई नेताओं पर आरोप लगाए हुए हैं। इसमें एनसीपी प्रमुख पवार का भी नाम है।

चिट्ठी में सचिन वाजे ने आरोप लगाया है कि पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने उन्हें नौकरी पर वापस रखने के बदले 2 करोड़ रुपए माँगे थे। चिट्ठी में सचिन वाजे ने कहा कि शरद पवार उन्हें वापस नौकरी पर नहीं रखना चाहते थे, लेकिन अनिल देशमुख ने उनसे कहा कि वो शरद पवार को मना लेंगे लेकिन उसके लिए दो करोड़ रुपए देने होंगे।

सचिन वाजे ने अपने पत्र में ये भी दावा किया कि नवंबर 2020 में, उन्हें एक व्यक्ति (दर्शन घोड़ावत) से मिलवाया गया, जो डिप्टी सीएम अजित पवार के करीबी थे। उन्होंने वाजे को महाराष्ट्र में गुटखा के अवैध व्यापार के बारे में सूचित किया और जोर देकर कहा कि सचिन वाजे को अवैध गुटखा विक्रेताओं से कम से कम 100 करोड़ रुपए वसूल करने होंगे।

इवनिंग वॉक पर निकले बुजुर्ग दंपति पर महिला ने चढ़ा की कार, हुई मौत: पुलिस से कहा- कुछ और सोच रही थी तो ध्यान खो गया

द्वारका के सेक्टर-11 में रविवार (अप्रैल 4, 2021) को डॉक्टर शांति स्वरूप अरोड़ा (79) और उनकी पत्नी अंजना अरोड़ा (62) इवनिंग वॉक पर निकले थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि ये उनके जीवन का आखिरी वॉक होगा। पीछे से आती कार ने दोनों को कुचल दिया, जिससे बुजुर्ग दंपति की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि उस कार को एक 28 वर्षीय महिला चला रही थी। वहाँ एक मस्जिद में लगे CCTV कैमरे में ये दुर्घटना कैद हो गई।

ड्राइवर दीपक्षी चौधरी को गिरफ्तार किया गया। उन पर सार्वजनिक रास्ते पर उतावलेपन में ड्राइविंग करने और अपनी बेपरवाही से किसी की मौत होने का मामला दर्ज किया गया है। द्वारका साउथ पुलिस स्टेशन में इस मामले में IPC की धारा 304A और 279 के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालाँकि, दीपाक्षी चौधरी को पुलिस थाने से ही जमानत मिल गई। वो एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी करती हैं।

मृत डॉक्टर और उनकी पत्नी के बाल-बच्चे अमेरिका में ही सेटल हो गए हैं। दोनों पति-पत्नी अप्पू एन्क्लेव में रहा करते थे। वहीं दीपाक्षी चौधरी भी उसी सोसाइटी में रहती हैं। कुछ लोगों का कहना है कि वो अभी सीख ही रही थी कि गाड़ी किस तरह ड्राइव करते हैं। द्वारका के DCP संतोष कुमार मीणा ने कहा, “उक्त महिला ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया है कि वो उस वक़्त किसी और चीज के बारे में सोच रही थी और उसने अपना ध्यान खो दिया, जिस कारण ये घटना हुई।”

पुलिस का कहना है कि दीपाक्षी ने घटनास्थल से भागने की बजाए हॉस्पिटल में भर्ती होने तक बुजुर्ग कपल का साथ दिया। जब पुलिस इस घटना के बारे में सूचना मिलने पर पहुँचीं तो वो हॉस्पिटल में ही थी। CCTV फुटेज में देखा जा सकता है कि ‘मस्जिद वाली गली’ में टहलते पति-पत्नी ने आगे जाकर यूटर्न लिया, तभी एक ग्रे कलर की कार तेज़ी में आई। दोनों जमीन पर गिर गए और कार उनके ऊपर से चली गई।

जहाँ डॉक्टर कार के नीचे ही फँस गए, उनकी पत्नी पीछे फँस गई। इसके बाद दो लोग भागे-भागे आते हैं। फिर महिला ने कार से बाहर निकल कर परिस्थिति देखी। इसके बाद उसे हड़बड़ी में किसी से फोन पर बात करते हुए देखा गया। लोगों ने कार को उठा कर बुजुर्गों को बाहर निकाला। लोगों का कहना है कि हॉस्पिटल ले जाते समय बजुर्ग डॉक्टर होश में थे। रास्ते में उन्होंने बातें भी की और अपनी पत्नी के बारे में पूछा।

अब मृतकों के परिजन ने ड्राइवर की पहचान पर सवाल खड़े किए हैं। जहाँ एक तरफ दीपाक्षी ने कहा कि वही कार चला रही थी और पुष्टि के लिए अपने डॉक्युमेंट भी दिखाए, मृतकों के परिजन का कहना है कि दीपाक्षी की बहन गाड़ी में थी। मौत से पहले बुजुर्ग दंपति को मणिपाल हॉस्पिटल ले जाया गया था और तब दीपाक्षी उनके साथ थी, लेकिन दावा किया जा रहा है कि कार चलाने वाली महिला वो नहीं थी। ये घटना शाम के 6:30 में हुई थी। पुलिस इस मामले में सभी के बयान दर्ज कर रही है।

केंद्र के एक निर्णय ने पंजाब में आर्थिक आपात की संभावना पर लगाई रोक: ₹90,000 करोड़ के NPA होने का था खतरा

भले ही पंजाब सरकार कृषि सुधारों को लेकर आए दिन भारत सरकार के साथ विवाद की स्थिति में ही रहती हो किन्तु भारत सरकार के हस्तक्षेप के कारण पंजाब में राज्य सरकार पर से एक बड़ा संकट टल गया। यदि केंद्र सरकार ने पहल न की होती तो पंजाब सरकार राज्य में किसानों से उपज खरीद पाने में असमर्थ रहती क्योंकि इस उद्देश्य के लिए लिया गया लोन 31, मार्च के पहले एनपीए होने की कगार पर पहुँच गया था।

मामला ऐसा है कि पंजाब सरकार का खाद्य भुगतान के लिए लिया गया लगभग 90,000 करोड़ रुपए का लोन वित्तीय वर्ष 2020-21 के समाप्त होने के साथ ही नॉन परफार्मिंग एसेट्स (NPA) में बदल जाता। ऐसा इसलिए क्योंकि राज्य क्रय एजेंसियों (SPA) ने बैंकों से लिया हुआ लोन वापस नहीं किया।

किसान अपनी उपज को इन्हीं राज्य क्रय एजेंसियों के माध्यम से एफसीआई और अन्य संस्थाओं को बेचते हैं। ये एजेंसियाँ किसानों को भुगतान करती हैं औरे बाद में  खाद्य स्टॉक के आधार पर एफसीआई इन एजेंसियों को भुगतान करता है। किसानों को भुगतान करने के लिए एजेंसियां बैंकों के विशेष समूह से लोन लेती हैं। बैंकों का यह समूह ‘फूड क्रेडिट कॉनसॉर्टियम (FCC)’ कहा जाता है जिसका प्रमुख स्टेट बैंक ऑफ इंडिया है।

रबी और खरीफ सीजन के लिए क्रय एजेंसियां जो लोन लेती हैं उसे ‘कैश क्रेडिट लिमिट’ कहा जाता है। भारत सरकार संविधान के अनुच्छेद 293 के तहत राज्यों की सरकारों को यह लोन लेने की अनुमति प्रदान करती है। नियमानुसार यदि यह लोन 3 वर्षों के भीतर न चुकाया गया तो वह एनपीए में बदल जाता है।  

पंजाब में राज्य क्रय एजेंसियों द्वारा लिया गया 89,200 करोड़ रुपए का लोन चुकता न हो पाने के कारण एनपीए होने के कगार पर था। इस मुद्दे पर भारतीय रिजर्व बैंक ने भी लोन चुकता करने की अवधि को 3 वर्ष से अधिक बढ़ाने से साफ मना कर दिया था। इस कारण पंजाब सरकार के पास 10 अप्रैल से शुरू हो रही खरीदी प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए पैसों की भारी कमी थी।

पंजाब के किसानों के लिए यह एक आपातकाल स्थिति होने वाली थी। इस आपात स्थिति में सभी रास्ते बंद होने पर राज्य सरकार ने केंद्र को इसकी सूचना दी और राज्यों की क्रय एजेंसियों के पास उपलब्ध खाद्य स्टॉक को खरीदने का निवेदन किया। इस निवेदन पर संज्ञान लेते हुए केंद्र ने राज्य सरकार, एफसीआई और रेलवे बोर्ड के साथ विचार-विमर्श किया और निर्णय लिया कि एफसीआई, पंजाब की राज्य क्रय एजेंसियों के पास 2018-19 से उपलब्ध 22.42 मिलियन टन का खाद्य स्टॉक खरीदेगी और उसके लिए उन एजेंसियों को पूरा भुगतान भी किया जाएगा। इस प्रकार केंद्र सरकार के समय पर लिए गए निर्णय से पंजाब में किसानों को एक बड़ी आपात स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा।

गेहूँ खरीद पर झूठ फैलाते पकड़े गए AAP नेता गोपाल राय: FCI ने खोली पोल, लोगों ने कहा- ‘झूठ और मक्कारी केजरीवाल सरकार की आदत’

दिल्ली के कृषि मंत्री गोपाल राय ने FCI पर बड़ा आरोप लगाया है। गोपाल राय का कहना है कि दिल्ली में MSP पर गेहूँ खरीद के लिए FCI ने काउंटर नहीं खोले हैं। राय की मानें तो FCI अपनी ओर से दावे कर रही है कि उन्होंने 1 अप्रैल से MSP पर खरीददारी के लिए काउंटर ओपन किए हैं। लेकिन हकीकत में यह झूठ है। राय के मुताबिक वह इस संबंध में तीन बार FCI को चिट्ठी लिख चुके हैं।

गोपाल राय ने दिल्ली सचिवालय में हुए एक प्रेस वार्ता में यह भी सफाई दी कि केंद्र सरकार फसल की एमएसपी तैयार करती है और एफसीआई खरीददारी करती है, लेकिन भाजपा झूठा आरोप लगा रही है कि दिल्ली सरकार एमएसपी पर गेहूँ नहीं खरीद रही है। उनके अनुसार MSP पर फसल खरीदने के प्रधानमंत्री के आश्वासन की यही हकीकत है, इसलिए MSP कानून बनाना जरूरी है।

मीडिया के जरिए गोपाय राय ने केंद्र सरकार से माँग की कि नजफगढ़ और नरेला मंडी में तत्काल एमएसपी पर खरीददारी शुरू की जाए और 1 अप्रैल से दिल्ली में खरीद करने के झूठे दावे की जाँच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

अब गोपाल राय के यह दावे हर जगह मीडिया में प्रकाशित हो रहे हैं। इनमें से एक मीडिया खबर को आम आदमी पार्टी ने अपने ट्विटर पर भी शेयर किया है। AAP ने खबर के साथ ट्वीट में लिखा, “MSP पर फसल खरीदने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आश्वासन की खुली पोल। दिल्ली में गेहूँ खरीद के लिए FCI ने नहीं खोला एक भी काउंटर।”

AAP के इस ट्वीट के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स इसे पार्टी का प्रोपगेंडा बताने लगे। लोगों ने कहा कि आम आदमी पार्टी नेताओं की आदत हो चुकी है कि वह झूठ फैलाएँ और पॉलिटिकल एजेंडा के तहत किसानों को बरगलाएँ।

इस बीच फुड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने भी आप नेता के आरोपों पर उन्हें करारा जवाब दिया। FCI ने अपने ट्विटर पर इस दावे को पूरी तरह गलत और निराधार बताया। FCI ने जानकारी दी कि दिल्ली क्षेत्र में तीन केंद्र किसानों से गेहूँ खरीदने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं: FSD मायापुरी, FSD नरेला और APMC नजफगढ़ मंडी जो कि 1 अप्रैल 2021 से पूरी तरह से चालू हो गया है और 8 अप्रैल 2021 तक 15.8 मीट्रिक टन (158 क्विंटल) गेहूँ FSD नरेला पर FCI दिल्ली द्वारा खरीदा गया है।

FCI के इस ट्वीट के बाद कई अन्य यूजर्स AAP पर सवाल खड़े कर रहे हैं। यूजर्स का कहना है, “दिल्ली की AAP सरकार का सिर्फ एक ही काम करने का तरीका है- झूठ फैलाना और किसी तरह केंद्र सरकार के ऊपर इल्जाम लगाकर जनता को बेवकूफ बनाना और राज करते रहना। दिल्ली की केजरीवाल सरकार के झूठ, मक्कारी और प्रोपगेंडों का फैक्ट चेक करते रहिए नहीं तो भ्रमित रहेंगे।”

परीक्षा पे चर्चा: क्या वाकई पीएम मोदी ने छात्रों को एग्जाम में कठिन प्रश्नों को पहले हल करने का सुझाव दिया? जानिए सच्चाई

7, अप्रैल को परीक्षा पे चर्चा के पहले वर्चुअल संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के साथ चर्चा की। यह परीक्षा पे चर्चा का चौथा संस्करण था। नब्बे मिनट की इस चर्चा में पीएम मोदी ने अपने अनुभव साझा किए और साथ ही शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों को सुझाव भी दिए। विदेशों में रहने वाले छात्र भी परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम से जुड़े।

पीएम मोदी के सुझाव पर विवाद :

कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया पर पीएम मोदी की कथित सलाह पर प्रश्न उठाए जाने लगे। ऐसा कहा गया कि पीएम मोदी ने परीक्षा में पहले सरल प्रश्नों को हल करने के स्थान पर कठिन प्रश्नों को प्राथमिकता देने की बात कही है। कई पूर्व अधिकारियों, विपक्षी नेताओं एवं सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे आत्मघाती और आपत्तिजनक कहा।

इस मुद्दे पर कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आजतक के उस ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की जिसे डिलीट किया जा चुका है। आजतक के द्वारा अपनी वेबसाइट से वह रिपोर्ट भी हटा ली गई है जिसमें इस मुद्दे पर गुमराह करने वाली खबर बनाई गई थी।

कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा का गुमराह करने वाला ट्वीट
आजतक के ट्वीट का स्क्रीनशॉट जो डिलीट कर दिया गया
आजतक की वेबसाइट का स्क्रीनशॉट जहाँ से इस मुद्दे से जुड़ी खबर भी डिलीट हो चुकी है
आईएएस सूर्यप्रताप सिंह के ट्वीट का स्क्रीनशॉट जिसमें उन्होंने भी पीएम मोदी के सुझाव का गलत मतलब समझा

क्या वाकई पीएम मोदी ने पहले कठिन प्रश्नों को हल करने कि बात कही?

कठिन विषयों और अध्यायों के विषय में बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि छात्रों को प्रत्येक विषय को एक ही ऊर्जा के साथ समय देना चाहिए। उन्होंने दैनिक आधार पर प्रत्येक विषय को समय देने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि हालाँकि छात्रों को यही सिखाया जाता है कि पहले सरल विषयों और परीक्षा में सरल प्रश्नों को ही हल करना है किन्तु पढ़ाई के दौरान विषयों के संबंध में उनके विचार थोड़े अलग हैं।

उन्होंने कहा कि कठिन अध्याय एकदम फ्रेश माइंड के साथ पहले हल किए जाने चाहिए क्योंकि नई ऊर्जा से ऐसे अध्याय और भी सरल हो जाते हैं। उन्होंने अपने गुजरात के मुख्यमंत्री और अब प्रधानमंत्री के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वे सदैव ही दिन की शुरुआत कठिन चीजों से ही करते हैं क्योंकि सुबह की ऊर्जा नई और दिमाग पूरी तरह से फ्रेश रहता है। उन्होंने छात्रों को कठिन अध्यायों से भागने के स्थान पर उन्हें अध्ययन के दौरान पहले हल करने का सुझाव दिया।

चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने कठिन अध्यायों को पहले पढ़ने का सुझाव दिया न कि छात्रों को परीक्षा में कठिन प्रश्नों को पहले हल करने का। लेकिन कई बड़े अधिकारी, विपक्षी नेता और सामान्य लोग कन्फ्यूज हो गए। पीएम मोदी ने तो इसकी चर्चा की कि परीक्षा के दौरान अक्सर छात्रों को सरल प्रश्न पहले हल करने की सलाह दी जाती है लेकिन कहा यह कि पढ़ाई के दौरान पहले कठिन हिस्से से निपटना बेहतर है क्योंकि तरोताजा दिमाग और नई ऊर्जा के साथ शुरुआत करने से कठिन प्रश्न भी आसान हो जाते हैं। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि कठिन टॉपिक्स को छोड़ते रहने की आदत से नुकसान ही होता है। उन्होंने ऐसे टॉपिक्स को सॉल्व करने पर जोर दिया जिससे पढ़ाई में विश्वास हासिल किया जा सके।

इससे यही निष्कर्ष निकलता है कि पीएम मोदी का सुझाव परीक्षा के संबंध में न होकर पढ़ाई पर आधारित था। उन्होंने परीक्षा में कठिन प्रश्नों को पहले हल करने का सुझाव नहीं दिया अपितु उन्होंने पढ़ाई के दौरान कठिन टॉपिक्स को हल करने और कठिन विषयों को भी बराबर महत्व देने का सुझाव दिया।

‘एंटिलिया के सामने जो बम रखा गया, उसे शिवसेना नेता ने खरीदा था’ – NIA से सचिन वाजे

एंटिलिया केस में पूछताछ के दौरान मुंबई पुलिस के निलंबित अधिकारी व मामले में आरोपित, सचिन वाजे ने NIA के सामने चौंकाने वाला खुलासा किया है। वाजे ने NIA को बताया कि नालासोपाड़ा से शिवसेना प्रत्याशी व पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा ने जिलेटिन की छड़ें खरीदी थीं।

बता दें कि इससे पहले पूर्व पुलिस कमिश्नर परबीर सिंह के साथ पूछताछ के बाद 7 अप्रैल को प्रदीप शर्मा को भी NIA ऑफिस पूछताछ के लिए बुलाया गया था।

दरअसल, एटीएस ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि मनसुख हिरेन ने अंधेरी ईस्ट से अंतिम कॉल किया था और उसके बाद उसका मोबाइल फोन स्वीच ऑफ हो गया था। अब चूँकि अंधेरी ईस्ट में ही प्रदीप शर्मा रहते हैं, इस वजह से वह एटीएस और अब एनआईए के शक के घेरे में थे।

मालूम हो कि प्रदीप शर्मा ने साल 2019 के विधानसभा चुनावों के दौरान शिवसेना का हाथ थामा था और वह नालासोपाड़ा से बतौर शिवसेना प्रत्याशी चुनाव भी लड़ चुके हैं। साल 2019 में ही जब शिवसेना ने प्रदीप शर्मा को कैंडिडेट बनाया था, तब 36.21 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा इन्होंने दिया था।

सचिन वाजे की चिट्ठी में आया शरद पवार का भी नाम

इस पूरे मामले में पुलिस के सस्पेंड हो चुके अधिकारी सचिन वाजे की बुधवार (अप्रैल 7, 2021) को मीडिया में कथित चिट्ठी सामने आई थी। इसमें सचिन वाले ने महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार के कई नेताओं पर आरोप लगाए हुए हैं। इसमें एनसीपी प्रमुख पवार का भी नाम है।

चिट्ठी में सचिन वाजे ने आरोप लगाया है कि पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने उन्हें नौकरी पर वापस रखने के बदले 2 करोड़ रुपए माँगे थे। चिट्ठी में सचिन वाजे ने कहा कि शरद पवार उन्हें वापस नौकरी पर नहीं रखना चाहते थे, लेकिन अनिल देशमुख ने उनसे कहा कि वो शरद पवार को मना लेंगे लेकिन उसके लिए दो करोड़ रुपए देने होंगे।

बदरुद्दीन अजमल की रैलियों में ‘जादुई पानी’ के लिए मची रही धक्का-मुक्की, समर्थकों का दावा- ठीक होती हैं बीमारियाँ

असम में विधानसभा चुनाव संपन्न हो गए हैं। राज्य में कॉन्ग्रेस ने इस बार बदरुद्दीन अजमल की AIUDF के साथ गठबंधन किया था, जो कट्टरवादी मुस्लिम नेता माने जाते हैं। चुनाव के दौरान अजमल का ‘जादुई पानी (Healing Water)’ खासा चर्चा में रहा, जिसे लेने के लिए कई मुस्लिम लाइन लगाते हैं। उनकी चुनावी रैलियों में अजमल के आशीर्वाद के लिए लोगों ने उस पानी के लिए गजब की धक्का-मुक्की मचाई।

उनके समर्थकों का मानना है कि इस पानी से बड़ी से बड़ी समस्याएँ दूर हो जाती हैं और बीमारियाँ भी चमत्कारिक रूप से ठीक हो जाती हैं। असम के धुबरी जिले में अजमल की एक जनसभा हुई थी, जिसका वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें देखा जा सकता है कि बदरुद्दीन अजमल एक कंटेनर में रखी हुई ‘जादुई पानी’ को लोगों के ऊपर छींट कर उन्हें आशीर्वाद दे रहे हैं। कइयों का मानना है कि वो वोट के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रहे हैं।

हालाँकि, ये पहली बार नहीं है कि अजमल ने इस तरह की तिकड़म अपनाई हो। 2016 में हुए असम विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने अपनी रैलियों में ये तिकड़म आजमाया था और 2019 लोकसभा चुनाव में भी इस पानी की चर्चा हुई थी। मौलवियों का कहना है कि अजमल किसी को नहीं कहते हैं कि वो उनका ‘जादुई पानी’ ले लें। उन्होंने दावा किया कि अजमल के समर्थकों और अनुयायियों ने दबाव डाला कि वो उन्हें इस तरह का पानी दें।

चूँकि, बदरुद्दीन अजमल भी कभी एक मौलाना थे, इसीलिए मुस्लिमों को उन पर इतना विश्वास है। गुवाहाटी स्थित दक्षिणगाँव शाही जामा मस्जिद के पेशे इमाम मोफीदुल इस्लाम ने कहा कि अजमल पहले से ही मजहबी गतिविधियाँ चलाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग उनसे भी इसी तरह की पानी की माँग करते हैं, लेकिन वो हमेशा इनकार कर देते हैं। लेकिन, साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि अगर अत्यधिक विश्वास करके कुछ माँगते हैं तो फिर वो उन्हें जो चाहिए वो दे देते हैं।

उन्होंने कहा कि जनता के दबाव के कारण अजमल को ऐसा करना पड़ रहा है। हालाँकि, असम में भाजपा के नेता मोइमुल अजमल ने कहा कि बदरुद्दीन अजमल द्वारा ये सब कुछ मुस्लिम वोटरों को रिझाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अजमल सोशल मीडिया पर भी ऐसा ही कर रहे हैं और इन चीजों का विरोध होना चाहिए। उन्होंने इसे मजहब के नाम पर वोट माँगना करार दिया और कहा कि चुनाव आयोग को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।

कुछ दिनों पहले बदरुद्दीन अजमल ने जनसंख्या नियंत्रण पर बोलते हुए कहा था, “करंट नहीं है। बिजली नहीं है। अब इंसान हैं वो भी। गरीब जब रात को उठेगा। मियाँ-बीवी हैं। दोनों जवान हैं। तो फिर रात को क्या करेंगे? वो बच्चे ही तो पैदा करेंगे।” हाल ही में उनके बेटे अब्दुर रहीम अजमल ने विवाद पैदा करते हुए कहा था, “इस बार यह गरीब लोगों की सरकार होगी। सरकार में दाढ़ी, टोपी और लुंगी वाले पुरुष होंगे।”

असम में हाल में संपन्न हुए चुनाव में 82% वोटर टर्नआउट हुआ। 3 चरणों में मतदान संपन्न कराया गया। पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार 2.68% कम वोटिंग हुई। असम में लगातार तीन बार मुख्यमंत्री बनने वाले कॉन्ग्रेस के तरुण गोगोई अब दिवंगत हो चुके हैं। ओपिनियन पोल्स का भी कहना है कि सर्वानंद सोनवाल के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार लौट रही है। भाजपा नेता हिमंत बिस्वा सरमा भी खासे लोकप्रिय हैं।

अस्थायी शमशान… 1 ही चिता… और जला डाले 8 हिन्दुओं के शव: महाराष्ट्र में कोरोना से स्थिति बदतर, नहीं मिल रही सूखी लकड़ियाँ

महाराष्ट्र में कोरोना के कारण स्थिति बिगड़ती ही जा रही है। हालत इतनी खराब है कि श्मशान में मृतकों को जलाने के लिए चिताएँ नहीं मिल रही हैं। ताज़ा मामला बीड जिले का है, जहाँ कोरोना से 8 लोगों की मौत हुई थी। प्रशासन ने आठों शवों को एक अस्थायी श्मशान में एक ही चिता पर जला डाला। स्थानीय लोगों के विरोध के कारण अम्बाजोगई कस्बे में स्थित शव दाहगृह में कोविड-19 के मरीजों के शवों का अंतिम संस्कार किए जाने का विरोध हुआ था।

इसीलिए, प्रशासन ने एक अस्थायी श्मशान की व्यवस्था की। ये जगह कस्बे से दूर स्थित है। ‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, अम्बाजोगई नगर परिषद के प्रमुख अशोक सबाले ने बुधवार (अप्रैल 7, 2021) को जानकारी दी कि पठाण मांडवा रोड पर जहाँ मृत कोरोना मरीजों के अंतिम-संस्कार की व्यवस्था की गई है, वो कस्बे से 2 किलोमीटर की दूरी पर है। उन्होंने दावा किया कि जलाते वक़्त शवों के बीच उचित दूरी रखी गई थी।

उन्होंने दावा किया कि मंगलवार को मजबूरी में आठ शवों को एक ही चिता पर जलाना पड़ा। उन्होंने कहा कि जिस तेज़ी से संक्रमण फ़ैल रहा है, उससे लगता है कि अभी और मौतें होने की आशंका है। अस्थायी श्मशान को विस्तार देकर इसे वॉटरप्रूफ बनाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। जलगाँव में स्थिति इतनी खराब है कि यहाँ के भुसावल में मृतकों को जलाने के लिए लकड़ियाँ कम पड़ रही हैं।

‘TV9 भारतवर्ष’ की खबर के अनुसार, तापी नदी के पास मौजूद श्मशान भूमि में हर दिन आम तौर पर 10 से 15 मृतकों का अंतिम संस्कार किया जाता है, लेकिन अब ये संख्या रोज़ बढ़ती ही जा रही है। आसपास के गाँवों से सूखी लकड़ियाँ मँगवाई जा रही हैं। शवों की लाइन इतनी लंबी है कि अंतिम-संस्कार के लिए परिजनों को इंतजार करना पड़ रहा है। अंबाजोगाई प्रखंड में 4 दिनों में 500 के आसपास नए पॉजिटिव केस सामने आए हैं।

विश्व हिन्दू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “महाराष्ट्र की बीड जिले में 8 COVID-19 संक्रमित हिन्दू शवों को प्रशासन ने एक ही चिता में जला दिया। दलील दी गई कि जगह कम थी। ये शव यदि मुस्लिमों या ईसाइयों के होते तब भी क्या एक ही कब्र में दफनाने की जुर्रत किसी की होती?” उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से इसका जवाब माँगा।

बीड में फ़िलहाल कोरोना के 4946 सक्रिय मामले हैं। पिछले 1 दिन में यहाँ कोरोना के 597 नए मामले सामने आए हैं। पूरे महाराष्ट्र में कोरोना के फ़िलहाल 5,01,559 सक्रिय केस हैं और 56,652 की मौत हो चुकी है। पिछले एक दिन में यहाँ से 59,907 नए केस सामने आए हैं। वहीं 40 लोगों को इस संक्रमण की वजह से जान गँवानी पड़ी। पूरे भारत में भी अब सक्रिय कोरोना संक्रमितों की संख्या 9 लाख के पार हो गई है।